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                <title>colony - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <title>रेलवे अंडरपास में टपकता पानी, उधड़ी सड़कों से राहगीर बेहाल, बारिश में आवागमन हो जाता है ठप </title>
                                    <description><![CDATA[करीब पचास हजार से ज्यादा की आबादी होने के बावजूद प्रशासन नहीं दे रहा ध्यान
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/water-leaks-in-the-railway-underpass--damaged-roads-cause-distress-to-commuters--and-traffic-comes-to-a-standstill-during-the-rains/article-131310"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-11/ews-(12).png" alt=""></a><br /><p>कोटा। रेलवे कॉलोनी क्षेत्र का अंडरपास इन दिनों शहरवासियों के लिए मुसीबत का दूसरा नाम बन गया है। बरसात के मौसम में यहां से गुजरने वाले राहगीरों के सिर पर लगातार पानी टपकता रहता है। वहीं दूसरी ओर, अंडरपास से सटे मार्गों की हालत पिछले एक साल से भी अधिक समय से बदहाल बनी हुई है। क्षेत्र के लोगों का कहना है कि करीब पचास हजार से अधिक आबादी इस इलाके में निवास करती है, लेकिन फिर भी उन्हें मूलभूत सुविधाओं के लिए तरसना पड़ रहा है। रेलवे कॉलोनी अंडरपास की समस्या कोई नई नहीं है। करीब दस सालों से यहां के लोग इस परेशानी के साथ जी रहे हैं। अब सवाल यह है कि कब तक जिम्मेदार विभाग एक-दूसरे पर जिम्मेदारी टालते रहेंगे। स्थानीय निवासी मिर्जा खलील बेग बताते हैं कि यह अंडरपास दस-ग्यारह साल पहले का बना हुआ है जब से बना है, तभी से पानी टपकने की समस्या बनी हुई है। हर साल बरसात में यही हाल होता है। रेलवे प्रशासन से कई बार शिकायत की गई, लेकिन कोई सुनवाई नहीं होती। उन्होंने बताया कि  बारिश ज्यादा होती है तो यह अंडरपास लबालब भर गया था। आवागमन पूरी तरह से ठप हो गया था। स्कूली विद्यार्थी और दफ्तर जाने वाले लोगों को लंबा चक्कर लगाकर दूसरे रास्ते से जाना पड़ता है।</p>
<p><strong>क्षतिग्रस्त सड़कें बनीं लोगों की मुसीबत</strong><br />अंडरपास से जुड़े मार्गों की स्थिति भी किसी मुसीबत से कम नहीं है। क्षेत्र की सड़कों पर बड़े-बड़े गड्ढे हैं, जिनमें हल्की बारिश के बाद ही पानी भर जाता है। कृष्णा नगर, सुंदर नगर, रंग तालाब, काला तालाब, न्यू रेलवे कॉलोनी और लोको कॉलोनी जैसे इलाकों में रहने वाले लोग रोजाना इस समस्या से जूझ रहे हैं। इन इलाकों से होकर गुजरने वाले लगभग एक हजार से अधिक लोग हर दिन आवाजाही करते हैं। टूटी सड़कों और जलभराव के कारण यहां चलना भी दूभर हो गया है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि कई बार दोपहिया वाहन चालक गड्ढों में फंसकर गिर चुके हैं, जिससे चोटें भी लगी हैं।</p>
<p><strong>यहां से गुजरने वाले राहगीरों को लगता है डर</strong><br />अंडरपास के ऊपर से रेलवे प्लेटफार्म नंबर 1 और 4 का कुछ हिस्सा गुजरता है। इन प्लेटफार्मों से लंबी दूरी की गाड़ियां लगातार आती-जाती रहती हैं। ऐसे में अंडरपास से गुजरने वालों के ऊपर पानी टपकने के साथ हादसे का खतरा भी बना रहता है। रात के समय स्थिति और भी भयावह हो जाती है। रेलवे लोको कॉलोनी में सड़क के दोनों तरफ रोड़ लाइटे 5-6 माह से बंद है, वहॉं से गुजरने वाले राहगीरों को हादसे का अंदेशा बना रहता है। गश्त की कमी के कारण असामाजिक तत्वों की गतिविधियां बढ़ जाती हैं। कई वाहन चालक अंधेरे और उबड़-खाबड़ सड़कों के कारण गिर चुके हैं। आसपास के लोग बताते हैं कि पिछले एक वर्ष में यहां कई छोटे-बड़े हादसे हो चुके हैं। रेलवे के खाली मैदानों में हमेशा पानी भरा रहता है।</p>
<p><strong>रेलवे को लेना होगा जिम्मा</strong><br />अगर यह क्षेत्र रेलवे के अधीन है तो रेलवे को ही इसकी देखरेख करनी चाहिए। अंडरपास और सड़कों की मरम्मत तत्काल की जाए ताकि लोगों को राहत मिले।  हमने कई बार शिकायत दर्ज करवाई, लेकिन हर बार यही जवाब मिला कि रेलवे क्षेत्र में कार्य नहीं हो सकता। क्या हम रेलवे क्षेत्र के नागरिक नहीं हैं.. टैक्स हम देते हैं, लेकिन सुविधाएं नहीं मिलतीं।<br /><strong>- सुनीता शर्मा, रहवासी</strong></p>
<p><strong>प्रशासनिक उदासीनता पर उठे सवाल</strong><br />रेलवे कॉलोनी क्षेत्र में सफाई, सड़क और जल निकासी जैसी मूलभूत सुविधाओं का अभाव प्रशासनिक उदासीनता को उजागर करता है। एक ओर कोटा स्मार्ट सिटी के रूप में आगे बढ़ने का दावा किया जा रहा है, वहीं दूसरी ओर शहर के बीचोंबीच स्थित यह कॉलोनी बदहाली का प्रतीक बन चुकी है। स्थानीय लोगों ने चेतावनी दी है कि अगर शीघ्र समाधान नहीं निकाला गया, तो वे रेलवे कार्यालय के बाहर धरना प्रदर्शन करेंगे। </p>
<p><strong>रेलवे और निगम दोनों संयुक्त कार्य करें</strong><br />इस समस्या का स्थायी समाधान तभी संभव है जब रेलवे और नगर निगम मिलकर संयुक्त कार्य योजना बनाएं। अंडरपास की मरम्मत, जल निकासी और सड़क पुनर्निर्माण जैसे कार्यों के लिए संयुक्त बजट आवंटन जरूरी है। क्षेत्रवासियों की सुविधा के लिए दोनों को मिलजुलकर कार्य करना होगा।<br /><strong>- मिर्जा खलील बेग, रहवासी, कृष्णा नगर</strong></p>
<p><strong>लोगों ने खुद जुटाए पैसे, मिट्टी डाल बनाया मार्ग</strong><br />क्षेत्रवासियों ने अपने स्तर पर समाधान की कोशिश भी की। उन्होंने कॉलोनी के लोगों से पैसे एकत्रित कर मिट्टी डलवाकर एक मार्ग में जमा पानी में मिट्टी डलवाकर तैयार किया है, ताकि आने-जाने वालों को कुछ राहत मिल सके। हालांकि यह रास्ता भी अस्थायी है और बारिश होने पर वह भी दलदल में बदल जाता है। निवासियों का कहना है कि प्रशासन और पार्षद को कई बार लिखित व मौखिक रूप से समस्या से अवगत करवाया गया, लेकिन जवाब हमेशा यही मिला कि रेलवे का क्षेत्र है, हमारी सीमाएं नहीं हैं।<br /><strong>- अनिल माथुर, रहवासी</strong></p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br />रेलवे कॉलोनी का क्षेत्र मेरे वार्ड के अधीन है। रेलवे अंडरपास की छत में सीलन व पानी टपकने की समस्या रेलवे को अवगत करवा देंगे। <br /><strong>- बशीर मोहम्मद, वार्ड पार्षद</strong></p>
<p>क्षेत्र में जो भी समस्या हैं हम इंजीनियर से दिखवा लेंगे। क्षेत्रवासी वाट््सएप पर भी समस्या भेजते है तो उनको जरूर प्राथमिकता देंगे।<br /><strong>- अनिल कालरा, डीआरएम, कोटा</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 03 Nov 2025 16:35:54 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[kota]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>नारी शक्ति ने प्रभु विहार कॉलोनी को दी नई सड़क की सौगात : महिला ने फीता काटकर सीसी रोड का किया लोकार्पण, बारिश में भरता था पानी</title>
                                    <description><![CDATA[ कॉलोनी के सभी निवासी उत्साहपूर्वक मौजूद रहे। सड़क निर्माण की लागत राशि करीब 16 लाख रूपए नगर निगम ग्रेटर की ओर से वहन की गई है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/nari-shakti-gifted-a-new-road-to-prabhu-vihar-colony/article-130255"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-10/6622-copy118.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। ग्रेटर नगर निगम के वार्ड नंबर 19 निवारू रोड  स्थित प्रभु विहार कॉलोनी में नारी शक्ति के हाथों नई सीमेंट  सड़क का लोकार्पण किया गया। 60 वर्षीय शांति देवी ने फीता काटकर सड़क का लोकार्पण किया। इस अवसर पर कॉलोनी के सभी निवासी उत्साहपूर्वक मौजूद रहे। सड़क निर्माण की लागत राशि करीब 16 लाख रूपए नगर निगम ग्रेटर की ओर से वहन की गई है।</p>
<p>कॉलोनीवासी लंबे समय से सड़क की समस्या से जूझ रहे थे। पानी निकास की समुचित व्यवस्था नहीं होने के कारण बरसात के दौरान कॉलोनी के मुख्य द्वार पर तीन से चार फीट तक पानी भर जाता था, जिससे लोगों को आवाजाही में भारी परेशानी का सामना करना पड़ता था। बच्चों के स्कूल की गाड़ियां भी कॉलोनी में नहीं आ पाती थी ,अब इस नई सीमेंटेड सड़क के निर्माण से लोगों को बड़ी राहत मिली है। नारी शक्ति के इस प्रतीकात्मक लोकार्पण ने कार्यक्रम को विशेष बना दिया। महिलाओं ने सड़क निर्माण को विकास की दिशा में बड़ा कदम बताया। </p>
<p>कॉलोनीवासियों ने नगर निगम प्रशासन का आभार जताया और उम्मीद जताई कि आगे भी क्षेत्र में इसी तरह विकास कार्य जारी रहेंगे। इस नई सड़क के बन जाने से न केवल जलभराव की समस्या से निजात मिलेगी, बल्कि कॉलोनी की सुंदरता और सुविधा दोनों में वृद्धि होगी।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 22 Oct 2025 14:02:40 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>नाले के अभाव में गरीब नवाज कॉलोनी में भर रहा बरसाती पानी, लोगों को आवागमन में हो रही परेशानी</title>
                                    <description><![CDATA[नगर से गुजर रही स्टेट हाइवे 70 के समीप ही बनी गरीब नवाज कॉलोनी के बाहर मुख्य नाला नहीं होने के कारण बारिश का पानी कॉलोनी में भर जाता है
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/lack-of-water-in-garib-nawaz-colony/article-116355"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-06/news-(1)8.png" alt=""></a><br /><p>सुल्तानपुर। नगर से गुजर रही स्टेट हाइवे 70 के समीप ही बनी गरीब नवाज कॉलोनी के बाहर मुख्य नाला नहीं होने के कारण बारिश का पानी कॉलोनी में भर जाता है। जिसके चलते कॉलोनी वासियों को नारकीय जीवन जीने पर मजबूर होना पड़ता है। जानकारी के अनुसार नाले के अभाव में मामूली बरसात में भी कॉलोनी के मुख्य मार्ग पर पानी भर जाने के कारण मुख्य सड़क से संपर्क कट जाता है। जिससे कॉलोनी वासियों को परेशानियों का सामना करना पड़ता है। मंगलवार को दिन में 2 बजे से हुई बारिश के बाद शाम तक बारिश का दौर जारी रहने से निकासी के अभाव में पानी भर गया। यहां नाला नहीं होने के कारण खाली जगह में वर्ष भर पानी भरा रहता है। जिससे कई बार बीमारियों का अंदेशा बना रहता है। समस्या को लेकर जनप्रतिनिधियों एवं संबंधित अधिकारियों को कॉलोनी वासियों ने कई बार अवगत करवाया। लेकिन समस्या का समाधान नहीं हो सका। जिससे उन्हें काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।</p>
<p>इस समस्या के बारे में कॉलोनी वासियों ने अवगत कराया था। जिस पर इसका प्रस्ताव बनाकर उच्च अधिकारियों को भेज दिया गया है। जयपुर तक प्रस्ताव जा चुका है। जिसकी स्वीकृति आना बाकी है। स्वीकृति आने के बाद ही कार्य शुरू हो सकेगा।<br /><strong>- विनोद मिश्रा, एईएन, पीडब्ल्यूडी</strong></p>
<p>नाला नहीं होने के कारण बारिश के पानी की निकासी नहीं हो पाती है। जिसके चलते पूरी कॉलोनी में पानी भर जाता है। जिससे बड़े, बुजुर्ग और बच्चों एवं महिलाओं को आवागमन में परेशानियों का सामना करना पड़ता है।<br /><strong>- मोहम्मद वसीम, कॉलोनीवासी</strong></p>
<p>पानी की निकासी के लिए नाले का निर्माण नहीं होने के कारण बारिश का पानी कॉलोनी में भर जाता है। जिसके चलते कई दिनों तक बारिश का पानी इकट्ठा रहने से बीमारियां फैलने का भी खतरा बना रहता है।  <br /><strong>- रईस अंसारी, कॉलोनीवासी</strong></p>
<p>बारिश में जगह-जगह पानी हो जाने से छोटे बच्चों और बुजुर्गों को आवागमन में समस्याओं का सामना करना पड़ता है। समस्या का समाधान नहीं होने के कारण मोहल्ले वासियों को समस्या का सामना करना पड़ रहा है।<br /><strong>- आकिब पठान, कॉलोनीवासी</strong></p>
<p>मुख्य सड़क पर जब तक नाले का निर्माण नहीं होगा, तब तक समस्या का समाधान नहीं हो सकता। पानी निकासी के लिए सुचारु व्यवस्था करने के लिए जनप्रतिनिधियों एवं प्रशासन को अवगत कराया जा चुका है। लेकिन अब तक समस्या का समाधान नहीं हुआ है।<br /><strong>- रिजवान पठान, कॉलोनीवासी </strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 04 Jun 2025 17:43:22 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[kota]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>कब तक सफेद हाथी बना रहेगा कोटा का हाउसिंग बोर्ड </title>
                                    <description><![CDATA[हाउसिंग बोर्ड ने  कोटा शहर में करीब 23 साल पहले वर्ष 2001 में अंतिम कॉलोनी स्वामी विवेकानंद नगर में बनाई थी। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/how-long-will-kota-s-housing-board-remain-a-white-elephant/article-91713"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-09/4427rtrer-(1)5.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। कोटा में हाउसिंग बोर्ड का उप आवासन आयुक्त कार्यालय आखिर कब तक सफेद हाथी बना रहेगा। यहां बोर्ड के पास न तो मकान बनाने के लिए जमीन है और न ही अधिक काम। मात्र दो कॉलोनियों की देखरेख व नाम ट्रांसफर का ही काम हो रहा है। जबकि कर्मचारियों के वेतन पर सरकार को लाखों रुपए महीना खर्चा करना पड़ रहा है और कमाई के नाम पर जीरो है। कोटा शहर में पहले मकान बनाने का अधिकतर काम हाउसिग बोर्ड(आवासन मंडल) करता था।  लेकिन अब हालत यह है कि बोर्ड ने करीब 23 साल से शहर में  न तो कोई नया मकान बनाया है और न ही कोई कॉलोनी  विकसित की है।  हाउसिग बोर्ड के पास  कोटा शहर में  निर्माण कार्य के लिए जमीन  तक नहीं है। उनका यह काम अब कोटा विकास प्राधिकरण कर रहा है। जिससे न तो बोर्ड को कोई कमाई हो रही है और न ही आय। जबकि बोर्ड के कार्यालय में लगे कर्मचारियों के वेतन  पर सरकार को लाखों रुपए महीना खर्चा करना पड़ रहा है। </p>
<p><strong>23 साल पहले बनाई भी अंतिम कॉलोनी</strong><br />हाउसिंग बोर्ड ने  कोटा शहर में करीब 23 साल पहले वर्ष 2001 में अंतिम कॉलोनी स्वामी विवेकानंद नगर में बनाई थी। उसके बाद से अभी तक बोर्ड ने शहर में न तो कोई नया मकान बनाया है और न ही कॉलोनी।  हालांकि करीब एक साल पहले कुन्हाड़ी में एक चौपाटी का निर्माण कराया है। लेकिन वह भी उतनी नहीं चल पा रही है जितनी उम्मीद की जा रही थी। यहां भी  लोगों से दस रुपए प्रवेश टिकट लेने के बाद भी पर्याप्त सुविधा तक नहीं मिल पा रही है। </p>
<p><strong>17 कॉलोनियां, दो ही अधिकार क्षेत्र में</strong><br />शहर में हाउसिंग बोर्ड की  कुल 17 कॉलोनियां हैं। लेकिन उनमें से मात्र दो ही कॉलोनियां बोर्ड के अधिकार क्षेत्र में है।  जिनमें से कुन्हाड़ी व स्वामी विवेकानंद नगर कॉलोनी। जिनकी मरम्मत व देखरेख की जिम्मेदारी बोर्ड के पास है। शेष अन्य कॉलोनयां नगर निगम को हस्तांतरित हो चुकी है।   बोर्ड की कॉलोनियों में  दादाबाड़ी, दादाबाड़ी विस्तार, अम्बेडकर नगर कुन्हाड़ी, हाउसिंग बोर्ड कॉलोनी कुन्हाड़ी, महावीर नगर विस्तार, महावीर नगर परिजात कॉलोनी, टीचर्स कॉलोनी,रंगबाड़ी, सकतपुरा, वल्लभबाड़ी व स्वामी विवेकानंद नगर की कॉलोनियां शामिल हैं। इन कॉलोनियों की मरम्मत व देखरेख तक नगर निगम करवाता है। कोटा शहर में तो बोर्ड के पास सिर्फ दो कॉलोनियों की देखरेख व नाम ट्रांसफर का ही काम है। बाकी काम बारां व झालावाड़ जिलों का है। </p>
<p><strong>संभाग स्तर का कार्यालय,स्थायी अधिकारी तक नहीं</strong><br />टीचर कॉलोनी कैशव पुरा निवासी सुदर्शन शर्मा कहते  है कि कोटा में हाउसिंग बोर्ड का संभाग स्तरीय कार्यालय है। सीएडी रोड पर उप आवासन आयुक्त का कार्यालय है। जहां से कोटा शहर ही नहीं संभा के अन्य जिलों तक के कामों की मॉनिटरिंग तो की जाती है। लेकिन हालत यह है कि विभाग में स्थायी अधिकारी तक नहीं है। उप आवासन आयुक्त का पद पिछले काफी समय से कार्यवाहकों के भरोसे ही चल रहा है। पूर्व में इस पद पर कई अधिकारी कार्यवाहक के तौर पर रह चुके है। वहीं वर्तमान में भी सहायक अभियंता अमजद अहमद को इस पद पर कार्यवाहक आयुक्त लगाया हुआ है। इतना ही नहीं यहां एक्सईएन से लेकर कई अन्य पदों तक पर अधिकारी व कर्मचारी लम्बे समय से नहीं लगाए गए हैं। </p>
<p>हाउसिग बोर्ड के पास कोटा शहर में फिलहाल कोई जमीन नहीं है। जमीन के अभाव में न तो नए मकान बना पा रहे हैं और न ही कॉलोनी विकसित की जा रही है। जबकि बारां व झालावाड़ जिलों में बोर्ड के मकानों की नीलामी, बिक्री व मरम्मत का काम किया जा रहा है। उन जिलों के कामों के मॉनिटरिंग कोटा कार्यालय से ही होती है। कोटा शहर में बोर्ड के पास मात्र दो कॉलोनी है। शेष निगम व न्यास को ट्रांसफर हो चुकी है। शहर में दो कॉलोनियों की देखरेख व मरम्मत व अन्य के नाम ट्रांसफर का ही काम किया जा रहा है। बोर्ड के पास कोटा शहर में करने के लिए कोई नया काम नहीं है। <br /><strong>- अमजद अहमद, कार्यवाहक उप आवासन आयुक्त हाउसिंग बोर्ड कोटा</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 27 Sep 2024 15:43:32 +0530</pubDate>
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                <title>प्रेम नगर अर्फोडेबल योजना में गंदगी से लोगों का बुरा हाल</title>
                                    <description><![CDATA[कॉलोनी में कचरे के ढेर और नालियों की समस्या के अलावा सीवरेज के चैंबर खुले पड़े हैं। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/people-are-in-bad-condition-due-to-dirt-in-prem-nagar-affordable-scheme/article-73023"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-03/prem-nagar-affordable-yojna-me-gandagi-s-logo-ka-bura-haal...kota-newsn-18-03-2024.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। शहर के औद्योगिक क्षेत्र के प्रेम नगर स्थित अर्फोडेबल आवासीय योजना में जगह जगह कचरे के ढेर पड़े हैं जो लोगों के लिए परेशानी का सबब बनी हुई है। कॉलोनी का एक भी कोना ऐसा नहीं बचा है जहां कचरे के ढेर ना लगे हों या नालियां जाम ना हो। जगह जगह लगे कचरे के ढेर के कारण कॉलोनी में रहने वाले बाशिंदे बदबू में रहने को मजबूर हैं। वहीं निवासियों का कहना है कि उनके द्वारा कई बार इसे लेकर शिकायत भी की गई लेकिन कुछ दिन सफाई हो जाती है। लेकिन फिर से कचरे के ढेर हो जाते हैं।</p>
<p><strong>जगह जगह हो रहे कचरे के ढेर</strong><br />कॉलोनी में सप्ताह में एक दो दिन ही कचरे की गाड़ी आती है। जिस कारण कॉलानी में रहने वाले लोग कचरे को आस पास ही फेंकने को मजबूर हैं। कॉलोनी में कचरे की गाड़ी नहीं आने की समस्या कई सालोें पुरानी है। जिसे लेकर निवासियों ने कई बार निगम प्रशासन को शिकायत भी दर्ज कराई लेकिन समस्या ज्यों की त्यों बनी हुई है। कॉलोनी में हनुमान मंदिर के पास, राजकीय संस्कृत उच्च प्राथमिक विद्यालय के पीछे, सी ब्लॉक के सामने स्थित कचरा पॉइंट और डी ब्लॉक के सामने मौजूद पार्क के पास कचरे के ढेर लगे हैं जिनसे इलाके में बदबू बनी रहती है। साथ ही कॉलोनी की नालियों की कई दिनों से सफाई नहीं हुुई जिस कारण वो जाम हुई पड़ी हैं। </p>
<p><strong>सीवरेज के चैंबर महीनों से खुले पड़े</strong><br />कॉलोनी में कचरे के ढेर और नालियों की समस्या के अलावा सीवरेज के चैंबर खुले पड़े हैं। कॉलोनी के चारों ब्लॉकों में कुछ महीने पहले कई जगह सीवरेज लाइन की समस्या को ठीक करने के लिए चैंबर खोले गए थे। जिसमें ना तो सीवरेज लाइन को ठीक करने का काम पूर्ण किया गया और ना ही उन्हें बंद किया। चैंबरों के खुले पड़े होने के कारण कई बार रात के समय में लोग हादसे का शिकार हा चुके हैं क्योंकि ये चैंबर रात के अंधेरे में नजर नहीं आते। वहीं ए और बी ब्लॉक के बीच मौजूद सड़क के बीचों बीच सीवरेज लाइन का बड़ा सा गड्ढा बना हुआ है। जिससे कई बार सीवरेज का पानी सड़क पर फैल जाता है।</p>
<p><strong>नियमित नहीं उठता कचरा</strong><br />कॉलोनी में कचरे के ढेर की समस्या कई सालों से बनी हुई है यहां से कभी भी समय पर कचरा नहीं उठाया जाता है। जिस कारण चारों तरफ बदबू फैली रहती है। पार्षद से कई बार शिकायत कर चुके लेकिन हर बार कर्मचारी न होने के बहाना बना देते हैं।<br /><strong>- आनंद नागर, सी ब्लॉक</strong></p>
<p><strong>दो सप्ताह में एक बार हो रही सफाई</strong><br />कॉलोनी में कई गलियों ऐसी हैं जिनमें नालियों की सालों से सफाई नहीं हुई है। लोगों को मजबूरन खुद ही उन्हें साफ करना पड़ता है। कॉलोनी में दो हफ्ते में एक बार सफाई कर्मचारी आते हैं। जिससे कचरे और नालियों में जाम लग जाता है।<br /><strong>- विनोद चौबदार,  ए ब्लॉक</strong></p>
<p>कॉलोनी में सफाई की समस्या बहुत बड़ी है साथ ही सड़क के बीचों बीच सीवरेज के चैंबर भी खुले पड़े हैं। निगम प्रशासन को ध्यान देकर इस इलाके की नियमित सफाई कराकर सीवरेज चैंबरों को बंद करवाना चाहिए।<br /><strong>- प्रमोद पारेता, डी ब्लॉक</strong></p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br />वार्ड में आवश्यकतानुसार सफाई कर्मचारी बहुत कम हैं जिस कारण कुछ इलाके छुट जाते हैं। कर्मचारियों की संख्या बढ़ाने के लिए निगम प्रशासन को बोला हुआ है, जिस पर कोई जवाब नहीं मिला है। साथ ही कचरे की गाड़ियां बढ़ाने के लिए भी पत्र लिखा हुआ है।<br /><strong>- सुशील त्रिपाठी, पार्षद वार्ड नं 15, उत्तर निगम</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 18 Mar 2024 14:55:43 +0530</pubDate>
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                <title>आवासीय भूमि में कंवर्ट हुए बिना कॉलोनी में बन गई सड़कें</title>
                                    <description><![CDATA[नगर पालिका कानून में बिना आवासीय भूमि के कंवर्ट करवाए कॉलोनी विकसित नहीं की जा सकती है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/roads-built-in-the-colony-without-converting-it-into-residential-land/article-50821"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-07/avasiye-colony-me-convert-hue-bina-colony-me-bn-gyi-sadake...ramganjmando,-kota-news-04-07-2023.jpg" alt=""></a><br /><p>रामगंजमंडी। रामगंजमंडी के खैराबाद रोड़ पर एएसआई कम्पनी की बी आॅफिसर्स कॉलोनी में इन दिनों कंचन सिटी के नाम से कॉलोनी विकसित की जा रही है। किन्तु इस कॉलोनी को अभी तक नगर पालिका द्वारा आवासीय में कंवर्ट नहीं किया गया है। कॉलोनी के कंवर्जन की फाइल अवश्य विचाराधीन है। जानकारी के अनुसार नगर पालिका प्रशासन की मूक स्वीकृति से शहर में कई कॉलोनियां बिना आवासीय में कंवर्ट किए ही विकसित कर दी जाती हैं। जिसमें कुल कॉलोनी का 40 फीसदी जन सुविधाओं के लिए छोड़ना आवश्यक होता है, वह नहीं छोड़ा जाता। कॉलोनाइजर इस भूमि पर भी प्लॉट काट देता है। एक कॉलोनी से दूसरी कॉलोनी जोड़ी जाती है।</p>
<p> टाउन प्लानर द्वारा स्वीकृत नक्शे पर ही कॉलोनी कंवर्ट होनी चाहिए। किंतु शहर में अवैध कॉलोनियों के निर्माण के कारण एक से दूसरी कॉलोनी में जाने के रास्तों को लेकर विवाद गहराता है। ऐसी कई कॉलोनियों में रास्तों को लेकर विवाद हुआ है। कॉलोनी के बाशिंदों को धरना तक देना पड़ा। जिनमें द्वारका कॉलोनी प्रमुख है। यहां के बाशिंदों को पास की कॉलोनी में जाने के लिए एक किलोमीटर का चक्कर लगाना पड़ता है। गत दिनों सुविधा नगर में खाटू श्याम बाबा मंदिर के पास की कॉलोनी का मामला भी सामने आया था। प्रशासन के दखल से कॉलोनी वासियों में समझौता भी हुआ। नगर पालिका कानून में बिना आवासीय भूमि के कंवर्ट करवाए कॉलोनी विकसित  नहीं की जा सकती है।</p>
<p><strong>कॉलोनी में करोड़ों की सरकारी भूमि </strong><br />मास्टर प्लान 2011-31 में खसरा से 2974, 75, 76, 2984, 85, 86 है। जिसमें 16983 वर्ग मीटर पर उद्यान, खेल मैदान व खुली जगह बताई गई है। कॉलोनाइजर द्वारा इस भूमि को उपयोग में लेने के लिए भी आवेदन किया हुआ है। इस पर स्थानीय नागरिकों ने आपत्ति लगाई हुई है कि सार्वजनिक भूमि जो मास्टर प्लान में है, वह उद्यान, खेल मैदान के लिए ही आरक्षित रखी जाए। कॉलोनाइजर की कुल भूमि में से 40 फीसदी भाग जन सुविधाओं के लिए नियमानुसार छोड़ना चाहिए।</p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br />भूमि को औद्योगिक कम्पनी ने भू माफिया को बेचान किया है। लेकिन रजिस्ट्री नहीं हुई। कम्पनी ने सिर्फ कंवर्जन की फाइल लगाई है। भू माफिया को फायदा पहुंचाने के लिए मिलीभगत से बिना कंवर्ट किए ही कॉलोनी में रोड़ निर्माण कर दिए, जो अवैधानिक है। जिस पर उच्चाधिकारियों को नियमानुसार कार्यवाही करनी चाहिए।<br /><strong>- जसविंदर सिंह विक्की, पार्षद, नगर पालिका</strong></p>
<p>जिस जगह कॉलोनी विकसित की जा रही है, उसके कंवर्जन की फाइल लगी हुई है। उच्चाधिकारियों द्वारा तकनीकी स्वीकृति दी गई है। आपत्ति भी है। मामला कमेटी के पास जाएगा। तब कॉलोनी कंवर्ट होगी।<br /><strong>- सत्यनारायण राठौर, ईओ, नगर पालिका</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 04 Jul 2023 14:48:31 +0530</pubDate>
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                <title>आदर्श नगर में दस साल पुराने अतिक्रमण को हटाकर बनाया रास्ता</title>
                                    <description><![CDATA[अतिक्रमण हटाने के पश्चात न्यास द्वारा तत्काल मौके पर रोड का निर्माण भी कर दिया गया।  ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/in-adarsh-%E2%80%8B%E2%80%8Bnagar-a-road-was-made-by-removing-ten/article-47430"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-06/whatsapp-image-2023-06-01-at-14.38.22.jpeg" alt=""></a><br /><p>कोटा । नगर विकास न्यास के अतिक्रमण निरोधक दस्ते द्वारा गुरुवार को एक बड़ी कार्रवाई करते  हुए आदर्श नगर कुन्हाड़ी में पिछले 10 साल से रुके हुए रास्ते को मौके पर अतिक्रमण हटाकर नई रोड बनाकर चालू करवाया। आदर्श नगर  कॉलोनी 2013 में न्यास द्वारा अनुमोदित की गई थी । खसरा नंबर 244, 245 ,246 ग्राम कुन्हाड़ी में स्थित यह कॉलोनी पूरी तरह बस चुकी है, सघन आबादी बसी हुई है और इसके लेआउट में 20 फुट चौड़ा अनुमोदित रोड मुख्य सड़क को जोड़ने का बना हुआ था। किंतु कुछ अतिक्रमियों द्वारा इस रोड पर दीवार बनाकर इस रोड को बनने नहीं दिया जा रहा था। कॉलोनीवासियों द्वारा समय-समय पर इस रास्ते को खुलवाने की मांग लगातार की जा रही थी। स्वायत्त शासन मंत्री शांति धारीवाल से भी कॉलोनी वासियों ने इस रास्ते को चालू करवाने की मांग की थी। गुरुवार को सुबह 6:00 बजे अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई  को अंजाम दिया गया । अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई में कोटा जिला कलेक्टर के निदेर्शानुसार चंदन दुबे उप सचिव नगर विकास न्यास  को कार्यपालक मजिस्ट्रेट नियुक्त किया गया था। जिला पुलिस अधीक्षक  कोटा  शहर द्वारा इस कार्य में सहयोग हेतु पर्याप्त मात्रा में पुलिस जाब्ता उपलब्ध कराया गया। अतिक्रमण हटाने की  कार्रवाई  के दौरान न्यास उप पुलिस अधीक्षक आशीष भार्गव ,पुलिस उप अधीक्षक वृत  शंकर लाल , उप अधीक्षक  अमर सिंह , अधीक्षण अभियंता संदीप नागपाल,कुन्हाड़ी थानाधिकारी  गंगा सहाय तथा पुलिस लाइन व अतिक्रमण दस्ते का जाप्ता  मौके पर मौजूद रहा । अतिक्रमण हटाने के पश्चात न्यास द्वारा तत्काल मौके पर रोड का निर्माण भी कर दिया गया।  </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 01 Jun 2023 14:57:29 +0530</pubDate>
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                <title> करोड़ों खर्च करके भी नारकीय जीवन जीने को मजबूर लोग</title>
                                    <description><![CDATA[इलाके में कई स्थानों पर अवैध कच्ची झोपड़िया बनी हुई हैं। ये लोग सुबह और शाम कॉलोनी में शौच करते हैं जिससे पूरे इलाके में दुर्गंध फैली रहती है। गंदगी के कारण दिनभर इलाके में सुअरों का जमावड़ा रहता है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/people-forced-to-live-a-hellish-life-even-after-spending-crores/article-43983"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-04/karoro-kharch-karke-bhi-naarakiya-jeevan-jine-ko-majboor-log...kota-news..27.4.2023.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। आंख के अंधा और नाम नैनसुख वाला मुहावरा इस समय कोटा मेडिकल कॉलेज के सामने स्थित आरोग्य नगर पर बिलकुल सटीक बैठ रहा है। कहने को तो इस इलाके का नाम आरोग्य नगर यानि बिना रोग का नगर है लेकिन क्षेत्र के हालात देखकर, लोगों की सुनकर, उनकी पीड़ा जानकर ऐसा लगता है जैसे रोगों की उत्पति होती ही यहां से है। इस क्षेत्र के लोग कहते हैं कि खुद को स्माट सिटी का बताने वाले जनप्रतिनिधि और प्रशासनिक अधिकारी एक बार यहां आकर इन हालातों को देखे तो स्मार्ट सिटी की सारी जमीनी हकीकत सामने आ जाएगी। इलाके के लोगों का कहना है कि पूरे क्षेत्र में शायद ही कोई ऐसी जगह होगी जहां साफ-सफाई नजर आती हो, वरना तो क्षेत्र के अधिकांश खाली पड़े भूखन्डों को लोगों ने खुला शौचालय बनाया हुआ तो किसी ने इन प्लॉटों को डस्टबिन बनाया हुआ है। हम सुबह की सैर पर जाए तो भी कैसे, जाते है स्वच्छ हवा लेने के लिए लेकिन मिलती है सडांघ और बदबूदार हवा। जाए तो स्वस्थ रहने के लिए लेकिन पड़ जाए बीमार। इन भूखन्डों में सालभर पानी भरा रहता है। जिनमें मच्छर भिनभिनाते रहते हैं। विचारणीय बात तो ये है कि यहां रहने वाले लोग तो इन प्लॉटों में कचरा डालते ही है, रही सही कसर निगम के टिपर चालक इन भूखन्डों में कचरा डालकर पूरी कर देते हैं। </p>
<p> यहा के लोगों का कहना है कि नगर निकास न्यास की ओर से साल 1996 में विकसित की गई ये कॉलोनी वर्तमान में कोटा नगर निगम दक्षिण के वार्ड नम्बर 31 में आती है। हमारे इलाके की सड़कें पूरी तरह से टूटी हुई है। कई स्थानों पर गिट्टी निकली हुई है। सड़कों पर डामर का तो नामोनिशान तक नहीं है। नालियां पूरी तरह से बनी हुई नहीं हैं। जो हैं वो भी कचरे के कारण जाम रहती है। जिसके कारण जगह-जगह कीचड़ और बदूब फैली रहती है। गंदगी के कारण दिनभर इलाके में सुअरों का जमावड़ा रहता है। आए दिन कॉलोनी में सुअर मरते रहते है जिससे रोगों के फैलने का खतरा बना हुआ है।  क्षेत्र के लोग पीड़ा बताते हुए कहते हैं कि हमने लाखों के प्लॉट लिए और जीवनभर की पूंजी लगाकर बच्चों और परिवार को कुछ सुख देने के लिए मकान बनवाए लेकिन जिनके लिए ये सब किया वो ही कहने लगे हैं कि इस मकान को बेचो और नहीं बिकता तो खाली करके दूसरी जगह किराए से मकान ले लो, यहां रहने से अच्छा तो किराए से रहना है। अब हम तो गजब की दुविधा में पड़ चुके हैं। सारी बातों से संबंधित विभाग और प्रशासन को अवगत करवा चुके हैं लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई हैं। लोगों का कहना है कि इलाके में कई स्थानों पर अवैध कच्ची झोपड़िया बनी हुई हैं। ये लोग सुबह और शाम कॉलोनी में शौच करते हैं जिससे पूरे इलाके में दुर्गंध फैली रहती है। आए दिन ये लोग शराब पीकर गाली गलौच करते हैं, लड़ाई झगड़ा करते हैं जिससे स्थायी निवासियों का रहना दूभर हो गया है। क्षेत्र में कई स्थानों पर बड़े-बड़े गड्ढेंÞ बने हुए हैं जिनमें नालियों का और बारिश का पानी जमा रहता है। </p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br />इलाके में सड़कें और नालियों के हालात खराब है। जो नालियां है उनमें भी मलबा भरा रहता है। यूआईटी की ओर से कोट्या भील चौराहा पर जो झोपड़ियां हटाई गई थी वो सारे लोग यहां झोपड़िया बना चुके हैं। ये लोग और दूसरे स्थानों के लोग यहां खाली पडेÞ भूखन्डों और गड्ढ़ों में शौच करते हैं। टिपर वाले इन्ही गड्ढ़ों में शहर का कचरा डाल जाते हैं। दिनभर में केवल 2 घ्ांटे पानी आता है। 26 साल पहले बनी सड़कों ही मरम्मत तक नहीं हो पाई है। कहने को पॉश इलाका है लेकिन यहां हम कैसे रहते हैं, ये हमारी आत्मा ही जानती है। <br /><strong>-उम्मेद माथुर, स्थानीय निवासी। </strong></p>
<p>इलाके में सड़कें नहीं हैं। कई स्थानों पर लोगों ने झुग्गी झोपड़िया बनाई हुई है। इनमें रहने वाले खुले में शौच करते हैं। नालियां नहीं है। जो हैं वो भी सही नहीे है। <br /><strong>-श्याम सुन्दर गौतम, स्थानीय निवासी। </strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 27 Apr 2023 14:52:58 +0530</pubDate>
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                <title>निगम कॉलोनी में करोड़ों के मकान हुए खंडहर</title>
                                    <description><![CDATA[सबसे बुरे हाल निगम कॉलोनी के हैं। जहां करोड़ों रुपए के मकान पहले अतिक्रमण की भेंट चढ़े हुए थे और अब खंडहर होने से अधिकारियों की अनदेखी के चलते नशेड़ियों का अड्डा बन चुके हैं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/houses-worth-crores-were-ruins-in-nigam-colony/article-13110"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-06/nigam-colony-mei-makan-hue-khandahar.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। शहर में नगर निगम की अरबों रुपए की सम्पति  तो बेकार पड़ी हुई है। जिनकी नीलामी तक नहीं हो रही हैं। वहीं सबसे बुरे हाल तो निगम कॉलोनी के हैं। जहां करोड़ों रुपए के मकान  पहले अतिक्रमण की भेंट चढ़े हुए थे और अब खंडहर होने से अधिकारियों की अनदेखी के चलते नशेड़ियों का अड्डा बन चुके हैं। छावनी स्थित नगर निगम की कॉलोनी में कई मकान तो सही हालत में है। जिनमें निगम के कर्मचारी रह रहे हैं। जबकि उसी कॉलोनी में उन मकानों के आगे नाले के पास करीब एक दर्जन से अधिक मकान भी बने हुए हैं। पहले उन मकानों में भी निगम कर्मचारी रहते थे। लेकिन उनमें रहने वाले कर्मचारी रिटायर्ड होते गए और वे अपने स्र पर ही दूसरे लोगों को किराए पर रखते रहे। हालत यह हो गई कि निगम अधिकारियों ने उन मकानों पर ध्यान नहीं दिया। जिससे उन मकानों में अतिक्रमण होने लगे। जो मकान खाली हुए और उनमें ताले लगे हुए थे। अतिक्रमण करने वालों ने उन मकानों के ताले तोड़कर जबरन रहना शुरू कर दिया था। जिससे वहां कई तरह की अवैध गतिविधियां होने लगी थी। उन मकानों में होने वाली अवैध गतिविधियों के चलते आस-पास के लोग परेशान होने लगे थे। <br /><br /><strong>तत्कालीन उपायुक्त ने खाली करवाए थे मकान</strong><br />नगर निगम कोटा दक्षिण क्षेत्र में होने से तत्कालीन उपायुक्त कीर्ति राठौड़ ने उन मकानों की स्थिति का मौका निरीक्षण कराया। उसके बाद अधिकारियों की टीम के साथ उन सभी एक दर्जन मकानों को खाली करवाकर अतिक्रमण से मुक्त करवाया था।  साथ ही उन सभी मकानों में ताले लगा दिए थे। लेकिन कुछ समय बाद फिर से उनके ताले तोड़कर लोग रहने लगे थे। बाद में उन मकानों के दरवाजे व चार दीवारी को तुड़वा दिया था। जिससे कोई उन मकानों पर कब्जे नहीं कर सके। लेकिन निगम अधिकारी डाल-डाल तो अपराधी पात-पात हैं। <br /><br /><strong>नशेडियों का अड्डा बने खंडहर मकान</strong><br />निगम के अधिकारियों ने उन मकानों के अगले हिस्से को तोड़कर अधूरा छोड़ दिया। उसके बाद उनकी तरफ देखा तक नहीं। हालत यह है कि अधिकारियों की अनदेखी की चलते वे मकान खंडहर तो हुए ही। साथ ही वे नशेड़ियों के अड्डे बन गए हैं।  हालत यह है कि नशा करने वालों को सूने मकान  खुले हुए मिल गए। उस जगह पर किसी का भी आना जाना नहीं होता। ऐसे में वहां बड़ी संख्या में नशा करने वालों का जमघट लगने लगा। एक साथ एक दर्जन से अधिक लोग वहां नशा करते हुए देखे जा सकते हैंं। इसका अंदाजा वहां पड़ी नशे की सामग्री जिनमें इंजक् शन, स्मैक की पुड़िया और शराब की बोतलों को देखकर लगाया जा सकता है। <br /><br /><strong>यहीं नशा करते और फिर चोरियां, लोग परेशान</strong><br />नगर निगम कॉलोनी के आस-पास रहने वाले लोगों ने बताया कि पहले उन मकानों में लोग रहते थे। लेकिन अब वे खंडहर हो रहे हैं। ऐसे में वहां नशा करने वालों का दिन और रात में जमावड़ा रहने लगा है। ये लोग वहां नशा करके आस-पास के घरों में चोरियां करने लगे हैं। उनका कोई विरोध भी नहीं करता और पुलिस भी कोई कार्रवाई नहीं करती। जिससे आस-पास के लोग काफी परेशान हैं। <br /><br /><strong>इनका कहना है</strong><br />निगम की कॉलोनी में खंडहर हो रहे मकानों को पूरी तरह से ध्वस्त कराया जाएगा। जिससे वहां जमीन को समतल किया जाए। वहां मकान नहीं होंगे तो कोई अवैध गतिविधि भी नहीं होगी। उसके बाद उस जगह पर या तो पौधारोपण किया जा सकता है या फिर वहां मल्टी स्टोरी बनाई जा सकती है। निगम के क् वाटर भी बनाए जाएं तो कर्मचारियों के रहने के काम आएंगे। इस बारे में चर्चा कर शीघ्र ही समस्या का समाधान कराने का प्रयास करेंगे। <br /><strong>राजपाल सिंह, आयुक्त, नगर निगम कोटा दक्षिण</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 27 Jun 2022 16:03:01 +0530</pubDate>
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                <title>वीरान हॉस्टल से बुर्का पहन कॉलोनी में घुसे दो किशोर</title>
                                    <description><![CDATA[ ब्यावर। सनातन धर्म राजकीय महाविद्यालय के सूने पड़े बॉयज हॉस्टल में घुस दो किशोर बुर्का पहनकर निकले और पास ही भार्गव कॉलोनी में पहुंच गए। बुर्कानशीं दोनों किशोरों को बच्चा चोर समझकर क्षेत्रवासी हरकत में आ गए। उन्होंने दोनों को पकड़कर धुनाई कर दी। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/ajmer/two-teenagers-entered-the-colony-wearing-a-burqa-from-a-deserted-hostel/article-12972"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-06/burqa1.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"> ब्यावर। सनातन धर्म राजकीय महाविद्यालय के सूने पड़े बॉयज हॉस्टल में घुस दो किशोर बुर्का पहनकर निकले और पास ही भार्गव कॉलोनी में पहुंच गए। बुर्कानशीं दोनों किशोरों को बच्चा चोर समझकर क्षेत्रवासी हरकत में आ गए। उन्होंने दोनों को पकड़कर धुनाई कर दी। इसके बाद पुलिस को बुलाकर सुपुर्द कर दिया। पुलिस दोनों को थाने ले गई, जहां उनके परिजन को बुलाकर तस्दीक की गई। पुलिस की प्रारं•िाक पड़ताल में मामला ‘पै्रंक वीडियो’ बनाकर दोस्त से मजाक करने का सामने आया है।</p>
<p style="text-align:justify;">क्षेत्रवासियों के अनुसार स्कूटी सवार दो किशोर वीरान पड़े एसडी कॉलेज के बॉयज हॉस्टल में घुसे और वहां से बुर्का पहनकर पास ही भार्गव कॉलोनी में आ गए। क्षेत्रवासियों में अफवाह फैल गई कि ये बुर्कानशीं बच्चों को उठाने की फिराक में इधर-उधर घूम रहे हैं। दोनों की संदिग्ध गतिविधियों को देख क्षेत्रवासियों ने दबोच कर पिटाई कर दी। इस बीच किसी ने महाविद्यालय प्रशासन को भी सूचित कर दिया। महाविद्यालय में कार्यरत प्रो.जलालुद्दीन काठात मौके पर पहुंचे। इस बीच सूचना पाकर पुलिस भी पहुंच गई और दोनों को थाने ले गई। सूचना के बाद दोनों के परिजन भी थाने पहुंच गए हैं। बताया जा रहा है कि दोनों की तस्दीक करने के बाद पुलिस ने उन्हें परिजन के साथ घर भेज दिया।</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>बोले- ‘पै्रंक वीडियो’ बनाने आए थे</strong></p>
<p style="text-align:justify;">पूछताछ में सामने आया है कि दोनों किशोर ‘पै्रंक वीडियो’ बनाकर अपने किसी दोस्त को डराकर मजाक करने आए थे। लेकिन इससे पहले ही क्षेत्रवासियों के हत्थे चढ़ गए। दोनों के पास नकली गन तथा टेप रॉल भी मिला है।</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>क्षेत्रवासी ने पहले दी रिपोर्ट, बाद में वापस ली</strong></p>
<p style="text-align:justify;">क्षेत्रवासी जितेन्द्र माली ने पुलिस को लिखित रिपोर्ट पेश कर आरोप लगाया था कि दोनों उसकी मासूम बच्ची को उठाकर ले जाने की फिराक में थे। बाद में माली ने थाने पहुंचकर किसी प्रकार की कोई कार्रवाई नहीं चाहने की बात कहकर रिपोर्ट वापस ले ली।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>अजमेर</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 25 Jun 2022 15:42:47 +0530</pubDate>
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                <title>कॉलोनी बनी गंदे पानी की तलैया, आंखे मूंदे बैठे जिम्मेदार </title>
                                    <description><![CDATA[अटरू के वार्ड 12 की कॉलोनी की गलियों में पिछले कई सालों से नालियों का पानी रोड पर फैल जाता है। जिसके कारण आने जाने वालों को बड़ी परेशानी का सामना करना पड़ता है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/baran/colony-became-a-pool-of-dirty-water--sitting-blindly-responsible/article-12248"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-06/colony-bani-talaiyaa.jpg" alt=""></a><br /><p>अटरू। अटरू के वार्ड 12 की कॉलोनी की गलियों में पिछले कई सालों से नालियों का पानी रोड पर फैल जाता है। जिसके कारण आने जाने वालों को बड़ी परेशानी का सामना करना पड़ता है। कई बार तो स्कूल जाते समय छोटे बच्चे इस पानी में गिर जाते हैं। लेकिन जिम्मेदार बेपरवाह बैठे है।<br /><br />वार्डवासी सुरेंद्र सुमन ने बताया कि कई बार हम इसकी सूचना नगरपालिका अटरू को दे चुके हैं। जिसके कारण पिछले साल नगरपालिका के अधिकारी यहां आकर गली में पानी भरा देखा तो अधिकारी यह कहकर चले गए कि बहुत जल्दी इस गली में इंटरलॉकिंग का कार्य प्रारंभ कर दिया जाएगा। परंतु पूरा 1 वर्ष बीत जाने के बाद भी यहां पर गलियों की व्यवस्था वैसी की वैसी ही है। इस समस्या पर किसी का भी ध्यान नहीं है। इसकी सूचना राजस्थान सरकार के हेल्पलाइन नंबर 181 पर भी दे चुके हैं, लेकिन अभी तक किसी भी अधिकारी ने इस समस्या पर कोई ध्यान नहीं दिया है। मौहलावासी रामरतन मीणा ने बताया कि यह समस्या पिछले 5 वर्षों से चली आ रही है। पूरे मौहल्ले में पानी भरा रहता है। उसके चलते लोगो को परेशानी का सामना करना पड़ता है और मौहल्ले में नालियों का पूरा पानी रोड पर आ जाता है। समय-समय पर नालियों की सफाई भी नहीं हो पाती है। <br /><br />वार्ड 12 की गलियों में पानी भरा रहता है। इसके बारे में मैंने नगर पालिका अधिकारी व चेयरमैन सुशीलाबाई को अवगत करा चुका हूं पर उनका कहना है कि और वालों का काम हो जाने के बाद वार्ड 12 का कार्य भी प्रारंभ कर दिया जाएगा व अधिकारी से पहुंचने पर व सही तरीके से यह नहीं बता पा रहे कि यह काम होगा भी या नहीं। <br /><strong>-तेजकरण बैरवा, वार्ड पार्षद, अटरू  </strong> <br /><br />यहां से बच्चे स्कूल जाते समय कीचड़ में गिर जाते हैं। जिसके कारण उनकी यूनिफार्म खराब हो जाती है और उनको स्कूल आने जाने में भी बड़ी परेशानी का सामना करना पड़ता है। वहीं महिलाएं भी सही तरीके से यहां से नहीं निकल पाती है। इसके कारण मौहल्ले वासियों को परेशानी का सामना करना पड़ता है। <br /><strong>- आसाराम मीणा, वार्डवासी, अटरू</strong><br /><br />यहां पर वार्ड 12 में पूरी गली पानी से भरी रहती है। जिसके चलते आने जाने वालों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है। इसके बारे में पिछले वर्ष भी नगर पालिका को अवगत करा चुके हैं। नगरपालिका टीम ने आकर मौके पर आकर देखा नगर पालिका के अधिकारी मौके पर सांत्वना देकर चले गए कि बहुत जल्दी गली में इंटरलॉकिंग का कार्य प्रारंभ कर दिया जाएगा। पूरा 1 वर्ष बीतने के बाद भी यहां पर कोई कार्य प्रारंभ नहीं हुआ है।<br /><strong>- मदनलाल सुमन, वार्डवासी </strong><br /><br />अटरू नगर पालिका के हर वार्ड में इंटरलॉकिंग का कार्य होगा। 8-10 महीनों में हर वार्ड में इंटरलॉकिंग का कार्य पूरा हो जाएगा। <br /><strong>- सुशीला बाई, चेयरमैन, नगरपालिका अटरू </strong><br /><br />अगर यह जगह एस्टीमेट में आ रही होगी तो जल्दी ही इसका कार्य प्रारंभ कर दिया जाएगा। <br /><strong>- सुरेश रेगर, अधिशासी अधिकारी, नगर पालिका अटरू</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>बारां</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 15 Jun 2022 15:03:25 +0530</pubDate>
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                <title> 20 दिन से खुले पड़े मौत के चैम्बर, जिम्मेदार मौन </title>
                                    <description><![CDATA[शहर के अंदरुनी इलाकों में हो रहे निर्माण कार्यों में सरकारी मशीनरी व जिम्मेदारों की बदइंतजामी का दंश पिछले एक साल से शहरवासी भुगत रहे हैं। पहले आरयूडीपीआई ने सीवरेज पाइप लाइन डालने के लिए कॉलोनियों की सड़कें उधेड़ डाली। हालांकि सीसी रोड बनाया है लेकिन सीवरेज के दो फीट चौड़े और चार फीट गहरे चैम्बरों को खुला छोड़ दिया, जो हादसों का कारण बन रहे हैं। 
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/death-chambers-lying-open-for-20-days--responsible-silence/article-11909"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-06/l2.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। शहर के अंदरुनी इलाकों में हो रहे निर्माण कार्यों में सरकारी मशीनरी व जिम्मेदारों की बदइंतजामी का दंश पिछले एक साल से शहरवासी भुगत रहे हैं। पहले आरयूडीपीआई ने सीवरेज पाइप लाइन डालने के लिए कॉलोनियों की सड़कें उधेड़ डाली। डिल मशीनों की कानफाडू आवाज के बीच लोगों ने जैसे-तैसे परेशानियों के दिन काटे। लंबे अरसे बाद काम पूरा होने पर लोग चेन की सांस ले पाते उससे पहले ही नगर निगम भी जेसीबी लेकर उन्हीं कॉलोनियों में कूद गया और रोड चौड़ा करने के नाम पर घरों के आगे बनी चबूतरियों को मलबे के ढेर में तब्दील कर दिया। हालांकि सीसी रोड बनाया है लेकिन सीवरेज के दो फीट चौड़े और चार फीट गहरे चैम्बरों को खुला छोड़ दिया, जो हादसों का कारण बन रहे हैं। इन दिनों विज्ञान नगर के वार्ड 39 में ऐसे ही हालात बने हुए हैं। दरअसल, कोटा दक्षिण नगर निगम द्वारा वार्डों में विभिन्न निर्माण कार्य करवाएं जा रहे हैं। जिनमें सीसी सड़क, सीवरेज चैम्बर, इंटरलोकिंग सहित अन्य कार्य शामिल हैं। <br /><br /><strong>सड़क पर गिरे बाइक सवार दंपती</strong><br />अनिल लालवानी का कहना है, चैम्बर का ढकान करवाने के लिए पार्षद को बोला था लेकिन अनसुना कर दिया। हालात यह हो रहे हैं, दिन में तो गड्ढे दिखाई देने से वाहन चालक संभलकर निकल जाते हैं लेकिन रात को स्ट्रीट लाइट बंद रहती है, जिससे कॉलोनी में अंधेरा होने से चैम्बर दिखाई नहीं देते। तीन दिन पहले शाम साढ़े सात बजे करीब बाइक सवार दम्पति सीवरेज गड्ढे में गिकर चोटिल हो गए। महिला के हाथ में छोटा बच्चा था, जिसे भी मामूली चोट आई। <br /><br /><strong>घर के आगे फिर मलबे का ढेर</strong><br />कविता कुकरेजा ने बताया कि पहले सीवरेज पाइप लाइन डालने के लिए आरयूडीपीआई के ठेकेदारों ने सड़क खोदकर मलबे का ढेर लगाया, अब नगर निगम ने इंटरलॉकिंग के नाम पर घर के बाहर बनी चबुतरियां तोड़कर फिर से मलबे का ढेर लगा दिया। धूल-मिट्टी से जीना मुहाल हो गया। निगम ठेकेदार एक कॉलोनी का काम पूरा किए बिना ही दूसरी कॉलोनी में काम शुरू कर देते हैं, जिससे दोनों ही कॉलोनी के बाशिंदे बदइंतजामी से परेशान हो रहे हैं। <br /><br /><strong>रोड लाइटें बंद, कॉलोनी में अंधेरा</strong><br />स्थानीय निवासियों का कहना है, कॉलोनी की रोड लाइटें बंद पड़ी हैं। शाम ढलते ही अंधेरा हो जाता है और खुले पड़े चैम्बर हादसों का सबब बनते हैं। यहां 20 दिन में कई हादसे हो चुके हैं। पार्षद से ढकान करवाने को कहा लेकिन अनसुना कर दिया। निगम अधिकारी भी मौका मुआयना नहीं करते। जिसकी वजह से ठेकेदार व जनप्रतिनिधि मनमर्जी चलाते हैं। लोग शारीरिक व मानसिक रूप से परेशान हो रहे हैं।  <br /><br /><strong>10 साल के मासूम की बच गई जान</strong><br />स्थानीय निवासी लविशा खत्री बतातीं है, गत बुधवार की शाम ट्यूशन पढ़कर घर लौट रहा 10 वर्षीय बालक सीवरेज गड्ढे में गिरकर लहुलूहान हो गया। होठों से लेकर नाक का उपरी हिस्सा कट गया। मोहल्लेवासियों ने तुरंत बच्चे को बाहर निकाल पास ही क्लिनिक लेकर पहुंचे। इधर, सागर लोहिया कहते हैं, घर के सामने खुले पड़े सीवरेज गड्ढे खतरनाक साबित हो रहे हैं। बच्चे बाहर जाने की जिद करते हैं, ऐसे में साए की तरह उनके पीछे लगे रहते हैं। <br /><br /><strong>चैम्बर में फंस रहे वाहन</strong> <br />कॉलोनीवासी मधु मूलचंदानी ने बताया कि सीवरेज चैम्बर का ढकान नहीं होने से आए दिन हादसे हो रहे हैं। वाहन चालक चोटिल हो रहे हैं। कुछ दिनों पहले देर शाम चेम्बर में कार फंसने से चालक चोटिल हो गया। मोहल्लेवालों ने बमुशिकल कार को बाहर निकाला। वहीं, लोडिंग वाहन भी पलटने से बाल-बाल बचा। इसके अलावा आए दिन बाइक सवार चोटिल हो रहे हैं। <br /><br /><strong>खुले पड़े 2 फीट चौड़े सीवरेज चैम्बर</strong> <br />विज्ञान नगर अशोक पार्क स्थित कॉलोनी में करीब 16 फीट चौड़ी सीसी सड़क बनाई गई है। जिस पर 2 फीट चौड़े व 4 फीट गहरे 8 से 10 सीवरेज चैम्बर बने हैं, जो 20 दिन से खुले पड़े होने से आए दिन हादसे हो रहे हैं। रात को रोड लाइटें बंद होने से कॉलोनी में अंधेरा रहता है। जिससे वाहन चालकों को चैम्बर दिखाई नहीं देते और उसमें गिरकर चोटिल हो जाते हैं। <br /><br />नगर निगम द्वारा वार्डों में सीसी सड़क, इंटरलोकिंग, सीवरेज चैम्बर सहित अन्य कार्य करवाए जा रहे हैं। पार्षद होने के नाते लोगों की सुविधाओं का ध्यान रखना मेरी जिम्मेदारी है। मैने ठेकेदार को अस्थाई रूप से सीवरेज के गड्ढों के आसपास अवरोधक लगाने को कहा था। वैसे, चेम्बरों के ढकान बनकर तैयार हो गए हैं, शनिवार या रविवार को सभी का ढकान कर दिया जाएगा। वहीं, वार्ड की अन्य कॉलोनियों में 20 फीट से अधिक चौड़ी सड़क बनाई है, जहां चैम्बरों के ढकान करवा दिया है।  <br /><strong>- मनोज गुप्ता, पार्षद वार्ड 39</strong><br /><br />सीवरेज से सबंधित काम आरयूडीपीआई या यूआईटी द्वारा करवाया जा रहा है। यदि, किसी वार्ड में कोई समस्या है तो वार्डवासी हमें बताएं, तुरंत समाधान करवाया जाएगा। वैसे, हमारे पास इस तरह की शिकायत नहीं आई, जैसे ही कोई शिकायत आएगी तो जेईएन को मौके पर भेज समाधान करवा देंगे। <br /><strong>- राजीव अग्रवाल, महापौर कोटा दक्षिण नगर निगम</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 11 Jun 2022 14:47:32 +0530</pubDate>
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