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                <title>बड़ी खबर: अमेरिका-ईरान समझौते की अटकलें तेज, अगले हफ्ते स्विट्ज़रलैंड में हो सकती है अहम बैठक</title>
                                    <description><![CDATA[अमेरिका और ईरान के शीर्ष अधिकारियों के बीच अगले हफ्ते स्विट्ज़रलैंड में हाई-लेवल बैठक की संभावना है। अमेरिकी वायुसेना के विमान जिनेवा में तैयारियां कर रहे हैं, जहां उप राष्ट्रपति जेडी वेंस पहुंच सकते हैं। हालांकि राष्ट्रपति ट्रंप के रविवार के दावों को खारिज करते हुए ईरान ने कहा कि हस्ताक्षर आने वाले दिनों में होंगे।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/big-news-speculation-on-us-iran-agreement-intensifies-important-meeting-may/article-156939"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-06/ameica.png" alt=""></a><br /><p>मॉस्को। अमेरिका और ईरान के दो वरिष्ठ अधिकारियों की अगले हफ़्ते स्विट्ज़रलैंड में बैठक हो सकती है। रिपोर्ट के अनुसार पाकिस्तान के विदेश मंत्री इशाक डार ने इस बैठक की तैयारी के लिए स्विट्ज़रलैंड जाने की योजना बनाई है। इससे पहले शुक्रवार को मीडिया रिपोर्ट दी कि ईरान और अमेरिका के बीच समझौते पर हस्ताक्षर करने के लिए जिनेवा संभावित जगह हो सकती है। साथ ही शुक्रवार को एक्सियोस ने बताया था कि अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस के अमेरिका-ईरान समझौते पर हस्ताक्षर करने के लिए संभावित दौरे से पहले अमेरिकी वायु सेना के चार सी-17 विमान जिनेवा में उपकरण पहुंचा रहे हैं।</p>
<p>वहीं, ईरानी वार्ताकारों के करीबी एक सूत्र ने बताया कि रविवार को जिनेवा में संभावित समझौते पर हस्ताक्षर होने की खबरें गलत हैं और ईरान ने अभी तक समझौते पर कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शनिवार को कहा कि संघर्ष को समाप्त करने के समझौते पर रविवार को हस्ताक्षर किए जाएंगे। वहीं ईरान ने इस समय-सीमा को खारिज कर दिया है, लेकिन उसका कहना है कि हस्ताक्षर आने वाले दिनों में हो सकते हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 14 Jun 2026 11:09:55 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का बड़ा ऐलान : अमेरिका-ईरान समझौते के करीब, कुछ दिनों में हस्ताक्षर होने की उम्मीद</title>
                                    <description><![CDATA[अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने घोषणा की है कि ईरान के साथ एक शानदार युद्धविराम समझौता तय हो गया है। व्हाइट हाउस में उन्होंने बताया कि दस्तावेज़ अंतिम रूप में हैं और इस सप्ताहांत यूरोप में उप राष्ट्रपति जेडी वेंस की मौजूदगी में हस्ताक्षर समारोह होने की उम्मीद है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/trump-claims-us-iran-agreement-expected-to-be-signed-in-a/article-156739"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/trump1.png" alt=""></a><br /><p>वॉशिंगटन। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि उन्होंने ‘ईरान के साथ युद्ध का एक शानदार समझौता तय किया है’ और अगले कुछ दिनों में इस समझौते पर हस्ताक्षर होने की उम्मीद है। ट्रंप ने गुरुवार को ह्वाइट हाउस में पत्रकारों को बताया कि उन्हें उम्मीद है कि सप्ताहांत पर यूरोप में एक हस्ताक्षर समारोह आयोजित किया जायेगा। इसमें अमेरिका के उप राष्ट्रपति जे डी वेंस शामिल होंगे। उन्होंने कहा कि दस्तावेज ‘अंतिम रूप’ में हैं और यह समझौता प्रक्रिया ‘बेहद जल्द' पूरी हो जायेगी।</p>
<p>यह पूछे जाने पर कि क्या ईरान के सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई इस समझौते के लिए सहमत हो गये हैं? ट्रंप ने कहा, “मेरी समझ से इसका जवाब हां है।” इस संभावित समझौते को ‘थोड़ा वैचारिक’ करार देते हुए ट्रंप ने कहा कि यह ‘एक बेहद मजबूत सहमति पत्र’ है और ‘ऐसा कुछ है, जो पूरा होने जा रहा है।’</p>
<p>ईरान ने अभी तक इस बात की पुष्टि नहीं की है कि वह युद्ध विराम के लिए अमेरिकी शर्तों पर सहमत हो गया है। गौरतलब है कि अमेरिका-इजरायल ने बीते 28 फरवरी को ईरान के खिलाफ यह युद्ध शुरू किया था। इससे पहले गुरुवार को ट्रंप ने लगातार तीसरे दिन ईरान पर हमला करने का संकल्प लिया था, लेकिन कुछ ही घंटों बाद उन्होंने घोषणा की कि अमेरिका ने इस कार्रवाई को रद्द कर दिया है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 12 Jun 2026 11:40:47 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>'वोट चोरी' के बाद 'सीट चोरी', महंगाई-बेरोजगारी के खिलाफ शुरू करेंगे देशव्यापी अभियान : वेणुगोपाल</title>
                                    <description><![CDATA[कांग्रेस ने मध्य प्रदेश से राज्यसभा उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन का नामांकन खारिज होने को 'सीट चोरी' और लोकतंत्र पर हमला करार दिया है। के.सी. वेणुगोपाल ने भाजपा पर दोहरे मापदंड का आरोप लगाते हुए कहा कि पार्टी इसके खिलाफ कानूनी लड़ाई और ब्लॉक स्तर तक राष्ट्रव्यापी आंदोलन शुरू करेगी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/after-vote-theft-venugopal-will-start-a-nationwide-campaign-against/article-156672"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/kc-vanugopal.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। कांग्रेस ने मध्य प्रदेश से राज्यसभा चुनाव के लिए पार्टी उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन का नामांकन पत्र रद्द किए जाने को लोकतंत्र पर हमला बताते हुए गुरुवार को आरोप लगाया कि देश में ''वोट चोरी के बाद अब सीट चोरी'' भी शुरू हो गई है और पार्टी इसके खिलाफ कानूनी तथा राजनीतिक दोनों स्तरों पर लड़ेगी तथा देशव्यापी अभियान शुरू करेगी। कांग्रेस महासचिव के. सी. वेणुगोपाल ने गुरुवार को यहां पार्टी मुख्यालय इंदिरा भवन में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे की अध्यक्षता में हुई महासचिवों, प्रदेश प्रभारियों और प्रदेश अध्यक्षों की बैठक के बाद संवाददाता सम्मेलन में कहा कि करीब तीन घंटे चली बैठक में देश की राजनीतिक और आर्थिक स्थिति के साथ-साथ मध्य प्रदेश और झारखंड में राज्यसभा नामांकन प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं पर विस्तार से चर्चा हुई।</p>
<p>उन्होंने कहा कि राज्यसभा चुनाव के लिए नामांकन पत्रों की जांच के दौरान लोकतांत्रिक मूल्यों की धज्जियां उड़ाई गई हैं। मध्य प्रदेश से कांग्रेस उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन के खिलाफ कोई आपराधिक मामला, प्राथमिकी या आरोप पत्र नहीं था, फिर भी यह कहते हुए उनका नामांकन खारिज कर दिया गया कि उन्होंने अदालत से प्राप्त एक नोटिस का खुलासा नहीं किया। इसके विपरीत झारखंड में भाजपा समर्थित एक उम्मीदवार के नामांकन पत्र में गंभीर त्रुटियां होने के बावजूद उसे स्वीकार कर लिया गया। कांग्रेस का आरोप है कि यह दोहरा मापदंड भारतीय लोकतंत्र की दयनीय स्थिति को दर्शाता है। वेणुगोपाल ने कहा कि बैठक में यह निर्णय लिया गया है कि इस मामले को कानूनी और राजनीतिक दोनों स्तरों पर चुनौती दी जाएगी। </p>
<p>लोकतांत्रिक संस्थाओं की निष्पक्षता बनाए रखने के लिए इस मुद्दे को जनता के बीच ले जाना आवश्यक है। देश में बढ़ती महंगाई, बेरोजगारी, पेट्रोल-डीजल और रसोई गैस की कीमतों में वृद्धि, पेपर लीक की घटनाओं तथा चुनावी प्रक्रियाओं में कथित धांधलियों को लेकर भी केंद्र सरकार की आलोचना करते हुए उन्होंने कहा कि आम जनता आर्थिक संकट से जूझ रही है लेकिन सरकार इन समस्याओं के समाधान के लिए कोई ठोस कदम उठाने की बजाय सिर्फ ''वोट चोरी और सीट चोरी'' में लगी है।</p>
<p>उन्होंने कहा कि बेरोजगारी अपने उच्चतम स्तर पर है, एमएसएमई क्षेत्र गंभीर संकट में है और युवा अपने भविष्य को लेकर चिंतित हैं। नीट और सीबीएसई परीक्षाओं से जुड़े विवादों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि शिक्षा व्यवस्था भी संकट के दौर से गुजर रही है, लेकिन सरकार किसी भी मुद्दे की नैतिक जिम्मेदारी लेने को तैयार नहीं है। वेणुगोपाल ने कहा कि कांग्रेस गरीबों, किसानों, युवाओं और आम लोगों की समस्याओं को लेकर उनके साथ खड़ी है। पार्टी इन मुद्दों पर राष्ट्रव्यापी अभियान और आंदोलन शुरू करेगी, जिसकी रूपरेखा अगले कुछ दिनों में घोषित की जाएगी। उन्होंने कहा कि वर्तमान परिस्थितियां, लोकतांत्रिक व्यवस्था से की जा रही छेड़छाड़, आर्थिक अस्थिरता और युवाओं के भविष्य के सामने खड़ी चुनौतियां बेहद गंभीर हैं और इनके खिलाफ व्यापक जनजागरण चलाया जाएगा।</p>
<p>कांग्रेस नेता ने कहा कि पार्टी पूरे देश में राष्ट्रीय अभियान शुरू करने जा रही है। यह अभियान केवल राष्ट्रीय स्तर तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि राज्य, जिला और ब्लॉक स्तर तक चलाया जाएगा। उन्होंने कहा, "जहां भी लोग मुश्किलों का सामना कर रहे हैं, कांग्रेस पार्टी वहां जाएगी, उनकी भावनाओं को समझेगी और उनके लिए लड़ाई लड़ेगी।" उन्होंने कहा कि पार्टी केवल पारंपरिक आंदोलनों तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि उन लोगों तक भी पहुंचेगी जो परेशान हैं और कठिनाइयों का सामना कर रहे हैं। कांग्रेस उनकी पीड़ा को साझा करेगी और आंदोलन के माध्यम से उनकी आवाज राष्ट्रीय स्तर तक पहुंचाने का प्रयास करेगी।</p>
<p>वेणुगोपाल ने कहा कि अभियान की विस्तृत रूपरेखा अगले दो से पांच दिनों में तैयार कर ली जाएगी। उन्होंने कहा, "हर कांग्रेस नेता और कार्यकर्ता को सड़कों पर होना चाहिए।" पार्टी का मानना है कि देश के सामने खड़ी इन चुनौतियों के खिलाफ व्यापक जनभागीदारी के साथ संघर्ष करना समय की मांग है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 11 Jun 2026 18:05:54 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>खरगे का बड़ा हमला: संवैधानिक संस्थाओं को कमजोर किया जा रहा, संविधान बचाने की लड़ाई का आह्वान</title>
                                    <description><![CDATA[कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने महंगाई, बेरोजगारी और नीट परीक्षा घोटाले को लेकर केंद्र पर तीखा हमला किया। उन्होंने आरोप लगाया कि दशकों में बनी संवैधानिक संस्थाओं को कमजोर किया जा रहा है। खरगे ने नेताओं से एकजुट होकर जनता के हक और संविधान की रक्षा के लिए लड़ने का आह्वान किया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/big-attack-by-kharge-constitutional-institutions-are-being-weakened-call/article-156650"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-01/kharge.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने कहा कि देश के सामने महंगाई, बेरोजगारी, परीक्षा घोटाले, सामाजिक असमानता जैसी गंभीर चुनौतियों के साथ ही संवैधानिक संस्थाओं और व्यवस्थाओं को भी कमजोर किया जा रहा है जिनके खिलाफ सख्ती से लड़ने की जरूरत है। खरगे ने गुरुवार को यहां इंदिरा भवन में कांग्रेस महासचिवों, विभिन्न राज्यों के प्रभारियों और प्रदेश अध्यक्षों की बैठक को संबोधित करते हुए कहा कि जिन संस्थाओं और व्यवस्थओं को बनाने में दशकों लगे, उन्हें कमजोर करने का प्रयास किया जा रहा है। ऐसे में संविधान, लोकतंत्र और सामाजिक न्याय की रक्षा करना कांग्रेस की जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि नीट, विभिन्न भर्ती परीक्षाओं में पेपर लीक और शिक्षा व्यवस्था से जुड़े विवादों ने करोड़ों युवाओं और उनके परिवारों का विश्वास हिला दिया है। लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी स्वयं प्रभावित छात्रों और युवाओं से मिले हैं तथा उनकी आवाज को देश के सामने मजबूती से रखा है।</p>
<p>कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा, "आज दुर्भाग्य से हम देखते हैं कि जिन संस्थाओं और व्यवस्थाओं को बनाने में दशकों लगे, उन्हें कमजोर करने का प्रयास किया जा रहा है। इसलिए हमारी जिम्मेदारी केवल राजनीतिक संघर्ष की नहीं, बल्कि भारत के संविधान, लोकतंत्र और सामाजिक न्याय की रक्षा की भी है।" उन्होंने पार्टी नेताओं से जनता के मुद्दों को मजबूती से उठाने और संगठन को मजबूत बनाने का आह्वान किया। बैठक में मौजूदा राजनीतिक घटनाक्रम, संगठनात्मक रणनीति तथा आगामी कार्यक्रमों पर भी चर्चा की गई। खरगे ने कहा कि कांग्रेस इन मूल्यों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है और जनता के अधिकारों की लड़ाई जारी रखेगी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 11 Jun 2026 15:01:56 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>झारखंड में सियासी हलचल: परिमल नथवाणी के नामांकन पर कांग्रेस का धरना, दस्तावेजों में नाम की विसंगति पर उठाए सवाल</title>
                                    <description><![CDATA[राज्यसभा चुनाव में भाजपा समर्थित उम्मीदवार परिमल नथवाणी के दस्तावेजों में नाम की तकनीकी विसंगति सामने आई है। इसके विरोध में कांग्रेस मंत्रियों और विधायकों ने विधानसभा के बाहर एकजुट होकर धरना दिया। निर्वाचन पदाधिकारी ने नामांकन पर अंतिम निर्णय फिलहाल लंबित रखा है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/congress-protest-on-nomination-of-parimal-nathwani-raised-questions-on/article-156563"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-06/paraimal.png" alt=""></a><br /><p>रांची। झारखंड विधानसभा परिसर के बाहर बुधवार को कांग्रेस के मंत्रियों, विधायकों और वरिष्ठ नेताओं ने एकजुट होकर धरना-प्रदर्शन किया। कांग्रेस ने भाजपा समर्थित निर्दलीय राज्यसभा उम्मीदवार परिमल नथवाणी के नामांकन को रद्द करने की मांग करते हुए चुनावी प्रक्रिया में नियमों के सख्ती से पालन की बात कही। राज्यसभा चुनाव के लिए नामांकन पत्रों की स्क्रूटनी के दौरान परिमल नथवाणी के दस्तावेजों में नाम को लेकर तकनीकी विसंगति सामने आई। कुछ आधिकारिक दस्तावेजों में उनका नाम "परिमल नथवाणी" दर्ज है, जबकि अन्य महत्वपूर्ण दस्तावेजों में "नथवाणी परिमल" लिखा हुआ पाया गया। इस अंतर को गंभीर मानते हुए निर्वाची पदाधिकारी ने आपत्ति दर्ज की और उनके नामांकन पर अंतिम निर्णय फिलहाल लंबित रख दिया।</p>
<p>इस मुद्दे को लेकर कांग्रेस नेताओं ने विधानसभा के बाहर धरना देते हुए आरोप लगाया कि चुनावी प्रक्रिया में नियमों की अनदेखी किसी भी सूरत में स्वीकार नहीं की जा सकती। पार्टी नेताओं का कहना है कि जब तक इस विसंगति का संतोषजनक समाधान नहीं हो जाता अथवा नामांकन रद्द नहीं किया जाता, उनका विरोध जारी रहेगा। कांग्रेस नेताओं ने कहा कि राज्यसभा जैसे महत्वपूर्ण चुनाव में सभी उम्मीदवारों के लिए समान नियम लागू होने चाहिए और किसी भी प्रकार की तकनीकी या कानूनी त्रुटि को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए।</p>
<p>उधर, निर्वाचन अधिकारियों के अनुसार परिमल नथवाणी अथवा उनके प्रतिनिधियों को इस तकनीकी आपत्ति के संबंध में स्पष्टीकरण और आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत करने का अवसर दिया जाएगा। सभी पक्षों की दलीलों और उपलब्ध दस्तावेजों की समीक्षा के बाद ही उनके नामांकन की वैधता पर अंतिम फैसला लिया जाएगा। फिलहाल, इस घटनाक्रम ने झारखंड की राजनीति में नई हलचल पैदा कर दी है और राज्यसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक सरगर्मियां तेज हो गई हैं। सभी की नजरें अब निर्वाचन पदाधिकारी के अंतिम निर्णय पर टिकी हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 10 Jun 2026 16:34:55 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>होर्मुज संकट के बीच ओपेक देशों का बड़ा फैसला : चौथी बार तेल उत्पादन बढ़ाने को दी मंजूरी, 5 जुलाई को होगी अगली बैठक</title>
                                    <description><![CDATA[अमेरिका-ईरान संघर्ष और यूएई के बाहर होने के बावजूद ओपेक के 7 प्रमुख देशों ने तेल उत्पादन बढ़ाने का फैसला किया है। सऊदी अरब और रूस सहित सदस्य देश जुलाई 2026 से 1.88 लाख बैरल प्रतिदिन उत्पादन बढ़ाएंगे। बाजार स्थिरता के लिए दिसंबर 2026 तक का नया शेड्यूल तय किया गया है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/big-decision-of-opec-countries-amid-hormuz-crisis-approval-to/article-156308"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-06/opecc.png" alt=""></a><br /><p>लंदन। अमेरिका-ईरान संघर्ष के कारण होर्मुज जलडमरूमध्य क्षेत्र में जारी तनाव और कई सदस्य देशों की उत्पादन क्षमता प्रभावित होने के बावजूद ओपेक के सात प्रमुख सदस्य देशों ने लगातार चौथी बार तेल उत्पादन बढ़ाने का फैसला किया है। ओपेक समूह के अनुसार सऊदी अरब, रूस, इराक, कुवैत, कजाखस्तान, अल्जीरिया और ओमान ने रविवार को आयोजित एक वर्चुअल बैठक में वैश्विक तेल बाजार की स्थिति और भविष्य की संभावनाओं की समीक्षा की तथा उत्पादन लक्ष्य बढ़ाने पर सहमति व्यक्त की।</p>
<p>संयुक्त बयान में कहा गया कि अप्रैल 2023 में घोषित अतिरिक्त स्वैच्छिक उत्पादन कटौती के तहत 1.88 लाख बैरल प्रतिदिन की उत्पादन वृद्धि जुलाई 2026 से लागू की जाएगी। समूह ने कहा कि बाजार की परिस्थितियों के अनुसार भविष्य में इन स्वैच्छिक कटौतियों को आंशिक या पूर्ण रूप से वापस लिया जा सकता है। सदस्य देश वैश्विक मांग और आपूर्ति की स्थिति पर लगातार नजर रखेंगे और आवश्यकतानुसार उत्पादन बढ़ाने, रोकने या वापस घटाने का निर्णय ले सकेंगे।</p>
<p>बयान में कहा गया कि नवंबर 2023 में लागू उत्पादन समायोजन सहित सभी व्यवस्थाओं की समय-समय पर समीक्षा की जाएगी ताकि बाजार में स्थिरता बनी रहे। सदस्य देशों ने कहा कि यह कदम उन देशों को भी मदद करेगा जिन्होंने पहले निर्धारित सीमा से अधिक उत्पादन किया था और अब उसकी भरपाई करनी है। समूह ने 'डिक्लेरेशन ऑफ कोऑपरेशन' (सहयोग घोषणा) के प्रति अपनी पूर्ण प्रतिबद्धता दोहराई और कहा कि उत्पादन अनुपालन की निगरानी संयुक्त मंत्रिस्तरीय निगरानी समिति (जेएमएमसी) द्वारा जारी रहेगी।</p>
<p>सदस्य देशों ने यह भी पुष्टि की कि जनवरी 2024 से हुई अतिरिक्त उत्पादन की भरपाई पूरी तरह की जाएगी और इसके लिए निर्धारित अवधि को बढ़ाकर दिसंबर 2026 तक कर दिया गया है। ओपेक समूह ने बाजार की स्थिति, उत्पादन अनुपालन और भरपाई व्यवस्था की समीक्षा के लिए हर महीने बैठक आयोजित करने का निर्णय लिया है। अगली बैठक 5 जुलाई 2026 को होगी। इस बीच, लगभग छह दशक तक सदस्य रहने के बाद संयुक्त अरब अमीरात के ओपेक से बाहर होने और वैश्विक ऊर्जा बाजार में बढ़ती अस्थिरता ने संगठन के सामने नयी चुनौतियां खड़ी कर दी हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 08 Jun 2026 15:04:36 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>अमेरिका-यूक्रेन संघर्ष: अमेरिका का रूस के साथ संबंध बनाए रखना जरूरी, बोले- मध्यस्थता के प्रयासों को फिर से शुरू करने के लिए तैयार</title>
                                    <description><![CDATA[अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने कहा है कि यूक्रेन संघर्ष के बावजूद अमेरिका को रूस के साथ राजनयिक संबंध और बातचीत बनाए रखनी चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि कई द्विपक्षीय मुद्दों का यूक्रेन से संबंध नहीं है। रुबियो ने ट्रंप प्रशासन की मध्यस्थता में वापसी की इच्छा जताते हुए कहा कि अमेरिका पूरी तरह यूक्रेन के पक्ष में है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/america-ukraine-conflict-america-needs-to-maintain-relations-with-russia-says/article-155969"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-06/macro.png" alt=""></a><br /><p>वॉशिंगटन। अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने कहा है कि यूक्रेन में जारी संघर्ष के बावजूद अमेरिका को रूस के साथ संबंध और बातचीत बनाए रखनी चाहिए। रुबियो ने संसद की विदेश मामलों की समिति की सुनवाई में कहा, “कम से कम, हमें रूसियों के साथ संबंध और बातचीत जारी रखनी ही होगी। हमारे द्विपक्षीय संबंधों में ऐसे मुद्दे हैं, जिनका यूक्रेन से कोई लेना-देना नहीं है।” अमेरिकी विदेश मंत्री ने विश्वास जताया कि यूक्रेन संघर्ष का समाधान होने के बाद अमेरिका-रूस संबंध अधिक दोस्ताना और संभालने में आसान हो जाएंगे। उन्होंने बुधवार को दावा किया कि अमेरिका-यूक्रेन संघर्ष पर मध्यस्थता के प्रयासों को फिर से शुरू करने के लिए तैयार है।</p>
<p>मार्को रुबियो से जब पूछा गया कि क्या मध्यस्थता में ट्रंप प्रशासन फिर से शामिल होने के लिए तैयार है, तो उन्होंने जवाब दिया, “हम ऐसा करने के लिए तैयार हैं।” उन्होंने हालांकि इस बात पर भी जोर दिया कि अमेरिका के अब तक के प्रयास ‘कम फलदायी’ रहे हैं। अमेरिकी विदेश मंत्री ने हालांकि यह भी स्पष्ट किया कि यूक्रेन में संघर्ष को सुलझाने की बातचीत में अमेरिका ‘साफ तौर पर’ यूक्रेन के पक्ष में है।</p>
<p>उन्होंने समिति से कहा, “हम उस युद्ध में निष्पक्ष मध्यस्थ नहीं हैं। हम रूस को हथियार नहीं देते, हम केवल यूक्रेन को हथियार देते हैं। हम यूक्रेन पर प्रतिबंध नहीं लगाते, हम केवल रूस पर प्रतिबंध लगाते हैं, इसलिए हमने स्पष्ट रूप से एक पक्ष लिया है।” मार्को रुबियो ने कहा कि अमेरिका यूक्रेन को आवश्यकता सूची (पर्ल) कार्यक्रम के माध्यम से हथियार बेचना जारी रखे हुए है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 04 Jun 2026 17:29:04 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>टीएमसी में विभाजन की अटकलें तेज: ऋतव्रत बनर्जी के समर्थन में आये 59 विधायक, नेतृत्व और असंतुष्ट गुट के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी</title>
                                    <description><![CDATA[पश्चिम बंगाल में TMC के भीतर गहरा संकट पैदा हो गया है। निष्कासित विधायक ऋतव्रत बनर्जी के नेतृत्व में विधानसभा में करीब 60 विधायकों की अहम बैठक हुई। असंतुष्ट गुट ने दो-तिहाई विधायकों के समर्थन का दावा किया है, जिससे विपक्ष के नेता चयन और हस्ताक्षर जालसाजी विवाद के बीच पार्टी में विभाजन की अटकलें तेज हैं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/speculation-of-split-in-tmc-intensifies-59-mlas-come-in/article-155851"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-07/tmcc.png" alt=""></a><br /><p>कोलकाता। तृणमूल कांग्रेस के निष्कासित विधायक ऋतव्रत बनर्जी के नेतृत्व में बुधवार को राज्य विधानसभा स्थित नौशाद अली भवन में करीब 60 विधायकों की बैठक हुई, जिसके बाद पार्टी में संभावित विभाजन की अटकलें और तेज हो गयीं। इसकी आधिकारिक पुष्टि अभी हालांकि नहीं हुई है, लेकिन अभिषेक बनर्जी सुबह विधानसभा पहुंचे और उनके पास 59 विधायकों के समर्थन वाला एक पत्र होने की चर्चा रही। इस बीच एक अन्य निष्कासित तृणमूल विधायक ने कहा, “बैठक के बाद सब कुछ सामने आ जाएगा। हमारे साथ दो-तिहाई विधायकों का समर्थन है।”</p>
<p>उल्लेखनीय है कि हाल ही में संपन्न विधानसभा चुनाव में तृणमूल कांग्रेस ने 80 सीटें जीती थीं, लेकिन फिलहाल उसके पास 78 विधायक हैं, क्योंकि ऋतव्रत बनर्जी और संदीपन साहा को पार्टी विरोधी गतिविधियों के आरोप में निष्कासित कर दिया गया है। बैठक में अरूप राय, शिउली साहा, अखुज्जमान और सबीना यास्मीन सहित कई विधायक शामिल हुए। सबीना यास्मीन ने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि विपक्ष के नेता के चयन के लिए विधायकों की यह बैठक बुलाई गयी है। उनसे जब पूछा गया कि बैठक किसने बुलाई, तो उन्होंने कहा, “हम सभी ने।”</p>
<p>यह घटनाक्रम विपक्ष के नेता के चयन को लेकर कथित जाली हस्ताक्षरों के विवाद के बीच सामने आया है, जिससे तृणमूल कांग्रेस के भीतर तनाव बढ़ गया है। विवाद उस समय और गहरा गया, जब विधानसभा अध्यक्ष रथीन्द्र बोस ने विपक्ष के नेता पद के लिए किसी भी उम्मीदवार को मान्यता देने से परहेज किया। विधानसभा पहुंचने के बाद ऋतव्रत बनर्जी ने पूरे घटनाक्रम को ‘अटकल’ बताते हुए महत्व कम करने की कोशिश की, लेकिन पार्टी की एकजुटता को लेकर सवाल लगातार उठ रहे हैं। इस बीच, भाजपा विधायक तपस राय ने मंगलवार को सोशल मीडिया पर दावा किया था कि ऋतव्रत बनर्जी को बड़ी संख्या में तृणमूल विधायकों का समर्थन प्राप्त है।</p>
<p>अभिषेक बनर्जी ने हालांकि बाद में इस पोस्ट से दूरी बना ली। उन्होंने कहा कि वह विधानसभा में अपने काम के लिये आये हैं और इस मामले से जुड़ी तमाम खबरें महज अटकलें हैं। जब उनसे पूछा गया कि क्या लगभग 50 विधायक उनके साथ हैं, तो उन्होंने कहा, “मैं केवल अपने और संदीपन के बारे में ही जिम्मेदारी ले सकता हूं।” विवाद की शुरुआत सोमवार को हुई थी, जब तृणमूल कांग्रेस ने ऋतव्रत बनर्जी और एंटाली के विधायक संदीपन साहा को पार्टी से निष्कासित कर दिया था। दोनों विधायकों का आरोप है कि छह मई को हुई पार्टी बैठक में विपक्ष के नेता के चुनाव संबंधी कोई प्रस्ताव पारित नहीं किया गया था। उनका दावा है कि उपस्थिति रजिस्टर पर लिये गये हस्ताक्षरों को बाद में प्रस्ताव के दस्तावेज में बदल दिया गया।</p>
<p>मुख्यमंत्री शुवेंदु अधिकारी ने सोमवार को नावन्ना में आयोजित संवाददाता सम्मेलन में कहा था कि ऋतव्रत बनर्जी और संदीपन साहा ने विधानसभा अध्यक्ष को लिखित शिकायत देकर विधानसभा अभिलेखों में हस्ताक्षर जालसाजी का आरोप लगाया है। करीब 60 विधायकों के ऋतव्रत बनर्जी के साथ खुलकर खड़े होने के बाद तृणमूल कांग्रेस में बड़े विभाजन की संभावनाओं को लेकर अटकलें तेज हो गयी हैं। पार्टी नेतृत्व और असंतुष्ट गुट के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर भी जारी है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 03 Jun 2026 18:39:15 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>इज़रायली बमबारी से गाजा बना कब्रिस्तान: 72 हजार से ज्यादा लोगों की मौत, नहीं थम रहा मासूमों की मौत का सिलसिला</title>
                                    <description><![CDATA[गाजा के स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, इजरायली हमलों में अब तक 72,938 फिलिस्तीनियों की मौत हो चुकी है और 1,72,919 लोग घायल हुए हैं। हमास के साथ युद्धविराम लागू होने के बाद भी इजरायल ने हमले जारी रखे हैं, जिससे पिछले 48 घंटों में ही कई नागरिक हताहत हुए हैं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/gaza-became-a-graveyard-due-to-israeli-bombing-more-than/article-155731"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-06/gaza.png" alt=""></a><br /><p>गाजा। फ़िलिस्तीन के गाजा पट्टी क्षेत्र पर इजरायल के हमले निरंतर जारी है और इन हमलों से गाजा में अब तक मरने वालों की संख्या बढ़कर 72,938 पहुंच गयी है। गाजा के स्वास्थ्य मंत्रालय ने मंगलवार को बताया कि पिछले 48 घंटों के दौरान सात शवों और 25 घायलों को गाजा के अस्पतालों में लाया गया है। मंत्रालय के अनुसार पिछले साल 11 अक्टूबर को युद्धविराम लागू होने के बाद से अब तक गाजा में 929 लोगों की मौत हो चुकी है और 2,811 अन्य घायल हुए हैं। इसके अलावा मलबे के नीचे से 781 शवों को भी निकाला गया है।</p>
<p>स्वास्थ्य मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, सात अक्टूबर 2023 से अब तक गाजा में मृतकों की कुल संख्या 72,938 और घायलों की संख्या 172,919 तक पहुंच गयी है। रिपोर्ट में कहा गया है कि इजरायल ने अमेरिका के समर्थन से सात अक्टूबर 2023 को गाजा पट्टी के निवासियों के खिलाफ व्यापक सैन्य अभियान शुरू किया था। हालांकि, वह हमास आंदोलन को समाप्त करने और इजरायल के बंदियों की वापसी सुनिश्चित करने के अपने घोषित उद्देश्यों को हासिल करने में विफल रहा और अंततः हमास के साथ युद्धविराम पर सहमत होना पड़ा। रिपोर्ट के अनुसार, युद्धविराम लागू होने के बाद भी इजरायल ने इसके कुछ प्रावधानों को लागू करने से इनकार किया है और गाजा पट्टी पर अपने सैन्य अभियान जारी रखे हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 02 Jun 2026 18:35:42 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>ओडिशा बॉक्साइट खनन विवाद: कांग्रेस ने आदिवासी अधिकारों के उल्लंघन का लगाया आरोप, केंद्र से निष्पक्ष जांच की मांग</title>
                                    <description><![CDATA[कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने ओडिशा के कोरापुट और कालाहांडी जिलों में बॉक्साइट खनन के खिलाफ ग्रामीणों के प्रदर्शन पर चिंता जताई है। उन्होंने कलिंगा एल्युमिना लिमिटेड द्वारा 400 एकड़ वन भूमि के कथित अवैध उपयोग और ग्राम सभा की फर्जी मंजूरियों के आरोपों की निष्पक्ष जांच की मांग की है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/odisha-bauxite-mining-dispute-congress-alleges-violation-of-tribal-rights/article-155714"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-09/jairam-ramesh-333.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। कांग्रेस ने ओडिशा में बॉक्साइट खनन परियोजनाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर ग्रामीणों के विरोध प्रदर्शनों पर चिंता व्यक्त करते हुए केंद्र से इस मामले में हस्तक्षेप कर प्रभावितों के अधिकारों की रक्षा सुनिश्चित करने की मांग की है। पार्टी ने खनन परियोजनाओं से जुड़े वन अधिकार कानून, 2006 के कथित उल्लंघन, वन भूमि के उपयोग तथा ग्राम सभा की स्वीकृतियों में कथित अनियमितताओं के आरोपों को गंभीर बताते हुए उनकी व्यापक और निष्पक्ष जांच की मांग की है।</p>
<p>कांग्रेस महासचिव एवं संचार विभाग के प्रभारी जयराम रमेश ने मंगलवार को एक बयान में कहा कि ओडिशा के कोरापुट जिले में बॉक्साइट खनन के लिए दी गई स्वीकृतियों को लेकर ग्रामीणों का विरोध जारी है। उन्होंने कहा कि कलिंगा एल्युमिना लिमिटेड पर लगभग 400 एकड़ वन भूमि के कथित अवैध उपयोग के आरोप लगाए जा रहे हैं, जिस पर आंदोलनरत ग्रामीण वन अधिकार कानून, 2006 के तहत अपने पारंपरिक और आध्यात्मिक अधिकार होने का दावा कर रहे हैं।</p>
<p>उन्होंने आरोप लगाया कि ग्राम सभा की मंजूरी प्राप्त करने की प्रक्रिया में कंपनी और जिला प्रशासन के अधिकारियों की कथित मिलीभगत से अनियमितताएं हुई हैं, जिसकी जानकारी संबंधित अधिकारियों को भी दी गई है। उनका कहना था कि इसी प्रकार के आरोप कालाहांडी और रायगढ़ा जिलों में भी लगाए जा रहे हैं। जयराम रमेश ने कहा कि केंद्र सरकार में जनजातीय कार्य मंत्री ओडिशा से हैं, वन अधिकार कानून, 2006 को उसकी भावना और प्रावधानों के अनुरूप लागू कराने के लिए जिम्मेदार हैं। उन्होंने कहा कि राज्य के विभिन्न हिस्सों में हो रहे इन विरोध प्रदर्शनों और उनके कारणों पर गंभीरता से ध्यान दिया जाना चाहिए।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 02 Jun 2026 16:33:00 +0530</pubDate>
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                <title>गहलोत का भाजपा पर हमला, बोले- महंगाई-बेरोजगारी से त्रस्त जनता आज चुनाव हो तो फिर कांग्रेस की सरकार बनाएगी</title>
                                    <description><![CDATA[अजमेर के पुष्कर में कांग्रेस के चिंतन शिविर में पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने भाजपा सरकारों को महंगाई, रोजगार और बिजली-पानी के मोर्चे पर विफल बताया। उन्होंने दावा किया कि जनता भाजपा की नीतियों से त्रस्त हो चुकी है और यदि आज चुनाव हो जाएं, तो प्रदेश में कांग्रेस की वापसी निश्चित है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/ajmer/gehlots-attack-on-bjp-said-people-suffering-from-inflation/article-155582"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-06/gehlott.png" alt=""></a><br /><p>अजमेर। अशोक गहलोत ने पुष्कर की तिलोरा में चल रहे कांग्रेस के प्रदेश स्तरीय चिंतन शिविर को कांग्रेस की मजबूती का अनूठा प्रयास बताया। इस मौके पर गहलोत ने केंद्र और प्रदेश की भाजपा सरकार पर तीखा हमला किया। गहलोत बोले महंगाई, रोजगार, बिजली पानी हर मोर्चे पर भाजपा की प्रदेश और केंद्र की सरकार पूरी तरह से फेल हो गई। प्रदेश में हालत चिंताजनक बनी हुई है। केंद्र में तो खुद भाजपा की सरकार है । गहलोत ने कहा आज चुनाव हो जाए तो प्रदेश में कांग्रेस की सरकार वापस आ जाएगी । आमजन को कांग्रेस से काफी उम्मीदें हैं, आमजन भाजपा की सरकारों से पूरी तरह त्रस्त हो चुका है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>अजमेर</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 01 Jun 2026 09:53:49 +0530</pubDate>
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                <title>भारत-नेपाल सीमा विवाद : केवल भारत ही नहीं ; नेपाल ने भी किया भारतीय जमीन पर कब्जा, बालेन्द्र ने कहा- कूटनीतिक वार्ता से निकाला जाएगा समाधान </title>
                                    <description><![CDATA[नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन शाह ने संसद में कहा कि केवल भारत ने ही नहीं, बल्कि नेपाल ने भी कई जगहों पर भारत की जमीन पर अतिक्रमण किया है। उन्होंने आश्वासन दिया कि लिपुलेख, कालापानी और लिम्पियाधुरा विवाद को इतिहासकारों और सर्वेक्षकों की संयुक्त टीम के साथ कूटनीतिक बातचीत के जरिए सुलझाया जाएगा।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/india-nepal-border-dispute-not-only-india-but-nepal-also-occupied/article-155577"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-02/nepal-election.png" alt=""></a><br /><p>काठमांडू। नेपाल के प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह ने रविवार को संसद में एक विवादित बयान देते हुए कहा कि जैसे भारत ने नेपाल की जमीन पर अतिक्रमण किया है, वैसे ही नेपाल ने भी कई जगहों पर भारत की जमीन पर अतिक्रमण किया है। जानकारी के अनुसार, नेपाल के प्रधानमंत्री ने आश्वासन दिया कि लिपुलेख, लिम्पियाधुरा और कालापानी के सीमा विवाद को कूटनीतिक बातचीत के जरिए सुलझाया जाएगा। श्रम संस्कृति पार्टी के सांसद आरेन राय के संसद में पूछे गए सवाल का जवाब देते हुए शाह ने कहा, प्रधानमंत्री बनने के बाद मुझे पता चला कि न केवल भारत ने नेपाल की जमीन पर अतिक्रमण किया है, बल्कि नेपाल ने भी कई जगहों पर भारत की भूमि पर अतिक्रमण किया है। </p>
<p><strong>सीमा विवाद सुलझाने को बनेगी संयुक्त टीम</strong></p>
<p>शाह ने बताया कि नेपाल इस संबंध में भारत को पहले ही एक आधिकारिक कूटनीतिक नोट भेज चुका है और वहां से जवाब भी मिल गया है। उन्होंने कहा, भारत से मिले जवाब में कहा गया है कि दोनों सरकारें इतिहासकारों, सर्वेक्षकों और क्षेत्र के जानकारों को शामिल कर टीमें बनाएंगी और बातचीत के जरिए इसका समाधान तलाशेंगी।</p>
<p><strong>सीमा मुद्दे पर चीन और ब्रिटेन से भी बातचीत</strong></p>
<p>नेपाल के प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि नेपाल ने इस सीमा विवाद को लेकर चीन और ब्रिटेन के साथ भी कूटनीतिक चर्चा की है, क्योंकि यह मुद्दा उस समय का है, जब अंग्रेज इस क्षेत्र को छोड़कर गए थे, इसलिए ब्रिटेन को भी इसमें दिलचस्पी लेनी चाहिए। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 01 Jun 2026 09:18:46 +0530</pubDate>
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