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                <title>debt - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <description>debt RSS Feed</description>
                
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                <title>FPIs की बड़ी बिकवाली: अप्रैल में ₹70,449 करोड़ निकाले, आउटफ्लो ₹1.26 लाख करोड़ पार</title>
                                    <description><![CDATA[विदेशी निवेशकों (FPI) ने अप्रैल में भारतीय पूंजी बाजार से ₹70,449 करोड़ की शुद्ध निकासी की। यह लगातार दूसरा महीना है जब निवेशकों ने इक्विटी और डेट सेगमेंट में बिकवाली की है। हालांकि, हाइब्रिड उपकरणों और म्यूचुअल फंड में मामूली निवेश बढ़ा है, लेकिन वैश्विक अनिश्चितता के कारण निकासी का दबाव जारी है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/business/big-selling-of-fpis-in-april-withdrawal-of-%E2%82%B9-70449/article-152517"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/fpi.jpg" alt=""></a><br /><p>मुंबई। विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफपीआई) ने अप्रैल में भारतीय पूंजी बाजार से 70,449 करोड़ रुपये की शुद्ध निकासी की। शुद्ध निकासी एफपीआई द्वारा पूंजी बाजार में लगायी गयी पूंजी और निकाली गयी पूंजी का अंतर है। यह लगातार दूसरा महीना है जब एफपीआई बिकवाल रहे हैं। इससे पहले, मार्च में उन्होंने रिकॉर्ड 1,26,991 करोड़ रुपये निकाले थे।</p>
<p>केंद्रीय डिपॉजिटरी सेवा के ऑकड़ों के अनुसार, अप्रैल में एफपीआई ने इक्विटी और डेट से पैसे निकाले जबकि हाइब्रिड उपकरणों और म्यूचुअल फंड में उनका निवेश बढ़ा है। उन्होंने वित्त वर्ष 2026-27 के पहले महीने में शुद्ध रूप से 58,378 करोड़ रुपये की इक्विटी बेची। डेट से भी उन्होंने 13,081 करोड़ रुपये की बिकवाली की।</p>
<p>हाइब्रिड उपकरणों में उन्होंने 592 करोड़ रुपये लगाये। म्यूचुअल फंड में उनका निवेश 417 करोड़ रुपये रहा। मौजूदा कैलेंडर वर्ष में एफपीआई ने फरवरी को छोड़कर अन्य तीन महीने में बिकवाली की है। इस साल अबतक उन्होंने शुद्ध रूप से भारतीय पूंजी बाजार से 1,88,664 करोड़ रुपये निकाले हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>बिजनेस</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 03 May 2026 15:33:22 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>पाई-पाई को मोहताज गुरुजी, कर्ज में डूबी दाल रोटी</title>
                                    <description><![CDATA[जून 2021 के बाद से कार्यरत शैक्षणिक व अशैक्षणिक स्टाफ को तनख्वाह नहीं मिल रही। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/guruji-is-in-need-of-every-penny-and-is-drowned-in-debt/article-70535"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-02/payi-payi-k-mohtaj-guruji,-karj-me-dubi-dal-roti...kota-news-19-02-2024.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। सरकार की अनदेखी से हाड़ौती के दो राजकीय महाविद्यालयों के शिक्षकों की जिंदगी कर्ज में डूब गई है। ढाई साल से पाई-पाई को मोहताज हो रहे हैं। मंत्री से लेकर मुख्यमंत्री तक फरियाद लगाई लेकिन सभी जगहों से निराशा ही हाथ लगी। हालात यह हो गए कि 30 महीनों से न तो शिक्षकों को तनख्वाह मिली और न ही उन्हें नियमित किया जा रहा। जबकि, शैक्षणिक व अशैक्षणिक स्टाफ नियमित कॉलेज जा रहे हैं और विद्यार्थियों को पढ़ा रहे हैं। कॉलेज संचालित कर रहे हैं। स्थिति यह हो गई कि एक कर्ज चुकाने के लिए दूसरा कर्ज लेना पढ़ रहा है। बकाया न चुकाने के कारण दुकानदारों ने उधारी में राशन देना भी बंद कर दिया। ऐसे में शिक्षक कभी रिश्तेदार तो कभी परिचितों के आगे हाथ फैलाने को मजबूर हैं। दरअसल, राज्य सरकार ने स्ववित्त पोषिक योजना के तहत संचालित बारां जिले में छीपाबड़ौद के प्रेमसिंह सिंधवी व बूंदी जिले में नैनवा के भगवान आदिनाथ जयराज मारवाड़ा कॉलेज को अधिग्रहण कर सरकारी तो बना दिया लेकिन स्टाफ को नियमित नहीं किया। जिसकी वजह से दोनों कॉलेजों के करीब 21 लैक्चरर व 15 अशैक्षणिक स्टाफ पिछले 30 माह से तनख्वाह को तरस गए। </p>
<p><strong>यह है मामला</strong><br />वर्ष 2006 में स्ववित्त पोषित योजना के तहत बारां जिले के प्रेमसिंह सिंघवी कॉलेज शुरू किया था। कॉलेज संचालन के लिए तत्कालीन एसडीएम की अध्यक्षता में महाविद्यालय विकास समिति का गठन किया। जिसकी देखरेख में कॉलेज संचालित किया जा रहा था। वर्ष 2013 में कांगे्रस सरकार ने कॉलेज का अधिग्रहण कर सरकारी में बदल दिया। लेकिन, वर्ष 2014 में सत्ता परिवर्तन होने के कारण भाजपा सरकार ने इसे डिस नोटिफाइड कर दिया था। इसके बाद वर्ष 2019 में फिर से प्रदेश में कांगे्रस सरकार आने के बाद सीएम घोषणा बजट में इसे फिर से नोटिफाइड करते हुए कॉलेज को सरकारी कर दिया।  जून 2021 के बाद से ही यहां कार्यरत शैक्षणिक व अशैक्षणिक स्टाफ को तनख्वाह नहीं मिल रही। जबकि, पहले विकास समिति के माध्यम से स्टाफ को वेतन मिलता था। </p>
<p><strong>दोनों कॉलेजोें में एक भी कर्मचारी सरकारी नहीं</strong><br />जानकारी के अनुसार छिपाबड़ौद के प्रेम सिंह सिंघवी व मारवाड़ा कॉलेज में वर्तमान में एक भी कर्मचारी सरकारी नहीं है। महाविद्यालयों का संचालन पुराना स्टाफ द्वारा ही किया जा रहा है। एडमिशन लेने से एग्जाम संचालित करवाने तक का सारा काम यही स्टाफ कर रहा है। छात्रवृति का काम भी यही शिक्षक कर रहे हैं। इसके अलावा पूरे साल नियमित कॉलेज आ रह हैं। ढाई साल से तनख्वाह नहीं मिलने से दो वक्त की रोटी का जुगाड़ करना भी मुश्किल हो गया है।</p>
<p><strong>जेवर गिरवी रखे तब हुआ रोटी का जुगाड़</strong><br />लेक्चरर राजेश गुप्ता ने बताया कि ढाई साल से परिवार आर्थिक तंगी से जूझ रहा है। जमा पूंजी खत्म हो गई। दुकानदारों ने भी पिछला बकाया नहीं दे पाने से उधारी में राशन देना बंद कर दिया। हाल ही मुख्यमंत्री व आयुक्तालय कमीशनर से मिलकर पीढ़ा बताई लेकिन आश्वासन के अलावा कुछ नहीं मिला। घर के जेवर गिरवी रख दो वक्त की रोटी का जुगाड़ करना पड़ रहा है। अधिकतर शिक्षक ओवरऐज हो चुके हैं, ऐसे में कॉलेज छोड़कर भी नहीं जा सकते। सरकार भी मामले में कुछ भी स्पष्ट नहीं कर रही।  </p>
<p><strong>ब्याज पर कर्जा लेकर पाल रहे परिवार </strong><br />सिंघवी कॉलेज में कार्यरत सहायक कर्मचारी बाबू खान ने बताया कि जून 2021 के बाद से ही तनख्वाह नहीं मिली। 30 महीनों से कॉलेज में काम कर रहे हैं लेकिन सरकार न तो नियमित कर रही और न ही तनख्वाह दे रही। परिवार चलाना मुश्किल हो गया। ब्याज पर कर्जा लेकर परिवार चला रहे हैं। बेटा हैदराबाद में एयरलाइंस इंस्टीट्यूट से कू्र-मेंबर का कोर्स कर रहा है, जिसकी फीस 1.70 लाख है। तनख्वाह की उम्मीद में जेवर गिरवी रख 1 लाख रुपए तो जमा करवा दिए लेकिन 70 हजार न दे पाए। </p>
<p><strong>ढाई साल से नहीं मिली तनख्वाह</strong><br />प्रेमसिंह सिंघवी कॉलेज में संस्कृत लेक्चरर भूमिका पारीक ने बताया कि 18 मार्च 2021 को नियमित करने के लिए आयुक्तालय जयपुर में शिक्षकों की स्क्रिीनिंग की थी। दस्तावेज जांचे थे और नियमित करने का भरोसा दिलाया था। इसी आस में ढाई साल से प्रतिदिन कॉलेज जा रहे हैं। वहां एडमिशन से लेकर पढ़ाने व एग्जाम करवाने तक की जिम्मेदारी निभा रहे हैं। अब तक न तो तनख्वाह मिली और न ही नियमित किया गया। बच्चों की जरूरतें पूरी करना तो दूर फीस का जुगाड़ करना ही मुश्किल हो गया। परिवार हर दिन तनाव से गुजर रहा है। </p>
<p><strong>अब कहां मिलेगी नौकरी</strong><br />भगवान आदिनाथ जयराज मारवाड़ा कॉलेज के शिक्षक डॉ. जेपी मीणा ने बताया कि 1977 नियम-5 के अनुसार स्ववित्त कॉलेज में कार्यरत शैक्षणिक व अशैक्षणिक कर्मचारियों को सरकारी सेवा में मर्ज करना किया जाना है। जिसके तहत कर्मचारियों के डॉक्यूमेंट उच्च शिक्षा आयुक्तालय की स्क्रेनिंग कमेटी चेक कर चुकी है। अब तक न तो नियमित किया गया और न ही वेतन दिया। उप मुख्यमंत्री से भी मिले थे। लेकिन संतोषजनक जवाब नहीं मिला। वर्ष 2003 से सभी स्टाफ नियमित सेवाएं दे रहे हैं। अधिकतर कर्मचारी ओवर एज हो चुके हैं, नियमित होने की आस में बिना वेतन नौकरी कर रहे हैं। अब हमें कहां नौकरी मिलेगी।</p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br />15 फरवरी को कॉलेज आयुक्त की अध्यक्षता में प्रदेश के सभी संभाग के एडी व कॉलेज प्रिंसिपलों की आॅनलाइन मिटिंग हुई थी। जिसमें छीपाबड़ौद के प्रेमसिंह सिंधवी व नैनवां का मारवाड़ा कॉलेज का मुद्दा उठाया था। इन दोनों कॉलेजों को सरकारी तो कर दिया लेकिन न तो इन्हें नियमित किया और न ही तनख्वाह मिली यह जानकारी उच्चाधिकारियों के समक्ष रखी थी। इस पर कमीशनर ने मामला संज्ञान में होने और सरकार द्वारा जल्द ही कार्रवाई करने की बात कहीं है। <br /><strong>- डॉ. रघुराज सिंह परिहार, सहायक क्षेत्रिय निदेशक, आयुक्तालय कोटा</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 19 Feb 2024 16:17:04 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[kota]]></dc:creator>
                            </item>
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                <title>प्रदेश में 99.97 लाख किसानों पर कर्ज</title>
                                    <description><![CDATA[कांग्रेस सरकार 22 लाख से अधिक किसानों की कर्जमाफी का दावा कर रही है। वहीं भाजपा राष्ट्रीय बैंकों का कर्ज माफ नहीं होने का आरोप लगा रहे है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/debt-on-99-97-lakh-farmers-in-the-state/article-54098"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-08/untitled-1-copy9.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। चुनावी माहौल तैयार होने के साथ ही अब प्रदेश में फिर से किसानों की कर्जमाफी का मुद्दा गर्माने लगा है। कांग्रेस सरकार 22 लाख से अधिक किसानों की कर्जमाफी का दावा कर रही है। वहीं भाजपा राष्ट्रीय बैंकों का कर्ज माफ नहीं होने का आरोप लगा रहे है। वैसे तो केन्द्र के आंकड़ों के मुताबिक राजस्थान के किसानों पर 147538.62 करोड़ का कृषि कर्ज बकाया है। इसमें वाणिज्यिक बैंक के खातों की संख्या 5631307 है, जिसमें 1087761.47 करोड़ का ऋण बकाया है। इसी तरह सहकारी बैंकों के 3285471 खातों में 15337.84 करोड़ और क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक के 1081314 खातों का 23439 करोड़ का ऋण बकाया है।</p>
<p><strong>सरकार की भावी योजना </strong></p>
<p>कांग्रेस सरकार ने हाल ही विधानसभा में राजस्थान राज्य कृषक ऋण राहत आयोग विधेयक 2023 पारित किया है। इसमें प्रावधान किया गया है कि जिन किसानों पर ऋण बकाया है, उनकी जमीन कुर्क नहीं हो सके। इसके लिए आयोग का गठन होगा। यह आयोग कर्ज में डूबे किसानों को राहत देगा। बैंक व कंपनियां किसानों की भूमि को कुर्क नहीं कर सकेंगी। चुनाव से पहले राज्य सरकार आयोग के जरिए किसानों को राहत देने की मुहिम पर जुटी है। हालांकि बिल को अभी राज्यपाल के स्तर पर मंजूरी मिलना शेष है। </p>
<p><strong>किसानों की भूमि कुर्क</strong><br />राजस्व विभाग और राजस्व मंडल के आंकड़ों के मुताबिक 19 हजार 442 किसानों की भूमि कुर्क की गई है। इन किसानों की भूमि कर्ज की राशि नहीं चुकाने पर की गई है। </p>
<p>राष्ट्रीयकृत बैंक भारत सरकार के नियंत्रणाधीन है एवं उनका ऋण माफ करने का निर्णय भारत सरकार के स्तर पर ही लिया जा सकता है। इसके लिए मुख्यमंत्री ने कई बार केन्द्र सरकार को पत्र भी लिखा है।<br /><strong>- उदयलाल आंजना, सहकारिता मंत्री</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 09 Aug 2023 10:27:29 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>भारत का विदेशी ऋण 8.2 प्रतिशत बढ़कर 620.7 अरब डॉलर पर पहुंचा</title>
                                    <description><![CDATA[मार्च 2022 के अंत में गैर-संप्रभु विदेशी ऋण 490.0 अरब डॉलर अनुमानित था जो एक वर्ष पहले के स्तर से 6.1 प्रतिशत  अधिक है। सीबी, एनआरआई जमा राशि और अल्पकालिक व्यापार ऋण गैर-संप्रभु ऋण के लगभग 95 प्रतिशत है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/business/india-s-external-debt-rises-8-2-percent-to--620-7-billion/article-21839"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-09/q-10.jpg" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। भारत का विदेशी ऋण मार्च 2022 में समाप्त वित्त वर्ष में 620.7 अरब डॉलर पर पहुंच गया जो मार्च 2021 में समाप्त वित्त वर्ष के 573.7 अरब डॉलर के ऋण की तुलना में 8.2 प्रतिशत अधिक है। वित्त मंत्रालय के आर्थिक मामलों के विभाग की विदेशी ऋण प्रबंधन इकाई (ईडीएमयू) ने भारत के विदेशी ऋण 2021-22 पर स्थिति रिपोर्ट का 28वां संस्करण जारी किया है। मार्च 2022 के अंत में भारत का विदेशी ऋण 620.7 अरब डॉलर था, जो मार्च 2021 के अंत में रहे 573.7 अरब डॉलर के ऋण से 8.2 प्रतिशत अधिक था। जबकि इसका 53.2 प्रतिशत डॉलर के मूल्य वर्ग में था, भारतीय रु. के मूल्य वर्ग का ऋण 31.2 प्रतिशत अनुमानित था जो दूसरी सबसे बड़ी राशि है। मार्च 2022 के अंत में विदेशी ऋण सकल घरेलू उत्पाद के अनुपात में मामूली रूप से गिरकर 19.9 प्रतिशत हो गया जो एक साल पहले के 21.2 प्रतिशत था। विदेशी ऋण के अनुपात के रूप में विदेशी मुद्रा भंडार मामूली रूप से गिरकर मार्च 2022 के अंत में 97.8 प्रतिशत पर रहा जो एक साल पहले 100.6 प्रतिशत था।   दीर्घकालिक ऋण 499.1 अरब डॉलर अनुमानित था, जो 80.4 प्रतिशत का सबसे बड़ा हिस्सा था, जबकि 121.7 अरब  डॉलर का अल्पकालिक ऋण ऐसे कुल ऋण का का 19.6 प्रतिशत था। अल्पकालिक व्यापार ऋण मुख्य रूप से व्यापार ऋण (96 प्रतिशत) वित्तपोषण आयात के रूप में था।   वाणिज्यिक उधार (सीबी), एनआरआई जमा राशि, अल्पकालिक व्यापार ऋण और बहुपक्षीय ऋण एक साथ मिलकर कुल विदेशी ऋण का 90 प्रतिशत है, जबकि मार्च 2021 के दौरान एनआरआई में मामूली कमी हुई तो दूसरी ओर सीबी अल्पकालिक व्यापार ऋण और बहुपक्षीय ऋण में इस अवधि के दौरान बढ़ोत्तरी हुई। सीबी, अल्पकालिक व्यापार ऋण और बहुपक्षीय ऋण में बढ़ोत्तरी हुई जो कुल मिलाकर एनआरआई की जमाराशि में आई कमी से कही अधिक थी।   मार्च 2022 के अंत तक, संप्रभु विदेशी ऋण (एसईडी) की राशि 130.7 अरब डॉलर थी, जो पिछले साल के स्तर से 17.1 प्रतिशत अधिक है। यह 2021-22 के दौरान आईएमएफ द्वारा दी गई एसडीआर के अतिरिक्त आवंटन को दर्शाती है। मार्च 2021 के अंत एसडीआर 5.5 अरब डॉलर से बढ़कर 22.9 अरब डॉलर हो गया। दूसरी ओर जी-सेक की एफपीआई होल्डिंग जो एक साल पहले 20.4 अरब डॉलर थी घटकर 19.5 अरब डॉलर हो गई। <br />   <br />मार्च 2022 के अंत में गैर-संप्रभु विदेशी ऋण 490.0 अरब डॉलर अनुमानित था जो एक वर्ष पहले के स्तर से 6.1 प्रतिशत  अधिक है। सीबी, एनआरआई जमा राशि और अल्पकालिक व्यापार ऋण गैर-संप्रभु ऋण के लगभग 95 प्रतिशत है। मार्च 2022 के अंत में अल्पकालिक व्यापार ऋण 20.7 प्रतिशत बढ़कर 117.4 अरब डॉलर हो गया जिसमें  वर्ष 2021-22 के दौरान आयात में हुई भारी बढ़ोत्तरी का योगदान है।  ऋण सेवा अनुपात वर्तमान प्राप्तियों में उछाल और ऋण सेवा भुगतान में कमी के कारण वर्ष 2020-21 में 8.2 प्रतिशत था जो 2021-22 के दौरान घटकर 5.2 प्रतिशत हो गया। मार्च 2022 के अंत में विदेशी ऋण के स्टॉक से उत्पन्न होने वाले ऋण सेवा भुगतान दायित्वों में आने वाले वर्षों में गिरावट का रुख होने का अनुमान है।   क्रॉस-कंट्री परिप्रेक्ष्य में भारत का विदेशी ऋण मामूली है, जो विश्व स्तर पर 23वें स्थान पर है। विभिन्न ऋण भेद्यता संकेतकों के संदर्भ में भारत की स्थिरता निम्न और मध्यम आय वाले देशों (एलएमआईसी) की तुलना में एक समूह के रूप में और उनमें से कई से तो व्यक्तिगत रूप में भी बेहतर थी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>बिजनेस</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 06 Sep 2022 11:15:09 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur]]></dc:creator>
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                <title>जानलेवा कर्ज: एक ही परिवार के पांच सदस्यों ने की आत्महत्या</title>
                                    <description><![CDATA[तिरुवनंतपुरम। केरल में तिरुवनंतपुरम के कल्लम्बलम कस्बे में कर्ज से लदे एक परिवार के पांच सदस्यों के खुदकशी कर लिए जाने का मामला सामने आया है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/deadly-debt-five-members-of-the-same-family-committed-suicide/article-13437"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-07/a-1.jpg" alt=""></a><br /><p>तिरुवनंतपुरम। केरल में तिरुवनंतपुरम के कल्लम्बलम कस्बे में कर्ज से लदे एक परिवार के पांच सदस्यों के खुदकशी कर लिए जाने का मामला सामने आया है। पुलिस सूत्रों के मुताबिक मृतकों की पहचान मणिकंदन, उनकी पत्नी संध्या, बच्चे अमेया और अजेश और उनकी मां की बहन देवकी के रूप में हुई है। उन्होंने बताया कि मणिकंदन अपने कमरे में लटके पाये गये, जबकि अन्य ने कथित तौर पर जहर खाकर आत्महत्या कर ली।<br /><br />बताया जाता है कि परिवार के लोग अत्यंत आर्थिक तंगी से जूझ रहे थे। पंचायत स्वास्थ्य अधिकारियों की आपत्ति तथा अन्य कारणों से पिछले कुछ दिनों से मणिकंदन अपनी दुकान नहीं खोल सके थे। पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है और आवश्यक तहकीकात कर रही है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 02 Jul 2022 13:02:40 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur]]></dc:creator>
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                <title>कर्ज में डूबे राज्य</title>
                                    <description><![CDATA[भारतीय रिजर्व बैंक ने अपने एक सर्वे में देखा है कि देश के दस राज्य भारी कर्ज के दबाव में हैं और इन राज्यों में सभी सूचक चिंताजनक संकेत दे रहे हैं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/opinion/states-ridden-in-debt/article-12987"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-06/465456.jpg" alt=""></a><br /><p>भारतीय रिजर्व बैंक ने अपने एक सर्वे में देखा है कि देश के दस राज्य भारी कर्ज के दबाव में हैं और इन राज्यों में सभी सूचक चिंताजनक संकेत दे रहे हैं। इन दस राज्यों में सबसे ज्यादा खराब स्थिति पंजाब की है, जहां कर्ज और राज्य के सकल घरेलू उत्पादन का अनुपात 45 प्रतिशत से अधिक हो जाने का अनुमान है। इस अवधि तक राजस्थान, केरल और पश्चिम बंगाल में यह अनुपात 35 प्रतिशत से अधिक हो सकता है। शीर्ष बैंक की सलाह है कि वित्तीय स्थिति को और ज्यादा गड़बड़ाने से बचाने के लिए ठोस और कारगर उपाय किए जाने चाहिए। इन राज्यों को सबसे पहले अपने कर्ज के स्तर को स्थिर करने को प्राथमिकता देनी चाहिए। कर्ज का बोझ झेल रहे राज्यों में पंजाब, बिहार, आंध्र प्रदेश, झारखण्ड, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश और हरियाणा विशेष रूप से शामिल हैं। पूरे देश की सभी राज्य सरकारें जितना खर्च करती है, उसका लगभग आधा इन दस राज्यों में खर्च किया जाता है, क्योंकि कर्ज का ब्याज चुकाने में ही काफी धन खर्च कर दिया जाता है। फिर पेंशन व प्रशासनिक खर्च भी काफी होता है। आंध्र प्रदेश, बिहार, राजस्थान और पंजाब ने वित्त वर्ष 2020-21 में 15वें वित्त आयोग द्वारा निर्धारित कर्ज और वित्तीय नुकसान के लक्ष्यों को भी पार कर लिया। पश्चिम बंगाल, केरल व झारखण्ड ने तो निर्धारित लक्ष्य से अधिक कर्ज लिया। मध्य प्रदेश का वित्तीय नुकसान तय हिसाब से ज्यादा रहा। हरियाणा और उत्तर प्रदेश लक्ष्यों के भीतर ही कर्ज व वित्तीय नुकसान को रख सके।</p>
<p>रिजर्व बैंक का आंकलन है कि राजस्थान, केरल और पश्चिम बंगाल वर्तमान वित्त में कर्ज और वित्तीय घाटे के लक्ष्य को लांघ सकते हैं। राज्यों द्वारा कर्ज लेने की मुख्य वजह यह होती है कि उनकी राजस्व प्राप्तियां और केन्द्र से प्राप्त होने वाली राशि से उनका खर्च पूरा नहीं होता। ऐसे वित्तीय नुकसान बढ़ जाता है। राज्यों की राजस्व प्राप्ति में लगातार कमी आ रही है और गैर कर राजस्व गिरावट देखी जा रही है। ऐसी स्थिति में ये राज्य अपने राजस्व का 80 से 90 प्रतिशत हिस्सा खर्च करने को विवश होते हैं, जिससे खर्च की गुणवत्ता पर तो नकारात्मक असर पड़ता ही है। इसके साथ ही विकास कार्य आगे नहीं बढ़ पाते हैं। इन दस राज्यों में विकास के काम आगे नहीं बढ़ पा रहे हैं। अगर इन राज्यों ने राजस्व बढ़ाने तथा खर्चो पर अंकुश नहीं लगाया तो अर्थव्यवस्था पर विपरीत असर पड़ेगा और विकास की गति धीमी पड़ जाएगी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>ओपिनियन</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 25 Jun 2022 12:24:34 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>डेट म्यूचुअल फंड्स से निवेशकों ने निकाले 32,722 करोड़ </title>
                                    <description><![CDATA[ भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के बढ़ती महंगाई को काबू में लाने के लिए प्रमुख नीतिगत दर रेपो रेट में बढ़ोतरी और उदार रुख को धीरे-धीरे वापस लेने की घोषणा के बाद निकासी बढ़ी है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/business/investors-withdraw-32722-crore-from-debt-mutual-funds/article-12143"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-06/buyers-guide-mutual-fund-min.jpg" alt=""></a><br /><p><strong> नई दिल्ली।</strong> फिक्स्ड इनकम वाले म्यूचुअल फंड प्रोडक्ट्स से मई महीने में निवेशकों ने 32,722 करोड़ की निकासी की है। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के बढ़ती महंगाई को काबू में लाने के लिए प्रमुख नीतिगत दर रेपो रेट में बढ़ोतरी और उदार रुख को धीरे-धीरे वापस लेने की घोषणा के बाद निकासी बढ़ी है। एसोसिएशन आॅफ  म्यूचुअल फंड्स इन इंडिया (एएमएफआई) के आंकड़ों के अनुसार, इससे पहले अप्रैल महीने में इसमें 54,656 करोड़ रु. का निवेश हुआ था। इसके अलावा इस साल अप्रैल और मई के बीच फोलियो की संख्या भी 73.43 लाख से घटकर 72.87 पर आ गई। बाजार में उतार-चढ़ाव के दौरान निवेश के लिहाज से बांड जैसे फिक्स्ड इनकम वाले प्रोडक्ट्स को सुरक्षित विकल्प माना जाता है। हालांकि, ब्याज दर में बढ़ोदरी, मैक्रो एनवायरनमेंट में उथल-पुथल और हायर यील्ड से निवेशकों पर बांड बाजार में निवेश को लेकर रुख प्रभावित हो सकता है।</p>
<p><strong>विश्लेषकों की सलाह</strong></p>
<p>मार्निंग स्टार इंडिया के सीनियर एनालिस्ट (रिसर्च मैनेजर) कविता कृष्णन ने कहा कि खाने-पीने की चीजों, कमोडिटी और फ्यूल की कीमतों में तेजी के साथ रूस-यूक्रेन युद्ध जैसे कारणों से नीतिगत दर में वृद्धि हुई है। रिजर्व बैंक का जोर अब मुद्रास्फीति को काबू में लाने पर है। इससे नीतिगत दर में आगे और वृद्धि की आशंका है। मौजूदा स्थिति को देखते हुए ओवरनाइट और लिक्विड फंड (अल्पकालीन निवेश उत्पाद) जैसे कोष को छोड़कर बांड और इसी तरह के अन्य उत्पादों से पूंजी निकासी जारी है। सिंगल डिजिट में रिटर्न और इक्विटी जैसे अन्य क्षेत्रों में बढ़ती रुचि से भी बांड कोष में पूंजी प्रवाह प्रभावित हुआ है। बजाज कैपिटल के चीफ  रिसर्च आॅफिसर आलोक अग्रवाल ने भी कहा कि पूंजी निकास का कारण आरबीआई का पिछले महीने मौद्रिक नीति समीक्षा में अपने रुख में बदलाव है। बिना तय कार्यक्रम के हुई बैठक में आरबीआई ने न केवल रेपो रेट में 0.40 प्रतिशत की वृद्धि की बल्कि कैश रिजर्व रेश्यो 0.5 प्रतिशत बढ़ाकर 4.5 प्रतिशत कर दिया।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>बिजनेस</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 14 Jun 2022 15:09:11 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>कर्ज का जाल, किसान की जान भी गई और जमीन भी हो गई नीलाम, परिवार के पालन-पोषण पर संकट, मुखिया की हो चुकी है दो माह पूर्व मौत</title>
                                    <description><![CDATA[सात लाख का लोन था, जमीन बिकी 46 लाख 51 हजार में]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/dausa/%E0%A4%95%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%9C-%E0%A4%95%E0%A4%BE-%E0%A4%9C%E0%A4%BE%E0%A4%B2--%E0%A4%95%E0%A4%BF%E0%A4%B8%E0%A4%BE%E0%A4%A8-%E0%A4%95%E0%A5%80-%E0%A4%9C%E0%A4%BE%E0%A4%A8-%E0%A4%AD%E0%A5%80-%E0%A4%97%E0%A4%88-%E0%A4%94%E0%A4%B0-%E0%A4%9C%E0%A4%AE%E0%A5%80%E0%A4%A8-%E0%A4%AD%E0%A5%80-%E0%A4%B9%E0%A5%8B-%E0%A4%97%E0%A4%88-%E0%A4%A8%E0%A5%80%E0%A4%B2%E0%A4%BE%E0%A4%AE--%E0%A4%AA%E0%A4%B0%E0%A4%BF%E0%A4%B5%E0%A4%BE%E0%A4%B0-%E0%A4%95%E0%A5%87-%E0%A4%AA%E0%A4%BE%E0%A4%B2%E0%A4%A8-%E0%A4%AA%E0%A5%8B%E0%A4%B7%E0%A4%A3-%E0%A4%AA%E0%A4%B0-%E0%A4%B8%E0%A4%82%E0%A4%95%E0%A4%9F--%E0%A4%AE%E0%A5%81%E0%A4%96%E0%A4%BF%E0%A4%AF%E0%A4%BE-%E0%A4%95%E0%A5%80-%E0%A4%B9%E0%A5%8B-%E0%A4%9A%E0%A5%81%E0%A4%95%E0%A5%80-%E0%A4%B9%E0%A5%88-%E0%A4%A6%E0%A5%8B-%E0%A4%AE%E0%A4%BE%E0%A4%B9-%E0%A4%AA%E0%A5%82%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%B5-%E0%A4%AE%E0%A5%8C%E0%A4%A4/article-4061"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-01/27.jpg" alt=""></a><br /><p>रामगढ़ पचवारा, दौसा। प्रदेश में किसानों की कर्ज माफी पिछले तीन सालों से मुद्दा बनी हुई है। सरकार का दावा है कि उसने हजारों करोड़ रुपए किसानों के कर्जे के माफ किए है लेकिन राजधानी के सबसे समीपवर्ती जिले दौसा से आई एक खबर ने कर्ज माफी की जमीनी हकीकत बता दी है। कर्ज में डूबे एक किसान की जमीन को पहले कुर्क किया गया और मंगलवार को उस जमीन की नीलामी भी कर दी गई। ऐसे में जमीन नीलाम होने के बाद किसान का परिवार आत्महत्या करने को मजबूर है क्योंकि परिवार के भरण पोषण का अब कोई जरिया नहीं रहा है। दौसा जिले के रामगढ़ पचवारा के जामुन की ढाणी के कजोड़ मीणा ने राजस्थान मरुधरा ग्रामीण बैंक से केसीसी का लोन लिया था। वर्ष 2017 के बाद किसान ने 7 लाख रुपए से अधिक का ऋण नहीं चुकाया। लोन लेने वाले किसान कजोड़ मीणा की मौत भी हो गई। बैंक ने मृतक किसान के पुत्र राजू लाल और पप्पू लाल को कई बार नोटिस दिए। लेकिन गरीब परिवार सरकार के कर्जमाफी के इंतजार में लोन जमा नहीं करा पाया। ऐसे में रामगढ़ पचवारा एसडीएम कार्यालय की ओर से जमीन कुर्की के आदेश दिए गए।<br /> <br /> <strong>जमीन की नहीं, जिंदगी की नीलामी का इश्तिहार </strong><br /> मंगलवार को जमीन की नीलामी की प्रक्रिया की गई। किसान कजोड़ मीणा की करीब 15 बीघा 2 बिस्वा जमीन 46 लाख 51 हजार रुपए में नीलाम कर दी गई। यह जमीन किरण शर्मा निवासी मंडावरी ने खरीदी।</p>
<p><br /> <strong>परिवार वालों का रो रोकर हुआ बुरा हाल</strong></p>
<p>नीलामी के बाद किसान परिवार का रो-रोकर बुरा हाल है। उनके सामने प्रश्न ये है कि वे अब कहां जाएं। अपने परिवार को कैसे पाले? ऐसे में किसान परिवार के सदस्य आत्महत्या को मजबूर होने की बात कहते हुए नजर आए।<br /> <br /> <strong>सेटलमेंट के प्रयास भी किए थे: एसडीएम</strong><br /> रामगढ़ पचवारा एसडीएम मिथलेश मीणा का कहना है कि केसीसी लोन जमा कराने के लिए सेटलमेंट के लिए भी प्रयास किए गए थे लेकिन किसान की ओर से लिया गया लोन नहीं चुकाया। जिसके बाद जमीन की नीलामी की गई है।</p>
<p><br /> <strong>किसानों ने प्रदर्शन कर ज्ञापन भी सौंपा था</strong><br /> किसान की जमीन की नीलामी रोकने को लेकर हाल ही में किसानों ने उपखंड कार्यालय पर धरना प्रदर्शन कर उपखंड अधिकारी से नीलामी रोके जाने को लेकर ज्ञापन भी सौंपा था। बैंक मैनेजर ने किसान के पुत्रों को एक मुश्त समझौता के तहत छूट पर कर्ज जमा कराने की कोशिश भी थी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>दौसा</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 19 Jan 2022 11:46:41 +0530</pubDate>
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