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                <title>womb - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <title>कोख में पल रहे बच्चों की तय की जाती है रेट, 20 बच्चों की खरीद फरोख्त शर्मनाक: हरिमोहन</title>
                                    <description><![CDATA[विपक्षी सदस्यों ने इस विषय पर हंगामा शुरू किया तो मंत्री गजेंद्र खींवसर ने कहा कि यह दुखद घटना है। वंहा थाने में कुछ प्रकरण 2023 में तो कुछ इस साल दर्ज हुए हैं। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/the-rate-of-children-growing-in-the-womb-is-fixed/article-84385"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-07/u1rer-(11)7.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। दिल्ली के दलालों के जरिए राजस्थान में छोटे बच्चों की खरीद फरोख्त का मामला गुरुवार को सदन में गूंजा। कांग्रेस विधायक हरिमोहन शर्मा ने पर्ची के माध्यम से मामला उठाते हुए सरकार की कार्यशैली पर सवाल उठाए। विधायक शर्मा ने कहा कि आदिवासी क्षेत्रों में दिल्ली के दलालों के बच्चों की खरीद फरोख्त का मामला गम्भीर है। कोख में पल रहे बच्चों की रेट तय की जाती है। यह बहुत शर्मनाक की बात है। जांच में पिछले 9-10 महीने में ही 20 बच्चों की खरीद फरोख्त होने की बात सामने आई है। इनमें से 5 गांव तो मंत्री के विधानसभा क्षेत्र में हैं। मामला सामने आने के बाद भी स्थानीय पुलिस, प्रशासन के अफसर और जनप्रतिनिधियों के चुप्पी साधे रखना सवाल खड़े करता है। </p>
<p>मुख्यमंत्री, गृह मंत्री और मंत्री का अभी तक इस मामले पर ध्यान नहीं जाना भी गम्भीर बात है। लोग रोजगार नहीं होने के कारण बच्चों को बेच रहे हैं, लेकिन सरकार ने अफसरों को बुलाकर अभी तक इस बारे में क्यों नहीं पूछा। विपक्षी सदस्यों ने इस विषय पर हंगामा शुरू किया तो मंत्री गजेंद्र खींवसर ने कहा कि यह दुखद घटना है। वंहा थाने में कुछ प्रकरण 2023 में तो कुछ इस साल दर्ज हुए हैं। सरकार चाहे कोई भी हो, लेकिन ऐसे मामलों में कॉउंसलिंग की जरूरत है। एनजीओ और समाज के लोगों की भी जरूरत है। मंत्री के जबाव से असंतुष्ट विपक्ष हंगामा करने लगा। नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने कहा कि इस सरकार में मंत्री ने बयान दिया था कि ज्यादा बच्चे पैदा करो,क्या ये बयान इसीलिए दिया था।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 11 Jul 2024 14:47:22 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>वे मांएं जिन्होंने गढ़ी वीर संतानें: मुझे कोख पर गर्व, एक और भगत सिंह को जन्म दे पाती तो उसे भी देश पर कुर्बान कर देती...</title>
                                    <description><![CDATA[च्चे का पहला गुरु ‘मां’ को माना गया है, मां के संघर्ष, त्याग और बलिदान की अनेक कहानियां हैं। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/those-mothers-who-created-heroic-children-i-am-proud-of-my-womb--if-i-could-have-given-birth-to-another-bhagat-singh--i-would-have-sacrificed-that-too-on-the-country/article-9340"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-05/17.jpg" alt=""></a><br /><p> जयपुर। संसार में ‘मां’ की अपनी महिमा है। बच्चे का पहला गुरु ‘मां’ को माना गया है, मां के संघर्ष, त्याग और बलिदान की अनेक कहानियां हैं। माना जाता है कि बच्चा जब जन्म लेता है तो वह पहला शब्द ही ‘मां’ बोलता है। भारतीय इतिहास में ऐसी अनेक माताएं हुई हैं, जिन्होंने अपने पुत्र के निर्माण में अपना पूरा जीवन खपा दिया। पुत्र को इस तरह तैयार किया कि उसने मुगलों की दास्ता स्वीकार नहीं की। अंग्रेजी हुकूमत के दौर में भगतसिंह की मां विदयावती कौर का जीवन भी प्रेरणा देता है। बहरहाल, मशहूर शायर ताबिश ने लिखा है- ‘एक मुद्दत से मेरी मां सोई नहीं ताबिश, मैंने एक कहा था कि मुझे अंधेरे से डर लगता है।’ इन शब्दों में मां की ममता के आंचल की गहराई का पला चलता है।<br /><br /><strong>भगत सिंह की मां विद्यावती</strong><br />शहीदे आजम भगतसिंह को फांसी देने का दिन 23 मार्च, 1931 तय हुआ तो अपने लाल को एक नजर भर देखने के लिए मां विदयावती जेल में मिलने गर्इंं। बेटे से मिलकर वापस जाने लगी तो आंखों के कोर में काफी समय से कैद मोती झलक गए। यह देखकर पास खड़े जेल के सिपाही ने कहा कि शहीद की मां होकर रोती है? इस पर विदयावती ने कहा कि ‘मैं अपने बेटे की शहीदी पर नहीं रो रही हूं, यदि इस कोख ने एक और भगतसिंह दिया होता तो उसे भी देश पर कुर्बान कर देती।’ धन्य हैं ऐसी माताएं, जिन्होंने ऐसे पुत्र को जन्म दिया।<br /><br /><strong>शिवा को गढ़ा मां जीजाबाई ने</strong> <br />छत्रपति शिवा ने 1674 में जब स्वतंत्र मराठा साम्राज्य की नींव रखी तो उसके पीछे उनकी मां जीजाबाई की प्रेरणा और उनके संस्कार ही थे। जीजाबाई को देश में तेजी से बढ़ते मुगल सामाज्य का शासन उनके सीने में कील की तरह चुभता था। उन्होंने अपने पुत्र शिवा का पुणे में इस कदर सैन्य, राजनीति, कूटनीति के सबक सिखाए, जो आगे चलकर दिल्ली दरबार के लिए नासूर बन गए। <br /><br /><strong>प्रताप को तराशा मां जयवंता बाई ने</strong> <br />दिल्ली मुगल दरबार की दासता स्वीकार नहीं करने वाले महाराणा प्रताप के खून में वीरता और स्वतंत्र रहने के संस्कार उनकी मां जयवंता बाई ने ही दिए थे। अकबर ने अपनी दासता स्वीकार कराने के लिए प्रताप पर हर तरीके आजमाए, लेकिन प्रताप ने अधिनता स्वीकार नहीं की। घनघोर विपरीत परिस्थितियों में जंगल-जंगल भटकते रहे, लेकिन मां के दूध पर आंच नहीं आने दी। चाहते तो आमेर के राजा मानसिंह की तरह दिल्ली दरबार में उच्च पद पा सकते थे, लेकिन 1576 में हल्दी घाटी का युद्ध लड़ा, जिसमें सामना आमेर के राजा मानसिंह से हुआ। राजस्थान के इतिहासकार श्रीकृष्ण जुगनू बताते हैं कि उनके पिता महाराणा उदयसिंह के व्यस्त होने से उनकी मां  जयवंता बाई ने ही उन्हें वीरता और महिलाओं के प्रति आदर के संस्कार दिए थे।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 08 May 2022 14:38:26 +0530</pubDate>
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                <title>  कोख चीर रहे प्राइवेट अस्पताल : हर चौथी डिलिवरी ‘सिजेरियन’ </title>
                                    <description><![CDATA[एक्सपर्ट बोले : मोटी कमाई के साथ सुरक्षित प्रसव का फोबिया बड़ा कारण]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/private-hospital-tearing-womb--every-fourth-delivery-caesarean--not-even-one-lakh-on-13-47-lakh-deliveries-in-government--1-08-lakh-on-4-lakh-in-private-only--expert-said--phobia-of-safe-delivery-with-big-earnings-is-a-big-reason/article-4553"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-02/6_news.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। राजस्थान में प्रसव के सरकारी अस्पतालों में नि:शुल्क के साथ सामान्य प्रसव के आंकड़े सुखद हैं। हर 13-14 प्रसव में से केवल एक प्रसव सिजेरियन हो रहा है। लेकिन प्राइवेट अस्पतालों में इसका आंकड़ा डराने वाला है। हर चौथा प्रसव सिजेरियन ही करवाया जा रहा है। हालांकि जांचों में गर्भ में जटिलताएं एक कारण हो सकता है,लेकिन सामान्य के मुकाबले सिजेरियन प्रसव से मोटी कमाई को भी प्रदेश के सरकारी डॉक्टर इसका एक बड़ा कारण मानते हैं।<br /><br />राजस्थान में सालाना करीब 17.50 लाख गर्भवती महिलाओं का प्रसव हो रहा है। चिकित्सा विभाग के आंकड़ों के अनुसार इनमें से 77 फीसदी यानी 13 लाख 47 हजार 500 प्रसव सरकारी अस्पतालों में हो रहा है। नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे के मुताबिक इनमें से 7.2 फीसदी मतलब 97,020 हजार की ही जटिलताओं के कारण मजबूरन सिजेरियन कर प्रसव कराया जा रहा है। जबकि प्राइवेट अस्पतालों में सरकारी के मुकाबले प्रसव का आंकड़ा तीन चौथाई (23 फीसदी) 4,02,500 ही है, लेकिन आॅपरेशन से 26.9 फीसदी यानी एक चौथाई से ज्यादा 1.08 लाख का प्रसव सालाना हो रहाी है। एक्सपर्ट डॉक्टर प्राइवेट अस्पतालों के पैसा कमाने के लिए सिजेरियन प्रसव कराने को अधिक प्रायिकता देने के साथ ही गर्भवती, परिजन और डॉक्टरों में सुरक्षित प्रसव के पैदा हुए फोबिया को भी इसका बड़ा कारण मानते हैं।<br /><br /><br />प्राइवेट में इलाज के साथ पैसा कमाने का प्रोफेशनलिज्म तो होता ही है। इससे इनकार नहीं किया जा सकता है, लेकिन प्रसूता-परिजनों और डॉक्टरों में सुरक्षित प्रसव का यहां फोबिया ज्यादा होता है। गर्भवती, परिजन भी डॉक्टरों पर बिना परेशानी प्रसव कराने का दबाव बनाते हैं। -<strong>डॉ.पुष्पा नागर, अधीक्षक, जनाना अस्पताल</strong><br /><br />प्राइवेट अस्पतालों में व्यावसायिकरण ज्यादा सिजेरियन का कारण मान सकते हैं, लेकिन दोषी तो परिजन-गर्भवती खुद हैं। परिजन-प्रसूता चाहती हैं कि प्रसव बिना दर्द के आसानी से हो। परिजन पैसे देकर चिकित्सा सुविधा ले रहे हैं, इसलिए डॉक्टर उनकी इस संतुष्टि को ज्यादा महत्व देता है। -<strong>डॉ.विमला जैन, पूर्व अधीक्षक, महिला चिकित्सालय</strong><br /><br />प्राइवेट अस्पतालों में सिजेरियन प्रसव ज्यादा क्यों हो रहे हैं। बिना वजह तो नहीं हो रहे, इसकी समीक्षा करेंगे।<br />-<strong>आशुतोष ए.टी पेंडणेकर, शासन सचिव, चिकित्सा विभाग</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>स्वास्थ्य</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 17 Feb 2022 12:33:33 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Administrator]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>प्रदेश में हर साल 2,886 प्रसूताएं तोड़ रही हैं दम</title>
                                    <description><![CDATA[नवजात को कोख में नौ महीने पालकर जिदंगी देने वाली 8 प्रसूताएं राजस्थान में रोजाना प्रसव के दौरान दम तोड़ रही हैं। हर साल प्रदेश में करीब 17.60 लाख महिलाएं बच्चों को जन्म देती हैं, जिनमें प्रति एक लाख प्रसूताओं पर 164 की मौत हो जाती है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/%E0%A4%AA%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A4%A6%E0%A5%87%E0%A4%B6-%E0%A4%AE%E0%A5%87%E0%A4%82-%E0%A4%B9%E0%A4%B0-%E0%A4%B8%E0%A4%BE%E0%A4%B2-2-886-%E0%A4%AA%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A4%B8%E0%A5%82%E0%A4%A4%E0%A4%BE%E0%A4%8F%E0%A4%82-%E0%A4%A4%E0%A5%8B%E0%A4%A1%E0%A4%BC-%E0%A4%B0%E0%A4%B9%E0%A5%80-%E0%A4%B9%E0%A5%88%E0%A4%82-%E0%A4%A6%E0%A4%AE/article-4219"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-01/prasuta.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। प्रदेश में 2,886 प्रसूताएं हर साल बच्चे को जन्म देने या प्रसव के दौरान मर रही हैं। हालांकि प्रदेश में 2003 के मुकाबले यह संख्या आधी हो चुकी है, लेकिन अभी भी प्रसूताओं की चिकित्सकीय केयर पर उनके परिजन को जागरूक करने की जरुरत है। वहीं दूसरी ओर चिकित्सा विभाग की मेटरनिटी हेल्थ की स्कीमों, जागरूकता अभियान को जमीनी स्तर पर और मजबूत करने की आवश्यकता है।<br /> <strong><br /> रैफरल परिवहन की मजबूती नहीं</strong><br /> चौबीसों घंटे दुर्गम और दूरस्थ डिलेवरी पाइंट पर रैफरल सिस्टम के लिए परिवहन की व्यवस्था भी नहीं है। ऐसे में प्रसूता की हालत बिगड़ने पर उच्च अस्पतालों में परिवहन में देरी भी मौत का एक कारण है।  <br /> <br />                                 <span style="background-color:#ffff99;"><span style="color:#ff0000;"><span style="font-size:larger;"><strong>प्रसूताओं की मौतें क्यों?</strong></span></span></span><br /> <strong>44.7%महिलाएं प्रसव पूर्व अस्पताल नहीं जाती</strong><br /> नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे के मुताबिक राजस्थान में 44.7 फीसदी प्रसूताएं ऐसी हैं जो प्रसव पूर्व जांच और चिकित्सकीय परामर्श को अस्पताल ही नहीं जाती हैं। गंभीर बात यह है कि गांवों में प्रसूताएं इसे लेकर ज्यादा लापरवाह हैं। शहरों में 39.4 फीसदी और गांवों में 46.1 फीसदी गर्भधारण करने के बाद प्रसव पूर्व जांच नहीं करातीं हैं। इसके चलते उनके शारारिक पोषण, गर्भ से जुड़ी जटिलताओं का पता ही नहीं चलता।<br /> <br /> <strong>46%  में खून-पोषण की कमी</strong><br /> प्रदेश में 46.3 फीसदी महिलाएं गर्भवती होने के दौरान एनीमिक यानी खून की कमी से जूझ रही होती है। गांवों में ऐसी गर्भवती महिलाओं की संख्या 47.5 और शहरों में 41.4 फीसदी है। खून की कमी, कुपोषण, गर्भधारण के बाद जांचें और जटिलताएं ही मौत का बड़ा कारण होती है। वहीं 24 फीसदी गर्भवती महिलाएं तो आयरन की गोलियां भी खून की कमी पूरी करने के लिए नहीं लेती है।<br /> <strong><br /> सिजेरियन डिलेवरी में सुविधाओं का अभाव</strong><br /> प्रदेश में 10.4 फीसदी महिलाओं की सालाना सिजेरियन डिलेवरी होती है। सभी अस्पतालों में डिलेवरी की सुविधा, विशेषज्ञ डॉक्टर ना होने से प्रसव पीड़ा के दौरान रैफर करने की स्थिति बनती है तो जान सांसत में आ जाती है।<br /> <strong><br /> चार डिलेवरी केन्द्रों में से औसतन एक पर ही स्त्रीरोग विशेषज्ञ</strong><br /> प्रसूताओं की डिलेवरी के लिए पीएचसी स्तर तक करीब 2 हजार सरकारी अस्पताल में सुविधा हैं, लेकिन स्त्री रोग विशेषज्ञ केवल मात्र 550 ही हैं। यानी चार अस्पतालों में से एक पर ही स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉक्टर है। मौतों को और कम करने के लिए कम से कम एक अस्पताल में एक स्त्री रोग विशेषज्ञ की जरुरत है। प्रसूताओं की समय पर जांच-चिकित्सा मिले इसलिए हर नाम पीएम मातृत्व सुरक्षा अभियान के लिए विभाग को प्राइवेट चिकित्सक हॉयर करने पड़ते हैं।<br /> <br /> प्रसूताओं की मौतों को रोकने के लिए हाल ही में समीक्षा बैठक की है। सभी को बचाने के हर संभव प्रयास होते हैं।<br /> -<strong>आशुतोष ए.टी.पेडनेकर, शासन सचिव, चिकित्सा</strong><br /> <br /> प्रसूता का एनीमिक होना, प्रसव पूर्व जांच ना कराने से व्याप्त जटिलताओं का पता न लगना ही मौतों का बड़ा कारण है। गर्भवती को प्रसव पूर्व जांचे और चिकित्सकीय परामर्श लेने से काफी हद तक मौतें रोकी जा सकती है।<br /> -<strong>डॉ.विमला जैन, पूर्व अधीक्षक, महिला चिकित्सालय, जयपुर</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
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                <pubDate>Sat, 29 Jan 2022 13:16:10 +0530</pubDate>
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