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                <title>satellite - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <description>satellite RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>चीन का शिजियान-32 उपग्रह प्रक्षेपण मिशन विफल : कारणों की जांच जारी, लॉन्ग मार्च-3बी वाहक रॉकेट का किया था उपयोग</title>
                                    <description><![CDATA[सिचुआन प्रांत के प्रक्षेपण केंद्र से रॉकेट ने 00:55 बजे (बीजिंग समयानुसार) उड़ान भरी, लेकिन उड़ान के दौरान एक असामान्य घटना हुई। विफलता के कारणों की जांच की जा रही है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/chinas-shijian-32-satellite-launch-mission-failed-investigation-into-reasons-underway/article-139871"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-01/6622-copy53.jpg" alt=""></a><br /><p>शीचांग। चीन के शीचांग उपग्रह प्रक्षेपण केंद्र से शिजियान-32 उपग्रह का प्रक्षेपण विफल रहा। इसके प्रक्षेपण में लॉन्ग मार्च-3बी वाहक रॉकेट का उपयोग किया गया था। </p>
<p>दक्षिण-पश्चिमी सिचुआन प्रांत के प्रक्षेपण केंद्र से रॉकेट ने 00:55 बजे (बीजिंग समयानुसार) उड़ान भरी, लेकिन उड़ान के दौरान एक असामान्य घटना हुई। विफलता के कारणों की जांच की जा रही है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 17 Jan 2026 12:59:06 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>विस्तृत सैटेलाइट आधारित वैज्ञानिक अध्ययन जारी : पहाड़ियां उजड़ने का करोड़ों लोगों पर पड़ेगा असर, इन्हें नष्ट करने से उपजाऊ मैदान भी बदल सकते हैं रेगिस्तान में  </title>
                                    <description><![CDATA[अरावली की कुल पहाड़ी भूमि का 31.8 प्रतिशत हिस्सा 100 मीटर से कम ऊंचाई का है, जिसे वर्तमान सरकारी मानकों के कारण कानूनी सुरक्षा से बाहर कर दिया गया है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/detailed-satellite-based-scientific-study-is-ongoing-destruction-of-hills/article-138281"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-01/6622-copy2.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। पर्यावरण संरक्षण समूह वी आर अरावली की ओर से शनिवार को जयपुर स्थित एक निजी कैफे में अरावली पवर्तमाला पर सरकार के मौजूदा दृष्टिकोण को चुनौती देता हुआ एक विस्तृत सैटेलाइट आधारित वैज्ञानिक अध्ययन जारी किया। इस अवसर पर क्लाइमेट साइंटिस्ट डॉ.सुधांशु भी मौजूद रहे। मीडिया कंवीनर डॉ. तनमय ने बताया कि यह स्वतंत्र विश्लेषण जीएसआई वैज्ञानिकों की एक टीम द्वारा ब्रिस्टोल फेबडेम के आधार पर किया गया है। अध्ययन से यह सामने आया है कि अरावली की कुल पहाड़ी भूमि का 31.8 प्रतिशत हिस्सा 100 मीटर से कम ऊंचाई का है, जिसे वर्तमान सरकारी मानकों के कारण कानूनी सुरक्षा से बाहर कर दिया गया है। </p>
<p>वी आर अरावली का दावा है कि इस अध्ययन से जुड़ा पूरा डेटा और इंटरैक्टिव मैप संस्था की वेबसाइट पर उपलब्ध है। डॉ.सुधांशु ने कहा कि इस निम्न ऊंचाई वाली पहाड़ियों से संरक्षण हटने का सीधा असर लगभग 30 करोड़ लोगों पर पड़ेगा। अध्ययन बताता है कि ये पहाड़ियां उन खाली गैप्स में स्थित हैं, जहां थार रेगिस्तान पहले से फैल रहा है। इन्हें नष्ट करने से उपजाऊ मैदान भी रेगिस्तान में बदल सकते हैं। जयपुर, गुरुग्राम और फरीदाबाद जैसे जल संकटग्रस्त शहरों के लिए यही क्षेत्र मुख्य भूजल पुनर्भरण जोन है। </p>
<p>अरावली धूल को रोकने वाली प्राकृतिक दीवार है। इन पहाड़ियों में खनन से दिल्ली-एनसीआर में पीएम 2.5 प्रदूषण और बढ़ेगा। जिससे स्वास्थ संकट गहराएगा। सभी प्रकार के खनन पर तुरंत रोक लगाने के साथ ही अन्य मांगे भी रखी। </p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 04 Jan 2026 10:22:57 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>चीन ने प्रक्षेपण केंद्र से नया उपग्रह किया लॉन्च </title>
                                    <description><![CDATA[उपग्रह का उपयोग मुख्य रूप से अंतरिक्ष पर्यावरण का पता लगाने जैसे प्रयोगों के लिए किया जाएगा। यह कुआइझोउ-1ए रॉकेट का 26वां उड़ान मिशन है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/china-launches-new-satellite-to-launch-center/article-66639"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-01/photo4.png" alt=""></a><br /><p>बीजिंग। चीन के उत्तर-पश्चिमी क्षेत्र में स्थित जिउक्वान उपग्रह प्रक्षेपण केंद्र से एक नया उपग्रह अंतरिक्ष में भेजा गया। स्थानीय समयानुसार सुबह करीब 11:52 बजे तियानक्सिंग-1 02 उपग्रह को कुआइझोउ-1ए वाहक रॉकेट द्वारा लॉन्च किया गया। उपग्रह का उपयोग मुख्य रूप से अंतरिक्ष पर्यावरण का पता लगाने जैसे प्रयोगों के लिए किया जाएगा। यह कुआइझोउ-1ए रॉकेट का 26वां उड़ान मिशन है।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 11 Jan 2024 16:45:16 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>चीन ने अपना नवीनतम रिमोट सेंसिंग उपग्रह अंतरिक्ष में किया प्रक्षेपित </title>
                                    <description><![CDATA[उपग्रह का उपयोग वैज्ञानिक प्रयोगों, भूमि संसाधन सर्वेक्षण, फसल उपज अनुमान और आपदा रोकथाम और राहत कार्यों के लिए किया जाएगा। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/china-launches-its-latest-remote-sensing-satellite-in-space/article-58163"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-09/size-16.png" alt=""></a><br /><p>जिउक्वान। चीन ने उत्तर पश्चिम चीन के जिउक्वान सैटेलाइट लॉन्च सेंटर से अपना नवीनतम रिमोट सेंसिंग उपग्रह अंतरिक्ष में प्रक्षेपित किया। उपग्रह, याओगन-33 04, को लॉन्ग मार्च-4सी वाहक रॉकेट पर सुबह 4:15 बजे प्रक्षेपित किया गया। </p>
<p>उपग्रह का उपयोग वैज्ञानिक प्रयोगों, भूमि संसाधन सर्वेक्षण, फसल उपज अनुमान और आपदा रोकथाम और राहत कार्यों के लिए किया जाएगा। यह प्रक्षेपण लॉन्ग मार्च वाहक रॉकेट श्रृंखला का 489वां उड़ान मिशन था।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 27 Sep 2023 12:34:04 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>चीन ने आपदाओं की देखरेख के लिए सिंथेटिक एपर्चर रडार उपग्रह अंतरिक्ष में किया प्रक्षेपित</title>
                                    <description><![CDATA[सीएनएसए ने बताया कि यह दुनिया का पहला हाई-ऑर्बिट सिंथेटिक एपर्चर रडार (एसएआर) उपग्रह है, जो परियोजना कार्यान्वयन चरण में प्रवेश कर चुका है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/china-launches-synthetic-aperture-radar-satellite-in-space-for-disasters/article-54521"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-08/222-copy2221.jpg" alt=""></a><br /><p>बीजिंग। चीन ने लॉन्ग मार्च-3बी रॉकेट के जरिए आपदाओं की देखरेख के लिए दुनिया का पहला ए-एसएआर4 01, हाई-ऑर्बिट सिंथेटिक एपर्चर रडार उपग्रह अंतरिक्ष में प्रक्षेपित किया है। चीन के राष्ट्रीय अंतरिक्ष प्रशासन (सीएनएसए) ने बताया कि सिचुआन प्रांत के जिचांग अंतरिक्ष केन्द्र से उपग्रह को प्रक्षेपित किया गया। </p>
<p>सीएनएसए ने बताया कि यह दुनिया का पहला हाई-ऑर्बिट सिंथेटिक एपर्चर रडार (एसएआर) उपग्रह है, जो परियोजना कार्यान्वयन चरण में प्रवेश कर चुका है। यह उपग्रह चीन की प्राकृतिक आपदाओं की अंतरिक्ष देखरेख को सही करेगा और आपदाओं की रोकथाम और उसमें कमी लाने की क्षमताओं में बढ़ोतरी करेगा।    </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 13 Aug 2023 16:09:20 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>अंतरिक्ष में सोयूज-2 रॉकेट पर उपग्रह लॉन्च करेगा यूएई </title>
                                    <description><![CDATA[रूसी अधिकारियों ने इससे पहले कहा था कि मेटेओर-एम मौसम उपग्रह के प्रक्षेपण के दौरान पीएचआई-डेमो एक अतिरिक्त पेलोड होगा।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/uae-will-doing-launch-satellite-in-space/article-49528"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-06/630-400-size-(15)7.png" alt=""></a><br /><p>अबू धाबी। संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के मोहम्मद बिन राशिद अंतरिक्ष केंद्र (एमबीआरएससी) अगले सप्ताह रूस के वोस्तोचन कोस्मोड्रोम से एक सोयूज-2 रॉकेट पर अंतरिक्ष में एक उपग्रह लॉन्च करेगा। दुबई सरकार के मीडिया कार्यालय ने यह जानकारी दी। मीडिया कार्यालय ने ट्वीट किया कि 27 जून को यूएई के समयानुसार अपराह्न तीन बजकर 34 मिनट पर एमबीआर स्पेस सेंटर सोयूज-2 रॉकेट का उपयोग करते हुए रूस के वोस्तोचन कोस्मोड्रोम से अपना पहला मिशन पीएचआई-डेमो लॉन्च करेगा। कार्यालय ने कहा कि इस पहल का नेतृत्व संयुक्त रूप से एमबीआरएससी और संयुक्त राष्ट्र कार्यालय के बाह्य अंतरिक्ष मामलों द्वारा किया जाएगा, जो वैश्विक सहयोग में सबसे अग्रसर होगा, अंतरिक्ष पहुंच प्रदान करेगा और अनूठे अंतरिक्ष प्रौद्योगिकियों की सतत विकास को तेज करेगा। एमबीआरएससी ने ट्विटर पर कहा कि दुनिया के पहले वैश्विक उपग्रह 5जी ऑपरेटर, ओक्यू टेक्नोलॉजी और स्टीमजेट के साथ साझेदारी में पेलोड होस्टिंग पहल के हिस्से के रूप में 2022 में मॉड्यूलर सैटेलाइट प्लेटफॉर्म बनाया गया था, जो इंटरनेट ऑफ थिंग्स संचार पेलोड वितरित करेगा। 5जी का उपयोग दूरस्थ क्षेत्रों में स्थित इंटरनेट से जुड़े उपकरणों से एकत्रित डेटा को कक्षा में संग्रहीत और अग्रेषित करने का काम करेगा।</p>
<p>रूसी अधिकारियों ने इससे पहले कहा था कि मेटेओर-एम मौसम उपग्रह के प्रक्षेपण के दौरान पीएचआई-डेमो एक अतिरिक्त पेलोड होगा। जून की शुरुआत में रूसी सरकार का एक फरमान प्रकाशित किया गया था, जिसमें बेलारूस, मलेशिया और संयुक्त अरब अमीरात के एक-एक उपग्रह सहित 42 छोटे उपग्रहों को रॉकेट द्वारा ले जाया जाएगा। वर्ष 2006 से संयुक्त अरब अमीरात ने अंतरिक्ष में कई उपग्रह लॉन्च किए हैं। वर्ष 2020 में यूएई ने ग्रह पर जलवायु परिस्थितियों का अध्ययन करने के लिए मंगल पर अल अमल अंतरिक्ष जांच शुरू की, जिसे होप प्रोब के रूप में भी जाना जाता है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 21 Jun 2023 11:23:59 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>उत्तर कोरिया का उपग्रह प्रक्षेपण विफल, जल्द करेगी अगला प्रक्षेपण </title>
                                    <description><![CDATA[रिपोर्ट के अनुसार उत्तर कोरिया ने स्थानीय समयानुसार मंगलवार सुबह 6 बजकर 27 मिनट पर (21 बजकर 27 मिनट जीएमटी) मैलिगयोंग-1 सैन्य टोही उपग्रह के साथ रॉकेट को प्रक्षेपित किया, लेकिन रॉकेट इंजन दूसरे चरण में प्रज्वलित होने में विफल रहा।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/satellite-launch-fail-due-to-engine-of-north-korea/article-47303"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-05/ff1.png" alt=""></a><br /><p>प्योंगयांग। उत्तर कोरिया का टोही उपग्रह को कक्षा में पहुंचाने के लिए चोलिमा-1 उपग्रह यान रॉकेट को प्रक्षेपित करने का प्रयास रॉकेट इंजन के दूसरे चरण में खराबी होने के कारण विफल हो गया है। रिपोर्ट के अनुसार उत्तर कोरिया ने स्थानीय समयानुसार मंगलवार सुबह 6 बजकर 27 मिनट पर (21 बजकर 27 मिनट जीएमटी) मैलिगयोंग-1 सैन्य टोही उपग्रह के साथ रॉकेट को प्रक्षेपित किया, लेकिन रॉकेट इंजन दूसरे चरण में प्रज्वलित होने में विफल रहा।</p>
<p>रिपोर्ट में कहा गया कि पहले चरण में अलग होने के बाद दूसरे चरण का इंजन प्रज्वलित होने में विफल रहा, जिससे रॉकेट ने शक्तिहीन हो गया और पीत सागर में गिर गया। रिपोर्ट के अनुसार उत्तर कोरिया की अंतरिक्ष एजेंसी रॉकेट की जांच और उसे सही करने के लिए तत्काल वैज्ञानिक एवं तकनीकी उपाय करेगी और विभिन्न परीक्षणों के बाद जल्द ही अगला प्रक्षेपण करेगी। रिपोर्ट के अनुसार उत्तर कोरिया की अंतरिक्ष एजेंसी के एक प्रवक्ता ने कहा कि माना जा रहा है कि यह दुर्घटना चोलिमा-1 रॉकेट में नई इंजन प्रणाली की विश्वसनीयता एवं स्थिरता की कमी और उपयोग किए गए ईंधन की अस्थिरता के कारण हुई। प्रवक्ता ने यह भी कहा कि वैज्ञानिक, इंजीनियर और विशेषज्ञ इस दुर्घटना के कारणों का पता लगाने की दिशा में काम कर रहे हैं।       </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 31 May 2023 14:44:46 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>चीन ने अंतरिक्ष में रिमोट सेंसिंग सैटेलाइट किया स्थापित</title>
                                    <description><![CDATA[रिमोट सेंसिंग सैटेलाइट को स्थानीय समयानुसार अपराह्न 12:01 बजे एक लांग मार्च-2सी वाहक रॉकेट द्वारा लॉन्च किया गया. वह अपनी नियोजित कक्षा में सफलतापूर्वक प्रवेश किया। यह लॉन्च मार्च करियर रॉकेट श्रृंखला का 464वां उड़ान मिशन है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/china-installs-remote-sensing-satellite-in-space/article-38165"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-02/site-photo-size-(5)9.jpg" alt=""></a><br /><p>जिउक्वान। चीन ने शुक्रवार को उत्तर-पश्चिम क्षेत्र में स्थित जिउक्वान सैटेलाइट लॉन्च सेन्टर से अंतरिक्ष में एक नया रिमोट सेंसिंग सैटेलाइट सफलतापूर्वक स्थापित किया। रिमोट सेंसिंग सैटेलाइट को स्थानीय समयानुसार अपराह्न 12:01 बजे एक लांग मार्च-2सी वाहक रॉकेट द्वारा लॉन्च किया गया. वह अपनी नियोजित कक्षा में सफलतापूर्वक प्रवेश किया। यह लॉन्च मार्च करियर रॉकेट श्रृंखला का 464वां उड़ान मिशन है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 24 Feb 2023 13:30:51 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>भारत के पहले छोटे उपग्रह प्रक्षेपण वाहन (एसएसएलवी) ने भरी उड़ान</title>
                                    <description><![CDATA[इस मौके पर इसरो अध्यक्ष डॉ एस सोमनाथ, पूर्व इसरो अध्यक्ष डॉ के राधाकृष्णन और श्री के सिवन तथा मिशन नियंत्रण केंद्र के वैज्ञानिक मौजूद रहे]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/indias-first-small-satellite-launch-vehicle-sslv-took-off/article-18158"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-08/capture-copy.jpg" alt=""></a><br /><p>श्रीहरिकोटा। भारत के पहले छोटे उपग्रह प्रक्षेपण वाहन (एसएलवी) ने पृथ्वी अवलोकन उपग्रह (ईओएस)-02 और एक सह-यात्री उपग्रह 'आजादीसैट' के साथ रविवार को यहां सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र (एसडीएससी) से उड़ान भरी। तड़के 02 बजकर 18 मिनट पर शुरू हुई उल्टी गिनती के सात घंटे बाद सुबह 09.18 बजे एसएलवी ने एसढीएससी शार रेंज से सफलतापूर्वक उड़ान भरी। इस मौके पर इसरो अध्यक्ष डॉ एस सोमनाथ, पूर्व इसरो अध्यक्ष डॉ के राधाकृष्णन और श्री के सिवन तथा मिशन नियंत्रण केंद्र के वैज्ञानिक मौजूद रहे।<br />रॉकेट के उड़ान भरने के साथ ही आसमान में नारंगी धुएं का गुबार उड़ता नजर आया और ऐसा लगा जैसे इसने पृथ्वी को हिला दिया। एसएसएलवी 34 मीटर लंबा है जो पीएसएलवी से लगभग 10 मीटर कम है। पीएसएलवी के 2.8 मीटर की तुलना में इसका व्यास दो मीटर है। एसएसएलवी का उत्थापन द्रव्यमान 120 टन है, जबकि पीएसएलवी का 320 टन है, जो 1,800 किलोग्राम तक के उपकरण ले जा सकता है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 07 Aug 2022 13:40:41 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>चीन ने पृथ्वी के लिए नए उपग्रह का किया परीक्षण</title>
                                    <description><![CDATA[चीन ने पश्चिमोत्तर चीन के जिउक्वान उपग्रह परीक्षण केंद्र से एक नए पृथ्वी-अवलोकन उपग्रह का परीक्षण किया है। रिपोर्ट के अनुसार उपग्रह गाओफेन -3 03, को लॉन्ग मार्च -4 सी रॉकेट द्वारा लांच किया गया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/china-test-new-satellite-of-earth/article-7514"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-04/465646.jpg" alt=""></a><br /><p>बीजिंग। चीन ने पश्चिमोत्तर चीन के जिउक्वान उपग्रह परीक्षण केंद्र से एक नए पृथ्वी-अवलोकन उपग्रह का परीक्षण किया है। रिपोर्ट के अनुसार उपग्रह गाओफेन -3 03, को लॉन्ग मार्च -4 सी रॉकेट द्वारा लांच किया गया। यह सफलतापूर्वक कक्षा में प्रवेश कर गया है। यह परीक्षण लॉन्ग मार्च सीरीज कैरियर रॉकेट्स के लिए 414 वां मिशन है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/world/china-test-new-satellite-of-earth/article-7514</link>
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                <pubDate>Thu, 07 Apr 2022 11:03:08 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>CM गहलोत ने किया IPD टॉवर और कार्डियक सेंटर का शिलान्यास</title>
                                    <description><![CDATA[SMS का लोड कम करने के लिए खोलेंगे 4 सेटेलाइट हॉस्पिटल]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/jaipur--chief-minister-ashok-gehlot-laid-the-foundation-stone-of-ipd-tower-and-cardiac-center--to-reduce-the-load-of-sms--four-satellite-hospitals-will-be-opened/article-7412"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-04/ashok-gehlot-new.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। एसएमएस हॉस्पिटल में बनाए जाने वाले आईपीडी ब्लॉक का मंगलवार को मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने शिलान्यास किया। इस मौके पर आए देश के जाने-माने डॉक्टर्स ने देश में हेल्थ इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने पर जोर दिया। इसके लिए उन्होंने देश में ज्यादा से ज्यादा मेडिकल और नर्सिंग कॉलेज खोलने की भी बात कही। वहीं लोगों में हेल्थ से जुड़ी जानकारी बचपन से ही मिले इसके लिए प्राथमिक शिक्षा से ही हेल्थ एज्युकेशन को कोर्स में जोड़ने पर विचार किया जा रहा है।</p>
<p><br />मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की ओर से आईपीडी टॉवर की नींव रखने के बाद आयोजित कार्यक्रम को संबोधित करते हुए गहलोत ने कहा कि राजस्थान में आज हेल्थ इंफ्रास्ट्रक्चर देश के सभी राज्यों से बेहतर है। हम जल्द ही विधानसभा में राइट टू हेल्थ का कानून भी लाने वाले है, ताकि लोगों को हेल्थ के प्रति सोशल सिक्योरिटी मिल सके। उन्होंने कहा कि प्रदेश में बच्चे बचपन से ही हेल्थ के प्रति अवेयर रहे इसके लिए हम ऐसा सिस्टम डवलप करने का प्रयास कर रहे है, जिससे मेडिकल से जुड़ी जरूरी जानकारियों को एज्युकेशन में प्राथमिक कक्षा से ही मिल सके।</p>
<p><br /><strong>SMS का लोड कम करने के लिए खोलेंगे चार सेटेलाइट हॉस्पिटल</strong><br />गहलोत ने मंच से घोषणा करते हुए कहा कि इस समय एसएमएस हॉस्पिटल पर मरीजों का दबाव है और ये बढ़ता जा रहा है। इस दबाव को कम करने के लिए हमने जिले के चारो बाहरी इलाकों में 4 सैटेलाइट हॉस्पिटल खोलने की योजना बना रहे है। ताकि ग्रामीण अंचल से आने वाले मरीज वहीं इलाज करवाकर लौट जाए। इसके लिए हमने 100 करोड़ रुपए का प्रावधान रखा है।</p>
<p><br /><strong>डॉ. पॉल का सुझाव, सिलिकोसिस मरीजों के लिए बने सेंटर ऑफ एक्सीलेंस</strong><br />कार्यक्रम में आए नीति आयोग के सदस्य डॉ. वी.के पॉल ने मंच से सरकार को कई अहम सुझाव दिए। इसमें सबसे मुख्य सिलिकोसिस मरीजों के लिए आईपीडी टॉवर में ही सेंटर ऑफ एक्सीलेंस डिपार्टमेंट खोलने की बात कही। उन्होंने कहा कि राजस्थान में इस बीमारी से बड़ी संख्या में लोग प्रभावित हो रहे है और सरकार ने इस बीमारी के लिए पहले से ही पॉलिसी बना रखी है। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि जितना ज्यादा हम हेल्थ सेक्टर को बढ़ावा देंगे देश उतना ही मजबूत होगा। उन्होंने कहा कि केन्द्र सरकार और एनएमसी ने मेडिकल कॉलेज खोलने के लिए कई नियम और शर्तो को कम कर दिया है। ऐसे में सरकार और मेडिकल सेक्टर से जुड़े लोगों का प्रयास रहना चाहिए कि ज्यादा से ज्यादा मेडिकल कॉलेज खोले।</p>
<p><br /><strong>ये भी रहे मौजूद:</strong><br />कार्यक्रम में मंत्री शान्ति धारीवाल, मंत्री परसादी लाल मीणा, मुख्य सचिव उषा शर्मा, डॉ, रणदीप गुलेरिया, डॉ शिव सरीन, डॉ नरेश त्रेहान ने भी संबोधित किया।</p>
<p> </p>
<p><strong>मीडिया से बातचीत में ये बोले गहलोत:</strong><br />राजस्थान पूरा देश में सबसे बड़ा प्रदेश हो गया है, भौगोलिक दृष्टि से भी, पानी तो एक पर्सेंट ही है यहां पर, परंतु भू-भाग जो है वो 10 पर्सेंट है देश का, आबादी साढ़े पांच पर्सेंट है, लोग ढाणियों में गांव में रहते हैं तो इतने बड़े प्रदेश के अंदर स्वास्थ्य सेवाओं की टॉप प्रायोरिटी रहनी चाहिए, दूर-दूर से लोग आते हैं, पैसा नहीं होता है, उधार लेकर खर्च करते हैं, टॉप प्रायोरिटी पर रखा है स्वास्थ्य सेवाओं को हम लोगों ने, इसलिए आप देख लीजिए की जो प्रोविजन किया गया है, उसके अंदर मैंने प्रोविजन बजट का देख लीजिए करीब 7.6 पर्सेंट किया है, जबकि ऐवरेज राज्यों में 6 पर्सेंट है। तो सब तरीके से हम चाहते हैं कि यहां पर एजुकेशन भी अच्छी हो स्वास्थ्य सेवाओं की, निरोगी राजस्थान का कंसेप्ट है वो Prevention of Medicine, मेडिसिन लेने की जरूरत ही नहीं पड़े, नौबत ही नहीं आए, उसके प्रोटोकॉल को आगे बढ़ाना चाहते हैं हम लोग। इसलिए हम चाहते हैं कि शिक्षा बचपन से ही मिलने लगे बच्चों को मेडिकल के संबंध में, जैसे-जैसे आगे बढ़ता जाएगा, पाठ्यक्रम बदलता जाएगा। तो तमाम तरह से कोशिश कर रहे हैं, इसलिए आईपीडी टावर, हेल्थ इंस्टीट्यूट, बायोलॉजी लैब, जो जो इन्वेस्टमेंट कर रहे हैं हैवी इन्वेस्टमेंट हो रहा है और मैं चाहूंगा कि राजस्थान की जनता साथ दे रही है और हम चाहेंगे गांव तक सब सेंटर, पीएचसी, सीएचसी, डिस्ट्रिक्ट हॉस्पिटल्स, सब जगह उनको सुविधा मिले, यह हमारा प्रयास है, उसमें हम कामयाब होंगे।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 05 Apr 2022 15:30:34 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>इसरो ने ध्रुवीय उपग्रह प्रक्षेपण यान का किया सफल प्रक्षेपण</title>
                                    <description><![CDATA[अंतरिक्ष एवं अनुसंधान संगठन (इसरो) ने ध्रुवीय उपग्रह प्रक्षेपण यान (पीएसएलवी-सी52) के जरिये चौथे पृथ्वी अवलोकन उपग्रह (ईओएस-04) का आंध्र प्रदेश के हरिकोटा से सफलतापूर्वक प्रक्षेपण किया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/%E0%A4%87%E0%A4%B8%E0%A4%B0%E0%A5%8B-%E0%A4%A8%E0%A5%87-%E0%A4%A7%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A5%81%E0%A4%B5%E0%A5%80%E0%A4%AF-%E0%A4%89%E0%A4%AA%E0%A4%97%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A4%B9-%E0%A4%AA%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A4%95%E0%A5%8D%E0%A4%B7%E0%A5%87%E0%A4%AA%E0%A4%A3-%E0%A4%AF%E0%A4%BE%E0%A4%A8-%E0%A4%95%E0%A4%BE-%E0%A4%95%E0%A4%BF%E0%A4%AF%E0%A4%BE-%E0%A4%B8%E0%A4%AB%E0%A4%B2-%E0%A4%AA%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A4%95%E0%A5%8D%E0%A4%B7%E0%A5%87%E0%A4%AA%E0%A4%A3/article-4455"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-02/465465465465465-copy8.jpg" alt=""></a><br /><p>हरिकोटा। अंतरिक्ष एवं अनुसंधान संगठन (इसरो) ने ध्रुवीय उपग्रह प्रक्षेपण यान (पीएसएलवी-सी52) के जरिये चौथे पृथ्वी अवलोकन उपग्रह (ईओएस-04) का आंध्र प्रदेश के हरिकोटा से सफलतापूर्वक प्रक्षेपण किया। पीएसएलवी-सी52 ने 25 घंटे की उलटी गिनती के बाद हरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र के पहले लॉन्चपैड से अंतरिक्ष के लिए उड़ान भरी। ईओएस-04 के साथ दो अन्य उपग्रहों का भी प्रक्षेपण किया गया, जिन्हें पृथ्वी से लगभग 529 किमी ऊपर सूर्य-तुल्यकालिक कक्षा में रखा गया है। चार चरणों वाले रॉकेट को एक छात्र उपग्रह इंस्पायरसैट और भविष्य के लिए संयुक्त भारत-भूटान मिशन के अग्रदूत उपग्रह इन्सैट-2डीटी के साथ प्रक्षेपित किया गया। यह महत्वपूर्ण कार्यक्रम बिल्कुल योजना के अनुसार ही रहा।</p>
<p>यह एसडीएससी शार हरिकोटा से 80वां, पीएसएलवी की 54वीं उड़ान और एक्सएल विन्यास में पीएसएलवी की 23वीं उड़ान (6 स्ट्रैप-ऑन मोटर्स) प्रक्षेपण यान मिशन था। इस उपग्रह को बेंगलुरु के यूआर राव सैटेलाइट सेंटर में बनाया गया था। इसरो प्रमुख एस सोमनाथ ने कहा कि पीएसएलवी-सी52 का मिशन सफलतापूर्वक पूरा कर लिया गया है और उन्होंने सभी को बधाई दी। इसरो प्रमुख ने कहा ईओएस-04 रडार इमेजिंग सैटेलाइट (आरआईएसएटी) है, जिसे कृषि, वानिकी और वृक्षारोपण, जल विज्ञान और बाढ़ मानचित्रण जैसे अनुप्रयोगों के लिए सभी मौसम में उच्च गुणवत्ता वाली तस्वीरें प्रदान करने के लिए डिजाइन किया गया है।</p>
<p>यह लगभग 1,710 किलोग्राम वजनी तथा 2280 वाट बिजली उत्पन्न करता है। उपग्रह में कोलोराडो विश्वविद्यालय में वायुमंडलीय और अंतरिक्ष भौतिकी की प्रयोगशाला के सहयोग से भारतीय अंतरिक्ष विज्ञान और प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईएसटी) के एक छात्र उपग्रह (इंस्पायरसैट-1) के दो छोटे उपग्रह भी रखा गया था। इसरो का बोल्डर और एक प्रौद्योगिकी प्रदर्शक उपग्रह (आईएनएस-2टीडी), जो भारत-भूटान संयुक्त उपग्रह (आईएनएस-2बी) का अग्रदूत है। पूर्व निर्धारित योजना के तहत उपग्रहों को पीएसएलवी से सफलतापूर्वक अलग किया गया। इसरो प्रमुख सोमनाथ ने मिशन को पूरा करने के लिए टीम को बधाई दी। इसके बाद सफलतापूर्वक बेंगलुरु में इसरो टेलीमेट्री ट्रैकिंग एंड कमांड नेटवर्क (आईएसटीआरएसी) ने उपग्रह का नियंत्रण प्राप्त कर लिया। उपग्रह को अंतिम परिचालन विन्यास में लाया जाएगा, जिसके बाद यह डेटा देना शुरू करेगा। <br />  </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 14 Feb 2022 14:56:39 +0530</pubDate>
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