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                <title>sovereignty - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <title>सीतारमण का बड़ा बयान, बोली-ऑपरेशन सिंदूर ने त्वरित, सटीक-निर्णायक कार्रवाई से भारत की सुरक्षा नीति में नया अध्याय जोड़ा, आतंकवाद के प्रति शून्य सहिष्णुता की राष्ट्रव्यापी प्रतिबद्धता को प्रदर्शित किया</title>
                                    <description><![CDATA[वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 'ऑपरेशन सिंदूर' की सराहना करते हुए इसे भारत की सुरक्षा नीति का नया अध्याय बताया। पिछले वर्ष पहलगाम हमले के बाद भारतीय सेना ने पाकिस्तान में आतंकी ठिकानों को ध्वस्त कर दिया था। यह दिन भारतीय सशस्त्र बलों के साहस, राजनीतिक संकल्प और आतंकवाद के विरुद्ध 'जीरो टॉलरेंस' का प्रतीक है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/sitharaman-said-operation-sindoor-added-a-new-chapter-to/article-152969"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-11/sitaraman.jpg" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। केंद्रीय वित्त एवं कारपोरेट मामलों के मंत्री निर्मला सीतारमण ने गुरुवार को कहा कि ऑपरेशन सिंदूर ने त्वरित, सटीक और निर्णायक कार्रवाई के साथ भारत की सुरक्षा नीति में एक नया अध्याय जोड़ा है। पहले रक्षा मंत्री का कार्यभार संभाल चुकी सीतारमण ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में कहा," ऑपरेशन सिंदूर ने हमारे सशस्त्र बलों के साहस, राजनीतिक संकल्प की दृढ़ता और आतंकवाद के प्रति शून्य सहिष्णुता की राष्ट्रव्यापी प्रतिबद्धता को प्रदर्शित किया।"</p>
<p>गौरतलब है कि पिछले वर्ष अप्रैल में जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में आतंकवादी हमले में 26 निर्दोष हिंदुओं की हत्या के बाद भारत ने आज ही के दिन पाकिस्तान में आतंकवाद दी ठिकानों पर नपा-तुला हमला किया था। उसके बाद पाकिस्तान की सेनाओं के अंधाधुंध हमले के खिलाफ भारतीय वायु सेवा ने कार्रवाई करते हुए पाकिस्तान की वायु रक्षा प्रणाली को पंगु बना दिया था और उसके कई सैनिक ठिकानों को बर्बाद कर दिया था और 10 में को पाकिस्तान की ओर से युद्ध विराम के अनुरोध पर कार्रवाई रोक दी थी लेकिन सरकार ने कहा था कि ऑपरेशन सिंदूर खत्म नहीं किया गया है।</p>
<p>निर्मला सीतारमण ने कहा कि यह दिन हमारे राष्ट्र की रक्षा करने वाले वीरों को श्रद्धांजलि है और यह स्मरण दिलाता है कि भारत अपनी शांति और संप्रभुता को खतरे में डालने वालों के खिलाफ हमेशा दृढ़ खड़ा रहेगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 07 May 2026 15:10:50 +0530</pubDate>
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                <title>पश्चिम बंगाल में केंद्र के शपथ ग्रहण में शामिल होने का सपना कभी पूरा नहीं होगा : अजय राय ने कहा-हम खोखले दावे नहीं करते, राहुल गांधी के प्रति जनता का समर्थन और स्नेह </title>
                                    <description><![CDATA[यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय ने दावा किया है कि बंगाल चुनाव में कांग्रेस शानदार प्रदर्शन करेगी। उन्होंने भाजपा के जीत के दावों को 'खोखला' बताते हुए मुख्यमंत्री द्वारा महापुरुषों के इतिहास की गलत व्याख्या पर तंज कसा। राय ने जोर दिया कि जनता राहुल गांधी के साथ है और भाजपा का सत्ता का सपना अधूरा रहेगा।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/the-dream-of-attending-the-swearing-in-ceremony-of-the-center/article-151948"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/ajay-rai.png" alt=""></a><br /><p>लखनऊ। पश्चिम बंगाल में 29 अप्रैल को दूसरे चरण का मतदान होना है। इसके साथ ही बंगाल में बदलाव के बड़े दावे किए जा रहे हैं। इस बीच उत्तर प्रदेश में कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष अजय राय ने दावा किया है कि पश्चिम बंगाल में उनकी पार्टी मजबूती के साथ चुनाव लड़ रही है और आने वाले समय में असम व केरल में भी कांग्रेस की स्थिति मजबूत होने जा रही है। उन्होंने कहा कि बंगाल में केंद्र सरकार के शपथ ग्रहण समारोह में शामिल होने का सपना कभी पूरा नहीं होगा।</p>
<p>मीडिया से विशेष बातचीत में राय ने कहा कि बंगाल चुनाव के दौरान कांग्रेस नेता राहुल गांधी के प्रति जनता का जो समर्थन और स्नेह दिखाई दिया है, उससे स्पष्ट है कि कांग्रेस पहले से अधिक मजबूती के साथ उभरेगी। कई इलाक़ों में कांग्रेस शानदार प्रदर्शन करेगी। सीटों के अनुमान पर पूछे गए सवाल पर उन्होंने कहा, “हम केंद्र सरकार की तरह खोखले दावे नहीं करते और ना ही लफ्फाजी करते हैं और न ही जुमले उछालते हैं। आंकड़े बताने के बजाय इतना जरूर कहेंगे कि इस बार कांग्रेस पहले से बेहतर स्थिति में रहेगी।” केंद्र की ओर से बंगाल में जीत के दावे और शपथ ग्रहण में शामिल होने वाले बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए राय ने कहा कि उनका यह सपना अधूरा ही रहेगा।</p>
<p>उत्तर प्रदेश सरकार पर निशाना साधते हुए उन्होंने मुख्यमंत्री पर आरोप लगाया कि उनका फोकस रोजगार जैसे मुद्दों पर नहीं, बल्कि हिंदू-मुस्लिम की राजनीति पर है। उन्होंने हेल्पलाइन में काम करने वाली लड़कियों के साथ कथित मारपीट और कार्रवाई का भी जिक्र किया। आम आदमी पार्टी के कुछ सांसदों के केंद्र में जाने के सवाल पर राय ने कहा कि केंद्र सरकार लोगों को बांटने की राजनीति कर रही है और अरविंद केजरीवाल को उन्होंने “बी टीम” करार दिया।</p>
<p>पश्चिम बंगाल में एक चुनावी सभा के दौरान मुख्यमंत्री के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए राय ने कहा कि “तुम मुझे खून दो, मैं तुम्हें आजादी दूंगा” का नारा महान क्रांतिकारी सुभाष चंद्र बोस ने दिया था, न कि स्वामी विवेकानंद ने। उन्होंने इसे इतिहास की गलत व्याख्या बताते हुए कहा कि यह अज्ञानता की पराकाष्ठा है। राय ने कहा कि राजनीतिक मतभेद अपनी जगह हैं, लेकिन इतिहास और महापुरुषों के सम्मान से समझौता नहीं होना चाहिए। सार्वजनिक मंचों पर बोलने से पहले तथ्यों का अध्ययन जरूरी है, ताकि प्रदेश और देश की गरिमा बनी रहे। उन्होंने दोहराया कि कांग्रेस हमेशा सत्य, इतिहास और महापुरुषों के सम्मान के साथ खड़ी रही है और आगे भी इस पर कोई समझौता नहीं किया जाएगा। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 28 Apr 2026 18:00:21 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>आतंकवाद, अलगाववाद और उग्रवाद से निपटने के लिए एकजुट मोर्चा समय की जरूरत: राजनाथ सिंह</title>
                                    <description><![CDATA[रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने बिश्केक में एससीओ बैठक को संबोधित करते हुए 'ऑपरेशन सिंदूर' को भारत के दृढ़ संकल्प का प्रतीक बताया। उन्होंने आतंकवाद के सुरक्षित ठिकानों को खत्म करने और सीमा पार आतंकवाद के खिलाफ एकजुट होने का आह्वान किया। राजनाथ सिंह ने स्पष्ट किया कि आतंकवाद के प्रति भारत की 'जीरो टॉलरेंस' नीति अडिग है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/united-front-to-deal-with-terrorism-separatism-and-extremism-is/article-151941"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/rajnath-singh-3.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने ऑपरेशन सिंदूर को आतंकवाद के खिलाफ भारत के दृढ़ संकल्प का प्रतीक बताते हुए आतंकवाद, अलगाववाद और उग्रवाद जैसी "बुराइयों" से निपटने के लिए आतंकवादियों के सुरक्षित ठिकानों को समाप्त करने और किसी भी राजनीतिक अपवाद को अस्वीकार करते हुए एकजुट मोर्चा बनाने की आवश्यकता पर बल दिया है। राजनाथ सिंह ने मंगलवार को किर्गिज़स्तान के बिश्केक में शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) के रक्षा मंत्रियों की बैठक को संबोधित करते हुए यह बात कही। उन्होंने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर भारत के उस दृढ़ संकल्प का प्रतीक है कि आतंकवाद के गढ़ अब न्यायोचित दंड से अछूते नहीं रहेंगे।</p>
<p>उन्होंने आतंकवाद, अलगाववाद और उग्रवाद जैसी "बुराइयों" से निपटने के लिए सुरक्षित ठिकानों को समाप्त करने और किसी भी राजनीतिक अपवाद को अस्वीकार करते हुए एकजुट मोर्चा बनाने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि देश द्वारा प्रायोजित सीमा-पार आतंकवाद, जो किसी राष्ट्र की संप्रभुता पर हमला करता है, उसे नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए क्योंकि दोहरे मापदंडों के लिए कोई स्थान नहीं है।</p>
<p>रक्षा मंत्री ने जोर देकर कहा कि एससीओ को उन लोगों के खिलाफ उचित कार्रवाई करने में हिचकिचाना नहीं चाहिए जो आतंकवादियों को सहायता, शरण और सुरक्षित ठिकाने प्रदान करते हैं। उन्होंने कहा, "आतंकवाद, अलगाववाद और उग्रवाद का बिना किसी अपवाद के सामना करके, हम क्षेत्रीय सुरक्षा को एक चुनौती से शांति और समृद्धि के आधार स्तंभ में बदलते हैं।" आतंकवाद-रोधी प्रयासों को एससीओ का एक मूलभूत सिद्धांत बताते हुए, श्री सिंह ने कहा कि संगठन ने इस खतरे के खिलाफ साझा लड़ाई में ऐसे कृत्यों और विचारधाराओं की निंदा की है। उन्होंने पिछले वर्ष की तियानजिन घोषणा का उल्लेख किया, जिसने आतंकवाद के खिलाफ भारत के दृढ़ और सामूहिक रुख को दर्शाया, और इसे आतंकवाद तथा उसके समर्थकों के प्रति उसकी शून्य-सहिष्णुता नीति का प्रमाण बताया। उन्होंने कहा, "सामूहिक विश्वसनीयता की वास्तविक परीक्षा निरंतरता में निहित है। हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि आतंकवाद की कोई राष्ट्रीयता और कोई धर्म नहीं होता। देशों को आतंकवाद के खिलाफ दृढ़ और सामूहिक रुख अपनाना चाहिए।"</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 28 Apr 2026 17:36:28 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>ईरानी स्पीकर ग़ालिबाफ़ का बड़ा बयान : अगर उन्होंने जरा सी गलती की तो हम करारा...', नाकेबंदी और संघर्ष-विराम का उल्लंघन करके  भ्रम में जी रहे ट्रंप</title>
                                    <description><![CDATA[ईरानी संसद अध्यक्ष मोहम्मद बाकर गालिबाफ ने अमेरिका की नौसैनिक नाकेबंदी को खारिज करते हुए इसे ट्रंप का 'भ्रम' बताया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि ईरान आत्मसमर्पण नहीं करेगा और युद्ध के मैदान में अपने नये पत्ते खोलने को तैयार है। वार्ता तभी संभव है जब अमेरिका दबाव के हथकंडे छोड़े और नाकेबंदी हटाए।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/big-statement-by-iranian-speaker-ghalibaf-if-he-makes-a/article-151165"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/iran4.png" alt=""></a><br /><p>तेहरान। ईरान ने धमकी के दबाव में अमेरिका के साथ बातचीत करने से इनकार किया है। ईरान की संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बगर ग़ालिबाफ़ ने ईरान को समझौता करने के लिए मजबूर करने के मकसद से अमेरिका की ओर से अपनाये जा रहे हथकंडों (जिसमें नौसैनिक नाकेबंदी भी शामिल है) की कड़ी निंदा की है। उन्होंने चेतावनी दी है कि ईरान युद्ध के मैदान में अपने नये पत्ते खोलने के लिए पूरी तरह तैयार है।</p>
<p>ग़ालिबाफ़ ने मंगलवार को सोशल मीडिया ‘एक्स’ पर लिखा कि अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप नाकेबंदी करके और संघर्ष-विराम का उल्लंघन करके एक तरह के भ्रम में जी रहे हैं। उन्होंने कहा, "ट्रंप नाकेबंदी करके और संघर्ष-विराम का उल्लंघन करके बातचीत की मेज को आत्मसमर्पण की मेज में बदलना चाहते हैं, या फिर से युद्ध भड़काने की अपनी मंशा को सही ठहराना चाहते हैं।" उन्होंने कहा कि दबाव बनाने के इन हथकंडों से बातचीत की मेज पर कोई नतीजा नहीं निकलने वाला है।</p>
<p>ग़ालिबफ़ ने कहा, “ हम धमकियों के साये में बातचीत स्वीकार नहीं करेंगे... पिछले दो हफ़्तों के दौरान हमने खुद को युद्ध के मैदान में अपने नये पत्ते खोलने के लिए तैयार कर लिया है।” ईरानी नेता की ये टिप्पणियां ऐसे समय में आयी हैं, जब ईरान और अमेरिका के बीच होने वाली शांति वार्ता का दूसरा दौर अभी भी अनिश्चितता के घेरे में है। ईरान ने अब तक इन वार्ताओं में शामिल होने से इनकार कर दिया है, और उसने बातचीत शुरू करने से पहले नाकेबंदी हटाने की शर्त रखी है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 21 Apr 2026 13:51:18 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>अमेरिका के साथ कोई भी बातचीत तभी सफल होगी जब ईरान के राष्ट्रीय हित सुरक्षित हों : इब्राहिम अजीजी</title>
                                    <description><![CDATA[ईरानी सांसद इब्राहिम अजीजी ने अमेरिका के साथ बातचीत को सैन्य संघर्ष का विस्तार बताया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि राष्ट्रीय हितों और सुरक्षा पर कोई समझौता नहीं होगा। अजीजी ने मांग की है कि अमेरिका संपत्ति बहाल करे और क्षेत्रीय सहयोगियों का सम्मान करे; अन्यथा 'अत्यधिक मांगों' के कारण वार्ता विफल हो सकती है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/any-talks-with-america-will-be-successful-only-when-irans/article-151120"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/ibrahim.png" alt=""></a><br /><p>तेहरान। ईरान के वरिष्ठ सांसद इब्राहिम अजीजी ने सोमवार को अमेरिका के साथ चल रही कूटनीतिक बातचीत को सैन्य संघर्ष का ही एक विस्तार बताया है। उन्होंने जोर देकर कहा कि कोई भी बातचीत तभी होगी जब वह पूरी तरह से ईरान के राष्ट्रीय हितों और सुरक्षा के पक्ष में हो। ईरानी संसद की राष्ट्रीय सुरक्षा समिति के प्रमुख श्री अजीजी ने अल जजीरा को दिए एक साक्षात्कार में कहा कि बातचीत को लेकर ईरान का रुख रणनीतिक गणना पर आधारित है। उन्होंने स्पष्ट किया, "ईरान अपने राष्ट्रीय हितों के आधार पर काम करता है।" उन्होंने कहा कि ईरान अपनी सुरक्षा के लिए हर जरूरी कदम उठाने को तैयार है।</p>
<p>सांसद ने कहा कि इस्लामाबाद में होने वाली संभावित वार्ताओं सहित मौजूदा बातचीत को 'युद्ध के मैदान के विस्तार' के रूप में देखा जा रहा है। उन्होंने कहा, "अगर बातचीत से ऐसे नतीजे निकलते हैं जो युद्ध के मैदान की उपलब्धियों को सुरक्षित रखते हैं, तो यह एक अवसर है। लेकिन अगर अमेरिकी इसे अपनी दादागिरी और अत्यधिक मांगों का मंच बनाना चाहते हैं, तो यह कतई स्वीकार्य नहीं है।" अजीजी ने पुष्टि की कि ईरान ने अमेरिका के साथ बातचीत जारी रखने का फैसला तो किया है, लेकिन यह 'किसी भी कीमत पर' नहीं होगा। उन्होंने चेतावनी दी कि ईरान की 'लक्ष्मण रेखा' पर कोई समझौता नहीं होगा और उनका सम्मान किया जाना चाहिए।</p>
<p>सांसद ने कहा कि इस्लामाबाद में प्रतिनिधिमंडल भेजना इस बात पर निर्भर करेगा कि अमेरिका, ईरान के रुख पर कोई 'सकारात्मक संकेत' देता है या नहीं। उन्होंने कहा कि ईरान सैद्धांतिक रूप से बातचीत का विरोधी नहीं है, लेकिन इसके नतीजे आपसी सम्मान और ठोस लाभ वाले होने चाहिए। अजीजी ने कुछ प्रमुख शर्तें भी सामने रखीं, जिनमें ईरान की फ्रीज की गई संपत्ति को जारी करना और लेबनान जैसे क्षेत्रीय मुद्दों पर ध्यान देना शामिल है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि ईरान के क्षेत्रीय सहयोगियों के हितों को नुकसान पहुँचाया गया या पिछले वादों को अनदेखा किया गया, तो इसे तेहरान की शर्तों को खारिज करना माना जाएगा और इसके गंभीर परिणाम होंगे।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 20 Apr 2026 18:25:21 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>अमेरिकी नाकेबंदी पर ईरान का पलटवार : राष्ट्रीय हितों की रक्षा के लिए आवश्यक कदम उठाने का अधिकार ; इरावानी ने इसे संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का &quot;घोर उल्लंघन&quot; बताया </title>
                                    <description><![CDATA[संयुक्त राष्ट्र में ईरान ने अमेरिकी नौसैनिक नाकेबंदी की कड़ी निंदा करते हुए इसे संप्रभुता का उल्लंघन करार दिया है। राजदूत अमीर सईद इरावानी ने इसे अंतरराष्ट्रीय शांति के लिए खतरा बताते हुए सुरक्षा परिषद से हस्तक्षेप की मांग की है। तेहरान ने जवाबी कार्रवाई की चेतावनी दी है और पड़ोसी देशों से भारी हर्जाने की मांग की है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/irans-counterattack-on-us-blockade-is-a-gross-violation-of/article-150373"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/iran-war.png" alt=""></a><br /><p>न्यूयॉर्क। ईरान ने अमेरिका द्वारा उसके बंदरगाहों की कथित नौसैनिक नाकेबंदी की कड़ी निंदा करते हुए इसे उसकी संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का "घोर उल्लंघन" बताया है। संयुक्त राष्ट्र में ईरान के स्थायी प्रतिनिधि अमीर सईद इरावानी ने संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस और संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के अध्यक्ष को लिखे पत्र में इस कदम को "अवैध आक्रामक कार्रवाई" करार दिया, जो क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय शांति के लिए खतरा है।</p>
<p>इरावानी ने कहा कि 12 अप्रैल को यूएस सेंट्रल कमांड द्वारा घोषित यह नाकेबंदी संयुक्त राष्ट्र चार्टर के अनुच्छेद 2(4) का उल्लंघन है और अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत "आक्रामकता का स्पष्ट उदाहरण" है। उन्होंने आरोप लगाया कि यह कदम ईरान के बंदरगाहों से आने-जाने वाले समुद्री यातायात को रोकने का प्रयास है, जिससे न केवल ईरान के संप्रभु अधिकारों में हस्तक्षेप हो रहा है, बल्कि तीसरे देशों और वैध समुद्री व्यापार के अधिकारों का भी उल्लंघन हो रहा है। ईरानी दूत ने चेतावनी दी कि तेहरान अपनी संप्रभुता और राष्ट्रीय हितों की रक्षा के लिए "सभी आवश्यक और उचित कदम" उठाने का अधिकार सुरक्षित रखता है।</p>
<p>ईरान ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद से इस मुद्दे पर तत्काल हस्तक्षेप कर नाकेबंदी की निंदा करने और क्षेत्र में बढ़ते तनाव को रोकने की अपील की है। इस बीच, अमेरिकी नौसेना ने पश्चिम एशिया में अपनी सैन्य मौजूदगी बढ़ा दी है, जिसमें यूएसएस अब्राहम लिंकन सहित कई युद्धपोत और 11 विध्वंसक तैनात हैं। हालांकि, ऑपरेशन में शामिल जहाजों की सटीक जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई है। रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान में सप्ताहांत में हुई वार्ता विफल रहने के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरानी बंदरगाहों की नाकेबंदी को मंजूरी दी।</p>
<p>इसके अलावा, ईरान ने बहरीन, सऊदी अरब, कतर, संयुक्त अरब अमीरात और जॉर्डन से भी मुआवजे की मांग की है। ईरान का आरोप है कि इन देशों ने अमेरिका-इज़राइल अभियान में भूमिका निभाई और कुछ मामलों में ईरान के भीतर नागरिक ठिकानों पर "अवैध हमलों" में भी शामिल रहे। इरावानी ने पत्र में श्री एंटोनियो गुटेरेस और बहरीन (जो अप्रैल में संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की अध्यक्षता संभाल रहा है) को संबोधित करते हुए कहा कि बहरीन, सऊदी अरब, कतर, संयुक्त अरब अमीरात और जॉर्डन को ईरान को "पूर्ण क्षतिपूर्ति" देनी चाहिए। उन्होंने जोर देकर कहा कि इन देशों को अपने "अंतरराष्ट्रीय रूप से अवैध कृत्यों" के कारण हुए सभी भौतिक और नैतिक नुकसान की भरपाई करनी होगी। ईरान के अनुसार, इन कार्रवाइयों से उसे भौतिक और नैतिक दोनों प्रकार का नुकसान हुआ है, जिसकी भरपाई संबंधित देशों को करनी चाहिए।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 14 Apr 2026 15:34:26 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>कतर के विदेश मंत्रालय ने रास लाफान ऊर्जा केंद्र पर मिसाइल हमले की निंदा की, बताया संप्रभुता एवं अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन</title>
                                    <description><![CDATA[कतर ने रास लाफान ऊर्जा केंद्र पर मिसाइल हमले की कड़ी निंदा करते हुए इसे संप्रभुता का उल्लंघन बताया है। जवाबी कार्रवाई में कतर ने ईरानी राजनयिकों को 24 घंटे के भीतर देश छोड़ने का आदेश दिया है। विश्व के सबसे बड़े एलएनजी टर्मिनल पर हुए इस हमले से वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर संकट मंडरा रहा है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/qatars-foreign-ministry-condemned-the-missile-attack-on-ras-laffan/article-147060"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/qtar.png" alt=""></a><br /><p>दोहा। कतर के विदेश मंत्रालय ने रास लाफान औद्योगिक शहर पर हुए हमलों की निंदा करते हुए इस हमले को संप्रभुता का उल्लंघन बताया है और चेतावनी दी कि उसके पास जवाबी कार्रवाई करने का अधिकार सुरक्षित है। रस लाफान कतर का प्रमुख एलएनजी उत्पादन केंद्र है, जहां गैस प्रसंस्करण, शोधन एवं बिजली उत्पादन की प्रमुख सुविधाएं स्थित हैं। इसका बंदरगाह विश्व के सबसे बड़े औद्योगिक ऊर्जा परिसरों में से एक है और दुनिया का सबसे बड़ा एलएनजी निर्यात टर्मिनल शामिल है।</p>
<p>कतर के विदेश मंत्रालय ने गुरुवार को कहा कि उसने ईरानी सैन्य और सुरक्षा अताशों के साथ-साथ दूतावास के कर्मचारियों को अवांछित घोषित किया है और उनसे 24 घंटे के भीतर देश छोडऩे का अनुरोध किया है।</p>
<p>मंत्रालय ने कहा कि यह निर्णय कतर को निशाना बनाकर किए गए ईरानी हमलों के मद्देनजर लिया गया है जो कि कतर की संप्रभुता एवं अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन है। मंत्रालय ने चेतावनी दी कि अगर इस तरह की कार्रवाई जारी रही तो और भी कदम उठाए जा सकते हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 19 Mar 2026 17:13:23 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>काबुल नरसंहार: अफगानिस्तान ने पाकिस्तान पर लगाया 400 लोगों की हत्या का आरोप, पाकिस्तानी सरकार ने किया खारिज</title>
                                    <description><![CDATA[अफगानिस्तान ने पाकिस्तान पर काबुल के नशा मुक्ति केंद्र पर हवाई हमले का आरोप लगाया है, जिसमें 400 लोगों की मौत हो गई। तालिबान ने इसे "मानवता के विरुद्ध अपराध" बताया, जबकि पाकिस्तान ने दावों को खारिज करते हुए कहा कि उसने केवल आतंकवादी ठिकानों को निशाना बनाया। सीमा पर बढ़ते तनाव ने दोनों देशों के बीच युद्ध जैसी स्थिति पैदा कर दी है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/afghanistan-accused-pakistan-of-killing-400-people-pakistani-government-rejected/article-146787"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/iran-attacked1.png" alt=""></a><br /><p>काबुल। अफगानिस्तान ने पाकिस्तान की सेना पर राजधानी काबुल में नशा मुक्ति केंद्र पर हवाई हमला करने का आरोप लगाया, जिसमें कम से कम 400 लोगों की मौत हो गई। यह जानकारी मंगलवार को अल जजीरा ने दी। हालांकि, पाकिस्तान ने इस दावे को झूठा और जनमत को गुमराह करने वाला बताते हुए खारिज कर दिया और कहा कि उसने सोमवार को केवल काबुल और नांगरहार प्रांत में सैन्य प्रतिष्ठानों को निशाना बनाया था। </p>
<p>अफगानिस्तान की तालिबान सरकार के उप प्रवक्ता हमदुल्लाह फितरत के अनुसार, काबुल के उमर व्यसन उपचार अस्पताल पर हमला स्थानीय समयानुसार सोमवार रात लगभग नौ बजे (16:30 जीएमटी) हुआ। उन्होंने एक्स पर लिखा कि अस्पताल में 2,000 बिस्तरों की क्षमता है और इस हमले में इमारत के बड़े हिस्से नष्ट हो गए। उन्होंने आगे कहा, दुर्भाग्यवश, मृतकों की संख्या अब तक 400 तक पहुंच चुकी है और लगभग 250 अन्य लोग घायल हुए हैं। बचाव दल वर्तमान में घटनास्थल पर मौजूद हैं और आग पर काबू पाने एवं पीड़ितों के शवों को निकालने का काम कर रहे हैं।</p>
<p>अफगान सरकार के एक अन्य प्रवक्ता जबिहुल्लाह मुजाहिद ने अस्पताल हमले की निंदा करते हुए कहा कि पाकिस्तान ने एक बार फिर अफगानिस्तान के हवाई क्षेत्र का उल्लंघन किया है और काबुल में एक नशा मुक्ति अस्पताल को निशाना बनाया है। उन्होंने एक्स पर कहा कि अफगान सरकार ऐसे कृत्य को सभी स्वीकृत सिद्धांतों एवं मानवता के विरुद्ध अपराध मानती है।</p>
<p>वहीं, पाकिस्तानी प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के प्रवक्ता मोशर्रफ जैदी ने इन आरोपों को निराधार बताते हुए खारिज कर दिया और कहा कि काबुल में किसी भी अस्पताल को निशाना नहीं बनाया गया। एक्स पर एक पोस्ट में, पाकिस्तान के सूचना मंत्रालय ने कहा कि हमलों में काबुल और नंगरहार में अफगान तालिबान और अफगानिस्तान स्थित पाकिस्तानी लड़ाकों के सैन्य प्रतिष्ठानों एवं आतंकवादी समर्थन अवसंरचना को निशाना बनाया गया। उन्होंने कहा कि इन सुविधाओं का उपयोग निर्दोष पाकिस्तानी नागरिकों के खिलाफ किया जा रहा था।</p>
<p>मंत्रालय ने कहा कि पाकिस्तान द्वारा की गई लक्षित कार्रवाई सटीक एवं सावधानीपूर्वक थी ताकि कोई भी अप्रत्यक्ष नुकसान न हो। मंत्रालय ने कहा कि अफगान प्रवक्ता मुजाहिद का दावा पाकिस्तान विरोधी भावना भड़काने और तालिबान द्वारा सीमा पार आतंकवाद के लिए अवैध समर्थन को छिपाने के उद्देश्य से किया गया है।</p>
<p>पाकिस्तान की ओर से ये टिप्पणियां संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद द्वारा अफगानिस्तान की तालिबान सरकार से आतंकवाद से निपटने के प्रयासों को तुरंत तेज करने के आह्वान के कुछ घंटों बाद आईं। पाकिस्तान काबुल पर सशस्त्र समूहों, विशेष रूप से पाकिस्तानी तालिबान को पनाह देने का आरोप लगाता रहा है  जिसके बारे में उसका कहना है कि वह पाकिस्तान में हमले करता है।</p>
<p>इससे पहले, अफग़ान अधिकारियों ने कहा कि सोमवार को दक्षिण-पूर्वी अफग़ानिस्तान में हुई गोलीबारी में दो बच्चों सहित चार लोग मारे गए और 10 अन्य घायल हो गए। प्रांतीय गवर्नर के प्रवक्ता मुस्तगफर गुरबाज ने कहा कि पाकिस्तान से दागे गए मोर्टार के गोले खोस्त प्रांत के गांवों में गिरे और कई घरों को नष्ट कर दिया। दोनों देशों के बीच पिछले महीने उस समय झड़प शुरू हुई जब पाकिस्तान ने अफगानिस्तान में हवाई हमले किए जिसमें इस्लामाबाद ने सशस्त्र समूहों को निशाना बनाने की बात की। अफगानिस्तान ने इन हमलों को अपनी संप्रभुता का उल्लंघन बताया और जवाबी हमला किया।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 17 Mar 2026 17:21:14 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>भारत ने की काबुल में अस्पताल पर पाकिस्तान के हमले की कड़ी निंदा, बताया-कायरतापूर्ण और अमानवीय कृत्य, समर्थन का किया ऐलान</title>
                                    <description><![CDATA[भारत ने काबुल के नशा मुक्ति अस्पताल पर पाकिस्तान के हवाई हमले को "कायरतापूर्ण और अमानवीय" बताया है। विदेश मंत्रालय के अनुसार, नागरिकों और मरीजों को निशाना बनाना अंतरराष्ट्रीय कानूनों का उल्लंघन है। प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने इसे अफगानिस्तान की संप्रभुता पर हमला और क्षेत्रीय शांति के लिए गंभीर खतरा करार देते हुए दोषियों को जवाबदेह ठहराने की मांग की।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/india-strongly-condemned-pakistans-attack-on-the-hospital-in-kabul/article-146821"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/india-pakistan.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। भारत ने अफगानिस्तान की राजधानी काबुल में एक अस्पताल पर पाकिस्तान के हमले को कायरतापूर्ण और अमानवीय कृत्य बताते हुए इसकी कड़ी निंदा की है।</p>
<p>विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने मंगलवार को एक बयान में कहा कि भारत सोमवार की रात काबुल के ओमिद नशा मुक्ति अस्पताल पर पाकिस्तान के बर्बर हवाई हमले की कड़ी निंदा करता है। यह हिंसा का एक कायरतापूर्ण और अमानवीय कृत्य है, जिसमें बड़ी संख्या में नागरिकों की जान चली गई। इस अस्पताल को किसी भी तरह से सैन्य लक्ष्य नहीं माना जा सकता है।        </p>
<p>उन्होंने कहा, पाकिस्तान अब इस नरसंहार को सैन्य अभियान का नाम देने की कोशिश कर रहा है। प्रवक्ता ने कहा कि पाकिस्तान द्वारा किया गया यह घृणित आक्रमण अफगानिस्तान की संप्रभुता पर एक स्पष्ट हमला है और क्षेत्रीय शांति तथा स्थिरता के लिए सीधा खतरा है। यह पाकिस्तान के लगातार लापरवाह व्यवहार और अपनी आंतरिक विफलताओं को सीमा पार हिंसा के बढ़ते हिंसक कृत्यों के माध्यम से छिपाने के बार-बार किए जाने वाले प्रयासों को दर्शाता है। </p>
<p>बयान में कहा गया है कि यह हमला रमजान के पवित्र महीने के दौरान किया गया, जो दुनिया भर के मुस्लिम समुदायों के लिए शांति, चिंतन और दया का समय होता है, जो इसे और भी निंदनीय बनाता है। ऐसा कोई धर्म, कोई कानून या कोई नैतिकता नहीं है जो किसी अस्पताल और उसके मरीजों को जानबूझकर निशाना बनाने को उचित ठहरा सके।    </p>
<p>उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय को इस आपराधिक कृत्य के दोषियों को जवाबदेह ठहराना चाहिए और यह सुनिश्चित करना चाहिए कि अफगानिस्तान में पाकिस्तान द्वारा नागरिकों को निशाना बनाने का यह अंधाधुंध हमला तत्काल बंद हो। जायसवाल ने कहा कि भारत शोक संतप्त परिवारों के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त करता है, घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना करता है और इस दुखद घड़ी में अफगानिस्तान के लोगों के साथ एकजुटता से खड़ा है। उन्होंने कहा, हम अफगानिस्तान की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता के प्रति अपने अटूट समर्थन को भी दोहराते हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 17 Mar 2026 14:37:05 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>ईरानी जहाज पर हमले के बाद पूर्व सीएम अशोक गहलोत ने उठाए केंद्र सरकार की नीतियों पर सवाल, कहा-भारत देश की शक्ति उसकी स्वतंत्र आवाज में है, न कि किसी की जी-हुजूरी में</title>
                                    <description><![CDATA[पूर्व सीएम अशोक गहलोत ने हिंद महासागर में ईरानी जहाज पर अमेरिकी हमले के बाद मोदी सरकार की रणनीतिक चुप्पी पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने इसे भारत की संप्रभुता और 'अतिथि देवो भव' के संस्कारों के खिलाफ बताया। गहलोत ने नेहरू और इंदिरा गांधी की निडर कूटनीति का हवाला देते हुए सरकार से स्वायत्तता बनाए रखने का आग्रह किया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/after-the-attack-on-the-iranian-ship-former-cm-ashok/article-145338"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/ashok-gehlot.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर: हिन्द महासागर में ईरानी जहाज पर अमेरिकी हमले के बाद पूर्व सीएम अशोक गहलोत ने मोदी सरकार की नीतियों पर सवाल उठाए हैं। गहलोत ने ट्वीट कर कहा कि भारत देश की शक्ति उसकी स्वतंत्र आवाज में है, न कि किसी की जी-हुजूरी में। नेहरू के गुट निरपेक्ष आंदोलन से लेकर इंदिरा की निडर कूटनीति तक, भारत कभी किसी महाशक्ति के दबाव में नहीं झुका।</p>
<p>हम सभी को 2013 का देवयानी खोबरागड़े मामला भी याद करना चाहिए जब डॉ. मनमोहन सिंह की सरकार ने अमेरिकी राजनयिकों की सुविधाएं छीनकर जैसे को तैसा जवाब दिया था। भारत ने कभी भी किसी दूसरे देश के दबाव में आकर अपनी संप्रभुता एवं नीतियों से समझौता नहीं किया। परन्तु हमारे ही समुद्री पड़ोस में मिलान 2026 के मेहमान ईरानी जहाज का शिकार होना और हमारी रणनीतिक चुप्पी, भारत की साख पर सवाल उठाती है।</p>
<p>अमेरिका की इस मनमानी पर चुप रहना अतिथि देवो भव के हमारे संस्कारों और सैन्य गौरव के खिलाफ है। हिंद महासागर का असली रक्षक कहलाने वाले भारत की चुप्पी क्या कूटनीतिक दबाव का संकेत है। एक उभरती महाशक्ति को अपने क्षेत्र में होने वाली ऐसी हिंसक घटनाओं पर मूकदर्शक नहीं बने रहना चाहिए। अगर हम हिंद महासागर के असली रक्षक हैं, तो हमें अपनी स्वायत्तता और मेहमान की सुरक्षा को सर्वोपरि रखना होगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 05 Mar 2026 13:24:03 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>खामेनेई की मौत पर चुप्पी को लेकर राहुल गांधी ने उठाए केंद्र सरकार की विदेश नीति पर सवाल, बोलें- ईरान संकट और &quot;लक्षित हत्या&quot; पर चुप्पी तोड़ें</title>
                                    <description><![CDATA[विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने ईरानी नेता खामेनेई की हत्या को 'लक्षित हत्या' बताते हुए केंद्र सरकार से स्पष्ट रुख अपनाने की मांग की है। उन्होंने कहा कि खाड़ी में फंसे एक करोड़ भारतीयों की सुरक्षा दांव पर है। राहुल ने हिंसा की निंदा करते हुए अंतरराष्ट्रीय कानून और संप्रभुता की रक्षा हेतु भारत को बोलने का साहस दिखाने का आह्वान किया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/rahul-gandhi-raised-questions-on-the-foreign-policy-of-the/article-145205"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-02/rahul-gandhi1.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष तथा लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने कहा है कि ईरान में लगातार गंभीर हो रहे हालात और उसके सुप्रीम लीडर आयतुल्ला खामेनेई की मौत लक्ष्य कर की गई हत्या है और हालात को देखते हुए केंद्र सरकार को इस पर अपनी स्पष्ट राय व्यक्त करनी चाहिए।</p>
<p>कांग्रेस नेता ने कहा कि युद्ध के कारण जो हालात ईरान तथा अन्य खाड़ी देशों में बन रहे हैं उसे देखते हुए भारत को स्पष्ट नीति का पालन करना चाहिए। उनका कहना था कि ईरान और अमेरिका तथा इजरायल के बीच लगातार बढ़ रहे संघर्ष के कारण खाड़ी देशों में रहने वाले भारतीयों के सामने भी अनिश्चितता का संकट पैदा हो गया है।</p>
<p>राहुल गांधी ने मंगलवार को एक सोशल मीडिया पोस्ट में कहा कि अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच बढ़ता तनाव एक नाजुक क्षेत्र को व्यापक संघर्ष की तरफ धकेल रहा है। इस वजह से खाड़ी देशों में रहने वाले करीब एक करोड़ भारतीयों के साथ ही असंख्य लागों को अनिश्चितता का सामना कर रहे हैं।</p>
<p>उन्होंने सुरक्षा संबंधी चिंताओं को स्वाभाविक बताया लेकिन कहा कि संप्रभुता का उल्लंघन करने वाले हमले संकट को और भी गंभीर बना देंगे। ईरान पर एकतरफा हमलों के साथ ही ईरान द्वारा पश्चिम एशिया के कई देशों पर किए जा रहे हमले, दोनों की निंदा की जानी चाहिए। उनका कहना था कि हिंसा ही हिंसा को जन्म देती है इसलिए संवाद और संयम ही शांति का एकमात्र मार्ग है।</p>
<p>कांग्रेस नेता ने कहा, "भारत को नैतिक रूप से स्पष्ट होना चाहिए। हमें अंतरराष्ट्रीय कानून और मानव जीवन की रक्षा में खुलकर बोलने का साहस होना चाहिए। हमारी विदेश नीति संप्रभुता और विवादों के शांतिपूर्ण समाधान पर आधारित है और इसे सुसंगत रहना चाहिए। केंद्र सरकार को बोलना चाहिए। क्या वे विश्व व्यवस्था को परिभाषित करने के तरीके के रूप में किसी राष्ट्राध्यक्ष की हत्या का समर्थन करते हैं। अब चुप्पी भारत की विश्व में प्रतिष्ठा को कम करती है।"</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 03 Mar 2026 18:10:16 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>आयतुल्लाह खामेनेई की मौत पर भारत की चुप्पी पर सोनिया और राहुल गांधी की दो टूक, सरकार की चुप्पी को दिया &quot;कमजोर विदेश नीति&quot; करार</title>
                                    <description><![CDATA[विपक्ष के नेता राहुल गांधी और सोनिया गांधी ने ईरानी नेता खामेनेई की हत्या पर मोदी सरकार की चुप्पी को "कमजोर विदेश नीति" करार दिया है। सोनिया गांधी ने इसे अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन और 'लक्षित हत्या' बताते हुए कहा कि तटस्थ रहना जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ना है। उन्होंने भारत को नैतिक शक्ति और संप्रभुता के लिए खड़े होने की सलाह दी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/on-indias-silence-on-the-death-of-ayatollah-khamenei-sonia/article-145172"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/rahul-and-sonia.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष तथा लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने कांग्रेस संसदीय दल की नेता सोनिया गांधी के ईरान की नेता आयतुल्लाह खामेनेई के मारे जाने पर भारत की प्रतिक्रिया को लेकर लिखे एक लेख को शेयर करते हुए कहा है कि ईरानी नेता के अमेरिकी हमले में मारे जाने की घटना पर भारत की चुप्पी अविश्वसनीय और कमजोर विदेश नीति का परिणाम है।</p>
<p>राहुल गांधी ने श्रीमती गांधी का लेख सोशल मीडिया एक्स पर शेयर मंगलवार को शेयर करते हुए कहा कि इस मुद्दे पर सरकार का रुख विश्वसनीय और भारतीय परंपरा के अनुकूल नहीं है। मोदी सरकार का यह रुख उसकी विदेश नीति पर सवाल खड़े करता है। सोनिया गांधी ने एक अंग्रेजी दैनिक में छपे अपने लेख में ईरानी नेता की मौत को लक्षित हत्या करार दिया और कहा कि इस पर मोदी सरकार की चुप्पी उसकी विदेश नीति पर गंभीर सवाल खड़े करते है। उन्होंने लिखा 'ईरान के नेता की हत्या पर मोदी सरकार की चुप्पी तटस्थता नहीं ब्लकि जिम्मेदारियां से पल्ला झाड़ना है।</p>
<p>उन्होंने आगे लिखा कि जब किसी विदेशी नेता की लक्षित हत्या पर हमारा देश संप्रभुता या अंतरराष्ट्रीय कानून का कोई स्पष्ट बचाव नहीं करता और निष्पक्षता का छोड़कर कर चुप रहता है, तो इससे हमारी विदेश नीति की दिशा और विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल उठते हैं। इस स्थिति में चुप रहना बिल्कुल तटस्थता नहीं है। कांग्रेस संसदीय दल की प्रमुख ने कहा "इस नाजुक वैश्विक परिदृश्य पर भारत को संप्रभुता और शांति के लिए खड़ा होना चाहिए और अपनी नैतिक शक्ति को पुनः प्राप्त करना चाहिए।"</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 03 Mar 2026 11:41:58 +0530</pubDate>
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