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                <title>satellite - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <title>डेटा ट्रांसमिशन में मिली चीन को बड़ी कामयाबी, नया संचार उपग्रह सफलतापूर्वक लॉन्च</title>
                                    <description><![CDATA[चीन ने हैनान के वेनचांग स्पेस लॉन्च साइट से संशोधित लॉन्ग मार्च-7 रॉकेट के जरिए एक नया संचार प्रौद्योगिकी परीक्षण उपग्रह सफलतापूर्वक कक्षा में स्थापित किया। यह उपग्रह मुख्य रूप से सैटेलाइट संचार, रेडियो-टीवी प्रसारण, डेटा ट्रांसमिशन सेवाओं और संबंधित तकनीकी परीक्षणों के लिए उपयोग किया जाएगा।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/china-gets-great-success-in-data-transmission-launches-new-communication/article-157853"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-06/018.png" alt=""></a><br /><p>बीजिंग। चीन ने मंगलवार को हैनान प्रांत में वेनचांग अंतरिक्ष प्रक्षेपण स्थल से एक नया संचार प्रौद्योगिकी परीक्षण उपग्रह अंतरिक्ष में भेजा। स्थानीय मीडिया के अनुसार, लॉन्ग मार्च-7 रॉकेट के एक संशोधित संस्करण के जरिए प्रक्षेपित किया गया यह उपग्रह सफलतापूर्वक अपनी कक्षा में प्रवेश कर गया है।</p>
<p>इस उपग्रह का उपयोग मुख्य रूप से उपग्रह संचार, रेडियो व टेलीविजन प्रसारण और 'डेटा ट्रांसमिशन' जैसी सेवाओं के साथ-साथ संबंधित प्रौद्योगिकी परीक्षण के लिए किया जाएगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 23 Jun 2026 15:10:36 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>ट्रंप सरकार का बड़ा ऐलान: ईरान के विदेशी सैन्य खरीद नेटवर्क पर लगाया प्रतिबंध, ईरानी हमलों में मदद करने के लिए सैटेलाइट इमेजरी प्रदान करने का आरोप, प्रतिबंधित संस्थाओं में चीनी कंपनियां शामिल</title>
                                    <description><![CDATA[अमेरिका ने ईरान के सैन्य नेटवर्क और ड्रोन कार्यक्रमों को कुचलने के लिए नए प्रतिबंधों की घोषणा की है। इनमें सैटेलाइट इमेजरी प्रदान करने वाली चीनी कंपनियां भी शामिल हैं, जो अमेरिकी सेना के लिए खतरा बनी थीं। 'ऑपरेशन एपिक फ्यूरी' के तहत ईरान की आपूर्ति शृंखला को वैश्विक स्तर पर बाधित करने का यह सख्त कदम है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/trump-governments-big-announcement-ban-on-irans-foreign-military-procurement/article-153241"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/1111200-x-600-px)-(3)17.png" alt=""></a><br /><p>वॉशिंगटन। अमेरिका ने ईरान के सैन्य खरीद नेटवर्क की सहायता करने के आरोप में कई संस्थानों पर नये प्रतिबंध लगाये हैं। इनमें वे कंपनियां भी शामिल हैं जिन पर कथित तौर पर पश्चिम एशिया में अमेरिकी और सहयोगी देशों की सेनाओं के खिलाफ ईरानी हमलों में मदद करने के लिए उपग्रह चित्र (सैटेलाइट इमेजरी) प्रदान करने का आरोप है। अमेरिकी विदेश विभाग की ओर से जारी फैक्ट शीट के अनुसार, मिसाइल  और ड्रोन संचालन सहित ईरानी सैन्य गतिविधियों को सक्षम बनाने वाली उपग्रह चित्र और संबंधित तकनीकी सहायता प्रदान करने के लिए चार संस्थाओं को प्रतिबंधित किया गया है।</p>
<p>अमेरिका ने कहा कि इस तरह की सहायता क्षेत्र में अमेरिकी और भागीदार सेनाओं के लिए सीधा खतरा पैदा करती है। अमेरिकी वित्त विभाग ने भी 10 व्यक्तियों और संस्थाओं को नामित किया है, जिन पर ईरान को उसके मानवरहित विमान (यूएवी) और बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रमों से संबंधित हथियार और कच्चा माल प्राप्त करने में मदद करने का आरोप है। अमेरिकी अधिकारियों ने कहा कि ये उपाय 'नेशनल सिक्योरिटी प्रेसिडेंशियल मेमोरेंडम 2' के तहत ईरान की सैन्य आपूर्ति शृंखलाओं को बाधित करने और 'ऑपरेशन एपिक फ्यूरी' के बाद उसके प्रसार-संवेदनशील कार्यक्रमों को फिर से खड़ा करने के किसी भी प्रयास को रोकने के व्यापक अभियान का हिस्सा हैं।</p>
<p>अधिकारियों ने बताया कि यह कार्रवाई परमाणु प्रतिबद्धताओं के प्रति ईरान की 'बेहद लापरवाही' दिखाने के बाद सितंबर 2025 में संयुक्त राष्ट्र (यूएन) के प्रतिबंधों को फिर से लागू किये जाने के बाद की गयी है। इन उपायों में संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव 1929 के तहत ईरान को पारंपरिक हथियारों के हस्तांतरण, तकनीकी सहायता और संबंधित सेवाओं पर प्रतिबंध शामिल हैं। प्रतिबंधित संस्थाओं में चीन स्थित कंपनियां जैसे मीनट्रॉपी टेक्नोलॉजी (मिज़ारविज़न) और द अर्थ आई (टीईई) शामिल हैं, जिन पर ईरानी सैन्य उपयोग से जुड़ी उपग्रह चित्र प्रदान करने का आरोप है।</p>
<p>एक अन्य चीनी कंपनी, चांग गुआंग सैटेलाइट टेक्नोलॉजी कंपनी लिमिटेड पर अमेरिकी और सहयोगी सैन्य स्थलों की तस्वीरें एकत्र करने और उनकी आपूर्ति करने तथा पहले अमेरिका के प्रतिबंधित हूतियों को डाटा प्रदान करने का आरोप लगाया गया है। ईरान के रक्षा मंत्रालय के निर्यात केंद्र (माइंडेक्स), जिसे पहले मॉडलेक्स के नाम से जाना जाता था, को भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ईरानी रक्षा उपकरणों को बढ़ावा देने में उसकी भूमिका के लिए नामित किया गया है। अमेरिकी सरकार ने दोहराया कि अंतरराष्ट्रीय प्रस्तावों के उल्लंघन में ईरान के सैन्य कार्यक्रमों को मिलने वाले किसी भी समर्थन के गंभीर परिणाम होंगे और ऐसी कार्रवाइयों का करारा जवाब दिया जायेगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 09 May 2026 16:10:20 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>चीन का शिजियान-32 उपग्रह प्रक्षेपण मिशन विफल : कारणों की जांच जारी, लॉन्ग मार्च-3बी वाहक रॉकेट का किया था उपयोग</title>
                                    <description><![CDATA[सिचुआन प्रांत के प्रक्षेपण केंद्र से रॉकेट ने 00:55 बजे (बीजिंग समयानुसार) उड़ान भरी, लेकिन उड़ान के दौरान एक असामान्य घटना हुई। विफलता के कारणों की जांच की जा रही है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/chinas-shijian-32-satellite-launch-mission-failed-investigation-into-reasons-underway/article-139871"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-01/6622-copy53.jpg" alt=""></a><br /><p>शीचांग। चीन के शीचांग उपग्रह प्रक्षेपण केंद्र से शिजियान-32 उपग्रह का प्रक्षेपण विफल रहा। इसके प्रक्षेपण में लॉन्ग मार्च-3बी वाहक रॉकेट का उपयोग किया गया था। </p>
<p>दक्षिण-पश्चिमी सिचुआन प्रांत के प्रक्षेपण केंद्र से रॉकेट ने 00:55 बजे (बीजिंग समयानुसार) उड़ान भरी, लेकिन उड़ान के दौरान एक असामान्य घटना हुई। विफलता के कारणों की जांच की जा रही है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 17 Jan 2026 12:59:06 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>विस्तृत सैटेलाइट आधारित वैज्ञानिक अध्ययन जारी : पहाड़ियां उजड़ने का करोड़ों लोगों पर पड़ेगा असर, इन्हें नष्ट करने से उपजाऊ मैदान भी बदल सकते हैं रेगिस्तान में  </title>
                                    <description><![CDATA[अरावली की कुल पहाड़ी भूमि का 31.8 प्रतिशत हिस्सा 100 मीटर से कम ऊंचाई का है, जिसे वर्तमान सरकारी मानकों के कारण कानूनी सुरक्षा से बाहर कर दिया गया है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/detailed-satellite-based-scientific-study-is-ongoing-destruction-of-hills/article-138281"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-01/6622-copy2.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। पर्यावरण संरक्षण समूह वी आर अरावली की ओर से शनिवार को जयपुर स्थित एक निजी कैफे में अरावली पवर्तमाला पर सरकार के मौजूदा दृष्टिकोण को चुनौती देता हुआ एक विस्तृत सैटेलाइट आधारित वैज्ञानिक अध्ययन जारी किया। इस अवसर पर क्लाइमेट साइंटिस्ट डॉ.सुधांशु भी मौजूद रहे। मीडिया कंवीनर डॉ. तनमय ने बताया कि यह स्वतंत्र विश्लेषण जीएसआई वैज्ञानिकों की एक टीम द्वारा ब्रिस्टोल फेबडेम के आधार पर किया गया है। अध्ययन से यह सामने आया है कि अरावली की कुल पहाड़ी भूमि का 31.8 प्रतिशत हिस्सा 100 मीटर से कम ऊंचाई का है, जिसे वर्तमान सरकारी मानकों के कारण कानूनी सुरक्षा से बाहर कर दिया गया है। </p>
<p>वी आर अरावली का दावा है कि इस अध्ययन से जुड़ा पूरा डेटा और इंटरैक्टिव मैप संस्था की वेबसाइट पर उपलब्ध है। डॉ.सुधांशु ने कहा कि इस निम्न ऊंचाई वाली पहाड़ियों से संरक्षण हटने का सीधा असर लगभग 30 करोड़ लोगों पर पड़ेगा। अध्ययन बताता है कि ये पहाड़ियां उन खाली गैप्स में स्थित हैं, जहां थार रेगिस्तान पहले से फैल रहा है। इन्हें नष्ट करने से उपजाऊ मैदान भी रेगिस्तान में बदल सकते हैं। जयपुर, गुरुग्राम और फरीदाबाद जैसे जल संकटग्रस्त शहरों के लिए यही क्षेत्र मुख्य भूजल पुनर्भरण जोन है। </p>
<p>अरावली धूल को रोकने वाली प्राकृतिक दीवार है। इन पहाड़ियों में खनन से दिल्ली-एनसीआर में पीएम 2.5 प्रदूषण और बढ़ेगा। जिससे स्वास्थ संकट गहराएगा। सभी प्रकार के खनन पर तुरंत रोक लगाने के साथ ही अन्य मांगे भी रखी। </p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 04 Jan 2026 10:22:57 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>चीन ने प्रक्षेपण केंद्र से नया उपग्रह किया लॉन्च </title>
                                    <description><![CDATA[उपग्रह का उपयोग मुख्य रूप से अंतरिक्ष पर्यावरण का पता लगाने जैसे प्रयोगों के लिए किया जाएगा। यह कुआइझोउ-1ए रॉकेट का 26वां उड़ान मिशन है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/china-launches-new-satellite-to-launch-center/article-66639"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-01/photo4.png" alt=""></a><br /><p>बीजिंग। चीन के उत्तर-पश्चिमी क्षेत्र में स्थित जिउक्वान उपग्रह प्रक्षेपण केंद्र से एक नया उपग्रह अंतरिक्ष में भेजा गया। स्थानीय समयानुसार सुबह करीब 11:52 बजे तियानक्सिंग-1 02 उपग्रह को कुआइझोउ-1ए वाहक रॉकेट द्वारा लॉन्च किया गया। उपग्रह का उपयोग मुख्य रूप से अंतरिक्ष पर्यावरण का पता लगाने जैसे प्रयोगों के लिए किया जाएगा। यह कुआइझोउ-1ए रॉकेट का 26वां उड़ान मिशन है।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 11 Jan 2024 16:45:16 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>चीन ने अपना नवीनतम रिमोट सेंसिंग उपग्रह अंतरिक्ष में किया प्रक्षेपित </title>
                                    <description><![CDATA[उपग्रह का उपयोग वैज्ञानिक प्रयोगों, भूमि संसाधन सर्वेक्षण, फसल उपज अनुमान और आपदा रोकथाम और राहत कार्यों के लिए किया जाएगा। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/china-launches-its-latest-remote-sensing-satellite-in-space/article-58163"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-09/size-16.png" alt=""></a><br /><p>जिउक्वान। चीन ने उत्तर पश्चिम चीन के जिउक्वान सैटेलाइट लॉन्च सेंटर से अपना नवीनतम रिमोट सेंसिंग उपग्रह अंतरिक्ष में प्रक्षेपित किया। उपग्रह, याओगन-33 04, को लॉन्ग मार्च-4सी वाहक रॉकेट पर सुबह 4:15 बजे प्रक्षेपित किया गया। </p>
<p>उपग्रह का उपयोग वैज्ञानिक प्रयोगों, भूमि संसाधन सर्वेक्षण, फसल उपज अनुमान और आपदा रोकथाम और राहत कार्यों के लिए किया जाएगा। यह प्रक्षेपण लॉन्ग मार्च वाहक रॉकेट श्रृंखला का 489वां उड़ान मिशन था।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 27 Sep 2023 12:34:04 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>चीन ने आपदाओं की देखरेख के लिए सिंथेटिक एपर्चर रडार उपग्रह अंतरिक्ष में किया प्रक्षेपित</title>
                                    <description><![CDATA[सीएनएसए ने बताया कि यह दुनिया का पहला हाई-ऑर्बिट सिंथेटिक एपर्चर रडार (एसएआर) उपग्रह है, जो परियोजना कार्यान्वयन चरण में प्रवेश कर चुका है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/china-launches-synthetic-aperture-radar-satellite-in-space-for-disasters/article-54521"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-08/222-copy2221.jpg" alt=""></a><br /><p>बीजिंग। चीन ने लॉन्ग मार्च-3बी रॉकेट के जरिए आपदाओं की देखरेख के लिए दुनिया का पहला ए-एसएआर4 01, हाई-ऑर्बिट सिंथेटिक एपर्चर रडार उपग्रह अंतरिक्ष में प्रक्षेपित किया है। चीन के राष्ट्रीय अंतरिक्ष प्रशासन (सीएनएसए) ने बताया कि सिचुआन प्रांत के जिचांग अंतरिक्ष केन्द्र से उपग्रह को प्रक्षेपित किया गया। </p>
<p>सीएनएसए ने बताया कि यह दुनिया का पहला हाई-ऑर्बिट सिंथेटिक एपर्चर रडार (एसएआर) उपग्रह है, जो परियोजना कार्यान्वयन चरण में प्रवेश कर चुका है। यह उपग्रह चीन की प्राकृतिक आपदाओं की अंतरिक्ष देखरेख को सही करेगा और आपदाओं की रोकथाम और उसमें कमी लाने की क्षमताओं में बढ़ोतरी करेगा।    </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 13 Aug 2023 16:09:20 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>अंतरिक्ष में सोयूज-2 रॉकेट पर उपग्रह लॉन्च करेगा यूएई </title>
                                    <description><![CDATA[रूसी अधिकारियों ने इससे पहले कहा था कि मेटेओर-एम मौसम उपग्रह के प्रक्षेपण के दौरान पीएचआई-डेमो एक अतिरिक्त पेलोड होगा।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/uae-will-doing-launch-satellite-in-space/article-49528"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-06/630-400-size-(15)7.png" alt=""></a><br /><p>अबू धाबी। संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के मोहम्मद बिन राशिद अंतरिक्ष केंद्र (एमबीआरएससी) अगले सप्ताह रूस के वोस्तोचन कोस्मोड्रोम से एक सोयूज-2 रॉकेट पर अंतरिक्ष में एक उपग्रह लॉन्च करेगा। दुबई सरकार के मीडिया कार्यालय ने यह जानकारी दी। मीडिया कार्यालय ने ट्वीट किया कि 27 जून को यूएई के समयानुसार अपराह्न तीन बजकर 34 मिनट पर एमबीआर स्पेस सेंटर सोयूज-2 रॉकेट का उपयोग करते हुए रूस के वोस्तोचन कोस्मोड्रोम से अपना पहला मिशन पीएचआई-डेमो लॉन्च करेगा। कार्यालय ने कहा कि इस पहल का नेतृत्व संयुक्त रूप से एमबीआरएससी और संयुक्त राष्ट्र कार्यालय के बाह्य अंतरिक्ष मामलों द्वारा किया जाएगा, जो वैश्विक सहयोग में सबसे अग्रसर होगा, अंतरिक्ष पहुंच प्रदान करेगा और अनूठे अंतरिक्ष प्रौद्योगिकियों की सतत विकास को तेज करेगा। एमबीआरएससी ने ट्विटर पर कहा कि दुनिया के पहले वैश्विक उपग्रह 5जी ऑपरेटर, ओक्यू टेक्नोलॉजी और स्टीमजेट के साथ साझेदारी में पेलोड होस्टिंग पहल के हिस्से के रूप में 2022 में मॉड्यूलर सैटेलाइट प्लेटफॉर्म बनाया गया था, जो इंटरनेट ऑफ थिंग्स संचार पेलोड वितरित करेगा। 5जी का उपयोग दूरस्थ क्षेत्रों में स्थित इंटरनेट से जुड़े उपकरणों से एकत्रित डेटा को कक्षा में संग्रहीत और अग्रेषित करने का काम करेगा।</p>
<p>रूसी अधिकारियों ने इससे पहले कहा था कि मेटेओर-एम मौसम उपग्रह के प्रक्षेपण के दौरान पीएचआई-डेमो एक अतिरिक्त पेलोड होगा। जून की शुरुआत में रूसी सरकार का एक फरमान प्रकाशित किया गया था, जिसमें बेलारूस, मलेशिया और संयुक्त अरब अमीरात के एक-एक उपग्रह सहित 42 छोटे उपग्रहों को रॉकेट द्वारा ले जाया जाएगा। वर्ष 2006 से संयुक्त अरब अमीरात ने अंतरिक्ष में कई उपग्रह लॉन्च किए हैं। वर्ष 2020 में यूएई ने ग्रह पर जलवायु परिस्थितियों का अध्ययन करने के लिए मंगल पर अल अमल अंतरिक्ष जांच शुरू की, जिसे होप प्रोब के रूप में भी जाना जाता है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 21 Jun 2023 11:23:59 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>उत्तर कोरिया का उपग्रह प्रक्षेपण विफल, जल्द करेगी अगला प्रक्षेपण </title>
                                    <description><![CDATA[रिपोर्ट के अनुसार उत्तर कोरिया ने स्थानीय समयानुसार मंगलवार सुबह 6 बजकर 27 मिनट पर (21 बजकर 27 मिनट जीएमटी) मैलिगयोंग-1 सैन्य टोही उपग्रह के साथ रॉकेट को प्रक्षेपित किया, लेकिन रॉकेट इंजन दूसरे चरण में प्रज्वलित होने में विफल रहा।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/satellite-launch-fail-due-to-engine-of-north-korea/article-47303"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-05/ff1.png" alt=""></a><br /><p>प्योंगयांग। उत्तर कोरिया का टोही उपग्रह को कक्षा में पहुंचाने के लिए चोलिमा-1 उपग्रह यान रॉकेट को प्रक्षेपित करने का प्रयास रॉकेट इंजन के दूसरे चरण में खराबी होने के कारण विफल हो गया है। रिपोर्ट के अनुसार उत्तर कोरिया ने स्थानीय समयानुसार मंगलवार सुबह 6 बजकर 27 मिनट पर (21 बजकर 27 मिनट जीएमटी) मैलिगयोंग-1 सैन्य टोही उपग्रह के साथ रॉकेट को प्रक्षेपित किया, लेकिन रॉकेट इंजन दूसरे चरण में प्रज्वलित होने में विफल रहा।</p>
<p>रिपोर्ट में कहा गया कि पहले चरण में अलग होने के बाद दूसरे चरण का इंजन प्रज्वलित होने में विफल रहा, जिससे रॉकेट ने शक्तिहीन हो गया और पीत सागर में गिर गया। रिपोर्ट के अनुसार उत्तर कोरिया की अंतरिक्ष एजेंसी रॉकेट की जांच और उसे सही करने के लिए तत्काल वैज्ञानिक एवं तकनीकी उपाय करेगी और विभिन्न परीक्षणों के बाद जल्द ही अगला प्रक्षेपण करेगी। रिपोर्ट के अनुसार उत्तर कोरिया की अंतरिक्ष एजेंसी के एक प्रवक्ता ने कहा कि माना जा रहा है कि यह दुर्घटना चोलिमा-1 रॉकेट में नई इंजन प्रणाली की विश्वसनीयता एवं स्थिरता की कमी और उपयोग किए गए ईंधन की अस्थिरता के कारण हुई। प्रवक्ता ने यह भी कहा कि वैज्ञानिक, इंजीनियर और विशेषज्ञ इस दुर्घटना के कारणों का पता लगाने की दिशा में काम कर रहे हैं।       </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 31 May 2023 14:44:46 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>चीन ने अंतरिक्ष में रिमोट सेंसिंग सैटेलाइट किया स्थापित</title>
                                    <description><![CDATA[रिमोट सेंसिंग सैटेलाइट को स्थानीय समयानुसार अपराह्न 12:01 बजे एक लांग मार्च-2सी वाहक रॉकेट द्वारा लॉन्च किया गया. वह अपनी नियोजित कक्षा में सफलतापूर्वक प्रवेश किया। यह लॉन्च मार्च करियर रॉकेट श्रृंखला का 464वां उड़ान मिशन है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/china-installs-remote-sensing-satellite-in-space/article-38165"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-02/site-photo-size-(5)9.jpg" alt=""></a><br /><p>जिउक्वान। चीन ने शुक्रवार को उत्तर-पश्चिम क्षेत्र में स्थित जिउक्वान सैटेलाइट लॉन्च सेन्टर से अंतरिक्ष में एक नया रिमोट सेंसिंग सैटेलाइट सफलतापूर्वक स्थापित किया। रिमोट सेंसिंग सैटेलाइट को स्थानीय समयानुसार अपराह्न 12:01 बजे एक लांग मार्च-2सी वाहक रॉकेट द्वारा लॉन्च किया गया. वह अपनी नियोजित कक्षा में सफलतापूर्वक प्रवेश किया। यह लॉन्च मार्च करियर रॉकेट श्रृंखला का 464वां उड़ान मिशन है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 24 Feb 2023 13:30:51 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>भारत के पहले छोटे उपग्रह प्रक्षेपण वाहन (एसएसएलवी) ने भरी उड़ान</title>
                                    <description><![CDATA[इस मौके पर इसरो अध्यक्ष डॉ एस सोमनाथ, पूर्व इसरो अध्यक्ष डॉ के राधाकृष्णन और श्री के सिवन तथा मिशन नियंत्रण केंद्र के वैज्ञानिक मौजूद रहे]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/indias-first-small-satellite-launch-vehicle-sslv-took-off/article-18158"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-08/capture-copy.jpg" alt=""></a><br /><p>श्रीहरिकोटा। भारत के पहले छोटे उपग्रह प्रक्षेपण वाहन (एसएलवी) ने पृथ्वी अवलोकन उपग्रह (ईओएस)-02 और एक सह-यात्री उपग्रह 'आजादीसैट' के साथ रविवार को यहां सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र (एसडीएससी) से उड़ान भरी। तड़के 02 बजकर 18 मिनट पर शुरू हुई उल्टी गिनती के सात घंटे बाद सुबह 09.18 बजे एसएलवी ने एसढीएससी शार रेंज से सफलतापूर्वक उड़ान भरी। इस मौके पर इसरो अध्यक्ष डॉ एस सोमनाथ, पूर्व इसरो अध्यक्ष डॉ के राधाकृष्णन और श्री के सिवन तथा मिशन नियंत्रण केंद्र के वैज्ञानिक मौजूद रहे।<br />रॉकेट के उड़ान भरने के साथ ही आसमान में नारंगी धुएं का गुबार उड़ता नजर आया और ऐसा लगा जैसे इसने पृथ्वी को हिला दिया। एसएसएलवी 34 मीटर लंबा है जो पीएसएलवी से लगभग 10 मीटर कम है। पीएसएलवी के 2.8 मीटर की तुलना में इसका व्यास दो मीटर है। एसएसएलवी का उत्थापन द्रव्यमान 120 टन है, जबकि पीएसएलवी का 320 टन है, जो 1,800 किलोग्राम तक के उपकरण ले जा सकता है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 07 Aug 2022 13:40:41 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>चीन ने पृथ्वी के लिए नए उपग्रह का किया परीक्षण</title>
                                    <description><![CDATA[चीन ने पश्चिमोत्तर चीन के जिउक्वान उपग्रह परीक्षण केंद्र से एक नए पृथ्वी-अवलोकन उपग्रह का परीक्षण किया है। रिपोर्ट के अनुसार उपग्रह गाओफेन -3 03, को लॉन्ग मार्च -4 सी रॉकेट द्वारा लांच किया गया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/china-test-new-satellite-of-earth/article-7514"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-04/465646.jpg" alt=""></a><br /><p>बीजिंग। चीन ने पश्चिमोत्तर चीन के जिउक्वान उपग्रह परीक्षण केंद्र से एक नए पृथ्वी-अवलोकन उपग्रह का परीक्षण किया है। रिपोर्ट के अनुसार उपग्रह गाओफेन -3 03, को लॉन्ग मार्च -4 सी रॉकेट द्वारा लांच किया गया। यह सफलतापूर्वक कक्षा में प्रवेश कर गया है। यह परीक्षण लॉन्ग मार्च सीरीज कैरियर रॉकेट्स के लिए 414 वां मिशन है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/world/china-test-new-satellite-of-earth/article-7514</link>
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                <pubDate>Thu, 07 Apr 2022 11:03:08 +0530</pubDate>
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