<?xml version="1.0" encoding="utf-8"?>        <rss version="2.0"
            xmlns:content="http://purl.org/rss/1.0/modules/content/"
            xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/"
            xmlns:atom="http://www.w3.org/2005/Atom">
            <channel>
                <atom:link href="https://dainiknavajyoti.com/corona-period/tag-11907" rel="self" type="application/rss+xml" />
                <generator>Dainik Navajyoti Rising Rajasthan RSS Feed Generator</generator>
                <title>corona period - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
                <link>https://dainiknavajyoti.com/tag/11907/rss</link>
                <description>corona period RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>कोरोना काल के बाद जन्म-मृत्यु में हुई तीन गुना बढ़ोतरी </title>
                                    <description><![CDATA[प्राप्त जानकारी के अनुसार वर्ष 2020-21 की तुलना में 2021-22 में दोनों निगम क्षेत्रों में करीब 3 गुना अधिक जन्म प्रमाण पत्र बने। इस अवधि में कुल 20 हजार 983 जन्म प्रमाण पत्र बनाए गए हैं। इनमें कोटा दक्षिण निगम क्षेत्र में 10 हजार 61 और कोटा उत्तर में 10922 प्रमाण पत्र शामिल हैं। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/three-times-increase-in-birth-and-death-after-corona-period/article-46302"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-05/corona-kaal-ke-baad-janm-mrtyu-mein-hua-teen-una-badotari...kota-news-22-05-2023.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। देश में जिस तेजी से आबादी बढ़ रही है उससे जनसंख्या 130 करोड़ के पार पहुंच गई है। हालांकि उसी अनुपात में मृत्यु भी हो रही है। कोटा में भी हर साल हजारों लोगों का जन्म हो रहा है तो मृत्यु भी हो रही है। कोटा में कोरोना काल वर्ष 2020-21 की तुलना में वर्ष 2021-22 में जन्म और मृत्यु में करीब तीन गुना की वृद्धि हुई है। इसका अंदाजा नगर निगम द्वारा बनाए गए जन्म मृत्यु प्रमाण पत्रों से लगाया जा सकता है। देश में हर साल जहां करीब एक करोड़ रुपए से अधिक बच्चे जन्म ले रहे हैं। वहीं कोटा में भी 10 से 15 हजार बच्चों का हर साल जन्म हो रहा है। हर जन्म लेने वाले बच्चे का जन्म प्रमाण पत्र सभी को बनवाना होता है। यह प्रमाण पत्र नगर निगम द्वारा बनाया जाता है। उसी तरह से मरने वाले हर व्यक्ति का मृत्यु प्रमाण पत्र भी निगम में ही बनाया जा रहा है। पहले एक ही नगर निगम था लेकिन वर्ष 2019 में  कोटा उत्तर व कोटा दक्षिण निगम बना दिए हैं। ऐसे में जिस क्षेत्र में बच्चे का जन्म हो रहा है और जिस क्षेत्र में व्यक्ति की मृत्यु हो रही है। उसी निगम में उनका जन्म और मृत्यु प्रमाण पत्र हैल्प लाइन के माध्यम से बनाए जाते हैं। नगर निगम द्वारा जन्म और मृत्यु के प्रमाण पत्र बनाने की प्रक्रिया आॅनलाइन की हुई है। निगम की हैल्प लाइन के अलावा नजदीकी ई मित्र से भी ये प्रमाण पत्र बनवाए जा सकते हैं। लेकिन पंजीयन नगर निगम में ही होता है। </p>
<p><strong>वर्ष 2020-21 में बने 64 सौ जन्म प्रमाण पत्र</strong><br />निगम कोटा उत्तर व दक्षिण से प्राप्त जानकारी के अनुसार वर्ष 2020-21 में दोनों निगम क्षेत्रों में जन्म भले ही अधिक बच्चों का हुआ होगा। लेकिन दोनों निगमों में कुल 6405 जन्म प्रमाण पत्र बनाए गए थे। जिनमें से कोटा दक्षिण निगम में 3972 और कोटा उत्तर में 2433 प्रमाण पत्र शामिल हैं। </p>
<p><strong>2021-22 में बढ़े तीन गुना</strong><br />प्राप्त जानकारी के अनुसार वर्ष 2020-21 की तुलना में 2021-22 में दोनों निगम क्षेत्रों में करीब 3 गुना अधिक जन्म प्रमाण पत्र बने। इस अवधि में कुल 20 हजार 983 जन्म प्रमाण पत्र बनाए गए हैं। इनमें कोटा दक्षिण निगम क्षेत्र में 10 हजार 61 और कोटा उत्तर में 10922 प्रमाण पत्र शामिल हैं। </p>
<p><strong>तीन साल में बने 53 हजार से अधिक प्रमाण पत्र</strong><br />नगर निगम द्वारा वर्ष 2020-21 से वर्ष 2022-23 में अप्रैल तक कुल 53 हजार 598 जन्म प्रमाण पत्र बनाए गए हैं। इनमें कोटा दक्षिण निगम में 25 हजार 42 व कोटा उत्तर निगम क्षेत्र में 28हजार 556 प्रमाण पत्र शामिल हैं। </p>
<p><strong>यह है मृत्यु प्रमाण पत्रों की स्थिति</strong><br />जन्म प्रमाण पत्र की तरह ही मृत्यु प्रमाण पत्र भी निगम की हैल्प लाइन के माध्यम से लगातार बनाए जा रहे हैं। कोटा में जन्म लेने वालों की तुलना में मृत्यु काफी कम रही है। इसका पता भी मृत्यु प्रमाण पत्रों से लगाया जा सकता है। निगम से प्राप्त जानकारी के अनुसार कोटा दक्षिण निगम में वर्ष 2020-21 में जहां 1703 मृत्यु प्रमाण पत्र बने थे। वह वर्ष 2021-22 में तीन गुना बढ़कर 5115 हो गए। जबकि वर्ष 2022-23 में इनकी संख्या 4339 रही।  इसी तरह से कोटा उत्तर निगम क्षेत्र में वर्ष 2020-21 में जहां 696 मृत्यु प्रमाण पत्र बने थे। वह वर्ष 2021-22 में बढ़कर 3641 हो गए थे। जबकि वर्ष 2022-23 में अब तक कुल 3370 प्रमाण पत्र बने हैं। </p>
<p><strong>आॅनलाइन से सरल हुई प्रक्रिया</strong><br />पाटनपोल निवासी नीरज शर्मा का कहना है कि जन्म और मृत्यु का प्रमाण पत्र बनाने की प्रक्रिया आॅनलाइन करने से सुविधा हो गई है। किसी भी ई मित्र पर जाकर आवेदन करना होता है। एक निर्धारित समय में प्रमाण पत्र बनकर तैयार हो रहे हैं। पहले आॅफलाइन होने से निगम के चक्कर लगाने पड़ते थे।  घंटाघर निवासी सईद अहमद का कहना है कि दो निगम होने से कुछ परेशानी हुई है। व्यक्ति रहता कोटा उत्रर निगम में है और बच्चे का जन्म या किसी की मृत्यु दक्षिण क्षेत्र के अस्पताल में हुई है तो प्रमाण पत्र दक्षिण निगम में बनेगा। इसका चक्कर पड़ता है बाकी कोई परेशानी नहीं है। बच्चे का प्रमाण पत्र ई मित्र से बनवाया था अधिक समय नहीं लगा। </p>
<p>जन्म और मृत्यु प्रमाण पत्र बनाने की प्रक्रिया को काफी सरल कर दिया है। आॅनलाइन आवेदन किए जा रहे हैं। आवश्यक दस्तावेज लगाने पर तुरंत प्रमाण पत्र बनकर मिल रहे हैं। तकनीकी कारणों से ही देरी हो सकती है। लेकिन किसी को परेशानी होने पर उसकी जानकारी मिलते ही तुरंत काम कराया जा रहा है। जानकारी के अनुसार कोटा दक्षिण में जन्म मृत्यु प्रमाण पत्रों की कोई पेंडेंसी नहीं है। <br /><strong>- राजीव अग्रवाल, महापौर नगर निगम कोटा दक्षिण </strong></p>
<p>जन्म और मृत्यु प्रमाण पत्र सभी के लिए आवश्यक हो गया है। ऐसे में हर व्यक्ति इन्हें समय से बनवाना चाहता है। नगर निगम कोटा उत्तर में हैल्प लाइन के जरिये ये प्रमाण पत्र बिना किसी परेशानी के बनाए जा रहे हैं। हर साल हजारों जन्म और मृत्यु प्रमाण पत्र बनाए जा रहे हैं। <br /><strong>- मंजू मेहरा, महापौर, नगर निगम कोटा उत्तर</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/three-times-increase-in-birth-and-death-after-corona-period/article-46302</link>
                <guid>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/three-times-increase-in-birth-and-death-after-corona-period/article-46302</guid>
                <pubDate>Mon, 22 May 2023 15:37:14 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://dainiknavajyoti.com/media/2023-05/corona-kaal-ke-baad-janm-mrtyu-mein-hua-teen-una-badotari...kota-news-22-05-2023.jpg"                         length="171668"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[kota]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>कोरोना के बाद प्रदेश में एक साल में बढ़ी संघ की 5277 शाखाएं, कोरोना में संघ स्थल पर शाखा लगने के बजाय ऑनलाइन भी रहे सक्रिय </title>
                                    <description><![CDATA[मार्च, 2021 में प्रदेश में थीं 55,652 शाखाएं, अब हैं 60,929 ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/jaipur--after-corona--5277-branches-of-the-union-increased-in-the-state-in-one-year--instead-of-setting-up-a-branch-at-the-sangh-site-in-corona--they-were-also-active-online/article-7210"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-04/rasss.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। देश में कोरोना के कमजोर पड़ने के साथ ही राष्टÑीय स्वयंसेवक संघ की शाखाओं में तेजी से वृद्धि हुई है। मार्च, 2021 में प्रदेश में 55,652 शाखाएं लगती थी, जो मार्च, 2022 में बढ़कर 60,929 शाखा दर्ज हुई हैं। एक साल में शाखाओं में 5,277 वृद्धि हुई। देश में मार्च, 2020 में लगे लॉकडाउन में संघ ने पूरा फोकस सेवा कार्यों पर कर दिया था। लॉकडाउन हटने के बाद संघ स्थल पर शाखाएं लगने के बजाय आॅनलाइन शाखा लगने लगी, जिसमें मुख्य शिक्षक (शाखा लगाने वाला कार्यकर्ता) मोबाइल के जरिए शाखा लगाने लगे। मुख्य शिक्षक प्रमुख रूप से संघ की प्रार्थना, गीत और अनमोल वचन के माध्यम से शाखा लगाते थे। कोराना की दूसरी लहर के पीक के गुजरने के बाद और सरकार की गाइड लाइन में धीरे-धीरे एकत्रीकरण में छूट देने से संघ की शाखाओं में तेजी आई है। संघ की स्थापना का 2025 में शताब्दी वर्ष होने से भी संघ कार्यों में विस्तार होने लगा है।</p>
<table>
<tbody>
<tr>
<td style="text-align:center;" colspan="4"><span style="background-color:#ffff99;color:#ff9900;"><strong>कोराना के बाद संघ की शाखा, स्थान, साप्ताहिक मिलन और संघ मण्डली में वृद्धि-</strong></span></td>
</tr>
<tr>
<td>गतिविधि</td>
<td>मार्च, 2021</td>
<td>मार्च, 2022 </td>
<td>वृद्धि</td>
</tr>
<tr>
<td>शाखा    </td>
<td>55,652    </td>
<td>60,929    </td>
<td>5277</td>
</tr>
<tr>
<td>साप्ताहिक मिलन  </td>
<td>18,553    </td>
<td>20,681    </td>
<td>2128</td>
</tr>
<tr>
<td>संघ मण्डली    </td>
<td>7655    </td>
<td>7923   </td>
<td>268</td>
</tr>
<tr>
<td><br />स्थान    </td>
<td>34,569    </td>
<td>38,390    </td>
<td>3821</td>
</tr>
</tbody>
</table>
<p><strong>वर्ष में एक लाख गांवों तक संघ कार्यों को ले जाने का लक्ष्य-</strong><br />संघ की स्थापना वर्ष 2025 में शताब्दी वर्ष होने से देशभर में एक लाख गांवों तक संघ कार्य को ले जाने का लक्ष्य तय किया है। कोविड संकट के बावजूद संघ कार्य 2020 की तुलना में देशभर में 98.6 प्रतिशत पुन: शुरू हो गया है। <br /><br /><strong>डिजिटल प्लेटफार्म से भी जुड़ रहे संघ से युवा-</strong><br />संघ के वर्ष 2017 से 2021 तक ‘जाइन आरएसएस’ के माध्यम से देशभर में चलाए अभियान के तहत 20 से 35 वर्ष के सवा लाख युवाओं ने संघ से जुड़ने की इच्छा जताई है।<br /><br /><strong>इनक कहना है-</strong><br />‘कोरोना में संघ ने डिजिटल शाखा लगाने के साथ ही सेवा कार्य किया। बाद के समय में शाखा लगने लगी, पिछले साल की तुलना में शाखा में वृद्धि हुई है।-<strong>महेन्द्र, क्षेत्र प्रचार प्रमुख, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ,जयपुर</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/jaipur--after-corona--5277-branches-of-the-union-increased-in-the-state-in-one-year--instead-of-setting-up-a-branch-at-the-sangh-site-in-corona--they-were-also-active-online/article-7210</link>
                <guid>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/jaipur--after-corona--5277-branches-of-the-union-increased-in-the-state-in-one-year--instead-of-setting-up-a-branch-at-the-sangh-site-in-corona--they-were-also-active-online/article-7210</guid>
                <pubDate>Sat, 02 Apr 2022 15:14:25 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://dainiknavajyoti.com/media/2022-04/rasss.jpg"                         length="33536"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Administrator]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>कोरोनाकाल में हैडफोन और ईयर बड्स के जरूरत से ज्यादा उपयोग ने बढ़ाई बहरेपन की समस्या</title>
                                    <description><![CDATA[ कोरोना के चलते बदलती जीवनशैली में सामान्य से अधिक लोगों में बहरेपन या कम सुनने के मामले पहले की अपेक्षा बढ़ते जा रहे हैं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/health/excessive-use-of-headphones-and-earbuds-during-the-corona-period-increased-the-problem-of-deafness--special-on-world-hearing-day-today--children-and-youth-are-seeing-more-trouble-while-taking-online-classes/article-5423"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-03/world-hearing-day.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। कोरोना के चलते बदलती जीवनशैली में सामान्य से अधिक लोगों में बहरेपन या कम सुनने के मामले पहले की अपेक्षा बढ़ते जा रहे हैं। यह समस्या बच्चे, युवा और बुजुर्ग वर्ग में सबसे अधिक देखी जा रही है। कोरोना काल में बच्चों और युवाओं में यह समस्या ज्यादा बढ़ गई है। अधिकतर शिक्षण संस्थाओं के विद्यार्थी हैड फोन या इयर बड्स लगाकार आनॅलाइन कक्षाएं ले रहे हैं। वहीं जो लोग वर्क फ्रॉम होम कर रहे हैं, वे भी इस समस्या से प्रभावित है।  एसएमएस अस्पताल के ईएनटी विभाग के वरिष्ठ आचार्य डॉ. पवन सिंघल ने बताया कि सुनने की समस्या पहले या तो जन्मजात होती थी या जो लोग तेज धमाकों या तेज आवाज के साथ काम करते थे उन्हें इसका सामना करना पड़ता था, लेकिन अब कोरोना काल में आनॅलाइन कक्षाओं के कारण स्टूडेंट्स को भी इससे दो चार होना पड़ रहा है। हमारे कान की सुनने की क्षमता 80 डेसिबल होती है, लेकिन आज के मॉडर्न लाइस्टाइल में लोग अपनी सुनने की क्षमता को ही खो बैठते हैं। <br /><br /><span style="background-color:#ffff99;color:#000080;"><strong>प्रति एक हजार बच्चों में से चार से ज्यादा को करना पड़ रहा है बहरेपन का सामना</strong></span><br /><span style="background-color:#ffff99;color:#000080;"><strong>नवजात बच्चों की जन्म के समय सुनने की क्षमता की जांच होना भी विशेषज्ञों ने बताया बेहद जरूरी</strong></span><br /><br /><span style="background-color:#ffff99;color:#ff0000;"><strong>प्रदेश में भी ऐसे मामलों में हुई बढ़ोतरी</strong></span><br />डॉ. सिंघल ने बताया कि राज्य में सुनने की क्षमता प्रभावित होने के मामले पहले से काफी बढ़ गए हैं। एसएमएस अस्पताल में भी बहरेपन के मामले कोरोना काल के बाद ज्यादा बढ़ गए हैं। अधिक समय तक मोबाइल पर बात करना, तेज आवाज में संगीत सुनने या गेम खेलना सबसे अधिक नुकसानदायक है। अकेले एसएमएस की बात करें तो यहां रोजाना 70-80 मरीज सुनने की क्षमता से प्रभावित होने के कारण ओपीडी में इलाज के लिए आ रहे हैं। डब्ल्यूएचओ की जारी रिपोर्ट के अनुसार दुनिया में सबसे ज्यादा बहरेपन की समस्या विकासशील और कम विकसित देशों में देखने को मिलती है। नवजात शिशु की जन्म के समय ही सुनने की जांच की जाए और अगर उसे दिक्कत है तो एक से दो साल के बीच ही कॉकलियर इंप्लांट किया जाए।<br /><br /><span style="background-color:#ffff99;color:#ff0000;"><strong>राष्ट्रीय टीकाकरण अभियान का हिस्सा बनें</strong></span><br />देशभर में प्रति एक हजार बच्चों में से 4 से अधिक बच्चों को बहरेपन का सामना करना पड़ रहा है। इनको समय पर सुनने की जांच न मिल पाने के कारण ये आवाज से वंचित रह जाते है। ना सुन पाते हैं और ना ही बोल पाते हैं। ऐसे में विशेषज्ञों ने सरकार से मांग की है कि इसके लिए नवजात शिशु की सुनने की जांच अनिवार्य हो। इसे राष्टÑीय टीकाकरण अभियान का हिस्सा बना दिया जाए, जिसमें सुनने की जांच हो सके।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वास्थ्य</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/health/excessive-use-of-headphones-and-earbuds-during-the-corona-period-increased-the-problem-of-deafness--special-on-world-hearing-day-today--children-and-youth-are-seeing-more-trouble-while-taking-online-classes/article-5423</link>
                <guid>https://dainiknavajyoti.com/health/excessive-use-of-headphones-and-earbuds-during-the-corona-period-increased-the-problem-of-deafness--special-on-world-hearing-day-today--children-and-youth-are-seeing-more-trouble-while-taking-online-classes/article-5423</guid>
                <pubDate>Thu, 03 Mar 2022 16:05:15 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://dainiknavajyoti.com/media/2022-03/world-hearing-day.jpg"                         length="85529"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Administrator]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>बजट सत्र में राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद का संबोधन: कोरोना काल में स्वास्थ्य सेवाओं को सराहा, तो नई तकनीक अपनाने पर जताई खुशी,  देश में मोबाइल फोन उत्पादन की सफलता को मेक इन इंडिया का बताया बड़ा उदाहरण </title>
                                    <description><![CDATA[कृषि के बढ़ते उत्पादन और निर्यात में वृद्धि के साथ-साथ रक्षा क्षेत्र में आत्म निर्भरता निरंतर बढ रही ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/%E0%A4%AC%E0%A4%9C%E0%A4%9F-%E0%A4%B8%E0%A4%A4%E0%A5%8D%E0%A4%B0-%E0%A4%AE%E0%A5%87%E0%A4%82-%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%B7%E0%A5%8D%E0%A4%9F%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A4%AA%E0%A4%A4%E0%A4%BF-%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%AE%E0%A4%A8%E0%A4%BE%E0%A4%A5-%E0%A4%95%E0%A5%8B%E0%A4%B5%E0%A4%BF%E0%A4%82%E0%A4%A6-%E0%A4%95%E0%A4%BE-%E0%A4%B8%E0%A4%82%E0%A4%AC%E0%A5%8B%E0%A4%A7%E0%A4%A8--%E0%A4%95%E0%A5%8B%E0%A4%B0%E0%A5%8B%E0%A4%A8%E0%A4%BE-%E0%A4%95%E0%A4%BE%E0%A4%B2-%E0%A4%AE%E0%A5%87%E0%A4%82-%E0%A4%B8%E0%A5%8D%E0%A4%B5%E0%A4%BE%E0%A4%B8%E0%A5%8D%E0%A4%A5%E0%A5%8D%E0%A4%AF-%E0%A4%B8%E0%A5%87%E0%A4%B5%E0%A4%BE%E0%A4%93%E0%A4%82-%E0%A4%95%E0%A5%8B-%E0%A4%B8%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%B9%E0%A4%BE--%E0%A4%A4%E0%A5%8B-%E0%A4%A8%E0%A4%88-%E0%A4%A4%E0%A4%95%E0%A4%A8%E0%A5%80%E0%A4%95-%E0%A4%85%E0%A4%AA%E0%A4%A8%E0%A4%BE%E0%A4%A8%E0%A5%87-%E0%A4%AA%E0%A4%B0-%E0%A4%9C%E0%A4%A4%E0%A4%BE%E0%A4%88-%E0%A4%96%E0%A5%81%E0%A4%B6%E0%A5%80---%E0%A4%A6%E0%A5%87%E0%A4%B6-%E0%A4%AE%E0%A5%87%E0%A4%82-%E0%A4%AE%E0%A5%8B%E0%A4%AC%E0%A4%BE%E0%A4%87%E0%A4%B2-%E0%A4%AB%E0%A5%8B%E0%A4%A8-%E0%A4%89%E0%A4%A4%E0%A5%8D%E0%A4%AA%E0%A4%BE%E0%A4%A6%E0%A4%A8-%E0%A4%95%E0%A5%80-%E0%A4%B8%E0%A4%AB%E0%A4%B2%E0%A4%A4%E0%A4%BE-%E0%A4%95%E0%A5%8B-%E0%A4%AE%E0%A5%87%E0%A4%95-%E0%A4%87%E0%A4%A8-%E0%A4%87%E0%A4%82%E0%A4%A1%E0%A4%BF%E0%A4%AF%E0%A4%BE-%E0%A4%95%E0%A4%BE-%E0%A4%AC%E0%A4%A4%E0%A4%BE%E0%A4%AF%E0%A4%BE-%E0%A4%AC%E0%A4%A1%E0%A4%BC%E0%A4%BE-%E0%A4%89%E0%A4%A6%E0%A4%BE%E0%A4%B9%E0%A4%B0%E0%A4%A3/article-4238"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-01/kovind.jpg" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। 1फरवरी को देश का बजट आएगा। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण बजट पेश करेंगी। सोमवार को संसद में बजट सत्र आयोजित हुआ। बजट सत्र में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी शामिल हुए। बजट सत्र में संसद के संयुक्त अधिवेशन को राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने संबोधित किया। बजट सत्र को  संबोधित करते हुए राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने कहा है कि कोरोना संकट के दौरान भारत की क्षमता दिखायी दी है और देश से 180 देशों को संबंधित दवाइयों की आपूर्ति की जा रही है। सरकार देश में स्वास्थ्य सेवाओं का बुनियादी ढांचा मजबूत कर रही है। देश के फार्मा क्षेत्र ने अपनी असाधारण क्षमता प्रदर्शित की है। भारत में बन रहे कोविड टीके पूरी दुनिया को महामारी से मुक्त कराने और करोड़ों लोगों का जीवन बचाने में अहम भूमिका निभा रहे हैं। भारत से लगभग 180 देशों को दवाओं की आपूर्ति की जा रही है। उन्होंने कहा कि आयुष्मान भारत जैसी योजनाओं से स्वास्थ्य सेवाओं के ढांचे को मजबूत किया जा रहा है और इसका विस्तार हो रहा है। <strong><br /></strong></p>
<p><strong>बदलावों, नयी तकनीकों को तेजी से अपना रहे हैं देशवासी</strong><br />राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने देश में डिजिटल लेनदेन में हो रही बढोतरी का हवाला देते हुए कहा कि देशवासी बदलाव और तकनीक को तेजी से अपना रहे हैं।  उन्होंने कहा कि जनधन, आधार मोबाइल (जैम) ट्रिनिटी को सरकार ने नागरिक सशक्तिकरण से जोड़ा है। उसका प्रभाव भी लगातार दिख रहा है। देश में 44 करोड़ से अधिक गरीब देशवासियों के बैंकिंग सिस्टम से जुडऩे के कारण महामारी के दौरान करोड़ों लाभार्थियों को सीधे नकद हस्तातंरण का लाभ मिला है। <br /><br />उन्होंने डिजिटल इंडिया और डिजिटल अर्थव्यवस्था के बढ़ते प्रसार के संदर्भ में देश के यूनिफाइड पेमेंट इंटरफेस(यूपीआई) की सफलता के लिए सरकार के दृष्टिकोण की प्रशंसा करते हुए कहा कि देश में आठ लाख करोड़ रुपये से ज्यादा का लेनदेन यूपीआई के माध्यम से हुआ है। राष्ट्रपति ने कहा कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को गति देने में महिलाओं की भूमिका अधिक बढ़ती जा रही है। 2021-22 में 28 लाख स्व सहायता समूहों को बैंकों से 65हजार करोड़ रुपये की मदद दी गयी है। यह राशि वर्श 2014-15 की तुलना में चार गुना अधिक है। <br /><br />उन्होंने देश के स्टार्टअप ईको सिस्टम का उल्लेख करते हुए कहा कि युवाओं के नेतृत्व में 2016 से देश में 56 अलग अलग क्षेत्रों में 60 हजार से अधिक नये स्टार्टअप बने हैं। इन स्टार्टअप के जरिये छह लाख से अधिक रोजगार का सृजन हुआ है। वर्ष 2021 में कोरोना काल में भारत में 40 से अधिक यूनिकॉर्न स्टार्टअप अस्तित्व में आये जिनमें से प्रत्येक का मूल्य 7400 करोड़ रुपये से अधिक आंका गया है। राष्ट्रपति ने कहा कि सरकार के निरंतर प्रयासों से भारत एक बार फिर विश्व की सबसे तेजी से विकसित हो रही अर्थव्यवस्थाओं में से एक बन गया है। उन्होंने वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) संग्रह का उल्लेख करते हुये कहा कि पिछले कई महीनों से जीएसटी राजस्व संग्रह एक लाख करोड़ रुपये से अधिक बना हुआ है। <br /><br />  इस वित्त वर्ष में पहले सात महीनेों में 48 अरब डॉलर का विदेशी निवेश आना इस बात का प्रमाण है कि अंतरराष्ट्रीय निवेशक भारत के विकास को लेकर बहुत आश्वास्त है। उन्होंने कहा कि इस समय देश का विदेशी मुद्रा भंडार 630 अरब डॉलर के ऊपर है। उन्होंने कहा कि सरकार की नीतियों की वजह से आज भारत उन देशों में है जहां इंटरनेट की कीमत सबसे कम है तथा स्मार्टफोन की कीमत भी सबसे कम है। इसका बहुत बड़ा लाभ भारत की नौजवान पीढ़ी को मिल रहा है। उन्होंने कहा कि भारत विश्व में दूसरा सबसे बड़ा मोबाइल फोन निर्माता बनकर उभरा है।  देश में मोबाइल फोन उत्पादन की सफलता , मेक इन इंडिया का एक बड़ा उदाहरण है। आज भारत विश्व में दूसरा सबसे बड़ा मोबाइल फोन निर्माता बनकर उभरा है। इससे देश के लाखों युवाओं को रोजगार भी मिला हुआ है। <br /><br /><strong>कृषि उत्पादन और निर्यात में रिकार्ड वृद्धि</strong><br /><br />अपने संबोधन के दौरान किसान और कृषि का जिक्र भी राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद ने किय। उन्होंने कहा कि कोरोना संकट केे बावजूद किसानों के अथक प्रयास से देश में खाद्यान्न और बागवानी फसलों का रिकार्ड उत्पादन और निर्यात हुआ है।  वर्ष 2020..21 के दौरान 30 करोड टन खाद्यान्नों और 33 करोड़ टन बागवानी फसलों का उत्पादन हुआ । उन्होंने कहा कि फसलों के रिकार्ड उत्पादन के साथ ही रिकार्ड मात्रा में न्यूनतम समर्थन मूल्य पर इसकी खरीद भी की गई है जिससे किसानों को आर्थिक लाभ हुआ है । </p>
<p>राष्ट्रपति ने कहा कि रबी फसलों के दौरान 433 लाख टन गेंहू की न्यूनतम समर्थन मूल्य पर खरीद की गई जिससे 50 लाख किसानों को फायदा हुआ । इसी तरह से खरीफ सीजन के दौरान 900 लाख टन धान की खरीद की गई जिससे एक करोड़ 30 लाख किसानों को आर्थिक लाभ हुआ । <br /><br />उन्होंने कहा कि वर्ष 2020 ( 21 के दौरान कृषि निर्यात में 25 प्रतिशत की वृद्धि हुयी और यह तीन लाख करोड़ रुपये पहुंच गया है । बागवानी और शहद उत्पादन से भी किसानों को आय के नये स्रोत खुले हैं। शहद का उत्पादन एक लाख 25 हजार टन पहुंच गया है । वर्ष 2014..15 की तुलना में इसमें 55 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। वर्ष 2014..15 की तुलना में शहद का निर्यात 102 प्रतिशत बढ गया है । <br /><br />उन्होंने कहा कि किसानों को सही बाजार मिले और उनमे खुशहाली आये इसके लिए किसान रेल सेवा शुरु की गयी । इससे सब्जी , फल , दूध और जल्दी खराब होने वाली वस्तुओं को बाजारों तक पहुंचाया गया । कुल 150 मार्गो पर 1900 किसान रेल चलायी गयी जिससे छह लाख टन माल की ढुलायी हुई। उन्होंने कहा कि पुराने संसाधनों से विकास के नये रास्ते तलाशे गये । छोटे किसानों के प्रयास से कृषि क्षेत्र में सतत सफलता मिल रही है । देश में छोटे किसान करीब 80 प्रतिशत हैं । <br /><br />राष्ट्रपति ने कहा कि प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि से 11 करोड़ से अधिक किसानों को एक लाख 80 हजार करोड़ रुपये की आर्थिक सहायता की गयी है । फसल बीमा योजना में बदलाव का लाभ भी छोटे किसानों को मिला है । करीब आठ लाख किसानों को फसलों की क्षति के लिए एक लाख करोड रुपये का मुआवजा दिया गया है । उन्होंने कहा कि एक लाख करोड़ रुपये के कृषि आधारभूत संरचना कोष से अनेक कार्यक्रम शुरु किये गये हैं ।</p>
<p><strong>देश रक्षा क्षेत्र में आत्म निर्भरता की ओर बढ रहा  तेजी से</strong><br />राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने अपना संबोधन जारी रखते हुए कहा कि सरकार देश की सुरक्षा के लिए दृढ संकल्प के साथ काम कर रही है जिससे रक्षा क्षेत्र में आत्म निर्भरता निरंतर बढ रही है। उन्होंने कहा कि मेरी सरकार देश की सुरक्षा के लिए दृढ़ संकल्पित होकर काम कर रही है। सरकार की नीतियों की वजह से डिफेंस सेक्टर में, विशेषकर रक्षा उत्पादन में, देश की आत्म-निर्भरता लगातार बढ़ रही है।<br /><br />सैन्य बलों के आधुनिकीकरण की दिशा में किये जा रहे कार्यों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि वर्ष 2020-21 में सैन्य बलों के आधुनिकीकरण के लिए जो भी स्वीकृतियों प्रदान की गयी उनमें 87 फीसदी उत्पादों में मेक इन इंडयिा को प्राथमिकता दी गयी। सरकार की महत्वाकांक्षी योजना मेक इन इंडिया का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि 2020-21 में 98 प्रतिशत उपकरणों से जुड़े अनुबंधों में मेक इन इंडिया को प्राथमिकता दी गयी है।   सशस्त्र बलों की जरूरतों को देश में ही पूरा करने के सरकार के प्रयासों तथा सफलता के बारे में उन्होंने कहा कि  हमारी सेनाओं ने 209 ऐसे साजो सामान की सूची भी जारी की है जिन्हें अब विदेश से नही खरीदा जायेगा। <br /><br />उन्होंने कहा कि सरकार का लक्ष्य है कि सेनाओं की जरूरत का सामान भारत में ही विकसित हो तथा भारत में ही निर्मित हो। इसे ध्यान में रखते हुए हिन्दुस्तान ऐरोनाटिक्स लिमिटेड ( एचएएल) के साथ 83 एलसीए तेजस लड़ाकू विमान बनाने के लिए अनुबंध किये गये हैं। सरकार ने आर्डिनेन्स फैक्ट्रियों को रक्षा क्षेत्र के सात सार्वजनिक उपक्रमों का रूप देने के लिए महत्वपूर्ण कदम उठाये हैं। इसके अलावा रक्षा क्षेत्र में निजी सेक्टर और स्टार्ट अप को तेजी से बढावा देने के लिए भी सरकार प्रतिबद्ध है। <br /><br /><br /></p>
<p> </p>
<p> </p>
<p><br /><br /></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/bharat/%E0%A4%AC%E0%A4%9C%E0%A4%9F-%E0%A4%B8%E0%A4%A4%E0%A5%8D%E0%A4%B0-%E0%A4%AE%E0%A5%87%E0%A4%82-%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%B7%E0%A5%8D%E0%A4%9F%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A4%AA%E0%A4%A4%E0%A4%BF-%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%AE%E0%A4%A8%E0%A4%BE%E0%A4%A5-%E0%A4%95%E0%A5%8B%E0%A4%B5%E0%A4%BF%E0%A4%82%E0%A4%A6-%E0%A4%95%E0%A4%BE-%E0%A4%B8%E0%A4%82%E0%A4%AC%E0%A5%8B%E0%A4%A7%E0%A4%A8--%E0%A4%95%E0%A5%8B%E0%A4%B0%E0%A5%8B%E0%A4%A8%E0%A4%BE-%E0%A4%95%E0%A4%BE%E0%A4%B2-%E0%A4%AE%E0%A5%87%E0%A4%82-%E0%A4%B8%E0%A5%8D%E0%A4%B5%E0%A4%BE%E0%A4%B8%E0%A5%8D%E0%A4%A5%E0%A5%8D%E0%A4%AF-%E0%A4%B8%E0%A5%87%E0%A4%B5%E0%A4%BE%E0%A4%93%E0%A4%82-%E0%A4%95%E0%A5%8B-%E0%A4%B8%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%B9%E0%A4%BE--%E0%A4%A4%E0%A5%8B-%E0%A4%A8%E0%A4%88-%E0%A4%A4%E0%A4%95%E0%A4%A8%E0%A5%80%E0%A4%95-%E0%A4%85%E0%A4%AA%E0%A4%A8%E0%A4%BE%E0%A4%A8%E0%A5%87-%E0%A4%AA%E0%A4%B0-%E0%A4%9C%E0%A4%A4%E0%A4%BE%E0%A4%88-%E0%A4%96%E0%A5%81%E0%A4%B6%E0%A5%80---%E0%A4%A6%E0%A5%87%E0%A4%B6-%E0%A4%AE%E0%A5%87%E0%A4%82-%E0%A4%AE%E0%A5%8B%E0%A4%AC%E0%A4%BE%E0%A4%87%E0%A4%B2-%E0%A4%AB%E0%A5%8B%E0%A4%A8-%E0%A4%89%E0%A4%A4%E0%A5%8D%E0%A4%AA%E0%A4%BE%E0%A4%A6%E0%A4%A8-%E0%A4%95%E0%A5%80-%E0%A4%B8%E0%A4%AB%E0%A4%B2%E0%A4%A4%E0%A4%BE-%E0%A4%95%E0%A5%8B-%E0%A4%AE%E0%A5%87%E0%A4%95-%E0%A4%87%E0%A4%A8-%E0%A4%87%E0%A4%82%E0%A4%A1%E0%A4%BF%E0%A4%AF%E0%A4%BE-%E0%A4%95%E0%A4%BE-%E0%A4%AC%E0%A4%A4%E0%A4%BE%E0%A4%AF%E0%A4%BE-%E0%A4%AC%E0%A4%A1%E0%A4%BC%E0%A4%BE-%E0%A4%89%E0%A4%A6%E0%A4%BE%E0%A4%B9%E0%A4%B0%E0%A4%A3/article-4238</link>
                <guid>https://dainiknavajyoti.com/bharat/%E0%A4%AC%E0%A4%9C%E0%A4%9F-%E0%A4%B8%E0%A4%A4%E0%A5%8D%E0%A4%B0-%E0%A4%AE%E0%A5%87%E0%A4%82-%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%B7%E0%A5%8D%E0%A4%9F%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A4%AA%E0%A4%A4%E0%A4%BF-%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%AE%E0%A4%A8%E0%A4%BE%E0%A4%A5-%E0%A4%95%E0%A5%8B%E0%A4%B5%E0%A4%BF%E0%A4%82%E0%A4%A6-%E0%A4%95%E0%A4%BE-%E0%A4%B8%E0%A4%82%E0%A4%AC%E0%A5%8B%E0%A4%A7%E0%A4%A8--%E0%A4%95%E0%A5%8B%E0%A4%B0%E0%A5%8B%E0%A4%A8%E0%A4%BE-%E0%A4%95%E0%A4%BE%E0%A4%B2-%E0%A4%AE%E0%A5%87%E0%A4%82-%E0%A4%B8%E0%A5%8D%E0%A4%B5%E0%A4%BE%E0%A4%B8%E0%A5%8D%E0%A4%A5%E0%A5%8D%E0%A4%AF-%E0%A4%B8%E0%A5%87%E0%A4%B5%E0%A4%BE%E0%A4%93%E0%A4%82-%E0%A4%95%E0%A5%8B-%E0%A4%B8%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%B9%E0%A4%BE--%E0%A4%A4%E0%A5%8B-%E0%A4%A8%E0%A4%88-%E0%A4%A4%E0%A4%95%E0%A4%A8%E0%A5%80%E0%A4%95-%E0%A4%85%E0%A4%AA%E0%A4%A8%E0%A4%BE%E0%A4%A8%E0%A5%87-%E0%A4%AA%E0%A4%B0-%E0%A4%9C%E0%A4%A4%E0%A4%BE%E0%A4%88-%E0%A4%96%E0%A5%81%E0%A4%B6%E0%A5%80---%E0%A4%A6%E0%A5%87%E0%A4%B6-%E0%A4%AE%E0%A5%87%E0%A4%82-%E0%A4%AE%E0%A5%8B%E0%A4%AC%E0%A4%BE%E0%A4%87%E0%A4%B2-%E0%A4%AB%E0%A5%8B%E0%A4%A8-%E0%A4%89%E0%A4%A4%E0%A5%8D%E0%A4%AA%E0%A4%BE%E0%A4%A6%E0%A4%A8-%E0%A4%95%E0%A5%80-%E0%A4%B8%E0%A4%AB%E0%A4%B2%E0%A4%A4%E0%A4%BE-%E0%A4%95%E0%A5%8B-%E0%A4%AE%E0%A5%87%E0%A4%95-%E0%A4%87%E0%A4%A8-%E0%A4%87%E0%A4%82%E0%A4%A1%E0%A4%BF%E0%A4%AF%E0%A4%BE-%E0%A4%95%E0%A4%BE-%E0%A4%AC%E0%A4%A4%E0%A4%BE%E0%A4%AF%E0%A4%BE-%E0%A4%AC%E0%A4%A1%E0%A4%BC%E0%A4%BE-%E0%A4%89%E0%A4%A6%E0%A4%BE%E0%A4%B9%E0%A4%B0%E0%A4%A3/article-4238</guid>
                <pubDate>Mon, 31 Jan 2022 14:47:25 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://dainiknavajyoti.com/media/2022-01/kovind.jpg"                         length="179240"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Administrator]]></dc:creator>
                            </item>

            </channel>
        </rss>
        