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                <title>100% अंकों की गूंज :पीडब्ल्यूवाला छात्रों की सीबीएसई 10वीं बोर्ड 2026 में रिकॉर्ड सफलता</title>
                                    <description><![CDATA[फिजिक्सवाला (PW) के छात्रों ने सीबीएसई कक्षा 10वीं बोर्ड परीक्षा 2026 में ऐतिहासिक प्रदर्शन किया है। वैभव अरोड़ा, अमोलिक पंडिता और आयुष्मान महापात्रा ने 100% अंक पाकर देश में शीर्ष स्थान हासिल किया। जयपुर विद्यापीठ में आयोजित समारोह में मेधावियों को सम्मानित किया गया। अलख पांडेय ने इस सफलता को कड़ी मेहनत और सही मार्गदर्शन का परिणाम बताया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/echo-of-100-marks-record-success-of-physics-students-in/article-150775"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/untitled-1.pdf.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। फिज़िक्सवाला (पीडब्ल्यू) के लिए आज का दिन गर्व और उत्सव का रहा, जब इसके कई विद्यार्थियों ने सीबीएसई कक्षा 10 बोर्ड परीक्षा 2026 में उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए उच्च अंक प्राप्त किए। इनमें कुछ विद्यार्थियों ने शत-प्रतिशत (100%) अंक हासिल कर देश में शीर्ष स्थान प्राप्त किया। उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों में पंजाब के फाजिल्का से वैभव अरोड़ा, गुजरात के अहमदाबाद से अमोलिक पंडिता और ओडिशा के भुवनेश्वर से आयुष्मान महापात्रा शामिल हैं, जिन्होंने 100 प्रतिशत अंक प्राप्त कर देश में सर्वोच्च स्थान हासिल किया।</p>
<p>इसके अतिरिक्त, पीडब्ल्यू विद्यापीठ, जो फिज़िक्सवाला के तकनीक-सक्षम ऑफलाइन केंद्र हैं, ने  जयपुर में एक सम्मान समारोह का आयोजन किया। इस समारोह में शहर के उन विद्यार्थियों को सम्मानित किया गया जिन्होंने सीबीएसई कक्षा 10वीं बोर्ड परीक्षा 2026 में उल्लेखनीय प्रदर्शन किया।  अपने अनुभव साझा करते हुए वैभव अरोड़ा ने कहा, “नियमित तैयारी, सतत अभ्यास और स्कूल व पीडब्ल्यू शिक्षकों के मार्गदर्शन ने मुझे पूर्ण अंक प्राप्त करने में मदद की।”</p>
<p>अमोलिक पंडिता ने बताया, “नियमित रिविजन और मॉक टेस्ट हल करना मेरे लिए 100% अंक लाने में बहुत सहायक रहा।” आयुष्मान महापात्रा ने कहा, “अनुशासन बनाए रखते हुए एक सुव्यवस्थित अध्ययन योजना का पालन करना मेरी सफलता की कुंजी रहा।” परिणामों पर अपने विचार साझा करते हुए अलख पांडेय, संस्थापक एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी, फिज़िक्सवाला (पीडब्ल्यू) ने कहा, “हम परीक्षा में शामिल हुए सभी विद्यार्थियों की मेहनत की सराहना करते हैं। विशेष रूप से उन विद्यार्थियों को बधाई, जिन्होंने पूर्ण अंक हासिल किए। ये परिणाम निरंतर प्रयास और सही शैक्षणिक सहयोग प्रणाली को दर्शाते हैं।”</p>
<p>इस वर्ष सीबीएसई कक्षा 10वीं परीक्षा में 25 लाख से अधिक विद्यार्थी सम्मिलित हुए। इन विद्यार्थियों का प्रदर्शन यह दर्शाता है कि सुनियोजित ऑनलाइन एवं मिश्रित शिक्षण पद्धति शैक्षणिक सफलता में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 17 Apr 2026 10:30:50 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>समंदर की लहरों पर कोटा की छाप: गर्वित बल्दुआ  बढ़ा रही शहर का मान,नेशनल सर्फ ओपन 2026 में बनाई जगह</title>
                                    <description><![CDATA[जुनून, मेहनत और सपनों की उड़ान ने दिलाई नई पहचान।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/kota%E2%80%99s-mark-on-the-ocean-waves--garvit-baldua-brings-honor-to-the-city--secures-a-spot-in-the-national-surf-open-2026/article-149992"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/1200-x-600-px)-(1)17.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। चंबल नदी के शांत किनारों से निकलकर अब समंदर की ऊंची लहरों पर अपनी पहचान बना रही कोटा की बेटी गर्वित बल्दुआ ने एक बार फिर शहर का गौरव बढ़ाया है। अंडमान में आयोजित हो रहे नेशनल सर्फ ओपन 2026 में स्थान बनाकर उन्होंने यह साबित कर दिया कि अगर हौसले बुलंद हों तो कोई भी मंजिल दूर नहीं होती। यह प्रतियोगिता 13 अप्रैल तक चलेगी, जिसमें देशभर के प्रतिभाशाली सर्फर्स भाग ले रहे हैं। गर्वित की कहानी केवल एक खिलाड़ी की सफलता नहीं, बल्कि एक ऐसे सपने की उड़ान है, जो कोटा जैसे शैक्षणिक शहर से निकलकर अंतरराष्ट्रीय खेल मंच तक पहुंची है। उन्होंने अमेरिका में अपना स्टार्टअप भी शुरू किया है और इसके साथ ही सर्फिंग की कोचिंग लेकर इस खेल में खुद को और निखार रही हैं। गर्वित का कहना है, “अब समुद्र से मेरी दोस्ती हो गई है। लहरों के साथ जीना और उन्हंम समझना ही मेरी जिंदगी का हिस्सा बन गया है।”<br /><strong> </strong><br /><strong>बचपन से ही बड़े सपनों की उड़ान</strong><br />गर्वित की मां संगीता महेश्वरी बताती हैं कि बचपन से ही उनकी बेटी के सपने बड़े थे। स्कूल के दिनों में वह एक बेहतरीन बास्केटबॉल कि खिलाड़ी रही हैं। खेलों के प्रति उनका झुकाव शुरू से ही रहा, लेकिन उनके भीतर कुछ अलग करने का जुनून भी था। पहाड़ों पर चढ़ना, नई जगहों पर घूमना और चुनौतियों को अपनाना उसे हमेशा आकर्षित करता था।</p>
<p><strong> बेंगलुरु में मिला सर्फिंग का सपना</strong><br />उनके जीवन में असली मोड़ तब आया जब उन्होंने बेंगलुरु में एमबीए के दौरान पहली बार समुद्र किनारे लोगों को सर्फिंग करते देखा। लहरों पर सवार होकर संतुलन बनाने का यह खेल उन्हें इतना आकर्षक लगा कि यही उनका सपना बन गया। इसके बाद उन्होंने खुद को पूरी तरह सर्फिंग के लिए समर्पित कर दिया।</p>
<p><strong>पढ़ाई भी समुद्र किनारे, जुनून भी वहीं</strong><br />गर्वित की लगन का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि वह अपनी पढ़ाई भी समुद्र किनारे बैठकर करती थीं। चेन्नई के महाबलीपुरम में 2023 में आयोजित अंतरराष्ट्रीय सर्फिंग प्रतियोगिता में उन्होंने शानदार प्रदर्शन करते हुए पांचवीं रैंक हासिल की थी। इसी उपलब्धि के आधार पर उन्होंने नेशनल स्तर के लिए क्वालिफाई किया और अब नेशनल सर्फ ओपन 2026 में अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन कर रही हैं।<br /><strong> </strong><br /><strong>कोटा से दुनिया तक का सफर</strong><br />साल 2011-12 से ही गर्वित कोटा से बाहर निकलकर नई दुनिया को देखने और समझने लगी थीं। उन्हें नए अनुभव हासिल करना और अलग-अलग जगहों पर जाना पसंद था। यही जिज्ञासा और साहस उन्हें आज इस मुकाम तक लेकर आया है। गर्वित बल्दुआ की सफलता न केवल कोटा बल्कि पूरे राजस्थान के लिए प्रेरणा का स्रोत बन गई है। उन्होंने यह दिखा दिया कि पारंपरिक सीमाओं से बाहर निकलकर भी नए रास्ते बनाए जा सकते हैं। आज वह उन युवाओं के लिए मिसाल हैं, जो अपने सपनों को सच करने का साहस रखते हैं। समंदर की लहरों पर सवार होकर गर्वित ने यह साबित कर दिया है कि जुनून और मेहनत के आगे कोई भी बाधा टिक नहीं सकती। अब सभी की नजरें उनके आगामी प्रदर्शन पर हैं, जहां वह देश के लिए और अधिक गौरव हासिल करने की तैयारी में हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 11 Apr 2026 14:46:42 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[kota]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>संघर्ष और चुनौतियों से लड़ बेटियों ने लिखी तकदीर, 90% से अधिक अंक हासिल कर पाया मुकाम</title>
                                    <description><![CDATA[ मजदूर, किसान और ऑटो चालक की बेटियों ने 12वीं बोर्ड में रचा कीर्तिमान।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/battling-struggles-and-challenges--these-daughters-forged-their-own-destinies/article-148837"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/1200-x-60-px)-(youtube-thumbnail)-(6)1.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। सपने वही सच होते हैं, जिनके पीछे संघर्ष की कहानी होती है। यह कहावत उन हौनहार बेटियों ने सच कर दिखाई, जिन्होंने गरीबी, अभाव, आर्थिक तंगी और विपरीत परिस्थितियों में भी हार नहीं मानी और जिद और जूनून के दम पर संघर्ष करते हुए 12वीं बोर्ड परीक्षा में 90 प्रतिशत से अधिक अंक हासिल कर खुद को साबित किया। किसी के पिता मजदूर, किसान हैं तो कोई आॅटो चालक की बेटी है, जिन्होंने कठिन परिस्थितियों को अपनी कमजोरी नहीं बल्कि ताकत बनाकर मिसाल पेश की। संघर्षों की कहानी में कुछ प्रतिभाएं ऐसी भी हैं, जिन्होंने अपनी जिद और जुनून से नामुकिन को भी नुमकिन कर दिखाया। पेश है खबर के प्रमुख अंश....</p>
<p><strong>जंगल में बसा गांव:माता-पिता और भाई दूसरों के खेतों पर मजदूरी करते ,बेटी ने पाया मुकाम</strong><br />जंगल में बसे जिस गांव में मोबाइल नेटवर्क भी ठीक से नहीं आता, वहां से भी प्रतिभा निकलकर सामने आई है। मुकुंदरा टाइगर रिजर्व में बसे घाटोली गांव में सरकारी स्कूल की रीना कुमारी ने 12वीं आर्ट्स फर्स्ट डिविजन से पास कर खुद को साबित किया। रीना बतातीं हैं, माता-पिता और भाई दूसरों के खेतों पर मजदूरी करते हैं, जो सुबह जल्दी घर से निकल जाते हैं। स्कूल जाने से पहले घर का सारा काम करती हूं। शाम को भी काम निपटाकर पढ़ाई करती हूं। घर में कोई पढ़ा लिखा नहीं है। छोटा भाई पढ़ रहा है। परिवार में 8 सदस्य हैं और दो कमरे हैं। एक में दादा-दादी और दूसरे में हम भाई-बहन व माता पिता सहित 6 सदस्य रहते हैं। शोर-शराबा होता है, कोई अन्य विकल्प नहीं होने से ऐसी परिस्थितियों में ही पढ़ाई की और 62.2 % हासिल की। आगे टीचर बनना चाहती हूं।</p>
<p><strong>पैदल चल अगले दिन कोटा आने का बचाता किराया</strong><br />महात्मा गांधी राजकीय इंग्लिश मीडियम स्कूल सुल्तानपुर के छात्र लक्ष्य गोस्वामी ने परिवार की विपरित परिस्थितियों के बावजूद 12वीं साइंस में 96% अंक हासिल कर कस्बे को टॉप किया। पिता जितेंद्र गोस्वामी 10 हजार रुपए महीने में प्राइवेट जॉब करते हैं, जिससे घर का गुजारा होता है। घर की स्थिति बेटा समझता है। वह रोडवेज बस से रोजाना 40 किमी का सफर कर कोटा कोचिंग को जाता है लेकिन शहर में कोचिंग तक जाने के लिए डेढ़ से दो किमी पैदल चलता है ताकि अगले दिन वापस कोटा आने के लिए बस का किराया बचा सके। आर्थिक परेशानियों के बावजूद लक्ष्य पर टॉप करने पर फोकस रखा और वह कर दिखाया। लक्ष्य का कहना है कि वह आगे इंजीनियर बनना चाहता है।</p>
<p><strong>टीचर नहीं, कोचिंग के पैसे नहीं, लेकिन जज्बा 100 फीसदी</strong><br />दीगोद निवासी जयश्री एक किमी पैदल स्कूल जाती और लौटकर घर का काम करती। शाम को भी मां का हाथ बंटाती। 12 लोगों का संयुक्त परिवार में शोर-शराबे के बीच पढ़ाई करती लेकिन व्यवधान से मन विचलित होता इसके बावजूद हिम्मत नहीं हारी और 12वीं कला में 94.80% अंक हासिल किर खुद को साबित किया। जयश्री बताती हैं, संयुक्त परिवार होने से शोर अधिक रहता है। शाम को 3 घंटे छत पर जाकर पढ़ती हूं। स्कूल में पिछले कई साल से इंग्लिश के टीचर नहीं हैं, ऐसे में लेसन व ग्रामर समझने में काफी परेशानी होती है। पिता किसान हैं, परिवार की आर्थिक स्थिति भी अच्छी नहीं होने से कोचिंग की सोच भी नहीं सकती। खुद के स्तर पर ही पढ़ाई की। पिता अनिल नागर ने बताया कि बेटी आगे सिविल सर्विसेज में जाना चाहती है।</p>
<p><strong>घर-दुकान बिकी, बीमार पड़ी फिर भी हासिल किए ऑटो चालक की बेटी ने 96.60%</strong><br />रायपुरा निवासी सरकारी स्कूल की छात्रा लक्षिता खरेड़िया की कहानी संघर्ष और चुनौतियों से भरी रही। आर्थिक तंगी के बावजूद उसने पढ़ाई जारी रखी और 12वीं कला में 96.60 % अंक हासिल कर ऑटो चालक पिता का नाम रोशन किया। लक्षिता कहती हैं, हमारा छावनी रामचंद्रपुरा में मकान व दुकान थी, जो कठिन परिस्थितियों के कारण बिक गए। पिता भी बेरोजगार हो गए। रायपुरा में रहने लगे। रोजगार की तलाश में पिता ऑटो चलाने लगे, इसी से गुजर-बसर होता है। परिवार की माली हालत समझती हूं, कई दिक्कतों से हर दिन दो-चार हुई लेकिन शिक्षा का दामन नहीं छोड़ा। पिता रामनिवास ने बताया कि कई बार स्टेशनरी खरीदने तक के पैसे नहीं थे। पेपरों के दौरान बेटी बीमार हो गई थी। फिर भी उसने हार नहीं मानी और बोर्ड में 96 प्रतिशत अंक हासिल किए।</p>
<p><strong>मां का ऑपरेशन हुआ तो खुद संभाली घर की जिम्मेदारी, रात दो बजे तक पढ़ाई कर पाया मुकाम</strong><br />जोमेटो राइडर शंभूदयाल की बेटी निर्जला मेहरा ने मुश्किल हालातों में भी 94.60 प्रतिशत अंक प्राप्त कर तीन विषयों में 99 अंक अर्जित किए। निर्जला ने बताया कि परीक्षा से पहले मां के गले का ऑपरेशन हुआ। उस समय हालत ऐसी नहीं थी कि मां घर का कोई काम कर सकें। ऐसे में खुद ने ही घर की जिम्मेदारी संभाली। मां की सार-संभाल के साथ-साथ छोटे भाई-बहनों की देखभाल की। घर के काम और परीक्षा की तैयारी सब एक साथ की। पिता शंभूदयाल ने बताया कि परिस्थितियां बेहद कठिन थी। उसके सामने सबसे बड़ी दिक्कत एक छोटे भाई की भी थी जो कि मानसिक रूप से कमजोर है।ज्यादातर समय तो मां की सेवा और छोटे भाई की देखभाल में निकलता। इसके बाद देर रात दो बजे तक वह पढ़ाई करती थी। निर्जला ने कोई कोचिंग या ट्यूशन नहीं ली। उसका आईएएस बनना सपना है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>शिक्षा जगत</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 02 Apr 2026 15:22:35 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[kota]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>तीन महीने की उम्र में पिता का निधन, मां का पुनर्विवाह, बेटी ने 97% बनाए </title>
                                    <description><![CDATA[रेशमा , कृष्णा , आकाश और आरती की मेहनत, दृढ़ संकल्प और लगन ने परिवार व विद्यालय का नाम किया रोशन ।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/baran/father-passed-away-at-three-months-old--mother-remarried--daughter-scores-97/article-148710"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/122200-x-60-px)-(1).png" alt=""></a><br /><p>बूंदी/बारां। राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय सांवतगढ़ की छात्रा रेशमा किराड ने आर्ट्स संकाय में 97.00% अंक प्राप्त कर शानदार सफलता हासिल की है। रेशमा की इस उपलब्धि ने पूरे क्षेत्र का गौरव बढ़ाया है। उनके जीवन में कई कठिनाइयाँ रही हैं; मात्र 3 महीने की उम्र में उनके पिता ज्ञान सिंह का निधन हो गया और जब रेशमा 2 वर्ष की थी तो उनकी माता मीना बाई ने पुनर्विवाह किया। इन विपरीत परिस्थितियों के बावजूद रेशमा ने दृढ़ संकल्प और मेहनत से अपनी पढ़ाई जारी रखी।<br />रेशमा ने अपनी सफलता का श्रेय अपनी दादी और विद्यालय के गुरुजनों को दिया। उनके अनुसार कक्षा 10 से पढ़ाई का खर्च इंजीनियर आशाराम नागर द्वारा उठाया गया, जो वर्तमान में उनकी बीएसटीसी कोचिंग का खर्च भी वहन कर रहे हैं। रेशमा की बड़ी बहन भी सेकंड ईयर में अध्ययनरत है। उनकी इस उपलब्धि ने साबित कर दिया कि कठिन परिस्थितियाँ भी मजबूत हौसले वालों को सफलता से नहीं रोक सकतीं।<br />वहीं, विद्यालय की कृष्णा कुमारी किराड ने आर्ट्स संकाय में 97.80% अंक प्राप्त कर उत्कृष्ट प्रदर्शन किया। कृष्णा के माता-पिता रामनारायण एवं जडाव ने उनकी सफलता पर गर्व जताया। कृष्णा ने अपने माता-पिता और गुरुजनों को धन्यवाद देते हुए कहा कि उनके मार्गदर्शन और सहयोग से ही यह मुकाम संभव हुआ। उनकी इस उपलब्धि ने यह सिद्ध कर दिया कि मेहनत और लगन से कोई भी लक्ष्य प्राप्त किया जा सकता है।दोनों छात्राओं की सफलता से विद्यालय और परिवार में खुशी का माहौल है। यह उपलब्धि क्षेत्र के अन्य विद्यार्थियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनी है।</p>
<p><strong>मजदूर पिता का बेटा 12वीं में 97.80 प्रतिशत लाकर बना मिसाल</strong><br />सीसवाली। सीसवाली नगर के कालूपुरा निवासी आकाश बैरवा ने विपरीत परिस्थितियों में भी अपनी मेहनत और लगन से शानदार सफलता हासिल की है।मजदूर पिता और बीमार मां के बीच पले-बढ़े आकाश ने 12वीं कृषि विज्ञान में 97.80 प्रतिशत अंक प्राप्त कर यह साबित कर दिया कि हौसले बुलंद हों तो गरीबी भी रास्ता नहीं रोक सकती। सीसवाली नगर के कालूपुरा निवासी आकाश बैरवा एक गरीब परिवार से हैं। आकाश के पिताजी बजरंगलाल बैरवा एक मजदूर हैं। मजदूरी से ही अपने परिवार का लालन-पालन करते हैं। मां दस साल से बीमारी की चपेट में है। जिसका भी हर महिने इलाज व दवाईयों का खर्चा भी उठाते है। आकाश ने शुरू से ही सीसवाली के सरकारी विद्यालय पढ़ाई की है। शुरू से ही पढ़ाई में अच्छा था दसवीं में 89 प्रतिशत अंक प्राप्त किए थे। वहीं 12वीं में कृषि विज्ञान में 97.80 प्रतिशत अंक प्राप्त किए हैं। आकाश बैरवा ने बताया कि परिवार में एक बहिन दो भाई हैं, गरीब परिवार है पिताजी मजदूरी करते हैं। मां बीमार रहती है। अब आगे ऊंची पढ़ाई करने की इच्छा तो है। मगर इतने पैसे नहीं है। अगर सरकारी कॉलेज मिल जायेगा तो पशु परिचर की तैयारी कर सकता हूं।</p>
<p><strong>पत्थर तराशने वाले की बेटी  ने रचा कीर्तिमान</strong><br />डाबी। बरड़ क्षेत्र के डाबी कस्बे की होनहार छात्रा आरती मेघवाल ने विपरीत परिस्थितियों के बावजूद कक्षा 12वीं कला वर्ग में 95.20 प्रतिशत अंक प्राप्त कर शानदार सफलता हासिल की है। इस उपलब्धि से न केवल परिवार, बल्कि पूरे क्षेत्र में खुशी का माहौल है।आरती मेघवाल, छात्रा राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय डाबी, ने 500 में से 476 अंक प्राप्त कर प्रथम श्रेणी में बाजी मारी। उनके पिता रामनिवास पत्थर काटने का कार्य करते हैं, जबकि माता संपत बाई सिलाई कर परिवार का सहयोग करती हैं। सीमित संसाधनों के बावजूद माता-पिता ने बेटी की पढ़ाई में कोई कमी नहीं आने दी।आरती ने अपनी सफलता का श्रेय माता-पिता एवं गुरुजनों को देते हुए बताया कि नियमित अध्ययन, अनुशासन और समय प्रबंधन सफलता की कुंजी है। उन्होंने कहा कि परिवार के विश्वास और शिक्षकों के मार्गदर्शन ने उन्हें निरंतर प्रेरित किया।विद्यालय का कुल परीक्षा परिणाम 95 प्रतिशत रहा, जिस पर प्रधानाचार्य रूबीना बानो एवं समस्त स्टाफ ने हर्ष व्यक्त किया। परिणाम घोषित होते ही विद्यालय में उत्सव जैसा माहौल बन गया। शिक्षकों ने आरती का मुंह मीठा कराकर उज्ज्वल भविष्य की कामना की।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>शिक्षा जगत</category>
                                            <category>बारां</category>
                                            <category>बूंदी</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 01 Apr 2026 15:00:04 +0530</pubDate>
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                <title>दिल्ली पुलिस की बड़ी कामयाबी : देश में 1100 से ज्यादा फर्जी धमकियां देने वाला गिरफ्तार, स्कूलों, हाईकोर्ट और सरकारी कार्यालयों को दी थी बम से उड़ाने की धमकी</title>
                                    <description><![CDATA[पुलिस ने 1,100 से अधिक फर्जी बम धमकी कॉल करने वाले आरोपी को मैसूर से गिरफ्तार किया। आरोपी श्रीनिवास लुइस, मूलतः बेंगलुरु निवासी, ईमेल समेत कई माध्यमों से देशभर के स्कूलों, हाईकोर्ट और सरकारी दफ्तरों को निशाना बना रहा था। तकनीकी जांच के बाद पुलिस ने उसे दबोचा, पूछताछ में आरोप कबूल, दिल्ली लाया जा रहा है।
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/big-success-of-delhi-police-the-person-giving-more-than/article-148390"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/12200-x-60-px)-(6).png" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal"><span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">नई</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">दिल्ली। दिल्ली</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">पुलिस</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">ने</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">एक</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">बड़ी</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">कामयाबी</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">हासिल</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">की</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">है।</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">दिल्ली</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">पुलिस</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">ने</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">देश</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">भर</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">के</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">स्कूलों</span>, <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">उच्च</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">न्यायालयों</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">और</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">सरकारी</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">कार्यालयों</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">को</span> 1,100 <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">से</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">ज्यादा</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">फर्जी</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">कॉल</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">कर</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">बम</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">से</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">उड़ाने</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">की</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">धमकी</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">देने</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">वाले</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">शख्स</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">को</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">कर्नाटक</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">के</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">मैसूर</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">से</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">गिरफ्तार</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">किया</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">है। दिल्ली</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">पुलिस</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">और</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">स्थानीय</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">पुलिस</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">टीमों</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">के</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">बीच</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">गुरुवार</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">को</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">एक</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">समन्वित</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">अभियान</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">में</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">संदिग्ध</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">श्रीनिवास</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">लुइस</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">को</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">उसके</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">किराए</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">के</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">घर</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">से</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">हिरासत</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">में</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">लिया</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">गया</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">था।</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">हाल</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">के</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">हफ्तों</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">में</span>, <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">दिल्ली</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">उच्च</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">न्यायालय</span>, <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">दिल्ली</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">विधानसभा</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">और</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">कई</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">शिक्षण</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">संस्थाओं</span><span> </span><span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">और</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">सरकारी</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">कार्यालयों</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">सहित</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">कई</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">संस्थाओं</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">को</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">बम</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">की</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">धमकी</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">मिली</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">थी</span>, <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">जिसके</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">बाद</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">तुरंत</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">जांच</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">शुरू</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">की</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">गई।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">अधिकारियों</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">ने</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">बताया</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">कि</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">आरोपी</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">लुइस</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">मूल</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">रूप</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">से</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">बेंगलुरु</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">का</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">रहने</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">वाला</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">है</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">और</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">कथित</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">तौर</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">पर</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">अपनी</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">मां</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">के</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">साथ</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">किराये</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">के</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">मकान</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">में</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">रहता</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">है।</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">वह</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">एक</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">सेवानिवृत</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">सरकारी</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">कर्मचारी</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">हैं</span>, <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">और</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">अभी</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">बेरोजगार</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">है।</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">उन्होंने</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">संकेत</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">दिया</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">कि</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">शुरुआती</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">जांच</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">से</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">पता</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">चलता</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">है</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">कि</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">वह</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">मानसिक</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">तनाव</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">में</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">हो</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">सकता</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">है। उन्होंने</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">बताया</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">कि</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">आरोपी</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">ने</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">शुरुआती</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">पूछताछ</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">के</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">दौरान</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">कथित</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">तौर</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">पर</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">देश</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">भर</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">में</span> 1,100 <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">से</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">ज्यादा</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">धमकी</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">भरे</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">संदेश</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">भेजने</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">की</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">बात</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">कबूल</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">की</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">है।</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">पुलिस</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">ने</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">पुष्टि</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">की</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">कि</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">धमकियां</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">ईमेल</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">और</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">दूसरे</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">संचार</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">चैनल</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">से</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">भेजी</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">गई</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">थीं</span>, <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">जिसके</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">कारण</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">अलग</span>-<span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">अलग</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">राज्यों</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">में</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">कई</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">प्राथमिकी</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">दर्ज</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">की</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">गईं।</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">गौरतलब</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">है</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">कि</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">दिल्ली</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">पुलिस</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">ने</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">मामला</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">दर्ज</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">कर</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">गहन</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">जांच</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">शुरू</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">की</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">थी।</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">तकनीकी</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">जांच</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">और</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">सुराग</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">जोड़ते</span>-<span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">जोड़ते</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">पुलिस</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">कर्नाटक</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">तक</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">पहुंची</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">और</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">वहां</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">से</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">लुइस</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">को</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">हिरासत</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">में</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">ले</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">लिया</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">तथा</span><span> </span><span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">अब</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">उसे</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">दिल्ली</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">लाया</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">जा</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">रहा</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">है।</span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 30 Mar 2026 12:19:30 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>आंसुओं से लिखी सफलता की इबारत : झाड़ू-पौंछा लगाने वाली और मजदूर की बेटियों ने बोर्ड में रचा इतिहास</title>
                                    <description><![CDATA[गरीबी, दर्द , अभावों से लड़कर और जिम्मेदारियों के बीच बेटियां बनीं बोर्ड टॉपर ।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/a-saga-of-success-written-in-tears--daughters-of-domestic-workers-and-laborers-make-history-in-board-exams/article-147974"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/1200-x-60-px)-(1)71.png" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal"><span lang="en" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="en">कोटा । किसी के हाथ में किताबों से पहले झाड़ू थी, कोई मां के बिना घर संभालते हुए पढ़ी तो किसी ने पिता की मौत के बाद टूटते परिवार को संभाला। मजदूर और किसान की बेटियां अभावों से लड़ती रही। लेकिन, हालातों के आगे हार नहीं मानी। संघर्ष, चुनौतियों और अभावों से जूझते हुए इन बेटियों ने 10वीं बोर्ड परीक्षा में उत्कृष्ट प्रदर्शन कर खुद को साबित किया। उन्होंने साबित कर दिया कि सफलता के लिए महंगे स्कूल, कोचिंग और सुविधाएं जरूरी नहीं, बल्कि मेहनत, लगन और आत्मविश्वास जरूरी है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="margin-bottom:0.0001pt;"><strong><span lang="en" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="en">बिन मां की बेटी कृष्णा ने मैकेनिक पिता का नाम किया रोशन</span></strong></p>
<p class="MsoNormal" style="margin-bottom:0.0001pt;"><span lang="en" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="en">कृष्णा ने संघर्ष और चूनौतियों से लड़ खुद को साबित किया। बिन मां की बेटी कृष्णा ने 10वीं बोर्ड में 90 प्रतिशत अंकों के साथ सभी विषयों में डिक्टेशन हासिल की है। पिता वेल्डिंग का काम करते हैं। परिवार की माली हालत और विपरीत परिस्थितियों के बावजूद शिक्षा का दामन थामे रखा। राजकीय बालिका उच्च माध्यमिक विद्यालय अंबेडकर नगर कुन्हाड़ी की छात्रा के पिता विपिन कुमार बताते हैं, कृष्णा तीन भाई बहन है। स्कूल से आने के बाद घर का काम और बुजुर्ग दादी की सार-संभाल करती है। दिन में थोड़ा समय पढ़ाई के लिए मिलता तो शाम को फिर से घर के काम में लग जाती। रात को 4 घंटे पढ़ती और साथ में छोटे भाई को भी पढ़ाती। परीक्षा के दौरान बीमार हो गई फिर भी कृष्णा ने हार नहीं मानी और परीक्षा में उत्कृष्ट प्रदर्शन किया।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="margin-bottom:0.0001pt;"><span lang="en" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="en"> </span></p>
<p class="MsoNormal" style="margin-bottom:0.0001pt;"><strong><span lang="en" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="en">पिता की मृत्यु से टूटी फिर संभली अब बोर्ड में किया नाम रोशन</span></strong></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="en" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="en">कुन्हाड़ी निवासी सरकारी स्कूल की छात्रा रंजिता का जीवन चुनौतियों और संघर्षों से भरा रहा। वर्ष 2024 में पिता का अचानक देहांत होने से वह टूट गई। मां हॉस्टल में झाडू-पौंछा कर परिवार का पेट पालती है। ऐसी विकट परिस्थितियों में भी रंजिता ने हार नहीं मानी और नियमित 4 घंटे पढ़ाई कर परीक्षा में 81 प्रतिशत से ज्यादा अंक हासिल किए। साथ ही सभी 6 विषयों में विशेष योग्यता हासिल कर गार्गी पुरस्कार में चयनित हुई। प्रिंसिपल अर्पणा शर्मा कहती हैं, अभावों से जूझते हुए भी रंजिता ने मुकाम हासिल किया है। अब वह साइंस लेकर मेडिकल फिल्ड में जाना चाहती है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="margin-bottom:0.0001pt;"><strong><span lang="en" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="en">मजदूर की बेटी ने किया स्कूल टॉप</span></strong></p>
<p class="MsoNormal" style="margin-bottom:0.0001pt;"><span lang="en" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="en">राजकीय बालिका उच्च माध्मिक विद्यालय कुन्हाड़ी की छात्रा सोनाक्षी ने 80 प्रतिशत से ज्यादा अंक हासिल कर परिवार का नाम रोशन किया। उनके पिता विशू प्रताप मजदूरी करते हैं और मां इसी स्कूल में पोषाहार बनाती है। मां ममता मेघवाल बताती हैं, घर की आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं है। किराए से कमरा लेकर रहते हैं। एक ही कमरे में परिवार के 6 सदस्य रहते हैं। सीमित संसाधनों के बावजूद सोनाक्षी ने सफलता की इबारत लिखी। बेटी आगे इंजीनियर बनना चाहती है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="margin-bottom:0.0001pt;"><span lang="en" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="en"> </span></p>
<p class="MsoNormal" style="margin-bottom:0.0001pt;"><strong><span lang="en" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="en">इलेक्ट्रीशियन की बेटी ने रचा इतिहास</span></strong></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="en" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="en">महात्मा गांधी राजकीय विद्यालय सुल्तानपुर की छात्रा दिव्या नागर ने बोर्ड परीक्षा में 96.83 प्रतिशत अंक हासिल कर पूरे ब्लॉक में टॉपर रही है। दिव्या के पिता सुरेश इलेक्ट्रीक की दुकान पर काम करते हैं। उन्होंने बताया कि स्कूल के बाद बेटी घर के काम में मां का हाथ बटाती है। रात को 4 घंटे नियमित पढ़ाई करती है और छोटे बहन-भाई को भी पढ़ाती है। बुजुर्ग दादी की अक्सर तबीयत खराब रहती है, जिससे घर का माहौल भी अशांत हो जाता है। विपरीत परिस्थितियों के बावजूद दिव्या ने खुद को साबित करके दिखाया। बेटी सरकारी टीचर बनना चाहती है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="margin-bottom:0.0001pt;"><strong><span lang="en" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="en">काश्तगार की बेटी ने बढ़ाया पिता का मान</span></strong></p>
<p class="MsoNormal" style="margin-bottom:0.0001pt;"><span lang="en" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="en">सुल्तानपुर के सरकारी स्कूल की छात्रा फिजा खानम ने 10वीं बोर्ड परीक्षा में 92.67 प्रतिशत अंक प्राप्त कर परिवार का मान बढ़ाया। फिजा के पिता दिलभर खान काश्तगार हैं, जो दूसरों की जमीन जोतकर आजिविका चलाते हैं। उन्होंने बताया कि घर से स्कूल की दूरी एक किमी है। बेटी रोजाना पैदल स्कूल जाती है। परिवार की आर्थिक स्थिति कमजोर है, विपरीत परिस्थितियों के बावजूद उसने पढ़ाई जारी रखी। 5 घंटे नियमित पढ़ाई करती और घर का काम भी संभालती। बेटी ने 600 में 556 अंक प्राप्त किए हैं।</span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 26 Mar 2026 15:41:02 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[kota]]></dc:creator>
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                <title>अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस विशेष : हौसलों की उड़ान हो तुम, सपनों की पहचान हो तुम</title>
                                    <description><![CDATA[कई महिलाएँ चुनौतियों को पार कर अपने सपनों को साकार करती हैं।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/international-women-s-day-special--you-are-the-flight-of-courage--you-are-the-identity-of-dreams/article-145790"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/200-x-60-px)-(1)13.png" alt=""></a><br /><p>कोटा।"हौसलों की उड़ान से ही मंजिलें मिलती हैं,रास्ते आसान हों तो पहचान नहीं बनती।" महिलाओं की सफलता के पीछे अक्सर संघर्ष, धैर्य और मजबूत इरादों की कहानी छिपी होती है। घर, परिवार, समाज और करियर की जिम्मेदारियों के बीच अपनी अलग पहचान बनाना आसान नहीं होता। फिर भी कई महिलाएँ चुनौतियों को पार कर अपने सपनों को साकार करती हैं। महिला दिवस के अवसर पर दैनिक नवज्योति ने शहर की ऐसी ही प्रेरणादायक महिलाओं से बातचीत की और जाना कि उन्होंने अपनी मंजिÞल तक पहुँचने के लिए किन संघर्षों और चुनौतियों का सामना किया। उनकी जुबानी सुनिए सफलता की यात्रा।</p>
<p><strong>महिला जीवन की चुनौतियां और संकल्प की शक्ति</strong><br />महिला होने के नाते जीवन के हर पड़ाव पर अनेक चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। बचपन में अक्सर ऐसा होता है कि परिवार में भाई को अधिक प्राथमिकता दी जाती है, जबकि लड़कियों पर कई तरह की पाबंदियाँ लगा दी जाती हैं, कैसे रहना है, क्या पहनना है और कहाँ जाना है। मेरे जीवन में भी ऐसे अनुभव रहे। जैसे-जैसे उम्र बढ़ी, चुनौतियों का स्वरूप भी बदलता गया। घर की चौखट से बाहर निकलकर  नौकरी की ओर कदम बढ़ाने पर कई तरह के आक्षेप और सवाल सामने आए। फिर भी जब मन में दृढ़ निश्चय हो कि हमारा विचार सही है और हमें अपने लक्ष्य की ओर बढ़ना है, तो कोई भी बाधा रास्ता नहीं रोक सकती। चुनौतियों को मैंने हमेशा सकारात्मक रूप में लिया, क्योंकि उनसे सीखने और खुद को और अधिक मजबूत बनाने का अवसर मिलता है। आज जिस मुकाम पर हूं, उसमें सभी का हाथ है। जब माता-पिता के पास थे तो उनकी भूमिका सबसे ज्यादा रही। मैं बीकानेर की रहने वाली हूँ। मेरे पिता का हमेशा मानना था कि अच्छी शिक्षा मिलनी चाहिए और  आत्मनिर्भर बनना चाहिए। इसी सोच के साथ उन्होंने मुझे घर से दूर वनस्थली विद्यापीठ भेजा, जहाँ से मैंने स्कूल से लेकर कॉलेज तक की पढ़ाई पूरी की। वहाँ की शिक्षा ने मेरे जीवन की मजबूत नींव तैयार की। मेरी माँ स्वयं  पढ़ी-लिखी नहीं थीं, लेकिन हम सभी  को पढ़ाने के लिए उन्होंने अपना पूरा जीवन समर्पित कर दिया। पति से भी जीवन में कई महत्वपूर्ण बातें सीखने का अवसर मिला और आज मैं जिस मुकाम पर हूँ, उसमें परिवार के समर्थन की बड़ी भूमिका रही है। </p>
<p><strong>महिला दिवस पर संदेश</strong><br />बच्चियां और महिलाएं अपनी प्रतिभा को पहचानें, बड़े सपने देखें और उन्हें पूरा करने के लिए मेहनत, समर्पण और साहस के साथ आगे बढ़ें। साथ ही उन्हें वित्तीय प्रबंधन, सामुदायिक सहयोग और नेतृत्व की जिम्मेदारियों को भी समझना होगा। बाधाएं जीवन में आती हैं, लेकिन सकारात्मक सोच और दृढ़ संकल्प से उन्हें पार कर एक स्थायी और उज्ज्वल भविष्य बनाया जा सकता है।<br /><strong>-डॉ. विमला डुकवाल, कुलगुरु, कृषि विश्वविद्यालय, कोटा</strong></p>
<p><strong>फॉरेंसिक विज्ञान में बनाई मजबूत पहचान</strong><br />मैंने वर्ष 1998 में इस क्षेत्र में कार्य करना शुरू किया। उस समय महिलाओं और लड़कियों में इस क्षेत्र के प्रति जागरूकता बहुत कम थी। फॉरेंसिक विज्ञान का कार्य केवल प्रयोगशाला तक सीमित नहीं होता, बल्कि कई बार क्राइम सीन इन्वेस्टिगेशन के लिए किसी भी समय ड्यूटी देनी पड़ती है। कई घटनास्थल बेहद भयावह होते हैं और कई बार गहन जंगलों या एकांत स्थानों पर भी जांच करनी पड़ती है। ऐसे में वैज्ञानिक साक्ष्यों को संकलित करते समय धैर्य, साहस और समझदारी बेहद जरूरी होती है। समाज में जब रेप जैसे जघन्य अपराध सामने आते हैं, तो एक महिला होने के नाते ये दृश्य मन को गहराई से झकझोर देते हैं। आज के समय में मानसिक, शारीरिक और तकनीकी रूप से मजबूत बने बिना आगे बढ़ना संभव नहीं है, इसलिए हर चुनौती का दृढ़ता से सामना करना पड़ता है।</p>
<p>पुरुष प्रधान समाज में बिना किसी समझौते के आगे बढ़ना भी अपने आप में एक चुनौती रहा है। कई बार परिवार और समाज की पारंपरिक सोच भी सामने आती है। समय के साथ कदम मिलाने की कोशिश में कई बार परिवार और बच्चों को उतना समय नहीं दे पाते, जितना देना चाहते हैं। वहीं कार्यस्थल पर भी जब एक महिला अधिकारी उच्च पद पर होती है, तो कई बार पुरुष सहकर्मियों और अधीनस्थों के लिए उसे सहज रूप से स्वीकार करना आसान नहीं होता। फिर भी निरंतर मेहनत और समर्पण के साथ आगे बढ़ना ही सफलता का रास्ता बनाता है। मैं अपनी सोच और मूल्यों का श्रेय अपनी मां शांति देवी, पिता भरत सिंह, सास प्रेम खन्ना और पति राजेश खन्ना को देना चाहूंगी। परिवार ही वह आधार है, जिससे जुड़कर हम समाज के लिए भी बेहतर कार्य कर सकते हैं।</p>
<p><strong>महिला दिवस पर संदेश</strong><br />एक सशक्त महिला या बालिका को अपने लक्ष्यों की प्राप्ति के लिए मन और तन दोनों को मजबूत बनाना होगा। निरंतर प्रयास के साथ जीवन में संतुलन बनाए रखना जरूरी है।  विशेष रूप से अपराध के मामलों में महिलाओं को खुद को केवल पीड़ित न मानते हुए साहस के साथ आगे आना चाहिए और साक्ष्य प्रस्तुत करने में सहयोग देना चाहिए। इससे अपराधियों में भय पैदा होगा और उन्हें उनके अपराध की सजा भी मिलेगी।<br /><strong>-डॉ. राखी खन्ना,  एडिशनल डायरेक्टर रीजनल फॉरेंसिक साइंस लेबोरेटरी कोटा रेंज</strong></p>
<p><strong>संघर्ष, धैर्य और आत्मविश्वास से सफलता का मार्ग</strong><br />जी वन में चुनौतियों का सामना हर व्यक्ति को करना पड़ता है। मेरे जीवन में भी संघर्ष मुख्य रूप से पढ़ाई और प्रतियोगी परीक्षाओं से जुड़े रहे। पढ़ाई के दौरान कई बार असफलताएँ भी मिलीं, लेकिन ऐसे समय में धैर्य और दृढ़ निश्चय सबसे अधिक जरूरी होता है। मेरे माता-पिता का हमेशा पूरा समर्थन मिला और उन्होंने हर परिस्थिति में मुझे प्रेरित किया। यूपीएससी की तैयारी के दौरान मेरा चयन तीसरे प्रयास में हुआ। इससे पहले के प्रयास में केवल एक अंक से चयन छूट गया था, उस समय बहुत निराशाजनक लगता था। लेकिन परिवार के सहयोग और अपने धैर्य की वजह से मैंने हिम्मत नहीं हारी लगातार अपने प्रयास जारी रखे। हमेशा यही कोशिश रही कि मनोबल बनाए रखा जाए और लक्ष्य पर ध्यान केंद्रित किया जाए।</p>
<p>-कॉलेज के समय से ही मेरा लक्ष्य था कि मुझे सार्वजनिक सेवा के क्षेत्र में जाना है। मैंने दिल्ली विश्वविद्यालय से बिजनेस स्टडीज में स्नातक किया और उसी दौरान इस दिशा में आगे बढ़ने का निर्णय लिया। इस पूरे सफर में मेरे माता-पिता की प्रेरणा सबसे बड़ी ताकत रही। जब हम मेहनत करते हैं और हमारे काम से हमारे अपने लोग खुश होते हैं, तो उससे और अधिक ऊर्जा मिलती है। आज भी उनका मार्गदर्शन और प्रोत्साहन मुझे आगे बढ़ने की प्रेरणा देता है। जीवन में हर भूमिका को संतुलन के साथ निभाना भी बहुत जरूरी है। जब मैं काम पर होती हूँ तो पूरी तरह अपने कार्य पर ध्यान देती हूँ, और जब घर पर होती हूँ तो परिवार को समय देने की कोशिश करती हूँ। कई बार काम का दबाव होता है और कभी पारिवारिक जिम्मेदारियाँ बढ़ जाती हैं, लेकिन इन दोनों के बीच संतुलन बनाए रखना ही सबसे महत्वपूर्ण है।</p>
<p><strong>महिला दिवस पर संदेश</strong><br /> महिलाओं और युवतियों के लिए मेरा संदेश है कि सबसे पहले खुद पर विश्वास रखें। मेहनत और लगन के साथ काम करें, क्योंकि इंसान की सबसे बड़ी सीमा उसकी सोच होती है। यदि आप आत्मविश्वास के साथ अपने लक्ष्य की ओर बढ़ते हैं, तो आप जो चाहें वह हासिल कर सकते हैं।<br /><strong>-चारु शंकर, एसडीएम रामगंजमंडी</strong></p>
<p><strong> संघर्ष, संकल्प और बड़े सपनों की उड़ान</strong><br />सिविल सेवा में आने से पहले का मेरा सफर संघर्ष और धैर्य से भरा रहा। यूपीएससी की परीक्षा मैंने चौथे प्रयास में सफलतापूर्वक पास की। इन चार वर्षों की तैयारी काफी मेहनत और धैर्य की परीक्षा लेने वाली रही। कई बार ऐसे क्षण आए जब निराशा भी हुई। दो बार मैंने परीक्षा दी, एक बार इंटरव्यू तक पहुँची, लेकिन अंतिम चयन नहीं हो पाया। ऐसे झटके किसी भी अभ्यर्थी के लिए कठिन होते हैं। कई बार हम योजनाएँ बनाते हैं, लेकिन परिणाम उम्मीद के अनुसार नहीं मिलते। ऐसे समय में परिवार और समाज का दबाव भी महसूस होता है और कई लोग बीच रास्ते में हार मान लेते हैं।मेरे लिए सबसे बड़ी ताकत मेरा परिवार रहा। उन्होंने हमेशा मेरा हौसला बढ़ाया और कहा कि जितना समय चाहिए, उतना लेकर पूरी लगन से तैयारी करो। इसी समर्थन और आत्मविश्वास के साथ मैंने चौथे प्रयास में सफलता प्राप्त की। मेरे पिता राज्य सरकार में कार्यरत थे और उन्हें देखकर ही मुझे शुरूआत से ही कुछ करने की प्रेरणा मिली। बाद में जब मैंने कॉपोर्रेट क्षेत्र में काम करना शुरू किया, तब मुझे एहसास हुआ कि निजी क्षेत्र में पब्लिक इंटरफेस और सामाजिक प्रभाव अपेक्षाकृत कम होता है। वहीं से यह विचार और मजबूत हुआ कि सरकारी व्यवस्था में काम करके समाज पर अधिक सकारात्मक प्रभाव डाला जा सकता है।मेरी प्रेरणा मेरी माँ और बहनें रही हैं। उन्होंने हमेशा यही सिखाया कि जो भी काम करें, पूरी ईमानदारी और समर्पण के साथ करें, क्योंकि हर काम के अपने सकारात्मक और नकारात्मक पहलू होते हैं।</p>
<p><strong>महिला दिवस पर संदेश</strong><br />अगर आपको लगता है कि आप कुछ बड़ा करना चाहते हैं, तो शुरूआत करने से कभी न डरें। अपने सपनों को साकार करने के लिए पहला कदम उठाइए। कहीं न कहीं से सहयोग अवश्य मिलेगा। सबसे जरूरी है कि बड़े सपने देखने का साहस हमेशा बनाए रखें।<br /><strong>-आराधना चौहान, प्रशिक्षु आईएएस</strong></p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 09 Mar 2026 12:32:59 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>सफलता कोई इत्तेफाक नहीं,  'माइक्रो प्लानिंग' का नतीजा</title>
                                    <description><![CDATA[टॉपर्स का मानना है कि 'लिखकर याद करना' और बार-बार दोहराना ही जीत की कुंजी है।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/success-is-not-an-accident--but-the-result-of--micro-planning/article-142456"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-02/(1200-x-600-px)24.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। मंजिल उन्हीं को मिलती है जिनके सपनों में जान होती है, पंखों से कुछ नहीं होता हौसलों से उड़ान होती है। हर साल जब बोर्ड परीक्षाओं या कॉम्पिटिटिव एग्जाम्स के रिजल्ट आते हैं, तो कुछ चेहरे चमकते हुए सितारों की तरह उभरते हैं। हम उन्हें 'टॉपर्स' कहते हैं।आज दैनिक नवज्योति की खास रिपोर्ट 'टॉपर्स का मास्टरप्लान' में हम पर्दा उठाएंगे उन अनकहे राज से, जिन्हें अपनाकर साधारण छात्र भी असाधारण बन जाते हैं। हम जानेंगे उनके टाइम मैनेजमेंट का गणित और उनके नोट्स बनाने का वो अनोखा तरीका, जो उन्हें भीड़ से अलग खड़ा करता है।" टॉप करना कोई इत्तेफाक नहीं, बल्कि एक सटीक प्लानिंग का नतीजा है।</p>
<p><strong>- ये रहती है टॉपर्स की योजना</strong><br />अनुशासन का खेल: टॉपर्स कभी भी 'कल' पर काम नहीं टालते। उनके लिए टाइम टेबल सिर्फ कागज का टुकड़ा नहीं, बल्कि उनकी लाइफलाइन होती है।<br />स्मार्ट वर्क बनाम हार्डवर्क: वे 18 घंटे नहीं पढ़ते, बल्कि उन 6 घंटों पर ध्यान देते हैं जहाँ उनका दिमाग सबसे ज्यादा सक्रिय होता है।<br />रिवीजन की ताकत: एक बार पढ़ना काफी नहीं है। टॉपर्स का मानना है कि 'लिखकर याद करना' और बार-बार दोहराना ही जीत की कुंजी है।<br />सवालों से दोस्ती: वे केवल जवाब नहीं रटते, बल्कि 'क्यों' और 'कैसे' के पीछे भागते हैं।<br />डिजिटल डिटॉक्स: पढ़ाई के दौरान मोबाइल फोन और सोशल मीडिया से दूरी उनकी एकाग्रता का सबसे बड़ा हथियार है।</p>
<p><strong>- राकेश केवट: "दुकान की जिम्मेदारी के साथ हिंदी में हासिल किए 96% अंक</strong><br />राज. उ.मा.वि. सकतपुरा कोटा शहर के विद्यार्थी राकेश केवट की सफलता की कहानी बेहद प्रेरणादायक है। घर की आर्थिक स्थिति ठीक न होने के कारण राकेश आधा दिन दुकान पर काम करते थे और शेष समय पढ़ाई को देते थे। संसाधनों की कमी के बावजूद उन्होंने बिना किसी कोचिंग के हिंदी में 96% और भूगोल में 89% अंक प्राप्त किए। समय के अभाव के कारण मैं कोचिंग नहीं कर सका। मैंने स्कूल में होने वाले हर टेस्ट को गंभीरता से दिया। जो भी समझ नहीं आता था, उसे शिक्षकों से पूछकर हल करता था।</p>
<p><strong>- दुर्गेश मेहरा: "बीमारी भी नहीं रोक सकी कदम, भूगोल में पाए 94 अंक</strong><br />राज. उ.मा.वि. सकतपुरा कोटा शहर के विद्यार्थी दुर्गेश मेहरा ने पूरे साल स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का सामना किया। यहाँ तक कि परीक्षा के ठीक पहले उनकी तबीयत अत्यधिक खराब हो गई, लेकिन उन्होंने हिम्मत नहीं हारी। दुर्गेश ने बताया, "स्वास्थ्य खराब होने के बावजूद मैंने अधिक से अधिक क्लास अटेंड कीं और नियमित टेस्ट दिए। इसी मेहनत का परिणाम रहा कि मैंने भूगोल विषय में 94 अंक प्राप्त किए।"</p>
<p><strong>- छवि मित्तल: सटीक उत्तर और समय प्रबंधन पर दें ध्यान</strong><br />राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय, दादाबाड़ी (घोड़ेवाला)छात्रा छवि मित्तल ने बताया कि मैंने कक्षा 12 वीं में 94 प्रतिशत प्राप्त कर सफलता अर्जित की। सफलता का मुख्य आधार नियमितता रही। छवि ने कहा, मैं प्रतिदिन करीब 10 घंटे तक पढ़ाई करती थी और अवकाश के दिनों में रिवीजन करती थी। स्कूल में होने वाले टेस्ट और परीक्षाओं को मैंने कभी नहीं छोड़ा, क्योंकि इससे मुझे स्वयं के मूल्यांकन में मदद मिली। परीक्षार्थियों को सलाह देते हुए छवि कहती हैं परीक्षा देते समय हमेशा ध्यान रखें कि प्रश्न में जो पूछा गया है, केवल उसका ही सटीक उत्तर लिखें और समय प्रबंधन का विशेष ध्यान रखें।</p>
<p><strong>- काजल गुर्जर: रविवार को विशेष विषयों पर फोकस और परीक्षा हॉल में एकाग्रता"</strong><br />राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय, दादाबाड़ी (घोड़ेवाला)में 12वीं बोर्ड में 95% से अधिक अंक प्राप्त करने वाली काजल गुर्जर ने विज्ञान वर्ग में शानदार प्रदर्शन किया। काजल ने अपनी रणनीति साझा करते हुए बताया, स्कूल के बाद घर पर हर विषय को दो-दो घंटे देना मेरी दिनचर्या का हिस्सा था। उन्होंने बताया, "शिक्षकों द्वारा बताए गए महत्वपूर्ण प्रश्नों को मैंरिवाइज करती थी। परीक्षा देने के दौरान विद्यार्थियों को अपना फोकस पेपर पर ही रखना चाहिए।</p>
<p><strong>घर पर आकर दोबारा समझे स्कूल में पढ़े हुए को</strong><br />राज.उमावि. दीगोद की छात्रा -अनुष्का नागर ने बताया कि स्कूल में पढ़ाई के दौरान जो पढ़ाया जाता था। वहां घर पर आकर दोबारा पढ़ाई करते थे। उसमें से कुछ समझ में नहीं आता था तो उसको टीचर से पूछते थे। सुबह जल्दी उठकर पढ़ाई नियमित रूप से पढ़ाई करते थे। 12 वीं मे मेरे 90 प्रतिशत से अधिक प्रतिशत से सफलता आर्जित की।</p>
<p><strong>सुबह जल्दी उठकर पढ़ाई करती थी </strong><br />ज्योतिका नागर, राज.उमावि. दीगोद की छात्रा ने बताया कि सुबह जल्दी उठकर पढ़ाई करती थी और जो भी स्कूल में पढ़ाया जाता था। उसको अच्छे से समझने की कोशिश करते थे। इसी के साथ स्कूल में आयोजित होेने वाले टेस्ट भी दिए। इसी के साथ घर पर खाली समय में हर विषय का रिवीजन करती थी।</p>
<p><strong>- शिक्षकों का समर्पण: रिक्त पदों के बावजूद बेहतर परिणाम</strong><br />स्कूल में व्याख्याताओं के पद रिक्त होने के बावजूद विद्यालय के वरिष्ठ अध्यापकों द्वारा पूर्ण प्रयास किया जाता है कि बोर्ड परीक्षा का परिणाम श्रेष्ठ रहे। उन्होंने कहा, विगत तीन सत्रों से 12वीं बोर्ड का परिणाम उत्कृष्ट रहा है। भूगोल विषय के अध्यापन के दौरान कोशिश रही कि क्लासरूम में ही बच्चों को विषय के बारे में समझाया।समय-समय पर छात्रों की शंकाओं का समाधान किया। और उनकी 'प्रोग्रेस रिपोर्ट' से अभिभावकों को अवगत कराया । <br /><strong>-शिव कुमार धामेजा,वरिष्ठ अध्यापक राज.माध्य.वि. सकतपुरा</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>शिक्षा जगत</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 09 Feb 2026 16:01:42 +0530</pubDate>
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                <title>विश्व ब्रेल दिवस : हौसलों की उड़ान के आगे धुंधली दृष्टि भी नतमस्तक, बैंक से लेकर शिक्षा जगत तक फहरा रहे परचम </title>
                                    <description><![CDATA[संघर्ष से सफलता तक, इन जांबाजों ने पेश की मिसाल
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/world-braille-day--even-impaired-vision-bows-before-the-flight-of-determination/article-138424"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-01/1200-x-600-px)-(1200-x-600-px)-(2)11.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। लुई ब्रेल दिवस के अवसर पर उन दृष्टिबाधितों की चर्चा करना लाजिमी है, जिन्होंने अपनी मेहनत और लगन से आज समाज में एक विशिष्ट मुकाम हासिल किया है। इनमें से कोई बैंक में अधिकारी है, तो कोई कॉलेज प्रोफेसर। ये सभी अपनी बाधाओं को पार कर आमजन की सेवा कर रहे हैं और समाज के साथ कदम से कदम मिलाकर चल रहे हैं। इनका मानना है कि संघर्ष के बिना सफलता संभव नहीं है। बैंक से लेकर शिक्षा जगत तक फहराया सफलता का परचम कोटा में ऐसे कई उदाहरण हैं जो प्रेरणा का स्रोत हैं। जिनमें शहर की नयापुरा बैंक में कार्यरत राजेंद्र कुमार सीनियर एसोसिएट, भरत माली प्राथमिक शिक्षा में अंग्रेजी के अध्यापक आसींद भीलवाड़ा में कार्यरत हैं, अरविंद सक्सेना अभी कोटा विवि में गेस्ट फैकल्टी इतिहास विभाग में कार्यरत हैं। ये तो मात्र आपके सामने उदाहरण है, शहर में अन्य भी है जिनमें से कोई व्यवसाय कर रहा है तो कोई अन्य क्षेत्रों में समाज के साथ कदम से कदम मिलाकर सेवा कर रहा है। इनका मानना है, संघर्ष के बिना सफलता नहीं है। अभी तो उन्हें  रास्ता मिला, अभी मंजिलें हासिल करनी है।</p>
<p><strong>केस 1: बैंकिंग सेवा में ग्राहकों की पसंद बने </strong><br />मूलत: भरतपुर के निवासी राजेंद्र कुमार चार भाई-बहनों में तीसरे नंबर पर हैं। बचपन में जब माता-पिता को उनकी दृष्टिबाधिता का पता चला, तो कई जगह इलाज करवाया गया, लेकिन सफलता नहीं मिली। इसके बाद उन्हें शिक्षा के लिए दिल्ली भेजा गया। वर्ष 2011 में प्रतियोगी परीक्षा के माध्यम से उनका चयन बैंकिंग सेवा में हुआ। राजेंद्र बताते हैं कि दृष्टिबाधित होने के बावजूद उनका प्रयास रहता है कि बैंक आने वाला हर ग्राहक संतुष्ट होकर जाए। वे बैंक के हर काउंटर की जानकारी तत्परता से ग्राहकों को देते हैं।</p>
<p><strong>केस 2: बच्चों के जीवन में शिक्षा का उजियारा फैला रहे </strong><br />जन्मजात दृष्टिबाधित होने के बावजूद भरत माली ने हार नहीं मानी। जयपुर सहित कई शहरों में इलाज बेअसर रहने के बाद उन्होंने हिम्मत जुटाई और राजस्थान बोर्ड से 10वीं-12वीं करने के बाद अजमेर से बीएड किया। वर्तमान में वे आसींद (भीलवाड़ा) में बच्चों को शिक्षित कर रहे हैं। भरत बताते हैं कि दृष्टिबाधित छात्रों को परीक्षा में प्रति घंटा 20 मिनट का अतिरिक्त समय और लिखने के लिए 'स्क्राइब' (सहयोगी) की सुविधा मिलती है। उन्होंने अंग्रेजी साहित्य, राजनीति विज्ञान और लोक प्रशासन में स्नातक की डिग्री हासिल की है।</p>
<p><strong>केस 3: हादसे के बाद भी जारी रही शैक्षणिक यात्रा</strong><br />कोटा विश्वविद्यालय में कार्यरत अरविंद सक्सेना ने 10वीं कक्षा के दौरान एक एक्सीडेंट में अपनी आंखों की रोशनी खो दी थी। उस समय तकनीक इतनी विकसित नहीं थी कि उनका इलाज हो पाता। इसके बावजूद उन्होंने बूंदी से शिक्षा प्राप्त की, इतिहास में एमए और फिर पीएचडी की। 1976 में झालावाड़ कॉलेज में उनकी नियुक्ति हुई और 2012 में वे सेवानिवृत्त हुए। उन्होंने अब तक 7 पुस्तकें लिखी हैं, 11 विद्यार्थियों को पीएचडी करवाई है और उनके 20 शोध पत्र प्रकाशित हो चुके हैं।</p>
<p><strong>क्यों मनाया जाता है विश्व ब्रेल दिवस </strong><br />प्रत्येक वर्ष 4 जनवरी को 'विश्व ब्रेल दिवस' मनाया जाता है। यह दिन ब्रेल लिपि के आविष्कारक लुई ब्रेल के जन्मदिन के उपलक्ष्य में मनाया जाता है, ताकि दृष्टिबाधितों के अधिकारों और संचार के महत्व के बारे में वैश्विक जागरूकता फैलाई जा सके।</p>
<p><strong>राजकीय सार्वजनिक पुस्तकालय कोटा: तकनीक से आसान हो रही राह </strong><br />कोटा के दादाबाड़ी स्थित राजकीय सार्वजनिक मंडल पुस्तकालय राजस्थान की संभवत: एकमात्र ऐसी लाइब्रेरी है जहाँ ब्रेल पुस्तकें भी तैयार की जाती हैं। यहाँ वर्तमान में 28 विद्यार्थी नियमित अध्ययन के लिए आते हैं। पुस्तकालय में आधुनिक संसाधन उपलब्ध हैं:<br />- टेक्स्ट टू स्पीच:--- डिजिटल पाठ को सुनने योग्य आॅडियो में बदलना।<br />- ओपन आई पर्ल कैमरा:--- किताबों को स्कैन कर तुरंत आॅडियो में परिवर्तित करना।<br />- फोकस-40 रिफ्रेशेबल ब्रेल डिस्प्ले:--- डिजिटल सामग्री को ब्रेल में प्रदर्शित करना।<br />- ब्रेल प्रिंटर:--- डिजिटल टेक्स्ट को ब्रेल पन्नों पर प्रिंट करना।<br />- मेरलिन बेसिक:-- दृष्टिबाधित बच्चों के लिए टेक्स्ट को बड़ा कर दिखाने वाला उपकरण।<br />- हिंदी ओसीआर:--- हिंदी मुद्रित सामग्री को सुलभ डिजिटल रूप में बदलना।</p>
<p><strong>इनका कहना है </strong><br /><strong>तकनीक ही समावेशी शिक्षा की रीढ़</strong><br />"ब्रेल केवल एक लिपि नहीं, बल्कि आत्मनिर्भरता और गरिमा का माध्यम है। समावेशी शिक्षा का अर्थ यही है कि सीखने का अधिकार व्यक्ति की दृष्टि पर निर्भर न हो। जब तकनीक सही हाथों में होती है, तब अक्षमता बाधा नहीं बल्कि क्षमता में बदल जाती है।"<br /><strong>- डॉ. दीपक कुमार श्रीवास्तव, नोडल अधिकारी, सार्वजनिक पुस्तकालय कोटा संभाग</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 05 Jan 2026 14:31:17 +0530</pubDate>
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                <title>अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस - नारी है शक्ति, नारी है ज्योति, नारी बिना ये दुनिया है खोती ....</title>
                                    <description><![CDATA[महिला अगर हम ठान लें तो हर चुनौती को पार कर सफ लता की नई कहानी लिख सकती हैं। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jhalawar/international-women-s-day---woman-is-power--woman-is-light--without-woman-this-world-is-lost/article-106839"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-03/257rtrer47.png" alt=""></a><br /><p>कोटा।  नारी शक्ति अगर ठान ले तो हर मुकाम पर अपना परचम लहरा देती है। आज के युग में महिलाएं पुरूषों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर चल रही है। वे अपनी आत्मनिर्भरता, जोश और जज्बे से अपने सपने साकार कर रही है। शिक्षा, व्यवसाय, उच्च सरकारी पद, खेल, बिजनेस, राजनीति जैसे हर क्षेत्र में कामयाबी के शिखर पर पहुंच रही है। अंतरराष्टÑीय महिला दिवस पर हम ऐसे ही हाड़ौती की महिलाओं से आपको मुखातिब करवा रहे है। इन महिलाओं का कहना है कि बेटियों को सपने देखने दीजिए। उन्हें उड़ने दीजिए। अगर सही दिशा और अवसर मिले, तो वे हर मंजिÞल को हासिल कर सकती हैं। हर महिला में असीम शक्ति है। अगर हम ठान लें तो हर चुनौती को पार कर सफ लता की नई कहानी लिख सकते हैं। </p>
<p>मेहनत से सफलता तक अपनी कड़ी मेहनत, लगन और ईमानदारी से प्रशासनिक सेवा में अपनी पहचान बनाई। माता-पिता एवं परिवार की प्रेरणा से मैंने अपनी क्षमताओं को निखारा। शिक्षा, आत्मनिर्भरता और संकल्प ही सफलता की कुंजी हैं। जब एक महिला ठान लेती है, तो हर चुनौती छोटी हो जाती है। एक सुरक्षित समाज ही महिला सशक्तिकरण की नींव है। जागरूकता, सशक्त कानून और समाज की सकारात्मक सोच से महिलाएं निर्भय होकर आगे बढ़ सकती हैं। कड़ी मेहनत, सही मार्गदर्शन और आत्मविश्वास से हर महिला अपने लक्ष्य को हासिल कर सकती है। महिला शक्ति, समाज की असली ताकत है। <br /><strong>-भावना सिंह,एसडीएम  लाखेरी </strong></p>
<p><strong>निरंतर मेहनत पर ही अपनी मंजिल मिल सकती है</strong><br /> शुरू से ही परिवार का सहयोग रहा तो संघर्ष तो नही करना पड़ा लेकिन मेहनत बहुत करनी पड़ी है। जो भी  महिला जीवन मे कुछ करना चाहती है वो लक्ष्य निर्धारित कर के निरंतर मेहनत कर अपनी मंजिल को हासिल कर सकती है। महिला मजूबत और सफल हो सके इसके लिए जरूरी हो कि महिला अंदर से मजबूत हो अपने लक्ष्य के प्रति समर्पित हो, क्योंकि जीवन में कैसी भी परिस्थितियां आ जाए हमे हमारी नाकामी के पीछे परिस्थियों का हवाला नही देना चाहिए।  सकारात्मक ऊर्जा के साथ परिस्थितियों का सामने करते हुए आगे बढ़ते रहना चाहिए। समाज में महिला अपने आप को सुरक्षित महसूस करे इसके लिए जरूरी है कि लोग अपने लड़के और लड़कियों की परवरिश समानता के साथ करे। उनमें किसी प्रकार का भेदभाव नही करें। क्योंकि अगर माता पिता अपनी लड़कियों के साथ ही लड़कों को भी सही संस्कार देंगे तो समाज मे निश्चित ही महिलाएं सुरक्षित माहौल को महसूस करेंगी।<br /><strong>-सपना कुमारी, उपखण्ड अधिकारी सांगोद</strong></p>
<p><strong>बदलाव लाने के लिए सिर्फ  इच्छा ही नहीं , निरंतर प्रयास भी जरूरी हैं</strong><br />आशा शर्मा जो कभी एक साधारण गृहिणी थीं। उन्होंने अपने संघर्ष और संकल्प के बल पर लाखेरी नगर परिषद की चेयरमैन बनने का गौरव हासिल किया। पारिवारिक जिम्मेदारियों को निभाते हुए भी उन्होंने समाज सेवा को प्राथमिकता दी और यह साबित किया कि इच्छाशक्ति से हर सपना साकार किया जा सकता है। चेयरमैन बनने के बाद आशा शर्मा ने शहर को नई ऊंचाइयों तक ले जाने का दृढ़ निश्चय किया। उन्होंने स्वच्छता, विकास और नागरिक सुविधाओं को बेहतर बनाने के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठाए। उनका मानना है कि बदलाव लाने के लिए सिर्फ  इच्छा ही नहीं बल्कि निरंतर प्रयास भी जरूरी हैं। अंतरराष्टीय महिला दिवस के अवसर पर उन्होंने युवा छात्राओं और महिलाओं को संदेश दिया कि महिला शक्ति आज किसी से कम नहीं है। आशा शर्मा ने कहा हर महिला में असीम शक्ति है। अगर हम ठान लें तो हर चुनौती को पार कर सफ लता की नई कहानी लिख सकते हैं। आशा शर्मा हर उस महिला के लिए प्रेरणा है जो अपने सपनों को साकार करना चाहती है। उनका संघर्ष और सफ लता यह साबित करता है कि अगर हौसला बुलंद हो तो कोई भी मुकाम दूर नहीं। <br /><strong>-आशा शर्मा, चेयरमैन, नगर पालिका लाखेरी</strong></p>
<p>उन्हें देखकर जनसेवा का जज्बा जगा। पूर्व मुख्यमंत्री वसुन्धरा राजे सिंधिया का विधानसभा क्षेत्र हैं । वो भी एक महिला है तो उनसे प्रेरित होकर राजनीति के जरिए जनसेवा का मौका मिला। अपने पालिकाध्यक्ष के कार्यकाल में लोगों के लिए जी जान से विकास कार्य किए। जिस मुकाम पर मैं हू वह परिवार के सहयोग से ही सम्भव हो पाता है। समय का बेहतर प्रबंधन दोनों कार्य मे सफलता दिलाता है और परिवार के सहयोग से ऊर्जा मिलती है। समाजसेवा हो या राजनीति, संघर्ष तो कदम कदम पर हर होते है, विरोध भी होते है खासकर जब आप महिला है तो हौसला तोड़ने वाले भी मिलते है लेकिन जनता के प्यार से हौसला और ताकत मिलती रहती है।<br /><strong>-वर्षा मनीष चांदवाड़, नगरपालिका अध्यक्ष, झालरापाटन</strong><br /><strong> </strong><br /><strong> डर को छोडो, हौसले को पकडो</strong><br />बचपन से ही डॉक्टर बनने का सपना देखती थी। परंतु समाज में बेटियों की पढाई लिखाई पर खर्चा व्यर्थ समझा जाता था फि र भी मेरे माता पिता के बेटे बेटी को समान शिक्षा प्रदान करने के विचार व मेरे अथक परिश्रम व लगन के चलते मैंने एसएमएस मेडिकल कॉलेज में दाखिला लिया।  इन्द्रगढ कस्बे से पहली महिला डॉक्टर बनी।  नीट परीक्षा की तैयारी के लिए दिन में 14 से 15 घंटे तक अध्ययन किया। शारिरीक विकलांगता होने के बावजूद मैंने कभी इसे अपनी कमजोरी नही माना और निरंतर मेहनत की। अपने अथक प्रयासों के दम पर ये मुकाम हासिल किया। पिता बैंक मैनेजर और माता गृहिणी है। जिनका मेरी इस सफ लता में अहम योगदान है। मेरे तीन छोटे भाई बहिन भी डॉक्टरी की तैयारी कर रहे है तथा एक बहिन आईएएस की तैयारी कर रही है। बाद में मेरे पति डॉ0 चन्दन मीना के प्रोत्साहन से पीजी की पढाई पूरी कर स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ के रूप में अपने कस्बे के सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र में अपनी सेवाएं दे रही हूं। महिला सुरक्षा समान कानून और व्यक्तिगत जागरूकता से जुडा मुद्दा है। सख्त कानून आत्मरक्षा शिक्षा व जागरुकता से इसे मजबूत किया जा सकता है। महिलाओं को सुरक्षित माहौल प्रदान करने में समाज की भी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है। महिला सशक्तिकरण का मतलब सिर्फ अधिकार हासिल करना नही बल्कि अपने आत्मविश्वास स्वाभिमान और काबिलियत को पहचानना भी है। महिला दिवस पर सभी महिलाओं व बालिकाओं को मेरा संदेश है कि  डर को छोडा, हौसले को पकड़ो। शिक्षा तुम्हारा सबसे बडा हथियार है, इसे कभी मत छोड़ो। आर्थिक स्वतंत्रता तुम्हे आत्मनिर्भर बनाएगी इसे अपनाओ। गलत के खिलाफ आवाज उठाओ, क्योंकि चुप्पी भी अन्याय को बढ़ावा देती है।<br /><strong> -डॉ. प्रियंका मीना महिला एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ, सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र इन्द्रगढ़।</strong></p>
<p><strong>सही दिशा और अवसर मिले तो बेटियां हर मंजिÞल को हासिल कर सकती हैं</strong><br />छीपाबड़ौद कस्बे के ही राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय से 12वीं तक की पढ़ाई पूरी की लेकिन  सपना इससे कहीं आगे था।  एमबीबीएस की तैयारी के लिए कोटा जाने की इच्छा जताई तो समाज ने सवाल उठाए। लड़की को इतना पढ़ाने की क्या जरूरत। इतनी दूर भेजकर क्या करेंगे? लेकिन  माता-पिता ने समाज की परवाह किए बिना उन्हें पूरा समर्थन दिया। कोटा में  दिन-रात मेहनत की। 16-16 घंटे पढ़ाई की। न मनोरंजन देखा, न पारिवारिक कार्यक्रमों में भाग लिया। एक ही लक्ष्य था डॉक्टर बनकर अपने क्षेत्र की महिलाओं के लिए कुछ करना। लगातार पांच वर्षों की मेहनत के बाद विजय लक्ष्मी का चयन अलीगढ़ यूनिवर्सिटी में हुआ। जहां से उन्होंने स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ की पढ़ाई पूरी की। इसके बाद उनका सरकारी नौकरी में चयन हुआ और 2021 में छीपाबड़ौद के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में अपनी सेवाएं शुरू कीं। लड़कियों को सिर्फ  स्कूल भेजना काफ ी नहीं है, उन्हें उच्च शिक्षा के लिए प्रेरित करना और सही संसाधन उपलब्ध कराना भी जरूरी है। महिला सुरक्षा को लेकर वे कहती हैं। सरकार को सख्त कानून लागू करने चाहिए और पुलिस को महिलाओं की शिकायतों पर तुरंत कार्रवाई करनी चाहिए ताकि वे खुद को सुरक्षित महसूस कर सकें। आज भी कई महिलाओं के साथ हिंसा होती है। हर लड़की के माता-पिता से यह कहना है कि बेटियों को सपने देखने दीजिए। उन्हें उड़ने दीजिए। अगर सही दिशा और अवसर मिले, तो वे हर मंजिÞल को हासिल कर सकती हैं।<br /><strong>-डॉ विजय लक्ष्मी चौरसिया, स्त्री एवं प्रसूति विशेषज्ञ, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र छीपाबडौद</strong></p>
<p>मैं पेशे से एक ब्यूटीशियन है। पिछले 4 सालों में लगभग 500 से ज्यादा युवतियों व महिलाओं को ब्यूटीपार्लर का कोर्स करवा कर हुनरमंद बनाया है। ब्यूटी कोर्स का कोई चार्ज नही लिया, यह बिल्कुल निशुल्क है। जो आज भी अनवरत जारी है। स्कूल व कॉलेज की युवतियों के लिए यह फ्री ब्यूटी कोर्स समर वेकेशन के समय करवाया जाता है। यह सब नारी सशक्तिकरण की दिशा में एक अच्छा कदम है। साथ ही प्रधानमंत्री मोदी के कौशल विकास व आत्मनिर्भर भारत, नारी सशक्तिकरण जैसे ध्येय को भी बढ़ावा दे रही है। हर महिला को अपनी जिद और जुनून से अपने जीवन की कहानी खुद लिखनी चाहिए। मैं  इंदौर जैसे बड़े शहर की रहने वाली थी, शादी भवानीमंडी में हुई। एक बेटी का अपने पापा के प्रति अटूट विश्वास ने ही उन्हें इस मुकाम तक पहुंचाया है। सब में उनके माता-पिता व पति का भी महत्वपूर्ण योगदान रहा। <br /><strong>-सविता घुता -ब्यूटीशियन, भवानीमंडी</strong></p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>बारां</category>
                                            <category>बूंदी</category>
                                            <category>झालावाड़</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 08 Mar 2025 16:00:02 +0530</pubDate>
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                <title>अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस - लहरा दो, लहरा दो सरजमीं का परचम लहरा दो...</title>
                                    <description><![CDATA[शहर की उन सशक्त महिलाओं से रुबरु करवा रहें हैं, जिन्होंने अपने प्रयासों के चलते कामयाबी हासिल की और अपना एक खास मुकाम बनाया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/international-women-s-day---wave-it--wave-it--wave-the-flag-of-the-land/article-106816"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-03/lahara-do,-lahara-do-sarajamen-ka-paracham-lahara-do...kota-news-8.03.2025.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। "यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते रमन्ते तत्र देवता:" अर्थात जहां नारी की पूजा होती है, उनका सम्मान किया जाता है वहां देवता निवास करते हैं। मुस्कुराकर, दर्द भूलकर,रिश्तों में बंद थी दुनिया सारी, हर पग को रोशन करने वाली वो शक्ति हैं नारी ! नारी केवल एक शब्द नहीं, बल्कि संपूर्ण सृष्टि का आधार है, वह जीवनदायिनी है, प्रेम की मूर्ति और रिश्ते संवारने वाली शक्ति है। नारी समाज का मूल आधार है, नारी है तो समाज है नारी समाज का आईना है, क्योंकि वह समाज में कई तरह की भूमिकाएं निभाती है। आज नारी ने शिक्षा, राजनीति, व्यवसाय, और सामाजिक सेवाओं में अपनी प्रतिभा का परिचय दिया है। इन्होंने यह भी बता दिया है कि वे किसी भी परिस्थिति से निपटने के लिए सक्षम हैं। किसी भी प्रोफेशन को ले लीजिए महिलाएं अब पुरुषों से कंधा मिलाकर चल रही हैं। यह अब अपवाद नहीं रह गया है। बीते जमाने की बात हो गई है कि महिलाएं सिर्फ घर की चाहरदीवारी में ही रहेंगी। आज की महिलाएं जागृत हैं और अनेक क्षेत्रों में नेतृत्व भी कर रही हैं। अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर शहर की उन सशक्त महिलाओं से रुबरु करवा रहें हैं, जिन्होंने अपने प्रयासों के चलते कामयाबी हासिल की और अपना एक खास मुकाम बनाया।</p>
<p>हमारा परिवार इस विचारधारा को मानने वाला था कि लड़कियों की समय पर शादी उनकी शिक्षा से ज्यादा जरूरी है। मेरी बड़ी बहिन की शादी 18 साल की होते ही कर दी गई। मेरे आगे पढ़ने की इच्छा को जानकर मेरी दादी ने मेरे घर वालों  को मुझे उचित माहौल देने का मार्ग प्रशस्त किया। समस्या यह थी कि  परिवार में सभी बड़े लोग निजी क्षेत्र में कार्यरत थे।  ऐसे में परिवारजनों के समुचित सहयोग के बावजूद उचित मार्गदर्शन के अभाव में कई दिक्कतें आई।  प्रतियोगिता पत्रिकाओं में प्रकाशित होने वाले सफल अभ्यर्थियों के साक्षात्कार पढ़कर प्रशासनिक सेवा में जाने का संकल्प लिया। कोचिंग नहीं करने की वजह से तैयारी के दौरान कई चुनौतियां आई लेकिन  कड़ी मेहनत का परिणाम मिला कि  मेरा चयन राजस्थान प्रशासनिक सेवा में हो गया।  महिलाओं को अभी भी कई चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। इसके बावजूद, महिलाएं लगातार आगे बढ़ रही हैं। महिलाओं को आगे बढ़ने के लिए  उन महिलाओं को देखने की जरूरत है जो विभिन्न क्षेत्रों में सफल हुई है। महिलाओं को अपने लक्ष्यों को निर्धारित करने और उन्हें प्राप्त करने के लिए योजना निर्माण करना चाहिए।  नए कौशल सीखने और अपनी प्रतिभा को विकसित करने के लिए प्रयासरत रहना होगा। महिलाओं को अपनी आवाज उठाने और अपने अधिकारों के लिए जागरूक रहना होगा। एक महिला  को दूसरी महिला का समर्थन करने और एक-दूसरे को आगे बढ़ने में मदद करने के लिए प्रोत्साहित करना होगा।<br /><strong>-ममता तिवारी, अतिरिक्त संभागीय आयुक्त कोटा</strong></p>
<p>आपकी जो आज की परिस्थिति है उसको अगर बदलने का जज्बा है वो इच्छाश्क्ति अगर आप में है तो हालातों को बदल सकते है। मेरा ग्रामीण परिवेश था। मुझे एक ही इच्छा थी कि मुझे अपने पैरों पर खड़े होना है। मैं कभी नहीं चाहुंगी कि मैं किसी पर निर्भर रहुं अपने फैसले लेने में या अपनी लाइफ के छोटे-छोटे फैसले लेने में या कहीं आने जाने में। इसी ने मुझे प्रेरित किया। आजकल लाइफ में डिस्ट्रेक्शन बहुत ज्यादा है सबसे पहले अपने उद्देश्य पर केंद्रित रहे, डिस्ट्रेक्शन को अपने ऊपर बहुत हावी नहीं होने दें। आज आप जिस परिस्थिति में हैं और उसे बदलना चाहते है तो निश्चित रूप से आपको कुछ अलग करना होगा।<br /><strong>- गीता चौधरी, अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश, सचिव विधिक सेवा प्राधिकरण</strong></p>
<p>जब कोई महिला घर से बाहर निकल कर कुछ करती है तो बहुत अड़चनें आती है। पुरूष तो करें ही पर हर महिला को महिला का भी सपोर्ट जरूरी है। महिला अगर ठान ले कि मुझे इस मुकाम तक पहुंचना है चाहे कितना भी संघर्ष करना पड़े, कोई कुछ भी कहें मुझे आगे बढ़ना है यह लक्ष्य लेकर चलें तो वह वहां तक पहुचेंगी। अपनी व अपने अंदर की सुनें तो अवश्य मंजिल को छूएंगी। मैं जब 9वीं कक्षा में पढ़ती थी तभी विवाह हो गया था। ससुराल से भी पढ़ने जाती थी। पति, सास व ससुर ने मुझे बहुत सपोर्ट किया। मेरी इच्छा शुरू से टीचर बनने की थी। स्कूल में बच्चों को पढ़ाया भी, समाज सेवा भी करती थी। सब जगह मंजू मैडम के नाम से जानी जाती थी जब कहीं महिला की सीट आती और किसको खड़ा करें यह बात आई तो उस समय मुझसे कहा गया एक  बार तो मैंने सोचा यह सब नहीं पर सबने कहां कि आप सब कुछ कर सकती है इस तरह राजनीति में आ गई। यहां भी सास, ससुर, पति के सपोर्ट से आई। मैं चाहती हूं कि मेरे पीछे की महिलाएं भी आगे बढ़े। महिला अपने आस-पास, अपने क्षेत्र, अपने ग्रुप में जो महिलाएं हैं उन्हें सपोर्ट करके आगे बढ़ाए। माता-पिता अपनी बेटियों को संपूर्ण शिक्षा दिलाकर उन्हें आत्मनिर्भर बनाकर ही उनका विवाह करें।<br /><strong>- मंजू मेहरा, महापौर कोटा उत्तर</strong></p>
<p>व्यक्ति के पूरे जीवन के लिए अर्थात जन्म से लेकर अंत तक के लिए कानूनी प्रावधान हैं।  कानून में हर तरह की स्थिति का प्रावधान हैं। महिला को सशक्त होने, स्वाभिमान से जीवन जीने, हर वो काम करने की आजादी है जो वह करना चाहती है। लेकिन यह जरूरी है कि महिलाओं को अपने अधिकारों की जानकारी होना चाहिए। महिलाओं को यह पता होना  चाहिए कि वर्क प्लेस, घर ससुराल,या अन्य स्थान  पर किसी भी तरह की घटना होती है वह क्या करे, कैसे बचे, किससे सहायता लें आदि। इसके साथ महिला को कभी अपने आप को किसी भी परिस्थिति में कमजोर नहीं समझना चहिए।  आज हर महिला को अपने पैरों पर खड़ा होना चाहिए, ताकि वह कठिन समय का सामना आसानी से कर पाए। मैं इस अवसर पर यह भी कहना चाहती हूं कि कभी भी अपने अधिकार व कानून का मिस्यूज नहीं करें। <br /><strong>- डॉ. अमृता दुहन पुलिस अधीक्षक कोटा शहर</strong></p>
<p>शिक्षा वह है जो हर व्यक्ति में आत्मविश्वास भी लाती है और उसका व्यक्तित्व भी निखारती है। हर लड़की को चाहिए कि वह अपनी शिक्षा पर पूरा ध्यान दें। अपनी रूचि के अनुरूप अपना करियर चुनें। हर परिस्थिति में अपने पैरों पर खड़ी हो। हर परिस्थिति में सही-गलत को सोच विचार कर निर्णय करें। क्षेत्र पूरे आत्मविश्वास, पूरी लगन व मेहनत से काम करें तो महिलाएं अपने को ऊंचाई तक ले जा सकती है। हमारा विभाग गरीब, दुखी व वंचित वर्ग के लिए काम करता है। मेरा सौभाग्य था कि ईश्वर ने मुझे इस काम के लिए चुना ताकि मैं लोगों की कुछ मदद कर सकूं। सरकार की योजनाओं से जोड़कर परोक्ष या अपरोक्ष रूप से किसी भी तरह मदद कर सकूं। मैंने कभी सोचा नहीं था कि इस फील्ड में जाउंगी । सोशलॉजी में उच्च शिक्षा प्राप्त की थी। उसके बाद जब इस फील्ड में आई तो धीरे-धीरे समाज को जाना और समझा तो लगा कि सहीं दिशा थी। मैं सेतुष्ट हुं इस विभाग में काम करके। शादी के तीन साल बाद जॉब ज्वाइन किया तो पति व सभी लोगों का मोटीवेशन व सपोर्ट मिला।<br /><strong>- सविता कृष्णैया, संयुक्त निदेशक सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग</strong></p>
<p>आज महिलाएं हर क्षेत्र में अपनी उपस्थिति दर्ज करा रही है। लेकिन आज भी बालिका शिक्षा में हम काफी पिछड़े हुए है। आज भी ग्रामीण परिवेश में बालिकाओं को उच्च शिक्षा के लिए भेजने में संकोच करते हैं। मैं अपनी बात करूं तो मैं एक मध्यमवर्गीय परिवार से आई हूं। हमारे समय में लड़कियों को उच्च शिक्षा के लिए नहीं भेजते थे। लेकिन इस बारे में लकी हूं मेरे पिता ने मुझे पढ़ाई के लिए हमेशा प्रोत्साहित किया। दादाजी मेडिकल लाइन में नहीं भेजना चाहते थे लेकिन पिता के सहयोग से आज मैं इस मुकाम पर पहुंची हूं। बालिकाओं को किसी भी फील्ड में जाना है तो इसके लिए  अपना लक्ष्य तय करना चाहिए। जब तक अपना लक्ष्य हासिल नहीं हो तब तक प्रयास करते रहना चाहिए। मैं कोटा आई तो पहली स्त्री रोग विभाग में महिला सर्जन थी पुरुष प्रधान समाज में इसको लेकर काफी भ्रांतियां भी फैलाई एक महिला सर्जन रूप में कई नकारात्मक चीजें आई उनका डटकर मुकाबला किया।  मुझे काम करना था तो मैंने हर चुनौती का स्वीकार कर इस फील्ड में आगे बढ़ती चली गई। स्त्रीरोग विशेषज्ञ से सफर की शुरुआत हुई उसके बाद विभागाध्यक्ष, बूंदी मेडिकल कॉलेज की प्रधानाचार्य फिर ब्लड बैंक प्रभारी बनी । वर्तमान में जेकेलोन अधीक्षक पद पर हूं। सभी महिलाओं से कहना चाहती हूं कि लगन से किया गया हर कार्य संभव हो जाता है।<br /><strong> - निर्मला शर्मा, अधीक्षक जेकेलोन अस्पताल कोटा</strong></p>
<p> एक कोर टेक्निकल ब्रांच से इंजीनियरिंग करने के लिए वर्कशॉप मैनेजर बनने तक के सफर में हर कदम पर पुरुषों के साथ मिलकर काम शुरू किया। शुरू में एडजस्ट करने के लिए मुझे कुछ दिक्कतें भी आई पर जब मन में सोच लिया कि कुछ अलग करना है तो डर की जगह नहीं रहती। मेरे अनुसार महिलाओं के लिए आर्थिक आत्मनिर्भरता सबसे ज्यादा जरूरी है। हर लड़की को अपनी पसंद की किसी भी फील्ड में बिना डरे आगे बढ़ने के लिए प्रयास करना चाहिए।<br /><strong>- सुचिता गुप्ता, मुख्य आगार प्रबंधक यातायात, कोटा</strong></p>
<p>महिला दिवस के शुभ अवसर पर मैं सभी साथी महिलाओं को बधाई देना चाहती हूॅ। परन्तु ये जोश ये जुनून सिर्फ आज तक सीमित न रहे। हर दिन महिला सशक्तिकरण सही अर्थों में तभी होगा । जब महिलाऐं न  सिर्फ अर्थिक रूप से आत्मनिर्भर होगी बल्कि अपने जीवन के सभी निर्णय लेने का अधिकार होगा। वे अपने पिता, भाई, पति और पुत्र पर निर्भर नहीं होगी। वे पैसा कमाने के साथ पैसा का व्यय, नियोजन व निवेश का निर्णय भी स्वयं लें। पिछले 4 सालों से राजीविका स्वयं सहायता समूह की महिलाओं से जुड़ी हुई हंू। इस अनुभव ने मेरी सोच बदली है- मैं आम ग्रामीण महिला की शक्ति का अनुभव करती हंू। महिलाएं हर दिन अपने आप को बेहतर बनाने का प्रयास कर रही हैं। नई विधाएं सीख रही, साक्षर हो रही हैं। यहीं चाहती हंू। कि ये सभी महिलाएं निरंतर इस मार्ग पर आगे बढ़ती रहें।<br /><strong>-नेहा चतुर्वेदी, जिला परियोजना प्रबंधक राजीविका</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 08 Mar 2025 14:56:16 +0530</pubDate>
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                <title>प्रशासन ने उर्स की सफलता के लिए पेश की चादर </title>
                                    <description><![CDATA[ जिला एवं पुलिस प्रशासन की ओर से ख्वाजा मोईनुद्दीन हसन चिश्ती की बारगाह में हाजरी लगाकर 813वें सालाना उर्स के मुबारक मौके पर 'उर्स की सफलता के लिए मखमली चादर पेश कर दुआ की]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/ajmer/the-administration-presented-a-sheet-for-the-success-of-urs%C2%A0/article-99031"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-12/44.jpg" alt=""></a><br /><p>अजमेर। जिला एवं पुलिस प्रशासन की ओर से ख्वाजा मोईनुद्दीन हसन चिश्ती की बारगाह में हाजरी लगाकर 813वें सालाना उर्स के मुबारक मौके पर 'उर्स की सफलता के लिए मखमली चादर पेश कर दुआ की। जिला कलक्टर लोकबंधु और पुलिस अधीक्षक वंदिता राणा ने अधिकारियों के साथ दरगाह शरीफ पहुंच कर जियारत की। सालाना उर्स-2025 के लिये झंडे की रस्म होने के बाद अजमेर प्रशासन की ओर से गरीब नवाज की बारगाह में चादर एवं अकीदत के फूल पेश कर उर्स के निर्बाध सफलता से पूरख होने की दुआ की। इस दौरान खादिमों ने चादर पेश करवाई।</p>
<p>लोकबंधु ने कहा कि हमने उर्स की सफलता के साथ साथ देश-प्रदेश में अमन, चैन, खुशहाली की दुआ की। उन्होंने कहा कि चांद दिखाई देने पर एक या दो जनवरी 2025 से विधिवत शुरू होने जा रहे सालाना उर्स के लिए सभी प्रशासनिक तैयारियां कर ली गई है। हमारा प्रयास रहेगा कि उर्स हमेशा की तरह अच्छी तरह सम्पन्न हो। पुलिस अधीक्षक वंदिता राणा ने कहा कि उर्स के दौरान माकूल सुरक्षा बंदोबस्त किये जा रहे है। उन्होंने कहा पुलिस का अमला, मेला अवधि के दौरान 24 घंटे मुस्तैद रहेगा। सालाना उर्स का झंडा चढ़ाये जाने के बाद अजमेर प्रशासन की पहली चादर रही।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>अजमेर</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/ajmer/the-administration-presented-a-sheet-for-the-success-of-urs%C2%A0/article-99031</link>
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                <pubDate>Sun, 29 Dec 2024 19:02:15 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur]]></dc:creator>
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