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                <title>सड़कों के किनारे उड़ती धूल ने बढ़ाया प्रदूषण, 5 शहरों की बनेगी विशेष योजना</title>
                                    <description><![CDATA[पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय द्वारा वर्ष 2019 में शुरू किए गए नेशनल क्लीन एयर प्रोग्राम (एनसीएपी) का उल्लेख किया गया है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/dust-blowing-on-the-roadside-increases-pollution-special-plan-will-cities/article-93422"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-10/630400-size-(17)1.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। शहरों में सड़कों के किनारे उड़ती धूल प्रदूषण को बढ़ावा दे रही है। इस पर रोक लगाने के लिए विशेष योजना तैयार की जाएगी। योजना के तहत इन शहरों में सड़क के किनारे कंक्रीट की जाएगी, ताकि हल्की हवा के कारण धूल के गुब्बार नहीं उड़ सके। स्वायत्त शासन विभाग ने धूल नियंत्रण के प्रयासों को और मजबूती देने के लिए एक महत्वपूर्ण निर्देश जारी किया है। यह निर्देश शहरी विकास एवं आवास विभाग के प्रमुख सचिव को भेजा गया है, जिसमें शहरों में सड़क की पूरी चौड़ाई में पक्कीकरण की आवश्यकता पर जोर दिया गया है, जिससे सड़क की किनारों पर असमान या कच्चे हिस्से न बचे, जो धूल का प्रमुख स्रोत बन सकते हैं।</p>
<p>इस संदर्भ में पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय द्वारा वर्ष 2019 में शुरू किए गए नेशनल क्लीन एयर प्रोग्राम (एनसीएपी) का उल्लेख किया गया है, जिसका उद्देश्य राज्य के पांच प्रमुख शहरों (जयपुर, जोधपुर, कोटा, अलवर, उदयपुर) में वायु गुणवत्ता में सुधार लाना है। इस कार्यक्रम का लक्ष्य पीएम 10 कणों के स्तर में 40% की कमी करना है, जिससे राष्ट्रीय वायु गुणवत्ता मानकों को प्राप्त किया जा सके।</p>
<p>नए आदेश के तहत सभी संबंधित एजेंसियों और नगर निगमों को निर्देशित किया गया है कि वे शहरी विकास एवं आवास विभाग के तहत आने वाली सभी सड़कों के किनारे-किनारे पक्कीकरण सुनिश्चित करें, ताकि धूल की पुनःस्थापना को कम किया जा सके। यह आदेश विशेष रूप से उन क्षेत्रों के लिए है जहां सड़क की अपर्याप्त या अधूरी पक्कीकरण से धूल का पुनःउत्थान हो रहा है, जिससे वायु गुणवत्ता पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। यह कदम शहरों में वायु प्रदूषण को नियंत्रित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल मानी जा रही है, जिससे राज्य के लोगों को स्वच्छ और स्वस्थ वातावरण मिल सकेगा।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 19 Oct 2024 17:46:44 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>कोटा उत्तर वार्ड 51: करोड़ों के विकास कार्यों को धत्ता बताते वार्ड 51 के हालात</title>
                                    <description><![CDATA[शहर में करोड़ों के विकास कार्य करवाए जा रहे हंै लेकिन कोटा उत्तर वार्ड 51के निवासी मूलभूत सुविधाओं के लिए आज तक तरस रहे हैं। सड़कों की हालत खराब है । क्षेत्र में खाली पड़े भूखन्डों में या गदंगी और कचरे के ढ़ेर लगे हुए हैं या जानवरों ने डेरा जमाया हुआ है।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/kota-north-ward-51--the-condition-of-ward-51-shows-the-development-works-worth-crores/article-32727"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-12/ward-51--karoro-ke-vikas-kaaryo-ko-dhata-batate-ward-51-ke-haalat..kota-news...19.12.2022.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। घरों के बाहर गाड़ियों पर कुछ ही मिनटों में जमी धूल की परतें, सड़कों से उड़ती धूल, अर्द्धनिर्मित नालों से निकलती बदबू से परेशान लोग। ये कहानी नहीं बल्कि हकीकत हैं कोटा उत्तर नगर निगम के वार्ड 51 के कुछ क्षेत्रों की। ये हालात तो तब है जब इस वार्ड का प्रतिनिधित्व निगम में पूर्व नेता प्रतिपक्ष और वर्तमान में ब्लॉक कांग्रेस कमेटी के शहर जिला उपाध्यक्ष अनिल सुवालका करते हैं। वार्ड 51 में थर्मल कॉलोनी, कुन्हाड़ी, संत तुकाराम सामुदायिक भवन, हनुमानगढ़ी तथा अम्बेडकर नगर आदि क्षेत्र आते हैं। इनमें से अम्बेडकर कॉलोनी तथा यूआईटी की ओर से आवंटित कॉलोनी तथा हनुमानगढ़ी क्षेत्र के नागरिकों का कहना है कि भले ही शहर में करोड़ों के विकास कार्य करवाए जा रहे हंै लेकिन हम तो मूलभूत सुविधाओं के लिए आज तक तरस रहे हैं। कुछ लोगों का तो ये भी कहना है कि हमें भाजपाई होने का खामियाजा भुगतना पड़ रहा है। दरअसल वार्ड 51 के इन क्षेंत्रों में सड़कों की हालात वास्तव में इतनी खराब है कि पैदल तक चलने में पैर मुड़ सकता है। कॉलोनियों में बनाये जा रहे नाले कई स्थानों पर खुले पड़े हुए हैं। इन खुले नालों से उठनी वाली बदबू के कारण यहां रहने वाले लोगों का जीना तक दुश्वार हो चुका है। क्षेत्र में खाली पड़े भूखन्डों में या गदंगी और कचरे के ढ़ेर लगे हुए हैं या जानवरों ने डेरा जमाया हुआ है। इन्ही क्षेत्रों में एक हनुमानगढ़ी में रहने वाले नागरिकों का कहना है कि उन्हे खुद के मकानों के पटटों के महीनों से निगम के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं। वे जब भी निगम जाते हैं उन्हे कोई ना कोई बहाना बनाकर वापस भेज दिया जाता है। नियमानुसार पटटा आवंटन के दौरान लगी आपत्ति का निवारण 7 दिनों में हो जाना चाहिए था लेकिन कई माह बीत जाने के बाद भी ऐसा नहीं हुआ है। कई बार फोन पर सम्पर्क करने पर पार्षद अनिल सुवालका ने फोन नहीं उठाया।</p>
<p><strong>वार्डवासियों का कहना है</strong><br /> क्षेत्र के कई नालों का कार्य अधूरा छोड़ा हुआ है। लगभग सभी नाले खुले पड़े हैं। क्षेत्र में सफाई व्यवस्था बिल्कुल भी नहीं है। सफाई के नाम पर सफाईकर्मी धूल उड़ाकर चले जाते हैं। सफाई नहीं करते कचरा फैला रहता है। नालियां गंदगी से भरी पड़ी हैं।<br /><strong>- सुरेन्द्रराय सक्सेना, स्थानीय निवासी</strong></p>
<p> इलाके की गलियां खुदी पड़ी है। क्षेत्र के भाजपा से जुड़े लोगों के पट्टे नहीं बनाये जा रहे हैं। लोग जाते हैं तो उनको फटकार बाहर निकाल दिया जाता है। क्षेत्र में खाली पडेÞ प्लॉटों पर गंदगी के ढेÞर लगे हुए है। वार्ड में ना सफाई व्यवस्था है ना ही काई खुदी सड़कों की सुध लेने वाला।<br /><strong>- प्रहलाद  सिंह पंवार, वार्डवासी</strong></p>
<p>इस क्षेत्र की सबसे बड़ी समस्या इलाके में उड़ती धूल है। जिससे श्वास संबंधित बीमारियां फैलने का खतरा बना हुआ है। पूरे क्षेत्र में गड़ढें हुए पड़े हैं। सड़के खोद दी गई लेकिन अब उनकी सुध नहीं ली जा रही है। घरों के बाहर गाड़ी खड़ा करना तक मुश्किल हैं।<br /><strong>-रामचन्द्र राठौड़, वार्डवासी।</strong></p>
<p> क्षेत्र की सड़कों को आज तक साफ नहीं देखा है। जब भी घर से निकलों धूल के गुबार नजर आते हंै। कितना ही मास्क या कुछ और डाल गा लो घूल तो जाती ही है। सड़कें खुदी हुई है। नालियां भरी हुई है। रोड साइड बने नालों को खुला छोड़ा हुआ है। जिससे दुर्घटना ही आशंका बनी रहती है। <br /><strong>-साक्षी सरोंजा, स्थानीय निवासी</strong></p>
<p> मैने 8 महीने पहले पट्टा प्राप्त करने के लिए रसीद कटवाई थी, किसी ने मई माह में आपत्ति दर्ज करवाई लेकिन उसका आज तक निस्तारण नहीं हुआ है। क्षेत्र में 15 साल पहले नालियां बनाई गई थी उसके बाद कभी नालियां नहीं बनी।<br /><strong>- जमादार सिंह, निवासी हनुमानगढ़ी</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 19 Dec 2022 14:41:04 +0530</pubDate>
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                <title>अगर आप धूल से एलर्जिक हैं, तो इम्यून सिस्टम को है खतरा </title>
                                    <description><![CDATA[ अगर आप धूल से एलर्जिक हैं, तो इसका मतलब आपके इम्यून सिस्टम को खतरा है। जिन लोगों का इम्यून सिस्टम अच्छा होता है, वे भी कई बार डस्ट एलर्जी की चपेट में आ जाते हैं। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/health/-if-you-are-allergic-to-dust--your-immune-system-is-at-risk/article-12033"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-06/kk1.jpg" alt=""></a><br /><p> <br /><strong>धूल से होने वाली एलर्जी का मतलब है</strong> जब सांस के जरिए धूल में मौजूद कण शरीर में पहुंच जाते हैं। इस एलर्जी की वजह से नाक बहना, छींक आना, बुखार और सांस लेने में तकलीफ होने लगती है। अगर आप धूल से एलर्जिक हैं, तो इसका मतलब आपके इम्यून सिस्टम को खतरा है। जिन लोगों का इम्यून सिस्टम अच्छा होता है, वे भी कई बार डस्ट एलर्जी की चपेट में आ जाते हैं। अगर आपको बार-बार धूल की वजह से जÞुकाम या गला खराब होता है, तो इसका मतलब आपका इम्यून सिस्टम कमजोर है।</p>
<p><strong>आपकी लाइफस्टाइल</strong>, डाइट और वर्कआउट रुटीन इम्यूनिटी को मजबूत बनाने का काम करते हैं। ऐसे कई सुपरफूड्स हैं, जिनमें कई पोषक तत्व होते हैं, जो शरीर पर बुरा असर नहीं करते। अदरक के समान लहसुन भारतीय और दक्षिणी एशियाई व्यंजनों में नियमित रूप से उपयोग किया जाने वाला एक लोकप्रिय सुपरफूड है। इसमें कमाल की इम्यूनिटी बूस्टिंग और एंटी-इंफ्लामेटरी गुण होते हैं।</p>
<p><strong>अदरक एक और पॉपुलर सुपरफूड है</strong>, जिसमें कई तरह की हीलिंग प्रोपरटीज होती हैं। धूल से होने वाला कंजेशन और सूजन को अदरक कम करने का काम करता है। प्याज में क्वेरसेटिन नामक तत्व होता है। यह घटक हिस्टामाइन के उत्पादन को कम करने में मदद करता है। हिस्टामाइन एक यौगिक है, जो शरीर एलर्जी की प्रतिक्रिया के रूप में जारी करता है जो सूजन, भीड़ आदि का कारण बनता है।</p>
<p><strong>शहद एक और ऐसा सुपरफूड है</strong>, जो कई तरह के फायदों से भरपूर है। इसके एंटी.इंफ्लामेटरी गुण एलर्जी के लक्षणों को कम करने का काम करते हैं। दही जैसे अन्य फूड्स जो प्रोबायोटिक से भरपूर होते हैं, शरीर को कई रैडिकल्स और इंफेक्शन से लड़ने की ताकत देते हैं। इसमें एंटी.इंफ्लामेटरी गुण भी होते हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वास्थ्य</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 13 Jun 2022 16:03:42 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title> आंखों से फेफड़ों तक चोट पहुंचा रहे धूल के कण</title>
                                    <description><![CDATA[ शहर में जगह-जगह हो रहे निर्माण कार्य व सीवरेज पाइप लाइन डालने के लिए खोदी गई सड़कों के कारण धूल के गुबार उड़ रहे हैं। धूल-धुएं से जहां वायु प्रदूषण बढ़ता है। वहीं, इसका सीधा असर फेफड़ों पर पड़ता है। लेकिन, अब ये धूल लोगों की आंखों पर भारी पड़ रही है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/dust-particles-are-causing-damage-from-eyes-to-lungs/article-9867"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-05/eyes-to-lungs-dust-particals-copy.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। शहर में जगह-जगह हो रहे निर्माण कार्य व सीवरेज पाइप लाइन डालने के लिए खोदी गई सड़कों के कारण धूल के गुबार उड़ रहे हैं। सबसे ज्यादा बुरे हाल डामर की सड़कों के हैं। बारीक गिटटी लोगों को ज्यादा परेशान करती है। धूल-धुएं से जहां वायु प्रदूषण बढ़ता है। वहीं, इसका सीधा असर फेफड़ों पर पड़ता है। लेकिन, अब ये धूल लोगों की आंखों पर भारी पड़ रही है। पिछले कुछ महीनों में आंखों से जुड़ी बीमारियों के मरीजों की संख्या में इजाफा हुआ है।<br /><br />एमबीएस अस्पताल की ओपीडी में ही सामान्य दिनों के मुकाबले इन दिनों ज्यादा मरीज पहुंच रहे हैं। इनमें आंखों में इंफेक्शन और एलर्जी के साथ ड्राय आइज के मामलों में 10 से 15 प्रतिशत तक की बढ़ोत्तरी हुई है। चिकित्सकों के मुताबिक ऐसे लोग जो ज्यादा बाहर रहते हैं, उनमें यह समस्या अधिक है। एमबीएस में इन दिनों आंखों की समस्या से जुड़े करीब 200 मामले आ रहे हैं। <br /><br /><strong>धूल के कणों से खतरा</strong><br />नेत्ररोग विशेषज्ञ डॉक्टर युनूस खान ने बताया कि धूल के पार्टिकल आंखों की कार्निया पर जाकर चिपक जाते हैं, जिससे आंखों को नुकसान पहुंच सकता है। वहीं, आंखों में घाव होने से इंफेक्शन का खतरा भी बढ़ जाता है। वैसे आंखें लाल होने के और भी कई कारण हैं। लेकिन, इन दिनों धूल-मिटटी से लाल आंखें होने के 4 और कंकर जाने के 5 केस प्रतिदिन आ रहे हैं। जबकि, पहले इन समस्याओं के मरीजों की संख्या इक्की-दुक्की ही रहती थी। इसके अलावा समान्य आंखों की समस्याओं के 50 से 60 मामले प्रतिदिन आ रहे हैं। यह आंकड़ा एक क्लिनिक का है। ऐसे शहरभर में कई हॉस्पिटल व क्लिनिक है। ऐसे में अंदाजा लगाया जा सकता है नुकसान किस हद तक बढ़ रहा है। एलर्जी व ड्राय आईज जैसी समस्याओं से बचने के लिए आंखों पर चश्मा पहने ताकि आंखों में धूल-मिटटी न जा सके। <br /><br /><strong>आंखों में सूजन और अंदरूनी समस्याएं भी</strong> <br />एमबीएस अस्पताल के नेत्ररोग विशेषज्ञ डॉक्टर अशोक मीणा बताते हैं कि इन दिनों मौसम बदल रहा है। सड़कों पर धूल है और हवा में भी नमी नहीं है। ऐसे में आंखों में समस्याएं बढ़ रही है। इन दिनों आंखों में खुजली, सूजन, पलक के अंदर वाली लेयर यानी कंजंक्टाइवा में भी इंफेक्शन आ रहा है। बार-बार आंखों को हाथ लगाने से कंजक्टिवाइटिस और पानी सूखना यानी ड्रायआईज के मरीज ज्यादा आ रहे हैं। <br /><br /><strong>इन बातों का रखें ख्याल</strong><br />- दो पहिया वाहन चालक चश्मे का उपयोग करें और हो सके तो हेलमेट जरूर पहनें। <br />-  हाथों को साफ करते रहें और बार-बार आंखें न छुएं।<br />-  आंखों को ठंडे पानी से धोते रहें।<br />- आंखें लाल होने, पानी आने या चुभन महसूस होने पर डॉक्टर की सलाह जरूर लें।<br />- धूल और भीड़-भाड़ वाले स्थानों पर जाने से बचें। <br /><br /><strong>फेफड़ों की झिल्लियों को नष्ट कर सकते हैं धूल के बारीक कण</strong><br />सड़कों की खुदाई व क्षतिग्रस्त मार्ग से वाहनों के गुजरने के दौरान उड़ने वाली धूल फेफड़ों के लिए घातक होती है। क्योंकि यह महीन कण होते हैं जो सांस के साथ सीधे फेफड़ों की झिल्लियों पर चिपक जाते हैं। इनसे झिल्लयां नष्ट होने का खतरा बढ़ जाता है। यह उन लोगों के लिए घातक होता है, जो पहले से ही एलर्जी व अस्थमा से पीड़ित होते हैं। हालांकि गर्मियों में अस्थमा कंट्रोल रहता है लेकिन धूल-मिटटी के सम्पर्क में आने के बाद समस्या और अधिक बढ़ जाती है। ऐसे में जहां निर्माण कार्य चल रहे हों वहां से गुजरने के दौरान मास्क लगाा चाहिए।<br /><strong>- राजेंद्र ताखर, श्वांस रोग विशेषज्ञ, मेडिकल कॉलेज कोटा</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 16 May 2022 15:42:06 +0530</pubDate>
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                <title>शीतलहर-गलन ने छुड़ाई धूजणी,  आज भी रहेगा शीतलहर का जोर</title>
                                    <description><![CDATA[माउंट आबू में न्यूनतम तापमान माइनस तीन डिग्री दर्ज, जोबनेर में 3 और सीकर में 3.5 डिग्री]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/%E0%A4%B6%E0%A5%80%E0%A4%A4%E0%A4%B2%E0%A4%B9%E0%A4%B0-%E0%A4%97%E0%A4%B2%E0%A4%A8-%E0%A4%A8%E0%A5%87-%E0%A4%9B%E0%A5%81%E0%A5%9C%E0%A4%BE%E0%A4%88-%E0%A4%A7%E0%A5%82%E0%A4%9C%E0%A4%A3%E0%A5%80---%E0%A4%86%E0%A4%9C-%E0%A4%AD%E0%A5%80-%E0%A4%B0%E0%A4%B9%E0%A5%87%E0%A4%97%E0%A4%BE-%E0%A4%B6%E0%A5%80%E0%A4%A4%E0%A4%B2%E0%A4%B9%E0%A4%B0-%E0%A4%95%E0%A4%BE-%E0%A4%9C%E0%A5%8B%E0%A4%B0/article-3949"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-01/sardi_oas.jpg" alt=""></a><br /><p> जयपुर। प्रदेश इन दिनों कोहरे और शीतलहर के साथ ही गलन भरी कड़ाके की ठंड से जूझ रहा है। बारिश और ओलावृष्टि का दौर खत्म होने के साथ ही अब पारे में लगातार गिरावट का दौर जारी होने से शीतलहर और गलन भरी सर्दी ने जनजीवन को काफी अस्त-व्यस्त किया हुआ है। प्रदेश के एकमात्र हिल स्टेशन माउंट आबू में पारा लगातार जमाव बिंदु के नीचे माइनस में दर्ज किया जा रहा है। बीती रात भी आबू में न्यूनतम तापमान माइनस तीन डिग्री दर्ज किया गया। इससे बर्फ  जमने के साथ ही फसलों को भी काफी नुकसान होने का अंदेशा हैं। जोबनेर में तीन, सीकर जिले में 3.5 और फतेहपुर में न्यूनतम तापमान 5.1 डिग्री रिकॉर्ड किया गया। मौसम विभाग की मानें तो 14 जनवरी यानि मकर संक्रांति से प्रदेश में शीतलहर से कुछ राहत मिलने की उम्मीद है और दिन के साथ ही रात का तापमान भी बढ़ सकता है। हालांकि इसकी शुरुआत 13 जनवरी से ही हो जाएगी, लेकिन इस दिन पूर्वी राजस्थान के अलवर, सीकर और झुंझुनू जिलों में शीतलहर की संभावना है। 14 जनवरी से मौसम साफ रहेगा और सर्दी से राहत मिलेगी। कोहरे के कारण वाहन चालकों को कम दृश्यता के कारण काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। राजधानी जयपुर में शीतलहर से हाल बेहाल बना हुआ है और इसके चलते बीती रात न्यूनतम तापमान 7.4 डिग्री और मंगलवार को अधिकतम तापमान 18.2 डिग्री दर्ज किया गया।</p>
<p><br /><strong>आज भी रहेगा शीतलहर का जोर</strong></p>
<p>प्रदेश के कई जिलों में बुधवार को भी शीतलहर और कोहरे का असर रहेगा। अलवर, भरतपुर, झुंझुनूं, सीकर, दौसा, करौली, बीकानेर, चूरू, हनुमानगढ़, श्रीगंगानगर और नागौर जिले में कहीं कहीं शीतलहर और कोहरे की संभावना है।<br /><br /><br /></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 12 Jan 2022 12:27:44 +0530</pubDate>
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