<?xml version="1.0" encoding="utf-8"?>        <rss version="2.0"
            xmlns:content="http://purl.org/rss/1.0/modules/content/"
            xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/"
            xmlns:atom="http://www.w3.org/2005/Atom">
            <channel>
                <atom:link href="https://dainiknavajyoti.com/buildings/tag-11774" rel="self" type="application/rss+xml" />
                <generator>Dainik Navajyoti Rising Rajasthan RSS Feed Generator</generator>
                <title>buildings - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
                <link>https://dainiknavajyoti.com/tag/11774/rss</link>
                <description>buildings RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>सांप मारने को लाठी पीट  रहे, वह भी आधी अधूरी</title>
                                    <description><![CDATA[ एक बार फिर नोटिस देकर की इतिश्री-हादसों के कुछ दिन तक ही नजर आती है अधिकारियों की सक्रियता।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/they-re-using-sticks-to-kill-a-snake--and-that-too-is-half-hearted/article-144681"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-02/1200-x-60-px)13.png" alt=""></a><br /><p>कोटा।<strong> केस एक :</strong> जवाहर नगर थाना क्षेत्र स्थित इंद्र विहार में एक तीन मंजिला रेस्टोरेंट के ढहने से दो लोगों की मौत के बाद नगर निगम व कोटा विकास प्राधिकरण कुछ दिन तक तो सक्रिय नजर आया। अवैध निर्माण के नोटिस भी दिए गए। लेकिन उसके बाद केडीए ने तो किसी के भी खिलाफ कोई ठोस कार्रवाई तक नहीं की। जबकि निगम ने की चार अवैध निर्माण भवनों को सीज करने के बाद आगे कोई कार्रवाई नहीं की।</p>
<p><strong>केस दो : </strong>रेस्टोरेंट हादसे के बाद नगर निगम का फायर अनुभाग भी सक्रिय हुआ। फायर टीम ने नए कोटा शहर के कोचिंग इलाकों में तीन से चार दिन तक तो अभियान चलाकर करीब डेढ़ सौ से अधिक नोटिस जारी किए। लेकिन उसके बाद उन नोटिसों की पालना हुई या नहीं। किसी के भी खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं हुई।</p>
<p><strong>स्कूल हादसे के बाद भी चेते थे अधिकारी:</strong> इसी तरह बरसात के समय में झालावाड़ जिले के पिपलोदी गांव में एक सरकारी स्कूल की छत ढहने से कई बच्चों की मौत हो गई थी। उस हादसे के बाद सरकार व प्रशासन और शिक्षा विभाग हरकत में आया। आनन-फानन में सभी जर्जर स्कूलों का सर्वे कराया गया। उनमें बच्चों को बैठने से रोका गया। सरकार ने जर्जर स्कूल भवनों के लिए बजट भी पारित कर दिया। लेकिन हुआ कुछ भी नहीं। अभी तक भी किसी स्कूल की मरम्मत तक नहीं हुई है। ये तो उदाहरण मात्र हैं उस स्थिति को बताने के लिए जो कुछ दिन पहले शहर में उत्पन्न हुई थी। हालत यह है कि हर बार किसी भी तरह का बड़ा हादसा होने के बाद प्रशासन उस समय या कुछ दिन तक तो सक्रिय नजर आता है लेकिन उसके बाद फिर वही ढाक के तीन पात वाली स्थिति हो जाती है।</p>
<p><strong>केडीए ने दिए सौ से अधिक नोटिस</strong><br />रेस्टोरेंट हादसा होने के बाद जांच में पता चला कि जो रेस्टोरेंट ध्वस्त हुआ था उसका निर्माण अवैध था। उसके पास के अन्य 5 भवन भी अवैध निर्माण की बुनियाद पर खड़े हुए थे। उसे देखते हुए कोटा विकास प्राधिकरण की ओर से नए कोटा शहर के कोचिंग एरिया जवाहर नगर, इंद्र विहार, तलवंडी, महावीर नगर, के अलावा कुन्हाड़ी लैंड मार्क और बोरखेड़ा स्थित नयानोहरा समेत कई जगह पर बहुमंजिला इमारतों को अवैध निर्माण मानते हुए नोटिस जारी किए। जानकारी के अनुसार करीब 100 से 125 नोटिस जारी किए। लेकिन उन नोटिसों को देने के बाद उन पर आगे क्या कार्रवाई की गई। इस बारे में कोई भी अधिकारी बोलने को तैयार ही नहीं है।</p>
<p><strong>अग्नि सुरक्षा नहीं होने पर दिए नोटिस</strong><br />इसी तरह नगर निगम के फायर अनुभाग की ओर से हॉस्टलों व रेस्टोरेंट समेत अन्य बहुमंजिला उमारतों में आग से सुरक्षा की जांच की गई। उनमें से कहीं फायर सिस्टम नहीं था तो कहीं कार्यशील अवस्था में नहीं थे। कहीं आग से सुरक्षा के नाम पर मात्र दिखावे के छोटे उपकरण रखे हुए थे। ऐसे में नगर निगम के फायर अनुभाग की ओर से अभियान चलाकर करीब 150 से अधिक नोटिस दिए गए। उन नोटिसों के बाद उनकी पालना हुई या नहीं। भवन मालिकों ने फायर सेफ्टी सिस्टम लगाए या नहीं। इसकी कोई जानकारी अभी तक नहीं है।</p>
<p><strong>फिर किसी हादसे का इंतजार</strong><br />शहर में किसी तरह का हादसा होने के कुछ दिन बाद तक तो सभी विभाग व जिला प्रशासन सक्रिय रहता है। फिर चाहे संभागीय आयुक्त हो या जिला कलक्टर। सभी ने बैठकें लेकर अधिकारियों को निर्देश दिए कि भविष्य में ऐसी घटना दोबारा नहीं हो। इसके लिए जो भी संभव हो कार्रवाई की जाए। अधिकारियों के निर्देश के बाद संबंधित विभाग हरकत में आए और कुछ दिन तक ऐसा लगा मानो अब शहर में ऐसी कार्रवाई होगी जिससे अवैध निर्माण व अतिक्रमण करने वालों को सबक मिलेगा। जबकि ऐसा लगता है कि प्रशासन व संबंधित विभाग फिर किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रहे हैं। उसके बाद ही सख्त कार्रवाई होगी।</p>
<p><strong>17 दिन हुए हादसे को</strong><br />दिल्ली स्पाइसी रेस्टोरेंट को ध्वस्त हुए 17 दिन का समय हो गया है। 8 फरवरी की रात को हुए हादसे में एक कोचिंग छात्र व एक युवक की मौत हो गई थी। जबकि एक महिला के मलबे में दबने से उनका पैर इतना जख्मी हो गया था कि उसे काटना ही पड़ा। विभागीय व भवन मालिकों की लापरवाही का खामियाया बेगुनाहों को भुगतना पड़ रहा है।</p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br />इंद्र विहार में जिस रेस्टोरेंट का अवैध निर्माण था। उस समेत आस-पास के 5 भवनों को नोटिस दिया गया था। जिनमें से एक जर्जर भवन के मालिक ने तो स्वयं ही उसे ढहा दिया था। जबकि अन्य 4 को सीज कर दिया है। वहीं फायर के नोटिसों की पालना करवाई जाएगी। पालना नहीं करने वालों के खिलाफ निर्धारित समय के बाद कार्रवाई की जाएगी।<br /><strong>- ओम प्रकाश मेहरा, आयुक्त, नगर निगम कोटा</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/they-re-using-sticks-to-kill-a-snake--and-that-too-is-half-hearted/article-144681</link>
                <guid>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/they-re-using-sticks-to-kill-a-snake--and-that-too-is-half-hearted/article-144681</guid>
                <pubDate>Thu, 26 Feb 2026 14:24:55 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://dainiknavajyoti.com/media/2026-02/1200-x-60-px%2913.png"                         length="1269450"                         type="image/png"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[kota]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>जर्जर इमारतों का होगा सर्वे, बिना अनुमति के निर्माण कराने वालों के खिलाफ होगी कार्रवाई </title>
                                    <description><![CDATA[बिना अनुमति के निर्माण कराने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/there-will-be-a-survey-of-dilapidated-buildings-in-kota/article-142369"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-02/6622-copy19.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal"><span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">कोटा। नगर निगम अब शहर की जर्जर इमारतों का सर्वे करवायेगा। नगर निगम कोटा के आयुक्त ओम प्रकाश मेहरा ने बताया कि जो इमारत धराशायी हुई है, उसके पास उचित निर्माण स्वीकृति नहीं थी। उन्होंने कहा कि बिना अनुमति के निर्माण कराने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">उललेखनीय है कि कोटा के जवाहर नगर थाना क्षेत्र में इंदिरा विहार में रात 3 मंजिला इमारत गिरने से 2 लोगों की मौत हो गयी थी और 14 अन्य घायल हो गए थे। </span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/there-will-be-a-survey-of-dilapidated-buildings-in-kota/article-142369</link>
                <guid>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/there-will-be-a-survey-of-dilapidated-buildings-in-kota/article-142369</guid>
                <pubDate>Sun, 08 Feb 2026 18:01:33 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://dainiknavajyoti.com/media/2026-02/6622-copy19.jpg"                         length="58318"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>बंगाल की ऊंची इमारतों में स्थापित होंगे मतदान बूथ : चुनाव आयोग ने दी मंजूरी, तृणमूल कांग्रेस ने किया था विरोध</title>
                                    <description><![CDATA[ सूत्रों के अनुसार कुल सात जिलों में 69 बहुमंजिले आवासीय परिसरों की पहचान की गयी है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/polling-booths-will-be-set-up-in-high-rise-buildings-of/article-139091"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-01/election-commission.png" alt=""></a><br /><p>कोलकाता। चुनाव आयोग ने पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के विरोध के बावजूद बहुमंजिले आवासीय परिसरों में मतदान बूथ स्थापित करने की मंजूरी दी है। आयोग ने कई महीनों से चल रहे विवाद के बीच यह कदम उठाया है। सूत्रों के अनुसार कुल सात जिलों में 69 बहुमंजिले आवासीय परिसरों की पहचान की गयी है। 300 से अधिक पंजीकृत मतदाता वाले परिसरों में मतदान बूथ स्थापित किये जायेंगे।<br />पश्चिम बंगाल में मुख्य चुनाव अधिकारी (सीईओ) के कार्यालय के अधिकारियों के अनुसार, दक्षिण कोलकाता के दो और उत्तर कोलकाता के आठ आवासीय परिसरों में मतदान बूथ स्थापित किये जायेंगे। जिलों की बात करें, तो दक्षिण 24 परगना में सबसे अधिक 25 ऐसे परिसर होंगे। इसके बाद उत्तर 24 परगना में 22 होंगे। हावड़ा में चार, पूर्व बर्दवान में तीन और हुगली में पांच आवासीय परिसरों में मतदान बूथ स्थापित किये जायेंगे।</p>
<p>एक वरिष्ठ अधिकारी ने पहचान छिपाने की शर्त पर यूनी(एजेंसी) को जानकारी दी, जहां मतदाताओं की संख्या 300 से अधिक है, वहां मतदान बूथ स्थापित किये जायेंगे। आयोग ने रिपोर्टों और सर्वेक्षणों की समीक्षा के बाद अंतिम निर्णय लिया है। इससे पहले मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को निजी ऊंची आवासीय परिसरों में मतदान बूथ स्थापित करने के प्रस्ताव का विरोध निष्पक्षता और सुरक्षा संबंधी चिंताओं का हवाला देते हुए किया था। अधिकारियों ने कहा कि विवाद तब शुरू हुआ, जब चुनाव आयोग ने राज्य प्रशासन को मतदान भागीदारी में सुधार के लिए मतदान बूथ स्थापित करने के लिए उपयुक्त आवासीय परिसरों की पहचान करने का निर्देश दिया। सीईओ के कार्यालय ने जिला चुनाव अधिकारियों (डीईओ) से योग्य आवासीय परिसरों पर रिपोर्ट मांगी थी। एक अधिकारी ने बताया कि बार-बार याद दिलाने के बावजूद डीईओ समय सीमा के भीतर रिपोर्ट पेश करने में विफल रहे। पहले डाटा और आवेदनों की कमी के कारण सीईओ कार्यालय ने योजना से पीछे हटने का फैसला किया था।</p>
<p>हालांकि आयोग के दबाव में इस मुद्दे को 30 दिसंबर को आयोजित एक उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक में उठाया गया। इसकी अध्यक्षता आयोग  के उपचुनाव आयुक्त ज्ञानेश भारती ने की। इसमें मुख्य चुनाव अधिकारी मनोज कुमार अग्रवाल और उत्तर व दक्षिण 24 परगना के जिलाधिकारियों और वरिष्ठ अधिकारियों ने भाग लिया। आयोग ने मतदान बूथों को स्थापित करने के लिए आवासीय परिसरों की पहचान के लिए अपनी टीम बनाने का निर्णय लिया और लंबी चर्चाओं के बाद आयोग ने 69 आवासीय परिसरों पर ध्यान केंद्रित किया, जहां बूथ स्थापित किये जा सकते हैं।</p>
<p>दिलचस्प तथ्य यह है कि इस प्रस्ताव को लेकर तेज राजनीतिक मतभेद देखने को मिले हैं। तृणमूल कांग्रेस ने यह तर्क देते हुए लगातार इस कदम का विरोध किया है कि मतदान बूथ आमतौर पर सरकारी विद्यालयों में स्थापित होते हैं और निजी आवासीय परिसरों के अंदर बूथों से चुनावी निष्पक्षता और सुरक्षा से समझौता हो सकता है। वहीं भाजपा ने यह दावा करते हुए समर्थन किया है कि बड़े आवासीय परिसरों के मतदाता अक्सर कथित धमकी के कारण मत डालने से बचते हैं। पार्टी ने तर्क दिया है कि आवासीय परिसरों के अंदर बूथ स्थापित करने से अधिक भागीदारी सुनिश्चित होगी।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/leads/polling-booths-will-be-set-up-in-high-rise-buildings-of/article-139091</link>
                <guid>https://dainiknavajyoti.com/leads/polling-booths-will-be-set-up-in-high-rise-buildings-of/article-139091</guid>
                <pubDate>Sat, 10 Jan 2026 15:03:45 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://dainiknavajyoti.com/media/2026-01/election-commission.png"                         length="1813421"                         type="image/png"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>मनोहरथाना में 26 सरकारी विद्यालय शिफ्ट, बच्चों की सुरक्षा व पढ़ाई पर सवाल</title>
                                    <description><![CDATA[कई गांवों में बच्चों को उनके मूल विद्यालय के बजाय 3 - 4 किमी. दूर के स्कूलों में पढ़ने जाना होगा। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jhalawar/26-government-schools-shifted-in-manoharathana--raising-questions-about-children-s-safety-and-education/article-138861"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-01/1200-x-600-px)1.png" alt=""></a><br /><p>मनोहरथाना । एक ओर राज्य सरकार अपने दो वर्ष के कार्यकाल की उपलब्धियां गिना रही है, वहीं दूसरी ओर जमीनी हकीकत यह है कि जर्जर विद्यालय भवनों का स्थायी समाधान अब तक नहीं हो सका है। पिपलोदी हादसे के बाद जिन स्कूल भवनों को जर्जर घोषित किया गया था, उन्हें समय रहते ध्वस्त कर नए भवनों का निर्माण नहीं किया गया। इसका नतीजा यह हुआ कि झालावाड़ जिले के मनोहरथाना ब्लॉक में करीब 26 सरकारी विद्यालयों को पास के अन्य विद्यालयों में शिफ्ट करना पड़ा है। इस निर्णय से हजारों बच्चों की पढ़ाई, सुरक्षा और अभिभावकों की चिंताएं बढ़ गई हैं।</p>
<p><strong>क्या है पूरा मामला</strong><br />जानकारी के अनुसार, मनोहरथाना ब्लॉक के जिन विद्यालयों को जर्जर घोषित किया गया था, वहां अध्ययनरत विद्यार्थियों को 10 जनवरी के बाद अन्य विद्यालयों में पढ़ने जाना होगा। कई गांवों में बच्चों को अपने मूल विद्यालय के बजाय 3 से 4 किलोमीटर दूर स्थित स्कूलों में भेजा जा रहा है। इस फैसले को लेकर ग्रामीणों और अभिभावकों में भारी नाराजगी देखी जा रही है।</p>
<p><strong>शिफ्ट किए गए 26 विद्यालय</strong><br />कोटड़ा चमरगढ़, ताजपुरिया, चित्तौड़ा, ढाबा, कुंजरी, गोडिया, हनोतिया, आफूखेड़ी, गुराड़खेड़ा, कंवरिया खेड़ी, भवानीपुरा, बिरजीपुरा, हमीरपुर, शोलाल का पूरा, तलाईबेह, टांडी तंवरान, बामलाबेह, बकबट पूरा, भामा का पूरा, गंगाहोनी, झिरी, गिरधरपुरा, खेड़ी बोर, कंजरी की टापरियां, मोतीपुरा, रामपुरिया गुजरान।</p>
<p><strong>इन 13 विद्यालयों ने दर्ज कराई आपत्ति</strong><br />ताजपुरिया, चित्तौड़ा, गुराड़खेड़ा, कंवरिया खेड़ी, बकबट पूरा, भामा का पूरा, गंगाहोनी, गिरधरपुरा, खेड़ी बोर, कंजरी की टापरियां, बिरजीपुरा, झिरी।</p>
<p><strong>अभिभावकों की चिंता</strong><br />अभिभावकों का कहना है कि छोटे बच्चों के लिए रोज 3-4 किलोमीटर पैदल चलकर स्कूल जाना आसान नहीं है। प्राथमिक कक्षाओं के बच्चों को व्यस्त सड़क मार्ग से गुजरना पड़ेगा, जिससे दुर्घटना की आशंका बनी रहती है। पहले से ही पिपलोदी हादसे की टीस मन में है, ऐसे में दूरी बढ़ने से डर और गहरा गया है।</p>
<p><strong>पढ़ाई पर असर</strong><br />विद्यालय शिफ्ट होने से बच्चों की नियमित पढ़ाई प्रभावित होने की आशंका है। फरवरी से बोर्ड परीक्षाएं शुरू होनी हैं। नए स्कूल, नया वातावरण और पहले से भरी कक्षाओं में अतिरिक्त विद्यार्थियों का दबाव शिक्षा की गुणवत्ता पर असर डाल सकता है।</p>
<p><strong>स्थायी समाधान की मांग</strong><br />ग्रामीणों, अभिभावकों और शिक्षाविदों की मांग है कि जर्जर भवनों को गिराकर समयबद्ध तरीके से नए सुरक्षित विद्यालय भवनों का निर्माण किया जाए। जब तक नए भवन नहीं बनते, तब तक गांव स्तर पर सुरक्षित अस्थायी व्यवस्था या परिवहन सुविधा उपलब्ध कराई जाए।</p>
<p>मनोहरथाना ब्लॉक में 26 विद्यालय शिफ्ट किए गए हैं। इनमें से 13 विद्यालयों की आपत्तियां प्राप्त हुई हैं, जिन्हें उच्च अधिकारियों को भेज दिया गया है। निर्देश मिलते ही नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।<br /><strong>-दुलीचंद लोधा, कार्यवाहक ब्लॉक शिक्षा अधिकारी, झालावाड़ </strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>झालावाड़</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jhalawar/26-government-schools-shifted-in-manoharathana--raising-questions-about-children-s-safety-and-education/article-138861</link>
                <guid>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jhalawar/26-government-schools-shifted-in-manoharathana--raising-questions-about-children-s-safety-and-education/article-138861</guid>
                <pubDate>Thu, 08 Jan 2026 16:20:24 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://dainiknavajyoti.com/media/2026-01/1200-x-600-px%291.png"                         length="709311"                         type="image/png"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[kota]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>निगम के सामुदायिक भवनों का उपयोग हो रहा न कमाई,  सुविधाओं का अभाव </title>
                                    <description><![CDATA[भवनों का बढ़ा किराया बोर्ड बैठक में किया कम, कागजों में नहीं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/the-corporation-s-community-buildings-are-not-being-used--nor-are-they-generating-revenue--and-lacking-amenities/article-134955"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-12/1200-x-600-px-(2)5.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। शहर में नगर निगम के सामुदायिक भवन तो बने हुए हैं लेकिन विभाग की अनदेखी के चलते अधिकतर भवन दुर्दशा का शिकार हो रहे हैं। साथ ही बोर्ड बैठक में भवनों का बढ़ा किराया कम करने का निर्णय तो कर दिया लेकिन कागजों में अभी भी बढ़ा हुआ किराया ही लिया जा रहा है। जिससे न तो इन भवनों का उपयोग हो रहा है और न ही निगम को कमाई। शहर में जहां प्राइवेट सेक्टर में बड़े-बड़े मैरिज गार्डन व सामुदायिक भवन बने हुए हैं। वहीं कोटा विकास प्राधिकरण के सामुदायिक भवन भी काफी बड़े व वैवाहिक आयोजनों के हिसाब से बने हुए हैं। वहां हॉल से लेकर गार्डन तक और जन सुविधा से लेकर बिजली- पानी तक की सभी सुविधाएं हैं। सुविधाएं पर्याप्त होने से इनका किराया भी उसी हिसाब से वसूल किया जा रहा है। वहीं शहर में नगर निगम के सामुदायिक भवन तो बने हुए हैं। ये अधिकतर क्षेत्रों में है। फिर चाहे भीमगंजमंडी क्षेत्र हो या खेड़ली फाटक, नयापुरा हो या विज्ञान नगर। किशोरपुरा हो या छावनी क्षेत्र। सभी जगह पर सामुदायिक भवन हैं लेकिन उनमें से अधिकतर में सुविधाओं का अभाव है।</p>
<p><strong>बाहर से ही देखने पर पता चल रही स्थिति</strong><br />शहर में नगर निगम के सामुदायिक भवनों की हालत बाहर से ही देखने पर पला चल रही है। बाहर की तरफ ही कचरे का इतना अधिक अम्बार लगा हुआ है कि उसे देखते हुए ही आयोजन के लिए लोग इनका उपयोग करने से कतराने लगे। वहीं अंदर जाने पर न तो उनमें लाइटें हैं और न ही पानी की सुविधा। इतना ही नहीं स्नानघर से लेकर जन सुविधाएं तक की इतनी दुर्दशा कि उन्हें देखकर ही लोग आयोजन करना तो दूर वहां कुछ देर तक टिक भी नहीं पाते। यह स्थिति किसी एक भवन की नहीं अधिकतर की है।</p>
<p><strong>अधिकतर बस्तियों में भवन</strong><br />निगम के अधिकतर सामुदायिक भवन बस्तियों में बने हुए हैं। जिनका निगम के स्तर पर संचालन तो किया जा रहा है लेकिन उनका उपयोग बिना निगम की जानकारी के ही स्थानीय लोगों द्वारा किया जा रहा है। पूर्व में ऐसा ही एक मामला छावनी सामुदायिक भवन का आया था। जिस पर निगम अधिकारियों ने उस भवन को खाली करवाकर उस पर अपना ताला लगाया था। वहीं किशोरपुरा मुख्य मार्ग पर स्थित सामुदायिक भवन की स्थिति यह है कि उसके बाहर कबाड़ का ढेर लगा हुआ है। हैंडपम्प लगा है लेकिन उसमें पानी ही नहीं आता। भवन के अंदर गंदगी हो रही है। धूल मिट्टी इतनी अधिक हो रही है जिसे देखकर लगता है कि इसका काफी समय से उपयोग ही नहीं हुआ होगा। जिस तरह से इस भवन के बाहर आयुक्त की आज्ञा से चेतावनी लिखी हुई है उसे देखते हुए लगता है कि इसका उपयोग भी बिना निगम की अनुमति के ही किया जा रहा होगा। स्थानीय लोगों का कहना है कि इस सामुदायिक भवन का किराया पहले से सात गुना अधिक बढ़ा दिया है। पहले एक हजार रुपए किराया था लेकनि अब यह 7 हजार से अधिक कर दिया है। ऐसे में गरीब परिवार के लोग इनका उपयोग नहीं कर पा रहे हैं।</p>
<p><strong>बिजली का बिल चढ़ा तो कटवा दी लाइट</strong><br />सूत्रों के अनुसार पूर्व में सभी सामुदायिक भवनों में बिजली कनेक् शन चालू थे। लेकिन उनका बिजली का बिल काफी बढ़ गया था। उसे चुकाने के लिए निगम के पास बजट नहीं था। ऐसे में कोटा दक्षिण के तत्कालीन आयुक्त कीर्ति राठौड़ के समय में सभी सामुदायिक भवनों का बिजली कनेक् शन कटवा दिया था। उसके बाद से जो भी इन भवनों को किराए पर लेता है। उसे निगमर की ओर से विशेष मोहर लगाकर दी जाती है। जिसमें लिखा हुआ है कि बिजली व पानी की व्यवस्था आयोजक को स्वयं के स्तर पर ही करनी होगी।सूत्रों के अनुसार कोटा दक्षिण क्षेत्र में भीतरिया कुंड समेत कुल १२ सामुदायिक भवन हैं। उनमें से भीतरिया कुंड के अलावा विज्ञान नगर व गोविंद नगर के ही भवनों की बुकिंग होती है। वह भी बढ़ी हुई दर से ही की जा रही है।</p>
<p><strong>कोटा दक्षिण आयुक्त ने बढ़ाया था किराया</strong><br />नगर निगम कोटा उत्तर के सामुदायिक भवनों का किराया तो अभी भी पुराना ही बना हुआ है। जबकि कोटा दक्षिण निगम क्षेत्र के भवनों का किताया निगम के तत्कालीन आयुुक्त द्वारा महापौर की जानकारी के बिना ही कई गुना बढ़ा दिया था। जिसका स्थानीय लोगों व पार्षदों ने विरोध किया था। उसके बाद निगम की बोर्ड बैठक में सामुदायिक भवनों का बढ़ा किराया विड्रो करते हुए फिर से पुराना किराया ही लागू कर दिया था। लेकिन हालत यह है कि अभी भी सिर्फ भीतरिया कुंड का ही किराया कम हुआ है। जबकि अन्य सामुदायिक भवनों का किराया अभी भी बढ़ी हुई दर से ही लिया जा रहा है।</p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br />कोटा उत्तर व दक्षिण निगम एक होने के बाद सामुदायिक भवनों की सूची संधारित करवाई जा रही है। साथ ही निर्माण अनुभाग से इनकी मरम्मत व अन्य आवश्यक कार्य करवाए जाएंगे। बढ़ा हुआ किराया कम करने के संबंध में अलग से आदेश जारी किया जाएगा। शीघ्र ही किराया तो कम कर दिया जाएगा। जिससे अधिकतर लोग इनका उपयोग कर सके। हालांकि पिछले कुछ समय से सामुदायिक भवनों की बकिंग ही नहीं हुई है।<br /><strong>-धीरज कुमार सोनी, उपायुक्त राजस्व, नगर निगम कोटा</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/the-corporation-s-community-buildings-are-not-being-used--nor-are-they-generating-revenue--and-lacking-amenities/article-134955</link>
                <guid>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/the-corporation-s-community-buildings-are-not-being-used--nor-are-they-generating-revenue--and-lacking-amenities/article-134955</guid>
                <pubDate>Sat, 06 Dec 2025 15:45:15 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://dainiknavajyoti.com/media/2025-12/1200-x-600-px-%282%295.png"                         length="1912494"                         type="image/png"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[kota]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>शिक्षा मंत्री ने दिए सरकारी स्कूल भवनों के जांच के आदेश, नागर ने स्कूलों के निरीक्षण के दौरान उजागर की थी कमियां </title>
                                    <description><![CDATA[पिछले दिनों ऊर्जा राज्य मंत्री हीरालाल नागर ने बीते दिनों कोटा के सरकारी स्कूलों के निरीक्षण के दौरान काफी कमियां पाई थी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/education-minister-ordered-inspection-of-government-school-buildings-nagar-had/article-130566"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-04/madan.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। शिक्षा मंत्री मदन दिलावर ने कोटा के सरकारी स्कूलों के भवनों की जांच के आदेश दिए हैं। सूत्रों कहना है कि ऊर्जा राज्य मंत्री हीरालाल नागर ने कोटा के सरकारी स्कूलों में घटिया सामग्री से स्कूल निर्माण करने की मुख्यमंत्री से शिकायत के बाद शिक्षा मंत्री ने जांच के आदेश दिए हैं। शिक्षा मंत्री दिलावर ने इस पूरे मामले के लिए जांच कमेटी का गठन किया है। </p>
<p>पिछले दिनों ऊर्जा राज्य मंत्री हीरालाल नागर ने बीते दिनों कोटा के सरकारी स्कूलों के निरीक्षण के दौरान काफी कमियां पाई थी। जिसको लेकर उन्होंने नाराजगी जाहिर की थी। दिलावर ने स्पष्ट किया कि सभी मामलों की गहन जांच होगी और लापरवाही पाए जाने पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। शिक्षा विभाग में इंजीनियरिंग विंग नहीं होने के कारण अब पीडब्ल्यूडी विभाग से इंजीनियर डेपुटेशन पर लाए जाएंगे ताकि राजस्थान के सरकारी स्कूलों का बेहतर और गुणवत्ता युक्त निर्माण किया जा सकें।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/education-minister-ordered-inspection-of-government-school-buildings-nagar-had/article-130566</link>
                <guid>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/education-minister-ordered-inspection-of-government-school-buildings-nagar-had/article-130566</guid>
                <pubDate>Sun, 26 Oct 2025 11:59:20 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://dainiknavajyoti.com/media/2025-04/madan.png"                         length="299547"                         type="image/png"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>पुराने सरकारी भवनों के उपयोग पर मुख्य सचिव के निर्देश : नए निर्माण से पहले करें जांच, कहा- वर्तमान में उपयोग में नहीं आ रहे 10 हजार से अधिक भवन </title>
                                    <description><![CDATA[राज्य सरकार द्वारा करवाए गए सर्वे में 10 हजार से अधिक ऐसे राजकीय भवनों की पहचान की गई है, जो वर्तमान में उपयोग में नहीं आ रहे हैं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/chief-secretarys-instructions-on-the-use-of-old-government-buildings/article-130277"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-04/sudhansh-panth.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। मुख्य सचिव सुधांश पंत ने राज्य के सभी प्रशासनिक विभागों को निर्देश दिए हैं कि किसी भी नए सरकारी भवन के निर्माण से पहले यह जांच अवश्य करें कि संबंधित उपयोग के लिए पहले से कोई भवन उपलब्ध तो नहीं है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार द्वारा करवाए गए सर्वे में 10 हजार से अधिक ऐसे राजकीय भवनों की पहचान की गई है, जो वर्तमान में उपयोग में नहीं आ रहे हैं।</p>
<p>पंत ने स्पष्ट किया कि जिला कलेक्टरों के पास इन खाली भवनों की पूरी सूची उपलब्ध है और आवश्यकता पड़ने पर इन्हें अन्य विभागों को आवंटित किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि नए भवन निर्माण के प्रस्ताव भेजने से पहले जिला कलेक्टर से यह प्रमाण पत्र लिया जाएं कि संबंधित प्रयोजन हेतु कोई उपयुक्त भवन उपलब्ध नहीं है। वित्त विभाग को भी निर्देश दिए गए हैं कि नए भवनों की स्वीकृति से पूर्व यह सुनिश्चित करें कि संबंधित विभाग ने पुराने भवनों के उपयोग की संभावना की जांच कर ली है। इस कदम से सरकारी संसाधनों का बेहतर उपयोग सुनिश्चित होगा और अनावश्यक निर्माण कार्यों पर खर्च में भी कमी आएगी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/chief-secretarys-instructions-on-the-use-of-old-government-buildings/article-130277</link>
                <guid>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/chief-secretarys-instructions-on-the-use-of-old-government-buildings/article-130277</guid>
                <pubDate>Wed, 22 Oct 2025 16:59:47 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://dainiknavajyoti.com/media/2024-04/sudhansh-panth.png"                         length="285967"                         type="image/png"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>जर्जर इमारतों पर कार्रवाई : लोगों ने किया विरोध, पार्षद कार्यालय भी सीज </title>
                                    <description><![CDATA[दिलीप भंभानी ने बताया कि भवन मालिकों ने शपथ पत्र देकर 15 दिन में जर्जर हिस्से को ध्वस्त करने  और शेष भवन की मरम्मत करने का आश्वासन दिया है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/people-protested-on-the-dilapidated-buildings/article-127461"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-09/6622-copy24.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। बारिश के चलते जर्जर इमारतों के गिरने से सुभाष चौक में हुए दो बड़े हादसों के बाद नगर निगम जयपुर हेरिटेज प्रशासन 5 जर्जर इमारतों पर कार्रवाई करते हुए सीज कर दिया। इस दौरान जर्जर भवनों में रह रहे लोगों ने निगम हेरिटेज की कार्रवाई का विरोध किया, लेकिन पुलिस एवं सतर्कता शाखा की स्पष्टीकरण के बाद मामला शांत हुआ और जर्जर भवनों का खाली कराया गया। कार्रवाई के दौरान एक जर्जर पार्षद कार्यालय को भी सीज किया गया है। जोन उपायुक्त दिलीप भंभानी ने बताया कि भवन मालिकों ने शपथ पत्र देकर 15 दिन में जर्जर हिस्से को ध्वस्त करने  और शेष भवन की मरम्मत करने का आश्वासन दिया है।</p>
<p><strong>इन भवनों को किया सीज</strong><br />जोन उपायुक्त दिलीप भंभानी ने बताया कि मकान 1314, पार्षद कार्यालय के पास, अजायबघर का रास्ता किशनपोल बाजार एवं 545 जय लाल मुंशी का रास्ता चांदपोल को सीज किया गया। इसी प्रकार 551-552 जय लाल मुंशी का रास्ता चांदपोल, 626 जय लाल मुंशी का रास्ता चांदपोल एवं 749 चांदपोल बाजार में सीज किया गया। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/people-protested-on-the-dilapidated-buildings/article-127461</link>
                <guid>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/people-protested-on-the-dilapidated-buildings/article-127461</guid>
                <pubDate>Sun, 21 Sep 2025 10:14:55 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://dainiknavajyoti.com/media/2025-09/6622-copy24.jpg"                         length="338444"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>जयपुर में 178 इमारतें जर्जर, हजारों जान जोखिम में : नगर निगम नोटिस देकर कर लेता है खानापूर्ति, खतरनाक भवनों को जमींदोज करने में ढिलाई क्यों?</title>
                                    <description><![CDATA[पिंकसिटी की खूबसूरती के बीच छिपा खतरा हर पल लोगों की जान पर भारी पड़ रहा है]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/in-jaipur-178-buildings-dilapidated-thousands-of-lives-at-risk/article-126121"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-09/untitled-design-(3)2.png" alt=""></a><br /><div>जयपुर। पिंकसिटी की खूबसूरती के बीच छिपा खतरा हर पल लोगों की जान पर भारी पड़ रहा है। शहर के परकोटे में 178 इमारतें जर्जर हालत में हैं, जिनमें हजारों लोग रह रहे हैं। नगर निगम जयपुर हेरिटेज प्रशासन को इसकी पूरी जानकारी होने के बावजूद कोई ठोस कदम नहीं उठाया जा रहा है। हर साल बारिश के मौसम में नगर निगम इन इमारतों के मालिकों व रहवासियों को नोटिस जारी कर अपनी जिम्मेदारी पूरी मान लेता है, लेकिन नोटिस देने के बाद कोई निरीक्षण या वैकल्पिक व्यवस्था नहीं की जाती। अत: लोग मजबूरी में इन्हीं खतरनाक इमारतों में रहने को विवश हैं। मानसून शुरू होने से पूर्व निगम हेरिटेज प्रशासन ने जर्जर इमारतों का सर्वे कराया। भवन मालिकों को नोटिस देकर अधिकारी नींद में सो गए और लोगों की सुरक्षा के लिए आगे कोई कार्रवाई नहीं की, जिसका नतीजा दो लोगों की मौत के रुप में सामने आया है। निगम अधिकारियों की कारगुजारी देखो कि 5 सितंबर की मध्य रात्रि की घटना के बाद 4 तारीख में दूसरा नोटिस रिकार्ड में तैयार कर दिया।   </div>
<div> </div>
<div><strong>कागजी खानापूर्ति में लगे अधिकारी</strong></div>
<div>शहर में जर्जर इमारतों को लेकर निगम हेरिटेज के अधिकारी घटना के बाद कागजी खानापूर्ति में लग गए और आयुक्त ने जोन उपायुक्त ने इसकी तथ्यात्मक रिपोर्ट मांगी। इसमें जोन उपायुक्त दिलीप भंभानी ने बताया कि जर्जर इमारत को चिह्नित कर इसकी मरम्मत के लिए भवन स्वामी को 13 अगस्त को नोटिस जारी कर दिया था। अब घटना के बाद कुछ घंटे पूर्व कागजी खानापूर्ति के नाम पर 4 सितंबर को एक और नोटिस बना दिया। जोन उपायुक्त ने अपनी रिपोर्ट में बताया कि शुक्रवार एवं शनिवार की मध्य रात्रि करीब एक बजे यह बिल्डिंग गिर गई। इसके बाद एसडीआरएफ, पुलिस, निगम प्रशासन एवं जिला प्रशासन ने मौके पर जाकर राहत कार्य किए। </div>
<div> </div>
<div><strong>हादसे के बाद निगम ग्रेटर भी जागा</strong></div>
<div>शहर के चारदीवारी क्षेत्र बारिश के चलते जर्जर भवन के गिरने से हताहत हुए लोगों के बाद नगर निगम जयपुर ग्रेटर के अधिकारी भी जागे हैं और निगम ग्रेटर क्षेत्र की जर्जर इमारतों को दुबारा सर्वे कराएगा। निगम ग्रेटर आयुक्त डॉ. गौरव सैनी के निर्देश के बाद जोन की टीम ने शनिवार को फील्ड में रहकर जोनवार जर्जर भवनों का पुन: सर्वे किया तथा चेतावनी बोर्ड, बैनर लगाए और जर्जर भवनों में रह रहे रहवासियों को नोटिस भी दिए गए। इसके साथ ही उन्हें किसी भी प्रकार की अनहोनी या दुर्घटना होने की चेतावनी भी दी गई।</div>
<div> </div>
<div><strong>जर्जर इमारतों को नोटिस देकर इतिश्री </strong></div>
<div>निगम हेरिटेज आयुक्त डॉ. निधि पटेल ने बताया कि हवामहल आमेर जोन में 40 भवनों को जर्जर होने पर चिह्नित किया गया है और सभी को एक बार नोटिस देने के बाद दुबारा नोटिस देने की कार्रवाई की जा रही है। इसके साथ ही जोन में 6 सामुदायिक केन्द्रों को भी जर्जर हालात में चिह्नित किया गया है। इनमें 17 कमरे है। इसी प्रकार किशनपोल जोन में 79 जर्जर इमारतों को चिह्नित किया गया है। इसमें से तीन जर्जर भवनों को ध्वस्त किया गया और शेष 76 में से 32 भवन मालिकों ने निगम हेरिटेज के नोटिस के बाद स्वयं के स्तर पर मरम्मत करवा ली और शेष 44 भवन मालिकों को फिर से नोटिस देने की कार्रवाई की जा रही है। किशनपोन जोन में तीन सामुदायिक केन्द्रों के 12 कमरों को भी जर्जर हालात में माना है। सिविल लाइन जोन में 24 भवनों का जर्जर हालात में चिह्नित कर 10 को नोटिस जारी किए है। जोन में 5 सामुदायिक भवनों के 17 कमरों को निगम ने जर्जर माना है। इसी प्रकार आदर्श नगर जोन में किए गए सर्वे में 35 भवनों का जर्जर भवन के रूप में चिह्नित किया है। 10 भवन मालिकों ने नोटिस के बाद स्वयं के स्तर पर मरम्मत करने की निगम को सहमति दी थी लेकिन मरम्मत नहीं कराने पर फिर से नोटिस जारी करने की कार्रवाई की जा रही है। आदर्श नगर जोन में 13 सामुदायिक केन्द्रों के 37 कमरों को भी जोन स्तर पर जर्जर हालात में मानकार रिपोर्ट मुख्यालय को भिजवाई है। </div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/in-jaipur-178-buildings-dilapidated-thousands-of-lives-at-risk/article-126121</link>
                <guid>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/in-jaipur-178-buildings-dilapidated-thousands-of-lives-at-risk/article-126121</guid>
                <pubDate>Sun, 07 Sep 2025 13:02:11 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://dainiknavajyoti.com/media/2025-09/untitled-design-%283%292.png"                         length="617890"                         type="image/png"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>सामुदायिक भवनों पर एक शहर में दो नियम, निगम को हो रहा राजस्व का नुकसान </title>
                                    <description><![CDATA[ एक ही शहर में दो नगर निगम होने से दोनों निगम अपने-अपने हिसाब से काम कर रहे है]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/two-rules-in-one-city-on-community-buildings/article-121692"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-07/news69.png" alt=""></a><br /><p>कोटा।  एक ही शहर में दो नगर निगम होने से दोनों निगम अपने-अपने हिसाब से काम कर रहे है। एक ही तरह के सामुदायिक भवनों के मामले में दोनों निगमों के नियम भी अलग-अलग हैं। कोटा दक्षिण निगम जहां बढ़ा हुआ किराया  वसूल रहा है वहं उत्तर निगम पुरानी दर से ही किराया वसूल रहा है।  नगर निगम कोटा दक्षिण के वार्ड 44 में एक दिन पहले नगर निगम अधिकारियों की जानकारी में आया कि उनके सामुदायिक भवन की निगम में बिना बुकिंग करवाए ही उपयोग किया जा रहा है। निगम की आड़ में सामुदायिक भवन की अवैध वसूल की जा रही है। जिससे निगम को तो राजस्व का नुकसान हो रहा है और कुछ लोग चांदी कूट रहे हैं।  इसकी जानकारी मिलने पर निगम ने उस सामुदायिक भवन पर अपना ताला लगाया और बिना निगम की अनुमति के वहां कार्यक्रम नहीं करने की चेतावनी भी चस्पा की। इस तरह के कोटा दक्षिण निगम में कई अन्य सामुदायिक भवनों की भी अवैध वसूली की जा रही है। जिसकी जानकारी निगम अधिकारियों तक होने के बाद भी उस पर कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है। </p>
<p><strong>किराया अधिक होने से बुकिंग प्रभावित</strong><br />नगर निगम कोटा दक्षिण की ओर से कुछ समय पहले उनके क्षेत्र में आने वाले सभी सामुदायिक भवनों का किराया कई गुना बढ़ा दिया था।  बिना सामुदायिक भवनों की मरम्मत व सुविधा के  किराया बढ़ाने के कारण इनकी बुकिंग भी प्रभावित हुई है। सूत्रों के अनुसार जो सामुदायिक भवन पहले शादी समारोह या अन्य आयोजनों के लिए बुक हो रहे थे वह या तो किराया बढ़ने के बाद से बुक ही नहीं हुए हैं या एक दो ही बुक हुए हैं।  जिससे निगम को मिलने वाले राजस्व का भी नुकसान हो रहा है।</p>
<p><strong>भीतरिया कुंड तिबारी का कम किया किराया</strong><br />नगर निगम कोटा दक्षिण क्षेत्र में आने वाले भीतरिया कुंड बारहद्वारी व तिबारी का कि राया फिर से कम किया गया है। सूत्रों के अनुसार पहले जहां इसका किराया बढ़ाकर 17 हजार से अधिक कर दिया था। वहीं विरोध के बाद इसे फिर से घटाकर 27 सौ के करीब कर दिया है। सूत्रों के अनुसार भीतरिया कुंड तिबारी की सबसे अधिक बुकिंग होती है। सावन में यहां धार्मिक आयोजन के साथ ही  पार्टियां भी होती है। यहां का किराया कम होने से इसकी ही बुकिंग अधिक हो रही है।</p>
<p><strong>कोटा उत्तर ने नहीं बढ़ाया किराया</strong><br />एक ओर जहां कोटा दक्षिण निगम ने सामुदायिक भवनों का किराया कई गुना बढ़ा दिया है। वहीं कोटा उत्तर निगम पुरानी दर से ही किराया वसूल कर रहा है। हालांकि कोटा उत्तर निगम क्षेत्र में सामुदायिक भवन छोटे से उनकी बुकिंग कम होती है। नगर निगम कोटा दक्षिण के राजस्व अनुभाग अधिकारियों का कहना है कि किराया बढ़ने के बाद से नई दर से ही सामुदायिक भवनों की बुकिंग की जा रही है। हालांकि अभी शादी समारोह बंद होने से बुकिंग नहीं हो रही है। भीतरिया कुंड में गोठ व आयोजन अधिक होने से इसका किराया वापस कम कर दिया गया है। यहां बुकिंग हो रही है।  उन्होंने बताया कि छावनी में जिस सामुदायिक भवन पर बिना निगम की जानकारी के आयोजन हो रहे थे उसकी शिकायत मिलते ही कार्रवाई  की गई है।  इधर नगर निगम कोटा उत्तर के राजस्व अनुभाग अधिकारियों का कहना है कि कोटा उत्तर निगम ने सामुदायिक भवनों का किराया नहीं बढ़ाया है। यहां पुरानी दर से ही किराया लिया जा रहा है। हालांकि अभी बुकिंग कम हो रही है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/two-rules-in-one-city-on-community-buildings/article-121692</link>
                <guid>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/two-rules-in-one-city-on-community-buildings/article-121692</guid>
                <pubDate>Sat, 26 Jul 2025 15:42:03 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://dainiknavajyoti.com/media/2025-07/news69.png"                         length="466218"                         type="image/png"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[kota]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>हेरिटेज स्वरूप से छेड़छाड़, नगर निगम ने 6 बिल्डिंगों को किया सीज</title>
                                    <description><![CDATA[निर्माणकर्ताओं को अवैध निर्माण हटाने के लिए नियमित रूप से समय-समय पर नोटिस भी जारी किए गए थे लेकिन नोटिसों के कोई जबाव प्रस्तुत नहीं किया गया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/tampering-with-heritage-structure--municipal-corporation-seijes-of-the-6-buildings/article-94502"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-11/630400-sizee3.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। शहर में हेरिटेज के मूल स्वरूप से छेड़छाड़ कर किए जा रहे अवैध निर्माणों के खिलाफ नगर निगम जयपुर हेरिटेज के हवामहल-आमेर जोन में आधा दर्जन बिल्डिंगों को सीज किया गया। हवामहल आमेर जोन उपायुक्त सीमा चौधरी ने बताया कि निर्माणकर्ताओं ने निगम हेरिटेज से अनुमति लिए बिना हेरिटेज स्वरूप से छेड़छाड़ करते हुए नए निर्माण कर लिए थे।</p>
<p>इस संबंध में निर्माणकर्ताओं को अवैध निर्माण हटाने के लिए नियमित रूप से समय-समय पर नोटिस भी जारी किए गए थे लेकिन नोटिसों के कोई जबाव प्रस्तुत नहीं किया गया।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/tampering-with-heritage-structure--municipal-corporation-seijes-of-the-6-buildings/article-94502</link>
                <guid>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/tampering-with-heritage-structure--municipal-corporation-seijes-of-the-6-buildings/article-94502</guid>
                <pubDate>Wed, 06 Nov 2024 12:39:40 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://dainiknavajyoti.com/media/2024-11/630400-sizee3.png"                         length="565609"                         type="image/png"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>ब्लॉक में 78 स्कूल भवन जर्जर, कई में शिक्षकों का अभाव</title>
                                    <description><![CDATA[इसके बाद से ही बच्चों को गांव के ही एक मंदिर में अध्ययन करवाया जा रहा है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/78-school-buildings-in-the-block-are-dilapidated--many-lack-teachers/article-89188"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-08/1rtrer9.png" alt=""></a><br /><p> दीगोद। कस्बे में सरकारी स्कूलों में शिक्षकों का अभाव है तो दूसरी ओर भवन जर्जर हो रहे हैं। ब्लॉक के करीब 78 स्कूलों को भवनों की मरम्मत का इंतजार है। वहीं क्षेत्र में कई स्कूल ऐसे हैं, जो एक अध्यापक के भरोसे चल रहे हैं। वहीं किसी स्कूल में तो अध्यापक ही नहीं हैं। ऐसे में अन्य जगह से व्यवस्था कर बच्चों को अध्ययन करवाया जा रहा है। सूत्रों की मानें तो ब्लॉक क्षेत्र में करीब 181 स्कूल हैं, जिनमें कुछ न कुछ सुविधाओं का अभाव है। ब्लॉक क्षेत्र के स्कूलों में बिल्डिंग जर्जर है तो शिक्षकों की कमी होने से अब अभिभावकों का रुझान भी निजी स्कूलों की ओर होने लगा है। मेहंदी गांव के सरकारी स्कूल में स्टाफ की कमी और कमरे की जरूरत है तो जाखडोंद के सरकारी स्कूल में अंग्रेजी और गणित के शिक्षक नहीं हैं और पूरे कमरों की छतें टपकती हैं। इसके कारण अब नामांकन भी घटने लगा है। इधर, वार्ड पंच जगदीश मेघवाल ने बताया कि उकल्दा प्राइमरी स्कूल में 40 से 45 बच्चों का नामांकन है। यहां दो कमरे और एक रसोई बनी हुई है, जिसमें से 21 अगस्त को अचानक एक कमरे की दीवार का कुछ हिस्सा गिर गया।</p>
<p><strong>डूंगरज्या स्कूल में शिक्षकों का अभाव, भवन भी जर्जर</strong><br />राजकीय वरिष्ठ उपाध्याय संस्कृत विद्यालय डूंगरज्या में 85 का नामांकन वर्तमान में है। जिनमें से 90 फीसदी मजदूर, किसान वर्ग के बच्चे अध्ययनरत हैं। विद्यालय में 17 स्वीकृत पदों में से मात्र 4 शिक्षक एवं 1 चतुर्थ श्रेणी कार्मिक कार्यरत है। इनमें से भी 1 व्याख्याता के पास प्रधानाचार्य, संकुलाध्यक्ष (संकुलाधीन 5 विद्यालय) का दायित्व है। ऐसे में अंग्रेजी-गणित विषय के लिए तो एक निजी शिक्षक द्वारा शिक्षण कार्य करवाया जा रहा है। यहां के स्कूल में 16 कमरे हैं, लेकिन 11 कमरे पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो चुके हैं। केवल 5 कमरे ही ठीक अवस्था में हैं, जिनमें से 2 कमरे कार्यालय एवं पोषाहार इत्यादि में काम आ रहे हैं।</p>
<p><strong>भवन तैयार नहीं, छात्रावास में 20 छात्राओं का दाखिला</strong><br />ब्लॉक क्षेत्र के 78 स्कूल जर्जर हैं। हालांकि रिकॉर्ड के अनुसार तीन दर्जन स्कूलों की हालत ही जर्जर बताई जा रही है। जिनमें से कुछ समय पहले 20 स्कूलों की मरम्मत के लिए प्लान भेजा था, जिसमें से खैरूला और मूंडला स्कूल का ही मरम्मत के लिए चयन हुआ है। इधर सुल्तानपुर की सरस्वती कॉलोनी में बन रहे बालिका आवासीय छात्रावास भवन के काम की मॉनिटरिंग नहीं होने से काम धीमी गति से चल रहा है। पिछले साल यहां 22 छात्राओं का एडमिशन तो कर दिया था, लेकिन वर्तमान में वे अपने गांव से ही आवाजाही कर रही हैं। ब्लॉक क्षेत्र के 8 स्कूलों में 15 कमरे बनाए जाने की स्वीकृति सरकार ने दे दी है, लेकिन बजट नहीं मिलने से काम शुरू नहीं हो पा रहा है। गनीमत ये रही कि भारत बंद होने के कारण कलक्टर ने अवकाश की घोषणा कर दी थी। जिससे बड़ा हादसा टल गया। इसके बाद से ही बच्चों को गांव के ही एक मंदिर में अध्ययन करवाया जा रहा है।</p>
<p><strong>इनका कहना है </strong><br />प्रस्ताव भेज दिए गए हैं। जल्द कमरों काम शुरू किया जाएगा। विद्यालय स्टॉफ को निर्देश दिए गए हैं कि बच्चों को दूसरे कमरों पढ़ाया जाए। <br /><strong>-अंजू जागीरवाल, मुख्य ब्लॉक शिक्षा अधिकारी</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/78-school-buildings-in-the-block-are-dilapidated--many-lack-teachers/article-89188</link>
                <guid>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/78-school-buildings-in-the-block-are-dilapidated--many-lack-teachers/article-89188</guid>
                <pubDate>Sat, 31 Aug 2024 16:23:22 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://dainiknavajyoti.com/media/2024-08/1rtrer9.png"                         length="385433"                         type="image/png"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[kota]]></dc:creator>
                            </item>

            </channel>
        </rss>
        