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                <title>commerce - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <description>commerce RSS Feed</description>
                
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                <title>सुरेश पाटोदिया बने  कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स के उपाध्यक्ष,  उनके अनुभव और नेतृत्व से संगठन को नई दिशा मिलने की उम्मीद </title>
                                    <description><![CDATA[राजस्थान के वरिष्ठ व्यापारी नेता सुरेश पाटोदिया को कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (CAIT) का राष्ट्रीय उपाध्यक्ष (2026-2028) निर्वाचित किया गया है। राष्ट्रीय अध्यक्ष बी.सी. भरतिया ने उनके नेतृत्व और व्यापारियों के प्रति समर्पण की सराहना की। पाटोदिया की यह नियुक्ति व्यापारिक जगत में राजस्थान के बढ़ते प्रभाव और मजबूत नेतृत्व का प्रमाण है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/suresh-patodiya-becomes-national-vice-president-of-cat/article-151496"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/cait.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। प्रमुख व्यापारिक संगठन कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) के वार्षिक आमसभा में राजस्थान के वरिष्ठ व्यापारी नेता सुरेश पाटोदिया को वर्ष 2026-2028 के लिए राष्ट्रीय उपाध्यक्ष निर्वाचित किया गया है। कैट के राष्ट्रीय अध्यक्ष बी.सी. भरतिया ने उन्हें पत्र लिखकर हार्दिक बधाई दी और कहा कि यह पद उनके समर्पण, नेतृत्व क्षमता और व्यापारियों के हित में किए गए उल्लेखनीय कार्यों का परिणाम है। पाटोदिया लंबे समय से व्यापारिक संगठनों में सक्रिय भूमिका निभाते रहे हैं और उन्होंने विभिन्न मंचों पर व्यापारियों की समस्याओं को मजबूती से उठाया है। उनके अनुभव और नेतृत्व से संगठन को नई दिशा मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>बिजनेस</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 23 Apr 2026 17:35:39 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title> हाड़ौती के दो बड़े कॉलेजों में 37 शिक्षकों के पद रिक्त, दो सेशन के विद्यार्थियों को एक साथ बिठाकर लगानी पड़ती है क्लास</title>
                                    <description><![CDATA[सेमेस्टर के तहत हर 6 माह में एग्जाम होते हैं लेकिन शैक्षणिक सत्र लेट चलने से ढाई से तीन माह में ही परीक्षा हो रही है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/thirty-seven-teaching-positions-are-vacant-in-two-major-colleges-in-hadoti--forcing-students-from-two-semesters-to-sit-together-for-classes/article-129639"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-10/y-of-news-(25).png" alt=""></a><br /><p>कोटा। हाड़ौती के दो बड़े गवर्नमेंट कॉमर्स कॉलेज में स्टूडेंट्स ही नहीं फैकल्टीज की भी आधी से ज्यादा सीटें खाली हैं। वाणिज्य महाविद्यालयों में शिक्षकों के कुल स्वीकृत पदों  के मुकाबले आधे से ज्यादा पद लंबे समय से रिक्त पड़े हैं। जिससे विद्यार्थियों पढ़ाई में काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। समय पर कक्षाएं नहीं लगने सहित अन्य समस्याओं के कारण विद्यार्थियों का भी नियमित कॉलेज आने में रुझान घटने लगा है। इधर, विशेषज्ञों का तर्क है कि वर्तमान दौर आर्टिफिशल इंटेलीजेंस से रुबरू हो रहा है लेकिन कॉमर्स के पाठ्यक्रम में एआई की उपयोगिता को शामिल नहीं किया गया। साथ ही महाविद्यालयों में थ्यौरी के अलावा प्रेक्टिकली नॉलेज का अभाव भी घटते रुझान का बड़ा कारण है। क्योंकि, कॉमर्स पढ़ने वाले छात्रों की कमी का असर आगामी वर्षों में फैकल्टीज के रूप में नजर आएगा।  यही वजह है कि कॉलेजों में आज स्वीकृत पदों के विपरीत  रिक्त पदों की संख्या अधिक है। </p>
<p><strong>बॉयज में 7.50 तो गर्ल्स कॉलेज में 5.50 सौ स्टूडेंट्स ने एडमिशन नहीं लिया  </strong><br />वाणिज्य उच्च शिक्षा में घटते रुझान का सबसे बड़ा उदारहण  बयॉज व गर्ल्स कॉमर्स कॉलेज की प्रथम वर्ष की सीटों के आंकड़ों से स्पष्ट होते हैं। गवर्नमेंट कॉमर्स में बीकॉम फर्स्ट ईयर में 1400 सीटें हैं, जिन पर 6.50 ही एडमिशन हुए हैं। शेष 7.50 सौ विद्यार्थियों ने दाखिला लेने में ही रुचि नहीं दिखाई। इसी तरह गर्ल्स कॉलेज में 800 सीटों के मुकाबले 250 छात्राओं ने ही एडमिशन लिया है और 5.50 सौ सीटें खाली रह गई। </p>
<p><strong>शिक्षा से दूर हो रही क्वालिटी</strong><br />विषयवार प्रोफेसरों के पद रिक्त होने का विपरीत असर कॉलेज शिक्षा में देखने को मिल रहा है। उच्च शिक्षा से क्वालिटी दूर होती जा रही है। हालात यह है, यहां बच्चे सालभर में बहुत ही कम समय कॉलेज आते हैं। जिसमें पहली बार कॉलेज में नामांकन कराने, दूसरी बार परीक्षा फार्म भरने व तीसरी बार परीक्षा के लिए एडमिट कार्ड लेने और चौथी बार परीक्षा देने के लिए पहुंचते हैं। क्योंकि, कॉलेज में विषयवार शिक्षकों के पद रिक्त होने से पढ़ाई प्रभावित रहती है।  विद्यार्थी अखिलेश नागर, दीपांशु मेहरा ने बताया कि सेमेस्टर प्रणाली के तहत हर 6 माह में एग्जाम होते हैं लेकिन शैक्षणिक सत्र लेट चलने से ढाई से तीन माह में ही परीक्षा हो रही है। ऐसे में शिक्षकों की कमी से कोर्स भी पूरा नहीं हो पाता। </p>
<p><strong>दोनों कॉलेजों में 67 में से 37 शिक्षकों के पद रिक्त </strong><br />आयुक्तालय के क्षेत्रिय सहायक निदेशक कार्यालय से मिली जानकारी के अनुसार, गवर्नमेंट बयॉज व गर्ल्स कॉलेजों में  शिक्षकों के कुल 67 पद स्वीकृत हैं। जिसमें से 30 ही कार्यरत हैं। ऐसे में 37 पद लंबे समय से रिक्त चल रहे हैं। इनमें अकाउंटिंग, अर्थशास्त्र तथा बिजनेस एडमिनेस्ट्रेशन जैसे महत्वपूर्ण विषयों के शिक्षक नहीं होने से विद्यार्थियों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। गर्ल्स कॉलेज में अकाउंटिंग में शिक्षकों के 8 पद स्वीकृत हैं, जिसके मुकाबले 2 , बीएडीएम में 8 के विपरीत 4 तथा इकोनोमिक्स में 7 के मुकाबले 4 पद लंबे समय से खाली पड़े हैं।</p>
<p><strong>कॉमर्स के प्रति घटते रुझानके प्रमुख कारण</strong><br />कोटा विश्वविद्यालय में वाणिज्य एवं प्रबंध विभाग की विभागाध्यक्ष प्रो. मीनू माहेश्वरी बतातीं हैं, कोटा सहित प्रदेश में लगातार कॉमर्स के प्रति रुझान घट रहा है। जिसका विपरीत असर फैकल्टीज की उपलब्धता में कमी के रूप में भी देखे जा रहे हैं। हालांकि, रुझान घटने के कई प्रमुख कारण हैं,जो इस प्रकार हैं। <br />- वर्तमान में विद्यार्थी 11वीं-12वीं में कॉमर्स विषय का चयन करते हैं, जबकि कई वर्षों पहले 9वीं कक्षा से ही वाणिज्य शिक्षा शुरू हो जाती थी और सीनियर सैकंडरी तक विद्यार्थी कॉमर्स में कॅरियर के विकल्पों से परिचित हो जाते और उच्च शिक्षा में स्पेशलाइजेशन कर किस क्षेत्र में कॅरियर बनाना है, इससे भलीभांती परिचित हो सकते हैं।  <br />- स्कूल शिक्षा में कॉमर्स अभ्यर्थियों को केवल फर्स्ट ग्रेड शिक्षक बनने का आॅप्शन रहता है। हालांकि, थर्ड ग्रेड में भी शिक्षक बन सकते हैं लेकिन सैकंड ग्रेड में कॉमर्स विषय नहीं मिलता।<br />- जूनियर अकाउंटेंट परीक्षा के लिए साइंस-आर्ट्स के अभ्यर्थी भी पात्र होते हैं, जबकि यह क्षेत्र कॉमर्स का है फिर भी वरियता नहीं है। </p>
<p><strong>यूं बढ़ सकता है वाणिज्य के प्रति रुझान</strong><br />- लेखांकन, वित्त, अंकेक्षण, बीमा, इनकम टैक्स, इंश्योरेंस के अध्यापन को बढ़ावा देने के लिए स्कूली शिक्षा में कक्षा-6 से ही हिन्दी, अंगे्रजी, सामाजिक विज्ञान सहित अन्य विषयों के साथ वाणिज्य शिक्षा को भी शुरू किया जाना चाहिए।<br />- प्राथमिक कक्षाओं से ही वाणिज्य पढ़ाया जाए  तो न केवल विद्यार्थियों का रुझान बढ़ेगा बल्कि शिक्षकों की आवश्यकता भी बढ़ेगी। जिससे नए पद सजृन होंगे और आगे जाकर विद्यार्थी शिक्षक बन कॅरियर बना सकेंगे। <br />- प्रतियोगी परीक्षा जूनियर अकाउंटेंट, अकाउंटेंट जैसी परीक्षाओं में कॉमर्स अभ्यर्थियों को वरियता दी जानी चाहिए। इन परीक्षाओं के सिलेबस में 80% प्रश्न वाणिज्य से संबंधित होने चाहिए। <br />- यूजीसी की नेट परीक्षा कॉमर्स से संबंधित अन्य विषयों में भी करवाई जानी चाहिए। </p>
<p><strong>क्या कहते हैं विद्यार्थी </strong><br />कॉलेजों में अकाउंट्स, अर्थशास्त्र व बिजनेस एडमिनेस्ट्रेशन के शिक्षकों के पद पिछले चार-पांच सालों से चल रहे हैं। जो टीचर्स कार्यरत हैं, उनमें से कुछ को गैर शैक्षणिक कार्य एनएसएस, छात्रवृति, स्पोर्ट्स कई गतिविधियों में लगा रखा है। ऐसे में यह शिक्षक अपनी क्लास नहीं ले पाते। नतीजन, पढ़ाई का नुकसान होता है। <br /><strong>-अर्पित जैन, निवर्तमान छात्रसंघ अध्यक्ष, गवर्नमेंट कॉमर्स कॉलेज</strong></p>
<p>कॉलेजों में पहले ही सब्जेक्ट टीचर्स की कमी है और प्रतियोगी परीक्षाओं का सेंटर भी बना दिया जाता है। जिससे पढ़ाई ठप हो जाती है। क्योंकि, पेपर तक महाविद्यालय में छुट्टियां लगी होती है। वहीं, दो-दो सेशन के बच्चों को एक साथ बिठाकर पढ़ाना मजबूरी बन जाती है। <br /><strong>-सतीश कुमार, बलवीर, छात्र कॉमर्स कॉलेज </strong></p>
<p>कॉमर्स कॉलेजों में फैकल्टीज के पद व प्रथम वर्ष की सीटें आधी से ज्यादा खाली हैं। वर्तमान में आरपीएससी से शिक्षकों की चयन प्रक्रिया चल रही है। आर्ट्स-साइंस के शिक्षक मिल चुके हैं। जल्द ही कॉमर्स के भी मिलने की संभावना है। सरकार रिक्त पदों को भरने की पूरा प्रयास कर रही है। वहीं, विद्यार्थियों में रुझान बढ़ाने के लिए पाठ्यक्रम में जॉब आॅरियंटेड टॉपिक को शामिल किए जा रहे हैं। <br /><strong>-प्रो. विजय पंचौली, क्षेत्रिय सहायक निदेशक, आयुक्तालय कोटा </strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 14 Oct 2025 16:48:53 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[kota]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>कॉमर्स से उठा विश्वास, संभाग के आठ कॉलेजों में 60 फीसदी से ज्यादा सीटें खाली</title>
                                    <description><![CDATA[प्रवेश प्रक्रिया के दो माह बीतने के बाद भी महज 40 प्रतिशत सीटें भर पाई हैं।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/confidence-lost-in-commerce--more-than-60-percent-seats-vacant-in-eight-colleges-of-the-division/article-56821"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-09/commerce-se-utha-viswas,-sambhag-k-8-colleges-mei-50-fisadi-se-zyada-seats-khaali...kota-news..11.9.2023.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। सरकारी कॉलेजों में वाणिज्य शिक्षा के प्रति विद्यार्थियों का रुझान दिनोंदिन घटता जा रहा है। क्वालिटी एजुकेशन का अभाव व रोजगार के सीमित होते अवसर के चलते स्टूडेंट्स कॉमर्स लेने से कतरा रहे हैं। हालात यह हैं कि कोटा संभाग के 8 राजकीय महाविद्यालयों में वाणिज्य संकाय की 60 फीसदी सीटें खाली रह गई। प्रवेश प्रक्रिया के दो माह बीतने के बाद भी महज 40 प्रतिशत सीटें भर पाई हैं। कॉमर्स के प्रति विद्यार्थियों की बेरुखी से शिक्षाविदें ने चिंता जताई।</p>
<p><strong>1776 सीटें रह गई खाली</strong><br />हाड़ौती के 8 राजकीय महाविद्यालय जिनमें कॉमर्स संकाय संचालित हैं। जहां बीकॉम प्रथम वर्ष की कुल 2 हजार 940 सीटें हैं। जिनमें से 1 हजार 64 सीटें ही भर सकी हैं। जबकि, 1 हजार 776 सीटें खाली रह गई। जबकि, संभाग के सबसे बड़े गवर्नमेंट कॉमर्स कॉलेजों की स्थिति और भी खराब है। राजकीय वाणिज्य महाविद्यालय में सबसे ज्यादा 749 सीटें खाली रह गई। वहीं, जेडीबी कॉमर्स कॉलेज में 588 छात्राओं ने एडमिशन ही नहीं लिया। </p>
<p><strong>बूंदी गर्ल्स कॉलेज में एक भी एडमिशन नहीं</strong><br />हाड़ौती के बूंदी गर्ल्स कॉलेज में बीकॉम प्रथम वर्ष में एक भी छात्रा ने एडमिशन नहीं लिया। जबकि, प्रथम वर्ष में 100 सीटें है, जो पूरी तरह से खाली है। वाणिज्य शिक्षा के प्रति विद्यार्थियों की बेरुखी से कॉलेज शिक्षा की गुणवत्ता पर सवाल खडेÞ हो गए। शिक्षाविदों का कहना है, सरकारी शिक्षण संस्थानों में साधन-संसाधनों का अभाव व रोजगार के घटते अवसर के कारण विद्यार्थी कॉमर्स से दूर भाग रहे हैं। </p>
<p><strong>क्वालिटी एजुकेशन तो दूर पास होना ही चुनौती</strong><br />कोटा संभाग में करीब सात राजकीय पीजी महाविद्यालयों में कॉमर्स संकाय संचालित किया जा रहा है। जिनमें कोटा गवर्नमेंट कॉलेज, जेडीबी वाणिज्य, बूंदी, बारां, रामगंजमंडी, भवानीमंडी व झालावाड़ के एक-एक कॉलेज शामिल हैं। इन महाविद्यालयों में से केवल बारां और जेडीबी वाणिज्य कॉलेज में ही एक-एक बिजनेस एडमिनेस्ट्रेशन की फैकल्टी है। शेष अन्य कॉलेजों में स्थाई शिक्षक नहीं है। ऐसे में इन महाविद्यालयों के विद्यार्थियों को क्वालिटी एजुकेशन मिलना तो दूर उनका एग्जाम में पास होना ही चुनौती बन गया। हालात यह हैं कि विद्यार्थियों को प्रथम सेमेस्टर की परीक्षा में व्यापार प्रबंधन का पेपर बिना पढ़े ही देना पड़ा था। अब जुलाई के प्रथम सप्ताह में सेकंड सेमेस्टर के एग्जाम होना है। ऐसे में शिक्षक के बिना कैसे विद्यार्थियों की तैयारी होगी। </p>
<p><strong>6 कॉलेजों में व्यापार प्रबंधन के शिक्षक ही नहीं</strong><br />हाड़ौती के 8 कॉलेजों में से मात्र दो कॉलेजों में ही बिजनेस एडमिनेस्ट्रेशन की एक-एक नियमित फैकल्टी है। इनमें जेडीबी कॉमर्स कोटा व राजकीय बारां महाविद्यालय शामिल है। इसके अलावा किसी भी कॉलेज में न तो नियमित फैकल्टी है और न ही विद्या संबल योजना में। ऐसे में विद्यार्थियों की क्लासें ही नहीं लग पाती। मजबूरन बच्चों को कोचिंग का सहारा लेना पड़ता है। समय पर कोर्स पूरे नहीं हो पाते। जबकि, कोटा यूनिवर्सिटी द्वारा सेमेस्टर सिस्टम लागू किया गया है। कॉलेज शिक्षा आयुक्तालय की लचर व्यवस्था के कारण विद्यार्थियों का कॉमर्स के प्रति रुझान घटता जा रहा है। </p>
<p><strong>विद्यार्थियों की पीड़ा- </strong><strong>सिलेबस अधूरे, पास होना ही चुनौती</strong><br />गवर्नमेंट कॉमर्स कॉलेज कोटा के स्टूडेंट्स सुरभी व आशुतोष जादौन ने बताया कि वर्तमान में कॉलेजों में न तो पढ़ाने को शिक्षक है और न ही शैक्षणिक माहौल। वहीं, छात्रों को रोजगार से जोड़ने की भी कोई कार्ययोजना भी नहीं है। हालात यह हैं, इंडस्ट्री में किस स्किल की डिमांड है यह बताने वाला भी कोई नहीं है। कॉलेजों के विद्यार्थियों का पास होना ही मुश्किल हो रहा है।</p>
<p><strong>65 प्रतिशत कोर्स रह गया था अधूरा</strong><br />छात्र अजय व सुरेंद्र ने बताया कि बड़ी संख्या में शिक्षकों के पद रिक्त हैं। गत वर्ष एमकॉम प्रिवियस के प्रथम सेमेस्टर का 65 प्रतिशत से ज्यादा सिलेबस अधूरा रह गया था। वर्तमान में भी बिजनेस एडमिनेस्ट्रेशन पढ़ाने को शिक्षक नहीं है। विद्यार्थी मानसिक तनाव से गुजर रहे हैं। </p>
<p><strong>70 किमी से अपडाउन फिर भी क्लास नहीं</strong><br />गवर्नमेंट कॉमर्स कॉलेज की छात्रा प्रियंका का कहना है कि वे प्रतिदिन रावतभाटा से 70 किमी का सफर कर कॉलेज आती हैं, इसके बावजूद व्यापार प्रबंधन की क्लास नहीं मिलती।  वहीं, रोजगार से जोड़ने के लिए प्लेसमेंट कैम्प भी नहीं लगते और न ही इंडस्ट्री विजिट करवाई जाती है।  </p>
<p><strong>क्या कहते हैं शिक्षाविद्</strong><br />कॉमर्स के प्रति रुझान कम होने का सबसे प्रमुख कारण रोजगार के घटते अवसर हैं। बीकॉम-एमकॉम के बाद नौकरी के क्या अवसर हैं, छात्रों को इसकी जानकारी नहीं है।  प्रतियोगी परीक्षाओं में भी वाणिज्य वर्ग के लिए कोई मौका नहीं  है। विद्यार्थी शिक्षक बनना चाहते हैं लेकिन उन्हें बीएड करने के लिए पात्र नहीं माना जाता। जबकि, अकाउंटेंट भर्ती परीक्षाओं में आर्ट्स-साइंस के स्टूडेंट्स भी शामिल हो जाते हैं, जिससे उनके हाथ से सीट निकल जाती है। उच्च शिक्षा हो या प्रतियोगी परीक्षा हर जगह निराशा ही मिल रही है। ऐसे में स्टूडेंट्स कॉमर्स लेने के बजाए आर्ट्स लेना पसंद कर रहे हैं। वहीं, कॉलेजों में साधन-संसाधनों व शिक्षकों का अभाव भी बड़ी वजह है।<br /><strong>- सीमा राठौर, प्राचार्य, राजकीय वाणिज्य महाविद्यालय कोटा</strong><br /><br />कॉमर्स के प्रति विद्यार्थियों का रुझान स्कूली शिक्षा से ही कम होता जा रहा है। क्योंकि, विद्यालयों में वाणिज्य से संबंधित विषय नहीं है।  10वीं पास करने के बाद छात्रों के सामने सभी विषय नए होते हैं। कोरर्पोरेट जगत में कॉमर्स की जरूरत बढ़ रही है, जिससे विद्यार्थियों को काउंसलिंग के जरिए अवगत कराने की जरूरत है। वहीं, कक्षा 6 से ही कॉमर्स पढ़ाई जानी चाहिए तभी छात्रों का रुझान बढ़ेगा। शिक्षकों की कमी दूर होना जरूरी है। <br /><strong>- डॉ. रघुराज सिंह परिहार, क्षेत्रीय सहायक निदेशक, कॉलेज शिक्षा </strong></p>
<p>रोजगार को लेकर छात्रों व अभिभावकों का साइंस के प्रति माइंससेट है, जिसे बदलने की जरूरत है। कॉमर्स रोजगार देने और दिलाने वाला विषय है। दिल्ली-मुंबई में कॉमर्स का क्रेज है। स्कूली व कॉलेज शिक्षा में क्वालीटी एजुकेशन का अभाव है। आज भी परम्परागत पाठ्यक्रम चल रहे हैं, जिन्हें इंडस्ट्री की आवश्यकता के अनुरूप मोडराइजेशन करने की जरूरत है।  कोटा में वाणिज्य शिक्षा के डेडीकेटेड गवर्नमेंट कॉलेज होने के बावजूद सीटें खाली रहना चिंताजनक है। <br /><strong>-सीए शशांक गर्ग, पूर्व चैयरमेन, सीए ब्रांच कोटा </strong></p>
<p>पाठ्यक्रम में स्किल डवलपमेंट प्रोग्राम शामिल किया जाना चाहिए। कॉमर्स इंडस्ट्री के एक्सपर्ट को बुलाकर गेस्ट लेक्चर करवाए जाना जरूरी है ताकि विद्यार्थियों को पता लगे कि किन किन क्षेत्रों में उनके लिए रोजगार है। वहीं, किताबी ज्ञान के अलावा इंडस्ट्री विजिट करवाकर प्रैक्टिकली समझ विकसित की जाए तो घटता रुझान फिर से बढ़ाया जा सकता है। सीए इंस्टीट्यूड को कॉलेजों व स्कूलों में सेमिनार कर विद्यार्थियों को जागरूक करना चाहिए। <br /><strong>- सीए बद्रीविशाल माहेश्वरी, पूर्व अध्यक्ष, सीए ब्रांच कोटा</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 11 Sep 2023 15:29:33 +0530</pubDate>
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                <title>व्यापार प्रबंधन पढ़े बिना पूरी हो रही वाणिज्य शिक्षा</title>
                                    <description><![CDATA[हाड़ौती के 32 कॉलेजों में से मात्र दो कॉलेजों में ही बिजनेस एडमिनेस्ट्रेशन की एक-एक नियमित फैकल्टी है। इनमें जेडीबी कॉमर्स व राजकीय बारां महाविद्यालय  शामिल है। इसके अलावा किसी भी कॉलेज में न तो नियमित फैकल्टी है और न ही विद्या संबल योजना में है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/commerce-education-being-completed-without-studying-business-management/article-43984"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-04/vyapar-prabandhan-padhe-bina-poori-ho-rahi-vanijya-shiksha..kota-news..27.4.2023.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। कोटा संभाग के सबसे बड़े गवर्नमेंट कॉमर्स कॉलेज में वाणिज्य शिक्षा का बुरा हाल है। यहां क्वालिटी एजुकेशन मिलना तो दूर विद्यार्थियों का एग्जाम में पास होना ही चुनौती बन गया। कॉलेज के बिजनेस एडमिनेस्ट्रेशन डिपार्टमेंट में 12 पद स्वीकृत हैं लेकिन 5 साल से एक भी शिक्षक कार्यरत नहीं है। लंबे समय से यहां बिजनेस एडमिनेस्ट्रेशन की क्लासें नहीं लग रही। जबकि, कोटा यूनिवर्सिटी द्वारा सेमेस्टर सिस्टम लागू किया गया है। द्वितीय सेमेस्टर की परीक्षा दो माह बाद जुलाई में होनी है। ऐसे में क्लासें नहीं लगने से विद्यार्थी मानसिक तनाव से गुजर रहे हैं। कॉलेज प्रशासन भी समस्या का लेकर गंभीर नहीं है। विद्यार्थी फर्स्ट सेमेस्टर की तरह सैकंड सेमेस्टर में भी सिलेबस अधूरा रहने को लेकर चिंतित हैं। </p>
<p><strong>संभाग में दो ही शिक्षक</strong><br />हाड़ौती के 32 कॉलेजों में से मात्र दो कॉलेजों में ही बिजनेस एडमिनेस्ट्रेशन की एक-एक नियमित फैकल्टी है। इनमें जेडीबी कॉमर्स व राजकीय बारां महाविद्यालय  शामिल है। इसके अलावा किसी भी कॉलेज में न तो नियमित फैकल्टी है और न ही विद्या संबल योजना में है। ऐसे में विद्यार्थियों की क्लासें ही नहीं लग पाती। मजबूरन बच्चों को कोचिंग का सहारा लेना पड़ता है। समय पर कोर्स पूरे नहीं हो पाते। एमकॉम प्रिवियस के पहले सेमेस्टर में करीब 35 प्रतिशत ही कोर्स पूरा हो पाया था। राजकीय कॉमर्स कॉलेज कोटा में बिजनेस एडमिनेस्ट्रेशन की आखिरी क्लास 11 मार्च को लगी थी। इसके बाद विद्या संबल योजना के तहत लगे सहायक आचार्यों को सरकार ने हटा दिया था। </p>
<p><strong>क्यों नहीं हो रही नियमित व्याख्याताओं की नियुक्ति </strong><br />गत वर्ष आरपीएससी ने व्यवसायिक प्रशासन विषय में 127 पदों पर भर्ती निकाली थी। जिनके साक्षात्कार आयोग द्वारा ले लिए गए थे। लेकिन, आयोग ने नियमों के अनुरूप सिर्फ व्यवसायिक प्रशासन में एमकॉम योग्यताधारी अभ्यर्थियों को ही योग्य माना और एमबीए  स्नातकोत्तर करने वाले अभ्यर्थियों को साक्षात्कार के लिए अयोग्य घोषित कर दिया। जिससे नाराज एमबीए उत्तीर्ण अभ्यर्थी कोर्ट की शरण में चले गए और हाई कोर्ट से स्टे ले लिया। वर्तमान में मामला न्यालय में विचाराधीन है। </p>
<p><strong>इन विषयों की नहीं लग रही कक्षाएं</strong><br />विद्यार्थियों ने बताया कि एमकॉम फाइनल व प्रिवियस में कई ऐसे विषय हैं, जिनकी नियमित कक्षाएं नहीं लग पा रही। वहीं, कुछ विषयों की तो एक भी कक्षाएं नहीं लगी। एमकॉम फाइनल में मार्केटिंग मैनेजमेंट, इंटरनेशनल मार्केटिंग, रिसर्च मैथोलॉजी,  एचआरडी और यूनियन मैनेजमेंट रिलेशन विषय शामिल हैं। वहीं, प्रिवियस के द्वितीय सेमेस्टर में आॅर्गेनाइजेशन बिहेवियर, स्टेÑजिक मैनेजमेंट, एचआरडी, रिसर्च मैथोलॉजी सहित अन्य विषयों की कक्षाएं प्रथम सेमेस्टर के बाद से अभी तक नहीं लगी।  </p>
<p><strong>काम जयपुर में और तनख्वाह कोटा से </strong><br />राजकीय कॉमर्स कॉलेज में सरकारी रिकॉर्ड में बिजनेस एडमिनेस्ट्रेशन डिपार्टमेंट में एक शिक्षक प्रतिनियुक्ति पर लगे हैं। लेकिन, वर्तमान में वे जयपुर आयुक्तालय में कार्यरत हैं और उनकी तनख्वाह कॉलेज से ही मिलती है। वहीं, गत वर्ष एक शिक्षिका का बारां जिले में ट्रांसफर हो गया। ऐसे में यहां 12 शिक्षकों के पद रिक्त पड़े हैं। विद्यार्थियों की क्लासें नहीं लग पा रही। हालात यह हो रहे हैं कि कॉलेज में इस विषय को पढ़ाने वाला कोई शिक्षक नहीं है। जबकि, विद्यार्थियों ने इसकी शिकायत कई बार प्राचार्य से कर चुके हैं। इसके बावजूद कोई वैकल्पिक व्यवस्था नहीं हो सकी। </p>
<p><strong>65 प्रतिशत कोर्स रह गया था अधूरा</strong><br />स्टूडेंट्स सुरभी शर्मा व आशुतोष जादौन ने बताया कि एमकॉम प्रिवियस में फस्ट सेमेस्टर के एग्जाम 31 मार्च से शुरू हुए थे, जो 8 अपे्रल तक जारी रहे। इन दिनों व्यवसायिक प्रशासन विषय में करीब 35 प्रतिशत ही कोर्स पूरा हो पाया था। जबकि, 65 प्रतिशत से अधिक सिलेबस अधूरा रह गया था।आधी-अधूरी तैयारियों के बीच एग्जाम दिए हैं। ऐसे में रिजल्ट बिगड़ने की चिंता सता रही है। </p>
<p><strong>70 किमी से अपडाउन फिर भी क्लास नहीं</strong><br />छात्रा खुशबू कुमारी का कहना है कि वे प्रतिदिन रावतभाटा से 70 किमी का सफर कर कॉलेज आती हैं, इसके बावजूद बिजनेस एडमिनेस्ट्रेशन की क्लास नहीं मिलती।  जबकि, यह विषय कॉमर्स संकाय में सबसे महत्वपूर्ण सब्जेक्ट है। इसमें इंडस्ट्रीज में समय के साथ क्या अपडेट हो रहा है, बिजनेस मैकेनिज्म में आए बदलाव की जानकारी दी जाती है। लेकिन, शिक्षकों के अभाव में इंडस्ट्रीज में नया क्या हो रहा है, बिजनेस की कला सहित कई बारीकियों से अनजान रहते हैं। ऐश्वर्य महावर ने बताया कि प्रतिदिन 200 से 250 रुपए खर्च कर पढ़ने को कॉलेज आते हैं लेकिन पढ़ाई नहीं होने से समय और पैसा दोनों ही बर्बाद हो रहा है। </p>
<p><strong>दो महीने बाद पेपर, कैसे करें तैयारी</strong><br />अजय सुमन ने बताया कि फर्स्ट सेमेस्टर की परीक्षाएं समाप्त होने के बाद 11 अप्रेल से सैकंड सेमेस्टर की क्लासें लगना शुरू हो गई। लेकिन, व्यवसायिक प्रशासन पढ़ाने वाले शिक्षक नहीं होने से पीरियड खाली रहता है। अधिकतर विद्यार्थियों को तो सिलेबस का भी पता नहीं है।  कैसे इंटरनल एग्जाम की तैयारी होगी और कैसे मुख्य सेमेस्टर की पढ़ाई कर पाएंगे। </p>
<p>यह दुखद है कि संभाग के सबसे बड़े वाणिज्य महाविद्यालय में व्यवसायिक प्रशासन का एक भी शिक्षक नहीं है। जबकि, इस विभाग में 12 पद स्वीकृत हैं। इसके बावजूद न तो नियमित शिक्षक लगाए गए और न ही गेस्ट फैकल्टी।   हाड़ौती में इस विषय के 2 ही शिक्षक कार्यरत हैं। विद्यार्थियों को इंडस्ट्रीज में समय के साथ क्या बदलाव हुए, इसकी व्यवहारिक जानकारी नहीं मिल पा रही। <br /><strong>- अनुज विलियम, सहायक आचार्य विद्या संबल, व्यवसायिक प्रशासन</strong></p>
<p>यह बात सही है कि कॉलेज में व्यवसायिक प्रशासन विभाग में कोई फैकल्टी नहीं है। शिक्षकों की नियुक्ति को लेकर पूर्व में तीन बार उच्च शिक्षा आयुक्तालय को पत्र लिख चुके हैं।  लेकिन अभी तक कोई जवाब नहीं मिला। वहीं, आयुक्तालय के ज्वाइंट डायरेक्टर एचआरडी ताराचंद बैरवा को भी पत्र भेज मामले से अवगत करा चुके हैं। हमारे लिए विद्यार्थियों का हित सर्वोपरि है। उनकी पढ़ाई प्रभावित न हो, इसके लिए वैकल्पिक व्यवस्था कर रहे हैं। वहीं, महाविद्यालय की विकास समिति से गेस्ट फैकल्टी लगाने के लिए भी उच्चाधिकारियों से मार्गदर्शन मांगने का प्रयास किया जाएगा।  <br /><strong>- सीमा राठौर, प्राचार्य, कॉमर्स कॉलेज</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 27 Apr 2023 14:52:38 +0530</pubDate>
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                <title>उद्योग मंत्री ने की वालमार्ट-फ्लिपकार्ट के एसोसिएट डायरेक्टर  के साथ मीटिंग</title>
                                    <description><![CDATA[लघु स्तर के हस्तकला आर्टिजन को अपने उत्पाद बेचने हेतु उपयुक्त बाजार उपलब्ध हो इसके लिए प्रदेश की सरकार प्रतिबद्ध है। इसी दिशा में 'मुख्यमंत्री लघु उद्योग प्रोत्साहन योजना' की शुरूवात की गई थी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/industries-and-commerce-minister-shakuntala-rawat-held-a-meeting-with-wal-mart-flipkart-associate-director-hassan-yakub-at-udyog-bhawan/article-4536"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-02/9.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर।  उद्योग एवं वाणिज्य मंत्री  शकुन्तला रावत ने बुधवार को उद्योग भवन में वालमार्ट-फ्लिपकार्ट के एसोसिएट डायरेक्टर हसन याकूब के साथ बैठक की।बैठक में राजस्थान के हस्तकला आर्टिजन और बुनकरों से जुड़े विषय पर चर्चा की गई। मंत्री शकुंतला रावत ने इस दौरान कहा कि राजस्थान के हैंडीक्रॉफ्ट की वैश्विक स्तर पर पहचान हैं। उद्योग मंत्री ने कहा कि प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों की हस्त शिल्प कला अपने आप में अनेक विशिष्टतायें लिए हुए हैं। राज्य के हस्तशिल्पियों ने अपने उत्पादों की गुणवत्ता के दम पर विश्व पटल पर पहचान बनाई है। लघु स्तर के हस्तकला आर्टिजन को अपने उत्पाद बेचने हेतु उपयुक्त बाजार उपलब्ध हो इसके लिए प्रदेश की सरकार प्रतिबद्ध है। इसी दिशा में 'मुख्यमंत्री लघु उद्योग प्रोत्साहन योजना' की शुरूवात की गई थी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>बिजनेस</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 16 Feb 2022 17:57:57 +0530</pubDate>
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