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                <title>rajasthani - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <title>राजस्थान की बेटियों की आवाज़: 8 मई को रिलीज़ होगी फिल्म ‘हमारी बेटियां’, जयपुर में विशेष प्रदर्शन</title>
                                    <description><![CDATA[राजस्थानी फिल्म ‘हमारी बेटियां’ 8 मई को जयपुर के जैम सिनेमा में रिलीज होने के लिए तैयार है। मंगलवार को फिल्म का पोस्टर लॉन्च हुआ, जिसमें निर्देशक उग्रसेन तंवर और अभिनेत्री रेखा परिहार ने इसे महिला सशक्तिकरण का मजबूत संदेश बताया। दर्शक दोपहर 12 बजे के विशेष शो में फिल्म की स्टार कास्ट से भी मिल सकेंगे।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/voice-of-rajasthans-daughters-film-hamari-betiyan-will-be-released/article-152799"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/rera2.pdf-(1200-x-600-px)-(2).png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। राजस्थानी सिनेमा प्रेमियों के लिए खुशखबरी है कि महिला सशक्तिकरण पर आधारित बहुप्रतीक्षित राजस्थानी फिल्म ‘हमारी बेटियां’ 8 मई को रिलीज़ होने जा रही है। निर्देशक उग्रसेन तंवर के अनुसार, फिल्म को लेकर इंडस्ट्री में पहले से ही खासा उत्साह देखने को मिल रहा है। इस सिलसिले में मंगलवार को जयपुर के एक निजी होटल में फिल्म का पोस्टर लॉन्च हुआ। जयपुर के जैम सिनेमा में 8 से 14 मई तक प्रतिदिन दोपहर 12 बजे इसका विशेष शो आयोजित किया जाएगा। खास बात यह है कि दर्शकों को शो के दौरान फिल्म की स्टार कास्ट से मिलने का अवसर भी मिलेगा।</p>
<p>फिल्म में रेखा परिहार, ऋषभ साहू और अन्य कलाकारों ने दमदार अभिनय किया है। रेखा परिहार ने बताया कि यह फिल्म समाज में महिलाओं की भूमिका और उनके सशक्तिकरण को प्रभावी ढंग से दर्शाती है। निर्माता गणेश साहू की इस फिल्म में मधुर संगीत और पांच कर्णप्रिय गीत दर्शकों को आकर्षित करेंगे। यह फिल्म राजस्थान की संस्कृति और सामाजिक संदेश को बड़े पर्दे पर प्रस्तुत करने का एक महत्वपूर्ण प्रयास है। चीफ असिस्टेंट डायरेक्टर ज्योत्सना कौशिक सहित अन्य फिल्म में अपनी अहम भूमिका निभा रहे है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 05 May 2026 18:20:45 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>राजस्थान की सिनेमा को बड़ी उड़ान: ‘डुग डुग’ को मिला बॉलीवुड के दिग्गजों का साथ</title>
                                    <description><![CDATA[राजस्थानी फिल्म 'डुग डुग' ने राष्ट्रीय स्तर पर हलचल मचा दी है। अनुराग कश्यप और निक्खिल आडवाणी जैसे दिग्गज फिल्मकारों के समर्थन से सजी यह व्यंग्यात्मक मिस्ट्री फिल्म 8 मई को सिनेमाघरों में उतरेगी। सच्ची घटनाओं पर आधारित यह कहानी आस्था और समाज पर तीखा प्रहार करती है, जो क्षेत्रीय सिनेमा के लिए एक ऐतिहासिक मोड़ है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/big-flight-for-rajasthans-cinema-dug-dug-got-the-support/article-152795"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/rera2.pdf-(1200-x-600-px).png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। राजस्थान की फिल्म इंडस्ट्री के लिए एक ऐतिहासिक और गौरवपूर्ण शुरुआत हुई है। व्यंग्यात्मक मिस्ट्री फिल्म ‘डुग डुग’ अब राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाने के लिए तैयार है। खास बात यह है कि इस राजस्थानी फिल्म को समर्थन देने के लिए अनुराग कश्यप, निक्खिल आडवाणी, विक्रमादित्य मोटवाने और वसान बाला जैसे बड़े फिल्मकार एक साथ आए हैं। राजस्थानी कलाकारों से सजी ये फिल्म का निर्देशन युवा निर्देशक ऋत्विक पारीक ने किया है, जिन्होंने अपनी अनोखी कहानी और प्रस्तुति से अंतरराष्ट्रीय मंचों पर पहले ही सराहना बटोरी है।</p>
<p>यह पहली बार है जब किसी राजस्थानी फिल्म को इस स्तर का राष्ट्रीय समर्थन मिला है, जिससे प्रदेश की लोकल सिनेमा इंडस्ट्री को नई पहचान मिलने की उम्मीद है। ‘डुग डुग’ सच्ची घटनाओं से प्रेरित एक दिलचस्प कहानी है, जिसमें एक गांव में एक मृत व्यक्ति की मोटरसाइकिल को चमत्कारी मान लिया जाता है। धीरे-धीरे यह विश्वास एक बड़े सामाजिक और व्यावसायिक रूप में बदल जाता है। फिल्म व्यंग्य और हास्य के माध्यम से समाज की सोच और आस्था पर सवाल उठाती है। यह फिल्म 8 मई को देशभर के सिनेमाघरों में रिलीज़ होने जा रही है।</p>
<p>अंतरराष्ट्रीय फिल्म फेस्टिवल्स में सराहना पाने के बाद अब यह भारतीय दर्शकों के बीच अपनी छाप छोड़ने के लिए तैयार है। फिल्मकारों का मानना है कि ‘डुग डुग’ राजस्थानी सिनेमा को नई ऊंचाइयों तक ले जाने का काम करेगी। यह न केवल मनोरंजन प्रदान करेगी, बल्कि समाज को सोचने पर भी मजबूर करेगी। राजस्थान के लिए यह एक नए सिनेमा युग की शुरुआत मानी जा रही है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 05 May 2026 18:17:03 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>राजस्थानी व हाड़ौती अटल कवि सम्मेलन करवाने के संबंध में दिया ज्ञापन </title>
                                    <description><![CDATA[राजस्थानी  व हाड़ौती कवि सम्मेलन सुनने के लिए  श्रोता गण, कविता प्रेमी, साहित्य प्रेमी आते हैं जो सुबह तक सुनते हैं । ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/memorandum-given-regarding-organizing-rajasthani-and-hadoti-atal-kavi-sammelan/article-60472"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-10/kota1.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। नगर निगम कोटा उत्तर और दक्षिण की ओर से दशहरे मेले के दौरान राजस्थानी अटल कवि सम्मेलन नहीं करवाने के संबंध में नगर निगम कोटा उत्तर के भाजपा पार्षदों के प्रतिनिधिमंडल ने बुधवार को नगर निगम अधिकारियों को ज्ञापन दिया।  मेला अधिकारी के ढाई घंटे तक निगम कार्यालय नहीं पहुंचने पर पार्षद उनके कक्ष के बाहर धरने पर ही बैठ गए बाद में अतिरिक्त महिला अधिकारी को ज्ञापन सौंपा। कोटा उत्तर के भाजपा व निर्दलीय पार्षदों ने राष्ट्रीय दशहरा मेला अधिकारी को राजस्थानी कवि सम्मेलन व हाड़ौती अटल कवि सम्मेलन इस बार नहीं करवाने के संबंध में पार्षदों ने मिलकर ज्ञापन दिया जिसमें कहा कि राजस्थानी कवि सम्मेलन व हाड़ौती कवि सम्मेलन हमारी सांस्कृतिक धरोहर है जिसको सुनने के लिए राजस्थान वह हाड़ौती के श्रोता गण, कविता प्रेमी, साहित्य प्रेमी आते हैं जो सुबह तक सुनते हैं । यह  दशहरे मेले का मुख्य कार्यक्रम है यह हमारी 43 साल पुरानी परंपरा रही है। राजस्थानी कवि सम्मेलन व हाडौती कवि सम्मेलन के कार्यक्रम नहीं करवा कर प्रशासन मेले का स्वरूप बिगाड़ रहा है ।</p>
<p>पार्षद नवल सिंह हाडा ने बताया कि वह काफी देर तक मेला अधिकारी व कोटा  नगर निगम उत्तर के आयुक्त अनुराग भार्गव का इंतजार करते रहे लेकिन मेला अधिकारी जब करीब 2.30  घंटे तक नहीं पहुंचे तब पार्षद धरने पर बैठ गए। बाद मे मुख्य अभियंता व अतिरिक्त मेला अधिकारी प्रेम शंकर शर्मा आयुक्त के कक्ष में आए और ज्ञापन लिया। शर्मा ने  विश्वास दिलाया की मेला दशहरा जैसे पहले लगता था इस बार भी वैसे ही लगेगा</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 25 Oct 2023 16:18:01 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[kota]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>यूक्रेन के प्रवासी राजस्थान छात्र-छात्राओं की वापसी के लिए पूनिया की विदेश मंत्री जयशंकर को चिठ्ठी</title>
                                    <description><![CDATA[
यूक्रेन में रह रहे प्रवासी राजस्थानी छात्र-छात्राओं की सकुशल वापसी के लिए भाजपा प्रदेश अध्यक्ष डॉ. सतीश पूनिया ने विदेश मंत्री एस.जयशंकर को पत्र लिखकर किया आग्रह]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/bjp-state-president-dr--satish-poonia-wrote-a-letter-to-external-affairs-minister-s--jaishankar-urging-for-the-safe-return-of-migrant-rajasthani-students-living-in-ukraine/article-5042"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-02/satish-puniya2.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। यूक्रेन में रह रहे प्रवासी राजस्थानी छात्र- छात्राओं की सकुशल वापसी के लिए भाजपा प्रदेश अध्यक्ष डॉ. सतीश पूनिया ने विदेश मंत्री एस.जयशंकर को पत्र लिखकर आग्रह किया है।</p>
<p>डॉ. पूनिया ने विदेश मंत्री को पत्र में लिखा कि, यूक्रेन में बड़ी संख्या में राजस्थानी विद्यार्थी मेडिकल व अन्य संस्थानों में अध्ययनरत हैं। अभी वहां उत्पन्न हालातों के कारण विद्यार्थियों में आशंका का माहौल है, वे स्वयं को असुरक्षित महसूस कर रहे हैं। यह बहुत प्रसन्नता की बात है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने विद्यार्थियों की सकुशल वापसी के लिए सार्थक पहल प्रारंभ कर दी है। विगत कोरोनाकाल में भी मोदी सरकार ने वन्दे भारत मिशन के अंतर्गत प्रवासी राजस्थानी विद्यार्थियों की हमारे आग्रह पर सकुशल वापसी करवाई थी। इसी क्रम में विनम्र अनुरोध है कि यूक्रेन में रह रहे प्रवासी राजस्थानी विद्यार्थियों की राजस्थान में सकुशल वापसी करवाने का श्रम कराए।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 26 Feb 2022 12:32:15 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>समृद्ध राजस्थानी भाषा की उपेक्षा कब तक</title>
                                    <description><![CDATA[अन्य भाषाओं की तरह राजस्थानी भाषा की अपनी विशिष्ट परम्पराएं एवं परिवेश रहा है। राजस्थानी बोलने वालों की संख्या आज विश्व में 16 करोड़ तक पहुंच गई है।  ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/how-long-has-the-rich-rajasthani-language-been-neglected/article-4663"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-02/rajasthan_new.jpg" alt=""></a><br /><p>भाषा व्यक्ति के भावों की अभिव्यक्ति का सशक्त माध्यम होती है। पशु-पक्षी,कीट-पतंगे आदि सब जीवों की अपनी-अपनी भाषाएं हैं। ईश्वर की सर्वोतम कृति होने के नाते मानव ने अपनी भाषा का इतना विकास कर लिया कि वो छोटी से छोटी एवं बड़ी से बड़ी बात को अपने शब्दों से प्रकट कर देता है। अन्य भाषाओं की तरह राजस्थानी भाषा की अपनी विशिष्ट परम्पराएं एवं परिवेश रहा है। राजस्थानी बोलने वालों की संख्या आज विश्व में 16 करोड़ तक पहुंच गई है।  हिन्दी, बंगला,तेलगू,तमिल और मराठी के बाद इस दृष्टि से राजस्थानी का ही नाम आता है। मध्यकाल में मेवाड़,ढूंढाड़,हाड़ोती,गोड़वाड़, मेरवाड़ा, शेखावाटी,जंगळधर,मेवात व सवाळख अदि नाम शुरू हुए। कर्नल जेम्स टॉड की पुस्तक एनाल्स एण्ड एंटीक्रिटीज ऑफ  राजस्थान में सर्वप्रथम राजस्थान का नाम आया, उससे पहले यह प्रदेश राजपूताना के नाम से पुकारा जाता था। आजादी मिलने के बाद इस प्रदेश का नाम राजपूताना की जगह राजस्थान रखा गया। राजस्थान के स्थानवासी नाम से यहां की भाषा का नाम राजस्थानी रखा गया। इससे स्पष्ट है कि राजस्थानी अति प्राचीन भाषा है। इसका राजस्थानी नाम जरूर नया है, पहले यह मरूभाषा के नाम से जानी जाती थी। मध्यकाल में यह मरू गुर्जर कहलाई और स्वतंत्रता प्राप्ति के पश्चात इसका नाम राजस्थानी पड़ा।</p>
<p><br />सर जॉर्ज ग्रियर्सन नें जब लिग्विस्टिक सर्वे ऑफ  इण्डिया नामक महान ग्रन्थ लिखा तो उन्होंने राजस्थान में बोली जाने वाली इकसार व्याकरण के ढांचे के सभी बोलियों का एक कुटुम्ब एक परिवार माना और जैसे गुजरात की गुजराती है वैसे ही राजस्थानी भाषा को राजस्थानी नाम दिया। ग्रियर्यन के सामने भी सम्भवत: कर्नल टॉड की पुस्तक का आधार था। भाषा-भूगोल की दृष्टि से राजस्थान के पूर्व में (उत्तर-दक्षिण तक) ब्रज भाषा, दक्षिण में (पूर्व से पश्चिम तक) बुन्देली,मराठी, भीली, खानदेसी और गुजराती, पश्चिम  में (दक्षिण से उत्तर तक) सिंधी, लहंदा और उत्तर में (पश्चिम से पूर्व तक)   लहंदा,पंजाबी और बांगरू है। विंध्याचल और आबू पर्वत के बीच के पर्वतों में भीली बोली जाती है। अंग्रेजों ने अपनी राजनैतिक सुविधा के लिए मालवा को राजस्थान से अलग कर दिया, परन्तु लोक के संस्कारों, रहन-सहन, बोलचाल, वेशभूषा आदि की दृष्टि से वह राजस्थान का स्वाभाविक अंश है।  मध्यप्रदेश के सात  जिले मन्दसौर, रतलाम, राजगढ़ , उज्जैन, देवास , इन्दौर व धार को मध्यप्रदेश सरकार आज भी मालवी भाषी मानती है। हरियाणा के रोहतक, सोनीपत, हिसार, सिरसा, गुड़गांव, जीन्द ,महेन्द्रगढ़ आदि की भाषा बांगड़ू बोली राजस्थानी भाषा का ही एक रूप है। इससे यह स्पष्ट होता है कि राजस्थानी भाषा का  विस्तार कई दूसरे प्रदेशों तक है। राजनैतिक व्यवस्था और व्यवस्था के स्वरूप ने इस भाषा के विस्तार क्षेत्र को कुंठित कर दिया। स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद राजनैतिक तौर पर मनचाहे ढंग से राजस्थानी को हिन्दी की उप भाषा मानकर इसके विकास को बहुत बड़ी क्षति पहुंचाई गई, जो आज भी पूरी नहीं हो पा रही है।</p>
<p><br />राजस्थानी समस्त राजस्थान की अपनी भाषा है। राष्ट्रभाषा हिन्दी की इस बहन का कहीं किसी तरह का विरोध नहीं है। अंतर इतना ही है कि राजस्थानी राजस्थान की धरती के वासियों की मातृभाषा है। मातृभाषा से राष्ट्रभाषा का हमेशा मान बढ़ा हैै। लेकिन राजस्थान में बाहर से आए शिक्षित लोगों ने जो कि इस धरती की प्रकृति और भाषा से अंजान थे, हिन्दी को मातृभाषा बतलाना और पढ़ाना शुरू कर दिया। बिना इस अंतर को जाने या जानते हुए भी सरकारी सर्वेक्षणों में मातृभाषा के हाशिए में हिन्दी को लिख शुरू से ही राजस्थान वासियों को भ्रमित करना शुरू कर दिया। बाल मानस पर धरी यह छाप राजस्थानी भाषा की महत्ता को राजस्थान की नई पीढ़ी को निरन्तर न समझने के लिए तैयार कर दिया। इसके दुष्परिणाम स्वरूप राजस्थानी भाषा की गति और विकास को भारी धक्का लगा। बाद में इस गति को सुधारने के लिए राजस्थान वासियों को आंदोलन का सहारा लेना पड़ा। सन् 2000 में एक राष्ट्र स्तरीय संगठन खड़ा कर राजस्थानी भाषा को संवैधानिक मान्यता दिलाने के लिए पूरे प्रदेश में जागृति लाई गई। जगह-जगह धरने, प्रदर्शन सम्मेलन हुए। आम जन की आवाज जयपुर तक पहुंची, सुपरिणाम स्वरूप 25 अगस्त 2003 को राजस्थान विधानसभा नें सर्वसम्मति से राजस्थानी भाषा की संवैधानिक मान्यता का संकल्प (प्रस्ताव) पारित कर केन्द्र सरकार को भेज दिया। </p>
<p><br />राजनैतिक उदासीनता के कारण राजस्थान सरकार की ओर से  भेजा गया वह संकल्प केन्द्र सरकार के ठंडे बस्ते में है। यदि राजस्थान सरकार चाहे तो सर्वसम्मति से पारित संकल्प को आधार मानते हुए राजस्थानी भाषा को प्रदेश में द्वितीय राजभाषा का दर्जा दे सकती है, इसमें कोई कानूनी अड़चन नहीं है। पूर्व में छत्तीसगढ़ प्रदेश में ऐसा ही हो चुका है। विश्व मातृ भाषा दिवस पर राजस्थान प्रदेश के समस्त प्रदेशवासियों का नैतिक दायित्व बनता है कि वो अपने क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों, विधायकों ,सांसदों एवं राजनेताओं से अपनी मातृभाषा को मान्यता का सम्मान शीघ्र दिलवाने हित दबाव बनाएं।  शांतिप्रिय आंदोलन को सरकारें हमेशा नजरअंदाज करती आई हंै,इसलिए अब आर-पार की लड़ाई लड़ने के लिए बाल, युवा, प्रौढ़ ,वृद्ध एवं महिलाओं को अपनी ताकत दिखााने का समय आ गया है।  </p>
<p><strong>      -पवन पहाड़िया<br />(ये लेखक के अपने विचार हैं)</strong><br />    <br /><br /><span style="color:#ff0000;">राजस्थानी समस्त राजस्थान की अपनी भाषा है।</span> राष्ट्रभाषा हिन्दी की इस बहन का कहीं किसी तरह का विरोध नहीं है। अंतर इतना ही है कि राजस्थानी राजस्थान की धरती के वासियों की मातृभाषा है। मातृभाषा से राष्ट्रभाषा का हमेशा मान बढ़ा हैै। लेकिन राजस्थान में बाहर से आए शिक्षित लोगों ने जो कि इस धरती की प्रकृति और भाषा से अंजान थे। हिन्दी को मातृभाषा बतलाना और पढ़ाना शुरू कर दिया।</p>
<p><br /><br /><br /><br /></p>]]></content:encoded>
                
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                                            <category>ओपिनियन</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 19 Feb 2022 15:38:38 +0530</pubDate>
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