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                <title>सफेद हाथी बन गया रिवर फ्रंट का घाटा, अभी तक नहीं दी दुकानें भी किराए पर</title>
                                    <description><![CDATA[रोजाना करीब 15 सौ पर्यटकों के प्रवेश टिकट और शादियों व शूटिंग की बुकिंग शामिल है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/river-front-has-become-a-white-elephant--incurring-losses/article-116244"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-06/rtroer-(2)6.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। कांग्रेस सरकार के समय में नगर विकास न्यास द्वारा बनाए गए विश्व स्तरीय पर्यटन स्थल चम्बल रिवर फ्रंट का संचालन करना बड़ी चुनौती बनती जा रही है। इसका संचालन करने वाली फर्म ही नहीं मिल रही है। जिससे रिवर फ्रंट से केडीए का हर महीने का घाटा कम नहीं हो रहा है। चम्बल नदी के दोनों छोर पर करीब 1442 करोड़ की लागत से बने रिवर फ्रंट का संचालन वर्तमान में कोटा विकास प्राधिकरण  द्वारा ही किया जा रहा है। यहां की व्यवस्थाओं के लिए गुरुग्राम की फर्म द्वारा मेनपावर उपलब्ध करवाई हुई है। जिसकी एवज में केडीए को हर महीने करीब एक से सवा करोड़ रुपए का भुगतान करना पड़ रहा है। उसके अलावा बिजली का बिल समेत अन्य व्यवस्थाओं पर भी केडीए को करीब एक करोड़ का खर्चा करना पड़ रहा है। हर महीने करीब दो करोड़ से अधिक का खर्चा करने के बाद भी केडीए को केवल आधी ही एक करोड़ रुपए करीब ही आय हो रही है। जिसमें  रोजाना करीब 15 सौ पर्यटकों के प्रवेश टिकट और शादियों व शूटिंग की बुकिंग शामिल है। </p>
<p><strong>अभी तक नहीं दी दुकानें भी किराए पर</strong><br />केडीए की ओर से पूर्व में यहां दोनों छोर पर बनी दुकानों को किराए पर देने की योजना थी। लेकिन जब दुकानों से लेकर पूरे रिवर फ्रंट का संचालन एक ही फर्म को देने की योजना बनी तो अभी तक उन दुकानों को भी किराए पर नहीं दिया जा सका है। </p>
<p><strong>हर साल 6 करोड़ देने को कोई तैयार नहीं</strong><br />केडीए की ओर से जिस तरह से रिवर फ्रंट संचालन का टेंडर डॉक्यूमेंट तैयार किया गया था। उस हिसाब से पहले साल में जो भी फर्म इसका संचालन करेगी उसे केडीए को कुछ नहीं देना होगा। दूसरे साल में 1.80 करोड़  रुपए सालाना केडीए को देना होगा। तीसरे साल में 3 करोड़ और चौथे साल में फर्म द्वारा 6 करोड़ रुपए वार्षिक केडीए को देना होगा। चौथे साल में जो फर्म 6 करोड़ या उससे अधिक का भुगातन केडीए को कर सकेगा उसी फर्म को इसका  ठेका दिया जाएगा। यह ठेका 20 साल के  लिए दिया जाना है। जानकारों के अनुसार हालत यह है कि अभी तक इतनी अधिक राशि का भुगतान करने वाली कोई भी फर्म केडीए को नहीं मिली है। जबकि वर्तमान में केडीए को हर महीने घाटा हो रहा है और केडीए मेन पावर उपलब्ध करवाने वाली फर्म को भुगतान कर रही है। जबकि केडीए के टेंडर डॉक्यूमेंट के अनुसार फर्म को उस घाटे को सहन करते हुए केडीए को भुगतना करना होगा।  सूत्रों का कहना है कि जब तक फर्म को इससे कमाई नहीं होगी तब तक कोई भी फर्म इसे लेकर नुकसान में नहीं जाना चाहती। ऐसे में यह केडीए के लिए सफेद हाथी बन गया है। </p>
<p><strong>बोट संचालक फर्म ने दी चुनौती</strong><br />सूत्रों के अनुसार रिवर फ्रंट का संचालन एक ही फर्म को देने का जैसे ही टेंडर डॉक्यूमेंट तैयार हुआ और आॅनलाइन अपलोड किया गया। वैसे ही रिवर फ्रंट एरिया में बोट संचालन फर्म ने केडीए को हाईकोर्ट में चुनौती दे दी। सूत्रों के अनुसार संचालक फर्म का कहना है कि उनका 15 साल का एमओयू हुआ है। ऐसे  में केडीए अब इसे किसी ओर को कैसे दे सकता है। इस संबंध में केडीए की ओर से कोर्ट में जवाब भी पेश किया गया है। </p>
<p><strong>एक ही फर्म को देने की योजना</strong><br />रिवर फ्रंट से केडीए को हर महीने हो रहे घाटे को कम करने के लिए केडीए द्वारा इसका संचालन एक ही फर्म को देने की योजना है। जिसके लिए केडीए द्वारा टेंडर डॉक्यूमेंट तैयार किया गया था। ुजिसे आॅनलाइन अपलोड किया गया। करीब एक माह से अधिक का समय होने पर जयपुर की सिर्फ एक ही फर्म ने इसके संचालन के लिए टेंडर डाला। लेकिन वह फर्म भी तकनीकी बिड़  में सफल नहीं हो सकी। जिससे टेंडर को निरस्त करना पड़ा। उसके बाद से अभी तक दोबारा नया टेंडर नहीं किया जा सका है। </p>
<p><strong>पर्यटन को बढ़ावा देने के हों प्रयास</strong><br />चम्बल रिवर फ्रंट न केवल कोटा वासियों के लिए वरन् पूरे देश में पर्यटन का बेहतर स्थल बना है। इसे देखने के लिए देशी विदेशी पर्यटक आ रहे हैं। इसका निर्माण करने में जनता के करोड़ों रुपए खर्च हुए हैं। ऐसे में इसे कमाई का जरिया बनाने के स्थान पर पर्यटन को बढ़ाने देने  के लिए इसका देश विदेश व पर्यटन टूर में शामिल करने का प्रयास करना चाहिए। देशी विदेशी पर्यटक अधिक आएंगे तो आय भी बढ़ेगी। <br /><strong>-महेश अग्रवाल, इंद्र विहार</strong></p>
<p><strong>प्रचार-प्रसार हो तो कई फर्म आ सकती हैं</strong><br /> रिवर फ्रंट अपने आप में अनोखा पर्यटन स्थल बनाया गया है। इसका संचालन करना वैसे तो आसान नहीं है। लेकिन केडीए अधिकारी यदि प्रयास करें और इसका उचित माध्यम से सही जगह पर प्रचार-प्रसार करें। देश विदेश में इस तरह के पर्यटन स्थलों का संचालन करने वाली बड़ी फर्मो से सम्पर्क करें तो ऐसी कई फर्म मिल सकती हैं जो इसका लाभ के साथ संचालन कर पाएंगी। घाटे में होने से इसे बंद नहीं किया जाना चाहिए। वरन् इसे बढ़ावा देने के प्रयास होने चाहिए। <br /><strong>-रिंकल माहेश्वरी, राजीव गांधी नगर </strong></p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br />चम्बल रिवर फ्रंट को एक ही फर्म द्वारा संचालित करने के लिए इसका टेंडर जारी किया था। जयपुर की एक फर्म ने टेंडर डाला था। लेकिन वह फर्म सफल नहीं हो सकी। जिससे टेंडर को निरस्त करना पड़ा। फिलहाल अभी इसका दोबारा से कोई टेंडर नहीं किया गया है। वर्तमान स्थिति जस की तस है। रिवर फ्रंट का संचालन वर्तमान में केडीए द्वारा ही किया जा रहा है। भविष्य में उच्चाधिकारियों के निर्देशानुसार आगे की कार्यवाही की जाएगी।  <br /><strong>-महेन्द्र सक्सेना, एक्सईएन, कोटा विकास प्राधिकरण </strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 03 Jun 2025 15:20:32 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>युवराज सिंह ने रियल एस्टेट फर्म को कोर्ट में घसीटा, घटिया सामान लगाने का आरोप</title>
                                    <description><![CDATA[ याचिका में कहा गया है कि बिल्डर ने युवराज सिंह को नवंबर 2023 में फ्लैट का पजेशन लेटर दिया था। युवराज सिंह जब फ्लैट देखने गए तो उन्होंने पाया कि फ्लैट की क्वालिटी काफी घटिया है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/yuvraj-singh-drags-real-estate-firm-to-court-accuses-him/article-84230"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-07/yuvraj-singh.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। दिल्ली हाईकोर्ट ने क्रिकेटर युवराज सिंह की एक रियल एस्टेट फर्म के खिलाफ फ्लैट देने में देरी और करार का उल्लंघन करने के आरोपों पर सुनवाई करते हुए रियल इस्टेट कंपनी को नोटिस जारी किया है।  युवराज सिंह ने अपनी याचिका में बिल्डर और उनके बीच मामले को निपटाने के लिए मध्यस्थ की नियुक्ति की मांग की है। याचिका में कहा गया है कि युवराज सिंह ने 2021 में बिल्डर एटोलाइट प्राईवेट लिमिटेड से एक फ्लैट बुक कराया था। </p>
<p><strong>14 करोड़ 10 लाख रुपए में फ्लैट खरीदा </strong><br />फ्लैट दिल्ली के हौज खास में स्थित है। युवराज सिंह ने 2021 में करीब 14 करोड़ 10 लाख रुपए में फ्लैट खरीदा था। याचिका में कहा गया है कि बिल्डर ने युवराज सिंह को नवंबर 2023 में फ्लैट का पजेशन लेटर दिया था। युवराज सिंह जब फ्लैट देखने गए तो उन्होंने पाया कि फ्लैट की क्वालिटी काफी घटिया है। याचिका में कहा गया है कि बिल्डर ने फ्लैट के निर्माण में अच्छी गुणवता की सामग्री का इस्तेमाल नहीं किया है।</p>
<p><strong>पजेशन देने में भी देरी की</strong><br />याचिका में कहा गया है कि फ्लैट की फिटिंग, फर्निशिंग, लाईटिंग और फिनिशिंग घटिया क्वालिटी की है। इसके अलावा बिल्डर ने तय समय से देरी से फ्लैट दिया है। युवराज सिंह ने फ्लैट को देने में देरी और उसके निर्माण में घटिया सामग्री के इस्तेमाल पर मुआवजा की मांग की है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 10 Jul 2024 09:42:25 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>रोडवेज से अब पार्सल भेजना मुश्किल</title>
                                    <description><![CDATA[ अब प्रदेशवासियों को रोडवेज बसों के माध्यम से सामान भेजने की सुविधा फिलहाल नहीं मिल सकेगी। राजस्थान रोडवेज मुख्यालय ने रोडवेज बसों में पार्सल सेवा का काम करने वाली फर्म सांई श्रृद्धा कारगो का लाइसेंस समाप्त कर दिया है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/now-it-is-difficult-to-send-parcels-by-roadways/article-8010"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-04/ma4).jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। अब प्रदेशवासियों को रोडवेज बसों के माध्यम से सामान भेजने की सुविधा फिलहाल नहीं मिल सकेगी। राजस्थान रोडवेज मुख्यालय ने रोडवेज बसों में पार्सल सेवा का काम करने वाली फर्म सांई श्रृद्धा कारगो का लाइसेंस समाप्त कर दिया है। साथ ही फर्म की अमानत राशि को जप्त कर लिया है। सांई श्रृद्धा कारगो राजस्थान रोडवेज बसों के माध्यम से माल परिवहन का काम अनुबंध पर कर रही थी। <br /><br />रोडवेज मुख्यालय की ओर से जारी आदेशों में स्पष्ट किया गया है कि ‘सांई श्रृद्धा कारगो’ से छोटे पार्सल को परिवहन करने का अनुबंध किया गया था। अनुबंध शर्तों के अनुसार फर्म को त्रिमासिक अनुबंध राशि 34 लाख 53 हजार रुपए एक साथ जमा करनी थी। परन्तु फर्म की ओर से यह राशि किस्तों में जमा कराई गई, साथ ही पूरी राशि का भुगतान भी नहीं किया गया। ऐसे में रोडवेज प्रबंधन ने अमानत राशि जप्त करने के साथ ही फर्म का अनुबंध समाप्त कर दिया है। रोडवेज बसों में पार्सल सेवा का अनुबंध समाप्त होने से उन लोगों के सामने परेशानी खडी हो जाएगी, जो अपना सामान रोडवेज बसों के माध्यम से भेजते और मांगाते हैं। पहले यदि किसी को अपना सामान जल्दी और सुरक्षित तरीके से प्रदेश में कहीं भेजना होता था तो रोडवेज बस में सामान की बुकिंग करा सकते थे।   पार्सल बस के माध्यम से गंतव्य बस स्टैण्ड पहुंच जाता थर््ा। परन्तु यह सुविधा फिलहाल कुछ समय के लिए नहीं मिल सकेगी। <br /><br />यह रास्ता तो खुला रहेगा<br />रोडवेज बसों में सामान अभी भी भेजा जा सकेगा, परन्तु अब सामान की गारंटी नहीं होगी। अब बस चालक अथवा परिचालक को ‘सेवा शुल्क’ देकर पार्सल भेज सकते हैं। लेकिन उसकी कोई रसीद और गारंटी नहीं होगी। ऐसे में सामान भेजना सुरिक्षत नहीं होगा। पार्सल इधर-उधर होने पर कोई वैधानिक कार्रवाई संभव नहीं हो पाएगी। <br /><br />प्राइवेट बसों की चांदी<br />रोडवेज की पार्सल सेवा बंद होने से प्राइवेट बस वालों की चांदी हो गई है। अब लोग प्राइवेट बसों से सामान की बुकिंग करा कर भेंजेंगे। उसकी कच्ची रसीद भी मिलेगी और सामान पहुंचने की गारंटी भी रहेगी। बस आपरेटर मनमाने दरों पर सामान की बुकिंग कर माल कमाएंगें।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 16 Apr 2022 15:36:39 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>नगर निगम कोटा उत्तर ने दिया ब्लैक लिस्टेड फर्म को टेंडर</title>
                                    <description><![CDATA[नगर निगम कोटा उत्तर द्वारा 28/12/ 2021 को 4 सेक्टरों में 300 श्रमिक आपूर्ति हेतु निविदाएं आमंत्रित की गई थी। इन निविदाओं में 20 सवेदकों ने भाग लिया था जिसमें 17 सवेदक सफल पाए गए थे । ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/municipal-corporation-kota-north-gave-tender-to-blacklisted-firm/article-6745"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-03/32.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा । नगर निगम कोटा उत्तर द्वारा 28/12/ 2021 को 4 सेक्टरों में 300 श्रमिक आपूर्ति हेतु निविदाएं आमंत्रित की गई थी। इन निविदाओं में 20 सवेदकों ने भाग लिया था जिसमें 17 सवेदक सफल पाए गए थे । नगर निगम द्वारा जो तकनीकी निविदा प्रपत्र जारी किया गया था उसमें 14 शर्ते थी जिसमें संख्या 12 नंबर की शर्त में यह साफ शब्दों में अंकित किया गया था कि कोई भी ऐसी फर्म जो किसी भी राज्य सरकार, केंद्र सरकार, निगम बोर्ड से ब्लैक लिस्टेड होगी उसे कार्य नहीं दिया जाएगा। इस हेतु उस फर्म द्वारा रु 50 के नॉन ज्यूडिशियल स्टांप पर लिख कर भी देना था हमारी फर्म कहीं भी ब्लैक लिस्टेड नहीं है। किन्तु हमारी जानकारी में आया  है कि राजस्थान सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट संस्था भोपो का बाड़ा अजमेर राजस्थान ने भी इस कार्य हेतु निविदा में हिस्सा लिया । जबकि यह फर्म कार्यालय नगर पालिका पुष्कर जिला अजमेर ने ब्लैक लिस्टेड फर्म है ।  ब्लैक लिस्टेड होने के आदेश की प्रतिलिपि ज्ञापन के साथ उपलब्ध करा दी गई है ।  हमारी जानकारी में आया कि नगर निगम प्रशासन ब्लैक लिस्टेड फर्म को ही इस निविदा में सफल मानकर देने की तैयारी कर रहा है । यदि ऐसा हुआ तो हम सभी पार्षदों द्वारा आंदोलन किया जाएगा । निगम कोटा उत्तर आयुक्त वासुदेव मलावत की अनुपस्थिति में पार्षदों ने मुख्य अभियंता प्रेम शंकर शर्मा को ज्ञापन सौंप कर उचित कार्रवाई की मांग की।  नवल सिंह हाडा, बीरबल लोधा, नंदकिशोर मेवाड़ा, रवि मीणा पार्षद व मोहन सैनी, योगेंद्र सैनी ,वरिष्ठ भाजपा कार्यकर्ता रामलाल सैनी की उपस्थित में ज्ञापन दिया गया।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 25 Mar 2022 18:00:05 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>आखिरकार निजी फर्म ने शुरू किया यूडी टैक्स सर्वे व वसूली</title>
                                    <description><![CDATA[वर्ष 2005 के बाद से नया सर्वे नहीं हुआ था, लेकिन अब नगर निगम कोटा दक्षिण ने निजी फर्म के माध्यम से नगरीय कर वसूलने का टेंडर किया है। जिसका ठेका रांची की फर्म को मिला है। जिसने सर्वे के साथ ही वसूली भी शुरू कर दी है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/eventually-the-private-firm-started-the-survey-and-recovery-of-ud-tax-of-the-corporation/article-5520"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-03/nigam_kota.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। नगर निगम कोटा दक्षिण की बोर्ड बैठक में यूडी टैक्स की वसूली निजी फर्म से नहीं कराने के निर्णय के बावजूद निजी फर्म ने वसूली शुरू कर दी है। इसके साथ निजी फर्म ने लगभग 15 वर्ष बाद  (यूडी टैक्स) सर्वे भी शुरू कर दिया है।  रांची की फर्म को नगर निगम कोटा दक्षिण ने वसूली का टेंडर दिया गया है। जिसने सर्वे के साथ ही वसूली भी शुरू कर दी है। शहर में व्यवसायिक व आवासीय भूखंडों से नगर निगम द्वारा हर साल नगरीय विकास कर वसूल किया जाता है। इसके लिए नगर निगम द्वारा मापदंड निर्धारित किए हुए हैं। उसके अनुसार ही नियमानुसार हर साल यूडी टैक्स की राशि संबंधित व्यक्ति को नगर निगम में जमा करवानी होती है। अभी तक नगर निगम द्वारा यह कर वर्ष 2005 में हुए सर्वे के आधार पर ही वसूल किया जा रहा था। वर्ष 2005 के बाद से नया सर्वे नहीं हुआ था, लेकिन अब नगर निगम कोटा दक्षिण ने निजी फर्म के माध्यम से नगरीय कर वसूलने का टेंडर किया है। जिसका ठेका रांची की फर्म को मिला है। नगर निगम ने उसे जनवरी में कार्यादेश भी जारी कर दिया है। जिसके बाद फर्म ने शहर में सर्वे तो शुरू कर ही दिया है। साथ ही उसके अनुसार कर भी वसूलना शुरू कर दिया है। <br /><br /><strong>दो साल का दिया टेंडर</strong><br />नगर निगम कोटा दक्षिण द्वारा रांची की फर्म को फिलहाल दो साल का टेंडर दिया है। हर साल 7 करोड़ रुपए का लक्ष्य तय किया गया है। फर्म को 11 फीसदी कमीशन पर यह टेंडर दिया है। सूत्रों के अनुसार संबंधित फर्म ने कार्यादेश मिलते ही 27 जनवरी से काम भी शुरू कर दिया है। साथ ही 6 दिन में करीब 15 से 20 लाख रुपए कर भी वसूल कर लिया है। फर्म के शहर में 15 कर्मचारी काम कर रहे हैं। वे सर्वे के तुरंत बाद बिल बनाकर संबंधित व्यक्ति को दे रहे हैं। व्यक्ति  नगरीय विकास कर की राशि का चैक या डीडी से भुगतान कर रहा है। सूत्रों के अनुसार अभी तक फर्म द्वारा करीब 15 से 20 लाख रुपए टैक्स  वसूल भी कर लिया है। यह टैक्स नियमानुसार ही लिया जाएगा। <br /><br /><strong>निगम का राजस्व अनुभाग नहीं कर पा रहा था लक्ष्य पूृरा</strong><br />नगर निगम द्वारा हर साल बजट में नगरीय विकास कर वसूली का लक्ष्य तय किया जाता है। पिछले कई सालों से नगर निगम यह कर पूरा नहीं वसूल  पा रहा था। इसका कारण निगम के राजस्व अनुभाग के पास अधिकारी व कर्मचारियों की कमी होना बताया जा रहा था। हालत यह है कि चालू वित्तीय वर्ष में दोनों नगर निगमों में 12 करोड़ की एवज में 31 जनवरी तक मात्र 2.68 करोड़ रुपए ही नगरीय विकास कर वसूल किया जा सका है। <br /><br /><strong>बजट की बोर्ड बैठक में हुआ विरोध, टेंडर निरस्त करने का निर्णय</strong><br />नगर निगम कोटा दक्षिण की बजट बोर्ड बैठक 17 फरवरी को आयोजित की गई थी। जिसमें निजी फर्म द्वारा यूडी टैक्स वसूल करने का विरोध किया गया। जिसके बाद बैठक में सर्व सम्मति से यूडी टैक्स का टेंडर निरस्त करने का निर्णय लिया गया था। लेकिन जब तक टेंडर निरस्त करने का निर्णय हुआ तब तक बहुत देर हो चुकी थी। निगम ने संबंधित फर्म को कार्यादेश ही जारी कर दिया था। <br /><br /><strong>कोटा उत्तर में टेंडर प्रक्रिया जारी</strong><br />नगर निगम कोटा दक्षिण में तो यूडी टैक्स का टेंडर रांची की फर्म को दिया जा चुका है। जिसने काम भी शुरू कर दिया है। जबकि नगर निगम कोटा उत्तर में अभी तक यह फाइनल नहीं हुआ है। यहां यूृडी टैक्स अभी भी टेंडर प्रक्रिया में ही चल रहा है। <br /><br /><strong>कोटा उत्तर ने बढ़ाया एक करोड़ का लक्ष्य</strong><br />नगर निगम कोटा दक्षिण ने चालू वित्तीय वर्ष के समान ही आगामी वित्तीय वर्ष का नगरीय विकास कर लक्ष्य 7 करोड़ रुपए ही रखा है। जबकि नगर निगम कोटा उत्तर ने अपने चालू वित्तीय वर्ष के 5 करोड़ रुपए से एक करोड़ रुपए बढ़ाकर आगामी वित्त वर्ष का लक्ष्य 6 करोड़ रुपए कर दिया है। <br /><br /><strong>इनका कहना है</strong><br />पिछले दो साल से कोरोना संक्रमण और राजस्व अनुभाग में कर्मचारियों की कमी के चलते यूडी टैक्स का लक्ष्य पूरा नहीं हो पा रहा था। साथ ही सर्वे भी काफी पुराना हो गया था।  जोधपुर व उदयपुर की तर्ज पर ही कोटा में निजी फर्म को टेंडर दिया है। जिससे नए सिरे से सर्वे भी हो जाएगा। साथ ही संबंधित फर्म को नगरीय कर वसूल करने पर एक निर्धारित राशि का भुगतान किया जाएगा। ऐसे में फर्म द्वारा अधिक कमीशन के प्रयास में अधिक से अधिक नगरीय कर वसूल  किया जाएगा। जिससे नगर निगम को लाभ होगा और आय भी बढ़ेगी। टेंडर निरस्त करने का निर्णय बोर्ड बैठक में हुआ है उस पर विधिक राय ली जाएग़ी। <br /><strong>-कीर्ति राठौड़, आयुक्त नगर निगम कोटा दक्षिण</strong><br /><br />निगम द्वारा यूडी टैक्स का टेंडर पहले ही किया जा चुका है। उसे निरस्त करने का निर्णय बोर्ड बैठक में सर्व सम्मति से बाद में लिया गया है। इस बारे में बोर्ड बैठक की प्रोसिडिंग आने के बाद ही पता चलेगा कि अधिकारियों ने क्या किया। <br /><strong>-राजीव अग्रवाल, महापौर, नगर निगम कोटा दक्षिण</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 05 Mar 2022 18:39:13 +0530</pubDate>
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                <title>ऑडियो-गाइड शुरू नहीं करने पर फर्म को किया ब्लैकलिस्ट</title>
                                    <description><![CDATA[पर्यटकों के अवलोकनार्थ इन्हें पुन: खोलने के बाद ऑडियो गाइड की सुविधा शुरू नहीं की गई थी। करीब डेढ़ साल से ये सुविधा बंद थी। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/firm-blacklisted-for-not-starting-audio-guide--on-october-16--2021--dainik-navjyoti-had-published-a-news-titled-audio-guide-closed-in-all-the-forts-and-palaces-of-the-city-for-one-and-a-half-years-due-to-the-lack-of-audio-guide-facility-for-tourists/article-4613"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-02/71.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। जयपुर के हवामहल स्मारक, अल्बर्ट हॉल संग्रहालय में पर्यटकों को ऑडियो गाइड की सुविधा देने वाली फर्म को पुरातत्व एवं संग्रहालय विभाग ने ब्लैकलिस्ट कर दिया है। इससे पहले विभाग ने इस सुविधा को शुरू करने के लिए संबंधित फर्म को कई बार पत्र लिखे, लेकिन इसके बावजूद ये व्यवस्था शुरू नहीं होने पर इसका टेंडर खत्म कर दिया। पुरातत्व विभाग के अधिकारियों के अनुसार अब ये निजी फर्म तीन साल तक विभाग की किसी भी टेंडर प्रक्रिया में हिस्सा नहीं ले सकेगी। पर्यटकों को ऑडियो गाइड की सुविधा नहीं मिलने पर दैनिक नवज्योति ने 16 अक्टूबर, 2021 को ‘शहर के सभी किले-महलों में डेढ़ साल से बंद ऑडियो-गाइड’ शीर्षक से खबर प्रकाशित की थी। इसके बाद अब विभाग ने संबंधित प्राइवेट फर्म को ब्लैक लिस्टेड कर दिया है।  गौरतलब है कि कोविड-19 के कारण मार्च, 2019 में लॉकडाउन के चलते स्मारकों को ऐहतियातन बंद कर दिया गया था। लेकिन इस बाद पर्यटकों के अवलोकनार्थ इन्हें पुन: खोलने के बाद ऑडियो गाइड की सुविधा शुरू नहीं की गई थी। करीब डेढ़ साल से ये सुविधा बंद थी। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 18 Feb 2022 16:26:46 +0530</pubDate>
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