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                <title>ट्रम्प टैरिफ कम होने से 12 सौ करोड़ हो जाएगा हाड़ौती का निर्यात</title>
                                    <description><![CDATA[ अब पहले से भी कम टैरिफ, अमेरिका में रहने वाले भारतीयों को यहां की वस्तुएं मिलेंगी सस्ती ।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/hadoti-s-exports-will-reach-1200-crore-rupees-due-to-the-trump-tariff-reduction/article-142050"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-02/trump&#039;s-tariffs-kam-hone-se-12-sau-crore-ho-jaega-hadoti-ka-niryat...kota-news-05.02.2026.jpg.jpeg" alt=""></a><br /><p>कोटा। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प द्वारा भारत पर लगाए टैरिफ को पहले से भी कम करने की घोषणा की है। इससे हाड़ौती से अमेरिका में होने वाला निर्यात पहले से करीब डेढ़ गुना यानि करीब 12 सौ करोड़ रुपए का होने की संभावना है। साथ ही यहां से निर्यात होने वाले चावल, धनिया, कोटा स्टोन व सैंड स्टोन उद्योग में बढ़ोतरी होगी। अमेरिका द्वारा पूर्व में जहां भारत पर पारम्परिक शुल्क(टैरिफ) 25 फीसदी लगाया हुआ था। उसे कुछ समय पहले बढ़ाकर 50 फीसदी करने की घोषणा कर दी थी। उस घोषणा के साथ ही भारत से अमेरिका में निर्यात होने वाले सामान पर एक तरह से रोक लग गई थी। भारत उसे मानने को तैयार नहीं था और अमेरिका उसे कम करने को राजी नहीं था। ऐसे में भारत ने भी अमेरिका को किए जाने वाले निर्यात को बंद कर दिया था। इससे भारत के अलग-अलग राज्यों से होने वाले सामान का जहां निर्यात घटा था। वहीं उन वस्तुओं की अमेरिका में रहने वाले भारतीय को उपलब्धता होना या तो बंद हो गया था या फिर वह वस्तुएं महंगी हो गई थी।</p>
<p><strong>कई महीनों तक रही असमंजस की स्थिति</strong></p>
<p>ट्रम्प द्वारा टैरिफ बढ़ाने की घोषणा का असर हाड़ौती संभाग पर भी पड़ा था। यहां भी असमंजस की स्थिति बनी रही। जिससे यहां से अमेरिका को निर्यात होने वाले सामान पर रोक लगा दी गई थी। जिससे यहां से होने वाला निर्यात कम हो गया था। हालांकि इससे कोटा के कई उद्योग प्रभावित हुए। लेकिन इसी बीच प्रधानमंत्री द्वारा ब्रिटेन व यूरोप से जो ट्रेड डील की उससे और स्वदेशी उत्पादों को बढ़ावा देने से व्यापार व उद्योग में उम्मीद की किरण जगी थी।</p>
<p><strong>इन वस्तुओं का होता है निर्यात</strong></p>
<p>कोटा व हाड़ौती संभाग के अन्य जिलों से अमेरिका समेत कई अन्य देशों को चावल, धनिया, कोटा स्टोन, सैंड स्टोन, कैमिकल, आटे का निर्यात होता है। जिससे यहां के इन उद्योगों को अमेरिका में मार्केट उपलब्ध होता है। पहले जहां 25 फीसदी टैरिफ लगने से जितना निर्यात यहां से हो रहा था। उस टैरिफ को घटाकर 18 फीसदी करने से अब उस निर्यात में बढ़ोतरी होगी।</p>
<p><strong>800 से 12 सौ करोड़ हो जाएगा निर्यात</strong></p>
<p>हाड़ौती से प्रमुख रूप से चावल, धनिया, कोटा स्टोन, सैंड स्टोन व कैमिकल का अमेरिका में अधिक निर्यात होता है। जिससे वहां रहने वाले भारतीयों को यहां के सामान उपलब्ध होते हैं। लेकिन ट्रम्प द्वारा टैरिफ बढ़ाने की घोषणा से यहां से निर्यात बंद कर दिया था। जिससे यहां से निर्यात तो कम हुआ था लेकिन उससे अधिक नुकसान अमेरिका में आयात घटने से वहां के लोगों को भारतीय वस्तुएं महंगी मिल रही थी। पूर्व में हाड़ौती से जहां करीब आठ सौ करोड़ रुपए सालाना निर्यात हो रहा था। अब टैरिफ पहले से भी कम होने से एक तरफ से अमेरिका ने काफी राहत दी है। जिससे हाड़ौती से निर्यात बढ़कर करीब 12 सौ करोड़ रुपए का हो जाएगा।</p>
<p><strong>- गोविंद राम मित्तल, संस्थापक अध्यक्ष, दी एसएसआई एसोसिएशन</strong></p>
<p><strong>अमेरिका में भारतीय को सस्ती मिलेगी वस्तुएं</strong></p>
<p>कोटा व हाड़ौती से काफी सामान विशेष रूप से खाद्यान से जुड़ी वस्तुओं का अमेरिका में अधिक निर्यात होता है। आटा, चावल व धनिया समेत कई ऐसी वस्तुए़ं हैं जिनकी वहां रहने वाले भारतीयों में अधिक डिमांड है। टैरिफ कम होने से यहां से निर्यात तो बढ़ेगा ही। साथ ही अमेरिका में रहने वाले भारतीयों को यहां की वस्तुएं सस्ती मिलेगी। कुछ समय तक निर्यात बंद रहने से वहां कई वस्तुओं की कीमतें काफी अधिक बढ़ गई थी।</p>
<p><strong>- अशोक माहेश्वरी, महासचिव, कोटा व्यापार महासंघ</strong></p>
<p><strong>अमेरिका में मिलेगा अधिक मार्केट</strong></p>
<p>ट्रम्प टैरिफ कम होना भारत व हाड़ौती के लिए अच्छा संकेत है। इससे यहां से अमेरिका में जाने वाली वस्तुओं का निर्यात बढ़ेगा। यहां की वस्तुओं को अमेरिका में अधिक मार्केट मिलेगा। विशेष रूप से हाड़ौती से चावल, धनिया व अन्य वस्तुएं शामिल हैं।</p>
<p><strong>- मनोज राठी, अध्यक्ष, दी एसएसआई एसोसिएशन</strong></p>
<p><strong>आने वाले समय में होगा लाभ</strong></p>
<p>अमेरिका ने टैरिफ 25 से 50 फीसदी लगाने की घोषणा की थी। जिससे हाड़ौती से वहां होने वाले निर्यात को बंद कर दिया था। जिससे यहां का उद्योग व व्यापार तो प्रभावित हुआ ही था साथ ही सबसे अधिक नुकसान अमेरिका को भी हुआ था। लेकिन अब पहले से कम टैरिफ करने से इसका आने वाले समय में अधिक लाभ होगा। हाड़ौती के व्यापार व उद्योग को फिर से आर्थिक लाभ होगा।</p>
<p><strong>- अनिल मूंदड़ा, अध्यक्ष कैट</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 05 Feb 2026 15:18:09 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[kota]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>सांसद लुंबाराम चौधरी ने किया मेगा एग्जीबिशन &quot;विजन राजस्थान&quot; के  पोस्टर का लोकार्पण </title>
                                    <description><![CDATA[जालौर-सिरोही में 19 से 21 जनवरी 2026 तक मेगा एग्जीबिशन विजन राजस्थान आयोजित होगा। कृषि, उद्योग, शिक्षा, स्टार्टअप, रक्षा और पर्यटन सहित कई क्षेत्रों की उपलब्धियां प्रदर्शित होंगी। सांसद लुंबाराम चौधरी ने कहा कि यह आयोजन निवेश, नवाचार और प्रदेश के समग्र विकास को नई दिशा देगा।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/mp-lumbaram-chaudhary-inaugurates-poster-of-mega-exhibition-vision-rajasthan/article-132474"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-11/500-px)-(3)3.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। राजस्थान राज्य में निवेश के नए अवसर खोलने और स्थानीय स्तर पर कौशल व रोजगार के नए आयाम विकसित करने के लिए जालौर-सिरोही जिले में मेगा एग्जीबिशन विजन राजस्थान का आयोजन होने जा रहा है। इसमें कृषि, उद्योग, शिक्षा, तकनीकी अनुसंधान, स्टार्टअप, स्वास्थ्य, पर्यटन, रक्षा, महिला सशक्तिकरण और ग्रामीण विकास जैसे प्रमुख क्षेत्रों की उत्कृष्ट उपलब्धियों का प्रदर्शन होगा। जालौर- सिरोही से सांसद लुंबाराम चौधरी ने मेगा एग्जीबिशन विजन राजस्थान 2026 का पोस्टर लोकार्पण करते हुए कहा कि यह आयोजन राजस्थान में निवेश, कौशल, नवाचार और विकास को नई दिशा देने वाला साबित होगा। सांसद चौधरी ने बताया कि यह भव्य प्रदर्शनी 19, 20 और 21 जनवरी 2026 को आयोजित की जाएगी। </p>
<p><strong>प्रदेश को मुख्य धारा में मजबूती से स्थापित किया जा सकेगा</strong></p>
<p>सांसद ने अपेक्षा जताई कि इस कार्यक्रम से प्रदेश के हर वर्ग युवा, महिला, किसान, उद्योगपति और शोधकर्ता को समान रूप से लाभ मिलेगा और राजस्थान को राष्ट्रीय विकास की मुख्य धारा में और अधिक मजबूती से स्थापित किया जा सकेगा।  सांसद चौधरी ने यह भी कहा कि यह आयोजन केवल एक प्रदर्शनी नहीं, बल्कि विजन राजस्थान 2026 के माध्यम से राज्य के अगले दशक के विकास का रोडमैप प्रस्तुत करेगा। </p>
<p><strong>प्रदेश के समग्र विकास का अभियान</strong></p>
<p>लुंबाराम ने कहा कि विजन राजस्थान 2026 केवल एक प्रदर्शनी नहीं, बल्कि प्रदेश के समग्र विकास का अभियान है, जो युवाओं, उद्यमियों, वैज्ञानिकों और उद्योग जगत को साझा मंच प्रदान करेगा।  सांसद चौधरी ने यह भी कहा कि सिरोही सहित पूरे प्रदेश की संभावनाओं को राष्ट्रीय मंच मिलेगा और इस आयोजन से हर वर्ग को लाभ पहुंचेगा। यह एग्जिÞबिशन इन संभावनाओं को न केवल पहचान देगा, बल्कि उन्हें वास्तविक विकास में बदलने का कार्य करेगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 15 Nov 2025 10:48:30 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>चौमहला से मजदूर पलायन को मजबूर, सरकार से उद्योग लगाने की आस</title>
                                    <description><![CDATA[रेल और सड़क कनेक्टिविटी होने के बाद भी युवा बेरोजगार।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jhalawar/laborers-forced-to-migrate-from-chaumhala/article-104033"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-02/257rtrer-(4)17.png" alt=""></a><br /><p>चौमहला। गंगधार उपखंड क्षेत्र की प्रमुख व्यापारिक मंडी एवं दिल्ली मुंबई सेंट्रल रेलवे लाइन पर स्थित चौमहला क्षेत्र में कोई बड़ा उद्योग नहीं होने से बेरोजगारों के सामने रोजगार व मजदूरों के सामने दूसरी जगह पलायन का संकट बना हुआ है। क्षेत्र में बिजली, पानी, सड़क व रेल जैसे बुनियादी ढांचे की उपलब्धता व  चंबल, शिप्रा, छोटी काली सिंध जैसी प्रमुख नदियां होते हुए भी कस्बा बरसों से एक अदद उद्योग को तरस रहा है। क्षेत्र के पढ़े लिखे बेरोजगार युवा और मजदूर वर्ग के लोग नई सरकार से उद्योग की आस लगाए बैठे हैं। झालावाड़ जिले की डग विधान सभा क्षेत्र के गंगधार उपखंड के चौमहला क्षेत्र में  रोजगार के कोई  प्रमुख साधन बड़ा उद्योग नहीं होने के कारण क्षेत्र के पढ़े लिखे बेरोजगार युवाओं और मजदूरों के पास जीवन यापन का कोई ठोस आधार नहीं है। इस कारण यहां के युवा बेरोजगार व मजदूर पलायन कर अपने दूसरे राज्यों में मजदूरी के लिए जा रहे हैं।</p>
<p>क्षेत्र की भौगोलिक स्थिति, जलवायु उद्योग के लिए काफी अनुकूल है। साथ ही बिजली, पानी की भी समुचित उपलब्धता है। वहीं चौमहला झालावाड़ जिले की डग विधान सभा क्षेत्र के गंगधार उपखंड की मुख्य व्यापारिक मंडी है। तहसील गंगधार क्षेत्र में 116 गांव आते हैं। जिसकी आबादी करीब सवा लाख  है। डग व गंगधार तहसील मिलाकर 191 गांव हैं जिसकी आबादी करीब दो लाख है। इतने बड़े क्षेत्र के लिए आजादी के बाद से कोई उद्योग नहीं होने से लोगों को अपना घर बार छोड़ कर दूसरी जगह जाना पड़ता है। क्षेत्र के बाशिंदों का कहना है कि चौमहला क्षेत्र में कोई बड़ा उद्योग खुलना चाहिए। जिससे क्षेत्र का समुचित विकास हो सके। इसके लिए सभी दलों के जनप्रतिनिधियों को सामूहिक रूप से प्रयास करने चाहिए।</p>
<p><strong>व्यापार संघ ने मुख्यमंत्री को लिखा पत्र</strong><br />खाद्य एवं किराना व्यापार संघ अध्यक्ष पवन पिछोलिया ने मुख्य मंत्री, सांसद दुष्यंत सिंह, विधायक कालूराम मेघवाल को पत्र लिख कर आगामी बजट में चौमहला क्षेत्र में औद्योगिक इकाई स्वीकृत करने की मांग की है। पत्र में लिखा कि प्रयास कर बजट में चौमहला क्षेत्र में किसी बड़े उद्योग की स्वीकृति कराई जाए।  पत्र में बताया कि क्षेत्र में पानी की प्रचुर मात्रा उपलब्ध है व बड़े बांध प्रस्तावित हैं। औद्योगिक इकाई के लिए पठारी भूमि, दिल्ली मुंबई रेल मार्ग, नदियों की उपलब्धता है।</p>
<p><strong>रेल व सड़क कनेक्टिविटी उपलब्ध</strong><br />क्षेत्र में दिल्ली मुंबई एक्सप्रेस वे 8 लाइन, गरोठ उज्जैन इंदौर फोर लाइन समीप ही है। जिससे देश के हर कोने में वाहन से माल की सप्ेलाई हो सकती है। वहीं चौमहला पश्चिम रेलवे के दिल्ली-मुंबई मुख्य व सीधी रेल लाइन पर स्थित है। क्षेत्र में भयंकर बेरोजगारी है। जिससे श्रमिकों की उपलब्धता की भी कोई समस्या नहीं है। रोजगार नहीं होने से श्रमिक अन्य राज्यों में मजदूरी के जाते हैं। अगर यहां कोई बड़ा उद्योग लगता है तो आसानी के साथ श्रम बल भी उपलब्ध होगा और क्षेत्र के लोगों को अपना घर, गांव व कस्बा छोड़कर अन्यत्र नहीं जाना पड़ेगा। क्षेत्र में शांत वातावरण के सारी सुविधाएं उपलब्ध हैं। बड़ा उद्योग लगाने से क्षेत्र का विकास होगा।</p>
<p>क्षेत्र में कोई उद्योग नहीं होने से बेरोजगारी है। श्रमिक मजदूरी के लिए अन्य राज्यों में पलायन करते है। यहां बिजली, पानी, पठारी जमीन के साथ रेल व सड़क का साधन उपलब्ध है। यहां कोई उद्योग फैक्ट्री खुलनी चाहिए। इसको लेकर मुख्यमंत्री,सांसद, विधायक को भी पत्र लिखा है।<br /><strong>- पवन पिछोलिया, अध्यक्ष खाद्य एवं किराना व्यापार संघ चौमहला</strong></p>
<p>कोई औद्योगिक इकाई खुले इसके लिए  प्रयास किए जा रहे है। इस विषय में विधायक को ज्ञापन भी दिया गया है। उद्योग खुलने से बेरोजगारी कम होगी रोजगार के नए अवसर खुलेंगे।<br /><strong>- गौतम जैन, भाजपा मंडल अध्यक्ष</strong></p>
<p>चौमहला क्षेत्र में कोई औद्योगिक इकाई खुलती है। क्षेत्र का विकास होगा। बेराजगारी कम होगी।<br /><strong>- जगदीश अग्रवाल, ग्रेन व्यवसाई</strong></p>
<p>क्षेत्र में औद्योगिक इकाई खुले इसके लिए प्रयास जारी है।<br /><strong>- कालूराम मेघवाल, विधायक डग </strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>झालावाड़</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 12 Feb 2025 16:46:37 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[kota]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>तेल, दाल, आटा, मसाला उद्योग तीन दिन करेंगे सद्बुद्धि यज्ञ</title>
                                    <description><![CDATA[तेल, दाल. आटा, मसाला उद्योगों को बन्द भी किया जा सकता है, जिसकी सारी जिम्मेवादी राज्य सरकार की होगी।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/oil-pulses-flour-spice-industry-will-perform-sadbuddhi-yagya-for/article-100621"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-01/5554-(2)20.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। भारतीय उद्योग व्यापार मण्डल तथा राजस्थान खाद्य पदार्थ व्यापार संघ के तत्वावधान में आयोजित सभा में राजस्थान के तेल मिल, आटा मिल, दाल मिल तथा मसाला उद्योग के उद्योगपत्ति एक साथ उपस्थित हुए और निर्णय लिया कि राज्य सरकार 30 जनवरी से पहले बाहर से आयात की गयी कृषि जिंस पर राजस्थान में मण्डी सेस तथा कृषक कल्याण फीस नहीं लगने का निर्णय नहीं करती है, तथा साथ ही पुरानी मीलों को नयी मीलों की तरह रिप्स में छूट नहीं देती है, तो राज्य की तेल मीलें, आटा मीलें. दाल मीलें, मसाला उद्योग राज्य सरकार को चेतावनी के लिये दिनांक 1, 2, 3 फरवरी 2025 को सद्बुद्धि यज्ञ करेंगे। अपने-अपने शहर व कस्बों में सामूहिक यज्ञ आयोजित किये जायेंगे। यदि फिर भी राज्य सरकार हमारी मांग नहीं मानती है, तो 4 फरवरी को जयपुर में बड़ी सभा आयोजित की जायेगी, जिसमें आंदोजन की अग्रिम रूपरेखा तय की जायेगी। आवश्यक हुआ तो तेल, दाल. आटा, मसाला उद्योगों को बन्द भी किया जा सकता है, जिसकी सारी जिम्मेवादी राज्य सरकार की होगी।</p>
<p>आयोजित सभा में मस्टर्ड ऑयल प्रोड्यूसर्स एसोसिएशन ऑफ इण्डिया के राष्ट्रीय अध्यक्ष बाबूलाल डाटा तथा राष्ट्रीय मंत्री अनिल चतर के साथ प्रान्त के तेल मिल एसोसिएशन के सदस्यों ने तथा प्रदेश दाल मिल महासंघ समिति, राजस्थान के अध्यक्ष विमल बड़जात्या, पवन अग्रवाल, जयपुर दाल मिल एसोसिएशन के अध्यक्ष बाबूलाल गोयल सहित एसोसिएशन के अन्य सदायों ने, राजस्थान रोलर फ्लोर मिलर्स एसोसिएशन के प्रान्तीय अध्यक्ष गोविन्द ग्रोवर, मंत्री भानूप्रकाश गर्ग व एसोसिएशन के अन्य सदस्यों ने,नेशनल ऑयल्स मैन्यूफैक्चरर्स एण्ड रिपैकर्स एसोसिएशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष मनोज मुरारका तथा एसोसिएशन के अन्य सदस्यों ने, राजस्थान मसाला उद्योग व्यापार संघ के प्रान्तीय मंत्री दिनेश अग्रवाल एवं एसोसिएशन के सदस्यों ने उपस्थिति दर्ज की।</p>
<p>भारतीय उद्योग व्यापर मण्डल के राष्ट्रीय अध्यक्ष तथा राजस्थान खाद्य पदार्थ व्यापार संघ के चेयरमेन बाबूलाल गुप्ता ने बताया कि सभा में उपस्थित सभी सदस्यों ने रोष व्यक्त किया कि राज्य सरकार राईजिंग राजस्थान का सम्मेलन आयोजित कर तथा रिप्स में नयी मीलों को प्रोत्साहन राशि उपलब्ध करवाकर नए उद्योग लगाना चाहती है, परन्तु सभी उद्योगों के लिये राज्य के बाहर से दलहन, गेहूँ, तिलहन एवं मसाले आयात करने पर दुबारा गण्डी सेस तथा कृषक कल्याण फीस लेती हैं, जिसका उद्योगों पर विपरीत प्रभाव पडता है। चैरिटी नहीं आने के कारण पुरानी मीलें बन्द होती जा रही हैं, इसलिये आवश्यक है कि आयातित कृषि जिन्स पर राज्य में मण्डी सेस तथा कृषक कल्याण फीस नहीं लगाई जाएं। नयी मीलों की तरह पुरानी मीलों को भी रिप्स में छूट दी जायें तथा अन्य दी जाने वाली सब्सिडी भी पुरानी मीलों को उपलब्ध करवाई जाएं। यह उद्योग किसान के हित में तथा उपभोक्ताओं के हित में है। यदि राज्य सरकार 31 जनवरी तक आदेश नहीं पारित करती है, तो 1, 2, 3 फरवरी को सामूहिक सद्बुद्धि यज्ञ आयोजित किये जाएंगे और 4 फरवरी को संयुक्त सभा आयोजित कर आन्दोलन की अग्रिम रूपरेखा तय की जायेगी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 13 Jan 2025 16:55:01 +0530</pubDate>
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                <title>उद्योग व्यापार और एमएसएमई को राहत की उम्मीद</title>
                                    <description><![CDATA[उद्योग व्यापार आशान्वित हैं कि एमएसएमई को इस बजट में 43बी(एच) से राहत दी जाएगी। टीसीएस एवं टीडीएस को समाप्त किया जाएगा, जो क्रेता एवं विक्रेता दोनों के लिए प्रभावी हैं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/expectation-of-relief-for-industry-trade-and-msmes/article-85562"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-07/photo-size-(5)13.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। उद्योग व्यापार आशान्वित हैं कि एमएसएमई को इस बजट में 43बी(एच) से राहत दी जाएगी। टीसीएस एवं टीडीएस को समाप्त किया जाएगा, जो क्रेता एवं विक्रेता दोनों के लिए प्रभावी हैं। कर मुक्त आय को बढ़ाकर 10 लाख किया जाएगा और आयकर पर लगाए गए सरचार्ज एवं सेस हटा दिए जाएंगे, क्योंकि जीएसटी से अच्छा राजस्व प्राप्त हो रहा है। इसके अलावा, सांसदों एवं विधायकों की आय पर भी आयकर लगाया जाएगा।</p>
<p>भारतीय उद्योग व्यापार मंडल ने फोन वार्ता के जरिये केंद्र सरकार से वांछित मांगों की समीक्षा की। उनके अनुसार, आयकर की तरह ही जीएसटी में भी किसी भी प्रकार की नोटिस, स्क्रूटनी, ऑडिट आदि से संबंधित कार्यवाही फेसलैस तरीके से ही होनी चाहिए। यह राजस्व एवं करदाता दोनों के हितों की रक्षा करेगा। जीएसटी रिपोर्ट, जीएसटी पोर्टल पर आसानी से उपलब्ध होनी चाहिए। </p>
<p>पोस्टल में कुछ तकनीकी खामियां हैं। जब कोई जीएसटी नंबर लॉगिन करता है, तो लिंक के अभाव में संबंधित माह के रिटर्न पर जाना संभव नहीं है। हर दो-तीन महीने में जीएसटी पासवर्ड बदला जाता है। इनकम टैक्स की तरह जीएसटी का पासवर्ड भी एक साल तक एक ही रहना चाहिए। गलत पासवर्ड की सुरक्षा प्रदान करने के लिए पासवर्ड कुछ निर्दिष्ट तरीके से बनाए जाने चाहिए।</p>
<p>भारतीय उद्योग व्यापार मंडल के राष्ट्रीय अध्यक्ष बाबूलाल गुप्ता ने चर्चा के दौरान कहा कि जीएसटी नोटिस ईज ऑफ डूइंग बिजनेस की दिशा में यदि सरकार चाहती है, तो उसे इसी प्रकार के प्रावधान करने होंगे। व्यापारी को दिए जाने वाले नोटिस, जैसे कि जीएसटी ऑडिट, स्क्रूटनी, समन, आईटीसी मिसमैच, जीएसटीआर-1 एवं 3बी का मिसमैच, ब्याज के नोटिस, सर्च के नोटिस, आउटपुट टैक्स का शत प्रतिशत पेमेंट करने के नोटिस आदि, व्यापारी के लिए सिरदर्द पैदा करते हैं। ईज ऑफ डूइंग बिजनेस के लिए इन पर विवेचना आवश्यक है।</p>
<p>बधाई कार्ड, शादी कार्ड, अचार, पूजा की थाली, देसी घी एवं ड्राईफ्रूट्स को 12 प्रतिशत से घटाकर 5 प्रतिशत की श्रेणी में लिया जाना चाहिए। उपभोक्ता मामलात मंत्रालय को एमआरपी से नीचे बिकने वाले माल को प्रतिबंधित करना चाहिए। घटिया माल ब्रांड के आधार पर बेचने पर कड़े नियम बनाए जाएं। बाजारों में काम कर रहे करोड़ों व्यापारियों, कर्मचारियों एवं मजदूरों को सुरक्षा प्रदान करते हुए व्यापार सुरक्षित रहे, इसके लिए नियम बनाए जाने चाहिए।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 22 Jul 2024 18:37:46 +0530</pubDate>
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                <title>शहरों से रोज निकलने वाले गंदे पानी को ट्रीट कर इंडस्ट्री को बेचेंगी स्थानीय निकाय</title>
                                    <description><![CDATA[शहरों से निकलने वाले गंदे पानी और सीवरेज के पानी को ट्रीट कर निजी उद्योगों को बेचने की बड़े स्तर पर योजना तैयार हो रही है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/local-bodies-will-treat-the-dirty-water-coming-out-of/article-80322"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-06/t211rer2.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। शहरों से निकलने वाले गंदे पानी और सीवरेज के पानी को ट्रीट कर निजी उद्योगों को बेचने की बड़े स्तर पर योजना तैयार हो रही है। स्वायत्त शासन विभाग ने इसके लिए स्थानीय निकायों को कार्य योजना तैयार करने के निर्देश दिए है। </p>
<p>मुख्य अभियन्ता प्रदीप कुमार गर्ग के अनुसार नगरीय निकायों में मैटेरियल रिकवरी फेसेलिटी से पुनर्चक्रण योग्य सामग्री एवं सीवरेज ट्रीटमेन्ट प्लान्ट्स से शोधित जल को विक्रय कर लगभग 16 करोड़ की सालाना आय नगरीय निकायों ने अर्जित की है। विभाग के प्रमुख सचिव टी. रविकांत ने अधिकारियों को प्रदेश में शोधित जल के विक्रय को बढ़ाने के लिए औद्योगिक इकाईयों से समन्वय स्थापित करने के निर्देश भी दिए है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 03 Jun 2024 20:15:09 +0530</pubDate>
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                <title>कोटा का पहला स्टार्टअप अपनी उड़ान भरने से पहले ही दम तोड़ने लगा</title>
                                    <description><![CDATA[ये लिमिटेड कंपनी होने व अनलिस्टेड होने की वजह से इसे लोन या अन्य कोई सहायता नहीं मिली। इसके बने हुए प्रोडक्ट को भी सरकारी निर्माण में प्राथमिकता नहीं दी गई। विभाग ने भी उदासीनता दिखाई।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/kota-s-first-startup-died-even-before-it-could-take-off/article-77930"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-05/photo-size-(2)6.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। कोटा स्टोन से निकलने वाली स्लरी से टाइल्स बनाने का उद्योग अपने शुरुआती दौर में पूरे उछाल पर रहा। किंतु बाद में बैंकों और राज्य सरकार की ओर से फंड उपलब्ध नहीं कराने के कारण इसकी स्थिति बिगड़ी गई और अब हालात यह है कि इससे टाइल्स बनाना लगभग बंद सा हो गया है। कोटा में देश का पहला स्टार्टअप अपनी उड़ान भरने से पहले ही दम तोड़ने लगा है। जनसेवा और शहर में स्लरी से बढ़ रही समस्या के समाधान को लेकर जिन्होंने इस उद्योग को चालू करने में मेहनत की वह सफल नहीं हो पाई। वर्तमान में यह उद्योग लगभग मृतप्राय: हो चुका है। </p>
<p><strong>प्रोडक्ट को सरकारी निर्माण में नहीं दी प्राथमिकता</strong><br />हाड़ौती कोटा स्टोन इंडस्ट्रीज एसोसिएशन के पूर्व महासचिव मुकेश त्यागी ने बताया कि राजस्थान प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की पॉलिसी के अनुसार इस तरह के प्लांट को लगाने के लिए कंपनी एक्ट के सेक्शन 8 में एसपीवी (विशेष उद्देश्यों के लिए बनाई गई कंपनी) बनाई, जो पाषाण वेलफेयर फाउंडेशन के नाम से रजिस्टर्ड की गई थी। ये लिमिटेड कंपनी होने व अनलिस्टेड होने की वजह से इसे लोन या अन्य कोई सहायता नहीं मिली। इसके बने हुए प्रोडक्ट को भी सरकारी निर्माण में प्राथमिकता नहीं दी गई। विभाग ने भी उदासीनता दिखाई।</p>
<p><strong>सरकार बदली तो प्लांट को लगा ग्रहण</strong><br />तत्कालीन भाजपा सरकार ने कोटा स्टोन की स्लरी का उपयोग जनसेवा में करने तथा लोगों को रोजगार देने के उद्देश्य से यहां पर कोटा में स्वच्छ भारत अभियान के तहत इंद्रप्रस्थ इंडस्ट्रियल एरिया में कोटा स्टोन स्लरी से टाइल्स, इंटरलॉक, पेवर ब्लॉक व सीएलसी ब्लॉक बनाने के लिए पहले स्टार्टअप की शुरुआत जून, 2018 में की थी। जिसके लिए रीको ने पाषाण वेलफेयर फाउंडेशन को डम्पिंग यार्ड के पास 15 हजार मीटर जमीन निशुल्क आवंटित की थी और तत्कालीन राज्य सरकार व प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने इस प्लांट व मशीनरी के लिए करीब 80 लाख रुपए अनुदान देने की घोषणा की थी। लेकिन दिसंबर 2018 में राज्य में सत्ता परिवर्तन के साथ ही इस उद्योग पर जैसे ग्रहण सा लग गया। सरकार ने इस ओर ध्यान देना ही बंद कर दिया और यह प्लांट गर्त में जाने लगा। बैंकों ने लिमिटेड कंपनी होने के कारण इसको फंड उपलब्ध नहीं कराया। ऐसे में यह प्लांट बंद होने के कगार पर है।</p>
<p><strong>सीबीआरआई रिसर्च से निकले थे प्रॉडक्ट</strong><br />आईआईटी, रूड़की स्थित सेंट्रल बिल्डिंग रिसर्च इंस्टीट्यूट (सीबीआरआई) के वैज्ञानिकों ने कोटा स्टोन स्लरी के उपयोग पर निरंतर अनुसंधान कर सके मिश्रण से टाइल्स, पेवर ब्लॉक, इंटरलॉक एवं सीएलसी ब्लॉक बनाने में सफलता पाई। तत्कालीन भाजपा सरकार एवं राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने इस प्लांट व मशीनरी के लिए अनुदान की घोषणा की थी।</p>
<p><strong>शहर ही नहीं ग्राम पंचायतों में भी लगी है टाइल्स</strong><br />कोटा शहर के स्वामी विवेकानगर, इंद्रा विहार और कोटा जेल में स्लरी से बनी टाइल्स का ही उपयोग हुआ है। स्वामी विवेकानगर में तो करीब 6-7 लाख टाइल्स लगी हुई है। इतना ही नहीं जिले की कई ग्राम पंचायतों में भी स्लरी से बनी हुई टाइल्स का उपयोग किया गया है। प्लांट के शुरुआती दौर में स्लरी से बनी टाइल्स की जमकर बिक्री हुई।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 14 May 2024 15:23:58 +0530</pubDate>
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                <title>जमीन उद्योग की, बन गए हॉस्टल और आवास</title>
                                    <description><![CDATA[गौरतलब है कि इन भूखण्डों पर ये हॉस्टल खड़े तो कर लिए गए लेकिन उनका रजिस्ट्रेशन औद्योगिक उपयोग के लिए ही बना रहा। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/the-land-belonged-to-the-industry-and-became-hostels-and-residences/article-64545"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-12/11116.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। कोटा शहर को देश के कोचिंग हब से रूप में जाना जाता है जहां हर साल लाखों विद्यार्थी जेईई और नीट जैसी परीक्षाओं की तैयारी करने आते हैं। देश के कोने कोने से आने वाले इन विद्यार्थियों की बदोलत शहर की लगभग आधी आबादी को रोजगार मिलता है। वहीं रोजगार दिलाने वाले साधनों में कोचिंग संस्थानों के बाद हॉस्टल्स का ही नम्बर आता है। इसी क्रम में शहर के कई इलाकों में हजारों की संख्या में हॉस्टल संचालित हैं। जो हजारों लोगों को रोजगार उपलब्ध करा रहे हैं। लेकिन शहर के रीको इण्डस्ट्रियल एरिया में बने सैकड़ों हॉस्टल ऐसे हैं जो नियमानुसार बिल्कुल अवैध चल रहे हैं। किसी भी शहर में रीको की जमीन केवल औद्योगिक गतिविधि के लिए ही उपयोग की जा सकती है, उस पर किसी भी प्रकार का कमर्शियल या रिहायशी उपयोग अवैध है। लेकिन बावजूद इसके इस क्षेत्र में करीब 150 से 200 हॉस्टल नियमानुसार अवैध रूप से चल रहे हैं। वहीं इस मामले में रीको भी आंख मूंद कर बैठा नजर आता है, जो मात्र नोटिस देकर अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ रहा है।</p>
<p><strong>उद्योग के लिए आवंटित है जमीन</strong><br />रीको क्षेत्र की सारी जमीन और प्लॉट आद्यौगिक गतिविधि के लिए आवंटित है जिसे सरकार द्वारा 99 साल की लीज पर आवंटित किया गया था। लेकिन शहर की इण्डस्ट्री का रूप समय के साथ बदलता गया। शहर का औद्योगिक स्वरूप जो कोटा स्टोन, ग्रेनाइट, सेंड स्टोन और अन्य इण्डस्ट्री के रूप में चल रहा था वो साल 2010 के बाद कोचिंग इण्डस्ट्री में तब्दील हो गया। जिसका सीधा प्रभाव रीको क्षेत्र पर हुआ जहां पर व्यापारियों ने फैक्ट्रियां बंद करके कोचिंग संस्थानों और हॉस्टल का निर्माण शुरू कर दिया। </p>
<p><strong>3098 में से 2996 में उद्योग संचालित</strong><br />गौरतलब है कि इन भूखण्डों पर ये हॉस्टल खड़े तो कर लिए गए लेकिन उनका रजिस्ट्रेशन औद्योगिक उपयोग के लिए ही बना रहा। रीको प्रशासन की माने तो शहर में वर्तमान में करीब 3098 भूखण्डों पर औद्योगिक गतिविधि की अनुमति दी हुई है, जिनमें से 2996 भूखण्डों पर अभी भी उद्योग संचालित हैं वहीं शेष भूखण्डों पर या तो उद्योग बंद हो गए हैं या उन्हें किसी अन्य कार्यों में उपयोग किया जा रहा है। उधर आंकडों से इतर बात करें तो इस क्षेत्र में करीब 150 से 200 हॉस्टल संचालित हैं। </p>
<p><strong>करोडों के राजस्व का नुकसान</strong><br />इस क्षेत्र में चल रहे इन हॉस्टलों के कारण सरकार को भी लाखों करोड़ों रूपयों का नुकसान हो रहा है। क्योंकि किसी स्थान पर उद्योग के चलने से सरकार को भी उस स्थान से औद्योगिक कर के रूप में आय होती है जो इन हॉस्टलों के संचालन से होना मुश्किल है। वहीं इसके अलावा इन हॉस्टलों के औद्योगिक क्षेत्र में बने होने से इन हॉस्टलों में रहने वाले विद्यार्थियों को धूल और प्रदूषण का सामना करना पड़ता है क्योंकि ये हॉस्टल स्टोन इण्डस्ट्री के साथ में अन्य कई प्रकार की औद्योगिक ईकाइयों के बीच मौजूद हैं। इन फैक्ट्रियों से निकला धुंआ और धूल सीधे हॉस्टालों में जाता है। दूसरी ओर फैक्ट्रियों के होने से यहां पर दिनभर भारी वाहनों का आवागमन होता है जो भी प्रदूषण को और बढ़ा देता है। </p>
<p><strong>नियमों से अटका डायवर्जन का मामला</strong><br />इन सभी भूखण्डों पर पहले औद्योगिक इकाइयां संचालित थी, लेकिन कोटा स्टोन की घटती डिमांड और बाजार में बढ़ते तकनीक से ये इकाइयां घाटे में जाती रहीं और कोटा में बढ़ती कोचिंग इण्डस्ट्री को देखते हुए फैक्ट्रियों के मालिकों ने उद्योग बंद कर हॉस्टल्स का निर्माण शुरू कर दिया। जिसे लेकर व्यापार महासंघ और कोटा हॉस्टल एसासिएशन की ओर से रीको प्रशासन को कई बार भूखण्डों के डायवर्जन के लिए पत्र लिखकर मांग की जा चुकी है लेकिन रीको प्रशासन की तरफ से आगे की कोई कार्यवाही नहीं की जा रही है। <br /><strong>- अशोक माहेश्वरी, महासचिव, कोटा व्यापार महासंघ</strong></p>
<p>इन भूखण्डों पर बने हॉस्टल पूर्ण रूप से अवैध हैं जिसे लेकर करीब 150 हॉस्टल मलिकों को नोटिस दिए हुए हैं, वहीं जिन प्लॉटों पर ये हॉस्टल बने हुए हैं उनके औद्योगिक लाइसेंस भी निरस्त किए जा चुके हैं। इसके अलावा हॉस्टल एसोसिएशन की ओर से भी लैंड डायवर्जन की मांग की गई थी जिसके बारे में जयपुर मुख्यालय को पत्र लिखकर बताया जा चुका है। कोई नया आदेश आने पर ही आगे की कारवाई की जाएगी।<br /><strong>- महेंद्र कुमार शर्मा, सीनियर डीजीएम, रीको कोटा यूनिट </strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 19 Dec 2023 19:36:33 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>लघु उद्योग भारती की नई इकाई का किया गठन समारोह </title>
                                    <description><![CDATA[कार्यक्रम में लघु उद्योग भारती के जयपुर अंचल अध्यक्ष सुधीर गर्ग, सीतापुरा इंडस्ट्रीज एसोसिएशन अध्यक्ष निलेश अग्रवाल एवं संरक्षक सुभद्र पापड़िवाल समेत विभिन्न एसोसिएशन के सदस्य अवम प्रहलादपुरा औद्योगिक क्षेत्र के लगभग सभी निवेशक उपस्थित रहे।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/formation-ceremony-of-new-unit-of-industry-bharti/article-51558"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-07/222-copy6.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। शहर के प्रहलादपुरा इलाके में लघु उद्योग भारती की नई इकाई का गठन समारोह किया गया। अक्षय इंफ्रासिस इंडस्ट्रीज के प्रांगण में हुए समारोह में लघु उद्योग भारती के राष्ट्रीय संगठन मंत्री प्रकाश चंद्र एवं निवर्तमान राष्ट्रीय अध्यक्ष ओमप्रकाश मित्तल ने बतौर मुख्य अतिथि शामिल हुए। इस अवसर पर सर्वसम्मति से इस इकाई का अध्यक्ष अक्षय हाड़ा को एवं सचिव ललित आहूजा को मनोनीत किया गया। </p>
<p>कार्यक्रम में लघु उद्योग भारती के जयपुर अंचल अध्यक्ष सुधीर गर्ग, सीतापुरा इंडस्ट्रीज एसोसिएशन अध्यक्ष निलेश अग्रवाल एवं संरक्षक सुभद्र पापड़िवाल समेत विभिन्न एसोसिएशन के सदस्य अवम प्रहलादपुरा औद्योगिक क्षेत्र के लगभग सभी निवेशक उपस्थित रहे। प्रकाश चंद्र ने कहा कि परंपरागत संसाधनों से सर्वश्रेष्ठ निर्माण करने का स्वभाव हमारे उद्योगों का रहा है, इसी परिपाठी को आगे बढ़ाते हुए बेहतर उत्पाद आमजन तक पहुंचाना है। हाड़ा ने अधिक से अधिक औद्योगिक इकाइयों को लघु उद्योग भारती मे जोड़कर बेहतर दिशा में काम करने की बात कही, संयोजन ललित आहूजा ने किया।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>बिजनेस</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 12 Jul 2023 11:04:22 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>तुर्की के उद्योग को भूकंप से नौ अरब डॉलर का नुकसान</title>
                                    <description><![CDATA[वारंक ने एक प्रेस विज्ञप्ति में कहा कि लगभग 170 अरब तुर्की लीरा (नौ अरब डॉलर] के बुनियादी ढांचे, इमारतों, उपकरणों और शेयरों को नुकसान का अनुमान लगाया गया हैं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/turkeys-industry-lost-9-billion-due-to-earthquake/article-40935"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-03/t-1.png" alt=""></a><br /><p>इस्तांबुल। तुर्की के उद्योग और प्रौद्योगिकी मंत्री मुस्तफा वारंक ने कहा कि फरवरी में आए भूकंप ने देश में 5,600 औद्योगिक उद्यमों को प्रभावित किया और देश की अर्थव्यवस्था के सामरिक क्षेत्र को नौ अरब डॉलर का नुकसान हुआ है। वारंक ने एक प्रेस विज्ञप्ति में कहा कि लगभग 170 अरब तुर्की लीरा (नौ अरब डॉलर] के बुनियादी ढांचे, इमारतों, उपकरणों और शेयरों को नुकसान का अनुमान लगाया गया हैं।</p>
<p>उन्होंने कहा कि कुल मिलाकर तुर्की के 34 औद्योगिक क्षेत्रों में लगभग 5,600 उद्यम ज्यादा या मामूली रूप से क्षतिग्रस्त हो गए। 33,000 अन्य कारखानों का संचालन जारी रहा। उल्लेखनीय है कि 06 फरवरी को 7.7 और 7.6 तीव्रता के दो भूकंपों ने नौ घंटे के अंतराल पर तुर्की के दक्षिण-पूर्वी क्षेत्रों में हजारों घरों को क्षतिग्र्रस्त कर दिया। तुर्की के 11 प्रांतों और पड़ोसी देशों में, विशेष रूप से सीरिया में सैकड़ों झटकों के बाद भूमिगत झटके महसूस किए गए। तुर्की में भूकंप से 50,000 से ज्यादा लोगों की मौत हो गयी थी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 27 Mar 2023 12:21:04 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>ज्यादा से ज्यादा निवेश को धरातल पर लाने के लिए की जा रही माइक्रो मॉनिटरिंग-गुप्ता</title>
                                    <description><![CDATA[40 प्रतिशत से अधिक निवेश को धरातल पर लाने के लिए अधिकारियों को थोड़ी ज्यादा सजगता दिखानी होगी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/micro-monitoring-is-being-done-to-bring-maximum-investment-on-the-ground---gupta/article-17775"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-08/whatsapp-image-2022-08-04-at-4.22.01-pm.jpeg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal">जयपुर। उद्योग एवं वाणिज्य विभाग की अतिरिक्त मुख्य सचिव वीनू गुप्ता ने कहा कि इन्वेस्ट राजस्थान समिट के लिए अब तक लगभग 39 फीसद निवेश मूर्त रूप ले चुका है। उन्होंने कहा कि ज्यादा से ज्यादा निवेश को धरातल पर उतारने के लिए विभाग द्वारा माइक्रो मॉनिटरिंग की जा रही है। गुप्ता ने गुरुवार को उद्योग भवन में आयोजित महाप्रबंधकों और संबंधित अधिकारियों की बैठक में यह बात कही। वे 'इन्वेस्ट राजस्थान' समिट से जुड़े एमओयू और एलओआई की प्रगति और विभागीय योजनाओं की समीक्षा कर रही थीं। उन्होंने कहा कि 40 प्रतिशत से अधिक निवेश को धरातल पर लाने के लिए अधिकारियों को थोड़ी ज्यादा सजगता दिखानी होगी। उन्होंने निर्देश देते हुए कहा कि निवेशकों के प्रस्ताव किसी भी कमी की वजह से अटके हुए हैं, तो अधिकारी खुद दिलचस्पी लेते हुए उन्हें दुरुस्त कराएं। अतिरिक्त मुख्य सचिव ने अधिकारियों को ऐसे निवेशकों पर ज्यादा ध्यान देने के निर्देश दिए जो उचित रूपरेखा और क्षेत्रीय निवेश से जुड़ी जानकारी के अभाव में इनवेस्ट नहीं कर पाते हैं। उन्होंने ऐसे निवेशकों को जरुरी मार्गदर्शन और आवश्यकतानुसार मदद करने के भी निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि जिला और राज्य स्तर पर अधिकारियों की पूरी टीम लगातार मॉनिटरिंग कर रही है, ताकि निवेशकों को किसी भी तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 04 Aug 2022 16:34:38 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>मोदी ने भारत में विनिर्माण उद्योग को प्रोत्साहित करने पर दिया बल </title>
                                    <description><![CDATA[प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत में विनिर्माण उद्योग को प्रोत्साहित करने पर बल दिया। मोदी ने कहा कि यह देश केवल दूसरे देशों के सामान का बाजार बन कर रह जाए। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/modi-force-at-encouraged-manufacturing-industry-in-india/article-5425"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-03/modi04-copy1.jpg" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत में विनिर्माण उद्योग को प्रोत्साहित करने पर बल दिया। मोदी ने कहा कि यह देश केवल दूसरे देशों के सामान का बाजार बन कर रह जाए। यह स्वीकार नहीं किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि देश की अर्थव्यवस्था में विनिर्माण कारोबार का योगदान कम है, लेकिन संभावनाएं विशाल है। प्रधानमंत्री ने कहा कि युवा और प्रतिभाशाली आबादी के जनसांख्यिकीय लाभांश, लोकतांत्रिक व्यवस्था, प्राकृतिक संसाधनों के सकारात्मक कारकों के बल पर दृढ़ संकल्प के साथ मेक इन इंडिया की ओर बढ़ने के लिए प्रोत्साहित  होना चाहिए।मोदी उद्योग एवं आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग (डीपीआईआईटी) द्वारा बजट के प्रावधानों पर केंद्रित आन लाइन राष्ट्रीय संगोष्ठी को संबोधित कर रहे थे। यह प्रधानमंत्री द्वारा संबोधित बजट-उपरांत वेबिनार है। मोदी ने कहा कि इस बार के बजट में आत्मनिर्भर भारत और मेक इन इंडिया के लिए कई महत्वपूर्ण प्रावधान हैं। उन्होंने कहा कि यह स्वीकार्य नहीं है कि भारत जैसा देश केवल एक बाजार बनकर रह जाए।</p>
<p>उन्होंने कहा कि भारत में विनिर्माण क्षेत्र का भाग सकल घरेलू उत्पाद का 15 प्रतिशत है, लेकिन मेक इन इंडिया से पहले अनंत संभावनाएं हैं और भारत में एक मजबूत विनिर्माण आधार बनाने के लिए पूरी ताकत से काम करना चाहिए। प्रधानमंत्री ने बाजार में उत्पाद की उपलब्धता और उसकी तुलना में भारत में बने उत्पाद की उपलब्धता के बीच अंतर के बारे में चर्चा की। उन्होंने अपनी निराशा को दोहराते हुए कहा कि भारत के विभिन्न त्योहारों के दौरान विदेशी प्रदाताओं द्वारा सामग्रियों की आपूर्ति की जाती है, जबकि वे स्थानीय निर्माताओं द्वारा आसानी से प्रदान की जा सकती है। <br /><br /><br /><br /></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 03 Mar 2022 16:28:32 +0530</pubDate>
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