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                <title>machine - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <title>वन्यजीवों के अन्तिम संस्कार के लिए बनाया यंत्र, पर्यावरण की दृष्टि से भी सुरक्षित</title>
                                    <description><![CDATA[ प्रदेश के पहले मिनी शवदाह गृह से रुकेगी अंग तस्करी , अवशेषों की खाद से महकेगी विभाग की नर्सरी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/device-developed-for-the-dignified-cremation-of-wildlife%E2%80%94also-environmentally-safe/article-149692"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/1200-x-600-px)-(2)3.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। क्षेत्रीय वन्य जीव मंडल ने वन्यजीवों के सम्मानजनक निस्तारण की दिशा में एक अनूठी पहल की है। जिले में अब घायल वन्यजीवों और पक्षियों की मृत्यु के बाद उनके शवों को जमीन में दफनाने की पारंपरिक मजबूरी खत्म होगी। विभाग ने एक विशेष 'ओवननुमा शवदाह गृह' तैयार किया है, जो न केवल पर्यावरण की दृष्टि से सुरक्षित है, बल्कि वन्यजीवों के अंगों की तस्करी को रोकने में भी अभेद्य कवच साबित होगा।</p>
<p><strong>विभाग ने बनाया प्रदेश का पहला मिनी शवदाह गृह</strong><br />प्रदेश में पहली बार अन्तिम संस्कार के लिए बने यंत्र से अंतिम संस्कार होगा। नयापुरा स्थित क्षेत्रीय वन्य जीव कार्यालय कोटा ने इसे बनाकर तैयार कर लिया है। जिसमें जिले भर से लाये गये घायल व इलाज के दौरान दम ताेड़ने वाले जानवराें, पक्षीयों का अंतिम संस्कार किया जा सकेगा। कोटा मेें इस पहल की शुरूआत जल्द ही होने वाली है।</p>
<p><strong>अहमदाबाद से मिली प्रेरणा से बनाया मिनिएचर</strong><br />डीसीएफ (वाइल्डलाइफ) अनुराग भटनागर ने बताया कि गुजरात दौरे के दौरान उन्होंने देखा कि वहां हाथियों जैसे बड़े जानवरों के लिए विशाल शवदाह गृह बने हुए हैं। जिनमें वाहन से लाये गये बड़े से बड़े जानवर को सीधे ही रखा जा सकता है। राजस्थान में फिलहाल इसके लिए अलग से बजट उपलब्ध नहीं था। इसलिए कोटा टीम ने उसी तकनीक का एक मिनिएचर मॉडल स्थानीय स्तर पर तैयार करवाया। नयापुरा स्थित वन्य जीव कार्यालय में जमीन की कमी और बारिश में दुर्गंध की समस्या को देखते हुए यह कदम उठाया गया है।</p>
<p><strong>गैस आधारित कम खर्चीला व सुरक्षित</strong><br />इसे बनाने में विभाग के एडेप्टिव स्कीम से बचे पैसे से कुल 3.25 लाख रूपये की लागत में ही इसे तैयार कर लिया। इस शवदाह यंत्र की बनावट बेहद मजबूत है। जिसे आधुनिक और वैज्ञानिक मापदंडों पर तैयार किया गया है। इसमें अन्य छोटे जीवो के अलावा भेड़िया ,लोमड़ी ,बन्दर , व्यस्क चिंकारा , हिरण जैसे जानवरों का निस्तारण किया जा सकेगा। गैस आधारित संचालन प्रक्रिया को प्रदूषण मुक्त रखने के लिए इसमें तीन गैस कनेक्शन का आवेदन किया गया है, ताकि शव को पूरी तरह भस्म किया जा सके।</p>
<p><strong>6 एमएम की लोहे की चादर से निर्मित</strong><br />विशाल आकार यह ओवननुमा यंत्र करीब 9 फीट लंबा, पौने चार फीट चौड़ा और साढ़े चार फीट ऊंचा है। इसका ढ़ांचा मोटी चद्दर की दोहरी परत से बनी हैं, जिससे इसकी कुल मोटाई 4 इंच हो जाती है। जिसमे एक साथ 6 बर्नर से ऐ साथ गैस ड़ाली जाती है यह संरचना उच्च तापमान को बर्दाश्त करने में सक्षम है।</p>
<p><strong>पर्यावरण संरक्षण तस्करी पर रोक</strong><br />परंपरागत रूप से जानवरों को जमीन में दफन करने पर हड्डीयों व अंगों की चोरी या दुरुपयोग का जोखिम बना रहता है। इस मशीन में शव पूरी तरह राख में तब्दील हो जाएगा, जिससे तस्करी की संभावनाएं शून्य हो जाएंगी। साथ ही, बारिश के मौसम में जमीन से आने वाली दुर्गंध और संक्रमण का खतरा भी टल जाएगा।</p>
<p><strong>वेस्ट टू वेल्थ हड्डियों के पाउडर से बढ़ेगी वन भूमि की उर्वरता</strong><br />चिड़ियाघर और बायोलॉजिकल पार्क में मांसाहारी वन्यजीवों के भोजन के बाद रोजाना करीब 80 से 85 किलो हड्डियां बचती हैं। पर्यावरण नियमों के तहत इन्हें बाहर नहीं फेंका जा सकता। अब इन हड्डियों को इस भट्टी में जलाने के बाद क्रशर मशीन से पीसा जाएगा। इस पाउडर का उपयोग विभाग की नर्सरी और वन भूमि में खाद के तौर पर होगा, जिससे पौधों को प्राकृतिक पोषण मिलेगा और जानवरों के अवशेषों का कोई दुरुपयोग नहीं हो सकेगा।</p>
<p>बजट की कमी के बावजूद हमने वन्यजीवों के वैज्ञानिक निस्तारण के लिए यह यंत्र तैयार करवाया है। इससे न केवल स्वच्छता रहेगी, बल्कि बहुमूल्य वन्यजीव अंगों की सुरक्षा भी सुनिश्चित होगी।<br /><strong>-अनुराग भटनागर, डीसीएफ वाइल्डलाइफ, कोटा</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 09 Apr 2026 15:16:39 +0530</pubDate>
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                <title>बायो मेट्रिक मशीन में चेहरा दिखाने पर ही खुलेगा दरवाजा, बाहर से आने वाले लोगों पर होगा नियंत्रण</title>
                                    <description><![CDATA[केडीए की नई बिल्डिंग में लागू हुआ विजिटर्स मैनेजमेंट सिस्टम।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/doors-will-only-open-after-showing-their-faces-in-a-biometric-machine/article-143786"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-02/12200-x-600-px)-(1)9.png" alt=""></a><br /><p>कोटा । कोटा विकास प्राधिकरण की नई विस्तारित बिल्डिंग स्थित कार्यालय में अधिकारियों व कर्मचारियों से मिलने जाने वाले बाहरी लोगों को अब बायो मेट्रिक मशीन में चेहरा दिखाना व अपना नाम पता नोट करवाना आवश्यक होगा। उसके बाद ही प्रवेश द्वार खुलेगा। केडीए की ओर से नई बिल्डिग में बुधवार से विजिटर्स मैनेजमेंट सिस्टम को लागू किया गया है। हालांकि इसका ट्रायल तो पिछले करीब एक सप्ताह से अधिक समय से चल रहा था। उसके सही तरह से काम करने के बाद बुधवार से उसे लागू कर दिया गया।</p>
<p><strong>अंदर जाते व बाहर निकलते समय दिखाने होंगे चेहरे</strong><br />सामान्य तौर पर सरकारी व निजी कार्यालयों में बायो मेट्रिक मशीन का उपयोग वहां काम करने वाले कर्मचारियों व अधिकारियों के लिए किया जाता है। लेकिन केडीए की नई बिल्डिंग में इसे कर्मचारियों व अधिकारियों के साथ ही आमजन के लिए भी लागू किया गया है।बाहरी से आने वाले किसी भी व्यक्ति को यदि अधिकारी व कर्मचारी से मिलना है तो सबसे पहले उन्हें कम्प्यूटराइज बायो मेट्रिक कक्ष में बैठे कर्मचारियों को अपना नाम व मोबाइल नम्बर के साथ ही किससे मिलना है उसकी जानकारी देनी होगी। उसे नोट करने के बाद वहां लगी बायो मेट्रिक मशीन में चेहरा दिखाना होगा। जिससे उस व्यक्ति का पंजीयन होगा।उसके बाद मुख्य प्रवेश द्वार के पास लगी मशीन में भी चेहरा दिखाना होगा। वहां से ओके होने के बाद ही दरवाजा खुलेगा। जिससे अंदर प्रवेश किया जा सकेगा। वहीं कामहोने के बाद वापस बाहर आते समय भी गेट के पास अंदर लगी बायो मेट्रिक मशीन में चेहरा दिखाने पर ही गेट खुलेगा। पहले दिन कार्यालय आए लोग इस सिस्टम को देखकर चौक गए। जबकि अधिकतर ने इसकी सराहना की।</p>
<p><strong>गेट पर आॅटोमैटिक लॉक सिस्टम</strong><br />बिल्डिंग में प्रवेश के लिए एक ही मुख्य प्रवेश द्वार है। उसे बायो मेट्रिक मशीन से जोड़ा गया है। साथ ही उसमें आॅटो मेटिक सिस्टम लगाया गया है। बाय मेट्रिक मशीन में चेहरा दिखाने के बाद ही वह गेट खुलगा। हालांकि वहां दो होमगार्ड को लगाया गया है लेकिन वे केवल व्यवस्था की दृष्टि से हैं।विजिटर्स के लिए प्रवेश की व्यवस्था सुबह 11 से शाम 5 बजे तक ही रहेगी।</p>
<p><strong>कर्मचारियों के लिए बायो मेट्रिक उपस्थिति</strong><br />आम आदमी के लिए जहां विजिटर्स मैनेजमेंट सिस्टम लागू किया गया है। वहीं वहां काम करने वाले अधिकारियों व कर्मचारियों के लिए भी बायो मेट्रिक उपस्थिति सिस्टम लागू किया गया है। अधिकारी-कर्मचारियों के भी आते-जाते समय बायो मेट्रिक मशीन से ही उपस्थिति दर्ज होगी।</p>
<p><strong>सीसीटीवी से कवर है पूरा सिस्टम</strong><br />केडीए अधिकारियों का कहना है कि यह पूरा सिस्टम सीसीटीवी कैमरे से कवर है। जिससे इसमें किसी तरह की और किसी के भी द्वारा कोई छेड़छाड़ नहीं की जा सके। इसके लिए दो होमगार्ड विशेष रूप से लगाए गए हैं। अधिकारियों का कहना है कि इस पूरे सिस्टम का संचालन केडीए कर्मचारियों के द्वारा ही किया जा रहा है।</p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br />कार्यालय की नई बिल्डिग में इस सिस्टम को लागू किया गया है। वहां की व्यवस्थाएं उसके अनुरूप है। इससे अनावश्यक रूप से कार्यालय में आने वाले लोगों पर रोक तो लगेगी ही। साथ ही बाहर से आने वाले लोगों का रिकॉर्ड भी रहेगा। अधिकारियों व कर्मचारियों की बायो मेट्रिक उपस्थिति तो पुरानी बिल्डिंग में भी है। विजिटर्स मैनेजमेंट सिस्टम का ट्रायल कई दिन से चल रहा था। उसे बुधवार से लागू किया गया है। विजिटर्स सुबह 11 से शाम 5 बजे तक ही प्रवेश कर सकेंगे।<br /><strong>- हर्षित वर्मा, उपायुक्त, कोटा विकास प्राधिकरण</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 19 Feb 2026 15:22:54 +0530</pubDate>
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                <title>30 साल पुरानी एक मात्र मशीन पर धुलाई का जिम्मा, जानें पूरा मामला </title>
                                    <description><![CDATA[एमबीएस अस्पताल प्रशासन की  लापरवाही से लॉन्ड्री मशीन हुई नाकारा।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/a-single-30-year-old-machine-is-responsible-for-laundry/article-143783"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-02/12200-x-600-px)-(2)9.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। लाखों की मशीनरी भी प्रशासनिक लापरवाही के चलते किस तरह कण्डम हो जाती है इसकी बानगी कोटा के एमबीएस अस्पताल के लॉन्ड्री सेक्शन में देखने को मिली । बेपरवाही का आलम यह है कि अस्पताल में मरीजों की चादरें, कंबल और अन्य कपड़ों की धुलाई अभी भी लगभग 25 वर्ष पुरानी मशीनों से की जा रही है, जिससे काम की रफ्तार और गुणवत्ता दोनों प्रभावित हो रही हैं। अस्पताल से आए दिन दाग लगे चद्दरों की शिकायतें भी कितनी  बार परिजनों द्वारा सामने आती रहती है । लॉन्ड्री सेक्शन के प्रभारी ने बताया कि यहां पर सोमवार और गुरुवार को ही कपड़े लिए और दिए जाते हैं, क्योंकि पुरानी मशीनें होने के कारण लगातार धुलाई का काम चल रहा है। इसी वजह से पूरे सप्ताह में नियमित और समय पर कपड़ों की आपूर्ति करना चुनौतीपूर्ण हो गया है।</p>
<p><strong>मात्र 70 हजार की दरकार</strong><br />जानकारी के अनुसार वर्ष 2020 में अस्पताल प्रशासन को एक आधुनिक कपड़ा धुलाई मशीन स्थापित की गई थी, जिसे एक आॅयल कम्पनी के सहयोग से उपलब्ध कराया गया था। यह मशीन अत्याधुनिक तकनीक से लैस थी । पारम्परिक ब्लीच,सोडा व सर्फ के प्रयोग से कपडो व त्वचा को भी परेशानी होती है जबकि नई मशीन व उन्नत कैमिकल से अधिक मात्रा में साफ-सफाई सुनिश्चित करने में सक्षम थी । यहां काम करने वाले लोगों ने बताया कि इसको देखने के लिए इंजीनियर भी आए थे जिन्होने 70 हजार खर्चा  बताया था । कार्मिकों ने बताया कि नई लगाई गई मशीन को पहले तो करीब दो सालों तक चालू ही नहीं किया गया। 2022-23 में मशीन को चालू किया गया तब काम में थोड़ा आराम और सुधार आया था लेकिन पिछले करीब 14 माह से भी अधिक का समय गुजर गया लेकिन मशीन चालू नहीं हो पायी है।</p>
<p><strong>बेड़शीट सहित ओटी ड्रेस की धुलाई</strong><br />परिसर में स्थापित इस धुलाई केन्द्र पर रोजाना करीब 600 बेडशीट के अलावा आई ओटी, जनरल व न्यूरो आॅपरेशन थियेटर के भी कपडे़ आते है। यहां पर पुराने समय की धुलाई करने वाली दो मशीनें है इनमें से एक तो पूरी तरह गल चुकी है जबकि दूसरी को  किसी तरह जुगाड़ करके चलाया जा रहा है जो भी बंद हो जाए अस्पताल में भारी परेशानी पैदा हो सकती है।</p>
<p><strong>इनका कहना है </strong><br />मशीन की कम्पनी का पता कराया है, मशीन की मरम्मत के लिए आवश्यक पत्रावलियां तैयार की जा चुकी है, विशेषज्ञों के अनुसार करीब 70-80 हजार का खर्च आने का एस्टीमेट है। इसको चालू करवाया जाएगा।<br /><strong>- डॉ. कर्नेश गोयल, उपाधीक्षक एमबीएस असपताल </strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 19 Feb 2026 14:46:44 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>मोखापाड़ा पशु चिकित्सालय: सोनोग्राफी मशीन पर जमी धूल, काफी समय से खराब होने से नहीं हो रहा उपयोग </title>
                                    <description><![CDATA[पशु चिकित्सालय में रोज 80 से 100 तक पशु उपचार के लिए लाए जाते हैं। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/mokhapaada-veterinary-hospital--sonography-machine-covered-in-dust--unused-for-a-long-time-due-to-being-out-of-order/article-138233"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-01/1200-x-600-px-(1)7.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। शहर के मोखापाड़ा स्थित राजकीय पशु चिकित्सालय में सोनोग्राफी मशीन काफी समय से बंद पड़ी हुई है। आधुनिक जांच सुविधा के अभाव में चिकित्सकों को बीमार पशुओं का उपचार केवल लक्षणों और अनुभव के आधार पर करना पड़ रहा है। इससे न सिर्फ उपचार की गुणवत्ता प्रभावित हो रही है, बल्कि कई जटिल मामलों में पशुओं की जान पर भी जोखिम बढ़ गया है। पशु चिकित्सालय में रोजाना 80 से 100 तक पशु उपचार के लिए लाए जाते हैं। इनमें बड़ी संख्या दुधारू गाय-भैंसों, गर्भवती पशुओं और प्रजनन संबंधी समस्याओं वाले मामलों की होती है। सोनोग्राफी मशीन के जरिए गर्भ की स्थिति, भ्रूण का विकास, आंतरिक सूजन, ट्यूमर, चोट या संक्रमण की सटीक जानकारी मिलती है। सोनोग्राफी मशीन बंद होने से गर्भ जांच पूरी तरह प्रभावित हो गई है।</p>
<p><strong>निजी जांच केंद्रों का ही सहारा</strong><br />सरकारी अस्पताल में सोनोग्राफी सुविधा नहीं मिलने से पशुपालकों को निजी क्लीनिकों और जांच केंद्रों की ओर रुख करना पड़ रहा है। निजी स्तर पर सोनोग्राफी कराने पर 800 से 1500 रुपऐ तक खर्च आ रहा है, जो छोटे और मध्यम पशुपालकों के लिए बड़ी रकम है। कई पशुपालक आर्थिक तंगी के कारण जांच नहीं करा पा रहे हैं, जिससे बीमारी समय पर पकड़ में नहीं आ रही। चिकित्सकों के अनुसार सोनोग्राफी के बिना कई बार बीमारी की सही वजह स्पष्ट नहीं हो पाती। इससे इलाज ट्रायल-बेस पर करना पड़ता है, दवाइयों की अवधि बढ़ जाती है और पशु के स्वस्थ होने में अधिक समय लगता है। दुधारू पशुओं के मामलों में दूध उत्पादन घटने से पशुपालकों को सीधा आर्थिक नुकसान झेलना पड़ रहा है।</p>
<p><strong>नई मशीन की मांग, लेकिन अब तक इंतजार</strong><br />पशु चिकित्सालय प्रशासन की ओर से कई माह पहले ही नई सोनोग्राफी मशीन की मांग उच्च अधिकारियों को भेज दी गई है। बजट और प्रक्रिया का हवाला देते हुए मामला लंबित बताया जा रहा है। चिकित्सकों का कहना है कि आधुनिक मशीन मिलने से न सिर्फ जांच सटीक होगी, बल्कि रेफर के मामलों में भी कमी आएगी। स्थानीय पशुपालकों ने विभाग से मांग की है कि मोखापाड़ा पशु चिकित्सालय में जल्द से जल्द नई सोनोग्राफी मशीन उपलब्ध कराई जाए। ताकि क्षेत्र के हजारों पशुपालकों को राहत मिल सके और पशुओं का समय पर, सटीक और प्रभावी उपचार सुनिश्चित हो सके।</p>
<p>सरकारी अस्पताल में सोनोग्राफी सुविधा नहीं होने से हमें निजी जगह जांच करानी पड़ती है। खर्च ज्यादा आता है, ऊपर से समय भी बर्बाद होता है। गरीब पशुपालकों के लिए यह बड़ी समस्या है।<br /><strong>-रामलाल, पशुपालक</strong></p>
<p>पशु चिकित्सालय में सोनोग्राफी मशीन खराब पड़ी हुई है। नई मशीन के लिए डिमांड भेज रखी है। नई मशीन मिलने के बाद उपचार की गुणवत्ता काफी बेहतर हो सकेगी।<br /><strong>-डॉ. भंवर सिंह, उपनिदेशक, राजकीय पशु चिकित्सालय</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 03 Jan 2026 15:21:43 +0530</pubDate>
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                <title>पेड़ों की नहीं चढ़ेगी बलि, गोकाष्ठ मशीन बनेगी सहारा</title>
                                    <description><![CDATA[बजट घोषणा की पालना में गोकाष्ठ मशीन उपलब्ध कराई जाएगी। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/trees-will-not-be-sacrificed--cow-wood-machine-will-be-the-support/article-114042"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-05/news-(3)19.png" alt=""></a><br /><p>कोटा । जिले के गौ-पालकों के लिए अच्छी खबर है। अब पेड़ों की लकड़ी की बजाय गोबर की लकड़ी जलाने के काम आएगी। इसके लिए सरकार गोशालाओं को रियायती दर पर गोकाष्ठ मशीनें उपलब्ध कराएगी। इस पूरी योजना में प्रदेश की सौ गोशालाओं का चयन किया जाएगा। इनमें कोटा जिले की गोशालाओं को भी शामिल किया गया है। पशुपालन विभाग के अनुसार सरकार ने वित्तीय वर्ष 2024-25 में प्रदेश की 100 गोशालाओं को रियायती दरों पर गोकाष्ठ मशीनें उपलब्ध करवाने की घोषणा की थी। जिन गोशालाओं में गोवंश 1000 से अधिक है, उनको बजट घोषणा की पालना में गोकाष्ठ मशीन उपलब्ध कराई जाएगी। </p>
<p><strong>हजारों पेड़ कटने से बचेंगे</strong><br />सरकार की इस योजना का उदे्श्य पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देने का है। अभी लकड़ी के लिए रोजाना पेडों को काटा जा रहा है। पेड़ों को बचाने के लिए सरकार ने गोबर से बनी लकड़ी का अधिकाधिक उपयोग को बढ़ावा देने का निर्णय किया है। चयन उपरान्त लाभार्थी पात्र गोशाला द्वारा अपने हिस्से की कुल लागत की बीस प्रतिशत राशि संबंधित जिला संयुक्त निदेशक, पशुपालन विभाग को जमा करवाई जाएगी। तत्पश्चात लाभार्थी गोशाला को गोकाष्ठ मशीन चयनित फर्म की ओर से निर्धारित दर पर उपलब्ध करवाई जाएगी।  अब गाय के गोबर से बनी लकड़ी मोक्षधाम में काम आएगी। अंतिम संस्कार के लिए ये गोबर से बनी लकड़ी बेची जाएगी। इससे गोशालाओं की आय में भी बढ़ोतरी होगी। </p>
<p><strong>गोशालाओं की आय में होगी बढ़ोतरी</strong><br />विभागीय अधिकारियों के अनुसार गोवंश के गोबर से मशीन के माध्यम से गोकाष्ठ बनाई जाती है। गोकाष्ठ बनाने वाली मशीन से दो किलोग्राम गोबर से एक किलोग्राम गोकाष्ठ (गोबर के लठ्ठे ) तैयार होते हैं। जिसका उपयोग ईंधन के रूप किया जा सकता है। लाभार्थी गोशाला को गोकाष्ठ के विपणन से होने वाली आय गोशाला की स्वयं की होगी, जिसे गोशाला संचालक गोशाला के हितार्थ उपयोग में ले सकेंगे। गोकाष्ठ की अनुमानित विक्रय दर आठ रुपए प्रति किलोग्राम होगी। इस दर में आवश्यकतानुसार संशोधन जिला गोपालन समिति के स्तर से किया जा सकेगा। गोकाष्ठ को मोक्ष धाम अंत्येष्टि स्थल, फैक्ट्री बॉयलर, रेस्टोरेंट, होटल-ढाबे, मंदिर-हवन आदि जगह जहां भी इसका उपयोग ईंधन के रूप में संभव हो, उसका बेचान किया जा सकेगा।</p>
<p><strong>योजना में यह है नियम</strong><br />- कोई भी लाभार्थी गोशाला इस योजना के तहत प्राप्त गोकाष्ठ मशीन को 10 साल से पहले बेचान नहीं कर सकेंगी ना ही इन्हें किसी अन्य को सुपुर्द कर सकेंगी।<br />- लाभार्थी गोशाला को गोकाष्ठ के विपणन से होने वाली आय गोशाला की स्वयं की आय होगी जिसे गोशाला संचालक गोशाला के हितार्थ उपयोग में ले सकेंगे ।<br />- गोकाष्ठ की अनुमानित विक्रय दर आठ रुपए प्रति किलोग्राम होगी। उक्त दर में आवश्यकतानुसार संशोधन जिला गोपालन समिति के स्तर से किया जा सकेगा।<br />- गोकाष्ठ को मोक्ष धाम / अंत्येष्टि स्थल, फैक्ट्री बॉयलर, रेस्टोरेंट, होटल-ढाबे, मंदिर-हवन इत्यादि जगह जहां भी इसका उपयोग ईंधन के रूप में संभव हो, का बेचान किया जा सकेगा।</p>
<p>लकड़ी का अधिकाधिक उपयोग होने से रोजाना पेड़ों की कटाई की जा रही है। इससे पर्यावरण संतुलन को काफी क्षति पहुंच रही है। ऐसे में गोशालाओं में गोकाष्ठ मशीनें उपलब्ध कराने की सरकार की यह पहल अच्छी है। इससे पर्यावरण को बढ़ावा मिलेगा।<br /><strong>-डॉ. राजू गुप्ता, पर्यावरणविद्</strong></p>
<p>राज्य सरकार ने वित्तीय वर्ष 2024-25 में प्रदेश की 100 गोशालाओं को रियायती दरों पर गोकाष्ठ मशीन उपलब्ध करवाए जाने की घोषणा की थी। इनमें कोटा जिले की गोशालाएं भी शामिल हैं। पर्यारण संरक्षण के लिए यह योजना शुरू की गई है।<br /><strong>-डॉ. अनिल कुमार, नोडल अधिकारी, पशुपालन विभाग</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 13 May 2025 17:52:59 +0530</pubDate>
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                <title>लिफ्टिंग मशीन से हर महीने बचा रहे 100 गौवंश की जान</title>
                                    <description><![CDATA[गौशाला व कायन हाउस में अधिकतर गौवंश शहर की सड़कों से निराश्रित हालत में पकड़कर लाए गए हैं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/100-cows-are-being-saved-every-month-with-the-help-of-cow-lifting-machine/article-98764"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-12/257rtrer-(4)20.png" alt=""></a><br /><p>कोटा । नगर निगम की बंधा धर्मपुरा स्थित गौशाला व किशोरपुरा स्थित कायन हाउस में बैठक लेने वाली करीब 100 गौवंश को हर महीने बचाया जा रहा है। यह संभव हुआ है काऊ लिफ्टिंग मशीन से। गौशाला व कायन हाउस में अधिकतर गौवंश शहर की सड़कों से निराश्रित हालत में पकड़कर लाए गए हैं। जिनमें भी बीमार व घायल और कमजोर गौवंश अधिक है। उनमें गाय हो या बछड़े या फिर सांड अधिकतर प्लास्टिक की पॉलिथीन खाई हुई है। जिससे गौशाला में आने पर वे भूसा व चारा कम खा पाती है।  जिससे कई कमजोर व बीमार गाय बैठक ले लेती है। एक बार बैठक लेने के बाद उन्हें प्रयास करने पर भी  खड़ा करना मुश्किल होता है। जिससे उनकी मौत निश्चित होती है। ऐसा पिछले कई सालों से हो रहा था। लेकिन कुछ समय से बैठक लेने वाले गौवंश की मृत्यु दर में कमी आई है।</p>
<p><strong>आधा दर्जन मशीनों का कर रहे उपयोग</strong><br />सिंह ने बताया कि पहले जहां बैठक लेने के बाद अधिकतर गायों कीमौत  हो जाती थी। अब कुछ समय पहले कॉऊ लिफ्टिंग मशीनोंका उपयोग कर उनकी मुत्यु दर को कम किया गया है। गौशाला व कायन हाउस में ऐसी करीब आधा दर्जन मशीनें बनवाई गई है। पहले इनकी संख्या दो ही थी और पुरानी होने से इनका उपयोग नहीं हो पा रहा था। अब इनकी संख्या बढ़ाई गई है। कुछ निगम के स्तर पर और कुछ दान दाताओं के सहयोग से ली गई है। सिंह ने बताया कि पहले जहां बैठक लेने वाली गौवंश की अधिक मुत्यु हो रही थी। वहीं वर्तमान में यह घटकर 4 से 5 ही प्रतिदिन हो पा रही है। </p>
<p><strong>काढ़ा पिलाया जा रहा, हैलोजन लगाई</strong><br />गौशाला समिति अध्यक्ष जितेन्द्र सिंह ने बताया कि सर्दी में बीमार व कमजोर गायों के साथ ही छोटे बछड़ों को भूसे व चापड़ में पौष्टिक तत्वों का काढ़ा मिलाकर दिया जा रहा है। गौशाला व कायन हाउस में रोजाना यह काढ़ा बनाया जा रहा है।  इसके साथ ही बाड़ों में गर्माहट के लिए हैलोजन लाइटें लगाई गई है। हर 35 से 40 फुट की दूरी  पर लगाई गई है।</p>
<p><strong>कॉऊ लिफ्टिंग मशीन से कर रहे खड़ा</strong><br />नगर निगम कोटा दक्षिण की गौशाला समिति के अध्यक्ष जितेन्द्र सिंह ने बताया कि गौशाला में अधिकतर बीमार व कमजोर गाय है। यहां आने के बाद किसीकारण से यदि वह बैठक ले लेती है तो श्रमिकों की मदद से उन्हें दोबारा से खड़ा करना मुश्किल हो रहा था। ऐसे में कुछ समय पहले प्रयास कर काऊ लिफ्टिंग मशीनें तैयार करवाई गई। जिनकी सहायता से बैठक लेने वाले गौवंश को खड़ा करने में सफलता मिली है। सिंह ने बताया कि लोहे की बनी इस मशीन को नीचे रखकर उस पर बैठक लेने वालीगाय या सांड को लिया जाता है। उसके बाद पट्टों  से बांधकर गिरारी की सहायता से उन्हें  उनके पैरों पर खड़ा किया  जाता है। उसके बाद उनके कमजोर पैरों पर सरसों के तेल की मालिश की जाती है। जिससे उनके पैरों में ताकत आने पर उन्हें कुछ दूरी पर चलाया जाता है। ऐसा करके रोजाना 3 से 4 यानि हर महीने करीब 100 गौवंश की जान बचाने में सफल हो रहे है। बुधवार को भी 3 से 4  बैठक ले चुकी गायों को खड़ा किया गया।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 26 Dec 2024 17:25:12 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>एसबीआई ‘साथी’ पीओएस मशीन का जयपुर में भव्य शुभारंभ</title>
                                    <description><![CDATA[ भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) ने अपने नवाचारों की परंपरा को आगे बढ़ाते हुए ‘साथी’ पीओएस मशीन का शुभारंभ किया गया है, जो बाजार में क्रांति लाने वाली तकनीक साबित होगी]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/grand-launch-of-sbi-sathi-pos-machine-in-jaipur/article-96248"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-11/6633-copy175.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) ने अपने नवाचारों की परंपरा को आगे बढ़ाते हुए ‘साथी’ पीओएस मशीन का शुभारंभ किया गया है, जो बाजार में क्रांति लाने वाली तकनीक साबित होगी। इसका उद्घाटन बैंक के उच्चाधिकारियों द्वारा किया गया। बैंक द्वारा राजस्थान में पहली ‘साथी’ पीओएस मशीन का लोकार्पण जयपुर के टीएक्सबी हब, एओ-1, गोपालबाड़ी में एक प्रतिष्ठित व्यापारी को प्रदान कर किया। यह पहल एसबीआई की नवाचार और उत्कृष्टता की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।</p>
<p>‘साथी’ पीओएस मशीन में ऑडियो नोटिफिकेशन के साथ भुगतान प्राप्ति की सुविधा है। इसके द्वारा टैप एंड पे प्रणाली के द्वारा भी भुगतान किया जा सकता है, साथ ही क्रेडिट कार्ड को पंच करके भी भुगतान किया जा सकता है। इस प्रकार इस डिवाइस के द्वारा डिजिटल माध्यम से भुगतान प्राप्ति की विविध सुविधाएं उपलब्ध हैं।   ग्राहकों की संतुष्टि और लेन-देन में अद्वितीय सरलता और कुशलता प्रदान करने के लिए इसे डिज़ाइन किया गया है। देश के सबसे बड़े बैंक के रूप में, एसबीआई अपने ग्राहकों की बदलती जरूरतों को पूरा करने के लिए हमेशा अग्रणी और नवाचारी समाधान प्रस्तुत करने का प्रयास करता रहता है।</p>
<p>यह लॉन्च प्रौद्योगिकी-आधारित बैंकिंग सेवाओं को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल  है और हमें विश्वास है कि यह हमारे ग्राहकों और हितधारकों के लिए अति महत्वपूर्ण एवं उपयोगी साबित होगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 29 Nov 2024 17:31:39 +0530</pubDate>
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                <title>खेत पर मशीन में फंसने से युवक के हुए टुकड़े</title>
                                    <description><![CDATA[ मशीन को खोलकर शरीर के टुकड़े निकाले। केलवा थाना प्रभारी ओम सिंह चुंडावत ने बताया कि जेतपुरा पंचायत के सेंगनवास निवासी नारायण गुर्जर ट्रेक्टर चालक है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/youth-killed-to-stuck-in-the-machine/article-94364"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-11/6633-copy31.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। राजसमंद के केलवा थाना क्षेत्र में जेतपुरा गांव में एक खेत पर एक घटना हुई। खेत की जुताई के समय रोटावेटर मशीन में उलझने से मशीन चालक की मौत हो गई। मशीन में फंसने से उसके शरीर के कई टुकड़े हो गए। मशीन को खोलकर शरीर के टुकड़े निकाले। केलवा थाना प्रभारी ओम सिंह चुंडावत ने बताया कि जेतपुरा पंचायत के सेंगनवास निवासी नारायण गुर्जर ट्रेक्टर चालक है। जेतपुरा गांव में कितेला तालाब के पास मांगीलाल गुर्जर के खेत पर जुताई के लिए ट्रेक्टर मय रोटावेटर मशीन लेकर नारायण गुर्जर पहुंचा था। </p>
<p>खेत की हकाई की जा रही थी, तभी मशीन में घास फंस गई, जिसे निकालने के लिए नारायण गुर्जर ट्रेक्टर से नीचे उतरा और मशीन के पास गया, तभी मशीन चालू होने से वह मशीन में घुस गया। हादसा होता देख खेत मालिक मांगीलाल गुर्जर व किशनसिंह वहां पहुंचे, लेकिन तब तक नारायण गुर्जर मशीन में बुरी तरह से फंस चुका था। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 03 Nov 2024 17:12:49 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>मानसूनी मौसम के चलते एसडीपी डोनेशन में आ रही समस्या</title>
                                    <description><![CDATA[मशीन को एसडीपी सेपरेशन के लिए लगाया जाता है तो मशीन ऑटोमेटिक होने के कारण नमी को भांप लेती है और प्रोसेस रोक देती है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/problems-arising-in-sdp-donation-due-to-monsoon-season/article-90039"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-09/1rtrer-(8)4.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। शहर के वातावरण में बारिश के दौरान नमी बढ़ जाती है। जिसका कारण कई तरह की समस्याएं होने लगती हैं। इसमें एक प्रकार समस्या ब्लड बैंक में भी होने लगी है। जहां वातावरण में नमी ज्यादा हो जाने के कारण मशीन ब्लड सेपरेशन यानि रक्त से प्लेटलेट्स, प्लाज्मा, आरबीसी और डब्लूबीसी को अलग करने का कार्य रोक देती है। एमबीएस स्थित ब्लड बैंक में भी शुक्रवार को यही घटना सामने आई जहां एक डोनर को एसडीपी देने के लिए दो बार ब्लड बैंक के चक्कर लगाने पड़े। </p>
<p><strong>यह हुई घटना:</strong> दरअसल बूंदी के खटकड़ निवासी हीरालाल जांगीड़ को ब्लड कैंसर है ऐसे में डॉक्टर ने उन्हें तुरंत एसडीपी चढ़ाने के लिए कहा जिसके लिए हीरालाल पहले मेडिकल कॉलेज अस्पताल गए तो उन्हें वहां न तो ओ नेगेटिव ब्लड मिला और न ही ओ नेगेटिव ब्लड डोनर ऐेसे में निराश होकर एमबीएस अस्पताल आए तो यहां किसी के परिचित ने नांता निवासी अर्जुन गुर्जर के बारे में बताया। जिसके बाद अर्जुन दोपहर करीब 2.30 बजे एसडीपी डोनेट करने आए तो मशीन खराब होने की जानकारी मिली। जहां 4.30 बजे तक इंतजार करने के बाद भी मशीन नहीं चलने पर अर्जुन वापस लौट गए। उसके बाद अर्जुन को शाम 8.30 बजे ब्लड बैंक से जानकारी मिली की मशीन ठीक हो गई है तो एसडीपी डोनेट करने आ जाइए जिसके बाद करीब 9 बजे तक एसडीपी डोनेट हो पाई।</p>
<p><strong>ब्लड बैंक का कहना है</strong><br />पूरी घटना पर ब्लड बैंक प्रभारी अधिकारी डॉ. शैलेंद्र वशिष्ट से जानकारी ली तो उन्होंने बताया कि ब्लड बैंक की सारी मशीनें ठीक प्रकार से कार्य कर रही हैं। केवल एक मशीन में किट लगाने वाला ड्रम टूटा हुआ है। जिसके लिए अधीक्षक को लिखा हुआ है। डॉ. शैलेंद्र ने बताया कि अभी मानसून का सीजन चल रहा है। इस दौरान हवा में नमी की मात्रा बढ़ जाती है। ऐसे में जब भी मशीन को एसडीपी सेपरेशन के लिए लगाया जाता है तो मशीन ऑटोमेटिक होने के कारण नमी को भांप लेती है और किसी भी प्रकार की मेलफंकशनिंग यानी खराबी से बचने के लिए प्रोसेस रोक देती है। ऐसे में मशीन को सुखाना पड़ता है, ताकि उसमें मौजूद सारी नमी खत्म हो जाए। शुक्रवार को भी डोनर अर्जुन के साथ यही हुआ। हालांकि शाम को मशीन की नमी खत्म हो जाने के बाद अर्जुन को बुलाकर एसडीपी डोनेशन का कार्य पूरा कर लिया गया था। वहीं मशीन के कमरे और आसपास के वातावरण को बिल्कुल बंद करने के लिए अस्पताल प्रशासन को लिखा हुआ है जिससे ऐसी घटनाएं आगे ना हो।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 09 Sep 2024 16:10:01 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title> अनदेखी: पशुओं की नहीं हो पा रही सोनोग्राफी</title>
                                    <description><![CDATA[जिले के छह लाख से अधिक पशुओं की सोनोग्राफी की जांच का भार इसी मशीन पर है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/negligence--sonography-of-animals-is-not-being-done/article-81836"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-06/andekhi--pashuo-ki-nahi-ho-paa-rahi-sonography..kota-news..17.6.2024.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा । राजकीय बहुउद्देशीय पशु चिकित्सालय में लगी सोनोग्राफी मशीन अभी तक ठीक नहीं हुई है। इस कारण पशुओं की सोनोग्राफी नहीं हो पा रही है। यहां पर लगी सोनोग्राफी मशीन में व्हाइटनेस की समस्या आ रही है। इसकी वजह से रिपोर्ट का सही आंकलन नहीं हो पा रहा है। ऐसे में बीमार पशुओं के उपचार में परेशानी हो रही है। पूरे जिले में सोनोग्राफी मशीन की सुविधा केवल मोखापाड़ा स्थित बहुउद्देशीय पशु चिकित्सालय की पॉली क्लिनिक इकाई में हैं। ऐसे में जिले के छह लाख से अधिक पशुओं की सोनोग्राफी की जांच का भार इसी मशीन पर है। इसके बावजूद अभी तक सोनोग्राफी मशीन को चालू नहीं किया गया है।</p>
<p><strong>मशीन लगाने वाली कंपनी लापता</strong><br />जिला मुख्यालयों पर संचालित होने वाले प्रत्येक राजकीय पशु चिकित्सालयों के लिए वर्ष 2017 में एक-एक सोनोग्राफी मशीन खरीदी गई थीं। उस समय एक मशीन की कीमत 4.50 लाख रुपए आई थी। उस समय जिस कंपनी को सोनोग्राफी मशीनें लगाने और देखभाल का जिम्मा दिया गया था, आज उस कंपनी का कोई अता-पता ही नहीं है। पशु चिकित्सालय के कर्मचारियों ने बताया कि सोनोग्राफी मशीन लगने के बाद बीमार पशुओं के उपचार में आसानी होने लगी थी। कुछ माह पहले यहां की मशीन अचानक खराब हो गई। जिससे जांच की सुविधा बंद हो गई। इस कारण बीमार पशुओं का उपचार कराने में पशुपालकों को परेशानी का सामना करना पड़ हा है।</p>
<p><strong>बिना जांच कैसे पता चलेगी बीमारी </strong><br />मोखापाड़ा स्थित राजकीय पशु चिकित्सालय में ही सोनोग्राफी मशीन लगी हुई। सोनोग्राफी जांच की सुविधा कोटा जिले में केवल यहीं पर ही हैं। इस मशीन के खराब होने के कारण अब बीमार पशुओं की सोनोग्राफी नहीं हो पा रही है। नयागांव के पशुपालक दौलतराम मीणा व शोदान गुर्जर ने बताया कि सोनोग्राफी की जांच से ही पशुओं की बीमारी का पता चल पाता है। अब मशीन खराब होने से पशु चिकित्सक पशुओं की स्थिति देखकर दवाइयां लिख रहे हैं। जांच के बिना पशुओं की गम्भीर बीमारी का पता नहीं लग पा रहा है। </p>
<p> पशु चिकित्सालय में सोनोग्राफी मशीन खराब होने के कारण बीमार पशुओं का उपचार कराने में परेशानी हो रही है। पशुओं के गंभीर बीमार होने पर पशु चिकित्सक सोनोग्राफी की सलाह देते हैं, लेकिन जिले में सोनोग्राफी की सुविधा नहीं होने से उन्हें अन्य जिलों में जाकर सोनोग्राफी करवानी पड़ती है।<br /><strong>-भवानीशंकर गुर्जर, पशुपालक</strong></p>
<p>जिला पशु चिकित्सालय में सोनोग्राफी मशीन को ठीक कराने के लिए उच्चाधिकारियों को कई बार लिखा जा चुका है। पूर्व में आचार संहिता के कारण नई मशीन नहीं लग पा रही थी। अब  नई सोनोग्राफी मशीन जल्द ही उपलब्ध होने की उम्मीद है।<br /><strong>-डॉ. गिरिश सालफळे, उप निदेशक, पशुपालक विभाग कोटा</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 17 Jun 2024 16:32:32 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>मुनेश गुर्जर ने ऑटोमैटिक क्लॉथ बैग वैंडिंग मशीन का किया शुभारम्भ</title>
                                    <description><![CDATA[इस अभियान के तहत शहर में पांच मशीनें लगवाई गई है व एक मशीन पुरोहित के कटले के बाहर लगवाई गई है, जिससे अगर बाजार में सामान खरीदते समय मात्रा अधिक हो जाए, तो इस मशीन से बैग प्राप्त कर सामान सुगमता से गंतव्य स्थान पर ले जा सके। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/munesh-gurjar-start-automatic-cloth-bag-vending-machine/article-43196"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-04/q-12.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। निगम हेरिटेज क्षेत्र में सिंगल यूज प्लास्टिक की रोकथाम के लिए महापौर मुनेश गुर्जर ने आमेर में गांधी चौक स्थित निगम कार्यालय के बाहर ऑटोमैटिक क्लॉथ बैग वैंडिंग मशीन का शुभारम्भ किया। महापौर गुर्जर ने कहा कि शहर को प्लास्टिक मुक्त बनाने के लिए अभियान चलाया जा रहा है, क्योंकि प्लास्टिक से न केवल पर्यावरण को नुकसान पहुंचता बल्कि इससे हमारे स्वास्थ्य को भी बहुत नुकसान पहुंच रहा है और प्लास्टिक कचरे के निस्तारण में निगम कर्मियों को बहुत परेशानी का सामना करना पड़ता है। </p>
<p>इस अभियान के तहत शहर में पांच मशीनें लगवाई गई है व एक मशीन पुरोहित के कटले के बाहर लगवाई गई है, जिससे अगर बाजार में सामान खरीदते समय मात्रा अधिक हो जाए, तो इस मशीन से बैग प्राप्त कर सामान सुगमता से गंतव्य स्थान पर ले जा सके। </p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 19 Apr 2023 10:16:40 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>एक एमआरआई मशीन पर पूरी हाड़ौती का भार</title>
                                    <description><![CDATA[ संभाग के सबसे बड़े व पुराने एमबीएस अस्पताल में अभी तक भी एमआरआई की सुविधा नहीं है।  न्यू मेडिकल कॉलेज अस्पताल की एक मात्र एमआरआई मशीन पर पूरे हाड़ौती का भार पड़ रहा है। वहां भी मरीजों को 20 से 25 दिन का इंतजार करना पड़ रहा है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/people-of-hadoti-depend-on-one-mri-machine/article-11914"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-06/mri.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा । संभाग के सबसे बड़े व पुराने एमबीएस अस्पताल में अभी तक भी एमआरआई की सुविधा नहीं है।  न्यू मेडिकल कॉलेज अस्पताल की एक मात्र एमआरआई मशीन पर पूरे हाड़ौती का भार पड़ रहा है। वहां भी मरीजों को 20 से 25 दिन का इंतजार करना पड़ रहा है। मेडिकल के क्षेत्र में कोटा शहर में कई तरह की सुविधाएं विकसित की जा रही हैं। एमबीएस व जे.के. लोन अस्पताल में नए ओपीडी ब्लॉक बनाए जा रहे हैं। नए एनआईसीयू बनाए जा रहे हैं। लेकिन हालत यह है कि एमबीएस जैसे अस्पताल में जो सबसे पुराना व बड़ा है। वहां एमआरआई  जैसी सुविधा नहीं है। इसके लिए मरीजों को परेशान होना पड़ रहा है। <br /><br /><strong>13.50 करोड़ का बजट स्वीकृत लेकिन समय लगेगा</strong><br />एबीएस अस्पताल में एमआरआई के लिए हो रही मरीजों की परेशानी को देखते हुए गत दिनों कोटा आए चिकित्सा मंत्री ने 13.50 करोड़ रुपए का बजट स्वीकृत किया है। जिससे यहां पहली बार नई एमआरआई मशीन लगेगी। लेकिन उसमें समय अधिक लगेगा। तब तक मरीजों को परेशान होना पड़ेगा। <br /><br /><strong>रोजाना 55 से 60 एमआरआई</strong><br />मेडिकल कॉलेज अस्पताल में रोजाना 55 से 60 मरीजों की एमआरआई की जा रही है। पहले जहां दोपहर 2 बजे तक और रोजाना 30 मरीजों की ही एमआरआई की जा रही थी। लेकिन मरीजों की संख्या अधिक होने से इसका समय व संख्या दोनों बढ़ा दिए हैं। वर्तमान में मेडिकल कॉलेज में रात 8 बजे तक और 55 से 60 एमआरआई की जा रही है। <br /><br /><strong>एमबीएस के मरीज भी मेडिकल कॉलेज जा रहे</strong><br />हालत यह है कि पूरे संभाग में सिर्फ न्यू मेडिकल कॉलेज अस्पताल में ही मात्र एक एमआरआई मशीन है। जिस पर संभाग के सभी अस्पतालों में आने वाले मरीजों की एमआरआई की जा रही है। एमबीएस अस्पताल से भी मरीज मेडिकल कॉलेज ही भेजे जा रहे हैं।  यहां मरीज अधिक है और मशीन एक है। ऐसे में एमआरआई के लिए मरीजों को 20 से 25 दिन का इंतजार करना पड़ रहा है। <br /><br /><strong>यह है व्यवस्था</strong><br />हालत यह है कि एमबीएस में भर्ती मरीज की एमआरआई करवानी हो तो उसके लिए उन्हें मेडिकल कॉलेज भेजा जा रहा है। एक मई से सरकार द्वारा की गई सभी जांचें नि:शुल्क होने से अस्पताल प्रशासन द्वारा अपने स्तर पर मेडिकल कॉलेज अस्पताल में सम्पर्क किया जाता है। वहां से एमआरआई के लिए समय लिया जाता है। उसके बाद सीटी स्कैन के काउंटर पर जानकारी दी जाती है। वहां मरीज की 0 की रसीद काटकर बस से उन्हें मेडिकल कॉलेज भेजा जा रहा है। लेकिन इसमें समय और परेशानी मरीज व उनके परिजनों को भुगतनी पड़ रही है। <br /><br />एमबीएस में अभी तक एमआरआई मशीन नहीं है। अब उसके लिए 13.50 करोड़ रुपए का बजट स्वीकृत हुआ है। नई मशीन लगने तक फिलहाल मरीजों को मेडिकल कॉलेज भेजा जा रहा है। लेकिन अब निजी संस्थानों से एमआरआई करवाने के लिए 7 दिन का शॉर्ट टर्म टेंडर किया जा रहा है। वह सोमवार को अपलोड हो जाएगा। उसके बाद मरीज को अस्पताल से ले जाने व छोड़ने और रिपोर्ट देने तक की जिम्मेदारी संबंधित संस्थान की होगी। उसमें मरीज से कोई शुल्क नहीं लिया जाएगा। <strong>-डॉ. नवीन सक्सेना, अधीक्षक, एमबीएस अस्पताल</strong><br /><br />हाड़ौती में सिर्फ मेडिकल कॉलेज अस्पताल में ही एक एमआरआई मशीन है। यहां पूरे संभाग से मरीज आ रहे हैं। पहले दोपहर 2 बजे तक 30 मरीजों की एमआरआई हो रही थी। मरीजों की संख्या को देखते हुए उसका समय रात 8 बजे तक और 55 से 60 एमआरआई रोजाना की जा रही है। उसके बाद भी 20 से 25 दिन की वेटिंग चल रही है। <strong>-डॉ. चंद्र शेखर सुशील, अधीक्षक, न्यू मेडिकल कॉलेज अस्पताल</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 11 Jun 2022 15:30:18 +0530</pubDate>
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