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                <title>vice chancellor - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <title>कुलपतियों की नियुक्ति की लड़ाई शिखर पर</title>
                                    <description><![CDATA[ संविधान के प्रावधानों के अनुसार राज्य में तब तक  कोई कानून लागू नहीं होता, जब तक संबंधित राज्य के राज्यपाल उस पर अपनी मोहर नहीं लगाते। फिर वहां के सत्तारूढ़ दल ने विधानसभा में ऐसा विधेयक पारित ही क्यों करवाया। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/opinion/the-battle-for-the-appointment-of-vice-chancellors-is-at-its/article-33346"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-12/e23.jpg" alt=""></a><br /><p>दक्षिण के केरल राज्य में, जहां मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी के नेतृत्व वाली वाम मोर्चा  सरकार सत्ता में है,  प्रदेश के 14 विश्वविद्यालयों  कुलपतियों की नियुक्ति को लेकर चली रही लड़ाई इतने शिखर पर पहुंच गई है कि सरकार ने विधानसभा में एक विधेयक पारित करवा कर राज्यपाल के उन सभी अधिकारों को निरस्त कर दिया, जिसके अन्तर्गत वे राज्य के विश्व विद्यालयों के कुलपतियों की नियुक्ति करते हैं। विधेयक के जरिए सरकार ने यह अधिकार अपने पास ले लिया है। इस विधेयक को लेकर एक नया संवैधानिक संकट पैदा हो गया है।<br /><br />संविधान के प्रावधानों के अनुसार राज्य में तब तक  कोई कानून लागू नहीं होता, जब तक संबंधित राज्य के राज्यपाल उस पर अपनी मोहर नहीं लगाते। फिर वहां के सत्तारूढ़ दल ने विधानसभा में ऐसा विधेयक पारित ही क्यों करवाया। जिस पर राज्यपाल कभी भी अपने सहमति नहीं देने वाले और यह कानून बन ही नहीं सकता। केरल के राज्यपाल आरिफ  मोहम्मद खान और वाम मोर्चे की सरकार  में कई मुद्दों पर अधिकारों को लेकर लड़ाई काफी समय  से चल रही है। आरिफ मोहम्मद खान का कहना है कि  राज्यपाल के रूप में उनका दायित्व संविधान की रक्षा करना  है। वे राज्य सरकार के किसी ऐसे निर्णय पर अपनी सहमति नहीं देंगे, जो संविधान के प्रावधानों के विपरीत हो। वे सार्वजनिक रूप से कई बार कह चुके है कि राज्य में मुख्यमंत्री पिनराई विजयन और उनकी सरकार लगातार अपने निर्णयों उनकी मोहर लगवाने  चाहते हैं, जो संविधान के विपरीत है। ऐसा माना जाता है कि इस विधेयक की  मंशा भी राज्यपाल पर दवाब बनाना मात्र है।<br /><br />विश्वविद्यालय अनुदान आयोग ने राज्य सरकारों के विश्वविद्यालयों में कुलपतियों की नियुक्तियों के स्पष्ट कानून बना रखे हैं। ऐसे ही कानून भारत सरकार के केंद्रीय विश्व विद्यालयों के लिए है। कुलपतियों के लिए योग्य उम्मीदवारों का पता लगाने के लिए खोज समितियां गठित की जाती हैं। जो अपनी सिफारिशों में एक पद के लिए कम से कम  तीन नाम सुझाती है जिनमें से एक पर केंद्र में राष्टÑपति और राज्यों में राज्यपाल अपने विवेक से निर्णय करते हैं। राष्टÑपति केंद्रीय तथा राज्य में राज्यपाल राज्य के विश्वविद्यालयों  के कुलाधिपति हैं और इसी रूप में उन्हें कुलपतियों के नियुक्ति का अधिकार है।<br />जब से केरल में आरिफ  मोहम्मद खान को राज्यपाल बनाया गया है तब से वे राज्य सरकार को बार-बार चेता रहे हैं कि वे उनसे उन कानूनों और नियमों पर सहमति की  अपेक्षा न करें, जो पूरी तरह संवैधानिक प्रावधानों के अनुरूप नहीं। कई अन्य मुद्दों के अलावा राज्य के विश्वविद्यालयों  में कुलपतियों की नियुक्ति पिछले कई महीनों से एक बड़ा मुद्दा बना हुआ है। सरकार चाहती है कि विश्वविद्यालयों  के कुलपतियों के चयन का अधिकार उसके पास रहे राज्यपाल  का काम केवल उन पर अपनी मोहर लगाना मात्र हो। काफी समय पहले राज्य सरकार ने तीन उम्मीदवारों की सूचि  भेजने के बजाए एक ही नाम भेजकर उस पर राज्यपाल की सहमति ले ली। इस नियुक्ति को केरल हाई कोर्ट में चुनौती दी गई, लेकिन कोर्ट ने इस नियुक्ति को सही  बताया। इसके विपरीत जब मामला सर्वोच्च न्यायालय में गया, तो  फैसला आया कि उक्त नियुक्ति गलत है, क्योंकि इसमें  नियुक्ति की सामान्य प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया। इस फैसले को सामने रखते हुए केरल के राज्यपाल ने  राज्य सरकार को चेताया के राज्य के विश्वविद्यालयों के  कुलपतियों के नियुक्तियों में प्रक्रिया का सख्ती से पालन किया जाए। इसके साथ ही सर्वोच्च न्यायालय ने जिस कुलपति की नियुक्ति को गलत बताया, उसे पद से हटने का नोटिस जारी कर दिया। इस समय यह मामला केरल हाई कोर्ट के विचाराधीन है। विधानसभा ने जो विधेयक पारित किया है उसके  अनुसार राज्य के सभी 14 विश्वविद्यालयों में कुलपतियों   की नियुक्ति राज्य सरकार करेंगी, क्योंकि विधेयक के अनुसार अब राज्यपाल इन विश्वविद्यालयों के कुलाधिपति नहीं है। विधेयक में यह प्रावधान किया गया है कि भविष्य में कुलपतियों की नियुक्ति मुख्यमंत्री की अध्यक्षता वाली एक तीन सदस्यों वाली समिति करेंगी। इस समिति के अन्य दो सदस्य विधानसभा के अध्यक्ष और विपक्ष के नेता होंगे। विधेयक के अनुसार सरकार केवल ऐसे व्यक्तियों को  कुलपति नियुक्त करेगी। जो शिक्षा की क्षेत्र में बड़ा नाम  रखते हो, वे अपने विषय के विशेषज्ञ हों। चूँकि कानून प्रावधानों के अनुसार राज्यपाल द्वारा सरकार द्वारा भेजे गए प्रस्तावों पर सहमति देने की कोई समय सीमा निर्धारित नहीं है। इसलिए आरिफ  मोहम्मद खान पर इस विधेयक पर तुरंत अपनी मोहर लगाने का कोई दवाब नहीं है। उनके पास यह भी विकल्प है कि वे इस विधेयक को राष्टÑपति के पास भेज दें।<br /><br />(ये लेखक के अपने विचार हैं)</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>ओपिनियन</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 26 Dec 2022 10:31:05 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur]]></dc:creator>
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                <title>अदालत ने कुलपति को नोटिस जारी कर मांगा जवाब </title>
                                    <description><![CDATA[ तकनीकी विश्वविद्यालय में कंप्यूटर टीचर और  वाईफाई के अभाव के  मामले में सुनवाई करते हुए स्थाई लोक अदालत ने गुरुवार को  कुलपति राजस्थान तकनीकी विश्वविद्यालय कोटा को नोटिस जारी करते हुए 21 सितंबर 2022 तक जवाब तलब किया है । ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/court-issued-notice-to-the-vice-chancellor-and-sought-reply/article-21352"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-09/asar-khaber-ka--adalat-nei-kulpati-ko....kota-news-2.9.2022-copy.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। तकनीकी विश्वविद्यालय में कंप्यूटर टीचर और  वाईफाई के अभाव के  मामले में सुनवाई करते हुए स्थाई लोक अदालत ने  कुलपति राजस्थान तकनीकी विश्वविद्यालय कोटा को नोटिस जारी करते हुए 21 सितंबर 2022 तक जवाब तलब किया है। इस मामले में अदालत में वकील  लोकेश कुमार सैनी ने एक जनहित याचिका दायर करते हुए बताया कि  राजस्थान तकनीकी विश्वविद्यालय कोटा में कंप्यूटर टीचर एवं वाईफाई नहीं होने से विद्यार्थियों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है, जबकि कंप्यूटर साइंस विभाग में विद्यार्थियों की संख्या के अनुपात में शिक्षक भी नहीं हैं. विश्वविद्यालय में 36 कंप्यूटर शिक्षकों के पद रिक्त पड़े हुए हैं। लंबे समय से यहां वाईफाई की भी सुविधा उपलब्ध नहीं कराई जा रही है। अकादमी वर्ष निर्धारित समय से काफी देरी से चल रहा है, जबकि राजस्थान तकनीकी विश्वविद्यालय कोटा से मान्यता प्राप्त प्रदेश के अन्य कॉलेजों में परीक्षाएं भी काफी समय पहले समाप्त हो चुकी है। जहां एडमीशन की भी तैयारी चल रही है और राजस्थान तकनीकी विश्वविद्यालय कोटा में अभी तक परीक्षाएं ही चल रही हैं, परीक्षा परिणाम में देरी होने से प्लेसमेंट में छात्रों को परेशानी होगी। </p>
<p>याचिका में बताया गया कि विश्वविद्यालय में लड़कों के हॉस्टल को सेंचुरी एरिया में बनाया गया है, जिससे चारों और बड़ी-बड़ी झाड़ियां उगी हुई है, जिनकी समय पर सफाई तक नहीं होती है । बरसात के समय में जहरीले जीव जंतुओं का खतरा उनके सिर पर मंडराता रहता है। हॉस्टल की ओर जाने वाली रोड लाइटें भी काफी दिनों से बंद पड़ी हंै जिसे वहां पर  शाम को अंधेरा छाया रहता  है। राजस्थान तकनीकी विश्वविद्यालय  कुलपति की अनदेखी के चलते विद्यार्थियों को अनेक असुविधाओं का सामना करना पड़ रहा है।  याचिका में कहा गया कि विश्वविद्यालय में कंप्यूटर साइंस विभाग में विद्यार्थियों की संख्या के अनुपात में शिक्षकों की स्थाई व्यवस्था तथा वाई फाई सुविधा भी मुहैया कराई जाए।  हॉस्टल के चारों ओर फैल रही झाड़ियों को शीघ्र साफ  करवाया जाए। हॉस्टल की ओर जाने वाले रोड पर लाइटों की रात्रि के समय पर चालू करवाया जाए। साथ  अकादमी वर्ष निर्धारित समय पर प्रारंभ कर विद्यार्थियों को क्वालिटी एजुकेशन दी जाए। इस बात का पूरा ध्यान रखा जाए। जिससे विद्यार्थी किसी प्रकार की असुविधा से  परेशान ना हो । न्यायालय ने मामले में सुनवाई करते हुए कोटा तकनीकी विश्वविद्यालय कुलपति को नोटिस जारी कर 21 सितंबर 2022 तक जवाब तलब किया है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 02 Sep 2022 12:57:15 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[kota]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>हरिदेव जोशी पत्रकारिता और जनसंचार विवि में नई कुलपति ने संभाला कार्यभार </title>
                                    <description><![CDATA[प्रो. सुधी ने कहा कि पत्रकारिता और जनसंचार अंतर-अनुशासनात्‍मक विषय है और इसका दूसरे विषयों से गहरा संबंध है। उनका लक्ष्‍य विश्‍वविद्यालय को नई अकादमिक ऊंचाइयों पर ले जाना है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/new-vice-chancellor-took-charge-in-haridev-joshi-journalism-and-mass-communication-university/article-19201"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-08/q-22.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal"><span lang="hi" style="line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">जयपुर। हरिदेव जोशी पत्रकारिता और जनसंचार विश्‍वविद्यालय की नवनियुक्‍त कुलपति प्रोफेसर सुधी राजीव ने </span><span style="line-height:115%;">15</span><span lang="hi" style="line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi"> अगस्‍त को खासाकोठी स्थित अकादमिक परिसर पहुंचकर कार्यभार ग्रहण किया। विश्‍वविद्यालय के कार्यवाहक कुलपति डॉ. देव स्‍वरूप ने उनको कार्यभार सौंपा। डॉ. देव स्‍वरूप वर्तमान में डॉ. भीमराव अंबेडकर विधि विश्‍वविद्यालय के कुलपति हैं। </span></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" style="line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">इस अवसर पर अकादमिक परिसर में शिक्षकों और कर्मचारियों ने उनका स्‍वागत किया। कार्यभार ग्रहण करने के बाद प्रोफेसर सुधी ने झंडारोहण किया और उपस्थित शिक्षकों और विद्यार्थियों को संबोधित किया। प्रो. सुधी ने कहा कि पत्रकारिता और जनसंचार अंतर-अनुशासनात्‍मक विषय है और इसका दूसरे विषयों से गहरा संबंध है। उनका लक्ष्‍य विश्‍वविद्यालय को नई अकादमिक ऊंचाइयों पर ले जाना है। डॉ. सुधी ने कहा कि विश्‍वविद्यालय की पहचान वहां का समृद्ध पुस्‍तकालय और वहां पर होने वाला शोधकार्य है। उनकी कोशिश विश्‍वविद्यालय को जनसंचार और मीडिया क्षेत्र में शोध का एक बेहतरीन संस्‍थान बनाने की रहेगी। प्रख्‍यात शिक्षाविद् प्रो. सुधी जयनारायण व्‍यास विश्‍वविद्यालय</span><span style="line-height:115%;">, </span><span lang="hi" style="line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">जोधपुर में अंग्रेजी विभाग की अध्‍यक्ष रही हैं। इस अवसर पर अकादमिक परिसर की समन्‍वयक शालिनी जोशी ने कहा कि हरिदेव जोशी पत्रकारिता और जनसंचार विश्‍वविद्यालय को पहली महिला कुलपति के रूप में प्रख्‍यात शिक्षाविद् मिली हैं। यह गर्व का विषय है। उनके मार्गदर्शन में यह नवस्‍थापित विश्‍वविद्यालय तेजी से अकादमिक ऊंचाइयों को प्राप्‍त करेगा।</span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 16 Aug 2022 14:26:01 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title> राजभवन के बुलावे पर फिर नहीं पहुंचे सुविवि के कुलपति</title>
                                    <description><![CDATA[ उदयपुर। सुखाड़िया विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. अमेरिकासिंह ने राजभवन के बुलावे पर शुक्रवार को माउंट आबू में राज्यपाल एवं कुलाधिपति कलराज मिश्र के सामने उपस्थित नहीं हुए।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/udaipur/udaipur--vice-chancellor-of-suvivi-did-not-reach-again-on-the-call-of-raj-bhavan/article-10608"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-05/ww1.jpg" alt=""></a><br /><p>उदयपुर। सुखाड़िया विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. अमेरिकासिंह ने राजभवन के बुलावे पर शुक्रवार को माउंट आबू में राज्यपाल एवं कुलाधिपति कलराज मिश्र के सामने उपस्थित नहीं हुए। इस तरह उन्होंने सीकर के गुरुकुल विवि की सम्पत्ति के भौतिक सत्यापन में गलत रिपोर्ट पेश करने के मामले में राजभवन स्तर से मिला छठां अवसर भी गंवा दिया है। ऐसे में अब कुलाधिपति मिश्र उनके स्तर पर निर्णय करेंगे।</p>
<p><br />बताया गया कि कुलपति ऑनलाइन जुड़कर उनका स्पष्टीकरण रखना चाहते थे, लेकिन राज्यपाल मिश्र ने इसकी स्वीकृति प्रदान नहीं की। संभवतया प्रदेश का यह पहला मामला है जब कुलाधिपति किसी कुलपति को छह बार उसका पक्ष रखने के लिए आमंत्रित कर रहे हो और कुलपति छह में से एक बार भी उनके सामने उपस्थित नहीं हों। उल्लेखनीय है कि जयपुर के अशोकनगर थाने में कुलपति प्रो. सिंह के खिलाफ मामला दर्ज हो चुका है तथा प्रदेश सरकार भी उन्हें निलम्बित करने की अनुशंसा कर चुकी है। शुक्रवार को कुलपति प्रो. सिंह के अनुपस्थिति रहने पर प्रमुख सचिव सुबीर कुमार ने रिपोर्ट तैयार कर राज्यपाल को सौंप दी है। राज्यपाल अब उनके स्तर पर निर्णय करेंगे।<br /> <br /><strong>पूर्व नोटिस में दी थी चेतावनी</strong><br />विधानसभा में करीब एक दर्जन विधायकों ने कुलपति प्रो. सिंह पर गुरुकुल विवि के भौतिक सत्यापन, उनकी योग्यता व कार्यशैली को लेकर कई आरोप लगाए थे। इस पर जयपुर के संभागीय आयुक्त की अध्यक्षता में बनी कमेटी ने जांच कर रिपोर्ट दी थी। गत दो माह में कुलपति प्रो. सिंह को दो अलग-अलग कमेटियों और राजभवन ने छह बार उनका पक्ष रखने के लिए बुलाया। अंतिम बार भेजे गए पत्र में तो चेतावनी भी दी गई थी, लेकिन कुलपति प्रो. सिंह ने जवाब दिया और उपस्थित नहीं होने का कोई कारण ही बताया। इस अंतिम पत्र में कुलपति प्रो. सिंह को हिदायत दी गई थी कि यदि प्रो. सिंह 27 मई को पेश नहीं होते हैं तो उपलब्ध साक्ष्य और दस्तावेजों के आधार पर राजभवन निर्णय करेगा। <br /> <br /><strong>19 अप्रेल से अवकाश पर कुलपति</strong> <br />कुलपति प्रो. सिंह 19 अप्रेल से अवकाश पर चल रहे हैं, इस अवधि में वे कहां हैं और क्या कर रहे हैं, किसी को जानकारी नहीं है। माउंट आबू से पूर्व कुलपति प्रो. सिंह को उदयपुर में संभागीय आयुक्त की अध्यक्षता वाली कमेटी के समक्ष पेश होना था, लेकिन वे यहां भी नहीं आए।  <br /> <br /><strong>उत्तरप्रदेश पहुंची कमेटी, आज आएगी</strong><br />इस बीच, उदयपुर के संभागीय आयुक्त की अध्यक्षता में गठित कमेटी की दोनों बैठक में कुलपति के अनुपस्थित रहने पर कमेटी सदस्यों को उत्तरप्रदेश भेजा गया है, जो शनिवार को उदयपुर लौटेंगे। इसके बाद संभागीय आयुक्त कमेटी की बैठक कर रिपोर्ट तैयार करेंगे। बताया गया कि यह कमेटी कुलपति प्रो.सिंह के दस्तावेज जांचने के लिए उत्तरप्रदेश गई है। कुलपति प्रो.सिंह की योग्यता को लेकर राज्य सरकार ने संभागीय आयुक्त की अध्यक्षता में जांच कमेटी का गठन किया है। <br /><br /><strong>यह है मामला</strong><br />सीकर के गुरुकुल विवि की अचल सम्पत्तियों के भौतिक सत्यापन के लिए गठित कमेटी में सुविवि के कुलपति प्रो. सिंह अध्यक्ष एवं सुविवि के ही साइंस कॉलेज के पूर्व डीन प्रो. जीएस राठौड़ व दो अन्य सदस्य थे। कमेटी ने मौके पर पहुंचे बगैर ही बंद कमरे में बैठकर रिपोर्ट तैयार कर दी। विधानसभा में इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाया गया तो राजभवन स्तर पर जांच कमेटी बनाई गई। इसमें इस कमेटी पर आरोप सिद्ध हो गए। सदस्यों को निलंबित कर दिया गया जबकि कुलपति प्रो. सिंह को राज्यपाल के समक्ष उनका पक्ष रखने के लिए छह बार बुलाया गया है, लेकिन वे एक बार भी उपस्थित नहीं हुए है।<br /><br /><br /></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>उदयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 28 May 2022 11:18:59 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>कुलपति 10 मई तक अवकाश पर, जारी हो रही ‘वित्तीय स्वीकृतियां’</title>
                                    <description><![CDATA[सुखाड़िया विश्वविद्यालय की कार्यप्रणाली से खुद को त्रस्त बताते हुए रजिस्ट्रार सीआर देवासी ने राजभवन और राज्य सरकार को यह पत्र लिखा है कि ‘कुलपति प्रो. अमेरिका सिंह एक तरफ अवकाश की अवधि बढ़ाते जा रहे हैं तो दूसरी तरफ वित्तीय स्वीकृतियां जारी करवा रहे हैं। विश्वविद्यालय में आए दिन अपने स्तर पर कार्यवाहक कुलपति बदल दिए जाते हैं, जबकि कार्यवाही कुलपति की नियुक्ति कुलाधिपति करनी होती है। कार्यवाहक कुलपति बदलने की जानकारी भी दो से तीन दिन के बाद कर्मचारियों से मिलती है। इस नियुक्ति प्रक्रिया में पूर्व निर्धारित एक्ट 11-5 का स्पष्ट उल्लंघन किया जा रहा है।’ ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/udaipur/udaipur--vice-chancellor-on-leave-till-may-10--financial-approvals-being-issued/article-9144"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-05/mlsu.jpg" alt=""></a><br /><p>उदयपुर। सुखाड़िया विश्वविद्यालय की कार्यप्रणाली से खुद को त्रस्त बताते हुए रजिस्ट्रार सीआर देवासी ने राजभवन और राज्य सरकार को यह पत्र लिखा है कि ‘कुलपति प्रो. अमेरिका सिंह एक तरफ अवकाश की अवधि बढ़ाते जा रहे हैं तो दूसरी तरफ वित्तीय स्वीकृतियां जारी करवा रहे हैं। विश्वविद्यालय में आए दिन अपने स्तर पर कार्यवाहक कुलपति बदल दिए जाते हैं, जबकि कार्यवाही कुलपति की नियुक्ति कुलाधिपति करनी होती है। कार्यवाहक कुलपति बदलने की जानकारी भी दो से तीन दिन के बाद कर्मचारियों से मिलती है। इस नियुक्ति प्रक्रिया में पूर्व निर्धारित एक्ट 11-5 का स्पष्ट उल्लंघन किया जा रहा है।’</p>
<p><br />उल्लेखनीय है कि कुलपति प्रो. सिंह 19 अप्रेल से अवकाश पर हैं। पहले उन्होंने 30 अप्रेल को उदयपुर आने की बात कही, लेकिन बीमारी का हवाला देते हुए उन्होंने अवकाश 10 मई तक बढ़ा दिया है। इस दौरान दो अलग-अलग कार्यवाहक कुलपतियों की नियुक्तियां की गई। अवकाश अवधि में कुलपति ने वित्त नियंत्रक से साइंस कांग्रेस की अनुमति मिलने के बाद कोलकाता में 15 लाख रुपए जमा करवाने के लिए वित्तीय स्वीकृति जारी करने को कहा है। इस पर रजिस्ट्रार देवासी का कहना है कि सुविवि के कर्मचारियों में इससे आक्रोश है। कर्मचारियों का आरोप है कि सुविवि में न तो ग्रेज्युटी दी जा रही है और न सातवें वेतनमान की एरियर राशि। कर्मचारियों को दरकिनार खर्चीले आयोजनों को प्राथमिकता दी जा रही है। <br /><br /><strong>हां, जारी किए हैं 15 लाख रुपए</strong><br />वित्त नियंत्रक डीएस राठौड़ ने इस संबंध में बताया कि ‘सुविवि में साइंस कांग्रेस का होना एक ऐतिहासिक पहल होगी। कार्यक्रम में प्रधानमंत्री का आना भी प्रस्तावित है। कुलपति प्रो. सिंह से मिले निर्देशों के अनुसार हमने वित्तीय स्वीकृति जारी की है। साइंस कांग्रेस की अनुमति पहले ही मिल चुकी थी। इसकी एवज में 15 लाख रुपए जमा करवाने थे। यदि ऐसा नहीं करते हैं तो आयोजन की मेजबानी किसी अन्य विश्वविद्यालय को सौंपी जा सकती है। साइंस कांग्रेस इसके लिए बाध्य नहीं है कि सुविवि कब पैसा जमा करवाएगा और कब आयोजन करेगा। वह किसी भी विश्वविद्यालय को यह मौका दे सकती है।’<br /> <br /><strong>कुलपति सेठ-कंट्रोलर मुनीम</strong> <br />रजिस्ट्रार देवासी का कहना है कि कुलपति प्रो.सिंह सुविवि के सेठ बने हुए हैं और वित्त नियंत्रक उनके मुनीम है। यही कारण है कि सरकारी तंत्र में शामिल किसी भी प्रक्रियाओं का पालन नहीं किया जा रहा है। कुलपति अवकाश पर बैठे-बैठे स्वीकृतियां जारी करने के निर्देश दे रहे हैं और वित्त नियंत्रक आंखें मूंद कर पैसा जारी कर रहे हैं। विश्वविद्यालय में रजिस्ट्रार नाम की भी कोई चीज है। बहरहाल, सुविवि में क्या हो रहा है, इस बारे में मुझे कोई जानकारी नहीं है। यही कारण है कि राजभवन के सचिव और प्रदेश सरकार को इस संबंध में पत्र लिखा है।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>उदयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 05 May 2022 11:41:00 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>सुविवि : कुलपति को संभागीय आयुक्त का ‘बुलावा’, कुलपति बीमार</title>
                                    <description><![CDATA[सुखाड़िया विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. अमेरिका सिंह की योग्यता एवं अन्य सम्बन्धित प्रकरणों की जांच के लिए राज्य सरकार द्वारा गठित कमेटी के अध्यक्ष एवं उदयपुर के संभागीय आयुक्त ने चार मई यानी बुधवार को प्रो. सिंह को योग्यता संबंधी मूल दस्तावेजों के साथ व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने के निर्देश दिए गए हैं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/udaipur/suvivi--divisional-commissioner-s-call-to-vice-chancellor--vice-chancellor-ill/article-9063"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-05/mlsu-new.jpg" alt=""></a><br /><p> उदयपुर। सुखाड़िया विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. अमेरिका सिंह की योग्यता एवं अन्य सम्बन्धित प्रकरणों की जांच के लिए राज्य सरकार द्वारा गठित कमेटी के अध्यक्ष एवं उदयपुर के संभागीय आयुक्त ने चार मई यानी बुधवार को प्रो. सिंह को योग्यता संबंधी मूल दस्तावेजों के साथ व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने के निर्देश दिए गए हैं। जांच कमेटी की बैठक भी बुधवार को इसके अध्यक्ष एवं संभागीय आयुक्त राजेंद्र भट्ट की अध्यक्षता में होगी। इस बीच, कुलपति प्रो. सिंह ने सोमवार को नए कार्यवाहक कुलपति प्रो. सीआर सुथार को सोशल मीडिया पर संदेश भेजकर तबीयत खराब होने का हवाला देते हुए 10 मई तक अवकाश पर रहने की सूचना भेज दी है। हालांकि, यह सूचना अब तक रजिस्ट्रार सीआर देवासी तक नहीं पहुंची है। उल्लेखनीय है कि कुलपति प्रो. सिंह 19 अप्रेल से ही अवकाश पर हैं। पहले उन्होंने 30 अप्रेल को उदयपुर लौटने की बात कही थी, लेकिन अब 10 मई तक अवकाश बढ़ा दिया है।<br /><br /><strong>फिर बदल गए कार्यवाहक कुलपति</strong><br />प्रो. सिंह ने जांच समिति के बुलावे को दरकिनार करते हुए बीमारी का हवाला देकर छुट्टियां बढ़ा ली है, लेकिन सुविवि के प्रति वे बीमारी की अवस्था में भी सक्रिय हैं। उन्होंने अब कार्यवाहक कुलपति बदल दिया है। 19 अप्रेल को अवकाश पर जाने से पूर्व उन्होंने प्रो. नीरज शर्मा को कार्यवाहक कुलपति बनाया था, जबकि अब कार्यवाहक कुलपति का दायित्व आर्ट्स कॉलेज के डीन प्रो. सीआर सुथार को सौंप दिया गया है।<br /><br /><strong>इनका कहना है..</strong><br />कुलपति प्रो. सिंह कब तक अवकाश पर है, इस संबंध में मेरे पास कोई जानकारी नहीं है। पूर्व में भी कार्यवाहक कुलपति नीरज शर्मा ने बार-बार पूछने पर उन्होंने पत्र भेजकर 30 अप्रेल तक उनके अवकाश पर रहने की जानकारी दी थी।<br />सीआर देवासी, रजिस्ट्रार, सुविवि<br />कार्यवाहक कुलपति का दायित्व मुझे सौंपा गया है। प्रो.सिंह ने मुझे सोशल मीडिया पर संदेश भेजकर सूचित किया है कि उनकी तबीयत सही नहीं है और वे आगामी 10 मई तक अवकाश पर रहेंगे।<br />प्रो. सीआर सुथार, कार्यवाहक कुलपति, सुविवि</p>
<p> </p>
<p>photo mlsu</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>उदयपुर</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/udaipur/suvivi--divisional-commissioner-s-call-to-vice-chancellor--vice-chancellor-ill/article-9063</link>
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                <pubDate>Tue, 03 May 2022 12:37:54 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>कुलपति के खिलाफ जांच लम्बित, फिलहाल शिकायतकर्ता की बारी</title>
                                    <description><![CDATA[राजभवन के स्तर पर गठित जांच कमेटी ने गुरुवार को सुखाड़िया विश्वविद्यालय पहुंच कर प्रोफेसर्स की योग्यता की जांच शुरू कर दी। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/udaipur/udaipur-news--investigation-pending-against-the-vice-chancellor--at-present-it-is-the-turn-of-the-complainant/article-8808"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-04/m41.jpg" alt=""></a><br /><p> उदयपुर। सुखाड़िया विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. अमेरिका सिंह के खिलाफ विभिन्न आरोपों की जांच के लिए गठित जांच कमेटियां अब तक शुरू भी नहीं कर पाई हैं। इस बीच, राजभवन के स्तर पर गठित जांच कमेटी ने गुरुवार को सुखाड़िया विश्वविद्यालय पहुंच कर प्रोफेसर्स की योग्यता की जांच शुरू कर दी। कोटा विश्वविद्यालय कुलपति नीलम कौशिक की अध्यक्षता में गठित जांच दल गुरुवार को सुखाड़िया विश्वविद्यालय पहुंचा। दल ने भौतिक विज्ञान के प्रोफेसर्स की पात्रता एवं योग्यता के संबंध में दस्तावेज तलब किए, वहीं कुलपति प्रो. सिंह के खिलाफ प्रताड़ना की शिकायत दर्ज करवाने वाली एक महिला प्रोफेसर के खिलाफ भी जांच शुरू कर दी है। सूत्रों के अनुसार भौतिक विज्ञान के प्रो. एमएस ढाका और बॉटनी के एसोसिएट प्रो. विनीत सोनी की पात्रता और उनकी योग्यता के संबंध में जांच की जा रही है। उल्लेखनीय है कि इन दोनों प्रोफेसरों ने कुलपति प्रो. सिंह पर कई तरह की अनियमितता का आरोप लगाते हुए राजभवन में शिकायतें दर्ज करवाई थी। इनमें से प्रो. ढांका तो दर्जनों पत्र राजभवन को लिख चुके हैं। बताया गया कि कुलपति प्रो. सिंह ने राजभवन से इन तीनों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की अनुशंसा की थी। प्रो. ढाका और सोनी की नियुक्ति के बाद पदोन्नति के बाद पदोन्नति भी पा चुका हैं और अब इनकी योग्यता की जांच की जा रही है। <br /> <br /><strong>एक भी कमेटी ने नहीं दी रिपोर्ट</strong> <br />राजभवन स्तर पर सबसे पहले कुलपति प्रो. सिंह पर लगे अनियमितताओं के आरोपों की जांच के लिए कमेटी का गठन किया था। इसके बाद एक महिला प्रोफेसर को प्रताड़ित करने तथा सीकर के गुरुकुल विवि के भवन-भूमि के भौतिक सत्यापन के मामले में जांच कमेटियां गठित हुई लेकिन अब तक किसी भी कमेटी ने उसकी रिपोर्ट प्रस्तुत नहीं की है। इस बीच, कुलपति के खिलाफ शिकायतें दर्ज करवाने वालों के खिलाफ जांच शुरू हो जाने पर विश्वविद्यालय के शैक्षणिक और शैक्षणेत्तर स्टाफ ने आश्चर्य जताया है। <br /><br /><strong>कल तक अवकाश पर हैं कुलपति</strong><br />इधर, कुलपति प्रो. सिंह के अवकाश से लौटने के बारे में रजिस्ट्रार कार्यालय द्वारा बार बार पूछे जाने पर कार्यवाही कुलपति प्रो. नीरज शर्मा ने गुरुवार को रजिस्ट्रार को पत्र के माध्यम से सूचित किया कि कुलपति प्रो. सिंह 30 अप्रेल तक अवकाश पर रहेंगे, लेकिन वे किसी भी कार्य के लिए आॅनलाइन उपस्थित रहेंगे। मामले में रजिस्ट्रार सीआर देवासी का कहना है कि कुलाधिपति ही किसी कुलपति को अवकाश स्वीकृत कर सकते हैं। सूत्रों के अनुसार  कार्यवाहक कुलपति द्वारा दिए गए पत्र में कुलपति प्रो. सिंह के खराब स्वास्थ्य की जानकारी दी गई है।<br /><br />राजभवन स्तर पर गठित कमेटी गुरुवार को उदयपुर आई। भौतिक विज्ञान व बोटेनी के प्रोफेसरों के योग्यता मामले में दस्तावेज तलब किए हैं। इसके अलावा कुलपति के खिलाफ शिकायत करने वाली महिला प्रोफेसर के खिलाफ भी जांच की जा रही है। फिलहाल, कुलपति 30 अप्रेल तक अवकाश पर है।<br /><strong>-सीआर देवासी, रजिस्ट्रार, सुविवि</strong></p>
<p> </p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                            <category>उदयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 29 Apr 2022 12:16:35 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>मोहनलाल सुखाड़िया विश्वविद्यालय के  कुलपति पर फर्जी प्रमाणपत्रों के आधार पर नियुक्ति पाने का आरोप</title>
                                    <description><![CDATA[मामले की जांच के लिए एक कमेटी का गठन किया जाएगा।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/leader-of-opposition-in-the-state-assembly--gulab-chand-kataria--through-a-calling-attention--accused-the-vice-chancellor-of-mohanlal-sukhadia-university-udaipur-of-getting-appointment-through-wrong-documents/article-5956"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-03/gu.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। राज्य विधानसभा में शुक्रवार को नेता प्रतिपक्ष गुलाब चंद कटारिया ने ध्यानाकर्षण के जरिए मोहनलाल सुखाड़िया विश्वविद्यालय उदयपुर के कुलपति पर गलत दस्तावेज से नियुक्ति पाने का आरोप लगाया।  नेता प्रतिपक्ष की आरोपों का जवाब देते हुए उच्च शिक्षा मंत्री राजेंद्र यादव ने कहा कि यह  मामला गंभीर है। मामले की जांच के लिए एक कमेटी का गठन किया जाएगा। गलती पाए जाने पर एफ आई आर दर्ज कराई जाएगी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 11 Mar 2022 14:05:52 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>हरिदेव जोशी पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय के कुलपति का अतिरिक्त कार्यभार डॉ. देव स्वरूप को</title>
                                    <description><![CDATA[ राज्यपाल कलराज मिश्र ने सोमवार को आदेश जारी कर हरिदेव जोशी पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय के कुलपति का अतिरिक्त कार्यभार अग्रिम आदेशों तक डॉ. भीमराव अम्बेडकर विधि विश्वविद्यलालय के कुलपति डॉ. देव स्वरूप को प्रदान किया है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/-additional-charge-of-vice-chancellor-of-haridev-joshi-university-of-journalism-and-mass-communication-to-dr--dev-swarup/article-5642"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-03/vc.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। राज्यपाल कलराज मिश्र ने सोमवार को आदेश जारी कर हरिदेव जोशी पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय के कुलपति का अतिरिक्त कार्यभार अग्रिम आदेशों तक डॉ. भीमराव अम्बेडकर विधि विश्वविद्यलालय के कुलपति डॉ. देव स्वरूप को प्रदान किया है। डॉक्टर देव स्वरूप इससे पहले राजस्थान विश्वविद्यालय के कुलपति भी रह चुके हैं और उनको एजुकेशन सेक्टर का लंबा अनुभव है वह विश्वविद्यालय अनुदान आयोग में संयुक्त सचिव के पद पर करीब 15 साल तक काम किया है। डॉ. देव स्वरूप मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के करीबी माने जा रहे हैं। जिसके चलते  जोशी पत्रकारिता विश्वविद्यालय का अतिरिक्त कार्यभार उनको दिया गया है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 07 Mar 2022 16:34:12 +0530</pubDate>
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                <title> सुख सुविधाओं में कुलपति मंत्रियों से भी आगे : धोबी, नाई, माली, कुक मर्जी से रख सकते हैं वीसी: मंत्री सरकारी नियमों की बंदिशों में</title>
                                    <description><![CDATA[राज्य में विश्वविद्यालयों के कुलपतियों को समाज में सार्वजनिक रूप से भले ही उच्च शिक्षा मंत्री जैसा रुतबा नहीं मिल पाता है, लेकिन इन्हें मिलने वाले बंगले, वेतन और अन्य सुविधाएं मंत्रियों की सुविधाओं पर भी भारी है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/vice-chancellor-ahead-of-ministers-in-amenities--washerman--barber--gardener--cook-can-keep-vc-at-will--minister-under-restrictions-of-government-rules/article-4820"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-02/kulapati.jpg" alt=""></a><br /><p> जयपुर। राज्य में विश्वविद्यालयों के कुलपतियों को समाज में सार्वजनिक रूप से भले ही उच्च शिक्षा मंत्री जैसा रुतबा नहीं मिल पाता है, लेकिन इन्हें मिलने वाले बंगले, वेतन और अन्य सुविधाएं मंत्रियों की सुविधाओं पर भी भारी है। कुछ कुलपतियों के बंगले तो मंत्रियों के बंगलों से काफी बड़े हैं। इस मामले में कई जिलों में तो कलक्टर और एसपी के पास भी मंत्रियों से ज्यादा सुख सुविधाएं हैं।  कई विश्वविद्यालयों में अधिकांश कुलपतियों को शासकीय निवास वाले बंगले मिले हुए हैं, जिनमें उनका ऑफिस और गेस्ट हाउस भी होता है। आगन्तुकों और अतिथियों की वजह से रसोइया, धोबी, माली, नाई, नौकर जैसी सुविधाएं भी कई कुलपतियों के पास होती हैं। वहीं, उच्च शिक्षा मंत्री को भी बंगले, वेतन और नौकर जैसी सुविधाएं मिलती हैं, लेकिन कुलपति निवास की तुलना में कर्मचारी नहीं मिलते। राज्यपाल विश्वविद्यालय से ऑर्डिनेस पास कर धोबी, नाई, कुक, माली और गार्ड अपनी मर्जी के हिसाब से रख सकते हैं, वहीं मंत्री को तय स्टाफ से ज्यादा रखने पर सरकार से मंजूरी लेनी पड़ती है। राजस्थान विश्वविद्यालय के कुलपति को सबसे ज्यादा 2.60 लाख रुपए वेतन मिलता है, वहीं अन्य कुलपतियों को भी करीब 2.25 लाख रुपए वेतन मिलता है। मंत्री को भी शासकीय निवास वाले बंगले ही मिलते हैं, लेकिन बंगले, वेतन और नौकर की सुविधाएं कुलपति की तुलना में कम है। <br /><br /><strong>मंत्री को ये सुविधाएं</strong><br />उच्च शिक्षा मंत्री राजेन्द्र यादव को 62 हजार रुपए वेतन और 80 हजार रुपए सत्कार भत्ता मिलता है। इसके अलावा अन्य मंत्रियों की तरह सरकारी गाड़ी और बंगला, पीए, गनमैन, गार्ड और अन्य स्टाफ की सुविधाएं मिलती हैं। सरकारी बंगला शासकीय आवास होने के कारण चार लोगों का स्टाफ मिलता है। <br /><br /><strong>हां कुलपतियों को मिलती है अधिक छूट</strong><br />हां, यह बात सही है कि कुलपतियों को मिलने वाली सुविधाएं मंत्रियों की तुलना में कहीं ज्यादा  हैं। कुलपतियों को सुविधाएं यूनिवर्सिटी एक्ट के हिसाब से मिलती हैं। हालांकि मंत्री और कुलपति की सुविधाओं की तुलना कई मायनों में उचित नहीं है, लेकिन कुलपतियों को अपनी सुविधाएं बढ़ाने में मंत्रियों से ज्यादा छूट होती है। - <strong>कैलाश सोढ़ानी, पूर्व कुलपति, एमडीएस विवि,अजमेर </strong><br /><br /><strong>शिक्षाविदों का तर्क: कुलपति का ओहदा बड़ा</strong><br />हालांकि उच्च शिक्षामंत्री और कुलपति के ओहदे की तुलना में शिक्षाविद् अलग नजरिया रखते हैं। शिक्षाविदों का मानना है कि कुलपति सीधे तौर पर राज्यपाल के अधीन होते हैं। उनके अधीन यूनिवर्सिटी में कई राज्यों के विद्यार्थी रहते हैं। लिहाजा विद्वत्ता के मानकों के हिसाब से कुलपति का ओहदा उच्च शिक्षा मंत्री से बड़ा होता है। अधिकांश उच्च शिक्षा मंत्री कुलपतियों के योग्यता और अनुभव के सामने कहीं नहीं टिकते।</p>
<p><strong><br />नजरिया बदलने के लिए ये कारण जिम्मेदार</strong><br />बड़ा ओहदा होने के बावजूद मंत्रियों की तुलना में समाज में कम आंकने की प्रवृत्ति के लिए कुलपतियों की भूमिका भी काफी हद तक जिम्मेदार है। किसी जमाने में बीएचयू के कुलपति से मिलने प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति जैसे लोग पहुंचते थे। पॉलिटिकल पहुंच से पद हासिल करने वाले कुलपति कई मौकों पर मंत्रियों के पास पहुंचकर या उन्हें रिसीव करने पहुंचते हैं तो लोग उन्हें छोटा आंकने लगते हैं। अपने व्यक्तित्व और शख्यिसत के विपरीत आचरण दिखाने में कई कुलपतियों की घटनाएं रही हैं। अजमेर के एक कुलपति निजी कॉलेज संचालक से रिश्वत लेकर जेल गए। <br /><br /><strong>कुलपतियों को मिलने वाली सुविधाएं</strong><br />आरयू के कुलपति का बंगला सभी बंगलों में बड़ा माना जाता है, वहीं यूनिवर्सिटी एक्ट के हिसाब से उनको सबसे ज्यादा वेतन-भत्ते मिलते हैं। अन्य सुविधाएं तकरीबन सभी कुलपतियों की समान सी होती हैं। कुलपति कम से कम 10 से 12 कर्मचारियों का स्टाफ रख सकता है और अधिकतम की कोई संख्या तय नहीं है। सुविधाओं में गाड़ी, वीसी लॉज के लिए गार्ड, कुक, माली, नाई, धोबी, आदि। वीसी ऑफिस के लिए तीन चौकादीर, तीन गार्ड, आठ चपरासी और मंत्रालय कर्मचारियों में एक पीए, एक पीएस, एक स्टेनो, दो बाबू मिलते हैं। कुलपति चाहे तो अध्यादेश के माध्यम से अपनी मर्जी से स्टाफ की संख्या में बढ़ोतरी कर सकता है। राजस्थान विश्वविद्यालय के कुलपति का वेतन दो लाख दस हजार बेसिक है। टीए, 31 प्रतिशत डीए और अलाउंस सहित 2,60,000 रुपए है। अन्य कुलपतियों को कुल वेतन करीब 2.25 लाख रुपए तक मिलता है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>शिक्षा जगत</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 22 Feb 2022 14:54:18 +0530</pubDate>
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                <title> डॉ. सुधीर भण्डारी राजस्थान स्वास्थ्य विज्ञान विश्वविद्यालय के कुलपति नियुक्त</title>
                                    <description><![CDATA[<p>जयपुर। राज्यपाल एवं कुलाधिपति कलराज मिश्र ने शुक्रवार को आदेश जारी कर सवाई मानसिंह  चिकित्सा महाविद्यालय एवं चिकित्सालय जयपुर के प्रधानाचार्य एवं नियंत्रक डॉ. सुधीर भण्डारी को राजस्थान स्वास्थ्य विज्ञान विश्वविद्यालय का कुलपति नियुक्त किया है। </p>
<p>मिश्र ने डॉ. भण्डारी को कार्यभार संभालने की तिथि से पांच वर्ष या सत्तर वर्ष की आयु प्राप्त कर लेने तक, इनमें से जो भी पहले हो, के लिए राजस्थान स्वास्थ्य विज्ञान विश्वविद्यालय का कुलपति नियुक्त किया है। यह नियुक्ति राज्य सरकार के परामर्श से सक्षम प्राधिकारी द्वारा सतर्कता अनापति प्रस्तुत करने के अधीन की गयी है।</p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/dr--sudhir-bhandari-appointed-as-vice-chancellor-of-rajasthan-university-of-health-sciences--governor-and-chancellor-kalraj-mishra-issued-orders/article-4601"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-02/sudhirbhandari.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। राज्यपाल एवं कुलाधिपति कलराज मिश्र ने शुक्रवार को आदेश जारी कर सवाई मानसिंह  चिकित्सा महाविद्यालय एवं चिकित्सालय जयपुर के प्रधानाचार्य एवं नियंत्रक डॉ. सुधीर भण्डारी को राजस्थान स्वास्थ्य विज्ञान विश्वविद्यालय का कुलपति नियुक्त किया है। </p>
<p>मिश्र ने डॉ. भण्डारी को कार्यभार संभालने की तिथि से पांच वर्ष या सत्तर वर्ष की आयु प्राप्त कर लेने तक, इनमें से जो भी पहले हो, के लिए राजस्थान स्वास्थ्य विज्ञान विश्वविद्यालय का कुलपति नियुक्त किया है। यह नियुक्ति राज्य सरकार के परामर्श से सक्षम प्राधिकारी द्वारा सतर्कता अनापति प्रस्तुत करने के अधीन की गयी है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>शिक्षा जगत</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 18 Feb 2022 14:28:51 +0530</pubDate>
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