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                <title>Private Hospital - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <description>Private Hospital RSS Feed</description>
                
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                <title>मरीज निजी अस्पताल में भर्ती, सरकारी मशीनरी रिपोर्ट में कह रही स्वस्थ</title>
                                    <description><![CDATA[गंभीर रूप से बीमार एक मरीज का कोटा के निजी अस्पताल में इलाज चल रहा है।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/patient-admitted-to-private-hospital--government-machinery-declares-him-healthy-in-report/article-155156"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/1111200-x-600-px)-(3)62.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। सुल्तानपुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) में आईवी फ्लूइड (ग्लूकोज की बोतलें) चढ़ाने से मरीजों की तबीयत बिगड़ने के मामले ने चिकित्सा विभाग में चल रही ढाँक-छुपी को फिर से उजागर कर दिया है। दरअसल सीएचसी प्रभारी डॉ. श्याम बिहारी मालव द्वारा जयपुर मुख्यालय और कोटा के उच्चाधिकारियों को भेजी गई आधिकारिक रिपोर्ट' में दावा किया है कि ग्लूकोज से प्रभावित हुए तीनों मरीज अब 'स्वस्थ' हैं। जबकि हकीकत यह है कि गंभीर रूप से बीमार एक मरीज दिनेश गोचर का कोटा के निजी अस्पताल में इलाज चल रहा है। अभी तक इस रिपोर्ट पर विभाग के अधिकारियों की तरफ से स्पष्ट प्रतिक्रिया नहीं आई है।</p>
<p><strong>रिपोर्ट का सच: रात को बिगड़ी हालत, आनन-फानन में किया रेफर</strong><br />सरकारी रिपोर्ट के मुताबिक, डोबरली निवासी दिनेश गोचर (45) को 23 मई की रात 08:20 बजे बुखार और उल्टी की शिकायत पर भर्ती किया गया था। रात 08:30 बजे ड्यूटी डॉक्टर कमल मालव ने उन्हें मुख्यमंत्री निशुल्क दवा योजना के तहत कल्ल्न. फछ (ग्लूकोज) व अन्य इंजेक्शन लगाए। बोतल चढ़ने के महज आधा घंटे बाद रात 09:00 बजे दिनेश को तेज कंपकंपी, ठंड और खुजली के साथ उल्टियां शुरू हो गईं। हालत बिगड़ती देख डॉक्टरों ने उन्हें एंटी-एलर्जिक और जीवन रक्षक इंजेक्शन दिए।<br />रिपोर्ट में मालव खुद स्कवीकार रहे हैं कि रात 10:15 बजे मरीज को 108 एम्बुलेंस से एमबीएस अस्पताल कोटा रेफर किया गया, लेकिन परिजन उन्हें निजी अस्पताल ले गए जहां उनका इलाज जारी है। इसके बावजूद प्रभारी ने मुख्यालय को भेजे जवाब में मरीज को 'स्वस्थ' लिखा है।</p>
<p><strong>दो अन्य मरीजों की भी चढ़ाई बोतल, कांपने लगे शरीर</strong><br />रिपोर्ट में दो अन्य प्रभावित मरीजों का भी बिंदुवार ब्योरा दिया गया है जिसमें मरीज चिंटू (30), चम्पाखेड़ा निवासी है इन्हें 19 मई को दोपहर 01:00 बजे यूटीआई की शिकायत पर भर्ती किया गया। दोपहर 01:20 बजे डॉ. श्याम मालव ने इन्हें कल्ल्न. ऊठर चढ़ाया। ठीक 20 मिनट बाद मरीज को तेज ठंड, कंपकंपी और खुजली होने लगी। काउंटर ट्रीटमेंट देकर दोपहर 02:30 बजे डिस्चार्ज किया गया। वही दुसरी मरीज शबाना (34), नोताडा की है इन्हें 23 मई की रात 07:10 बजे दस्त की शिकायत पर भर्ती किया गया। रात 07:25 बजे चढ़ते ही रात 07:45 बजे शरीर कांपने लगा और उल्टियां शुरू हो गईं। इन्हें भी रात 09:00 बजे डिस्चार्ज किया गया। हालाकि इन दोनों के परिजनों से बात करने पर उन्होंने पुरी स्वस्थ होने की बात कही।</p>
<p><strong>बचाव की मुद्रा में विभाग: 'मरीजों ने लिखित में शिकायत नहीं की'</strong><br />इस पूरी रिपोर्ट में खास बात यह है कि प्रभारी ने तीनों मरीजों के कॉलम में नीचे एक जैसी लाईन लिखी है- मरीज द्वारा उक्त उपचार तथा दवा के संबंध में किसी भी प्रकार की लिखित में शिकायत प्राप्त नहीं हुई है। जानकार इसे चिकित्सा विभाग का खुद को बचाने का पैंतरा मान रहे हैं, क्योंकि जब पूरे प्रदेश में इस बैच की दवाइयों को संदिग्ध मान कर सप्लाई रोकी जा चुकी है और बची दवाएं सील की गई हैं, तो विभाग जांच के लिये लिखित शिकायत का बहाना क्यों बना रहा है?</p>
<p><strong>सवाल कागजों में 'स्वस्थ', अस्पताल के बेड पर मरीज!</strong><br />सरकारी सिस्टम की संवेदनहीनता देखिए कि सुल्तानपुर सीएचसी के अधिकारी ने जयपुर मुख्यालय (नोडल अधिकारी), संयुक्त निदेशक कोटा और सीएमएचओ कोटा को भेजी रिपोर्ट में यह लिख दिया कि 'मरीज वर्तमान में स्वस्थ है'। सवाल यह उठता है कि अगर मरीज पूरी तरह स्वस्थ था, तो उसे रात के 10:15 बजे सरकारी 108 एम्बुलेंस बुलाकर कोटा के हायर सेंटर क्यों रेफर करना पड़ा? और अगर वह स्वस्थ है तो आज भी निजी अस्पताल के बेड पर उसका इलाज क्यों चल रहा है? विभागीय आंकड़ों की बाजीगरी मरीजों की जान पर भारी पड़ रही है।</p>
<p> आज मिटिंग की व्यस्तता के चलते मुझे इस मामले की ज्यादा अपडेट नहीं है। हाँलाकि फेक्चुअल रिपोर्ट हमें मिल गयी है मैने अभी नहीं देखी।<br /><strong>- डॉ. घनश्याम मीणा , डिप्टी सीएमएचओ कोटा </strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 27 May 2026 13:05:37 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>अस्पताल में महिला मरीज की मौत पर बवाल, परिजनों ने हॉस्पिटल प्रशासन पर लगाया इलाज में लापरवाही का आरोप</title>
                                    <description><![CDATA[इसके बाद उच्च स्तर के निर्देश पर एसएमएस मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल से मामले की जांच के लिए कमेटी गठित करवाने का आग्रह किया है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/family-members-accused-the-hospital-administration-of-negligence-in-treatment/article-128292"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-09/copy-of-news-(6)11.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। जयपुर में गोपालपुरा बाइपास स्थित निजी हॉस्पिटल में भर्ती महिला मरीज की मौत पर बवाल हो गया। परिजनों ने हॉस्पिटल प्रशासन पर इलाज में लापरवाही का आरोप लगाते हुए हॉस्पिटल परिसर में सोमवार को हंगामा कर दिया। घटना के बाद परिजनों के साथ आए लोगों ने हॉस्पिटल का घेराव किया और धरने पर बैठ गए। वहीं मामले में जांच के लिए जयपुर सीएमएचओ द्वितीय ने एक कमेटी बनाई। जानकारी के अनुसार महिला मरीज शशि शर्मा को एक सितंबर को ब्रेन में परेशानी के चलते अस्पताल में भर्ती कराया गया। जांच के बाद यहां डॉक्टरों ने क्लॉट जमने की बात कहते हुए मरीज के ब्रेन का ऑपरेशन किया।</p>
<p>पिछले कुछ समय पहले मरीज की तबीयत बिगड़ने लगी और 28 सितंबर को मरीज की डेथ हो गई। परिजनों ने अस्पताल प्रशासन और डॉक्टर के खिलाफ इलाज में लापरवाही का आरोप लगाया। जयपुर सीएमएचओ द्वितीय ने मामले में एक कमेटी बनाई है। कमेटी ने प्राथमिक जांच में मरीज को सेप्टीसीमिया होने पर मल्टीपल ऑर्गन फेलियर होने की बात कही है। कमेटी ने जांच के लिए सुपर स्पेशियलिटी स्तर के डॉक्टरों को भी शामिल करने की मांग की है। इसके बाद उच्च स्तर के निर्देश पर एसएमएस मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल से मामले की जांच के लिए कमेटी गठित करवाने का आग्रह किया है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 30 Sep 2025 11:23:20 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur PS]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>प्राइवेट हॉस्पिटल आरजीएचएस स्कीम बकाया मामला : सरकार जल्द बुला सकती है आरएएचए प्रतिनिधि को बातचीत के लिए</title>
                                    <description><![CDATA[जानकारी के अनुसार प्राइवेट अस्पतालों के भुगतान को लेकर बने संगठन राजस्थान एलियांज ऑफ़ हेल्थ एसोसिएशन के प्रतिनिधि मंडल से वार्ता होगी]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/private-hospital-rghs-scheme-arrears-case-government-may-soon-call/article-120143"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-05/673202-secretariate.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। राजस्थान में प्राइवेट अस्पतालों के राजस्थान गवर्नमेंट हेल्थ स्कीम यानी आरजीएचएस स्कीम में बीते मार्च तक के बकाया 980 करोड रुपए का भुगतान न होने के बाद प्राइवेट हॉस्पिटलों के द्वारा 15 जुलाई से स्कीम में पात्र लोगों को कैशलेस इलाज नहीं देने के फैसले को लेकर राजस्थान सरकार जल्दी ही प्राइवेट अस्पतालों को बातचीत के लिए बुला सकती है। जानकारी के अनुसार प्राइवेट अस्पतालों के भुगतान को लेकर बने संगठन राजस्थान एलियांज ऑफ़ हेल्थ एसोसिएशन के प्रतिनिधि मंडल से वार्ता होगी। </p>
<p>प्राइवेट हॉस्पिटलों ने स्कीम में कैशलेस की जगह पुनरभुगतान की 2021 से पहले की स्कीम लागू करने की मांग की है। ताकि अस्पतालों के बकाया का सिस्टम खत्म हो सके। वहीं दूसरी ओर वित्त विभाग ने अस्पतालों के बकाया 980 करोड रुपए भुगतान करने को लेकर भी विचार विमर्श शुरू कर दिया है। ऐसे में उम्मीद है कि प्राइवेट अस्पतालों का बकाया भुगतान को लेकर कैशलेस स्कीम बंद करने का ऐलान 15 जुलाई से पहले ही वापस ले लिया जाए और प्रदेश के सरकारी कर्मचारी पेंशनर्स सहित उनके परिजनों को कैशलेस इलाज जारी रहे।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 11 Jul 2025 15:29:16 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>निजी अस्पतालों के बाहर लगाए जाएं चिरंजीवी योजना के बोर्ड, मरीजों के लिए अलग से काउंटर: यादव</title>
                                    <description><![CDATA[जयपुर शहर कांग्रेस के निवर्तमान महामंत्री और प्रवक्ता विमल यादव ने मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और चिकित्सा मंत्री रघु शर्मा से मांग की है कि चिरंजीवी योजना का अधिक से अधिक लाभ देने के लिए निजी अस्पतालों के बाहर भी चिरंजीवी योजना के बोर्ड लगाए जाएं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/%E0%A4%A8%E0%A4%BF%E0%A4%9C%E0%A5%80-%E0%A4%85%E0%A4%B8%E0%A5%8D%E0%A4%AA%E0%A4%A4%E0%A4%BE%E0%A4%B2%E0%A5%8B%E0%A4%82-%E0%A4%95%E0%A5%87-%E0%A4%AC%E0%A4%BE%E0%A4%B9%E0%A4%B0-%E0%A4%B2%E0%A4%97%E0%A4%BE%E0%A4%8F-%E0%A4%9C%E0%A4%BE%E0%A4%8F%E0%A4%82-%E0%A4%9A%E0%A4%BF%E0%A4%B0%E0%A4%82%E0%A4%9C%E0%A5%80%E0%A4%B5%E0%A5%80-%E0%A4%AF%E0%A5%8B%E0%A4%9C%E0%A4%A8%E0%A4%BE-%E0%A4%95%E0%A5%87-%E0%A4%AC%E0%A5%8B%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%A1--%E0%A4%AE%E0%A4%B0%E0%A5%80%E0%A4%9C%E0%A5%8B%E0%A4%82-%E0%A4%95%E0%A5%87-%E0%A4%B2%E0%A4%BF%E0%A4%8F-%E0%A4%85%E0%A4%B2%E0%A4%97-%E0%A4%B8%E0%A5%87-%E0%A4%95%E0%A4%BE%E0%A4%89%E0%A4%82%E0%A4%9F%E0%A4%B0--%E0%A4%AF%E0%A4%BE%E0%A4%A6%E0%A4%B5/article-889"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2021-06/2021-06-25~aqmik_nl.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। जयपुर शहर कांग्रेस के निवर्तमान महामंत्री और प्रवक्ता विमल यादव ने मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और चिकित्सा मंत्री रघु शर्मा से मांग की है कि चिरंजीवी योजना का अधिक से अधिक लाभ देने के लिए निजी अस्पतालों के बाहर भी चिरंजीवी योजना के बोर्ड लगाए जाएं। यादव ने कहा कि जैसा कि लगातार समाचार पत्रों में खबर आ रही हैं कि मुख्यमंत्री चिरंजीवी स्वास्थ्य बीमा योजना को कुछ निजी अस्पताल लागू नहीं कर रहे हैं, जिससे मरीजों को इधर-उधर भटकना पड़ता है, सरकार को शिकायत करनी पड़ती है। <br /> <br /> उन्होंने कहा कि इसके समाधान के लिए मुख्यमंत्री अशोक गहलोत एवं स्वास्थ्य मंत्री रघु शर्मा से निवेदन है कि जिन अस्पतालों को इस योजना में पंजीकृत किया गया है, उनके बाहर आम आदमी की सुविधा के लिए बड़े बोर्ड लगाए जाएं। जिन पर योजना का विस्तार से विवरण हो, ताकि कोई मरीज अस्पताल पहुंचे तो उसे पता लग जाए कि चिरंजीवी स्वास्थ्य बीमा योजना का लाभ इस चिकित्सालय में मिल रहा है और उसे किसी प्रकार की परेशानी नहीं हो। इस प्रकार से आम जनता इस योजना का पूरा लाभ उठा पाएगी और सरकार को आने वाली शिकायतों से भी राहत मिलेगी। साथ ही अस्पतालों को निर्देश भी दिया जाए कि इस योजना में आने वाले मरीजों के लिए अलग से काउंटर की व्यवस्था की जाए।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
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                <pubDate>Fri, 25 Jun 2021 16:24:03 +0530</pubDate>
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                <title>प्राइवेट अस्पताल को भी सरकारी वेंटिलेटर्स-कंसंट्रेटर देने की छूट, मरीज से इनके चॉर्ज नहीं वसूलेंगे निजी अस्पताल</title>
                                    <description><![CDATA[राजस्थान में कोरोना मरीजों की संख्या के लगातार बढ़ने और प्राइवेट अस्पताल में भी संसाधन कम पड़ने के चलते सरकार ने फैसला किया है कि जरूरत पड़ने पर सरकारी वेंटिलेटर्स और ऑक्सीजन कंसंट्रेटर कि उपलब्धता अगर सरकारी अस्पताल में उपयोग के बाद अधिक है तो उसे प्राइवेट अस्पताल को भी दिया जा सकेगा। चिकित्सा विभाग के प्रमुख शासन सचिव अखिल अरोड़ा ने मंगलवार को इसके आदेश जारी किए हैं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/%E0%A4%AA%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%87%E0%A4%B5%E0%A5%87%E0%A4%9F-%E0%A4%85%E0%A4%B8%E0%A5%8D%E0%A4%AA%E0%A4%A4%E0%A4%BE%E0%A4%B2-%E0%A4%95%E0%A5%8B-%E0%A4%AD%E0%A5%80-%E0%A4%B8%E0%A4%B0%E0%A4%95%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A5%80-%E0%A4%B5%E0%A5%87%E0%A4%82%E0%A4%9F%E0%A4%BF%E0%A4%B2%E0%A5%87%E0%A4%9F%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%B8-%E0%A4%95%E0%A4%82%E0%A4%B8%E0%A4%82%E0%A4%9F%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A5%87%E0%A4%9F%E0%A4%B0-%E0%A4%A6%E0%A5%87%E0%A4%A8%E0%A5%87-%E0%A4%95%E0%A5%80-%E0%A4%9B%E0%A5%82%E0%A4%9F--%E0%A4%AE%E0%A4%B0%E0%A5%80%E0%A4%9C-%E0%A4%B8%E0%A5%87-%E0%A4%87%E0%A4%A8%E0%A4%95%E0%A5%87-%E0%A4%9A%E0%A5%89%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%9C-%E0%A4%A8%E0%A4%B9%E0%A5%80%E0%A4%82-%E0%A4%B5%E0%A4%B8%E0%A5%82%E0%A4%B2%E0%A5%87%E0%A4%82%E0%A4%97%E0%A5%87-%E0%A4%A8%E0%A4%BF%E0%A4%9C%E0%A5%80-%E0%A4%85%E0%A4%B8%E0%A5%8D%E0%A4%AA%E0%A4%A4%E0%A4%BE%E0%A4%B2/article-330"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2021-05/0000011.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। राजस्थान में कोरोना मरीजों की संख्या के लगातार बढ़ने और प्राइवेट अस्पताल में भी संसाधन कम पड़ने के चलते सरकार ने फैसला किया है कि जरूरत पड़ने पर सरकारी वेंटिलेटर्स और ऑक्सीजन कंसंट्रेटर कि उपलब्धता अगर सरकारी अस्पताल में उपयोग के बाद अधिक है तो उसे प्राइवेट अस्पताल को भी दिया जा सकेगा। चिकित्सा विभाग के प्रमुख शासन सचिव अखिल अरोड़ा ने मंगलवार को इसके आदेश जारी किए हैं। उन्होंने सभी जिला कलेक्टरों को आदेश दिए हैं कि सरकारी अस्पतालों में संसाधनों के उपयोग के बाद इन्हें प्राइवेट अस्पताल को दिया जा सकता है, लेकिन प्राइवेट अस्पताल मरीजों से इनके चॉर्ज वसूल नहीं कर सकेंगे। उन्हें इसके लिए पाबंद कर ही आवंटित किया जाए। जिला कलेक्टर स्तर पर इसकी मॉनिटरिंग हो कि वेंटीलेटर्स और ऑक्सीजन कंसंट्रेटर के उपयोग की राशि प्राइवेट अस्पताल वसूल ना कर सके। <br /> <br /> गौरतलब है कि हाल ही में भरतपुर के पीबीएम अस्पताल से कुछ पीएम केयर फंड के वेंटीलेटर्स को एक प्राइवेट अस्पताल को यूज के लिए दे दिया गया था। जिसके बाद विवाद हुआ था कि इनहें सरकारी अस्पतालों में गरीब मरीजों के लिए क्यों नहीं उपयोग किया गया। प्राइवेट अस्पताल इसकी मरीजों से मोटी राशि भी वसूल रहे थे। जबकि सरकार को केवल दो हजार रुपए प्रतिदिन दे रहे थे। अब सरकार ने यह फैसला किया है। <br /> <br /> <strong>प्लाज्मा थैरेपी की दरें घटी</strong><br /> राजस्थान में कोरोना संक्रमितों के इलाज में उपयोग हो रही प्लाज्मा थैरेपी के लिए सरकार ने मरीजों को राहत दी है। अब मरीजों के लिए काम आने वाले कन्वलसेंट प्लाज्मा 200 एमएल की कीमत 16 हजार की जगह 10 हजार रुपए ही ली जा सकेगी। चिकित्सा मंत्री डॉ. रघु शर्मा ने मंगलवार को इसके आदेश जारी कर दिए हैं। चिकित्सा विभाग के प्रमुख शासन सचिव अखिल अरोड़ा ने बताया कि प्रदेश में निजी अस्पतालों में कोरोना के उपचार के लिए प्लाज्मा थैरेपी की अधिकतम दर 16500 रुपए निर्धारित की गई थी, लेकिन दर में अब कमी की गई है। एक यूनिट कन्वलसेंट प्लाज्मा के लिए यह दर अब 10 हजार रुपए कर दी गई है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
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