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                <title>embassy - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <description>embassy RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>स्पेन ने तेहरान में फिर खोला अपना दूतावास, कहा- शांति को बढ़ावा देने के उद्देश्य से काम पर लौट रहे</title>
                                    <description><![CDATA[अमेरिका-ईरान युद्धविराम के बाद स्पेन ने तेहरान में अपना दूतावास फिर खोल दिया है। दूतावास ने एक्स पर इसकी पुष्टि करते हुए कहा कि राजदूत एंटोनियो सांचेज-बेनेडिटो गैस्पर टीम संग लौट आए हैं। 7 मार्च को खाली कराया गया मिशन अब शांति और कूटनीतिक संबंध मजबूत करने के उद्देश्य से फिर सक्रिय हो गया है।
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/spain-reopens-its-embassy-in-tehran-returning-to-work-to/article-150399"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/6622-copy63.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal"><span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">मॉस्को। अमेरिका और ईरान के बीच युद्धविराम के बाद स्पेन ने तेहरान में अपना दूतावास फिर से खोल दिया है। स्पेन के राजनयिक मिशन ने यह जानकारी दी है। दूतावास ने एक्स पर कहा, हम तेहरान लौट रहे हैं। संघर्ष विराम के बाद ईरान में स्पेनिश दूतावास फिर से खुल रहा है। राजदूत एंटोनियो सांचेज-बेनेडिटो गैस्पर, राजनयिक टीम और स्थानीय कर्मचारियों के साथ, शांति को बढ़ावा देने के उद्देश्य से काम पर लौट रहे हैं।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">स्पेन के दूतावास को सात मार्च को खाली करा लिया गया था, राजनयिक मिशन ने उन सभी स्पेनिश नागरिकों की रवानगी सुनिश्चित कर ली थी, जो ईरान छोड़ना चाहते थे।</span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 14 Apr 2026 17:25:06 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>अमेरिकी दूतावास का दावा : भारत में वोटर टर्नआउट के लिए यूएसएआईडी ने नहीं की फंडिंग, पहले ट्रंप लगा चुके आरोप</title>
                                    <description><![CDATA[भारत में अमेरिकी दूतावास ने अमेरिका से चुनावी फंडिंग पर वहां के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दावे का खंडन किया है। अमेरिकी दूतावास ने यह डेटा केंद्र सरकार को दिया है, जिसने इसे संसद में साझा किया है]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/usaid-did-not-claim-the-us-embassy-for-voter-turnout/article-124380"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-12/donald_trump_630x400.jpg" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। भारत में अमेरिकी दूतावास ने अमेरिका से चुनावी फंडिंग पर वहां के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दावे का खंडन किया है। अमेरिकी दूतावास ने यह डेटा केंद्र सरकार को दिया है, जिसने इसे संसद में साझा किया है। इस डेटा के मुताबिक यूएसएआईडी ने भारत में चुनावी गतिविधियों के लिए कोई फंड नहीं दिए। इस डेटा के मुताबिक भारत में चुनाव संबंधी अनुदानों की लिस्ट में 21 मिलियन डॉलर की कोई एंट्री नहीं है। इस साल उनके राष्ट्रपति बनने के बाद फरवरी में ट्रंप प्रशासन ने भी दावा किया था कि भारत के चुनाव में वोटर टर्नआउट बढ़ाने के लिए यूएसएआईडी ने 21 मिलियन डॉलर खर्च किए।</p>
<p><strong>21 मिलियन डॉलर देने का किया था दावा</strong><br />अमेरिका के डिपार्टमेंट आॅफ गवर्नमेंट एफिशिएंसी की ओर से फरवरी में एक्स पर एक पोस्ट में दावा किया गया था कि अन्य अनुदानों के साथ ही भारत को वोटर टर्नआउट के लिए 21 मिलियन डॉलर के अनुदान को रद्द किया जाता है। इससे पहले ट्रंप ने लगातार आरोप लगाए थे कि उनकी पूर्ववर्ती डेमोक्रेटिक पार्टी की सरकार ने भारत के चुनावों में दखल दी। उन्होंने इसे अपने चुनावी अभियान का हिस्सा भी बनाया था कि दूसरे देशों को चुनावी अनुदान देने का क्या औचित्य है। एक मौके पर ट्रंप ने कहा था, भारत में वोटर टर्नआउट के लिए मेरे दोस्त प्रधानमंत्री मोदी को 21 मिलियन डॉलर दिए जा रहे हैं। हम भारत में वोटर टर्नआउट के लिए 21 मिलियन डॉलर दे रहे हैं। हमारा क्या? मैं भी वोटर टर्नआउट चाहता हूं।</p>
<p><strong>ट्रंप ने जो बाइडेन प्रशासन पर लगाया था आरोप</strong><br />अमेरिकी डिपार्टमेंट ऑफ गवर्नमेंट एफिशिएंसी के दावे से पहले से ही डोनाल्ड ट्रंप कह रहे थे कि जो बाइडेन सरकार भारत के चुनावों में दखल देकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की जगह किसी और को चुने जाने में मदद की कोशिश कर रही थी। एक मौके पर उन्होंने कहा था, वोटर टर्नआउट के लिए 21 मिलियन डॉलर, हमें भारत में वोटर टर्नआउट के लिए 21 मिलियन डॉलर खर्च करने की क्या जरूरत है? मेरा अनुमान है कि वे किसी और को जितवाना चाहते थे। हमें भारत सरकार को यह बताना होगा, क्योंकि जब हमने सुना कि रूस ने हमारे देश पर करीब 2,000 डॉलर खर्च किया, यह बहुत बड़ी बात थी। उन्होंने 2,000 डॉलर से कुछ इंटरनेट ऐड खरीदे। यह पूरी तरह एक सफलता है। एक मौके पर उन्होंने इसे किकबैक स्कीम भी कहा।</p>
<p><strong>ट्रंप ने जो बाइडेन प्रशासन पर लगाया था आरोप</strong><br />अमेरिकी डिपार्टमेंट ऑफ गवर्नमेंट एफिशिएंसी के दावे से पहले से ही डोनाल्ड ट्रंप कह रहे थे कि जो बाइडेन सरकार भारत के चुनावों में दखल देकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की जगह किसी और को चुने जाने में मदद की कोशिश कर रही थी। एक मौके पर उन्होंने कहा था, वोटर टर्नआउट के लिए 21 मिलियन डॉलर, हमें भारत में वोटर टर्नआउट के लिए 21 मिलियन डॉलर खर्च करने की क्या जरूरत है? मेरा अनुमान है कि वे किसी और को जितवाना चाहते थे। हमें भारत सरकार को यह बताना होगा, क्योंकि जब हमने सुना कि रूस ने हमारे देश पर करीब 2,000 डॉलर खर्च किया, यह बहुत बड़ी बात थी। उन्होंने 2,000 डॉलर से कुछ इंटरनेट ऐड खरीदे। यह पूरी तरह एक सफलता है। एक मौके पर उन्होंने इसे किकबैक स्कीम भी कहा।</p>
<p>लेकिन, केंद्र सरकार ने सीपीएम सांसद जॉन ब्रिटास के प्रश्न के जवाब में संसद को बताया है कि जब अमेरिकी प्रशासन ने 16 फरवरी को दावा किया कि वह भारत को चुनाव के लिए मिलने वाले अनुदान को रद्द कर दिया है तो उसने तुरंत अमेरिकी दूतावास से भारत में यूएसएआईडी की ओर से समर्थित सभी तरह के प्रोजेक्ट की बीते 10 वर्षों का ब्योरा उपलब्ध कराने को कहा। विदेश राज्यमंत्री कीर्ति वर्धन सिंह के हस्ताक्षर वाले जवाब के अनुसार अमेरिकी दूतावास ने 2 जुलाई को इस संबंध में सूचना मुहैया करवाई। मंत्री ने संसद को बताया कि अमेरिकी दूतावास ने यूएसएआईडी की ओर से फंडिंग वाले सभी अनुदानों की लिस्ट उपलब्ध करवाई है, जिसमें चुनाव संबंधी कोई भी अनुदान का जिक्र नहीं है। उन्होंने आगे कहा कि अमेरिकी राजदूत ने बताया है कि 15 अगस्त से यूएसएआईडी भारत में कार्य बंद कर देगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 22 Aug 2025 11:36:14 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>अमेरिका से पनामा भेजे गए निर्वासितों ने लगाई मदद की गुहार : दूतावास ने ली मिलने की अनुमति, कहा - होटल में सुरक्षित हैं सभी भारतीय</title>
                                    <description><![CDATA[रिपोर्ट्स के मुताबिक, पिछले सप्ताह भारत, नेपाल, श्रीलंका, पाकिस्तान, अफगानिस्तान, चीन और ईरान जैसे देशों के 299 प्रवासियों को पनामा भेजा गया था। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/the-exiles-sent-to-panama-from-america-the-embassy-of/article-105008"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-02/257rtrer-(6)15.png" alt=""></a><br /><p>वॉशिंगटन। अमेरिका में बिना कानूनी स्थिति वाले कई प्रवासियों को निर्वासन का सामना करना पड़ रहा है। कार्रवाई के तहत कई निर्वासितों को पनामा के एक होटल में भेजा गया है, जिनमें कई भारतीय भी शामिल हैं। इन लोगों को जब तक उनके मूल देश में वापस नहीं भेज दिया जाता, उन्हें होटल में रखा जाएगा। होटल से कुछ प्रवासियों ने मदद की गुहार लगाई थी। उन्होंने खिड़कियों से कृपया हमें बचाओ लिखे संकेत दिखाए। इस बीच भारतीय दूतावास ने कहा है कि भारतीय पनामा के होटल में सुरक्षित हैं और वहां जरूरी सुविधाएं उपलब्ध हैं।</p>
<p>रिपोर्ट्स के मुताबिक, पिछले सप्ताह भारत, नेपाल, श्रीलंका, पाकिस्तान, अफगानिस्तान, चीन और ईरान जैसे देशों के 299 प्रवासियों को पनामा भेजा गया था। इनमें से कुछ को डेरियन जंगल के पास एक दूरस्थ स्थान पर स्थानांतरित कर दिया गया है।</p>
<p><strong>पनामा भेजे गए भारतीयों को लेकर दूतावास ने क्या कहा</strong><br />पनामा, निकारागुआ, कोस्टा रिका में भारतीय दूतावास ने कहा कि उन्हें पनामा भेजे गए भारतीयों के समूह तक राजनयिक पहुंच मिल गई है। दूतावास ने एक्स एक बयान में कहा, पनामा के अधिकारियों ने हमें बताया है कि कुछ भारतीय अमेरिका से पनामा पहुंचे हैं। वे सुरक्षित हैं और एक होटल में रुके हुए हैं, जहां सभी जरूरी सुविधाएं उपलब्ध हैं। दूतावास की टीम ने उनसे मिलने की अनुमति ले ली है। हम उनकी देखभाल के लिए स्थानीय सरकार के साथ मिलकर काम कर रहे हैं।</p>
<p><strong>प्रवासियों को होटल से बाहर निकलने की अनुमति नहीं </strong><br />इसी प्रकार कोस्टा रिका ने गुरुवार से भारत, पाकिस्तान, किर्गिस्तान, कजाकिस्तान और उज्बेकिस्तान जैसे देशों से 200 प्रवासियों को स्वीकार करने पर सहमति व्यक्त की है। पनामा ने प्रवासियों को शहर के डेकापोलिस नामक होटल में रखा है। निर्वासितों को उनके होटल से बाहर निकलने की अनुमति नहीं है। होटल की सुरक्षा पुलिस की ओर से की जा रही है।</p>
<p><strong>पनामा सुरक्षा मंत्री ने क्या कहा</strong><br />रिपोर्ट के मुताबिक पनामा के सुरक्षा मंत्री फ्रैंक अब्रेगो ने इस बात से इनकार किया है कि प्रवासियों को हिरासत में लिया गया है। एक प्रेस ब्रीफिंग में अब्रेगो ने कहा कि पनामा के नागरिकों की सुरक्षा और शांति की गारंटी के लिए इन लोगों को हमारे देश में घूमने की अनुमति नहीं है। हम उन्हें सभी आवश्यक चिकित्सा, भोजन और आरामदायक सेवाएं प्रदान कर रहे हैं। पनामा सरकार के अनुसार, 13 प्रवासियों को उनके मूल देश वापस भेज दिया गया है। 175 से ज्यादा लोगों ने स्वेच्छा से घर लौटने पर सहमति जताई है और उन्हें फिलहाल डेकापोलिस होटल में रखा गया है।</p>
<p><strong>97 प्रवासियों को डेरियन जंगल के पास कैंप में रखा </strong><br />वापस जाने से इनकार करने वाले लोगों को सुदूर डेरियन प्रांत में एक प्रवासी सुविधा में रखा जाएगा। बुधवार देर रात तक, अधिकारियों ने कहा कि उन्होंने कम से कम 97 प्रवासियों को वन क्षेत्र के अंत में सैन विसेंट कैंप में स्थानांतरित कर दिया है। वर्षों से प्रवासी अमेरिका में अवैध प्रवेश के लिए कोलंबिया और पनामा को जोड़ने वाले खतरनाक वन क्षेत्र माने जाने वाले डेरियन गैप को पार करते रहे हैं। माना जा रहा है कि और भी लोग वहां स्थानांतरित किए जाएंगे।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 21 Feb 2025 10:46:09 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>ब्रिटेन ने नागरिकों से किया लेबनान छोड़ने का आह्वान, दूतावास जारी रखेगा कार्य</title>
                                    <description><![CDATA[अमेरिका, भारत, स्वीडन और अन्य देशों के दूतावासों ने सिफारिश की थी कि उनके नागरिक लेबनान छोड़ दें।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/britain-calls-on-peoples-to-leave-lebanon-embassy-will-continue-work/article-86871"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-04/flag-britain-(-copy.jpg" alt=""></a><br /><p>लंदन। ब्रिटेन ने अपने देश के नागरिकों से लेबनान को तुरंत छोड़ने का आह्वान किया और बेरूत में दूतावास के कर्मचारियों के परिवार के लोगों को क्षेत्र से वापस बुलाने की घोषणा की है। विदेश विभाग की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि ब्रिटेन के जो लोग इस समय लेबनान में हैं, वे यथाशीघ्र वहां से निकल जायें। बयान के मुताबिक बेरूत में  ब्रिटिश दूतावास में काम करने वाले अधिकारियों के परिवारों को अस्थायी रूप से क्षेत्र से वापस बुला लिया गया है, लेकिन दूतावास कार्य जारी रखेगा। इससे पहले अमेरिका, भारत, स्वीडन और अन्य देशों के दूतावासों ने आ्ग्रह किया थाा कि उनके नागरिक लेबनान छोड़ दें।</p>
<p>गाजा में इजरायली सैन्य कार्रवाई शुरू होने के बाद से इजरायल-लेबनानी सीमा पर स्थिति भी खराब हो गई है। इजरायली सेना और हिजबुल्लाह के सैनिक सीमा से लगे इलाकों में रोजाना एक-दूसरे के ठिकानों पर गोलाबारी करते हैं। लेबनानी विदेश मंत्रालय के अनुसार इजराइल की गोलाबारी के कारण दक्षिणी लेबनान में लगभग एक लाख लोगों को अपना घर छोडऩा पड़ा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 05 Aug 2024 18:39:46 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>स्वीडन की सरकार ने पाकिस्तान में दूतावास किया बंद </title>
                                    <description><![CDATA[विशेषज्ञों की मानें तो इस फैसले का सीधा असर पाकिस्तान के व्यापार, शिक्षा, सांस्कृतिक आदान-प्रदान और साथ ही देश की छवि पर पड़ेगा।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/sweden-govt-closes-embassy-in-the-pakistan/article-42615"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-04/c-1.png" alt=""></a><br /><p>स्टॉकहोम। स्वीडन की सरकार ने पाकिस्तान में अपना दूतावास बंद कर दिया है। यह फैसला पाकिस्तान की मुश्किलों को बढ़ाने वाला है। स्वीडन ने देश की वर्तमान स्थिति को देखते हुए यह फैसला किया है। उसने इसके पीछे सुरक्षा कारणों का हवाला दिया है। विशेषज्ञों की मानें तो इस फैसले का सीधा असर पाकिस्तान के व्यापार, शिक्षा, सांस्कृतिक आदान-प्रदान और साथ ही देश की छवि पर पड़ेगा। पहले ही आर्थिक संकट में घिरे पाकिस्तान के लिए स्वीडिश सरकार का यह फैसला मुसीबतों को बढ़ाने वाला है। इस फैसले पर अभी पाकिस्तान सरकार की प्रतिक्रिया नहीं आई है।</p>
<p><strong>क्या है स्वीडिश सरकार का आदेश</strong><br />आदेश स्वीडन की तरफ से जारी किया गया है उसमें कहा गया है कि राष्ट्रीय राजधानी इस्लामाबाद में सुरक्षा स्थिति को देखते हुए दूतावास को आंगुतकों के लिए बंद किया जाता है। आदेश में बताया गया है कि दूतावास का प्रवासी विभाग इस समय किसी भी तरह के अनुरोध को पूरा करने में असक्षम है। साथ ही कोई भी डॉक्यूमेंट भी बाकी दूतावासों को नहीं भेजा जा सकता है। दूतावास की तरफ से कहा गया है कि इस समय इस बात का जवाब नहीं दिया जा सकता है कि आखिर इसे दोबारा कब खोला जाएगा। वहीं अब माना जा रहा है कि इस फैसले का असर दोनों देशों विशेषकर पाकिस्तान पर बड़े स्तर पर पड़ने वाला है। हाल ही में कुरान जलाए जाने की घटना को लेकर दोनों देशों के बीच तनाव हुआ था।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 13 Apr 2023 10:52:49 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>काबुल में भारतीय दूतावास की सुरक्षा की, किसी सामान  को नहीं लगाया हाथ, इतना दरियादिल हो गया तालिबान?</title>
                                    <description><![CDATA[ इस साल 23 जून को भारतीय अधिकारियों की एक छोटी टीम ने दूतावास में सब कुछ बरकरार पाया। तालिबान ने यह सुनिश्चित किया कि भारतीय दूतावास में रखे गोला-बारूद और निगरानी उपकरणों सहित सुरक्षा उपकरणों को कोई नुकसान न हो।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/security-of-the-indian-embassy-in-kabul--did-not-touch-any-goods--the-taliban-became-so-generous/article-18246"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-08/q-51.jpg" alt=""></a><br /><p>काबुल। अफगानिस्तान पर तालिबान के कब्जे का एक साल पूरा होने जा रहा है। इस दौरान दुनिया के किसी भी देश ने तालिबान की अंतरिम सरकार को मान्यता नहीं दी है। हालांकि, कई देश ऐसे जरूर हैं जो इस सच्चाई को स्वीकार कर रहे हैं कि अब तालिबान ही अफगानिस्तान का असली प्रतिनिधि है। यही कारण है कि कुछ देशों ने तो पर्दे के पीछे तालिबान के साथ बातचीत भी शुरू कर दी है। इन देशों की सूची में भारत भी शामिल है। दरअसल अफगानिस्तान में भारत ने अरबों का निवेश किया हुआ है, जो तालिबान के सत्ता में आने के बाद खतरे में है। हालांकि, तालिबान भी जानता है कि बिना भारत की मदद के वह अफगानिस्तान में अपनी सरकार को सही से चला नहीं सकता। यही कारण है कि तालिबान ने भारतीय दूतावास को रत्ती भर भी नुकसान नहीं पहुंचाया है। इस साल 23 जून को भारतीय अधिकारियों की एक छोटी टीम ने दूतावास में सब कुछ बरकरार पाया। तालिबान ने यह सुनिश्चित किया कि भारतीय दूतावास में रखे गोला-बारूद और निगरानी उपकरणों सहित सुरक्षा उपकरणों को कोई नुकसान न हो।</p>
<p><strong>गोला-बारूद सहित सभी उपकरण बरकरार </strong><br />एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी ने बताया कि 10 महीने खाली छोड़े जाने के बाद काबुल दूतावास का निरीक्षण करने पहुंची भारतीय टीम गोला-बारूद, बुलेटप्रूफ जैकेट और निगरानी उपकरणों सहित सभी उपकरणों को बरकरार देखकर हैरान रह गई। अधिकारी ने बताया कि वे उसी स्थिति में थे जैसे वे एक साल पहले थे। हालांकि, सभी स्टोरेज रूम और कंटेनरों के ताले जरूर टूटे हुए थे। यह दर्शाता है कि तालिबान लड़ाकों ने भारत की अनुपस्थिति में दूतावास की रक्षा की थी और वहां रखे गए सभी सामानों की बारीकी से जांच की थी।</p>
<p><strong>60 से अधिक कर्मचारी तैनात</strong><br />रिपोर्ट के अनुसार, दूतावास और आवासीय परिसर में अब 60 से अधिक अधिकारी और कर्मचारी तैनात हैं। इसमें पांच से सात अधिकारी शामिल हैं, जिनमें एक डायरेक्टर स्तर के आईएफएस अधिकारी मिशन के उप प्रमुख के रूप में कार्य कर रहे हैं। इसके साथ ही दूतावास की सुरक्षा में भारत-तिब्बत सीमा पुलिस की एक बड़ी टुकड़ी भी तैनात है। भारतीय दूतावास में अभी पूरी क्षमता का लगभग एक तिहाई लोग ही काम कर रहे हैं। हालांकि, एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी ने यह जरूर बताया है कि निकट भविष्य में कर्मचारियों और अधिकारियों की तादाद बढ़ाई जा सकती है।<br /><br /><strong>वीजा और अफगान पासपोर्ट भी सुरक्षित</strong><br />टीम को अफगान नागरिकों के दर्जनों पासपोर्ट भी मिले, जिन्होंने उस समय वीजा के लिए आवेदन किया था, लेकिन दूतावास के बंद होने के बाद वे उन तक नहीं पहुंच पाए। फिर से खुलने के कुछ हफ्तों बाद दूतावास की टीम ने, भारतीय दूतावास के पासपोर्ट और वीजा एजेंट शाहिर ट्रैवल्स को उनके मालिकों को वापस करने के लिए लगभग 120 पासपोर्ट सौंपे। अधिकारी ने कहा कि हालांकि दूतावास को सभी भारतीय कर्मचारियों ने खाली कर दिया था, लेकिन वहां तैनात स्थानीय अफगानों ने सुनिश्चित किया कि परिसर या इन्वेंट्री को कोई नुकसान नहीं हुआ है। <br />पिछले साल भारतीय टीम को 1.5 टन से अधिक उपकरणों, जिसमें बैगेज स्कैनर और हाथ से पकड़े जाने वाले मेटल डिटेक्टर शामिल थे, को पीछे छोड़ना पड़ा था। इनमें से कुछ वस्तुओं को हेरात, जलालाबाद और कंधार में भारत के अन्य वाणिज्य दूतावासों से सुरक्षित रखने के लिए भेजा गया था। इनमें से अधिकतर दूतावासों को 2020-21 के दौरान तालिबान की हिंसा के कारण बंद करना पड़ा था।</p>
<p><strong>कनेक्टिविटी और ट्रांसपोर्ट बढ़ाने की तैयारी में भारत</strong><br />द हिंदू की रिपोर्ट के अनुसार, भारत जल्द ही काबुल में अपने दूतावास को पूरी क्षमता के साथ खोल सकता है। जून में सिर्फ एक तकनीकी टीम को ही तैनात किया गया था, जिसका काम व्यापार और व्यापार के अवसरों और भोजन और चिकित्सा सहायता के वितरण पर ध्यान देना था। इस महीने, अफगानिस्तान की एरियाना एयरलाइंस भी कामा एयर की तरह काबुल से नई दिल्ली के बीच फ्लाइट का संचालन शुरू कर देगी। इसके बाद न सिर्फ यात्रियों बल्कि एयर कार्गो के माध्यम से माल के ट्रांसपोर्ट में बढ़ोत्तरी होगी। वर्तमान में भारतीय दूतावास में 60 से 70 कर्मचारी काम कर रहे हैं, पर अभी तक वीजा सुविधा को खोला नहीं गया है। केवल ई-वीजा मार्ग के माध्यम से अफगानिस्तान के नागरिकों को सीमित संख्या के वीजा जारी किए गए हैं, जिससे सैकड़ों छात्र और भारत में इलाज की आशा लिए हुए मरीज काफी निराश हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 08 Aug 2022 12:17:22 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>मोदी ने यूक्रेन में फंसे लोगों को निकालने में नहीं छोड़ी कमी </title>
                                    <description><![CDATA[मोदी ने जनता को यूक्रेन में फंसे भारतीयों को सुरक्षित भारत लाने का केवल आश्वासन ही नहीं दिया, बल्कि जो कहा उसे पूरा भी कर दिखाया। उन्होंने देश की सुरक्षा एवं भारतीयों की रक्षा को प्राथमिकता देते हुए कई महत्वपूर्ण फेसले किए। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/opinion/modi-decision-for-peoples-of-india/article-5934"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-03/e1-copy.jpg" alt=""></a><br /><p>मोदी ने जनता को यूक्रेन में फंसे भारतीयों को सुरक्षित भारत लाने का केवल आश्वासन ही नहीं दिया, बल्कि जो कहा उसे पूरा भी कर दिखाया। उन्होंने देश की सुरक्षा एवं भारत के लोगों की रक्षा को प्राथमिकता देते हुए कई महत्वपूर्ण फैसले किए। वह एक साहसी एवं कर्मयोद्धा की भांति राजनीतिक व्यस्तताओं के बावजूद युद्धरत क्षेत्रों में फंसे भारतीयों को सुरक्षित भारत लाने के काम को बड़ी सूझबूझ से सफल किया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एवं उनकी भाजपा सरकार ने एक बार फिर यह सिद्ध कर दिया कि उसके लिए सत्ता से अधिक महत्वपूर्ण लोगों की रक्षा है। उसने रूस एवं यूक्रेन के बीच चल रहे घमासान युद्ध एवं आपदा में फंसे अपने नागरिकों को सुरक्षित निकालने में कोई कमी नहीं छोड़ी। सबसे बड़ी राहत की खबर है कि यूक्रेन के घमासान वाले शहर सूमी में फंसे करीब सात सौ भारतीय छात्रों को सुरक्षित निकालने में उसे सफलता मिली है, इससे पूर्व सत्रह हजार भारतीयों को सुरक्षित स्वदेश लाया जा चुका है। आपरेशन गंगा के तहत चले इस अभियान में उसे यह अभूतपूर्व सफलता मिली है। यह भारत की विदेश नीति, मोदी की अन्तरराष्ट्रीय छवि एवं भारत की लगातार बढ़ती साख एवं शक्ति का परिणाम है। इसलिए आॅपरेशन गंगा के उजालों पर कालिख पोतने की बजाए उसकी प्रशंसा होनी चाहिए।</p>
<p>यह मोदी के दृढ़ संकल्प का ही परिणाम है कि एक बड़ी चुनौती के बीच भारतीयों को सुरक्षित स्वदेश लाना। इसीलिए भी यह सफलता उल्लेखनीय है, क्योंकि कभी रूस तो कभी यूक्रेन युद्धविराम के लिए बनी सहमति का उल्लंघन कर रहे थे। इससे सूमी में फंसे भारतीय छात्रों की मुसीबत बढ़ रही थी, उनका जीवन पल-पल खतरों से घिरा था। उन्हें संकट से बचाने के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को न केवल यूक्रेन और रूस के राष्ट्रपति से बात करनी पड़ी, बल्कि संयुक्त राष्टÑ में भारतीय प्रतिनिधि को इन दोनों देशों के रवैये पर आपत्ति भी जतानी पड़ी। रूस पर यूक्रेन के हमले के बाद वहां फंसे भारतीयों को सुरक्षित बचाकर लाना एक जटिल काम था, इन जटिल  हालातों में 17 हजार से अधिक भारतीयों को सुरक्षित निकालकर लाना एक साहस का काम है। इस काम को किस तरह सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई, इसे इससे समझा जा सकता है कि इसके लिए न केवल चार केंद्रीय मंत्रियों को यूक्रेन के पड़ोसी देशों में भेजा गया, बल्कि भारतीय वायुसेना की भी सेवाएं ली गईं।</p>
<p>मोदी ने जनता को यूक्रेन में फंसे भारतीयों को सुरक्षित भारत लाने का केवल आश्वासन ही नहीं दिया बल्कि जो कहा उसे पूरा भी कर दिखाया। उन्होंने देश की सुरक्षा एवं भारतीयों की रक्षा को प्राथमिकता देते हुए कई महत्वपूर्ण कदम उठाए। वे एक साहसी एवं कर्मयोद्धा की भांति अपनी तमाम राजनीतिक व्यस्तताओं के बावजूद युद्धरत क्षेत्रों में फंसे भारतीयों को सुरक्षित भारत लाने के काम को बड़ी सूझबूझ एवं जीवट से सफल किया। वे सफल जननायक हैं, ऐसे राजनेताओं के लिए जॉन एडम्स कहते है ‘सार्वजनिक नीतिमत्ता, व्यक्तिगत नीतिमत्ता से अलग नहीं होती। सार्वजनिक नीतिमत्ता यह गणराज्य की आधारशिला है। शासनकर्ताओं में सार्वजनिक हित, सार्वजनिक सम्मान, सार्वजनिक हित संबंधों के विषय में सकारात्मक रूख होना चाहिए। इन बातों के साथ ही सम्मान, शक्ति, तेजस्विता भी लोगों उत्पन्न की जानी चाहिए। मोदी ने एक अरब तीस करोड़ की विशाल आबादी वाले देश के जन-जन में यह आस्था एवं विश्वास पैदा किया है।</p>
<p>मोदी ने देश की जनता को सुरक्षित, भयमुक्त एवं सम्मानजनक जीवन का कोरा नारा ही नहीं दिया, बल्कि ऐसा करके दिखाया है। रूस एवं यूक्रेन युद्ध में फंसे भारतीयों को सुरक्षित निकाल कर ही नहीं बल्कि कोरोना महामारी एवं पूर्व के आतंकवादी दौर में भी जनता को शांति एवं भयमुक्त जीवन प्रदत्त किया। जैसा कि सर्वविदित है कि पूर्व सरकारों के दौर में देशवासी सबसे अधिक भयभीत आए दिन होने वाले आतंकवादी हमलों और सीरियल बम विस्फोटों से थे। नागरिकों में यह भय समा गया था कि न जाने कब, कहां, कैसे आतंकवादी हमला हो जाएं। लेकिन मोदी सरकार आने के बाद नागरिकों ने सुरक्षा के मामले में राहत की सांस ली है। मोदी के शासनकाल में नागरिक निर्भय एवं निसंकोच होकर कहीं भी देश के किसी भी कोने में आ-जा रहे हैं। एक ओर राष्ट्र सुरक्षा एवं जनता की रक्षा के लिए अनेकानेक उपाय-योजनाएं और नीतियां लागू की जा रही है। दूसरी ओर भारत तेजी के साथ विकास व प्रगति की ऊंचाइयों को छू रहा है। भारत ने मोदी के शासन में संकट एवं आपदा के समय जनता की रक्षा के अनूठे कीर्तिमान स्थापित किए हैं। कुछ वर्ष पहले ऐसा ही काम यमन में ऑपरेशन किया था। तब तो उसने बांगलादेश, नेपाल, श्रीलंका के अलावा, अमेरिका, ब्रिटेन, जर्मनी, कनाडा समेत दो दर्जन देशों के नागरिकों को भी वहां से निकाला था। ऐसे अभियान न केवल भारत की बढ़ती क्षमता को रेखांकित करते हैं, बल्कि दुनिया को यह संदेश भी देते हैं कि वह एक बड़ी और जिम्मेदार शक्ति बन रहा है। ऑपरेशन गंगा से भारत ने एक बार फिर साबित किया है कि वह संकट में स्वयं के साथ ही मानवीय आधार पर दूसरे देशों की मदद करने से भी कभी गुरेज नहीं करता है। भारत ने यूक्रेन में फंसे भारतीयों के साथ ही बांग्लादेश, नेपाल और ट्यूनीशिया के नागरिकों को भी वहां से निकाला। भारत ने बांग्लादेश के 9 और पड़ोसी देश नेपाल के 3 छात्रों को यूक्रेन से रेस्क्यू किया था। भारतीयों ने यूक्रेन स्थित भारतीय दूतावास से संपर्क किया था, उन सभी को निकाल लिया गया है।            </p>
<p><strong>- ललित गर्ग</strong><br /><strong>(ये लेखक के विचार हैं)</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>ओपिनियन</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 11 Mar 2022 10:59:56 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur]]></dc:creator>
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                <title>यूक्रेन में गोली लगने से भारतीय छात्र घायल</title>
                                    <description><![CDATA[यूक्रेन में पश्चिमी सीमा पर ल्वीव की ओर जाने के दौरान कथित तौर पर एक भारतीय छात्र को गोली लगने के बाद अस्पताल में भर्ती कराया गया है। भारत सरकार ने अब तक इस खबर की पुष्टि नहीं की है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/attack-at-indian-student-in-ukraine/article-5447"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-03/firing-copy1.jpg" alt=""></a><br /><p>कीव। यूक्रेन में पश्चिमी सीमा पर ल्वीव की ओर जाने के दौरान कथित तौर पर एक भारतीय छात्र को गोली लगने के बाद अस्पताल में भर्ती कराया गया है। भारत सरकार ने अब तक इस खबर की पुष्टि नहीं की है।</p>
<p>सूचना के अनुसार भारतीय छात्र हरजोत सिंह कार से ल्वीव जा रहा था, तभी उस पर हमला हुआ और उसे गोली मार दी गयी। उसे कीव स्थित भारतीय दूतावास के पास ले जाया गया। उसने भारतीय प्राधिकरण से सहायता की अपील की है। <br /><br /></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>यूक्रेन-रूस युद्ध</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 04 Mar 2022 11:16:08 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>भारतीय दूतावास ने नागरिकों को दिया यूक्रेन छोड़ने का निर्देश</title>
                                    <description><![CDATA[यूक्रेन की सीमाओं पर रूसी सैनिकों की तैनाती और उस पर रूस के हमले की आशंका के बीच राजधानी कीव स्थित भारतीय दूतावास ने लोगों, विशेष तौर पर छात्रों को देश की स्थिति और अनिश्चितताओं को देखते हुए अस्थायी तौर पर देश छोड़ने का निर्देश दिया है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/embassy-give-instruction-to-leave-ukraine/article-4493"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-02/46546546546528.jpg" alt=""></a><br /><p>कीव। यूक्रेन की सीमाओं पर रूसी सैनिकों की तैनाती और उस पर रूस के हमले की आशंका के बीच राजधानी कीव स्थित भारतीय दूतावास ने लोगों, विशेष तौर पर छात्रों को देश की स्थिति और अनिश्चितताओं को देखते हुए अस्थायी तौर पर देश छोड़ने का निर्देश दिया है। भारतीय दूतावास ने एक परामर्श जारी कर कहा कि सभी यूक्रेन की और देश के भीतर की सभी यात्रा से लोग नहीं करे। परामर्श में कहा गया कि स्थिति की अनिश्चितताओं को देखते हुए, यूक्रेन में भारतीय नागरिक, विशेष रूप से ऐसे छात्र, जिनका रुकना आवश्यक नहीं है, अस्थायी तौर पर छोडऩे पर विचार करे। भारतीय नागरिकों को यूक्रेन की और देश के भीतर की  सभी गैर-जरूरी यात्रा से बचने की भी सलाह दी जाती है।</p>
<p>भारतीय नागरिकों से अनुरोध है कि वे दूतावास को यूक्रेन में अपनी उपस्थिति के बारे में सूचित करते रहें, आवश्यक पडऩे पर उन तक पहुंचा जा सके। दूतावास यूक्रेन में भारतीय नागरिकों को सभी सेवाएं प्रदान करने के लिए सामान्य रूप से कार्य करेगा। यूक्रेन सीमा के पास 100,000 से अधिक सैनिकों को तैनात किया है, जिससे हमले की आशंका बनी हुई है। रिपोर्टो के अनुसार जर्मनी के चांसलर ओलाफ शॉल्ज ने यूक्रेन का दौरा किया और आज मॉस्को का दौरा करने की योजना बनाई है, जिसे एक संभावित रूसी आक्रमण को रोकने का अंतिम प्रयास माना जा रहा है। शॉल्ज ने यूक्रेन पर किसी भी रूसी हमले के खिलाफ स्पष्ट चेतावनी जारी की थी। उन्होंने कहा था कि रूस के किसी भी आक्रमण के भारी आर्थिक परिणाम होंगे, यूक्रेन की क्षेत्रीय अखंडता पर कोई समझौता नहीं होगा।<br /> <br />  </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/world/embassy-give-instruction-to-leave-ukraine/article-4493</link>
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                <pubDate>Tue, 15 Feb 2022 15:07:41 +0530</pubDate>
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