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                <title>150 - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <description>150 RSS Feed</description>
                
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                <title>कोविड तीसरा टीका: निजी कोविड टीकाकरण केंद्र पर सेवा शुल्क  अधिकतम 150 रुपए</title>
                                    <description><![CDATA[पात्र व्यक्ति को टीका लेने के लिए कोविन ऐप पर दर्ज कराना होगा।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/covid-third-vaccine--service-charge-at-private-covid-vaccination-center-maximum-rs-150/article-7690"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-04/92.jpg" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। सरकार ने 18 वर्ष से अधिक की आयु की आबादी को कोविड का तीसरा टीका प्रीकाशंस खुराक लगाने वाले निजी टीकाकरण केंद्रों के लिए विस्तृत दिशा निर्देश जारी करते हुए कहा है कि टीके का अधिकतम सेवा शुल्क 150 रुपए प्रति होगा। केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय में सचिव राजेश भूषण में शनिवार को यहां कहा कि सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को 18 से 59 वर्ष की आयु की आबादी को कोविड का तीसरा टीका लगाने की तैयारियां करनी चाहिए। तीसरा टीका निजी कोविड टीकाकरण केंद्रों पर लगाया जाएगा और यह केंद्र टीके की लागत और सेवा शुल्क के रूप में 150 रुपए तक की राशि लोगों से ले सकते हैं।<br /><br />उन्होंने कहा कि प्रत्येक टीके का पंजीकरण कोविन ऐप होगा। पात्र व्यक्ति को टीका लेने के लिए कोविन ऐप पर दर्ज कराना होगा। वह सीधे टीकाकरण केंद्र पर जाकर भी टीका ले सकता है। तीसरा टीका दूसरे टीके के नौ महीने के अंतराल पर दिया जाएगा। तीसरी खुराक उसी टीके की होगी जिसका उपयोग पहली और दूसरी खुराक में  किया गया है।<br /><br /><br /></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>स्वास्थ्य</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 09 Apr 2022 16:59:08 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Administrator]]></dc:creator>
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                <title>फिर उठा खेल परिषद कर्मचारियों को पेंशन का मुद्दा, चार माह से नहीं मिल रहा है 150 कर्मचारियों को पेंशन लाभ</title>
                                    <description><![CDATA[राज्य सरकार की ओर से 2004 के बाद के कर्मचारियों को पेंशन लाभ की घोषणा के साथ ही राजस्थान खेल परिषद के कर्मचारियों को पेंशन का मुद्दा फिर उठ गया है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/then-the-issue-of-pension-to-sports-council-employees-arose--150-employees-are-not-getting-pension-benefits-for-four-months--finance-department-raised-hands--council-does-not-have-budget/article-6308"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-03/sms_new.jpg" alt=""></a><br /><p> जयपुर। राज्य सरकार की ओर से 2004 के बाद के कर्मचारियों को पेंशन लाभ की घोषणा के साथ ही राजस्थान खेल परिषद के कर्मचारियों को पेंशन का मुद्दा फिर उठ गया है। परिषद के 2004 से पूर्व के कर्मचारियों को भी चार माह से पेंशन नहीं मिल रही है। राज्य के वित्त और खेल विभाग ने भी अब परिषद को राय दी है कि कर्मचारियों को पेंशन और अन्य लाभ के भुगतान के लिए अपनी निजी आय में वृद्धि करें। वित्त विभाग के संयुक्त शासन सचिव वृद्धिचंद बुनकर ने पिछले दिनों खेल विभाग को लिखे पत्र में स्पष्ट किया है कि कोविड-19 के कारण उत्पन्न परिस्थितियां अब सामान्य होने लगी हैं और खेल गतिविधियां नियमित रूप से आरंभ हो गई हैं। इसलिए विभाग निजी आय में वृद्धि कर पेंशन के मासिक भुगतान और भावी पेंशन दायित्वों के भुगतान की व्यवस्था सुनिश्चित करे। वित्त विभाग का यह पत्र खेल विभाग ने परिषद को भेज दिया है। <br /><br /><strong>सरकार ने दी 6.70 करोड़ की राशि</strong><br />साल की शुरुआत में राज्य सरकार की ओर से कर्मचारियों को पेंशन भुगतान के लिए खेल परिषद को 6.70 करोड़ रुपए जारी किए गए लेकिन उनसे दिसम्बर माह तक की पेंशन और सेवानिवृत हुए कर्मचारियों के अन्य पेंशन लाभों का भुगतान ही संभव हो सका। <br /><br /><strong>डेढ़ सौ कर्मचारी ले रहे हैं पेंशन</strong><br />राजस्थान खेल परिषद में कर्मचारियों को 1991 से पेंशन लाभ दिया जा रहा है। पुरानी पेंशन योजना के तहत करीब 150 कर्मचारी या उनका परिवार वर्तमान में पेंशन लाभ प्राप्त कर रहा है। पुरानी पेंशन योजना के तहत नियुक्त लगभग सभी कर्मचारी 2024 तक रिटायर हो जाएंगे। <br /><br />राजस्थान खेल परिषद के निजी आय के स्रोत अत्यंत सीमित हैं और दो साल कोरोना महामारी के कारण खेल गतिविधियां पूरी तरह बन्द रहीं। परिषद बिना सरकार की मदद के कर्मचारियों को पेंशन और अन्य परिलाभ का भुगतान नहीं करने में सक्षम नहीं है। परिषद की ओर से पहले भी सरकार को यह बताया गया है और अब फिर पत्र लिखकर और मदद के लिए मांग करेंगे। <br />-<strong>राजूलाल, सचिव, खेल परिषद</strong><br /><br />ंकर्मचारियों को पिछले चार माह से पेंशन नहीं मिल रही है। हमारे कुछ साथी बीमार हैं और कई आर्थिक बदहाली में रह रहे हैं। पेंशन ही रिटायर कर्मचारी का एकमात्र सहारा है। हमने सरकार के हर स्तर पर अपनी आवाज पहुंचाई है। अब उम्मीद मुख्यमंत्री जी से है, जिन्होंने कर्मचारियों के हित में कई फैसले लिए हैं।<br />-<strong>गजेन्द्र सिंह, अध्यक्ष, कर्मचारी संघ</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>खेल</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 17 Mar 2022 14:01:48 +0530</pubDate>
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                <title>देशभर में ‘प्रताप धन मुर्गी’ की डिमांड लाखों में, सप्लाई हजारों में</title>
                                    <description><![CDATA[<p>  उदयपुर। महाराणा प्रताप कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (एमपीयूएटी) के वैज्ञानिकों द्वारा तैयार की गई प्रतापधन मुर्गी की देशभर में इतनी डिमांड है कि एमपीयूएटी द्वारा इसकी सप्लाई में ही पसीने छूट रहे हैं। जानकारी के अनुसार कश्मीर, मध्यप्रदेश और गुजरात से ही लाखों मुर्गियों की डिमांड है, लेकिन एमपीयूएटी हजारों में ही सप्लाई कर पा रहा है। चिकन और अंडा उत्पादन में अब तक की सबसे अव्वल रही इस नस्ल को जो व्यक्ति एक बार लेता है, उसे अन्य कोई प्रजाति रास नहीं आती है। कारण यह है कि इस नस्ल की मुर्गियां एक साल में 150 से अधिक<br /><strong><br />1.25</strong></p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/udaipur/demand-for-pratap-dhan-chicken-in-lakhs--supply-in-thousands-across-the-country---this-breed-prepared-by-the-scientists-of-mewar-lays-more-than-150-eggs-annually/article-4566"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-02/7_new.jpg" alt=""></a><br /><p> उदयपुर। महाराणा प्रताप कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (एमपीयूएटी) के वैज्ञानिकों द्वारा तैयार की गई प्रतापधन मुर्गी की देशभर में इतनी डिमांड है कि एमपीयूएटी द्वारा इसकी सप्लाई में ही पसीने छूट रहे हैं। जानकारी के अनुसार कश्मीर, मध्यप्रदेश और गुजरात से ही लाखों मुर्गियों की डिमांड है, लेकिन एमपीयूएटी हजारों में ही सप्लाई कर पा रहा है। चिकन और अंडा उत्पादन में अब तक की सबसे अव्वल रही इस नस्ल को जो व्यक्ति एक बार लेता है, उसे अन्य कोई प्रजाति रास नहीं आती है। कारण यह है कि इस नस्ल की मुर्गियां एक साल में 150 से अधिक अंडे दे देती हैं तो इस नस्ले के मुर्गे पांच माह में ही तीन से साढ़े तीन किलो वजनी भी हो जाते हैं। एमपीयूएटी के वैज्ञानिकों ने इस नस्ल को करीब चार साल पहले तैयार किया था। प्रतापधन को लेकर देश के कई राज्यों से ऑर्डर प्राप्त हो रहे हैं, तो कई फर्म एडवांस राशि देकर भी बुकिंग करवाने को तैयार है, लेकिन इस प्रजाति की सप्लाई तैयार करने में लगने वाला अत्यधिक समय इसकी डिमांड में रोड़ा बना हुआ है। बता दें, यह ऐसी प्रजाति है जिसे किसी तरह की बीमारी भी नहीं लगती और इसका सेवन करने वालों को भी कोई परेशानी नहीं होती है। <br /><strong><br />1.25 से 1.50 लाख पहुंची सालाना डिमांड</strong><br />एमपीयूएटी से मिली जानकारी के अनुसार वर्तमान में प्रतापधन मुर्गी की डिमांड बीते साल की तुलना में बढ़ी है। बताया गया कि बीते साल करीब 1.25 लाख चूजों की सालाना डिमांड थी, जो इस वर्ष बढ़कर 1.50 तक जा पहुंची है। इसकी तुलना में पूर्ति करीब 85 हजार चूजों की ही हो पा रही है। बताया गया कि देशभर में सर्वाधिक मांग कश्मीर, गुजरात व मध्यप्रदेश से आ रही है। कुलपति प्रो. एनएस राठौड़ ने बताया कि रोड आइलैंड रेड (आरआईआर) जो सालाना दो सौ अंडे देती है, कलर ब्राइलर, जो पांच माह में ढाई किलो हो जाती है और मेवाड़ी मुर्गी जिसमें बीमारी बेहद कम लगती है। इन तीनों नस्लों को मिलाकर उन्नत मूर्गी प्रताप धन तैयार की गई। नस्ल को नेशनल ब्यूरो आॅफ एनिमल जेनेटिक रिसोर्स करनाल से रजिस्टर्ड करवाया गया है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>उदयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 17 Feb 2022 14:58:46 +0530</pubDate>
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