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                <title>hijab - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <title>कर्नाटक में हिजाब पर फिर उपजा विवाद</title>
                                    <description><![CDATA[सबसे अधिक कड़ी प्रतिक्रिया मुख्य विपक्षी दल  बीजेपी की ओर से आई। लगभग दो साल पहले जब राज्य में बीजेपी की सरकार थी तब एक आदेश जारी किया गया था  कि स्कूल के छात्र और छात्राएं कक्षा निर्धारित यूनिफार्म  ही पहनकर आएं न कि अन्य कोई वस्त्र।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/opinion/controversy-over-hijab-erupts-again-in-karnataka/article-65634"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-01/hijab-ban.png" alt=""></a><br /><p>कुछ दिन पूर्व मुस्लिम बहुल इलाके में एक समारोह में बोलते हुए कर्नाटक के मुख्यमंत्री  सिद्धारमैया ने यह  घोषणा की कि स्कूलों में मुस्लिम छात्राओं पर कक्षा में हिजाब पहन कर आने पर पाबन्दी को हटाया जा रहा है। इसके लिए अधिकारियों को निर्देश दे दिए गए हैं कि वे इस संबंध में सरकारी अधिसूचना शीघ्र जारी कर दें। अगले दिन उनकी यह खबर अखबारों की सुर्खियों में थी। इसको लेकर  राजनीतिक तथा सामाजिक हलकों में तीव्र प्रतिक्रिया हुई। शाम होते-होते मुख्यमंत्री की ओर से यह स्पष्ट किया गया कि इस बारे में अभी कोई निर्णय नहीं किया गया है। अभी इस मुद्दे पर विचार-विमर्श जारी है।<br /><br />सबसे अधिक कड़ी प्रतिक्रिया मुख्य विपक्षी दल  बीजेपी की ओर से आई। लगभग दो साल पहले जब राज्य में बीजेपी की सरकार थी तब एक आदेश जारी किया गया था  कि स्कूल के छात्र और छात्राएं कक्षा निर्धारित यूनिफार्म  ही पहनकर आएं न कि अन्य कोई वस्त्र। तब तटवर्तीय  इलाके में कुछ मुस्लिम छात्राओं ने इसका विरोध कर कक्षा में हिजाब पहनकर आने के लिए धरना दिया। इसी बीच कुछ मुस्लिम संगठनों ने कहा कि हिजाब पहनना इस्लाम का एक जरूरी अंग हैं। अगर उन्हें हिजाब पहनने की इजाजत नहीं दी जाती तो यह उनके मूलभूत अधिकारों का हनन  होगा। कुछ स्कूलों में छात्राओं ने अपनी कक्षाओं  का वहिष्कार तक करना शुरू कर दिया। इसी दौरान वार्षिक परीक्षाओं का दौर शुरू हो गया। हिजाब पहनने की इजाजत नहीं होने के चलते छात्राओं के कई अभिवावकों ने उन्हें परीक्षा में  नहीं बैठने के लिए कहा। दूसरी ओर बीजेपी के नजदीक समझे जाने वाले छात्र संगठनों ने ऐलान कर दिया कि अगर मुस्लिम छात्राओं को हिजाब पहनने की इजाजत दी गई तो वे कक्षा में भगवे रंग का गमछा पहनकर आएंगे। कुछ स्कूलों में तो इसको लेकर हिन्दू और मुस्लिम् छात्र एक दूसरे से टकराने तक को आ गए। उन दिनों जो फोटो सबसे अधिक वायरल हुई वह मुस्कान नाम की एक मुस्लिम  छात्रा की थी। बाद में यही पिक्चर हिजाब को लेकर मुस्लिम समुदाय के विरोध के रूप में उनके आन्दोलन का चेहरा बन  गई। इसी बीच कुछ मुस्लिम संगठनों ने कर्नाटक हाई कोर्ट में एक याचिका दायर कर हिजाब पर प्रतिबंध लगाने  वाली सरकारी अधिसूचना को स्थगित करने की गुहार लगाई। याचिक दायर करने वालों का दावा था कि हिजाब मुस्लिम महिलाओं की वेशभूषा का अभिन्न अंग है। इसे पहनने पर रोक लगाना संवैधानिक अधिकारों का हनन है।  लेकिन कोर्ट ने अधिसूचना पर रोक लगाने से इंकार कर दिया। बाद में इस मुद्दे पर कोर्ट में लम्बी बहस के बाद  माननीय जजों ने फैसला सुनाया, जिसमें कहा गया कि हिजाब इस्लाम का अंग नहीं है। इन संगठनों ने इस फैसले को सर्वोच्च न्यायलय में चुनौती दी जहां अभी इस पर  सुनवाई लंबित है। जिस समय हिजाब पहनने पर प्रतिबन्ध लगाया गया उस समय राज्य में कांग्रेस प्रमुख विपक्षी दल था। तब इस पार्टी के नेताओं ने बीजेपी सरकार के इस निर्णय की निंदा  की थी। इन नेताओं ने कहा था कि अगर निकट भविष्य उनकी पार्टी की सरकार बनती है तो यह निर्णय वापस कर लिया जाएगा।<br /><br />बताया जाता है कि सिद्धारमैया ने अपनी पार्टी के किसी भी बड़े नेता से विचार-विमर्श किए बिना ही हिजाब पर प्रतिबन्ध हटाए जाने की घोषणा कर दी थी। सबसे अधिक रोष उप मुख्यमंत्री  डी.के. शिवकुमार ने व्यक्त किया। शिवकुमार राज्य कांग्रेस पार्टी के अध्यक्ष भी है। जब सिद्धारमैया को मुख्यमंत्री बनाया गया था उनको साफतौर पर कहा गया था कि वे सरकार के सभी निर्णय शिवकुमार से विचार- विमर्श करके ही करेंगे। ऐसा माना है कि शिवकुमार और पार्टी कई अन्य बड़े नेताओं की राय है कि इस मुद्दे को लोकसभा के चुनाव होने तक ठन्डे बस्ते में रहने दिया जाए। अगर हिजाब पहनने पर लगे प्रतिबन्ध को हटाया जाता है  बीजेपी इसे बड़ा चुनावी मुद्दा बना लेगी जिसका नुकसान  कांग्रेस पार्टी को ही होगा।<br /><br />पार्टी की नेताओं का कहना है कि पार्टी आलाकमान का भी यह मत है कि इस मामले पर फिलहाल चुप्पी रखी जाए। बीजेपी के हाथ कोई भी ऐसा मुद्दा नहीं दिया जाना चाहिए, जिससे पार्टी को लोकसभा चुनावों में फायदा हो।  पिछले लोकसभा चुनावों में बीजेपी ने कुल 28 सीटों में से 26 पर जीत दर्ज की थी। बीजेपी इस जीत को दोहराने की कोशिश में है। राज्य कांग्रेस के नेताओं ने पार्टी आलाकमान का विश्वास दिलाया है कि वे लोकसभा चुनावों में पार्टी का परचम लहराएंगे।<br /><br />-लोकपाल सेठी<br />(ये लेखक के अपने विचार हैं)</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>ओपिनियन</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 01 Jan 2024 10:05:03 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur]]></dc:creator>
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                <title>कश्मीर में हिजाब को लेकर विवाद, स्कूल में एंट्री नहीं मिलने पर भड़की छात्राएं</title>
                                    <description><![CDATA[ एक प्राइवेट निजी हायर सेकेंडरी स्कूल प्रशासन ने अबाया  पहनकर आने वाली छात्राओं को स्कूल में घुसने की अनुमति नहीं दी। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/controversy-over-hijab-in-kashmir-girl-students-raging-for-not/article-48259"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-06/630-400-size-(7)1.png" alt=""></a><br /><p>श्रीनगर। जम्मू-कश्मीर में हिजाब को लेकर एक बार फिर हंगामा व विवाद शुरू हो गया है। ताजा मामला श्रीनगर से सामने आया है, जहां एक प्राइवेट निजी हायर सेकेंडरी स्कूल प्रशासन ने अबाया (एक तरह का हिजाब होता है जो सिर से लेकर पेट तक का होता है, इसमें सिर्फ चेहर खुला होता है) पहनकर आने वाली छात्राओं को स्कूल में घुसने की अनुमति नहीं दी। इसके बाद वहां पर हंगामा शुरू हो गया।</p>
<p>आंदोलनरत छात्राओं का कहना है कि यह हमारे अल्लाह का फरमान है। हम नहींं निकालेंगे। स्कूल आने वाली कई छात्राओं ने प्रशासन के इस फैसले का विरोध किया है। श्रीनगर के एक स्कूल में छात्राओं के एक समूह द्वारा कथित रूप से स्कूल में अबाया पहनने की अनुमति नहीं देने पर स्कूल प्रशासन के खिलाफ प्रदर्शन करने के बाद विवाद खड़ा हो गया।</p>
<p>विश्व भारती हायर सेकेंडरी स्कूल के छात्रों का आरोप है कि उन्हें अबाया पहनकर स्कूल परिसर में प्रवेश नहीं करने दिया जा रहा है। स्कूल के प्रधानाचार्य ने आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया और कहा कि छात्राओं को उचित ड्रेस कोड का पालन करने के लिए कहा गया था और केवल अबाया पहने बिना कक्षाओं में जाने के लिए कहा गया था।</p>
<p>स्कूल की छात्राओं ने गुरुवार को अबाया पहनने पर वर्जित करने के लिए स्कूल प्रशासन के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 08 Jun 2023 20:15:25 +0530</pubDate>
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                <title>पीओके शिक्षा विभाग ने शिक्षिकाओं, छात्राओं के लिए हिजाब अनिवार्य किया</title>
                                    <description><![CDATA[सर्कुलर में चेतावनी दी कि यदि निर्देशों का उल्लंघन किया गया, तो संबंधित संस्थानों के प्रमुखों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्यवाही शुरू की जाएगी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/pok-education-department-made-hijab-mandatory-for-female-teachers/article-39169"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-03/site-photo-size-(15)1.jpg" alt=""></a><br /><p>इस्लामाबाद। पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर के शिक्षा विभाग ने सह-शिक्षण संस्थानों में छात्राओं और शिक्षिकाओं के लिए हिजाब पहनना अनिवार्य कर दिया है। पाकिस्तानी अखबार डॉन की रिपोर्ट में कहा गया है कि इस संबंध में 24 फरवरी को एक सर्कुलर जारी किया गया था।  पीओके के प्रारंभिक एवं माध्यमिक शिक्षा महानिदेशालय (पुरुष) के उप निदेशक के हस्ताक्षर वाले सर्कुलर में कहा गया है कि यह देखा गया है कि जहां सह-शिक्षा का संचालन होता है, वहां छात्राएं /शिक्षिकाएं  हिजाब नहीं पहनती हैं। इसलिए पारित निर्देशों के तहत छात्राओं/शिक्षिकाओं को हिजाब पहनने के लिए सख्ती से बाध्य किया जाना चाहिए।</p>
<p>सर्कुलर में चेतावनी दी कि यदि निर्देशों का उल्लंघन किया गया, तो संबंधित संस्थानों के प्रमुखों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्यवाही शुरू की जाएगी। डॉन के अपनी रिपोर्ट में प्रारंभिक एवं माध्यमिक शिक्षा मंत्री दीवान अली खान चुगताई के हवाले से कहा, हमने इसे खुदा और उनके दूत (उस पर शांति) के आदेश  के पालन में किया है, जिसमें महिलाओं को हिजाब पहनने और पुरुषों को अपनी निगाहें नीची करने के लिए कहा गया है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 07 Mar 2023 11:33:28 +0530</pubDate>
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                <title>हिजाब पहनकर परीक्षा देने संबंधी छात्राओं की याचिका पर होली बाद सुनवाई</title>
                                    <description><![CDATA[याचिकाकर्ताओं के अधिवक्ता ने कहा कि छात्राओं को पहले ही एक साल का नुकसान हो चुका है। अगर कोई राहत नहीं दी जाती है तो उनका एक साल और बर्बाद हो जाएगा।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/hearing-after-holi-on-petition-of-girl-students-to-appear/article-38891"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-03/site-photo-size-(3)1.jpg" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। उच्चतम न्यायालय कर्नाटक की प्री-यूनिवर्सिटी कॉलेजों में हिजाब पहनकर वार्षिक परीक्षा में शामिल होने की अनुमति देने की मांगी वाली छात्राओं की एक समूह की याचिका पर होली की छुट्टियों के बाद सुनवाई करेगा।</p>
<p>मुख्य न्यायाधीश डी. वाई. चंद्रचूड़ और न्यायमूर्ति जे. बी. पारदीवाला और न्यायमूर्ति पी.एस. नरसिम्हा की पीठ ने शुक्रवार को तत्काल सुनवाई की गुहार ठुकराते हुए कहा कि वह याचिका पर सुनवाई के लिए होली की छुट्टियों के बाद एक पीठ का गठन कर याचिकाकर्ता छात्राओं की अंतरिम गुहार पर विचार करेगी।</p>
<p>याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश अधिवक्ता ने इस मामले को विशेष उल्लेख के दौरान उठाते हुए शीघ्र सुनवाई की गुहार लगाई थी। अधिवक्ता ने कहा कि इस मामले को उन्होंने जनवरी और फरवरी में भी सुनवाई करने की गुहार लगाई थी।</p>
<p>पीठ की अध्यक्षता कर रहे न्यायमूर्ति चंद्रचूड़ ने कहा कि वह इस मामले पर होली के बाद सुनवाई कर सकते हैं। इस पर याचिकाकर्ता ने गुहार लगाते हुए कहा कि अगले 09 मार्च से परीक्षा शुरू होनी है। </p>
<p>पिछली सुनवाई के दौरान 22 फरवरी को याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता शादान फरासत ने दावा किया था कि  छात्राओं को मार्च की वार्षिक परीक्षाओं में शामिल होना है। छात्राएं हिजाब पहनकर उस परीक्षा में बैठने की अनुमति चाहती हैं। </p>
<p>याचिकाकर्ताओं के अधिवक्ता ने कहा कि छात्राओं को पहले ही एक साल का नुकसान हो चुका है। अगर कोई राहत नहीं दी जाती है तो उनका एक साल और बर्बाद हो जाएगा।</p>
<p>अधिवक्ता शादान फरासत ने पीठ के समक्ष तर्क देते हुए कहा था कि हिसाब विवाद के कारण इन छात्राओं ने पहले ही अपना स्थानांतरण निजी कॉलेजों में करा लिया था, लेकिन उन्हें परीक्षाओं में शामिल होने के लिए सरकारी कॉलेजों में जाना पड़ता है। अधिवक्ता ने इस मामले में अंतरिम राहत देने की गुहार लगाई। छात्राओं की ओर से ऐसा ही अनुरोध 23 जनवरी को भी किया गया था।</p>
<p>शीर्ष अदालत ने 13 अक्टूबर 2022 को प्री-यूनिवर्सिटी कॉलेजों में हिजाब पहनने पर कर्नाटक सरकार के प्रतिबंध की वैधता पर एक खंडित फैसला दिया था। इस मामले की सुनवाई न्यायाधीशों की पीठ के समक्ष की जानी थी।</p>
<p>शीर्ष न्यायालय की न्यायमूर्ति हेमंत गुप्ता (सेवानिवृत्त) और न्यायमूर्ति सुधांशु धूलिया की पीठ ने कहा था कि चूंकि विचारों में भिन्नता है, इसलिए इस मामले विचार के लिए एक बड़ी पीठ स्थापित करने के लिए भारत के मुख्य न्यायाधीश के समक्ष भेजा जाएगा।</p>
<p>न्यायमूर्ति गुप्ता ने कर्नाटक उच्च न्यायालय के 15 मार्च 2022 के उस फैसले को चुनौती देने वाली याचिकाओं को खारिज कर दिया था, जिसमें एक समुदाय को अपने धार्मिक प्रतीकों को पहनने की अनुमति देना धर्मनिरपेक्षता के विपरीत माना गया था।</p>
<p>न्यायमूर्ति गुप्ता के विपरीत न्यायमूर्ति धूलिया ने अपने फैसले में अपील की अनुमति देने और 05 फरवरी 2022 को राज्य सरकार द्वारा जारी उस अधिसूचना को रद्द करने से असहमति जताई थी, जिसमें हिजाब पहनकर कॉलेजों में पर प्रतिबंध लगाया गया था।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 03 Mar 2023 15:14:34 +0530</pubDate>
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                <title>शीर्ष न्यायालय हिजाब पहनकर परीक्षा देने की याचिका पर करेगा सुनवाई</title>
                                    <description><![CDATA[न्यायमूर्ति गुप्ता ने कर्नाटक उच्च न्यायालय के 15 मार्च 2022 के उस फैसले को चुनौती देने वाली याचिकाओं को खारिज कर दिया था, जिसमें एक समुदाय को अपने धार्मिक प्रतीकों को पहनने की अनुमति देना धर्मनिरपेक्षता के विपरीत माना गया था।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/supreme-court-will-hear-the-petition-to-give-exam-wearing/article-37952"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-02/z-1.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। उच्चतम न्यायालय ने बुधवार को कहा कि वह कर्नाटक की प्री-यूनिवर्सिटी कॉलेजों में हिजाब पहनकर वार्षिक परीक्षा में शामिल होने की अनुमति देने की मांग वाली छात्राओं की एक समूह की याचिका पर सुनवाई करेगा।</p>
<p>मुख्य न्यायाधीश डी. वाई. चंद्रचूड़ और न्यायमूर्ति पी.एस. नरसिम्हा की पीठ ने याचिका पर सुनवाई के लिए सहमति व्यक्त करते हुए कहा कि छात्राओं की गुहार पर विचार किया जाएगा।</p>
<p>याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता शादान फरासत ने दावा किया कि उन्हें मार्च से शुरू होने वाली वार्षिक परीक्षाओं में शामिल होना है। छात्राएं हिजाब पहनकर उस परीक्षा में बैठने की अनुमति चाहती हैं। उन्होंने कहा कि छात्राओं को पहले ही एक साल का नुकसान हो चुका है। अगर कोई राहत नहीं दी जाती है तो उनका एक साल और बर्बाद हो जाएगा।</p>
<p>अधिवक्ता शादान फरासत ने पीठ के समक्ष तर्क देते हुए कहा कि हिसाब विवाद के कारण इन छात्राओं ने पहले ही अपना स्थानांतरण निजी कॉलेजों में करा लिया था, लेकिन उन्हें परीक्षाओं में शामिल होने के लिए सरकारी कॉलेजों में जाना पड़ता है। अधिवक्ता ने इस मामले में अंतरिम राहत देने की गुहार लगाई। छात्राओं की ओर से ऐसे ही अनुरोध 23 जनवरी को भी किया गया था।</p>
<p>शीर्ष अदालत ने 13 अक्टूबर 2022 को प्री-यूनिवर्सिटी कॉलेजों में हिजाब पहनने पर कर्नाटक सरकार के प्रतिबंध की वैधता पर एक खंडित फैसला दिया था। इस मामले की सुनवाई न्यायाधीशों की पीठ के समक्ष किया जाना था।</p>
<p>शीर्ष न्यायालय की न्यायमूर्ति हेमंत गुप्ता (सेवानिवृत्त) और न्यायमूर्ति सुधांशु धूलिया की पीठ ने कहा था कि चूंकि विचारों में भिन्नता है, इसलिए इस मामले विचार के लिए एक बड़ी पीठ स्थापित करने के लिए भारत के मुख्य न्यायाधीश के समक्ष भेजा जाएगा।</p>
<p>न्यायमूर्ति गुप्ता ने कर्नाटक उच्च न्यायालय के 15 मार्च 2022 के उस फैसले को चुनौती देने वाली याचिकाओं को खारिज कर दिया था, जिसमें एक समुदाय को अपने धार्मिक प्रतीकों को पहनने की अनुमति देना धर्मनिरपेक्षता के विपरीत माना गया था।</p>
<p>न्यायमूर्ति गुप्ता के विपरीत न्यायमूर्ति धूलिया ने अपने फैसले में अपील की अनुमति देने और पांच फरवरी 2022 को राज्य सरकार द्वारा जारी उस अधिसूचना को रद्द करने से असहमति जताई थी, जिसमें हिजाब पहनकर कॉलेजों में पर प्रतिबंध लगाया गया था।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 22 Feb 2023 13:13:02 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>ईरानी एथलीट ने बिना हिजाब पहने जीता मेडल, अब हो गई लापता</title>
                                    <description><![CDATA[सोमवार की सुबह ईरानी टीम के दक्षिण कोरिया से रवाना होने के बावजूद रेकाबी के दोस्त रविवार रात से उससे संपर्क नहीं कर पा रहे हैं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/khel/iranian-athlete-won-medal-without-wearing-hijab--now-missing/article-27046"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-10/k-11.jpg" alt=""></a><br /><p>सियोल/तेहरान। आईएफएससी विश्व चैंपियनशिप में पदक जीतने वाली पहली ईरानी महिला एल्नाज रेकाबी बिना हिजाब के दक्षिण कोरिया में प्रतिस्पर्धा करने के बाद लापता हो गई हैं। 33 साल की रेकाबी ईरान के इस्लामी गणराज्य के अनिवार्य हिजाब नियम का उल्लंघन करने वाली दूसरी महिला एथलीट हैं। </p>
<p>सोमवार की सुबह ईरानी टीम के दक्षिण कोरिया से रवाना होने के बावजूद रेकाबी के दोस्त रविवार रात से उससे संपर्क नहीं कर पा रहे हैं। रेकाबी ने फ़्रांस स्थित यूरोपीय मीडिया आउटलेट यूरोन्यूज को 2016 में दिए गए साक्षात्कार में प्रतियोगिताओं के दौरान हिजाब पहनने पर कहा था कि शुरुआत में, यह अन्य एथलीटों के लिए थोड़ा विचित्र था। वे एक लड़की को लेकर उत्सुक थे जो उसके सिर पर एक स्कार्फ और एक ऐसी पोशाक पहने हुए थी जो इतने गर्म तापमान में बाहों और पैरों को ढकती थी। निश्चित रूप से गर्म मौसम में हिजाब एक समस्या बन जाता है।</p>
<p>उन्होंने कहा था कि प्रतियोगिता के दौरान आपके शरीर को गर्मी को बाहर निकालने की जरूरत होती है, लेकिन हमने खुद एक ऐसी पोशाक बनाने की कोशिश की है जो हिजाब का सम्मान करती है और चढ़ाई के खेल के अभ्यास के अनुकूल है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>खेल</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 18 Oct 2022 15:35:52 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>ईरान: हिजाब के खिलाफ प्रदर्शन चौथे सप्ताह भी जारी, टीवी चैनल हैक</title>
                                    <description><![CDATA[राजधानी तेहरान में भी शनिवार को प्रदर्शन हुए। ईरान के प्रमुख शिक्षा केंद्र शरीफ यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्नोलॉजी के समीप भी प्रदर्शन हुए, जिसके बाद प्राधिकारियों ने अगले आदेश तक परिसर को बंद कर दिया है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/iran-protest-against-hijab-continues-for-fourth-week-tv-channel/article-26013"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-10/v-3.jpg" alt=""></a><br /><p>सुलेमानिया। ईरान में कई स्थानों पर शनिवार को सरकार विरोधी प्रदर्शन हुए जिनमें कम से कम दो लोगों की मौत हो गयी। शनिवार को प्रदर्शन का चौथा सप्ताह शुरू हुआ। पुलिस हिरासत में 22 वर्षीय महसा अमीनी की मौत के बाद ईरान में हिजाब विरोधी प्रदर्शन हो रहे हैं। पुलिस ने अमीनी को कथित रूप से देश के कड़े इस्लामी ड्रेस कोड के उल्लंघन के आरोप में हिरासत में लिया था। प्रदर्शनकारी महिलाओं ने सरकार विरोधी नारे लगाए और अनिवार्य धार्मिक ड्रेस कोड का विरोध करते हुए अपने हिजाब उतारकर फेंक दिए। कुछ इलाकों में हड़ताल के आ"ान के कारण तथा नुकसान से बचने के लिए व्यापारियों ने दुकानें बंद रखीं। शनिवार को ईरान के सरकारी टीवी को शाम के समाचार प्रसारण के दौरान 15 सेकंड तक हैक कर लिया गया। इस दौरान देश के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खमेनी की फुटेज प्रसारित की गयी। हैकरों ने आग की लपटों से घिरी खमेनी की तस्वीर प्रसारित की। इसके कैप्शन में लिखा था, आपके पंजों से हमारे युवाओं का खून टपक रहा है।<br /><br /><strong>सुरक्षाबलों के सामने हॉर्न बजाने पर मारी गोली</strong><br />अमीनी की मौत के बाद से ही देशभर में प्रदर्शन हो रहे हैं और प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की गयी है, जिसमें दर्जनों लोगों के मारे जाने और सैकड़ों लोगों के गिरफ्तार होने का अनुमान है। मानवाधिकार निगरानी संगठनों ने बताया कि कुर्द बहुल उत्तरी क्षेत्र के सनांदज शहर में एक कार सवार व्यक्ति को शनिवार को एक प्रमुख मार्ग पर गोली मार दी गई। फ्रांस स्थित कुर्दिस्तान ह्मूमैन राइट्स नेटवर्क एंड द हेंगाव ऑर्गेनाइजेशन फॉर ह्यूमैन राइट्स ने बताया कि इस व्यक्ति को तब गोली मारी गयी जब उसने सड़क पर तैनात सुरक्षाबलों के सामने हॉर्न बजाया। उल्लेखनीय है कि हॉर्न बजाना सविनय अवज्ञा का एक तरीका बन गया है। अर्ध-सरकारी फार्स समाचार एजेंसी ने बताया कि कुर्दिस्तान के पुलिस प्रमुख ने प्रदर्शनकारियों पर गोलियां चलाने की खबरों का खंडन किया है। मानवाधिकार निगरानी संगठनों ने बताया कि सुरक्षाबलों ने शहर में भीड़ को तितर-बितर करने के लिए गोलियां चलायीं जिसमें एक अन्य प्रदर्शनकारी की मौत हो गयी और 10 प्रदर्शनकारी घायल हो गए।<br /><br /><strong>यूनिवर्सिटी को किया बंद</strong><br />राजधानी तेहरान में भी शनिवार को प्रदर्शन हुए। ईरान के प्रमुख शिक्षा केंद्र शरीफ यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्नोलॉजी के समीप भी प्रदर्शन हुए, जिसके बाद प्राधिकारियों ने अगले आदेश तक परिसर को बंद कर दिया है। सोशल मीडिया पर प्रसारित तस्वीरों के अनुसार, उत्तर-पूर्वी शहर मशाद में भी प्रदर्शन हुए। राष्ट्रपति इब्राहिम रईसी ने तेहरान में अल-जहरा विश्वविद्यालय की छात्राओं से मुलाकात में एक बार फिर आरोप लगाया कि प्रदर्शनों को भड़काने में विदेशी शत्रुओं का हाथ है। इस बीच, नीदरलैंड के द हेग में हजारों लोगों ने ईरान में प्रदर्शनकारियों के समर्थन में नारे लगाए।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 10 Oct 2022 10:46:04 +0530</pubDate>
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                <title>देश में फैली अशांति के लिए ईरान ने अमेरिका और इजरायल को जिम्मेदार ठहराया</title>
                                    <description><![CDATA[ईरान के सर्वोच्च नेता ने कहा एक दशक के बाद उनके शासन काल में यह विरोध प्रदर्शन सबसे बड़ी चुनौती बनकर सामने आई है और उन्होंने सुरक्षा बलों को और ज्यादा सतर्क और तैयार रहने के लिए कहा है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/iran-blames-america-and-israel-for-the-unrest-in-the/article-25371"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-10/e-1.jpg" alt=""></a><br /><p>तेहरान। ईरान के सर्वोच्च नेता ने पुलिस हिरासत में एक महिला की मौत के बाद देश में चल रहे विरोध प्रदर्शनों के लिए अमेरिका और इजरायल को जिम्मेदार ठहराया है।</p>
<p>ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई ने सोमवार को सार्वजनिक रूप से देश में हो रहे सबसे बड़े विरोध प्रदर्शनों पर अपनी चुप्पी तोड़ी। उन्होंने इसे दंगा करार देते हुए अमेरिका और इजरायल पर विरोध प्रदर्शन की योजना बनाने का आरोप लगाया। खामेनेई ने कहा कि ईरान की नैतिकता पुलिस की हिरासत में 22 साल की महसा अमिनी की मौत से उनका दिल टूट गया था, जिसके बाद देशव्यापी विरोध प्रदर्शन शुरू हुआ था। हालांकि, उन्होंने ईरान को अस्थिर करने के लिए विरोध-प्रदर्शनों को विदेशी साजिश करार देते हुए इसकी तीखी निंदा की।<br /><br />ईरान के सर्वोच्च नेता ने कहा एक दशक के बाद उनके शासन काल में यह विरोध प्रदर्शन सबसे बड़ी चुनौती बनकर सामने आई है और उन्होंने सुरक्षा बलों को और ज्यादा सतर्क और तैयार रहने के लिए कहा है। उधर अमेरिका ने कहा कि वह विरोध प्रदर्शनों के खिलाफ की गई हिंसक कार्रवाई से हैरान है। अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन ने एक बयान में कहा कि वह शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों पर हिंसक कार्रवाई की खबरों को लेकर गंभीर रूप से चिंतित हैं।</p>
<p>बाइडन ने कहा कि प्रदर्शनकारी न्यायसंगत और सार्वभौमिक सिद्धांतों का आह्वान कर रहे हैं और अमेरिका ईरानी महिलाओं के साथ खड़ा है जो बहादुरी के साथ अपनी लड़ाई लड़ रही हैं और दुनिया को प्रेरित कर रही हैं। ब्रिटेन ने लंदन में ईरान के वरिष्ठ राजनयिक को तलब किया और कहा कि तेहरान अशांति के लिए बाहरी तत्वों को जिम्मेदार ठहराने के बजाय खुद इसकी जिम्मेदारी लें और अपने लोगों की चिंताओं को सुनें और समझे।</p>
<p>गौरतलब है कि तेहरान में महिलाओं को हिजाब पहनने वाले सख्त कानून को तोड़ने के आरोप में 13 सितंबर को 22 साल की महासा अमिनी को हिरासत में लिया गया, जिसके कुछ घंटे बाद वह कोमा में चली गई और तीन दिन बाद उसकी मौत हो गई। पीड़िता के परिवार ने आरोप लगाया कि अधिकारियों ने उसके सिर पर डंडा मारा और एक वाहन पर उसका सिर पटका। पुलिस ने हालांकि कहा किसी प्रकार के दुव्र्यवहार का कोई सबूत नहीं है और उसकी मौत अचानक दिल का दौरा पडऩे से हुई।</p>
<p>पीड़िता अमिनी का अंतिम संस्कार होने के बाद ईरान में महिलाओं ने विरोध प्रदर्शन शुरू किया। हवा में अपने हिजाब लहराए और उन्हें आग लगाकर महिला, जीवन, स्वतंत्रता और तानाशाह की मौत जैसे नारे लगाए। ईरान के साथ साथ अन्य देशों में भी हिजाब को लेकर प्रदर्शन तेज हो रहे हैं। ईरान के सर्वोच्च नेता ने हालांकि कहा कि विदेशी शक्तियों ने इस दंगे की योजना बनाई क्योंकि वे ईरान को सभी क्षेत्रों में शक्तिशाली बनते देखना बर्दाश्त नहीं कर पा रहे हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 04 Oct 2022 16:03:32 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>हिजाब को लेकर गिरफ्तार महिला की मौत, भड़का गुस्सा, यूनिवर्सिटीज से सड़कों तक आंदोलन</title>
                                    <description><![CDATA[बेहेश्ती यूनिवर्सिटी,  मशहाद शहर और सेंट्रल तेहरान में बड़ी संख्या में महिलाओं ने प्रदर्शन किए हैं। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/woman-arrested-for-hijab-anger-flared-up-agitation-from-universities/article-23651"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-09/iran-hijab.jpg" alt=""></a><br /><p>ईरान में गुस्से और तनाव का माहौल है। यूनिवर्सिटीज में और सड़कों पर आंदोलन हो रहे है। जगह- जगह महिलाओं ने अपने बाल काट लिए हैं और हिजाब भी जला दिए हैं। यह गुस्सा तब भड़का जब हिजाब को लेकर गिरफ्तार एक महिला की मौत हो गई। कुर्दिस्तान प्रांत की रहने वाली 22 वर्षीय  महसा अमीनी को हिजाब को लेकर गिरफ्तार किया गया था। जहां हिरासत में उसकी तबियत बिगड़ गई जिसके बाद उसे अस्पताल में भर्ती कराया गया था। वहां उसकी मौत हो गई। वह अस्पताल में तीन दिनों तक कोमा में थी। इस घटना के बाद विरोध प्रदर्शन तेज हो गए हैं। मशहाद शहर और सेंट्रल तेहरान में बड़ी संख्या में महिलाओं ने प्रदर्शन किए हैं। शाहिद बेहेश्ती यूनिवर्सिटी में तेज विरोध प्रदर्शन हो रहा है। बड़ी संख्या में छात्र प्रदर्शन कर रहे हैं। उन्होंने सरकार से इस घटना को लेकर जवाब मांगा है।</p>
<p><strong>इस्लामिक रिपब्लिक मुर्दाबाद के भी लगाए नारे</strong><br />बड़ी संख्या में महिलाओं ने सरकार के खिलाफ नारे लगाए और अपने हिजाब उतार डाले। महिलाओं ने आजादी और इस्लामिक रिपब्लिक मुर्दाबाद के नारे भी लगाए हैं। पुलिस ने जगह- जगह आंसु गैस के गोले भी छोड़े हैं और कई जगहों पर लाठीचार्ज भी किया है। पुलिस का कहना है कि उन्होंने मृतका को छुआ तक नहीं था। पुलिस के अनुसार महिला ने ड्रेस कोड का उल्लंघन किया था। इस पर उसे पकड़ा गया था और उसके परिजनों से कहा गया था कि वह उसके लिए सही ड्रेस लेकर के आए। </p>
<p><strong>ईरान में महिलाओं पर कड़े हैं प्रतिबंध</strong><br />ईरान में महिलाओं के लिए सार्वजनिक स्थानों या घर से बाहर निकलने पर हिजाब पहनना अनिवार्य है। इसके अलावा चुस्त कपड़ों और जीन्स पहनने पर भी पाबंदी है। यही नहीं ज्यादा चमक-धमक वाले कपड़ों पर भी ईरान में ऐतराज जताया जाता है। इस को लेकर महिलाओं का एक वर्ग विरोध कर रहा है, महिला की मौत के बाद इस विरोध ने बड़ा रुप ले लिया है। जिसके बाद सरकार की चिंताएं बढ़ गई हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 20 Sep 2022 16:13:30 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>साड़ी पहने आई महिला को नहीं देने दी परीक्षा</title>
                                    <description><![CDATA[दादाबाड़ी बसंत विहार स्थित एक परीक्षा केंद्र पर  महिला अभ्यर्थी को साड़ी पहनकर आने पर परीक्षा में नहीं बैठने दिया गया। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/the-woman-who-came-wearing-a-sari-was-not-allowed-to-give-the-exam/article-16148"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-07/saree-mei-aai-mahila-ko-exam-nahi-dene-diya-..kota-news-25.7.2022.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। दादाबाड़ी बसंत विहार स्थित एक परीक्षा केंद्र पर महिला अभ्यर्थी को साड़ी पहनकर आने पर परीक्षा में नहीं बैठने दिया गया। महिला रोते हुए केंद्र से बाहर निकली। उसके साथ  बांदा जिला निवासी रामानुज व  कोसाम्बी जिला निवासी रंजीत  को भी देरी होने के कारण प्रवेश नहीं दिया।  मध्यप्रदेश के सीकरी जिला निवासी सुगमती राजपूत ने बताया कि शनिवार को प्रथम पारी में रीट लेवल-1 की परीक्षा देने सुबह 8.30 बजे केंद्र पहुंची थी।  गेट पर तैनात महिला कर्मचारी ने चैकिंग कर साड़ी में प्रवेश दे दिया। इसके बाद परीक्षा भवन में अपने रोल नम्बर लिखित बैंच पर बैठ गई।  अचानक कोई अधिकारी आए और कहने लगे कि साड़ी में परीक्षा नहीं दे सकते, आपकी एंट्री हो गई, अब 10 मिनट में लॉअर-टीशर्ट पहनकर आ जाओ तो परीक्षा में बैठ सकते हो। इसके बाद सेंटर से बाहर निकाल दिया। जैसे-तैसे ऑटो में बैठ नयापुरा पहुंची और कपड़े बदलकर वापस 10 बजे परीक्षा केंद्र पहुंची, लेकिन अंदर प्रवेश नहीं दिया गया। सालभर की मेहनत बर्बाद हो गई।<br /><br /><strong>हमारा काम चैकिंग करने का</strong> <br />परीक्षा केंद्र पर तैनात पुलिसर्मियों ने बताया कि सुबह एक महिला अभ्यर्थी साड़ी पहनकर आई थी, थोड़ी देर बाद महिला रोते हुए बाहर आई और चली गई। । वह महिला कपड़े बदलकर वापस आई थी लेकिन तब तक दस बज चुके थे, इसलिए उसे प्रवेश नहीं दिया गया। <br /><br /> साड़ी बुर्का या कपड़ों की वजह सेकिसी को  परीक्षा देने से नहीं रोका गया। महिला परीक्षार्थी द्वारा पेपर नहीं दिए जाने का कोई और ही कारण होगा। हालांकि, ऐसा मामला मेरी जानकारी में नहीं आया। <br /><strong>-ओमप्रकाश बुनकर, जिला कलक्टर कोटा</strong><br /><br /> साड़ी या हिजाब पहनकर आने वाली किसी भी महिला अभ्यर्थी को परीक्षा देने से नहीं रोके जाने के अधिकारियों से निर्देश मिले हैं। परीक्षा केंद्र के अंदर क्या हुआ यह हमारी जानकारी में नहीं है। <br /><strong>-अंकित जैन, पुलिस उपाधीक्षक </strong><br /><br />महिला अभ्यर्थी कौन थी, परीक्षा केंद्र पर क्या हुआ, इसकी मुझे कोई जानकारी नहीं है। मैं इलाके की गश्त कर रहा था। <br /><strong>-रामभरोस मीणा, सीआई दादाबाड़ी पुलिस थाना</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>शिक्षा जगत</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 25 Jul 2022 16:14:21 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>कर्नाटक में परीक्षा के दौरान हिजाब नहीं हटाने पर होगी कार्रवाई </title>
                                    <description><![CDATA[कर्नाटक के गृह मंत्री अरागा ज्ञानेंद्र ने कहा कि कर्नाटक बोर्ड एसएसएलसी परीक्षा में शामिल होने से पहले हिजाब हटाने से इनकार कर उच्च न्यायालय के फैसले का उल्लंघन करने वाली छात्राओं के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/action-will-be-taken-if-hijab-is-not-removed-during-exam-in-karnataka/article-6910"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-03/karnataka-home-minister-copy.jpg" alt=""></a><br /><p>बेंगलुरु। कर्नाटक के गृह मंत्री अरागा ज्ञानेंद्र ने कहा कि कर्नाटक बोर्ड एसएसएलसी परीक्षा में शामिल होने से पहले हिजाब हटाने से इनकार कर उच्च न्यायालय के फैसले का उल्लंघन करने वाली छात्राओं के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। ज्ञानेंद्र ने यहां कहा कि सभी छात्रों को अपने हिजाब हटाकर परीक्षा देनी चाहिए। हम इस पर कोई समझौता नहीं करेंगे। हिजाब पर कर्नाटक उच्च न्यायालय के फैसले का उल्लंघन करने वालों पर कार्रवाई होगी।</p>
<p>राज्य के शिक्षा मंत्री बीसी नागेश ने भी कहा कि ड्रेस कोड लागू करने के सरकारी आदेश का उल्लंघन करने पर पुलिस कार्रवाई करेगी। राज्य भर के 3,440 केंद्रों में 48,000 से अधिक हॉल में 8.74 लाख से अधिक छात्र परीक्षा में शामिल हो रहे हैं। हिजाब विवाद पर सुनवाई के बाद न्यायालय ने फैसला सुनाया था कि हिजाब एक आवश्यक धार्मिक प्रथा नहीं है और सभी को यूनिफॉर्म पहनने के नियम का पालन करना चाहिए। मुख्यमंत्री बसवराज बोम्मई ने एसएसएलसी परीक्षा में बैठने वाले सभी छात्रों को शुभकामनाएं दी हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 28 Mar 2022 16:32:00 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Administrator]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>हिजाब विवाद सुनवाई मामले पर अभी करना होगा इंतजार: सुप्रीम कोर्ट का निश्चित तारीख देने से इनकार</title>
                                    <description><![CDATA[मुख्य न्यायाधीश एन. वी. रमना की अध्यक्षता वाली पीठ ने वरिष्ठ अधिवक्ता देवदत्त कामत की ओर से शीघ्र सुनवाई के लिए किसी निश्चित तारीख पर सूचीबद्ध करने की  गुहार ठुकरा दी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/supreme-court-refused-to-fix-any-fixed-date-for-hearing-the-petitions-challenging-the-karnataka-high-court-s-decision-on-hijab/article-6629"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-03/hijab01.jpg" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। 'हिजाब' मामले पर  कर्नाटक उच्च न्यायालय के फैसले को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर  सुनवाई के लिए कोई निश्चित तारीख तय करने से गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट ने इनकार कर दिया। मुख्य न्यायाधीश एन. वी. रमना की अध्यक्षता वाली पीठ ने वरिष्ठ अधिवक्ता देवदत्त कामत की ओर से शीघ्र सुनवाई के लिए किसी निश्चित तारीख पर सूचीबद्ध करने की  गुहार ठुकरा दी। <br /><br />कामत ने कर्नाटक में 28 मार्च से आयोजित होने वाली परीक्षाओं( जिसमें याचिकाकर्ता भी शामिल है) का उल्लेख करते हुए  उच्च न्यायालय के फैसले को चुनौती देने वाली कुछ छात्राओं की याचिका पर सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करने का अनुरोध किया था।  कामत द्वारा 'विशेष उल्लेख' के दौरान परीक्षा की तारीख का जिक्र करते हुए मामले को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करने के अनुरोध पर मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि इसका परीक्षा से कोई लेना-देना नहीं है। यह एक संवेदनशील मामला है।<br /><br />मुख्य न्यायाधीश ने 16 मार्च को तत्काल सुनवाई करने की मांग संबंधी गुहार के मद्देनजर  इस मामले पर  होली के बाद  विचार करने का संकेत दिया था। वरिष्ठ वकील संजय हेगडे ने इस मामले को अति आवश्यक बताते हुए 16 मार्च को विशेष उल्लेख के दौरान तत्काल सुनवाई की गुहार लगाई थी। स्कूल-कॉलेजों में हिजाब पहनने पर रोक जारी रखने के कर्नाटक उच्च न्यायालय के फैसले के कुछ घंटे बाद ही उसे शीर्ष अदालत में चुनौती दी गई थी। इसके बाद कई याचिकाएं दायर की गईं।</p>
<p><br />याचिकाकर्ताओं में शामिल लोगों ने उच्च न्यायालय के फैसले को अधिवक्ता अनस तनवीर के माध्यम से शीर्ष अदालत का दरवाजा खटखटाया था। याचिकाकर्ता ने कर्नाटक शिक्षा अधिनियम-1983 और इसके तहत बनाए गए नियमों का हवाला देते हुए अपनी याचिका में दावा किया है कि  विद्यार्थियों के लिए किसी भी तरह से अनिवार्य वर्दी का प्रावधान नहीं है। उच्च न्यायालय ने अपने फैसले में कहा था कि हिजाब पहनना इस्लाम का अनिवार्य हिस्सा नहीं है। वर्दी का निर्धारण संवैधानिक है और विद्यार्थी इस पर आपत्ति नहीं कर सकते।</p>
<p><br />अदालत में दायर याचिका में कर्नाटक शिक्षा अधिनियम के तहत राज्य सरकार द्वारा पारित पांच फरवरी 2022 के आदेश की वैधता पर सवाल सवाल उठाए गए हैं।  याचिका में दावा किया गया है कि यह निर्देश धार्मिक अल्पसंख्यकों और विशेष रूप से इस्लामी आस्था के हिजाब पहनने वाली मुस्लिम महिला अनुयायियों का उपहास कर उन पर एक प्रकार से हमला करने के अप्रत्यक्ष इरादे से जारी किया गया था। याचिका में कहा गया है कि हिजाब पहनने का अधिकार संविधान के अनुच्छेद 25 के तहत अंतरात्मा के अधिकार के तहत संरक्षित है।याचिकाकर्ताओं ने विभिन्न तर्कों के माध्यम से उच्च न्यायालय के फैसले को कानून के खिलाफ बताते हुए उसे चुनौती दी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 24 Mar 2022 13:22:28 +0530</pubDate>
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