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                <title>sovereignty - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <title>मिडिल ईस्ट में बढ़ा युद्ध का खतरा: अमेरिका पर ईरान का बड़ा पलटवार, कुवैत और बहरीन में मिसाइल-ड्रोन हमला</title>
                                    <description><![CDATA[अमेरिकी एयरस्ट्राइक के जवाब में ईरान की आईआरजीसी (IRGC) ने कुवैत और बहरीन में स्थित अमेरिकी सैन्य व नौसैनिक ठिकानों पर भीषण मिसाइल और ड्रोन हमले शुरू कर दिए हैं। ईरानी कमांडर ने अमेरिकी ठिकानों को "नरक" बनाने की चेतावनी दी है, जिसके बाद बहरीन में रेड अलर्ट और सायरन बजाए गए हैं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/danger-of-war-increases-in-the-middle-east-irans-big/article-158267"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-06/middel-east.png" alt=""></a><br /><p>मॉस्को। इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) की नौसेना और एयरोस्पेस फोर्स ने अमेरिका के हमलों के जवाब में कुवैत और बहरीन में मिसाइल और ड्रोन ऑपरेशन शुरू किए। आईआरजीसी ने यह भी कहा कि अमेरिका ने ईरान की पांच तटीय चौकियों पर हमला किया था। आईआरजीसी की नौसेना के कमांडर ने कहा कि आने वाले दिनों में मध्य पूर्व में मौजूद अमेरिका के ठिकानों का हाल "नरक" जैसा होगा। आईआरजीसी नौसेना के कमांडर के हवाले से कहा, "इस क्षेत्र में अमेरिकी ठिकानों का हिसाब-किताब एक अलग मुद्दा है। आने वाले दिनों में उन्हें नरक जैसी स्थिति का सामना करना पड़ेगा।" कमांडर ने यह भी कहा कि घुसपैठियों पर गोलीबारी से होर्मुज जलडमरूमध्य में मौजूद दूसरे जहाजों को यह याद दिलाया जा सकेगा कि वहां से गुजरने का रास्ता बिना किसी रुकावट के खुला है।</p>
<p>आईआरजीसी ने कहा कि युद्धविराम का उल्लंघन ईरान-अमेरिका समझौते के खिलाफ है और इससे विवाद को सुलझाने की कूटनीतिक प्रक्रिया पूरी तरह से रुक जाएगी। आईआरजीसी के हवाले से बताया जा रहा है, "युद्धविराम का उल्लंघन इस्लामाबाद में हुए समझौते की पहली शर्त के खिलाफ है और इससे सभी कूटनीतिक प्रक्रियाएं पूरी तरह से बंद हो जाएंगी।" प्रसारक के अनुसार,आईआरजीसी ने बताया कि उसके जवाबी हमलों का निशाना कुवैत में अमेरिकी एयरबेस और बहरीन में अमेरिकी नौसैनिक अड्डा था। कुवैती सेना ने कहा कि उसकी वायु रक्षा प्रणाली मिसाइल और ड्रोन हमलों को नाकाम कर रही हैं। इससे पहले, बहरीन में चेतावनी वाले सायरन बजे और लोगों से सुरक्षित जगहों पर शरण लेने को कहा गया। देश के गृह मंत्रालय ने 'एक्स' पर कहा, "संभावित खतरे के कारण चेतावनी सायरन बजाया गया है। नागरिकों और निवासियों से शांत रहने, नजदीकी सुरक्षित जगह पर जाने और बहुत जरूरी न होने पर मुख्य सड़कों का इस्तेमाल न करने की अपील की जाती है।"</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 28 Jun 2026 14:54:26 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>होर्मुज़ जलडमरूमध्य में बढ़ा तनाव: ईरान के कथित ड्रोन हमले का अमेरिका ने दिया करारा जवाब, 10 ठिकाने तबाह करने का दावा</title>
                                    <description><![CDATA[कमर्शियल तेल टैंकर पर ड्रोन हमले के जवाब में अमेरिकी सेना ने होर्मुज़ जलडमरूमध्य के पास ईरान के 10 सैन्य ठिकानों पर भीषण बमबारी की है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इसे सीज़फायर का उल्लंघन बताते हुए चेतावनी दी कि यदि ईरान नहीं सुधरा, तो उसका अस्तित्व खत्म कर दिया जाएगा।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/tension-increased-in-the-strait-of-hormuz-america-gave-a/article-158265"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-06/hormuz.png" alt=""></a><br /><p>मॉस्को। अमेरिका की सेंट्रल कमांड (सेंटकॉम) ने कहा कि अमेरिका की सेना ने शनिवार रात होर्मुज़ जलडमरूमध्य और उसके आस-पास ईरान के 10 सैन्य ठिकानों पर हमला किया। यह कार्रवाई एक वाणिज्यिक जहाज़ पर ईरान के कथित हमले के जवाब में की गई। कमांड ने ‘एक्स’ पर कहा, "अमेरकी नेवी और वायु सेना के लड़ाकू जहाजों ने आज रात होर्मुज़ जलडमरूमध्य और उसके आस-पास कई जगहों पर ईरान के 10 सैन्य ठिकानों पर हमले किए। ये हमले एम/टी किकू पर ईरान के ड्रोन हमले के जवाब में किए गए।"</p>
<p>सेंटकॉम ने इन हमलों का फ़ुटेज भी जारी किया। सेंटकॉम ने पहले दावा किया था कि शनिवार सुबह 4:30 बजे होर्मुज़ जलडमरूमध्य में पनामा के झंडे वाले टैंकर 'किकू’ पर एक ईरानी ड्रोन ने हमला किया था। इस टैंकर में 20 लाख बैरल से ज़्यादा तेल लदा हुआ था। सेंटकॉम ने आगे कहा, "होर्मुज़ जलडमरूमध्य से कमर्शियल जहाज़ों का आना-जाना जारी है।" अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने यह भी कहा कि अमेरिका ने ईरान में कई ठिकानों पर हमले किए हैं। ट्रंप ने 'ट्रुथ सोशल' पर कहा, "अमेरिकी विमानों ने अभी-अभी ईरान के मिसाइल और ड्रोन स्टोरेज ठिकानों और तटीय रडार साइटों पर हमले किए हैं।" उन्होंने इसे "सीज़फायर समझौते का फिर से उल्लंघन" करने का जवाब बताया।</p>
<p>अमेरिकी नेता ने चेतावनी दी, "एक समय ऐसा आ सकता है जब हम और ज़्यादा समझदारी से काम न ले पाएं और हमें उस काम को सैन्य तरीके से पूरा करने के लिए मजबूर होना पड़े जिसे हमने बहुत सफलतापूर्वक शुरू किया था। अगर ऐसा हुआ, तो इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ़ ईरान का अस्तित्व ही खत्म हो जाएगा!" इससे पहले, ईरानी मीडिया ने ईरान के केशम द्वीप और सिरिक शहर के पास, साथ ही देश के दक्षिण में बंदर-ए-लेंघे बंदरगाह शहर के पास हमलों की खबर दी थी। अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने एक कमर्शियल जहाज़ पर ईरान के कथित हमले के जवाब में ईरान में कई ठिकानों पर हमले की पुष्टि की।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 28 Jun 2026 10:19:05 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>ईरान की कूटनीतिक पहल: आईएईए निरीक्षकों को मंज़ूरी देने से किया इनकार, अमेरिकी उपराष्ट्रपति के बयान का किया खंड़न</title>
                                    <description><![CDATA[ईरान ने अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस के उस दावे को खारिज कर दिया है जिसमें कहा गया था कि ईरान आईएईए निरीक्षकों की वापसी पर सहमत हो गया है। ईरानी विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि स्विट्जरलैंड वार्ता में मिसाइल क्षमता पर कोई चर्चा नहीं हुई। हालांकि, अमेरिका ने 60 दिनों के लिए प्रतिबंधों में ढील दी है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/irans-diplomatic-initiative-to-deny-approval-to-iaea-inspectors-contradicts/article-157884"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-06/iran.png" alt=""></a><br /><p>तेहरान। ईरान ने अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस के उस बयान का खंडन किया है कि उसने अंतरराष्ट्रीय परमाणु निरीक्षकों (आईएईए) को देश में आने पर सहमति दे दी है। वेंस ने दावा किया था कि अमेरिका और ईरान के बीच जारी विवाद को खत्म करने के लिए अंतिम समझौते पर पहुंचने के लिए हुई बातचीत के पहले दौर के बाद ईरान ने इस आशय की सहमति दी है। स्विट्जरलैंड के रिसॉर्ट बर्गेनस्टॉक में हुई बातचीत दोनों पक्षों के बीच एक अहम कूटनीतिक पहल थी।</p>
<p>बातचीत के बाद वेंस ने कहा कि निरीक्षकों की वापसी को लेकर आईएईए के साथ बातचीत आज ही शुरू हो सकती है। उन्होंने इस बैठक को भविष्य की प्रगति के लिए बहुत अच्छा नींव करार दिया था। ईरान के विदेश मंत्रालय ने हालांकि, इस दावे को तुरंत खारिज कर दिया। ईरान के विदेश मंत्रालय ने कहा कि स्विट्जरलैंड में अमेरिका के साथ बातचीत में ईरान की मिसाइल क्षमताओं पर कोई चर्चा नहीं हुई है और उसने परमाणु संयंत्रों का निरीक्षण करने के लिए आईएईए के निरीक्षकों को अनुमति देने से इनकार कर दिया।</p>
<p>प्रवक्ता इस्माइल बकाई ने कहा कि ईरान ने परमाणु निरीक्षणों को लेकर कोई नया वादा नहीं किया है। उन्होंने कहा कि संयुक्त राष्ट्र के परमाणु निरीक्षकों के साथ कोई भी सहयोग, ईरान की संसद और सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद द्वारा बनाए गए मौजूदा कानूनी एवं संस्थागत संरचनाओं के अंतर्गत सख्ती से जारी रहेगा। निरीक्षण को लेकर यह मतभेद अमेरिका, ईरान, कतर और पाकिस्तान से जुड़ी व्यापक कूटनीतिक गतिविधियों के बीच सामने आया है।</p>
<p>मध्यस्थता करने वाले देशों ने एक संयुक्त बयान में कहा था कि बातचीत के शुरुआती दौर के बाद अमेरिका और ईरान दोनों ही 60 दिनों के भीतर अंतिम समझौते तक पहुंचने के लिए एक योजना पर सहमत हो गए हैं। कूटनीतिक घटनाक्रम के साथ-साथ अमेरिका ने अपनी नीति में एक बड़ा बदलाव करते हुए ईरान पर लगे प्रतिबंधों में कुछ समय के लिए ढील दी है। अमेरिकी वित्त मंत्रालय ने 60 दिनों के लिए प्रतिबंधों में छूट दी है जिससे ईरान दशकों में पहली बार अमेरिकी डॉलर में तेल बेच सकेगा।</p>
<p>इस छूट से लंबे समय से चले आ रहे अमेरिकी प्रतिबंधों में कुछ समय के लिए छूट मिली है जिससे 21 अगस्त तक ईरान के लिए कच्चा तेल और पेट्रोकेमिकल का निर्यात, बिक्री एवं परिवहन करना संभव हो गया है। इससे ईरानी तेल को सीधे अमेरिका में आयात करने की भी इजाज़त मिली है और उन अंतर्राष्ट्रीय बैंकिंग, इंश्योरेंस एवं नौवहन चैनलों तक पहुंच फिर से बहाल हुई है जिन पर पहले बहुत ज़्यादा पाबंदियां थीं।</p>
<p>अमेरिकी वित्त मंत्रालय के अधिकारियों ने कहा कि ईरान से प्राप्त वादों के बदले प्रतिबंधों में ढील दी गई। इन वादों में रणनीतिक तौर पर अहम होर्मुज़ जलडमरूमध्य की सुरक्षा बनाए रखना और आईएईए निरीक्षकों की वापसी की इजाज़त देना शामिल है। उन्होंने अहम समुद्री रास्ते को फिर से खोलना और परमाणु पारदर्शिता को समझौते की मुख्य शर्तें कहा। उपराष्ट्रपति वेंस ने यह भी संकेत दिया कि बातचीत परमाणु मुद्दे से आगे बढ़कर क्षेत्रीय सुरक्षा चिंताओं तक भी हुई जिसमें होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने की संभावित व्यवस्था और क्षेत्र में तनाव कम करने के लिए समन्वय तंत्र जैसे विषय शामिल थे।</p>
<p>अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी सोशल मीडिया पर कहा कि ईरान मुख्य हथियारों के निरीक्षण की इजाज़त देने पर सहमत हो जाएगा। हालांकि, ईरानी अधिकारियों ने इस बात को सख्ती से खारिज कर दिया और दोहराया कि निरीक्षण के लिए किसी नई व्यवस्था पर सहमति नहीं बनी है। गौरतलब है कि ईरान और दुनिया की बड़ी शक्तियां अमेरिका, ब्रिटेन, फ्रांस, जर्मनी, रूस और चीन के बीच 2015 में हुए परमाणु समझौते हुआ था। 2015 के इस समझौते के तहत आईएईए को ईरान के परमाणु संयंत्रों का निरीक्षण करने की इजाज़त थी लेकिन 2018 में राष्ट्रपति ट्रंप के पहले कार्यकाल के दौरान अमेरिका ने इसे खराब समझौता बताते हुए खुद को इससे अलग कर लिया।</p>
<p>फरवरी 2026 में इज़रायल और अमेरिका के साथ हुए 12 दिनों के टकराव के दौरान ईरान के परमाणु ठिकानों पर सैन्य हमले हुए। इसके बाद ईरान ने आईएईए निरीक्षकों की पहुंच पर रोक लगा दी और बाद में एजेंसी ने देश से अपने बाकी कर्मचारियों को वापस बुला लिया।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 23 Jun 2026 18:35:34 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>भारतीय विदेश मंत्रालय की पाकिस्तान को दो टूक: खुद का रिकॉर्ड खराब, भारत के आंतरिक मामलों में बोलने का नहीं है अधिकार</title>
                                    <description><![CDATA[विदेश मंत्रालय ने पाकिस्तानी राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी की टिप्पणी को भारत के आंतरिक मामलों में अनावश्यक हस्तक्षेप करार दिया। प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि अल्पसंख्यकों के उत्पीड़न के खराब ट्रैक रिकॉर्ड वाले देश को दूसरों को उपदेश देने का कोई अधिकार नहीं है। यह बयान कट्टरता से प्रेरित एक सुनियोजित राजनीतिक हमला है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/indian-foreign-ministry-bluntly-spoils-its-own-record-on-pakistan/article-157631"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-06/india2.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। विदेश मंत्रालय ने पाकिस्तान के राष्ट्रपति की टिप्पणी को भारत के आंतरिक मामलों में अनावश्यक हस्तक्षेप करार देते हुए कहा है कि जिस देश का खुद का मानव अधिकार का रिकॉर्ड खराब है उसे दूसरों को उपदेश नहीं देना चाहिए। विदेश मंत्रालय के आधिकारिक प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने भारत में मुस्लिम धार्मिक स्थलों को लेकर की गयी पाकिस्तान के राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी की टिप्पणी पर शनिवार देर रात सख्त प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए उसे सिरे से खारिज कर दिया।</p>
<p>जायसवाल ने कहा , “भारत पाकिस्तान के राष्ट्रपति द्वारा की गयी अनावश्यक टिप्पणियों को स्पष्ट रूप से अस्वीकार करता है। किसी भी स्थिति में भारत के आंतरिक मामलों पर टिप्पणी करने का उन्हें कोई अधिकार नहीं है।“ उन्होंने कहा कि ये टिप्पणियाँ विशेष रूप से हास्यास्पद हैं, क्योंकि मानवाधिकारों के मामले में पाकिस्तान का अपना रिकॉर्ड अत्यंत खराब रहा है, जो वैश्विक स्तर पर चर्चा का विषय है। विभिन्न धर्मों के अल्पसंख्यकों को व्यवस्थित रूप से निशाना बनाने और उनका उत्पीड़न करने का पाकिस्तान का लंबा इतिहास है।</p>
<p>उन्होंने कहा कि इस वास्तविकता को देखते हुए पाकिस्तान के राष्ट्रपति की टिप्पणियों को केवल एक सुनियोजित राजनीतिक हमले के रूप में ही देखा जा सकता है, जो पाकिस्तान की कट्टरता और घृणा पर आधारित राष्ट्रीय नीतियों से प्रेरित है।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 21 Jun 2026 14:23:07 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>ईरान का बड़ा ऐलान: यूरेनियम रहेगा देश में, अमेरिका से समझौते के बीच बधाई बड़ा बयान</title>
                                    <description><![CDATA[ईरान ने स्पष्ट किया है कि वह संवर्धित यूरेनियम को देश से बाहर नहीं भेजेगा, बल्कि देश के भीतर ही इसकी सांद्रता कम (डाउन-ब्लेंडिंग) करेगा। अमेरिका के साथ हुए हालिया समझौते के तहत, वाशिंगटन 30 दिनों के भीतर ईरान से सटे इलाकों से अपने सैनिक हटाने पर सहमत हुआ है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/irans-big-announcement-uranium-will-remain-in-the-country-amidst/article-157369"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-06/024.png" alt=""></a><br /><p>तेहरान। ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने कहा है कि ईरान अपनी इस बात पर कायम है कि देश से संवर्धित यूरेनियम बाहर नहीं ले जाया जाएगा। बघाई ने कहा, "हमने शुरू से ही कहा है कि संवर्धित सामग्री देश से बाहर नहीं ले जाई जाएगी। एक विकल्प ईरान के भीतर ही इसकी सांद्रता कम करना (डाउन-ब्लेंडिंग) है। यह कोई नया विकल्प नहीं है।" उनका यह बयान संघर्ष खत्म करने के लिए अमेरिका के साथ समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर की घोषणा के बाद दिया। उम्मीद है कि इसके बाद ईरान के परमाणु कार्यक्रम और ईरान पर लगे प्रतिबंधों को लेकर बातचीत होगी। </p>
<p>रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका अंतिम समझौते के 30 दिनों के भीतर ईरान से सटे इलाकों से अपने सैनिक हटा लेगा और तब तक अतिरिक्त बल तैनात नहीं करेगा। समझौते के चौथे पैराग्राफ में लिखा है, "अमेरिका अंतिम समझौते पर हस्ताक्षर के 30 दिनों के भीतर ईरान से सटे इलाकों से सैनिक हटाने का भी वादा करता है।" साथ ही, दस्तावेज़ के नौवें पैराग्राफ के अनुसार, समझौते पर हस्ताक्षर के बाद अमेरिका इस क्षेत्र में अतिरिक्त बल नहीं भेजेगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 18 Jun 2026 17:14:25 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>जी-7 शिखर सम्मेलन में पीएम मोदी : AI के लिए प्रस्तुत किया 'मानव' विजन, सुरक्षा और समावेशिता पर दिया जोर</title>
                                    <description><![CDATA[प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जी-7 सम्मेलन में एआई के लिए भारत का 'मानव' विजन प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा कि एआई का विकास सुरक्षा, गति और जनहित पर आधारित होना चाहिए। पीएम ने डीपफेक और साइबर खतरों से निपटने के लिए वैश्विक सहयोग और 'ग्लोबल साउथ' तक तकनीक पहुंचाने का आह्वान किया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/development-of-artificial-intelligence-should-be-based-on-the-basic/article-157305"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-06/modii.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने जी-7 देशों के सामने कृत्रिम बुद्धिमत्ता के बारे में भारत के 'मानव' विजन का उल्लेख करते हुए कहा है कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता का विकास समावेशिता, सुरक्षा और जनहित के मूल सिद्धांतों पर आधारित होना चाहिए। जी-7 देशों के 52 वें शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए फ्रांस यात्रा पर गये पीएम मोदी ने बुधवार रात फ्रांस के एवियन में "इंश्योरिंग ए सेफ, रैपिड एंड एफिशिएंट रोल आउट ऑफ आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस" विषय पर आयोजित आउटरीच सत्र को संबोधित किया।</p>
<p>पीएम मोदी ने कहा कि एआई एक परिवर्तनकारी शक्ति है जिसमें मानव सभ्यता की दिशा को फिर से परिभाषित करने की क्षमता है, लेकिन इसे लोगों को सशक्त बनाने वाला भी होना चाहिए। उन्होंने विस्तार से बताया कि इसी व्यापक सोच के साथ भारत ने हाल ही में एआई इम्पैक्ट समिट की मेजबानी की थी। प्रधानमंत्री ने एआई के लिए भारत के 'मानव' विजन को रेखांकित किया, जो इस बात पर जोर देता है कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता का विकास समावेशिता, सुरक्षा और जनहित के मूल सिद्धांतों पर आधारित होना चाहिए।</p>
<p>प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत ने हमेशा साइबरस्पेस को एक वैश्विक सार्वजनिक संपत्ति के रूप में देखा है और लोकतांत्रिक देशों की ऐसी एआई मॉडल तक पहुंच होनी चाहिए जो उनके महत्वपूर्ण सूचना बुनियादी ढांचे को सुरक्षित कर सकें और उन्हें साइबर खतरों से निपटने में मदद कर सकें। उन्होंने एआई विकास के लिए एक एकीकृत दृष्टिकोण का आह्वान किया, जिसमें सुरक्षा, गति और दक्षता पर एक साथ ध्यान दिया जाए।</p>
<p>इस संबंध में, उन्होंने चार सुझाव दिए: एआई सिस्टम को 'सेफ-बाय-डिजाइन' (निर्माण के स्तर पर ही सुरक्षित) होना चाहिए। एआई के इस्तेमाल के साथ-साथ सामान्य मानक, परीक्षण फ्रेमवर्क और नियामक दिशानिर्देश होने चाहिए। डीपफेक, गलत सूचना और साइबर धोखाधड़ी से निपटने के लिए प्रभावी वैश्विक सहयोग होना चाहिए और एक समावेशी दुनिया सुनिश्चित करने के लिए एआई का लाभ 'ग्लोबल साउथ' के देशों तक पहुँचना चाहिए।</p>
<p>प्रधानमंत्री मोदी ने संबोधन का समापन करते हुए कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता का उद्देश्य मानव क्षमता का विस्तार करना, मानवीय विकल्पों को सशक्त बनाना और मानव गरिमा की रक्षा करना होना चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत इन उद्देश्यों को बढ़ावा देने के लिए अपने सहयोगियों के साथ मिलकर काम करना जारी रखेगा।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 18 Jun 2026 14:08:33 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>ईरान की इजरायल को दोटूक, लेबनान में संघर्ष विराम उल्लंघन पर दी कड़ी सैन्य कार्रवाई की चेतावनी</title>
                                    <description><![CDATA[ईरान ने चेतावनी दी है कि यदि इजरायल ने दक्षिणी लेबनान में अपनी 'शरारत' बंद नहीं की, तो उसे कड़े परिणाम भुगतने होंगे। ईरान-अमेरिका शांति समझौते के बीच, तेहरान ने इजरायल पर 84 बार संघर्ष विराम उल्लंघन का आरोप लगाते हुए कब्जे वाले क्षेत्रों से पूरी तरह पीछे हटने की मांग की है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/cant-tolerate-it-anymore-iran-accuses-israel-of-ceasefire-violations/article-157251"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-06/iran-israel.png" alt=""></a><br /><p>तेहरान। ईरान ने चेतावनी दी है कि यदि इजरायल ने दक्षिणी लेबनान में अपनी ‘शरारत’ बंद नहीं की, तो उसे ईरानी सशस्त्र बलों की ‘कड़ी’ प्रतिक्रिया के लिए तैयार रहना होगा। ईरान के मुख्य सैन्य कमान ‘खातम अल-अंबिया सेंट्रल हेडक्वार्टर्स’ ने मंगलवार को एक आधिकारिक बयान में कहा कि जब से अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने युद्ध समाप्ति की घोषणा की है, तब से इजरायली सेना ने दक्षिणी लेबनान में 84 बार संघर्ष विराम का उल्लंघन किया है और वह अब भी ‘पीड़ित लेबनानी लोगों के खिलाफ अपराध और उनकी हत्या’ जारी रखे हुए है।</p>
<p>रिपोर्ट के अनुसार, ईरान, अमेरिका और पाकिस्तान ने सोमवार तड़के लेबनान सहित पश्चिम एशिया क्षेत्र में सभी मोर्चों पर युद्ध समाप्त करने के लिए एक समझौता ज्ञापन को अंतिम रूप देने की घोषणा की थी। ईरान और अमेरिका शुक्रवार को स्विट्जरलैंड में इस समझौता ज्ञापन पर आधिकारिक रूप से हस्ताक्षर करने वाले हैं। मंगलवार को तेहरान में विदेशी राजनयिकों के साथ एक बैठक में ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने लेबनान में युद्ध की समाप्ति को ईरान-अमेरिका शांति समझौते का एक 'अटूट' हिस्सा बताया। उन्होंने कहा कि तेहरान के दृष्टिकोण से, इस समझौते के दो पक्ष हैं, एक तरफ अमेरिका और इजरायल हैं, तो दूसरी तरफ ईरान और हिजबुल्लाह है।</p>
<p>अराघची ने कहा, “युद्ध की समाप्ति का मतलब इजरायली कब्जे का खत्म होना भी है। जब तक इजरायली सेना इस युद्ध में कब्जाये गये लेबनानी क्षेत्रों से पीछे नहीं हटती, तब तक युद्ध की समाप्ति पूरी नहीं मानी जाएगी।” अराघची ने यह टिप्पणी इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के उस बयान के बाद की है, जिसमें नेतन्याहू ने सोमवार को एक संवाददाता सम्मेलन में कहा था कि इजरायली सेना लेबनान, सीरिया और गाजा पट्टी में अपने नियंत्रण वाले ‘सुरक्षा क्षेत्रों’ में तब तक बनी रहेगी, जब तक आवश्यक होगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 17 Jun 2026 18:32:12 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>तुर्की की हवाई सुरक्षा होगी मजबूत, कोन्या में तैनात होगी इटली की एसएएमपी-टी (SAMP-T) मिसाइल रक्षा प्रणाली</title>
                                    <description><![CDATA[तुर्की ने नाटो की रक्षा योजना के तहत कोन्या में इटली की एसएएमपी-टी मिसाइल प्रणाली तैनात करने की घोषणा की है। फ्रांस और इटली द्वारा विकसित यह सतह से हवा में मार करने वाली प्रणाली बैलिस्टिक मिसाइल खतरों से रक्षा करेगी। इसका उद्देश्य गठबंधन की हवाई सुरक्षा को मजबूत करना है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/t%C3%BCrkiyes-big-announcement-samp-t-missile-defense-system-will-be-deployed/article-157252"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-06/023.png" alt=""></a><br /><p>अंकारा। तुर्की ने घोषणा की है कि देश की हवाई क्षेत्र सुरक्षा को बढ़ाने के लिए कोन्या प्रांत में इटली की एसएएमपी-टी मिसाइल रक्षा प्रणाली तैनात करेगा। तुर्की के रक्षा मंत्रालय ने मंगलवार को एक बयान में कहा कि यह कदम उत्तरी अटलांटिक संधि (नाटो) की स्थायी रक्षा योजनाओं  के तहत उठाया जा रहा है और इसका उद्देश्य गठबंधन की हवाई सुरक्षा को मजबूत करना है। इटली द्वारा संचालित इस प्रणाली को कोन्या में तीसरे मुख्य जेट बेस कमांड पर तैनात किया जाएगा।</p>
<p>रिपोर्टों के मुताबिक, फ्रांस और इटली द्वारा संयुक्त रूप से विकसित एसएएमपी-टी एक सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल प्रणाली है, जिसे बैलिस्टिक मिसाइलों सहित कई तरह के खतरों को रोकने के लिए डिजाइन किया गया है। नाटो ने पहले ही अदाना प्रांत के इंसिलिक एयर बेस पर एक अतिरिक्त पैट्रियट मिसाइल बैटरी तैनात कर दक्षिण-पूर्वी तुर्की में अपनी उपस्थिति को मजबूत किया है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/world/t%C3%BCrkiyes-big-announcement-samp-t-missile-defense-system-will-be-deployed/article-157252</link>
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                <pubDate>Wed, 17 Jun 2026 17:25:02 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>ईरानी राष्ट्रपति का दावा, बोले- अमेरिका के साथ समझौते के बावजूद ईरान किसी भी स्थिति के लिए तैयार, अंतिम समझौता बाकी </title>
                                    <description><![CDATA[ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेज़ेश्कियान ने अमेरिका के साथ हुए शांति समझौते को युद्ध रोकने की दिशा में बड़ा कदम बताया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि अंतिम समझौता होना अभी बाकी है और ईरान हर स्थिति के लिए तैयार है। इस ऐतिहासिक समझौते पर 19 जून को स्विट्जरलैंड में औपचारिक हस्ताक्षर होंगे।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/iranian-president-claims-despite-agreement-with-america-iran-is/article-157113"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-06/111200-x-600-px)-(2)18.png" alt=""></a><br /><p>तेहरान। ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेज़ेश्कियान ने कहा कि ईरान-अमेरिका समझौता युद्ध खत्म करने की दिशा में एक अहम कदम है लेकिन ईरान किसी भी स्थिति के लिए तैयार है। पेज़ेशकियन ने एक्स पर कहा, "जिस बात पर सहमति बनी है वह युद्ध रोकने और बातचीत शुरू करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है लेकिन अभी अंतिम समझौता होना बाकी है। ईरान का इस्लामिक गणराज्य सभी विकल्पों के लिए तैयार है।"</p>
<p>उन्होंने कहा कि ईरान की सरकार अमेरिका के साथ अंतिम समझौते के बिना भी या उसके साथ लोगों की सेवा करेगी। पेज़ेशकियन ने बताया कि अमेरिका के साथ समझौता ज्ञापन तैयार करने में ईरान के सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई ने अहम भूमिका निभाई। ईरानी राष्ट्रपति ने कहा, "ईरान के राष्ट्रीय हितों की रक्षा करने वाली धाराओं को शामिल करने में सम्मानित सर्वोच्च नेता के मार्गदर्शन की सबसे बड़ी भूमिका रही है और हम इसके लिए उनके आभारी हैं।"</p>
<p>15 जून को, ईरान और अमेरिका ने उस ज्ञापन के पूरा होने की पुष्टि की, जिस पर 19 जून को स्विट्जरलैंड में हस्ताक्षर होने हैं। ईरानी पक्ष ने बताया कि इस ज्ञापन में लेबनान समेत सभी मोर्चों पर सैन्य कार्रवाई खत्म करने की बात कही गई है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोमवार को पुष्टि किया कि ईरान के साथ ज्ञापन पर वास्तव में हस्ताक्षर हो चुके हैं। ईरान ने कहा कि ज्ञापन के बाद, दोनों पक्ष एक अंतिम समझौते पर बातचीत शुरू करेंगे, जिससे ईरान के परमाणु मुद्दे और तेहरान पर अमेरिकी प्रतिबंधों का समाधान हो सकेगा।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 16 Jun 2026 16:21:07 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>पवन कल्याण का बड़ा शक्ति प्रदर्शन: जन सेना का 'सेना प्रस्थानम्' मिशन शुरू, राष्ट्रीय मुद्दों पर बनेगी रणनीति</title>
                                    <description><![CDATA[जन सेना पार्टी का विशेष राष्ट्रीय सम्मेलन 'सेना प्रस्थानम्' दिल्ली में शुरू हुआ। पार्टी अध्यक्ष पवन कल्याण के नेतृत्व में आयोजित इस अधिवेशन में दक्षिण भारत के 150 प्रतिनिधि भाग ले रहे हैं। सम्मेलन में संगठनात्मक और राष्ट्रीय एकता से जुड़े मुद्दों पर चर्चा होगी, जिसके बाद कल्याण राष्ट्रीय युद्ध स्मारक पर शहीदों को श्रद्धांजलि देंगे।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/pawan-kalyans-big-show-of-strength-jana-senas-sena-prasthanam/article-157015"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-12/pawan-kalyan.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। जन सेना पार्टी का विशेष राष्ट्रीय सम्मेलन 'सेना प्रस्थानम्–फॉर नेशनल इंटीग्रेशन' सोमवार को राष्ट्रीय राजधानी में शुरू हुआ। कार्यक्रम की शुरुआत वंदे मातरम् के सामूहिक गायन से हुई, जिसके बाद पार्टी अध्यक्ष पवन कल्याण ने उद्घाटन संबोधन दिया। दिनभर चलने वाले इस सम्मेलन में जन सेना पार्टी के सांसद, विधायक, विधान परिषद सदस्य, विभिन्न निगमों के अध्यक्ष, निर्वाचित जनप्रतिनिधि तथा देश के दक्षिणी राज्यों से आए लगभग 150 प्रतिनिधि हिस्सा ले रहे हैं। सम्मेलन में आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, कर्नाटक, केरल और तमिलनाडु के प्रतिनिधि भागीदारी कर रहे हैं। बैठक के दौरान संगठनात्मक मुद्दों के साथ-साथ राष्ट्रीय महत्व के विषयों पर व्यापक चर्चा की जाएगी। इसके अलावा, विभिन्न सत्रों में चार महत्वपूर्ण प्रस्ताव भी पेश किए जाने की संभावना है।</p>
<p>सम्मेलन के समापन के बाद जन सेना पार्टी अध्यक्ष्य कल्याण राष्ट्रीय युद्ध स्मारक (नेशनल वॉर मेमोरियल) जायेंगे। इस दौरान वह देश की सेवा में सर्वोच्च बलिदान देने वाले वीर शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित करेंगे। जन सेना पार्टी के अनुसार, 'सेना प्रस्थानम्' पहल का उद्देश्य राष्ट्रीय एकता को मजबूत करना, दक्षिणी राज्यों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करना तथा राष्ट्रीय महत्व के मुद्दों पर सार्थक विमर्श को आगे बढ़ाना है। पार्टी का मानना है कि यह सम्मेलन देश की एकता और समावेशी विकास को नई दिशा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 15 Jun 2026 17:59:43 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>जे.डी. वेंस का बड़ा बयान, बोले- ईरान न तो परमाणु हथियार बनाने की कोशिश करेगा और न ही खरीदने की, अमेरिका रखेगा सख्त नजर</title>
                                    <description><![CDATA[अमेरिकी उपराष्ट्रपति जे.डी. वेंस ने कहा कि अमेरिका-ईरान समझौता यह सुनिश्चित करता है कि ईरान कभी परमाणु हथियार हासिल नहीं करेगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि ईरान की प्रतिबद्धताओं पर कड़ी नजर रखी जाएगी। यदि समझौता सफल रहता है, तो अगले 50 वर्षों में पश्चिम एशिया निवेश का बड़ा केंद्र बनेगा।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/jds-big-statement-said-iran-will-neither-try-to/article-156991"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-06/jd-vance.png" alt=""></a><br /><p>वॉशिंगटन। अमेरिका के उपराष्ट्रपति जे.डी. वेंस ने कहा है कि अमेरिका-ईरान समझौता यह पक्का करता है कि ईरान कभी भी परमाणु हथियार हासिल नहीं कर पाएगा। वेंस ने कहा, "इसका मतलब है कि ईरान के पास कभी परमाणु हथियार नहीं होगा। वह न तो परमाणु हथियार बनाने की कोशिश करेगा और न ही उन्हें खरीदने या हासिल करने की कोशिश करेगा। यह बात इस समझौते में शामिल है।"</p>
<p>अमेरिकी उपराष्ट्रपति ने कहा कि अमेरिका इस बात पर नज़र रखेगा कि ईरान समझौते का पालन कर रहा है या नहीं, लेकिन उन्होंने यह नहीं बताया कि इसके बदले ईरान को क्या मिलेगा। वेंस ने कहा, "यहां एक ऐसा तरीका अपनाया जा रहा है, जिसमें हम जांच-पड़ताल करते रहेंगे और जब ईरान अपनी ज़िम्मेदारियां पूरी करेगा, तो उसे वास्तविक फ़ायदे भी मिलेंगे।"</p>
<p>उन्होंने कहा कि अगर ईरान समझौते का पालन करता है, तो अगले पचास सालों में पश्चिम एशिया में बुनियादी बदलाव आएगा और यह इलाका निवेश के लिए ज़्यादा अनुकूल बन जाएगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 15 Jun 2026 14:07:23 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>ऐतिहासिक अमेरिका-ईरान समझौता : सुरक्षा परिषद देगी अंतिम मंजूरी, $24 अरब की ईरानी संपत्ति से हटेगी रोक</title>
                                    <description><![CDATA[संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव से अमेरिका-ईरान समझौते को अंतिम मंजूरी दी जाएगी। शर्तों के तहत अमेरिका ईरान पर लगे तेल प्रतिबंध हटाएगा और उसकी $24 अरब की संपत्ति मुक्त करेगा। बदले में ईरान परमाणु हथियार न बनाने और 30 दिनों के भीतर होर्मुज जलडमरूमध्य खोलने पर सहमत हुआ है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/the-final-agreement-between-iran-and-america-will-be-approved/article-156987"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/trump2.png" alt=""></a><br /><p>तेहरान। ईरान और अमेरिका के बीच अंतिम समझौते को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के एक प्रस्ताव से मंज़ूरी दी जाएगी। ईरान और अमेरिका के बीच हुए समझौते के मसौदा का हवाला देते हुए रिपोर्ट में कहा, “अंतिम समझौते को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के एक प्रस्ताव से मंज़ूरी दी जाएगी।” एजेंसी ने कहा है कि अमेरिका ने ईरानी तेल और पेट्रोलियम उत्पादों के निर्यात पर लगे प्रतिबंधों को हटाने, ईरान के खिलाफ़ नये प्रतिबंध न लगाने और पश्चिम एशिया में अपनी सैन्य ताकत न बढ़ाने का वादा किया है। समाचार एजेंसी ने मसौदा ज्ञापन का हवाला देते हुए कहा, “तेल, पेट्रोकेमिकल उत्पादों और पेट्रोकेमिकल डेरिवेटिव्स की बिक्री पर लगे प्रतिबंध हटाए जाएंगे। </p>
<p>अमेरिका पश्चिम एशिया में अपनी सेना न बढ़ाने और ईरान के खिलाफ नये प्रतिबंध न लगाने का वादा किया है।” इसके अलावा मसौदा ज्ञापन के अनुसार, अमेरिका ने ईरान के आंतरिक मामलों में दखल न देने और इस्लामिक गणराज्य की संप्रभुता का सम्मान करने का वादा किया है। दोनों पक्षों के बीच ज्ञापन पर हस्ताक्षर होने के 30 दिनों के भीतर ही होर्मुज जलडमरूमध्य को खोल दिया जाएगा। रिपोर्ट के अनुसार, ईरान ने परमाणु हथियारों के प्रसार को रोकने की संधि (एनपीटी) के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहरायी है और परमाणु हथियार न बनाने का वादा किया है। एजेंसी ने मसौदा ज्ञापन का हवाला देते हुए कहा कि दस्तावेज़ में यह उल्लेख है।</p>
<p>हालांकि, इसमें यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि किन विशिष्ट प्रतिरोधी बलों का उल्लेख किया गया है। दस्तावेज़ में यह भी कहा गया है कि ईरान और अमेरिका के बीच अंतिम वार्ता तब तक शुरू नहीं होगी, जब तक ईरान की विदेशी परिसंपत्तियों का आधा हिस्सा मुक्त नहीं कर दिया जाता, ईरानी तेल पर लगाए गए प्रतिबंध नहीं हटा लिए जाते और अमेरिकी नौसैनिक नाकाबंदी समाप्त नहीं कर दी जाती। मसौदे के अनुसार, अमेरिका ने ईरान की 24 अरब डॉलर की विदेशी परिसंपत्तियों पर लगी रोक हटाने का वादा किया है। इनमें से आधी राशि दोनों देशों के बीच समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर होने से पहले ही ईरान को वापस दी जानी होगी। इससे पहले, ईरान के उप विदेश मंत्री काजेम गरीबाबादी ने ईरान और अमेरिका के बीच समझौता ज्ञापन पर काम पूरा होने की पुष्टि की थी। इस पर हस्ताक्षर 19 जून को स्विट्जरलैंड में होंगे।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 15 Jun 2026 11:15:43 +0530</pubDate>
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