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                            <item>
                <title>  रीट के लिए दूसरी बार बढ़ाई आवेदन की अन्तिम तिथि </title>
                                    <description><![CDATA[राजस्थान माध्यमिक शिक्षा बोर्ड ने राजस्थान अध्यापक पात्रता परीक्षा (रीट) के आवेदन की अन्तिम तिथि एक बार और बढ़ाकर 23 मई कर दी है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/ajmer/ajmer-news--last-date-of-application-extended-for-the-second-time-for-reet/article-9962"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-05/board.jpg" alt=""></a><br /><p>अजमेर। राजस्थान माध्यमिक शिक्षा बोर्ड ने राजस्थान अध्यापक पात्रता परीक्षा (रीट) के आवेदन की अन्तिम तिथि एक बार और बढ़ाकर 23 मई कर दी है। चालान जनरेट करने एवं परीक्षा शुल्क जमा कराने की अन्तिम तिथि भी 19 मई रात्रि 12 बजे तक बढ़ा दी है। बोर्ड प्रशासक और रीट के मुख्य समन्वयक एल.एन. मंत्री ने बताया कि आवेदकों को आवेदन-पत्र में ऑनलाइन सुधार के लिए तिथियों में भी संशोधन किया गया है। अब अभ्यर्थी 25 मई प्रात: 10 बजे से 27 मई रात्रि 12 बजे तक आवेदन-पत्र में सुधार करवा सकेंगे। आवेदन में नाम, पिता का नाम, माता का नाम, जन्म दिनांक, परीक्षा स्तर, फोटो, हस्ताक्षर एवं मोबाइल नम्बर में संशोधन नहीं कर पाएंगे। इसके अतिरिक्त आवेदन-पत्र में भरी गई शेष सभी प्रविष्टियों में केवल एक बार संशोधन कर सकेंगे। संशोधन की प्रक्रिया और निर्देश 24 मई को दोपहर 12 बजे रीट की वेबसाइट पर जारी किए जाएंगे। </p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>शिक्षा जगत</category>
                                            <category>अजमेर</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 18 May 2022 12:40:34 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Ajmer]]></dc:creator>
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            <item>
                <title> भले बधाल ‘पाक साफ’ हों,  भ्रष्टाचारियों में खुशी की लहर!, सबसे ज्यादा ट्रैप करने वाले एएसपी वर्मा का आरएएस संघ के दबाव में तबादला</title>
                                    <description><![CDATA[2019 में मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने पिस्टल देकर किया था सम्मान]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/jaipur--even-if-the-changes-are-pak-clean--there-is-a-wave-of-happiness-among-the-corrupt/article-9153"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-05/narotam.jpg" alt=""></a><br /><p> जयपुर। घूसखोरों के लिए सिरदर्द बने एसीबी के अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक नरोत्तम वर्मा का तबादला गृह विभाग ने बुधवार रात पुलिस मुख्यालय में एडिशनल एसपी सीआईडी सीबी इन्वेस्टीगेशन के पद पर कर दिया। जयपुर में कुछ दिन पूर्व आरएएस बधाल को बिना नियमों के पूछताछ के लिए बुलाने के बाद आरएएस एसोसिएशन ने इस मामले को बड़ी गम्भीरता के साथ लिया और कार्रवाई करने का दबाव बनाया था। बेहतर कार्य के लिए सीएम अशोक गहलोत ने वर्मा को वर्ष 2019 में पिस्टल देकर सम्मानित किया था।</p>
<p><br /><strong>राज्य की सेवा के लिए छोड़ी केन्द्र की नौकरी</strong><br />एएसपी वर्मा झुंझुनूं के मुकुन्दगढ़ के रहने वाले हैं। इन्होंने स्नातक बीए ऑनर्स दिल्ली यूनिवर्सिटी के हिन्दू कॉलेज से की और दिल्ली यूनिवर्सिटी से ही एलएलबी और एलएलएम किया। इस दौरान यूपीएससी का एग्जाम दिया, जिसमें अलाइड सर्विस में सलेक्शन हुआ लेकिन राजस्थान में आकर सेवा करने के लिए वह नौकरी छोड़ दी और आरपीएससी की परीक्षा दी। वर्ष 2001 में डिप्टी बने वर्मा ने कई पदों पर कार्य किया। इसके बाद वर्ष 2009 में एसीबी ज्वॉइन की। दो साल बीकानेर रहने के बाद एसीबी मुख्यालय लगाया गया। <br /><br /><strong>वर्मा ट्रैप की प्लानिंग के मास्टर माइंड</strong> <br />राजस्थान एसीबी के कार्यशैली को लेकर अन्य राज्यों की एसीबी भी जयपुर आकर काम करने के तरीकों को जानती थी। नरोत्तम वर्मा ने कई बार अन्य राज्यों से आने वाले सीनियर ऑफिसरों को ट्रैप के तरीके, रिकॉर्डिंग, फैक्ट फाइल वर्क एविडेंस की जानकारी देते थे।<br /><br /><strong>वर्मा के अहम ट्रैप</strong><br />    बायोफ्यल अर्थोरिटी सीआईओ सुरेन्द्रसिंह राठौड़ और क्लर्क ट्रैप राठौड़ से मिले चार करोड़ रुपए <br />    दौसा एसपी आईपीएस मनीष अग्रवाल ट्रैप<br />    दौसा आरएएस पिंकी मीणा- आरएएस संजय मित्तल ट्रैप<br />    एनएचएम में एक साथ पांच लोगों को रंगे हाथों ट्रैप किया<br />    कोटा में सीनियर डिविजनल इंजीनियर को ट्रैप किया, 55 लाख कैश मिला <br />    नसीराबाद में आर्मी कैंट एरिया में जाकर ऑडिटर और एकाउंटेड को ट्रैप किया <br />    भरतपुर में पॉल्यूशन कंट्रोल के रीजनल ऑफिसर को ट्रैप किया<br />    सीजीएसटी के सुप्रीटेंडेंट और इंस्पेक्टर को ट्रैप किया<br />    सीबीआई का इंस्पेक्टर को जमीनों को पट्टा लेते हुए 40 लाख की रिश्वत <br />    लेते गिरफ्तार <br />    जेडीए में आरएएस डीजी को किया ट्रैप</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 05 May 2022 12:57:13 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>राजनेताओं की कमजोर पैरवी से प्यासा रह जाएगा मेवाड़</title>
                                    <description><![CDATA[पाली जिले के जवाई बांध को भरकर जोधपुर की जनता की प्यास बुझाने के लिए उदयपुर जिले की कोटड़ा तहसील में दो बांध बनाने की योजना के लिए क्षेत्रीय राजनेताओं की राजधानी जयपुर में कमजोर पैरवी को जिम्मेदार ठहराया जा रहा है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/udaipur/udaipur--mewar-will-remain-thirsty-due-to-weak-lobbying-of-politicians/article-9064"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-05/dam-new.jpg" alt=""></a><br /><p>उदयपुर। पाली जिले के जवाई बांध को भरकर जोधपुर की जनता की प्यास बुझाने के लिए उदयपुर जिले की कोटड़ा तहसील में दो बांध बनाने की योजना के लिए क्षेत्रीय राजनेताओं की राजधानी जयपुर में कमजोर पैरवी को जिम्मेदार ठहराया जा रहा है। जनप्रतिनिधियों की चुप्पी नहीं टूटते देखकर कोटड़ा की जनता ने आवाज बुलंद करने का फैसला किया है और वह मैदान में उतर चुकी है। तकनीकी जानकार भी प्रस्तावित बांधों के निर्माण को मेवाड़ के हित में नहीं मान रहे हैं।</p>
<p><br />मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने बजट घोषणा 2022-23 में उदयपुर जिले की कोटड़ा तहसील के चाकमरिया और भात में दो बड़े बांध के निर्माण की घोषणा की। इन बांधों से 1000 एमसीएफटी पानी पाली जिले में स्थित जवाई बांध में पहुंचेगा। यह बांध जोधपुर शहर में पेयजल आपूर्ति का प्रमुख स्रोत है। जल संरचनाओं के तकनीकी जानकारों का मानना है कि कोटड़ा तहसील में जहां दोनों बांधों का निर्माण प्रस्तावित है, वहां व आसपास गांवों में लोग आज भी पेयजल संकट से जूझ रहे हैं। क्षेत्र के गांव-कस्बों में कई दिनों तक पेयजल नसीब नहीं होता। ऐसे में जोधपुर की जनता की प्यास बुझाने के लिए यहां से पानी ले जाने की योजना पर मेवाड़ के जननेताओं ने अब तक चुप्पी धारण कर रखी है जिसे क्षेत्रवासी जयपुर में मेवाड़ की कमजोर पैरवी के रूप में देख रहे हैं।</p>
<p><br />जानकारों का मानना है कि कोटड़ा में बांध बनाने की योजना के अंतर्गत अध्ययन एवं परीक्षण के प्रारंभिक चरण में ही मेवाड़ के नेताओं को इसका विरोध शुरू कर देना चाहिए था, जो उन्होंने नहीं किया। परिणामस्वरूप कोटड़ा में बरसने वाले पानी के मारवाड़ चले जाने और मेवाड़ के प्यासा रह जाने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता। उल्लेखनीय है कि केन्द्र सरकार के उपक्रम वेबकोस संस्था द्वारा विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार करने के दौरान ही प्रस्तावित बांधों के डूब क्षेत्र के गांवों के आदिवासी ग्रामीणों ने इसका विरोध शुरू कर दिया था। <br /><br /><strong>मेवाड़वासियों के हितों से खिलवाड़</strong><br />मोहनलाल सुखाड़िया जल अपवर्तन परियोजना देवास से सेवानिवृत्त सहायक अभियंता पीयूष जोशी का कहना है कि  देवास तृतीय व चतुर्थ चरण के बांधों के निर्माण की डीपीआर को प्रशासनिक एवं वित्तीय स्वीकृति के लिए राज्य सरकार को दो बार प्रेषित की गई, तब इसकी बीएसआर रेट के अनुसार तत्कालीन लागत 1187 करोड़ थी जो अब रिवाइज होने पर काफी बढ़ जाएगी। वसुंधरा सरकार की बजट घोषणा में भी इसके लिए 1064 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया लेकिन कुछ नहीं हुआ। अब गहलोत सरकार भी मेवाड़वासियों के हितों के साथ खिलवाड़ कर रही है। देवास तृतीय व चतुर्थ चरण को लेकर भी मेवाड़ के नेताओं की पैरवी कमजोर साबित हो रही है। इसका फायदा उठाते हुए मेवाड़ के पानी को मारवाड़ के जवाई बांध में पहुंचाने के लिए दो बड़े बांध का निर्माण प्रस्तावित किया गया है जिनसे करीब 1000 एमसीएफटी की जलापूर्ति जोधपुरवासियों को होगी जबकि कोटड़ा तहसील के ही सेई बांध, टनल के जरिए जवाई बांध से वर्ष 1975 से जोधपुर को जलापूर्ति हो रही है।</p>
<p> </p>
<p> </p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>उदयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 03 May 2022 12:33:14 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[udaipur]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>परमाणु हमले के खतरे ने बढ़ाई न्यूक्लियर बंकर की डिमांड,  जाने  कैसे काम करता है न्यूक्लियर बंकर</title>
                                    <description><![CDATA[ रूस और यूक्रेन के बीच जारी युद्ध में पूरी दुनिया के लिए परमाणु बम एक बड़ा खतरा बना हुआ है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/--threat-of-nuclear-attack-increased-the-demand-for-nuclear-bunker--know-how-nuclear-bunker-works/article-9034"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-05/eastern-europe-1-mobilemaster.jpg" alt=""></a><br /><p>लंदन। रूस और यूक्रेन के बीच जारी युद्ध में पूरी दुनिया के लिए परमाणु बम एक बड़ा खतरा बना हुआ है। परमाणु बमों से सिर्फ न्यूक्लियर बंकर ही बचा सकता है। न्यूक्लियर युद्ध के खतरे से लोग इस कदर डरे हैं कि यूरोप में परमाणु बंकरों की डिमांड में बड़ा उछाल देखने को मिला है। लोगों को इस बात का अंदेशा है कि रूस किसी भी वक्त परमाणु बम से भरे रॉकेट को लॉन्च कर देगा। टेलीग्राफ की रिपोर्ट के मुताबिक बंकर बनाने वाली कंपनियों ने कहा है कि जर्मनी, स्विटजरलैंड, फ्रांस और यूके के नागरिक न्यूक्लियर बंकर खरीदने और उनके निर्माण से जुड़ी जानकारी मांग रहे हैं। ऐसा इसलिए क्योंकि लगातार यूक्रेन युद्ध में रूस पश्चिमी देशों को न्यूक्लियर स्ट्राइक की चेतावनी दे रहा है। दो महीन से जारी जंग में यूरोप और अमेरिका में कुछ लोगों को इस बात का डर है कि रूसी राष्ट्रपति व्लादिमिर पुतिन किसी भी वक्त दूसरे देशों को निशाना बनाने के लिए परमाणु हमला कर सकते हैं। स्विटजरलैंड में न्यूक्लियर बंकर बनाने और रिपेयर करने वाली एक कंपनी ने बताया कि मार्च की शुरूआत में लोग बेहद डरे हुए थे। <br /><br />वह तुरंत मदद मांग रहे थे। रूस के यूक्रेन पर हमले के बाद तो डिमांड तेजी से बढ़ी है। यूके की एक फर्म ने भी बताया कि बंकर की डिमांड पिछले साल की तुलना में दोगुनी हो गई है। जर्मनी की एक कंपनी ने बताया कि देश में 599 पब्लिक शेल्टर हैं। हम इसे अपग्रेड करने का तरीका खोज रहे हैं। यूरोप के साथ ही अमेरिका में भी इसका खतरा बरकरार है और वहां भी न्यूक्लियर बंकर की डिमांड बढ़ी है।</p>
<p><br /><strong>कैसे काम करता है न्यूक्लियर बंकर</strong><br />न्यूक्लियर बम के कारण एक बड़ा धमाका होता है। अगर इसके सीधे संपर्क में कोई आ जाए तो उसे यह पता भी नहीं चलेगा कि वह कब राख बन गया। इन धमाकों के बाद सबसे खतरनाक चीज रेडिएशन होती है। इसी से बचने के लिए बंकर बनाए जाते हैं जो जमीन के नीचे बने घर की तरह होते हैं। इनकी दीवारें मोटी कंक्रीट से बनी होती हैं, ताकि रेडिएशन न पहुंचे। बंकरों में आॅक्सीजन और खाने-पीने की व्यवस्था रखी जाती है, क्योंकि धमाके के कई दिनों बाद तक उसी में रहना होगा। कोल्ड वार के समय बड़ी संख्या में न्यूक्लियर बंकर बने थे।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 02 May 2022 15:08:41 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>विश्व मलेरिया दिवस आज: हजारों साल पुराना दंश, लाखों मौत, अब घट रहे केस, 5 साल में केवल 1 मौत</title>
                                    <description><![CDATA[मादा एनाफिलीज मच्छर के शरीर में रहने वाले पैरासाइट से होने वाली मलेरिया बीमारी का पता 1880 में लगा, लेकिन वैज्ञानिक इसका दंश दुनिया में 2500 ईसा पूर्व यानी करीब 4 हजार 500 साल से पुराना मानते हैं। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/health-news--jaipur-news--world-malaria-day-today--thousands-of-years-old-bite--lakhs-of-deaths--now-cases-are-decreasing--only-1-death-in-5-years/article-8531"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-04/4654544651.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। मादा एनाफिलीज मच्छर के शरीर में रहने वाले पैरासाइट से होने वाली मलेरिया बीमारी का पता 1880 में लगा, लेकिन वैज्ञानिक इसका दंश दुनिया में 2500 ईसा पूर्व यानी करीब 4 हजार 500 साल से पुराना मानते हैं। पांच साल पहले तक भारत में 20 लाख से अधिक लोग साल में इसके शिकार हो रहे थे। डारेक्ट्रेट ऑफ नेशनल वैक्टर बोर्न डिजीज कन्ट्रोल प्रोग्राम के डेटा के अनुसार राहत यह है कि इसके बाद से मलेरिया कम होता जा रहा है। देश में बीते साल केवल 1.58 लाख केस आए। मौतें केवल 80 ही हुई। प्रदेश में यह है कि 871 लोगों को बीमार किया। मौतें तो पांच साल में केवल एक ही हुई है। दुनिया में 4 लाख लोगों की जान अभी भी इससे जा रही है। मलेरिया की खोज के 141 साल बाद पिछले साल इसकी पहली वैक्सीन मोक्सक्यूरिस नाम से आई है। इम्यूनिटी, पैरासाइट की पूरा होता जीवन-चक्र, बारिश के मौसम में सावधानियां, साफ-सफाई, बेहतर ड्रेनेज सिस्टम से इसे हराने वाले दुनिया के 100 से अधिक देशों की तरह उम्मीद है कि भारत भी इससे जल्द मुक्त होगा।</p>
<p><strong>जानलेवा रूप कम, इसलिए मौतें भी कम</strong><br />एसएमएस अस्पताल के मेडिसिन विभाग के सीनियर प्रोफेसर डॉ. सीएल नवल ने बताया कि प्लाज्मोडियम वाइवेक्स, प्लाज्मोडियम फेलसिफेरम और प्लाज्मोडियम मलेरी पैरासाइट मच्छर के शरीर में रहते हैं। मच्छर के काटने से हम संक्रमित होते हैं। जानलेवा पैरासाइट प्लाज्मोडियम फैलसिफेरम होता है। राहत यह है कि मच्छरों में इसकी संख्या घट रही है। केवल 5 फीसदी मरीज ही अब इससे संक्रमित हो रहे हैं। बाकी 95 फीसदी भारत में प्लाज्मोडियम वाइवैक्स के केस आ रहे हैं। इसके चलते मौतें लगातार कम हो रही है।</p>
<p><strong>मलेरिया पर फैक्ट फाइल</strong><br />- राजस्थान में 83 हजार पर एक व्यक्ति को मलेरिया हुआ।  भारत में अब मलेरिया के 1 हजार आबादी पर 1 से कम केस आ रहे हैं, जबकि देश में 2001 में प्रति हजार 2 केस आया करते थे। प्रदेश में यह आंकड़ा 5 केस प्रति हजार था, लेकिन 2021 में 83237 लोगों पर केवल एक व्यक्ति ही शिकार हुआ। <br />- आजादी के वक्त 75 लाख लोग संक्रमित हुए थे। मलेरिया से 1947 में 75 लाख लोग संक्रमित हुए थे। तब जनसंख्या 33 करोड़ थी। अब 135 करोड़ आबादी पर केवल मात्र 1.58 लाख ही संक्रमित हुए। <br />- अमेरिका के दो राज्य 1962 में ही मलेरिया मुक्त हुए, अब पड़ोसी चीन भी। दुनिया में सबसे पहले अमेरिका के दो स्टेट ग्रेनेडा, सेंट ल्यूसिया 1962 में मलेरिया मुक्त हुए थे। इसके बाद 100 से अधिक देश मलेरिया मुक्त हो चुके। पिछले साल चीन को भी डब्ल्यूएचओ ने मलेरिया मुक्त घोषित किया है। <br />- बीते साल सबसे ज्यादा  केस व मौतें छत्तीसगढ़ में हुई। देश में बीते साल सबसे ज्यादा केस 92455 और सबसे ज्यादा 34 मौतें छत्तीसगढ़ में हुई। राजस्थान समेत 27 राज्यों में कोई मौत नहीं हुई। <br /><br /></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वास्थ्य</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 25 Apr 2022 10:50:12 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>गाय पर राजनीति: रामलाल शर्मा ने कांग्रेस सरकार पर लगाया हिंदू समाज की आस्था पर प्रहार करने का आरोप</title>
                                    <description><![CDATA[सरकार आए दिन हिंदू समाज की आस्था पर प्रहार करने का कर रही है काम: रामलाल शर्मा]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/jaipur-news--politics-over-cow--ramlal-sharma-accuses-congress-government-of-attacking-the-faith-of-hindu-society/article-8448"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-04/ramlal_new.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। भाजपा प्रदेश मुख्य प्रवक्ता एवं विधायक रामलाल शर्मा ने कहा कि राजस्थान की सरकार बहुसंख्यक समाज को आहत करने की ठान चुकी है। राज्य सरकार द्वारा पहले सालासर के अंदर गेट पर लगे राम मंदिर को गिराने का काम किया और फिर करौली के दंगे और फिर अलवर के अंदर राजगढ़ में मंदिर को गिराना, उसके बाद अब अलवर जिले के ही कठूमर विधानसभा क्षेत्र के अंदर कई वर्षों से संचालित गौशाला जिसके अंदर 400 से अधिक गाय थी और जिसे सरकार से अनुदान मिल रहा था और इस गौशाला को अलवर के जिला कलेक्टर द्वारा बेस्ट गौशाला का अवार्ड भी प्रदान किया गया था, लेकिन उसके उपरांत भी कठूमर विधानसभा क्षेत्र में विधायक के इशारे के ऊपर वन विभाग का नाम लेकर 400 गायों के आशियाने को उजाड़ने का काम किया गया। जिसमे पानी की टंकी, गौशाला की चारदिवारी, चारे के शेड को तोड़ दिया गया है और उन 400 गायों को ऐसे स्थान पर छोड़ा गया है जहां उनके चारे की कोई व्यवस्था नहीं है। अब वो गाये कैसे अपने आप को बचा पाएगी यह भी मुश्किल है, लेकिन राज्य सरकार हिंदू समाज की आस्था पर लगातार प्रहार करने का काम कर रही है। वक्त आने पर राजस्थान की जनता भी इनको जवाब देने का काम करेगी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 23 Apr 2022 15:26:48 +0530</pubDate>
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                <title>कांग्रेस के भविष्य को लेकर दिल्ली में मंथन</title>
                                    <description><![CDATA[दिल्ली में बीजेपी पर बरसे गहलोत]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/brainstorming-in-delhi-regarding-the-future-of-congress--many-congress-veterans-including-prashant-kishor--ashok-gehlot-were-present/article-8231"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-04/ashok5.jpg" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। कांग्रेस की भविष्य की रणनीति तय करने के लिए दिल्ली दरबार में मंथन का दौर जारी है। बुधवार को दस जनपथ पर कांग्रेस की महत्वपूर्ण बैठक हुई। बैठक में राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत, भूपेश बघेल, प्रशांत किशोर, दिग्विजय सिंह, केसी वेणुगोपाल, सोनिया गांधी, अंबिका सोनी, मुकुल वासनिक, जयराम रमेश मौजूद रहें। बैठक में कांग्रेस अध्यक्ष का चुनाव, अगले आम चुनाव समेत गुजरात, हिमाचल प्रदेश के विधानसभा चुनावों पर मंथन किया गया। इसके साथ ही कांग्रेस के चिंतन शिविर पर भी चर्चा हुई। कांग्रेस पार्टी को जीत की नई दिशा देने के लिए  लगातार तीसरे दिन हो रही बैठक में प्रशांत किशोर पर सभी की निगाहें रही। वहीं बैठक के दौरान कांग्रेस की भविष्य की रणनीति तय करने में सीएम गहलोत की राय और सुझाव बेहद महत्वपूर्ण माना गया।</p>
<p><strong>सीएम अशोक गहलोत दिल्ली में बोले...</strong><br />मुख्यमंत्री अशोक गहलोत दिल्ली पहुंचने पर मीडिया से भी मुखातिब हुए। इस दौरान उनहोनें जमकर बीजेपी पर जुबानी हमला बोला। गहलोत ने कहा कि राजस्थान में बीजेपी के 6 सीएम चेहरे हो गए हैं। तंज कसते हुए गहलोत ने कहा कि ऐसे में अब चर्चा किससे की जाए। वहीं देश में मौजूदा हालातों पर बोलते हुए गहलोत ने कहा कि देश में हिंसा का माहौल है, सरकार कुछ नहीं कर रही है। सत्तापक्ष हिंसा को रोकने के बाजय बढ़ावा दे रहा है। पीएम मोदी और गृह मंत्री अमित शाह बेलगाम होकर काम कर रहे हैं। वें किसी की परवाह नहीं करते। बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा वहीं कह रहे हैं जो पीएम मोदी चाहते हैं। पीएम मोदी किरोड़ी मीणा की धमाल पट्टी को पसंद करते हैं। बाकी नेताओं से भी यही उम्मीद करते हैं। मैं किसी पर व्यक्तिगत हमला नहीं करता, बल्कि मुद्दों पर बात करता हूं। पीएम और गृह मंत्री की गरिमा का ख्याल रखता हूं। जरूरत है कि सरकार देशहित में काम करे और फैसले ले।</p>
<p>वहीं मुख्यमंत्री ने प्रशांत किशोर पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि प्रशांत किशोर जैसे प्रोफेशन लोगों का पार्टी यदि उपयोग करती है तो गलत नहीं है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 20 Apr 2022 16:18:16 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Administrator]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>नि:शुल्क दवा योजना का सच: टिटनेस के इंजेक्शन बाजार से, सीरप में मिले मरे मच्छर</title>
                                    <description><![CDATA[गड़बड़ियों ने नि:शुल्क दवा योजना की पोल खोल दी]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/udaipur/udaipur-news--tetanus-injections-from-market--mosquitoes-found-in-syrup--truth-of-free-medicine-plan/article-8209"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-04/ttt-injection-in-.jpg" alt=""></a><br /><p>उदयपुर। मुख्यमंत्री नि:शुल्क दवा एवं जांच योजना में सभी रोगियों को नि:शुल्क दवा एवं जांच सुविधा देने  संबंधी राज्य सरकार के निर्देश के बावजूद एमबी हॉस्पिटल की इमरजेंसी में कई रोगियों को सप्ताह भर से टिटनेस का इंजेक्शन तक बाजार से लाना पड़ रहा है, वहीं एक रोगी को हॉस्पिटल से दिए गए सीरप में मरे हुए दो मच्छर दिखे। इन गड़बड़ियों ने नि:शुल्क दवा योजना की पोल खोल दी है। गत सप्ताह भर से एमबी हॉस्पिटल की इमरजेंसी में कई जीवनरक्षक दवाइयों का टोटा है। सर्वाधिक उपयोग में आने वाले टिटनेस के इंजेक्शन का भी अभाव बना हुआ था। हॉस्पिटल प्रशासन ने सोमवार को इस इंजेक्शन की आपूर्ति की है। इसके अलावा इमरजेंसी में एंटीबायोटिक सिफेक्सीन, बीपी की दवा लोसारटन, दर्द निवारक आईबीप्रूफेन आदि दवाइयां नहीं है। ये दवाइयां अधिकतर रोगियों को लिखी जाती है। मंगलवार को एक रोगी को हॉस्पिटल से गले में संक्रमण पर सीरप ग्लोवर हैक्सीडीन दिया गया जिसमें मरे हुए दो मच्छर दिखाई देने पर रोगी के परिजनों ने अधीक्षक को शिकायत की। <br /><br /><br />सीरप सीलबंद है, जो डिट्रिक्ट डिस्ट्रीब्यूशन सेंटर (डीडीसी) के पास दवा भण्डार से आई है। ऐसे में हॉस्पिटल के दवा भण्डार में पूरा स्टॉक चैक कराएंगे। इस स्टॉक को विड्रॉल करने के निर्देश दे दिए हैं। टिटनेस के इंजेक्शन व कुछ दवाइयां आरएमसीएल से ही शॉर्ट सप्लाई है। इनकी वैकल्पिक दवाइयां है। टिटनेस के इंजेक्शन लोकल बाजार से भी खरीदे गए लेकिन बाजार में भी उन दिनों में इसकी किल्लत है। जिस डीडीसी पर दवाइयों की उपलब्धता नहीं है, उसके खिलाफ कार्रवाई करेंगे। <br />डॉ. आर.एल. सुमन, अधीक्षक, एमबी हॉस्पिटल</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                            <category>उदयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 20 Apr 2022 14:03:33 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Administrator]]></dc:creator>
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                <title>सांसद और विधायक के पत्रों की अनदेखी पड़ेगी भारी</title>
                                    <description><![CDATA[सांसद, विधायक और अन्य जनप्रतिनिधि के पत्रों की अनदेखी अब भारी पड़ेगी। राज्य सरकार इसके लिए अधिकारियों की जवाबदेही तय करेगी। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/jaipur-news--ashok-gehlot-government-will-doing-launched-of-prsa-portal/article-7850"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-04/465465465645.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। सांसद, विधायक और अन्य जनप्रतिनिधि के पत्रों की अनदेखी अब भारी पड़ेगी। राज्य सरकार इसके लिए अधिकारियों की जवाबदेही तय करेगी। इसकी पूरी देखरेख के लिए मुख्यमंत्री अशोक गहलोत सरकार पीआरएसए यानि पब्लिक रिप्रजेंटेटिव लैटर्स एसेसमेंट पोर्टल लांच करने जा रही है। प्रशासनिक सुधार विभाग के प्रमुख सचिव अश्विनी भगत ने बताया कि पीआरएलए पोर्टल लांच होने के बाद जनप्रतिनिधियों की शिकायतों का निवारण हो सकेगा। जनप्रतिनिधियों को शिकायत रहती है कि उनके भेजे गए पत्र पर काम हुआ या नहीं, या उनके पत्र को सरकार ने कचरे में तो नहीं डाल दिया। जनप्रतिनिधियों की भूमिका को महत्वपूर्ण मानते हुए उनके पत्रों पर जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए यह खास पोर्टल सरकार लांच कर रही है। इसके बाद कोई भी जनप्रतिनिधि अपने पत्र की ट्रैकिंग कर सकेगा। यदि अधिकारी पोर्टल लॉगिन नहीं करते है, तो उसकी भी रिपोर्ट कलक्टर के पास पहुंचेगी।</p>
<p><strong>पीआरएलए पोर्टल में ये होगा</strong><br />- पोर्टल पर सरपंच से लेकर एमपी, एमएलए तक के पत्र अपलोड होंगे।<br />- इन पत्रों की विभागवार ट्रैकिंग हो सकेगी।<br />- जनप्रतिनिधियों के पत्रों के खोने या कचरे में डालने जेसी शिकायतों पर लगाम लगेगी।<br />- सरकार के पारदर्शी और जवाबदेही शासन के दिशा में महत्वपूर्ण कदम।<br />- जनप्रतिनिधियों के पत्रों पर निश्चित समय पर कार्रवाई नहीं तो नोडल अधिकारी को रिमाइंडर की सुविधा।<br />- जनप्रतिनिधि पत्रों पर की गई रिपोर्ट को डाउनलोड कर सकेंगे।<br />- पोर्टल पर कोई अधिकारी लॉगिन नहीं करता है तो उसकी सूचना विभागाध्यक्ष और कलक्टर के पास जाएगी।<br />- प्रत्येक 7 दिन में कार्रवाई नहीं होने पर रिमांइडर करवाया जाएगा।<br /><br /></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/jaipur-news--ashok-gehlot-government-will-doing-launched-of-prsa-portal/article-7850</link>
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                <pubDate>Wed, 13 Apr 2022 15:33:43 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur]]></dc:creator>
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                <title>कश्मीर में हिन्दुओं की वापसी राष्ट्रीय मुद्दा बने</title>
                                    <description><![CDATA[ भागवत का यह बयान न केवल कश्मीरी पंडितों के दर्द, वेदना, उपेक्षा के घावों पर मरहम लगाने का काम कर रहा है]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/opinion/-return-of-hindus-to-kashmir-became-a-national-issue-mohan-bhagwat/article-7752"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-04/rss.jpg" alt=""></a><br /><p>राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रमुख मोहन भागवत ने कहा कि कश्मीरी हिन्दुओं की कश्मीर में वापसी इस तरह होनी चाहिए कि उन्हें फिर उजाड़ा न जा सके, उस पर सरकार ही नहीं, सभी दलों को भी गंभीरता से ध्यान देना चाहिए। भागवत का यह बयान न केवल कश्मीरी पंडितों के दर्द, वेदना, उपेक्षा के घावों पर मरहम लगाने का काम कर रहा है, बल्कि उनके दर्द को समझने के साथ ऐसा वातावरण बनाने में सहयोग देने की अपेक्षा को भी उजागर कर रहा है कि कश्मीर में हिन्दुओं की वापसी सम्मानजनक तरीके से हो, उनको इस तरह मजबूती से बसाया जाए कि कोई भी शक्ति उन्हें उजाड़ न सके, उन्हें बहिर्गमन करने की विवशता को न भोगना पड़े। यह एक राष्ट्रीय मुद्दा बनना चाहिए।</p>
<p><br />कश्मीरी हिंदुओं का बहिर्गमन एक त्रासदी थी, एक उत्पीड़न की चरम पराकाष्ठा थी, एक राजनीतिक स्वार्थ की घिनौनी एवं अशोभनीय मानसिकता थी जो वर्ष 1989 के अन्तिम चरण से लेकर 1990 के आरम्भिक दिनों तक जेकेएलएफ  एवं अन्य इस्लामी उपद्रवियों द्वारा निशाना बनाए जाने की शुरुआत के तुरन्त बाद हुए हिंदू विरोधी नरसंहारों और हमलों की श्रृंखला को संदर्भित करती है, जिसमे अंतत: कश्मीरी हिंदू घाटी छोड़कर भागने को मजबूर हुए थे। इसे कश्मीरी पंडितों के पलायन भी कहा जाता है। कांग्रेस, अन्य कश्मीर के राजनीतिक दलों एवं नेताओं ने यह काला अध्याय लिखा और कट्टरवादी शक्तियों ने इसे अंजाम दिया। यही कारण है कि आज भी कांग्रेस सहित कई विपक्षी दल इस बहुचर्चित त्रासदी पर बनी फिल्म ‘द कश्मीर फाइल्स’ को न केवल खारिज कर रहे हैं, बल्कि उसे झूठी फिल्म भी बता रहे हैं। यह उनकी बौखलाहट है, यह उनकी औछी मानसिकता है जिसके चलते वे इस फिल्म को यूट्यूब पर अपलोड करने जैसे बेतुके बयान दे रहे हैं, वहीं कुछ नेता यह दुष्प्रचार करने में जुटे हैं कि यह फिल्म नफरत फैला रही है। कुछ यह भी समझाने में लगे हैं कि सेंसर बोर्ड को तो यह फिल्म पास ही नहीं करनी चाहिए थी। जबकि यह फिल्म साहस एवं संवेदना की सार्थक एवं सत्य अभिव्यक्ति है, एक सत्य को लम्बे समय तक दबाए रखने की कुचेष्ठा को चुनौती देते हुए उस सत्य को प्रकट करने की वीरतापूर्ण प्रस्तुति है, यह राष्ट्रीयता को मूर्च्छित करने वाली शक्तियों को एक करारा तमाचा है। कश्मीरी हिंदुओं की हत्याओं और उनके भयावह उत्पीड़न की सच्ची घटनाओं पर आधारित कश्मीर फाइल्स सफलता के नए मानदंड स्थापित कर रही है तो इसीलिए कि उसने 32 साल बाद कश्मीर के दिल दहलाने वाले सच को सामने लाने का काम किया है। जो लोग भी कश्मीर फाइल्स को वैमनस्य फैलाने वाली बताने की कुचेष्टा कर रहे हैं, उन्हें एक तो यह जानना चाहिए कि यह फिल्म संयुक्त अरब अमीरात में भी रिलीज होने जा रही है। दुनियाभर में इस फिल्म की चर्चाएं हो रही हैं। सत्य कभी ढ़का नहीं रह सकता, वह देर सवेर प्रकट होता ही है। लेकिन इस फिल्म को लेकर जो दुष्प्रचार किया जा रहा है, वह महज राजनीतिक शरारत ही नहीं, बल्कि कश्मीर से मार भगाए गए लाखों कश्मीरी हिंदुओं के जख्मों पर नमक छिड़कने की कोशिश भी है। इस घोर संवेदनहीनता एवं घृणित मानसिकता के पीछे एक उद्देश्य वोट बैंक की राजनीति को साधना है। वास्तव में माहौल खराब करने की कोशिश तो ऐसे ही लोग कर रहे हैं। वे यह देखने से इन्कार कर रहे हैं कि कोई भी फिल्म तभी लोकप्रिय होती है, जब वह लोगों के दिलों को छूती है। राष्ट्रीय आदर्शों, राष्टÑीय प्रतीकों और राष्ट्रीय मान्यताओं की परिभाषा खोजने के लिए और कहीं नहीं, अपनी विरासत में झांकना होगा, अपने अतीत में खोजना होगा। उन पर राजनीतिक स्वार्थ की रोटियां सेकना बन्द करना होगा। अन्यथा राष्टÑ कमजोर होता रहेगा। हमें राष्ट्रीय स्तर से सोचना चाहिए वरना इन त्रासदियों से देश आक्रांत होता रहेगा।<br />कश्मीर घाटी में रहने वाले हिन्दुओं की संख्या लगभग 3 से 6 लाख तक थी। 2016 में कश्मीर घाटी में केवल 2 से 3 हजार हिन्दू ही शेष हैं, जबकि सन् 1990 में कश्मीरी हिन्दू 19 जनवरी 1990 के दिन को ‘दु:खद बहिर्गमन दिवस’ के रूप में याद करते हैं। जनवरी का महीना पूरी दुनिया में नए साल के लिए एक उम्मीद ले कर आता है, लेकिन कश्मीरी पंडितों के लिए यह महीना दु:ख, दर्द और निराशा से भरा है। 19 जनवरी प्रतीक बन चुका है उस त्रासदी का, जो कश्मीर में 1990 में घटित हुई। जिहादी इस्लामिक ताकतों ने कश्मीरी पंड़ितों पर ऐसा कहर ढाया कि उनके लिए सिर्फ तीन ही विकल्प थे- या तो धर्म बदलो, मरो या पलायन करो। आतंकवादियों ने सैकड़ों अल्पसंख्यक कश्मीरी पंड़ितों को मौत के घाट उतार दिया था। कई महिलाओं के साथ सामूहिक दुष्कर्म कर उनकी हत्या कर दी गई। उन दिनों कितने ही लोगों की आए दिन अपहरण कर मार-पीट की जाती थी। पंड़ितों के घरों पर पत्थरबाजी, मंदिरों पर हमले लगातार हो रहे थे। घाटी में उस समय कश्मीरी पंड़ितों की मदद के लिए कोई नहीं था, ना तो पुलिस, ना प्रशासन, ना कोई नेता और ना ही कोई मानवाधिकार के लोग। उस समय हालात इतने खराब थे कि अस्पतालों में भी हिन्दू समुदाय के लोगों के साथ भेदभाव हो रहा था। सड़कों पर चलना तक मुश्किल हो गया था। कश्मीरी पंड़ितों के साथ सड़क से लेकर स्कूल-कॉलेज, दफ्तरों में प्रताड़ना हो रही थी- मानसिक, शारीरिक और सांस्कृतिक। 19 जनवरी, 1990 की रात को अगर उस समय के नवनियुक्त राज्यपाल जगमोहन ने घाटी में सेना नहीं बुलाई होती, तो कश्मीरी पंड़ितों का कत्लेआम व महिलाओं के साथ सामूहिक दुष्कर्म किस सीमा तक होता, इसकी कल्पना नहीं की जा सकती।<br />-<strong> ललित गर्ग</strong><br /><strong>(ये लेखक के अपने विचार हैं)</strong><br /><br /><br />साम्प्रदायिक समस्या एवं स्वार्थ की देश तोड़क राजनीति का हल तो तभी प्राप्त हो सकेगा जब इस बात को सारे देश के मस्तिष्क में बहुत गहराई से बैठा दिया जाए कि भारतवर्ष की अपनी सांस्कृतिक विशिष्टता है और उसको आत्मसात करने में ही सबका हित है। हिन्दू और मुसलमान दोनों को ही जब इस देश में रहना है तो दोनों को ही अपनी-अपनी मानसिकता बदलनी होगी। इसीलिये मोहन भागवत ने कश्मीरी पंडितों के दर्द को साझा करते हुए कहा, मुझे लगता है कि वह दिन बहुत करीब है जब कश्मीरी पंडित अपने घरों में वापस आएंगे और मैं चाहता हूं  कि वह दिन जल्दी आए। संघ प्रमुख ने कहा कि फिल्म ने 1990 के समय में घाटी से कश्मीरी पंडितों और उनके पलायन की तस्वीर सामने रख दी है। भागवत ने यह भी कहा कि कश्मीरी पंडितों को अपने वतन लौटने का संकल्प लेना चाहिए, ताकि स्थिति जल्दी बदल सके। गविविधता में एकताग गहम सब एक हैंग, के लिए लम्बा समय और जीवन खपा देने वालोें की कुर्बानी को हम भूल रहे हैं। जबकि इस प्रकार की संस्कृति तो नित्य योगदान मांगती है। ये पौधे तो नित्य पानी मांगते हैं। जनता राजनीतिज्ञों से ईमानदारी की अपेक्षा रखती है। वह उन पर जाति सम्प्रदाय का लेबल देखना नहीं चाहती। समझ में नहीं आता सत्ता मोह और धर्मान्धता व्यक्ति को इतना संकीर्ण, अनुदार और बहुरूपिया क्यों बना देती है?<br />कश्मीरी पंडितों के दर्द को देखना जितना दयनीय है, उतना ही ल’जाजनक भी है। अब कश्मीरी हिंदुओं के दर्द को समझने के साथ ऐसा वातावरण बनाने में सहयोग देना चाहिए कि उनकी घाटी में वापसी हो सके, तब या तो सस्ती राजनीति की जा रही है या फिर परस्पर दोषारोपण किया जा रहा है, अब तोड़ने नहीं जोड़ने की बात हो। कोई इस फिल्म की विषयवस्तु से सहमत हो या न हो, लेकिन इस सच से मुंह नहीं मोड़ सकता कि कश्मीरी हिंदुओं पर भीषण अत्याचार हुए। यह समझा जाना चाहिए कि लाखों कश्मीरी हिंदुओं का घाटी से पलायन एक ऐसी त्रसदी है, जिसे भूला नहीं जा सकता। वास्तव में आवश्यक केवल यह नहीं कि कश्मीरी हिंदुओं का दमन करने वालों की पहचान तय कर उन्हें दंडित करने के लिए कोई जांच आयोग बनें, बल्कि यह भी है कि उनकी घर वापसी के लिए ठोस प्रयास किए जाए। ये प्रयास तभी सफल होंगे, जब उन्हें सभी का सहयोग मिलेगा।<br /><br /><br /><br /><strong>प्रसंगवशट</strong><br />वर्ष 1989 के अन्तिम चरण से लेकर 1990 के आरम्भिक दिनों तक जेकेएलएफ  एवं अन्य इस्लामी उपद्रवियों द्वारा निशाना बनाए जाने की शुरुआत के तुरन्त बाद हुए हिंदू विरोधी नरसंहारों और हमलों की श्रृंखला को संदर्भित करती है, जिसमे अंतत: कश्मीरी हिंदू घाटी छोड़कर भागने को मजबूर हुए थे।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>ओपिनियन</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/opinion/-return-of-hindus-to-kashmir-became-a-national-issue-mohan-bhagwat/article-7752</link>
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                <pubDate>Mon, 11 Apr 2022 15:38:53 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Administrator]]></dc:creator>
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                <title>पंजाब: मान सरकार का एक और बड़ा फैसला: अब एक ही पेंशन लेंगे विधायक</title>
                                    <description><![CDATA[मान ने शुक्रवार को ट्वीट किया कि आज हमने एक और बड़ा फैसला लिया है कि प्रदेश विधायकों के पेंशन फार्मूले में बदलाव किया जाएगा।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/punjab--another-big-decision-of-the-government--now-mlas-will-take-only-one-pension/article-6756"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-03/punjab-cm.jpg" alt=""></a><br /><p>चंडीगढ़। पंजाब में आम आदमी पार्टी (आप) की सरकार ने प्रदेश की वित्तीय हालत को देखते हुए विधायकों के पेंशन फार्मूले में बदलाव करने का बड़ा फैसला लिया है। मान ने शुक्रवार को ट्वीट किया कि आज हमने एक और बड़ा फैसला लिया है कि प्रदेश विधायकों के पेंशन फार्मूले में बदलाव किया जाएगा। विधायक अब केवल एक पेंशन ही ले सकेंगे। इसके अलावा पारिवारिक पेंशन में भी कटौती की जा रही है। हजारों करोड़ रुपए विधायकों की पेंशन पर खर्च किया जाता रहा है लेकिन अब इसे राज्य के लोगों के हित में खर्च किया जाएगा। <br /><br /><strong>विपक्ष ने भी किया स्वागत</strong><br />सरकार के इस फैसले का विपक्ष ने भी स्वागत किया है। कांग्रेस के विधायक सुखपाल खेहरा ने भगवंत सरकार के फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि हम इस कदम का समर्थन करते हैं। प्रदेश हित में किए जाने वाले हर कदम का हम स्वागत करेंगे। पंजाब पहले ही कर्ज में डूब चुका है ऐसे हालात में ये कदम स्वागत योग्य है। सरकार अच्छा काम करेगी तो उसका स्वागत होगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 26 Mar 2022 12:11:59 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Administrator]]></dc:creator>
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                <title>कॉलोनियों के नियमन के लिए कट ऑफ डेट दिसंबर 2018 होगी</title>
                                    <description><![CDATA[ प्रदेश के शहरी क्षेत्रों में बसी कच्ची बस्तियों के नियमन के लिए राज्य सरकार नई पॉलिसी लाएगी। इसका प्रारूप तैयार कर मंजूरी के लिए कैबिनेट में भेजा जाएगा।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/the-cut-off-date-for-regulation-of-colonies-will-be-december-2018--government-will-bring-a-new-policy-for-regulation-of-raw-settlements/article-4644"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-02/jaipur_kachi_basti_new.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। प्रदेश के शहरी क्षेत्रों में बसी कच्ची बस्तियों के नियमन के लिए राज्य सरकार नई पॉलिसी लाएगी। इसका प्रारूप तैयार कर मंजूरी के लिए कैबिनेट में भेजा जाएगा। इसके साथ ही आवासन मण्डल क्षेत्राधिकार की कॉलोनियों में पट्टे देने के लिए बोर्ड अपने एक्ट में संशोधन करेगा ताकि बोर्ड के मकानों के बेचान के बाद आखिरी क्रेता के पक्ष में नियमितिकरण किया जा सके। बोर्ड का क्षेत्र ट्रांसफर होने के बाद निकाय इन कॉलोनियों में पट्टे देने के लिए बोर्ड से एनओसी मांग रहे थे। कृषि भूमि पर बसी कॉलोनियों के नियमन के लिए कट ऑफ डेट को भी दिसंबर 2018 तक बढ़ाई जाएगी। यूडीएच मंत्री शांति धारीवाल की अध्यक्षता में शुक्रवार को प्रशासन शहरों के संग अभियान की समीक्षा बैठक में यह निर्णय लिया गया। अपने आवास पर हुई बैठक में धारीवाल ने नई नीति का प्रस्ताव करने करने के यूडीएच अधिकारियों को निर्देश दिए।<br /><br /><br /><strong>हाउसिंग बोर्ड एक्ट में संशोधन कर शेष कॉलोनियों में देगा पट्टे<br />कट ऑफ डेट बढ़ाने से मिलेगी राहत</strong><br />साथ ही नियमन के लिए मौजूदा कट ऑफ डेट को बढ़ाने का भी निर्णय लिया गया। अभी नियमन के लिए कॉलोनियों की कट ऑफ डेट 15 अगस्त, 2009 निर्धारित है, लेकिन अब इसे बढ़ाकर दिसंबर 2018 करने पर सहमति बनी है। इसके साथ ही कृषि भूमि पर बसी कॉलोनियों के लिए 17 जून, 1999 है, जिसे भी बढ़ाकर दिसंबर 2018 किया जा सकता है। बैठक में बताया गया कि कट ऑफ डेट बढ़ाने के लिए भू-राजस्व अधिनियम में बदलाव जरूरी है, ऐसा होने से हजारों की तादाद में भूखण्डधारियों को राहत मिल सकेगी। भूखण्ड व सुविधा क्षेत्र में 60:40 के अनुपात की बजाय 70:30 अनुपात भी हो सकता है। साथ ही पट्टा लेने के लिए पहले की तुलना में कम राशि देनी होगी।<br /><br /><strong><br />नाम हस्तांतरण के मामलों में आर्थिक भार कम</strong><br />मकान व भूखण्ड का नाम हस्तांतरण के लिए विज्ञप्ति प्रकाशित कराने में विस्तृत ब्यौरा नहीं देने का निर्णय लिया गया ताकि आवेदक पर आर्थिक भार कम हो। प्रशासन शहरों के संग अभियान के कैम्प मार्च में फिर शुरू हो सकते है। इसके लिए धारीवाल-मुख्यमंत्री के बीच चर्चा कर समय तय किया जाएगा। <br /><br /><strong>चार सीई का पदोन्नति के बाद पदस्थापन</strong><br />नगरीय विकास विभाग ने पदोन्नति के बाद चार मुख्य अभियंता के पदस्थापन कर दिया है। इसमें सीई अशोक कुमार चौधरी को निदेशक जेडीए, महेन्द्र कुमार माथुर को निदेशक जेडीए, पीके जैन को अतिरिक्त परियोजना निदेशक आरयूआईडीपी और ओपी वर्मा को कोटा यूआईटी में पदस्थापित किया है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 19 Feb 2022 13:26:57 +0530</pubDate>
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