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                            <item>
                <title>ऑनलाइन गेमिंग के नाम पर साइबर ठगी: 3 आरोपी गिरफ्तार, लैपटॉप-टैबलेट समेत कई इलेक्ट्रॉनिक उपकरण जब्त </title>
                                    <description><![CDATA[जयपुर पुलिस ने ऑनलाइन गेमिंग के नाम पर धोखाधड़ी करने वाले तीन शातिर ठगों को गिरफ्तार किया है। आरोपी लोगों को मोटा मुनाफा कमाने का झांसा देकर फंसाते थे और जीत की राशि न देकर खिलाड़ियों की आईडी ब्लॉक कर देते थे। पुलिस ने इनके पास से भारी मात्रा में गैजेट्स, डेबिट कार्ड और सिम बरामद किए हैं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/3-accused-of-cyber-fraud-in-the-name-of-online/article-156968"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-06/1200-x-600-px2.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। रामनगरिया थाना पुलिस ने ऑनलाइन गेमिंग आईडी बनाकर साइबर ठगी करने वाले गिरोह का पर्दाफाश करते हुए तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से एक लैपटॉप, एक टैबलेट, पांच मोबाइल फोन, आठ सिम कार्ड, पांच डेबिट कार्ड, दो चेकबुक, बैंक डिटेल से जुड़े दस्तावेज और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरण जब्त किए हैं। पुलिस उपायुक्त पूर्व रंजिता शर्मा ने बताया कि पुलिस ने इस मामले में सीकर जिले के खंडेला निवासी हरफूल यादव (33), जाजोद निवासी राजेंद्र कुमार रूलानियां (23) तथा झुंझुनूं जिले के गुढ़ागोड़जी क्षेत्र निवासी विजेंद्र कुमार (35) को गिरफ्तार किया है। </p>
<p>पुलिस ने रामनगरिया के जगतपुर स्थित चंद्रविला के एक फ्लैट में कुछ युवक ऑनलाइन गेमिंग और साइबर फ्रॉड से जुड़ी गतिविधियां संचालित कर रहे हैं। सूचना के सत्यापन के बाद पुलिस ने मौके पर दबिश दी। ऐसे देते थे ठगी को अंजाम पुलिस जांच में सामने आया कि आरोपी लोगों को ऑनलाइन गेमिंग के जरिए मोटा मुनाफा कमाने का लालच देकर अपने पोर्टल से जोड़ते थे। खिलाड़ियों से पैसे लेकर उन्हें कॉइन उपलब्ध कराए जाते थे। गेम हारने पर रकम आरोपियों के पास रह जाती थी, जबकि जीतने वाले खिलाड़ियों की आईडी ब्लॉक कर दी जाती थी और उन्हें जीती गई राशि का भुगतान नहीं किया जाता था। इस तरह ऑनलाइन गेमिंग के नाम पर लोगों से धोखाधड़ी की जाती थी। आरोपियों द्वारा अलग-अलग लोगों के नाम पर जारी सिम कार्ड और बैंक खातों का भी उपयोग किया जाता था। मामले में आगे की जांच जारी है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 14 Jun 2026 16:01:14 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>सुप्रीम कोर्ट के फैसले का विहिप ने किया स्वागत, कहा-अनुसूचित समाज के अधिकारों से समझौता नहीं, धर्मांतरण गतिविधियों पर लगेगा अंकुश</title>
                                    <description><![CDATA[विश्व हिंदू परिषद ने सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक निर्णय का स्वागत किया है। सुरेंद्र जैन ने स्पष्ट किया कि धर्मांतरण के बाद व्यक्ति अनुसूचित जाति (SC) की श्रेणी में नहीं रहता और उसे एट्रोसिटी एक्ट का संरक्षण नहीं मिलेगा। विहिप के अनुसार, यह फैसला संवैधानिक अधिकारों के दुरुपयोग को रोकेगा और केवल हिंदू, सिख एवं बौद्ध अनुयायियों के हक की रक्षा करेगा।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/vhp-welcomed-the-decision-of-the-supreme-court-and-said/article-147829"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-04/supreme-court.jpg" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। विश्व हिंदू परिषद (विहिप) ने सर्वोच्च न्यायालय के हालिया फैसले का स्वागत करते हुए इसे सामाजिक न्याय और संविधान की मूल भावना को सुदृढ़ करने वाला बताया है। विहिप के संयुक्त महामंत्री सुरेंद्र जैन ने कहा कि सर्वोच्च न्यायालय ने स्पष्ट किया है कि धर्मांतरण के बाद कोई भी व्यक्ति अनुसूचित जाति की संवैधानिक श्रेणी में नहीं आता और उसे अनुसूचित जाति एव जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम के तहत संरक्षण प्राप्त नहीं हो सकता।</p>
<p>जैन ने कहा कि यह निर्णय संविधान (अनुसूचित जाति) आदेश, 1950 की भावना के अनुरूप है, जिसमें केवल हिन्दू, सिख और बौद्ध धर्म के अनुयायियों को ही अनुसूचित जाति की श्रेणी में शामिल किया गया है। उन्होंने कहा कि यह फैसला उन प्रवृत्तियों पर रोक लगाएगा, जिनमें धर्म परिवर्तन के बाद भी पूर्व जातिगत पहचान के आधार पर संवैधानिक लाभ लेने की कोशिश की जाती है। उनके अनुसार, इससे तथाकथित धर्मांतरण गतिविधियों पर भी अंकुश लगेगा।</p>
<p>डॉ. जैन ने कहा कि अनुसूचित जातियों को दिए गए अधिकारों का उद्देश्य ऐतिहासिक सामाजिक अन्याय को दूर करना है। ऐसे में यदि कोई व्यक्ति स्वेच्छा से धर्म परिवर्तन करता है, तो वह उस सामाजिक संदर्भ से भी अलग हो जाता है, जिसके आधार पर ये विशेष अधिकार दिए गए हैं।</p>
<p>हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यदि कोई व्यक्ति पुनः हिन्दू, सिख या बौद्ध धर्म में लौटता है और समाज उसे स्वीकार करता है, तो वह दोबारा इन अधिकारों का पात्र बन सकता है। विहिप नेता ने कहा कि यह निर्णय सामाजिक समरसता, पारदर्शिता और न्याय की स्थापना की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने यह भी बताया कि संगठन देशभर में ऐसे लोगों की पहचान करेगा, जिन्होंने कथित रूप से अनुसूचित समाज के अधिकारों का दुरुपयोग किया है, ताकि वास्तविक लाभार्थियों को उनका हक दिलाया जा सके।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 25 Mar 2026 16:15:00 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल 2026 में कार्तिकेय वाजपेयी पेश करेंगे अपना पहला उपन्यास ‘द अनबिकमिंग’</title>
                                    <description><![CDATA[जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल में कार्तिकेय वाजपेयी के प्रथम उपन्यास ‘द अनबिकमिंग’ पर विशेष सत्र होगा, जिसमें पहचान, आत्मचिंतन और प्रामाणिकता पर संवाद किया जाएगा।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/karthikeya-vajpayee-will-present-his-first-novel-the-unbecoming-at/article-139357"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-01/jlf.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। दुनिया के सबसे प्रतिष्ठित साहित्यिक आयोजनों में शुमार जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल, कार्तिकेय वाजपेयी की पहली पुस्तक ‘द अनबिकमिंग’ परएक विशेष सत्र में प्रस्तुत करेगा। यह सत्र वाजपेयी की जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल में पहली उपस्थिति होगी, जिसमें उनके उपन्यास को अंतरराष्ट्रीय पाठकों, लेखकों और विचारकों के सामने औपचारिक रूप से प्रस्तुत किया जाएगा। इस बातचीत में वरिष्ठ पत्रकार संजय पुगलिया शामिल होंगे और सत्र का संचालन पेंगुइन रैंडम हाउस इंडिया की प्रकाशन निदेशक मिली ऐश्वर्या करेंगी।</p>
<p>‘द अनबिकमिंग’ अपनी आत्ममंथनकारी शैली और दार्शनिक दृष्टि के लिए चर्चा में है। उपन्यास में पहचान, महत्वाकांक्षा और आत्मिक स्पष्टता जैसे प्रश्नों को गहराई से टटोला गया है। महामहिमदलाई लामा की प्रस्तावना से सुसज्जित यह पुस्तक ध्यान, खेल और आत्म-चिंतन की लंबी साधना का परिणाम है और भारतीय कथा साहित्य में एक नए विचारशील स्वर को सामने लाती है।</p>
<p>जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल में वाजपेयी उन अनुभवों और विचारों को साझा करेंगे, जिनसे इस पुस्तक की रचना संभव हुई। चर्चा के केंद्र में मार्गदर्शन, अपेक्षाएँ और विरासत में मिली पहचान को पीछे छोड़कर प्रामाणिकता की खोज जैसे विषय होंगे। संजय पुगलिया इस बातचीत को सांस्कृतिक और सार्वजनिक जीवन के व्यापक परिप्रेक्ष्य से जोड़ेंगे।</p>
<p>पेंगुइन रैंडम हाउस इंडिया द्वारा प्रकाशितद अनबिकमिंगसिद्धार्थ, एक प्रसिद्ध क्रिकेटर, और उसके गुरु अजय के बीच विकसित होते रिश्ते की कहानी है। यह कथा बाहरी सफलता और आंतरिक संतोष के बीच के तनाव को उजागर करती है और आधुनिक जीवन में स्थिरता और जागरूकता की परिवर्तनकारी भूमिका पर विचार करती है।</p>
<p>अपने उपन्यास के बारे में लेखक कार्तिकेय वाजपेयी ने कहा,“द अनबिकमिंग’ एक लंबी आत्म-परीक्षा और ध्यान की यात्रा से उपजा है। इसे जयपुर लिटरेचरफेस्टिवल  में प्रस्तुत करना—जहाँ संवाद स्वाभाविक है और जिज्ञासा को सम्मान मिलता है—ऐसा महसूस होता है मानो यह पुस्तक अपने स्वाभाविक पाठकों के बीच घर लौट आई हो,ऐसे साहित्यिक महाकुंभ में अपनी किताब पर संवाद करने को मैं उत्सुक हूँ।”</p>
<p>दिल्ली-स्थित वकील, पूर्व राज्य-स्तरीय क्रिकेटर और विभिन्न ध्यान साधनाओं के अनुभवी अभ्यासकर्ता वाजपेयी ने अपने जीवन के अनुभवों से इस कृति को आकार दिया है। ‘द अनबिकमिंग’ उनका प्रथम उपन्यास है, जो आत्म-चिंतन और जागरूकता पर केंद्रित एक नए, चिंतनशील साहित्यिक स्वर के आगमन का संकेत देता है।</p>
<p>यह सत्र एक आत्मीय और रोचक संवाद के रूप में सामने आएगा, जो श्रोताओं को ऐसी पुस्तक से परिचित कराएगा जो उपलब्धि और ‘और अधिक बनने’ की निरंतर दौड़ पर ठहरकर प्रश्न करती है। यह संवाद पाठकों को ‘जो पहले से है, उसी में लौटने’ की संवेदनशील और गहरी यात्रा का आमंत्रण देगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 12 Jan 2026 18:25:02 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>शहर की सूरत बदली तो बदल गए संकेतक भी</title>
                                    <description><![CDATA[हालत यह है कि कोटा वासी भी एक बार तो समझ नहीं पा रहे थे कि वे किधर से जाएं। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/when-the-face-of-the-city-changed--the-indicators-also-changed/article-54598"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-08/sheher-ki-soorat-bdli-to-badl-gye-snketak-bhi...kota-news-14-08-2023.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। नगर विकास न्यास की ओर से करवाए गए विकास व सौन्दर्यीकरण के साथ ही शहर का नक् शा ही बदल गया है। ऐसे में शहर के नए रास्तों की पहचान बाहर से आने वाले ही नहीं स्थानीय लोगों के लिए परेशानी बनी हुई थी। लेकिन अब लोगों को न तो परेशान होना पड़ेगा और न ही किसी से पूछना पड़ेगा। ऐसा संभव हुआ है शहर में जगह-जगह लगाए गए संकेतकों से। नगर विकास न्यास व स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के तहत पिछले तीन साल में कोटा शहर में कई बड़े प्रोजेक्ट तैयार हुए। शहर के यातायात को सुगम बनाने और पर्यटन की दृष्टि से किए गए विकास से शहर का नक् शा ही बदल गया। शहर में अब जहां देखो वहां फ्लाई ओवर व अंडरपास नजर आने लगे हैं। चौराहों की पहचान ही बदल गई है। नए-नए रास्ते बन गए हैं।  शहर में हुए विकास व सौन्दर्यीकरण के चलते बाहर से आने वाले व्यक्ति को समझ ही नहीं आता कि वह कोटा में ही आया है या किसी अन्य शहर में। तीन साल पहले जो रास्ते थे वे अब पूरी तरह से नह रूप में दिखने लगे हैं। चौराहों का आकार व प्रकार ही बदल गया है। अचानक आने वाले तो चकर घिन्नी हो रहे हैं। हालत यह है कि कोटा वासी भी एक बार तो समझ नहीं पा रहे थे कि वे किधर से जाएं। </p>
<p><strong>महानगरों की तर्ज पर लगे संकेतक</strong><br />जिस तरह से जयपुर, जोधपुर जैसे बड़े शहरों और दिल्ली व मुम्बई जैसे महानगरों में जगहों की पहचान के लिए काफी ऊंचाई पर दिशा सूचक  संकेतक लगे होते हैं। शहर वासियों व बाहर से आने वालों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए अब कोटा में भी उसी तरह के संकेतक लगाए गए हैं। हालांकि पूर्व में गेंट्री बोर्ड पर संकेतक लगे हुए हैं लेकिन वे पुराने होने व उनमें से अधिकतर पर विज्ञापन चस्पा होने से उनका पूरा उपयोग नहीं हो पा रहा है। ऐसे में अब नगर विकास न्यास की ओर से महानगरों की तर्ज पर कोटा में भी संकतक लगाए गए हैं। </p>
<p><strong>यहां लगाए संकेतक</strong><br />नगर विकास न्यास की ओर से शहर में बनाए गए सभी नए चौराहों और अंडरपास व फ्लाई ओवरों के आस-पास संकेतक लगाए गए हैं। एरोड्राम चौराहा अंडरपास पर घोड़े वाले बाबा चौराहा, झालावाड़ रोड, सेवन वंडर्स रोड, जेडीबी कॉलेज के आस-पास और गोबरिया बावड़ी व अनंतपुरा तक के क्षेत्र में जगह-जगह पर इस तरह के संकेतक देखे जा सकते हैं। न्यास अधिकारियों का कहना है कि अंडरपास व फ्लाई ओवर के साथ ही नए रास्ते बनने से लोगों को उनकी जानकारी आसानी से मिल सके। इसके लिए संकेतक लगाए गए हैं। कई जगह पर लग चुके हैं और जहां आवश्यक हैं वहां लगाए जा रहे हैं। पुराने संकेतकों के साथ ही नए संकेतक भी लगाने से लोगों को सुविधा होगी। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 14 Aug 2023 18:18:39 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[kota]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>प्रदेश के किले-महलों ने अन्तरराष्ट्रीय स्तर पर बनाई पहचान</title>
                                    <description><![CDATA[ पर्यटक स्मारक के यंत्रों की कार्यप्रणाली को देखकर आश्चर्यचकित हो जाते हैं। वहीं साल 2013 में प्रदेश के 6 किले यूनेस्को की लिस्ट में शामिल हुए थे। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/palaces-of-the-state-made-an-identity-at-the-international-level/article-41159"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-03/333-copy2.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। प्रदेश के किले और महलों ने अपनी स्थापत्य कला, बनावट के बल पर देश ही बल्कि विदेशों तक में अपनी पहचान बनाई है। इसी का नजीता है कि प्रदेश के 7 मॉन्यूमेंट्स यूनेस्को की वर्ल्ड हेरिटेज मॉन्यूमेंट्स की लिस्ट में शामिल हैं। साल 2010 में पुरातत्व विभाग के अधीन आने वाले जंतर-मंतर स्मारक को इस सूची में शामिल किया था। पर्यटक स्मारक के यंत्रों की कार्यप्रणाली को देखकर आश्चर्यचकित हो जाते हैं। वहीं साल 2013 में प्रदेश के 6 किले यूनेस्को की लिस्ट में शामिल हुए थे। हिल फोट्स आॅफ राजस्थान के तहत पुरातत्व विभाग के अधीन आने वाले आमेर महल, गागरौन फोर्ट एवं भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) के अधीन आने वाले कुंभलगढ़ फोर्ट, रणथम्भौर फोर्ट, जैसलमेर और चित्तौड़गढ़ फोर्ट को शामिल किया था। इन मॉन्यूमेंट्स में सबसे अधिक पर्यटक जयपुर स्थित आमेर महल में विजिट के लिए आते हैं। </p>
<p><strong>रेलवे</strong><br />16 अप्रैल 1853 को एशिया की पहली ट्रेन मुंबई (बोरी बंदर) और थाणे के बीच चली। इस लाल रंग ट्रेन में 14 डिब्बे थे। इनमें 400 यात्रियों को 21 मील की सैर कराई गई। वहीं राजपूताना मालवा रेलवे की दिल्ली एवं आगरा से अहमदाबाद की मीटर गेज रेल लाइन 1873 में रेवाड़ी तक एवं 1874 में बांदीकुई एवं जयपुर तक चालू हो गई थी। इसे सन् 1875 में अजमेर तक यातायात के लिए खोल दिया गया। 1909 में बंबई-दिल्ली वाया कोटा रेल मार्ग हुआ।</p>
<p><strong>रोडवेज</strong><br />राजस्थान राज्य पथ परिवहन निगम 1 अक्टूबर, 1964 में बना। इससे पहले रोडवेज विभाग थे। इस दौरान आठ डिपो व 429 बसे थी। यह बसे 8000 किलोमीटर प्रतिदिन संचालित होती थी। वर्तमान में 52 डिपो है, जिनसे 3300 बसे 12.50 लाख किलोमीटर संचालित हो रही है।  वहीं जयपुर में करीब 30 हजार ई रिक्शा व 1400 मिनी बस व करीब 300 लो फ्लोर बसे भी संचालित हो रही है। </p>
<p><strong>एयरपोर्ट</strong><br />जयपुर से प्रतिदिन 60-65 अंतराष्ट्रीय व घरेलू विमान संचालित हो रहे है। इनमें 10 हजार से अधिक लोग सफर करते है। </p>
<p><strong>जयपुर मेट्रो</strong><br />जयपुर में 15 जून, 2015 3 जून, 2015 मानसरोवर से चांदपोल तक 9.6 किलोमीटर के रूट में मेट्रो ट्रेन का संचालन किया था। चांदपोल से बड़ी चौपड़ तक 23 सितंबर, 2020 से मेट्रो ट्रेन का संचालन किया जा रहा है। मानसरोवर से बड़ी चौपड़ (11.9 किलोमीटर लंबे रूट) तक 10 मेट्रो ट्रेन संचालित होती है। इनमें 30 से 40 हजार यात्री प्रतिदिन सफर करते है। </p>
<p><strong>चिकित्सा, शिक्षा और सेवा</strong><br />राजस्थान में आजादी के बाद 1949 में केवल एक मेडिकल कॉलेज जयपुर में एसएमएस मेडिकल कॉलेज था। यह देश का 15 वां कॉलेज था। इसकी शुरुआत 1855 में एक औषधालय और एक मेडिकल स्कूल के रूप में हुई थी। 1864 में बंद हो गया। बाद में 1945 में जयपुर राज्य के दीवान मिर्जा इस्माइल ने इसी योजना बनाई और 1947 में यह मूर्तरूप ले सका। अब राजस्थान में 31 जिलों में सरकारी मेडिकल कॉलेज जल्द हो जाएंगे। 4-5 जिलों में 1949 में अस्पताल खुले थें। दवाइयां भी सीमित थीं। चुनिंदा डॉक्टर थे। एक्स-रे भी जयपुर में ही होते थे। डॉक्टर नब्ज देखकर इलाज करते थे। जांच की खासा तकनीक नहीं थीं। अभी 17 जिलों में सरकारी और प्रदेश में 8 प्राइवेट मेडिकल कॉलेज हैं। हर साल करीब 4400 डॉक्टर बनते हैं। सरकारी में 3030 और प्राइवेट में करीब 1350 सीटें एमबीबीएस की है। अभी राजस्थान में करीब 20 हजार मेडिकल कॉलेजों के अस्पतालों और चिकित्सालयों में डॉक्टर है। वहीं इतने ही प्राइवेट सेक्टर में डॉक्टर काम कर रहे हैं। एक लाख के करीब जीएनएम, एएनएम और 35 हजार के करीब पैरामेडिकल स्टॉफ है। करीब 3500 जिला, सीएचसी, पीएचसी स्तर के अस्पताल हैं। अब प्रदेश मेडिकल टयूरिज्म का हब है। आॅर्गन ट्रांसप्लांट, बड़े आॅपेरशन, आईवीएफ तकनीक से टेस्ट टÞयूब बेबी जन्म, एमआरआई-सीट स्कैन जैसी अत्याधुनिक जांच सुविधाएं हैं।  एयर एम्बुलेंस जैसी सेवाएं चल रही हैं।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 30 Mar 2023 10:29:03 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>डाक टिकट से बनी पहचान, लोगों में बढ़ रहा रुझान</title>
                                    <description><![CDATA[
डाक विभाग की ओर से संचालित मायटिकट योजना आमजन को काफी रास आ रही है। इस योजना के तहत आमजन अपने नाम की पहचान बना सकता है। इसके लिए ज्यादा रकम खर्च नहीं करनी पड़ेगी। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/identity-made-from-postage-stamp--increasing-trend-among-people/article-13414"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-07/dak-ticket-se-bani-pehchan.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। डाक विभाग की ओर से संचालित मायटिकट योजना आमजन को काफी रास आ रही है। इस योजना के तहत आमजन अपने नाम की पहचान बना सकता है। इसके लिए ज्यादा रकम खर्च नहीं करनी पड़ेगी। कम खर्च में आमजन अपने नाम से डाक टिकट छपा सकता है और इसका उपयोग अन्य डाक टिकटों की तरह किया जा सकता है। आम तौर पर डाक टिकटों पर महापुरुषों के चित्र लगे होते हैं। अलग-अलग मूल्य के डाक टिकटों पर अलग-अलग महापुरुषों के चित्र बने होते हैं। जिसके साथ टिकट का मूल्य भी लिखा रहता है। लोगों की भागीदारी बढ़ाने के उद्देश्य से डाक विभाग ने आमजन के डाक टिकट जारी करने के लिए माय टिकट योजना शुरू की। इसमें कोई भी व्यक्ति अपनी फोटो डाक टिकट पर लगवा सकता है। इस टिकट का रजिस्ट्री व अन्य डाक सामग्री भेजने में इस्तेमाल किया जा सकता है।</p>
<p><strong>यह है योजना</strong></p>
<p>डाक विभाग की ओर से माई टिकट योजना संचालित की जा रही है। इस योजना के तहत स्वयं का डाक टिकट बनवाया जा सकता है। डाक  टिकट पर फोटो भी रहेगी। यह डाक टिकट उसी तरह काम करेगा जैसे अन्य डाक टिकट काम करते हैं। डाक विभाग ने यह योजना लोगों को डाक घर से जोड़ने और नई सुविधा उपलब्ध कराने के मकसद से चलाई है। डाक विभाग की ओर से सभी लोगों को अपने नाम से डाक टिकट बनवाने के लिए प्रेरित किया जा रहा है। </p>
<p><strong>तीन सौ जमा करवाओ, अपना टिकट बनवाओ</strong></p>
<p>डाक विभाग की इस योजना के तहत डाक टिकट बनवाने के लिए डाक घर में जाकर निर्धारित फार्म भरना होगा। फार्म जमा कराते समय तीन सौ रुपए जमा करवाने होंगे। इस राशि में पांच-पांच रुपए के 12 टिकट बनाकर फार्म भरने वाले उपभोक्ता को दिए जाएंगे। इसके बाद उपभोक्ता इन टिकटों का उपयोग रजिस्ट्री और अन्य डाक सामग्री भेजने में उपयोग कर सकता है। वहीं उपभोक्ता इन टिकटों को संग्रहण कर अपने पास भी रख सकता है। </p>
<p><strong>मशीन से होती है छपाई</strong></p>
<p>डाक विभाग की ओर से टिकटों की छपाई के लिए अलग से मशीन की व्यवस्था की गई है। यह मशीन में पूरे जिले में केवल प्रधान डाकघर में लगाई जाती है। कोटा शहर में यह मशीन नयापुरा स्थित प्रधान डाकघर में लगा रखी है। इस मशीन का सेटअप अलग तरह से होता है।</p>
<p><strong>हर माह आ रहे आठ आवेदन</strong></p>
<p>डाक विभाग के अनुसार माई टिकट योजना के प्रति लोगों की काफी रुचि बनी हुई है। योजना के शुरुआत के समय आमजन को इसकी जानकारी नहीं थी। ऐसे में विभाग ने डाकघर में विभिन्न कार्यों के लिए आने वाले लोगों को इसकी जानकारी देना शुरू किया। जब लोगों को इस योजना की जानकारी मिली तो उन्होंने इसमें काफी रुचि दिखाई। प्रारम्भ में इस योजना में आवेदन करने लोगों की संख्या काफी कम थी। बाद में इसकी उपयोगिता को देखते हुए आमजन की योजना में भागीदारी बढ़ती चली गई। वर्तमान में हर माह करीब आठ आवेदन इस योजना के तहत अपना डाक टिकट बनवाने के लिए आ रहे हैं।  </p>
<p> रजिस्ट्री और साधारण डाक में अभी भी डाक टिकटों का उपयोग होता है। इस योजना के तहत उपभोक्ता को पांच-पांच रुपए के 12 टिकट दिए जाते हैं। तीन सौ रुपए जमा कराने के बाद 60 रुपए के डाक टिकट बनाकर दिए जाते हैं। इन टिकटों का उपयोग आवेदनकर्ता अपनी सुविधा के अनुसार कर सकता है।</p>
<p><strong>- सुशील कुमार राठौर, सहायक डाक अधीक्षक नयापुरा</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 02 Jul 2022 13:01:32 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[kota]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>फादर्स डे विशेष: मेरा अभिमान, स्वाभिमान, पहचान ही नहीं पूरा आसमान है पिता</title>
                                    <description><![CDATA[शहर में कुछ ऐसे भी पिता हैं जो अकेले ही माता-पिता दोनों की भूमिका बखूबी निभा रहे हैं। उन्होंने बच्चों की खुशी और उनकी परवरिश की खातिर विपरीत परिस्थियों में भी हिम्मत नहीं हारी। उनकी जिंदगी का एक ही मकसद रहा कि बच्चों की अच्छी परवरिश करनी है। उन्हें अच्छे संस्कार देकर काबिल बनाना है। आज फादर्स डे के अवसर पर ऐसे ही सिंगल फादर्स के बारे में बताएंगें जिन्होनें पिता होने के साथ-साथ मां के फर्ज को भी बखूबी निभा रहे हैं। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/father-s-day-special--my-pride--self-respect--not-only-identity--but-the-whole-sky-is-my-father/article-12632"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-06/fathers-day-3.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। सख्त-सी आवाज में कहीं प्यार छिपा सा रहता है। उसकी रगों में हिम्मत का एक दरिया सा बहता है। कितनी भी परेशानियां और मुसीबतें पड़ती हो उस पर, हंस कर झेल जाता है ह्लपिताह्व किसी से कुछ न कहता है। पिता शब्द की व्याख्या करना बहुत कठिन है। पिता परिवार के लिए वटवृक्ष की तरह होता है। बच्चों के जीवन का आधार होते है। एक उम्मीद, एक आस और एक विश्वास होते है। बच्चों के हर सपने को पूरा करने की सोच रखते हैं। बच्चों के संघर्ष में हौसलों की दीवार होते हैं। माता-पिता दुनिया का सबसे अनमोल रत्न होते हैं। उनके प्यार और आशीर्वाद के बिना संसार में कुछ संभव नहीं है। पूरी दुनिया में एक पिता ही वो इंसान हैं जो ये चाहता है कि उनके बच्चे उससे भी ज्यादा कामयाब बनें। बच्चों की जरा-सी तकलीफ या समस्या के सामने पिता एक चट्टान की तरह खड़े हो जाते हैं। लेकिन अपने बच्चों पर कोई आंच नहीं आने देते । बच्चों के सुख-दुख में हमेशा साथ होते हैं।<br /><br /> पिता नीम के पेड़ जैसा होता है। उसके पत्ते भले ही कड़वे हों पर छाया ठंडी देता है। एक पिता अपने बच्चों का गुरूर होता है। जिसे कोई तोड़ नहीं सकता। पिता सदैव संघर्ष कर अपने बच्चों के जीवन को आकार देने के लिए अपनी खुशियों का त्याग करता हैं। कहते हैं कि एक मां अकेले बच्चों की परवरिश कर सकती है लेकिन पिता नहीं। लेकिन शहर में कुछ ऐसे भी पिता हैं जो अकेले ही माता-पिता दोनों की भूमिका बखूबी निभा रहे हैं। उन्होंने बच्चों की खुशी और उनकी परवरिश की खातिर विपरीत परिस्थियों में भी हिम्मत नहीं हारी। उनकी जिंदगी का एक ही मकसद रहा कि बच्चों की अच्छी परवरिश करनी है। उन्हें अच्छे संस्कार देकर काबिल बनाना है। आज फादर्स डे के अवसर पर ऐसे ही सिंगल फादर्स के बारे में बताएंगें जिन्होनें पिता होने के साथ-साथ मां के फर्ज को भी बखूबी निभा रहे हैं। दैनिक नवज्योति ने इस अवसर पर ऐसे बच्चों से बात कर उनके पिता के संघर्ष के बारे में जाना। जिन्होंने विपरीत हालातों में भी अपना हौसला नहीं खोया और अकेले दम पर बच्चों को बेहतर परवरिश दी। हालांकि इस सफर में उन्हें काफी संघर्ष का सामना भी करना पड़ा लेकिन जिंदगी के फाइनेंशियल, सोशल, इमोशनल हर स्तर पर चट्टान की तरह मजबूत खड़े रहें। किसी शायर की ये पंक्तियां - क्या कहूं उस पिता के बारे में जिसने सोचा नहीं कभी खुद के बारे में , पापा आपने मुझे जिंदगी भर दिया है, आपका तहेदिल से बेहद शुक्रिया है।<br /><br /><strong> पापा हमारे सुपर हीरो हैं</strong><br />हम काफी छोटे थे जब हमारी मम्मी का अचानक निधन हो गया। सारी जिम्मेदारी पापा (मनोज गुप्ता) पर आ गई। उस समय मैं 14 साल की थी और मेरे दोनों छोटे भाई एक ग्यारह व एक नौ साल का था। हम लोग समझ भी नहीं सकते कि पापा  भी उस दौरान किस स्टेज से गुजरे होंगे। पापा ने अकेले पूरे घर का काम देखा। बच्चों के प्रति अपनी पूरी जिम्मेदारियां निभाई। पढ़ाना-लिखाना, खाना बनाना स्वयं  भी जॉब पर जाना। सब कुछ उन्होंने बहुत ही बखूबी संभाला। कभी भी हमें मम्मी की कमी महसूस नहीं होने दी। पापा शिक्षक है पोस्टिंग अंता के पास है वह रोज अप डाऊन करते हैं। जब हम छोटे थे तब भी वह डेली अप डाऊन करते थे । हमारा सब काम करके खाना बनाकर जाते शाम को आने के बाद फिर सारा काम करते थे। वह अकेला महसूस करते थे ये हमने महसूस किया। पर दुबारा शादी करने के बारे में उन्होंने नहीं सोचा। उन्होंने हमारी खुशी देखी। मैं उस समय छोटी थी मुझे कुछ काम आता भी नहीं था। पापा ने ही सब चीजों को संभाला । फिर धीरे धीरे मैनें पापा के कामों में हाथ बंटाना शुरू किया । कुछ बातें लड़कियां अपनी मम्मी से ही शेयर  कर सकती थी वह उनसे शेयर की। पापा ने मुझे बहुत सपोर्ट किया। मुझे समझा और समझाया भी और हर चीज की सही गाइडेंस दी। उन्होंने कभी यह महसूस नहीं होने दिया कि वह सिर्फ पापा है। मां का रोल भी निभाया । मैंने और मेरे दोनों छोेटे भाई हिमांक और देवांक ने इंजीनियरिंग की है छोटा भाई अभी बैंगलोर में इंजीनियरिंग कर रहा है। मैं कोटा में ही जॉब कर रही हूं। हम तीनों बहन भाई अपने पापा से बहुत प्यार करते हैं।  वह हमारे सुपर हीरो है। वहीं हमारे मम्मी भी है और पापा भी है। वो नहीं होते तो हम भी अभी नहीं होते। <br /><strong>- अपर्णा गुप्ता, इंजीनियर</strong><br /><br /><strong>लाइफ में पापा का बहुत ज्यादा सपोर्ट</strong> <br />हम बहुत छोटे थे जब मम्मी का कैंसर से निधन हुआ। उस समय मैं चौथी कक्षा में था मेरी बहन मुझे कुछ चार साल बड़ी है।  हमें बहुत बाद में मालूम हुआ कि उन्हें कैंसर है। उसके पहले ट्रीटमेंट काफी टाइम से चल रहा था। उस समय से पापा - मम्मी बाहर दिल्ली  ट्रीटमेंट  के कारण रहते थे। हम घर पर अपने रिश्तेदारों के साथ रहते थे। पापा(सुरेश वर्मा ) एक इंश्योरेस कंपनी में प्रशासनिक अधिकारी है । पापा ने सबसे ज्यादा स्ट्रगल किया है। हॉस्पिटल में मम्मी के साथ रहना वहां सब संभालना उसके अलावा हमारी देखभाल की भी जिम्मेदारी थी। मेड्स समय से आ रही है या नहीं ,हम लोग समय से स्कूल जा रहे है या नहीं ,उन पर हॉस्पिटल और यहां घर की भी जिम्मेदारी रहती थी। मैं उस समय आठवी में थी पापा ने कभी किसी चीज की कमी महसूस नहीं होने दी। सभी सुविधाएं हमें दे रखी थी । रिश्तेदारों  पर भी हमारी जिम्मेदारी पापा ने नहीं डाली। वह हमारे लिए सब कुछ मैनेज करके जाते थे। जिससे किसी के ऊपर भी हमारा बर्डन नहीं पड़े। हम थोडे छोटे थे तो अकेले नहीं रह सकते थे इस वजह से रिश्तेदारों के साथ रहते थे। हमारे मम्मी-पापा ने हमें कभी बताया ही नहीं क्या बीमारी है। हमें मम्मी के निधन के बाद पता चला कि उन्हें कैंसर था।  वर्ष 2007 में निधन हुआ था उससे पहले 2-3 साल तक ट्रीटमेंट चला था। मम्मी के नहीं रहने का मुझे शुरू में पता ही नहीं चला मैं बहुत छोटा था मैं समझ ही नहीं पाया कि यह क्या हो रहा है । जब थोड़ा समझदार हुआ तब मम्मी के प्रति लगाव की फीलिंग महसूस हुई। बहन बड़ी है तो उन्होंने वह दर्द महसूस किया होगा। शुरू में सभी रिश्तेदारों ने पापा से कहा बच्चे हमारे पास रह जाएंगे आप जॉब वगेरह करो, लेकिन पापा ने कहा, मैं अकेला ही सब मैनेज कर लूंगा। तब से आज तक पापा हमारे साथ है। पापा के सपोर्ट से ही आज लाइफ आसानी से चल रही है।  मैं अपने पापा से बहुत प्यार करता हूं।  मैं उन्हें सब खुशियां लौटाना चाहता हूं जो हमारे कारण उनकी छूट गई हैं। मेरे पापा ने इतना स्ट्रगल किया है मैं उन्हें दु:खी नहीं देख सकती। जिम्मेदारी तो बच्चों के प्रति हर पेरेंट्स की होती है लेकिन हमारे पापा ने हमारी हर जिम्मेदारी को प्यार से निभाया है।  हम तीनों मिलकर लाइफ को एन्जॉय करते है। उन्होंने हमकों कभी बांध कर नहीं रखा पूरी आजादी दी। यह नहीं सोचा कि बेटी है तो यह नहीं करें हर चीज की आजादी दी इस बात का भी पूरा ध्यान रखा कि बच्चे बिगड़े नहीं। अच्छे संस्कार दिए। गलत रास्ते पर नहीं चले। हमने भी कभी उनकी दी हुई फ्रीडम का गलत इस्तेमाल नहीं किया। पापा की यही सीख है कि जो भी करो समझदारी करों। मेरा अभी बी.फार्मा पूरा हुआ है मैं जॉब के लिए प्रयासरत हॅू। बहन ने बी.टेक किया है।             <br /><strong>-  प्रफुल्ल वर्मा  एवं आयुषी वर्मा </strong><br /><br /><strong>मेरे बच्चे ही मेरी जिंदगी</strong><br />जिंदगी बहुत अच्छे से चल रही थी। किसी चीज की कोई कमी नहीं थी। जुलाई 2011 में मेरे दूसरे बेटे का जन्म हुआ। इसके जन्म के 10 माह बाद पता चला कि पत्नी को ब्लड कैंसर है। मेरा बड़ा बेटा तब चार साल का था। सब जगह ट्रीटमेंट करवाया।  इलेक्ट्रॉनिक्स की दुकान थी। इलाज में सब धन खर्च हो गया। काम धंधा बंद हो गया। अक्टूबर 2014 में पत्नी का निधन हो गया। यह मेरे परिवार के लिए दु:खद समय था। इसके साथ ही दोनों बेटों की जिम्मेदारी मुझ पर आ गई। उस समय बड़ा बेटा हर्षित सात साल का था और छोटा बेटा रिद्म तीन साल का था। परिवार और रिश्तेदारों ने भी ऐसे समय में साथ छोड़ दिया। मेरे सामने दोनों बेटों का भविष्य था। मुझे उनकी परवरिश अपने दम पर करनी थी। इधर काम धंधा बंद हो चुका था। हर तरफ से चुनौतियां मेरे सामने थी। स्वयं ही उनके लिए खाना बनाता, उन्हें खिलाता, स्कूल और ट्यूशन पर भेजता हूं। उस समय मेरे तीन एक्सीडेंट भी हुए। एक हाथ से ही खाना बनाता और सभी काम खुद करता था। काफी संघर्ष भरे दिन थे। दोनों बच्चे 6 साल से  ताइक्वाडों सीख रहे हैं।  मेरे दोनों बच्चे ताइक्वांडो में गोल्ड मेडल जीत चुके हैं। मेरे लिए मेरे बच्चों की खुशी पहले है। मेरे जीवन में बच्चों के अलावा कोई नहीं है। हम तीनों पिता-पुत्र की तरह नहीं बल्कि भाइयों की तरह रहते हैं। बेटे मुझे पापा नहीं भाई बोलते है। मैंने बच्चों को बोल रखा है मैं ही तुन्हारा पिता भी हंू और मां भी हूं। जो भी बात है मुझे बताओ।  इन हालातों में भी कोशिश पूरी है कि बच्चों को अच्छी परवरिश देकर लायक बनाऊं। बड़े बेटे ने 10वींं का एग्जाम दिया है छोटा 7वीं क्लास में आया है ।     <strong>- दीपक कुमार शर्मा</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 20 Jun 2022 13:24:51 +0530</pubDate>
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                <title>देश की सम्प्रभुता के पर्व पर दिखी सांस्कृतिक विविधता, लोक कलाओं ने गणतंत्र की करवाई पहचान</title>
                                    <description><![CDATA[दर्शकों के बीच पहुंचे मोदी, स्वीकार किया अभिवादन]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/%E0%A4%A6%E0%A5%87%E0%A4%B6-%E0%A4%95%E0%A5%80-%E0%A4%B8%E0%A4%AE%E0%A5%8D%E0%A4%AA%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A4%AD%E0%A5%81%E0%A4%A4%E0%A4%BE-%E0%A4%95%E0%A5%87-%E0%A4%AA%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%B5-%E0%A4%AA%E0%A4%B0-%E0%A4%A6%E0%A4%BF%E0%A4%96%E0%A5%80-%E0%A4%B8%E0%A4%BE%E0%A4%82%E0%A4%B8%E0%A5%8D%E0%A4%95%E0%A5%83%E0%A4%A4%E0%A4%BF%E0%A4%95-%E0%A4%B5%E0%A4%BF%E0%A4%B5%E0%A4%BF%E0%A4%A7%E0%A4%A4%E0%A4%BE--%E0%A4%B2%E0%A5%8B%E0%A4%95-%E0%A4%95%E0%A4%B2%E0%A4%BE%E0%A4%93%E0%A4%82-%E0%A4%A8%E0%A5%87-%E0%A4%97%E0%A4%A3%E0%A4%A4%E0%A4%82%E0%A4%A4%E0%A5%8D%E0%A4%B0-%E0%A4%9F/article-4164"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-01/28.jpg" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। देश की एकता अखण्डता और सम्प्रभुता की तस्वीर बुधवार को राजपथ पर गणतंत्र दिवस के मौके पर एक बार फिर नज़र आई। जब देश की सम्प्रभुता के पर्व पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद सहित हजारों की संख्या में देश-वासियों के सामने सांस्कृतिक विवधता और लोक कलाओं के बीच गणतंत्र का चित्रण नजर आया।  देश के 73वें गणतंत्र दिवस के मौके पर बुधवार को राजपथ पर आयोजित मुख्य समारोह में सांस्कृतिक तथा लोक कलाओं का अनूठा संगम नजर आया। पहली बार इस बार के समारोह में कई बदलाव दिखे और पहली बार प्रधानमंत्री ने इंडिया गेट की बजाय राष्ट्रीय युद्ध स्मारक जाकर शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित की। इस साल गणतंत्र दिवस परेड के दौरान 12 राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों तथा नौ मंत्रालयों/विभागों की झांकियां निकाली गयीं।<br /><br /></p>
<p><strong>हरियाणा की झांकी टोक्यो ओलंपिक पर आधारित</strong> <br />मेघालय की झांकी में राज्य के 50 सालों के इतिहास को दिखाया गया । इस झांकी में महिलाओं के नेतृत्व में चल रहीं सहकारी समितियों और स्व सहायता समूहों को प्रदर्शित किया गया। हरियाणा की झांकी टोक्यो ओलंपिक पर आधारित रही। हरियाणा की झांकी में पहलवान बजरंग पूनिया, जैवलिन थ्रोअर सुमित अंतिल और हॉकी खिलाड़ी रानी रामपाल को दिखाया गया। वहीं उत्तर प्रदेश की झांकी में इस बार काशी विश्वनाथ मंदिर मुख्य आकर्षण रहा। काशी विश्वनाथ कॉरिडोर जिसका हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लोकार्पण किया है, उसको प्रमुखता से दर्शाया गया। उत्तराखंड की झांकी में सिखों के प्रमुख तीर्थ हेमकुंड साहिब, टिहरी डैम, डोबरा चांठी पुल और चार धाम में से एक बदरीनाथ धाम के साथ ही सरकार की उत्तराखंड के चार धाम को लेकर चल रही महत्वपूर्ण योजना 'ऑल वेदर रोड' का प्रदर्शन किया गया।<br /><br /><strong>पंजाब की झांकी में राज्य से जुड़े स्वतंत्रता सैनिकों और उनके संघर्ष की कहानी</strong><br />पंजाब की झांकी में राज्य से जुड़े स्वतंत्रता सैनिकों और उनके संघर्ष की कहानी को दर्शाया गया। इसमें भगत सिंह, सुखदेव, राजगुरू की प्रतिमा के साथ लाला लाजपत राय पर हुए लाठी चार्ज और सरदार उधम सिंह को जलियांवाला बाग के दोषी माइकल ओ डायर की हत्या करते हुए दिखाया गया। ऐतिहासिक धरोहरों को समेटे गोवा की झांकी जब राजपथ पर निकली, लोगों ने तालियों की गड़गड़ाहट से उसका स्वागत किया।गुजरात की झांकी में राज्य के आदिवासी क्रांतिकारियों के जीवन और उनके बलिदान से जुड़े इतिहास को दर्शाया गया।<br /><br /></p>
<p><strong>तालियां बजाकर कलाकारों की हौसला अफजाई </strong><br />वहीं कर्नाटक की झांकी में राज्य की पारंपरिक हस्तशिल्प कला को दर्शाया गया। इसमें कमला देवी जिन्होंने विलुप्त होने की कगार पर पंहुचे पारंपरिक हस्तशिल्प को पुनर्जीवित करने का काम किया, को प्रमुखता दी गयी, जिसे लोगों ने काफी सराहा।<br />जम्मू-कश्मीर की झांकी में प्रदेश के बदलते स्वरूप को दर्शाया गया और लोगों को बताने की कोशिश की गयी कि प्रदेश अब दिनों-दिन प्रगति की पथ पर अग्रसर हो रहा है।महाराष्ट्र की झांकी में राज्य की जैव-विविधता और जैव प्रतीकों को प्रदर्शित किया गया। इसके अलावा अरुणाचल प्रदेश और छत्तीसगढ़ जैसे राज्यों की भी झांकियां भी निकाली गयीं, जिसे लोगों ने सराहा और तालियां बजाकर कलाकारों की हौसला अफजाई की।</p>
<p><strong>मंत्रालय और विभागों से जुड़ी अन्य नौ झांकियां </strong><br />राज्यों की झांकियों के अलावा मंत्रालय और विभागों से जुड़ी अन्य नौ झांकियां भी निकाली गयी। इनमें संस्कृति मंत्रालय, शिक्षा एवं कौशल विकास मंत्रालय, वस्त्र मंत्रालय, नागर विमानन मंत्रालय, जल शक्ति मंत्रालय, विधि एवं न्याय मंत्रालय, केंद्रीय लोक निर्माण विभाग, केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल, भारतीय डाक विभाग, डीआरडीओ और तीनों सेनाओं से जुड़े अत्याधुनिक हथियारों तथा विमानों की झांकियां भी शामिल थीं। विभागों की झांकियों की बात करें तो इंडिया पोस्ट की झांकी महिला सशक्तीकरण पर केंद्रित रही। इसे लोगों ने खूब सराहा और तालियां बजाकर कलाकारों का स्वागत किया।</p>
<p><br /><strong>जल शक्ति मंत्रालय की झांकी</strong><br />वहीं जल शक्ति मंत्रालय की झांकी में दर्शाया गया कि कैसे जल जीवन मिशन ने लद्दाख में 13,000 फुट से अधिक की ऊंचाई पर शून्य से 20 डिग्री सेल्सियस कम तापमान में स्वच्छ नल का पानी उपलब्ध कराकर लोगों के जीवन स्तर में सुधार किया। इस वर्ष गणतंत्र दिवस के मौके पर राजपथ पर आयोजित समारोह में पहली बार नागरिक उड्डयन मंत्रालय की झांकी भी निकाली गयी, जिसमें ‘उड़ान’ योजना की गौरवपूर्ण सफलता को दर्शाते हुए बुद्धिस्ट सर्किट के पर्यटक स्थलों को दिखाया गया।<br /><br /><strong>480 नर्तक एवं नर्तकियों ने सांस्कृतिक प्रस्तुती देकर लोगों का मन मोह लिया</strong></p>
<p>झांकियों के बाद अखिल भारतीय नृत्य प्रतियोगिता 'वंदे भारतम' के माध्यम से चुने गए 480 नर्तक एवं नर्तकियों ने सांस्कृतिक प्रस्तुती देकर लोगों का मन मोह लिया। इस दौरान लोगों ने तालियां बजाकर कलाकारों की हौसला अफजाई की।<br />परेड को बेहतर ढंग से देखने के लिए, राजपथ के प्रत्येक तरफ पांच-पांच यानी कुल मिलाकर 10 बड़ी एलईडी स्क्रीन लगाए गए थे। झांकियों के बाद शुूरू हुए देश के जाबांज जवानों के हैरतअंगेज करतब, जिसके देख कर लोग अचम्भित रह गए।<br />मोटरसाइकल पर सवार महिला सुरक्षाकर्मियों की टुकड़ी जब राजपथ पर उतरी तो उनके हैरतअंगेज करतब को देख कर लोग अचम्भित रह गए। गणतंत्र दिवस पर राजपथ पर पहली बार पांच राफेल विमानों ने एरोहेड फॉर्मेशन में उड़ान भरी, जिसके देखने के लिए लोग अपनी कुर्सियों से उठकर खड़े हो गए और हाथ हिलाकर जाबांजों की हौसला बढ़ाया। गणतंत्र दिवस के मौके पर आयोजित समारोह में पहली बार भारतीय वायु सेना के 75 विमानों / हेलिकॉप्टरों को 'आजादी का अमृत महोत्सव' के तौर करतब दिखाए। राफेल, सुखोई, जगुआर, एमआई-17, सारंग, अपाचे और डकोटा जैसे पुराने और वर्तमान आधुनिक विमान/हेलिकॉप्टर राहत, मेघना, एकलव्य, त्रिशूल, तिरंगा, विजय और अमृत सहित विभिन्न संरचनाओं का प्रदर्शन किया।</p>
<p><br /><br /><strong>गणतंत्र दिवस के मौके पर सुरक्षा के व्यापक इंतजाम </strong><br />गणतंत्र दिवस के मौके पर सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किये गए थे। राजधानी दिल्ली को छावनी में तब्दील कर दिया गया और जगह-जगह सीसीटीवी लगा कर सुरक्षाकर्मी हर गतिविधि पर नजर रख रहे हैं। गणतंत्र दिवस के दौरान कोरोना प्रोटोकॉल का पूरी तरह से पालन किया गया। सोशल डिस्टेंसिंग तथा मास्क पहनने से जैसे नियम का सख्ती के साथ पालन किया गया। इस बार सिर्फ छह हजार लोगों को ही राजपथ पर आने को अनुमति दी गयी थी और 15 साल से कम उम्र के लोगों के लिए यहां पर प्रवेश पूरी तरह से वर्जित था।</p>
<p><strong>दर्शकों के बीच पहुंचे मोदी, स्वीकार किया अभिवादन</strong><br />वहीं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 73वें गणतंत्र दिवस के मौके पर राजपथ पर आयोजित मुख्य समारोह के समापन के बाद दर्शकों के बीच पहुंचे और उनका अभिवादन स्वीकार किया। मोदी ने राजपथ पर 73वें गणतंत्र दिवस के मौके पर आयोजित मुख्य समारोह के समापन के बाद राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद को विदाई दी। इसके बाद उन्होंने थोड़ी देर तक रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के साथ गुफ्तगू की और फिर वह हर साल की तरह दर्शकों का अभिवादन स्वीकार करने के लिए उनके पास पहुंच गये। उन्होंने हाथ हिलाकर राजपथ के दोनों ओर बैठे दर्शकों का अभिवादन स्वीकार किया।</p>
<p><strong>मोदी के पहनावे ने सबका ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया</strong><br />गणतंत्र दिवस के मौके पर मोदी के पहनावे ने सबका ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया।  मोदी ने आज मणिपुरी अंगवस्त्र और उत्तराखंड की टोपी धारण कर रखी थी, जिसमें ब्रह्म कमल अंकित था। गौरतलब है कि मोदी जब भी उत्तराखंड के केदारनाथ में बाबा भोले भंडारी का दर्शन करने जाते हैं, तो उन्हें ब्रह्मकमल अवश्य अर्पित करते हैं। समारोह में पहुंचे दर्शक भी  मोदी को अपनी बीच पाकर काफी खुश नजर आए। दर्शकों ने भी हाथ हिलाकर मोदी का स्वागत किया। इस दौरान लोगों ने मोदी-मोदी के नारे भी लगाए। <br /><br /></p>
<p><br /><br /></p>]]></content:encoded>
                
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                <pubDate>Wed, 26 Jan 2022 15:28:30 +0530</pubDate>
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