<?xml version="1.0" encoding="utf-8"?>        <rss version="2.0"
            xmlns:content="http://purl.org/rss/1.0/modules/content/"
            xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/"
            xmlns:atom="http://www.w3.org/2005/Atom">
            <channel>
                <atom:link href="https://dainiknavajyoti.com/annually/tag-12290" rel="self" type="application/rss+xml" />
                <generator>Dainik Navajyoti Rising Rajasthan RSS Feed Generator</generator>
                <title>annually - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
                <link>https://dainiknavajyoti.com/tag/12290/rss</link>
                <description>annually RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>  सालाना 105 करोड़ से ज्यादा की किताबें बिक रही कोटा में</title>
                                    <description><![CDATA[कोटा में हर साल 105 करोड़ से ज्यादा की किताबें बिकती है,जो प्रदेश में सबसे अधिक है। इनमें 70 करोड़ की जेईई और नीट की किताबें बिकती है और 35 से 40 करोड़ की सीबीएसई  और आरबीएसई की किताबें बिकती है। कुल मिलाकर यह आंकड़ा 105 करोड़ से अधिक तक पहुंच जाता है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/books-worth-more-than-105-crores-are-being-sold-in-the-kota-annually/article-12857"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-06/kota-mei-105-crore-se-zyada-bik-rahi-kitabei..kota.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। राजस्थान के सरकारी व प्राइवेट स्कूलों में ग्रीष्मकालीन अवकाश जल्द खत्म होने वाला है। इसी के साथ नए शैक्षणिक सत्र की शुरूआत होगी। राजस्थान के प्राइवेट स्कूल 24 जून से शुरू होंगे, जबकि सरकारी स्कूल 1 जुलाई को खोले जाएंगे। प्रदेश के सरकारी व प्राइवेट स्कूलों में जल्द ही बच्चों की चहल-पहल शुरू हो जाएगी। हालांकि 24 जून को निजी स्कूलों में शिक्षकों के साथ-साथ बच्चें भी आ सकेंगे। सरकारी स्कूलों में सिर्फ शिक्षकों की आवाजाही होगी। विद्यालयों से लेकर शिक्षकों, बच्चों और बुक विक्रेताओं ने तैयारियां कर ली है। सरकारी स्कूलों में नए सत्र की किताबें बच्चों को पहले ही उपलब्ध करवा दी गई है। कोटा में 35 से 40 प्रतिशत सीबीएसई  और आरबीएसई की किताबों की बिक्री होती है,जबकि 60 से 65 प्रतिशत जेईई और नीट की किताबों का कारोबार होता है। इस साल कागज की कीमत महंगी होने से किताबें भी महंगी हो गई है। <br /><br /><strong>किताबों से 105 करोड़ से ज्यादा का कारोबार</strong><br />बुक सेलरों के अनुमान के मुताबिक कोटा में हर साल 105 करोड़ से ज्यादा की किताबें बिकती है,जो प्रदेश में सबसे अधिक है। इनमें 70 करोड़ की जेईई और नीट की किताबें बिकती है और 35 से 40 करोड़ की सीबीएसई  और आरबीएसई की किताबें बिकती है। कुल मिलाकर यह आंकड़ा 105 करोड़ से अधिक तक पहुंच जाता है। कोटा में 1.30 लाख से ज्यादा स्टूडेंट्स है। कोटा आने वाला हर स्टूडेंट औसतन सालाना 10 हजार रुपए की किताबें खरीदता है। इनकी संख्या 25 से 30 तक होती है।<br /><br /><strong>400 के करीब बुक सेलर</strong><br />कोटा में करीब 400 होलसेल व रिटेलर बुक सेलर है। 8 से 10 आॅनलाइन बुक सेलर है व 10 से 15 जनरल बुक विक्रेता है। एक स्टूडेंट एनसीईआरटी की 14 के अलावा सब्जेक्ट की 4 साइड बुक, करीब 12-12 बुक्स जेईई अथवा मेडिकल की बुक खरीदता है। होलसेल कारोबारियों के मुताबिक सीजन में कोटा में ढाई से तीन हजार बुक आॅनलाइन बिक जाती है।<br /><br /><strong>पुरानी किताबों का बड़ा कारोबार</strong><br />कोटा में पुरानी किताबों का भी बड़ा कारोबार है। यहां करीब 400 बुक सेलर यह कारोबार करते हंै। कोचिंग के बाद स्टूडेंट्स इन बुक सेलर को अपनी किताबें बेच जाते हैं। कोटा में आने वाले नए स्टूडेंट्स जो महंगी नई किताबें खरीदने में असमर्थ होते हंै, वह स्टूडेंट्स इन पुरानी किताबों को 35 से 40 फीसदी दर पर इन किताबों को खरीद लेते है।<br /><br /><strong>यहां के बुक राइटर्स देशभर में फेमस</strong><br />मेडिकल और इंजीनियरिंग परीक्षा को लेकर कोटा के 2 दर्जन से ज्यादा बुक राइटर्स की बुक्स पब्लिश होती है। इन बुक्स की देशभर में मांग रहती है। हर बुक सब्जेक्ट वाइज पब्लिश होती है। इन बुक्स की पहचान कोटा के सर के नाम से होती है और अनेक बुक्स कोचिंग के संस्थान के नाम से भी प्रकाशित होती है। इसी नाम की वजह से इनकी बुक्स देशभर में लाखों की तादात में बिकती है। <br /><br />स्कूल व यूनिवर्सिटीज से ज्यादा उनके पास कंपीटिशन की बुक्स बिकती है। यह किताबें टेक्स फ्री है। हालांकि कागज मंहगा होने से किताबें मंहगी जरूर हैं। स्टूडेंटस का ज्यादातर ध्यान कंपीटिशन की और ही है। अनेक कोचिंग सेंटर संचालक ज्यादातर अपने पास से ही कॉपी-किताबें देते हैं। लेकिन इसकी वजह से इनकी बिक्री पर कोई प्रभाव नहीं पड़ा। <br /><strong>- विजय कुमार, बुक विके्रता</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>शिक्षा जगत</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/books-worth-more-than-105-crores-are-being-sold-in-the-kota-annually/article-12857</link>
                <guid>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/books-worth-more-than-105-crores-are-being-sold-in-the-kota-annually/article-12857</guid>
                <pubDate>Thu, 23 Jun 2022 14:02:42 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://dainiknavajyoti.com/media/2022-06/kota-mei-105-crore-se-zyada-bik-rahi-kitabei..kota.jpg"                         length="62337"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[kota]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>घर से निकल रहे कचरे पर हो रहा सालाना 220 करोड़ से अधिक खर्च</title>
                                    <description><![CDATA[कोटा शहर की करीब 15 लाख से अधिक की आबादी वाले घरों से रोजाना निकलने वाला कचरा दिखने में तो थोड़ा लगता है। लेकिन उसका आंकलन किया गया तो पता चला कि शहर से रोजाना करीब 400 टन से अधिक कचरा निकल रहा है जो ट्रेचिंग ग्राउंड पहुंच रहा है। उस कचरे को साफ करने पर हर साल 220 करोड़ रुपए से अधिक का खर्चा हो रहा है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/more-than-220-crores-is-being-spent-annually-on-the-waste-coming-out-of-the-house/article-12434"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-06/ghar-se-nikal-rahe-kachre-par-ho-raha-salana.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। कोटा शहर की करीब 15 लाख से अधिक की आबादी वाले घरों से रोजाना निकलने वाला कचरा दिखने में तो थोड़ा लगता है। लेकिन उसका आंकलन किया गया तो पता चला कि शहर से रोजाना करीब 400 टन से अधिक कचरा निकल रहा है जो ट्रेचिंग ग्राउंड पहुंच रहा है। उस कचरे को साफ करने पर हर साल 220 करोड़ रुपए से अधिक का खर्चा हो रहा है। उसके बाद भी अभी तक उस कचरे का निस्तारण नहीं हो सका है। कोटा में पहले जहां एक ही नगर निगम था। उसे कोटा उत्तर व कोटा दक्षिण में बांट दिया है। वार्डों की संख्या भी 65 से बढ़ाकर 150 कर दी गई है। नगर निगम द्वारा हर साल शहर से निकलने वाले कचरे को साफ करने पर होने वाले बजट को बढ़ाया जा रहा है। करीब तीन हजार से अधिक सफाई कर्मचारी रोजाना शहर की सड़कों और गली मौहल्लों में सुबह-शाम झाडू लगाते हुए देखे जा सकते हैं। हर वार्ड में घरों से कचरा एकत्र करने के लिए घर-घर कचरा संग्रहण में हर वार्ड में दो-दो टिपर लगाए हुए हैं। उसके बाद भी शहर उतना साफ नजर नहीं आ रहा है। जितना होना चाहिए। कोटा में रोजाना करीब 400 टन कचरा ट्रेचिंग ग्राउंड जा रहा है। उसके अलावा भी काफी कचरा ऐसा है जो सड़कों पर पड़ा हुआ है। <br /><br />कोटा शहर को सफाई के मामले में मध्य प्रदेश के इंदौर की तर्ज पर बनाने की बातें तो खूब की जाती हैं। लेकिन उसे अभी तक भी अमली जामा नहीं पहनाया गया है। नगर निगम की जेसीबी व डम्परों के अलावा कचरा परिवहन का काम ठेके पर दिया हुआ है। सफाई कर्मचारियों के अलावा रोड स्वीपर मशीनों से भी मुख्य मार्गों की सफाई करवाई जा रही है।  कचरा पाइंट कम किए जा रहे हैं। कचरे के हाइजनिक तरीके से परिवहन के लिए आधुनिक कचरा ट्रांसफर स्टेशन बनाए जा रहे हैं। इतना सब कुछ होने के बाद भी शहर से कचरे का निस्तारण नहीं हो पाया है।  कोटा में हर साल सफाई पर होने वाले खर्च से अंदाजा लगाया जा सकता है कि शहर से निकलने वाला कचरा कितना महंगा पड़ रहा है। हर साल अरबों रुपए कचरे में जा रहे हैं। <br /><br /><strong>उत्तर-दक्षिण में अलग-अलग बजट</strong><br />नगर निगम कोटा उत्तर व कोटा दक्षिण में सफाई के लिए अलग-अलग बजट निर्धारित है। हर साल बजट बढ़ाया भी जा रहा है। नगर निगम कोटा उत्तर का वित्तीय वर्ष 2022-23 के लिए सफाई पर खर्च होने वाला प्रस्तावित बजट 114.82 यानि 1 अरब 14 करोड़ 82 लाख रुपए है। उसी तरह से कोटा दक्षिण में वित्तीय वर्ष 2022-23 में सफाई पर खर्च होने वाला प्रस्तावित बजट 105.37 करोड़ यानि 1 अरब 5 करोड़ 37 लाख रुपए है। यह बजट कोटा उत्तर के 70 व कोटा दक्षिण के 80 वार्डों में खर्च किया जा रहा है। <br /><br /><strong>गत वर्ष हुआ 154 करोड़ रुपए से अधिक खर्च</strong><br />नगर निगम कोटा उत्तर व कोटा दक्षिण द्वारा गत वित्तीय वर्ष  2021-22  के लिए जो बजट प्रस्तावित किया गया है।  उसमें से दोनों निगमों में सफाई पर करीब 154 करोड़ रुपए से अधिक खर्च किए गए थे। जानकारी के अनुसार कोटा उत्तर में गत वर्ष 79 करोड़ 64 लाख रुपए और कोटा दक्षिण में 75 करोड़ 23 लाख रुपए खर्च किए गए थे। <br /><br /><strong>यह है सफाई व्यवस्था</strong><br />शहर में हर घर से जो कचरा निकल रहा है। उस कचरे को नगर निगम द्वारा घर-घर कचरा संग्रहण के माध्यम से टिपरों के जरिये एकत्र किया जा रहा है। उन टिपरों में एकत्र होने वाले कचरो को शहर में निर्धारित कचरा ट्रांसफर स्टेशनों पर डाला जा रहा है। टिपरों के अलावा जगह-जगह पर निर्धारित कचरा पाइंटों पर भी जो कचरा डल रहा है। उसे निगम व संवेदक की ट्रॉलियों के माध्यम से एकत्र कर कचरा ट्रांसफर स्टेशनों पर पहुचाजा जा रहा है। वहां से कचरा डम्परों के माध्यम से नांता स्थित ट्रेचिंग ग्राउंड पर पहुंचाया जा रहा है। नगर निगम कोटा दक्षिण में किशोरपुरा में आधुनिक कचरा ट्रांसफर स्टेशन बनाया गया है। जहां से कचरे को कंटेनरों के जरिय ट्रेचिंग ग्राउंड पहुंचाया जा रहा है। <br /><br /><strong>15.90 करोड़ का टेंडर</strong><br />निगम द्वारा नांता स्थित ट्रेचिंग ग्राउंड पर जमा पुराने कचरे के निस्तारण के लिए 20 करोड़ रुपए का बजट स्वीकृत कराया गया था। जिसमें से गत दिनों 15.90 करोड़ रुपए का टेंडर जारी किया है। जिस फर्म ने यह टेंडर लिया है। वह उस कचरे की छटनी कर उसमें से मिट्टी-गिट्टी, प्लास्टिक-पॉलिथन व कपड़े और अन्य सामान मशीनों से अलग-अलग कर उस कचरे के पहाड़ को वहां से हटाया जाएगा। हालांकि इस काम में करीब डेढ़ं साल का समय लगेगा। <br /><br /><strong>करवानी पड़ रही छंटनी</strong><br />वैसे तो घरों से निकलने वाले कचरे को गीला और सूखा अलग-अलग एकत्र करने की व्यवस्था है। इसके लिए हर घर में दो-दो डस्टबीन होने चाहिए। लेकिन ऐसा नहीं हो रहा है। उसके बाद टिपरों में भी गीला व सूखा कचरा अलग-अलग लेने की व्यवस्था है। लेकिन वहां भी ऐसा नहीं हो रहा है। इस कारण से कचरा ट्रांसफर स्टेशनों पर कचरे की छटनी और ट्रेचिंग ग्राइंड में कचरे की छटनी का अलग से टेंडर करना पड़ रहा है। इतना सब कुछ होने के बाद भी नांता स्थित ट्रेचिंग ग्राउंड में पुराने कचरे के पहाड़ लगे हुए हैं। <br /><br /><strong>इनका कहना है</strong><br />कचरा घरों से ही अलग-अलग निकले इसके लिए लोगों में जागरूकता होनी चाहिए। एक की जगह दो डस्टबीन रखने होंगे। साथ ही लोगों को सड़क पर कचरा नहीं डालने के लिए जागरूक किया जाएगा। शहर को साफ रखना ही प्राथमिकता है। उसके लिए मशीनरी व मेनुअल हर तरह के प्रयास किए जा रहे हैं। <br /><strong>मंजू मेहरा, महापौर, नगर निगम कोटा उत्तर</strong><br /><br /> लोगों में जागरूकता की कमी है। जिससे कचरा सड़कों पर ही डाला जा रहा है। शहर में सड़क किनारे जमे पुराने कचरे को साफ करने पर आधा शहर वैसे ही साफ हो जाएगा। कचरे को गीला-सूखा अलग-अलग करने के प्रयास किए जाएंगे।  जिससे कचरे की छटनी पर अलग से खर्चा नहीं करना पड़ेगा। शहर की सफाई पर करोड़ों रुपए खर्च किए जा रहे हैं। <br /><strong>-राजीव अग्रवाल, महापौर, नगर निगम कोटा दक्षिण</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/more-than-220-crores-is-being-spent-annually-on-the-waste-coming-out-of-the-house/article-12434</link>
                <guid>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/more-than-220-crores-is-being-spent-annually-on-the-waste-coming-out-of-the-house/article-12434</guid>
                <pubDate>Fri, 17 Jun 2022 15:22:14 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://dainiknavajyoti.com/media/2022-06/ghar-se-nikal-rahe-kachre-par-ho-raha-salana.jpg"                         length="82561"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[kota]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>स्वास्थ्य दिवस पर आइए जानें कैसी है हेल्थ सिस्टम की सेहत</title>
                                    <description><![CDATA[अभी कुल 52 हजार डॉक्टर, सात सरकारी मेडिकल कॉलेजों में ही सालाना 1.76 करोड़ मरीज ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/jaipur--news--on-health-day--let-s-know-how-is-the-health-of-the-health-system-lack-of-20-thousand-doctors-in-the-state--16-thousand-government-doctors-are-treating-9-crores/article-7512"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-04/health.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:left;"> जयपुर। राजस्थान की वर्तमान आबादी तकरीबन 7.25 करोड़ है। इनके स्वास्थ्य को ठीक रखने का जिम्मा प्रदेश के सरकारी और प्राइवेट मिलाकर करीब 52 हजार डॉक्टरों (राजस्थान मेडिकल काउंसिल में रजिस्टर्ड) पर है। आदर्श स्वास्थ्य सेवाओं के लिए अभी भी 20 हजार और डॉक्टरों की जरूरत है, क्योंकि विश्व स्वास्थ्य संगठन मानता है कि बेहतर हेल्थ मैनजमेंट को प्रति एक हजार की आबादी पर एक डॉक्टर होना चाहिए। राजस्थान में 1538 की आबादी पर एक डॉक्टर है। प्रदेश का बड़ा तबका सरकारी अस्पतालों पर ही निर्भर है। हालांकि प्रदेश में सरकारी स्वास्थ्य और मेडिकल शिक्षा महकमे में तीन हजार से ज्यादा डॉक्टरों के पद खाली पड़े हैं। यदि पूरे पद भी भर दिए जाएं तब भी बड़ी संख्या में और डॉक्टर चाहिए, क्योंकि सरकार के सात मेडिकल कॉलेज और 2863 अस्पतालों में करीब 16 हजार ही डॉक्टर हैं। इन्होंने बीते साल करीब 9 करोड़ बीमार होकर आने वाले लोगों यानी आबादी से 1.75 करोड़ से अधिक लोगों का इलाज किया। आंकड़े चिंता में इसलिए डालते हैं कि गंभीर मरीजों के इलाज के लिए बने सरकार के सातों मेडिकल कॉलेजों में केवल 3169 ही बड़े डॉक्टर (मेडिकल टीचर्स) हैं। बीते साल इन अस्पतालों में इलाज को 1.76 करोड़ से अधिक मरीज पहुंचे थे। इनमें भी सर्जरी के एक्सपर्ट तकरीबन 10 फीसदी ही हैं, जिन्होंने 4.38 लाख ऑपरेशन कर मरीजों को नई जिंदगी दी। <br /><br /><span style="background-color:#ffff99;color:#ff0000;"><strong>विश्व स्वास्थ्य दिवस </strong></span><br /><span style="background-color:#ffff99;color:#ff0000;"><strong>प्रदेश में अभी 1349 मरीजों पर एक डॉक्टर</strong></span><br /><span style="background-color:#ffff99;color:#ff0000;"><strong>5 साल में WHO के मुताबिक होंगे डॉक्टर</strong></span></p>
<table style="width:778px;">
<tbody>
<tr>
<td style="text-align:center;width:773px;" colspan="2"><span style="background-color:#cc99ff;color:#000080;"><strong>सरकार की मुफ्त इलाज और नीरोगी राजस्थान की मुहिम</strong></span></td>
</tr>
<tr>
<td style="width:35.9px;"><strong>.</strong></td>
<td style="width:737.1px;"> सरकारी अस्पतालों में मरीजों का भार कम करने और प्राइवेट अस्पताल की मुफ्त सेवाओं को चिंरजीवी बीमा से 1.33 करोड़ परिवार बीमित हैं। ये 10 लाख तक का इलाज पर 714 करोड़ रुपए बीमा राशि से हुए।</td>
</tr>
<tr>
<td style="width:35.9px;"><strong>.</strong></td>
<td style="width:737.1px;">सभी सरकारी अस्पतालों में इलाज पूरी तरह फ्री कर दिया गया है। अस्पतालों में इस साल 150 से अधिक जांचें हुई, जिनमें 10 हजार तक की मुफ्त जांचें।</td>
</tr>
<tr>
<td style="width:35.9px;"><strong>.</strong></td>
<td style="width:737.1px;"> अस्पताल में मौजूदा 969 मुफ्त दवाओं के अतिरिक्त बाहर से महंगी दवा आने का खर्चा भी सरकार उठा रही।</td>
</tr>
<tr>
<td style="width:35.9px;"><strong>.</strong></td>
<td style="width:737.1px;">अब तक 30 जिलों में केन्द्र की मदद से 23 मेडिकल कॉलेज मंजूर।</td>
</tr>
<tr>
<td style="width:35.9px;"><strong>.</strong></td>
<td style="width:737.1px;"> डॉक्टरों की उपलब्धता के लिए प्राइवेट मेडिकल कॉलेज की जल्द नीति आएगी।</td>
</tr>
<tr>
<td style="width:35.9px;"><strong>.</strong></td>
<td style="width:737.1px;">राइट टू हेल्थ कानून लागू होने जा रहा है।</td>
</tr>
<tr>
<td style="width:35.9px;"><strong>.</strong></td>
<td style="width:737.1px;">कुल बजट का सात फीसदी हेल्थ पर खर्च, एनएचएम के तहत 4358.78 करोड़ रुपए केन्द्र दे रहा।</td>
</tr>
</tbody>
</table>
<table style="width:778px;">
<tbody>
<tr style="height:41px;">
<td style="height:41px;width:774px;" colspan="2"><span style="background-color:#ffff99;color:#ff0000;"><strong>बीते साल कितने मरीजों का इलाज हुआ</strong></span></td>
</tr>
<tr style="height:41px;">
<td style="height:41px;width:774px;" colspan="2"><span style="background-color:#ffff99;color:#ff0000;"><strong>सात सरकारी मेडिकल कॉलेजों में</strong></span></td>
</tr>
<tr style="height:41.5px;">
<td style="height:41.5px;width:58.7px;"><strong>.</strong></td>
<td style="height:41.5px;width:715.3px;"> 1,76,42,822 मरीज ओपीडी में</td>
</tr>
<tr style="height:41px;">
<td style="height:41px;width:58.7px;"><strong>.</strong></td>
<td style="height:41px;width:715.3px;">1,31,67,576 मरीज भर्ती हुए</td>
</tr>
<tr style="height:41px;">
<td style="height:41px;width:58.7px;"><strong>.</strong></td>
<td style="height:41px;width:715.3px;"> 4,38,915 ऑपरेशन हुए।</td>
</tr>
<tr style="height:41px;">
<td style="height:41px;width:58.7px;" colspan="2"><span style="background-color:#cc99ff;color:#000080;"><strong>8 राजसैम व सोसायटी मेडिकल कॉलेज में 90 लाख मरीज</strong></span></td>
</tr>
<tr style="height:41px;">
<td style="height:41px;width:58.7px;" colspan="2"><span style="background-color:#ccffff;color:#993300;"><strong>2863 अस्पताल</strong></span></td>
</tr>
<tr style="height:41px;">
<td style="height:41px;width:58.7px;"><strong>.</strong></td>
<td style="height:41px;width:715.3px;">ओपीडी में 6.45 करोड़</td>
</tr>
<tr style="height:41px;">
<td style="height:41px;width:58.7px;"><strong>.</strong></td>
<td style="height:41px;width:715.3px;">भर्ती हुए 70 लाख</td>
</tr>
</tbody>
</table>
<p style="text-align:left;"> </p>
<p style="text-align:left;">824 डॉक्टरों की जल्द भर्ती कर रहे हैं। जिलों में अस्थायी आधार पर डॉक्टर रखने के आदेश हाल ही में दिए हैं। वहीं एक हजार अधिशेष डॉक्टरों को भी जिन जगह डॉक्टर नहीं है, वहां भेजा जा रहा है।  राजमैस के तहत संचालित मेडिकल कॉलेज में मेडिकल टीचर्स की अस्थाई भर्ती की रियायत दी है।  अस्पतालों में पूरी तरह से इलाज फ्री कर दिया गया है। चिरंजीवी से प्राइवेट की भी सेवाएं 1.33 करोड़ परिवार ले सकते हैं। ऐसी योजनाएं लाएं है कि हेल्थ पर जनता की जेब अब ढीली नहीं होगी। - <strong>परसादी लाल मीणा, चिकित्सा मंत्री, राजस्थान    </strong></p>
<table style="width:708px;">
<tbody>
<tr style="height:41px;">
<td style="text-align:center;height:41px;width:703px;" colspan="3"><span style="background-color:#ffcc99;color:#ff6600;"><strong>हमारा हेल्थ सिस्टम</strong></span></td>
</tr>
<tr style="height:41px;">
<td style="height:41px;width:112.1px;" rowspan="4">
<p style="text-align:left;"><span style="background-color:#ccffcc;color:#008000;"><strong>इलाज की क्षमता</strong></span></p>
<p style="text-align:left;"><strong>मेडिकल कॉलेज में भर्ती की क्षमता 24,517, अन्य सरकारी अस्पतालों में 60 हजार</strong></p>
</td>
<td style="height:41px;width:550.9px;" colspan="2">
<p><span style="background-color:#ffff99;color:#ff0000;"><strong>16 मेडिकल कॉलेज व अस्पताल में</strong></span></p>
<p><strong>01. सात सरकारी मेडिकल कॉलेज , झालावाड़ में सोसायटी द्वारा संचालित,  7 राजसैम से जिलों में संचालित, 1 अलवर में ईएसआई संचालित</strong></p>
</td>
</tr>
<tr style="height:41.5667px;">
<td style="height:41.5667px;width:550.9px;" colspan="2">
<p><span style="background-color:#ffff99;color:#ff0000;"><strong>2863 अस्पताल</strong></span></p>
<p><strong>02. 29 जिला,32 सब डिविजनल, 649सीएचसी, 2153 पीएचसी, (13779 सब सेंटर अलग)</strong></p>
</td>
</tr>
<tr style="height:41px;">
<td style="height:41px;width:550.9px;" colspan="2">
<p><span style="background-color:#ffff99;color:#ff0000;"><strong>डॉक्टर</strong></span></p>
<p><strong>03. 12500 चिकित्सा विभाग,  3169 मेडिकल कॉलेज टीचर्स,  805 सीनियर रेजीडेंट्स डॉक्टर <br /></strong></p>
</td>
</tr>
<tr style="height:41px;">
<td style="height:41px;width:550.9px;" colspan="2">
<p style="text-align:left;"><span style="background-color:#ffff99;color:#ff0000;"><strong>रिक्त पद </strong></span></p>
<p style="text-align:left;"><strong>04. 633 मेडिकल टीचर्स, 2500 डॉक्टर,  30हजार पैरामेडिकल स्टाफ, 66 हजार नर्सिंग व पैरामेडिकल स्टाफ, 52 हजार आशा सहयोगिनियां</strong></p>
</td>
</tr>
</tbody>
</table>
<table style="width:602px;">
<tbody>
<tr>
<td style="text-align:left;width:600px;" colspan="2"><span style="background-color:#ffcc99;color:#ff6600;"><strong> नि: शुल्क दवा और जांच</strong></span></td>
</tr>
<tr>
<td style="width:54.3333px;"> </td>
<td style="width:545.667px;">4 हजार निशुल्क दवा वितरण केंद्र: 8.58 करोड़ मरीजों को दी मुफ्त दवा, 760 करोड़ रुपए खर्च।</td>
</tr>
<tr>
<td style="width:54.3333px;"> </td>
<td style="width:545.667px;">3 हजार से ज्यादा अस्पताल: 4.4 करोड़ जांचे हुई, 100 से ज्यादा मुफ्त जांच,  150.34 करोड़ खर्च।</td>
</tr>
<tr>
<td style="width:54.3333px;"> </td>
<td style="width:545.667px;">अब मंहगी एमआरआई, सीटी स्कैन,  डायलिसिस सहित सभी फ्री होंगे।</td>
</tr>
<tr>
<td style="width:54.3333px;"> </td>
<td style="width:545.667px;">डॉक्टर की जरूरत जल्द पूरी होने की आस, अभी 4200 डॉक्टर बन रहे है, जल्द 7000 तक मिलने लगेंगे।</td>
</tr>
<tr>
<td style="width:54.3333px;"> </td>
<td style="width:545.667px;">3 साल पहले 8 मेडिकल कॉलेज:  जयपुर, जोधपुर, बीकानेर, उदयपुर, अजमेर, कोटा, झालावाड़ और जयपुर में आरयूएचएस थे, कुल सीटें 1900।</td>
</tr>
<tr>
<td style="width:54.3333px;"> </td>
<td style="width:545.667px;">अब नए 7 नए मेडिकल कॉलेज और शुरू: भरतपुर, भीलवाड़ा, चूरू, डूंगरपुर, पाली, बाड़मेर, सीकर कुल सीटें 980।</td>
</tr>
<tr>
<td style="width:54.3333px;"> </td>
<td style="width:545.667px;">
<p style="text-align:left;">नए प्रस्तावित कॉलेज: 15 को मंजूरी, 2023 तक शुरू होंगे।</p>
<p style="text-align:left;">तीन जिलों में जंहा और कॉलेज की कवायद: राजसमंद, जालौर, प्रतापगढ़।</p>
</td>
</tr>
</tbody>
</table>
<p style="text-align:left;"> </p>
<p style="text-align:left;"> </p>
<p> </p>
<p style="text-align:left;"><strong> </strong></p>
<p style="text-align:left;"><strong> </strong></p>
<p style="text-align:left;"><strong> </strong></p>
<p style="text-align:left;"><strong> </strong></p>
<p style="text-align:left;"><strong> </strong></p>
<p style="text-align:left;"><strong> </strong></p>
<p style="text-align:left;"><strong> </strong></p>
<p> </p>
<p style="text-align:left;"> </p>
<p style="text-align:left;"><strong> </strong>     <br />    <br />   <br />    <br />   <br />    <br />    <br /><br /></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>स्वास्थ्य</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/jaipur--news--on-health-day--let-s-know-how-is-the-health-of-the-health-system-lack-of-20-thousand-doctors-in-the-state--16-thousand-government-doctors-are-treating-9-crores/article-7512</link>
                <guid>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/jaipur--news--on-health-day--let-s-know-how-is-the-health-of-the-health-system-lack-of-20-thousand-doctors-in-the-state--16-thousand-government-doctors-are-treating-9-crores/article-7512</guid>
                <pubDate>Thu, 07 Apr 2022 10:33:40 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://dainiknavajyoti.com/media/2022-04/health.jpg"                         length="61885"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Administrator]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>देशभर में ‘प्रताप धन मुर्गी’ की डिमांड लाखों में, सप्लाई हजारों में</title>
                                    <description><![CDATA[<p>  उदयपुर। महाराणा प्रताप कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (एमपीयूएटी) के वैज्ञानिकों द्वारा तैयार की गई प्रतापधन मुर्गी की देशभर में इतनी डिमांड है कि एमपीयूएटी द्वारा इसकी सप्लाई में ही पसीने छूट रहे हैं। जानकारी के अनुसार कश्मीर, मध्यप्रदेश और गुजरात से ही लाखों मुर्गियों की डिमांड है, लेकिन एमपीयूएटी हजारों में ही सप्लाई कर पा रहा है। चिकन और अंडा उत्पादन में अब तक की सबसे अव्वल रही इस नस्ल को जो व्यक्ति एक बार लेता है, उसे अन्य कोई प्रजाति रास नहीं आती है। कारण यह है कि इस नस्ल की मुर्गियां एक साल में 150 से अधिक<br /><strong><br />1.25</strong></p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/udaipur/demand-for-pratap-dhan-chicken-in-lakhs--supply-in-thousands-across-the-country---this-breed-prepared-by-the-scientists-of-mewar-lays-more-than-150-eggs-annually/article-4566"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-02/7_new.jpg" alt=""></a><br /><p> उदयपुर। महाराणा प्रताप कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (एमपीयूएटी) के वैज्ञानिकों द्वारा तैयार की गई प्रतापधन मुर्गी की देशभर में इतनी डिमांड है कि एमपीयूएटी द्वारा इसकी सप्लाई में ही पसीने छूट रहे हैं। जानकारी के अनुसार कश्मीर, मध्यप्रदेश और गुजरात से ही लाखों मुर्गियों की डिमांड है, लेकिन एमपीयूएटी हजारों में ही सप्लाई कर पा रहा है। चिकन और अंडा उत्पादन में अब तक की सबसे अव्वल रही इस नस्ल को जो व्यक्ति एक बार लेता है, उसे अन्य कोई प्रजाति रास नहीं आती है। कारण यह है कि इस नस्ल की मुर्गियां एक साल में 150 से अधिक अंडे दे देती हैं तो इस नस्ले के मुर्गे पांच माह में ही तीन से साढ़े तीन किलो वजनी भी हो जाते हैं। एमपीयूएटी के वैज्ञानिकों ने इस नस्ल को करीब चार साल पहले तैयार किया था। प्रतापधन को लेकर देश के कई राज्यों से ऑर्डर प्राप्त हो रहे हैं, तो कई फर्म एडवांस राशि देकर भी बुकिंग करवाने को तैयार है, लेकिन इस प्रजाति की सप्लाई तैयार करने में लगने वाला अत्यधिक समय इसकी डिमांड में रोड़ा बना हुआ है। बता दें, यह ऐसी प्रजाति है जिसे किसी तरह की बीमारी भी नहीं लगती और इसका सेवन करने वालों को भी कोई परेशानी नहीं होती है। <br /><strong><br />1.25 से 1.50 लाख पहुंची सालाना डिमांड</strong><br />एमपीयूएटी से मिली जानकारी के अनुसार वर्तमान में प्रतापधन मुर्गी की डिमांड बीते साल की तुलना में बढ़ी है। बताया गया कि बीते साल करीब 1.25 लाख चूजों की सालाना डिमांड थी, जो इस वर्ष बढ़कर 1.50 तक जा पहुंची है। इसकी तुलना में पूर्ति करीब 85 हजार चूजों की ही हो पा रही है। बताया गया कि देशभर में सर्वाधिक मांग कश्मीर, गुजरात व मध्यप्रदेश से आ रही है। कुलपति प्रो. एनएस राठौड़ ने बताया कि रोड आइलैंड रेड (आरआईआर) जो सालाना दो सौ अंडे देती है, कलर ब्राइलर, जो पांच माह में ढाई किलो हो जाती है और मेवाड़ी मुर्गी जिसमें बीमारी बेहद कम लगती है। इन तीनों नस्लों को मिलाकर उन्नत मूर्गी प्रताप धन तैयार की गई। नस्ल को नेशनल ब्यूरो आॅफ एनिमल जेनेटिक रिसोर्स करनाल से रजिस्टर्ड करवाया गया है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>उदयपुर</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/udaipur/demand-for-pratap-dhan-chicken-in-lakhs--supply-in-thousands-across-the-country---this-breed-prepared-by-the-scientists-of-mewar-lays-more-than-150-eggs-annually/article-4566</link>
                <guid>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/udaipur/demand-for-pratap-dhan-chicken-in-lakhs--supply-in-thousands-across-the-country---this-breed-prepared-by-the-scientists-of-mewar-lays-more-than-150-eggs-annually/article-4566</guid>
                <pubDate>Thu, 17 Feb 2022 14:58:46 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://dainiknavajyoti.com/media/2022-02/7_new.jpg"                         length="302223"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Administrator]]></dc:creator>
                            </item>

            </channel>
        </rss>
        