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                <title>जनता क्लिनिक का जनता को पता नहीं : नाम नया हालात वही, कोटा के आरोग्य मंदिर बने खाली कुर्सियों के केंद्र</title>
                                    <description><![CDATA[डॉक्टर महीनों से नदारद, दो-तिहाई केंद्रों पर स्टाफ अधूरा।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/public-unaware-of--janata-clinics---new-name--same-old-story%E2%80%94kota-s--arogya-mandirs--become-centers-of-empty-chairs/article-146814"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/1200-x-60-px)-(1)26.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। शहर में सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं की हकीकत ह्यशहरी आयुष्मान आरोग्य मंदिरह्ण के नाम पर चल रहे पूर्व के जनता क्लिनिकों में साफ दिखाई दे रही है। नाम बदलने और बड़े दावों के बावजूद जमीनी स्तर पर हालात बेहद खराब हैं। 20 दिनों तक किए गए भौतिक सत्यापन में सामने आया कि अधिकांश केंद्रों पर डॉक्टर ही नहीं हैं, कई जगह स्टाफ अधूरा है और कुछ केंद्रों पर तो ताले लटके मिले।</p>
<p><strong>2 माह से अधिक गुजरा समय</strong><br />विभाग ने 2 माह पूर्व ही इन शहरी आयुष्मान केन्द्रों का संचालन नयी एजेन्सी को दिया है। क्षेत्र से लगातार मिल रही जानकारीयों के सत्यापन के लिये नवज्योति रिपोर्टर टीम ने 24 फरवरी से बड़गांव, सुखाडिया, नान्ता, घोड़ा बस्ती, एक मीनार मस्जिद, गोवर्धनपुरा और बंजारा कॉलोनी समेत कई आरोग्य मंदिरों का दौरा किया। केंद्रों में कहीं भी पूरा स्टाफ ड्यूटी पर मौजूद नहीं मिला। दो केंद्रों पर तो निरीक्षण के दौरान ताले लगें मिलें, जबकि जिन केंद्रों पर ड्यूटी ओपीडी का बोर्ड लगा था वहां भी डॉक्टर नदारद थे। कही पर सात कार्मिकों के नाम की जानकारी तो दी गयी, लेकिन मौके पर उनकी उपस्थिति नहीं मिली, ज्यादातर जगह पर कार्मिक के बारे में कहा गया कि वह अन्य जगह पीएचसी पर गये हुये है। हालांकि नये नियमार्न्तगत शहरी आयुष्मान केन्द्रों के स्टाफ की ड्यूटी का जिम्मा मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी कार्यालय का है ।</p>
<p><strong>1.45 रू. प्रति माह के 7 स्टाफ की अनुशंसा</strong><br />सरकारी निदेर्शों के अनुसार प्रत्येक आरोग्य मंदिर के लिये 1.45 रू. मेनपॉवर के दिये जाते है जिससे एक डॉक्टर, दो नर्सिंग स्टाफ, एक फार्मासिस्ट, एक एएनएम, एक सहायक कर्मचारी और एक सफाई कर्मचारी सहित कुल सात कर्मचारियों की व्यवस्था होनी चाहिए। लेकिन नए वित्तीय सत्र के दो महीने गुजर जाने के बाद भी अधिकांश केंद्रों पर चतुर्थ श्रेणी और सहायक कर्मचारी तक नियुक्त नहीं किए गए। परिणामस्वरूप कई जगह गंदगी, बिखरी दवाइयां और अव्यवस्था का आलम देखने को मिला।</p>
<p><strong>महिला स्टाफ की सुरक्षा</strong><br />सबसे खराब स्थिति गोवर्धनपुरा आरोग्य मंदिर में सामने आई। यहां कायर्करत डॉक्टर रूद्रप्रताप छावनी आरोग्य मंदिर पर ड्यूटी कर रहे थे, हांलाकि यहां पर स्टाफ के नाम पर मौजूद एक फार्मासिस्ट ने बताया कि सामुदायिक भवन में चल रहे इस केंद्र पर स्टाफ रुकना नहीं चाहता, क्योंकि अधिकतर कर्मचारी महिलाएं हैं, और सुरक्षा की समस्या बनी रहती है । इसी तरह एक मीनार मस्जिद, छावनी क्षेत्र में शनिवार को दोपहर 2:50 बजे ही केंद्र का ताला लगा मिला। स्थानीय लोगों ने बताया कि यहां डॉक्टर और एजेंसी के बीच विवाद चल रहा है, जिसके कारण डॉक्टर नहीं आते। मरीज अक्सर इलाज की उम्मीद में आते हैं लेकिन बिना चिकित्सक के खाली कुर्सी देखकर वापस लौट जाते हैं।</p>
<p><strong>ओपीडी समय चस्पा कर दिया पर ताले नहीं खुले</strong><br />घोड़ा बस्ती आरोग्य मंदिर में कागजों पर दो टाइम ओपीडी का समय लिखा है, लेकिन वास्तविकता में स्टाफ एक बजे से पहले ही निकल जाता है। मौके पर बिजली विभाग का कर्मचारी भी बिल सम्बन्धी काम से बाहर खड़ा मिला। ओपीड़ी समय के अनुसार हमारी टीम शाम को फिर से यहां पहुंची तो भी यहां मुख्य दरवाजे पर ताला ही लगा मिला।सबसे अजीब स्थिति बंजारा कॉलोनी में सामने आई, जहां आरोग्य मंदिर का कोई बोर्ड तक नहीं लगा है। यह केंद्र स्थानीय पार्षद के घर के भीतर चलाया जा रहा है और यहां पिछले तीन महीनों से डॉक्टर ही नहीं है। स्थानीय पीएचसी शॉपिंग सेंटर के चिकित्सक डॉ. संजय शायर के अनुसार डॉक्टर नहीं होने से मरीजों को काफी परेशानी हो रही है।</p>
<p><strong>आॅनलाईन फोटो में भी आधा ही स्टाफ</strong><br />केंद्रों के संचालन में पारदर्शिता पर भी सवाल उठ रहे हैं। कर्मचारियों के अनुसार अटेंडेंस के नाम पर सभी कर्मचारी एक साथ फोटो खींचकर आॅनलाइन अपलोड कर देते हैं, जबकि मौके पर आधे कर्मचारी भी मौजूद नहीं होते। ऐसे में भी विभाग द्वारा इन पर संज्ञान न लेना लापरवाही का सबसे बड़ा उदाहरण है।</p>
<p><strong>जनता तो क्या जनप्रतिनिधियों तक को नहीं पता</strong><br />जनता क्लिनिक के प्रचार प्रसार का हाल यह है कि इनके प्रति किसी भी प्रकार के रूट मेंपिंग तक विभाग के पास मौजूद नहीं है। सम्बन्धित मदर पीएचसी के प्रभारी चिकित्सकों ने तो यहां के रजिस्टरों में विजिट तक दर्ज नहीं हे, यहीं हाल आम नागरिको ने भी बयान किया कि हमें तो अभी तक पता ही नहीं कि हमारे यहां भी कोई क्लिनिक है। जनप्रतिनिधियों को भी इन केंद्रों की स्थिति की जानकारी नहीं है। गोवर्धनपुरा वार्ड-20 की पार्षद इति शर्मा (पूर्व ) ने कहा कि सरकार बनने के बाद इस विषय में उनसे कोई संवाद तक नहीं किया गया, और उन्हें यह तक नहीं पता कि उनके क्षेत्र में जनता क्लिनिक किस जगह और किस स्थिति में चल रहा है।</p>
<p><strong>नोडल अधिकारी ने कहा सभी 40 जगह डॉक्टर</strong><br />उधर विभाग नोड़ल अधिकारी डिप्टी सीएमएचओ घनश्याम मीणा का दावा है कि सभी 40 केंद्रों पर डॉक्टर लगाए जा चुके हैं। उनहोनें कहा कि एजेन्सी की ओर से हमे लेटर में बताया गया कि सभी जगह डॉक्टर लगे हुये है कहीं भी जगह खाली नहीं केवल बाकि दो स्टाफ की लिस्ट अभी नहीं आयी है। लेकिन ग्राउंड रिपोर्ट इस दावे से बिल्कुल उलट तस्वीर दिखाती है। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों की जिम्मेदारी तय होने के बावजूद अब तक किसी प्रकार की सख्त कार्रवाई नहीं हुई है। सवाल यह है कि जब प्रत्येक केंद्र पर करीब 1.45 लाख रुपए प्रतिमाह स्टाफ पर खर्च किए जा रहे हैं, तो फिर जमीन पर स्टाफ ओर सुविधाएं क्यों नहीं दिखाई दे रही हैं। स्पष्ट है कि सिर्फ नाम बदलकर जनता क्लिनिक को ह्यआरोग्य मंदिरह्ण बना देने से स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार नहीं होगा। जब तक नियमित निरीक्षण, जवाबदेही और सख्त कार्रवाई नहीं होगी, तब तक ये केंद्र आम लोगों के लिए राहत नहीं बल्कि निराशा का कारण बने रहेंगे ।</p>
<p><strong>जमीनी जांच में सामने आए तथ्य</strong><br />- 20 दिन में कई आरोग्य मंदिरों का भौतिक सत्यापन<br />-अधिकांश केंद्रों पर पूरा स्टाफ नहीं मिला<br />-दो केंद्रों पर निरीक्षण के दौरान ताले<br />-कई जगह डॉक्टर महीनों से नदारद<br />-गंदगी और अव्यवस्था, सफाई कर्मचारी तक नहीं<br />-अटेंडेंस के लिए फोटो अपलोड, मौके पर स्टाफ गायब</p>
<p><strong>प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों का मजबूत होना बेहद जरूरी</strong><br />सार्वजनिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार शहरी क्षेत्रों में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण होती है। यदि इन केंद्रों पर नियमित डॉक्टर और स्टाफ उपलब्ध नहीं होगा तो छोटे-छोटे रोग भी गंभीर बन सकते हैं और मरीजों का बोझ सीधे बड़े अस्पतालों पर बढ़ेगा। इसलिए प्रशासन को इन केंद्रों की नियमित मॉनिटरिंग और जवाबदेही तय करनी चाहिए।</p>
<p><strong>यूँ बोले जिम्मेदार अधिकारी</strong><br />हमने एजेंसी से रिपोर्ट मांगी है। उनके अनुसार सभी 40 केंद्रों पर डॉक्टर लगा दिए गए हैं। इससे ज्यादा जानकारी अभी नहीं दी जा सकती।<br /><strong>- डॉ. घनश्याम मीणा, नोडल अधिकारी, आयुष्मान आरोग्य मंदिर, डिप्टी सीएमएचओ कोटा।</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 17 Mar 2026 15:04:05 +0530</pubDate>
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                <title>सर्वेन्ट क्वार्टर्स खाली, कंटकों ने आबाद कर डाला</title>
                                    <description><![CDATA[17 आवास पूरी तरह से खण्डहर बन चुके हैं, 10 मरम्मत योग्य हैं ।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/servant-quarters-empty--vermin-infested/article-144052"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-02/1200-x-600-px)-(4)5.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। एमबीएस अस्पताल परिसर के सरकारी आवासीय कॉलोनी की बदहाल स्थिति ने स्थानीय निवासियों और अस्पताल कर्मचारियों के लिए सुरक्षा में गंभीर समस्या पैदा कर दी है। अस्पताल प्रशासन की ओर से कोई ध्यान न दिए जाने के कारण यह सरकारी आवास खण्डहरों में तब्दील हो चुके है। यहाँ रहने वाले परिवारों ने इन्हें पूरी तरह से छोड़ दिया  है। एक समय ये आवास चिकित्सकों और अस्पताल कर्मचारियों के लिए बनाए गए थे, लेकिन अब इनकी हालत इतनी खस्ता हो चुकी है कि इनमें रहने की संभावना न के बराबर है। कर्मचारयों के यहां से जाने के बाद इन्हे तुड़वाने का एस्टीमेट बनाने के लिये सार्वजनिक निर्माण विभाग को कहा गया लेकिन तभी से यह खाली घर और भी जानलेवा हो चुके हे।</p>
<p><strong>खण्डहर में तब्दील आवासों की खौफनाक तस्वीर</strong><br />अस्पताल परिसर में 64 सरकारी आवासों में से 35 आवासों की संख्या आवंटित की गई थी। हालांकि, इनमें से 17 आवास पूरी तरह से खण्डहर बन चुके हैं, 10 मरम्मत योग्य हैं और 7 ही ऐसे हैं जो किसी तरह रहने योग्य माने जा सकते हैं। इन खण्डहरों के अंदर की स्थिति इतनी खराब हो चुकी है कि दीवारें, छतें और अन्य संरचनाएं गिरने का खतरा बनी रहती हैं। अस्पताल प्रशासन ने इन आवासों को पूरी तरह छोड़ दिया है, जिससे न केवल आवासीय कॉलोनी, बल्कि आसपास के लोग भी असुरक्षित महसूस कर रहे हैं।</p>
<p><strong>नशेड़ियों से सुरक्षा को गम्भीर खतरा</strong><br />नशा मुक्ति केन्द्र के पास स्थित खाली आवासीय ढांचे दिन भर दवाई लेने आने वाले लोगों से भरे रहते हैं, लेकिन रात के समय ये खाली मकान नशे के आदि लोगों के आश्रय स्थल में बदल जाते हैं। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, स्मैक और इंजेक्शन से नशा करने वाले नशेड़ियों की टोलियां यहाँ मंडराती रहती हैं और कभी-कभी अपने साथ महिलाओं को भी लेकर आती हैं। स्थानीय निवासी बताते हैं कि इन खंडहरों में नशेड़ी गैंग के जमा होने से कई सुरक्षा खतरे उत्पन्न हो रहे हैं। खाली मकानों की दीवारें गिरने का खतरा हमेशा बना रहता है, साथ ही इन जगहों पर चोरी और अन्य अपराध की घटनाएं भी सामने आ रही हैं। इसके चलते अस्पताल परिसर और आसपास के क्षेत्र में असुरक्षा का माहौल बन गया है। स्थानीय लोगों का कहना है कि इन खंडहरों को नशेड़ी और स्मैकचियों का अड्डा बनने से न केवल चोरी और अव्यवस्था बढ़ी है, बल्कि यह सामाजिक और मानसिक सुरक्षा के लिए भी खतरा पैदा कर रहा है।</p>
<p><strong>झाड़ियां और पेड़ों से बढ़ता जंगली जानवरों का खतरा</strong><br />परिसर में स्थित इस क्षेत्र में काफी घनी झाड़ियाँ उग आई है यहां पुराने पेड़ होने से घना जंगल बन गया है अभाी हाल ही में यहां सांभर नजर आ रहा है ।साथ ही जहरीले सांप, बिच्छू और गिरगिट जैसे खतरनाक जानवरों की उपस्थिति से क्षेत्र के निवासियों के लिए खतरा बढ़ गया है। खासकर बरसात के मौसम में इस समस्या में वृद्धि हो जाती है। इन जानवरों के कारण, न केवल अस्पताल परिसर में रहने वाले लोग, बल्कि आसपास के नागरिक भी असुरक्षित महसूस कर रहे हैं।</p>
<p><strong>मोर्चरी की टूटी सड़क पर फैला सीवरेज का पानी</strong><br />इन्ही खाली पड़े आवासों के पास नयी मोर्चरी भवन की शुरूआत की गयी थी । ऐसे में यहां आने वाले परिजनों को भी काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता है इस सड़क के दोनों और मिट्टी और कंस्ट्रक्शन का मलबा पड़ा हुआ है । साथ ही नयी क्वार्टरर्स के पास सड़क पर ही सीवरेज का पानी जमा हुआ रहता है।</p>
<p><strong>चुप्पी तुड़वाने  में ही लग गये 2 साल</strong><br />अस्पताल प्रशासन भले ही खण्डहर हो चुके आवासों की जगह नये आवास बनाने के लिये प्रक्रिया प्रारम्भ करने की बात कह रहा है लेकिन पिछले ढ़ाई सालों से अव्यवस्थाओं के बावजूद प्रशासन की ओर से कोई ठोस कदम नहीं उठाए गए हैं। अन्य डुप्लेक्स आवासों में रह रहे स्टाफ इस स्थिति से परेशान हैं और उनका कहना है कि अगर प्रशासन जल्द ही इस पर ध्यान नहीं देता, तो स्थिति और भी बिगड़ सकती है। खण्डहर आवासों की मरम्मत और रख-रखाव की प्रक्रिया तुरंत शुरू करनी चाहिए। साथ ही, सुरक्षा व्यवस्था में सुधार, साफ-सफाई की व्यवस्था, और जहरीले जानवरों से सुरक्षा के लिए यहां की जंगली झाड़ियां कटवाकर सफाई हेतु कदम उठाए जाने चाहिए।</p>
<p> साल 2012 से इन क्वार्टरर्स में रह रहा था, करीब 14 पैड़ अमरूद 3 पेड़ आम के लगायें थे । जबसे यहां पर नशामुक्ति केन्द्र चालू हुआ तब से एक एक करके सारे आवास खाली हो गये। सारी रौनक खत्म हो गयी।<br /><strong>-कमलेश, निवासी के आर 221</strong></p>
<p> मै यहां सालों से नौकरी करता हूँ, यहां सबकुछ ठीक ठाक था सुख दु:ख में साथ देते थे। अब केवल दिन में मोर्चरी को आने वाले लोग नजर आते है रात के समय चारो तरफ अनजान नशेड़ियों का जमावड़ा रहता है ।<br /><strong>-अफजल इलेक्ट्रिशियन पीएचड़ी पम्प हाउस</strong></p>
<p>इन क्वार्टर्स को नये सिरे से तैयार करवाने की और हमारा ध्यान हे इसके लिये पी डब्ल्यूडी से एस्टीमेट के लिये कहा गया है,इसके बाद ही बताया जा सकता है कि इस जगह का क्या उपयोग हो सकता है ।<br /><strong>-डा. धर्मराज मीणा, अधीक्षक एमबीएस अस्पताल कोटा</strong></p>
<p>इन खण्डहर आवासों जो बिल्कुुल भी रहने योग्य नहीं है इनके ध्वस्तीकरण के लिये हमनें एस्टीमेट बना दिया है, निर्णय पर आने की कार्यवाही हमारे स्तर पर की जायेगी।<br /><strong>-अशोक सनाढ्य अधिशाषी अभियन्ता प्रोजेक्ट खंड पीडब्ल्यूडी कोटा</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
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                <pubDate>Sat, 21 Feb 2026 14:30:29 +0530</pubDate>
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                <title>कोटा दक्षिण वार्ड 41-वार्ड में खाली प्लॉट बने कचरा पॉइन्ट </title>
                                    <description><![CDATA[दिनभर लगा रहता है पशुओं का जमावड़ा]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/kota-south-ward-41--empty-plots-in-the-ward-become-garbage-points/article-125021"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-08/1ne1ws-(630-x-400-px)-(5)1.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। शहर के नगर निगन दक्षिण वार्ड 41 में विकास के विभिन्न कार्य तो हुए है लेकिन बरसात के दौरान सड़कों से डामर बह गया है तथा कंक्रीट-गिट्टी से अब वाहन चालक चोटिल हो रहे है। वहीं वार्ड में स्थित अयप्पा मंदिर के आस-पास नालियों का ढकान भी टूटा हुआ तथा खाली पड़ी जगहों पर लोगों ने कचरा प्वाइंट बना रखा है। वहीं पार्षद का कहना है कि पर्याप्त बजट नहीं मिलने के कारण वार्ड के विकास नहीं करवा पा रहे है। मंदिर के पास वाली गली में कचरा गाड़ी नहीं आती है। कचरा गाड़ी मैन रोड पर खड़ी होने के कारण रहवासियों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है। रात में कॉलोनियों की लाइटें भी नहीं जलती है। वार्ड की मुख्य सड़क पर ठेले वाले शाम को जाते समय बची हुई खाद्य सामग्री वहीं डाल जाते है जिससे कॉलोनीवासियों को परेशानी का सामना करना पड़ता है। मुख्य सड़क पर कचरा बिखरा होने के करण दिनभर पशुओं का जमावड़ा लगा रहता है। आइटीआइ कॉलेज के पास स्थित नाले में काफी दिनों से कंटीली झांडियां उगी हुई है। बारिश दिनों में जहरीले जीवों का खतरा बना रहता है। छत्रपुरा रोड पर स्थित मंदिर शिव मंदिर के पास स्थित वाटर कूलर काफी दिनों से खराब है, जिसके कारण श्रद्धालुओं कोपानी के अभाव में परेशानी का सामना करना पड़ता हैं। </p>
<p><strong>जगह-जगह कचरे के ढेर</strong><br />वार्ड में खाली पड़े प्लॉट कचरा प्वाइंट बने हुए है। आरटीओ आॅफिस की दुकानों पर कचरा जमा हो रखा है। नालियों में निकासी व्यवस्था भी सही नहीं है। साफ-सफाई के अभाव में बीमारियों के फैलने की भी आशंका बनी रहती है।</p>
<p><strong>सड़कों में गड्डे बने परेशानी</strong><br />वार्डवासियों ने बताया कि बारिश की वजह से सड़क पर गड्डे हो गए है। राहगीरों को आवागमन में काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है। रात्रि में निकलने के दौरान हादसे का भी डर बना रहता है। रात्र में मुख्य सड़क पर कुते भी राहगीरों व वाहनचालकों के पीछे भागते रहते है।</p>
<p><strong>खुला ट्रांसफार्मर दे रहा हादसों को न्यौता</strong><br />वार्ड के मुख्य रोड पर स्थित बिजली का खुला ट्रांसफार्मर लगा हुआ है। वहां पर दिनभर लोगों की आवाजाही लगी रहती है जिससे बारिश के समय पर कभी भी बड़ा हादसा हो सकता हैं। वहां स्वीच बॉक्स भी खुले पड़े है।</p>
<p><strong>ये हुए विकास के कार्य </strong><br />वार्ड में विभिन्न जगहों पर सीसी व नालियों का निर्माण किया। वहीं आरटीओं के पीछे स्थित पार्क का जीर्णोद्धार किया। </p>
<p><strong>वार्ड का एरिया</strong><br />छत्रपुरा, पॉलोटेक्निक कॉलेज, आई टीआई कॉलेज, आरटीओ आॅफिस,अयप्पा मंदिर के सामने  का भाग, मीणा बालिका छात्रावास, करणी नगर विकास समिति इत्यादि।</p>
<p>हमारी गली प्रतिदिन झाडू से सफाई नहीं होती है। और बारिश के समय पर रोड लाइट बंद रहती है जो कि दो से तीन बंद चालू होती हैं। <br /><strong>- राकेश कुमार</strong></p>
<p>वार्ड के मुख्य रोड पर ही कचरा गाड़ी आती है तो कचरा डालने के लिए वहां पर जाना पड़ता है। कभी कचरा गाड़ी का हार्न सुनाई नहीं देता है तो कचरा घर पर ही रखा रह जाता हैं। <br /><strong>- प्रेम बाई</strong></p>
<p>वार्ड के बाबा भोलेनाथ मंदिर व मां काली मंदिर पर लग वाटर कूलर काफी दिनों से बंद है जिससे श्रद्धालुओं को परेशानी आती हैं।<br /><strong>- साबु राठौर</strong></p>
<p>वार्ड वासियों की पट्टे की मांग अभी तक लंबित हैं। बजट का अभाव होने से लंबे समय से समस्याओं के निराकरण करने में परेशानी आ रही है। सरकार बजट देगी तो रोड का पेचवर्क व नालियों पर ढकान सहित अन्य कार्य किए जाएगा। <br /><strong>- साहिब हुसैन, वार्ड पार्षद 41 कांग्रेस</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 28 Aug 2025 14:42:55 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>निजी भूखंड बीमारियों का बन रहें ठिकाना, खाली प्लॉटों में फैल रहा कीचड़ और गदंगी </title>
                                    <description><![CDATA[  कवाई कस्बे में इन दिनों जगह-जगह गंदगी के ढेर लग रहे है। वहीं सरकारी कर्मचारी अधिक मुनाफा कमाने के चक्कर में प्लॉट खरीद लेते है और खाली प्लॉटों की कोई सुध नहीं लेते है]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/baran/private-plots-are-becoming-a-breeding-ground-for-diseases/article-121029"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-07/news-(4)15.png" alt=""></a><br /><p>कवाई। कवाई कस्बे में इन दिनों जगह-जगह गंदगी के ढेर लग रहे है। वहीं सरकारी कर्मचारी अधिक मुनाफा कमाने के चक्कर में प्लॉट खरीद लेते है और खाली प्लॉटों की कोई सुध नहीं लेते है। जिनकी देखभाल तक नहीं करते जिनमें  गंदगी के ढेर लग रहते है। इन गंदगी के ढेरों से मौहल्ले वासियों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। स्वच्छ भारत अभियान के तहत जहां एक ओर सरकार स्वच्छता को लेकर बड़े-बड़े दावे कर रही है। वहीं कवाई कस्बे में जमीनी हालात इसके बिल्कुल उलटे नजर आ रहे हैं। कस्बे के कई मौहल्लों में निजी भूखंडों पर गंदगी के ढेर लगे हुए हैं। जिनकी सफाई की जिम्मेदारी कोई नहीं ले रहा। खास बात यह है कि ये भूखंड किसी आम नागरिक के नहीं है बल्कि सरकारी कर्मचारियों के हैं जो अधिक मुनाफा कमाने के चक्कर में प्लॉट खरीद कर रख लेते हैं। मोहल्ले वासियों ने बताया कि करीबन 15 साल से  प्लॉट ऐसे ही खाली पड़े हुए हैं। जिससे कोलानीवॉसी कचरा डाल देते है। जिससे खाली प्लॉटों में गंदगी का अंबार लगा रहता है परंतु इस और किसी ने ध्यान नहीं दिया। धीरे-धीरे स्थिति और गंभीर हो गई है  गंदगी और वहां फैला कीचड़ सड़ रहा है। जिससे बीमारियां होने का खतरा रहता है एवं काफी बदबू आती रहती है। इस ओर जिम्मेदारों को ध्यान देकर जल्दी ही इस समस्या का समाधान निकालना चाहिए।</p>
<p><strong>सरकारी कर्मचारी लगा रहे स्वच्छता अभियान को पलीता </strong><br />वार्ड नंबर 11 से गुजरने वाला बाईपास गौरव पथ जो कस्बे से गुजर रहे स्टेट हाईवे को नेशनल हाईवे से जोड़ता है। इस गौरव पथ पर स्थित निजी भूखंडों में इन दिनों बारिश के कारण कीचड़ पनप रहा है। गंदगी एवं पानी भर गया है। इन जलभराव वाले भूखंडों में मच्छर जहरीले कीड़े-मकोड़े और बीमारियां फैलाने वाले जीव पनप रहे हैं। स्थानीय लोग बताते हैं कि यह स्थिति दिन-ब-दिन और गंभीर होती जा रही है, वहीं सरकारी कर्मचारी प्लॉट खरीदकर उनकी अनदेखी कर रहे है और स्वच्छता अभियान को पलीता लगा रहे है। </p>
<p><strong>बीमारी और असुरक्षा के साये में जी रहे कस्बेवासी </strong><br /> वहीं खाली प्लॉट में फैल रहे कीचड़ और गंदगी से मोहल्ले वासी बीमारी और असुरक्षा के साये में जी रहे हैं। रात के समय घरों के बाहर निकलना खतरे से खाली नहीं है, क्योंकि जहरीले जीव अक्सर घरों तक पहुंच जाते हैं।</p>
<p><strong>पंचायत व प्रशासन बन रहा मूकदर्शक </strong><br /> स्थानीय निवासी सोनू नागर, टिंकू सुमन,  लीला सोनी, केदार बाई सहित अन्य लोगों ने बताया कि उन्होंने कई बार पंचायत व प्रशासन को इन भूखंडों की सफाई को लेकर अवगत कराया, परंतु अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। निवासियों ने बताया कि जब इन भूखंडों के मालिक सरकारी नौकरी में हैं और समाज को साफ-सुथरा रखने की जिम्मेदारी उन्हीं पर भी है, तो फिर वे खुद अपने निजी भूखंडों की उपेक्षा कर मोहल्ले को बीमारियों के खतरे में क्यों डाल रहे हैं। </p>
<p><strong>स्थानीय लोगों की प्रमुख मांगें </strong><br />स्थानीय लोगों ने सभी भूखंड मालिकों को नोटिस देकर जल्द सफाई सुनिश्चित करवाने की मांग की है। उन्होंने मांग की है कि  ग्राम पंचायत इन भूखंडों की नियमित निगरानी करे और भूखंड मालिकों द्वारा लापरवाही बरतने पर सख्त कार्रवाई हो। मोहल्ले की सफाई को प्राथमिकता देते हुए विशेष अभियान चलाया जाए। यदि जल्द कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया तो मोहल्लेवासी जनआंदोलन या प्रदर्शन के लिए मजबूर होंगे। </p>
<p>सरकारी कर्मचारियों ने अधिक मुनाफा कमाने के लिए कई प्लॉट खरीद रखे है। लेकिन प्लॉटों की कोई सुध नहीं लेते, जिससे वहां गंदगी और कीचड़ फैला रहता है। जिसका खामियाजा कस्बेवासियों को झेलना पड़ रहा है।   <br /><strong>- सोनू यादव, कस्बेवासी </strong></p>
<p>समस्या को लेकर कई बार पंचायत और प्रशासन को अवगत करा दिया है लेकिन जिम्मेदारों पर इसका कोई असर नहीं हो रहा है और वे मूकदर्शक बनकर बैठे हुए है। <br /><strong>- नीतू गुर्जर, मोहल्लेवासी </strong></p>
<p>प्रशासन और जिम्मेदारों को जल्दी ही इस समस्या की सुध लेकर स्थायी समाधान निकालना चाहिए। जिससे कस्बेवासी और मोहल्लेवासियों का राहत मिल सके। <br /><strong>- गोवर्धन गोयल, कस्बेवासी </strong><br />    <br />ग्राम पंचायत द्वारा ऐसे सभी खाली पड़े भूखंडों का शीघ्र ही सर्वे कराया जाएगा। जिन भूखंडों में गंदगी, जलभराव या स्वच्छता की लापरवाही पाई जाएगी उनके मालिकों को नियमानुसार नोटिस जारी किए जाएंगे और आवश्यकतानुसार सख्त कार्यवाही की जाएगी।<br /><strong>- रामप्रताप सिंह, ग्राम विकास अधिकारी, ग्राम पंचायत कवाई </strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>बारां</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 19 Jul 2025 16:48:21 +0530</pubDate>
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                <title>रोज 720 टीमें कर रही सर्वे, नहीं दिख रहा असर, पनप रहे मच्छर </title>
                                    <description><![CDATA[शहर के  खाली प्लॉट, पार्क के फव्वारों व ब्लैक स्पोट में पनप रहे मच्छर]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/720-teams-are-conducting-surveys-every-day--no-effect-is-visible--mosquitoes-are-breeding/article-119819"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-07/882roer-(2)1.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग ने मानसून पूर्व  मलेरिया डेंगू, स्क्रब टाइफस जैसी बीमारियों से लड़ने के लिए जो कमर कसी थी उसकी पेटी अब खुल गई है। बारिश पूर्व विभाग ने खाली प्लॉट, गड्ढो की जो कवायद की थी वो पूरी नहीं होने से शहर में कई जगह बारिश का पानी जमा हो गया उसमें अब मच्छर पनप रहे जिससे लोग अब इसकी चपेट में आना शुरू हो गए है। विभाग की ओर से  व्यापक प्रचार प्रसार और सर्वे के बावजूद भी लोग डेंगू की चपेट में आ रहे है।  उल्लेखनीय है कि  इस बार चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग ने घरों में सर्वे करने के साथ ही गली मोहल्लों के गड्ढो जिनमें बारिश का पानी जमा हो सकता है उनको चिहिंत करने का काम शुरू किया है।  लेकिन वो पूरी तरह मूर्तरूप नहीं ले सका। शहर में चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग की 720 टीमें प्रतिदिन शहर के विभिन्न इलाकों में जाकर मौसमी बीमारियों का तो सर्वे लेकिन उसका असर धरातल पर नजर नहीं आ रहा है। </p>
<p><strong>शहर में मच्छरों की उत्पत्ति के 50 से अधिक ब्लैक स्पॉट </strong><br />मानूसन जल्दी सक्रिय होने से विभाग को गड्ढे भरने का समय ही नहीं मिला जिससे शहर में करीब 50 से अधिक ऐस ब्लैक स्पॉट है जहां डेंगू मलेरिया के मच्छर पनप रहे है। एमबीएस अस्पताल के पीछे बने क्वॉटर पीछे पानी का तालाब बना हुआ है। वहीं शहर के विभिन्न कॉलोनियों में भी खाली प्लाट व गड्ढों में पानी जमा हो रहा है। शहर के विभिन्न पार्क में बने जलाशय और फव्वारों जमा पानी में मच्छर पनप रहे है।  इस बार  डेंगू, मलेरिया के मरीज बढ़ने  की संभावनों को ध्यान में रखते हुए चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग कागजों में तो अलर्ट मोड पर चल रहा है।  लेकिन वास्तव में शहर में तेजी से मच्छर पनप रहे है। प्रतिदिन 12 हजार से अधिक घरों का सर्वे कर एंटी लार्वा गतिविधियां की जा रही है। उसके बावजूद मच्छर का आंतक बढ़ रहा है।  कोटा शहर में करीब 50 से अधिक ब्लैक स्पॉट चिहिंत किए  जहां सबसे ज्यादा मच्छर पनपते है। कोटा में पिछले साल कोटा में डेंगू काफी फैला था जिसके कारण कई लोगों की जान पर बन आई थी। इस बार इसके फैलाव से पहले विभाग इसकी रोकथाम में जुटा है।  </p>
<p><strong> जगह जगह गड्ढों में  पनप रहे लार्वा</strong><br />शहर में जगह जगह बने गड्ढो खाली प्लाट में बारिश का पानी जमा होने से मच्छर तेजी से पनप रहे है। वहीं नालों व नदियों की सफाई बेहतर तरीके से नहीं हुई जिसके कारण मच्छरों के लार्वा इनमें पनप रहे है। चिकित्सा एवं स्वास्थ विभाग की टीमे घरों का तो सर्वे कर कूलर, परिडों में एंटी लार्वा गतिविधियां कर रही है लेकिन शहर में कई ऐसे स्थान है जहां जहां मच्छरों का अड्डा बना हुआ है।   पिछले साल महावीर नगर, विज्ञान नगर, नया कोटा में डेंगू बेलगाम हो गया था। नगर निगम को नालों की सफाई कराकर यहां एंटी लार्वा गतिविधियां करानी चाहिए। नदी- नालों की सफाई के नाम कचरा निकालकर ढेर बना दिया जाता है।  वहां से संबंधित कचरे को हटाया नहीं जाता।  जिसकी वजह से मच्छरों के पनपने के अनुकूल परिस्थितियां तैयार हो गई। <br /><strong>-अजय पानेरी, विज्ञान नगर </strong></p>
<p><strong>इन इलाकों में सबसे ज्यादा आए डेंगू के मरीज</strong><br />पिछले साल मच्छर जनित बीमारियों के सबसे ज्यादा मरीज जवाहर नगर, इंद्रा विहार, तलवंडी सेक्टर ए ,सी,एसएफएस सहित महावीर नगर सैकंड से आए। इसके अलावा अनंतपुरा,भीमगंजमंडी, नयागांव,रंगबाड़ी, महावीर नगर,केशवपुरा  पुरोहित जी की टापरी, डीसीएम, विज्ञान नगर, दादाबाड़ी, बोरखेड़ा, नयापुरा, स्टेशन, काला तालाब, डकनिया, शॉपिंग सेंटर,छावनी, कुन्हाडी, नांता सहित करीब 50 से अधिक ब्लैक स्टॉप है यहां अधिक मच्छर के लार्वा पनप रहे है। इन इलाकों से पिछले साल ज्यादा लोग बीमार हुए थे। <br /><strong>-रामनारायण गुर्जर, निवासी नांता</strong></p>
<p><strong>मलेरिया और डेंगू के लक्षण</strong><br /><strong>डॉ. संजय शायर ने बताया</strong> कि  मलेरिया में सर्दी के साथ एक दिन छोड़कर बुखार आना है। उल्टी, सिरदर्द, बुखार उतरने के बाद पसीना निकलना, कमजोरी होना आदि मलेरिया के लक्षण है। वहीं, डेंगू में तेज बुखार, सिरदर्द, बदन व जोड़ों में दर्द, शरीर पर लाल दाने, चकत्ते पड़ जाना, खून की उल्टी, पेशाब और मल में खून आना, अत्याधिक घबराहट होना आदि डेंगू के लक्षण हैं।</p>
<p><strong>पानी भराव स्थानों कोकर रहे चिंहित </strong><br />शहर में रोज टीमें घरों में कूलर पानी टंकी में पनपने वाले लार्वा को नष्ट करा रही है।  साथ प्रतिदिन 720 टीमें 12 हजार घरों के साथ ही मोहल्लों में बारिश के दौरान पानी जमा होने वाले खाली प्लाट, गड्ढों को चिंहित कर उन्हें भरवाया जा रहा है। जिससे डेंगू के लार्वा नहीं पनपे। इस लार्वा मिलने पर लोगों नोटिस भी दिए जा रहे है। <strong>-डॉ. नरेंद्र नागर, सीएमएचओं</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 08 Jul 2025 14:58:54 +0530</pubDate>
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                <title>एक तरफ पार्किंग खाली, दूसरी तरफ रास्ते में बदहाली</title>
                                    <description><![CDATA[दोनों पार्किंग में केवल अस्पताल के डॉक्टर व कर्मचारियों के ही वाहन खड़े किए जा रहे हैं। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/parking-empty-on-one-side--plight-on-the-other-side/article-55264"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-08/ek-trf-parking-khali,-dusri-trf-raste-me-badhali...kota-news-23-08-2023.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। संभाग के सबसे बड़े जे.के. लोन मातृ एवं शिशु चिकित्सालय का करोड़ों रुपए की लागत से नया ओपीड़ी ब्लॉक  तो बना दिया। लेकिन वहां अभी की पार्किंग व्यवस्था बदहाल ही है। अस्पताल परिसर में अंडरग्राउंड पार्किंग बनाई गई है। इसका मकसद अस्पताल परिसर में सड़क पर रास्ते में खड़े होने वाले वाहनों की समस्या का समाधान करना था। करीब 30 करोड़ की लागत से बने जे.के. लोन अस्पताल के नए ओपीडी ब्लॉक में अंडरग्राउंड पार्किंग बनाई है। यहां लिफ्ट तक लगाई गई है। लेकिन वह इतनी छोटी हैं कि उनमें केवल अस्पताल स्टाफ के ही वाहन खड़े हो पा रहे हैं। </p>
<p>यहां दो अलग-अलग पार्किंग बनाई गई है। एक में दो पहिया वाहन खड़े हो रहे हैं तो दूसरी में चार पहिया वाहन खड़े हो रहे हैं। इन दोनों पार्किंग में केवल अस्पताल के डॉक्टर व कर्मचारियों के ही वाहन खड़े किए जा रहे हैं।  अंडर ग्राउंड पार्किंग में लगे सुरक्षा गार्ड आमजन के वाहनों को  वहां जाने ही नहीं दे रहे हैं। जबकि कई लोग अंडरग्राउंड पार्किंग में वाहन खड़े करना चाह रहे हैं जिन्हें ऐसा करने से रोका जा रहा है। लोगों का कहना है कि जब करोड़ों रुपए खर्च कर पार्किंग बनाई है तो उसे इतना बड़ा तो बनाया जाता कि मरीजों के तीमारदारों के वाहन तो खड़े होते। लेकिन ऐसा नहीं होने से स्थिति जस की तस बनी हुई है। </p>
<p><strong>दुकानों के पीछे खाली पार्किंग</strong><br />अस्पताल में मरीजों के तीमारदारों के वाहन खड़े होने के लिए नगर विकास न्यास द्वारा अस्पताल के सामने ही दो दर्जन से अधिक दुकानें बनाई गई है। उन दुकानों के पीछे काफी लम्बी-चौड़ी पार्किंग बनाई गई है। लेकिन वह बनने के बाद से ही खाली पड़ी है। यहां एक भी वाहन खड़े नहीं हो रहे हैं। </p>
<p><strong>आमजन के वाहन सड़कों पर</strong><br />अस्पताल स्टाफ के अलावा अन्य वाहन जिनमें आमजन व मरीजों के तीमारदारों के वाहन अस्पताल परिसर में ही सड़क पर व बीच राह में खड़े हो रहे हैं। मेन गेट के पास से लेकर केन्द्रीय प्रयोगशाला और आस-पास  जगह-जगह वाहन खड़े हुए हैं। जिनमें कारों से लेकर बाइक व स्कूटर भी शामिल हैं। इतना ही नहीं एम्बूलेंस व अन्य कई सरकारी वाहन भी परिसर में ही अस्त-व्यस्त खड़े हुए हैं। जिससे हैरिेटज लुक में बने करोड़ों के अस्पताल भवन की सुंदरता में ग्रहण लग रहा है।</p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br />अस्पताल परिसर में बनी अंडरग्राउंड पार्किंग में इतनी ही जगह है कि वहां अस्पताल स्टाफ के वाहन खड़े हो सके। एक में करीब 300 दो पहिया और दूसरी में करीब 50 चार पहिया वाहन खड़े हो रहे हैं। आमजन के लिए गेट के पास पैड पार्किंग है। साथ ही दुकानों के पीछे भी पार्किंग बनाई गई है। लेकिन वहां कोई वाहन खड़े ही नहीं कर रहा है। हालांकि स्टाफ के वाहन अंडर ग्राउंड में खड़े होने से इतने वाहन तो सड़क पर खड़े होने से बचे हैं। फिर भी स्टैंड संचालक को पाबंद करेंगे कि वे परिसर में वाहनों को व्यवस्थित खड़े करवाए। <br /><strong>- डॉ. आशुतोष शर्मा, अधीक्षक जे.के. लोन अस्पताल</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 23 Aug 2023 16:25:36 +0530</pubDate>
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                <title>लीची की टॉक्सिन्स खाली पेट करती है नुकसान: एक्सपर्ट्स</title>
                                    <description><![CDATA[बाजार में सजी खूबसूरत लीची हर किसी को आकर्षित करती हैं। लीची खाने में टेस्टी होती है और हेल्थ के लिए भी बहुत अच्छी होती है। हालांकि लीची खरीदने और इन्हें स्टोर करने में थोड़ी सावधानी रखनी चाहिए। कुछ साल पहले बिहार में कई बच्चों की मौत की खबर आई थी। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/health/toxins-of-litchi-do-harm-on-an-empty-stomach--experts/article-12647"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-06/lychee.jpg" alt=""></a><br /><p>बाजार में सजी खूबसूरत लीची हर किसी को आकर्षित करती हैं। लीची खाने में टेस्टी होती है और हेल्थ के लिए भी बहुत अच्छी होती है। हालांकि लीची खरीदने और इन्हें स्टोर करने में थोड़ी सावधानी रखनी चाहिए। कुछ साल पहले बिहार में कई बच्चों की मौत की खबर आई थी। लोकल एरिया में  इसकी वजह चमकी नाम के एक बुखार को बताया जा रहा था। बाद में एक्सपर्ट्स ने बताया था कि लीची के टॉक्सिन्स की वजह से बच्चों को अक्यूट इनसेफेलाइटिस सिंड्रोम हो गया था। लीची खरीदते और खाते वक्त क्या सावधानिया बरतनी चाहिए। लीची देखने में प्यारा और खूबसूरत फल है जो कि नॉर्थ इंडिया में काफी कम समय के लिए आता है। गर्मी से बरसात के बीच आपको मार्केट में ढेर सारी लीचियां दिख जाएंगी।</p>
<p>इन्हें खरीदने से पहले कुछ बातों का ध्यान रखें जैसे हमेशा पकी लीची लें। कच्ची लीची हरी सी दिखती है। इनमें टॉक्सिन्स होते हैं। लीची रेड, पिंक या आॅरेंज कलर की ही लें। साथ ही ऐसी लीची खरीदें जो कि साइज में छोटी न हों। पकी लीची में आपको अच्छी खुशबू आएगी और दबाने पर सॉफ्ट लगेंगी। अगल लीची चटकी है या इससे रस निकल रहा है या धब्बे हैं तो न लें। यह ज्यादा पकी होगी और सड़ने या अंदर कीड़े निकलने के चांस भी हो सकते हैं। डार्क ब्राउन कलर की लीची भी न लें ये ज्यादा पकी हो सकती हैं। लीची टिप पर हमेशा चेक करके खाएं इसमें गूदे के कलर के कीड़े भी होते हैं।</p>
<p>एक्सपर्ट्स का मानना है कि लीची की टॉक्सिन्स खाली पेट ज्यादा नुकसान करते हैं। अगर पोषक तत्वों की कमी से बॉडी शुगर लो है तो इसमें पाया जाने वाला मेथाइलीन साक्लोप्रोपिल ग्लाइसीन केमिकल दिमाग को प्रभावित करता है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वास्थ्य</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 20 Jun 2022 14:43:36 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>  गोदाम खाली, दूसरे राज्यों से मंगा रहे गेहूं</title>
                                    <description><![CDATA[कोटा संभाग में इस बार सरकारी केन्द्रों पर गेहूं की खरीद नहीं हो पाई। इस कारण यहां के गोदाम खाली रहे। अब एफसीआई के अधिकारी दूसरे राज्यों से गेहूं मंगा रहे हैं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/godown-empty--wheat-is-being-ordered-from-other-states/article-11556"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-06/truck.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। डीसीएम रोड  स्थित एफसीआई के गोदाम खाली होने के कारण अधिकारियों को चिंता हो रही है। कोटा संभाग में इस बार सरकारी केन्द्रों पर गेहूं की खरीद नहीं हो पाई। इस कारण यहां के गोदाम खाली रहे। अब एफसीआई के अधिकारी दूसरे राज्यों से गेहूं मंगा रहे हैं। मंगलवार को गोदाम के बाहर ट्रको की कतार लगी हुई थी। ट्रक चालक अपनी बारी का इंतजार कर रहे थे।<br /><br />इस साल मार्च माह की शुरुआत में मंडी में गेहूं की आवक शुरू हो गई थी। इस दौरान गेहूं के दामों में काफी उछाल आ गया था। इस कारण अधिकांश किसानों ने अपना गेहूं बाजार में ही बेचा। कोटा संभाग के किसी भी एफसीआई के केंद्र पर गेहूं बेचने के लिए एक भी किसान नहीं पहुंचा। खरीद अवधि के दौरान सारे केंद्र खाली पड़े रहे। गेहूं की खरीद नहीं होने पर इस बार गोदाम खाली ही रह गए। अब एफसीआई को हरियाणा, पंजाब से गेहूं मंगवाना पड़ रहा है। रोजाना काफी संख्या में ट्रक इन राज्यों से गेहूं लाकर कोटा पहुंच रहे हैं। इस समय गोदामों के बाहर ट्रकों की लाइन लगी हुई है। गोदामों के बनने के बाद गेहूं का आवंटन राज्य सरकार को किया जाएगा। जहां से यह राशन के माध्यम से बेचा जाएगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 07 Jun 2022 18:32:01 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>चिंता : तीसरी लहर में बढ़ रहे मरीज, राहत : अस्पताल खाली, घर पर ठीक हो रहे</title>
                                    <description><![CDATA[58,393 में से केवल 1.25 फीसदी भर्ती, 0.46 फीसदी को ही ऑक्सीजन की जरूरत पड़ी]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/%E0%A4%9A%E0%A4%BF%E0%A4%82%E0%A4%A4%E0%A4%BE---%E0%A4%A4%E0%A5%80%E0%A4%B8%E0%A4%B0%E0%A5%80-%E0%A4%B2%E0%A4%B9%E0%A4%B0-%E0%A4%AE%E0%A5%87%E0%A4%82-%E0%A4%AC%E0%A5%9D-%E0%A4%B0%E0%A4%B9%E0%A5%87-%E0%A4%AE%E0%A4%B0%E0%A5%80%E0%A4%9C--%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%B9%E0%A4%A4---%E0%A4%85%E0%A4%B8%E0%A5%8D%E0%A4%AA%E0%A4%A4%E0%A4%BE%E0%A4%B2-%E0%A4%96%E0%A4%BE%E0%A4%B2%E0%A5%80--%E0%A4%98%E0%A4%B0-%E0%A4%AA%E0%A4%B0-%E0%A4%A0%E0%A5%80%E0%A4%95-%E0%A4%B9%E0%A5%8B-%E0%A4%B0%E0%A4%B9%E0%A5%87/article-4026"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-01/15.jpg" alt=""></a><br /><p> जयपुर। प्रदेश में कोरोना की तीसरी लहर में दूसरी लहर से 902 फीसदी संक्रमण ज्यादा फैल रहा है। 30 दिसम्बर से लेकर अब तक प्रदेश में 18 दिन में 81640 लोग कोरोना की चपेट में आ चुके हैं, लेकिन बड़ी राहत की बात यह है कि केवल 1.25 फीसदी मरीजों को ही अब तक अस्पताल में भर्ती होने की जरूरत पड़ी है। इनमें भी केवल 0.46 फीसदी ही ऐसे हैं जिनको आॅक्सीजन सपोर्ट, आईसीयू या फिर वेंटिलेटर्स की आवश्यकता पड़ी। बाकी 97.75 फीसदी मरीज घरों पर ही इलाज लेकर कोरोना को हराकर ठीक हो रहे हैं।</p>
<p><br /> चिकित्सा विभाग के पास शनिवार यानी 14 जनवरी तक के अस्पताल में भर्ती मरीजों के आंकड़े को देखें तो इस दिन तक प्रदेश में 58,393 एक्टिव केस थे। लेकिन राहत यह है कि केवल 733 मरीज को ही अस्पताल में भर्ती होने की जरुरत पड़ी। इनमें भी 462 यानी 63.02 फीसदी तो सामान्य वार्ड्स में ही है। ऑक्सीजन की भी जरूरत इन्हें नहीं पड़ी है। वहीं केवल 179 मरीजों को आॅक्सीजन सपोर्ट की आवश्यकता पड़ी है। आईसीयू में केवल मात्र 64 और वेंटिलेटर्स पर केवल 28 ही मरीज हैं। अस्पतालों में 96.25 फीसदी सामान्य बेड्स, 99.10 फीसदी आॅक्सीजन बेड्स, 97.63 फीसदी आईसीयू बेड्स और 98.97 फीसदी वेंटिलेटर्स खाली पड़े हैं। <br /> <br /> <span style="background-color:#ffff99;"><span style="color:#339966;"><span style="font-size:larger;"><strong>अस्पताल में बेड्स और भर्ती मरीज की फैक्ट फाइल</strong></span></span></span><br /> <strong>अस्पताल में मात्र 733 मरीज, आईसीयू में केवल 64, वेंटीलेटर्स पर केवल 28 संक्रमित</strong><br /> <br /> सामान्य आईसोलेशन : 12,315 कुल बेड्स<br /> खाली पड़े 11,853, 96.25% <br /> मरीज  462,   3.75%<br /> <br /> <br /> ऑक्सीजन सपोर्टेड : 19,847  कुल बेड्स  <br /> खाली पड़े  19,668,  99.10%<br /> मरीज  179,  0.90%<br /> <br /> आईसीयू : 2,695  कुल बेड्स <br /> खाली पड़े  2,631,   97.63%<br /> मरीज  64,  2.37%<br /> <br /> वेंटिलेटर्स :  2,466 कुल बेड्स<br /> खाली पड़े  2,438,  98.97%<br /> मरीज  28,  1.13%</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 17 Jan 2022 13:10:33 +0530</pubDate>
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