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                <title>lohri - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <title>कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे-राहुल ने दी देशवासियों को लोहड़ी की बधाई</title>
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                        <![CDATA[कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने लोहड़ी पर देशवासियों को बधाई देते हुए सुख, शांति और समृद्धि की कामना की।]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/congress-president-mallikarjun-kharge-rahul-congratulated-the-countrymen-on-lohri/article-139401"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-01/lohri.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे तथा पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने लोहड़ी के अवसर पर देशवासियों को मंगलवार को बधाई दी और सबके जीवन में खुशहाली की कामना की।</p>
<p>खरगे ने अपने बधाई संदेश में कहा, लोहड़ी के शुभ अवसर पर सभी को बहुत- बहुत बधाई। आशा है हर्ष और उल्लास का यह त्योहार आपके जीवन में अपार खुशियाँ व समृद्धि लेकर आए।</p>
<p>राहुल गांधी ने कहा, आप सभी को लोहड़ी की लख-लख बधाईयां। यह पावन त्यौहार सभी के जीवन में ढेर सारी खुशियां, सुख और शांति लेकर आए।</p>]]>
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                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 13 Jan 2026 11:44:39 +0530</pubDate>
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                <title>लोहड़ी पर गूंज उठा ‘सुंदर मुंदरिये हो, तेरा कौन विचारा हो, दुल्ला भट्टी वाला हो’</title>
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                        <![CDATA[मानसरोवर, मालवीयनगर, प्रतापनगर, सांगानेर, वैशालीनगर, विद्याधरनगर, सिरसी रोड, सीकर रोड,  खातीपुरा, कालवाड़ रोड पर भी लोहड़ी पर्व धूमधाम से मनाया गया। ]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/sundar-mundriya-ho-tera-kaun-vichara-ho-dulla-bhatti-wala/article-100670"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-01/5554-(7)4.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। पंजाबी समाज ने खुशियों की लोहड़ी मनाई। पंजाबी बहुल इलाकों में पर्व की रौनक देखते ही बन रही थी। सुबह से पंजाबी माहौल नजर आ रहा था। शहर में जगह-जगह पर पंजाब की संस्कृति साकार हुई। मुख्य आयोजन राजापार्क में हुआ। राजस्थान प्रदेश पंजाबी महासभा और राजापार्क व्यापार मंडल की ओर से यहां गोकाष्ठ लोहड़ी उत्सव कार्यक्रम का आयोजन किया गया। अतिथियों ने गोकाष्ठ से लोहड़ी की अग्नि प्रज्ज्वलित की। पंजाबी गीतों के साथ लोगों ने लोहड़ी की अग्नि के परिक्रमा की। भाजपा नेता रवि नैय्यर, भाजपा के प्रदेश उपाध्यक्ष सरदार अजयपाल सिंह, विधायक गोपाल शर्मा सहित कई गणमान्य लोग मौजूद रहे। पंजाबी समाज के साथ ही अन्य समुदाय के लोगों ने भी त्योहार का लुत्फ उठाया। खास बात यह रही कि इस बार अलग-अलग क्षेत्रों में अलग-अलग थीम  से लोहड़ी का महापर्व मनाया गया। शाम ढलते ही लोगों ने पंजाबी कलाकारों की मौजूदगी में भांगड़ा किया।</p>
<p>कैंप फायर के साथ अलग-अलग मनोरंजक कार्यक्रम हुए। रात के खाने के लिए बुफे भी शानदार हुआ। व्यंजनों में गुड़ और तिली की मिठास ने जायका बढ़ा दिया। अंताक्षरी और हाऊजी में बच्चों ने खूब आनन्द उठाया। आमतौर पर घरों में नई दुल्हन के आने और पुत्र जन्म पर लोहड़ी धूमधाम से मनाई जाती थी, लेकिन अब कन्या के जन्म लेने पर भी लोहड़ी पूरे उत्साह और उमंग के साथ मनाई जाने गई। महिलाओं ने नवजात बच्चों को बुरी नजर से बचाने के लिए लोहड़ी की अग्नि में तपाया। महिलाओं ने दुल्हा भट्टी को याद किया। मानसरोवर, मालवीयनगर, प्रतापनगर, सांगानेर, वैशालीनगर, विद्याधरनगर, सिरसी रोड, सीकर रोड,  खातीपुरा, कालवाड़ रोड पर भी लोहड़ी पर्व धूमधाम से मनाया गया। </p>
<p> </p>]]>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 14 Jan 2025 10:31:35 +0530</pubDate>
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                <title>पुत्र जन्म पर ही नहीं, कन्या जन्म पर भी मनाने लगे लोहड़ी</title>
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                        <![CDATA[शादी के बाद जिसकी पहली लोहड़ी है, उसे अपने घर में रहकर लोहड़ी मनाना और बुजुर्गों का आशीर्वाद लेना महत्वपूर्ण माना जाता है।]]>
                    </description>
                
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/lohri-started-being-celebrated-not-only-on-the-birth-of/article-100552"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-01/257rtrer-(11)5.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। आमतौर पर घरों में नई दुल्हन के आने और पुत्र जन्म पर लोहड़ी धूमधाम से मनाई जाती थी, लेकिन अब कन्या के जन्म लेने पर भी लोहड़ी पूरे उत्साह और उमंग के साथ मनाई जाने लगी है। जबकि श्रीगंगानगर-हनुमानगढ़ ने तो कन्या लोहड़ी अलग से सामूहिक स्तर पर मनाकर नजीर पेश की है। यह त्योहार भगवान सूर्य और अग्नि को समर्पित है। यह पर्व सर्दियों के जाने और बसंत ऋतु के आने का संकेत है। लोहड़ी की रात सबसे ठंडी मानी जाती है। इस त्योहार पर पवित्र अग्नि में फसलों का अंश अर्पित किया जाता है। </p>
<p><strong>कैसे मनाते हैं लोहड़ी</strong><br />रात के समय सभी लोग एक जगह इकट्ठा होते हैं और आग जलाते हैं। इस अलाव में गेहूं की बालियां, रेवड़ी, मूंगफली, खील, चिक्की और गुड़ से बनी चीजें अर्पित की जाती हैं। हर साल लोहड़ी का त्योहार मकर संक्रांति से एक दिन पहले मनाया जाता है। लोहड़ी के शुभ अवसर पर लोग एक-दूसरे को मिठाइयां भेंट करते हैं और शुभकामनाएं देते हैं। यह पर्व नई फसल आने की खुशी में मनाया जाता है। पंजाबियों के लिए यह त्योहार काफी महत्व रखता है। इस त्योहार के दिन पंजाबी गीत और डांस का आनंद लिया जाता है। इस रात को लोहड़ी जलाकर सभी रिश्तेदार और परिवार वाले उसकी पूजा करते हैं। </p>
<p><strong>बुरी नजर से बचाने के लिए बच्चे को आग के पास तपाते हैं</strong><br />महिलाएं अपने छोटे बच्चों को गोद में लेकर उसे लोहड़ी की आग तपाती हैं। माना जाता है इससे बच्चा स्वस्थ रहता है और उसे बुरी नजर नहीं लगती। शादी के बाद जिसकी पहली लोहड़ी है, उसे अपने घर में रहकर लोहड़ी मनाना और बुजुर्गों का आशीर्वाद लेना महत्वपूर्ण माना जाता है। </p>
<p><strong>दुल्ला भट्टी को भी याद किया जाता है</strong><br />दुल्ला भट्टी अकबर के समय में पंजाब में रहता था। उसे पंजाब के नायक की उपाधि से सम्मानित किया गया था। अमीर व्यापारी लड़कियां खरीदते थे तब भट्टी ने लड़कियों को छुड़वाया और उनकी शादी भी करवाई। इस तरह महिलाओं का सम्मान करने वाले वीर को लोहड़ी पर याद किया जाता है। </p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br />कन्या लोहड़ी मनाने का स्वागत योग्य कदम है, यह हनुमानगढ़ और श्रीगंगानगर में व्यापक स्तर पर मनाया जाता है, जबकि जयपुर में भी इसकी अच्छी शुरूआत हुई है। मुझे लगता है कि इससे दोनों जिलों का बिगड़ा हुआ लिंगानुपात अधिक ठीक हो जाएगा।    <br />-जसबीर सिंह, पूर्व अध्यक्ष, राजस्थान अल्पसंख्यक आयोग, राजस्थान</p>
<p>पुत्र जन्म पर अधिक खुशी और उत्साह के साथ मनाई जाने वाली लोहड़ी अब कन्या जन्म पर भी मनाई जाने लगी है। यह एक बहुत बड़ा सकारात्मक कदम है, लोगों के नजरिए में बदलाव आया है। लोग लड़के और लड़की में भेद करने वाली मानसिकता से बाहर निकल आए हैं। यह बड़ा क्रांतिकारी कदम है, यही बात गुरु नानकजी ने समय-समय पर कही है।    <br />-डॉ. मन्जीत कौर, गुरु वाणी चिंतक एवं शोधकर्ता, जयपुर </p>]]>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 13 Jan 2025 12:09:45 +0530</pubDate>
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                <title>लोहड़ी पर्व पर विशेष : राजा जयसिंह की दिल्ली हवेली, अब बंगला साहिब गुरुद्वारा</title>
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                        <![CDATA[  विस्थापित सिखों के लिए बसाया गया था राजापार्क]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/61dfc9c09085d/article-3973"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-01/lohri.jpg" alt=""></a><br /><p> जयपुर। भारत-पाक विभाजन के बाद जयपुर आए सिख समुदाय के लोगों के लिए राजापार्क बसाया गया था। सरकार ने 1953 में पंजाबी हाउसिंग कॉपरेटिव सोसायटी बनाकर 200 क्वार्टर आवंटित किए थे। राजापार्क का पुराना नाम फतेहटीबा था। अप्रैल 1960 में चक्रवर्ती राजगोपालाचारी के जयपुर आगमन के बाद इस इलाके को उनके नाम से जाना जाने लगा। <br /><br /><strong>राजा जयसिंह थे गुरु गोबिंद सिंह से प्रभावित</strong><br />वैशाली नगर के सतवीर सिंह बताते हैं कि जयपुर के राजा जय सिंह गुरु गोबिंद सिंह जी से प्रभावित थे। राजा ने गुरु गोविंद सिंह को हीरे जड़ित सोने की तलवार भी भेंट की थी। गुरु गोबिंद सिंह की तलवार आज भी सिटी पैलेस में रखी हुई है। राजा जयसिंह ने दिल्ली की अपनी हवेली दान की थी। वह महल अब बंगला साहिब गुरुद्वारा है। इस रिश्ते की वजह से 18वीं शताब्दी में कई सिख जयपुर आए। वे जौहरी बाजार में रुके और बाद में अलग-अलग इलाके में बसे। जयपुर में चालीस से अधिक गुरुद्वारे हैं। सेना से रिटायर लोगों ने वैशाली नगर में घर बनाया।<br /><br /><strong>लड़का-लड़की का भेदभाव मिटाती है कन्या लोहड़ी</strong><br />लड़का-लड़की के भेदभाव को समाप्त करने के लिए राजा पार्क के लोगों ने ‘कन्या लोहड़ी’ की शुरुआत की। इस दिन एक साल से कम उम्र की लड़कियों को सम्मानित किया जाता है। उनके बैंक खातों में राशि जमा कराई जाती है। आयोजन से जुड़े जगजीत सिंह सूरी ने कहा कि हमने 2016 में इसकी शुरुआत की थी। <br /><br /><strong>आग के पास सुनते हैं दुल्ला-भट्टी की कहानियां</strong><br />मान्यता है कि अकबर के शासनकाल में दुल्ला-भट्टी नाम का एक व्यक्ति पंजाब में रहता था। उस वक्त कुछ अमीर व्यापारी लड़कियों की बोली लगाते थे। दुल्ला-भट्टी उन लड़कियों को बचाकर उनकी शादी करा देता था। उस समय से लोहड़ी पर दुल्ला-भट्टी की कहानियां सुनाई जाती है। <br /><br /><br /><strong>सादगी से मनेगी लोहड़ी</strong><br />नई फसल के आगमन की खुशी में जयपुर में पंजाबी समाज द्वारा गुरुवार को लोहड़ी पर्व सादगी से मनाया जाएगा। पंजाबी महासभा व राजापार्क व्यापार मंडल दोनों मिलकर इस त्योहार को मनाएंगे। अध्यक्ष रवि नैय्यर ने बताया कि कई दशकों से लोहड़ी पर्व राजपार्क में धूमधाम से मनाते रहे हैं, लेकिन पिछले दो साल से कोविड के चलते लोहड़ी का पर्व सादगी से ही मनाया जा रहा है। राजापार्क मुख्य चौराहे पर शाम 7:15 बजे गोकाष्ठ से लोहड़ी दहन किया जाएगा। इसमें गाय का देशी घी व हवन सामग्री का उपयोग होगा। ना ढोल होगा, ना डीजे होगा और ना भंगड़ा होगा। लोहड़ी का पूजन कर लोहड़ी दहन होगी। इस मौके पर कोरोना महामारी को समाप्त करने की भी कामना होगी। कुंडली विश्लेषक डॉ. अनीष व्यास ने बताया कि मान्यता है कि लोहड़ी पर धरती माता अच्छी फसल देगी। पंजाब में इस त्योहार को तिलोड़ी कहते हैं। वहां लोहड़ी के दिन तिल, गुड़ खाने और आपस में बांटने की परम्परा है।</p>]]>
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                <pubDate>Thu, 13 Jan 2022 13:09:48 +0530</pubDate>
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