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                <title>gaushala - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <title>निगम गौशाला से 6 माह में 96 पशुओं को छोड़ा</title>
                                    <description><![CDATA[शहर में पिछले काफी समय से सड़कों पर बीच राह बड़ी संख्या में मवेशियों का जमघट देखा जा सकता है। 
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/96-animals-released-from-the-municipal-corporation-gaushala-in-6-months/article-119718"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-07/rt112roer-(6)4.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। शहर में सड़कों पर बैठे निराश्रित पशुओं के साथ ही ऐसे पालतू पशुओं को भी पकड़ा गया जो सड़क पर दुर्घटनाओं का कारण बन रहे थे। उन पकड़े गए पशुओं में से नगर निगम गौशाला से इस साल के 6 माह में कुल 96 पशुओं को छोडणा गया। जिनकी एवज में निगम ने 4 लाख 43 हजार से अधिक का जुर्माना वसूल किया। शहर में पिछले काफी समय से सड़कों पर बीच राह बड़ी संख्या में मवेशियों का जमघट देखा जा सकता है। कहीं झुंड में बैठे तो कहीं खड़े हुए और कहीं आपस में लड़ते सांड दुर्घटनाओं का कारण भी बन रहे है। बरसात के सीजन में और रात के समय अंधेरा होने से तो ये पशु नजर भी नहीं आते। जिससे दुर्घटनाओं का खतरा अधिक बना हुआ है। हालांकि नगर निगम कोटा उत्तर व दक्षिण द्वारा ऐसे निराश्रित व सड़कों पर दुर्घटनाओं का कारण बन रहे पशुओं को पकड़कर गौशाला में बंद करने का ठेका दिया हुआ है। संवेदकों के  माध्यम से इन पशुओं को पकड़ा जा रहा है। हालांकि पकड़े गए अधिकतर पशु निराश्रित होने से उन्हें तो कोई छुड़वाने नहीं आता। लेकिन कई पालतू व दुधारू पशु भी पकड़ में आ जाते हैं। जिन्हें पशु पालक निगम के कायन हाउस व गौशाला से छुड़वा भी रहे हैं। </p>
<p><strong>सबसे अधिक मार्च  में वसूला जुर्माना</strong><br />नगर निगम गौशाला अनुभाग द्वारा पकड़े गए गौवंश को पशु पालकों के आने पर प्रति पशु निर्धारित जुर्माना वसूल करने पर उन्हें छोडा भी गया है। नगर निगम गौशाला समिति के अध्यक्ष जितेन्द्र सिंह ने बताया कि गौशाला अनुभाग से इस साल जनवरी से जून तक कुल 96 पशुओं को छोड़ा गया है। जिनसे कुल 4 लाख 43 हजार 900 रुपए जुर्माना वसूल किया गया है। इसमें भी सबसे अधिक 1 लाख 73 हजार 600 रुपए जुर्माना वसूल किया गया। यह जुर्माना मार्च के महीने में वसूल किया गया। इस माह में 41 पशुओं को छोड़ा गया। उनसे जुर्माने के रूप में यह राशि वसूल की गई। इसी तरह  जनवरी में 8 हजार, फरवरी में 59 हजार 200  रुपए,अप्रैल में 1 लाख 23 हजार 200 रुपए, मई में 5600 रुपए और जून में 13 पशुओं को छोड़ने की एवज में 74 हजार 300 रुपए का जुर्माना वसूल किया गया। </p>
<p><strong>जिला कलक्टर को दी गलत जानकारी</strong><br />गौशाला समिति के अध्यक्ष जितेन्द्र सिंह ने बताया कि गत दिनों जिला कलक्टर द्वारा नगर निगम व केडीए अधिकारियों की बैठक ले गई थी। उस दौरान उन्हें निगम अधिकारियों द्वारा पशुओं को छोड़ने की एवज में मात्र 30 हजार रुपए जुर्माना वसूल करना बताया गया है। हालांकि उस बैठक में जिला कलक्टर ने निगम अधिकारियों से सवाल भी किया कि जब इतने पशु पकड़े जा रहे हैं तो जुर्माना मात्र 30 हजार ही क्यों वसूला गया। इस पर अधिकािरयों ने बताया कि पशु पालक रास्ते में ही पकड़े हुए पशुओं को छुड़वाकर ले जाते हैं। इस बारे में जितेन्द्र सिंह का कहना है कि 4 लाख 43 हजार 900 रुपए जुर्माना वसृूल कर निगम के राजकोष में जमा कराया गया है। इस संबंध में शनिवार को जिला कलक्टर को भी वाट्सअप के माध्यम से अवगत कराया गया है। </p>
<p><strong>निगम अधिकारी व कलक्टर करें गौशाला का निरीक्षण</strong><br />अध्यक्ष जितेन्द्र सिंह ने बताया कि बंधा धर्मपुरा स्घित गौशाला में क्षमता से अधिक गौवंश है। जिससे उन्हें यहां घूमने की पर्याप्त जगह नहीं मिल पा रही है। साथ ही अधिकतर गौवंश के पॉलिथीन खाई होने से उनके बैठक लेने पर उनकी मौत हो रही है। सिंह ने कहा कि लोकसभ अध्यक्ष के प्रयासों से गौशाला विस्तार के लिए केडीए द्वारा नगर निगम कोटा दक्षिण को 4 हैक्टेयर भूमि का आवंटन  8 जनवरी को ही कर दिया  था। लेकिन निगम अधिकारी अभी तक उसका कब्जा तक नहीं ले सके है। सिंह ने कहा कि निगम अधिकारियों के साथ ही जिला कलक्टर को भी एक बार गौशाला आकर वहां की व्यवस्थाओं का जायजा लेना चाहिए। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 07 Jul 2025 15:35:14 +0530</pubDate>
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                <title>गौवंश की मौत का कारण बन रही पॉलिथीन, निगम गौशाला में दो बैल के पोस्टमार्टम से हुआ खुलासा</title>
                                    <description><![CDATA[शहर में सड़कों पर लावारिस हालत में घूम रहे अधिकतर गौवंश की मौत का कारण उनके पेट में जमा पॉलिथीन बन रही है]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/polythene-is-the-cause-of-death-of-cows/article-112644"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-05/rtrer-(2)2.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। शहर में सड़कों पर लावारिस हालत में घूम रहे अधिकतर गौवंश की मौत का कारण उनके पेट में जमा पॉलिथीन बन रही है। इसका खुलासा बुधवार को निगम की बंधा गौशाला में एक ही दिन में मरे एक दर्जन से अधिक गौवंश में से दो बैल के पोस्ट मार्टम से हुआ। उनके पेट से चारे की जगह पर पॉलिथीन के करीब 40 से 50 किलो के गुच्छे निकले। शहर में बड़ी संख्या में लावारिस हालत में गाय और सांड घूम रहे हैं। उनके द्वारा सड़कों पर पड़े कचरे व खाद्य सामग्री को खाकर ही पेट भरा जा रहा है। लेकिन हालत यह है कि वे उस कचरे व खाद्य सामग्री के साथ इतनी अधिक मात्रा में पॉलिथीन खा रहे हैं कि उनके पेट में चारे की जगह ही नहीं है। </p>
<p><strong>12 की मौत, दो का पोस्टमार्टम</strong><br />नगर निगम कोटा दक्षिण के गौशाला समिति अध्यक्ष व पार्षद जितेन्द्र सिंह ने बताया कि गौशाला में वर्तमान में करीब 3 हजार से अधिक गौवंश है। गर्मी व चक्कर आकर गिरने की बीमारी से आए दिन गौवंश की मौत हो रही है। पिछले कई दिन से गौवंश की मृत्यु दर बढ़ी है। सिंह ने बताया कि बुधवार को भी करीब एक दर्जन गाय व बैल की मौत हुई थी। उनमें से पशु चिकित्सा अधिकारी की मौजूदगी में दो बैल का पोस्ट मार्टम किया गया। जिनमें दोनों के ही पेट से काफी मात्रा में पॉलिथीन निकली है। यही उनकी मौत का कारण बताया जा रहा है। </p>
<p><strong>40 से 50 किलो के निकले गुच्चे</strong><br />इधर वरिष्ठ पशु चिकित्सा अधिकारी व प्रभारी जिला मोबाइल यूनिट डॉ. भंवर सिंह चौधरी ने बताया कि उनकी मौजूदगी में रैंडमली दो बैल का पोस्ट मार्टम निगम की गौशाला में किया गया। दोनों के ही पेट से करीब 40 से 50 किलो पॉलिथीन के गुच्छे निकले हैं। ये तो उदाहरण है। अधिकतर गौवंश की यही हालत है।  डॉ. चौधरी ने बताया कि लावारिस हालत में घूमने पर गाय व बैल अधिकतर पॉलिथीन खा रहे है। जिससे इनके पेट में चारे की जगह ही नहीं है। जब वे चारा नहीं खा पा रहे हैं तो उनमें कमजोरी आ रही है। साथ ही उनके लीवर डीमेज हो रहे हैं। यही उनकी मौत का कारण बन रहे हैं। </p>
<p><strong>पहले भी मिली थी यही स्थिति</strong><br /><strong>डॉ. चौधरी ने बताया</strong> कि इससे पहले भी निगम की गौशाला में गौवंश की बड़ी संख्या में मौत हुई थी। उस समय भी जब गायों का पोस्ट मार्टम किया गया था तब भी उनके पेट से पॉलिथीन के गुच्छे निकले थे। </p>
<p><strong>पॉलिथीन में न डालें खाद्य पदार्थ</strong><br /><strong>डॉ. भंवर सिंह चौधरी व पार्षद जितेन्द्र सिंह ने बताया </strong>कि गायों की मौत का कारण  पॉलिथीन बन रही है। ऐसे में लोगों को चाहिए कि वे खाद्य पदार्थ को पॉलिथीन में नहीं फेंके। खाद्य पदार्थ खाने के चक्कर में गाय पॉलिथीन तक को खा रही है। जिससे वे चारा व रोटी नहीं खा पा रही और यही उनकी मौत का कारण है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 01 May 2025 17:47:04 +0530</pubDate>
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                <title>गौशाला व बंधा गांव में हजारों पशु, फिर भी नहीं है चिकित्सालय की सुविधा</title>
                                    <description><![CDATA[ गौशाला में बीमारियों का बढ़ रहा प्रकोप]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/thousands-of-animals-in-the-cowshed-and-bandha-village--yet-there-is-no-hospital-facility/article-112416"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-04/news-(1)43.png" alt=""></a><br /><p>कोटा । शहर से कई किलोमीटर दूर बंधा गांव और वहां स्थित नगर निगम की गौशाला में जहां हजारों पशु हैं। वहां पशु चिकित्सालय की सुविधा तक नहीं है। निगम की गौशाला में इन दिनों बीमारियों का प्रकोप होने के बावजूद गौशाला कम्पाउंडरों के भरोसे है। बंधा धर्मपुरा में नगर निगम की गौशाला है।  जहां शहर से लावारिस हालत में पकड़े गए गौवंश को रखा गया है। वर्तमान में यहां करीब 3 हजार से अधिक मवेशी हैं। जिनमें सांड से लेकर गाय व बछड़े तक शामिल है। हालत यह है कि लावारिस हालत में पकड़े गए इन गौवंश में से अधिकतर बीमार  व कमजोर हालत में आते हैं। जिन्हें पशु चिकित्सक की देखभाल की आवश्यकता रहती है। गौशाला में बीमार व कमजोर गायों को अलग बाड़े में रखा हुआ है। हालांकि यहां पशु चिकित्सा केन्द्र तो बनाया हुआ है। लेकिन चिकित्सालय की सुविधा नहीं है। केन्द्र में मात्र कम्पाउंडर ही कार्यरत हैं। जिनके भरोसे पूरी गौशाला में गौवंश की देखभाल व उपचार किया जा रहा है। बंधा में ही गायत्री परिवार की गौशाला भी है। साथ ही गांव में अन्य पशु पालकों के भी पशु है। ऐसे में उन सभी को  पशुओं के बीमार होने पर उपचार के लिए परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। </p>
<p><strong>चक्कर खाकर गिरने का बढ़ रहा रोग</strong><br />नगर निगम की गौशाला में पहले जहां लम्पी रोग से ग्रसित मवेशी सबसे पहले पाए गए थे। वहीं अब इनमें एक नई बीमारी चक्कर खाकर गिरने  वाली प्रोेयेजोमा बढ़ रही है। जिससे गौवंश की मृत्युदर में बढ़ोतरी हुई है। हालत यह है कि इस रोग के होने के बाद भी वहां न तो  पशु चिकित्सक की सुविधा है और न ही चिकित्सालय की। जिससे रोजाना मरने वाले गौवंश की संख्या सामान्य से अधिक हो गई है। </p>
<p><strong>सेवानिवृत्त उप निदेशक कार्यरत</strong><br />नगर निगम की ओर से पशु चिकित्सालय से सेवानिवृत्त उप निदेशक डॉ. नंद किशोर वर्मा को नियुक्त किया हुआ है। लेकिन वे अधिकतर समय किशोरपुरा स्थित कायन हाउस में ही सेवाएं देते हैं। जबकि गौशाला में कम्पाउंडर ही कार्यरत हैं।  हालांकि बोराबास पशु चिकित्सा केन्द्र से सरकारी डॉक्टर गौशाला में आते हैं लेकिन वह कभी-कभी ही आते हैं।  </p>
<p><strong>पशु चिकित्सालय व चिकित्सक हो</strong><br />निगम की गौशाला में क्षमता से अधिक गौवंश है।  इसके अलावा वहां निजी गौशाला व गांव में अन्य पशु भी हैं। ऐसे में वहां पशु चिकित्सालय और पशु चिकित्सक का होना आवश्यक है। जिससे इतने अधिक गौवंश के बीमार होने पर उन्हें समय पर तुरंत उपचार मिल सके। हालांकि गौशाला में कम्पाउंडर हैं लेकिन वे अपना काम तो कर रहे हैं जबकि डॉक्टर का काम तो डॉक्टर ही कर सकता है। <br /><strong>-डॉ. नंद किशोर वर्मा, रिटायर्ड उप निदेशक, पशु चिकित्सालय</strong></p>
<p><strong>आयुक्त समेत अधिकारियों को कई बार कराया अवगत</strong><br /> निगम की गौशाला में वर्तमान में करीब 3 हजार से अधिक गौवंश है। यह क्षमता से काफी अधिक है। ऐसे में यहां शहर से लावारिस हालत में लाए जा रहे गौवंश को घूमने की पर्याप्त जगह तक नहीं मिल पा रही है। ऐसे में वर्तमान में गौशाला में प्रोयेजोमा बीमारी का प्रकोप बढ़ा है। जिसमें पशु चक्कर खाकर गिरते हैं और वापस उठ नहीं पाते। जिससे उनकी मृत्युदर अधिक हुई है। इस बीमारी से रोजाना 5 से 6 गौवंश की मौत हो रही है। इस बीमारी के उपचार और गौशाला में पशु चिकित्सक की सुविधा करवाने के सबंध में निगम आयुक्त व अधिकारियों को कई बार अवगत कराया जा चुका है। लिखित में देने के बाद भी कोई व्यवस्था नहीं की गई। गौशाला में कम्पाउंडरों से काम चलाया जा रहा है। बोराबांस से पशु चिकित्सक कभी-कभी आकर गौशाला का निरीक्षण करते हैं। जबकि यहां नियमित पशु चिकित्सक होना चाहिए। <br /><strong>-जितेद्र सिंह, अध्यक्ष गौशाला समिति, नगर निगम कोटा दक्षिण</strong></p>
<p><strong>डॉक्टर की साप्ताहिक विजिट</strong><br />गौशाला में स्थायी रूप से तो कम्पाउंडर लगाए हुए हैं। वे पूरे समय वहां सेवाएं दे रहे हैं। उनके अलावा किशोरपुरा कायन हाउस में सेवानिवृत्त डॉक्टर को भी लगाया हुआ है।साथ ही बोराबांस से सरकारी डॉक्टर सप्ताह में निगम की गौशाला का विजिट करते हैं। वर्तमान में जो बीमारी गौशाला में हुई है  उसकी दवाईयां व उपचार की व्यवस्था की जा रही है। <br /><strong>-महेश गोयल, उपायुक्त व प्रभारी गौशाला नगर निगम कोटा दक्षिण</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 29 Apr 2025 15:14:31 +0530</pubDate>
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                <title>असर खबर का - स्वीकृति मिलते ही जारी किया भूमि का आवंटन पत्र</title>
                                    <description><![CDATA[आवंटन की तिथि से एक साल में निर्माण कार्य शुरु कर 3 साल में पूरा करना होगा।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/impact-of-the-news---land-allotment-letter-issued-as-soon-as-approval-is-received/article-101798"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-01/257rtrer-(3)23.png" alt=""></a><br /><p>कोटा । नगरीय विकास विभाग की ओर से बंधा धर्मपुरा में गौशाला विस्तार के लिए भूमि का आवंटन करने की स्वीकृति का पत्र मिलते ही केडीए ने अगले ही दिन बुधवार को भूमि का आवंटन पत्र जारी कर दिया। कोटा विकास प्राधिकरण की ओर से बंधा धर्मपुरा में 4 हैक्टेयर भूमि का आवंटन पत्र बुधवार को नगर निगम कोटा दक्षिण आयुक्त के नाम जारी कर दिया।  केडीए सचिव द्वारा जारी आवंटन पत्र में कहा गया है कि इस भूमि का आवंटन गौशाला विस्तार के लिए  नि:शुल्क किया जा रहा है। इसका उपयोग उसी प्रयोजन के लिए किया जाएगा जिसके लिए आवंटन किया गया है। आवंटन की तिथि से एक साल में निर्माण कार्य शुरु कर 3 साल में पूरा करना होगा। इस भूमि का व्यवसायिक व अन्य प्रयोजन में उपयोग नहीं किया जा सकेगा। यदि अन्य प्रयोजन में इसका उपयोग किया गया तो आवंटन क निरस्त किया जा सकेगा। यह आवंटन 99 वर्षीय पट्टेधारी के आधार पर किया गया है।  गौरतलब है कि नगर निगम की ओर से बंधा  धर्मपुरा में गौशाला विस्तार के लिए केडीए सचिव को जून 2023 से ही पत्र लिखकर जमीन की मांग की जा रही थी। इस पत्र के संबंध में जमीन आवंटन की स्वीकृति के  लिए केडीए की ओर से पत्र को नगरीय विकास विभाग को भेज दिया था। वहां से स्वीकृति नहीं मिलने से आवंटन लम्बे समय से अटका हुआ था।  गौशाला समिति के अध्यक्ष जितेन्द्र सिंह ने बताया कि भूमि केआवंटन के संबंध में जब लोकसभा अध्यक्ष से आह्गर किया गया तो उनके प्रयास से भूमि आवंटन की स्वीकृति भी जारी हो गई और आवंटन पत्र भी जारी हो गया। अब इस भूमि पर गौशाला विस्तार कि या जा सकेगा। सूत्रों के अनुसार नगरीय विकास विभाग की ओर से आवंटन पत्र तो 8 जनवरी को ही जारी कर दिया गया है। जबकि यह केडीए को 21 जनवरी को प्राप्त हुआ है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 23 Jan 2025 15:22:08 +0530</pubDate>
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                <title>लिफ्टिंग मशीन से हर महीने बचा रहे 100 गौवंश की जान</title>
                                    <description><![CDATA[गौशाला व कायन हाउस में अधिकतर गौवंश शहर की सड़कों से निराश्रित हालत में पकड़कर लाए गए हैं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/100-cows-are-being-saved-every-month-with-the-help-of-cow-lifting-machine/article-98764"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-12/257rtrer-(4)20.png" alt=""></a><br /><p>कोटा । नगर निगम की बंधा धर्मपुरा स्थित गौशाला व किशोरपुरा स्थित कायन हाउस में बैठक लेने वाली करीब 100 गौवंश को हर महीने बचाया जा रहा है। यह संभव हुआ है काऊ लिफ्टिंग मशीन से। गौशाला व कायन हाउस में अधिकतर गौवंश शहर की सड़कों से निराश्रित हालत में पकड़कर लाए गए हैं। जिनमें भी बीमार व घायल और कमजोर गौवंश अधिक है। उनमें गाय हो या बछड़े या फिर सांड अधिकतर प्लास्टिक की पॉलिथीन खाई हुई है। जिससे गौशाला में आने पर वे भूसा व चारा कम खा पाती है।  जिससे कई कमजोर व बीमार गाय बैठक ले लेती है। एक बार बैठक लेने के बाद उन्हें प्रयास करने पर भी  खड़ा करना मुश्किल होता है। जिससे उनकी मौत निश्चित होती है। ऐसा पिछले कई सालों से हो रहा था। लेकिन कुछ समय से बैठक लेने वाले गौवंश की मृत्यु दर में कमी आई है।</p>
<p><strong>आधा दर्जन मशीनों का कर रहे उपयोग</strong><br />सिंह ने बताया कि पहले जहां बैठक लेने के बाद अधिकतर गायों कीमौत  हो जाती थी। अब कुछ समय पहले कॉऊ लिफ्टिंग मशीनोंका उपयोग कर उनकी मुत्यु दर को कम किया गया है। गौशाला व कायन हाउस में ऐसी करीब आधा दर्जन मशीनें बनवाई गई है। पहले इनकी संख्या दो ही थी और पुरानी होने से इनका उपयोग नहीं हो पा रहा था। अब इनकी संख्या बढ़ाई गई है। कुछ निगम के स्तर पर और कुछ दान दाताओं के सहयोग से ली गई है। सिंह ने बताया कि पहले जहां बैठक लेने वाली गौवंश की अधिक मुत्यु हो रही थी। वहीं वर्तमान में यह घटकर 4 से 5 ही प्रतिदिन हो पा रही है। </p>
<p><strong>काढ़ा पिलाया जा रहा, हैलोजन लगाई</strong><br />गौशाला समिति अध्यक्ष जितेन्द्र सिंह ने बताया कि सर्दी में बीमार व कमजोर गायों के साथ ही छोटे बछड़ों को भूसे व चापड़ में पौष्टिक तत्वों का काढ़ा मिलाकर दिया जा रहा है। गौशाला व कायन हाउस में रोजाना यह काढ़ा बनाया जा रहा है।  इसके साथ ही बाड़ों में गर्माहट के लिए हैलोजन लाइटें लगाई गई है। हर 35 से 40 फुट की दूरी  पर लगाई गई है।</p>
<p><strong>कॉऊ लिफ्टिंग मशीन से कर रहे खड़ा</strong><br />नगर निगम कोटा दक्षिण की गौशाला समिति के अध्यक्ष जितेन्द्र सिंह ने बताया कि गौशाला में अधिकतर बीमार व कमजोर गाय है। यहां आने के बाद किसीकारण से यदि वह बैठक ले लेती है तो श्रमिकों की मदद से उन्हें दोबारा से खड़ा करना मुश्किल हो रहा था। ऐसे में कुछ समय पहले प्रयास कर काऊ लिफ्टिंग मशीनें तैयार करवाई गई। जिनकी सहायता से बैठक लेने वाले गौवंश को खड़ा करने में सफलता मिली है। सिंह ने बताया कि लोहे की बनी इस मशीन को नीचे रखकर उस पर बैठक लेने वालीगाय या सांड को लिया जाता है। उसके बाद पट्टों  से बांधकर गिरारी की सहायता से उन्हें  उनके पैरों पर खड़ा किया  जाता है। उसके बाद उनके कमजोर पैरों पर सरसों के तेल की मालिश की जाती है। जिससे उनके पैरों में ताकत आने पर उन्हें कुछ दूरी पर चलाया जाता है। ऐसा करके रोजाना 3 से 4 यानि हर महीने करीब 100 गौवंश की जान बचाने में सफल हो रहे है। बुधवार को भी 3 से 4  बैठक ले चुकी गायों को खड़ा किया गया।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 26 Dec 2024 17:25:12 +0530</pubDate>
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                <title>असर खबर का - गायों को पिलाने लगे कीड़े मारने की दवा</title>
                                    <description><![CDATA[नवज्योति ने किया था समाचार प्रकाशित । 
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/effect-of-news---cows-started-being-given-deworming-medicine/article-96424"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-12/257rtrer-(1)2.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। नगर निगम की बंधा धर्मपुरा स्थित गौशाला में गायों को पेट के कीड़े मारने की दवा पिलाने का अभियान शुरु किया है। जिससे यह दवा उनके लीवर को डेमेज होने से बचाएगी और उनकी पाचन क्रिया बढ़ाएगी। नगर निगम की गौशाला में वर्तमान में करीब 2500 से अधिक गौवंश है। जिनमें अधिकतर कमजोर व बीमार है। सड़कों  पर निरािश्रत हालत में घूमने के दौरान  इनके द्वारा पॉलिथीन अधिक खाने से इनके  पेट में कीड़े अधिक हो गए हैं। इन कीड़ों के कारण अधिकतर गायों के लीवर व किडनी डेमेज हो गई है। जिससे न तो यह सही ढंग से व भरपेट चारा खा पा रही है और न ही घूम पा रही है।ऐसे में उनके कमजोर होने पर बैठक लेने से अधिकतर दोबारा से उठ नहीं पाती और उनकी मौत हो जाती है। गौशाला के चिकित्सा प्रभारी डॉ. नंद किशोर वर्मा ने बताया कि एक दिन पहले ब्लड सैम्पल से जब  गायों के लीवर व  किडनी  डेमेज होने की जानकारी मिली। उसका कारण अधिकतर गायों के पेट में कीड़े होना है। ऐसे में पशु पालन विभाग के माध्यम से गौशाला में गायों को पेट के कीड़े मारने की दवा पिलाना शुरु किया है। डॉ. वर्मा ने बताया कि इस दवा के असर से पेट के  कीड़े तो मरेंगे ही। साथ  ही इस दवा के असर से लीवर को सपोर्ट मिलेगा। गायों की पाचन क्रिया बढ़ने से उनकी खुराक बढ़ेगी। जिससे पशुओं के स्वास्थ्य में भी सुधार होगा। उन्होंने बताया कि गौशाला में वर्तमान में करीब 25 सौ से अधिक गौवंश है। उन सभी को दवाई पिलाई जाएगी। सभी को दवाई पिलाने तक यह अभियान लागातर जारी रहेगा। गौशाला के साथ ही किशोरपुरा स्थित कायन हाउस में भीगायों को पेट के कीड़े मारने की दवा पिलाई जाएगी। </p>
<p><strong>नवज्योति ने किया था प्रकाशित</strong><br />गौरतलब है कि गौशाला की गायों में से अधिकतर के लीवर व किडनी डेमेज होने का समाचार दैनिक नवज्योति ने प्रकाशित किया था। समाचार पत्र में 30 नवम्बर के अंक में पेज 7 पर ‘पॉलिथीन खाने से डेमेज हो रहे गायों के लीवर व किडनी’ शीर्षक से प्रकाशित किया था। जिसमें गायों की स्थिति को दर्शाया गया था। उसके बाद पशु पालन विभाग के माध्यम से गौशाला में गायों को पेट के कीड़े मारने की दवा पिलाने के अभियान को तेज किया गया।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 02 Dec 2024 14:53:44 +0530</pubDate>
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                <title>बेजुबानों के भी बनें तारणहार, सड़कों पर डाल रखा डेरा</title>
                                    <description><![CDATA[जिम्मेदार इस ओर ध्यान देवें, तो इन आवारा मवेशियों को भी बसेरा मिल जाएं।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/bundi/become-savior-of-the-mute-animals-too--camping-on-the-roads/article-87395"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-08/4111u1rer-(16)1.png" alt=""></a><br /><p>भण्डेड़ा। भण्डेड़ा क्षेत्र में लगभग आधा दर्जन ग्राम पंचायतों के अधीन गांवों में गौशाला की दरकार होने से यहां इन कस्बों, ग्रामीण अंचलों सहित ढाणियों में हजारों की संख्या में आवारा मवेशी इधर उधर डमडोला खाते हुए नजर आते है। इन्हें गांव व कस्बों में बैठने की ठोर के अभाव में यह पशु आबादी की मुख्य सड़कों के चौराहे, सड़कें व बाजारों में चौक पर सीसी सड़कों पर ढेरा जमा लेते है। अचानक पशु आपस में भीड़ जाते है, जो यहां से गुजरने वाले राहगीरों को भी चोटिल कर देते है। जिम्मेदारों की अनदेखी से यह बेजुबान आवारा पशुओं को दर-दर की ठोकरें खाने को मजबूर होना पड़ रहा है। आखिरकार पशु भी करें तो क्या करें। इन मुख्य सड़कों के किनारे किसानों की जमीन में फसलें होने से आसपास पशु नजर आते ही उनको दूर भगा देते है। अपनी फसल को बचाने के लिए इसी तरह दूसरी तरफ जाते ही दूसरे किसान भी इसी तरह करने से यह पशु इधरउधर टहलकर मुख्य सड़कों व चौराहों को ही अपना सहारा मानकर सड़कों पर बैठ जाते है। इसी दौरान राह से गुजरने वाले राहगीर के समय अचानक पशु आपस में झगड़ते है। उनको चपेट में लेकर राहगीरों सहित वाहनों को क्षति पहुंचा देते हैं। कभी-कभार तो राहगीरों को भी घायल कर देते है। पर जिम्मेदार आमजन की इस समस्या को दरकिनार कर रहे है। क्षेत्र की आधा दर्जन ग्राम पंचायतों में बेजुबान मवेशी इधर उधर भटक रहे है। इनके लिए कोई तारणहार नहीं बन रहा है। इनकी संख्या में दिनोंदिन इजाफा हो रहा है। पर उचित ठोर के अभाव में इनको परेशानियां झेलनी पड़ रही है। जिम्मेदार इस ओर ध्यान देवें, तो इन आवारा मवेशियों को भी बसेरा मिल जाएं। एवं सड़कों पर इनकी वजह से होने वाली दुर्घटनाओं से भी बचा जा सकता है।</p>
<p>खेतों व कुओं से जो भी ग्रामीण व किसान वर्ग गांव में आते समय रास्ते में व खेतों के आसपास में नजर आनेवाले आवारा पशुओं को घेरते हुए गांव में ले आते है। कुछ समय इधरउधर भटकते हुए पेट भरने के लिए फिर दूसरी तरफ घूमते हुए पेट भरने के लिए खेतो की तारबंदी तक तोड़कर फसलों को नुकसान पहुंचा देते है।  फिर गांव की तरफ भगाने का प्रयास किया जाता हैं।<br /><strong>- जयलाल गुर्जर, निवासी गुजरियाखेड़ा</strong></p>
<p>आवारा पशुओं के लिए गौशाला के नहीं होने से यहाँ पर आसपास के गांवों में हजारों की संख्या में आवारा पशु नजर आते है, जो दिनरात इधरउधर भटकते रहते हैं। बरसात के समय आवारा पशु मुख्य सड़कों को अपना सहारा मानकर ढेरा ढालने को मजबूर होना पडता है। बरसात के बंद होने पर सड़कों पर ही बैठ जाते है।           <br /><strong>- किशनगोपाल शर्मा, निवासी भण्डेड़ा</strong></p>
<p>क्षेत्र में आसपास में गौशाला के नहीं होने से यह आवारा पशु सड़कों पर जमा हो जाते है। यहाँ से दोपहिया वाहनों के राहगीर गुजरते समय यह पशु आपस में अचानक झगड़ा करने से राह पर चलने वाले राहगीर चोटिल हो जाते है। पशुओं से आमजनों की समस्या को देखते हुए क्षेत्र में एक बडी गौशाला बने तो आमजन को भी राहत मिले। <br /><strong>- सुमेर गुर्जर, निवासी रामगंज</strong></p>
<p>आबादी के मकान मालिकों का कहना है कि आवारा पशुओं के लिए गौशाला नहीं होने से यह पशु गांव में निवास करते है। बरसात के समय मकानों के बरामदे में जमा हो जाते है, जो बरामदे के आंगन में गोबर करने से दीवारों तक छीटे लग जाते है। बडी मुश्किल से हररोज हटाना पडता है। आवारा पशुओं के लिए गौशाला का निर्माण हो तो राहत मिल पाए। <br /><strong>- बाबूलाल सैन, निवासी रामगंज</strong></p>
<p>बाजारों में रात के समय दुकानदार अपनी दुकानें बंद कर घर जाते समय बरामदे के रस्सी बांधकर जाते है कि आवारा पशु अंदर नही आए व गंदगी नही करें, पर पशु बरसात से खुद को बचाने के लिए रस्सी को भी तोड़ देते है व दुकानों के शट्टरों के पास पहुंचकर बैठ जाते है। रातभर गंदगी करते रहते हैं। सुबह दुकान मालिक पहुंचने पर पहले पशुओं को हटाना पडता है, फिर गन्दगी को दूर करने के लिए पानी लाकर सफाई करने के बाद दुकानों में पहुंच पातें है। <br /><strong>- नीरूशंकर शर्मा, निवासी बांसी</strong></p>
<p>क्षेत्र में गौशाला के नहीं होने से आवारा पशुओं को अपना पेट भरने के लिए लोगों के डंडे भी खाने पडते है। आवारा पशुओं को बहुत भारी पीडा सहनी पड़ती है। गौशाला हो तो इन पशुओं को भी राहत मिले साथ में राहगीरों को सड़क पर आवाजाही के दौरान इनसे खतरा नहीं हो। <br /><strong>- राजवीर गुर्जर, निवासी फलास्थूनी</strong></p>
<p>गौशाला का निर्माण हर ग्राम पंचायत मे बहुत आवश्यक हो गया है। आवारा पशुओं का खतरनाक आंतक हो रहा है। दुकानदार सबसे ज्यादा परेशान है। साथ ही आवारा पशुओं के कारण रोज दुर्घटना हो रही है। सरकार जल्द ही इस नवाचार के लिए कदम उठाएं तो आमजन को राहत मिले।<br /><strong>- अवधेश कुमार जैन, दुकानदार बांसी</strong></p>
<p>क्षेत्र में तीन से चार ग्राम पंचायतों की सटी हुई सीमा में एक उच्च क्षमता की गौशाला का निर्माण हो तो आवारा गौवंश इधर उधर नहीं भटकते फिरेंगे एवं सड़कों पर आवागमन करनेवाले राहगीरों को भी इससे निजात मिले। गौवंश की इस समस्या को जिम्मेदार गंभीरता से देखें। इस समस्या का समाधान भी जल्द करें। मंहगें दामों में किसान खाद बीज लगाते है। आवारा पशु एक बार फसल में पहुंचते ही चौपट कर देते है। किसान देखकर हैरान हो जाते है। <br /><strong>- अर्चना कंवर हाडा, सदस्य  पंचायत समिति हिण्डोली</strong></p>
<p>गौशाला के अभाव में क्षेत्र के सभी वर्ग परेशान है। लगभग तीन-चार ग्राम पंचायत में अच्छी-सी जगह देखकर सरकार द्वारा गौशाला के लिए लगभग चार-पांच हजार आवारा पशुओं को रखने की क्षमता के आधार पर जगह आंवटन करना चाहिए व फिलहाल जब तक चारदीवारी नहीं हो, तब तक तारबंदी हो जाए। आवारा पशुओं के लिए आशियाना उपलब्ध हो तो किसानों व सड़कों पर पशुओं से होने वाली दुर्घटनाओं से निजात मिल सकें। हम ग्राम पंचायत की तरफ से जिला कलेक्टर से भी इस संबंध में मांग करेंगे। <br /><strong>- बीना बाई मीणा, सरपंच  ग्राम पंचायत मरां</strong></p>
<p>जनप्रतिनिधि ने बताया कि सरकार चार से पांच ग्राम पंचायत की सीमा में अच्छी जगह देखकर लगभग पचास बीघा भूमि गौवंश के लिए आवंटित करें, तो आवारा पशुओं से किसान वर्ग, एवं सड़क पर आवागमन के समय राहगीर व आबादी में निवासरत आमजनों को भी राहत मिले। <br /><strong>- सत्यप्रकाश शर्मा (भाया), सरपंच  ग्राम पंचायत बांसी</strong></p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>बूंदी</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 10 Aug 2024 17:49:18 +0530</pubDate>
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                <title>गौशाला में दवाओं के लिए करना होगा इंतजार</title>
                                    <description><![CDATA[वर्तमान में हालत यह है कि यहां पशुओं के लिए आवश्यक दवाएं समाप्त हो चुकी है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/will-have-to-wait-for-medicines-in-cow-shed/article-76672"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-05/goshala-me-dwao-k-liye-krna-hoga-intezar...kota-news-03-05-2024.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा ।  लोकसभा चुनाव की आचार संहिता में कई आवश्यक काम भी नहीं हो पा रहे हैं। उन्हीं में से एक काम है नगर निगम की गौशाला में गौवंश के लिए दवाएं क्रय करना। नगर निगम की बंधा धर्मपुरा स्थित गौशाला व किशोरपुरा स्थित कायन हाउस में करीब ढाई हजार से अधिक संख्या में गौवंश है। जिनमें गाय से लेकर बैल व बछड़े तक शामिल हैं। अधिकतर गौवंश को सड़कों पर लावारिस हालत में घूमते हुए पकड़ा गया है। ऐसे में उनमें से अधिकतर बीमार, कमजोर व चोटिल भी है। गौशाला में आने वाले ऐसे पशुओं के लिए वहां पशु चिकित्सा केन्द्र संचालित किया जाता है। जहां हर साल पर्याप्त मात्रा में दवाएं क्रय की जाती है। लेकिन वर्तमान में हालत यह है कि यहां पशुओं के लिए आवश्यक दवाएं समाप्त हो चुकी है। लेकिन लोकसभा चुनाव की आचार संहिता के कारण दवाएं क्रय करने का टेंडर तक नाहीं हो पा रहा है। </p>
<p><strong>आयुक्त ने कलक्टर को लिखा था पत्र</strong><br />आचार संहिता के दौरान गौशाला में दवाओं का टेंडर करने के लिए नगर निगम कोटा दक्षिण की आयुक्त ने जिला कलक्टर को पत्र भी लिखा था। जिसमें दवाओं के टेंडर करने की अनुमति चाही थी। लेकिन हालत यह है कि करीब एक महीना होने को है। उसके बाद भी अभी तक न तो अनुमति मिली है और न ही दवाएं मिली हैं। </p>
<p><strong>समय पर टेंडर नहीं करने से हो रही परेशानी</strong><br />नगर निगम गौशाला समिति के अध्यक्ष जितेन्द्र सिंह का कहना है कि गौशाला में अधिकतर लावारिस पकड़ी गई गायों में बीमार व कमजोर और चोटिल हैं। जिनके लिए आवश्यक दवाएं तक गौशाला में नहीं है। निगम अधिकारियों द्वारा समय से टेंडर नहीं करने के कारण यह परेशानी हो रही है। अधिकािरयों को पता था कि लोकसभा चुनाव की आचार संहिता में टेंडर नहीं हो पाएंगे। उसके बाद भी पहले से दवाईयों की व्यवस्था नहीं की। अब जैसे-तैसे व्यवस्था करनी पड़ रही है।</p>
<p><strong>आचार संहिता के बाद ही होंगे टेंडर</strong><br />नगर निगम कोटा दक्षिण के उपायुक्त महावीर सिंह सिसोदिया ने बताया कि गौशाला में दवाएं समाप्त हो गई है। उनके टेंडर के लिए जिला कलक्टर से अनुमति का पत्र भी लिखा था। लेकिन फिलहाल कोई अनुमति नहीं मिली है। अब आचार संहिता समाप्त होने के बाद जून में ही दवाओं के टेंडर हो पाएंगे। हालांकि अभी आवश्यक दवाओं की व्यवस्था सहयोग से की जा रही है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 03 May 2024 15:19:38 +0530</pubDate>
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                <title>यहां गायें भी झूमती हैं संगीत की धुन पर, मृत्यु दर में आ रही कमी</title>
                                    <description><![CDATA[गौशाला की व्यवस्थाओं में सुधार किया जा रहा है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/here-even-cows-dance-to-the-tune-of-music--death-rate-is-decreasing/article-56664"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-09/yha-gaye-bhi-jhoomti-h-sangeet-ki-dhun-pr,-mrtyu-dr-me-aarhi-kami...kota-news-09-09-2023.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। नगर निगम की बंधा धर्मपुरा स्थित गौशाला में जहां बड़ी संख्या में लावारिस हालत में लाया गया गौवंश है। वहां उन्हें संगीत थैरेपी देने के लिए म्यूजिक सिस्टम लगाया गया है। जिससे गौशाला में खुशनुमा व भक्तिमय माहौल बना रहे। देश व प्रदेश में कई बड़ी व निजी और ट्रस्ट की गौशालाओं की तर्ज पर ही कोटा में नगर निगम की गौशाला में भी म्यूजिक सिस्टम लगाया गया है। बंधा धर्मपुरा स्थित निगम की गौशाला में पहले जहां करीब 4 हजार से अधिक गौवंश था। अधिकतर गाय लावारिस व बीमार हालत में होने से उनकी मृत्यु दर भी अधिक थी। रोजाना 10 से 15 गायों की मौत हो रही थी। इसे देखते हुए वहां की व्यवस्थाओं में सुधार किया गया। जिसके तहत गौशाला में म्यूजिक सिस्टम लगाया गया है। इस पर पूरी गौशाला में सुबह-शाम तो भजन व संगीत चलता ही रहता है। आवश्यकता होने पर दिन में भी भजन चलाए जाते हैं। भजनों को सुनने के बाद गायों के व्यवहार में बदलाव दर्ज किया गया है। अब गायें संगीत सुनते हुए दूध तो ज्यादा देती ही हैं। उनके आक्रामक व्यवहार में भी कमी आई है। बीमार गायों की स्वस्थ होने की दर भी बढ़ती नजर आ रही है। </p>
<p><strong>पूरी गौशाला में 12 हॉर्न</strong><br />निगम की गौशाला काफी बड़ी है। जिसमें वर्तमान में करीब 25 सौ गौवंश है। उन्हें अलग-अलग बाड़ों में रखा गया है। पूरी गौशाला में गायों को संगीत सुनाने व भजनों की सरिता बहाने के लिए निगम कीओर से 12 हॉर्न लगाए गए हैं।  जिन पर धीमी आवाज में भजन चलते रहते हैं। </p>
<p><strong>वातावरण में शुद्धि और गायों में खुशहाली</strong><br />नगर निगम की गौशाला समिति के अध्यक्ष जितेन्द्र सिंह ने बताया कि गौशाला में अधिकतर लावारिस हालत में पकड़ी गई गाय हैं जो बीमार व घायल  थी। जिससे उनकी मृत्यु दर भी अधिक हो रही थी। इसे सुधारने के लिए गौशाला में म्यूजिक सिस्टम लगाया गया। जिससे गायों को संगीत थैरेपी दी जा रही है। इससे गौशाला में भक्ति व वातावरण में शुद्धि हुई है। साथ ही गायों को भी  खुशनुमा माहौल मिल रहा है। ऐसे में उनकी खुराक बढ़ी है और मृत्युदर में भी कमी हुई है। सिंह ने बताया कि वर्तमान में केवल बीमार गायों के बाड़े में ही गायों की मौत हो रही है। उसमें भी काफी कमी आई है। साथ ही  दुधारू गायों के दूध में भी बढ़ोतरी हुई है। </p>
<p><strong>12 हॉर्न व माइक सिस्टम लगाया</strong><br />नगर निगम के अधिशाषी अभियंता सचिन यादव ने बताया कि गौशाला में कुछ समय पहले ही 12 हॉर्न व एम्प्लीफायर सिस्टम लगाया गया है। जिससे गायों को भजन व संगीत के साथ ही किसी भी तरह की उद्घोषणा करनी हो तो वह भी की जा सकती है। उसके लिए माइक भी लगाए गए हैं। </p>
<p><strong>गौशाला में सुधार की दिशा में प्रयास</strong><br />नगर निगम कोटा दक्षिण के गौशाला प्रभारी दिनेश शर्मा ने बताया कि गौशाला की व्यवस्थाओं में सुधार किया जा रहा है। उसी दिशा में प्रयास करते हुए समिति अध्यक्ष के निर्देश पर गौशाला में म्यूजिक सिस्टम लगाया है। थोड़ी-थोड़ी दूरी पर लगाए हॉर्न से कम आवाज में भजन व संगीत चलता रहता है। जिससे गौशाला में माहौल में भक्ति व शुद्धता बनी हुई है। इससे गायों पर ही नहीं वहां काम करने वाले कर्मचारियों के काम में भी फर्क पड़ा है।  शर्मा ने बताया कि इस तरह की व्यवस्था निजी गौशालाओं के अलावा कई ट्रस्ट की गौशालाओं में भी है। जिसे भी यहां अपनाया गया है। उसका फर्क भी महसूस किया जा रहा है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 09 Sep 2023 16:58:16 +0530</pubDate>
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                <title>बरसात में फिर बढ़ गया गायों की मौत का आंकड़ा</title>
                                    <description><![CDATA[बरसात में कीचड़ होने से गौवंश के फिलसने का खतरा अधिक रहता है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/the-death-toll-of-cows-increased-again-in-the-rain/article-52611"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-07/barsaat-me-fr-bdh-gya-gayo-ki-maut-ka-hamla...kota-news-24-07-2023.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। नगर निगम की गौशाला में गायों की मौत का आंकड़ा बरसात में एक बार फिर से बढ़ गया है। यहां रोजाना 10 से अधिक गौवंश की मौत हो रही है। नगर निगम की बंधा धर्मपुरा स्थित गौशाला में जहां वर्तमान में मात्र करीब 2 हजार ही गौवंश है। पिछले कुछ महीनों में इनकी संख्या आधी रह गई है। इसका कारण एक तो यहां से जिले की अन्य गौशालाओं को करीब 11 सौ से अधिक गौवंश को शिफ्ट करना है। वहीं दूसरा कारण गौवंश की लगातार हो रही मौत है। गौशाला में गायों की अधिक मौत का सिलसिला थमने का नाम ही नहीं ले रहा है। कुछ समय पहले यहां मौत का आंकड़ा कम होकर 5 से 6 के बीच हो रह गया था। लेकिन बरसात का सीजन शुरू होते ही एक बार फिर से गायों की मौत अधिक होने लगी है। </p>
<p><strong>बरसात में कीचड़ और बैठक लेने से होती मौत</strong><br />गौशाला में पहले जहां क्षमता से अधिक गौवंश था तो उन्हें घूमने की जगह नहीं मिल पा रही थी। जिससे उनकी आपस में टकराने से मौत हो रही थी। वर्तमान में वहां इनकी संख्या तो कम हो गई है लेकिन गौशाला में जिस तरह का कच्चा व पक्का फर्श है। उस पर बरसात में कीचड़ होने से गौवंश के फिलसने का खतरा अधिक रहता है। जिससे वे एक बार बैठक लेने के बाद उठ नहीं पाती हैं। ऐसे में कुछ समय बाद उनकी मौत हो जाती है। </p>
<p><strong>बीमार गाय अधिक होना भी कारण</strong><br />जानकारों के अनुसार निजी गौशालाओं में जहां स्वस्थ गाय अधिक हैं। वहां अधिकतर दूध देने वाली गाय हैं। जिनकी देखभाल व खानपान भी अच्छा होता है। जबकि निगम की गौशाला में अधिकतर बीमार व लावारिस हालत में ही गौवंश आते हैं। जिससे उनकी मौत अधिक हो रही है। </p>
<p><strong>पोस्ट मार्टम रिपोर्ट में मौत का कारण</strong><br />गौशाला समिति के अध्यक्ष जितेन्द्र सिंह ने बताया कि गौशाला में गौवंश की अधिक मौत का कारण जानने के लिए ही गत दिनों निगम अधिकारियों व महापौर की मौजूदगी में पशु चिकित्सकों की टीम ने तीन गायों का पोस्ट मार्टम किया था। जिसमें उनके पेट से पॉलिथीन निकली थी। उसकी मात्रा अधिक होने से ही गायों की मौत हो रही है। बरसात में यह आंकड़ा हमेशा बढ़ जाता है। </p>
<p><strong>11 सौ से अधिक को किया शिफ्ट</strong><br />गौशाला से करीब 11 सौ से अधिक गौवंश को जिले की निजी गौशालाओं में शिफ्ट कर दिया है। जिससे इनकी संख्या तो सीमित हो गई है। लेकिन बरसात में फिर से गौवंश की मौत का आंकड़ा कुछ बढ़ा है। कुछ समय पहले तक जहां गौवंश की मौत का आंकड़ा 5 या उससे कम हो गया था। वह बरसात में बढ़कर 10 या उससे अधिक हो गया है। इसे रोकने के प्रयास किए जा रहे हैं। बरसात में कीचड़ की सफाई करवाने व बाड़ों को सही करने का काम किया जा रहा है। साथ ही गौशाला में निर्माण के काम भी शुरू हो गए हैं। <br /><strong>- दिनेश शर्मा, प्रभारी गौशाला, नगर निगम कोटा दक्षिण</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 24 Jul 2023 17:52:11 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>बरसात में आधे गौवंश को भी नसीब नहीं हो रही सिर छुपाने को छत</title>
                                    <description><![CDATA[शेड की संख्या कम होने से उसमें सीमित ही गौवंश आ पा रहे हैं। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/even-half-of-the-cow-dynasty-is-not-getting-a-roof-to-hide-their-heads-in-the-rain/article-50911"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-07/barsaat-me-adhe-gauvansh-ko-bhi-naseeb-nhi-ho-rhi-sr-chupane-ki-chht...kota-news-05-07-2023.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। बरसात में इंसान को ही नहीं जानवरों को भी सिर छिपाने के लिए छत की जरूरत होती है। जबकि नगर निगम की बंधा धर्मपुरा स्थित गौशाला में आधे गौवंश को भी सिर छिपाने के लिए छत नहीं मिल रही है। वहां शेड की कमी से गायों को समस्या का सामना करना पड़ रहा है। नगर निगम की बंधा धर्मपुरा स्थित गौशाला में जहां वर्तमान में करीब 3 हजार से अधिक गौवंश है। वहां सभी गौवंश को बरसात से बचने के लिए पूरे शेड तक बने हुए नहीं हैं। ऐसे में बरसात होते ही अधिकतर गाय, बैल व बछड़े उससे बचने के लिए शेड की तरफ भागते हैं। शेड की संख्या कम होने से उसमें सीमित ही गौवंश आ पा रहे हैं। जिससे वे एक दूसरे को धक्का देकर बचने का प्रयास कर रही हैं। ऐसे में उनके चोटिल होने के साथ ही गिरने से मौत होने तक का खतरा बढ़ गया है।</p>
<p><strong>बरसात से सबसे अधिक डरती गाय</strong><br />नगर निगम कोटा दक्षिण की गौशाला समिति के अध्यक्ष जितेन्द्र सिंह ने बताया कि गाय बरसात से सबसे अधिक डरती है। जैसे ही बरसात होती है। वह उससे बचने के लिए शेड की तरफ भागती हैं।  लेकिन शेड की कमी होने से उसमें पूरा गौवंश नहीं हो पा रहा है। जिससे उन्हें परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। सीमित शेड में ठुसने से कई गायों की मौत तक हो रही है।</p>
<p><strong>11 सौ गौवंश को किया शिफ्ट</strong><br />जितेन्द्र सिंह ने बताया कि गौशाला में कुछ समय पहले तक 4 हजार से अधिक गौवंश हो गया था। जिसे रखने की जगह तक नहीं थी। ऐसे में गौवंश की मृत्यु दर अधिक हो रही थी। जिला कलक्टर के निर्देश पर जिले की अन्य गौशालाओं को गौवंश शिफ्ट करने के निर्देश दिए गए थे। जिसकी पालना में वर्तमान में करीब 1100 गौवंश को अन्य निजी गौशालाओं में शिफ्ट कर दिया है। साथ ही नए पशुओं को नहीं पकड़ा जा रहा है। जिससे फिलहाल गौशाला में गौवंश की संख्या कम हुई है।</p>
<p><strong>निमाण का टेंडर हुआ, काम शुरू नहीं</strong><br />समिति अध्यक्ष ने बताया कि गौशाला में निर्माण संबंधी कार्य के टेंडर के लिए वे कई महीनों से अधिकारियों से कह रहे हैं। काफी प्रयास के बाद हाल ही में दो करोड़ के निर्माण कार्य के टेंडर हुए हैं। लेकिन बरसात शुरू होने के बावजूद भी अभी तक काम शुरू नहीं हो सका है। जिससे  समस्या का समाधान नहीं हुआ।</p>
<p>गौशाला में पहले की तुलना में गौवंश में कमी हुई है। अन्य गौशालाओं में गौवंश को शिफ्ट किया गया है। गौशाला में टीनशेड की कमी तो है जिसके निर्माण के टेंडर भी हो चुके हैं। शीघ्र ही काम शुरू कर दिया जाएगा। टीनशेड के साथ खेल और भूसा गोदाम समेत कई अन्य निर्माÞ कार्य करवाए जाने है।<br /><strong>- दिनेश शमार, प्रभारी गौशाला, नगर निगम कोटा दक्षिण </strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 05 Jul 2023 18:01:09 +0530</pubDate>
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                <title>अनुदान गौ शालाओं में, गौ वंश सड़क पर</title>
                                    <description><![CDATA[बरसाती सीजन शुरू होने के साथ ही नगर निगम ने कुछ दिन से घेरा डालकर मवेशियों को पकड़ना बंद कर दिया है। 
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/grant-in-cowsheds--cow-dynasty-on-the-road/article-50822"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-07/anudan-gaushalao-me,-govansh-sadak-p...kota-news-04-07-2023.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। सरकार से प्रतिवर्ष लाखों रुपए का अनुदान गौशालाओं के नाम उठाया जा रहा है। लेकिन गायों की देखभाल के नाम पर कुछ नहीं हो रहा। बरसात के सीजन में तो गायों की हालत ही खराब है। इन्हें सड़क पर छोड़ दिए जाने से यह आए दिन दुर्घटना की शिकार हो रही हैं। बरसाती सीजन शुरू होने के साथ ही नगर निगम ने कुछ दिन से घेरा डालकर मवेशियों को पकड़ना बंद कर दिया है। </p>
<p><strong>दूधिया पशुओं से ही सरोकार</strong><br />शहर में संचालित अन्य गौशालाओं को दूधिया पशुओं से ही सरोकार है। ऐसे में शहर में सड़कों पर एक बार फिर से मवेशियों के झुंड नजर आने लगे हैं। दिन और रात दोनों समय में शहर के मुख्य मार्गों से लेकर गलियों तक में से मवेशियों को घेरा डालकर पकड़ना शुरू कर दिया था। दिन में कई-कई वाहन भरकर गौशाला में मवेशी पहुंचाए जा रहे थे। जिससे गौशाला में उन्हें रखने की जगह की कम पड़ने लगी थी। लेकिन जैसे ही बरसात का सीजन शुरू हुआ वैसे ही नगर निगम कोटा उत्तर व दक्षिण में घेरा डालकर मवेशियों को पकड़ना बंद कर दिया है। यह स्थिति करीब एक सप्ताह से बनी हुई है। </p>
<p><strong>जिले में पन्द्रह गौशालाएं</strong><br />कोटा शहर में नगर निगम की बंधा धर्मपुरा गौशाला के अलावा दादाबाड़ी व कई इलाकों  समत 15 निजी गौशालाएं भी संचालित हो रही हैं। लेकिन हालत यह है कि सभी गौशालाओं में अधिकतर दुधारू पशु ही हैं। निगम की गौशाला में जहां दृूधियां पशु गिनती के हैं वहीं  जबकि निजी गौशालाओं में अधिकतर दूध देने वाले ही पशु हैं। निजी गौशालाएं सरकार से अनुदान प्राप्त कर रही हैं लेकिन लावारिस को लेने से बचते हैं। </p>
<p><strong>निगम की जिम्मेदारी, सड़कों से पकड़े पशु</strong><br />डीसीएम निवासी राजेश शर्मा का कहना है कि शहर को कैटल फ्री बनाने के लिए जिस तरह से अभियान चलाकर पशु पकड़े थे। उससे उनकी संख्या कम दिखने लगी थी। लोगों को हादसों से बचाने के लिए बरसात में भी इन्हें निगम पकड़े। जिससे हादसों का खतरा नहीं हो।  कंसुआ निवासी संजय यादव का कहना है कि औद्योगिक क्षेत्र में पशुओं का जमावड़ा अधिक रहता है। यहां भारी वाहन भी निकलते हैं। क्षेत्र की आबादी बढ़ने से लोगों का आवागमन भी बढ़ा है। ऐसे में निगम को चाहिए कि वह  बरसात में भी पशुओं को पकड़े। </p>
<p>सड़कों से लगातार मवेशियों को पकड़कर गौशाला में बंद किया गया। पिछले कुछ दिन से घेरा डालकर पकड़ना बंद किया हुआ है। सिर्फ शिकायत पर सांड और बीमार व घायल पशुओं को ही एम्बूलेंस से पकड़ रहे हैं। शीघ्र ही फिर से घेरा डालकर पशुओं को पकड़ना शुरू किया जाएगा। जिससे लोगों को परेशानी नहीं होगी। <br /><strong>- दिनेश शर्मा, गौशाला प्रभारी नगर निगम कोटा दक्षिण   </strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 04 Jul 2023 15:02:04 +0530</pubDate>
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