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                <title>military - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <description>military RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>‘ऑपरेशन सिंदूर’ की पहली वर्षगांठ पर भाजपा का सलाम: भारत के अडिग इरादों की गूंज ; भाजपा ने वीर जवानों को किया नमन, वीरों के साहस को राष्ट्र का नमन</title>
                                    <description><![CDATA[भाजपा ने 'ऑपरेशन सिंदूर' को भारत के अडिग इरादों का ऐलान बताया है। 7 मई 2025 को पहलगाम हमले के जवाब में शुरू हुए इस ऑपरेशन ने पाकिस्तान स्थित आतंकी ठिकानों को ध्वस्त कर दुनिया को कड़ा संदेश दिया। पार्टी ने उन पराक्रमी वीरों को नमन किया है, जिन्होंने राष्ट्र की सुरक्षा के लिए अदम्य साहस दिखाया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/bjps-salute-on-the-first-anniversary-of-operation-sindoor-echo/article-152979"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/sinddor.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने ऑपरेशन सिंदूर को भारत के अडिग इरादों का ऐलान बताते हुए इसमें शामिल भारतीय सेना के जवानों को नमन किया है। भाजपा ने सोशल मीडिया एक्स पर गुरुवार को लिखा, "वो सिर्फ एक ऑपरेशन नहीं था, भारत के अडिग इरादों का ऐलान था। ‘ऑपरेशन सिंदूर’ की पहली वर्षगांठ पर उन वीरों को नमन, जिन्होंने दुश्मन को जवाब नहीं, संदेश दिया और उस संदेश की गूंज दुनिया ने सुनी। जय हिंद! गौरतलब है कि जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकवादी हमले को लेकर भारतीय सेना ने सात मई 2025 को ऑपरेशन सिंदूर शुरू किया था और पाकिस्तान में स्थित आतंकवादियों के कई ठिकानों को नष्ट कर दिया था।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 07 May 2026 17:27:28 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>सीतारमण का बड़ा बयान, बोली-ऑपरेशन सिंदूर ने त्वरित, सटीक-निर्णायक कार्रवाई से भारत की सुरक्षा नीति में नया अध्याय जोड़ा, आतंकवाद के प्रति शून्य सहिष्णुता की राष्ट्रव्यापी प्रतिबद्धता को प्रदर्शित किया</title>
                                    <description><![CDATA[वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 'ऑपरेशन सिंदूर' की सराहना करते हुए इसे भारत की सुरक्षा नीति का नया अध्याय बताया। पिछले वर्ष पहलगाम हमले के बाद भारतीय सेना ने पाकिस्तान में आतंकी ठिकानों को ध्वस्त कर दिया था। यह दिन भारतीय सशस्त्र बलों के साहस, राजनीतिक संकल्प और आतंकवाद के विरुद्ध 'जीरो टॉलरेंस' का प्रतीक है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/sitharaman-said-operation-sindoor-added-a-new-chapter-to/article-152969"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-11/sitaraman.jpg" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। केंद्रीय वित्त एवं कारपोरेट मामलों के मंत्री निर्मला सीतारमण ने गुरुवार को कहा कि ऑपरेशन सिंदूर ने त्वरित, सटीक और निर्णायक कार्रवाई के साथ भारत की सुरक्षा नीति में एक नया अध्याय जोड़ा है। पहले रक्षा मंत्री का कार्यभार संभाल चुकी सीतारमण ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में कहा," ऑपरेशन सिंदूर ने हमारे सशस्त्र बलों के साहस, राजनीतिक संकल्प की दृढ़ता और आतंकवाद के प्रति शून्य सहिष्णुता की राष्ट्रव्यापी प्रतिबद्धता को प्रदर्शित किया।"</p>
<p>गौरतलब है कि पिछले वर्ष अप्रैल में जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में आतंकवादी हमले में 26 निर्दोष हिंदुओं की हत्या के बाद भारत ने आज ही के दिन पाकिस्तान में आतंकवाद दी ठिकानों पर नपा-तुला हमला किया था। उसके बाद पाकिस्तान की सेनाओं के अंधाधुंध हमले के खिलाफ भारतीय वायु सेवा ने कार्रवाई करते हुए पाकिस्तान की वायु रक्षा प्रणाली को पंगु बना दिया था और उसके कई सैनिक ठिकानों को बर्बाद कर दिया था और 10 में को पाकिस्तान की ओर से युद्ध विराम के अनुरोध पर कार्रवाई रोक दी थी लेकिन सरकार ने कहा था कि ऑपरेशन सिंदूर खत्म नहीं किया गया है।</p>
<p>निर्मला सीतारमण ने कहा कि यह दिन हमारे राष्ट्र की रक्षा करने वाले वीरों को श्रद्धांजलि है और यह स्मरण दिलाता है कि भारत अपनी शांति और संप्रभुता को खतरे में डालने वालों के खिलाफ हमेशा दृढ़ खड़ा रहेगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 07 May 2026 15:10:50 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>'ऑपरेशन सिंदूर' की पहली बरसी पर पीएम मोदी ने बदली सोशल मीडिया डीपी: भारतीय सशस्त्र बलों के शौर्य और बहादुरी को किया नमन, पाकिस्तान को सख्त संदेश </title>
                                    <description><![CDATA['ऑपरेशन सिंदूर' की पहली वर्षगांठ पर पीएम मोदी ने एक्स (X) की डीपी बदलकर सैनिकों के अदम्य साहस को नमन किया। महाभारत के श्लोक के साथ उन्होंने संदेश दिया कि उच्च मनोबल वाली सेना की विजय निश्चित है। 7 मई 2025 को शुरू हुआ यह ऑपरेशन आतंकवाद के खिलाफ भारत की ऐतिहासिक जीत का प्रतीक है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/on-the-first-anniversary-of-operation-sindoor-pm-modi-changed/article-152976"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/pm-modi.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ऑपरेशन सिंदूर की पहली बरसी पर अपने सोशल मीडिया एक्स की डिस्प्ले तस्वीर बदलकर 'ऑपरेशन सिंदूर' कर ली है और सैनिकों के पराक्रम और देशभक्ति की सराहना की है। पीएम मोदी ने 'ऑपरेशन सिंदूर' की वर्षगांठ पर भारतीय सशस्त्र बलों के शौर्य और बहादुरी को नमन करते हुए एक्स पर लिखा, "ऑपरेशन सिंदूर में भारत को मिली असाधारण विजय हमारे वीर सैनिकों के अद्भुत पराक्रम और देशभक्ति की प्रेरक मिसाल है। उनके अदम्य साहस, दृढ़ संकल्प और कर्तव्यनिष्ठा पर हर देशवासी को गर्व है।"</p>
<p>उन्होंने इस मौके पर महाभारत का एक श्लोक को एक्स पर पोस्ट किया, उदीर्णमनसो योधा वाहनानि च भारत। यस्यां भवन्ति सेनायां ध्रुवं तस्यां जयं वदेत्।" इस श्लोक का अर्थ है हे भरतवंशी (युधिष्ठिर)! जिस सेना के सैनिक (योद्धा) और वाहन (घोड़े, हाथी, रथ आदि) उत्साही और उच्च मनोबल वाले (उदीर्णमनस:) होते हैं, उस सेना की विजय निश्चित (ध्रुवम्) समझनी चाहिए। गौरतलब है कि जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकवादी हमले को लेकर भारतीय सेना ने सात मई 2025 को ऑपरेशन सिंदूर शुरू किया था और पाकिस्तान में स्थित आतंकवादियों के कई ठिकानों को नष्ट कर दिया था।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 07 May 2026 12:27:23 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>अमेरिका ने की ईरान युद्ध खत्म होने की घोषणा, कहा-'ऑपरेशन एपिक फ्यूरी' ने हासिल किए लक्ष्य, भविष्य की सुरक्षा व्यवस्था पर ध्यान केंद्रित</title>
                                    <description><![CDATA[अमेरिका ने ईरान के खिलाफ 'ऑपरेशन एपिक फ्यूरी' को सफलतापूर्वक समाप्त कर दिया है। विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने बताया कि सैन्य लक्ष्य पूरे हो चुके हैं और अब ध्यान 'प्रोजेक्ट फ्रीडम' पर होगा। अमेरिका अब हॉर्मुज जलडमरूमध्य में रक्षात्मक रुख अपनाते हुए वैश्विक ऊर्जा व्यापार और सुरक्षा सुनिश्चित करेगा, हालांकि जवाबी कार्रवाई के विकल्प खुले रहेंगे।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/america-announced-the-end-of-iran-war-said-operation/article-152877"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-01/trump.png" alt=""></a><br /><p>वॉशिंगटन। अमेरिका ने आधिकारिक तौर पर घोषणा की है कि ईरान के खिलाफ चलाया गया प्रमुख सैन्य अभियान 'ऑपरेशन एपिक फ्यूरी' अब समाप्त हो गया है। ह्वाइट हाउस में मंगलवार दोपहर 3:30 बजे के आसपास प्रेस ब्रीफिंग के दौरान विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने स्पष्ट किया कि अमेरिका ने इस अभियान के अपने सभी सैन्य लक्ष्यों को सफलतापूर्वक प्राप्त कर लिया है। रुबियो ने स्पष्ट किया कि 28 फरवरी को ईरान के खिलाफ शुरू किये गये आक्रामक सैन्य अभियान के सभी रणनीतिक लक्ष्य प्राप्त कर लिये गये हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि सेना ने अब अपने आक्रामक चरण को पूरी तरह समाप्त कर दिया है और अब ध्यान भविष्य की सुरक्षा व्यवस्था पर केंद्रित रहेगा।</p>
<p>इस घोषणा के साथ ही अमेरिकी रणनीति में एक बड़ा बदलाव आया है। इसके तहत अब सेना 'आक्रामक' रुख छोड़कर 'रक्षात्मक' मुद्रा में आ गयी है। रुबियो ने साफ किया कि अमेरिका अब नयी जंग शुरू करने के बजाय अमन को प्राथमिकता देना चाहता है। उन्होंने हालांकि यह चेतावनी भी दी कि हॉर्मुज जलडमरूमध्य और आसपास के क्षेत्रों में ताकत के इस्तेमाल का विकल्प अब भी खत्म नहीं हुआ है। यदि अमेरिकी सेना या उसके सहयोगियों के हितों पर हमला होता है तो अमेरिका अपनी पूरी शक्ति के साथ जवाबी कार्रवाई करने के लिए स्वतंत्र है।</p>
<p>आक्रामक अभियान की समाप्ति के बाद अब अमेरिका ने 'प्रोजेक्ट फ्रीडम' की शुरुआत की है। इस नये मिशन का मुख्य उद्देश्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल जलमार्ग हॉर्मुज जलडमरूमध्य को वैश्विक ऊर्जा व्यापार के लिए सुरक्षित बनाना और फिर से खोलना है। 'टाइम' और 'सीएनए' की रिपोर्ट्स के अनुसार, अमेरिकी नौसेना अब इस क्षेत्र में व्यापारिक जहाजों की सुरक्षा करेगी। रुबियो ने इसे एक 'रक्षात्मक कवच' बताते हुए कहा कि जब तक अमेरिकी सेना पर गोली नहीं चलायी जायेगी, तब तक उनकी तरफ से कोई हमला नहीं होगा, लेकिन वे किसी भी खतरे का सामना करने के लिए मुस्तैद रहेंगे।</p>
<p>व्हाइट हाउस की इस ब्रीफिंग में यह संदेश भी दिया गया कि अब सारा ध्यान सैन्य कार्रवाई से हटकर कूटनीति पर रहेगा। अमेरिका का अगला लक्ष्य ईरान को परमाणु हथियार विकसित करने से रोकना और क्षेत्रीय स्थिरता बहाल करना है। विदेश मंत्री रुबियो ने स्पष्ट चेतावनी दी कि परमाणु हथियारों से लैस ईरान पूरी दुनिया के लिए बड़ा खतरा हो सकता है, जिसे अमेरिका कभी स्वीकार नहीं करेगा। कुल मिलाकर, 'ऑपरेशन एपिक फ्यूरी' का अंत एक बड़े युद्ध के थमने का संकेत तो है, लेकिन क्षेत्र में सैन्य मौजूदगी और कड़ी निगरानी अब भी जारी रहेगी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 06 May 2026 16:46:32 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>अमेरिका ने फिर किया सीज़फायर का उल्लंघन: ईरानी नौकाओं पर ड्रोन हमला, फुजैराह तेल बंदरगाह पर लगी भीषण आग </title>
                                    <description><![CDATA[राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 'प्रोजेक्ट फ्रीडम' के तहत होर्मुज जलडमरूमध्य में सात ईरानी नौकाओं को नष्ट करने का दावा किया है। यूएई के तेल बंदरगाह पर हमलों के बाद तनाव चरम पर है। जहां अमेरिका फंसे हुए 2,000 जहाजों को निकालने का प्रयास कर रहा है, वहीं ईरान ने इसे 'सैन्य विफलता' करार देते हुए कड़ा विरोध जताया है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/america-again-violates-ceasefire-drone-attack-on-iranian-boats-massive/article-152697"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/1111200-x-600-px)-(5)8.png" alt=""></a><br /><p>वॉशिंगटन। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने कहा कि अमेरिका ने होर्मुज जलडमरूमध्य में सात ईरानी नौकाओं पर हमला किया है, क्योंकि वाशिंगटन लगभग बंद जलमार्ग के माध्यम से खाड़ी में फंसे जहाजों को बाहर निकालने का प्रयास कर रहा है। संयुक्त अरब अमीरात और दक्षिण कोरिया दोनों ने सोमवार को महत्वपूर्ण जलमार्ग में जहाजों पर हमले की सूचना दी। संयुक्त अरब अमीरात ने यह भी कहा कि ईरानी हमले के बाद फुजैराह के तेल बंदरगाह पर आग लग गई।</p>
<p>ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा कि जलडमरूमध्य में हुई घटनाओं से यह स्पष्ट हो गया है कि राजनीतिक संकट का कोई सैन्य समाधान नहीं है। उन्होंने आगे कहा, "प्रोजेक्ट फ्रीडम प्रोजेक्ट डेडलॉक है।" फरवरी में अमेरिका और इज़रायल द्वारा ईरान पर हवाई हमले शुरू करने के बाद से होर्मुज जलडमरूमध्य बहुत हद तक अवरुद्ध रहा है। तेहरान ने जवाबी कार्रवाई करते हुए इस महत्वपूर्ण जलमार्ग को अवरुद्ध कर दिया जिससे होकर दुनिया के 20 प्रतिशत तेल एवं द्रवीकृत प्राकृतिक गैस का परिवहन होता है।</p>
<p>अप्रैल की शुरुआत में, अमेरिका और ईरान ने युद्धविराम की घोषणा की, जिसके तहत ईरान ने संयुक्त अरब अमीरात सहित खाड़ी देशों पर ड्रोन और मिसाइल हमले बंद कर दिए, लेकिन तब से कुछ ही जहाज जलडमरूमध्य से गुजर पाए हैं। अमेरिका ने ईरानी बंदरगाहों पर अपनी नाकाबंदी भी लगा दी है। राष्ट्रपति ट्रम्प ने कहा, "हमने सात छोटी नौकाओं को मार गिराया है या जैसा कि वे उन्हें 'तेज़' नौकाएं कहते हैं। अब उनके पास बस यही बची हैं।" अमेरिकी सेना ने कहा कि उसने नौकाओं पर हमला करने के लिए हेलीकॉप्टरों का इस्तेमाल किया गया।</p>
<p>बाद में ईरानी सरकारी मीडिया ने ट्रम्प के इस दावे का खंडन किया कि अमेरिका ने तेज नौकाओं पर हमला किया। सैन्य सूत्रों का हवाला देते हुए, तसनीम समाचार एजेंसी ने बताया कि इसके बजाय दो छोटे मालवाहक जहाजों को निशाना बनाया गया जिनमें पांच नागरिकों की मौत हो गई। इससे पहले अमेरिका ने कहा था कि नौसेना के विध्वंसक पोत और अमेरिकी ध्वज वाले व्यापारिक जहाज सोमवार को जलडमरूमध्य से गुजरे थे। ईरान ने इन दावों को पूरी तरह से झूठा करार दिया और कहा कि उसकी सेना ने एक अमेरिकी युद्धपोत पर चेतावनी के तौर पर गोलियां चलाईं। अमेरिकी सेना ने इस बात से इनकार किया।</p>
<p>अंतर्राष्ट्रीय नेताओं ने यूएई अवसंरचना पर हुए हमलों की निंदा की है। फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रॉ ने कहा कि ये हमले अन्यायपूर्ण और अस्वीकार्य हैं। ब्रिटेन के प्रधानमंत्री सर कीर स्टारमर ने कहा कि ब्रिटेन खाड़ी में अपने साझेदारों की रक्षा के लिए अपना समर्थन जारी रखेगा।पड़ोसी देश कतर ने टैंकर पर हुए हमले की निंदा करते हुए जलडमरूमध्य को बिना शर्त फिर से खोलने की मांग की। रविवार को राष्ट्रपति ट्रम्प ने कहा था कि अमेरिका "प्रोजेक्ट फ्रीडम" के तहत फंसे हुए जहाजों को समुद्री मार्ग से बाहर निकालने में मदद करना शुरू करेगा। फरवरी में अमेरिका-ईरान युद्ध शुरू होने के बाद से अनुमानित 20,000 नाविक 2,000 जहाजों पर फंसे हुए हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 05 May 2026 11:24:08 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>नॉर्थ टेक सिम्पोजियम 2026 : राजनाथ सिंह ने कहा-बदला है वार फेयर का चेहरा, तकनीक के चलते हुये क्रांतिकारी बदलाव, साइबर स्पेस में भी लड़े जा रहे युद्ध</title>
                                    <description><![CDATA[प्रयागराज में नॉर्थ टेक सिम्पोजियम का उद्घाटन करते हुए रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने इसे रक्षा त्रिवेणी का संगम बताया। उन्होंने आधुनिक युद्ध में AI और ड्रोन की भूमिका को गेम चेंजर करार दिया। सिंह ने भारतीय सेना से चौकन्ना रहने और वैश्विक महाशक्ति बनने के लिए नई तकनीकों को अपनाने का आह्वान किया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/north-tech-symposium-2026-rajnath-singh-said-the-face/article-152620"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/rajnath-singh.png" alt=""></a><br /><p>प्रयागराज। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने सोमवार को संगम नगरी प्रयागराज में शुरु हुये नॉर्थ टेक सिम्पोजियम 2026 को ज्ञान व शक्ति का महाकुंभ बताते हुये कहा कि यह वास्तव में रक्षा त्रिवेणी का संगम है। राजनाथ सिंह ने तीन दिवसीय कार्यक्रम का उदघाटन करने के बाद अपने संबोधन में कहा कि हर काल खंड में वार फेयर का चेहरा बदला है,विश्व युद्ध के बाद नई तकनीक का समावेश होते हुए दुनिया ने देखा है। 21वीं सदी में टेक्नोलॉजी के नए युग का आगाज हुआ है। उन्होने कहा कि यह इनफॉरमेशन टेक्नोलॉजी फॉर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का दौर है। आज साइबर स्पेस में भी युद्ध लड़े जा रहे हैं।</p>
<p>उन्होने कहा कि बीते 10-15 वर्षों में क्रांतिकारी बदलाव हुए हैं। रूस और यूक्रेन के बीच जारी युद्ध पर उन्होने कहा कि दोनों के बीच पारंपरिक युद्ध शुरू हुआ, लेकिन अब यह युद्ध ड्रोन और सेंसर युद्ध के रूप में गेम चेंजर बनकर उभरा है। आज सब कुछ वैपनाइज किया जा सकता है। आपरेशन सिंदूर का जिक्र करते हुए रक्षा मंत्री ने कहा कि इससे भारतीय सेना का शौर्य याद आता है। ऑपरेशन सिंदूर में आकाश मिसाइल हुए नवीन तकनीक का प्रयोग किया गया था। रक्षा मंत्री ने भारतीय सेना से सक्रिय ही नहीं बल्कि चौकन्ना भी रहने का आह्वान करते हुये कहा कि तभी हम आने वाली चुनौतियों का सामना कर सकते हैं।</p>
<p>उन्होंने कहा कि चिकित्सा और शिक्षा में नई टेक्नोलॉजी एक साल बाद भी लागू कर सकते हैं,लेकिन सेना में अगर हमने देरी की तो काफी पीछे हो जाएंगे,रक्षा मंत्री ने सेना से सरप्राइज एलिमेंट विकसित करने का आह्वान किया,सरप्राइज एलिमेंट ऐसा हो जिसे दुश्मन देश ने सोचा भी ना हो। उन्होने कहा कि आगे बढ़ने का एक ही मंत्र अनुकूलनशीलता है। सेना में इन्फ्रास्ट्रक्चर को बढ़ावा दिया जा रहा है, यूपी में डिफेंस कॉरिडोर और ब्रह्मोस का निर्माण किया जा रहा है, यूपी में हाल में ही लोकार्पित गंगा एक्सप्रेसवे को भी डिफेंस सेक्टर के लिए महत्वपूर्ण बताया है। रक्षा मंत्री ने कहा कि रक्षा में शोध को बढ़ावा देने के लिए कई सहूलियन दी गई हैं। रक्षा मंत्री ने इंडस्ट्री और एकेडमिया से अपील की, कि वे डिफेंस कॉरिडोर की तरह नॉलेज कॉरिडोर का भी निर्माण करें। अंत में रक्षा मंत्री ने कहा कि सबके सामूहिक प्रयास से ही भारत विश्व पटल पर सैन्य ताकत के रूप में स्थापित होगा, सबके प्रयासों से ही भारत वैश्विक महाशक्ति बनेगा। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने चुनौतियों को अवसर में बदलने का भी आह्वान किया।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 04 May 2026 16:51:16 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>ईरानी सेना की ट्रंप को चेतावनी: अमेरिकी सेना ने होर्मुज में किया प्रवेश तो होगी कड़ी कार्रवाई ; जलडमरूमध्य ईरान के नियंत्रण में है, पूरी ताकत से की जाएगी इसकी सुरक्षा </title>
                                    <description><![CDATA[ईरान ने अमेरिका के 'प्रोजेक्ट फ्रीडम' पर कड़ी चेतावनी देते हुए होर्मुज जलडमरूमध्य में विदेशी सेना के प्रवेश का विरोध किया है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप फंसे जहाजों को निकालने के लिए 15,000 सैनिकों का मिशन शुरू कर रहे हैं। ईरान का कहना है कि यह क्षेत्र उसके पूर्ण नियंत्रण में है और बिना अनुमति प्रवेश पर सैन्य कार्रवाई की जाएगी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/iranian-armys-warning-to-trump-if-us-army-enters-hormuz/article-152635"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/trump.png" alt=""></a><br /><p>तेहरान। ईरानी सेना ने अमेरिकी को चेतावनी दी है कि उसकी सेना होर्मुज जलडमरूमध्य में दाखिल होने की कोशिश न करे। यह चेतावनी अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के उस ऐलान के बाद आई है जिसमें उन्होंने जलमार्ग से जहाजों को सुरक्षित निकालने के लिए 'प्रोजेक्ट फ्रीडम' अभियान शुरू करने की बात कही है। अमेरिकी सेना ने साफ किया है कि यह कोई औपचारिक 'एस्कॉर्ट मिशन' नहीं है। इस 'प्रोजेक्ट फ्रीडम' को सफल बनाने के लिए गाइडेड मिसाइल, 100 से अधिक विमान, ड्रोन प्लेटफॉर्म और 15,000 सैनिकों की मदद ली जाएगी।</p>
<p>जवाब में ईरान के सशस्त्र बलों की एकीकृत कमान के प्रमुख मेजर जनरल अली अब्दुल्लाही ने कहा कि ईरान इस इलाके में आने वाली 'किसी भी विदेशी सेना' और खास तौर पर 'आक्रामक अमेरिकी सेना' को निशाना बनाएगा। उन्होंने साफ कहा कि यह जलडमरूमध्य ईरान के नियंत्रण में है और इसकी सुरक्षा पूरी ताकत से की जाएगी। अब्दुल्लाही ने कहा कि हम होर्मुज जलडमरूमध्य की सुरक्षा का प्रबंधन मजबूती से कर रहे हैं। हम सभी व्यापारिक जहाजों और तेल टैंकरों को सलाह देते हैं कि वे यहाँ तैनात हमारी सेना के साथ तालमेल बिठाए बिना यहाँ से न गुजरें, अन्यथा उनकी सुरक्षा खतरे में पड़ सकती है।</p>
<p>मेजर जनरल ने कहा कि यह पूरा समुद्री रास्ता ईरानी सेना के दायरे में आता है। अमेरिका की कोई भी 'आक्रामक हरकत' यहाँ के हालात को और खराब करेगी और जहाजों की सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा पैदा करेगी। उन्होंने यह भी दोहराया कि सुरक्षित आवाजाही के लिए 'हर हाल में' ईरानी सेना से संपर्क करना जरूरी है। दूसरी ओर, ट्रंप ने 'प्रोजेक्ट फ्रीडम' के तहत सोमवार से फंसे हुए व्यापारिक जहाजों को बाहर निकालने की घोषणा की है। उन्होंने बताया कि कई देशों ने अपने जहाजों को मुक्त कराने के लिए अमेरिका से मदद मांगी है, जो इस समय होर्मुज जलडमरूमध्य में फंसे हुए हैं। उन्होंने इन जहाजों को निर्दोष और इस विवाद से पूरी तरह अलग बताया है।</p>
<p>डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि अमेरिकी सेना इन तटस्थ देशों के जहाजों को प्रतिबंधित जलमार्ग से सुरक्षित बाहर लाएगी, ताकि वे अपना व्यापारिक कामकाज फिर से शुरू कर सकें। उन्होंने दावा किया कि इस पहल से अमेरिका के साथ-साथ ईरान और पूरे क्षेत्र को फायदा होगा। घोषणा के मुताबिक, अमेरिकी प्रतिनिधियों को निर्देश दिया गया है कि वे संबंधित देशों को सूचित कर दें कि अमेरिका उनके जहाजों और चालक दल की सुरक्षा के लिए हर संभव प्रयास करेगा।</p>
<p>डोनाल्ड ट्रंप ने उम्मीद जताई कि सोमवार सुबह से शुरू होने वाली 'प्रोजेक्ट फ्रीडम' प्रक्रिया के लिए ईरान के साथ सकारात्मक बातचीत चल रही है। उन्होंने इसे एक मानवीय मिशन बताते हुए कहा कि कई जहाजों पर भोजन और जरूरी सामान खत्म हो रहा है, जिससे वहाँ के कर्मियों की हालत चिंताजनक है। हालाँकि, ट्रंप ने सख्त चेतावनी भी दी कि इस मानवीय काम में कोई भी रुकावट बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने कहा कि अगर इस प्रक्रिया में किसी ने दखल दिया, तो उससे पूरी ताकत के साथ निपटा जाएगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 04 May 2026 14:58:02 +0530</pubDate>
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                <title>ट्रंप सरकार का बड़ा फैसला : 60 दिन की अनिवार्य संसदीय अनुमति की समयसीमा पूरी होने से पहले युद्ध समाप्ति का ऐलान, सीजफायर जारी रखने के लिए रखी शर्ते</title>
                                    <description><![CDATA[ट्रंप प्रशासन ने ईरान के साथ दो महीने से जारी सैन्य टकराव को समाप्त करने की घोषणा की है। यह निर्णय वॉर पावर रिज़ॉल्यूशन की समयसीमा खत्म होने से ठीक पहले लिया गया। हालांकि, अमेरिका ने स्पष्ट किया है कि भविष्य में हमले की स्थिति में रक्षात्मक कार्रवाई का अधिकार सुरक्षित है, जबकि इजरायल को सैन्य सहायता जारी रहेगी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/big-decision-of-trump-government-declaration-of-end-of-war/article-152348"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/trumpp.png" alt=""></a><br /><p>वॉशिंगटन। संयुक्त राज्य अमेरिका और ईरान के बीच बीते दो महीनों से जारी सैन्य तनाव पर अब विराम लगने की खबर सामने आई है। डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन ने घोषणा की है कि 28 फरवरी से शुरू हुआ यह संघर्ष अब समाप्त माना जाएगा। यह टकराव उस समय शुरू हुआ था जब क्षेत्रीय तनाव और सुरक्षा चिंताओं के बीच दोनों देशों के बीच सैन्य गतिविधियां तेज हो गई थीं। इसके बाद हालात धीरे-धीरे युद्ध जैसी स्थिति में बदल गए, जिसमें समुद्री और सामरिक स्तर पर गतिविधियां बढ़ीं।</p>
<p>अब अमेरिकी प्रशासन ने वॉर पावर रिज़ॉल्यूशन के तहत 60 दिन की अनिवार्य संसदीय अनुमति की समयसीमा पूरी होने से ठीक पहले युद्ध समाप्ति का ऐलान किया है। हालांकि इस निर्णय में नौसैनिक नाकाबंदी को लेकर कोई स्पष्ट उल्लेख नहीं किया गया है। प्रशासन ने यह भी स्पष्ट किया है कि यदि भविष्य में ईरान की ओर से किसी अमेरिकी नौसैनिक जहाज पर हमला होता है, तो राष्ट्रपति को बिना कांग्रेस की पूर्व अनुमति के रक्षात्मक कार्रवाई करने का अधिकार होगा।</p>
<p>इसी बीच, अमेरिका की ओर से इजरायल को सैन्य सहायता जारी है। रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले 24 घंटों में करीब 6,500 टन हथियार और सैन्य सामग्री भेजी गई है, जबकि पूरे 60 दिनों में यह आंकड़ा 1.15 लाख टन से अधिक पहुंच चुका है। विशेषज्ञों का मानना है कि भले ही युद्ध समाप्ति की घोषणा हो गई हो, लेकिन क्षेत्र में तनाव पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है और स्थिति पर नजर बनाए रखना जरूरी होगा।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 01 May 2026 15:58:04 +0530</pubDate>
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                <title>ऑपरेशन सिंदूर ने दुनिया को आतंकवाद के खिलाफ देश की प्रतिबद्धता का दिया संदेश, भारत अब सिर्फ़ बयान जारी नहीं करता बल्कि आगे बढ़कर निर्णायक कार्रवाई भी करता है : राजनाथ सिंह</title>
                                    <description><![CDATA[रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि 'ऑपरेशन सिंदूर' ने भारत की बदलती मानसिकता का वैश्विक संदेश दिया है। अब भारत कूटनीतिक बयानों के बजाय निर्णायक सैन्य कार्रवाई में विश्वास रखता है। रक्षा निर्यात में 62% की रिकॉर्ड वृद्धि और एआई (AI) आधारित युद्धक प्रणालियाँ नए और सशक्त भारत की पहचान बन चुकी हैं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/operation-sindoor-gave-a-message-to-the-world-about-the/article-152209"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/rajnath-singh.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली । रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा है कि ऑपरेशन सिंदूर ने दुनिया को स्पष्ट संदेश दिया है कि भारत अपने भूभाग पर आतंकवादी हमलों के बाद अब केवल कूटनीतिक बयान जारी करने की पुरानी मानसिकता तक सीमित नहीं है बल्कि आगे बढ़कर निर्णायक कार्रवाई के लिए प्रतिबद्ध है। राजनाथ सिंह ने गुरुवार को यहां एक राष्ट्रीय सुरक्षा शिखर सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि सरकार ने स्पष्ट रुख अपनाया है कि किसी भी परिस्थिति में आतंकवाद का कोई भी कृत्य सहन नहीं किया जाएगा। उन्होंने सर्जिकल स्ट्राइक, हवाई हमलों और ऑपरेशन सिंदूर को आतंकवाद के खिलाफ सरकार के दृढ़ संकल्प का प्रतीक बताया।</p>
<p>उन्होंने कहा, "आतंकवाद एक विकृत और विक्षिप्त मानसिकता से उत्पन्न होता है। यह मानवता पर एक काला धब्बा है। आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई केवल राष्ट्रीय सुरक्षा का मामला नहीं है, यह मूल रूप से मानवता के मूल्यों की रक्षा की लड़ाई है। यह एक बर्बर विचारधारा के खिलाफ संघर्ष है जो हर मानवीय मूल्य के सीधे विरोध में खड़ी है। हमने इस भारतीय दृष्टिकोण को देश के भीतर और विदेशों में स्पष्ट रूप से प्रस्तुत किया है।"</p>
<p>रक्षा मंत्री ने कहा कि जब तक आतंकवाद मौजूद रहेगा, यह सामूहिक शांति, विकास और समृद्धि को चुनौती देता रहेगा। उन्होंने कहा, "आतंकवाद को धार्मिक रंग देकर या इसे नक्सलवाद जैसी हिंसक विचारधारा से जोड़कर उचित ठहराने के प्रयास किए जाते हैं। यह अत्यंत खतरनाक है और एक प्रकार से आतंकवादियों को आड़ प्रदान करता है ताकि वे धीरे-धीरे अपने लक्ष्य की ओर बढ़ सकें। आतंकवाद केवल राष्ट्र-विरोधी कृत्य नहीं है, इसके कई आयाम हैं—संचालनात्मक, वैचारिक और राजनीतिक। इससे तभी निपटा जा सकता है जब हम इन सभी आयामों पर काम करें।"</p>
<p>पाकिस्तान द्वारा आतंकवाद को लगातार समर्थन दिए जाने पर श्री सिंह ने कहा, "भारत और पाकिस्तान दोनों ने एक ही समय पर स्वतंत्रता प्राप्त की थी। हालांकि आज भारत को विश्व स्तर पर सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) के लिए जाना जाता है, जबकि पाकिस्तान को एक अलग प्रकार के आईटी यानी 'अंतरराष्ट्रीय आतंकवाद' का केंद्र माना जाता है।" रक्षा मंत्री ने ऑपरेशन सिंदूर को भारतीय सशस्त्र बलों की एकजुटता और समन्वय का उत्कृष्ट उदाहरण बताया। उन्होंने कहा कि भारतीय थल सेना, भारतीय नौसेना और भारतीय वायु सेना ने एकजुट होकर और एकीकृत योजना के तहत कार्य किया, जिससे यह स्पष्ट हो गया कि भारत की सैन्य शक्ति अब अलग-अलग हिस्सों में काम नहीं करती, बल्कि यह एक संयुक्त, एकीकृत और वैश्विक शक्ति के रूप में उभरी है।</p>
<p>राजनाथ सिंह ने कहा कि भारत ने ऑपरेशन सिंदूर को अपनी शर्तों पर और अपने चुने हुए समय पर अंजाम दिया, और इसे पूरी तरह अपनी शर्तों पर ही रोका। उन्होंने कहा, "इस अभियान के दौरान हमने अत्यंत सटीकता के साथ केवल उन लोगों को निशाना बनाया जिन्होंने हमारे खिलाफ हमला किया था। हमने अभियान इसलिए नहीं रोका कि हमारी क्षमताएं समाप्त हो गई थीं या कम हो गई थीं। हमने इसे पूरी तरह अपनी शर्तों पर समाप्त किया। हम लंबे समय तक संघर्ष जारी रखने के लिए पूरी तरह तैयार थे। हमारे पास आवश्यक अतिरिक्त क्षमता और अचानक संकट के समय अपनी क्षमताओं को तेजी से बढ़ाने की अंतर्निहित शक्ति है।"</p>
<p>रक्षा मंत्री ने जोर देकर कहा कि भारत का सैन्य-औद्योगिक ढांचा लगातार यह साबित करता रहा है कि वह न केवल शांति काल की आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए तैयार है, बल्कि युद्ध के समय तेज आपूर्ति और रसद की मांगों को भी पूरा करने में सक्षम है। उन्होंने कहा कि उस अवधि के दौरान भारत ने परमाणु हमले की धमकी या दबाव में आए बिना अपने निर्धारित उद्देश्यों को पूरा किया। उन्होंने कहा, "यह नई विश्व व्यवस्था है, यह नए वैश्विक युग का नया भारत है। यह वह भारत है जो आतंकवाद और उसे प्रायोजित करने वालों के बीच कोई अंतर नहीं करता। यह हमारे प्रधानमंत्री की स्पष्ट नीति है, जिसने बदलते वैश्विक परिदृश्य में भारत को रूपांतरित किया है।"</p>
<p>रक्षा मंत्री ने ऑपरेशन सिंदूर को प्रतिरोधक क्षमता का प्रतीक बताते हुए कहा कि यद्यपि यह अभियान केवल 72 घंटों के भीतर समाप्त हो गया, लेकिन इसके पहले की तैयारी व्यापक और लंबी थी। उन्होंने बताया कि भारत की अतिरिक्त क्षमता, संसाधनों को तेजी से जुटाने की क्षमता, रणनीतिक भंडार और स्वदेशी रूप से विकसित हथियारों की सिद्ध विश्वसनीयता अब प्रतिरोधक नीति के अभिन्न अंग बन चुके हैं।राजनाथ सिंह ने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर के परिणामस्वरूप वैश्विक धारणा में उल्लेखनीय बदलाव और स्वदेशी हथियारों तथा रक्षा उत्पादों की विश्वसनीयता के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण देखने को मिल रहा है। उन्होंने कहा ,"कई देशों ने भारत से हथियार और रक्षा उपकरण खरीदने में गहरी रुचि दिखाई है। </p>
<p>आंकड़े स्वयं इसकी पुष्टि करते हैं। वित्त वर्ष 2025-26 में रक्षा निर्यात 38,424 करोड़ रुपये के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया, जो पिछले वित्त वर्ष की तुलना में 62.66 प्रतिशत की उल्लेखनीय वृद्धि है। हम इन मानकों को और आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध हैं।" जर्मनी की अपनी हाल की यात्रा पर रक्षा मंत्री ने कहा कि यूरोप की प्रमुख कंपनियां हमारे निजी रक्षा उद्योग और सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों के साथ सहयोग करने के लिए उत्सुक हैं, जो भारत की बढ़ती विश्वसनीयता का प्रमाण है। उन्होंने कहा कि विश्व में भारत की मजबूत स्थिति केवल उसकी सैन्य शक्ति से ही नहीं, बल्कि प्रतिरोधक क्षमता स्थापित करने की योग्यता से भी सुदृढ़ हुई है।</p>
<p>प्रतिरोधक क्षमता के स्वरूप में तेजी से हो रहे बदलाव को रेखांकित करते हुए श्री सिंह ने कहा कि साइबर क्षेत्र, अंतरिक्ष युद्ध और सूचना प्रौद्योगिकी इसके महत्वपूर्ण घटक बन गए हैं, और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) इस परिवर्तन के केंद्र में है। उन्होंने कहा, "ऑपरेशन सिंदूर के दौरान उपयोग की गई ब्रह्मोस जैसी अत्याधुनिक मिसाइल प्रणालियों से लेकर विभिन्न निगरानी प्लेटफार्मों तक, एआई का व्यापक और प्रभावी उपयोग किया गया है। इससे हमारी सटीकता और प्रहार क्षमता में वृद्धि हुई है। जहां बड़ी कार्रवाइयों की जानकारी अक्सर सार्वजनिक हो जाती है, वहीं अनगिनत छोटे अभियान और प्रक्रियाएं पहले से सक्रिय होकर खतरों को उत्पन्न होने से पहले ही निष्प्रभावी कर देती हैं। ऐसे सभी मामलों में एआई का व्यापक उपयोग किया जाता है ।"</p>
<p>एआई के व्यावहारिक उपयोग पर जोर देते हुए रक्षा मंत्री ने कहा कि यह आतंकवादियों का पता लगाने और निर्णायक प्रतिक्रिया देने में महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा, "एआई का एक अर्थ 'ऑगमेंटेड इन्फैंट्री' भी है। यह हमारे सैनिकों की क्षमताओं को काफी बढ़ा रहा है। आधुनिक युद्ध की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए हम अपनी सेना को तकनीक-आधारित, एकीकृत युद्ध मशीन में बदलने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहे हैं। इस उद्देश्य से सेना ने 'रुद्र' ब्रिगेड, 'भैरव' बटालियन, 'शक्तिबाण' तोपखाना रेजिमेंट और 'दिव्यास्त्र' बैटरियों जैसे चुस्त और आत्मनिर्भर युद्धक इकाइयों की स्थापना की है, जो आधुनिक मिश्रित खतरों का तुरंत और सशक्त जवाब देने में सक्षम हैं।"<br />हालांकि, श्री सिंह ने इस बात पर भी जोर दिया कि एआई को केवल सकारात्मक दृष्टिकोण से नहीं देखा जा सकता, क्योंकि डीपफेक, साइबर युद्ध और स्वायत्त हथियार प्रणालियां नए और गंभीर खतरे उत्पन्न कर रही हैं। रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह, रक्षा अनुसंधान एवं विकास विभाग के सचिव तथा डॉ. समीर वी. कामत और एकीकृत रक्षा स्टाफ के प्रमुख एयर मार्शल आशुतोष दीक्षित भी इस कार्यक्रम में उपस्थित थे।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 30 Apr 2026 14:43:33 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>पश्चिम एशिया संकट के बीच अमेरिकी नौसेना प्रमुख ने दिया त्यागपत्र, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ थे अच्छे संबंध : युद्ध विभाग ने की पुष्टि</title>
                                    <description><![CDATA[अमेरिकी नौसेना प्रमुख जॉन फेलन ने युद्ध मंत्री पीट हेगसेथ के साथ मतभेदों के चलते तत्काल प्रभाव से इस्तीफा दे दिया है। हंग काओ कार्यवाहक प्रमुख होंगे। यह इस्तीफा ऐसे समय आया है जब अमेरिका ने हॉर्मुज जलडमरूमध्य की रणनीतिक घेराबंदी कर रखी है, जिसे राष्ट्रपति ट्रंप ने एक बड़ी सफलता बताया है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/us-navy-chief-resigns-amid-west-asia-crisis-had-good/article-151407"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/अमेरिकी-नौसेना-प्रमुख.png" alt=""></a><br /><p>वॉशिंगटन। अमेरिकी नौसेना प्रमुख जॉन फेलन ने त्यागपत्र दे दिया है। इसकी जानकारी अमेरिका के युद्ध विभाग ने दी। विभाग ने बुधवार को एक बयान में कहा, "नौसेना प्रमुख जॉन सी. फेलन तत्काल प्रभाव से पद छोड़ रहे हैं।” बयान में कहा गया है कि उप प्रमुख हंग काओ नौसेना के कार्यवाहक प्रमुख के रूप में सेवा देंगे। एक्सियोस समाचार पोर्टल की रिपोर्ट के अनुसार, फेलन की विदाई कई लोगों के लिये आश्चर्यजनक रही। उनके संबंध युद्ध मंत्री पीट हेगसेथ के साथ ‘ठीक नहीं’ थे, लेकिन कथित तौर पर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ उनके संबंध अच्छे थे।</p>
<p>समाचार पोर्टल ने एक सूत्र के हवाले से कहा, “फेलन यह नहीं समझ पाये कि वह सर्वोच्च अधिकारी नहीं थे। उनका काम दिये गये आदेशों का पालन करना है, न कि उन आदेशों का पालन करना जो उनके अनुसार दिये जाने चाहिये। ” फेलन ने मंगलवार को नौसेना के भविष्य और 'गोल्डन फ्लीट' पहल सहित इसके प्रमुख निवेशों पर चर्चा करने के लिये संवाददाताओं से बात की थी। फेलन का त्यागपत्र एक महत्वपूर्ण मोड़ पर आया है। अमेरिकी नौसेना ने 13 अप्रैल को हॉर्मुज जलडमरूमध्य के दोनों ओर ईरानी बंदरगाहों में प्रवेश करने और बाहर निकलने वाले सभी समुद्री यातायात की घेराबंदी शुरू कर दी है। दुनिया के तेल, पेट्रोलियम उत्पादों और तरल प्राकृतिक गैस की आपूर्ति का लगभग 20 प्रतिशत हिस्सा हॉर्मुज जलडमरूमध्य से होकर गुजरता है।</p>
<p>अमेरिका का कहना है कि गैर-ईरानी जहाज हॉर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने के लिये स्वतंत्र हैं, जब तक कि वे तेहरान को मार्ग कर नहीं देते। ईरानी अधिकारियों ने मार्ग कर लगाने की घोषणा नहीं की है, लेकिन ऐसी योजनाओं पर चर्चा की है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरानी बंदरगाहों की अमेरिकी घेराबंदी को ‘एक जबरदस्त सफलता’ बताया है और कहा है कि वाशिंगटन तब तक हॉर्मुज जलडमरूमध्य को नहीं खोलेगा, जब तक कि उसके पास ‘अंतिम समझौता’ न हो।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 23 Apr 2026 14:04:38 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>तिब्बत में चीन की भारी सैन्य तैयारी से भारत को बड़ा खतरा</title>
                                    <description><![CDATA[ इनका इस्तेमाल सैनिकों और हथियारों की आवाजाही के लिए, निगरानी बढ़ाने के लिए और आपात स्थिति में मदद पहुंचाने के लिए कर सकता है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/big-threat-to-india-due-to-chinas-heavy-military-preparation/article-91881"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-09/630400-size-(12)6.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। चीन तिब्बत में हेलिकॉप्टर और हवाई अड्डों का जाल बिछा रहा है। यह भारत की सुरक्षा को बड़ी चुनौती है। तक्षशिला इंस्टिट्यूशन की एक रिसर्च में खुलासा हुआ है कि तिब्बत में चीन के लगभग 90 प्रतिशत हेलीपैड समुद्र तल से 3,300 से 5,300 मीटर,10,000 से 17,400 फीट की ऊंचाई पर हैं।</p>
<p>इनमें से 80 प्रतिशत हेलीपैड 3,600 मीटर से भी ज्यादा ऊंचाई पर हैं। यह खुलासा भारत के लिए खतरे की घंटी है क्योंकि चीन इन हेलीपैड का इस्तेमाल सैनिकों और हथियारों को तेजी से सीमा पर पहुंचाने के लिए कर सकता है। रिसर्च में यह भी बताया गया है कि चीन इन हेलीपैड का निर्माण भारत और भूटान के साथ लगती सीमा के पास कर रहा है। ये हेलीपैड चीन की सैन्य रणनीति का अहम हिस्सा हैं और इनसे भारत के लिए खतरा बढ़ गया है।</p>
<p>रिसर्च में 109 हेलीपैड का अध्ययन किया गया है। इनमें से केवल दो हेलीपैड 780 से 2600 मीटर की ऊंचाई पर हैं। 32 हेलीपैड 2700 से 3600 मीटरए 44 हेलीपैड 3700 से 4300 मीटर और 25 हेलीपैड 4400 से 4700 मीटर की ऊंचाई पर स्थित हैं। छह हेलीपैड 4800 से 5400 मीटर की ऊंचाई पर हैं। बंगलुरु स्थित तक्षशिला इंस्टिट्यूशन में भूस्थानिक अनुसंधान कार्यक्रम के प्रमुख प्रोफेसर वाई नित्यानंदम ने द न्यू इंडियन एक्सप्रेस पर लेख लिखा है। इसमें उन्होंने कहा कि चीन इन हेलीपैड का इस्तेमाल सैन्य अभियानों के लिए कर सकता है। </p>
<p>वह इनका इस्तेमाल सैनिकों और हथियारों की आवाजाही के लिए, निगरानी बढ़ाने के लिए और आपात स्थिति में मदद पहुंचाने के लिए कर सकता है।</p>
<p>डॉ नित्यानंदम की अगुवाई में हुई रिसर्च की रिपोर्ट में कहा गया है कि चीन ऊंचे इलाकों में अपनी सैन्य क्षमता को तेजी से बढ़ा रहा है। पहले ऊंचाई वाले इलाकों में हेलीकॉप्टर उड़ाना चीन की कमजोरी मानी जाती थी, लेकिन अब वह इस कमी को तेजी से दूर कर रहा है। चीन अपनी सैन्य रणनीति के तहत हेलीपैड के साथ- साथ हवाई पट्टियों का भी विस्तार कर रहा है। वह 1ए000 मीटर से कम लंबाई वाली हवाई पट्टियों को मानवरहित विमानों के लिए इस्तेमाल करने की योजना बना रहा है।</p>
<p>पिछले एक दशक में चीन ने हेलीकॉप्टर के बुनियादी ढांचे में भारी निवेश किया है। जिससे उसकी सैन्य क्षमता में वृद्धि हुई है। यह निवेश केवल 2017 के डोकलाम गतिरोध या 2020 के गलवान घाटी संघर्ष जैसी घटनाओं की प्रतिक्रिया नहीं है। बल्कि, यह एक सोची-समझी रणनीति है। जिसका उद्देश्य ऐसे क्षेत्र में दीर्घकालिक लाभ सुनिश्चित करना है जहां भौगोलिक परिस्थितियां और ऊंचाई पीएलए  सैनिकों के लिए गंभीर चुनौती पेश करती हैं।</p>
<p>उदाहरण के लिए चीन के कुछ हेलीकॉप्टरों को विशेष रूप से तिब्बती पठार की कठिन परिस्थितियों में काम करने के लिए डिजाइन किया गया है। जो प्रतिकूल परिस्थितियों से उत्पन्न बाधाओं को दूर करने के लिए चीन की इच्छा शक्ति को दर्शाता है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 29 Sep 2024 12:25:54 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>नौसेना जवान मुनेश कुमार पंचतत्व में विलीन,  गांव बिरोल में सैन्य सम्मान के साथ हुई अंत्येष्टि</title>
                                    <description><![CDATA[ कस्बे के बिरोल गांव में मंगलवार को ज्यूं ही मुनेश कुमार का पार्थिव शरीर घर पहुंचा तो कोहराम मच गया। पत्नी किरण देवी का रो रो कर हाल बुरा हो गया। मुनेश कुमार राड नौसेना में था पिछले दो साल से ड्यूटी के दौरान जिंदगी और मौत से लड़ रहा था सोमवार सुबह 27 जून को उन्होंने अंतिम सांस ली।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jhunjhunu/navy-jawan-munesh-kumar-merged-with-panchtatva--cremated-with-military-honors-in-village-birol/article-13192"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-06/nwh-04-photo-28-june-2022.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>नवलगढ़।</strong> कस्बे के बिरोल गांव में मंगलवार को ज्यूं ही मुनेश कुमार का पार्थिव शरीर घर पहुंचा तो कोहराम मच गया। पत्नी किरण देवी का रो रो कर हाल बुरा हो गया। मुनेश कुमार राड नौसेना में था पिछले दो साल से ड्यूटी के दौरान जिंदगी और मौत से लड़ रहा था सोमवार सुबह 27 जून को उन्होंने अंतिम सांस ली मुनेश 6 बहिनों का इकलौता भाई था इनके दो पुत्र हैं पत्नी किरण भी राजस्थान पुलिस में तैनात है। मुनेश अपनी बटालियन में होनहार ओर बहादुर बताया जाता था।</p>
<p>मंगलवार को झुन्झुनू जिले के नवलगढ़ तहसील के पैतृक गांव बिरोल में सैन्य सम्मान के साथ उनका अंतिम ससंस्कार किया गया। भारत माता की जय मुनेश कुमार अमर रहे के नारों से आस-पास का माहौल गूंजने लगा। नौ सेना की टीम ने मुनेश को गार्ड आॅफ  आॅनर दिया। वहीं नौ सेना के अधिकारियों ने मुनेश कुमार की पत्नी को तिरंगा सौंपा। इस मौके पर सेना के अधिकारियों व स्थानीय लोगों ने पुष्प चक्र चढ़ा कर नमन किया। इस दौरान बड़ी संख्या में आसपास के गांवों के हजारों लोगों ने नम आंखों से विदाई दी।</p>
<p>अंतिम विदाई के दौरान गौरव की बात यह थी कि शहीद पत्नी श्मशान घाट जाकर पहले तो भारत माता की जय बोली फिर पति को अंतिम प्रणाम कर फक्र से विदाई दी। इस समय सब की आंखे नम हो गई। फिर सेना के अधिकारियों ने पत्नी किरण को तिरंगा भेट किया। शहीद के पिता गोपाल राम का निधन पहले ही हो चुका था माता चावली देवी जवान बेटे का शव देखकर सुदबुद खो बैठी उनकी बूढ़ी आंखे दबदबा गई और कहने लगी बेटा मेरी अर्थी को कंधा कोन देगा मेरे से पहले दुनिया छोड़ दी।</p>
<p>शहीद मुनेश के दो पुत्र एक 13 और दूसरा 10 साल का है।इस मौके पर जिला सैनिक कल्याण अधिकारी परेवज हुसैन, नवलगढ़ तहसीलदार ज्वालासहाय मीणा, नवलगढ चैयरमैन शोएब खत्री, पालिका उपाध्यक्ष कैलाश चोटिया, विधायक भाई सुरेश शर्मा, पबाना सरपंच विजेन्द्रसिंह डोटासरा, बिरोल सरपंच प्रतिनिधि नरेन्द्र कडवाल, पूर्व सरपंच घासीराम सैनी, पंचायत समिति सदस्य प्रताप पूनिया, भाजयुमो के पूर्व जिलाध्यक्ष सतीश गजराज, भाजपा जिला महामंत्री योगेन्द्र मिश्रा, पूर्व पार्षद विजेन्द्र सिंह सुण्डा, मेजर रामलाल साखनिया, मेजर जय राम सिंह सहित अनेक लोगो ने पुष्प चढ़ाकर नमन किया। बडे बेटे ने मुखागिन दी। इस मौके पर आसपास के हजारों लोगों ने अंतिम संस्कार में भाग लिया। इससे पूर्व नवलगढ़ से गांव बिरोल तक तिरंगा रैली निकाली।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>झुंझुनूं</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 29 Jun 2022 13:26:57 +0530</pubDate>
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