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                <title>ratio - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                            <item>
                <title>बेटी बचाओ अभियान का असर, भारत में पुरुष-महिला लिंगानुपात बढ़कर 929 हुआ</title>
                                    <description><![CDATA[ बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ योजना ने बड़ा असर दिखाया है। जन्म के समय लिंगानुपात 2014-15 के 918 से बढ़कर 2024-25 में 929 पहुंच गया। वहीं माध्यमिक स्तर पर लड़कियों का नामांकन 75.51% से बढ़कर 80.2% हो गया। सरकार ने इसे बालिका सुरक्षा, शिक्षा और सशक्तिकरण की दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया है।
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/impact-of-beti-bachao-abhiyan-male-female-ratio-in-india/article-156888"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-06/111200-x-600-px)-(3)12.png" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal"><span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">नई दिल्ली। सरकार की विभिन्न योजनाओं और प्रयासों से देश में पुरुष-महिला लिंगानुपात बढ़कर 929 हो गया है। सरकार की प्रमुख पहल बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ, बालिकाओं की जीवन रक्षा, संरक्षण और सशक्तिकरण को सुनिश्चित करने जैसी योजनाओं आदि के कारण यह उपलब्धि संभव हो सकी है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के स्वास्थ्य प्रबंधन सूचना प्रणाली (एचएमआईएस) के आंकड़ों के अनुसार, राष्ट्रीय स्तर पर जन्म के समय लिंग अनुपात (एसआरबी) 2014-15 में 918 से बढ़कर 2024-25 में 929 हो गया है। </span></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">यह भेदभावपूर्ण लिंग चयन को रोकने और संस्थागत प्रसव को बढ़ावा देने की दिशा में किये गये निरंतर प्रयासों को दर्शाता है। 2015 में शुरू की गयी बीबीबीपी योजना, घटते बाल लिंग अनुपात और व्यापक लिंग आधारित भेदभाव के जवाब में शुरू की गयी थी। यह योजना महिला एवं बाल विकास मंत्रालय (एमडब्ल्यूसीडी), स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय (एमओएचडब्ल्यू) और शिक्षा मंत्रालय (एमओई) की संयुक्त पहल है। पिछले ग्यारह वर्षों में बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ (बीबीबीपी) एक लक्षित नीतिगत पहल से आगे बढ़कर देशव्यापी जन-आंदोलन बन गया है, जिसने सरकार, मीडिया, नागरिक समाज और समुदायों सहित विभिन्न हितधारकों को सक्रिय रूप से जोडऩे का कार्य किया है। यह पहल बालिका के जन्म के समय उसकी गरिमा, उसकी सुरक्षा तथा प्रारंभिक बाल्यावस्था देखभाल और शिक्षा तक उसकी पहुंच के महत्व को रेखांकित करते हुए उसके समग्र विकास के लिए अनुकूल वातावरण के निर्माण को प्रोत्साहित करती है। शिक्षा क्षेत्र में लड़कियों की स्कूली शिक्षा तक पहुंच बढ़ाने में उल्लेखनीय प्रगति हुई है। </span></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">शिक्षा मंत्रालय के एकीकृत जिला शिक्षा सूचना प्रणाली (यूडीआईएसई) के आंकड़ों के अनुसार, माध्यमिक स्तर पर लड़कियों का नामांकन 2014-15 में 75.51 प्रतिशत से बढ़कर 2024-25 में 80.2 प्रतिशत हो गया है, जो बेहतर नामांकन दर और आगे की पढ़ाई जारी रखने की दर को दर्शाता है। बीबीबीपी योजना सुरक्षित और गरिमापूर्ण जन्म से शुरू होकर, प्रारंभिक बचपन की देखभाल सुनिश्चित करने और लड़कियों की शिक्षा और सशक्तिकरण को बढ़ावा देने तक, जीवनचक्र दृष्टिकोण पर बल देती है। यह योजना निरंतर समर्थन, सामुदायिक सहभागिता और मंत्रालयों तथा राज्यों/ केंद्र शासित प्रदेशों के बीच समन्वय के माध्यम से व्यावहारिक परिवर्तन को मजबूत करती है। </span></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">महिला एवं बाल विकास मंत्रालय बीबीबीपी ढांचे को मजबूत करने की अपनी प्रतिबद्धता को दोहराता है, यह सुनिश्चित करते हुए कि देश में प्रत्येक बालिका को संरक्षित, शिक्षित और सशक्त बनाया जाए, जिससे महिला नेतृत्व वाले विकास की परिकल्पना में योगदान दिया जा सके।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';"> </span></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';"> </span></p>
<p class="MsoNormal"> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 13 Jun 2026 15:15:03 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
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                <title>दस साल में 11,722 प्रसूताओं की जान बचाई, अस्पतालों में 95 फीसदी की डिलेवरी हो रही जो राष्ट्रीय औसत से ज्यादा</title>
                                    <description><![CDATA[प्रदेश में मातृ मुत्यु दर कम होने की राहत भरी खबर है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/in-ten-years-11722-obstetricians-saved-their-lives-in-hospitals/article-121466"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-07/news-(1)38.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। प्रदेश में मातृ मुत्यु दर कम होने की राहत भरी खबर है। सालाना औसतन 18 लाख महिलाओं के प्रसव होते हैं। ऐसे में दस साल पहले जहां हर एक लाख प्रसूताओं में से प्रसव के दौरान 199 महिलाओं की मौत हो जाया करती थी। वह आंकड़ा अब घटकर 87 पर आ गया है। ऐसे में वर्ष 2014-16 में जहां 3582 महिलाएं प्रसव दौरान दम तोड़ देती थी। बीते साल दो हजार प्रसूताओं की जान प्रसव दौरान बचाई गई है, 1536 महिलाओं की जान हालांकि नहीं बचाई जा सकी। सैम्पल रजिस्ट्रेशन सर्वे यानी एसआरएस की रिपोर्ट में यह सुखद आंकड़े सामने आए हैं। प्रसव के दौरान प्रसूताओं की मौत का बड़ा कारण अस्पताल में डिलेवरी नहीं कराना माना जाता है। प्रदेश में शिक्षा के स्तर बढ़ने, स्वास्थ्य सेवाओं के प्रति जागरूकता के कारण अब 95 फीसदी महिलाओं का संस्थागत प्रसव हो रहा है, जो कि राष्ट्रीय औसत से 7 फीसदी ज्यादा है। देश का संस्थागत प्रसव अभी 88 फीसदी है।</p>
<p><strong>उच्च जोखिम वाली गर्भावस्थाओं की पहचान और प्रबंधन :</strong></p>
<p>गर्भवती महिलाओं में एनीमिया, उच्च रक्तचाप, मधुमेह और अन्य जटिलताओं की जल्द पहचान के लिए नियमित स्वास्थ्य जांच को बढ़ावा दिया जा रहा है। गर्भवती महिला का पहले 12 हफ्तों में पंजीकरण और आवश्यक चिकित्सा जांच अनिवार्य की गई है।  </p>
<p><strong>11, 722 का यह है गणित :</strong></p>
<p>दस साल यानी वर्ष 2015 की मातृ मुत्यु दर के हिसाब से प्रदेश में अब तक कुल 11722 गर्भवती महिलाओं की जान बचाई गई है। वर्ष 2014 से देखें तो मातृ मुत्यु दर जो 199 थी, वह अब 87 रह गई है। वर्ष वार हर साल होने वाली प्रसूताओं के आंकड़ो और मातृ मृत्यु दर के हिसाब से इन प्रसूताओं को मौत के मुंह में जाने से बचाया जा सका है। 2014 से हर दो साल के आंकड़ों के अनुसार क्रमश: 264, 600, 1508, 2408, 2910, 4032 प्रसूताओं को तब की मातृ मुत्यु दर में हुई कमी के लिहाज से बचाया जा सका है।</p>
<p><strong>सुरक्षित मातृत्व आश्वासन कार्यक्रम :</strong></p>
<p>कार्यक्रम में सुरक्षित प्रसव, प्रसवोत्तर देखभाल, नवजात देखभाल, टीकाकरण और लेबर रूम की स्वच्छता पर फोकस रहता है। स्वास्थ्य मित्र, आशा कार्यकर्ता और एएनएम इसकी अहम कड़ी है।</p>
<p><strong>स्वास्थ्य सुविधाओं का विस्तार :</strong></p>
<p>ग्रामीण और दूरदराज में पीएचसी और सीएचएसी अस्पताल बढ़े हैं। यहां आपातकालीन प्रसव सेवाएं, सिजेरियन ऑपरेशन, नवजात देखभाल इकाइयां स्थापित की गई हैं। नि:शुल्क इलाज सेवाओं के साथ परिवहन सुविधाएं भी नि:शुल्क हैं।</p>
<p><strong>जागरूकता और समुदाय आधारित कार्यक्रम :</strong></p>
<p>आशा दिवस पीएचसी पर जागरूकता कार्यक्रम होते हैं। गर्भवती उसके परिवारों को मातृ और शिशु स्वास्थ्य के बारे में जानकारी दी जाती है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>स्वास्थ्य</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 24 Jul 2025 12:12:45 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur KD]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>गहलोत मंत्रिमण्डल की बैठक में हुए कई फैसले : ग्रामीण विकास राज्य सेवा की कनिष्ठ श्रृंखला में सीधी भर्ती और पदोन्नति का 50-50 होगा अनुपात</title>
                                    <description><![CDATA[मंत्रिमण्डल ने राजस्थान ग्रामीण विकास राज्य सेवा नियम 2007 में संशोधन को स्वीकृति दी है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/%E0%A4%97%E0%A4%B9%E0%A4%B2%E0%A5%8B%E0%A4%A4-%E0%A4%AE%E0%A4%82%E0%A4%A4%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A4%BF%E0%A4%AE%E0%A4%A3%E0%A5%8D%E0%A4%A1%E0%A4%B2-%E0%A4%95%E0%A5%80-%E0%A4%AC%E0%A5%88%E0%A4%A0%E0%A4%95-%E0%A4%AE%E0%A5%87%E0%A4%82-%E0%A4%B9%E0%A5%81%E0%A4%8F-%E0%A4%95%E0%A4%88-%E0%A4%AB%E0%A5%88%E0%A4%B8%E0%A4%B2%E0%A5%87---%E0%A4%97%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%AE%E0%A5%80%E0%A4%A3-%E0%A4%B5%E0%A4%BF%E0%A4%95%E0%A4%BE%E0%A4%B8-%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%9C%E0%A5%8D%E0%A4%AF-%E0%A4%B8%E0%A5%87%E0%A4%B5%E0%A4%BE-%E0%A4%95%E0%A5%80-%E0%A4%95%E0%A4%A8%E0%A4%BF%E0%A4%B7%E0%A5%8D%E0%A4%A0-%E0%A4%B6%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A5%83%E0%A4%82%E0%A4%96%E0%A4%B2%E0%A4%BE-%E0%A4%AE%E0%A5%87%E0%A4%82-%E0%A4%B8%E0%A5%80%E0%A4%A7%E0%A5%80-%E0%A4%AD%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%A4%E0%A5%80-%E0%A4%94%E0%A4%B0-%E0%A4%AA%E0%A4%A6%E0%A5%8B%E0%A4%A8%E0%A5%8D%E0%A4%A8%E0%A4%A4%E0%A4%BF-%E0%A4%95%E0%A4%BE-50-50-%E0%A4%B9%E0%A5%8B%E0%A4%97%E0%A4%BE-%E0%A4%85%E0%A4%A8%E0%A5%81%E0%A4%AA%E0%A4%BE%E0%A4%A4/article-3814"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-01/ashok_gehlot2.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की अध्यक्षता में बुधवार को मुख्यमंत्री निवास से वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिए हुई केबिनेट की बैठक में कई महत्वपूर्ण नीतिगत निर्णय किए गए।</p>
<p>मंत्रिमण्डल ने राजस्थान ग्रामीण विकास राज्य सेवा नियम 2007 में संशोधन को स्वीकृति दी है। राजस्थान ग्रामीण विकास राज्य सेवा की कनिष्ठ वेतन श्रृंखला के पदों के कुल 75 प्रतिशत पद वर्तमान में सीधी भर्ती से भरे जाने का प्रावधान है, जिसे केबिनेट के इस निर्णय से संशोधित किया जाकर सीधी भर्ती एवं पदोन्नति का अनुपात 50-50 किया जा सकेगा। इससे राजस्थान ग्रामीण विकास राज्य सेवा की कनिष्ठ वेतन श्रृंखला के 50 प्रतिशत पदों को अतिरिक्त विकास अधिकारियों की पदोन्नति के माध्यम से भरा जा सकेगा। केबिनेट के इस निर्णय से सहायक एवं अतिरिक्त विकास अधिकारियों की पदोन्नति के लिए अधिक संख्या में पद उपलब्ध होंगे तथा विभाग में विकास अधिकारी के रिक्त पदों को पदोन्नति द्वारा शीघ्रता से भरा जा सकेगा। साथ ही, लंबे समय से विकास अधिकारियों के पदों के रिक्त रहने की समस्या दूर होगी अतिरिक्त विकास अधिकारियों को विकास अधिकारी के पद पर पदोन्नति देने से ग्राम विकास अधिकारियों के मनोबल एवं कार्यकुशलता में भी वृद्धि होगी। कैबिनेट ने सीधी भर्ती से नियुक्त होने वाले कार्मिकों के पदोन्नति पर एक वर्ष के प्रोबेशन पर रखे जाने का प्रावधान हटाने के लिए विविध सेवा नियमों में संशोधन को मंजूरी दी है। इससे कार्मिक विभाग द्वारा जारी अधिसूचना में पदोन्नति द्वारा नियुक्त होने पर एक वर्ष की अवधि के लिए प्रोबेशन पर रखे जाने का प्रावधान हटा दिए जाने के बावजूद विविध सेवा नियमों में यथावत रह गए इस प्रावधान को समाप्त किया जा सकेगा। इससे सभी सेवा नियमों में एकरूपता आएगी।<br /> <br /> मंत्रिमण्डल ने दण्ड प्रक्रिया संहिता ( राजस्थान संशोधन) विधेयक-2021 को विधानसभा के विचारार्थ प्रस्तुत करने की मंजूरी दी है। इस प्रस्तावित विधेयक द्वारा केन्द्र सरकार के समान राज्य सरकार को भी अन्य सरकारी वैज्ञानिक विशेषज्ञों को अधिसूचित करने की शक्तियां प्राप्त हो सकेंगी। इससे आपराधिक प्रकरणों के अनुसंधान एवं विचारण में गतिशीलता आ सकेगी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
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