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                <title>संस्कृत व इंग्लिश में एक भी एडमिशन नहीं</title>
                                    <description><![CDATA[झालावाड़ को छोड़ कोटा व बूंदी जिले के नवीन गर्ल्स कॉलेजों में संस्कृत व अंग्रेजी साहित्य विषय लेने में रुचि नहीं दिखाई।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/not-a-single-admission-in-sanskrit-and-english/article-124287"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-08/7852014.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। मुख्यमंत्री बजट घोषणा में छात्राओं के लिए खोले गए राजकीय कला कन्या महाविद्यालयों में छात्राओं का एडमिशन लेने में रुझान नहीं दिखा। कैथून व सुकेत में बीए प्रथम वर्ष में एक भी छात्रा ने संस्कृत विषय नहीं लिया है। जबकि, सुकेत महाविद्यालय में तो इंग्लिश लिक्टेचर में भी शुन्य नामांकन है।  वहीं, बूंदी जिले के डाबी में 5 छात्राओं  ने जी संस्कृत विषय लिया है। लेकिन, आयुक्तालय के नियमानुसार  प्रत्येक विषय में 10 छात्राओं का नामांकन होने पर ही उसकी कक्षाएं संचालित की जा सकती है। ऐसे में इन छात्राओं में संस्कृत की कक्षा संचालन को लेकर असमंजस बना हुआ है।  स्थानीय छात्राओं व अभिभावकों का तर्क है कि आयुक्तालय ने नए कॉलेजों को विषय आवंटन में क्षेत्र की मांग को नजरअंदाज किया है।  जबकि, यहां उर्दू व होम साइंस की डिमांड थी।  दरअसल, वर्ष 2025 में सरकार ने कोटा-बंूदी व झालावाड़ में कॉलेज एजुकेशन सोसायटी के अधीन चार राजकीय कला कन्या महाविद्यालय खोले थे। जिसमें झालावाड़ को छोड़ कोटा व बूंदी जिले के नवीन गर्ल्स कॉलेजों में संस्कृत व अंग्रेजी साहित्य विषय लेने में रुचि नहीं दिखाई।</p>
<p><strong>संस्कृत व अंग्रेजी साहित्यके प्रति बेरुखी </strong><br />राजकीय कन्या कला महाविद्यालय कैथून में एक भी छात्रा  ने संस्कृत विषय नहीं लिया। हालांकि, नोडल जेडीबी आर्ट्स महाविद्यालय प्रशासन का कहना है कि छात्राओं द्वारा सब्जेक्ट चेंज करने की एप्लीकेशन दी जा रही है। वहीं, सुकेत महाविद्यालय में तो संस्कृत के साथ अंग्रेजी साहित्य में भी एक भी बालिका ने दाखिला नहीं लिया। ऐसे में यहां इन दोनों विषयों की कक्षाएं संचालित नहीं हो सकेगी। </p>
<p><strong>डाबी कॉलेज : छात्राओं में असमंजस</strong><br />आयुक्तालय के नियमानुसार, किसी भी विषय की कक्षा के संचालन के लिए 10 विद्यार्थियों का होना आवश्यक है। ऐसे में यहां संस्कृत व अंगे्रजी साहित्य में बालिकाओं की संख्या दस से कम है। ऐसे में जिन्होंने इन विषयों में दाखिला लिया है, उनमें अब कक्षा संचालन को लेकर असमंजस बना हुआ है। इधर, कॉलेज प्रशासन का कहना है, नए महाविद्यालय होने के नाते 5 स्टूडेंट पर भी आयुक्तालय द्वारा कक्षा संचालन की अनुमति दे सकता है।  </p>
<p><strong>4 बार एडमिशन का मौका फिर भी सीटें खाली</strong><br />कॉलेज आयुक्तालय द्वारा 4 बार आॅनलाइन आवेदन करने की अंतिम तिथि बढ़ाकर छात्राओं को एडमिशन का मौका दिया था। इसके बावजूद बालिकाओं ने नए कॉलेजों में दाखिला लेने के बजाए पुराने स्थापित महाविद्यालयों में ही रुचि दिखाई। नतीजन, कोटा, बूंदी के तीन राजकीय कला कन्या महाविद्यालयों में 600 में से 400 से ज्यादा सीट्स खाली रह गई। हालांकि, आयुक्तालय द्वारा रिक्त सीटों को भरने के लिए आॅफलाइन आवेदन भी लिए जा रहे हैं। इसके बावजूद इन तीनों महाविद्यालय में सीटें खाली रहेंगी। </p>
<p><strong>नामांकन घटने का कारण </strong><br />नाम न छापने की शर्त पर राजकीय महाविद्यालय कोटा के प्रोफेसर ने बताया कि नवीन गर्ल्स कॉलेजों में घटते नामांकन के पीछे कई कारण हैं, जो इस प्रकार है। <br />- आवश्यकता से अधिक गर्ल्स कॉलेज खोलना।<br />- नए कॉलेजों के पास न खुद का भवन व न ही स्थाई फैकल्टी।<br />- दो-दो कमरों में कॉलेज संचालित करना। भौतिक संसाधनों की कमी। <br />- क्षेत्र की आवश्यकता के विपरीत सब्जेक्ट आवंटित करना। <br />- नए कॉलेजों का प्रचार-प्रसार का अभाव।<br />- नए महाविद्यालयों में सुविधाओं की उपलब्धता को लेकर आशंकाएं। </p>
<p><strong>कब-कब बड़ी आवेदन की अंतिम तिथि </strong><br />- राजकीय महाविद्यालयों में गत 4 जून से ही प्रवेश प्रक्रिया शुरू हो गई थी। <br />- दूसरी बार अंतिम तिथि 16 जून से बढ़ाकर 20 जून कर दी गई। <br />- तीसरी बार में 5 दिन और बढ़ाकर अंतिम तिथि 25 जून कर दी गई। <br />- सीटों के मुकाबले आवेदन नहीं आने पर फिर से लास्ट डेट बढ़ाकर 3 जुलाई कर दी गई। <br />- 7 जुलाई को प्रथम वरियता सूची जारी की गई। <br />- 16 जुलाई को विभिन्न श्रेणियों में रिक्त रही सीटों पर फिर से आवेदन मांगे गए। <br />- अब गत 18 अगस्त से 23 अगस्त तक खाली रह गई सीटों पर आॅफलाइन एडमिशन देने के लिए आवेदन आमंत्रित किए गए हैं।  </p>
<p><strong>क्या कहती हैं छात्राएं व अभिभावक</strong><br />सरकार ने नए कॉलेज तो खोल दिए लेकिन बिल्डिंग व फैकल्टी भी स्थाई नहीं है। गत वर्ष भी राजसेस महाविद्यालयों में प्रथम सेमेस्टर की परीक्षाएं शुरू होने के एक से डेढ़ माह पहले ही शिक्षकों को हटा दिया था। इस बार भी ऐसी  स्थिति रहने की आशंका के चलते बूंदी गर्ल्स कॉलेज में दाखिला लेना ज्यादा मुनासिब लगा। <br /><strong>-अहिल्या कंवर, छात्रा डाबी</strong></p>
<p>कस्बे में नया कॉलेज खुला तो खुशी थी लेकिन ऐसे विषय अलॉट कर दिए, जो छात्राओं के लिए रुचिकर नहीं है। यहां होम साइंस व उर्दू विषय दिया जाना चाहिए था। इसलिए सुकेत कॉलेज में दाखिला लेने की बजाए रामगंजमंडी महाविद्यालय की ओर रुख करना ज्यादा सही लगा। <br /><strong>-पार्वती कुमारी,  रेहाना, (परिवर्तित नाम) सुकेत </strong></p>
<p>कस्बे का कॉलेज राजकीय सीनियर सैकंडरी स्कूल के तीन कमरोें में चल रहा है।  क्षेत्र की आवश्यकतानुसार सब्जेक्ट नहीं होना नामांकन में कटौती का मुख्य कारण है। यहां उर्दू, जीपीएम व होम साइंस विषय नहीं खोला गया। बीए में तीन आॅफनल सब्जेक्ट लेने होते हैं। ऐसे में छात्राओं ने कस्बे से बाहर शहर के कॉलेजों में दाखिला लिया है।  <br /><strong>- मोहम्मद अख्तर, बंशीलाल, अभिभावक कैथून </strong></p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br />अभी यह कॉलेज नए हैं। सुविधाएं विकसित होने में थोड़ा समय लगेगा। यदि, छात्राओं की ओर से विषयों को लेकर कोई कम्पलेन आती है तो उसे आयुक्तालय भिजवाकर समाधान करवाया जाएगा। <br /><strong>-डॉ. विजय पंचौली, क्षेत्रीय सहायक निदेशक आयुक्ताल कोटा </strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 21 Aug 2025 15:00:14 +0530</pubDate>
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                <title>जेकेके में देश-विदेश के 22 कलाकारों की रचनाओं का मंच बना 'सर्जना'</title>
                                    <description><![CDATA[सिंगापुर के आर्टिस्ट काइ किंग के बनाए पोट्रेट प्रदर्शित किए गए, जबकि नेपाल के एस.सी. सुमन की पेंटिंग में मिथिला आर्ट वर्क की खूबसूरती देखने को मिली। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/-sarjana--became-a-platform-for-creations-of-22-artists-from-india-and-abroad-in-jkk-hindi-news/article-55774"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-08/jkk-jaipur.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। जवाहर कला केंद्र की चातुर्दिक गैलरी में आज आर्ट एग्जीबिशन 'सर्जना' की शुरुआत हुई। पूर्णिमा यूनिवर्सिटी के फैकल्टी ऑफ डिजाइन एंड आर्ट्स तथा जयपुर आर्ट समिट द्वारा आयोजित इस एग्जीबिशन में देश—विदेश के 22 कलाकारों की करीब 50 पेंटिंग व स्कल्पचर प्रदर्शित किए जा रहे हैं। खास बात यह है कि ये कलाकृतियां इन्होंने गत छह दिनों पूर्णिमा यूनिवर्सिटी में आयोजित इंटरनेशनल आर्ट कैंप में तैयार की हैं। वरिष्ठ कलाकार पद्मश्री श्याम शर्मा ने मुख्य अतिथि तथा कलाविद् आर.बी. गौतम ने गेस्ट ऑफ ऑनर के तौर पर इस दो दिवसीय एग्जीबिशन का उद्घाटन किया।</p>
<p>इसमें अमेरिका के जोंग इल मा, सिंगापुर के काइ किंग, जर्मनी के किंग सोनेनबर्ग, नेपाल के एस.सी. सुमन, लिथुआनिया की जिद्रिजा जनुसाइट, श्रीलंका की मानुषिका बुद्धिनि पथिराना व कुशानी विदुषिका तथा ईरान के हादी सेतायेश के साथ—साथ भारत के महेश अंजरलेकर, नरोत्तम दास, के.के. गांधी, डिम्पल शाह, अमित कल्ला, अमिता खरे सहित अन्य नामचीन कलाकारों की बनाई पेंटिंग्स व स्कल्पचर डिस्प्ले किए जा रहे हैं।</p>
<p>सिंगापुर के आर्टिस्ट काइ किंग के बनाए पोट्रेट प्रदर्शित किए गए, जबकि नेपाल के एस.सी. सुमन की पेंटिंग में मिथिला आर्ट वर्क की खूबसूरती देखने को मिली। इसी प्रकार जम्मू काश्मीर के आर्टिस्ट के.के. गांधी विशाल कैनवास पर पर्वतों के बीच सूर्योदय की पहली किरण की खूबसूरती को रंगों के जरिए साकार किया। मुंबई के महेश अंजरलेकर द्वारा इंटरनेशनल आर्ट कैंप में तैयार किए गए सेल्फ पोट्रेट के स्कल्पचर प्रदर्शित किए गए। इनकी विशेषता यह है कि कलाकार द्वारा इनमें मछली के तत्वों को प्रमुखता दी गई है।</p>
<p>देबावृत्त दास ने बंदर की पेंटिंग के जरिए जीवन के सफर को प्रतिबिंबित किया, वहीं विनोद कुमार की पेंटिंग में मिट्टी के प्राकृतिक रंग का इस्तेमाल कर इसमें गेहूं की बाली को दर्शाया गया। अमित कल्ला की बनाई एब्स्ट्रेक्ट पेंटिंग भी विजिटर्स द्वारा काफी पसंद की गई। लिथुआनिया की जिद्रिजा जनुसाइट द्वारा परफॉर्मिंग आर्ट की प्रभावी प्रस्तुति भी दी गई।</p>
<p>एग्जीबिशन के उद्घाटन के अवसर पर मेजबान पूर्णिमा यूनिवर्सिटी के को- फाउंडर राहुल सिंघी, प्रो—प्रेसीडेंट डॉ. मनोज गुप्ता और रजिस्ट्रार डॉ. चांदनी कृपलानी भी उपस्थित थे। रविवार को इस एग्जीबिशन का अंतिम दिन है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 29 Aug 2023 14:06:51 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>साइंस - कॉमर्स में अव्वल रहने के बाद अब बेटियों ने कला में भी मारी बाजी अव्वल</title>
                                    <description><![CDATA[राजस्थान माध्यमिक शिक्षा बोर्ड ने 12वी आर्ट्स के परिणाम सोमवार को जारी कर दिए। परिणामों में कोटा जिले में भी एक बार फिर बेटियों ने अपना परचम लहरा दिया। कोटा जिले का कुल परिणाम 96.26 प्रतिशत रहा। 

]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/after-being-the-topper-in-science-commerce--now-the-daughters-also-topped-in-the-arts/article-11465"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-06/arts-result.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। माध्यमिक शिक्षा बोर्ड के 12वीं के विज्ञान और वाणिज्य में अपना परचम लहराने के बाद बेटियों ने एक बार फिर कला में भी अपनी बाजीगरी दिखाई। सोमवार को जारी हुए 12वीं के कला वर्ग के परिणाम में बेटियों ने 97. 31 प्रतिशत परिणाम  देकर बेटों से अपने को आगे रखने में सफल रहे रही।<br />राजस्थान माध्यमिक शिक्षा बोर्ड ने 12वी आर्ट्स के परिणाम सोमवार को जारी कर दिए। परिणामों में कोटा जिले में भी एक बार फिर बेटियों ने अपना परचम लहरा दिया। छात्राओं का परिणाम 97.31 प्रतिशत रहा। जबकि छात्रों का पास प्रतिशत 95.21 रहा। परिणाम जारी होने के साथ ही कोटा में विद्यार्थियों और शिक्षकों में खुशी की लहर दौड़ गई ।<br /><br />कोटा जिले का कुल परिणाम 96.26 प्रतिशत रहा। कोटा में परीक्षा के लिए कुल 15464 स्टूडेंट रजिस्टर्ड थे, जिनमें 15203 स्टूडेंट्स ने परीक्षा दी। इनमें 7556 छात्र और 7646 छात्राएं परीक्षा में मौजूद रहे। जारी परीक्षा परिणामों में 8229 स्टूडेंट फर्स्ट डिवीजन, 5773 स्टूडेंट सेकंड डिविजन, 632 स्टूडेंट थर्ड डिवीजन पास हुए।<br /><br />छात्रों की बात की जाए तो 3432 फर्स्ट डिविजन, 3342 सेकंड डिविजन और 420 स्टूडेंट थर्ड डिवीजन पास हुए। कुल 7194 छात्र पास हुए हैं। वहीं छात्राओं की बात की जाए तो 4797 फर्स्ट डिवीजन 2436 सेकंड डिविजन और 212 थर्ड ईयर पास हुई। कुल 7440 छात्राएं पास हुई है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>शिक्षा जगत</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 06 Jun 2022 16:40:14 +0530</pubDate>
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                <title>देश की सम्प्रभुता के पर्व पर दिखी सांस्कृतिक विविधता, लोक कलाओं ने गणतंत्र की करवाई पहचान</title>
                                    <description><![CDATA[दर्शकों के बीच पहुंचे मोदी, स्वीकार किया अभिवादन]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/%E0%A4%A6%E0%A5%87%E0%A4%B6-%E0%A4%95%E0%A5%80-%E0%A4%B8%E0%A4%AE%E0%A5%8D%E0%A4%AA%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A4%AD%E0%A5%81%E0%A4%A4%E0%A4%BE-%E0%A4%95%E0%A5%87-%E0%A4%AA%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%B5-%E0%A4%AA%E0%A4%B0-%E0%A4%A6%E0%A4%BF%E0%A4%96%E0%A5%80-%E0%A4%B8%E0%A4%BE%E0%A4%82%E0%A4%B8%E0%A5%8D%E0%A4%95%E0%A5%83%E0%A4%A4%E0%A4%BF%E0%A4%95-%E0%A4%B5%E0%A4%BF%E0%A4%B5%E0%A4%BF%E0%A4%A7%E0%A4%A4%E0%A4%BE--%E0%A4%B2%E0%A5%8B%E0%A4%95-%E0%A4%95%E0%A4%B2%E0%A4%BE%E0%A4%93%E0%A4%82-%E0%A4%A8%E0%A5%87-%E0%A4%97%E0%A4%A3%E0%A4%A4%E0%A4%82%E0%A4%A4%E0%A5%8D%E0%A4%B0-%E0%A4%9F/article-4164"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-01/28.jpg" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। देश की एकता अखण्डता और सम्प्रभुता की तस्वीर बुधवार को राजपथ पर गणतंत्र दिवस के मौके पर एक बार फिर नज़र आई। जब देश की सम्प्रभुता के पर्व पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद सहित हजारों की संख्या में देश-वासियों के सामने सांस्कृतिक विवधता और लोक कलाओं के बीच गणतंत्र का चित्रण नजर आया।  देश के 73वें गणतंत्र दिवस के मौके पर बुधवार को राजपथ पर आयोजित मुख्य समारोह में सांस्कृतिक तथा लोक कलाओं का अनूठा संगम नजर आया। पहली बार इस बार के समारोह में कई बदलाव दिखे और पहली बार प्रधानमंत्री ने इंडिया गेट की बजाय राष्ट्रीय युद्ध स्मारक जाकर शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित की। इस साल गणतंत्र दिवस परेड के दौरान 12 राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों तथा नौ मंत्रालयों/विभागों की झांकियां निकाली गयीं।<br /><br /></p>
<p><strong>हरियाणा की झांकी टोक्यो ओलंपिक पर आधारित</strong> <br />मेघालय की झांकी में राज्य के 50 सालों के इतिहास को दिखाया गया । इस झांकी में महिलाओं के नेतृत्व में चल रहीं सहकारी समितियों और स्व सहायता समूहों को प्रदर्शित किया गया। हरियाणा की झांकी टोक्यो ओलंपिक पर आधारित रही। हरियाणा की झांकी में पहलवान बजरंग पूनिया, जैवलिन थ्रोअर सुमित अंतिल और हॉकी खिलाड़ी रानी रामपाल को दिखाया गया। वहीं उत्तर प्रदेश की झांकी में इस बार काशी विश्वनाथ मंदिर मुख्य आकर्षण रहा। काशी विश्वनाथ कॉरिडोर जिसका हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लोकार्पण किया है, उसको प्रमुखता से दर्शाया गया। उत्तराखंड की झांकी में सिखों के प्रमुख तीर्थ हेमकुंड साहिब, टिहरी डैम, डोबरा चांठी पुल और चार धाम में से एक बदरीनाथ धाम के साथ ही सरकार की उत्तराखंड के चार धाम को लेकर चल रही महत्वपूर्ण योजना 'ऑल वेदर रोड' का प्रदर्शन किया गया।<br /><br /><strong>पंजाब की झांकी में राज्य से जुड़े स्वतंत्रता सैनिकों और उनके संघर्ष की कहानी</strong><br />पंजाब की झांकी में राज्य से जुड़े स्वतंत्रता सैनिकों और उनके संघर्ष की कहानी को दर्शाया गया। इसमें भगत सिंह, सुखदेव, राजगुरू की प्रतिमा के साथ लाला लाजपत राय पर हुए लाठी चार्ज और सरदार उधम सिंह को जलियांवाला बाग के दोषी माइकल ओ डायर की हत्या करते हुए दिखाया गया। ऐतिहासिक धरोहरों को समेटे गोवा की झांकी जब राजपथ पर निकली, लोगों ने तालियों की गड़गड़ाहट से उसका स्वागत किया।गुजरात की झांकी में राज्य के आदिवासी क्रांतिकारियों के जीवन और उनके बलिदान से जुड़े इतिहास को दर्शाया गया।<br /><br /></p>
<p><strong>तालियां बजाकर कलाकारों की हौसला अफजाई </strong><br />वहीं कर्नाटक की झांकी में राज्य की पारंपरिक हस्तशिल्प कला को दर्शाया गया। इसमें कमला देवी जिन्होंने विलुप्त होने की कगार पर पंहुचे पारंपरिक हस्तशिल्प को पुनर्जीवित करने का काम किया, को प्रमुखता दी गयी, जिसे लोगों ने काफी सराहा।<br />जम्मू-कश्मीर की झांकी में प्रदेश के बदलते स्वरूप को दर्शाया गया और लोगों को बताने की कोशिश की गयी कि प्रदेश अब दिनों-दिन प्रगति की पथ पर अग्रसर हो रहा है।महाराष्ट्र की झांकी में राज्य की जैव-विविधता और जैव प्रतीकों को प्रदर्शित किया गया। इसके अलावा अरुणाचल प्रदेश और छत्तीसगढ़ जैसे राज्यों की भी झांकियां भी निकाली गयीं, जिसे लोगों ने सराहा और तालियां बजाकर कलाकारों की हौसला अफजाई की।</p>
<p><strong>मंत्रालय और विभागों से जुड़ी अन्य नौ झांकियां </strong><br />राज्यों की झांकियों के अलावा मंत्रालय और विभागों से जुड़ी अन्य नौ झांकियां भी निकाली गयी। इनमें संस्कृति मंत्रालय, शिक्षा एवं कौशल विकास मंत्रालय, वस्त्र मंत्रालय, नागर विमानन मंत्रालय, जल शक्ति मंत्रालय, विधि एवं न्याय मंत्रालय, केंद्रीय लोक निर्माण विभाग, केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल, भारतीय डाक विभाग, डीआरडीओ और तीनों सेनाओं से जुड़े अत्याधुनिक हथियारों तथा विमानों की झांकियां भी शामिल थीं। विभागों की झांकियों की बात करें तो इंडिया पोस्ट की झांकी महिला सशक्तीकरण पर केंद्रित रही। इसे लोगों ने खूब सराहा और तालियां बजाकर कलाकारों का स्वागत किया।</p>
<p><br /><strong>जल शक्ति मंत्रालय की झांकी</strong><br />वहीं जल शक्ति मंत्रालय की झांकी में दर्शाया गया कि कैसे जल जीवन मिशन ने लद्दाख में 13,000 फुट से अधिक की ऊंचाई पर शून्य से 20 डिग्री सेल्सियस कम तापमान में स्वच्छ नल का पानी उपलब्ध कराकर लोगों के जीवन स्तर में सुधार किया। इस वर्ष गणतंत्र दिवस के मौके पर राजपथ पर आयोजित समारोह में पहली बार नागरिक उड्डयन मंत्रालय की झांकी भी निकाली गयी, जिसमें ‘उड़ान’ योजना की गौरवपूर्ण सफलता को दर्शाते हुए बुद्धिस्ट सर्किट के पर्यटक स्थलों को दिखाया गया।<br /><br /><strong>480 नर्तक एवं नर्तकियों ने सांस्कृतिक प्रस्तुती देकर लोगों का मन मोह लिया</strong></p>
<p>झांकियों के बाद अखिल भारतीय नृत्य प्रतियोगिता 'वंदे भारतम' के माध्यम से चुने गए 480 नर्तक एवं नर्तकियों ने सांस्कृतिक प्रस्तुती देकर लोगों का मन मोह लिया। इस दौरान लोगों ने तालियां बजाकर कलाकारों की हौसला अफजाई की।<br />परेड को बेहतर ढंग से देखने के लिए, राजपथ के प्रत्येक तरफ पांच-पांच यानी कुल मिलाकर 10 बड़ी एलईडी स्क्रीन लगाए गए थे। झांकियों के बाद शुूरू हुए देश के जाबांज जवानों के हैरतअंगेज करतब, जिसके देख कर लोग अचम्भित रह गए।<br />मोटरसाइकल पर सवार महिला सुरक्षाकर्मियों की टुकड़ी जब राजपथ पर उतरी तो उनके हैरतअंगेज करतब को देख कर लोग अचम्भित रह गए। गणतंत्र दिवस पर राजपथ पर पहली बार पांच राफेल विमानों ने एरोहेड फॉर्मेशन में उड़ान भरी, जिसके देखने के लिए लोग अपनी कुर्सियों से उठकर खड़े हो गए और हाथ हिलाकर जाबांजों की हौसला बढ़ाया। गणतंत्र दिवस के मौके पर आयोजित समारोह में पहली बार भारतीय वायु सेना के 75 विमानों / हेलिकॉप्टरों को 'आजादी का अमृत महोत्सव' के तौर करतब दिखाए। राफेल, सुखोई, जगुआर, एमआई-17, सारंग, अपाचे और डकोटा जैसे पुराने और वर्तमान आधुनिक विमान/हेलिकॉप्टर राहत, मेघना, एकलव्य, त्रिशूल, तिरंगा, विजय और अमृत सहित विभिन्न संरचनाओं का प्रदर्शन किया।</p>
<p><br /><br /><strong>गणतंत्र दिवस के मौके पर सुरक्षा के व्यापक इंतजाम </strong><br />गणतंत्र दिवस के मौके पर सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किये गए थे। राजधानी दिल्ली को छावनी में तब्दील कर दिया गया और जगह-जगह सीसीटीवी लगा कर सुरक्षाकर्मी हर गतिविधि पर नजर रख रहे हैं। गणतंत्र दिवस के दौरान कोरोना प्रोटोकॉल का पूरी तरह से पालन किया गया। सोशल डिस्टेंसिंग तथा मास्क पहनने से जैसे नियम का सख्ती के साथ पालन किया गया। इस बार सिर्फ छह हजार लोगों को ही राजपथ पर आने को अनुमति दी गयी थी और 15 साल से कम उम्र के लोगों के लिए यहां पर प्रवेश पूरी तरह से वर्जित था।</p>
<p><strong>दर्शकों के बीच पहुंचे मोदी, स्वीकार किया अभिवादन</strong><br />वहीं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 73वें गणतंत्र दिवस के मौके पर राजपथ पर आयोजित मुख्य समारोह के समापन के बाद दर्शकों के बीच पहुंचे और उनका अभिवादन स्वीकार किया। मोदी ने राजपथ पर 73वें गणतंत्र दिवस के मौके पर आयोजित मुख्य समारोह के समापन के बाद राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद को विदाई दी। इसके बाद उन्होंने थोड़ी देर तक रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के साथ गुफ्तगू की और फिर वह हर साल की तरह दर्शकों का अभिवादन स्वीकार करने के लिए उनके पास पहुंच गये। उन्होंने हाथ हिलाकर राजपथ के दोनों ओर बैठे दर्शकों का अभिवादन स्वीकार किया।</p>
<p><strong>मोदी के पहनावे ने सबका ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया</strong><br />गणतंत्र दिवस के मौके पर मोदी के पहनावे ने सबका ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया।  मोदी ने आज मणिपुरी अंगवस्त्र और उत्तराखंड की टोपी धारण कर रखी थी, जिसमें ब्रह्म कमल अंकित था। गौरतलब है कि मोदी जब भी उत्तराखंड के केदारनाथ में बाबा भोले भंडारी का दर्शन करने जाते हैं, तो उन्हें ब्रह्मकमल अवश्य अर्पित करते हैं। समारोह में पहुंचे दर्शक भी  मोदी को अपनी बीच पाकर काफी खुश नजर आए। दर्शकों ने भी हाथ हिलाकर मोदी का स्वागत किया। इस दौरान लोगों ने मोदी-मोदी के नारे भी लगाए। <br /><br /></p>
<p><br /><br /></p>]]></content:encoded>
                
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                <pubDate>Wed, 26 Jan 2022 15:28:30 +0530</pubDate>
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