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                <title>interim stay - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <title>करूर भगदड़ मामले में सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, पीड़ित परिवारों को अनुकंपा नौकरी देने पर मद्रास हाईकोर्ट के आदेश पर रोक</title>
                                    <description><![CDATA[उच्चतम न्यायालय ने मद्रास उच्च न्यायालय के उस आदेश पर अंतरिम रोक लगा दी है, जिसमें करूर भगदड़ त्रासदी के पीड़ितों के परिवारों को अनुकंपा के आधार पर नौकरी देने के तमिलनाडु सरकार के फैसले को रद्द कर दिया गया था। शीर्ष अदालत ने राज्य सरकार की याचिका पर नोटिस जारी करते हुए मामले में आगे की सुनवाई तय की है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/supreme-courts-big-decision-in-karur-stampede-case-stay-on/article-162930"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/superme-court.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। उच्चतम न्यायालय ने शुक्रवार को मद्रास उच्च न्यायालय के उस आदेश पर रोक लगा दी है, जिसमें करूर भगदड़ त्रासदी के पीड़ितों के परिवारों को अनुकंपा के आधार पर नौकरी देने के तमिलनाडु सरकार के फैसले को रद्द कर दिया गया था। न्यायमूर्ति जे.बी. पारदीवाला और न्यायमूर्ति के. विनोद चंद्रन की पीठ ने उच्च न्यायालय के फैसले को चुनौती देने वाली राज्य सरकार और अन्य की याचिका पर नोटिस जारी किया है। इसके साथ ही शीर्ष अदालत ने हाईकोर्ट के आदेश के अमल पर अंतरिम रोक लगा दी है।</p>
<p>तमिलनाडु सरकार की ओर से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी और मुकुल रोहतगी ने संविधान के अनुच्छेद 162 के तहत करूर भगदड़ पीड़ितों के परिवारों को अनुकंपा नियुक्ति देने के राज्य के फैसले का बचाव किया। सिंघवी ने मद्रास उच्च न्यायालय के दखल पर सवाल उठाते हुए कहा कि सरकार की नीति को किसी ने चुनौती नहीं दी थी। वहीं, एक राजनीतिक दल की ओर से पेश हुए अधिवक्ता ए. वेलन ने हितों के टकराव का आरोप लगाते हुए राज्य सरकार की इस नीति का विरोध किया।</p>
<p>सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति पारदीवाला ने इस आपत्ति पर सवाल उठाया और पूछा कि सरकार किसी पीड़ित के जीवित आश्रितों को रोजगार क्यों नहीं दे सकती, खासकर तब जब मृतक ही परिवार का एकमात्र कमाने वाला व्यक्ति रहा हो। इसके साथ ही, न्यायमूर्ति चंद्रन ने इस मामले में राजनीति को बीच में लाने से बचने की चेतावनी दी। उल्लेखनीय है कि इससे पहले मद्रास उच्च न्यायालय ने इन नियुक्तियों को यह कहते हुए रद्द कर दिया था कि ये संविधान के अनुच्छेद 14 और 16 का उल्लंघन करती हैं। उच्च न्यायालय ने यह भी टिप्पणी की थी कि इस तरह के फैसले से भविष्य में ऐसे दावों की बाढ़ आ सकती है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 14 Aug 2026 18:24:32 +0530</pubDate>
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                <title>हाईकोर्ट से निंबाराम को राहत : आरएसएस के क्षेत्रीय प्रचारक निंबाराम के विरुद्ध दंडात्मक कार्रवाई करने पर अंतरिम रोक </title>
                                    <description><![CDATA[अदालत ने सरकारी वकील को 22 फरवरी तक केस डायरी और ऑडियो-वीडियो की क्लिप पेश करने को कहा है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/rajasthan-high-court-has-granted-an-interim-stay-to-take-punitive-action-against-rss-s-regional-pracharak-nimbaram-in-a-case-related-to-bvg-company-demanding-a-bribe-of-20-crores-in-return-for-payment-of-rs-276-crore-dues-to-the-municipal-corporation/article-4606"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-02/nigam_hc.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। राजस्थान हाईकोर्ट ने बीवीजी कंपनी के नगर निगम पर बकाया 276 करोड रुपए के भुगतान के बदले बीस करोड की रिश्वत मांगने से जुडे मामले में आरएसएस के क्षेत्रीय प्रचारक निंबाराम के विरुद्ध दंडात्मक कार्रवाई करने अंतरिम रोक लगा दी है। इसके साथ ही अदालत ने सरकारी वकील को 22 फरवरी तक केस डायरी और ऑडियो-वीडियो की क्लिप पेश करने को कहा है। जस्टिस फरजंद अली की एकलपीठ ने यह आदेश निम्बाराम की आपराधिक याचिका पर दिए।</p>
<p> </p>
<p>याचिका में कहा गया कि प्रकरण में याचिकाकर्ता का नाम राजनीतिक द्वेषता के चलते शामिल किया गया है। बीवीजी कंपनी के प्रतिनिधि और राजाराम गुर्जर उसके पास राममंदिर के चंदे का प्रस्ताव लेकर आए थे, लेकिन तब तक चंदा लेने की समयावधि पूरी हो चुकी थी। इस पर याचिकाकर्ता ने प्रताप गौरव केन्द्र के लिए चंदा देने का सुझाव दिया था। याचिकाकर्ता के साथ बैठक के दौरान कंपनी के प्रतिनिधियों ने चंदे के साथ ही कंपनी की समस्याओं के बारे में बताया था। इसके अलावा ऑडियो-वीडियो क्लिप में बदले की भावना से कांट-छांट की गई है। याचिकाकर्ता को हाइकोर्ट पूर्व में गिरफ्तार करने पर भी रोक लगा चुके हैं। ऐसे में मामले में याचिकाकर्ता के विरुद्ध दर्ज एफआईआर को रद्द किया जाए।</p>
<p><br />जिसका विरोध करते हुए सरकारी वकील ने कहा कि कंपनी के बकाया भुगतान के बदले रिश्वत की बातचीत में निंबाराम की सक्रिय भागीदारी रही है। एसीबी के पास रिश्वत के पर्याप्त साक्ष्य हैं। इसके अलावा याचिकाकर्ता को गिरफ्तार करने के लिए सिर्फ सात दिन की रोक लगी थी। पुलिस जांच में निम्बाराम के विरुद्ध साक्ष्य प्रमाणित है। ऐसे में याचिका को खारिज किया जाए। जिस पर सुनवाई करते हुए एकलपीठ ने दंडात्मक कार्रवाई पर रोक लगाते हुए केस डायरी और ऑडियो-वीडियो की क्लिप पेश करने को कहा है। गौरतलब है कि वायरल वीडियो के आधार पर एसीबी ने पूर्व मेयर सौम्या गुर्जर के पति राजाराम, बीवीजी कंपनी के प्रतिनिधि ओमकार सप्रे, संदीप चौधरी और निंबाराम के खिलाफ मामला दर्ज किया था। एसीबी ने पूर्व में राजाराम और सप्रे के खिलाफ आरोप पत्र पेश करते हुए चौधरी व निंबाराम के खिलाफ जांच लंबित रख रखी है। फिलहाल राजाराम और सप्रे जमानत पर चल रहे हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 18 Feb 2022 15:28:21 +0530</pubDate>
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