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                <title>न्यास ने करोड़ों रुपए खर्च किए, आमजन  को नहीं हुआ लाभ </title>
                                    <description><![CDATA[न्यास ने हाल ही में जयपुर गोल्डन में करोड़ों रुपए खर्च कर बहुमंजिला पार्किंग बनाई है। उसका ठेका देकर चालू भी कर दिया है। लेकिन हालत यह है न तो दुकानदार और न ही आमजन उस पार्किंग में वाहन खड़े कर रहे हैं। गिनती के वाहन वहां आ रहे हैं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/uit-spent-crores-of-rupees--the-common-man-did-not-benefit/article-12929"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-06/nyas-nei-karoro-rs-kharch-kiye-aamjan-ko-nahi-hua-labh-copy.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। नगर विकास न्यास द्वारा कहने को तो आमजन की सुविधा के नाम पर करोड़ों रुपए खर्च किए जा रहे हैं। लेकिन उनका लाभ आमजन को नहीं मिल पा रहा है। इसका प्रत्यक्ष उदाहरण है जयपुर गोल्डन की पार्किंग और रामपुरा व सब्जीमंडी में बनाए गए 40 फीट चौड़े रास्ते। न्यास ने हाल ही में जयपुर गोल्डन में करोड़ों रुपए खर्च कर बहुमंजिला पार्किंग बनाई है। उसका ठेका देकर चालू भी कर दिया है। इस पार्किंग को बनाने का मकसद न्यास अधिकारियों द्वारा रामपुरा से लेकर शास्त्री मार्केट तक के बाजारों के वाहनों का यहां खड़ा होना बताया जा रहा था। जिससे बाजारों में वाहन खड़े नहीं होंगे और ट्रैफिक में भी बाधा नहीं होगी। रास्ते खुले होने से आवागमन में सुविधा होगी। लेकिन हालत यह है न तो दुकानदार और न ही आमजन उस पार्किंग में वाहन खड़े कर रहे हैं। गिनती के वाहन वहां आ रहे हैं। जबकि अधिकतर वाहन पहले की तरह अभी भी रास्तों पर ही खड़े हो रहे हैं। <br /><br />जयपुर गोल्डन पार्किंग के सामने, उसके आस-पास और पुलिस उप अधीक्षक कार्यालय के पास से निजी लैब व मंदिर के आस-पास अभी भी दो पहिया से लेकर चार पहिया वाहन खड़े हुए हैं। जिससे ये वाहन पहले भी तरह अभी भी ट्रैफिक में बाधक बन रहे हैं। बीच रास्ते में खड़े चार पहिया वाहनों के कारण रास्ता संकरा हो  गया है। लेकिन न्यास अधिकारी तो करोड़ों रुपए की पार्किंग बनाकर निश्चिंत हो गए। उनके अनुसार तो पार्किंग बनने से उस क्षेत्र में सड़क व बाजार में वाहन खड़े करने की समस्या का समाधान हो गया है। जबकि स्थिति ज्यौं की त्यौं बनी हुई है। सूत्रों के अनुसार न्यास अधिकारियों ने कांग्रेस नेता को लाभ पहुंचाने के लिए ठेके की राशि काफी कम कर दी। इस पाकिंग का ठेका एक कांग्रेस नेता ने दो साल के लिए मात्र 8 लाख रुपए में लिया है। <br /><br /><strong>शास्त्री मार्केट की पार्किंग भी तोड़ी</strong><br />नगर विकास न्यास द्वारा पूर्व में शास्त्री मार्केट के बाहर चार खम्बा रास्ते के पास दुपहिया वाहनों की पार्किंग बनाई थी। उस पर लाखों रुपए खर्च किए थे। जिससे वहां स्थानीय दुकानदार व ग्राहक दुपहिया वाहन खड़े कर रहे थे। लेकिन अब रास्ता चौड़ा करने के लिए उस पार्किंग को भी तोड़ दिया। जिससे फिर से वाहन दुकानों के बाहर सड़क पर ही खड़े हो रहे हैं। <br /><br /><strong>दुकानदारों व लोगों की पीड़ा</strong><br />रामपुरा व आर्य समाज रोड के दुकानदारों ने बताया कि जयपुर गोल्डन की पार्किंग में वाहन खड़े करके पैदल दुकान पर जाएंगे क्या। बार-बार आना-जाना पड़ता है। ऐसे में वाहन लेने के लिए इतनी दूृर जाने-आने में समय अधिक लगेगा। साथ ही ग्राहक भी इतनी दूर वाहन खड़े करके उनकी दुकान तक पैदल नहीं आएगा। यही कारण है कि पार्किंग बनने के बाद भी लोग व दुकानदार सड़क पर ही वाहन खड़े कर रहे हैं। <br /><br /><strong>चौड़े रास्तों पर अतिक्रमण</strong><br />न्यास ने पहले रामपुरा में और उसके बाद कुछ समय पहले सब्जीेमंडी से चार खम्बा तक 40 फीट का चौड़ा रास्ता बनाया था। सब्जीमंडी से चार खम्बा तक कई मकानों को अधिग्रहित किया और उन्हें ध्वस्त कर रास्ते को चौड़ा किया था। करोड़ों रुपए खर्च कर चौड़े किए गए रास्ते को बनाने का मकसद पुराने शहर के बजाज खाना, शास्त्री मार्केट व अग्रसेन बाजार तक वाहन आसानी से निकल सके। लेकिन हालत यह है कि न्यास अधिकारी रास्ता बनाने के बाद निश्चिंग हो गए। उसका फायदा आस-पास के लोगों व दुकानदारों ने उठा लिया। वर्तमान में सभी चौड़े रास्तों पर अतिक्रमण हो रहा है। चार पहिया वाहनों ने रास्ते रोके हुए हैÞ। दुकानदारों ने बक्सों से लेकर कूलर समेत अन्य सामान दुकानों के आग तक रास्तो में आग तक रखे हुए हैं। साथ ही वहां फल व अन्य सामान बेचने वाले ठेले खड़े करने लगे हैं। जिससे रास्ता चौड़ा कम और पहले जैसा संकरा अधिक हो गया है। ऐसे में वहां से वाहनों को निकलने में अभी भी पहले की तरह  ही परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। लेकिन उस पर न तो न्यास अधिकारियों का ध्यान है और न ही ट्रैफिक पुलिस का। नतीजा परेशानी उन बाजारों में जाने वाले आमजन को भुगतनी पड़ रही है।  इसी तरह रामपुरा के चौड़े रास्ते पर भी दोनों तरफ वाहन खड़े हो रहे हैं। ठेले खड़े होने लगे हैं। जिससे यह रास्ता भी संकरा हो गया है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 24 Jun 2022 13:29:21 +0530</pubDate>
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                <title>बसों में मेंटीनेंस के नाम पर 3.50 करोड़ रुपए खर्च,  सड़कों पर हो रहे ब्रेक डाउन </title>
                                    <description><![CDATA[शहर में संचालित सिटी ट्रांसपोर्ट सर्विस लिमिटेड (जेसीटीएसएल) की बसों पर मेंटीनेंस के नाम से हर माह करीब 3.50 करोड़ रुपए खर्च किया जा रहा है, लेकिन इन बसों की सही से मेंटीनेंस नहीं हो रहा। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/jaipur-350-carore-spent-the-maintenance-of-buses/article-12898"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-06/545465.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। शहर में संचालित सिटी ट्रांसपोर्ट सर्विस लिमिटेड (जेसीटीएसएल) की बसों पर मेंटीनेंस के नाम से हर माह करीब 3.50 करोड़ रुपए खर्च किया जा रहा है, लेकिन इन बसों की सही से मेंटीनेंस नहीं हो रहा। इसके चलते आए दिन सड़कों पर बसों के ब्रेक डाउन हो रहे है। इसके चलते आमजन को काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है। जेसीटीएसएल के पास कुल 305 छोटी-बड़ी बसें है।</p>
<p>विद्याधर नगर और टोडी डिपो से मातेश्वरी और बगराना डिपो से पारस ट्रेवल्स कंपनी संचालन व मेंटीनेंस का कार्य करती है। कुछ चालकों ने भी इन बसों को लेकर प्रशासन को भी शिकायत की थी, लेकिन कंपनी पर कोई कार्रवाई नहीं की जाती। हाल ही में दो बसें ब्रेक फेल होने से दीवार में टकराई थी।</p>
<p><strong>किस कंपनी को कितना भुगतान</strong><br />विद्याधर नगर डिपो की बसों के लिए प्रतिमाह 90 लाख रुपए मातेश्वरी कंपनी को, टोडी डिपो की बसों के मेंटीनेंस के लिए 1.60 करोड़ रुपए मातेश्वरी कंपनी को और बगराना डिपो की बसों के मेंटीनेंस के लिए एक करोड़ रुपए पारस ट्रेवल्स कंपनी कंपनी को प्रतिमाह का देती है। यह काम जेसीटीएसएल प्रशासन खुद करें तो शायद बसों की मेंटीनेंस व रखरखाव सही तरीके से हो सकता है।</p>
<p><strong>चालकों को भेजा दूसरे विभागों में</strong><br />जेसीटीएसएल के पास कुल 1125 चालक-परिचालक है। इनमें से 588 परिचालक व 537 चालक है। जेसीटीएसएल ने 537 चालकों में से 417 चालकों को दूसरे विभागों में डेपुटेशन पर भेज रखा है। वहीं कंपनी के प्राइवेट चालकों से बसों का संचालन करवाया जा रहा है।</p>
<p><strong>फैक्ट फाइल</strong><br />- कुल बसें: 305<br />- टोडी डिपो से संचालित: 127 <br />(इनमें 92 बड़ी व 35 मिनी बसें)<br />- विद्याधर से: 78 बसें <br />- बगराना से: 100 मिडी बसें <br />- प्रतिदिन राजस्व:  26.50 लाख<br />- प्रतिदिन यात्रीभार: 2.5 लाख</p>
<p><strong>इनका कहना</strong> <br />बसों की मेंटीनेंस का कार्य कर रही कंपनियों के कार्य का समय-समय पर जांच होती है। हाल ही में बसों के ब्रेक फेल होने के मामले में जांच के लिए कमेटी गठित की गई है। जांच रिपोर्ट आने के बाद निर्णय लिया जाएगा। <br />- आशीष कुमार, ओएसडी जेसीटीएसएल<br /><br /></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 24 Jun 2022 10:25:02 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>घर से निकल रहे कचरे पर हो रहा सालाना 220 करोड़ से अधिक खर्च</title>
                                    <description><![CDATA[कोटा शहर की करीब 15 लाख से अधिक की आबादी वाले घरों से रोजाना निकलने वाला कचरा दिखने में तो थोड़ा लगता है। लेकिन उसका आंकलन किया गया तो पता चला कि शहर से रोजाना करीब 400 टन से अधिक कचरा निकल रहा है जो ट्रेचिंग ग्राउंड पहुंच रहा है। उस कचरे को साफ करने पर हर साल 220 करोड़ रुपए से अधिक का खर्चा हो रहा है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/more-than-220-crores-is-being-spent-annually-on-the-waste-coming-out-of-the-house/article-12434"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-06/ghar-se-nikal-rahe-kachre-par-ho-raha-salana.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। कोटा शहर की करीब 15 लाख से अधिक की आबादी वाले घरों से रोजाना निकलने वाला कचरा दिखने में तो थोड़ा लगता है। लेकिन उसका आंकलन किया गया तो पता चला कि शहर से रोजाना करीब 400 टन से अधिक कचरा निकल रहा है जो ट्रेचिंग ग्राउंड पहुंच रहा है। उस कचरे को साफ करने पर हर साल 220 करोड़ रुपए से अधिक का खर्चा हो रहा है। उसके बाद भी अभी तक उस कचरे का निस्तारण नहीं हो सका है। कोटा में पहले जहां एक ही नगर निगम था। उसे कोटा उत्तर व कोटा दक्षिण में बांट दिया है। वार्डों की संख्या भी 65 से बढ़ाकर 150 कर दी गई है। नगर निगम द्वारा हर साल शहर से निकलने वाले कचरे को साफ करने पर होने वाले बजट को बढ़ाया जा रहा है। करीब तीन हजार से अधिक सफाई कर्मचारी रोजाना शहर की सड़कों और गली मौहल्लों में सुबह-शाम झाडू लगाते हुए देखे जा सकते हैं। हर वार्ड में घरों से कचरा एकत्र करने के लिए घर-घर कचरा संग्रहण में हर वार्ड में दो-दो टिपर लगाए हुए हैं। उसके बाद भी शहर उतना साफ नजर नहीं आ रहा है। जितना होना चाहिए। कोटा में रोजाना करीब 400 टन कचरा ट्रेचिंग ग्राउंड जा रहा है। उसके अलावा भी काफी कचरा ऐसा है जो सड़कों पर पड़ा हुआ है। <br /><br />कोटा शहर को सफाई के मामले में मध्य प्रदेश के इंदौर की तर्ज पर बनाने की बातें तो खूब की जाती हैं। लेकिन उसे अभी तक भी अमली जामा नहीं पहनाया गया है। नगर निगम की जेसीबी व डम्परों के अलावा कचरा परिवहन का काम ठेके पर दिया हुआ है। सफाई कर्मचारियों के अलावा रोड स्वीपर मशीनों से भी मुख्य मार्गों की सफाई करवाई जा रही है।  कचरा पाइंट कम किए जा रहे हैं। कचरे के हाइजनिक तरीके से परिवहन के लिए आधुनिक कचरा ट्रांसफर स्टेशन बनाए जा रहे हैं। इतना सब कुछ होने के बाद भी शहर से कचरे का निस्तारण नहीं हो पाया है।  कोटा में हर साल सफाई पर होने वाले खर्च से अंदाजा लगाया जा सकता है कि शहर से निकलने वाला कचरा कितना महंगा पड़ रहा है। हर साल अरबों रुपए कचरे में जा रहे हैं। <br /><br /><strong>उत्तर-दक्षिण में अलग-अलग बजट</strong><br />नगर निगम कोटा उत्तर व कोटा दक्षिण में सफाई के लिए अलग-अलग बजट निर्धारित है। हर साल बजट बढ़ाया भी जा रहा है। नगर निगम कोटा उत्तर का वित्तीय वर्ष 2022-23 के लिए सफाई पर खर्च होने वाला प्रस्तावित बजट 114.82 यानि 1 अरब 14 करोड़ 82 लाख रुपए है। उसी तरह से कोटा दक्षिण में वित्तीय वर्ष 2022-23 में सफाई पर खर्च होने वाला प्रस्तावित बजट 105.37 करोड़ यानि 1 अरब 5 करोड़ 37 लाख रुपए है। यह बजट कोटा उत्तर के 70 व कोटा दक्षिण के 80 वार्डों में खर्च किया जा रहा है। <br /><br /><strong>गत वर्ष हुआ 154 करोड़ रुपए से अधिक खर्च</strong><br />नगर निगम कोटा उत्तर व कोटा दक्षिण द्वारा गत वित्तीय वर्ष  2021-22  के लिए जो बजट प्रस्तावित किया गया है।  उसमें से दोनों निगमों में सफाई पर करीब 154 करोड़ रुपए से अधिक खर्च किए गए थे। जानकारी के अनुसार कोटा उत्तर में गत वर्ष 79 करोड़ 64 लाख रुपए और कोटा दक्षिण में 75 करोड़ 23 लाख रुपए खर्च किए गए थे। <br /><br /><strong>यह है सफाई व्यवस्था</strong><br />शहर में हर घर से जो कचरा निकल रहा है। उस कचरे को नगर निगम द्वारा घर-घर कचरा संग्रहण के माध्यम से टिपरों के जरिये एकत्र किया जा रहा है। उन टिपरों में एकत्र होने वाले कचरो को शहर में निर्धारित कचरा ट्रांसफर स्टेशनों पर डाला जा रहा है। टिपरों के अलावा जगह-जगह पर निर्धारित कचरा पाइंटों पर भी जो कचरा डल रहा है। उसे निगम व संवेदक की ट्रॉलियों के माध्यम से एकत्र कर कचरा ट्रांसफर स्टेशनों पर पहुचाजा जा रहा है। वहां से कचरा डम्परों के माध्यम से नांता स्थित ट्रेचिंग ग्राउंड पर पहुंचाया जा रहा है। नगर निगम कोटा दक्षिण में किशोरपुरा में आधुनिक कचरा ट्रांसफर स्टेशन बनाया गया है। जहां से कचरे को कंटेनरों के जरिय ट्रेचिंग ग्राउंड पहुंचाया जा रहा है। <br /><br /><strong>15.90 करोड़ का टेंडर</strong><br />निगम द्वारा नांता स्थित ट्रेचिंग ग्राउंड पर जमा पुराने कचरे के निस्तारण के लिए 20 करोड़ रुपए का बजट स्वीकृत कराया गया था। जिसमें से गत दिनों 15.90 करोड़ रुपए का टेंडर जारी किया है। जिस फर्म ने यह टेंडर लिया है। वह उस कचरे की छटनी कर उसमें से मिट्टी-गिट्टी, प्लास्टिक-पॉलिथन व कपड़े और अन्य सामान मशीनों से अलग-अलग कर उस कचरे के पहाड़ को वहां से हटाया जाएगा। हालांकि इस काम में करीब डेढ़ं साल का समय लगेगा। <br /><br /><strong>करवानी पड़ रही छंटनी</strong><br />वैसे तो घरों से निकलने वाले कचरे को गीला और सूखा अलग-अलग एकत्र करने की व्यवस्था है। इसके लिए हर घर में दो-दो डस्टबीन होने चाहिए। लेकिन ऐसा नहीं हो रहा है। उसके बाद टिपरों में भी गीला व सूखा कचरा अलग-अलग लेने की व्यवस्था है। लेकिन वहां भी ऐसा नहीं हो रहा है। इस कारण से कचरा ट्रांसफर स्टेशनों पर कचरे की छटनी और ट्रेचिंग ग्राइंड में कचरे की छटनी का अलग से टेंडर करना पड़ रहा है। इतना सब कुछ होने के बाद भी नांता स्थित ट्रेचिंग ग्राउंड में पुराने कचरे के पहाड़ लगे हुए हैं। <br /><br /><strong>इनका कहना है</strong><br />कचरा घरों से ही अलग-अलग निकले इसके लिए लोगों में जागरूकता होनी चाहिए। एक की जगह दो डस्टबीन रखने होंगे। साथ ही लोगों को सड़क पर कचरा नहीं डालने के लिए जागरूक किया जाएगा। शहर को साफ रखना ही प्राथमिकता है। उसके लिए मशीनरी व मेनुअल हर तरह के प्रयास किए जा रहे हैं। <br /><strong>मंजू मेहरा, महापौर, नगर निगम कोटा उत्तर</strong><br /><br /> लोगों में जागरूकता की कमी है। जिससे कचरा सड़कों पर ही डाला जा रहा है। शहर में सड़क किनारे जमे पुराने कचरे को साफ करने पर आधा शहर वैसे ही साफ हो जाएगा। कचरे को गीला-सूखा अलग-अलग करने के प्रयास किए जाएंगे।  जिससे कचरे की छटनी पर अलग से खर्चा नहीं करना पड़ेगा। शहर की सफाई पर करोड़ों रुपए खर्च किए जा रहे हैं। <br /><strong>-राजीव अग्रवाल, महापौर, नगर निगम कोटा दक्षिण</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 17 Jun 2022 15:22:14 +0530</pubDate>
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                <title>हेलमेट और फर्राटे में उड़ा दिए करोड़ों रुपए, फिर भी नहीं सुधरे</title>
                                    <description><![CDATA[शहर के लोग ट्रैफिक रूल मानने के लिए बिल्कुल तैयार नहीं है। लापरवाही का आलम यह है कि सिर्फ हेलमेट नहीं पहनने के चलते ही कोटा ट्रैफिक पुलिस पिछले ढाई सालों में 1 करोड़ 33 लाख 6 हजार 300 रुपए का जुर्माना वसूल चुकी है। करोड़ों रुपए गंवाने के बावजूद कई लोग  न तो हेलमेट लगा रहे और न ही अपनी रफ्तार कम कर रहे हैं। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/crores-of-rupees-were-spent-in-helmet-and-over-speed--still-not-improved/article-10309"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-05/helmet-nahi.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। शहर के लोग ट्रैफिक रूल मानने के लिए बिल्कुल तैयार नहीं है। लापरवाही का आलम यह है कि सिर्फ हेलमेट नहीं पहनने के चलते ही कोटा ट्रैफिक पुलिस पिछले ढाई सालों में 1 करोड़ 33 लाख 6 हजार 300 रुपए का जुर्माना वसूल चुकी है। इतना ही नहीं ओवरस्पीड के मामलों में भी 1 करोड़ 14 लाख 18 हजार 800 रुपए वसूले गए हैं। करोड़ों रुपए गंवाने के बावजूद कई लोग  न तो हेलमेट लगा रहे और न ही अपनी रफ्तार कम कर रहे हैं। ऐसे में सैकड़ों लोग अपनी जान से हाथ धो रहे हैं। <br /><br /><strong>हेलमेट और ओवरस्पीड में वसूले करोड़ों रुपए</strong><br />बिना हेलमेट वाहन चलाना और हवा से बातें करना, जैसे बाइक चालकों का फैशन बन गया है। ट्रैफिक पुलिस के आंकड़ों की बात करें तो वर्ष 2020 से अप्रेल 2022 तक पुलिस ने बिना हेलमेट पहनने वाले 44 हजार 350 लोगों के चालान बनाए। जिनसे 13306300 का जुर्माना वसूला। वहीं, ओवर स्पीड के 14318 लोगों के चालान बनाकर 11418800 रुपए जुर्माना वसूला गया। हादसे का सबसे बड़ा कारण मोबाइल पर बात करना यातायात अधिकारियों के मुताबिक सड़क हादसे का सबसे बड़ा कारण मोबाइल पर बात करते हुए वाहन चलाना है। क्योंकि, मोबाइल के कारण चालक का ध्यान भटक जाता है, जो हादसे की वजह बनता है। पुलिस ने इन ढाई सालों में 1250 लोगों का चालान बनाकर 10 लाख 90 हजार 500 रुपए का जुर्माना वसूला है। इसमें इसमें सभी तरह के वाहन शामिल हैं। <br /><br /><strong>यहां देखें किसका कितना जुर्माना</strong><br />यातायात पुलिस के अनुसार मोबाइल पर बात करने पर 1000 रुपए, बाइक-स्कूटर पर तीसरी सवारी बैठाने पर 1000, सीट बेल्ट नहीं लगाने पर 1000, बिना हेलमेट 1000, तेज रफ्तार ड्राइविंग पर 1000, खतरनाक ड्राइविंग पर 1000 रुपए (पहली बार), 10 हजार (दूसरी बार), बिना बीमा- बाइक पर 1000 और चौपहिया वाहन पर 2000 रुपए, रेड लाइट क्रॉस करने पर दुपहिया वाहन के 100 और चौपहिया वाहन के 200 रुपए जुर्माने का प्रावधान है।<br /><br /><strong>नो-पार्किंग के 52,214 चालान</strong> <br />ट्रैफिक नियम जानते हुए भी शहरवासी रूल तोड़ रहे हैं। नो-पार्किंग में वाहन खड़ा कर देते हैं। जिससे जाम की समस्या बन जाती है। कई बार तो हादसे तक हो जाते हैं। शहरभर में नो-पार्किंग में वाहन खड़े करने के 52 हजार 214 चालान काटे गए हैं। <br /> <br /><strong>रॉन्ग साइड के बने 37669 चालान</strong> <br />आंकड़ों के मुताबिक लोगों में जरा भी ट्रैफिक सेंस नहीं है। गत ढाई सालों में हेलमेट के बाद सबसे ज्यादा चालान रोंग साइड़ के बने हैं। वर्ष 2020 से अप्रेल 2022 तक 37 हजार 669 लोग चालान कटवाकर लाखों रुपए भुगत चुके। इनमें सबसे ज्यादा संख्या बाइकर्स की है। आलम यह है, शहर में जिन सडकों पर दांए से बाएं जाने के लिए कोई कट नहीं बना हुआ है और यू-टर्न लेने के लिए लंबा चक्कर से बचने को बाइक सवार रोंग साइड में घुस जाते हैं। जिन सड़कों पर कंजेक्शन ज्यादा रहता है वहां तो यह टेंÑड आम हो चला है। शहर के मुख्य मार्ग एरोडाÑम सर्कल, अंटाघर, जेल चौराहा, घोडेÞ वाले चौराहे पर हर दिन ऐसे ही हालात बने रहते हैं।<br /><br /><strong>सीट बेल्ट नहीं, 42,61200 वसूले</strong><br />बाइकर्स के अलावा चौपहिया वाहन चालक भी अपनी सुरक्षा को लेकर सजग नहीं है। पुलिस ने 9447 चालान बनाकर 42 लाख 61 हजार 200 रुपए का जुर्माना किया है।  <br /><br /><strong>तीन सवारी बैठाकर दौड़ाते हैं बाइक</strong><br />शहर में बिना हेलमेट के अलावा तीन सवारी बैठाकर बाइक दौड़ाने के मामले भी तेजी से बढ़ रहे हैं। इन्हें न तो अपनी और न ही दूसरों की जान की परवाह है। पिछले तीन सालों में 9 हजार 145 बाइकर्स के चालान बनाकर 9 लाख 14 हजार 500 रुपए जुर्माना वसूला। <br /><br /><strong>फैक्ट फाइल</strong><br />  2020<br />चालान: 127242<br />जुर्माना :26373250</p>
<p><br />2021<br />चालान: 149035<br />जुर्माना : 34072200</p>
<p><br />2022 अप्रैल तक<br />चालान: 25044<br />जुर्माना : 5380850<br /><br /><strong>इनका कहना है</strong><br />हेलमेट लगाना और यातायात नियमों का पालन करना वाहन चालक व उसके परिवार के हित में है, न की ट्रैफिक पुलिस के। नियमों का पालन करवा रहे हैं, उल्लंघन करने वालों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई करते हैं। <br /><strong>- राजेंद्र कविया, यातायात निरीक्षक</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 23 May 2022 17:16:14 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[kota]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>पशु चिकित्सा केंद्रों की होगी मम्मत,  15 करोड़ होंगे खर्च</title>
                                    <description><![CDATA[न्यायालयों के लिए अपरलोक अभियोजक एवं राजकीय अभिभाषक (अधिवक्ता संवर्ग) के 3 पद, क्लर्क ग्रेड-2 के 3 पद एवं चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी के 3 पदों का सृजन किया जाएगा।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/jaipur-news--veterinary-centers-will-be-repaired--15-crores-will-be-spent/article-10264"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-05/ashok-g3.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने प्रदेश के 3 हजार पशु चिकित्सा संस्थानों में मरम्मत एवं उन्नयन के कार्य के लिए 15 करोड़ रूपए के अतिरिक्त बजट प्रावधान को मंजूरी दी है। गहलोत ने वर्ष 2022-23 के बजट में घोषणा की थी कि वर्तमान वित्तीय वर्ष में प्रदेश के 3 हजार पशु चिकित्सा संस्थानों में 15 करोड़ रूपए की लागत से मरम्मत एवं उन्नयन के कार्य पशु चिकित्सा रिलीफ सोसायटी के माध्यम से करवाये जाएंगे। <br /><br /><strong>3 अपर जिला न्यायाधीश न्यायालयों में विभिन्न नवीन पदों का सृजन</strong><br />गहलोत ने अलवर जिले के भिवाड़ी, चूरू के तारानगर और बीकानेर के नोखा में नवसृजित अपर जिला न्यायाधीश न्यायालयों में नवीन पद सृजित किए जाने और कार्यालय व्यय राशि उपलब्ध कराए जाने के प्रस्तावों को स्वीकृति दी है। प्रस्ताव के अनुसार उक्त न्यायालयों के लिए अपरलोक अभियोजक एवं राजकीय अभिभाषक (अधिवक्ता संवर्ग) के 3 पद, क्लर्क ग्रेड-2 के 3 पद एवं चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी के 3 पदों का सृजन किया जाएगा। साथ ही, उपरोक्त कार्यालयों के लिए नवीन टेबल, कुर्सी, अलमारी एवं अन्य सामग्री की खरीद की जाएगी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 23 May 2022 12:49:18 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>जल जीवन मिशन के तोड़े नियम: पानी की गुणवत्ता जांच का पैसा स्लोगन-वॉल पेटिंग पर बहाया</title>
                                    <description><![CDATA[जिलों में जांच लैब-किट बनाने के 1815.37 लाख रुपए की कर दी कटौती]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/jaipur--breaking-rules-of-jal-jeevan-mission--money-for-water-quality-check-was-spent-on-slogan-wall-painting/article-9155"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-05/water.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। प्रदेश में जल जीवन मिशन में एक करोड़ से ज्यादा घरों में हर घर नल का काम चल रहा है। पानी की गुणवत्ता जांच की लैब्स और जागरूकता पर भी पैसे का अलग मद रखा है, लेकिन मिशन का पैसा अफरशाही की भेंट चढ़ रहा है। 2021-22 बजट में 2 फीसदी पैसा आईईसी गतिविधियों और पानी की गुणवत्ता पर खर्च करने का केन्द्र सरकार ने नियम को तोड़कर अफसरों ने 13.93 करोड़ की जगह 32.08 करोड़ रुपए का बजट करवा लिया।  हद तो तब हो गई जब इस पैसे को पानी की गुणवत्ता जांच पर 1815.37 करोड़ रुपए की भी कटौती कर दी। इस पैसे से पानी की जांच को जिलों में लैब्स को अपग्रेडेशन पर खर्च करना था। साथ ही पानी जांच के किट खरीदने थे ताकि गुणवत्ता युक्त पानी पिलाया जा सके। लैब्स अपग्रेडेशन के 1641.37 लाख और जांच किट खरीदने के 174.18 लाख बजट से कम कर दिए। अन्य मदों से भी पैसा काटा गया। 2.10 करोड़ की जगह 20.83 करोड़ तो केवल दीवारों पर स्लोगन-वॉल पेंटिंग में खर्च किए और अधिकारियों ने चहेती फर्मों को स्लोगन लिखने, सनबोर्ड, डिजिटल पेटिंग को ठेके दे दिए।<br /><br /><strong>घर तक जलापूर्ति में नहीं दिखी फुर्ती : 18500 करोड़ हर-घर नल में खर्च नहीं कर पाए</strong> <br />मिशन में अगस्त, 2019 से अब तक जलदाय विभाग को 22 हजार करोड़ रुपए केन्द्र से आवंटित हुए, लेकिन अफसरों ने हर घर नल कनेक्शन कर जलापूर्ति सुनिश्चित करने में फुर्ती नहीं दिखाई। केवल 3500 करोड़ रुपए ही खर्च किए, इसके चलते 18500 करोड़ रुपए का बजट लैप्स हो गया। <br /><br />मिशन के फंड से 2% पैसा इन कामों पर खर्च होने का ही नियम है। जलदाय विभाग की इकाई वॉटर सैनिटेशन सपोर्ट ऑर्गेनाइजेशन के निदेशक स्तर से फाइल चली थी। अफसरों से निर्देश मिला तो बजट बढ़ाया। -<strong>दिनेश गोयल, चीफ इंजीनियर, जलजीवन मिशन, राजस्थान</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 05 May 2022 13:14:42 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur]]></dc:creator>
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                <title>फोन के लिए सरकार का पैसा खर्च, स्पीकर ने दिए निर्देश विपक्ष के सदस्य आईफोन वापस लें</title>
                                    <description><![CDATA[ पार्टी के निर्देश पर बीजेपी के 3 विधायकों को छोड़ सभी ने आईफोन वापस लौटा दिए थे।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/government-s-money-spent-for-the-phone--speaker-cp-joshi-instructed-the-members-of-the-opposition-to-take-back-the-iphone/article-6876"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-03/c-p-j1.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। विधानसभा अध्यक्ष सीपी जोशी ने सोमवार को विधानसभा में व्यवस्था देते हुए कहा कि भाजपा विधायकों को निर्देश देता हूँ कि विधानसभा की ओर से जो विधायकों को फोन दिए गए हैं वह सभी विधायक उन्हें वापस ले लें।  इन फोन के लिए सरकार का पैसा खर्च हुआ है।<br /><br />स्पीकर ने कहा कि अगर आप काम नहीं लेंगे तो उस पैसे का सही इस्तेमाल नहीं हो सकेगा। स्पीकर ने विपक्ष के सभी विधायकों को दिए फोन लेने के निर्देश दिए। पार्टी के निर्देश पर बीजेपी के 3 विधायकों को छोड़ सभी ने आईफोन वापस लौटा दिए थे। अब आसन से स्पीकर ने  निर्देश देते हुए कहा कि विधानसभा ने सारी जानकारियां और सूचनाएं ऑनलाइन कर दी है। बजट भी डिजिटल कॉपी में ही दिया गया है। यह फोन इसलिए दिया गया, जिससे विधायकों की दक्षता बढ़ सके। विधानसभा से संबंधित सूचनाएं और डिजिटल जानकारियां अपने फोन पर एक्सेस कर सकें। स्पीकर ने कहा - मैं आपसे आग्रह तो नहीं करूंगा। क्योंकि आग्रह तो आप माने या ना माने? इसलिए आसन से स्पीकर ने बीजेपी विधायकों को निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि आप सभी विधायक इन फोन का इस्तेमाल संसदीय कार्य में अपनी दक्षता बढ़ाने के लिए करें। स्पीकर के इस निर्देश का सदन में टेबल बजाकर स्वागत हुआ। विपक्ष के भी कुछ विधायक दिखे टेबल बजाते हुए।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 28 Mar 2022 13:12:24 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Administrator]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>डॉ. किरोड़ी लाल मीणा ने मंत्री गुढ़ा के घर के शयन कक्ष के बाहर ही गुजारी रात, मनीषा जाट को न्याय दिलाने के लिए धरना जारी</title>
                                    <description><![CDATA[उदयपुरवाटी की मनीषा जाट को न्याय दिलाने की मांग को लेकर राज्यसभा सांसद डॉक्टर किरोडी लाल मीणा का मंत्री राजेंद्र  गुढ़ा के घर पर धरना रात भर से जारी है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/%E0%A4%A1%E0%A5%89--%E0%A4%95%E0%A4%BF%E0%A4%B0%E0%A5%8B%E0%A4%A1%E0%A4%BC%E0%A5%80-%E0%A4%B2%E0%A4%BE%E0%A4%B2-%E0%A4%AE%E0%A5%80%E0%A4%A3%E0%A4%BE-%E0%A4%A8%E0%A5%87-%E0%A4%AE%E0%A4%82%E0%A4%A4%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A5%80-%E0%A4%97%E0%A5%81%E0%A5%9D%E0%A4%BE-%E0%A4%95%E0%A5%87-%E0%A4%98%E0%A4%B0-%E0%A4%95%E0%A5%87-%E0%A4%B6%E0%A4%AF%E0%A4%A8-%E0%A4%95%E0%A4%95%E0%A5%8D%E0%A4%B7-%E0%A4%95%E0%A5%87-%E0%A4%AC%E0%A4%BE%E0%A4%B9%E0%A4%B0-%E0%A4%B9%E0%A5%80-%E0%A4%97%E0%A5%81%E0%A4%9C%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A5%80-%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%A4--%E0%A4%AE%E0%A4%A8%E0%A5%80%E0%A4%B7%E0%A4%BE-%E0%A4%9C%E0%A4%BE%E0%A4%9F-%E0%A4%95%E0%A5%8B-%E0%A4%A8%E0%A5%8D%E0%A4%AF%E0%A4%BE%E0%A4%AF-%E0%A4%A6%E0%A4%BF%E0%A4%B2%E0%A4%BE%E0%A4%A8%E0%A5%87-%E0%A4%95%E0%A5%87-%E0%A4%B2%E0%A4%BF%E0%A4%8F-%E0%A4%A7%E0%A4%B0%E0%A4%A8%E0%A4%BE-%E0%A4%9C%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A5%80/article-4381"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-02/kirodi-dharna.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। उदयपुरवाटी की मनीषा जाट को न्याय दिलाने की मांग को लेकर राज्यसभा सांसद डॉक्टर किरोडी लाल मीणा का मंत्री राजेंद्र  गुढ़ा के घर पर धरना रात भर से जारी है। मनीषा के पति रामनिवास रीट परीक्षा के पेपर का कंटेनर ले जा रहे थे, रास्ते में ट्रक पलटने के बाद रामनिवास की मौत हुई थी। किरोड़ी का आरोप है कि मौत नहीं यह साजिशन हत्या थी। किरोड़ीलाल ने रात  मंत्री के घर के शयन कक्ष के बाहर ही गुजारी। राज्य में REET परीक्षा रद्द होने के बाद भी विवाद, धरने और प्रदर्शन थमने का नाम नहीं ले रहे है। राजस्थान विधानसभा और सदन के बाहर विरोध जारी है। एक दिन पहले शुक्रवार को  राज्यसभा सांसद मीणा मुख्य सचिव उषा शर्मा से मिलने के बाद फिर से  सरकार के मंत्री राजेंद्र सिंह गुढा के आवास पर धरने पर है। गुढ़ा को आवंटित बंगले में लंबे समय तक किरोड़ीलाल मीणा भी रहे है। धरने पर रीट परीक्षा के पेपर लेकर जा रहे मृतक कंटेनर चालक की पत्नी भी साथ है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 12 Feb 2022 11:13:48 +0530</pubDate>
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