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                <title>mobile phone - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <title>धड़ल्ले से हो रहा पेट्रोल पम्पों पर मोबाइल का उपयोग, पेट्रोल-डीजल ज्वलनशील होने से खतरा बरकरार</title>
                                    <description><![CDATA[सिर्फ डिजिटल पेमेंट के लिए करें मोबाइल का उपयोग। 
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/use-of-mobile-at-petrol-pumps-is-rampant/article-102652"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-01/7819.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। शहर में हर पेट्रोल पम्प पर पेट्रोल व टीजल भरवाने वाले वाहन चालकों की भीड़ देखी जा सकती है। उस भीड़ में कई लोग ऐसे भी हैं जो वहीं खड़े होकर मोबाइल पर बात करने लगते है।  पेट्रोल पम्पों पर  लोगों को धडल्ले से बेफिक्र होकर बात करते हुए देखा जा सकता है। लेकिन उन्हें शायद इस बात का अंदाजा नहीं है कि पेट्रोल पम्प पर खड़े होकर मोबाइल पर बात करने का खतरा अभी कम नहीं हुआ है। देश में डिजिटल क्रांति के चलते अधिकतर काम ऑनलाइन हो गया है। जिससे पेट्रोल पम्पों पर भी मोबाइल का अधिक उपयोग होने लगा है। पेट्रोल पम्प पर मोबाइल का उपयोग सिर्फ डिजिटल पेमेंट के लिए ही किया जाना खतरनाक नहीं है। जबकि वहां खड़े होकर मोबाइल पर बात करने का खतरा अभी भी कम नहीं हुआ है। कोटा शहर में जितने भी पेट्रोल पम्प हैं उनमें से अधिकतर में अब पेट्रोल व डीजल भरवाने पर भुगतान की आॅनलाइन सुविधा कर दी गई है। जिसमें फोन पे, पेटीएम व स्वेप मशीन से होने लगा है। इन डिजिटल माध्यमों से भुगतान के लिए मोबाइल का उपयोग किया जा रहा है। इसमें ग्राहक से लेकर पेट्रोल पम्प कर्मचारी तक सभी मोबाइल लिए घंटों तक पम्पों पर खड़े रहते हैं। वह भी पम्प के इतने नजदीक कि कभी भी कोई हादसा या घटना घट सकती है। हालांकि सभी पम्प पर मोबाइल का उपयोग अधिक होने से वहां आग से सुरक्षा के इंतजाम बढ़ाए गए हैं। रेत व मिट्टी से भरी बाल्टियां व फायर इंस्टीब्यूशंस अधिक संख्या में रखे जा रहे हैं। </p>
<p><strong>पहले मोबाइल का उपयोग था वर्जित :</strong></p>
<p>डिजिटल क्रांति आने से अब अधिकतर लोग अपने पास नकद राशि कम रखते हैं। छोटे-छोटे भुगतान भी डिजिटल माध्यमों से करने लगे है। जिसमें पेट्रोल पम्प भी शामिल है। जबकि कुछ समय पहले तक लोगों को पेट्रोल पम्प पर मोबाइल ले जाना वर्जित था। यदि कोई मोबाइल लेकर जाता भी था तो उसे वहां मोबाइल निकालने और बात नहीं करने दिया जाता था। पम्प कर्मचारी ही  ग्राहकों को ऐसा करने से मना कर देते थे।  ऐसा कहा जाता था कि पेट्रोल पम्प पर मोबाइल से बात करने पर आग लगने  का खतरा हो सकता है। लेकिन अब कर्मचारी हो या ग्राहक सभी बेधड़क होकर पेट्रोल पम्प पर मोबाइल का उपयोग कर रहे हैं। </p>
<p><strong>करीब 50 फीसदी भुगतान ऑनलाइन हो रहा :</strong></p>
<p>शहर में वर्तमान में विभिन्न कम्पनियों के 39 पेट्रोल पम्प संचालित हैं। जिनसे रोजाना करीब 21 लाख लीटर पेट्रोल व डीजल की खपत हो रही है। जिसमें 8 लाख लीटर पेट्रोल और 13 लाख लीटर डीजल की खपत है। इससे करीब 21 करोड़ रुपए का लेनदेन हो रहा है। हालत यह है कि शहर के पेट्रोल पम्पों पर  रोजाना हो रहे लेनदेन में करीब 50 फीसदी भुगतान डिजिटल माध्यमों से आॅनलाइन किया जा रहा है। ऐसे में भुगतान करने वालों में कुछ लोग पम्प पर खड़े होकर मोबाइल से बात करने लगते है। इससे उन लोगों के साथ ही वहां मौजूद लोगों व आस-पास के लिए खतरनाक हैं। </p>
<p><strong>मोबाइल से निकलने वाली किरणें खतरनाक :</strong></p>
<p>मोबाइल रिपेयर करने वाले मैकैनिक सुखवीर  मेहरा का कहना है कि पेट्रोल पम्प पर मोबाइल से बात करना पहले भी खतरनाक था और अभी भी खतरनाक ही है। मोबाइल से निकलने वाली किरणें वातावरण में फेलती है। जिससे पेट्रोल व डीजल अधिक ’वलनशील पदार्थ होने से वह उसके सम्पर्क में आने से खतरनाक हो जाती है। इसलिए पेट्रोल पम्प पर मोबाइल से बात करने का खतरा जितना पहले था उतना ही अभी भी है। पम्प से एक निर्धारित दूरी पर जाकर ही मोबाइल से बात करना ही सुरक्षित है।  मोबाइल दुकानदार महेश आहूजा ने बताया कि  पेट्रोल पम्प पर मोबाइल से बात करना अधिक खतरनाक है। जबकि डिजिटल भुगतान करने में खतरा नहीं है। इसका कारण भुगतान करने में कुछ सैकंड या एक से दो मिनट का भी समय नहीं लगता। जबकि बात लम्बी चलती है। ऐसे में मोबाइल  से निकलने वाली किरणें पेट्रोल-डीजल के सम्पर्क में आने पर हादसे का कारण बन सकती है। </p>
<p><strong>पेट्रोल-डीजल ज्वलनशील होने से खतरा बरकरार :</strong></p>
<p>विज्ञान नगर निवासी कपिल शर्मा व गफ्फार मोहम्मद ने बताया कि पेट्रोल  व डीजल ’वलनशील पदार्थ होते हैं। वह मोबाइल से निकलने वाले रेडिएशन के सम्पर्क में तेजी से आते हैं। जिससे पम्प पर मोबाइल का उपयोग करना ही खतरनाक है। फिर चाहे वह डिजिटल भुगतान के लिए हो या बात करने के लिए। भुगतान के लिए भी तो नेट चालू करना होता है। ऐसा करने वाले लोगों के लिए खतरा पैदा कर रहे हैं। </p>
<p><strong>इनका कहना है :</strong></p>
<p>सरकार ने डिजिटल इंडिया के तहत अधिकतर भुगतान की व्यवस्था ऑनलाइन कर रखी है। ऐसे में पेट्रोल पम्प पर भी ऑनलाइन भुगतान को नकारा नहीं जा सकता। अब अधिकतर लोगों की नकद राशि रखने की आदत कम हो गई है। ऐसे में पेट्रोल पम्प संचालकों को भी ऑनलाइन भुगतान के लिए मोबाइल का उपयोग करना पड़ रहा है। पम्प पर मोबाइल से बात करना पहले भी खतरनाक था और अभी भी है। लेकिन डिजिटल पेमेंट करना खतरनाक नहीं है। सरकार ने जो सुविधा दी है उसका लोगों को उपयोग करना चाहिए दुरुपयोग नहीं। पेट्रोल पम्प पर लोग मोबाइल का उपयोग भुगतान के लिए करें बात करने के लिए नहीं। <br /><strong>- तरूमीत सिंह बेदी, अध्यक्ष पेट्रोलियम डीलर्स एसोसिएशन</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 31 Jan 2025 16:08:58 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>फिल्मी अंदाज में मोबाइल छीनने वाले दो बदमाश गिरफ्तार </title>
                                    <description><![CDATA[बिना नम्बर प्लेट की बाईक आई जिसमें पीछे बैठे  लड़के ने मोबाइल छीना  और फरार हो गया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/two-miscreants-who-snatched-mobile-in-filmy-style-arrested/article-74301"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-04/photo-size-(2).png" alt=""></a><br /><p>कोटा। जवाहर नगर पुलिस ने मंगलवार को फिल्मी अंदाज में मोबाइल छीनने के आरोप में फरार चल रहे दो बदमाशों को गिरफ्तार किया। पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से छीना गया मोबाइल व घटना में  उपयोग में ली गई मोटरसाइकिल को जब्त किया है। अभी उनसे पूछताछ की जा रही है।पुलिस ने थाना बूढ़ादीत के गांव निमोदा उजाड़ निवासी तथा वर्तमान में कोटा में न्यू राजीव गांधी नगर में रह रहे आरोपी हरगोविंद पुत्र जोधराज मीणा और पुलिस थाना इटावा गांव खेरदा निवासी कुलदीप मीणा पुत्र बंशीलाल मीण जो वर्तमान में कोटा में न्यू राजीव गांधी नगर में रह रहे को  गिरफ्तार किया। शहर पुलिस अधीक्षक डॉ. अमृता दुहन ने बताया कि 29 मार्च 2024 को रजत जायसवाल पुत्र श्याम सुन्दर तम्बोली निवासी पैना (उप्र) ने जो तलवंडी में रह रहे है जवाहर नगर थाने में  रिपोर्ट दी जिसमें बताया कि वह नजदीक ही एक पार्क के पास वीडियो कॉल पर घर बात कर रहा था तभी पीछे से बिना नम्बर प्लेट की बाईक आई जिसमें पीछे बैठे लड़के ने मोबाइल छीना और फरार हो गया। उसने लाल टी-शर्ट पहन रखी थी। मामले को धारा 379,356 भा.द.स में दर्ज किया गया। </p>
<p><strong> पुराने अनुभव के आधार पर पकड़े लुटेरे </strong><br />पुलिस निरीक्षक कमलेश कुमार ने बताया कि मामले में अनुसंधान के दौरान  मोबाइल छीनने की घटनाओं का पदार्फाश करने के लिए अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक दिलीप सैनी के निर्देशन में  टीम बनाई गई। टीम ने  मोबाइल बरामद करने के लिए घटना स्थल के आस पास के सीसीटीवी कैमरे खंगाले तथा मुखबिरी, आसूचना संकलन, चोरी व नकबजनी के पुराने चालानशुदा बदमाशों  से पूछताछ के आधार , तकनीकी सहायता एवं   अपने पुराने अनुभव के आधार पर आरोपी हरगोविन्द व  कुलदीप मीणा गिरफ्तार कर उनके पास से छीना गया मोेबाइल व घटना में प्रयुक्त मोटरसाईकिल जब्त  की । </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 02 Apr 2024 19:25:35 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>हमारे रिश्तों के दुश्मन बनते मोबाइल फोन</title>
                                    <description><![CDATA[पति-पत्नी के रिश्तों में मोबाइल प्यार नहीं बल्कि कलह पैदा करने लगा है। महिला आयोग के अनुसार पारिवारिक कलह के करीब 75 परसेंट केसेज का कारण मोबाइल रहा है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/opinion/mobile-phones-becoming-enemies-of-our-relationships/article-63751"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-12/111-(1)5.png" alt=""></a><br /><p>फोन लोगों को आपस में जोड़े रखते हैं और संबंध बनाए रखने में मदद करते हैं। लेकिन कुछ मामलों में वे अवरोध भी बन जाते हैं। किसी के सामने उसके फोन की तारीफ  करना और किसी को नीचा दिखाना आजकल की एक बड़ी समस्या बन गया है। सोचिए आज क्यों मोबाइल बन रहे रिश्तों में दरार की वजह? कोई माने या न माने, वास्तविकता में मोबाइल के हद से ज्यादा उपयोग से सामाजिक रिश्तों में हम सब की दिक्कतें बढ़ी हैं। पहले के दौर में जब मोबाइल नहीं था, तो लोगों का आपस में काफी मिलना-जुलना होता था। संवाद का सिलसिला चलता रहता था। लोग एक-दूसरे के दर्द और भावना को समझते थे। साथ ही समस्याओं के निपटारे के लिए प्रयास करते थे। अब मोबाइल के आगमन के बाद बातें तो काफी हो रही हैं, लेकिन दिलों के बीच की दूरियां काफी बढ़ गई हैं। लोगों के बीच उचित संवाद नहीं हो पा रहा है। व्यक्तिगत समस्याओं का जाल बढ़ रहा है और रिश्तों की बुनियाद कमजोर पड़ती जा रही है। आज के समय में एक ही घर में रह रहे लोग एक-दूसरे से बातचीत करने के लिए भी स्मार्टफोन का इस्तेमाल करने लग गए हैं।<br /><br />यही नहीं रोजाना एक साथ बैठकर होने वाली बातचीत और सोशल मीडिया ग्र्रुप्स पर होने लग गई है। ऐसे में इन आदतों का सीधा असर आपके रिश्तों पर पड़ रहा है। मोबाइल फोन के अनुचित उपयोग के कारण आपसी रिश्तों को नुकसान पहुंचाने वाली जो नई आदतें बन रही हैं, उनमें फबिंग भी शामिल है। स्मार्ट फोन पर चिपके रहने के कारण जब आप अपने करीबी रिश्ते को इग्नोर करते हैं, तो उसे फबिंग कहा जाता है। फबिंग एक ऐसा शब्द है जो स्मार्टफोन की लत से जुड़ा है। यह शब्द फोन और स्रबिंग से मिलकर बना है। स्रबिंग का मतलब होता है अनादर करना या फिर अनदेखी करना। स्मार्टफोन के इस्तेमाल से दूसरों की भावनाओं को समझना और भी मुश्किल हो जाता है। जब किसी का पूरा ध्यान स्मार्टफोन पर हो तो उसके चेहरे को पढ़ना मुश्किल है। इसका मतलब है कि इस प्रकार की स्थितियां आमने-सामने की बातचीत से कमजोर होती हैं। सार्थक बातचीत के बिना रिश्ते उतने विकसित नहीं होते। आज के दौर में मोबाइल से बढ़ता लगाव पारिवारिक रिश्तों में दरार पैदा कर रहा है।<br /><br />पति-पत्नी के रिश्तों में मोबाइल प्यार नहीं बल्कि कलह पैदा करने लगा है। महिला आयोग के अनुसार पारिवारिक कलह के करीब 75 परसेंट केसेज का कारण मोबाइल रहा है। मोबाइल के कारण पति-पत्नी के बीच गलतफहमी, मनमुटाव, लड़ाई-झगड़ा हुआ और मामला तलाक तक जा पहुंचता है। टेक्नोलॉजी हमारे जीवन का अहम हिस्सा है। लेकिन इसका लगातार इस्तेमाल ना सिर्फ  आपकी मेंटल हेल्थ को बिगाड़ रहा है, बल्कि आपके पार्टनर और रिश्तेदारों को भी आप से दूर कर रहा है। आज के युग डिजिटल युग में टेक्नोलॉजी हमारी रोजमर्रा की लाइफ  का एक अहम हिस्सा बन चुका है। यहां तक कि हम हमारे स्मार्टफोन से लेकर सोशल मीडिया और वीडियो कॉल तक अपने करीबियों से जुड़े रहने पर काफी भरोसा करने लगे हैं। एडवांस टेक्नोलॉजी ने हमारे करीबियों के साथ जुड़ना पहले से कहीं ज्यादा आसान बना दिया है। मोबाइल फोन के आने से जहां जिंदगी आसान हुई है वहीं कुछ मामलों में इसने नुकसान पहुंचाने का भी काम किया है।<br /><br />दरअसल पहले जहां यह एक जरूरत थी वहीं अब ये जरूरत के साथ लत बन चुकी है। ऐसी लत जिसके बिना लोगों का एक पल गुजारना भी मुश्किल हो गया है। ये लत अब रिलेशनशिप में भी दरार की वजह बन रही है। अक्सर देखा जाता है कि ज्यादातर लोग अपनी डिवाइस में इस कदर उलझे रहते हैं कि वो दूसरों के साथ बेहतरीन पलों को एंजॉय तक नहीं कर पाते। ऐसे में स्थिति कभी न कभी इतनी बिगड़ जाती है कि रिश्ते में एक दूसरे के बीच गलतफहमियां पनपने लगती हैं। वहीं लगातार टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल आपकी मेंटल हेल्थ को भी नुकसान पहुंचा सकता है। आज के समय में जब सोशल मीडिया और फोन ही सब कुछ है लोग एक मिनट भी उससे दूर नहीं रह सकते हैं। लोग किसी से मिलते समय भी फोन पर देखते रहते हैं या सोशल मीडिया पर स्क्रोल करते रहते हैं। उन्हें सामने वाले से ज्यादा जरूरी फोन पर बात करना लगता है। इस व्यवहार को अपमानजनक के रूप में देखा जा सकता है। इससे आप अपने पार्टनर से दूर हो सकते हैं और रिश्ता टूटने की कगार पर आ सकता है। इस बात को सुनश्चित करने के लिए कि आपका रिश्ता पहले की तरह बरकरार रहे, आपको अपने इलेक्ट्रानिक डिवाइसेस से जब भी जरूरत हो तब छोटे-छोटे ब्रेक यानी डिजिटल डिटॉक्स जरूर करने चाहिए। एक्सपर्ट्स के मुताबिक एक डिजिटल डिटॉक्स से आपके रिश्ते और सेहत दोनों सुधर सकते हैं।<br /><br />-प्रियंका सौरभ<br />(ये लेखक के अपने विचार हैं)</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>ओपिनियन</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 09 Dec 2023 14:35:47 +0530</pubDate>
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                <title>टीवी के बजाय मोबाइल फोन बना क्रिकेट प्रशंसकों की पहली पसंद</title>
                                    <description><![CDATA[मोबाइल फोन पर मैच देखने की दीवानगी का असर टीवर पर दिखाये जाने वाले विज्ञापनो पर भी पड़ा है। पिछले छह सप्ताह में स्पोर्टस चैनल में दिखाये जाने वाले विज्ञापन 40 फीसदी कम हुये है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/khel/mobile-phone-became-the-first-choice-of-cricket-fans-instead/article-45993"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-05/ipl-mob11.jpg" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। क्रिकेट का मजा लेने के लिये टेलीविजन स्क्रीन पर घंटो चिपके रहने अब गुजरे जमाने की बात बन चुका है। सर्वेक्षणों की माने तो टीवी की बजाय चलती फिरती स्क्रीन यानी मोबाइल फोन पर क्रिकेट का लुत्फ उठाने वालो की तादाद में खासा इजाफा हुआ है। सर्वे कंपनी डेटा एआई के अनुसार इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) के मौजूदा सत्र में 15 अप्रैल से पांच मई के दौरान 93 मिलियन दर्शकों ने टीवी पर मैच देखा जबकि जियो सिनेमा एप पर मैच देखने वालो की संख्या 97 मिलियन के आंकड़े को पार कर गयी है। इस सर्वेक्षण में हालांकि डिजिटल डेटा दो से 14 साल के बच्चों को शामिल नहीं किया गया है जबकि टीवी से संबंधित डेटा में सभी को शामिल किया गया है। यदि डिजिटल में दो वर्ष से अधिक आयु वालों को भी सम्मिलित कर लिया जाए तो यह संख्या टीवी के नंबर्स से कहीं अधिक हो सकती है।</p>
<p>मोबाइल फोन पर मैच देखने की दीवानगी का असर टीवर पर दिखाये जाने वाले विज्ञापनो पर भी पड़ा है। पिछले छह सप्ताह में स्पोर्टस चैनल में दिखाये जाने वाले विज्ञापन 40 फीसदी कम हुये है। पिछले आईपीएल सत्र में 98 विज्ञापनदाता थे, जबकि अभी चल रहे सीजन में टीवी के पास केवल 59 विज्ञापनदाता ही हैं। दूसरी तरफ, डिजिटल पर विज्ञापन देने वालों की संख्या 400 के आसपास की है। व्यूअरशिप की बात करे तो टेलीविजन इस आईपीएल सीजन में 4.46 की टीवीआर पर है, जो पिछले छह वर्षों में नीचे से दूसरे स्थान पर है। 2020 में यह टीवीआर 6.4 थी। मई में एक्सिस माय इंडिया कंज्यूमर सेंटीमेंट्स इंडेक्स के निष्कर्ष के अनुसार, युवा मोबाइल फोन (जियो सिनेमा) पर आईपीएल देखना पसंद करते हैं।</p>
<p>सर्वे में शामिल 18-25 वर्ष के 64 प्रतिशत प्रतिभागियों ने मोबाइल पर आईपीएल देखना पसंद किया। टीवी पर आईपीएल मैच की 23 प्रतिशत व्यूयरशिप 2-14 आयु वर्ग की है, जबकि 15-21 की आयु वाले केवल 15 प्रतिशत लोग ही टीवी पर मैच देखते हैं. 22-30 साल की उम्र के केवल 18 फीसदी लोग ही टीवी पर मैच देखते है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>खेल</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 19 May 2023 15:21:49 +0530</pubDate>
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                <title>टेंशन से बचना है तो  मस्त रहिए</title>
                                    <description><![CDATA[अपने जैसे लाखों के बारे में सोचिए और मस्त रहिए। आप सफल नहीं हुए तो इसमें सिर्फ आप वजह नहीं हैं, इसमें कम जगह और उन जगहों को चाहने वालों की बड़ी संख्या जिम्मेदार है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/health/if-you-want-to-avoid-tension-then-be-cool/article-17508"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-08/parivesh.jpg" alt=""></a><br /><p>आज की तारीख में टेंशन मोबाइल फोन के जैसा हो गया है। बहुत कम लोग बचे हैं, जो टेंशन से दूर हों। जिनके पास टेंशन है, वह उसी तरह उनके साथ सुबह बिस्तर से उठने से लेकर रात सोने तक रहता है, जैसे मोबाइल फोन रहता है। कई बार तो लगता है कि जैसे आज की लाइफस्टाइल और टेंशन एक दूसरे का पर्याय हो गये हैं। एक का दूसरे के बिना काम ही नहीं चलता। लेकिन इसको इतनी सहजता से न लें। भले टेंशन दिन रात हमारे साथ रहता हो, लेकिन टेंशन फिर भी हमारा अपना कतई नहीं है, उसे जब भी मौका मिलेगा, वह किसी न किसी रूप में हमें नुकसान ही पहुंचायेगा।</p>
<p><br /><strong>आइये जानते हैं कैसे ?</strong><br />अगर थकान महसूस हो रही हो, दिल तेजी से धड़क रहा हो, कमजोरी महसूस हो रही हो, तो साफ मतलब है कि हम टेंशन में हैं। अब जब हमें पता ही चल गया है तो सवाल है इससे कैसे निपटें ?</p>
<p><br />-एक गिलास रूम टैम्प्रेचर का पानी पीएं। रिलैक्स करें। समय हो और संभव हो तो एक से डेढ़ किलोमीटर तक अकेले में चुपचाप घूमने निकल जाएं। दिल धीरे धीरे फिट होने लगेगा। घर लौटकर आएं अगर घर वालों से बातें करने का मन है तो करें वरना आधा पौना घंटे लेट जाएं। अगर इस बीच एक हल्की सी गहरी झपकी आ जाए तो सोने में सुहागा,सारा टेंशन दूर हो जाएगा। लेकिन अगर झपकी नहीं भी आती तो भी काफी आराम महसूस करेंगे।</p>
<p><br />आपको जिस रिजल्ट का बेसब्री से इंतजार था, वह आ गया है। लेकिन हाय री किस्मत आपका नाम सफल उम्मीदवारों में नहीं है। हमें पता है टेंशन इसी की फिराक में है। जैसे ही आप हकीकत से दोचार होंगे कि टेंशन आपके सिर पर चढ़कर बैठ जायेगा। लेकिन इससे झगडे न, इससे भयभीत होने की जरूरत नहीं है। बस कुछ बातें को सोचने भर की जरूरत है। माना कि आपका सलेक्शन नहीं हुआ, लेकिन जगह सिर्फ 254 हैं और उम्मीदार थे 3 लाख 42 हजार। जाहिर है आप अकेले ऐसे नहीं हैं जो रिजल्ट से नाउम्मीद हुए हैं। इसलिए अपने जैसे लाखों के बारे में सोचिए और मस्त रहिए। आप सफल नहीं हुए तो इसमें सिर्फ आप वजह नहीं हैं, इसमें कम जगह और उन जगहों को चाहने वालों की बड़ी संख्या जिम्मेदार है।घर का एक सदस्य बहुत गंभीर रूप से बीमार है। आप खुद से हेल्पलेस महसूस कर रहे हैं, क्योंकि कुछ कर नहीं पा रहे हैं।</p>
<p><br />- यह बहुत आम बात है घर के किसी महत्वपूर्ण सदस्य की बीमारी ही नहीं अगर वह अचानक कहीं चला गया है तो भी कई बार उन घरों में यह काफी चिंता बढ़ाने वाला हो जाता है, खास करके जब बीमार व्यक्ति की बहुत सारी जिम्मेदारियां जीवित रहने वाले लोगों की तरफ बढ़ी चली आ रही हों, तो इस तनाव से बचने का एक ही तरीका है मान लें कि आप बचे हुए भाई नहीं हैं यानी आप भी परेशान हैं तो क्या इस परेशानी से आपकी समस्या का हल निकल आयेगा। शायद नहीं। इसलिए बेफिक्र रहें, क्योंकि चाहकर भी कुछ कर नहीं सकते।<br /><br /></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वास्थ्य</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 03 Aug 2022 14:55:44 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur]]></dc:creator>
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                <title>बजट सत्र में राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद का संबोधन: कोरोना काल में स्वास्थ्य सेवाओं को सराहा, तो नई तकनीक अपनाने पर जताई खुशी,  देश में मोबाइल फोन उत्पादन की सफलता को मेक इन इंडिया का बताया बड़ा उदाहरण </title>
                                    <description><![CDATA[कृषि के बढ़ते उत्पादन और निर्यात में वृद्धि के साथ-साथ रक्षा क्षेत्र में आत्म निर्भरता निरंतर बढ रही ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/%E0%A4%AC%E0%A4%9C%E0%A4%9F-%E0%A4%B8%E0%A4%A4%E0%A5%8D%E0%A4%B0-%E0%A4%AE%E0%A5%87%E0%A4%82-%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%B7%E0%A5%8D%E0%A4%9F%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A4%AA%E0%A4%A4%E0%A4%BF-%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%AE%E0%A4%A8%E0%A4%BE%E0%A4%A5-%E0%A4%95%E0%A5%8B%E0%A4%B5%E0%A4%BF%E0%A4%82%E0%A4%A6-%E0%A4%95%E0%A4%BE-%E0%A4%B8%E0%A4%82%E0%A4%AC%E0%A5%8B%E0%A4%A7%E0%A4%A8--%E0%A4%95%E0%A5%8B%E0%A4%B0%E0%A5%8B%E0%A4%A8%E0%A4%BE-%E0%A4%95%E0%A4%BE%E0%A4%B2-%E0%A4%AE%E0%A5%87%E0%A4%82-%E0%A4%B8%E0%A5%8D%E0%A4%B5%E0%A4%BE%E0%A4%B8%E0%A5%8D%E0%A4%A5%E0%A5%8D%E0%A4%AF-%E0%A4%B8%E0%A5%87%E0%A4%B5%E0%A4%BE%E0%A4%93%E0%A4%82-%E0%A4%95%E0%A5%8B-%E0%A4%B8%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%B9%E0%A4%BE--%E0%A4%A4%E0%A5%8B-%E0%A4%A8%E0%A4%88-%E0%A4%A4%E0%A4%95%E0%A4%A8%E0%A5%80%E0%A4%95-%E0%A4%85%E0%A4%AA%E0%A4%A8%E0%A4%BE%E0%A4%A8%E0%A5%87-%E0%A4%AA%E0%A4%B0-%E0%A4%9C%E0%A4%A4%E0%A4%BE%E0%A4%88-%E0%A4%96%E0%A5%81%E0%A4%B6%E0%A5%80---%E0%A4%A6%E0%A5%87%E0%A4%B6-%E0%A4%AE%E0%A5%87%E0%A4%82-%E0%A4%AE%E0%A5%8B%E0%A4%AC%E0%A4%BE%E0%A4%87%E0%A4%B2-%E0%A4%AB%E0%A5%8B%E0%A4%A8-%E0%A4%89%E0%A4%A4%E0%A5%8D%E0%A4%AA%E0%A4%BE%E0%A4%A6%E0%A4%A8-%E0%A4%95%E0%A5%80-%E0%A4%B8%E0%A4%AB%E0%A4%B2%E0%A4%A4%E0%A4%BE-%E0%A4%95%E0%A5%8B-%E0%A4%AE%E0%A5%87%E0%A4%95-%E0%A4%87%E0%A4%A8-%E0%A4%87%E0%A4%82%E0%A4%A1%E0%A4%BF%E0%A4%AF%E0%A4%BE-%E0%A4%95%E0%A4%BE-%E0%A4%AC%E0%A4%A4%E0%A4%BE%E0%A4%AF%E0%A4%BE-%E0%A4%AC%E0%A4%A1%E0%A4%BC%E0%A4%BE-%E0%A4%89%E0%A4%A6%E0%A4%BE%E0%A4%B9%E0%A4%B0%E0%A4%A3/article-4238"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-01/kovind.jpg" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। 1फरवरी को देश का बजट आएगा। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण बजट पेश करेंगी। सोमवार को संसद में बजट सत्र आयोजित हुआ। बजट सत्र में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी शामिल हुए। बजट सत्र में संसद के संयुक्त अधिवेशन को राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने संबोधित किया। बजट सत्र को  संबोधित करते हुए राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने कहा है कि कोरोना संकट के दौरान भारत की क्षमता दिखायी दी है और देश से 180 देशों को संबंधित दवाइयों की आपूर्ति की जा रही है। सरकार देश में स्वास्थ्य सेवाओं का बुनियादी ढांचा मजबूत कर रही है। देश के फार्मा क्षेत्र ने अपनी असाधारण क्षमता प्रदर्शित की है। भारत में बन रहे कोविड टीके पूरी दुनिया को महामारी से मुक्त कराने और करोड़ों लोगों का जीवन बचाने में अहम भूमिका निभा रहे हैं। भारत से लगभग 180 देशों को दवाओं की आपूर्ति की जा रही है। उन्होंने कहा कि आयुष्मान भारत जैसी योजनाओं से स्वास्थ्य सेवाओं के ढांचे को मजबूत किया जा रहा है और इसका विस्तार हो रहा है। <strong><br /></strong></p>
<p><strong>बदलावों, नयी तकनीकों को तेजी से अपना रहे हैं देशवासी</strong><br />राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने देश में डिजिटल लेनदेन में हो रही बढोतरी का हवाला देते हुए कहा कि देशवासी बदलाव और तकनीक को तेजी से अपना रहे हैं।  उन्होंने कहा कि जनधन, आधार मोबाइल (जैम) ट्रिनिटी को सरकार ने नागरिक सशक्तिकरण से जोड़ा है। उसका प्रभाव भी लगातार दिख रहा है। देश में 44 करोड़ से अधिक गरीब देशवासियों के बैंकिंग सिस्टम से जुडऩे के कारण महामारी के दौरान करोड़ों लाभार्थियों को सीधे नकद हस्तातंरण का लाभ मिला है। <br /><br />उन्होंने डिजिटल इंडिया और डिजिटल अर्थव्यवस्था के बढ़ते प्रसार के संदर्भ में देश के यूनिफाइड पेमेंट इंटरफेस(यूपीआई) की सफलता के लिए सरकार के दृष्टिकोण की प्रशंसा करते हुए कहा कि देश में आठ लाख करोड़ रुपये से ज्यादा का लेनदेन यूपीआई के माध्यम से हुआ है। राष्ट्रपति ने कहा कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को गति देने में महिलाओं की भूमिका अधिक बढ़ती जा रही है। 2021-22 में 28 लाख स्व सहायता समूहों को बैंकों से 65हजार करोड़ रुपये की मदद दी गयी है। यह राशि वर्श 2014-15 की तुलना में चार गुना अधिक है। <br /><br />उन्होंने देश के स्टार्टअप ईको सिस्टम का उल्लेख करते हुए कहा कि युवाओं के नेतृत्व में 2016 से देश में 56 अलग अलग क्षेत्रों में 60 हजार से अधिक नये स्टार्टअप बने हैं। इन स्टार्टअप के जरिये छह लाख से अधिक रोजगार का सृजन हुआ है। वर्ष 2021 में कोरोना काल में भारत में 40 से अधिक यूनिकॉर्न स्टार्टअप अस्तित्व में आये जिनमें से प्रत्येक का मूल्य 7400 करोड़ रुपये से अधिक आंका गया है। राष्ट्रपति ने कहा कि सरकार के निरंतर प्रयासों से भारत एक बार फिर विश्व की सबसे तेजी से विकसित हो रही अर्थव्यवस्थाओं में से एक बन गया है। उन्होंने वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) संग्रह का उल्लेख करते हुये कहा कि पिछले कई महीनों से जीएसटी राजस्व संग्रह एक लाख करोड़ रुपये से अधिक बना हुआ है। <br /><br />  इस वित्त वर्ष में पहले सात महीनेों में 48 अरब डॉलर का विदेशी निवेश आना इस बात का प्रमाण है कि अंतरराष्ट्रीय निवेशक भारत के विकास को लेकर बहुत आश्वास्त है। उन्होंने कहा कि इस समय देश का विदेशी मुद्रा भंडार 630 अरब डॉलर के ऊपर है। उन्होंने कहा कि सरकार की नीतियों की वजह से आज भारत उन देशों में है जहां इंटरनेट की कीमत सबसे कम है तथा स्मार्टफोन की कीमत भी सबसे कम है। इसका बहुत बड़ा लाभ भारत की नौजवान पीढ़ी को मिल रहा है। उन्होंने कहा कि भारत विश्व में दूसरा सबसे बड़ा मोबाइल फोन निर्माता बनकर उभरा है।  देश में मोबाइल फोन उत्पादन की सफलता , मेक इन इंडिया का एक बड़ा उदाहरण है। आज भारत विश्व में दूसरा सबसे बड़ा मोबाइल फोन निर्माता बनकर उभरा है। इससे देश के लाखों युवाओं को रोजगार भी मिला हुआ है। <br /><br /><strong>कृषि उत्पादन और निर्यात में रिकार्ड वृद्धि</strong><br /><br />अपने संबोधन के दौरान किसान और कृषि का जिक्र भी राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद ने किय। उन्होंने कहा कि कोरोना संकट केे बावजूद किसानों के अथक प्रयास से देश में खाद्यान्न और बागवानी फसलों का रिकार्ड उत्पादन और निर्यात हुआ है।  वर्ष 2020..21 के दौरान 30 करोड टन खाद्यान्नों और 33 करोड़ टन बागवानी फसलों का उत्पादन हुआ । उन्होंने कहा कि फसलों के रिकार्ड उत्पादन के साथ ही रिकार्ड मात्रा में न्यूनतम समर्थन मूल्य पर इसकी खरीद भी की गई है जिससे किसानों को आर्थिक लाभ हुआ है । </p>
<p>राष्ट्रपति ने कहा कि रबी फसलों के दौरान 433 लाख टन गेंहू की न्यूनतम समर्थन मूल्य पर खरीद की गई जिससे 50 लाख किसानों को फायदा हुआ । इसी तरह से खरीफ सीजन के दौरान 900 लाख टन धान की खरीद की गई जिससे एक करोड़ 30 लाख किसानों को आर्थिक लाभ हुआ । <br /><br />उन्होंने कहा कि वर्ष 2020 ( 21 के दौरान कृषि निर्यात में 25 प्रतिशत की वृद्धि हुयी और यह तीन लाख करोड़ रुपये पहुंच गया है । बागवानी और शहद उत्पादन से भी किसानों को आय के नये स्रोत खुले हैं। शहद का उत्पादन एक लाख 25 हजार टन पहुंच गया है । वर्ष 2014..15 की तुलना में इसमें 55 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। वर्ष 2014..15 की तुलना में शहद का निर्यात 102 प्रतिशत बढ गया है । <br /><br />उन्होंने कहा कि किसानों को सही बाजार मिले और उनमे खुशहाली आये इसके लिए किसान रेल सेवा शुरु की गयी । इससे सब्जी , फल , दूध और जल्दी खराब होने वाली वस्तुओं को बाजारों तक पहुंचाया गया । कुल 150 मार्गो पर 1900 किसान रेल चलायी गयी जिससे छह लाख टन माल की ढुलायी हुई। उन्होंने कहा कि पुराने संसाधनों से विकास के नये रास्ते तलाशे गये । छोटे किसानों के प्रयास से कृषि क्षेत्र में सतत सफलता मिल रही है । देश में छोटे किसान करीब 80 प्रतिशत हैं । <br /><br />राष्ट्रपति ने कहा कि प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि से 11 करोड़ से अधिक किसानों को एक लाख 80 हजार करोड़ रुपये की आर्थिक सहायता की गयी है । फसल बीमा योजना में बदलाव का लाभ भी छोटे किसानों को मिला है । करीब आठ लाख किसानों को फसलों की क्षति के लिए एक लाख करोड रुपये का मुआवजा दिया गया है । उन्होंने कहा कि एक लाख करोड़ रुपये के कृषि आधारभूत संरचना कोष से अनेक कार्यक्रम शुरु किये गये हैं ।</p>
<p><strong>देश रक्षा क्षेत्र में आत्म निर्भरता की ओर बढ रहा  तेजी से</strong><br />राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने अपना संबोधन जारी रखते हुए कहा कि सरकार देश की सुरक्षा के लिए दृढ संकल्प के साथ काम कर रही है जिससे रक्षा क्षेत्र में आत्म निर्भरता निरंतर बढ रही है। उन्होंने कहा कि मेरी सरकार देश की सुरक्षा के लिए दृढ़ संकल्पित होकर काम कर रही है। सरकार की नीतियों की वजह से डिफेंस सेक्टर में, विशेषकर रक्षा उत्पादन में, देश की आत्म-निर्भरता लगातार बढ़ रही है।<br /><br />सैन्य बलों के आधुनिकीकरण की दिशा में किये जा रहे कार्यों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि वर्ष 2020-21 में सैन्य बलों के आधुनिकीकरण के लिए जो भी स्वीकृतियों प्रदान की गयी उनमें 87 फीसदी उत्पादों में मेक इन इंडयिा को प्राथमिकता दी गयी। सरकार की महत्वाकांक्षी योजना मेक इन इंडिया का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि 2020-21 में 98 प्रतिशत उपकरणों से जुड़े अनुबंधों में मेक इन इंडिया को प्राथमिकता दी गयी है।   सशस्त्र बलों की जरूरतों को देश में ही पूरा करने के सरकार के प्रयासों तथा सफलता के बारे में उन्होंने कहा कि  हमारी सेनाओं ने 209 ऐसे साजो सामान की सूची भी जारी की है जिन्हें अब विदेश से नही खरीदा जायेगा। <br /><br />उन्होंने कहा कि सरकार का लक्ष्य है कि सेनाओं की जरूरत का सामान भारत में ही विकसित हो तथा भारत में ही निर्मित हो। इसे ध्यान में रखते हुए हिन्दुस्तान ऐरोनाटिक्स लिमिटेड ( एचएएल) के साथ 83 एलसीए तेजस लड़ाकू विमान बनाने के लिए अनुबंध किये गये हैं। सरकार ने आर्डिनेन्स फैक्ट्रियों को रक्षा क्षेत्र के सात सार्वजनिक उपक्रमों का रूप देने के लिए महत्वपूर्ण कदम उठाये हैं। इसके अलावा रक्षा क्षेत्र में निजी सेक्टर और स्टार्ट अप को तेजी से बढावा देने के लिए भी सरकार प्रतिबद्ध है। <br /><br /><br /></p>
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<p> </p>
<p><br /><br /></p>]]></content:encoded>
                
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