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                <title>WHO - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <description>WHO RSS Feed</description>
                
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                <title>कांगो और युगांडा में इबोला का प्रकोप: डब्ल्यूएचओ ने घोषित किया वैश्विक स्वास्थ्य आपातकाल, महामारी के पूरे क्षेत्र में तेजी से फैलने की आशंका</title>
                                    <description><![CDATA[विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने कांगो और युगांडा में फैले इबोला के 'बुंदीबुग्यो' स्ट्रेन को अंतरराष्ट्रीय आपातकाल घोषित किया है। सीमा पार संक्रमण, संदिग्ध मौतों और स्वीकृत टीकों की कमी के कारण यह कदम उठाया गया। WHO ने देशों को अलर्ट रहने, निगरानी बढ़ाने और बॉर्डर स्क्रीनिंग सख्त करने के निर्देश दिए हैं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/ebola-outbreak-in-congo-and-uganda-who-declared-global-health/article-154151"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/ibola.png" alt=""></a><br /><p>जेनेवा। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने रविवार को कांगो और युगांडा में फैले 'बुंदीबुग्यो' वायरस स्ट्रेन के कारण इबोला प्रकोप को 'अंतरराष्ट्रीय चिंता का सार्वजनिक स्वास्थ्य आपातकाल' घोषित कर दिया है। डब्ल्यूएचओ ने यह बड़ा फैसला सीमा पार संक्रमण की पुष्टि, संदिग्ध मौतों के बढ़ते आंकड़ों और इस महामारी के पूरे क्षेत्र में तेजी से फैलने की आशंका के मद्देनजर लिया है। यह वैश्विक घोषणा पूर्वी कांगो के इतूरी प्रांत और युगांडा की राजधानी कंपाला में प्रयोगशाला द्वारा पुष्टि किए गए इबोला मामलों के सामने आने के बाद की गई है, जिसमें कम से कम एक मौत भी शामिल है। स्वास्थ्य अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि इस बीमारी का प्रकोप वर्तमान में पाए गए मामलों की तुलना में कहीं अधिक बड़ा हो सकता है। </p>
<p>डब्ल्यूएचओ के अनुसार, 16 मई तक इतूरी प्रांत के कम से कम तीन स्वास्थ्य क्षेत्रों (बुन्या, वर्मपारा और मोंगबवालु) में 8 पुष्ट मामले, 246 संदिग्ध संक्रमण और 80 संदिग्ध मौतें दर्ज की जा चुकी हैं। युगांडा ने पिछले 24 घंटों के भीतर कंपाला में इबोला के दो मामलों की पुष्टि की है, और ये दोनों मरीज कांगो से आए यात्री हैं। इनमें से एक मरीज की मौत हो चुकी है और दोनों को गहन चिकित्सा इकाई में भर्ती कराया गया था। इसके अलावा, इतूरी से लौटे एक यात्री में किन्शासा के भीतर भी एक अलग पुष्ट मामला पाया गया है, जिससे घरेलू और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर संक्रमण फैलने की चिंताएं बहुत बढ़ गई हैं।</p>
<p>डब्ल्यूएचओ ने अपने आपातकालीन निर्धारण में कहा, "यह घटना अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बीमारी के प्रसार के माध्यम से अन्य देशों के लिए एक बड़ा सार्वजनिक स्वास्थ्य जोखिम पैदा करती है।" हालांकि संयुक्त राष्ट्र की इस स्वास्थ्य एजेंसी ने इसे अभी 'महामारी' घोषित नहीं किया है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय संचरण के जोखिम, कमजोर स्वास्थ्य बुनियादी ढांचे और 'बुंदीबुग्यो' स्ट्रेन को निशाना बनाने वाले स्वीकृत टीकों या सटीक इलाज की अनुपस्थिति के कारण इसने वैश्विक स्वास्थ्य आपातकाल के पैमाने को पार कर लिया है।</p>
<p>डब्ल्यूएचओ के अधिकारियों ने बताया कि इतूरी और पड़ोसी उत्तर कीवू प्रांत में सामुदायिक स्तर पर मौतों और संदिग्ध मामलों के असामान्य क्लस्टर देखे गए हैं। वहीं, कम से कम चार स्वास्थ्य कर्मियों की भी ऐसी परिस्थितियों में मौत हुई है जो अस्पतालों के भीतर फैले संक्रमण की ओर इशारा करती हैं। एजेंसी ने चेतावनी दी है कि पूर्वी कांगो में सुरक्षा की कमी (असुरक्षा), आबादी का विस्थापन, खुली सीमाएं और भारी क्षेत्रीय गतिशीलता इस प्रकोप को और तेज कर सकती है। यह स्थिति पूर्वी कांगो में 2018-19 के उस विनाशकारी इबोला संकट की याद दिलाती है जिसमें 2,000 से अधिक लोगों की जान चली गई थी।</p>
<p>डब्ल्यूएचओ के महानिदेशक टेड्रोस अदनोम घेब्रेयेसस ने कहा कि संगठन अंतरराष्ट्रीय स्वास्थ्य विनियमों के तहत एक आपातकालीन समिति की बैठक बुलाएगा ताकि आगे के अस्थायी सुझाव दिए जा सकें। डब्ल्यूएचओ ने कांगो और युगांडा से आपातकालीन प्रतिक्रिया प्रणालियों को सक्रिय करने, निगरानी बढ़ाने, संपर्क ट्रेसिंग तेज करने और अस्पतालों व समुदायों में संक्रमण की रोकथाम के उपायों को मजबूत करने का आग्रह किया है।</p>
<p>एजेंसी ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सीमाओं की स्क्रीनिंग बढ़ाने, पुष्ट मामलों और उनके संपर्क में आए लोगों के अंतरराष्ट्रीय यात्रा पर प्रतिबंध लगाने तथा प्रायोगिक टीकों व दवाओं के क्लीनिकल ट्रायल में तेजी लाने का आह्वान किया है। हालांकि, इसके साथ ही डब्ल्यूएचओ ने पड़ोसी देशों को सीमाएं पूरी तरह बंद करने या व्यापार प्रतिबंध लगाने के खिलाफ सलाह दी है। एजेंसी का कहना है कि ऐसे कदमों का कोई वैज्ञानिक आधार नहीं है और इससे लोग अनौपचारिक (अवैध) रास्तों से आवाजाही शुरू कर देंगे, जिससे संकट और अधिक बिगड़ सकता है। कांगो की सीमा से लगे पड़ोसी देशों से प्रयोगशाला परीक्षणों को मजबूत करने, स्वास्थ्य कर्मियों को प्रशिक्षित करने और त्वरित प्रतिक्रिया टीमों को तैनात करने सहित अपनी तैयारियों के स्तर को तुरंत बढ़ाने का अनुरोध किया गया है। गौरतलब है कि इबोला का 'बुंदीबुग्यो' स्ट्रेन पूर्व के बड़े प्रकोपों के लिए जिम्मेदार 'जायरे' स्ट्रेन की तुलना में कम आम है, लेकिन यह अभी भी उच्च मृत्यु दर के साथ गंभीर रक्तस्रावी बुखार का कारण बन सकता है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 17 May 2026 17:15:34 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>डब्ल्यूएचओ का दावा: वैश्विक कोरोना मौतों का आंकड़ा आधिकारिक संख्या से तीन गुना अधिक, रिपोर्ट जारी  </title>
                                    <description><![CDATA[विश्व स्वास्थ्य संगठन की 'वर्ल्ड हेल्थ स्टैटिस्टिक्स 2026' रिपोर्ट के अनुसार, महामारी से वास्तविक मौतें 2.2 करोड़ के पार पहुंच गई हैं। यह सरकारी आंकड़ों से तीन गुना ज्यादा है। कम रिपोर्टिंग और स्वास्थ्य सेवाओं में व्यवधान के कारण जीवन प्रत्याशा में हुई एक दशक की प्रगति भी समाप्त हो गई है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/who-claims-global-corona-death-toll-three-times-higher-than/article-153780"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/who.png" alt=""></a><br /><p>जिनेवा। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने कहा है कि कोविड-19 महामारी से दुनिया भर में मौतों की वास्तविक संख्या 2.2 करोड़ से अधिक पहुंच गई है, जो आधिकारिक तौर पर दर्ज 70 लाख मौतों से करीब तीन गुना ज्यादा है। डब्ल्यूएचओ की बुधवार को जारी "वर्ल्ड हेल्थ स्टैटिस्टिक्स 2026" रिपोर्ट में कहा गया, "वर्ष 2020 से 2023 के बीच सभी कारणों से वैश्विक अतिरिक्त मौतों (एक्सेस डेथ्स) का अनुमान 2.21 करोड़ लगाया गया, जबकि कोविड-19 से आधिकारिक तौर पर 70 लाख मौतें दर्ज की गईं। </p>
<p>इसका मतलब है कि कोविड से दर्ज हर एक मौत के मुकाबले महामारी से जुड़ी लगभग दो अतिरिक्त मौतें हुईं।"संगठन के अनुसार, इसका मुख्य कारण कई देशों द्वारा मौतों की कम रिपोर्टिंग करना है। इसके अलावा, 2022 के बाद अनेक देशों ने बड़े पैमाने पर कोविड-19 जांच अभियान बंद कर दिये, जिससे वास्तविक आंकड़े सामने नहीं आ सके। रिपोर्ट में कहा गया, "यह निष्कर्ष न केवल वायरस से सीधे हुई मौतों की कम रिपोर्टिंग को दर्शाता है, बल्कि स्वास्थ्य सेवाओं में व्यवधान, आर्थिक चुनौतियों और अन्य सामाजिक कारणों से हुई अप्रत्यक्ष मौतों को भी उजागर करता है।"</p>
<p>डब्ल्यूएचओ ने यह भी कहा कि महामारी ने वैश्विक स्तर पर जीवन प्रत्याशा में एक दशक की प्रगति को खत्म कर दिया और विभिन्न क्षेत्रों में इसकी भरपाई अब भी असमान बनी हुई है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 14 May 2026 14:11:04 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>इंदौर में दूषित पानी पीने से बच्चों की मौत पर राज भूषण चौधरी ने कहा, देश के किसी भी क्षेत्र के लोग दूषित पानी पीने के लिए बाध्य नहीं</title>
                                    <description><![CDATA[सरकार ने राज्यसभा में कहा कि देश में कोई भी व्यक्ति दूषित पानी पीने को मजबूर नहीं है। जल जीवन मिशन से नल जल पहुंचा, बच्चों की मौतें घटीं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/on-the-death-of-children-due-to-drinking-contaminated-water/article-141676"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-02/11-(700-x-400-px)-(630-x-400-px)-(6)1.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। सरकार ने सोमवार को संसद को बताया कि देश के किसी भी इलाके में लोग दूषित पानी पीने के लिए बाध्य नहीं हैं। राज्य सभा में प्रश्न काल के दौरान जल शक्ति राज्य मंत्री राज भूषण चौधरी ने एक पूरक प्रश्न के उत्तर में कहा कि केंद्रीय भूजल बोर्ड और राज्य सरकारों की रिपोर्ट के अनुसार देश का भूजल काफी हद तक पीने योग्य है। उन्होंने कहा कि आज 16 करोड़ घरों में नल से जल पहुंच रहा है और देश के किसी भी क्षेत्र का व्यक्ति दूषित पानी पीने के लिए बाध्य नहीं है।</p>
<p>हाल ही में, मध्य प्रदेश के इंदौर में दूषित पानी पीने से कई बच्चों की मौत के बारे में पूछे गए एक अन्य पूरक प्रश्न के उत्तर में जल शक्ति मंत्री सी.आर. पाटिल ने विश्व स्वास्थ्य संगठन की रिपोर्ट का हवाला देते हुए सदन को बताया कि हर घर जल योजना से 8.4 लाख करोड़ रुपये की बचत हुई है और हर साल 60 हजार बच्चों की मौत रोकी गयी है जो दूषित पानी की वजह से होती थी। उन्होंने कहा कि जलापूर्ति राज्य सरकारों का काम है इसके बावजूद केंद्र सरकार जल जीवन मिशन के तहत उन्हें इसे लागू करने में मदद कर रही है। </p>
<p>उन्होंने कहा, एक जिले में कभी कोई घटना हो तो उसके अपने कुछ कारण हो सकते हैं। इंदौरा की घटना में की गयी कार्रवाई के बारे में उन्होंने कहा कि विस्तृत रिपोर्ट आने पर सरकार उचित कार्रवाई करेगी। इसी सवाल के जवाब से पहले उन्होंने स्पष्ट किया कि इंदौर नहीं सूरत देश का सबसे स्वच्छ शहर है। </p>
<p>उन्होंने बताया कि पानी की गुणवत्ता जांचने के लिए 24.8 लाख महिलाओं को विशेष किट दिये गये थे। आठ लाख महिलाओं ने उनके घरों में आने वाले पानी की गुणवत्ता जांच कर रिपोर्ट जल जीवन मिशन के पोर्टल पर अपलोड की है। वित्त वर्ष 2025-26 में जल जीवन मिशन के लिए 67,000 करोड़ रुपये के बजट आवंटन को संशोधित कर 17,000 करोड़ रुपये किये जाने के सवाल पर पाटिल ने कहा कि जिन राज्यों ने मिशन पर किये गये खर्च की पूरी जानकारी नहीं दी उन्हें पैसा जारी नहीं किया गया। यही कारण है कि यह पैसा वापस ले लिया गया। उन्होंने कहा कि जैसे ही राज्य पूरी जानकारी उपलब्ध करा देते हैं उनका पैसा जारी कर दिया जायेगा। वित्त वर्ष 2026-27 में मिशन के लिए 67,300 करोड़ रुपये का आवंटन किया गया है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 02 Feb 2026 14:13:14 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>डब्ल्यूएचओ में शिखर सम्मेलन 2025 : नई दिल्ली में होगा आयोजन, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के शामिल होने की संभावना </title>
                                    <description><![CDATA[आयुष मंत्रालय, भारत सरकार एवं विश्व स्वास्थ्य संगठन के संयुक्त तत्वावधान में 17 से 19 दिसंबर 2025 तक नई दिल्ली स्थित भारत मंडपम में वैश्विक शिखर सम्मेलन का आयोजन किया जाएगा यह सम्मेलन वैज्ञानिक सत्यापन, डिजिटल स्वास्थ्य, जैव विविधता संरक्षण एवं पारंपरिक चिकित्सा में वैश्विक सहयोग को सुदृढ़ करने पर केंद्रित होगा। इस वैश्विक शिखर सम्मेलन का शुभारम्भ केंद्रीय आयुष राज्य मंत्री प्रतापराव जाधव द्वारा किया जाएगा और समापन समारोह में भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के शामिल होने की संभावना है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/who-summit-2025-will-be-held-in-new-delhi-prime/article-135706"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-12/1200-x-600-px)-(10)2.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। आयुष मंत्रालय, भारत सरकार एवं विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के संयुक्त तत्वावधान में 17 से 19 दिसंबर 2025 तक नई दिल्ली स्थित भारत मंडपम में वैश्विक शिखर सम्मेलन का आयोजन किया जाएगा यह सम्मेलन वैज्ञानिक सत्यापन, डिजिटल स्वास्थ्य, जैव विविधता संरक्षण एवं पारंपरिक चिकित्सा में वैश्विक सहयोग को सुदृढ़ करने पर केंद्रित होगा। इस वैश्विक शिखर सम्मेलन का शुभारम्भ केंद्रीय आयुष राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) प्रतापराव जाधव द्वारा किया जाएगा और समापन समारोह में भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के शामिल होने की संभावना है।<br />राष्ट्रीय आयुर्वेद संस्थान, जयपुर के कुलपति प्रो. संजीव शर्मा ने बताया कि इस वर्ष के शिखर सम्मेलन का मुख्य विषय संतुलन बहाल करना ‘स्वास्थ्य और कल्याण का विज्ञान एवं अभ्यास निर्धारित किया गया है। इस वैश्विक आयोजन में विश्व के 113 से अधिक देशों से मंत्री, नीति निर्माता, स्वास्थ्य विशेषज्ञ, शोधकर्ता, उद्योग प्रतिनिधि एवं चिकित्सक भाग लेंगे। उन्होंने बताया कि इस ऐतिहासिक शिखर सम्मेलन में राष्ट्रीय आयुर्वेद संस्थान, जयपुर के चिकित्सकों का दल भी सहभागी होगा, जो दुनिया भर से आए प्रतिनिधियों को राष्ट्रीय आयुर्वेद संस्थान, जयपुर द्वारा तैयार आयुष उत्पादों, उनकी उपयोगिता एवं वैज्ञानिक आयामों के बारे में विस्तृत जानकारी प्रदान करेगा।</p>
<p>कार्यक्रम के दौरान केंद्रीय आयुष राज्य मंत्री प्रतापराव जाधव ने घोषणा की कि आयुष मंत्रालय भारत के विश्वप्रसिद्ध एवं वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित औषधीय पौधे अश्वगंधा पर एक विशेष सत्र आयोजित करेगा। इसमें पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों से लेकर आधुनिक स्वास्थ्य प्रणाली में अश्वगंधा के प्रभाव और उपयोगिता पर विशेषज्ञ अपने विचार प्रस्तुत करेंगे। 113 से अधिक देशों की सहभागिता के साथ यह शिखर सम्मेलन पारंपरिक, पूरक, एकीकृत एवं स्वदेशी चिकित्सा पद्धतियों के राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्रणालियों में साक्ष्य-आधारित, न्यायसंगत और सतत एकीकरण हेतु एक दशक-लंबी वैश्विक रूपरेखा निर्धारित करेगा। शिखर सम्मेलन के विशेष विचार-विमर्श के अंतर्गत अश्वगंधा-पारंपरिक ज्ञान से वैश्विक प्रभाव तक अग्रणी वैश्विक विशेषज्ञों के दृष्टिकोण विषय पर एक विशेष सत्र 17 से 19 दिसंबर 2025 को आयोजित किया जाएगा। डब्ल्यूएचओ जीटीएमसी द्वारा आयुष मंत्रालय के सहयोग से आयोजित इस कार्यक्रम में विश्व प्रसिद्ध शोधकर्ता, नीति निर्माता एवं चिकित्सक अश्वगंधा के एडाप्टोजेनिक, न्यूरो प्रोटेक्टिव और इम्यूनो मॉड्यूलेटरी गुणों पर आधारित नवीनतम वैज्ञानिक साक्ष्यों पर चर्चा करेंगे।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 12 Dec 2025 13:05:36 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur PS]]></dc:creator>
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                <title>आतंकवाद को जन्म देने वाला पीड़ित होने का दिखावा नहीं कर सकता : अनुपमा सिंह</title>
                                    <description><![CDATA[उन्होंने पाकिस्तान को आड़े हाथों लिया, क्योंकि वह डब्ल्यूएचओ जैसे वैश्विक मंचों का उपयोग झूठ और विक्टिम कार्ड खेलने के लिए करता है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/anupama-singh-cannot-pretend-to-be-a-victim-who-gives/article-114959"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-05/rtroer-(5)2.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। विश्व स्वास्थ्य संगठन के मंच से भारत ने पाकिस्तान को आतंकवाद और झूठे प्रचार के मुद्दे पर तीखा जवाब दिया। भारतीय राजनयिक अनुपमा सिंह ने पाकिस्तान पर सीधा हमला बोलते हुए कहा कि पाकिस्तान आज भी जेहादी आतंकवाद का केंद्र बना हुआ है। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान आतंकवाद को पालता है, पाकिस्तान आतंकवाद को जन्म देता है, वह पीड़ित के रूप में दिखावा नहीं कर सकता। अनुपमा सिंह ने कहा कि आतंकी हमलों के प्रायोजक और आयोजक सीधे पाकिस्तान की धरती से काम करते हैं। उन्होंने पाकिस्तान को आड़े हाथों लिया, क्योंकि वह डब्ल्यूएचओ जैसे वैश्विक मंचों का उपयोग झूठ और विक्टिम कार्ड खेलने के लिए करता है।</p>
<p><strong>सिंधु जल संधि पर भी पाकिस्तान को घेरा</strong><br />भारतीय प्रतिनिधि ने यह भी स्पष्ट किया कि पाकिस्तान बार-बार सिंधु जल संधि को लेकर झूठा प्रचार करता रहा है। पाकिस्तान सिंधु जल संधि पर झूठ फैलाता है, जबकि भारत संधि का पूरी तरह पालन कर रहा है। बता दें कि 22 अप्रैल को पहलगाम में आतंकी हमला हुआ था, इसके बाद भारत ने ऑपरेशन सिंदूर के जरिए इसका बदला लिया, भारत ने पाकिस्तान और पीओके में 9 आतंकी ठिकानों पर हमला किया, इसमें जैश-ए-मोहम्मद का हेडक्वार्टर भी शामिल है।</p>
<p><strong>पाक को बेनकाब करेगा भारत</strong><br />बता दें कि भारत ने ऑपरेशन सिंदूर से आतंक के खिलाफ एक नई लकीर खींच दी है और पाकिस्तान का मुखौटा उतारने का प्लान भी मोदी सरकार ने तैयार कर लिया है, जिससे पाकिस्तान का आतंक वाला चेहरा दुनिया के सामने आ जाएगा। सरकार ने तय किया है कि वो पाकिस्तान के आतंकवाद और ऑपरेशन सिंदूर के बारे में भी दुनिया को बताएगी। इसके लिए भारत की सभी पार्टियों से 51 नेता और 85 राजदूत, 32 अलग-अलग देशों में 7 डेलिगेशन को भेजा जा रहा है। जहां ये डेलिगेशन बताएगा कि कैसे पाकिस्तान आतंकवाद को पालता-पोसता है और ऑपरेशन सिंदूर से भारत ने पाकिस्तान के इसी आतंक पर वार किया था। पाकिस्तान में पल रहे आतंक का सच, दुनिया के सामने उजागर करने का जिम्मा मिलने वाले डेलिगेशन में सिर्फ बीजेपी नहीं, बल्कि देश की सभी पार्टियों के नेता शामिल हैं और इन 7 में से 2 डेलिगेशन बुधवार 21 मई को विदेश रवाना हो रहे हैं। पहला डेलिगेशन जेडीयू के कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा के नेतृत्व में जापान रवाना होगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 22 May 2025 12:23:12 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur PS]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>फिलिस्तीन में भयंकर भूखमरी से जूझ रहे है लाखों लोग : नाकाबंदी के कारण 57 बच्चों की भूख से मौत, डब्ल्यूएचओ ने कहा-  71  हजार बच्चे हो सकते है कुपोषण का शिकार</title>
                                    <description><![CDATA[फिलिस्तीनी आंदोलन हमास द्वारा युद्ध विराम को बढ़ाने की अमेरिकी योजना को अस्वीकार किये जाने के बाद 18 मार्च को, इजरायल ने गाजा पर हमले फिर से शुरू कर दिए।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/millions-of-people-are-struggling-with-fierce-hunger-in-palestine/article-114025"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-05/who.jpg" alt=""></a><br /><p>गाजा सिटी। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने बताया कि गाजा में लगभग 5 लाख लोग भयंकर भूखमरी से जूझ रहे हैं और दो मार्च से शुरू हुई इजरायली नाकाबंदी के बाद से अब तक 57 बच्चों की कुपोषण से मौत हो चुकी है। डब्ल्यूएचओ ने बताया कि दो मार्च 2025 से  शुरू हुई नाकाबंदी के बाद अब तक कुपोषण से 57 बच्चों की मौत हो चुकी है और यह संख्या वास्तविक आंकड़े से कम हो सकती है। डब्ल्यूएचओ के अनुसार, अगर हालात नहीं बदले तो अगले 11 महीनों में पांच साल से कम उम्र के करीब 71 हजार बच्चे कुपोषण का शिकार हो सकते हैं।</p>
<p>गाजा की पूरी 21 लाख आबादी  लंबे समय से खाद्य संकट का सामना कर रही है, जिसमें करीब पांच लाख लोग  कुपोषण, भुखमरी, बीमारी और मौत की स्थिति में हैं। यह दुनिया के सबसे गंभीर  भूख संकटों में से एक है, जो इस समय सामने आ रहा है। फिलिस्तीनी आंदोलन हमास द्वारा युद्ध विराम को बढ़ाने की अमेरिकी योजना को अस्वीकार किये जाने के बाद 18 मार्च को, इजरायल ने गाजा पर हमले फिर से शुरू कर दिए।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 13 May 2025 16:06:37 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur PS]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>डब्ल्यूएचओ सीएसओ कमीशन ने रमेश गांधी को कम्युनिकेशन वर्किंग ग्रुप का सदस्य किया नियुक्त, मुख्यालय ने की घोषणा</title>
                                    <description><![CDATA[डब्ल्यू.एच.ओ. के महानिदेशक डॉ. टेड्रोस एडनॉम घेब्रेयसस और स्वास्थ्य एवं बहुपक्षीय भागीदारी  निदेशक गौडेनज सिल्वरस्मिथ ने भी संबोधित किया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/who-cso-commission-appointed-ramesh-gandhi-as-a-member-of/article-109488"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-04/6622-copy7.jpg" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। विश्व स्वास्थ्य संगठन के सिविल सोसाइटी आयोग की ओर से डॉ. रमेश गांधी को संचार कार्य समूह के सदस्य के रूप में नियुक्त किया गया है। यह घोषणा रूडोल्फ डैडी द्वारा जिनेवा स्थित डब्ल्यूएचओ मुख्यालय से जारी एक ईमेल में की गई। सिविल सोसाइटी कमीशन डब्ल्यूएचओ नेटवर्क का ही  एक अंग जिसके प्रबंधन हेतु एक संचालन समिति, एक जनरल मीटिंग और विशेष कार्य समूह शामिल होते हैं। हाल ही में इस कमीशन की वार्षिक आम बैठक-2025 जेनेवा से हाइब्रिड मोड में आयोजित की गई । इसे डब्ल्यू.एच.ओ. के महानिदेशक डॉ. टेड्रोस एडनॉम घेब्रेयसस और स्वास्थ्य एवं बहुपक्षीय भागीदारी  निदेशक गौडेनज सिल्वरस्मिथ ने भी संबोधित किया। इसमें विभिन्न देशों से 150 सदस्यों ने भाग लिया।</p>
<p>इस मीटिंग में भारत से डॉ. रमेश गांधी ने अपने विचार रखे।  उन्होंने डब्ल्यूएचओ के क्षेत्रीय स्तरों से संसाधन जुटाने की रणनीति विकसित करने के बारे में बात की। उन्होंने विभिन्न देशों की प्रमुख हस्तियों, सिलेब्रिटीज और प्रमुख हितधारकों को उनके देशों की स्थानीय स्वास्थ्य समस्याओं और स्वास्थ्य संबंधी रणनीतिक विकास लक्ष्यों  पर योगदान हेतु शामिल करने का सुझाव दिया। इस विश्वस्तरीय बैठक में भाग लेने के बाद, डॉ. गांधी ने बताया कि आयोग के सदस्य के रूप में दुनिया भर के 750 से अधिक संस्थान हैं। </p>
<p>इनमे सबसे अधिक सदस्यों वाले शीर्ष 16 देशों में अमेरिका, नाइजीरिया, यूनाइटेड किंगडम, केन्या, भारत, स्विट्जरलैंड, युगांडा, बेल्जियम, पाकिस्तान, नेपाल, कनाडा, ब्राजील, बांग्लादेश, आॅस्ट्रेलिया, चीन और मलेशिया शामिल हैं।  सदस्य संख्या के आधार पर इनमें भारत ऊपर से पांचवे स्थान पर आता है। उन्होंने बताया कि संचार कार्य समूह के 3 स्पष्ट उद्देश्य हैं: सीएसओ आयोग के काम की दृश्यता और जागरूकता बढ़ाना। सामूहिक कार्रवाई को बढ़ावा देने के लिए सदस्यों के बीच संबंधों को मजबूत करना।  प्रभावी संचार के माध्यम से विश्वास और समावेशिता को बढ़ावा देना। इस कमिशन में डॉ. गांधी का चयन विभिन्न क्षेत्रों में उनके योगदान और 30 से अधिक वर्षों के अनुभव को देखते हुए किया गया है। उनको रणनीतिक प्रबंधन, हेल्थ कम्युनिकेशन्स, तंबाकू नियंत्रण, सोशल मार्केटिंग, रचनात्मकता क्षेत्रों  का  लंबा  राष्ट्रीय व अंतराष्ट्रीय अनुभव है। इससे पूर्व भी डॉ. गांधी अमेरिका के वॉशिंग्टन डी.सी. में आयोजित वर्ल्ड सोशल मार्केटिंग सम्मेलन, में भारत का प्रतिनिधित्व कर चुके है। उन्होंने मॉस्को में भी डब्ल्यूएचओ की तंबाकू नियंत्रण के विश्व सम्मेलन कोप-6 में  भी साउथ पूर्वी एशिया से पर्यवेक्षक के रूप मे भाग लिया था।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/bharat/who-cso-commission-appointed-ramesh-gandhi-as-a-member-of/article-109488</link>
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                <pubDate>Thu, 03 Apr 2025 12:09:24 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>WHO की रिसर्च में खुलासा : मोबाइल के इस्तेमाल से नहीं होता किसी तरह का कैंसर, रेडियो तरंगों और कैंसर के संपर्क के बीच संबंध पर नहीं मिले साक्ष्य </title>
                                    <description><![CDATA[दुनिया भर में आम तौर पर यह धारणा है कि मोबाइल फोन के अधिक उपयोग से कैंसर जैसी जानलेवा बीमारी का खतरा बढ़ जाता है]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/who-research-does-not-disclose-any-kind-of-cancer-on/article-103143"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-02/untitled-design7.png" alt=""></a><br /><p>'कैनबरा। दुनिया भर में आम तौर पर यह धारणा है कि मोबाइल फोन के अधिक उपयोग से कैंसर जैसी जानलेवा बीमारी का खतरा बढ़ जाता है, लेकिन विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) की ओर से कराए गए एक ताजा शोध में इस आशंका को सिरे से खारिज कर दिया गया है। ऑस्ट्रेलिया की परमाणु एवं विकिरण सुरक्षा एजेंसी (एआरपीएएनएसए) द्वारा किए गए शोध में मोबाइल फोन के उपयोग और विभिन्न कैंसर के बीच कोई संबंध नहीं पाया गया है। डब्ल्यूएचओ द्वारा कराए गए और मंगलवार को प्रकाशित शोध के मुताबिक मोबाइल फोन से निकलने वाली रेडियो तरंगों के संपर्क में आने पर किसी भी प्रकार का कैंसर नहीं होता है। शोध में मोबाइल और ल्यूकेमिया, लिम्फोमा और थायरॉयड तथा मुंह के कैंसर सहित विभिन्न कैंसर के बीच कोई संबंध नहीं पाया गया।</p>
<p>गौरतलब है कि यह एआरपीएएनएसए द्वारा की गई दूसरी डब्ल्यूएचओ-कमीशन व्यवस्थित समीक्षा है। सितंबर 2024 में प्रकाशित पहली समीक्षा में मोबाइल फोन के उपयोग और मस्तिष्क तथा अन्य सिर के कैंसर के बीच संबंध की खोज की गई और कोई संबंध नहीं पाया गया था। दोनों अध्ययनों के मुख्य लेखक एवं एआरपीएएनएसए में स्वास्थ्य प्रभाव आकलन के सहायक निदेशक केन कारिपिडिस ने बताया कि नए शोध में मोबाइल फोन, मोबाइल फोन टावरों और कैंसर के बीच संबंध पर सभी उपलब्ध साक्ष्यों का मूल्यांकन किया गया है। उन्होंने बताया कि शोधकर्ताओं को रेडियो तरंगों के संपर्क और विभिन्न कैंसर के बीच कोई संबंध नहीं मिला, लेकिन टीम मस्तिष्क कैंसर पर समीक्षा की तुलना में परिणामों के बारे में उतनी निश्चित नहीं हो सकती। कारिपिडिस ने कहा कि ऐसा इसलिए है क्योंकि इन कैंसर और वायरलेस तकनीक से रेडियो तरंगों के संपर्क के बीच संबंध पर उतने साक्ष्य नहीं हैं।</p>
<p>अध्ययन में योगदान देने वाले एआरपीएएनएसए के वैज्ञानिक रोहन मेट ने बताया कि निष्कर्ष वायरलेस तकनीक और कैंसर के बारे में जनता को सूचित करने के लिए ज्ञान के भंडार में वृद्धि करेंगे। दोनों व्यवस्थित समीक्षाएं रेडियो तरंगों के संपर्क से स्वास्थ्य प्रभावों पर एक अद्यतन आकलन को सूचित करेंगी जिसे डब्ल्यूएचओ तैयार कर रहा है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>स्वास्थ्य</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/leads/who-research-does-not-disclose-any-kind-of-cancer-on/article-103143</link>
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                <pubDate>Tue, 04 Feb 2025 16:20:17 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>विश्व के लिए चुनौती बनता मानसिक अवसाद</title>
                                    <description><![CDATA[विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार स्वास्थ्य का अर्थ केवल बीमारी न होना और शारीरिक सेहत से नहीं होता। बल्कि स्वास्थ्य सामाजिक, मानसिक और शारीरिक तीनों से जुड़ा है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/opinion/mental-depression-becoming-a-challenge-for-the-world/article-74976"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-04/photo-size-(4)1.png" alt=""></a><br /><p>विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार स्वास्थ्य का अर्थ केवल बीमारी न होना और शारीरिक सेहत से नहीं होता। बल्कि स्वास्थ्य सामाजिक, मानसिक और शारीरिक तीनों से जुड़ा है। इन तीनों में जहां भी व्यक्ति कमजोर है वहां वो अस्वस्थ माना जाता है। उसे सेहतमंद नहीं कह सकते। अच्छी सेहत वाला व्यक्ति वो है, जो इन सभी मानकों पर खुश है और हर स्तर पर अपनी जिम्मेदारी बखूबी निभा रहा है। जो जीवन में सामान्य तनावों का सामना करने में सक्षम है। उत्पादक तरीके से काम करता है। अपने समुदाय में योगदान देने में तैयार है। दरअसल मानसिक स्वास्थ्य का संबंध इंसान के भावनात्मक पहलू से है, जो उसके सोचने, समझने, कार्य करने की शक्ति को प्रभावित करता है। यूं तो मानसिक विकार कई तरह के होते हैं। मसलन डिमेंशिया, तनाव, चिंता, भूलना, अवसाद, डिस्लेसिया आदि। लेकिन इन सभी में अवसाद ऐसा मनोविकार है जिससे पूरी दुनिया त्रस्त है। हर आयु, वर्ग का व्यक्ति आज मानसिक अवसाद के दौर से गुजर रहा है। इस अवसाद के तमाम कारण सामने आ रहे हैं।</p>
<p>डब्लूएचओ के अनुसार पिछले एक दशक में तनाव और अवसाद के मामले में 18 प्रतिशत की बढ़ोत्तरी हुई है। भारत की करीब 6.5 प्रतिशत से 7.5 प्रतिशत आबादी मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रही है। भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने भी मेंटल हेल्थ के मुद्दे के प्रति न्यायपालिका को संवेदनशील होने पर जोर देते हुए कहा कि किसी व्यक्ति के मानसिक स्वास्थ्य को वनसाइज फिट फॉर ऑल के दृष्टिकोण से नहीं देखा जाना चाहिए। अच्छी मेंटल हेल्थ हर व्यक्ति का मानवाधिकार है। जिससे उसे वंचित नहीं किया जा सकता। गौरतलब है कि मेंटल स्ट्रेस आनुवांशिक, सामाजिक, आर्थिक, पारिवारिक हर तरह की हो सकती है। इस अवस्था से किसी इंसान को बाहर निकालना आज के समय में सबसे बड़ी चुनौती है। जिससे डॉक्टर और एक्सपर्ट्स भी परेशान हैं। देखा गया है कि कई बार प्रारंभिक जीवन के बुरे अनुभव, हादसे और घटनाएं मन को इतना इफेक्ट करती हैं कि उनके असर से इंसान मेंटली इल हो जाता है। एक प्रकार के मनोविकारों का शिकार हो जाता है। ये मनोविकार और नकारात्मकता उसके मन और सेहत दोनों को खराब करती जाती है। मानसिक अवसाद का बड़ा कारण बेरोजगारी और गरीबी भी है। 2011 की जनगणना के अनुसार देखें तो आंकड़े बताते हैं कि मानसिक रोगों से ग्रस्त करीब 78.62 प्रतिशत लोग बेरोजगारी से जूझ रहे हैं। आज युवाओं में बढ़ते आत्महत्या के मामले भी इसकी पुष्टि करते हैं। कि बेरोजगारी से परेशान युवा इस कदर मानसिक नकारात्मकता के दौर से गुजर रहे हैं कि वो सुसाइड जैसा गंभीर कदम उठाने को मजबूर हैं। ये आंकड़े इशारा करते हैं कि युवाओं में तेजी से मानसिक अवसाद फैल रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार जब किसी देश की आर्थिक हालत गंभीर होती है तो वहां मानसिक अवसाद भी बढ़ जाता है।</p>
<p>डब्लूएचओ ने 2013 में मानसिक स्वास्थ्य को शारीरिक स्वास्थ्य के बराबर महत्व देते हुए वर्ल्ड हेल्थ एसेंबली में एक व्यापक मानसिक स्वास्थ्य कार्य योजना को मंजूरी दी थी। जो 2013-2020 तक के लिए थी। इस कार्य योजना में सभी देशों ने मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाने की कसम खाई थी। भारत ने भी इस कार्य योजना को अपने यहां लागू किया था। लेकिन आज भी भारत में मेंटल हेल्थ के हालात भयावह हैं। इसके पीछे तमाम कारण है। इसमें बड़ा कारण मेंटल हेल्थ पर खर्च होने वाला बजट है। आज भी भारत में मानसिक स्वास्थ्य पर किया जाने वाला व्यय बहुत कम है। भारत अपने कुल सरकारी स्वास्थ्य व्यय का मात्र 1.3 प्रतिशत ही मेंटल हेल्थ पर खर्च करता है। 2011 की जनगणना के अनुसार 1.5 मिलियन लोग बौद्धिक अक्षमता और तकरीबन 722826 लोग मनोसामाजिक दिव्यांगता का शिकार हुए थे।<br />यह संख्या पिछले दस सालों में करीब दोगुनी हो गई है। लेकिन उस पर खर्च होने वाला बजट आज भी कम है। विशेषज्ञ मानते हैं कि भारत में मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों, की कमी भी एक महत्वपूर्ण कारण है। डब्लूएचओ के अनुसार साल 2011 में भारत में मेंटल इलनेस से पीड़ित प्रत्येक एक लाख रोगियों के लिए 0.301 मनोचिकित्सक और 0.07 मनोवैज्ञानिक थे। यह हालत पिछले दस सालों में बहुत बेहतर नहीं हुई है। आंकड़े बताते हैं कि साल 2017 में भारत की विशाल जनसंख्या के लिए मात्र 5 हजार मनोचिकित्सक और 2000 से भी कम मनोवैज्ञानिक थे।वहीं कॉमनवेल्थ देशों के नियमानुसार प्रति दस हजार पर पांच मनोचिकित्सक होना चाहिए। हाल में जारी वैश्विक प्रसन्नता सूचकांक के आंकड़े दर्शाते हैं कि भारत में पुरुषों की अपेक्षा महिलाएं कम प्रसन्न और तनावग्रस्त अधिक होती हैं। इसलिए यहां महिला आत्महत्या दर पुरुषों से कहीं ज्यादा है। दरअसल भारत में घरेलू हिंसा, कम उम्र में शादी, युवा मातृत्व, लैंगिक भेदभाव काफी है। जो महिलाओं में मानसिक अवसाद और मनोविकारों का प्रमुख कारण है।</p>
<p><strong>-सीमा अग्रवाल</strong><br /><strong>(ये लेखक के अपने विचार हैं)</strong></p>
<p> </p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>ओपिनियन</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 12 Apr 2024 11:00:09 +0530</pubDate>
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                <title>हैजे के बढ़ते प्रकोप पर WHO ने जताई चिंता, कहा- निपटने के लिए पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध नहीं है वैक्सीन</title>
                                    <description><![CDATA[वैक्सीन प्रावधान पर डब्ल्यूएचओ के अंतरराष्ट्रीय समन्वय समूह (आईसीजी) ने बुधवार को टीकों के अपर्याप्त उत्पादन का हवाला देते हुए उत्पादन बढ़ाने के लिए प्रयास करने का आह्वान किया। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/who-expressed-concern-over-the-increasing-outbreak-of-cholera--said--vaccine-is-not-available-in-sufficient-quantity-to-deal-with-it/article-73402"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-04/who1.jpg" alt=""></a><br /><p>जिनेवा (एजेंसी)/स्पूतनिक)। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने दुनिया भर में हैजे के मामलों में बहुत तेजी से हो रही वृद्धि से निपटने के लिए टीकों के उत्पादन को बढ़ाने का 'तत्काल प्रयास' करने का आह्वान किया है।</p>
<p>वैक्सीन प्रावधान पर डब्ल्यूएचओ के अंतरराष्ट्रीय समन्वय समूह (आईसीजी) ने बुधवार को टीकों के अपर्याप्त उत्पादन का हवाला देते हुए उत्पादन बढ़ाने के लिए प्रयास करने का आह्वान किया। संगठन ने बुधवार को अपनी वेबसाइट पर कहा, ''अक्टूबर 2022 में, चल रही वैक्सीन की कमी के कारण आईसीजी को एकल वैक्सीन खुराक की सिफारिश करने की जरूरत पड़ी, जो कि पहले लम्बे समय से चली आ रही दो-खुराक व्यवस्था से कम है। पिछले साल लगभग तीन करोड़ 60 लाख खुराक का उत्पादन किया गया था, जबकि 14 प्रभावित देशों ने सात करोड़ 20 लाख की आवश्यकता दर्ज की गयी थी। ये अनुरोध वास्तविक आवश्यकता से कम हैं।''</p>
<p>बयान में कहा गया है कि 2024 में हैजा के टीकों की वैश्विक उत्पादन क्षमता तीन से पांच करोड़ खुराक होने का अनुमान है ''लेकिन यह हैजा से सीधे प्रभावित लाखों लोगों की जरूरतों को पूरा करने के लिए अपर्याप्त रहेगी।'' केवल एक कंपनी ईयू बायोलोजिक्स इस टीके का उत्पादन करती है, जिसकी वजह से उत्पादन क्षमता सीमित है।</p>
<p>कंपनी उत्पादन को अधिकतम करने की पूरी कोशिश कर रही है, लेकिन इतना काफी नहीं है। नए निर्माताओं के 2025 से पहले बाजार में शामिल होने की उम्मीद नहीं है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 21 Mar 2024 20:17:09 +0530</pubDate>
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                <title>WHO ने कोरोना से खतरों की दी चेतावनी</title>
                                    <description><![CDATA[ कोविड संक्रमण से पहले से अब से मृतकों की संख्या में भारी कमी आई है, फिर भी 50 देशों से प्रति माह लगभग 10 हजार मौतें होती हैं। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/who-warned-of-dangers-from-covid/article-66859"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-02/covid02-copy.jpg" alt=""></a><br /><p>जिनेवा। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के एक वरिष्ठ विशेषज्ञ ने कहा है कि कोविड -19 वायरस सभी देशों में फैल रहा है, जो चिंता का विषय है। कोविड-19 से रोकथाम के लिए डब्ल्यूएचओ की अंतरिम निदेशक मारिया वैन केरखोव ने जेनेवा में संवाददाता सम्मेलन में कहा कि कोविड -19 का वास्तविक प्रसार रिपोर्ट किए गए मामलों की संख्या से दो से 19 गुना अधिक है। उन्होंने कई अंगों को प्रभावित करने वाली कोविड बाद की स्थितियों पर चिंता व्यक्त जताई है।</p>
<p>उन्होंने कहा कि कोविड संक्रमण से पहले से अब से मृतकों की संख्या में भारी कमी आई है, फिर भी 50 देशों से प्रति माह लगभग 10 हजार मौतें होती हैं। उन्होंने कोविड-19 जेएन1 संस्करण को लेकर ङ्क्षचता व्यक्त की है। केरखोव ने कहा कि जेएन-1 संस्करण का अभी तक इसका कोई इलाज उपलब्ध नहीं है क्योंकि यह अभी भी नया हैतथा इस क्षेत्र पर अपर्याप्त ध्यान दिया गया है और पर्याप्त फंङ्क्षडग नहीं की गई है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 13 Jan 2024 17:37:05 +0530</pubDate>
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                <title>चीन में फैली फेफड़ों की नई बीमारी, डब्ल्यूएचओ ने चेताया</title>
                                    <description><![CDATA[चीन में बच्चों की एक नई बीमारी सामने आई है। इस बीमारी को लेकर चीनी सरकार ने भी चेताया है। इस बीमारी की वजह से बच्चों में कई प्रकार के लक्षण देखे जा रहे है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/who-warns-of-new-lung-disease-spreading-in-china/article-62990"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-11/who.png" alt=""></a><br /><p>चीन में बच्चों की एक नई बीमारी सामने आई है। इस बीमारी को लेकर चीनी सरकार ने भी चेताया है। इस बीमारी की वजह से बच्चों में कई प्रकार के लक्षण देखे जा रहे है। इस बीमारी के दौरान बच्चों के फेफड़ों में जलन, तेज बुखार, खांसी और जुकाम जैसे लक्षण देखे जा रहे हैं। </p>
<p>चीन से डराने वाले इस वायरस को लेकर विश्व स्वास्थ्य संगठन ने भी चेतावनी जारी कर दी है। मीडिया रिपोर्टस के मुताबिक चीन के उत्तर पूर्वी इलाके में स्थित लियाओनिंग प्रांत के बच्चे तेजी से बीमार पड़ रहे हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 27 Nov 2023 17:25:54 +0530</pubDate>
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