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                <title>make in india - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <title>राजस्थान एयरोस्पेस एण्ड डिफेंस पॉलिसी-2026 : प्रदेश में बनेंगे विमान, रडार, ड्रोन, हेलीकॉप्टर और मिसाइलें, निवेशकों को मिलेगी सात वर्षों तक विद्युत शुल्क में 100% छूट</title>
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                        <![CDATA[राजस्थान अब मिसाइल, ड्रोन और लड़ाकू विमानों का निर्माण केंद्र बनेगा। नई एयरोस्पेस और डिफेंस पॉलिसी-2026 के तहत निवेशकों को ₹1000 करोड़ तक के निवेश पर अल्ट्रा-मेगा प्रोत्साहन मिलेगा। 7 वर्षों तक बिजली शुल्क में 100% छूट और स्टाम्प ड्यूटी में राहत के साथ प्रदेश मेक इन इंडिया को नई ऊँचाई देगा।]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/rajasthan-aerospace-and-defense-policy-2026-aircraft-radar-drones-helicopters-and/article-147388"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/helicopter.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। राज्य में विमान, हेलीकॉप्टर, ड्रोन, मिसाइल, एवियोनिक्स, सैटेलाइट बसें, बख्तरबंद वाहन, रडार, नेविगेशन, संचार और नियंत्रण प्रणालियां, रोबोटिक्स और डिफेंस इलेक्ट्रॉनिक्स का निर्माण होगा। इससे मेक इन इंडिया को मजबूती मिलेगी। इसके लिए हाल ही राज्य सरकार ने राजस्थान एयरोस्पेस और डिफेंस पॉलिसी-2026 जारी की है।  निवेशको को आकर्षित करने के लिए नीति में वित्तीय एवं गैर-वित्तीय प्रोत्साहन और प्लग-एंड-प्ले इंफ्रास्ट्रक्चर, कौशल विकास सहयोग तथा त्वरित सेवाओं के प्रावधान भी किए गए हैं।</p>
<p><strong>वैश्विक प्रतिस्पर्धी इकोसिस्टम तैयार करना</strong></p>
<p>राजस्थान एयरोस्पेस और डिफेंस पॉलिसी-2026 का प्रमुख उद्देश्य एयरोस्पेस और डिफेंस वैल्यू चेन में मैन्युफैक्चरिंग, रिसर्च, टेस्टिंग और सर्विसेज को प्रोत्साहन देते हुए वैश्विक प्रतिस्पर्धी इकोसिस्टम तैयार करना है। यह नीति ओरिजिनल इक्विपमेंट मैन्युफैक्चर्स (ओइएम), सिस्टम इंटीग्रेटर्स, एमएसएमई, स्टार्टअप्स और स्किलिंग इंस्टीट्यूशन्स को एयरोस्पेस एवं डिफेंस वैल्यू चेन में प्रोत्साहित करती है।</p>
<p><strong>मैन्युफैक्चरिंग का हब बनेगा</strong></p>
<p>प्रभावी औद्योगिक नीतियां और तेज आर्थिक विकास, दिल्ली मुंबई इंडस्ट्रियल कॉरिडोर से कनेक्टिविटी, राष्टÑीय राजमार्गों का विशाल नेटवर्क, पर्याप्त भूमि की उपलब्धता के साथ-साथ विभिन्न धातुओं की सुलभता प्रदेश को एयरोस्पेस और डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग का हब स्थापित करने में कारगर साबित होगी। स्टील, तांबे और पीतल की यूनिट्स का मेटल मशीनिंग सेक्टरगोला-बारूद और डिफेंस के पुर्जे बनाने में अहम भूमिका निभाएगा।</p>
<p><strong>लार्ज, मेगा और अल्ट्रा मेगा श्रेणियों में स्थापित होगी परियोजना</strong></p>
<p>इस नीति के अन्तर्गत विनिर्माण परियोजनाओं को न्यूनतम 50 करोड़ से 300 करोड़ तक अचल पूंजी निवेश करने पर लार्ज, 300 करोड़ से एक हजार करोड़ के निवेश पर मेगा और एक हजार करोड़ से अधिक के निवेश पर अल्ट्रा मेगा परियोजना की श्रेणी में रखा गया है।  सेवा सेक्टर के लिए 25 करोड़ से 100 करोड़ तक अचल पूंजी निवेश वाली परियोजनाएं लार्ज, 100 करोड़ से 250 करोड़ तक मेगा और 250 करोड़ से अधिक के निवेश वाली परियोजनाएं अल्ट्रा मेगा की श्रेणी में रखी गई हैं।</p>
<p><strong>उद्योगों को ये मिलेगी छूट</strong></p>
<p>उद्योगों को दीर्घकालिक राहत देने के लिए 7 वर्षों तक विद्युत शुल्क से 100 प्रतिशत छूट, 7 वर्षों तक मंडी शुल्क अथवा बाजार शुल्क का 100 प्रतिशत पुनर्भरण, स्टाम्प शुल्क और रूपांतरण शुल्क के भुगतान में 75 प्रतिशत छूट तथा 25 प्रतिशत पुनर्भरण के प्रावधान किए गए हैं। ग्रीन इन्सेंटिव, स्किल एवं ट्रेनिंग इन्सेंटिव तथा इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी क्रिएशन इन्सेंटिव जैसे प्रावधान नीति को और अधिक आकर्षक बनाते हैं।</p>]]>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 22 Mar 2026 09:29:40 +0530</pubDate>
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                        <![CDATA[Jaipur NM]]>
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                <title>उत्तर प्रदेश बना ‘मेट्रो प्रदेश’: लखनऊ-कानपुर-आगरा में तेज़ विकास, विश्वस्तरीय और हरित परिवहन की ओर बड़ा कदम</title>
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                        <![CDATA[उत्तर प्रदेश 'मेट्रो प्रदेश' बनकर उभर रहा है। UPMRC के नेतृत्व में लखनऊ, कानपुर और आगरा में रिकॉर्ड समय में मेट्रो सेवाएं संचालित हैं। यह परियोजना न केवल शून्य कार्बन उत्सर्जन और सौर ऊर्जा से पर्यावरण की रक्षा कर रही है, बल्कि आधुनिक स्टेशनों के साथ अब फिल्म शूटिंग का भी पसंदीदा डेस्टिनेशन बन गई है।]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/uttar-pradesh-becomes-metro-state-rapid-development-in-lucknow-kanpur-agra-a/article-147128"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/uttar-pradesh-metro.png" alt=""></a><br /><p>लखनऊ। उत्तर प्रदेश देश में सबसे अधिक मेट्रो परियोजनाओं वाले राज्य के रूप में तेजी से उभर रहा है और अब ‘मेट्रो प्रदेश’ बनने की दिशा में मजबूती से आगे बढ़ रहा है। उत्तर प्रदेश मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन लि. भारत सरकार और राज्य सरकार की संयुक्त भागीदारी वाला उपक्रम है, जो लखनऊ, कानपुर और आगरा में मेट्रो परियोजनाओं का सफल संचालन और निर्माण कर रहा है।</p>
<p><strong>लखनऊ मेट्रो: रिकॉर्ड और विश्वसनीयता की मिसाल</strong></p>
<p>लखनऊ मेट्रो ने बेहद कम समय में अपनी पहचान बनाई। 5 सितंबर 2017 को शुरू हुई सेवाएं आज 14.5 करोड़ से अधिक यात्रियों को सुविधा दे चुकी हैं। 23 किमी लंबे कॉरिडोर में एलिवेटेड और अंडरग्राउंड स्टेशन शामिल हैं। अब प्रस्तावित ईस्ट-वेस्ट कॉरिडोर (चारबाग से वसंतकुंज) 11.165 किमी लंबा होगा, जिसमें 12 स्टेशन बनेंगे और यह पुराने शहर को बेहतर कनेक्टिविटी देगा।</p>
<p><strong>कानपुर मेट्रो: देश की सबसे तेज़ परियोजनाओं में शामिल</strong></p>
<p>कानपुर मेट्रो ने निर्माण की गति में नया रिकॉर्ड बनाया है। 30 मई 2025 को नरेंद्र मोदी द्वारा मोतीझील से कानपुर सेंट्रल तक विस्तार का उद्घाटन किया गया। अब IIT से कानपुर सेंट्रल तक 14 स्टेशन चालू हैं। कुल 32.4 किमी की परियोजना में दो कॉरिडोर विकसित किए जा रहे हैं, जिनमें ‘मेक इन इंडिया’ के तहत ट्रेन निर्माण और IGBC प्लेटिनम ग्रीन रेटिंग जैसी उपलब्धियां शामिल हैं।</p>
<p><strong>आगरा मेट्रो: विरासत शहर में आधुनिक सफर</strong></p>
<p>आगरा मेट्रो ने भी रिकॉर्ड कायम किए हैं। 6 मार्च 2024 को ताज ईस्ट गेट से मनकामेश्वर तक सेवा शुरू हुई। मात्र 23 महीनों में अंडरग्राउंड सेक्शन तैयार करना बड़ी उपलब्धि है। 29.4 किमी लंबी इस परियोजना में दो कॉरिडोर शामिल हैं, जो शहर की कनेक्टिविटी को नया आयाम देंगे।</p>
<p><strong>तकनीक, प्रशिक्षण और उत्कृष्टता में आगे</strong></p>
<p>यूपीएमआरसी ने 2016 में ‘सेंटर ऑफ एक्सीलेंस फॉर ट्रेनिंग’ की स्थापना की, जहां आधुनिक तकनीकों के साथ कर्मचारियों को प्रशिक्षित किया जाता है। जर्मनी की डॉयचे बाहन जैसी अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं को भी यहां प्रशिक्षण दिया गया है।</p>
<p><strong>पर्यावरण संरक्षण में अग्रणी</strong></p>
<p>यूपी मेट्रो परियोजनाएं शून्य कार्बन उत्सर्जन, रीजेनरेटिव ब्रेकिंग और 100% एलईडी लाइटिंग जैसी तकनीकों से लैस हैं। लखनऊ में 3.3 मेगावाट सोलर प्लांट, कानपुर में 1 मेगावाट प्लांट और वर्षा जल संरक्षण जैसी पहलें इसे हरित परिवहन का उदाहरण बनाती हैं। पेड़ों के प्रत्यारोपण और हरित पट्टियों के विकास पर भी विशेष ध्यान दिया गया है।</p>
<p><strong>सुविधाएं और सामाजिक पहल भी खास</strong></p>
<p>मेट्रो स्टेशनों पर लॉकर, ईटिंग जोन, लाइब्रेरी, प्री-वेडिंग शूट, ‘सेलिब्रेशन ऑन व्हील्स’ जैसी सुविधाएं यात्रियों को नया अनुभव दे रही हैं। साथ ही ‘शो योर टैलेंट’ और ‘ग्रो योर बिज़नेस’ जैसे कार्यक्रमों से कलाकारों और उद्यमियों को मंच मिल रहा है।</p>
<p><strong>फिल्म शूटिंग का नया डेस्टिनेशन</strong></p>
<p>अब यूपी मेट्रो केवल यात्रा का साधन नहीं, बल्कि फिल्म और मनोरंजन जगत का भी पसंदीदा स्थान बनता जा रहा है। खासकर लखनऊ मेट्रो के आधुनिक स्टेशन, साफ-सुथरा वातावरण और आकर्षक इंटीरियर फिल्म निर्माताओं को खूब लुभा रहे हैं। यहां कई फिल्मों और प्रोजेक्ट्स की शूटिंग हो चुकी है, जिनमें “एक चतुर नार”, “पगलैट” और “निकम्मा” जैसी फिल्में शामिल हैं। कलाकार भी अपने प्रमोशन के लिए मेट्रो का उपयोग कर रहे हैं, जिससे यह स्थान ग्लैमर का नया केंद्र बन गया है।</p>
<p><strong>पुरस्कारों से मिली पहचान</strong></p>
<p>राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर यूपी मेट्रो को कई पुरस्कार मिल चुके हैं, जिनमें ऊर्जा संरक्षण, उत्कृष्ट सेवा और सुरक्षा के लिए सम्मान शामिल हैं।</p>]]>
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                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 20 Mar 2026 09:35:48 +0530</pubDate>
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                        <![CDATA[Jaipur NM]]>
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                            </item>
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                <title>पीयूष गोयल का संसद को आश्वासन, कहा भारत ने अमेरिका के साथ व्यापार समझौता में खाद्य, कृषि क्षेत्र की संवेदनशीलता का रखा ध्यान </title>
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                        <![CDATA[सरकार ने संसद को आश्वस्त किया कि भारत–अमेरिका व्यापार समझौते में कृषि और दुग्ध जैसे संवेदनशील क्षेत्रों के हित सुरक्षित रखे गए हैं, जिससे निर्यात और रोजगार को बढ़ावा मिलेगा।]]>
                    </description>
                
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/piyush-goyals-assurance-to-the-parliament-said-that-india-took/article-141934"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-02/11-(700-x-400-px)-(630-x-400-px)-(9)3.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। भारत और अमेरिका के बीच व्यापार समझौते की जानकारी संसद के बाहर दिये जाने पर विपक्ष के कड़े विरोध के बाद बुधवार को सरकार ने संसद को आश्वस्त किया कि इस समझौते में देश के खाद्य एवं कृषि क्षेत्र की प्रमुख संवेदनशीलताओं का पूरा ध्यान रखा है।     वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने संसद के दोनों सदनों में दिये गये वक्तव्यों में कहा कि भारत समझौते में अपने संवेदनशील क्षेत्रों, विशेषकर कृषि और दुग्ध क्षेत्रों के हितों की रक्षा सुनिश्चित करने में सफल रहा है। उन्होंने कहा कि इसी तरह अमेरिका के भी कुछ ऐसे क्षेत्र हैं जो उनके दृष्टिकोण से संवेदनशील हैं। उन्होंने कहा कि यह समझौता लघु एवं मध्यम उद्यमों, उद्यमियों, कुशल श्रमिकों और उद्योग के लिए नये अवसर खोलेगा, उन्नत प्रौद्योगिकियों तक पहुंच को सुगम बनाएगा और भारत के मेक इन इंडिया फॉर द विश्व, डिजाइन इन इंडिया फॉर द वल्र्ड और इन्नोवेट इन इंडिया फॉर द वल्र्ड के दृष्टिकोण को साकार करने में सहायक होगा।</p>
<p>उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की पिछले वर्ष फरवरी की अमेरिका यात्रा के बाद से भारत और अमेरिका संतुलित और पारस्परिक रूप से लाभकारी द्विपक्षीय व्यापार समझौते को संपन्न करने के उद्देश्य से नियमित रूप से चर्चा करते रहे हैं। इसी को ध्यान में रखते हुए, दोनों पक्षों के कारों ने पिछले एक वर्ष में विभिन्न स्तरों पर गहन बातचीत की है। दोनों पक्षों के महत्वपूर्ण और विविध हितों को देखते हुए यह स्वाभाविक है कि दोनों पक्ष अपनी-अपनी अर्थव्यवस्थाओं के महत्वपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्रों की रक्षा करते हुए सर्वोत्तम संभव परिणाम सुनिश्चित करना चाहेंगे।</p>
<p>पीयूष गोयल ने कहा कि इन के दौरान लगभग एक वर्ष तक चले कई दौर के विचार-विमर्श के बाद, दोनों कार दल द्विपक्षीय व्यापार समझौते के कई क्षेत्रों को अंतिम रूप देने में सफल रहे हैं। पीएम मोदी और अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दो फरवरी को द्विपक्षीय और अंतरराष्ट्रीय महत्व के कई मुद्दों पर फोन पर चर्चा की। इसके बाद राष्ट्रपति ट्रम्प ने अमेरिका को किए जाने वाले भारतीय निर्यात पर टैरिफ की दर घटाकर 18 प्रतिशत करने की घोषणा की।</p>
<p>वाणिज्य मंत्री ने कहा, मैं इस बात पर जोर देना चाहता हूं कि यह अमेरिका द्वारा कई प्रतिस्पर्धी देशों पर लगाये गये आयात कर से कम है, जिससे अमेरिकी बाजार में भारत की निर्यात प्रतिस्पर्धात्मकता में वृद्धि होगी। यह समझौता भारतीय निर्यातकों को, विशेष रूप से श्रम-प्रधान क्षेत्रों और विनिर्माण में, महत्वपूर्ण तुलनात्मक लाभ भी प्रदान करता है। </p>
<p>उन्होंने कहा कि यह ऐतिहासिक ढांचागत समझौता भारत-अमेरिका संबंधों को मजबूत करने और विकसित भारत 2047 की दिशा में हमारी यात्रा को आगे बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है तथा यह दुनिया के दो सबसे बड़े लोकतांत्रिक देशों के बीच मजबूत जुड़ाव को भी दर्शाता है, जो स्वाभाविक साझेदार हैं और साझा समृद्धि के लिए मिलकर काम कर रहे हैं।</p>
<p>वाणिज्य मंत्री ने कहा कि दोनों पक्ष व्यापार समझौते से संबंधित आवश्यक तकनीकी प्रक्रियाओं को पूरा करने और कागजी कार्यवाही को अंतिम रूप देने के लिए मिलकर काम करेंगे, ताकि इसकी पूरी क्षमता का शीघ्रता से लाभ उठाया जा सके। समझौते की विस्तृत रूपरेखा इन प्रक्रियाओं के समापन के पश्चात तुरंत घोषित की जायेगी।</p>
<p>पीयूष गोयल ने कहा, सदस्यों को भारत के ऊर्जा स्रोतों से संबंधित उन मुद्दों की जानकारी होगी, जो इस समझौते पर हुई चर्चाओं के दौरान उठाये गये हैं। मैं स्पष्ट करना चाहता हूं, जैसा कि सरकार ने कई बार सार्वजनिक रूप से कहा है, कि 140 करोड़ भारतीयों की ऊर्जा आवश्यकताओं की सुरक्षा सुनिश्चित करना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। वस्तुनिष्ठ बाजार स्थितियों और बदलते अंतरराष्ट्रीय परिदृश्यों के अनुरूप ऊर्जा स्रोतों में विविधता लाना हमारी कार्यनीति का मूल आधार है। भारत की सभी कार्रवाइयां इसी बात को ध्यान में रखकर की जाती हैं। अत: मैं माननीय सदस्यों से इन मुद्दों को समुचित दृष्टिकोण से देखने का आग्रह करता हूं।</p>
<p>उन्होंने कहा, दोनों देशों के बीच भावी व्यापार अवसरों के संदर्भ में सदस्य इस बात को समझेंगे कि भारत और अमेरिका काफी हद तक एक-दूसरे की पूरक अर्थव्यवस्थाएं हैं। जैसे-जैसे भारत विकसित भारत के पथ पर अग्रसर हो रहा है, हमें ऊर्जा, उड्डयन, डेटा केंद्र, परमाणु ऊर्जा आदि सहित कई क्षेत्रों में अपनी क्षमताओं को बढ़ाने की आवश्यकता होगी। अमेरिका इन क्षेत्रों में दुनिया का अग्रणी देश है, इसलिए हमारे लिए इन क्षेत्रों में व्यापार की संभावनाओं पर ध्यान केंद्रित करना स्वाभाविक है, जिससे न केवल हमारी खरीद में बल्कि हमारे अपने निर्यात में भी विस्तार होगा। अत: हमारा अनुमान है कि तुलनात्मक लाभ के परिणामस्वरूप कई क्षेत्रों में भारत का निर्यात अमेरिका में भी काफी बढ़ेगा।</p>
<p>केन्द्रीय मंत्री ने कहा कि विश्व की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था के साथ यह ढांचागत समझौता, जो आने वाले वर्षों में वैश्विक विकास और नवाचार को गति प्रदान करेगा, भारत की जनता एवं राष्ट्र के व्यापक हित में है। यह विकसित भारत और आत्मनिर्भर भारत दोनों को सशक्त बनाता है। सरकार देश के लिए प्रधानमंत्री के इस ²ष्टिकोण को साकार करने की दिशा में निरंतर कार्य करती रहेगी। </p>
<p>गौरतलब है कि, विपक्ष इस बात को लेकर हमलावर है कि संसद सत्र के दौरान इस समझौते के बारे में जानकारी संसद से बाहर सार्वजनिक की गयी। गोयल ने मंगलवार को एक संवाददाता सम्मेलन में इस समझौते के बारे में जानकारी दी थी। इससे पहले विपक्ष के सदस्यों ने संसद के दोनों सदनों में सरकार से समझौते के बारे में वक्तव्य देने की मांग की थी।  </p>
<p>वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने बुधवार को फिर कहा कि अमेरिका के साथ व्यापार समझौता (एजेंसी) के दौरान भारत ने देश के खाद्य एवं कृषि क्षेत्र की प्रमुख संवेदनशीलताओं का पूरा ध्यान रखा है। पीयूष गोयल ने लोक सभा में भारत-अमेरिका व्यापार समझौते के संबंध में दोनों देशों की ओर से की गयी घोषणाओं पर अपने एक वक्तव्य में कहा कि भारतीय पक्ष अपने संवेदनशील क्षेत्रों, विशेषकर कृषि और दुग्ध क्षेत्रों के हितों की रक्षा सुनिश्चित करने में सफल रहा है। अमेरिकी पक्ष के भी कुछ ऐसे क्षेत्र हैं, जो उनके दृष्टिकोण से संवेदनशील हैं।  </p>
<p>गौरतलब है कि, पीयूष गोयल ने मंगलवार को संवाददाता सम्मेलन में भी कहा था कि अमेरिका के साथ होने वाले व्यापार समझौते में भारत कृषि क्षेत्र की संवदेनशीलता का ध्यान रखेगा। इस बारे में की गयी में यह स्पष्ट भी किया गया है। उन्होंने कहा कि यह समझौता लघु एवं मध्यम उद्यमों, उद्यमियों, कुशल श्रमिकों और उद्योग के लिए नये अवसर खोलेगा, उन्नत प्रौद्योगिकियों तक पहुंच को सुगम बनाएगा और भारत के'मेक इन इंडिया फॉर द वल्र्ड, डिजाइन इन इंडिया फॉर द वल्र्ड और इन्नोवेट इन इंडिया फॉर द वल्र्ड के दृष्टिकोण को साकार करने में सहायक होगा।     </p>
<p>उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की फरवरी 2025 में अमेरिका यात्रा के बाद से भारत और अमेरिका एक संतुलित और पारस्परिक रूप से लाभकारी द्विपक्षीय व्यापार समझौते को संपन्न करने के उद्देश्य से नियमित रूप से चर्चा करते रहे हैं। इसी को ध्यान में रखते हुए, दोनों पक्षों के कारों ने पिछले एक वर्ष में विभिन्न स्तरों पर गहन बातचीत की है। दोनों पक्षों के महत्वपूर्ण और विविध हितों को देखते हुए यह स्वाभाविक है कि दोनों पक्ष अपनी-अपनी अर्थव्यवस्थाओं के महत्वपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्रों की रक्षा करते हुए सर्वोत्तम संभव परिणाम सुनिश्चित करना चाहेंगे।</p>
<p>पीयूष गोयल ने कहा कि इन (एजेंसी)ओं के दौरान लगभग एक वर्ष तक चले कई दौर के विचार-विमर्श के बाद, दोनों (एजेंसी)कार दल द्विपक्षीय व्यापार समझौते के कई क्षेत्रों को अंतिम रूप देने में सफल रहे हैं। दो फरवरी 2026 को पीएम मोदी और अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने द्विपक्षीय और अंतरराष्ट्रीय महत्व के कई मुद्दों पर फोन पर चर्चा की। इसके बाद राष्ट्रपति ट्रम्प ने अमेरिका को किए जाने वाले भारतीय निर्यात पर टैरिफ की दर घटाकर 18 प्रतिशत करने की घोषणा की।</p>
<p>उन्होंने कहा, मैं इस बात पर जोर देना चाहता हूं कि यह अमेरिका द्वारा कई प्रतिस्पर्धी देशों पर लगाये गये आयात कर से कम है, जिससे अमेरिकी बाजार में भारत की निर्यात प्रतिस्पर्धात्मकता में वृद्धि होगी। यह समझौता भारतीय निर्यातकों को, विशेष रूप से श्रम-प्रधान क्षेत्रों और विनिर्माण में, महत्वपूर्ण तुलनात्मक लाभ भी प्रदान करता है। </p>
<p>उन्होंने कहा कि यह ऐतिहासिक ढांचागत समझौता भारत-अमेरिका संबंधों को मजबूत करने और विकसित भारत 2047 की दिशा में हमारी यात्रा को आगे बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है तथा यह दुनिया के दो सबसे बड़े लोकतांत्रिक देशों के बीच मजबूत जुड़ाव को भी दर्शाता है, जो स्वाभाविक साझेदार हैं और साझा समृद्धि के लिए मिलकर काम कर रहे हैं।</p>
<p>वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री ने कहा कि दोनों पक्ष व्यापार समझौते से संबंधित आवश्यक तकनीकी प्रक्रियाओं को पूरा करने और कागजी कार्यवाही को अंतिम रूप देने के लिए मिलकर काम करेंगे, ताकि इसकी पूरी क्षमता का शीघ्रता से लाभ उठाया जा सके। समझौते की विस्तृत रूपरेखा इन प्रक्रियाओं के समापन के पश्चात तुरंत घोषित की जायेगी।</p>
<p>उन्होंने कहा, सदस्यों को भारत के ऊर्जा स्रोतों से संबंधित उन मुद्दों की जानकारी होगी, जो इस समझौते पर हुई चर्चाओं के दौरान उठाये गये हैं। मैं स्पष्ट करना चाहता हूं, जैसा कि सरकार ने कई बार सार्वजनिक रूप से कहा है, कि 140 करोड़ भारतीयों की ऊर्जा आवश्यकताओं की सुरक्षा सुनिश्चित करना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। वस्तुनिष्ठ बाजार स्थितियों और बदलते अंतरराष्ट्रीय परिदृश्यों के अनुरूप ऊर्जा स्रोतों में विविधता लाना हमारी कार्यनीति का मूल आधार है। भारत की सभी कार्रवाइयां इसी बात को ध्यान में रखकर की जाती हैं। अत: मैं माननीय सदस्यों से इन मुद्दों को समुचित दृष्टिकोण से देखने का आग्रह करता हूं।</p>
<p>पीयूष गोयल ने कहा, दोनों देशों के बीच भावी व्यापार अवसरों के संदर्भ में सदस्य इस बात को समझेंगे कि भारत और अमेरिका काफी हद तक एक-दूसरे की पूरक अर्थव्यवस्थाएं हैं। जैसे-जैसे भारत विकसित भारत के पथ पर अग्रसर हो रहा है, हमें ऊर्जा, उड्डयन, डेटा केंद्र, परमाणु ऊर्जा आदि सहित कई क्षेत्रों में अपनी क्षमताओं को बढ़ाने की आवश्यकता होगी। अमेरिका इन क्षेत्रों में दुनिया का अग्रणी देश है, इसलिए हमारे लिए इन क्षेत्रों में व्यापार की संभावनाओं पर ध्यान केंद्रित करना स्वाभाविक है, जिससे न केवल हमारी खरीद में बल्कि हमारे अपने निर्यात में भी विस्तार होगा। अत: हमारा अनुमान है कि तुलनात्मक लाभ के परिणामस्वरूप कई क्षेत्रों में भारत का निर्यात अमेरिका में भी काफी बढ़ेगा।</p>
<p>उन्होंने कहा कि विश्व की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था के साथ यह ढांचागत समझौता, जो आने वाले वर्षों में वैश्विक विकास और नवाचार को गति प्रदान करेगा, भारत की जनता एवं राष्ट्र के व्यापक हित में है। यह विकसित भारत और आत्मनिर्भर भारत दोनों को सशक्त बनाता है। हम अपने देश के लिए माननीय प्रधानमंत्री जी के इस दृष्टिकोण को साकार करने की दिशा में निरंतर कार्य करते रहेंगे।</p>]]>
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                                                            <category>भारत</category>
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                <pubDate>Wed, 04 Feb 2026 16:47:17 +0530</pubDate>
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                <title>बजट 2026-27 : खाद, हथकरघा और हस्तशिल्पों को बढ़ावा देने के लिए व्यापक एकीकृत कार्यक्रम की घोषणा, आत्मनिर्भरता के लिए राष्ट्रीय फाइबर योजना शुरू </title>
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                        <![CDATA[बजट 2026-27 में सरकार ने वस्त्र उद्योग हेतु एकीकृत कार्यक्रम, महात्मा गांधी ग्राम स्वराज पहल, समर्थ 2.0 मिशन, राष्ट्रीय फाइबर योजना और टेक्स ईको पहल की घोषणा की।]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/budget-2026-launch-of-comprehensive-integrated-program-for-textile-industries/article-141560"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-02/500-px)-(8).png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। सरकार देश में वस्त्र उद्योगों के लिए एक व्यापक एकीकृत कार्यक्रम शुरू करने जा रही है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने रविवार को यहां लोकसभा में वित्त वर्ष 2026-27 का बजट पेश करते यह यह बात कही। </p>
<p>उन्होंने कहा, इस कार्यक्रम के तहत खाद, हथकरघा और हस्तशिल्पों को बढ़ावा देने के लिए महात्मा गांधी ग्राम स्वराज पहल का शुभारंभ किया जायेगा। इसके अलावा वस्त्र कौशल इको-सिस्टम को बढ़ावा और आधुनिकता के लिए समर्थ 2.0 मिशन तथा प्राकृतिक, मानव निर्मित और नयी पीढी के फाइबर में आत्मनिर्भरता के लिए राष्ट्रीय फाइबर योजना शुरू की जायेगी।</p>
<p>उन्होंने कहा कि परम्परागत कपड़ा कलस्टर को आधुनिक बनाने के लिए वस्त्र उद्योगों के लिए विस्तार और रोजगार योजना के साथ साथ जारी योजनाओं के एकीकरण और उन्हें बढावा देने के लिए राष्ट्रीय हथकरघा और हस्तशिल्प कार्यक्रम भी शुरू किया जायेगा। साथ ही विश्व स्तरीय और टिकाऊ वस्त्रों  के लिए 'टेक्स इको' पहल  भी शुरू की जायेगी। उन्होंने कहा कि देश में टेक्सटाइल पार्कों को बढावा देने के लिए इनकी चुनौती के स्तर पर स्थापना दी जायेगी। </p>]]>
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                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 01 Feb 2026 14:39:33 +0530</pubDate>
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                <title>बजट 2026: 'बॉयो फार्मा शक्ति' योजना शुरू करने की घोषणा; 10,000 करोड़ रुपये का होगा निवेश </title>
                                    <description>
                        <![CDATA[बजट 2026-27 में वित्त मंत्री ने ‘बायो फार्मा शक्ति’ योजना शुरू की। बायो फार्मा क्षेत्र को बढ़ावा देने के लिए पांच साल में 10,000 करोड़ निवेश किया जाएगा।]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/budget-2026-announcement-of-starting-bio-pharma-shakti-yojana-investment/article-141541"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-02/500-px)-(5).png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 'बॉयो फार्मा शक्ति' योजना शुरू करने की घोषणा करते हुये कहा है कि इसके तहत बायो फार्मा सेक्टर को बढावा देने के लिए दस हजार करोड़ रुपये का निवेश किया जायेगा।</p>
<p>वित्त मंत्री सीतारमण ने रविवार को बजट 2026-27 पेश करते हुए बायो फार्मा क्षेत्र के लिए 'बायो फार्मा शक्ति' रणनीति के तहत अगले पांच साल में दस हजार करोड़ रुपये  के निवेश की घोषणा की। उन्होंने कहा कि इसका उद्देश्य ज्ञान, तकनीक और नवाचार के माध्यम से स्वास्थ्य योजना को उन्नत करना है। यह निवेश भारत को वैश्विक बायो फार्मा विनिर्माण केंद्र बनाने और गैर संक्रामक बीमारियों से निपटने में मदद करेगा।</p>]]>
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                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 01 Feb 2026 12:57:58 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>बजट 2026:  युवा शक्ति से प्रेरित बजट, विनिर्माण को बढ़ावा देने के लिए कई बड़ी  योजनाओं की घोषणा</title>
                                    <description>
                        <![CDATA[वित्त मंत्री ने बजट 2026-27 को युवा शक्ति केंद्रित बताते हुए विनिर्माण, बायोफार्मा और सेमीकंडक्टर क्षेत्रों में निवेश, उत्पादकता बढ़ाने और आत्मनिर्भर अर्थव्यवस्था के लिए नई योजनाओं की घोषणा की।]]>
                    </description>
                
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/budget-2026-emphasizes-on-self-reliant-india-finance-minister-made-many/article-141531"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-02/chatgpt-image-feb-1,-2026,-12_23_05-pm.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने रविवार को संसद में वित्त वर्ष 2026-27 का आम बजट पेश करते हुए इसे युवा शक्ति से प्रेरित बताया और उत्पादकता बढ़ाने के उद्देश्य से विनिर्माण क्षेत्र के लिए कई योजनाओं को घोषणा की।</p>
<p><img alt="Z"></img></p>
<p>वित्त मंत्री सीतारमण ने लोकसभा में अपने बजट भाषण में बताया कि कर्तव्य भवन में तैयार पहला बजट तीन कर्तव्यों से प्रेरित है। पहला कर्तव्य उत्पादकता और प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ाकर आर्थिक विकास को तेज और अनवरत बनाये रखना होगा ताकि वैश्विक उथल-पुथल का मजबूती से समाना किया जा सके। दूसरा कर्तव्य लोगों की आकांक्षाओं को पूरा करने और उनके क्षमता निर्माण की है ताकि देश को समृद्धि के मार्ग पर ले जाया जा सके। सबका साथ सबका विकास के अनुरूप तीसरा कर्तव्य संसाधन, सुविधा और अवसर तक हर परिवार, समाज, इलाके और सेक्टर की पहुंच सुनिश्चित करना है। सरकार इन कर्तव्यों को पूरा करने के लिए समर्थन का वातावरण तैयार करेगी। </p>
<p>उन्होंने सात रणनीतिक सेक्टरों में विनिर्माण को बढ़ावा देने का प्रस्ताव किया। देश के बायो फार्मा विनिर्माण का वैश्विक केंद्र बनाने के लिए अगले पांच साल 10 हजार करोड़ रुपये के आवंटन के साथ बायो फार्मा शक्ति का प्रस्ताव किया। इसके तहत देश में बायोलॉजिक्स और बायो सिमिलर बनाने के लिए पारितंत्र तैयार किये जायेंगे। फार्मास्यूटिकल शिक्षा और अनुसंधान के लिए तीन राष्ट्रीय संस्थान बनाये जायेंगे और मौजूदा सात संस्थानों को अपग्रेड किया जायेगा। केंद्रीय औषधि नियंत्रण संस्थान को मजबूत कर वैश्विक मानकों के अनुरूप बनाया जायेगा। </p>
<p>इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन 2.0 की घोषणा की गयी है जिसके तहत उपकरण आदि तैयार किये जायेंगे, फुल स्टैक स्वदेशी आईपी तैयार किया जायेगा और आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत किया जायेगा। उद्योग के नतृत्व में अनुसंधान को बढ़ावा दिया जायेगा और प्रशिक्षण पर ध्यान केंद्रित किया जायेगा। अप्रैल 2025 में शुरू की गयी इलेक्ट्रॉनिक्स कंपोनेंट विनिर्माण योजना के लिए आवंटन 22,919 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 40,000 करोड़ रुपये करने का प्रस्ताव किया गया है।</p>]]>
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                                                            <category>भारत</category>
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                <pubDate>Sun, 01 Feb 2026 12:32:44 +0530</pubDate>
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                <title>रूस ने फिर दोहराया ऑफर, एसयू-57 की पूरी टेक्नोलॉजी और सोर्स कोड देने को तैयार</title>
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                        <![CDATA[रूस ने भारत को अपने पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमान Su-57E के लिए पूर्ण तकनीक हस्तांतरण और सोर्स कोड साझा करने का प्रस्ताव दिया है। रूसी कंपनी UAC के सीईओ ने कहा कि 'मेक इन इंडिया' के तहत यह विमान भारतीय वायुसेना की जरूरतों के लिए सबसे उपयुक्त है।]]>
                    </description>
                
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/russia-again-reiterated-its-offer-ready-to-give-complete-technology/article-137259"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-12/russia-plane.png" alt=""></a><br /><p>मॉस्को। रूस ने एक बार फिर भारत को सुखोई एसयू-57 की टेक्नोलॉजी और सोर्स कोड देने का ऑफर दोहराया है। रूसी विमान निर्माता कंपनी यूनाइटेड एयरक्राफ्ट कॉपोर्रेशन के सीईओ वादिम बडेखा ने कहा है कि रूस एकमात्र ऐसा देश है जो अपने पांचवीं पीढ़ी के मल्टीरोल फाइटर जेट एसयू-57ई के साथ भारतीय वायु सेना की जरूरतों को पूरा कर सकता है। उन्होंने कहा कि उनकी कंपनी भारत के साथ एसयू-57 लड़ाकू विमान की टेक्नोलॉजी ट्रांसफर को नई ऊंचाई तक ले जाने को तैयार है, बल्कि भारत अगर इस विमान को खरीदने का विकल्प चुनता है तो वह इसका सोर्स कोड भी शेयर कर सकता है।</p>
<p><strong>आईएएफ की जरूरतें पूरा करेगा एसयू-57</strong></p>
<p>यूनाइटेड एयरक्राफ्ट कॉपोर्रेशन के सीईओ वादिम बडेखा ने कहा कि भारतीय वायुसेना को लंबे समय से आधुनिक लड़ाकू विमानों की आवश्यकता है। भारत ने हाल में ही अपने मिग-21 बाइसन को रिटायर किया है। उन्होंने कहा, दुनिया में कुछ ही ऐसे देश हैं जो न केवल अपने पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमानों का उत्पादन करते हैं, बल्कि उन्हें भारत को उचित शर्तों पर देने के लिए भी तैयार हैं। भारत को अपने खुद के विमानों का डवलपमेंट करने में टाइम लगेगा। इसलिए, हमारी राय में, रूस ही एकमात्र ऐसा साझेदार है जो एसयू-57ई के संबंध में भारत की सभी आवश्यकताओं को पूरा करता है, चाहे वह उत्पाद की गुणवत्ता हो या मेक इन इंडिया कार्यक्रम के तहत संयुक्त उत्पादन का अनुभव।</p>
<p><strong>भारत के एसयू-57 प्रोग्राम छोड़ने पर क्या कहा</strong></p>
<p>2018 में भारत के एसयू-57 प्रोग्राम से बाहर निकलने के सवाल पर वादिम बडेखा ने कहा कि इतनी तकनीकी जटिलता और इतने इनोवेशन से युक्त विमान का डवलपमेंट हमेशा जोखिम भरा होता है। इस जोखिम को कम करने की भारतीय पक्ष की इच्छा स्वाभाविक है। हमने उन चिंताओं का समाधान कर दिया है और यह प्रदर्शित किया है कि विमान का विकास हो चुका है और इसने युद्धक्षेत्र में अपनी क्षमता साबित कर दी है। उन्होंने आगे कहा कि सहयोग करने की हमारी तत्परता में कोई बदलाव नहीं आया है। </p>
<p>अब रूसी वायुसेना को एसयू-57 की आपूर्ति बड़े पैमाने पर की जा रही है। हमने एसयू-57ई की एक्सपोर्ट डिलीवरी के लिए भी समझौते किए हैं। यूनाइटेड एयरक्राफ्ट कॉपोर्रेशन के सीईओ वादिम बडेखा ने कहा कि एसयू-57ई एक ऐसा विमान है जिसमें आधुनिकीकरण की अपार संभावनाएं और ओपन एवियोनिक्स मैकेनिज्म है। अगर एसयू-57ई का सोर्स कोड और डिजाइन डॉक्यूमेंट भारत को ट्रांसफर कर दिए जाते हैं, तो भारतीय इंजीनियर स्वतंत्र रूप से विमान को अपने हिसाब से मोडिफाई और अपग्रेड कर सकेंगे। </p>
<p><strong>एसयू-57 विमान अलग क्यों</strong></p>
<p>उन्होंने दावा किया कि आज का एसयू-57 उस विमान से काफी अलग है जिसने 15 साल पहले पहली बार उड़ान भरी थी। वर्षों से, इस लड़ाकू विमान में महत्वपूर्ण विकास हुआ है और यह लगातार बेहतर होता जा रहा है, विमान की हथियार और प्रणाली क्षमताओं का विस्तार हो रहा है। उन्होंने कहा कि हमने एसयू-57 विमान पर एक नए इंजन प्रोडक्ट 177 का फ्लाइट टेस्ट शुरू कर दिया है। यह नया इंजन अधिक थ्रस्ट प्रदान करता है और एसयू-57 की सुपरसोनिक क्रूज क्षमताओं को बढ़ाएगा, इसके समग्र प्रदर्शन में सुधार करेगा और इसकी स्टील्थ क्षमताओं को बेहतर बनाएगा।</p>]]>
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                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 26 Dec 2025 11:50:37 +0530</pubDate>
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                <title>स्वदेशी से सजा कोटा का बाजार : दीपावली पर रहेगी मेक इन इंडिया की चमक, मिट्टी के दीयों की बढ़ी मांग</title>
                                    <description>
                        <![CDATA[स्वदेशी उत्पादों की बढ़ती मांग से स्थानीय  कारीगरों को रोजगार के नए अवसर मिल रहे हैं।]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/kota-s-markets-are-adorned-with-indigenous-products--the-make-in-india-glow-will-shine-this-diwali--with-increased-demand-for-earthen-lamps/article-129004"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-10/copy-of-news-(2)16.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। त्योहारों के इस मौसम में जब बाजार विदेशी वस्तुओं से भरे पड़े हैं, तब कोटा में स्वदेशी उत्पादों की मांग ने नई दिशा दिखाई है। मेक इन इंडिया की भावना को आगे बढ़ाते हुए शहर के बाजारों में देसी वस्तुएं ग्राहकों की पहली पसंद बन चुकी हैं। दीपावली जैसे बड़े त्योहार पर स्वदेशी दीयों, देशी लाइटों और हस्तनिर्मित सजावट सामग्री के साथ कपड़ा, इलेक्ट्रॉनिक्स तक में स्वदेशी को लोग   प्राथमिकता में रख रहे हैं। लोगों का रुझान लगातार बढ़ रहा है। सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि देश में निर्मित वस्तुओं को अपनाने से स्थानीय उद्योगों को बल मिलेगा और रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे। इस दीपावली पर कोटा के बाजारों में विदेशी नहीं, स्वदेशी दीयों व लाइट की रोशनी ज्यादा चमकेगी।</p>
<p><strong>मिट्टी के दीयों की चमक बरकरार</strong><br />कोटा के कुम्हारों के मोहल्ले में दीपावली से पहले मिट्टी के दीये बनाने का काम जोरों पर है। धनराज प्रजापत, जो पिछले 35 वर्षों से यह काम कर रहे हैं, बताते हैं कि हर दिन 500 से 1000 दीये बिक जाते हैं। ग्राहकों में दीयों के प्रति उत्साह इतना है कि बूंदी और नेमवा से कच्चा माल मंगवाना पड़ रहा है। छोटे-बड़े हर आकार के दीये तैयार कर रहे हैं। साथ ही करवा, कलश और मटकियों की बिक्री भी बढ़ी है।</p>
<p><strong>स्वदेशी उत्पादों से लोगों को मिल रोजगार</strong><br /> स्वदेशी उत्पादों की बढ़ती मांग से स्थानीय उद्योगों और कारीगरों को रोजगार के नए अवसर मिल रहे हैं। मिट्टी के दीये हो या हस्तनिर्मित तोरण और जैविक रंग—शहर के बाजारों में देसी उत्पादों की चमक बढ़ रही है। प्रधानमंत्री मोदी की स्वदेशी अपनाओ मुहिम से प्रेरित होकर लोग अब देश में बने उत्पादों को अपनाने में गर्व महसूस कर रहे हैं।<br /><strong>-अशोक माहेश्वरी, व्यापार महासंघ </strong></p>
<p><strong>इलेक्ट्रॉनिक बाजारों में स्वदेशी उत्पादों का बोलबाला</strong><br />कोटा के इलेक्ट्रॉनिक बाजारों में इन दिनों दीपावली की रौनक देखते ही बनती है। दुकानदारों के अनुसार ग्राहक अब मेड इन इंडिया टैग वाले उत्पाद ही मांग रहे हैं। हमारे पास देसी और विदेशी दोनों तरह की लाइटें हैं, लेकिन ग्राहक अब स्वदेशी लाइटों को प्राथमिकता देते हैं। अहमदाबाद और इंदौर से मंगवाई गईं देसी लाइटें टिकाऊ और मरम्मत योग्य हैं, इसलिए लोग इन्हें पसंद कर रहे हैं।<br /><strong>-अभिषेक सोनी, इलेक्ट्रॉनिक व्यापारी</strong></p>
<p><strong>पानी वाले दीयों की मांग बढ़ी</strong><br />इस बार पानी वाले दीये, थ्री चीप सीरिज, 8 एमएम सीरिज और मल्टी रोप लाइटों की भारी मांग है। ग्राहक दस गुणा दस झरना और डिस्को बल्ब जैसे आकर्षक मॉडल भी खरीद रहे हैं। बाजारों में दीपावली को लेकर लोगों की भीड़ लगातार बढ़ रही है। <br /><strong>-घनश्याम आहुजा, व्यापारी</strong></p>
<p><strong>ग्राहकी हुई दोगुनी</strong><br />कुन्हाड़ी रोड की 60 वर्षीय शायरादेवी बताती हैं कि दीपावली और करवा चौथ पर उनकी ग्राहकी दोगुनी हो गई है। बूंदी से तैयार माल मंगवाकर बेच रहे हैं। शाम को ग्राहकों की भीड़ रहती है। करवा की बिक्री भी जोर पर है। यह काम हमारी पुश्तैनी परंपरा का हिस्सा है।</p>
<p><strong>स्वदेशी लाइटों की डिमांड बढी</strong><br />शहर में दीपावली पर्व को लेकर मेक इन इंडिया के उत्पादों को क्रेज बढ़ रहा है। बाजार में इन दिनों चीनी उत्पाद भी मौजूद है जो काफी सस्ता है लेकिन आने वाले ग्राहक अधिकतर स्वदेशी उत्पाद को ही पसंद कर रहे है। पानी वाला दीया जो पानी से चलता है लोग काफी पसंद कर रहे है। वहीं मल्टी रोप लाइट को भी पसंद कर रहे है।<br /><strong>-मुकेश आहुजा, कोटा</strong></p>
<p> </p>]]>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 07 Oct 2025 16:07:19 +0530</pubDate>
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                <title>बजट सत्र में राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद का संबोधन: कोरोना काल में स्वास्थ्य सेवाओं को सराहा, तो नई तकनीक अपनाने पर जताई खुशी,  देश में मोबाइल फोन उत्पादन की सफलता को मेक इन इंडिया का बताया बड़ा उदाहरण </title>
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                        <![CDATA[कृषि के बढ़ते उत्पादन और निर्यात में वृद्धि के साथ-साथ रक्षा क्षेत्र में आत्म निर्भरता निरंतर बढ रही ]]>
                    </description>
                
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/%E0%A4%AC%E0%A4%9C%E0%A4%9F-%E0%A4%B8%E0%A4%A4%E0%A5%8D%E0%A4%B0-%E0%A4%AE%E0%A5%87%E0%A4%82-%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%B7%E0%A5%8D%E0%A4%9F%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A4%AA%E0%A4%A4%E0%A4%BF-%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%AE%E0%A4%A8%E0%A4%BE%E0%A4%A5-%E0%A4%95%E0%A5%8B%E0%A4%B5%E0%A4%BF%E0%A4%82%E0%A4%A6-%E0%A4%95%E0%A4%BE-%E0%A4%B8%E0%A4%82%E0%A4%AC%E0%A5%8B%E0%A4%A7%E0%A4%A8--%E0%A4%95%E0%A5%8B%E0%A4%B0%E0%A5%8B%E0%A4%A8%E0%A4%BE-%E0%A4%95%E0%A4%BE%E0%A4%B2-%E0%A4%AE%E0%A5%87%E0%A4%82-%E0%A4%B8%E0%A5%8D%E0%A4%B5%E0%A4%BE%E0%A4%B8%E0%A5%8D%E0%A4%A5%E0%A5%8D%E0%A4%AF-%E0%A4%B8%E0%A5%87%E0%A4%B5%E0%A4%BE%E0%A4%93%E0%A4%82-%E0%A4%95%E0%A5%8B-%E0%A4%B8%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%B9%E0%A4%BE--%E0%A4%A4%E0%A5%8B-%E0%A4%A8%E0%A4%88-%E0%A4%A4%E0%A4%95%E0%A4%A8%E0%A5%80%E0%A4%95-%E0%A4%85%E0%A4%AA%E0%A4%A8%E0%A4%BE%E0%A4%A8%E0%A5%87-%E0%A4%AA%E0%A4%B0-%E0%A4%9C%E0%A4%A4%E0%A4%BE%E0%A4%88-%E0%A4%96%E0%A5%81%E0%A4%B6%E0%A5%80---%E0%A4%A6%E0%A5%87%E0%A4%B6-%E0%A4%AE%E0%A5%87%E0%A4%82-%E0%A4%AE%E0%A5%8B%E0%A4%AC%E0%A4%BE%E0%A4%87%E0%A4%B2-%E0%A4%AB%E0%A5%8B%E0%A4%A8-%E0%A4%89%E0%A4%A4%E0%A5%8D%E0%A4%AA%E0%A4%BE%E0%A4%A6%E0%A4%A8-%E0%A4%95%E0%A5%80-%E0%A4%B8%E0%A4%AB%E0%A4%B2%E0%A4%A4%E0%A4%BE-%E0%A4%95%E0%A5%8B-%E0%A4%AE%E0%A5%87%E0%A4%95-%E0%A4%87%E0%A4%A8-%E0%A4%87%E0%A4%82%E0%A4%A1%E0%A4%BF%E0%A4%AF%E0%A4%BE-%E0%A4%95%E0%A4%BE-%E0%A4%AC%E0%A4%A4%E0%A4%BE%E0%A4%AF%E0%A4%BE-%E0%A4%AC%E0%A4%A1%E0%A4%BC%E0%A4%BE-%E0%A4%89%E0%A4%A6%E0%A4%BE%E0%A4%B9%E0%A4%B0%E0%A4%A3/article-4238"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-01/kovind.jpg" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। 1फरवरी को देश का बजट आएगा। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण बजट पेश करेंगी। सोमवार को संसद में बजट सत्र आयोजित हुआ। बजट सत्र में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी शामिल हुए। बजट सत्र में संसद के संयुक्त अधिवेशन को राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने संबोधित किया। बजट सत्र को  संबोधित करते हुए राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने कहा है कि कोरोना संकट के दौरान भारत की क्षमता दिखायी दी है और देश से 180 देशों को संबंधित दवाइयों की आपूर्ति की जा रही है। सरकार देश में स्वास्थ्य सेवाओं का बुनियादी ढांचा मजबूत कर रही है। देश के फार्मा क्षेत्र ने अपनी असाधारण क्षमता प्रदर्शित की है। भारत में बन रहे कोविड टीके पूरी दुनिया को महामारी से मुक्त कराने और करोड़ों लोगों का जीवन बचाने में अहम भूमिका निभा रहे हैं। भारत से लगभग 180 देशों को दवाओं की आपूर्ति की जा रही है। उन्होंने कहा कि आयुष्मान भारत जैसी योजनाओं से स्वास्थ्य सेवाओं के ढांचे को मजबूत किया जा रहा है और इसका विस्तार हो रहा है। <strong><br /></strong></p>
<p><strong>बदलावों, नयी तकनीकों को तेजी से अपना रहे हैं देशवासी</strong><br />राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने देश में डिजिटल लेनदेन में हो रही बढोतरी का हवाला देते हुए कहा कि देशवासी बदलाव और तकनीक को तेजी से अपना रहे हैं।  उन्होंने कहा कि जनधन, आधार मोबाइल (जैम) ट्रिनिटी को सरकार ने नागरिक सशक्तिकरण से जोड़ा है। उसका प्रभाव भी लगातार दिख रहा है। देश में 44 करोड़ से अधिक गरीब देशवासियों के बैंकिंग सिस्टम से जुडऩे के कारण महामारी के दौरान करोड़ों लाभार्थियों को सीधे नकद हस्तातंरण का लाभ मिला है। <br /><br />उन्होंने डिजिटल इंडिया और डिजिटल अर्थव्यवस्था के बढ़ते प्रसार के संदर्भ में देश के यूनिफाइड पेमेंट इंटरफेस(यूपीआई) की सफलता के लिए सरकार के दृष्टिकोण की प्रशंसा करते हुए कहा कि देश में आठ लाख करोड़ रुपये से ज्यादा का लेनदेन यूपीआई के माध्यम से हुआ है। राष्ट्रपति ने कहा कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को गति देने में महिलाओं की भूमिका अधिक बढ़ती जा रही है। 2021-22 में 28 लाख स्व सहायता समूहों को बैंकों से 65हजार करोड़ रुपये की मदद दी गयी है। यह राशि वर्श 2014-15 की तुलना में चार गुना अधिक है। <br /><br />उन्होंने देश के स्टार्टअप ईको सिस्टम का उल्लेख करते हुए कहा कि युवाओं के नेतृत्व में 2016 से देश में 56 अलग अलग क्षेत्रों में 60 हजार से अधिक नये स्टार्टअप बने हैं। इन स्टार्टअप के जरिये छह लाख से अधिक रोजगार का सृजन हुआ है। वर्ष 2021 में कोरोना काल में भारत में 40 से अधिक यूनिकॉर्न स्टार्टअप अस्तित्व में आये जिनमें से प्रत्येक का मूल्य 7400 करोड़ रुपये से अधिक आंका गया है। राष्ट्रपति ने कहा कि सरकार के निरंतर प्रयासों से भारत एक बार फिर विश्व की सबसे तेजी से विकसित हो रही अर्थव्यवस्थाओं में से एक बन गया है। उन्होंने वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) संग्रह का उल्लेख करते हुये कहा कि पिछले कई महीनों से जीएसटी राजस्व संग्रह एक लाख करोड़ रुपये से अधिक बना हुआ है। <br /><br />  इस वित्त वर्ष में पहले सात महीनेों में 48 अरब डॉलर का विदेशी निवेश आना इस बात का प्रमाण है कि अंतरराष्ट्रीय निवेशक भारत के विकास को लेकर बहुत आश्वास्त है। उन्होंने कहा कि इस समय देश का विदेशी मुद्रा भंडार 630 अरब डॉलर के ऊपर है। उन्होंने कहा कि सरकार की नीतियों की वजह से आज भारत उन देशों में है जहां इंटरनेट की कीमत सबसे कम है तथा स्मार्टफोन की कीमत भी सबसे कम है। इसका बहुत बड़ा लाभ भारत की नौजवान पीढ़ी को मिल रहा है। उन्होंने कहा कि भारत विश्व में दूसरा सबसे बड़ा मोबाइल फोन निर्माता बनकर उभरा है।  देश में मोबाइल फोन उत्पादन की सफलता , मेक इन इंडिया का एक बड़ा उदाहरण है। आज भारत विश्व में दूसरा सबसे बड़ा मोबाइल फोन निर्माता बनकर उभरा है। इससे देश के लाखों युवाओं को रोजगार भी मिला हुआ है। <br /><br /><strong>कृषि उत्पादन और निर्यात में रिकार्ड वृद्धि</strong><br /><br />अपने संबोधन के दौरान किसान और कृषि का जिक्र भी राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद ने किय। उन्होंने कहा कि कोरोना संकट केे बावजूद किसानों के अथक प्रयास से देश में खाद्यान्न और बागवानी फसलों का रिकार्ड उत्पादन और निर्यात हुआ है।  वर्ष 2020..21 के दौरान 30 करोड टन खाद्यान्नों और 33 करोड़ टन बागवानी फसलों का उत्पादन हुआ । उन्होंने कहा कि फसलों के रिकार्ड उत्पादन के साथ ही रिकार्ड मात्रा में न्यूनतम समर्थन मूल्य पर इसकी खरीद भी की गई है जिससे किसानों को आर्थिक लाभ हुआ है । </p>
<p>राष्ट्रपति ने कहा कि रबी फसलों के दौरान 433 लाख टन गेंहू की न्यूनतम समर्थन मूल्य पर खरीद की गई जिससे 50 लाख किसानों को फायदा हुआ । इसी तरह से खरीफ सीजन के दौरान 900 लाख टन धान की खरीद की गई जिससे एक करोड़ 30 लाख किसानों को आर्थिक लाभ हुआ । <br /><br />उन्होंने कहा कि वर्ष 2020 ( 21 के दौरान कृषि निर्यात में 25 प्रतिशत की वृद्धि हुयी और यह तीन लाख करोड़ रुपये पहुंच गया है । बागवानी और शहद उत्पादन से भी किसानों को आय के नये स्रोत खुले हैं। शहद का उत्पादन एक लाख 25 हजार टन पहुंच गया है । वर्ष 2014..15 की तुलना में इसमें 55 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। वर्ष 2014..15 की तुलना में शहद का निर्यात 102 प्रतिशत बढ गया है । <br /><br />उन्होंने कहा कि किसानों को सही बाजार मिले और उनमे खुशहाली आये इसके लिए किसान रेल सेवा शुरु की गयी । इससे सब्जी , फल , दूध और जल्दी खराब होने वाली वस्तुओं को बाजारों तक पहुंचाया गया । कुल 150 मार्गो पर 1900 किसान रेल चलायी गयी जिससे छह लाख टन माल की ढुलायी हुई। उन्होंने कहा कि पुराने संसाधनों से विकास के नये रास्ते तलाशे गये । छोटे किसानों के प्रयास से कृषि क्षेत्र में सतत सफलता मिल रही है । देश में छोटे किसान करीब 80 प्रतिशत हैं । <br /><br />राष्ट्रपति ने कहा कि प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि से 11 करोड़ से अधिक किसानों को एक लाख 80 हजार करोड़ रुपये की आर्थिक सहायता की गयी है । फसल बीमा योजना में बदलाव का लाभ भी छोटे किसानों को मिला है । करीब आठ लाख किसानों को फसलों की क्षति के लिए एक लाख करोड रुपये का मुआवजा दिया गया है । उन्होंने कहा कि एक लाख करोड़ रुपये के कृषि आधारभूत संरचना कोष से अनेक कार्यक्रम शुरु किये गये हैं ।</p>
<p><strong>देश रक्षा क्षेत्र में आत्म निर्भरता की ओर बढ रहा  तेजी से</strong><br />राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने अपना संबोधन जारी रखते हुए कहा कि सरकार देश की सुरक्षा के लिए दृढ संकल्प के साथ काम कर रही है जिससे रक्षा क्षेत्र में आत्म निर्भरता निरंतर बढ रही है। उन्होंने कहा कि मेरी सरकार देश की सुरक्षा के लिए दृढ़ संकल्पित होकर काम कर रही है। सरकार की नीतियों की वजह से डिफेंस सेक्टर में, विशेषकर रक्षा उत्पादन में, देश की आत्म-निर्भरता लगातार बढ़ रही है।<br /><br />सैन्य बलों के आधुनिकीकरण की दिशा में किये जा रहे कार्यों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि वर्ष 2020-21 में सैन्य बलों के आधुनिकीकरण के लिए जो भी स्वीकृतियों प्रदान की गयी उनमें 87 फीसदी उत्पादों में मेक इन इंडयिा को प्राथमिकता दी गयी। सरकार की महत्वाकांक्षी योजना मेक इन इंडिया का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि 2020-21 में 98 प्रतिशत उपकरणों से जुड़े अनुबंधों में मेक इन इंडिया को प्राथमिकता दी गयी है।   सशस्त्र बलों की जरूरतों को देश में ही पूरा करने के सरकार के प्रयासों तथा सफलता के बारे में उन्होंने कहा कि  हमारी सेनाओं ने 209 ऐसे साजो सामान की सूची भी जारी की है जिन्हें अब विदेश से नही खरीदा जायेगा। <br /><br />उन्होंने कहा कि सरकार का लक्ष्य है कि सेनाओं की जरूरत का सामान भारत में ही विकसित हो तथा भारत में ही निर्मित हो। इसे ध्यान में रखते हुए हिन्दुस्तान ऐरोनाटिक्स लिमिटेड ( एचएएल) के साथ 83 एलसीए तेजस लड़ाकू विमान बनाने के लिए अनुबंध किये गये हैं। सरकार ने आर्डिनेन्स फैक्ट्रियों को रक्षा क्षेत्र के सात सार्वजनिक उपक्रमों का रूप देने के लिए महत्वपूर्ण कदम उठाये हैं। इसके अलावा रक्षा क्षेत्र में निजी सेक्टर और स्टार्ट अप को तेजी से बढावा देने के लिए भी सरकार प्रतिबद्ध है। <br /><br /><br /></p>
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<p> </p>
<p><br /><br /></p>]]>
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                <pubDate>Mon, 31 Jan 2022 14:47:25 +0530</pubDate>
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