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                <title>jawai - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <title>Budget: झालाना लेपर्ड रिजर्व और जवाई भी ईको टूरिज्म सर्किट का भाग बनेंगे </title>
                                    <description><![CDATA[प्रदेश के संरक्षित वन क्षेत्रों में प्रथम चरण में सरिस्का स्थित पांडुपोल और रणथम्भौर में त्रिनेत्रा गणेश जी के लिए ईवी बेस्ड ट्रांसपोर्ट सिस्टम शुरू किया जाएगा। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/budget-jhalana-leopard-reserve-and-jawai-will-also-become-part/article-84348"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-07/u1rer-(4)14.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। राजस्थान रणथम्भौर, सरिस्का एवं घना जैसे प्रमुख वाइल्ड सेंचुरीज/रिजर्वस के लिए प्रसिद्ध हैं। किन्तु अब झालाना लेपर्ड रिजर्व, पाली स्थित जवाई को भी ईको-टूरिज्म सर्किट का भाग बनाने से पर्यटकों को विभिन्न फ्लोरा-फौना से रूबरू होने का अवसर मिलने के साथ ही दूरदराज के क्षेत्रों का विकास भी सम्भव होगा। वहीं सांभर झील, खींचन कंजर्वेशन रिजर्व, शेरगढ़ अभयारण्य, मनसा माता कंजर्वेशन रिजर्व बस्सी अभयारण्य को ईको टूरिज्म साइट्स के रूप में विकसित किया जाएगा। जोगी महल-सवाई माधोपुर, आमेर-जयगढ़-नाहरगढ़ किला -जयपुर, बिजासन माता (इंदरगढ़)-बूंदी, समई माता-बांसवाड़ा तथा छतरंग मोरी-चित्तौड़गढ़ में रोपवे सुविधा उपलब्ध कराने के लिए डीपीआर बनाकर कार्य करवाए जाएंगे।  <br />प्रदेश के संरक्षित वन क्षेत्रों में स्थित धार्मिक स्थलों में श्रद्धालुओं और वन्यजीवों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए प्रथम चरण में सरिस्का स्थित पांडुपोल और रणथम्भौर में त्रिनेत्रा गणेश जी के लिए ईवी बेस्ड ट्रांसपोर्ट सिस्टम शुरू किया जाएगा। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 11 Jul 2024 11:19:15 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
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                <title> बप्पी लहरी का जयपुर से विशेष रिश्ता : जयपुर के जवाई थे बप्पी दा, 1977 में जयपुर की चित्राणी से हुई थी शादी</title>
                                    <description><![CDATA[बप्पी दा को अपने आई एम ए डिस्को डांसर, जिमी जिमी आजा आजा जैसे गानों पर लोगों को अब तक नाचते देखते है तो बड़ा गर्व और सुकून मिलता]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/bappi-lahiri-s-special-relationship-with-jaipur--jawai-the-bappi-da-of-jaipur--was-married-to-chitrani-of-jaipur-in-1977--bappi-lahiri-was-given-the-life-time-achievement-award-six-years-ago-at-the-rajasthan-film-festival/article-4522"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-02/bappi-da_jaipur.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। भले ही बप्पी दा आज हमारे बीच नहीं रहे हो लेकिन मशहूर संगीतकार का जयपुर से एक विशेष रिश्ता था। वे अनेक बार जयपुर आते रहते थे, लेकिन बहुत कम लोगों को मालूम है कि बप्पी दा जयपुर के जवाई थे।उनकी 1977 में जयपुर की चित्राणी से शादी हुई थी। उनकी पत्नी का मायका जयपुर में है और वे अपने पारिवारिक कार्यक्रमों में भी भाग लेने यहां आते रहे हैं।  जयपुर में ही उनको राजस्थान फिल्म फेस्टिवल में छह साल पहले लाइफ टाइम अचीवमेंट अवॉर्ड दिया गया था। तब उन्होंने कहा था कि अभी रिटायर नहीं हुआ हूं, मुझे अवार्ड तो लाइफ टाइम अचीवमेंट का दे दिया है लेकिन अभी भी मेरा बेस्ट वर्क आना बाकी है। हालांकि वे फिल्मी दुनिया के लोगों की बेरुखी और मगरूरियत से बेहद आहत थे, उनका कहना था कि फिल्मी दुनिया के रिश्ते भी फिल्मी ही है। मैने अनेक बड़े स्टार्स और गायकों को अवसर दिया, लेकिन वे सब आज मुझे भूल चुके है। बप्पी ने इस बात पर खुशी जताई की जयपुर में कई शादी की बारातो में शामिल हुए है और उनमें अपने आई एम ए डिस्को डांसर, जिमी जिमी आजा आजा जैसे गानों पर लोगों को अब तक नाचते देखते है, तो बड़ा गर्व और सुकून मिलता है कि लोग उन्हें और उनके गानों को आज भी पसंद करते है।</p>
<p><strong><br />क‍ई रिकॉर्ड हैं उनके नाम</strong><br />बप्‍पी लहरी बॉलिवुड के पहले ऐसे म्‍यूजिक प्रोड्यूसर थे जिन्‍होंने स‍िनथेसाइज्‍ड (Synthesized) म्‍यूजिक को प्रचल‍ित क‍िया। उन्‍होंने 33 फिल्‍मों में 180 गानों का रेकॉर्ड बनाया और उनका नाम गिनेस बुक ऑफ वर्ल्‍ड रेकॉर्ड में दर्ज हो गया। इसके अलावा उनके नाम एक दिन में सबसे ज्‍यादा गाने रिकॉर्ड करने का भी रेकॉर्ड दर्ज है।</p>
<p>डिस्को संगीत के किग के रूप में पहचान बनाईं बप्पी लाहिरी ने<br /> बॉलीवुड में बप्पी लाहिरी एक एसे संगीतकार के रूप में याद किया जायेगा,जिन्होंने ताल वाद्ययंत्रों के प्रयोग के साथ फिल्मी संगीत में पश्चिमी संगीत का समिश्रण करके बाकायदा .डिस्को थेक .की एक नयी शैली ही विकसित कर दी ।अपने इस नये प्रयोग की वजह से बप्पी लाहिरी को कैरियर के शुरूआती दौर में काफी आलोचनाओं का भी सामना करना पड़ा लेकिन बाद में श्रोताओं ने उनके संगीत को काफी सराहा और वह फिल्म इंडस्ट्री में डिस्को किंग के रूप में विख्यात हो गये ।<br /><br /><strong>बप्पी लाहिरी का मूल नाम आलोकेश लाहिरी</strong></p>
<p>27 नवंबर 1952 को पश्चिम बंगाल के कोलकाता शहर में जन्में बप्पी लाहिरी का मूल नाम आलोकेश लाहिरी था ।उनका रूझान बचपन  से ही संगीत की ओर था ।उनके पिता अपरेश लाहिरी बंगाली गायक थे , जबकि मां वनसरी लाहिरी संगीतकार और गायिका थी ।माता.पिता ने संगीत के प्रति बढ़ते रूझान को देख लिया और इस राह पर चलने के लिये प्रेरित किया।  बचपन से ही बप्पी लाहिरी यह सपना देखा करते थें कि संगीत के क्षेत्र में वह अंतराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त कर सकें ।महज तीन वर्ष की उम्र से ही बप्पी लाहिरी ने तबला बजाने की शिक्षा हासिल करनी शुरू कर दी ।इस बीच उन्होंने अपने माता.पिता से संगीत की प्रारंभिक शिक्षा भी हासिल की ।<br /><br /></p>
<p><strong>बतौर संगीतकार बप्पी लाहिरी ने अपने कैरियर की शुरूआती वर्ष 1972 में प्रदर्शित बंग्ला फिल्म दादू से की</strong><br />बतौर संगीतकार बप्पी लाहिरी ने अपने कैरियर की शुरूआती वर्ष 1972 में प्रदर्शित बंग्ला फिल्म दादू से की लेकिन फिल्म टिकट खिड़की पर नाकामयाब साबित हुयी ।अपने सपनो को साकार करने के लिये बप्पी लाहिरी ने मुंबई का रूख किया ।वर्ष 1973 में प्रदर्शित फिल्म नन्हा शिकारी बतौर संगीतकार उनके करियर की पहली ङ्क्षहदी फिल्म थी लेकिन दुर्भाग्य से यह फिल्म भी टिकट खिड़की पर नकार दी गयी ।<br /><br /><strong>बप्पी लाहिरी की किस्मत का सितारा वर्ष 1975 में प्रदर्शित फिल्म जख्मी से चमका </strong><br />बप्पी लाहिरी की किस्मत का सितारा वर्ष 1975 में प्रदर्शित फिल्म जख्मी से चमका। सुनील दत्त आशा पारेख, रीना रॉय और राकेश रौशन की मुख्य भूमिका वाली इस फिल्म में आओ तुम्हे चांद पे ले जाये और जलता है जिया मेरा भीगी भीगी रातो में जैसे गीत लोकप्रिय हुये लेकिन जख्मी दिलों का बदला चुकाने आज भी होली गीतों में विशिष्ट स्थान रखता है। वर्ष 1976 में बप्पी लाहिरी के संगीत निर्देशित में बनी एक और सुपरहिट फिल्म चलते चलते प्रदर्शित हुयी। फिल्म में किशोर कुमार की आवाज में चलते चलते मेरे ये गीत याद रखना आज भी श्रोताओं में बीच अपनी अपनी अमिट पहचान बनाये हुये है ।फिल्म जख्मी और चलते चलते की सफलता के बाद बप्पी लाहिरी बतौर संगीतकार अपनी पहचान बनाने में कामयाब हो गये ।</p>
<p><br /> <strong>पग घुंघरू बांध मीरा नाची थी ,उन दिनों श्रोताओं में क्रेज बन गया </strong><br />वर्ष 1982 में प्रदर्शित फिल्म नमक हलाल बप्पी लाहिरी के करियर की महत्वपूर्ण फिल्मों में शुमार की जाती है ।प्रकाश मेहरा के निर्देशन में बनी इस फिल्म में सुपर स्टार अमिताभ बच्चन ने मुख्य भूमिका निभाई थी ।फिल्म में किशोर कुमार की आवाज में बप्पी लाहिरी का संगीबतद्ध यह गीत पग घुंघरू बांध मीरा नाची थी ,उन दिनों श्रोताओं में क्रेज बन गया था और आज भी जब कभी सुनाई देता है तो लोग थिरकने पर मजबूर हो उठते है ।<br /><br /><strong>1983 में प्रदर्शित फिल्म डिस्को डांसर बप्पी लाहिरी के करियर के लिये मील का पत्थर साबित</strong></p>
<p>वर्ष 1983 में प्रदर्शित फिल्म डिस्को डांसर बप्पी लाहिरी के करियर के लिये मील का पत्थर साबित हुयी ।बी.सुभाष के निर्देशन में मिथुन चक्रवर्ती की मुख्य भूमिका वाली इस फिल्म में बप्पी लाहिरी के संगीत का नया अंदाज देखने को मिला ।आइ.एम.ए डिस्को डांसर, जिमी जिमी जिमी आजा आजा जैसे डिस्कों गीत ने श्रोताओं को झूमने पर विवश कर दिया ।फिल्म में अपने संगीतबद्ध गीत की सफलता के बाद बप्पी लाहिरी डिस्को किंग के रूप में मशहूर हो गये।<br /><br /></p>
<p><strong>सर्वश्रेष्ठ संगीतकार के फिल्मफेयर पुरस्कार से सम्मानित </strong><br />वर्ष 1984 में बप्पी लाहिरी के सिने कैरियर की एक और सुपरहिट फिल्म शराबी प्रदर्शित हुयी ।इस फिल्म में उन्हें एक बार फिर से निर्माता प्रकाश मेहरा और सुपरस्टार अमिताभ बच्चन के साथ काम करने का अवसर मिला। फिल्म में अपने संगीतबद्ध सुपरहिट गीत दे दे प्यार दे, मंजिले अपनी जगह है के जरिये बप्पी लाहिरी ने श्रोताओं को अपना दीवाना बना दिया।वह कैरियर में पहली बार सर्वश्रेष्ठ संगीतकार के फिल्मफेयर पुरस्कार से सम्मानित भी किये गये। नब्बे के दशक में बप्पी लाहिरी की फिल्मों को अपेक्षित सफलता नही मिली ।हालांकि वर्ष 1993 में आंखे और दलाल के जरिये उन्होंने फिल्म इंडस्ट्री में वापसी की लेकिन इसके बाद उनकी फिल्मों को अधिक कामयाबी नही मिल सकी ।<br /><br /></p>
<p><strong>यार बिना चैन कहां रे, तम्मा तम्मा लोगे</strong><br />बप्पी लाहिरी ने कई फिल्मों में अपने पाश्र्वगायन से भी श्रोताओं को अपना दीवाना बनाया है।उनके गाये गीतों की लंबी फेहरिस्त में कुछ है ,बंबई से आया मेरा दोस्त, देखा है मैने तुझे फिर से पलट के, तू मुझे जान से भी प्यारा है, याद आ रहा है तेरा प्यार, सुपर डांसर आये है आये है,जीना भी क्या है जीना, यार बिना चैन कहां रे, तम्मा तम्मा लोगे, प्यार कभी कम मत करना, दिल में हो तुम ख्वाबो में तुम, उलाला उलाला आदि।<br /><br /><br /><br /><br /><br /><br /><br /><br /><br /></p>
<p><br /><br /></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>मूवी-मस्ती</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 16 Feb 2022 11:49:33 +0530</pubDate>
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