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                <title>tigress - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <title>जरा देखूं तो कैसा है मेरा घर का आंगन, टाइग्रेस ने किया शिकार, रास आ रहा मुकुंदरा</title>
                                    <description><![CDATA[बाघिन ने एनक्लोजर का चप्पा चप्पा छाना, नए घर का किया मुआयना]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/let-me-see-how-my-courtyard-looks--the-tigress-hunted--enjoying-mukundra/article-145341"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/kota-news.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। मुकुंदरा हिल्स टाइगर रिजर्व में मध्य प्रदेश के बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व से शिफ्ट किए हुए बुधवार को पांच दिन हो गए हैं। बाघिन को अपना नया आशियाना खूब रास आ रहा है। बाघिन ने आते ही दूसरे दिन रविवार को पाड़े का शिकार किया। वह सुबह सूरज की पहली किरण के साथ ही अपने नए घर का मुआयने पर निकलती है। राउंठा रेंज की झामरा घाटी में बने एक हेक्टेयर के सॉफ्ट एनक्लोजर में बुधवार को चहल कदमी करती नजर आई। वह नए माहौल में ढलने की कोशिश करती दिखी। इस बीच कुछ समय वाटर प्वाइंट के पास रुकी और प्यास बुझाकर फिर से दौरे पर निकल पड़ी। यह सिलसिला दिनभर चलता रहा। भूख लगी तो एनक्लोजर में छोड़े गए पाड़े का शिकार कर पेट भरा। टाईग्रेस की एक-एक गतिविधियां एनक्लोजर के पीछे बने दो मंजिला वॉच टावर से कर्मचारी नोट कर अधिकारियों को रिपोर्ट करते रहे। हालांकि, बाघिन अभी पांच दिनों तक समान्य व्यवहार में विचरण करती नजर आई। अधिकारियों व कर्मचारियों की टीम लगातार बाघिन की सघन मॉनिटरिंग में जुटी है।</p>
<p><strong>रौब से घूमी, दौड़ कर किया शिकार</strong></p>
<p>डीएफओ मुथू एस ने बताया कि मुकुंदरा का माहौल बाघिन को रास आ रहा है। व्यवहार भी सामान्य रहा और बाड़े में रौब के साथ मूवमेंट करती दिखाई दी। कभी वॉटर पॉइंट पर तो कभी झाड़ियों के पीछे आराम करती नजर आई। एनक्लोजर में छोड़े गए वैट का दौड़कर शिकार किया। वन्यजीव चिकित्सक ने बाघिन का भौतिक रूप से स्वास्थ्य परीक्षण भी किया। जिसमें वह पूरी तरह से स्वस्थ मिली। दोपहर को उसने कुछ समय तक आराम किया फिर शाम 5 बजे बाद विवरण करती देखी गई।</p>
<p><strong>24 घंटे वॉच टावर से हर मूवमेंट पर नजर</strong></p>
<p>मुकुंदरा अधिकारियों का कहना है कि 24 घंटे बाघिन के हर एक मूवमेंट पर नजर रखी जा रही है। उसकी एक्टिविटी को वॉच टावर पर तैनात वनकर्मी नोट कर डीएफओ कार्यालय में बने कंट्रोल रूम पर रिपोर्ट करते रहे हैं। यहां 8-8 घंटे की शिफ्ट में गठित 3 टीमों द्वारा टाइग्रेस के मूवमेंट पर की नजर रखी जा रही हैं। जिसमें वह कितने बजे से कितनी बजे तक घूमी, कितनी बार पानी पिया। कब से कब तक आराम किया। दिनभर में उसका व्यवहार कैसा रहा, भोजन-पानी व एक्टिवनेस सहित अन्य गतिविधियां नोट की गई। इन एक्टिविटी के आधार पर तैयार रिपोर्ट का एनालिसिस किया जाता है, फिर हार्ड रिलीज पर फैसला किया जाता है।</p>
<p><strong>1135 वर्ग किमी में फैला मुकुंदरा टाइगर रिजर्व</strong></p>
<p>मुकुन्दरा हिल्स को 9 अप्रैल 2013 को टाइगर रिजर्व घोषित किया गया था। वर्तमान में यह 1135 वर्ग किमी में चार जिलों कोटा, बूंदी, झालावाड़ व चित्तौडगढ़ में फैला है। इसमें 793 वर्ग किमी कोर और 342 वर्ग किमी बफर जोन है। पहले मुकुंदरा का दायरा 760 वर्ग किमी था लेकिन दो वर्ष पूर्व भैंसरोडगढ़ अभयारण्य को शामिल कर लिया गया। जिससे टाइगर रिजर्व का क्षेत्रफल बढ़कर 1135 वर्ग किमी हो गया।</p>
<p><strong>सप्ताहभर बाद हार्ड रिलीज पर फैसला</strong></p>
<p>सीसीएफ सुगनाराम जाट ने बताया कि बाघिन को सॉफ्ट एनक्लोजर में शिफ्ट करने के साथ ही विशेषज्ञों की टीम 24 घंटे उसकी निगरानी कर रही है। उसके व्यवहार, स्वास्थ्य और नए वातावरण में ढलने की प्रक्रिया पर लगातार नजर रखी जा रही है। सब कुछ संतोषजनक रहने पर 7 दिन बाद बाघिन को खुले जंगल में छोड़ दिया जाएगा। बाघिन की मॉनिटरिंग के लिए 8- 8 घंटे की शिफ्ट में 3 टीमें गठित की गई है।</p>
<p><strong>अब मुकुंदरा में 7 बाघ</strong></p>
<p>बांधवगढ़ से बाघिन आने के साथ ही मुकुंदरा में अब बाघों की संख्या 7 हो गई है। इनमें 2 बाघ, 4 बाघिन और एक 10 माह का नर शावक शामिल है। वर्तमान में टाइग्रेस एमटी- 6 अपने शावक के साथ कोलीपुरा रेंज में तो बाघिन एमटी-8 हाल ही में रणथंभोर से लाए बाघ एमटी - 9 के साथ दरा रेंज में 82 वर्ग किमी के जंगल में विचरण कर रहे हैं। दोनों को कई बार साथ देखा गया है। ऐसे में उम्मीद जताई जा रही है कि निकट भविष्य में यहां श्रावकों के जन्म से बाघों का कुनबा बढ़ेगा।</p>
<p><strong>कमजोर जेनेटिक आधार को मजबूत करना उद्देश्य</strong></p>
<p>विशेषज्ञों के अनुसार, इंटर स्टेट बाघ ट्रांसलोकेशन का मुख्य उद्देश्य बाघों की आनुवंशिक विविधता बढ़ाना, कमजोर जेनेटिक आधार को मजबूत करना, भविष्य में संख्या स्थिर और स्वस्थ रखना है। ऐसे में अंतरराज्यीय स्थानांतरण से राजस्थान के टाइगर रिजर्व में दीर्घकालिक रूप से मजबूत बाघ आबादी विकसित करने में मदद मिलेगी।</p>
<p><strong>मार्च - अप्रैल में लाए जाएंगे 250 चीतल</strong></p>
<p>सीसीएफ जाट ने बताया कि मुकुंदरा में अभी प्रेबेस अच्छी संख्या अच्छी है। लेकिन इनकी संख्या बढ़ाने के लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। हाल ही में भरतपुर के घना नेशनल पार्क से 9 चीतल लाए हैं। मार्च - अप्रैल तक 250 चीतल लाए जाएंगे। भोमा लगाया हुआ है। उसमें जैसे जैसे प्रेबेस आएंगे वैसे ही मुकुंदरा में शिफ्ट किए जाएंगे।</p>
<p><strong>बाधिन पूरी तरह स्वस्थ</strong></p>
<p>बाघिन पूरी तरह से स्वस्थ है। सॉफ्ट एनक्लोजर में सामान्य व्यवहार में विचरण कर रही है। उसने एनक्लोजर में छोड़े गए वैट का शिकार किया। टीम द्वारा टाइग्रेस की 24 घंटे मॉनिटरिंग की जा रही है। पशु चिकित्सक द्वारा समय-समय पर स्वास्थ्य परीक्षण भी किया जा रहा है। सप्ताहभर बाद उच्च अधिकारियों के निर्देश पर हार्ड रिलीज करने का निर्णय किया जाएगा।</p>
<p><strong>- मुथू एस, डीएफओ मुकुंदरा हिल्स टाइगर रिजर्व</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 05 Mar 2026 14:09:43 +0530</pubDate>
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                <title>30 लाख का एनक्लोजर तैयार, लेकिन बांधवगढ़ में बाघिन चिन्हित नहीं</title>
                                    <description><![CDATA[मध्यप्रदेश में पिछले एक हफ्ते से टाइग्रेस की खोज जारी, फिर भी हाथ खाली।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/enclosure-worth-30-lakhs-ready-ban-enclosure-worth-30-lakh-rupees-is-ready--but-the-tigress-has-not-been-identified-in-bandhavgarhut-tigress-not-identified-in/article-144255"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-02/30-lack-kota.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। इंटरस्टेट टाइगर रीलोकेशन के तहत मध्यप्रदेश के बांधवगढ़ से बाघिन लाने के लिए मुकुंदरा टाइगर रिजर्व में 30 लाख की लागत से सॉफ्ट एनक्लोजर बनाकर तैयार कर लिया गया है। यह एनक्लोजर राउठा रेंज में एक हेक्टेयर में बनाया गया है।मुकुंदरा हिल्स टाइगर रिजर्व के मुख्य वन संरक्षक और फील्ड डायरेक्टर सुगनाराम जाट का कहना है कि पिछले सप्ताह ही जामरा वैली में एनक्लोजर का निर्माण कार्य पूरा किया गया है। चारों ओर फेंसिंग की गई है। अंदर वाटर पॉइंट भी बनाया गया है। वहीं बाघिन की निगरानी के लिए दो मंजिला वॉच टावर बनाया गया है। पूरे एनक्लोजर को ग्रीन नेट से कवर किया गया है।</p>
<p><strong>दो मंजिला वॉच टावर बनाया, हर मूवमेंट पर होगी नजर</strong></p>
<p>मुकुंदरा में 30 लाख की लागत से तैयार किया गया एनक्लोजर के पास ही दो मंजिला वॉच टावर बनाया गया है। बाघिन को यहां शिफ्ट किए जाने के बाद वनकर्मियों द्वारा वॉच टावर से टाइग्रेस के हर मूवमेंट पर नजर रखी जाएगी। साथ ही आठ - आठ घंटे के अंतराल में डीएफओ कार्यालय में बने कंट्रोल रूम पर रिपोर्ट देनी होगी। बाघिन शिफ्टिंग से पहले विभाग प्रेबेस लाने की भी तैयारी की जा रही है।</p>
<p><strong>8 दिन से तलाश जारी फिर भी हाथ खाली</strong></p>
<p>सीसीएफ जाट ने बताया कि मध्य प्रदेश के बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व प्रशासन पिछले आठ दिन से मुकुंदरा के लिए बाघिन सर्च कर रहे हैं लेकिन अब तक टाइग्रेस चिन्हित नहीं हुई है। सुबह छह बजे से शाम तक बाघिन को खोजा जा रहा है। टाइग्रेस को चिन्हित करने के बाद ही कोटा से टीम बांधवगढ़ के लिए रवाना होगी। स्थानीय स्तर पर तैयारियां पूरी कर ली गई है। मुकुंदरा से बांधवगढ़ की दूरी करीब सात सौ किमी है। ऐसे में सड़क मार्ग से टाइगर को शिफ्ट करने में 12 घंटे से ज्यादा का समय लग सकता है। ऐसे में हवाई मार्ग मुफीद रहता है, लेकिन रात के समय कोटा में लैंडिंग की सुविधा नहीं है, इसीलिए सड़क मार्ग का भी आॅप्शन भी रखा गया है। टाइगर ट्रांसलोकेशन में समय काफी मायने रखता है। बाघिन किस समय ट्रेंकुलाइज होती है, उससे ही तय होगा कि हवाई या सड़क मार्ग से आएगी।</p>
<p><strong>महाराष्ट्र से भी आएगी दो बाघिन</strong></p>
<p>उन्होंने बताया कि इंटर स्टेट टाइगर रीलोकेशन प्रोजेक्ट करीब 1 साल तक चल सकता है। इसमें पहली बाघिन को बीते साल दिसंबर में बूंदी के रामगढ़ टाइगर रिजर्व लाया गया था। अब फरवरी माह में कोटा के मुकुंदरा में बांधवगढ़ से एक बाघिन को लाई जानी है। इसके बाद मध्य प्रदेश के कान्हा रिजर्व से एक और बाघिन को बूंदी शिफ्ट किया जाएगा। इसके बाद दो बाघिनों को महाराष्ट्र से लेकर आना है। जिनमें ताडोबा-अंधेरी और पेंच महाराष्ट्र टाइगर रिजर्व से लाया जाना है। ऐसे में यह पूरा प्रोजेक्ट करीब एक साल तक चल सकता है।</p>
<p><strong>जेनेटिक बीमारियां से मिलेगी निजात</strong></p>
<p>इधर, मुकुंदरा हिल्स टाइगर रिजर्व के अधिकारियों का कहना है कि जीन पूल में सुधार के लिए यह प्रोजेक्ट चलाया जा रहा है। राजस्थान में मौजूद अधिकांश बाघ व बाघिन रणथंभौर से निकले टाइगर्स की संतान हैं। ऐसे में समान जीन पूल के कारण बाघों में जेनेटिक बीमारियां बढ़ने का भी अंदेशा रहता है। शारीरिक रूप से कमजोर भी हो सकते हैं, इसलिए इंटर स्टेट टाइगर रीलोकेशन से जेनेटिक बीमारियां से निजात मिल सकेगी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 23 Feb 2026 14:46:02 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>रणथम्भौर में दिखा बाघिन का घायल शावक : वन विभाग ने बढ़ाई निगरानी, पैर में दिखा घाव </title>
                                    <description><![CDATA[वन विभाग ने शावक की हालत खतरे से बाहर बताते हुए कहा कि आगे के पैर में घाव होने के चलते चिंता की बात नहीं है क्योंकि शावक के इसे जीभ से चाटकर सही करने की संभावना है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/injured-tigress-cub-seen-in-ranthambore-forest-department-increased-surveillance/article-130186"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-10/6622-copy106.jpg" alt=""></a><br /><p>सवाईमाधोपुर। जिले के रणथम्भौर बाघ अभयारण्य के जोन-तीन में बाघिन रिद्धि के नर शावक को घायल अवस्था में देखे जाने के बाद वन विभाग ने इनकी  निगरानी बढ़ा दी है। वन विभाग सूत्रों ने बताया कि अभयारण्य जोन नंबर-तीन में घूमते पर्यटकों को बाघिन के नर शावक के आगे वाले दाहिने पैर में एक घाव दिखाई दिखा। हालांकि घाव करीब 5 दिन पुराना लग रहा था। </p>
<p>वन विभाग ने शावक की हालत खतरे से बाहर बताते हुए कहा कि आगे के पैर में घाव होने के चलते चिंता की बात नहीं है, क्योंकि शावक के इसे जीभ से चाटकर सही करने की संभावना है। बताया जाता है कि बाघिन रिद्धि का अपनी सबसे बड़ी मादा शावक मीरा के साथ संघर्ष भी हुआ था जिसके बाद नर शावक के घायल होने की खबर सामने आयी है।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 21 Oct 2025 10:43:21 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>टारगेट से ज्यादा किए शिकार फिर भी पिंजरे में कैद बाघिन, रिवाइल्डिंग के नाम पर एक साल से सॉफ्ट एनक्लोजर में टाइग्रेस एमटी-7</title>
                                    <description><![CDATA[अब तक बाघिन 60 से ज्यादा कर चुकी शिकार, फिर भी हार्ड रिलीज नहीं कर रहे अधिकारी। 
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/despite-exceeding-the-target--the-tigress-remains-caged--tigress-mt-7-remains-in-a-soft-enclosure-for-a-year-in-the-name-of-rewilding/article-128894"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-10/copy-of-news-(2)12.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। अभेड़ा बायोलॉजिकल पार्क से रिवाल्डिंग के लिए मुकुंदरा टाइगर रिजर्व की दरा रेंज में शिफ्ट की गई बाघिन एक साल बाद भी पिंजरे में कैद है। जबकि, वन अधिकारियों ने बाघिन द्वारा 50 शिकार सफलतापूर्वक कर लेने पर खुले जंगल में हार्ड रिलीज किया जाना निर्धारित किया था। लेकिन, टाइग्रेस एमटी-7 अब तक टारगेट से ज्यादा शिकार कर चुकी है। इसके बाद भी उसे 5 हैक्टेयर के सॉफ्ट  एनक्लोजर में ही रखा जा रहा है। वर्तमान में उसकी उम्र करीब 3 वर्ष हो चुकी है। इस उम्र के अन्य टाइगर अपनी टेरीटरी बनाने के लिए जंगल का चप्पा-चप्पा छान लेते हैं लेकिन एमटी-7 पांच हैक्टेयर के एनक्लोजर से ही आगे नहीं बढ़ पा रही। इधर, वन्यजीव प्रेमियों का तर्क है, हार्ड रिलीज में अनावश्यक देरी से बाघिन के विकास पर विपरीत असर पड़ सकता है। </p>
<p><strong>60 से ज्यादा शिकार, फिर भी आजादी नहीं</strong><br />मुकुंदरा से मिली जानकारी के अनुसार, बाघिन एमटी-7 अब तक 66 से 70 के बीच सफलतापूर्वक शिकार कर चुकी है। जबकि, टारगेट 50 का ही था। इससे स्पष्ट होता है कि बाघिन शिकार करना सीख चुकी है। ऐसे में उसे खुले जंगल में छोड़ दिया जाना चाहिए। ताकि, वह जंगल की विपरीत परिस्थितियों में खुद को ढाल सके। </p>
<p><strong>चीतल से नीलगाय तक का किया शिकार</strong><br />टाइग्रेस एमटी-7 अब तक चीतल ही नहीं बल्कि बड़े एनिमल नील गाय का भी शिकार कर चुकी है। जबकि, नील गाय का शिकार आसान नहीं होता है। बाघिन के लगातार शिकार किए जाने से 5 हैक्टेयर के एनक्लोजर में प्रे-बेस की भी कमी होती जा रही है। ऐसे में रिवाइल्डिंग के उद्देश्यों की सफलता के लिए उसे शीघ्र ही खुले जंगल में छोड़ा जाना आवश्यक है। </p>
<p><strong>कैसे सीखेगी शिकार ढूंढना व टेरीटरी बनाना </strong><br />बायोलॉजिस्ट रवि कुमार बताते हैं, पिछले एक साल से बाघिन दरा में 5 हैक्टेयर के सॉफ्ट एनक्लोजर में रह रही है। जहां रिवाइल्डिंग के नाम पर सिर्फ शिकार करना ही सीखा है। लेकिन, शिकार ढूंढना नहीं सीख पा रही है। क्योंकि, सॉफ्ट एनक्लोजर में पहले से ही प्रे-बेस की उपलब्धता सुनिश्चित की जाती है। जबकि, खुले जंगल में ऐसा नहीं होता है। वहां हर दिन चूनौतियों के बीच उन्हें भोजन ढूंढना पड़ता है, जो पिंजरे में कैद होने के कारण इस गुण का विकास नहीं हो पा रहा। वहीं, अनावश्यक देरी से टेरीटरी बनाने में भी उसे परेशानी का सामना करना पड़ेगा।  </p>
<p><strong>तीन साल की उम्र में भी खुला जंगल नसीब नहीं</strong><br />नेचर प्रमोटर एएच जैदी बताते हैं, बाघिन एमटी-7 को पिछले साल दिसम्बर माह में शिफ्ट किया गया था। वर्तमान में उसकी उम्र लगभग 3 साल हो चुकी है। इसके बावजूद वह सॉफ्ट एनक्लोजर से बाहर नहीं निकल सकी। जबकि, इस उम्र के अन्य बाघ-बाघिन खुद को एक्सपोलर करते हैं और मां से अलग होकर अपनी टेरीटरी बनाने के लिए जंगल को सर्च करते हैं। इस बीच कई परिस्थितियों से गुजरने के दौरान बहुत कुछ सीखते हैं, जो जंगल में उनके सरवाइवल रेट को बढ़ाने में मददगार होते हैं। बाघिन को जल्द से जल्द हार्ड रिलीज किया जाना चाहिए।</p>
<p><strong>डब्ल्यूआईआई की टीम पर अटकी शिफ्टिंग</strong><br />बाघिन एमटी-7 की शिफ्टिंग पर फैसला डब्ल्यूआईआई  की टीम द्वारा किया जाना है। लेकिन, टीम का इंतजार 6 माह से हो रहा है, जो अब तक खत्म नहीं हुआ। वन अधिकारियों द्वारा  पूर्व में बारिश से पहले टीम का मुकुंदरा आना बताया जा रहा था, फिर बारिश में जंगल के रास्ते खराब होने का हवाला देते हुए विजिट टाल दी गई। अब अक्टूबर माह के अंतिम सप्ताह में आने की बात कही जा रही है। एनटीसीए की टीम  कब आएगी, इसको लेकर कोई स्पष्ट जानकारी नहीं दी जा रही।</p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br />अभेड़ा बायोलॉजिलक पार्क से गत वर्ष दिसम्बर माह में  रिवाइल्डिंग के लिए मुकुंदरा में शिफ्ट की गई बाघिन एमटी-7 को खुले जंगल में छोड़े जाने का फैसला इसी माह में होगा। क्योंकि, इसी अक्टूबर माह डब्ल्यूआईआई की टीम मुकुंदरा आने की संभावना है। टीम यहां बाघिन के व्यवहार, शिकार सहित फिजिकल वेरिफिकेशन कर हार्ड रिलीज को लेकर रिपोर्ट देगी। जिसके आधार पर खुले जंगल में छोड़े जाने को लेकर निर्णय होगा। <br /><strong>- सुगनाराम जाट, सीसीएफ मुकुंदरा </strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 06 Oct 2025 17:06:18 +0530</pubDate>
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                <title>अब भोपाल पर टिकी कोटा की उम्मीदें</title>
                                    <description><![CDATA[कोटा वन्यजीव विभाग ने मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक व सीजेडए को लिखा पत्र। 
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/now-kota-s-hopes-are-pinned-on-bhopal/article-97789"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-12/257rtrer33.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। अभेड़ा बायोलॉजिकल पार्क में युवा बाघ-बाघिन का जोड़ा लाने की कवायद तेज हो गई है। प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं मुख्य  वन्यजीव प्रतिपालक व भोपाल चिड़िया घर प्रशासन को पत्र भेजा जा चुका है। अब भोपाल जू प्रशासन की स्वीकृति का इंतजार है। भोपाल की रजामंदी मिलने के साथ ही शिफ्टिंग का रास्ता भी साफ हो जाएगा। हालांकि, कोटा वाइल्ड लाइफ डिपार्टमेंट स्वीकृति मिलने की उम्मीद जता रहा है। गौरतलब है कि अभेड़ा बायोलॉजिकल पार्क में बाघ नाहर की मौत व लॉयन नहीं होने से पार्क के राजस्व पर विपरीत असर पड़ा। ऐसे में वन्यजीव विभाग बड़े एनिमल लाने की तैयारी में जुटा है। </p>
<p><strong>4 से 8 वर्ष के बाघ-बाघिन लाना प्राथमिकता</strong><br />वन्यजीव विभाग के डीएफओ अनुराग भटनागर ने बताया कि भोपाल चिड़ियाघर में अच्छी संख्या में बाघ-बाघिन हैं। वहां से कम उम्र का ही जोड़ा लाना प्राथमिकता है। हमारी कोशिश है कि 4 से 8 वर्ष के बीच आयु के बाघ-बाघिन लाने की है। ताकि, ब्रिडिंग होने से बायोलॉजिकल पार्क में इनकी संख्या में इजाफा हो सके और भविष्य में यहां बाघों का कुनबा पनप सके। इस संबंध में मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक को पत्र लिखा जा चुका है। भोपाल चिड़ियाघर के अधिकारियों से भी सम्पर्क किया गया है। </p>
<p><strong>सज्जनगढ़ ने लॉयन देने से किया इंकार  </strong><br />डीएफओ भटनागर ने कहा, उदयपुर के सज्जनगढ़ बायोलॉजिकल पार्क से लॉयन लाया जाना था लेकिन उनके यहां लॉयन सफारी शुरू किए जाने के कारण लॉयन देने से मना दिया। वहीं, सज्जनगढ़ में गुजरात से लॉयन का जोड़ा लाया जा चुका है। ऐसे में एक लॉयन अभेड़ा बायोलॉजिकल पार्क को मिले, इसके लिए मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक को फिर से पत्र लिखा गया है। पार्क के विकास के लिए हर संभव कोशिश की जा रही है। </p>
<p><strong>समय पर चेत जाते तो मिल जाता लॉयन</strong><br />जानकारी के अनुसार अभेड़ा बायोलॉजिकल पार्क में लॉयनेस व लॉयन का जोड़ा लाने की तत्कालीन मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक जयपुर से स्वीकृति दिसम्बर 2022 में ही मिल गई थी। इसके लिए कोटा से वन्यजीव डीएफओ उदयपुर से पत्राचार भी किया गया था। उस समय वहां से हाईब्रिड लॉयन अली कोटा को दिए जाने की हरी झंडी भी मिल गई थी। लेकिन, कोटा वन्यजीव विभाग के तत्कालीन अधिकारी स्वीकृति मिलने के दो साल बाद भी केंद्रिय चिड़ियाघर प्राधिकरण से शिफ्टिंग की स्वीकृति नहीं ले सके। जिसकी वजह से शिफ्टिंग में अनावश्यक देरी होती रही। इसका नतीजा यह रहा कि वर्तमान में सज्जनगढ़ में अब लॉयन सफारी शुरू किए जाने की तैयारी चल रही है। ऐसे में अब उन्होंने कोटा को लॉयन देने में असमर्थता जाहिर कर दी। </p>
<p><strong>लॉयन-टाइगर नहीं होने से घटा राजस्व</strong><br />विभाग से मिली जानकारी के अनुसार, लॉयन व टाइगर जैसे बड़े एनीमल न होने से अभेड़ा बायोलॉजिकल पार्क की सालाना इनकम पर विपरीत असर पड़ रहा है। जनवरी 2023 से 14 अक्टूबर 2024 तक बायोलॉजिकल पार्क को 63 लाख 25 हजार 82 रुपए का ही राजस्व एकत्रित हॉुआ है। राजस्व का यह आंकड़ा करीब दो साल का है। जबकि, गत वर्ष 12 महीनों में ही राजस्व करीब 48 लाख रुपए था। ऐसे में लॉयन, टाइगर व एमू, फॉक्स जैसे वन्यजीव के अभाव में पर्यटकों का अभेड़ा बायोलॉजिकल पार्क के प्रति रुझान कम हो रहा है। जिससे सरकार को होने वाली आय में गिरावट हो रही है। </p>
<p><strong>मगरमच्छ, घड़ियाल आए तो दोगुनी हो आय </strong><br />बायोलॉजिकल पार्क के निर्माण के दौरान 44 एनक्लोजर बनने थे लेकिन प्रथम चरण में मात्र 13 ही बन पाए। जबकि, 31 एनक्लोजर अभी बनने बाकी हैं। जब तक यह एनक्लोजर नहीं बनेंगे तब तक पुराने चिड़ियाघर में मौजूद घड़ियाल, मगरमच्छ, अजगर, बंदर, कछुए, सारस व लव बर्ड्स सहित एक दर्जन से अधिक वन्यजीव बायलॉजिकल पार्क में शिफ्ट नहीं हो पाएंगे। यदि, यह जानवर व पक्षी यहां शिफ्ट किया जाए तो पार्क की कमाई में दोगुना इजाफा होगा। वहीं, पर्यटकों को देखने के लिए ज्यादा एनीमल मिल सकेंगे। </p>
<p><strong>पर्यटक बोले-क्या देखें, बड़े एनिमल तो है ही नहीं</strong><br />विज्ञान नगर निवासी भावेश नागर, कविता नागर, गांधी गृह निवासी मेहमूद भाई ने बताया कि अभेड़ा बायोलॉजिकल पार्क में पहले दो टाइगर थे, लेकिन  कुछ महीनों पर वह भी मर गया। जिसके बाद वन अधिकारी कोई बड़ा एनिमल्स नहीं लाए। वहीं, ऐमू पक्षी लाने की सिर्फ बातें ही की जाती है लेकिन लाते नहीं है। इसके अलावा वर्ष 2022 से ही लॉयन लाने की बात कही जा रही है लेकिन अब तक वह भी नहीं आ सका। ऐसे में यहां बड़े एनिमल तो है ही नहीं तो देखने क्या जाएं। सुविधाएं भी आधी-अधूरी हैं। जबकि, टिकट महंगा है। </p>
<p><strong>इनका कहना</strong><br />अभेड़ा बायोलॉजिकल पार्क के विकास के लिए लगातार प्रयास जारी हैं। भोपाल चिड़ियाघर से बाघ का एक जोड़ा लाने का प्रयास कर रहे हैं। इसके लिए मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक  व भोपाल चिड़ियाघर अधिकारियों को पत्र लिखा जा चुका है। साथ ही ऐमू व चिंकारा सहित अन्य एनीमल लाने की परमिशन मिल चुकी है, जो अगले हफ्ते तक कोटा ले आएंगे। <br /><strong>- अनुराग भटनागर, डीएफओ वन्यजीव विभाग</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 16 Dec 2024 15:58:53 +0530</pubDate>
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                <title>असर खबर का - 2 साल बाद सलाखों से आजाद होंगे बाघिन टी-114 के दोनों शावक</title>
                                    <description><![CDATA[मुकुंदरा व रामगढ़ टाइगर रिजर्व में होगी रिवाइल्डिंग।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/effect-of-news---both-cubs-of-tigress-t-114-will-be-free-from-the-bars-after-2-years/article-96425"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-12/257rtrer3.png" alt=""></a><br /><p>कोटा । अभेड़ा बॉयोलोजिकल पार्क के पिंजरे में कैद बाघिन टी-114 के दोनों शावकों को आखिरकार 2 साल बाद आजादी मिलेगी।  अब उन्हें मुकुंदरा व रामगढ़ टाइगर रिजर्व में रिलीज किया जाएगा। इसके लिए भारत सरकार के पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय वन्यजीव प्रभाग से आदेश जारी हो चुके हैं। इसमें मादा शावक को मुकंदरा टाइगर रिजर्व तो नर को रामगढ़ टाइगर रिजर्व में रिलीज किया जाएगा। रिलीज से पहले इन दोनों शावकों को रेडियो कॉलर लगाया जाएगा। </p>
<p><strong>5-5 हैक्टेयर के एनक्लोजर में होगी रिवाइल्डिंग</strong><br />दो साल से 3 गुना 3 साइज के पिंजरे (नाइट शेल्टर) में रह रहे शावक अब 5-5 हैक्टेयर के एनक्लोजर  में रहेंगे। जहां उनकी रिवाइल्डिंग की जाएगी। मुकुंदरा के दरा अभयारणय में लगभग पोर्टेबल एनक्लोजर का काम पूरा हो चुका है। वहीं, रामगढ़ टाइगर रिजर्व की जेतपुर रेंज में पहले से ही पोर्टेबल एनक्लोजर बना हुआ है।  जहां दोनों शावक जंगल की परिस्थितियों के मुताबिक खुद को ढाल सकेंगे। </p>
<p><strong>इन शर्तों का करना होगा पालन</strong><br />- रेडियो कॉर्लर व रिलीजिंग का कार्य कड़ाई से राज्य वन विभाग की देखरेख में किया जाएगा।<br />- पकड़ने और छोड़ने के बाद की जटिलताओं से बचने के लिए भी उचित सावधानी बरती जाए। -इस आॅपरेशन के दौरान बाघ शावकों को कम से कम नुकसान पहुंचे। <br />- चीफ वाइल्ड लाइफ वार्डन व राज्य वन विभाग द्वारा रेडियो कॉलरिंग व रिलीजिंग के दौरान और बाद में नियमित निगरानी की जाएगी। <br />- एनटीसी प्रोटोकॉल की पालना सुनिश्चित करनी होगी। सहित अन्य जरूरी निर्देश दिए गए हैं।  </p>
<p><strong>नवज्योति ने लगातार उठाया मामला</strong><br />बाघिन टी-114 के दोनों शावकों को ढाई साल की उम्र में गत वर्ष 1 फरवरी को रणथम्भौर से अभेड़ा बायोलॉजिकल पार्क में शिफ्ट किया गया था। तब, 6 माह बाद मुकुंदरा में शिफ्ट किए जाने के आदेश थे। लेकिन, शिफ्टिंग में लगातार देरी होने के कारण इनके जंगल में सरवाइव करने को लेकर अंदेशा बढ़ने लगा और वन्यजीवों की शिफ्टिंग की मांग उठने लगी। 2 साल तक शावकों की शिफ्टिंग को लेकर फैसला नहीं होने पर दैनिक नवज्योति वन्यजीव प्रेमियों की आवाज बना और वाइल्ड लाइफ एक्सपर्ट के नजरिए से लगातार खबरें प्रकाशित कर वन अधिकारियों को शिफ्टिंग में अनावश्यक देरी से रिवाइल्डिंग में बढ़ती चुनौतियां, शावकों का व्यवहार, जंगल में सरवाइवल, शिकार की कला, जंगल की विषम परिस्थितियों में खुद को ढालने को लेकर संशय सहित अन्य चुनौतियों पर ध्यान आकर्षित किया था। </p>
<p><strong>17 को खबर छपी, 26 को आदेश हो गए</strong><br />दैनिक नवज्योति ने हाल ही में 17 नवम्बर को हुक्मदारों के दोहरे नजरिए में फंसी बाघों की तक्दीर... शीर्षक से खबर प्रकाशित कर   2 साल के बाघ को शावक मानना और सरिस्का के ढाई साल के एसटी 2303 को सब एडल्ट मान रामगढ़ टाइगर रिजर्व  में शिफ्ट करने पर एक ही ऐज कैटेगिरी के शावकों के प्रति दोहरा रवैया अपनाने को लेकर विशलेषणात्मक व तथ्यात्मक खबर प्रकाशित की थी। इसके बाद 26 नवम्बर को दोनों शावकों की शिफ्टिंग के आदेश जारी हो गए। हालांकि नवज्योति, अगस्त 2023 से ही लगातार शावकों की रिवाइल्डिंग के लिए पांच हैक्टेयर के एनक्लोजर में शिफ्ट किए जाने की आवाज उठाता रहा है। आखिरकार नवज्योति के प्रयास रंग लाए और 3 गुणा 3 के छोटे पिंजरे से आजादी मिल सकेगी। </p>
<p><strong>अब मुकुंदरा में हो जाएंगे तीन बाघ </strong><br />मादा शावक के मुकुंदरा में शिफ्ट होने के साथ ही यहां बाघों की संख्या 2 से बढ़कर 3 हो जाएगी। यहां नर बाघ एमटी-5 व बाघिन एमटी-6 विचरण कर रही है। वहीं, नर शावक के आने से रामगढ़ टाइगर रिजर्व में बाघों की संख्या 5 से बढ़कर 6 हो जाएगी। </p>
<p>अभेड़ा बायोलॉजिकल पार्क में पल रहे दोनों शावकों की शिफ्टिंग को लेकर आदेश जारी हो चुके हैं। मुकुंदरा व रामगढ़ टाइगर रिजर्व  के डीएफओ से इस संबंध में बात हो चुकी है। दोनों अधिकारियों के कहने पर अभेड़ा से शावकों को शिफ्ट कर दिया जाएगा। हमारी तरफ से तैयारियां पूरी है।<br /><strong>- अनुराग भटनागर, उपवन संरक्षक, वन्यजीव विभाग कोटा </strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 02 Dec 2024 15:08:35 +0530</pubDate>
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                <title>अब बारिश के बाद मुकुंदरा में होगी टाइग्रेस की एंट्री</title>
                                    <description><![CDATA[रणथम्भौर टाइगर रिजर्व में होने लगी बाघिन की सर्चिंग।
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/now-after-the-rain--tigress-will-enter-mukundra/article-82556"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-06/ab-baarish-k-bd-mukundara-me-hogi-tigeress-ki-entry...kota-news-24-06-2024.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। मानसून की दस्तक के साथ ही मुकुंदरा  हिल्स टाइगर रिजर्व में एक ओर बाघिन की एंट्री हो सकती है। हालांकि, रणथम्भौर में बाघिन की सर्चिंग को लेकर मंथन तेज हो गया है। लंबे समय से टाइग्रेस लाने के लिए मुकुंदरा प्रशासन की ओर से लगातार प्रयास किए जा रहे थे। पूर्व में भी सीडब्ल्यूएलडब्ल्यू को पत्र लिखे जा चुके हैं। जहां से परमिशन मिलने के बाद कवायद तेज कर दी गई है। बता दें, एमएचटीआर में वर्तमान में एक बाघ-बाघिन विचरण कर रहे हैं। बाघ एमटी-5 को 4 नवम्बर 2022 को शिफ्ट किया गया था। वहीं, बाघिन एमटी-6 को गत वर्ष 9 अप्रेल को लाया गया था। करीब एक साल बाद दोनों का आमना-सामना हुआ। दोनों को एक साथ भी देखा गया।  इसके बावजूद मुकुंदरा अब तक आबाद नहीं हो सका। जबकि, इसके ठीक उलट दो साल में ही रामगढ़ टाइगर रिजर्व में बाघों की संख्या दो से छह हो गई। ऐसे में मुकुंदरा प्रशासन की ओर से एक टाइगर पर दो या तीन बाघिन का रेशो पूरा किए जाने का प्रयास शुरू किए गए हैं। </p>
<p><strong>पहले बाघिन फिर जोड़ा लाया जाएगा</strong><br />मुकुंदरा हिल्स टाइगर रिजर्व के डीएफओ अभिमन्यू सहारण ने बताया कि गत वर्ष मुकुंदरा हिल्स टाइगर रिजर्व में एनटीसीए से एक बाघ और दो बाघिन लाए जाने की स्वीकृति मिल चुकी है। लेकिन, पहले फेज में एक बाधिन लाई जाएगी। इसके लिए मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक को पत्र लिख चुके हैं। वहां से परमिशन भी मिल चुकी है। हालांकि, अभी गर्मी को देखते हुए शिफ्टिंग अगले महीने जुलाई में किए जाने की कोशिश है। मानसून की दस्तक के साथ बारिश का दौर शुरू होने पर मौसम में नमी आएगी। इसके बाद ही बाधिन लाई जाएगी। </p>
<p><strong>समान जीन पुल में इन ब्रिडिंग रोकने की कवायद</strong><br />उप वन संरक्षक सहारण ने बताया कि एक ओर बाघिन लाए जाने के जारी है। रणथम्भौर में भी कवायद शुरू हो गई है। मुकुंदरा में विचरण कर रहे टाइगर-टाइग्रेस से आने वाली बाघिन का बल्ड रिलेशन न हो। इसलिए, रणथम्भौर में बाघिन को चिन्हित करने से पहले उनकी फैमिली हिस्ट्री देखी जा रही है, ताकि, समान जीनपुल में इनब्रिडिंग को रोका जा सके। बाघिन लाने के बाद फिर बाघ लाए जाने की परमिशन ली जाएगी। हमारी ओर से भी तैयारी पूरी की जा रही है।</p>
<p><strong>नॉन ट्यूरिज्म जोन में सर्चिंग</strong><br />सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, रणथम्भौर में बाघिन की सर्चिंग नॉन ट्यूरिज्म जोन में दो पारियों में वनकर्मी कर रहे हैं। लेकिन, वन्यजीव प्रेमियों का कहना है कि वर्तमान में गर्मी व उमस अधिक होने से फिलहाल बाघ-बाघिन को ट्रैंकुलाइज करने व एक जगह से दूसरी जगह शिफ्ट नहीं किया जा सकता। क्योंकि, गर्मी में वन्यजीवों को किसी दूसरी जगह शिफ्ट किए जाने से किया वह स्ट्रेस में आते हैं। वहीं, जुलाई माह में बारिश का दौर शुरू होने पर भी शिफ्टिंग प्रक्रिया प्रभावित होती है। ऐसे में अभी शिफ्टिंग की संभावना कम ही नजर आती है। </p>
<p><strong>इधर, ट्रांजिक्ट लाइन सेंसस जारी </strong><br />डीएफओ सहारण ने बताया कि इन दिनों मुकुंदरा की सभी रैंजों में ट्रांजिक्ट लाइन सेंसस जारी है। इस पद्धिति के माध्यम से वन्यजीवों की गणना की जा रही है। वर्तमान में  गागरोन, राउंठा और जवाहर सागर रैंज में फेस फॉर व ट्रांजिक्ट लाइन सेंसस से गणना की जा रही है। जबकि, दरा, कोलीपुरा और बोराबास रैंज में यह गणना पूरी हो चुकी है। यह गणना अंतिम चरण में है। इसके बाद सभी रैंजों का डेटा एकत्रित कर एनटीसीए को भेजा जाएगा। जहां सोफ्टवेयर के माध्यम से एनालिसस होगा। इसके बाद रिपोर्ट जारी की जाएगी। जिसके बाद पता लग सकेगा कि मुकुंदरा में कितने जानवर बढ़े व घटे हैं।</p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br />मुकुंदरा में एक और बाघिन लाए जाने की तैयारी शुरू कर दी गई है। रणथम्भौर में भी सर्चिंग की जा रही है। जल्द ही मुकुंदरा में नई बाघिन की एंट्री हो सकती है। बारिश के बाद मौसम में नमी आने पर बाघिन शिफ्टिंग की प्रक्रिया तेज हो जाएगी। मुकुंदरा को आबाद करने व बेहतर व्यवस्थाएं बनाने के लिए लगातार प्रयास जारी है। <br /><strong>- अभिमन्यू सहारण, उप वन संरक्षक, मुकुंदरा हिल्स टाइगर रिजर्व</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 24 Jun 2024 17:38:34 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>मुकुंदरा में अब जल्द होगी एक और टाइग्रेस की एंट्री</title>
                                    <description><![CDATA[सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, गत वर्ष मुकुंदरा हिल्स टाइगर रिजर्व में एनटीसीए से एक बाघ और दो बाघिन लाए जाने की स्वीकृति मिल चुकी है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/now-another-tigress-will-soon-enter-mukundara/article-76211"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-04/mukundara-me-ab-jld-hogi-tigeress-ki-entry...kota-news-29-04-2024.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। मुकुंदरा हिल्स टाइगर रिजर्व में अब जल्द ही एक ओर बाघिन की एंट्री होगी। इसके लिए रणथम्भौर में बाघिन  की सर्चिंग भी शुरू कर दी गई है। लंबे समय से टाइग्रेस लाने के लिए मुकुंदरा प्रशासन की ओर से प्रयास किए जा रहे थे। पूर्व में भी सीडब्ल्यूएलडब्ल्यू को पत्र लिखे गए, जहां से परमिशन मिलने के बाद कवायद तेज कर दी गई है। बता दें, एमएचटीआर में वर्तमान में एक बाघ-बाघिन विचरण कर रहे हैं। बाघ एमटी-5 को 4 नवम्बर 2022 को शिफ्ट किया गया था। वहीं, बाघिन एमटी-2301 को गत वर्ष 9 अप्रेल को लाया गया था। करीब एक बीत जाने के बाद भी दोनों का आमना-सामना नहीं हुआ। जिसकी वजह से मुकुंदरा अब तक आबाद नहीं हो सका। जबकि, इसके ठीक उलट दो साल में ही रामगढ़ टाइगर रिजर्व में बाघों की संख्या दो से छह हो गई। ऐसे में मुकुंदरा प्रशासन की ओर से एक टाइगर पर दो या तीन बाघिन का रेशो पूरा किए जाने का प्रयास शुरू किए गए हैं। </p>
<p><strong>बाघ बोराबांस व बाघिन का कोलीपुरा में मूवमेंट</strong><br />मुकुंदरा में तैनात वनकर्मियों ने बताया कि वर्तमान में बाघ का मूवमेंट बोराबांस रैंज व बाघिन का कोलीपुरा में बना हुआ है। दोनों कोलीपुरा में भी साथ नजर आ चुके हैं। लेकिन, मेटिंग होने  की स्पष्ट जानकारी नहीं है। हालांकि, एक और बाघिन आने से बाघ एमटी-5 का भटकाव रुकेगा। गौरतलब है कि बाघ कई बार चंबल नदी पार कर लंबी दूरी तय कर चुका है। कुछ माह पहले ही वह मध्यप्रदेश की सीमा तक पहुंच गया था। </p>
<p><strong>एनटीसीए से मिल चुकी एक बाघ व दो बाघिन की परमिशन</strong><br />सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, गत वर्ष मुकुंदरा हिल्स टाइगर रिजर्व में एनटीसीए से एक बाघ और दो बाघिन लाए जाने की स्वीकृति मिल चुकी है। लेकिन, स्थानीय स्तर पर बाघ-बाघिन का जोड़ा लाने के सार्थक प्रयास नहीं हुए। हाल ही में अजमेर से ट्रांसफर होकर आए नए उपवन संरक्षक अभिमन्यू  सहारण ने इसके प्रयास तेज किए और पहले बाघिन लाए जाने की आवश्यकता पर बल देते हुए मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक को पत्र लिखे। जहां से परमिशन मिलने के बाद रणथम्भौर में बाघिन की सर्चिंग शुरू कर दी गई है। यहां से अमूमन उन बाघ-बाघिन को शिफ्ट किया जाता है, जो अब तक टेरिटरी नहीं बना पाए हों। ऐसे टाइगर रणथम्भौर के पेरिफेरल क्षेत्र में विचरण करते हैं। </p>
<p><strong>बाघिन के चयन से पहले देखी जा रही फैमिली हिस्ट्री</strong><br />मुकुंदरा हिल्स टाइगर रिजर्व के डीएफओ अभिमन्यू सहारण ने बताया कि एक ओर बाघिन लाए जाने के जारी है। रणथम्भौर में भी कवायद शुरू हो गई है। मुकुंदरा में विचरण कर रहे टाइगर-टाइग्रेस से आने वाली बाघिन का बल्ड रिलेशन न हो। इसलिए, रणथम्भौर में बाघिन को चिन्हित करने से पहले उनकी फैमिली हिस्ट्री देखी जा रही है, ताकि, समान जीनपुल में इनब्रिडिंग को रोका जा सके। बाघिन लाने के बाद फिर बाघ लाए जाने की परमिशन ली जाएगी। हमारी ओर से भी तैयारी पूरी की जा रही है।</p>
<p><strong>नॉन ट्यूरिज्म जोन दो पारियों में सर्चिंग</strong><br />जानकारी के अनुसार, रणथम्भौर में बाघिन की सर्चिंग नॉन ट्यूरिज्म जोन में दो पारियों में वनकर्मी कर रहे हैं। लेकिन, वन्यजीव प्रेमियों का कहना है कि वर्तमान में गर्मी के तेवर तीखे हैं, अभी मई व जून दोे महीने तेज गर्मी रहने से बाघ-बाघिन को ट्रैंकुलाइज करने व एक जगह से दूसरी जगह शिफ्ट नहीं किए जाने की संभावना है। क्योंकि, गर्मी में वन्यजीवों को किसी दूसरी जगह शिफ्ट किया जाता है तो वह स्ट्रेस में आता है। वहीं, जुलाई माह में बारिश का दौर शुरू होने पर भी शिफ्टिंग प्रक्रिया प्रभावित होती है। ऐसे में अभी शिफ्टिंग की संभावना कम ही नजर आती है। </p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br />मुकुंदरा में एक और बाघिन लाए जाने की तैयारी शुरू कर दी गई है। रणथम्भौर में भी सर्चिंग की जा रही है। जल्द ही मुकुंदरा में नई बाघिन की एंट्री हो सकती है। मुकुंदरा को आबाद करने व बेहतर व्यवस्थाएं बनाने के लिए लगातार प्रयास जारी है।<br /><strong>- अभिमन्यू सहारण, उप वन संरक्षक, मुकुंदरा हिल्स टाइगर रिजर्व</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 29 Apr 2024 15:20:27 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>नाहरगढ़ बायोलॉजिकल पार्क में जल्द आएगी बाघिन</title>
                                    <description><![CDATA[नाहरगढ़ बायोलॉजिकल पार्क में जल्द नया मेहमान आने वाला है। जयपुर से महाराष्ट्र के पुणे स्थित राजीव गांधी जूलोजिकल पार्क गई वन विभाग की टीम बाघिन को लेकर मंगलवार को जयपुर के लिए रवाना हो गई है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/tigress-will-soon-come-to-nahargarh-biological-park/article-71890"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-03/transfer-(8).png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। नाहरगढ़ बायोलॉजिकल पार्क में जल्द नया मेहमान आने वाला है। जयपुर से महाराष्ट्र के पुणे स्थित राजीव गांधी जूलोजिकल पार्क गई वन विभाग की टीम बाघिन को लेकर मंगलवार को जयपुर के लिए रवाना हो गई है। बाघिन की उम्र क़रीब साढ़े सात साल बताई जा रही है। उप वन संरक्षक (वन्यजीव) चिड़ियाघर जयपुर जगदीश गुप्ता ने बताया कि वरिष्ठ वन्यजीव चिकित्सक डॉ.अरविंद माथुर के नेतृत्व में टीम पुणे भेजी गई है। गुरुवार सुबह बाघिन को लेकर टीम जयपुर स्थित नाहरगढ़ बायोलॉजिकल पार्क पहुँचेगी। डॉ अरविंद माथुर ने बताया कि सीज़ेडए के ट्रांसपोटेशन प्रोटोकॉल के अनुसार बाघिन का ट्रांसपोटेशन किया जा रहा है। यहाँ लाए जाने के बाद बाघिन को 21 दिनो के क्वॉरंटीन समय में रखा जाएगा। </p>
<p>बाघिन का नाम ‘भक्ति’ बताया जा रहा है। जानकारी के अनुसार शिवाजी के साथ इसका जोड़ा बनाकर रखे जाने की योजना है। इससे पहले बाघिन को जयपुर लाने सम्बन्धी ख़बर की जानकारी सबसे पहले दैनिक नवज्योति ने दी थी।</p>
<p>ग़ौरतलब है कि एक्सचेंज प्रोग्राम के तहत राजीव गांधी जूलोजिकल पार्क को दो मादा और एक नर वुल्फ़, एक मादा दिया गया है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 05 Mar 2024 16:54:37 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>बाघिन को रास आया मुकुंदरा, अभेड़ा में पल रहे शावकों को दरा में छोड़ने के भेजे प्रस्ताव</title>
                                    <description><![CDATA[वन्यजीव चिकित्सक टाइग्रेस के स्वास्थ्य का निरीक्षण कर रहे हैं। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/mukundra-liked-tigress--sent-proposals-to-leave-the-cubs-growing-in-abheda-in-dara/article-54429"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-08/tigeress-ko-raas-aya-mukundara,-abheda-me-pal-rhe-shavako-ko-dara-me-chorne-k-bheje--prastav...kota-news-12-08-2023.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। मुकुंदरा हिल्स टाइगर रिजर्व बाघिन टी-2301 को रास आने लगा है। वह शुक्रवार को दिनभर चहल-कदमी करती नजर आई। सेल्जर एनक्लोजर में कभी पानी के पौंड में तो कभी पेड़ों की छांव के नीचे आराम करती देखी गई। गुरुवार रात को एक हैक्टेयर में फैले एनक्लोजर का चप्पे-चप्पे को नापा। एनक्लोजर के पीछे बने दो मंजिला वॉच टावर से मॉनिटरिंग में लगी टीम 24 घंटे बाघिन की गतिविधियों पर नजर बनाए हुए हैं और पल-पल का अपडेट नोट कर डीएफओ आॅफिस में बने कंट्रोल रूम पर भेज रहे हैं। अधिकारियों का कहना है, बाघिन समान्य व्यवहार के साथ विचरण कर रही है और पूरी तरह से स्वस्थ है। वन्यजीव चिकित्सक टाइग्रेस के स्वास्थ्य का निरीक्षण कर रहे हैं। </p>
<p><strong>रेडियोकॉलर से हो रही बाघिन की मॉनिटरिंग </strong><br />सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार बाघिन के गले में जीपीएस बेस्ड रेडियोकॉलर लगा हुआ है। जिसके द्वारा 24 घंटे मॉनिटरिंग की जा रही है। इसके लिए करीब 12 कर्मचारियों की टीम गठित की गई है। जिसमें 3-3 कर्मचारियों को तीन टीमों में बांटा गया है। वहीं, एक रिजर्व टीम भी गठित की गई है। प्रत्येक टीम 8-8 घंटे बाघिन के पल-पल के मूवमेंट पर नजर रख रही है। </p>
<p><strong>बकरे का कर रहे लाइव शिकार </strong><br />अभेड़ा बायोलॉजिकल पार्क के अधिकारियों के अनुसार दोनों शावकों को गत 21 जून से लाइव शिकार दिया जा रहा है। पहले दिन 8 किलो का बकरा इनके सामने छोड़ा गया था। जिसका इन्होंने शिकार किया। पहले दिन दोनों ने मिलकर 6 किलो मांस खाया था और 2 किलो वेस्ट रहा था। हर मंगलवार को बाघ-बाघिन को कराल में लेने के बाद दोनों शावकों को टाइगर के 4 हजार स्वायर मीटर के एनक्लोजर में खुला छोड़ते हैं। इस दौरान बकरा भी छोड़ा जाता है। जहां दोनों दौड़भाग कर शिकार करते हैं। मंगलवार को सूर्य अस्त होने के साथ ही कराल के गेट खोल दिए जाते हैं, जहां से दोनों वापस नाइट शेल्टर में पहुंच जाते हैं। इस तरह सप्ताह में एक दिन शावक टाइगर के डिस्पले एरिया में खुले में विचरण करते हैं। </p>
<p><strong>शावकों को दरा में छोड़ने का भेजा प्रस्ताव</strong><br />अभेड़ा बायोलॉजिकल पार्क में पल रहे बाघिन टी-2301 के भाई-बहन दोनों शावकोें को इसी माह में मुकुंदरा के दरा एनक्लोजर में शिफ्ट किया जा सकता है। गत माह जुलाई में एनटीसीए द्वारा गठित कमेटी की हुई बैठक में अधिकारियों ने इस संबंध में आपसी सहमति से निर्णय लेकर मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक को प्रस्ताव भिजवा दिए थे। हालांकि वहां से अभी तक इस बारे में वन्यजीव विभाग को कोई दिशा-निर्देश नहीं मिले हैं। बता दें, स्वीकृति मिलने के बाद दोनों शावकों को दरा के 28 हैक्टेयर के एनक्लोजर में शिफ्ट किया जाएगा। </p>
<p><strong>जंगल के लिए हो रहे तैयार</strong><br />अभेड़ा में पल रहे शावकों को इन दिनों री-वाइल्डनिंग की ट्रैनिंग दी जा रही है। उनके सामने 8 से 14 किलो का बकरा छोड़ा जा रहा है। जिसका वे लाइव शिकार कर रहे हैं। वहीं, घात लगना, शिकार का मूवमेंट समझना फिर अटैक करना सहित शिकार करने की कला सीख रहे हैं। साथ ही पंजों की पकड़ और नाखूनों की धार तेज कर रहे हैं। दोनों शावकों की उम्र करीब 8 माह हो चुकी है। इनमें से एक बाघ और दूसरी बाघिन हैं। </p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br />रणथम्भौर से मुकुंदरा टाइगर हिल्स रिजर्व में ट्रांसलोकेट की गई बाघिन 2301 पूरी तरह से स्वस्थ है। समान्य व्यवहार के साथ विचरण कर रही है। उसके स्वास्थ्य का निरीक्षण कार्यालय पशु चिकित्सक द्वारा की जा रही है। वहीं, 24 घंटे बाघिन की मॉनिटरिंग की जा रही है। <br /><strong>- बीजो जॉय, डीएफओ, मुकुंदरा हिल्स टाइगर रिजर्व</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 12 Aug 2023 14:14:32 +0530</pubDate>
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                <title>बाघिन टी-69 ने दिया दो शावकों को जन्म</title>
                                    <description><![CDATA[शावकों की उम्र करीब दो माह की बताई जा रही है। बाघिन टी-69 ने चौथी बार शावकों को जन्म दिया है। पहली बार में बाघिन ने एक शावक को जन्म दिया था।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/sawai-madhopur/tigress-t-69-gave-birth-to-two-cubs/article-46581"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-05/x-23.png" alt=""></a><br /><p>सवाईमाधोपुर। रणथम्भौर टाइगर रिजर्व में बाघिन टी-69 ने दो शावकों को जन्म दिया है। खण्डार रेंज में बाघिन टी-69 दो शावकों के साथ सोमवार को वन विभाग के फोटो ट्रैप कैमरे में कैद हुई है। एहतियात के तौर पर मॉनिटरिंग में इजाफा कर दिया गया है। शावकों की उम्र करीब दो माह की बताई जा रही है। बाघिन टी-69 ने चौथी बार शावकों को जन्म दिया है। पहली बार में बाघिन ने एक शावक को जन्म दिया था। जिसे वन विभाग ने टी-110 नाम दिया था। वन विभाग की ओर से इस बाघ टी-110 को मुकुंदरा शिफ्ट किया गया था, जहां उसे एमटी-5 नाम से पहचाना गया। इसके बाद बाघिन ने दो शावकों को जन्म दिया। इसमें एक मेल व फीमेल शावक था। इन्हें विभाग की ओर से टी-122 व टी-123 नाम दिया गया। मई 2021 में यह बाघिन दो शावकों के साथ ट्रैप कैमरे में कैद हुई थी। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>सवाई माधोपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 25 May 2023 10:00:03 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>खुशखबरी : शावकों की किलकारी से गूंजा रामगढ़, बाघिन ने 2 शावकों को दिया जन्म!</title>
                                    <description><![CDATA[ग्रामीणों व वनसूत्रों ने बाघिन द्वारा 2 शावकों को जन्म देने की बात कहीं  है लेकिन रामगढ़ टाइगर रिजर्व से जुड़े अधिकारियों ने इसकी अधिकारिक पुष्टि नहीं की है। लेकिन जंगल से जुड़े गांवों में यह चर्चा आम है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/good-news--ramgarh-echoed-with-the-cries-of-the-cubs--the-tigress-gave-birth-to-2-cubs/article-38069"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-02/khushkhabri--ramgarh-mei-kilkari-gunji...kota-news..23.2.2023.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। रामगढ़ टाइगर रिजर्व में आखिरकार वो घड़ी आ गई जिसका वन्यजीव प्रेमियों व शहरवासियों को बरसों से इंतजार था। रामगढ़ के जंगलों में शावकों की किलकारी गूंज उठी। बाघिन आरवीटी-2 ने जेतपुरा रेंज में शावकों को जन्म दिया है।  ग्रामीणों व विश्वसनीय सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार बाघिन ने 2 शावकों को जन्म दिया है। गत वर्ष सितम्बर माह में बाघ-बाघिन की सफल मेटिंग हो चुकी थी। शावकों को जन्म देने का समय भी पूरा हो चुका है। वहीं, रेडियोकॉलर से बाघिन के एक-डेढ़ माह से एक ही जगह बार-बार आने जाने की लॉकेशन मिल रही है। इसके अलावा गर्भकाल के दौरान बाघिन का वजन बढ़ने से शरीर में भारीपन नजर आ रहा था, जो अभी समान्य दिखाई दे रहा है। वहीं, दो शावकों को देखा गया है। ग्रामीणों ने भी शावकों के होने की पुष्टि की है। सुरक्षा कारणों के चलते शावकों के जन्म स्थान व रेंज को खबर में नहीं लिखा जा रहा है। </p>
<p><strong>गाय का किया शिकार</strong> <br />जंगल से सटे हरिपुरा की झौंपड़िया गांव के ग्रामीणों ने बताया कि कुछ दिन पहले पालतू गाय जंगल में चरने गई थी। इस दौरान श्वान भी साथ था। उनके वापस नहीं लौटने पर अगले दिन ग्रामीण जंगल में गए थे। वहां गाय व श्वान मृत मिले। ग्रामीणों द्वारा 2 शावकों को देखे जाने की बात कही जा रही है। वहीं, फोरेस्ट से जुड़े सूत्रों ने भी इसकी पुष्टि की है। </p>
<p><strong>शावकों की अधिकारिक पुष्टि नहीं</strong><br />ग्रामीणों व वनसूत्रों ने बाघिन द्वारा 2 शावकों को जन्म देने की बात कहीं  है लेकिन रामगढ़ टाइगर रिजर्व से जुड़े अधिकारियों ने इसकी अधिकारिक पुष्टि नहीं की है। लेकिन जंगल से जुड़े गांवों में यह चर्चा आम है। </p>
<p><strong>रणथम्भौर में दिया था 4 शावकों को जन्म</strong><br />बाघिन आरवीटी-2 बाघिन मछली की नाती और सुंदरी यानी टी-17 की बेटी है। इसका जन्म 29 जून 2012 को रणथम्भौर में हुआ था। इसने 8 साल की उम्र में 4 शावकों को जन्म दिया था। जिसमें से एक शावक की मौत हो गई थी। </p>
<p><strong>17 जुलाई को रामगढ़ आई थी आरटीवी-2</strong><br />बाघिन आरवीटी-2 यानी टी-102 को 17 जुलाई 2022 को रणथम्भौर के आमाघाटी वन क्षेत्र से रामगढ़ टाइगर रिजर्व में शिफ्ट किया गया था। एक माह माह बाद सॉफ्ट एनक्लोजर से हार्ड रिलीज किया गया था। सितम्बर माह में बाघ आरवीटी-1 से पहली बार मुलाकात हुई थी।  इसके बाद दोनों में नजदीकियां बढ़ी और सफल मेटिंग हुई थी। </p>
<p>ऐसी सूचना मिली है लेकिन स्पष्ट रूप से नहीं कह सकते। जब तक कैमरों में शावकों की तस्वीर कैद नहीं होगी और आंखों से न देख लें तब तक शावकों के जन्म के बारे में स्पष्ट रूप से नहीं कह सकते। <br /><strong>- संजीव कुमार शर्मा, डीएफओ रामगढ़ विषधारी टाइगर रिजर्व </strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 23 Feb 2023 14:41:14 +0530</pubDate>
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