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                <title>caste - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <title>जाति के नाम पर अपराध को नहीं छुपाया जा सकता, शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा- कथा कहने का हक सिर्फ ब्राह्मण को है</title>
                                    <description><![CDATA[ज्योतिषपीठ के शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने इटावा में गैर-ब्राह्मण कथावाचकों के साथ हुए दुर्व्यवहार पर बड़ा बयान दिया है]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/crime-cannot-be-hidden-in-the-name-of-caste-shankaracharya/article-118462"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-06/news58.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। ज्योतिषपीठ के शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने इटावा में गैर-ब्राह्मण कथावाचकों के साथ हुए दुर्व्यवहार पर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि सार्वजनिक रूप से कथा कहने का अधिकार सिर्फ ब्राह्मण को है। उनके अनुसार शास्त्रों के अनुसार सभी जातियों को कथा सुनाने के लिए ब्राह्मण ही उपयुक्त हैं। इटावा में कथावाचक मुकुटमणि और संत कुमार यादव को कथित रूप से ब्राह्मण बनकर कथा कहने के कारण गांव वालों ने अपमानित किया। इस पर शंकराचार्य ने कहा कि अपनी जाति छिपाकर कथा कहना गलत है। अगर कोई ब्राह्मणों के बीच जाकर ब्राह्मण बनकर कथा कहेगा, तो यह धोखा है। साथ ही उन्होंने कहा कि यदि मामला धोखाधड़ी का है, तो पुलिस में 419-420 के तहत मामला दर्ज कराया जाना चाहिए था।</p>
<p><strong>जाति के नाम पर अपराध को नहीं छुपाया जा सकता</strong><br />अखिलेश यादव द्वारा पीड़ित कथावाचकों को सम्मानित किए जाने पर शंकराचार्य ने कहा कि जाति के नाम पर अपराध को नहीं छुपाया जा सकता। कावड़ यात्रा मार्ग पर पकाया भोजन न खाने की सलाह देते हुए उन्होंने कहा कि कच्ची चीजें किसी भी जाति से खरीदी जा सकती हैं, पर पकाया हुआ खाना शुद्धता के दृष्टिकोण से ठीक नहीं है।</p>
<p><strong>सभी जातियों को कथा सुनाने के लिए ब्राह्मण ही उपयुक्त</strong><br />बिहार चुनाव को लेकर शंकराचार्य ने कहा कि हर विधानसभा से एक निर्दलीय उम्मीदवार गऊ के मुद्दे पर उतरेगा। इन उम्मीदवारों को गऊ मतदाता वोट करेंगे ताकि यह साफ हो सके कि गाय भी एक राजनीतिक मुद्दा है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 25 Jun 2025 11:46:46 +0530</pubDate>
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                <title>भाजपा में जातीय और क्षेत्रीय गणित के आधार पर की जिला प्रभारी मंत्रियों की नियुक्ति</title>
                                    <description><![CDATA[ आगामी दिनों में पांच विधानसभा उपचुनाव,पंचायती राज और निकाय के चुनाव होने है, लोकसभा चुनाव परिणामों के बाद जिलों में मंत्रियों की तैनाती मुख्य है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<br /><p>जयपुर। लोकसभा चुनावों में 11 सीटों पर हार के बाद सत्ता और संगठन अब मिलकर आगामी पंचायतीराज और निकाय चुनावों की रणनीति बनाने में जुटे है। साथ ही पांच विधानसभा सीटों पर होने आने उपचुनाव के मद्देनजर जिला प्रभारी मंत्रियों की नियुक्ति जातीय क्षेत्रीय गणित को ध्यान में रखते हुए की गई है।</p>
<p>राजस्थान में बजट सत्र से पहले सीएम भजनलाल शर्मा ने अपनी टीम के मंत्रियों को अलग-अलग जिलों का प्रभारी बनाया है। मंत्रियों को जिला प्रभारी बनाने के पीछे जातीय और क्षेत्रीय गणित को साधा गया है। इससे साफ है कि आगामी दिनों में पांच विधानसभा उपचुनाव, पंचायती राज और निकाय के चुनाव होने है, लोकसभा चुनाव परिणामों के बाद जिलों में मंत्रियों की तैनाती मुख्य है।</p>
<p>मंत्री सत्ता और संगठन को जमीनी सियासी फीडबैक देने का काम करेंगे। लोकसभा चुनाव परिणाम बीजेपी के लिए राजस्थान में ठीक नहीं रहे लोकसभा चुनाव की रणनीति के मद्देनजर जमीनी फीडबैक पूरी तरह नेतृत्व तक नहीं पहुंच पाया था। हालांकि संगठन के स्तर पर हार के कारणों की रिपोर्ट भी आलाकमान को भेजी गई है। ऐसे में अब जल्द ही संगठन में बड़े स्तर पर बदलाव नजर आएगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 22 Jun 2024 18:14:02 +0530</pubDate>
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur]]></dc:creator>
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                <title>Loksabha Election के बाद जातिगत समीकरण साधने में जुटेगी कांग्रेस</title>
                                    <description><![CDATA[ राजस्थान में होने वाले बदलाव में पहले विधानसभा और लोकसभा चुनाव के जिलेवार आंकड़ों का विश्लेषण किया जाएगा। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/congress-will-start-solving-caste-equation-after-loksabha-elections/article-79052"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-04/congress-logo-(3)4.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। लोकसभा चुनाव में आए परिणामों के विश्लेषण के बाद राजस्थान कांग्रेस में जातिगत समीकरण के आधार पर बदलाव किए जाएंगे। विधानसभा और लोकसभा चुनाव में कांग्रेस के पक्ष में रहने वाली जातियों को संगठन में महत्व दिया जाएगा।</p>
<p>कांग्रेस आलाकमान ने राजस्थान सहित कई राज्यों में संगठन बदलाव की मानस बना लिया है। राजस्थान में होने वाले बदलाव में पहले विधानसभा और लोकसभा चुनाव के जिलेवार आंकड़ों का विश्लेषण किया जाएगा। जिलों में उन जातियों का आंकड़ा तैयार किया जाएगा, जिन्होंने कांग्रेस के पक्ष में वोट किया। उस क्षेत्र के उन जातियों के नेताओं को प्रदेश और जिला संगठन में तवज्जो मिलेगी। उन क्षेत्रों में वर्तमान के निष्क्रिय रहे पदाधिकारियों को कार्यमुक्त किया जाएगा।</p>
<p>कांग्रेस को अब तक मिले फीडबैक में शेखावाटी में ओबीसी, एससी एसटी वर्ग की जातियों ने कांग्रेस के पक्ष में मतदान किया। मेवाड़, मारवाड़, हाड़ौती, ढूंढाड़ और पूर्वी राजस्थान में भी सामान्य, ओबीसी, एमबीसी,एससी एसटी जाति वर्ग के लोगों का आंकड़ा देखा जाएगा। संगठन में बदलाव में इस बार बड़े नेताओं की सिफारिश और पैराशूट लीडर्स के पर कतरे जाएंगे, ताकि संगठन को अधिक मजबूत किया जा सके। अगले महीने के दूसरे सप्ताह में इसके लिए बड़े नेताओं की जयपुर और दिल्ली में बैठकें भी होंगी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
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                <pubDate>Thu, 23 May 2024 15:09:53 +0530</pubDate>
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                <title>देश में जात-मजहब और भाषा के नाम पर नफ़रत का माहौल तैयार किया जा रहा : राहुल गांधी</title>
                                    <description><![CDATA[राहुल गांधी ने कहा कि केंद्र सरकार से लोगों को जवाब मांगना चाहिए। उन्होंने आगे कहा कि आप अपने अनुभवों के आधार पर बताइए कि पिछले दस साल में मौजूदा सरकार से उन्हें क्या मिला और क्या चला गया। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/rahul-will-change-the-atmosphere-of-hatred-in-the-country/article-71058"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-02/transfer-(5)12.jpg" alt=""></a><br /><p>मुरादाबाद। कांग्रेस की भारत जोड़ो न्याय यात्रा में पार्टी सांसद राहुल गांधी ने मुरादाबाद में कहा कि देश में जात-मजहब, भाषा के नाम पर नफऱत का माहौल तैयार किया जा रहा है। हम देश का आपसी सौहार्द खत्म नहीं होने देंगे और नफ़रत के माहौल को मोहब्बत से बदल देंगे।</p>
<p>न्याय यात्रा में शामिल कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी ने उत्तर प्रदेश सरकार के मुखिया योगी आदित्यनाथ पर हमला बोलते हुए कहा कि आखिर पुलिस भर्ती या अन्य परीक्षाओं में गड़बड़ी करने वालों पर बुलडोजर कब चलेगा?</p>
<p>राहुुल गांधी ने मुरादाबाद उपस्थित लोगों से सीधे संवाद करते हुए कहा कि पिछड़ों और दलितों को इस सरकार में न्याय नहीं मिला। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, उद्योगपति अडानी, गृहमंत्री अमित शाह का नाम लिए बगैर हमला बोलते हुए कहा कि इनमें से एक ध्यान भटकाता है, दूसरा जेब काटता है और तीसरा डंडा दिखाता है। अग्निवीर योजना के पीछे भी उद्योगपति को फायदा पहुंचाने का मकसद छिपा है। देश के 90 फीसदी आबादी का राजनीतिक हिस्सेदारी के लिए जाति जनगणना होना जरूरी है।</p>
<p>कांग्रेस नेता ने ऐसे समय लोगों से जागरूक रहने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि आपको कहा जाता है कि भाइयों और बहनों एक दूसरे से नफरत करो, एक धर्म को दूसरे धर्म से लड़ाया जाता है, एक जात को दूसरी जात से लड़ाया जाता है, एक भाषा को दूसरी भाषा से लड़ाया जाता है, फिर आपका धन विभिन्न तरीकों से 24 घंटे में लूटा जाता है। उन्होंने कहा कि अग्निवीर योजना, इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट, बड़े बड़े पोर्ट, एयरपोर्ट, हिमाचल के सेब, हथियार निर्माण किसको दे दिए गए है? 90 फीसदी आबादी के नौजवानों का रास्ता बंद करना के लिए अग्निवीर योजना लाई गई है। हर बड़ी कंपनी में अन्य पिछड़े वर्ग(ओबीसी) की तादाद कम है, ये भेद-भाव क्यों?</p>
<p>राहुल गांधी ने कहा कि केंद्र सरकार से लोगों को जवाब मांगना चाहिए। उन्होंने आगे कहा कि आप अपने अनुभवों के आधार पर बताइए कि पिछले दस साल में मौजूदा सरकार से उन्हें क्या मिला और क्या चला गया। अपनी परिस्थितियों पर गंभीरता से गौर करें और गहनता से सोचें कि आपने अब तक कितना खो दिया है। उन्होंने आह्वान किया कि मौजूदा स्थिति में बदलाव लाने के लिए भारत जोड़ो न्याय यात्रा में उमड़ा न्याय योद्धाओं का सैलाब इस बात का गवाह है कि कांग्रेस पार्टी द्वारा अन्याय के विरुद्ध न्याय का युद्ध वक्त की सबसे बड़ी जरूरत है।</p>
<p>भारत जोड़ो न्याय यात्रा में शामिल मुरादाबाद से समाजवादी पार्टी के सांसद डॉ एसटी हसन ने कहा, ''इस वक्त देश बदतरीन हालात से गु•ार रहा है। आज तक सांप्रदायिक सौहाद्र्र पर इतना खतरा कभी नहीं हुआ। आज तमाम हिंदुस्तानी चाहते हैं कि हमारा प्यार, मोहब्बत और गंगा-जमुनी तहजीब बरकरार रहे। जिसके अलमदार हमारे अखिलेश यादव और राहुल गांधी हैं। हमारे नेता (अखिलेश यादव) कल या परसों इस यात्रा में शामिल होंगे।"</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 24 Feb 2024 18:46:13 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>विकास की जगर-मगर के बीच जाति और जेंडर का जुगराफिया</title>
                                    <description><![CDATA[ अंबेडकर से एक सदी पहले मार्क्स ने कहा था,वंचित वर्ग के उद्धार की पहली शर्त यह है कि कम से कम प्रमुख सभ्य देश मिलकर एक साथ कदम उठाएं। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/opinion/the-geography-of-caste-and-gender-in-the-midst-of-development/article-52258"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-07/630-400-size-की-कॉपी-(1)6.png" alt=""></a><br /><p>कबीर का एक मार्मिक पद है: ‘सरवर तटि हंसणी तिसाई जुगति बिनां हरि जल पिया न जाई। पीया चाहे तौ लै खग सारी, उड़ि न सकै दोऊ पर भारी। कुंभ लीयै ठाढ़ी पनिहारी, गुण बिन नींर भरै कैसे नारीं। कहै कबीर गुर एक बुधि बताई सहज सुभाइ मिलै राम राई।’ कास्ट, जेंडर और विकास के मामले में उलझे समाजों के सामने सब तरह के हल हैं, लेकिन वे उलझनें लगातार बढ़ती ही जाती हैं। मसले और जटिल होते जाते हैं। अंबेडकर से एक सदी पहले मार्क्स ने कहा था,वंचित वर्ग के उद्धार की पहली शर्त यह है कि कम से कम प्रमुख सभ्य देश मिलकर एक साथ कदम उठाएं। जिस अनुपात में एक व्यक्ति द्वारा दूसरे व्यक्ति का शोषण खत्म होगा, उसी अनुपात में एक राष्ट्र द्वारा दूसरे राष्ट्र का शोषण भी खत्म होगा। जिस अनुपात में एक राष्ट्र के अंदर वर्गों का विरोध खत्म होगा, उसी अनुपात में राष्ट्रों का आपसी बैरभाव भी दूर होगा। (‘कम्युनिस्ट पार्टी का घोषणा पत्र’: पेज 60, फरवरी 21, 1848)<br /><br />लेकिन भारतीय उपमहाद्वीप में जातियों के शोषण की यह कहानी इतनी जटिल है कि कहां तो उन्नीसवीं सदी के अर्धांश पर एक मनुष्य के द्वारा दूसरे मनुष्य के शोषण को सदा के लिए समाप्त करने का संकल्प दिख रहा था और कहां इक्कीसवीं सदी का एक चौथाई हिस्सा बीत जाने पर भी पहिया उलटा घूम गया है। कभी श्रीकांत वर्मा ने चेताया था, लिच्छवी चले गए लिच्छवी फिर आएंगे! लेकिन उम्मीद भी जताई थी कि सच तो यह है, लिच्छवी कभी नहीं आएंगे। आए भी तो दोहराएंगे-हम लिच्छवी थे, हम लिच्छवी हैं, कहते हुए गुजर जाएंगे! लेकिन जाति और जेंडर की जकड़न ऐसी है कि दवाएं दर्द होती जाती हैं। अब तक कही गई तात्त्विक बात को अगर विस्तार दें तो देवस्वरूप की रिसर्च पुस्तक कास्ट जेंडर एंड डवलप्मेंट को अच्छे से खंगाला जा सकता है। अभी कुछ ही समय पूर्व आई यह पुस्तक इसलिए पठनीय है, क्योंकि इसके दस अध्यायों में जेंडर, अनुसूचित जातियों, राज्य के सोशियो-इकॉनोमिक हालात, विकास के मामले में जेंडर इक्वैलिटी के कारण, चुनौतियां और समाधानों को रेखांकित किया गया है।<br /><br />जाति के फेमिनिज्म की बात के साथ पूरे विमर्श को समेटते हुए रेखांकित किया गया है कि कास्ट और जेंडर की पीड़ाओं को समझने के लिए सत्ता के बल के डाइनैमिक्स को समझना सबसे जरूरी है। और इससे जुड़ा हुआ मसला है हिंसा का। और अगर इसकी और तह में जाएं तो इसमें एक और तत्व जुड़ जाता है और वह है क्लास। इसकी तहों को एक-एक कर उतारेंगे तो वहां भेदभाव मिलेगा और जो भेदभाव से पीड़ित हैं, वहां भी जेंडर डिस्क्रिमिनेशन पूरी तरह मौजूद है। अब अगर इस भेद को देखना, परखना और समझना चाहें तो इसके भेद भी मौजूद हैं। यह सात स्तरों पर है और इतना भयावह है कि मनुष्य इसे समझ ले तो विचलित हो जाए। इसमें पहली गैर बराबरी जीवन जीने के स्तर पर है। मृत्यु दर सिर्फ एक शब्द नहीं है। यह स्त्री के जीवन पर मंडराता वह संकट है, जो उसके पांवों पर खड़े होकर चलने से पहले तक जन्म के साथ पैदा होता है और जब वह किसी दूसरे नागरिक को इस धरती पर जन्म दे रही होती है तो भी उसका जीवन संकट में होता है। इस गैर बराबरी या भेदभाव का फैलाव देश ही नहीं, दुनिया भर तक है। इस मामले में भारत के साथ उत्तरदायियों की पंक्ति में चीन से अफ्रीका तक जाने कितने ही देश कतारबद्ध खड़े हैं। बेटी पर बेटे को वरीयता एक अलग तरह का भेद है, जो रोजमर्रा की जरूरी सुविधाओं से लेकर सम्पत्ति और जीवन जीने के अधिकारों तक अपना आयाम तय करता है। राष्ट्रीयता, मूलभूत सुविधाएं, समान अवसर, व्यावसायिक अवसर, मालिकाना अधिकार, पारिवारिक नेतृत्व जैसे कितने ही बिंदु हैं, जहां भेदभाव साफ देखा जा सकता है। जेंडर और कास्ट से उपजे भेदभावों के मुंह बोलते तथ्य ऐसे हैं, जैसे कोसल में उतना ही दुरूख है, जितना श्रावस्ती में है। इस लिहाज से देवस्वरूप ने संवैधानिक सेफ गार्डों का जिक्र करते हुए उत्तरप्रदेश को आधार बनाकर एक अध्ययन भी प्रस्तुत किया है। तकनीकी शिक्षा का एक उदाहरण देते हुए बताया गया है कि किस तरह उत्तर प्रदेश के आईटीआई संस्थानों में 70 प्रतिशत स्थान अनुसूचित जातियों के लिए आरक्षित किए गए और 15-15 प्रतिशत स्थान ओबीसी और सबके लिए खुले रखे गए। सामाजिक और आर्थिक स्तरों पर विभिन्न प्रकार के अध्ययनों को अच्छी तरह प्रस्तुत किया गया है। रावत प्रकाशत से आई कास्ट, जेंडर और डवलप्मेंट में तथ्यों, आंकड़ों और डेमोग्रैफिक आधार पर विभिन्न अध्ययनों को खंगाला गया है और उस पर नए विमर्श को जन्म देने वाले बिंदु रखे गए हैं। समाज विज्ञान में डिलिट् तीन विश्वविद्यालयों के कुलपति रहे हैं और अब चौथे विश्वविद्यालय के बनाए गए हैं। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग में लंबे समय तक अतिरिक्त सचिव रहे देवस्वरूप ने जाति, जेंडर और विकास के चुनौतीपूर्ण विषय को तथ्यपरकता के साथ प्रस्तुत किया है।<br /><br />अलबत्ता, अनुसूचित जाति के नागरिक, अनुसूचित जाति की स्त्री नागरिक और सभी वर्गों में स्त्री नागरिक के लिहाज से आज विकास की जगर-मगर के बीच जाति और जेंडर के जुगराफिये के जो हालात हैं, वे जीवनानंद दास की भाषा में ही समझे जा सकते हैं: ढेरों हेमंत हमारी गोल पृथ्वी पर बीत चुके और बीतते ही रहते हैं। ...हमारी सत्ता, पार्टी पॉलिटिक्स बस ज्ञान-विज्ञान का एक और पैंतरा भर। कमिटी मीटिंग विसर्जित होने के बाद आकाश की ओर ताकने पर आती है याद- वह सप्तमी और शीर्ष पर बैठा चांद।   <br /><br />-त्रिभुवन<br />(ये लेखक के अपने विचार हैं)</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>ओपिनियन</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 20 Jul 2023 11:40:27 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>पुजारी ने सांसी समाज के महिला पुरुषों को मंदिर में प्रवेश करने से रोका</title>
                                    <description><![CDATA[ चेनाराम ने बताया कि इस संबंध में कोतवाली पुलिस को सूचना दी गई। पुलिस के पहुंचने के बावजूद भी एकबारगी पुजारी ने सांसी समाज के लोगों के मंदिर में प्रवेश पर एतराज किया। इसके बाद में पुलिसकर्मियों के समझाइश के बाद समाज के लोगों को पूजा अर्चना के लिए प्रवेश दिया गया। इस दौरान पुलिस का जाब्ता भी मौके पर तैनात रहा। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/churu/the-priest-prevented-men-and-women-of-sansi-community-from/article-37661"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-02/18churu5.jpg" alt=""></a><br /><p>चूरू। एक तरफ  जहां इंसान मंगल ग्रह पर पहुंचने के लिए प्रयासरत है तो दूसरी तरफ  इस सदी में भी जातियों को लेकर भेदभाव के मामले भी सामने आ रहे हैं।  शहर के वार्ड 59 में महाशिवरात्रि पर एक ऐसा ही मामला सामने आया। जहां सांसी समाज के लोगों को पूजा अर्चना करने से रोक दिया गया। मंदिर के पुजारी ने गेट बंद कर लिया और सांसी समाज की महिलाओं कोअंदर जाने से रोकने के लिए हंगामा शुरू कर दिया। सूचना के बाद कोतवाली पुलिस का जाब्ता मौके पर पहुंचा और पुजारी सहित सांसी समाज के लोगों को समझाइश की। एक तरफ  पुजारी सांसी समाज के लोगों को मंदिर में प्रवेश की बात पर अड़ा रहा तो दूसरी तरफ  सांसी समाज के लोगों ने भी मंदिर में पूजा करने के अधिकार को लेकर अपनी आवाज को मुखर किया। सांसी समाज के अध्यक्ष चेनाराम सांसी ने बताया कि महाशिवरात्रि का पर्व होने पर सांसी समाज के पुरुष और महिला भी मंदिर में पूजा अर्चना करने के लिए पहुंचे थे। इस दौरान वहां मौजूद मंदिर के पुजारी ने समाज के महिलाओं पुरुष को प्रवेश पर रोक ताला लगा दिया। उन्होंने बताया कि मंदिर के पुजारी का कहना था कि सांसी समाज के लोग ने अब तक पूजा के लिए मंदिर में प्रवेश नहीं किया है। मंदिर उनके पूर्वजों का बनाया हुआ है मरम्मत कार्य भी उन्हीं की ओर से कराया जाता है, इसलिए यह उनकी निजी संपत्ति है। चेनाराम ने बताया कि इस संबंध में कोतवाली पुलिस को सूचना दी गई। पुलिस के पहुंचने के बावजूद भी एकबारगी पुजारी ने सांसी समाज के लोगों के मंदिर में प्रवेश पर एतराज किया। इसके बाद में पुलिसकर्मियों के समझाइश के बाद समाज के लोगों को पूजा अर्चना के लिए प्रवेश दिया गया। इस दौरान पुलिस का जाब्ता भी मौके पर तैनात रहा। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>चूरू</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 19 Feb 2023 11:22:21 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>चार राज्यों की नयी जातियों को मिलेगा एसटी का दर्जा</title>
                                    <description><![CDATA[तमिलनाडु, कर्नाटक, छत्तीसगढ़ एवं हिमाचल प्रदेश की कुछ जातियों को अनुसूचित जनजाति का दर्जा देने के उद्देश्य से लोकसभा में आज संविधान (अनुसूचित जनजाति) आदेश 1950 में संशोधन करने वाले चार विधेयक पेश किये गये।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/new-castes-of-four-states-will-get-st-status/article-31903"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-12/scst.jpg" alt=""></a><br /><p>नयी दिल्ली। तमिलनाडु, कर्नाटक, छत्तीसगढ़ एवं हिमाचल प्रदेश की कुछ जातियों को अनुसूचित जनजाति का दर्जा देने के उद्देश्य से लोकसभा में आज संविधान (अनुसूचित जनजाति) आदेश 1950 में संशोधन करने वाले चार विधेयक पेश किये गये।</p>
<p>जनजातीय मामलों के केन्द्रीय मंत्री अर्जुन मुण्डा ने तमिलनाडु के बारे में संविधान (अनुसूचित जनजाति) आदेश (दूसरा संशोधन) विधेयक 2022, हिमाचल प्रदेश के बारे में संविधान (अनुसूचित जनजाति) आदेश (तीसरा संशोधन) विधेयक 2022,  कर्नाटक के बारे में संविधान (अनुसूचित जनजाति) आदेश (चौथा संशोधन) विधेयक 2022 तथा छत्तीसगढ़ के बारे में संविधान (अनुसूचित जनजाति) आदेश (पांचवां संशोधन) विधेयक 2022 पेश किया।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/bharat/new-castes-of-four-states-will-get-st-status/article-31903</link>
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                <pubDate>Fri, 09 Dec 2022 18:32:19 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>सीएम योगी ने राजभर समुदाय को एसटी का दर्जा दिलाने का भरोसा दिया: राजभर</title>
                                    <description><![CDATA[राजभर ने कहा, ''मैं कल मुख्यमंत्री योगी से मिला था। उन्होंने विस्तार से मुझसे बात की। मैंने राजभर जाति के मामले में बात करते हुए इन जातियों को एसटी का दर्जा देने की मांग की। मेरी बात पर मुख्यमंत्री योगी सहमत हैं।" ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/cm-yogi-assured-of-st-status-to-rajbhar-community--rajbhar/article-23786"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-09/t-2.jpg" alt=""></a><br /><p>लखनऊ। उत्तर प्रदेश में विपक्षी दलों के गठबंधन से अलग हुए सुभासपा के अध्यक्ष ओम प्रकाश राजभर ने कहा है कि राज्य के मुख्यमंत्री  योगी आदित्यनाथ ने राजभर समुदाय को अनुसूचित जनजाति (एसटी) का दर्जा दिलाने की उनकी मांग से सहमति जताते हुए इसे पूरा कराने का भरोसा दिलाया है।<br /><br />राजभर ने योगी से मुलाकात के एक दिन बाद बुधवार को संवाददाता सम्मेलन में कहा कि मुख्यमंत्री के सामने उन्होंने राजभर जाति को एसटी का दर्जा दिलाने की मांग रखी। इस पर उन्होंने सहमति जताते हुए कहा कि राज्य सरकार ने इस आशय का प्रस्ताव केन्द्र सरकार के पास भेज दिया है।</p>
<p>राजभर ने कहा, ''मैं कल मुख्यमंत्री योगी से मिला था। उन्होंने विस्तार से मुझसे बात की। मैंने राजभर जाति के मामले में बात करते हुए इन जातियों को एसटी का दर्जा देने की मांग की। मेरी बात पर मुख्यमंत्री योगी सहमत हैं।" <br /><br />उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री योगी ने इन जातियों के बारे में केंद्र सरकार को प्रस्ताव भेजा है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि राजभर समाज को एसटी का दर्जा दिया जायेगा। गौरतलब है कि मौजूदा व्यवस्था में राजभर समुदाय अन्य पिछड़ा वर्ग में शामिल है।    </p>
<p>राजभर ने कहा, ''हम समाज की लड़ाई लड़ रहे हैं। भर और राजभर जाति के उत्थान के बारे में सपा ने सिर्फ सपना दिखाया था। अखिलेश जब सत्ता में थे, तो केन्द्र सरकार को क्यों नहीं प्रस्ताव भेजे।"<br /><br />उन्होंने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी की तारीफ करते हुए कहा कि मोदी और योगी पिछड़ों के कल्याण के लिए काम कर रहे हैं। राजभर ने कहा कि मुख्यमंत्री योगी ने राजभर जाति के मुद्दों को लेकर समाज कल्याण विभाग को आवश्यक निर्देश दिये हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/bharat/cm-yogi-assured-of-st-status-to-rajbhar-community--rajbhar/article-23786</link>
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                <pubDate>Wed, 21 Sep 2022 14:46:32 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>जाति विशेष के युवक को दबंगों ने पीटा, मूत्र पिलाया</title>
                                    <description><![CDATA[पुलिस ने दो आरोपियों को किया गिरफ्तार]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/churu/%E0%A4%9C%E0%A4%BE%E0%A4%A4%E0%A4%BF-%E0%A4%B5%E0%A4%BF%E0%A4%B6%E0%A5%87%E0%A4%B7-%E0%A4%95%E0%A5%87-%E0%A4%AF%E0%A5%81%E0%A4%B5%E0%A4%95-%E0%A4%95%E0%A5%8B-%E0%A4%A6%E0%A4%AC%E0%A4%82%E0%A4%97%E0%A5%8B%E0%A4%82-%E0%A4%A8%E0%A5%87-%E0%A4%AA%E0%A5%80%E0%A4%9F%E0%A4%BE--%E0%A4%AE%E0%A5%82%E0%A4%A4%E0%A5%8D%E0%A4%B0-%E0%A4%AA%E0%A4%BF%E0%A4%B2%E0%A4%BE%E0%A4%AF%E0%A4%BE/article-4234"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-01/dabango-ne-pita.jpg" alt=""></a><br /><p>रतनगढ़। जाति विशेष के एक युवक राकेश मेघवाल को दबंगों द्वारा गत 26 जनवरी को बुरी तरह पीटने और पेशाब पिलाने का मामला सामने आया है। घायल युवक की हालत बिगड़ने पर उसे बीकानेर रैफर किया। पुलिस ने मामले में बोलेरो गाड़ी जब्त कर दो आरोपियों को गिरफ्तार भी किया है। शनिवार रात रतनगढ़ पुलिस थाना में रिपोर्ट दर्ज हुई थी। पीड़ित ने आठ लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया था। पीड़ित राकेश ने बताया कि वह 26 जनवरी की रात अपने घर पर था। इसी दौरान गांव के ही उमेश पुत्र भंवरलाल जाट ने आवाज देकर बाहर बुलाया तथा साथ चलने को कहा। जाने से मना किया तो उमेश की गाड़ी में बैठे गांव के ही राजेश, ताराचंद, राकेश, बीरबल, अक्षय, दिनेश, बीड़दीचंद जाट सभी ने घेर लिया और मुंह दबाकर गाड़ी में डाल लिया। यहां से ये लोग सांवरमल नाई के खेत के कुंड पर ले गए। जहां राकेश व राजेश ने मुझे जबरन शराब पिलाने लगे तथा बोतल खाली होने पर इन दबंगों ने बोतल में पेशाब कर मुझे जबरन पिला दिया तथा जातिसूचक गालियां दी। <br /> <br /> मामले में बीरबल व उमेश दो आरोपियों की गिरफ्तारी हो चुकी है और काम में ली गई बोलेरो कार व लाठियां भी बरामद कर ली गई है। पुलिस अन्य आरोपियों की तलाश में जुटी हुई है। -<strong>हिमांशु शर्मा, जांच अधिकारी</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>चूरू</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 31 Jan 2022 11:45:40 +0530</pubDate>
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                <title>राजस्थान में फिल्म ‘पृथ्वीराज’ की रिलीजिंग पर असमंजस! : राजपूत बनाम गुर्जर जाति द्वंद्व फिल्म के टाइटल में बदलाव के साथ उन्हें अपनी जाति का दिखाने की मांग</title>
                                    <description><![CDATA[करणी सेना रुकवा चुकी है राजस्थान में फिल्म की शूटिंग]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/movie-fun/%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%9C%E0%A4%B8%E0%A5%8D%E0%A4%A5%E0%A4%BE%E0%A4%A8-%E0%A4%AE%E0%A5%87%E0%A4%82-%E0%A4%AB%E0%A4%BF%E0%A4%B2%E0%A5%8D%E0%A4%AE-%E2%80%98%E0%A4%AA%E0%A5%83%E0%A4%A5%E0%A5%8D%E0%A4%B5%E0%A5%80%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%9C%E2%80%99-%E0%A4%95%E0%A5%80-%E0%A4%B0%E0%A4%BF%E0%A4%B2%E0%A5%80%E0%A4%9C%E0%A4%BF%E0%A4%82%E0%A4%97-%E0%A4%AA%E0%A4%B0-%E0%A4%85%E0%A4%B8%E0%A4%AE%E0%A4%82%E0%A4%9C%E0%A4%B8----%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%9C%E0%A4%AA%E0%A5%82%E0%A4%A4-%E0%A4%AC%E0%A4%A8%E0%A4%BE%E0%A4%AE-%E0%A4%97%E0%A5%81%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%9C%E0%A4%B0-%E0%A4%9C%E0%A4%BE%E0%A4%A4%E0%A4%BF-%E0%A4%A6%E0%A5%8D%E0%A4%B5%E0%A4%82%E0%A4%A6%E0%A5%8D%E0%A4%B5-%E0%A4%AB%E0%A4%BF%E0%A4%B2%E0%A5%8D%E0%A4%AE-%E0%A4%95%E0%A5%87-%E0%A4%9F%E0%A4%BE%E0%A4%87%E0%A4%9F%E0%A4%B2-%E0%A4%AE%E0%A5%87%E0%A4%82-%E0%A4%AC%E0%A4%A6%E0%A4%B2%E0%A4%BE%E0%A4%B5-%E0%A4%95%E0%A5%87-%E0%A4%B8%E0%A4%BE%E0%A4%A5-%E0%A4%89%E0%A4%A8%E0%A5%8D%E0%A4%B9%E0%A5%87%E0%A4%82-%E0%A4%85%E0%A4%AA%E0%A4%A8%E0%A5%80-%E0%A4%9C%E0%A4%BE%E0%A4%A4%E0%A4%BF-%E0%A4%95%E0%A4%BE-%E0%A4%A6%E0%A4%BF%E0%A4%96%E0%A4%BE%E0%A4%A8%E0%A5%87-%E0%A4%95%E0%A5%80-%E0%A4%AE%E0%A4%BE%E0%A4%82%E0%A4%97/article-4104"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-01/prithviraaj-2.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। सम्राट पृथ्वीराज चौहान पर बनी फिल्म ‘पृथ्वीराज’ के नाम के साथ अब उनकी जाति को लेकर राजस्थान के दो महत्वपूर्ण समाज आमने-सामने आ गए हैं। राजपूत समाज जहां पृथ्वीराज चौहान को अपनी जाति का बता रहा है। वहीं अब गुर्जर समाज ने भी पृथ्वीराज को सम्राट गुर्जर बताते हुए फिल्म में भी इस बात को दिखाने की मांग कर दी है। इससे पहले मिहिरभोज और सुहेलदेव की जाति को लेकर भी दो जातियों के बीच विवाद चल रहा है। यश चोपड़ा के बैनर पर बनी रही फिल्म के निर्देशक चन्द्रप्रकाश द्विवेदी है। <br /><strong><br />पृथ्वीराज राजपूत समाज की अस्मिता के प्रतीक</strong><br />करणी सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष महिपाल सिंह मकराना कहते है कि पृथ्वीराज फिल्म के टाइटल को लेकर हमारा विरोध है। वहीं अब गुर्जर समाज उन्हें अपनी जाति का बता रहा है, जबकि सम्राट पृथ्वीराज चौहान राष्ट्र गौरव है। वह राजपूत समाज की अस्मिता के प्रतीक है। मैं खुद पृथ्वीराज चौहान के वंशज परिवार से ताल्लुक रखता हूं। गुर्जर समाज फिल्म से पहले ही इस तरह के दावे कर रहा है इससे पहले ये समाज के लोग कहां पर थे। </p>
<p><br /><strong>पृथ्वीराज को राजपूत दिखाया तो होगा विरोध</strong><br />गुर्जर नेता हिम्मत सिंह गुर्जर कहते है कि अगर पृथ्वीराज चौहान के लिए राजपूत शब्द बोला गया तो फिल्म का जबरदस्त विरोध किया जाएगा। कर्नल टोड ने गलत इतिहास लिखा है। इतिहास में वर्णन है कि उनके पिता गुर्जर थे। पृथ्वीराज चौहान रासो महाकाव्य 16वीं शताब्दी में लिखा गया था, जो पूरी तरह मिथ्यापूर्ण है। यह महाकाव्य चंदरबरदाई ने प्रिंगल भाषा में लिखा था, जो बाजरा और राजस्थानी भाषाओं का मिश्रण है। गुर्जर सम्राट पृथ्वीराज चौहान के शासन काल में संस्कृत बोली जाती थी ना कि प्रिंगल भाषा का, जिसका कवि ने प्रयोग किया है। हिम्मत कहते है कि ऐतिहासिक सबूतों के मुताबिक 13वीं शताब्दी से पहले राजपूत कभी अस्तित्व में नहीं थे। वे कहते है कि पृथ्वीराज चौहान के पिता सोमेश्वर गुर्जर जाति से है। इसलिए उनका बेटा खुद गुर्जर होना चाहिए। </p>
<p><br /><strong>गुर्जर प्रतिहार के लिए होता है इस्तेमाल </strong><br />इतिहासकार आरएस खंगारोत कहते है कि जिस गुर्जर शब्द की बात आज की जा रही है, वह गुर्जर प्रतिहार के लिए इस्तेमाल होता है। चौहान और चहमान से इसे कन्फयूज नहीं करना चाहिए। गुर्जर प्रतिहार की उत्पत्ति 8वीं शताब्दी में मानी जाती है। ये खुद को भगवान राम के भाई लक्ष्मण का वंशज कहते हैं। इसलिए वे अपने आप को सूर्यवंशी बताते हैं। कुछ इतिहासकार इन्हें विदेशी मानते हैं कि ये हूणों के साथ भारत आए और गुर्जर थे, लेकिन भारतीय इतिहासकार ऐसा नहीं मानते हैं।</p>
<p><br /><strong>फिल्म के लिए है बड़ी मुश्किलें</strong><br />पृथ्वीराज फिल्म की शूटिंग के दौरान ही करणी सेना ने फिल्म में ऐतिहासिक तथ्यों से छेड़छाड़ के आरोप लगाते हुए इसकी शूटिंग रूकवा दी थी। इसके बाद पूरी शूटिंग बाहर की गई। अब दोनों ही जातियों में पृथ्वीराज की जाति को लेकर विवाद है। राजपूत समाज को फिल्म के नाम पर भी आपत्ति है। वे इसका नाम बदलकर सम्राट पृथ्वीराज चौहान करने की मांग कर चुके हैं। </p>]]></content:encoded>
                
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