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                <title>sanction - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <title>चीन का अमेरिका पर बड़ा आर्थिक प्रहार, 46 अमेरिकी कंपनियों के उत्पादों की खरीद पर लगाया प्रतिबंध</title>
                                    <description><![CDATA[चीन ने सैन्य दिग्गज लॉकहीड मार्टिन सहित 46 अमेरिकी कंपनियों से उत्पाद खरीदने पर पूरी तरह प्रतिबंध लगा दिया है। चीनी वित्त मंत्रालय के अनुसार, सरकारी खरीद में इन कंपनियों को ब्लैकलिस्ट किया गया है। यह कदम ताइवान को हथियारों की आपूर्ति और अमेरिकी हस्तक्षेप के जवाब में देखा जा रहा है, हालांकि चीन स्थित अमेरिकी उद्यमों को छूट मिली है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/chinas-big-economic-attack-on-america-ban-on-purchase-of/article-157725"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-02/chinese-president-xi-jinping.png" alt=""></a><br /><p>बीजिंग। चीन ने 46 अमेरिकी कंपनियों से कोई भी उत्पाद खरीदने पर प्रतिबंध लगा दिया गया है। चीनी वित्त मंत्रालय ने सोमवार को इस आशय की सूची जारी की है। इन कंपनियों में लॉकहीड मार्टिन कॉरपोरेशन भी शामिल है। मंत्रालय के बयान में कहा गया है कि लागू कानूनों और नियमों के अनुसार, सरकारी खरीद गतिविधियों के दायरे में 46 अमेरिकी कंपनियों के खिलाफ प्रासंगिक कदम उठाने का निर्णय लिया गया है।</p>
<p>चीनी कंपनियों को इन 46 अमेरिकी कंपनियों में बने उत्पादों को खरीदने से रोक दिया गया है, हालांकि चीन में काम कर रहे अमेरिकी निवेश वाले उद्यमों को इससे छूट दी गयी है। चीन ने लॉकहीड मार्टिन पर प्रतिबंध लगाकर एक तरह से अमेरिका को भी संकेत दिया है कि वह अपने मामले में किसी तरह का हस्तक्षेप बर्दाश्त नहीं करेगी।</p>
<p>गौरतलब है कि लॉकहीड मार्टिन सैन्य विमान और उन्नत तकनीकी हथियारों की दुनिया की सबसे बड़ी निर्माता कंपनी है और यह कंपनी अमेरिकी सरकार के जरिए ताइवान को सबसे ज्यादा हथियारों और सैन्य उपकरणों की आपूर्ति करती है, जबकि चीन ताइवान को अपना हिस्सा मानता है।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 22 Jun 2026 17:33:22 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>अमेरिका-ईरान समझौता: 60 दिनों में अंतिम डील पर सहमति, पीएम शरीफ ने बतौर मध्यस्थ 'इस्लामाबाद एमओयू' पर किए दस्तख़त</title>
                                    <description><![CDATA[पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने अमेरिका और ईरान के बीच मध्यस्थता समझौते पर हस्ताक्षर किए। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और मसूद पेजेशकियन की सहमति वाले इस समझौते के तहत दोनों देश दुश्मनी खत्म करने और होर्मुज जलडमरूमध्य खोलने पर राजी हुए हैं। इसके तहत ईरान को $300 बिलियन का पुनर्निर्माण कोष मिलेगा।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/america-iran-agreement-final-deal-agreed-in-60-days-pm-sharif/article-157379"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-06/pm.png" alt=""></a><br /><p>इस्लामाबाद। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने बतौर मध्यस्थ ईरान और अमेरिका के बीच इस्लामाबाद समझौता ज्ञापन पर दस्तखत किए। पाकिस्तानी मीडिया ने प्रधानमंत्री कार्यालय के बयान का हवाला देते हुए कहा कि पाकिस्तान की तरफ से मध्यस्थता के अंतिम समर्थन दस्तावेज पर अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन के दस्तखत पहले से ही मौजूद थे। बयान के मुताबिक शांति समझौते को तय समय से पहले पूरा हुआ बताया गया, जिसमें दोनों पक्ष दुश्मनी खत्म करने और होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने पर राजी हुए। इसमें आगे दावा किया गया कि समझौता पहले ही लागू हो चुका था। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने फ्रांस में पैलेस ऑफ वर्सेल्स में अमेरिका-ईरान समझौता की एक कॉपी पर दस्तखत करके अपनी जी-7 यात्रा पूरी की।</p>
<p>एक अमेरिकी अधिकारी ने कहा कि इसके बाद अमेरिका ने दस्तखत किए गए समझौते की एक फोटो ईरानियों को भेजी। इसके बाद ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने दस्तावेज पर दस्तखत किए। यह समझौता अमेरिका और ईरान को 60 दिनों के अंदर एक अंतिम समझौता करने का वायदा करता है। इसमें यह भी कहा गया है कि अमेरिका छूट देगा ताकि ईरान तेल निर्यात कर सके और इसमें होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने के प्रावधान बताए गए हैं। यह अमेरिका और क्षेत्रीय साझेदारों को ईरान के लिए 300 बिलियन डॉलर का पुनर्निर्माण कोष बनाने का भी वायदा करता है। अधिकारियों ने समझौते को दुश्मनी खत्म करने और क्षेत्रीय स्थिरता वापस लाने के मकसद से एक बड़ी कूटनीतिक कामयाबी बताया।</p>
<p>बयान में कहा गया कि समझौता में खास समुद्री रास्तों को फिर से खोलने के प्रावधान शामिल हैं और इसमें बड़े आर्थिक पुनर्निर्माण और प्रतिबंध से जुड़े प्रतिबद्धता की रूपरेखा है। विवरण हालांकि अभी साफ नहीं हैं और स्वतंत्र रूप से इसकी पुष्टि नहीं की गई है। इसमें कहा गया कि ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर बातचीत 60 दिनों के लिए जारी रहेगी, जिसे आपसी सहमति से बढ़ाया जा सकता है।</p>]]></content:encoded>
                
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                <pubDate>Thu, 18 Jun 2026 18:32:31 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>ईरान का बड़ा ऐलान: यूरेनियम रहेगा देश में, अमेरिका से समझौते के बीच बधाई बड़ा बयान</title>
                                    <description><![CDATA[ईरान ने स्पष्ट किया है कि वह संवर्धित यूरेनियम को देश से बाहर नहीं भेजेगा, बल्कि देश के भीतर ही इसकी सांद्रता कम (डाउन-ब्लेंडिंग) करेगा। अमेरिका के साथ हुए हालिया समझौते के तहत, वाशिंगटन 30 दिनों के भीतर ईरान से सटे इलाकों से अपने सैनिक हटाने पर सहमत हुआ है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/irans-big-announcement-uranium-will-remain-in-the-country-amidst/article-157369"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-06/024.png" alt=""></a><br /><p>तेहरान। ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने कहा है कि ईरान अपनी इस बात पर कायम है कि देश से संवर्धित यूरेनियम बाहर नहीं ले जाया जाएगा। बघाई ने कहा, "हमने शुरू से ही कहा है कि संवर्धित सामग्री देश से बाहर नहीं ले जाई जाएगी। एक विकल्प ईरान के भीतर ही इसकी सांद्रता कम करना (डाउन-ब्लेंडिंग) है। यह कोई नया विकल्प नहीं है।" उनका यह बयान संघर्ष खत्म करने के लिए अमेरिका के साथ समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर की घोषणा के बाद दिया। उम्मीद है कि इसके बाद ईरान के परमाणु कार्यक्रम और ईरान पर लगे प्रतिबंधों को लेकर बातचीत होगी। </p>
<p>रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका अंतिम समझौते के 30 दिनों के भीतर ईरान से सटे इलाकों से अपने सैनिक हटा लेगा और तब तक अतिरिक्त बल तैनात नहीं करेगा। समझौते के चौथे पैराग्राफ में लिखा है, "अमेरिका अंतिम समझौते पर हस्ताक्षर के 30 दिनों के भीतर ईरान से सटे इलाकों से सैनिक हटाने का भी वादा करता है।" साथ ही, दस्तावेज़ के नौवें पैराग्राफ के अनुसार, समझौते पर हस्ताक्षर के बाद अमेरिका इस क्षेत्र में अतिरिक्त बल नहीं भेजेगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 18 Jun 2026 17:14:25 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>ईरानी राष्ट्रपति का दावा, बोले- अमेरिका के साथ समझौते के बावजूद ईरान किसी भी स्थिति के लिए तैयार, अंतिम समझौता बाकी </title>
                                    <description><![CDATA[ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेज़ेश्कियान ने अमेरिका के साथ हुए शांति समझौते को युद्ध रोकने की दिशा में बड़ा कदम बताया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि अंतिम समझौता होना अभी बाकी है और ईरान हर स्थिति के लिए तैयार है। इस ऐतिहासिक समझौते पर 19 जून को स्विट्जरलैंड में औपचारिक हस्ताक्षर होंगे।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/iranian-president-claims-despite-agreement-with-america-iran-is/article-157113"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-06/111200-x-600-px)-(2)18.png" alt=""></a><br /><p>तेहरान। ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेज़ेश्कियान ने कहा कि ईरान-अमेरिका समझौता युद्ध खत्म करने की दिशा में एक अहम कदम है लेकिन ईरान किसी भी स्थिति के लिए तैयार है। पेज़ेशकियन ने एक्स पर कहा, "जिस बात पर सहमति बनी है वह युद्ध रोकने और बातचीत शुरू करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है लेकिन अभी अंतिम समझौता होना बाकी है। ईरान का इस्लामिक गणराज्य सभी विकल्पों के लिए तैयार है।"</p>
<p>उन्होंने कहा कि ईरान की सरकार अमेरिका के साथ अंतिम समझौते के बिना भी या उसके साथ लोगों की सेवा करेगी। पेज़ेशकियन ने बताया कि अमेरिका के साथ समझौता ज्ञापन तैयार करने में ईरान के सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई ने अहम भूमिका निभाई। ईरानी राष्ट्रपति ने कहा, "ईरान के राष्ट्रीय हितों की रक्षा करने वाली धाराओं को शामिल करने में सम्मानित सर्वोच्च नेता के मार्गदर्शन की सबसे बड़ी भूमिका रही है और हम इसके लिए उनके आभारी हैं।"</p>
<p>15 जून को, ईरान और अमेरिका ने उस ज्ञापन के पूरा होने की पुष्टि की, जिस पर 19 जून को स्विट्जरलैंड में हस्ताक्षर होने हैं। ईरानी पक्ष ने बताया कि इस ज्ञापन में लेबनान समेत सभी मोर्चों पर सैन्य कार्रवाई खत्म करने की बात कही गई है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोमवार को पुष्टि किया कि ईरान के साथ ज्ञापन पर वास्तव में हस्ताक्षर हो चुके हैं। ईरान ने कहा कि ज्ञापन के बाद, दोनों पक्ष एक अंतिम समझौते पर बातचीत शुरू करेंगे, जिससे ईरान के परमाणु मुद्दे और तेहरान पर अमेरिकी प्रतिबंधों का समाधान हो सकेगा।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
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                <pubDate>Tue, 16 Jun 2026 16:21:07 +0530</pubDate>
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                <title>ऐतिहासिक अमेरिका-ईरान समझौता : सुरक्षा परिषद देगी अंतिम मंजूरी, $24 अरब की ईरानी संपत्ति से हटेगी रोक</title>
                                    <description><![CDATA[संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव से अमेरिका-ईरान समझौते को अंतिम मंजूरी दी जाएगी। शर्तों के तहत अमेरिका ईरान पर लगे तेल प्रतिबंध हटाएगा और उसकी $24 अरब की संपत्ति मुक्त करेगा। बदले में ईरान परमाणु हथियार न बनाने और 30 दिनों के भीतर होर्मुज जलडमरूमध्य खोलने पर सहमत हुआ है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/the-final-agreement-between-iran-and-america-will-be-approved/article-156987"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/trump2.png" alt=""></a><br /><p>तेहरान। ईरान और अमेरिका के बीच अंतिम समझौते को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के एक प्रस्ताव से मंज़ूरी दी जाएगी। ईरान और अमेरिका के बीच हुए समझौते के मसौदा का हवाला देते हुए रिपोर्ट में कहा, “अंतिम समझौते को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के एक प्रस्ताव से मंज़ूरी दी जाएगी।” एजेंसी ने कहा है कि अमेरिका ने ईरानी तेल और पेट्रोलियम उत्पादों के निर्यात पर लगे प्रतिबंधों को हटाने, ईरान के खिलाफ़ नये प्रतिबंध न लगाने और पश्चिम एशिया में अपनी सैन्य ताकत न बढ़ाने का वादा किया है। समाचार एजेंसी ने मसौदा ज्ञापन का हवाला देते हुए कहा, “तेल, पेट्रोकेमिकल उत्पादों और पेट्रोकेमिकल डेरिवेटिव्स की बिक्री पर लगे प्रतिबंध हटाए जाएंगे। </p>
<p>अमेरिका पश्चिम एशिया में अपनी सेना न बढ़ाने और ईरान के खिलाफ नये प्रतिबंध न लगाने का वादा किया है।” इसके अलावा मसौदा ज्ञापन के अनुसार, अमेरिका ने ईरान के आंतरिक मामलों में दखल न देने और इस्लामिक गणराज्य की संप्रभुता का सम्मान करने का वादा किया है। दोनों पक्षों के बीच ज्ञापन पर हस्ताक्षर होने के 30 दिनों के भीतर ही होर्मुज जलडमरूमध्य को खोल दिया जाएगा। रिपोर्ट के अनुसार, ईरान ने परमाणु हथियारों के प्रसार को रोकने की संधि (एनपीटी) के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहरायी है और परमाणु हथियार न बनाने का वादा किया है। एजेंसी ने मसौदा ज्ञापन का हवाला देते हुए कहा कि दस्तावेज़ में यह उल्लेख है।</p>
<p>हालांकि, इसमें यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि किन विशिष्ट प्रतिरोधी बलों का उल्लेख किया गया है। दस्तावेज़ में यह भी कहा गया है कि ईरान और अमेरिका के बीच अंतिम वार्ता तब तक शुरू नहीं होगी, जब तक ईरान की विदेशी परिसंपत्तियों का आधा हिस्सा मुक्त नहीं कर दिया जाता, ईरानी तेल पर लगाए गए प्रतिबंध नहीं हटा लिए जाते और अमेरिकी नौसैनिक नाकाबंदी समाप्त नहीं कर दी जाती। मसौदे के अनुसार, अमेरिका ने ईरान की 24 अरब डॉलर की विदेशी परिसंपत्तियों पर लगी रोक हटाने का वादा किया है। इनमें से आधी राशि दोनों देशों के बीच समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर होने से पहले ही ईरान को वापस दी जानी होगी। इससे पहले, ईरान के उप विदेश मंत्री काजेम गरीबाबादी ने ईरान और अमेरिका के बीच समझौता ज्ञापन पर काम पूरा होने की पुष्टि की थी। इस पर हस्ताक्षर 19 जून को स्विट्जरलैंड में होंगे।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
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                <pubDate>Mon, 15 Jun 2026 11:15:43 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>नेतन्याहू के पास अमेरिका-ईरान समझौता स्वीकारने के अलावा कोई विकल्प नहीं : डोनाल्ड ट्रंप</title>
                                    <description><![CDATA[अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने स्पष्ट किया है कि ईरान के साथ किसी भी संभावित समझौते को स्वीकार करने के अलावा इजरायल के पास कोई विकल्प नहीं है। उन्होंने कहा कि फैसले लेने का अधिकार सिर्फ उनका है। ट्रंप ने चेतावनी दी कि बातचीत विफल होने पर ईरान की नाकेबंदी या सैन्य बल का इस्तेमाल किया जाएगा।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/netanyahu-has-no-option-but-to-accept-us-iran-agreement-donald/article-156334"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/trump3.png" alt=""></a><br /><p>वॉशिंगटन। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया कि इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के पास अमेरिका-ईरान के बीच होने वाले किसी भी संभावित समझौते को स्वीकार करने के अलावा 'कोई विकल्प' नहीं होगा। ट्रंप ने इस बात पर जोर दिया कि इजरायल इन वार्ताओं के परिणाम तय नहीं करता है। ट्रंप ने कड़े लहजे में कहा, "फैसले मैं लेता हूं। सारे फैसले मैं ही करता हूं। वह फैसले नहीं लेते।"</p>
<p>डोनाल्ड ट्रंप ने यह दावा भी किया कि इजरायल पर ईरान के किये गये हाल के मिसाइल हमलों का ईरान से बातचीत जारी रखने की उनकी इच्छा पर कोई असर नहीं पड़ेगा। उन्होंने कहा, "इस घटना का समझौते पर कोई प्रभाव नहीं होने वाला है।" इसके साथ ही, ट्रंप ने चेतावनी दी कि यदि यह बातचीत विफल रहती है तो अमेरिका या तो ईरान की नाकेबंदी जारी रख सकता है या सैन्य बल का उपयोग कर सकता है। उन्होंने कहा कि यह आर्थिक नाकेबंदी उस देश पर किये गये 'किसी भी हमले से कहीं अधिक शक्तिशाली' रही है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 08 Jun 2026 16:44:54 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>क्यूबा पर अमेरिका का बड़ा एक्शन, राष्ट्रपति मिगुएल डियाज़-कैनेल सहित कई अधिकारियों और संस्थाओं पर लगाए कड़े प्रतिबंध</title>
                                    <description><![CDATA[अमेरिका ने क्यूबा पर दबाव बढ़ाते हुए राष्ट्रपति मिगुएल डियाज़-कैनेल, चार अधिकारियों और पांच संस्थाओं को प्रतिबंधित व्यक्तियों की सूची में शामिल किया है। अमेरिकी वित्त विभाग द्वारा की गई इस कार्रवाई से दोनों देशों के बीच राजनयिक और आर्थिक तनाव और अधिक बढ़ने की आशंका है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/americas-big-action-on-cuba-strict-sanctions-imposed-on-many/article-156070"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-06/us-cuba-1.webp" alt=""></a><br /><p>न्यूयॉर्क। अमेरिका ने क्यूबा पर दबाव बढ़ाने के लिए राष्ट्रपति मिगुएल डियाज़-कैनेल और कई अन्य लोगों एवं संस्थाओं पर प्रतिबंध लगा दिये हैं। अमेरिकी वित्त विभाग की वेबसाइट पर गुरुवार को जारी जानकारी के अनुसार विभाग ने डियाज़-कैनेल, चार अन्य लोगों और पांच संस्थाओं को विशेष रूप से नामित नागरिकों और प्रतिबंधित व्यक्तियों की सूची में शामिल किया है। डियाज़-कैनेल ने 2018 में राउल कास्त्रो की जगह क्यूबा के राष्ट्रपति का पद संभाला था।</p>
<p>मई में अमेरिकी सरकार ने क्यूबा के 11 अधिकारियों पर प्रतिबंध लगाए थे और 1996 में क्यूबा से निर्वासित लोगों से जुड़ी एक घटना को लेकर राउल कास्त्रो पर आरोप लगाए थे।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 05 Jun 2026 14:10:59 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>अमेरिका-ईरान बातचीत में अड़चन: ईरान ने की जब्त धन को तुरंत जारी करने की मांग, हिचकिचा रहा ट्रंप प्रशासन </title>
                                    <description><![CDATA[अमेरिका और ईरान के बीच शांति वार्ता में जब्त फंड की तत्काल रिहाई सबसे बड़ा रोड़ा बन गई है। ईरान $12 अरब की नकद राशि तुरंत जारी करने पर अड़ा है, जबकि ट्रंप प्रशासन ने साफ कर दिया है कि परमाणु कार्यक्रम और होर्मुज जलडमरूमध्य पर ठोस कदम उठाए बिना कोई आर्थिक राहत नहीं दी जाएगी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/hurdle-in-us-iran-talks-iran-demands-immediate-release-of-seized/article-155993"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/mojtaba-khamenei.png" alt=""></a><br /><p>वॉशिंगटन। अमेरिका और ईरान के बीच चल रही बातचीत में ईरान के जब्त धन को तुरंत जारी करने की मांग सबसे बड़ी अड़चन बन गई है। ईरान इस बात पर ज़ोर दे रहा है कि किसी संभावित समझौते के तहत कोई भी ठोस कदम उठाने से पहले उसकी अरबों डॉलर की जब्त की गई धनराशि को तुरंत जारी किया जाए। इस मांग को मानने में ट्रंप प्रशासन हिचकिचा रहा है। अमरीकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और उनका प्रशासन ईरान को कोई बड़ी रियायत दिए बिना बड़े पैमाने पर धन जारी करने को मंज़ूरी देने में आनाकानी कर रहा है। खासकर ईरान के संवर्धित यूरेनियम के भंडार, परमाणु गतिविधियों और होर्मुज़ जलडमरूमध्य को फिर से खोलने को लेकर वह कड़ा रूख अपना रहा है।</p>
<p>जेरूसलम पोस्ट की एक रिपोर्ट के अनुसार ईरानी वार्ताकार चाहते हैं कि जैसे ही दोनों पक्ष शुरुआती सहमति पत्र (एमओयू) पर हस्ताक्षर करें, उन्हें जब्त हुए धन से "नकद धनराशि" तुरंत मिल जाए और इसमें किसी तरह की कोई देरी नहीं होनी चाहिए। अमेरिकी अधिकारियों का रुख साफ है कि प्रतिबंधों में राहत तभी मिलेगी जब ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम को लेकर कोई ठोस आश्वासन देगा। रिपोर्ट के अनुसार अमेरिका में चिंता सिर्फ दिखावे तक सीमित नहीं है। अगर धनराशि को जल्दी जारी कर दिया गया, तो इससे ईरान को एक आर्थिक सहारा मिल जाएगा, जबकि अमेरिका के हाथ से उसका सबसे ताकतवर मोलभाव का हथियार,आर्थिक दबाव, जिसे बनाने में उसने कई वर्ष लगाए हैं, वह उसके हाथ से निकल जाएगा।</p>
<p>वरिष्ठ अधिकारियों ने क्षेत्रीय मध्यस्थों को साफ कर दिया है कि जब तक ईरान पहले कोई ठोस और कारगर कदम नहीं उठाता है खासकर अपनी परमाणु गतिविधियों और होर्मुज़ जलडमरूमध्य के आसपास की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर,तब तक कोई बड़ी रकम जारी नहीं की जाएगी। श्री ट्रंप ने अपने सलाहकारों से साफ-साफ कह दिया है कि वह ऐसे किसी भी समझौते पर दस्तखत नहीं करेंगे जो ओबामा के 2015 के समझौते जैसा हो, जिसके तहत ईरान के लिए 1.7 अरब डॉलर का फंड जारी किया गया था।</p>
<p>रिपोर्टों के मुताबिक ईरान अब करीब 12 अरब डॉलर की मांग कर रहा है, और ट्रंप की ऐसी कोई मंशा नहीं है। रिपोर्ट में कहा गया है कि सलाहकारों ने ऐसे इंतज़ामों पर विचार किया है, जिनके तहत कोई तीसरा देश जैसे कि कतर ईरान को फंड जारी करेगा, ताकि अमेरिका किसी भी सीधे भुगतान से दूर रहे। मध्यस्थों ने बीच का रास्ता निकालने के लिए कुछ प्रस्ताव रखे हैं, जिनमें कई अरब डॉलर का एक "मानवीय फंड" बनाना भी शामिल है। इस फंड का इस्तेमाल सिर्फ भोजन, दवा और कृषि उत्पादों की खरीद के लिए किया जाएगा। लेकिन अब तक, दोनों में से कोई भी पक्ष इतना झुकने को तैयार नहीं हुआ है कि यह गतिरोध टूट सके।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 04 Jun 2026 18:39:26 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>अमेरिका-यूक्रेन संघर्ष: अमेरिका का रूस के साथ संबंध बनाए रखना जरूरी, बोले- मध्यस्थता के प्रयासों को फिर से शुरू करने के लिए तैयार</title>
                                    <description><![CDATA[अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने कहा है कि यूक्रेन संघर्ष के बावजूद अमेरिका को रूस के साथ राजनयिक संबंध और बातचीत बनाए रखनी चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि कई द्विपक्षीय मुद्दों का यूक्रेन से संबंध नहीं है। रुबियो ने ट्रंप प्रशासन की मध्यस्थता में वापसी की इच्छा जताते हुए कहा कि अमेरिका पूरी तरह यूक्रेन के पक्ष में है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/america-ukraine-conflict-america-needs-to-maintain-relations-with-russia-says/article-155969"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-06/macro.png" alt=""></a><br /><p>वॉशिंगटन। अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने कहा है कि यूक्रेन में जारी संघर्ष के बावजूद अमेरिका को रूस के साथ संबंध और बातचीत बनाए रखनी चाहिए। रुबियो ने संसद की विदेश मामलों की समिति की सुनवाई में कहा, “कम से कम, हमें रूसियों के साथ संबंध और बातचीत जारी रखनी ही होगी। हमारे द्विपक्षीय संबंधों में ऐसे मुद्दे हैं, जिनका यूक्रेन से कोई लेना-देना नहीं है।” अमेरिकी विदेश मंत्री ने विश्वास जताया कि यूक्रेन संघर्ष का समाधान होने के बाद अमेरिका-रूस संबंध अधिक दोस्ताना और संभालने में आसान हो जाएंगे। उन्होंने बुधवार को दावा किया कि अमेरिका-यूक्रेन संघर्ष पर मध्यस्थता के प्रयासों को फिर से शुरू करने के लिए तैयार है।</p>
<p>मार्को रुबियो से जब पूछा गया कि क्या मध्यस्थता में ट्रंप प्रशासन फिर से शामिल होने के लिए तैयार है, तो उन्होंने जवाब दिया, “हम ऐसा करने के लिए तैयार हैं।” उन्होंने हालांकि इस बात पर भी जोर दिया कि अमेरिका के अब तक के प्रयास ‘कम फलदायी’ रहे हैं। अमेरिकी विदेश मंत्री ने हालांकि यह भी स्पष्ट किया कि यूक्रेन में संघर्ष को सुलझाने की बातचीत में अमेरिका ‘साफ तौर पर’ यूक्रेन के पक्ष में है।</p>
<p>उन्होंने समिति से कहा, “हम उस युद्ध में निष्पक्ष मध्यस्थ नहीं हैं। हम रूस को हथियार नहीं देते, हम केवल यूक्रेन को हथियार देते हैं। हम यूक्रेन पर प्रतिबंध नहीं लगाते, हम केवल रूस पर प्रतिबंध लगाते हैं, इसलिए हमने स्पष्ट रूप से एक पक्ष लिया है।” मार्को रुबियो ने कहा कि अमेरिका यूक्रेन को आवश्यकता सूची (पर्ल) कार्यक्रम के माध्यम से हथियार बेचना जारी रखे हुए है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 04 Jun 2026 17:29:04 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>फारस की खाड़ी में फिर बढ़ा युद्ध का खतरा: अमेरिका-ईरान के बीच शांति समझौता टूटने की आशंका प्रबल, ईरान बोला- जल्दबाजी मंजूर नहीं</title>
                                    <description><![CDATA[जॉर्जटाउन यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर मेहरान कामरावा के अनुसार, अमेरिका-ईरान शांति समझौता टूटने की कगार पर है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा नए संशोधनों के दबाव और प्रतिबंध हटाने की शर्तों पर दोनों पक्षों में गहरा मतभेद है। ईरान जहां धीमी प्रक्रिया चाहता है, वहीं अमेरिका त्वरित समझौते के पक्ष में है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/danger-of-war-increases-again-in-the-persian-gulf-fear/article-155814"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/america-and-iran.png" alt=""></a><br /><p>दोहा। अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे शांति समझौते की टूटने की आशंका जतायी जा रही है। कतर में जॉर्जटाउन विश्वविद्यालय के प्रोफेसर मेहरान कामरावा ने बताया कि फारस की खाड़ी में तनाव और सैन्य टकराव किसी भी पल फिर से शुरू हो सकता है। उन्होंने कहा कि ईरान की परिसंपत्तियों पर लगी रोक और ईरान के खिलाफ प्रतिबंधों को हटाने का प्रश्न अब भी बातचीत में प्रमुख गतिरोध बना हुआ है। उन्होंने कहा कि हालांकि समझौते पर मोटेतौर पर रूपरेखा पर सहमति बन गई है लेकिन अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप लगातार नए संशोधन करने की प्रयास कर रहे हैं, जिसे ईरान भरोसे के लायक नहीं मानता है।</p>
<p>उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि ईरान चाहता है कि अमेरिका उसके खिलाफ लगे प्रतिबंधों को हटा ले, जबकि ट्रंप का कहना है कि प्रतिबंधों में राहत "ईरान के बर्ताव' के आधार पर दी जानी चाहिये। राष्ट्रपति ट्रंप इस बात पर भी अड़े हैं कि समझौते के तहत ईरान की जब्त की गयी राशि जारी नहीं की जायेगी, भले ही मसौदा समझौते में इन संपत्तियों का आधा हिस्सा जारी करने का प्रावधान है। समझौते के स्वरूप को लेकर भी दोनों पक्षों के बीच मतभेद बरकरार हैं।</p>
<p>प्रो. कमरावा बताते हैं, "ईरानियों और अमेरिकियों की इस बात को लेकर बिल्कुल अलग-अलग धारणाएं हैं कि किसी समझौते का स्वरूप कैसा होना चाहिए। ईरान एक अपेक्षाकृत धीमी गति से आगे बढ़ने वाले समझौते का पक्षधर है। वह इस प्रक्रिया में पर्याप्त समय लेना चाहता है और जरूरी नहीं कि किसी त्वरित समझौते पर पहुंचे। दूसरी ओर, अमेरिका एक शीघ्र और तेजी से संपन्न होने वाला समझौता चाहता है।"<br />गौरतलब है कि अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ती नजदीकियों का लगातार विरोध कर रहा इजरायल अब भी ऐसा अनिश्चित तत्व बना हुआ है, जो किसी भी समय शांति समझौते को विफल कर सकता है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 03 Jun 2026 11:33:13 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
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                <title>मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा का वज्र प्रहार: एक आरएएस सहित 20 की गई नौकरी ; 332 निलंबित 17 की पेंशन बंद, भ्रष्टाचार, अनियमितता और लापरवाही के खिलाफ  मिशन जीरो टोलरेंस</title>
                                    <description><![CDATA[मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने जीरो टॉलरेंस नीति के तहत एक आरएएस सहित 20 भ्रष्ट अधिकारियों को नौकरी से बर्खास्त कर दिया है। सरकार ने 332 कार्मिकों को निलंबित किया और 17 सेवानिवृत्त अधिकारियों की आजीवन पेंशन रोकी है। कुल 108 मामलों में अभियोजन स्वीकृति देकर 577 मामलों की जांच जारी है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/chief-minister-bhajan-lal-sharmas-thunderbolt-20-jobs-including-one/article-155573"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/bhajanlal.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने कहा कि जीरो टॉलरेंस नीति के तहत अब तक एक आरएएस अधिकारी सहित 20 अधिकारियों एवं कर्मचारियों को सेवा से बर्खास्त किया जा चुका है जबकि 332 अधिकारियों और कार्मिकों को निलंबित किया गया है। 17 कार्मिकों की पेंशन बंद की गई है तथा 108 मामलों में अभियोजन स्वीकृति जारी कर भ्रष्टाचार के आरोपियों को न्यायिक प्रक्रिया के दायरे में लाया गया है। इसके अलावा अनुशासनहीनता एवं लापरवाही के 577 मामलों की जांच जारी है। </p>
<p><strong>मुख्यमंत्री के प्रहार से इन अधिकारियों की गई नौकरी</strong></p>
<p>मुख्यमंत्री के प्रहार के बाद सेवा से हटाए गए अधिकारियों में आरएएस नरसिंह, उपनिदेशक डॉ. पीआर खींची, सहायक आचार्य डॉ, सुनील व्यास, तकनीकी शिक्षा की प्रवक्ता प्रियंका दिवाकर और कृषि अधिकारी शीना लुकोश शामिल हैं। वहीं व्याख्याता अमृत लाल मीणा, सहायक आचार्य वैजयंती मीणा, चिकित्सा अधिकारी डॉ. संतोष कुमार, खनिज अभियंता अनिल खिमेसरा और लेखा सेवा के नरेंद्र तंवर को सेवा से बर्खास्त किया गया है। इसी प्रकार सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग के तत्कालीन अतिरिक्त निदेशक सुरेंद्र सिंह एवं पर्यटन विभाग के अतिरिक्त निदेशक संजय पांडे को सेवा से हटाया गया है। वहीं, पीडब्ल्यूडी के तत्कालीन विकास अधिकारी सुवाणा भीलवाड़ा भरत प्रकाश मेघवाल, तत्कालीन कृषि उप निदेशक झुंझुनूं राजेश कुमार नैनावत, तत्कालीन सहायक आयुक्त भरतपुर वित्त कर महावीर सिंह आसीवाल, तीन चिकित्सा अधिकारी डॉ. राम मोहन सिंह चौहान सीएचसी बिछीवाड़ा डूंगरपुर, डॉ. मुरलीधर शर्मा सीएचसी रामगढ़ पचवारा दौसा और डॉ. मनोहर लाल सीएचसी रामगढ़ अलवर को सेवा से बर्खास्त किया गया है। पीएचईडी की अलवर प्रयोगशाला के वरिष्ठ रसायनज्ञ प्रदीप कुमार हजरती और हरिसिंह मीना तत्कालीन एपीपीए एसीजेएम-4 कोटा को एसीबी कोर्ट द्वारा सजा सुनाये जाने के बाद नौकरी से हटाया गया है।</p>
<p><strong>सेवानिवृत्ति के बाद भी कार्रवाई </strong></p>
<p>सरकार ने 17 अधिकारियों को भ्रष्टाचार सहित विभिन्न मामलों में आजीवन शत-प्रतिशत पेंशन रोक कर दण्डित किया है। उन्होंने आरएएस फतेह राय सोनी, पीटीआई फूलाराम फगेड़िया, अतिरिक्त निदेशक खान राकेश हीरात और आरपीएस ओमप्रकाश चंदोलिया की आजीवन पूरी पेंशन एवं चिकित्सा अधिकारी डा. निधि मेहरोत्रा की पूर्ण पेंशन एवं ग्रेच्युटी आजीवन रोककर दंडित किया है। आजीवन पेंशन रोकने वाले अधिकारियों में बनवारी लाल मीणा, आरएएसए उप सचिव नगर विकास न्यास अलवर, चिकित्सा विभाग के प्रमुख विशेषज्ञ डॉ. त्रिलोक चंद गगरानी, डॉ. शिवनारायण यादव, वरिष्ठ चिकित्साधिकारी सीएचसी नीमराणा अलवर देवेन्द्र सिंह ढिल्लो, आरएएसए उप सचिव यूआईटी अलवर मनोहर लाल सिसोदिया, बीडीओ कपासन तत्कालीन कनिष्ठ विशेषज्ञ डॉ. राजेन्द्र प्रसाद कोठारी सीएचसी मांडलगढ भीलवाड़ा, डॉ. कल्पना श्रीवास्तव, चिकित्साधिकारी गंगरार-चित्तौडगढ़, नृसिंह रेबारी, सहायक अभियंता पीडब्ल्यूडी प्रतापगढ़, सुरेश माथुर, अधिशाषी अभियंता पीडब्ल्यूडी जैसलमेर, महेन्द्र सिंह आरपीएस वृत्ताधिकारी सवाई माधोपुर, डॉ. लक्ष्मण दत्त शर्मा चिकित्साधिकारी निवाई टोंक, डॉ. अविनाश कुमार शर्मा सहायक निदेशक पशुधन विकास बांसवाड़ा, देशराज नूनिया, अधिशासी अभियंता आईजीएनपी मोहनगढ़ जैसलमेर शामिल हैं। वहीं पीडब्ल्यूडी के सहायक अभियंता अशोक कुमार शर्मा की 3 वार्षिक वेतन वृद्धियां वापस ली गई हैं। </p>
<p><strong>अभियोजन के बाद गिरी गाज </strong></p>
<p>राज्य सरकार द्वारा 577 प्रकरणों में जांच कर जिम्मेदारी तय की जा रही है। इसी प्रकार अखिल भारतीय सेवा के 9 प्रकरणों की जांच जारी है। उन्होंने रिश्वत, ट्रैप, पद का दुरूपयोग, आय से अधिक संपत्ति प्रकरणों के 108 मामलों में अभियोजन स्वीकृति दी है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 01 Jun 2026 09:10:05 +0530</pubDate>
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                <title>अमेरिका-ईरान के बीच गहराया तनाव : ट्रंप ने दी सैन्य कार्रवाई की चेतावनी, ईरान ने मार गिराया अमेरिकी सैन्य ड्रोन</title>
                                    <description><![CDATA[अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि अमेरिका ईरान के साथ समझौते के करीब है, वरना सैन्य कार्रवाई का रास्ता खुला है। इसी बीच, ईरान (IRGC) ने अपने हवाई क्षेत्र में घुसपैठ करने वाले एक अमेरिकी MQ-1 प्रीडेटर ड्रोन को मिसाइल से मार गिराया। युद्धविराम के बाद दोनों देशों में तनाव फिर बढ़ गया है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/slowly-but-surely-america-is-getting-closer-to-a-good/article-155546"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/trump.png" alt=""></a><br /><p>वॉशिंगटन। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि अमेरिका ईरान के साथ एक बहुत अच्छे समझौते के करीब पहुंच रहा है, लेकिन अगर ऐसा नहीं हुआ, तो अमेरिका सैन्य कार्रवाई पर लौट आएगा। ट्रंप ने मीडिया को​ दिए साक्षात्कार में कहा, "अगर आप जल्दबाजी करेंगे, तो आप कोई अच्छा समझौता नहीं कर पाएंगे। मुझे लगता है कि धीरे-धीरे लेकिन निश्चित रूप से हम वह पा रहे हैं जो हम चाहते हैं। अगर हमें वह नहीं मिला जो हम चाहते हैं, तो हम इसे एक अलग तरीके से खत्म करेंगे।"</p>
<p>इस बीच, समाचार एजेंसी ने बताया कि ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) ने दावा किया कि उसने रविवार सुबह देश के क्षेत्रीय जल क्षेत्र के ऊपर एक अमेरिकी एमक्यू-1 प्रीडेटर मल्टी-रोल ड्रोन का पता लगाया और उसे मार गिराया। एजेंसी ने आईआरजीसी के बयान का हवाला देते हुए कहा कि आज सुबह-सवेरे एक अमेरिकी सेना का एमक्यू1 ड्रोन ईरानी क्षेत्रीय जल क्षेत्र में घुस आया था, लेकिन तुरंत उसका पता चल गया और आईआरजीसी के हवाई रक्षा प्रणाली से दागी गयीं मिसाइलों से उसे मार गिराया गया।</p>
<p>एजेंसी ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि अमेरिकी ड्रोन ईरानी क्षेत्रीय जल क्षेत्र में शत्रुतापूर्ण हरकतें करने के इरादे से घुसा था। उल्लेखनीय है कि अमेरिका और इज़राय ल ने 28 फरवरी को ईरान में ठिकानों पर हमले शुरू किये थे, जिसमें 3,000 से अधिक लोग मारे गये थे। इसके बाद ईरान ने जवाबी कार्रवाई में इजरायल और पश्चिम एशिया में स्थित अमेरिकी ठिकानों पर हमले किये । फिर अमेरिका और ईरान ने आठ अप्रैल को युद्धविराम की घोषणा की। शांति स्थापित करने को लेकर दोनों देशों ने पाकिस्तान के इस्लामाबाद में बातचीत की, जो बेनतीजा रही और फिर से दुश्मनी शुरू होने की कोई रिपोर्ट नहीं मिली। हालाँकि, अमेरिका ने ईरानी बंदरगाहों की नाकेबंदी शुरू कर दी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 31 May 2026 15:28:31 +0530</pubDate>
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