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                <title>मुख्यमंत्री के बयान पर नेता प्रतिपक्ष का पलटवार, आपकी तीन पीढ़ियां संघ को लेकर इसी भाषा का प्रयोग करती आई है</title>
                                    <description><![CDATA[CM के RSS को लेकर दिए बयान पर नेता प्रतिपक्ष गुलाबचंद कटारिया का पलटवार]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/jaipur-news--leader-of-opposition-counterattacked-on-chief-minister-s-statement--kataria-said--your-three-generations-have-been-using-this-language-regarding-the-sangh/article-8001"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-04/kat.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। मुख्यमंत्री के आरएसएस को लेकर दिए बयान पर पलटवार करते हुए नेता प्रतिपक्ष गुलाबचंद कटारिया ने कहा कि  हमारी पैदाइश से पहले संघ बना है और आपकी तीन पीढ़ियां संघ को लेकर इसी भाषा का प्रयोग करती आई है, लेकिन हर बार संघ मजबूती के साथ आगे बढ़ा है।<br /><br />कटारिया ने मुख्यमंत्री के बयान को शर्मनाक बताते हुए कहा कि  संघ की स्थापना सत्ता के लिए नहीं राष्ट्र और व्यक्तित्व निर्माण के लिए हुई थी। संघ लगातार इसी काम को आगे बढ़ाने में जुटा हुआ है। कभी देश की सबसे बड़ी पार्टी आज एक कोने में दब गई। अब जब कांग्रेस पार्टी का धरातल सिमटने लगा है तो उसके नेता हल्की भाषा का उपयोग करने लगे हैं। अगर सरदार वल्लभ भाई पटेल की सोच के आधार पर देश बनाया जाता तो आज हम दुनिया मे ओर भी आगे होते। कटारिया ने संघ के कार्य को लेकर सीएम गहलोत को खुली चुनौती देते हुए कहा कि वे मीडिया के सामने एक मंच पर आ जाए।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 16 Apr 2022 14:09:40 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Administrator]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>IPL:  आईपीएल की आचार संहिता का उल्लंघन,  बुमराह, राणा पर जुर्माना</title>
                                    <description><![CDATA[ उल्लंघन के लिए मैच रेफरियों का निर्णय अंतिम और मान्य होता है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/khel/sports--ipl--news--mumbai-indian-pacer-jasprit-bumrah-and-kolkata-knight-riders--kkr--batsman-nitish-rana-have-been-fined-for-breaching-the-ipl-code-of-conduct-during-the-match/article-7564"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-04/nitish-rana-and-jasprit-bumrah-.jpg" alt=""></a><br /><p>पुणे। आईपीएल में दो खिलाड़ियों पर आचार संहिता का उल्लंघन करने पर जुर्माना लगाया गया है। मुंबई इंडियन के तेज गेंदबाज जसप्रीत बुमराह और कोलकाता नाइट राइडर्स (KKR) के बल्लेबाज नीतीश राणा पर मैच के दौरान आईपीएल की आचार संहिता का उल्लंघन करने के लिए जुर्माना लगाया गया है। आईपीएल ने गुरुवार को इसकी घोषणा की। <br /><br />आईपीएल ने एक बयान में कहा है कि पुणे में बुधवार को मुंबई इंडियंस के खिलाफ मैच के दौरान आचार संहिता का उल्लंघन करने के लिए नीतीश राणा को फटकार लगाई गई है और उन पर 10 प्रतिशत मैच फीस का जुर्माना लगाया गया है। दोनों खिलाड़यिों ने आचार संहिता के लेवल एक के उल्लंघन और उन पर लगाए गए जुर्माने को स्वीकार किया है।उल्लेखनीय है कि इस तरह के उल्लंघन के लिए मैच रेफरियों का निर्णय अंतिम और मान्य होता है। कोलकाता ने बुधवार को पैट किंमस की तूफानी पारी की बदौलत यह मैच पांच विकेट से जीत लिया थ। <br /><br /></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>खेल</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 07 Apr 2022 16:21:07 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Administrator]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>इंटेलिजेंस और प्रशासन का अलर्ट मान लिया होता तो नहीं होता उपद्रव</title>
                                    <description><![CDATA[तीन सदस्यीय कमेटी ने सीएम गहलोत को सौंपी रिपोर्ट, दोनों पक्षों की गलती और पुलिस की भी लापरवाही मानी]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/-if-the-alerts-of-intelligence-and-administration-were-accepted--there-would-not-have-been-a-nuisance--the-three-member-committee-submitted-the-report-to-cm-gehlot--accepted-the-mistake-of-both-the-parties-and-also-the-negligence-of-the-police/article-7541"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-04/1111.jpg" alt=""></a><br /><p> जयपुर। करौली में गुरूवार को 2 घंटे की कर्फ्यू में छूट दी गई। सुबह 9 से 11 बजे तक कर्फ्यू में ढील दी गई। इस दौरान लोग बाजारों में जरूरी सामान लेने के लिए निकले। इस दौरान भारी पुलिस बल भी तैनात रहा। लेकिन पुलिस मुख्यालय की इंटेलिजेंस और प्रशासन (कानून व्यवस्था) विंग की ओर से धार्मिक आयोजनों को लेकर जारी किए गए अलर्ट को यदि करौली जिला पुलिस ने गंभीरता से लिया होता तो वहां उपद्रव नहीं होता। इन दोनों ही ब्रांच ने मार्च के अंत में प्रदेशभर की जिला पुलिस को अलर्ट जारी किया था, फिर भी करौली में सीआई, डिप्टी एसपी, एएसपी और एसपी ने गम्भीरता नहीं दिखाई और उपद्रवी अपने मंसूबों में कामयाब हो गए। अब पुलिस मुख्यालय ने दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई करने की तैयारी कर ली है। उच्चाधिकारियों ने लापरवाह अधिकारियों की पूरी जानकारी सीएमओ को दे दी है। जल्द ही उच्च स्तर पर बड़ी कार्रवाई होगी। <br /><br /><strong>उच्चाधिकारियों ने सीएमओ में रखी बात, लापरवाह पुलिस अफसरों पर हो कार्रवाई</strong><br /><strong>बवाल को समेटने में 3 अधिकारी रातभर जागे</strong><br />करौली पुलिस की लापरवाही के कारण पुलिस मुख्यालय के अधिकारी भी जूझते नजर आए। उपद्रव को रोकने और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए डीजीपी एमएल लाठर, डीजी (इंटेलिजेंस) उमेश मिश्रा और एडीजी (कानून-व्यवस्था) हवासिंह घुमरिया को रातभर जागना पड़ा और पल-पल की खबर रखकर मौके पर कानून-व्यवस्था बनाए रखने के निर्देश दिए। पुलिस मुख्यालय से भेजे चार आईपीएस में से दो ने बेहतर कार्य किया। <br /><br /><strong>आरपीएस को नाकाबंदी में लगाया</strong> <br />करौली में तनाव शुरू हो गया, कर्फ्यू लगाने के साथ नेटबंदी लागू कर दी गई। पुलिस मुख्यालय से भेजे अधिकारियों ने फील्ड में जाकर दौरा किया तो पता चला कि कानून-व्यवस्था बनाने में लगाए गए जाब्ता भी सही नहीं है। जयपुर से भेजे गए कई आरपीएस अधिकारियों को नाकाबंदी में लगा दिया गया जबकि एएसआई और एसआई स्तर के अधिकारी गाड़ियों में घूमकर स्थिति को देख रहे थे। यह सब देखकर नए तरीके से जाब्ता लगाया गया। <br /><br /><strong>राजाराम को पकड़ने के लिए दबिश</strong><br />करौली उपद्रव की नामजद एफआईआर में शामिल जयपुर मेयर सौम्या गुर्जर के पति को पकड़ने के लिए पुलिस टीम लगातार दबिश दे रही है। तीन अप्रैल से फरार राजाराम के लिए एक टीम यूपी भी भेजी गई है। करौली उपद्रव में पुलिस अभी तक 22 लोगों को गिरफ्तार कर चुकी है। <br /><br />पुलिस मुख्यालय की प्रशासन शाखा ने धार्मिक आयोजनों को लेकर गत माह में ही लिखित में आदेश जारी कर दिए थे। करौली में इस आदेश को गम्भीरता से नहीं लिया गया। किसी भी लापरवाह अधिकारी को बख्शा नहीं जाएगा। <br />-<strong>मोहन लाल लाठर, पुलिस महानिदेशक, राजस्थान</strong><br /><br /><span style="background-color:#ffff99;color:#ff0000;"><strong>तीन सदस्यीय कमेटी ने सीएम गहलोत को सौंपी रिपोर्ट, दोनों पक्षों की गलती और पुलिस की भी लापरवाही मानी</strong></span><br /> करौली पथराव मामले में कांग्रेस की गठित तीन सदस्यीय कमेटी ने मौका स्थल का दौरा कर रिपोर्ट मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को सौंप दी है। रिपोर्ट में दोनों पक्षों की गलती मानी है और पुलिस की लापरवाही भी बड़ा कारण है। <br />इस कमेटी में भरतपुर संभाग प्रभारी विधायक डॉ. जितेन्द्र सिंह, राज्य अल्पसंख्यक आयोग अध्यक्ष विधायक रफीक खान और करौली प्रभारी ललित यादव थे।  कमेटी सदस्य ललित यादव ने बताया कि रैली निकालने वाले लोगों की गलती यह थी कि वे लगातार भड़काऊ नारेबाजी करते रहे तो वहीं छतों पर मौजूद दूसरे पक्ष की गलती यह थी कि उन्होंने अपनी भावनाओं पर काबू नहीं रखकर पथराव किया। गहलोत को सौंपी रिपोर्ट में कमेटी ने सिफारिश की है कि सीसीटीवी फुटेज में जो नजर आ रहे हैं, उनके खिलाफ कार्रवाई की जाए। घटनाक्रम में साम्प्रदायिक सद्भाव बिगाड़ने में किसी भी पार्टी के व्यक्ति ने कोशिश की हो, उसके खिलाफ बिना भेदभाव के सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। रिपोर्ट में पुलिस की भी गलती मानी है।रैली में लाउड स्पीकर बजाने की अनुमति नहीं होने के बावजूद पुलिस ने नहीं रोका। प्रशासन के पास मौजूद 30 से ज्यादा पुलिसकर्मियों को रैली में नहीं लगाकर रिजर्व में बिठाए रखा। रिपोर्ट में हिंसा और आगजनी घटना में हुए नुकसान का ब्यौरा भी दिया है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 07 Apr 2022 13:28:05 +0530</pubDate>
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                <title>जवाहर सर्किल थाने में सुसाइड का मामला, पत्नी बोली: पुलिस अंकित को जिंदा लेकर गई थी, अब लाश दे रही'</title>
                                    <description><![CDATA[अंकित के खिलाफ पूर्व में दर्ज हैं केस ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/suicide-case-in-jawahar-circle-police-station--wife-said--police-had-taken-ankit-alive--now-giving-dead-body--in-the-presence-of-the-magistrate--the-body-was-brought-down-after-13-hours--cases-have-been-registered-against-ankit-in-the-past/article-4748"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-02/35.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। जवाहर सर्किल थाने की हवालात में कथित खुदकुशी करने वाले अंकित त्यागी के परिजन रोते-बिलखते थाने पहुंचे और पुलिस के खिलाफ नारेबाजी की। मृतक की पत्नी सुनीता ने कहा कि अंकित कमजोर नहीं था। पुलिस उसे जिंदा पकड़कर ले गई थी और अब उसकी लाश दे रहे हैं। मैं अपने बच्चों को क्या जवाब दूंगी। शिकायत करने वालों और जिम्मेदार पुलिसकर्मियों के खिलाफ  कानूनी कार्रवाई की मांग करते हुए पीड़िता रोती बिलखती रही। मजिस्ट्रेट की मौजूदगी में 13 घंटे बाद शव को नीचे उतारा गया। मेडिकल बोर्ड से शव का पोस्टमार्टम करवाया जाएगा। अब यह सुसाइड है या कुछ और इसका पूरा खुलासा जांच के बाद ही होगा। पुलिस ने अंकित को बीते 19 फरवरी को छेड़छाड में गिरफ्तार किया था। <br /><strong><br />पूर्व में दर्ज हैं केस </strong><br />मृतक अंकित के खिलाफ  पूर्व में भी पॉक्सो के तीन मामले दर्ज हैं। वर्ष 2014 में एक्सीटेंड का, 2016 में श्याम नगर और 2017 में शिप्रापथ थाने में पॉक्सो एक्ट में मामला दर्ज हुआ। हालांकि एक मुकदमे में आरोपी पूर्व में बरी हो चुका है।<br /><br /><strong>थाने में सीसीटीवी खराब </strong><br />पुलिस अधिकारी आए दिन सीसीटीवी लगाने की बात कहते हैं, लेकिन जवाहर सर्किल थाने में सीसीटीवी कैमरे ही बंद थे। जबकि सुप्रीम कोर्ट के निर्देश हैं कि हर थाने में सीसीटीवी कैमरे लगाने होंगे फिर भी पालना नहीं की गई। जवाहर सर्किल थाने का सीसीटीवी दो माह से बंद पड़ा था। थानाधिकारी राधारमण गुप्ता ने भी इसे ठीक कराने की जहमत नहीं उठाई।<br /><br /><strong>बेटी पूछेगी पापा कैसे मरे तो क्या बताऊंगी</strong><br />मृतक अंकित ने दो माह पूर्व ही अपनी बड़ी बहन की बेटी को गोद लिया था। हालांकि उसकी शादी को अभी सात माह ही हुए हैं। अंकित की पत्नी सुनीता रोती हुई एडिशनल डीसीपी अवनीश कुमार से बोली की बेटी बड़ी होगी तो पूछेगी पिता कैसे मरे तो मैं क्या बताऊंगी।</p>
<p><br /><strong>वर्ष 2011 के बाद यह चौथा मामला</strong><br />वर्ष 2011 में जयपुर कमिश्नरेट की स्थापना के बाद आज तक चार बार थाने में सुसाइड केस हो चुके हैं। शिप्रापथ थाना, करणी विहार, शिवदासपुरा थाने में सुसाइड के बाद आज जवाहर सर्किल थाने में सुसाइड हुआ है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 21 Feb 2022 11:35:46 +0530</pubDate>
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                <title>पहला निलंबन : 1982 में दाऊदयाल जोशी का हुआ, अब तक 58 विधायक हो चुके हैं निलंबित </title>
                                    <description><![CDATA[निलंबित हो चुके विधायकों में से अभी अधिकांश मंत्री, वर्तमान विधानसभा अध्यक्ष भी हो चुके हैं एक बार निलंबित]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/%E0%A4%AA%E0%A4%B9%E0%A4%B2%E0%A4%BE-%E0%A4%A8%E0%A4%BF%E0%A4%B2%E0%A4%82%E0%A4%AC%E0%A4%A8---1982-%E0%A4%AE%E0%A5%87%E0%A4%82-%E0%A4%A6%E0%A4%BE%E0%A4%8A%E0%A4%A6%E0%A4%AF%E0%A4%BE%E0%A4%B2-%E0%A4%9C%E0%A5%8B%E0%A4%B6%E0%A5%80-%E0%A4%95%E0%A4%BE-%E0%A4%B9%E0%A5%81%E0%A4%86--%E0%A4%85%E0%A4%AC-%E0%A4%A4%E0%A4%95-58-%E0%A4%B5%E0%A4%BF%E0%A4%A7%E0%A4%BE%E0%A4%AF%E0%A4%95-%E0%A4%B9%E0%A5%8B-%E0%A4%9A%E0%A5%81%E0%A4%95%E0%A5%87-%E0%A4%B9%E0%A5%88%E0%A4%82-%E0%A4%A8%E0%A4%BF%E0%A4%B2%E0%A4%82%E0%A4%AC%E0%A4%BF%E0%A4%A4/article-4401"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-02/vidhan-sabha2.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। विधानसभा में अब तक 58 विधायक निलंबित हो चुके हैं। निलंबन की पहली कार्रवाई 40 साल पहले सातवीं विधानसभा में हुई थी। निलंबित हुए थे दाऊदयाल जोशी। घटना 15 मार्च 1982 की है। इसके बाद 11 मार्च 1983 को भाजपा के देवीसिंह भाटी निलम्बित हुए। विधानसभा अध्यक्ष डॉ. सीपी जोशी भी एक बार निलंबित हो चुके हैं। विधानसभा में भाजपा के चार सदस्यों के निलंबन के विरोध में दो दिन से गतिरोध है। विधानसभा के अनुसार आठवीं विधानसभा में 18 जुलाई 1989 को जगतसिंह दायमा, जगदीप धनकड़, अमराराम चौधरी, भंवरलाल शर्मा और जुबेर खान भी निलम्बित हुए। धनकड़ अभी पश्चिम बंगाल के राज्यपाल हैं। 11वीं विधानसभा में 10 अप्रैल, 2002 को देवीसिंह भाटी और 19 मार्च को नाथूलाल गुर्जर तथा 2 अप्रैल 1999 को मदन दिलावर को निलम्बित किया गया। 12वीं विधानसभा में 24 मार्च 2006 को एक साथ छह सदस्यों को निलम्बित किया गया था। इनमें डॉ.सीपी जोशी, अत्तर सिंह भड़ाना, अशोक बैरवा, संयम लोढ़ा, सीडी देवल और रणवीर गुढ़ा थे। डॉ.जोशी अब विधानसभा अध्यक्ष हैं। इसके बाद विभिन्न सत्रों में आठ और विधायकों के खिलाफ निलंबन की कार्रवाई की गई। उस समय अध्यक्ष पद पर सुमित्रा सिंह थी। 13वीं विधानसभा में विभिन्न सत्रों के दौरान पांच सदस्यों का निलंबन हुआ,जिनमें ज्ञानदेव आहुजा, हेमसिंह भड़ाना, भवानीसिंह राजावत, राजेन्द्र राठौड़ और हनुमान बेनीवाल शामिल हैं। राठौड़ अभी विधानसभा में प्रतिपक्ष के उपनेता है। सबसे ज्यादा सदस्यों का निलंबन 14वीं विधानसभा में हुआ। इस विधानसभा में अध्यक्ष पद पर दीपेन्द्र सिंह शेखावत थे। इसमें विभिन्न सत्रों में 22 सदस्यों का निलंबन हुआ। <br /><br /><strong>एक बार ऐसा मौका भी आया, जब 14 सदस्यों का हुआ निलंबन</strong><br />सबसे ज्यादा 14 सदस्यों का एक साथ निलंबन 26 अप्रैल 2017 को हुआ। उस दिन अशोक, गोविन्द सिंह डोटासरा, घनश्याम, धीरज गुर्जर, भजनलाल, मनोज कुमार, मेवाराम जैन, रमेश, राजेन्द्र सिंह यादव, शंकुन्तला रावत, श्रवण कुमार, सुखराम विश्नोई, हनुमान बेनीवाल और हीरालाल दरांगी शामिल हैं। इससे पहले तीन मार्च, 2015 को अशोक चांदना, श्रवण कुमार, धीरज गुर्जर, गोविन्द्र सिंह डोटासरा, सुखराम विश्नोई, रमेश, बिजेन्द्र ओला और गिरिराज सिंह को निलम्बित किया गया । इनमें से डोटासरा अभी राजस्थान प्रदेश कांगे्रस के अध्यक्ष, राजेन्द्र सिंह यादव, शकुंतला, सुखराम विश्नोई, अशोक चांदना और बृजेन्द्र सिंह ओला मंत्री हैं और बेनीवाल लोकसभा सदस्य। 15वीं विधानसभा में 24अगस्त,2020 को राजेन्द्र सिंह राठौड़ तथा एक मार्च 2021 को वासुदेव देवनानी को निलम्बित किया गया था। एक दिन पहले गुरुवार को भाजपा के चार विधायकों को  निलम्बित किया गया। <br /><strong><br />पहले सदस्य सदन में आचरण का ध्यान रखते थे : सुमित्रा सिंह</strong><br /> सन् 1957 से सबसे लम्बे समय तक सदस्य रहीं और पूर्व विधानसभाध्यक्ष सुमित्रा सिंह का मानना है कि 1977 के बाद सदस्यों के आचरण में गिरावट शुरू हुई। इससे पहले हर सदस्य सदन के नियमों और परम्पराओं का पूरा ध्यान रखते थे। इसलिए किसी सदस्य को निलंबित करने की नौबत ही नहीं आई। आसन जब पैरों पर रहता था तो कोई भी सदस्य अपनी सीट पर खड़ा नहीं होता था और न बीच में बोलता था। आसन पैरों पर रहते समय पूर्व मुख्यमंत्री मोहनलाल सुखाड़िया तक सदन में प्रवेश तक नहीं करते थे। कई मौके ऐसे आए, जब सुखाड़िया दस मिनट तक गेट पर इंतजार करते रहे। नेता प्रतिपक्ष सदन के नेता पर जमकर आरोप लगाते थे, लेकिन न तो सदन का नेता और न उसकी पार्टी के सदस्य बीच में बोलते थे। पहले जब कोई सदस्य बोलता था, तो दूसरा सदस्य उसके सामने से नहीं गुजरता था। बिना आसन की इजाजत के कोई भी सदस्य सदन नहीं छोड़ता था। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 12 Feb 2022 15:39:34 +0530</pubDate>
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