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                            <item>
                <title>उदयपुर घटना को लेकर रात से ही पुलिस गश्त बढ़ी  दिन में निकाला फ्लैग मार्च</title>
                                    <description><![CDATA[ उदयपुर में एक हिन्दू दर्जी की कथित तौर पर गला काटने की घटना के  बाद टोंक जिले में इस खबर फैलने के बाद जिला प्रशासन सतर्क हो गया और रात में ही पूरे शहर में पुलिस गश्त बढ़ाने के साथ ही लोगों को घर पर भेज दिया और रात से पूरी तरह से इंटरनेट सेवाएं बंद कर दी तो बुधवार को शहर के जिला व पुलिस प्रशासन ने फ्लैग मार्च निकाला। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/tonk/police-patrolling-increased-since-night-due-to-udaipur-incident-flag/article-13265"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-06/t-22.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>टोंक।</strong> उदयपुर में एक हिन्दू दर्जी की कथित तौर पर गला काटने की घटना के  बाद टोंक जिले में इस खबर फैलने के बाद जिला प्रशासन सतर्क हो गया और रात में ही पूरे शहर में पुलिस गश्त बढ़ाने के साथ ही लोगों को घर पर भेज दिया और रात से पूरी तरह से इंटरनेट सेवाएं बंद कर दी तो बुधवार को शहर के जिला व पुलिस प्रशासन ने फ्लैग मार्च निकाला।</p>
<p>उदयपुर में युवक की गला काटने की घटना के खबर मंगलवार रात्रि को पूरे जिले सहित शहर में आग की तरह फैल गई और आमजन इस घटना की निंदा करते हुए सतर्क हो गया, वही जिला व पुलिस प्रशासन भी रात्रि से घटना के बाद सतर्क नजर आया। टोंक शहर में गर्र्मी के मौसम के बावजूद भी 10 बजे की बाजार में सन्नाटा पसर गया और पुलिस दल टोंक शहर में गश्त करते नजर आएं। रात्रि में घंटाघर चौराहे पर बेवजह घुमने वालो से पूछताछ करते हुए पुलिस कर्मी नजर आएं और उनको समय पर घर भेजा। रातभर पुलिस प्रशासन गश्त करता रहा है। जिला कलक्टर चिन्मयी गोपाल व जिला पुलिस अधीक्षक मनीष त्रिपाठी के निर्देशानुसार रात से ही प्रशासनिक व पुलिस अधिकारी शहर में गश्त पर रहे और बाजार में बेवजह घुमने वालों को लोगों को घर पर भेज दिया।</p>
<p>मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए राजस्थान में इंटरनेट सेवा बंद होने के साथ टोंक जिले मे इंटरनेट सेवा बंद हो गई, जो बुधवार को दिनभर बंद रही। बुधवार को उदयपुर की घटना में मामले में सतर्क प्रशासन ने मुख्य बाजार में आमजन से शांति बनाएं रखने की अपील करते हुए प्रशासनिक व पुलिस अधिकारियों ने पुलिस जवानों के साथ फ्लेग मार्च निकाला। अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक सुभाष चन्द्र मिश्रा, उपखंड अधिकारी गिरधर, पुलिस उपाधीक्षक सलेह मोहम्मद, शहर कोतवाल जितेन्द्रसिंह चारण सहित कई पुलिस अधिकारी व जवानों ने घंटाघर से मुख्य बाजार में फ्लेग मार्च निकाला। दिनभर इंटरनेट सेवाए बाधित रहने से लोगों के कामकाज भी ठप्प रहे। वही दिनभर शहर में जगह जगह पुलिस बल तैनात रहा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>टोंक</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 30 Jun 2022 11:25:56 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>हाउसिंग बोर्ड : 21 साल से कोटा में नहीं बनाई नई कॉलोनी व मकान </title>
                                    <description><![CDATA[अंटी में न धेला, देखन चली मेला। कोटा शहर में हाउसिंग बोर्ड की यही स्थिति है।  पहले मकान बनाने का अधिकतर काम हाउसिंग बोर्ड (आवासन मंडल) करता था।  लेकिन अब हालत यह है कि बोर्ड ने करीब 21 साल से शहर में कोई नया मकान या कॉलोनी नहीं बनाई है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/housing-board--no-new-colony-and-house-built-in-kota-since-21-years/article-9984"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-05/housing-board.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा । अंटी में न धेला, देखन चली मेला। कोटा शहर में हाउसिंग बोर्ड की यही स्थिति है।  पहले मकान बनाने का अधिकतर काम हाउसिंग बोर्ड (आवासन मंडल) करता था।  लेकिन अब हालत यह है कि बोर्ड ने करीब 21 साल से शहर में कोई नया मकान या कॉलोनी नहीं बनाई है। हाउसिग बोर्ड के पास शहर में जमीन का टोटा होने से उनका यह काम अब नगर विकास न्यास कर रहा है। मकानों के ंितजार में हाउसिंग बोर्ड में करीब 201 आवेदन लम्बित हैंं। शहर के अधिकतर क्षेत्रों में पहले  जहां हाउसिंग बोर्ड की कॉलोनियां बनी हुई हैं। वहीं अब बोर्ड द्वारा नई कॉलोनी व मकान नहीं बनाए जा रहे हैं। हाउसिंग बोर्ड ने करीब 21 साल पहले वर्ष 2001 में अंतिम कॉलोनी स्वामी विवेकानंद नगर में बनाई थी। उसके बाद से अभी तक हाउसिंग बोर्ड ने शहर में न तो कोई नया मकान बनाया है और न ही कॉलोनी। हाउसिंग बोर्ड का यह काम अब नगर विकास न्यास कर रहा है। न्यास द्वारा शहर में जगह-जगह पर आवासीय योजनाएं बनाई जा रही हैं।  हालत यह है कि कई लोग ऐसे हैं जो हाउसिंग बोर्ड के ही मकान लेना चाहते हैं। लेकिन बोर्ड के पास कोटा में जमीन ही नहीं होने से उन्हें मकान नहीं मिल पा रहे हैं। करीब 201 आवेदन अभी तक बोर्ड में लम्बित हैं।  सूत्रों के अनुसार हाउसिंग बोर्ड में मकानों के लिए आवेदन करने वालों में कई पूर्व सांसद व विधायक भी शामिल है। <br /><br /><strong>यहां है हाउसिंग बोर्ड कॉलोनी</strong><br />शहर में हाउसिंग बोर्ड की 17 कॉलोनियां हैं। जिनमें दादाबाड़ी, दादाबाड़ी विस्तार, अम्बेडकर नगर कुन्हाड़ी, हाउसिंग बोर्ड कॉलोनी कुन्हाड़ी, महावीर नगर विस्तार, महावीर नगर परिजात कॉलोनी, रंगबाड़ी, सकतपुरा, वल्लभबाड़ी व स्वामी विवेकानंद नगर की कॉलोनियां शामिल हैं। जानकारों के अनुसार अधिकतर कॉलोनियां नगर निगम को हस्तांतरित हो चुकी हैं। जिनमें विकास कार्य करवाने के लिए बोर्ड निगम को बजट उपलब्ध करवाता है। सिर्ल दो कॉलोनियां अभी तक निगम को हस्तांतरित नहीं हो सकी हैं। <br /><br /><strong>अधिकतर जमीन नगर विकास न्यास की</strong><br />पहले जहां कोटा शहर में जमीनें हाउसिंग बोर्ड के पास थी। वहीं अब अधिकतर जमीनें नगर विकास न्यास के पास हैं। सूत्रों के अनुसार रानपुर व बोरखेड़ा में हाउसिंग बोर्ड को कुछ जमीन मिलने वाली थी। लेकिन बाद में वे दोनों जमीन भी न्यास के खाते में चली गई। वहीं हाउसिंग बोर्ड की जगह अब भूखंड बेचने व मकान बनाकर बेचने का काम भी नगर विकास न्यास कर रहा है। न्यास द्वारा कई आवासीय योजनाएं बनाई गई हैं।  न्यास में एक शाखा हाउसिग की ही संचालित हो रही है।<br /><br /><strong>विधायक चंद्रकांता मेघवाल के सवाल पर विधानसभा में दिया जवाब</strong><br />भाजपा विधायक चंद्रकांता मेघवाल ने विधानसभा  में सवाल किया था। जिसमें पूछा था कि क्या आवासन मंडल के पास कोटा शहर में प्रतीक्षारत पंजीकृत आवेदकों को आवास उपलब्ध करवाने के लिए पर्याप्त भूमि उलपब्ध नहीं है। भूमि की अनुपलब्धता के कारण कितने आवेदन लम्बित हैं।  इस पर विभाग ने विधानसभा में जवाब दिया कि  कोटा में प्रतीक्षारत आवेदकों को आवास उपलब्ध करवाने के लिए आवासन मंडल के पास भूमि उपलप्ध नहीं है। भूमि की उपलब्धता के लिए प्रयास किए जा रहे हैं। विभाग में आवासों के लिए 201 आवेदकों की सूची लम्बित है। <br /><br /><strong>इनका कहना है</strong><br />कोटा में हाउसिंग बोर्ड के पास कोई जमीन ही नहीं है। बोर्ड ने शहर में करीब 21 साल पहले अंतिम कॉलोनी स्वामी विवेकानंद नगर में विकसित की  थी। अब शहर की अधिकतर जमीन नगर विकास न्यास के पास है। इस कारण से मकान बनाने का काम भी न्यास ही कर रहा है। यह काम पहले हाउसिंग बोर्ड करता था। विभाग में मकान व भूखंड के लिए कई लोगों ने पूर्व में ही आावेदन किए हुए हैं। ऐसे कई आवेदन जमीन नहीं होने के कारण लम्बित चल रहे हैं। कोटा में जमीन मिलेगी तो वहां मकान बनाकर आवेदकों को आवटित कर दिए जाएंगे।  <br /><strong>-अनिल सक्सेना, उप आवासन आयुक्त राजस्थान आवासन मंडल कोटा</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 18 May 2022 15:15:04 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[kota]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>गर्मियों की शुरुआत से ही पानी को लेकर हाहाकार</title>
                                    <description><![CDATA[<p>जयपुर। गर्मियों की शुरुआत होते ही पानी की किल्लत अधिकांश कॉलोनियों में होने लगी है। लोग धरना-प्रदर्शन पर उतर आए हैं। कई कॉलोनियां ऐसी हैं, जहां पानी का प्रेशर कम आने, पानी नहीं आने या दूषित पानी की समस्या को बताने के लिए लोगों ने मंत्रियों, विधायकों और अफसरों को ज्ञापन भी दिए हैं। ऐसा ही एक मामला शहर के नाड़ी का फाटक स्थित चरण नदी-द्वितीय क्षेत्र के लोगों से जुड़ा है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि क्षेत्र के सभी सरकारी और निजी बोरिंग या तो सूख चुके है या सूखने के कगार पर हैं। पूरे क्षेत्र में कोई</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/water-crisis-since-the-beginning-of-summer--water-shortage--dharnas-and-demonstrations-started-in-many-areas-of-the-city/article-6627"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-03/0111.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। गर्मियों की शुरुआत होते ही पानी की किल्लत अधिकांश कॉलोनियों में होने लगी है। लोग धरना-प्रदर्शन पर उतर आए हैं। कई कॉलोनियां ऐसी हैं, जहां पानी का प्रेशर कम आने, पानी नहीं आने या दूषित पानी की समस्या को बताने के लिए लोगों ने मंत्रियों, विधायकों और अफसरों को ज्ञापन भी दिए हैं। ऐसा ही एक मामला शहर के नाड़ी का फाटक स्थित चरण नदी-द्वितीय क्षेत्र के लोगों से जुड़ा है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि क्षेत्र के सभी सरकारी और निजी बोरिंग या तो सूख चुके है या सूखने के कगार पर हैं। पूरे क्षेत्र में कोई पानी की टंकी या दूसरा कोई स्त्रोत नहीं है, जिससे यहां रहने वाली लगभग 45 हजार से ज्यादा की आबादी को जल संकट से जूझना पड़ रहा है। बीसलपुर पेयजल संयुक्त संघर्ष समिति के प्रतिनिधियों ने इस संबंध में राज्यपाल, मुख्यमंत्री, जिला कलेक्टर, जलदाय मंत्री डॉ. महेश जोशी, क्षेत्रीय विधायक नरपत सिंह राजवी, स्थानीय पार्षद सहित संबंधित अधिकारियों को ज्ञापन भी दिए हैं। समिति का कहना है कि क्षेत्र को बीसलपुर परियोजना से जोड़ा जाए। यदि पानी किल्लत की समस्या को अगले 15 दिनों में सही नहीं किया गया तो क्षेत्रवासी मजबूरन आंदोलन करेंगे।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 24 Mar 2022 13:05:14 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Administrator]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>महिला दिवस विशेष: बचपन से पायलट बनने का ख्वाब- वृषाली</title>
                                    <description><![CDATA[आज के युग में महिलाए हर सेक्टर में काम कर रही है, चाहे वह सेना हो या अन्य विभाग हो।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/jaipur--indigo-airline-s-captain-vrushali-bhandarkar-said-that-since-childhood-he-had-a-dream-to-become-a-pilot--after-hard-work-today-she-is-flying-the-plane/article-5715"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-03/22.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। इंडिगो एयरलाइन की कैप्टन वृषाली भंडारकर ने कहा कि बचपन से उसका पायलट बनने का सपना था। कड़ी मेहनत के बाद आज वह विमान उड़ा रही है।<br />सन 2006 से विमान का संचालन कारी जयपुर निवासी वृषाली भंडारकर ने अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर सभी महिलाओं को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि आज के युग में महिलाएं हर क्षेत्र में काम कर रही है। शुरुआती दिनों में उन्हें विमान संचालन में काफी झिझक थी। लेकिन अब आसानी से विमान का संचालन करती है। इस कार्य में परिवार जनों का पूरा सहयोग रहा। पहले महिलाएं घर से बाहर नहीं निकलती थी। लेकिन आज के युग में महिलाए हर सेक्टर में काम कर रही है, चाहे वह सेना हो या अन्य विभाग हो।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 08 Mar 2022 16:26:44 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Administrator]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>जुलाई 2016 से नियुक्ति नहीं, कैसे हो वीरांगनाओं की सुनवाई</title>
                                    <description><![CDATA[<p>  जयपुर। सैन्य विधवाओं और भूतपूर्व सैनिकों के मामलों की सुनवाई के लिए भले ही अलग से सशस्त्र सेना अधिकरण बना हुआ है, लेकिन इसमें पिछले करीब साढ़े पांच साल से न्यायिक सदस्य की नियुक्ति नहीं होने के चलते इनके मुकदमों की सुनवाई नहीं हो पा रही है। न्यायिक सदस्य के रूप में यहां तैनात रही हाईकोर्ट की पूर्व न्यायाधीश मीना वी. गोम्बर के जाने के बाद से जुलाई 2016 से यह पद खाली चल रहा है। वहीं प्रशासनिक सदस्य के तौर पर बीच-बीच में कई अधिकारियों को नियुक्त किया गया, लेकिन उन्हें अकेले मुकदमों की सुनवाई का अधिकार ही<br /><strong><br />अन्य</strong></p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/no-appointment-since-july-2016--how-to-listen-to-veterans--no-appointment-of-judicial-member-in-armed-forces-tribunal-for-five-and-a-half-years/article-4670"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-02/amar-jawan-jayoti_new.jpg" alt=""></a><br /><p> जयपुर। सैन्य विधवाओं और भूतपूर्व सैनिकों के मामलों की सुनवाई के लिए भले ही अलग से सशस्त्र सेना अधिकरण बना हुआ है, लेकिन इसमें पिछले करीब साढ़े पांच साल से न्यायिक सदस्य की नियुक्ति नहीं होने के चलते इनके मुकदमों की सुनवाई नहीं हो पा रही है। न्यायिक सदस्य के रूप में यहां तैनात रही हाईकोर्ट की पूर्व न्यायाधीश मीना वी. गोम्बर के जाने के बाद से जुलाई 2016 से यह पद खाली चल रहा है। वहीं प्रशासनिक सदस्य के तौर पर बीच-बीच में कई अधिकारियों को नियुक्त किया गया, लेकिन उन्हें अकेले मुकदमों की सुनवाई का अधिकार ही नहीं है। जानकारी के अनुसार यहां करीब पांच हजार मुकदमों को सुनवाई का इंतजार है। <br /><strong><br />अन्य अदालतों में सुनवाई नहीं</strong><br />जयपुर एएफटी का गठन 22 जून, 2009 को हुआ था। वहीं 29 जुलाई, 2016 को इसमें न्यायिक सदस्य का पद खाली हो गया। वहीं कुछ माह बाद ही प्रशासनिक अधिकारी का पद भी रिक्त हो गया। हालांकि बीच में कई अधिकारी यहां आए, लेकिन वे मुकदमों की सुनवाई नहीं कर सके। एएफटी को तीनों सेनाओं से जुड़े सैनिकों के प्रकरणों को सुनवाई का अधिकार है। अलग से अधिकरण होने के चलते अन्य अदालतों को सैन्यकर्मियों के मामले की सुनवाई का अधिकार भी नहीं है।<br /><br /><strong>हाईकोर्ट के पूर्व जज और कर्नल रैंक का होता है सदस्य</strong><br />एएफटी में न्यायिक सदस्य के तौर पर हाईकोर्ट के पूर्व जज को नियुक्त किया जाता है। इसी तरह प्रशासनिक सदस्य के तौर पर कर्नल रैंक के पूर्व सैन्य अधिकारी को लगाया जाता है। जानकारी के अनुसार इन पदों पर नियुक्ति करने का कार्य केन्द्रीय विधि मंत्रालय को है। <br /><br /><strong>जंग में गोली खाली, पेंशन की आस में मौत</strong><br />एक सैन्यकर्मी होशियार सिंह वर्ष 1971 की लड़ाई में गोली लगने से अपंग हो गए। इसके कई सालों बाद उन्हें बिना पेंशन सेवा से हटा दिया गया। इस पर उन्होंने सितंबर 2011 में एएफटी में केस दायर किया, लेकिन सुनवाई पूरी होने से पहले की सितंबर 2017 में उनकी मौत हो गई। इस संबंध में एएफटी एडवोकेट्स एसोसिएशन के महासचिव ओमप्रकाश श्योराण ने बताया कि इस संबंध में हमने सीजेआई को पत्र लिखकर वस्तुस्थिति से अवगत कराया है। सदस्यों की नियुक्ति नहीं होने से सैन्यकर्मी, पूर्व सैन्यकर्मी और उनके आश्रितों के मामलों की सुनवाई नहीं हो पा रही है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 19 Feb 2022 16:33:44 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Administrator]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>42 साल से अब तक लंबित 5802 मामलों में तो केस नंबर तक नहीं</title>
                                    <description><![CDATA[

राज्य सरकार के विभिन्न महकमों के 20,636 मामले ऐसे हैं जो संबंधित अदालत के बजाय किसी अन्य में दर्ज हैं, जबकि 5802 मामले ऐसे हैं जिनके केस नंबर ही सही नहीं हैं। इसके लिए न्याय विभाग राज्य सरकार के विविध विभागों को 1979 से गलतियां दुरुस्त करने के लिए आग्रह कर रहा है, लेकिन मामला वहीं का वहीं है। ऐसे में 42 साल तक के पुराने कई मामलों में ढंग से पैरवी तक नहीं हो सकी। इसकी विभागवार सूची भी जारी की गई, लेकिन फिर भी जानकारी दुरुस्त नहीं हुई।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/42-%E0%A4%B8%E0%A4%BE%E0%A4%B2-%E0%A4%B8%E0%A5%87-%E0%A4%85%E0%A4%AC-%E0%A4%A4%E0%A4%95-%E0%A4%B2%E0%A4%82%E0%A4%AC%E0%A4%BF%E0%A4%A4-5802-%E0%A4%AE%E0%A4%BE%E0%A4%AE%E0%A4%B2%E0%A5%8B%E0%A4%82-%E0%A4%AE%E0%A5%87%E0%A4%82-%E0%A4%A4%E0%A5%8B-%E0%A4%95%E0%A5%87%E0%A4%B8-%E0%A4%A8%E0%A4%82%E0%A4%AC%E0%A4%B0-%E0%A4%A4%E0%A4%95-%E0%A4%A8%E0%A4%B9%E0%A5%80%E0%A4%82/article-4211"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-01/news.jpg" alt=""></a><br /><p> जयपुर। न्याय विभाग ने लाइट्स सॉफ्टवेयर में दर्ज न्यायिक प्रकरणों के संबंध में कई बार विभागों के एसीएस, प्रमुख सचिव और सचिव को पत्र लिखे हैं, लेकिन उसके बाद भी दर्ज न्यायिक प्रकरणों में केस नंबर तक अपडेट नहीं हो सके हैं। इसके कारण मामलों में समय पर पैरवी भी नहीं हो रही है। एक साल से अधिक जवाब दावा प्रस्तुत करने से लंबित न्यायिक प्रकरणों को लेकर तो विभाग ने अब 18वां स्मरण पत्र लिखा है, जिसमें कहा है कि संबंधित सूचना निर्धारित प्रारूप में उपलब्ध कराई जाए, लेकिन आदिनांक तक नहीं दी गई है।<br /><br /><span style="background-color:#ffff99;"><span style="color:#ff0000;"><span style="font-size:larger;"><strong>सरकार के पास विभिन्न कोर्ट में मुकदमे लड़ने का यह है अमला</strong></span></span></span><br /><span style="background-color:#ffff99;"><span style="color:#ff0000;"><strong>महाधिवक्ता-एक</strong></span></span><br /><span style="color:#ff0000;">जयपुर पीठ में</span><br />10 एएजी, दो गवर्नमेंट कौंसिल, 14 एडिशनल गवर्नमेंट कौंसिल, 17 डिप्टी गवर्नमेंट कौंसिल, 9 असिस्टेंट गवर्नमेंट कौंसिल<br /><br /><span style="color:#ff0000;">जोधपुर पीठ में</span><br />6 एएजी, तीन गवर्नमेंट कौंसिल, 14 एडिशनल गवर्नमेंट कौंसिल, 10 असिस्टेंट गवर्नमेंट कौंसिल<br /><br /><span style="color:#ff0000;">जयपुर जीए ऑफिस</span><br />दो एएजी, 11 एडिशनल गवर्नमेंट एडवोकेट, 12 डिप्टी गवर्नमेंट एडवोकेट, एक असिस्टेंड गवर्नमेंट एडवोकेट<br /><br /><span style="color:#ff0000;">जोधपुर जीए ऑफिस</span><br />9 एडिशनल <br />गवर्नमेंट एडवोकेट, <br />10 डिप्टी गवर्नमेंट एडवोकेट, छह <br />असिस्टेंड गवर्नमेंट एडवोकेट<br /><br /><span style="background-color:#ffff99;"><span style="color:#ff0000;"><strong><br />जयपुर मेट्रो प्रथम</strong></span></span><br />एक लोक अभियोजक, दस अपर लोक अभियोजक, तीन विशेष लोक अभियोजक<br /><br /><span style="background-color:#ffff99;"><span style="color:#ff0000;"><strong>जयपुर मेट्रो द्वितीय</strong></span></span><br />एक लोक अभियोजक, दस अपर <br />लोक अभियोजक, छह विशेष लोक अभियोजक<br /><br /><span style="background-color:#ffff99;"><span style="color:#ff0000;"><strong>जयपुर जिला</strong></span></span><br />एक लोक अभियोजक, 14 अपर लोक अभियोजक, एक विशेष लोक अभियोजक<br /><br />(इसके अलावा लोक सेवा आयोग से स्थायी रूप से नियुक्त होने वाले एडवोकेट अलग है और कई विभागों में अपने स्तर पर भी पैनल वकील बना रखे हैं)<br /><span style="background-color:#ffff99;"><span style="color:#ff0000;"><strong><br />ऐसे केस जिनके नंबर नहीं</strong></span></span><br />विभिन्न महकमों के 1979 से ऐसे केस चल रहे हैं, जिनके केस नंबर ही अपडेट नहीं है। अर्थात 5802 ऐसे केसेज है, जिनमें केस नंबर के अभाव में संबंधित कोर्ट में पैरवी नहीं हो सकी और निस्तारण भी नहीं हो पा रहा है। इस तरह के मामले 38 विभागों से जुडेÞ हैं। न्याय विभाग ने सातवीं बार लाइट्स सॉफ्टवेयर में दर्ज इन प्रकरणों में केस नंबर दर्ज करने के लिए विभागों को पत्र लिखा है। ऐसे प्रकरणों की ये स्थिति हैं:-<br /><br /><strong>वर्ष    केस     संख्या </strong><br />1979    1<br />1980    1<br />1981    1<br />1990    2<br />1992    1<br />1993    3<br />1994    3<br />1995    14<br />1996    6<br />1997    3<br />1998    4<br />1999    6<br />2000    1<br />2001    2<br />2003    2<br />2004    2<br />2005    2<br />2006    12<br />2007    14<br />2008    23<br />2009    33<br />2010    72<br />2011    92<br />2012    80<br />2013    70<br />2014    80<br />2015    89<br />2016    271<br />2017    483<br />2018    544<br />2019    882<br />2020    1389<br />2021    1654<br />कुल    5802<br /><br />न्याय विभाग ने ड्यू-कोर्स में लंबित न्यायिक प्रकरणों की न्यायालयवार समीक्षा की तो सामने आया कि करीब 20 हजार से अधिक प्रकरणों में प्रशासनिक विभागों ने संबंधित कोर्ट में इंद्राज न कर अन्य कोर्ट में इंद्राज कर दिया। विभाग के शासन संयुक्त सचिव ने ऐसे प्रकरणों का संबंधित कोर्ट में ही इंद्राज करवाने के लिए भी पत्र लिखा। ऐसे प्रकरणों की संख्या भी कुछ इस प्रकार हैं:-<br /><br /><span style="background-color:#ffff99;"><span style="color:#ff0000;"><strong>विभाग    सुप्रीम कोर्ट    राज. हाईकोर्ट    आरसीएसटी    अन्य कोर्ट    एनजीटी    ट्रिब्यूनल    कुल<br />        जोधपुर-जयपुर</strong></span></span><br />मेडिकल हेल्थ    33    1096-1949    857    7    0    6    3949<br />रेवेन्यू डिपार्टमेंट    13    1109-448    27    420    0    5    2039<br />राज. पब्लि. सर्विस कमी.    19    415-913    1    2    0    1    1351<br />आरएसआरटीसी    10    327-620    0    204    0    23    1186<br />स्कूल शिक्षा    2    189-769    34    57    0    115    1171<br />ऊर्जा    12    472-541    1    57    0    32    1115<br />होम डिपार्टमेंट    126    300-636    37    14    0    1    1114<br />एलएसजी    7    392-359    8    229    1    2    998<br />वित्त    111    485-301    0    22    0    0    924<br />जेडीए    11    0-204    0    444    0    231    890<br />पंचायतीराज    1    263-264    17    8    0    0    553<br />मेडिकल शिक्षा    3    97-390    4    16    0    0    510<br />यूडीएच    0    289-117    0    77    0    0    473<br />कॉपरेटिव    18    94-285    31    17    0    6    451<br />जल संसाधन    1    319-69    12    39    0    3    443<br />पीडब्ल्यूडी    1    203-147    14    66    0    1    432</p>
<p><br /><span style="background-color:#ffff99;"><span style="color:#ff0000;"><strong>विभाग    सुप्रीम कोर्ट    राज. हाईकोर्ट    आरसीएसटी    अन्य कोर्ट    एनजीटी    ट्रिब्यूनल    कुल<br />        जोधपुर-जयपुर</strong></span></span><br />कृषि    4    173-192    1    42    0    0    412<br />डीओपी    9    85-229    39    2    0    2    366<br />उद्योग    6    141-154    0    60    0    2    363<br />उच्च शिक्षा    8    105-177    12    19    0    14    335<br />वन    6    104-89    15    24    1    0    229<br />पीएचईडी    0    132-31    14    14    0    0    191<br />खनिज व पेट्रोलियम    18    79-24    0    36    0    3    160<br />महिला बाल विकास    1    45-48    20    34    0    0    148<br />पशुपालन व डेयरी    1    22-101    7    8    0    0    139<br />पर्यावरण    5    42-58    0    8    19    2    134<br />ग्रामीण विकास    0    69-35    3    6    0    0    113<br />परिवहन    0    24-81    0    5    0    0    110<br />आईजीएनपी    1    72-9    2    9    0    0    93<br />पर्यटन    0    10-52    0    20    0    1    83<br />देवस्थान    1    47-11    0    23    0    0    82<br />खाद्य आपूर्ति    1    27-47    4    0    0    0    79<br /><br /><br />कोई भी नई शुरुआत होती है तो उनमें कठिनाइयां आती हैं, वैसे सभी विभागों से उचित समन्वय है और महाधिवक्ता के नेतृत्व में सरकार की तरफ से अदालतों में प्रभावी पैरवी की जा रही है। -<strong>डॉ. विभूति भूषण शर्मा, अतिरिक्त महाधिवक्ता, राजस्थान सरकार </strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 28 Jan 2022 12:46:24 +0530</pubDate>
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