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                <title>fish - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <title>किशोर सागर में मृत मिली ढेरों मछलियां, विशेषज्ञों का तर्क- ऑक्सीजन का लेवल कम होना बड़ा कारण</title>
                                    <description><![CDATA[ किशोर सागर तालाब में गुरुवार को बड़ी संख्या में मछलियां मृत मिली। जिसे देखने के लिए पर्यटकों व राहगीरों की भीड़ लगी रही]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/lots-of-fish-found-dead-in-kishor-sagar/article-118689"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-06/rtroer-(4)22.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। किशोर सागर तालाब में गुरुवार को बड़ी संख्या में मछलियां मृत मिली। जिसे देखने के लिए पर्यटकों व राहगीरों की भीड़ लगी रही। लोगों का कहना है कि पानी गंदा हो चुका है। बदबू आ रही है। जिसकी वजह से मछलियों का दम टूट रहा है। हालांकि स्पष्ट कारणों का पता नहीं चला है। लेकिन, विशेषज्ञों का तर्क है कि लंबे समय से पानी स्थिर है, नहरों में पानी नहीं छोड़े जाने से तालाब का पानी बदल नहीं सका। जिसकी वजह से पानी में एलगी बढ़ गई और पीचए लेवल बिगड़ गया। जिससे पानी में ऑक्सीजन की कमी होने से मछलियां मर गई। एलगी बढ़ने से पानी का रंग हरा हो जाता है। ऐसी स्थिति में जलीय जीवों को ऑक्सीजन नहीं मिल पाने से उनकी मौत हो जाती है। </p>
<p><strong>बारहदरी पर तालाब किनारे पड़ी मृत मछलियां</strong><br />राहगीर कुलदीप शृंगी, लोकेंद्र शर्मा ने बताया कि  बारहदरी स्थित तालाब किनारे जेटी के आसपास के दायरे में बड़ी संख्या में छोटी-बड़ी मछलियां मृत पड़ी हैं। सफाई नियमित नहीं होती। पानी का रंग भी हरा हो चुका है। यहां खड़े रहने पर बदबू आती है। पिछले तीन दिन से  मछलियां मर रही हैं। जबकि, इसकी साफ-सफाई का जिम्मा केडीए का है लेकिन संबंधित जिम्मेदार अधिकारियों द्वारा ध्यान नहीं दिया जाता। </p>
<p><strong>लंबे समय से नहीं बदला पानी </strong><br />गुमानपुरा निवासी बलवीर सिंह, हितेंद्र कुमार, श्याम सुंदर का कहना है, हम प्रतिदिन सुबह मॉर्निंग वॉक पर आते हैं। बारहदरी पर बनी छतरी पर बैठने के दौरान पानी सडांध मारता है। सीएडी विभाग ने लंबे समय से नहरों में पानी नहीं छोड़ा। जिसकी वजह से तालाब का पानी बदल नहीं पाया। एक ही जगह स्थिर रहने से पानी दूषित हो रहा है। जिसकी वजह से मछलियां मर रही हैं। सिंचाई विभाग को नहरों में पानी छोड़ना चाहिए ताकि पानी के तेज बहाव से किशोर सागर तालाब का गंदा पानी बहकर निकल जाए और साफ पानी एकत्रित हो सके। </p>
<p>लंबे समय तक एक ही जगह स्थिर रहने से एलगी बढ़ती है और पानी  का पीएच बिगड़ जाता है। जिससे आॅक्सीजन  का लेवल घटता है, जो जलीय जीवों की मृत्यु का बड़ा कारण बनता है। ऐसे में  हफ्ते में एक बार नहरों में पानी छोड़कर तालाब का पानी बदलना चाहिए। <br /><strong>- सुमित एडविन, फिश रिसर्चर कोटा </strong></p>
<p>तालाब की नियमित सफाई करवाते हैं। अधिक समय तक पानी स्थिर रहने से हरा हो जाता है। सिंचाई विभाग से नहरों में पानी छोड़ने का आग्रह करेंगे। ताकि, किशोर सागर का पानी बदल सकेगा। <br /><strong>- सुमित चित्तौड़ा, एक्सईएन केडीए </strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 27 Jun 2025 17:14:49 +0530</pubDate>
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                <title>गहलोद घाट पर बनास में सैकड़ों मछलियों की मौत</title>
                                    <description><![CDATA[ बनास नदी के गहलोद घाट पर पानी में सैकड़ों की तादाद में मरी हुई मछलियां मृत पाई गई हैं, संभावना जताई जा रही है कि जहरीला पानी होने मछलियां मरी हैं,]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/tonk/hundreds-of-fish-died-in-banas-at-gehlod-ghat/article-11690"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-06/nrw-1.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>टोंक।</strong> बनास नदी के गहलोद घाट पर पानी में सैकड़ों की तादाद में मरी हुई मछलियां मृत पाई गई हैं, आशंका जताई जा रही है कि जहरीला पानी होने मछलियां मरी हैं, जिससे प्रशासन में हड़कम्प मचने के साथ आने जाने वाले लोगों की भीड़ भी जुट गई। मामले की सूचना मिलते ही मत्स्य विभाग के अधिकारी राकेश देव एवं तहसीलदार सहदेव मंडा मौके पर पहुंच मामले की जानकारी ली।</p>
<p>जानकारी के अनुसार बुधवार को बनास नदी के गहलोद घाट पर लोगों ने पानी का रंग बदला हुआ नजर आ रहा है एवं वहां बहुत सारी मरी हुई मछलियां देखकर लोगों ने कन्ट्रोल रूम को सूचना दी। जिसके बाद जिला मत्स्य अधिकारी राकेश देव मोके पर पहुंचे और मौका निरीक्षण किया।</p>
<p>मत्स्य अधिकारी राकेश देव ने बताया कि मौसम और तापमान में अचानक आने वाले बदलावों के कारण कम गहराई वाले पानी में गैसेस खत्म होकर ऊपरी सतह पर आने लगती है,जिसके चलते ऑक्सीजन की कमी के चलते कई बार मछलियों की मौत हो जाती है।मत्स्य विभाग की टीम ने मौके से मरी हुई मछलियों के एंव जलदाय विभाग ने पानी के सेम्पल एकत्रित किए है, जिनकी जांच प्रयोगशाला में कराई जाएगी। बताया जा रहा है कि मौके पर पानी के जिस हिस्से में मछलियां मरी हुई मिली हैं, वहां के पानी का रंग भी पूरी तरह से बदला हुआ है जो जांच का विषय बन रहा है।<br /><br /> <br /><br /><br /></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>टोंक</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 09 Jun 2022 12:28:42 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title> मछलियों के पम्प के इंपैलर में फंसने का खतरा: बीछवाल जलाशय से मछलियों को स्थाई रूप से हटाने का काम शुरू</title>
                                    <description><![CDATA[जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग के बीछवाल स्थित जलाशय से मछलियों को स्थायी रूप से हटाने का काम बुधवार से शुरू कर दिया गया है। कारण बताया गया है कि जलाशय में मछलियां होने की स्थिति में इसमें बचे हुए कम पानी का उपयोग भी संभव नहीं है। तकनीकी विशेषाज्ञों के अनुसार जलाशय में कम पानी रहने के दौरान मछलियों के पम्प के इंपैलर में भी फंसने का खतरा होता है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/bikaner/bikaner-news-permanent-removal-of-fish-from-beechwal-reservoir-started/article-10454"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-05/fgasgsad4.jpg" alt=""></a><br /><p>बीकानेर। जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग के बीछवाल स्थित जलाशय से मछलियों को स्थायी रूप से हटाने का काम बुधवार से शुरू कर दिया गया है। कारण बताया गया है कि जलाशय में मछलियां होने की स्थिति में इसमें बचे हुए कम पानी का उपयोग भी संभव नहीं है। तकनीकी विशेषाज्ञों के अनुसार जलाशय में कम पानी रहने के दौरान मछलियों के पम्प के इंपैलर में भी फंसने का खतरा होता है। मशीनरी के खराब होने का भी डर रहता है। संभागीय आयुक्त डॉ नीरज के पवन ने अपनी मौजूदगी में बुधवार को जलाशय से मछलियां निकलवाने का काम शुरू करवाया। उन्होंने जलाशय का निरीक्षण किया और पानी की उपलब्धता के बारे में जाना।</p>
<p>संभागीय आयुक्त ने बताया कि बीछवाल जलाशय का निर्माण 1994 में हुआ। इसके माध्यम से शहरी क्षेत्र में पेयजल वितरण किया जाता है। वर्तमान में बीछवाल जलाशय में बड़ी संख्या में मछलियां हैं। जलाशय में पानी का लेवल कम होने के कारण इन मछलियों के लिए ऑक्सीजन कम हो जाती है। इससे मछलियों के जीवन पर भी खतरा हो जाता है। उन्होंने बताया कि इसके मद्देनजर जलाशय निर्माण के बाद पहली बार यहां से मछलियां निकलवाने का कार्य प्रारम्भ किया गया है। इस कार्य के लिए पंजाब से विशेषज्ञों की टीम बुलाई गई है तथा मछलियां निकालने के लिए नावों और फ्रिजर वाले वाहनों की व्यवस्था भी की गई है। यह कार्य अतिशीघ्र पूरा कर लिया जाएगा। इसके साथ ही जलाशय की साफ सफाई का कार्य भी हो जाएगा। जिससे जलाशय में निचले स्तर का पानी भी आपूर्ति के लिए उपयोग में आ सकेगा। इस दौरान जलदाय विभाग के अतिरिक्त मुख्य अभियंता अजय कुमार शर्मा और अधीक्षण अभियंता बलवीर सिंह मौजूद रहे। <br /><br /></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>बीकानेर</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 26 May 2022 12:23:19 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>अमेरिका में समुद्र किनारे मिली ‘ब्लू ड्रैगन’, एक इंच की यह मछली दिखने में जितनी क्यूट उतनी ही जानलेवा</title>
                                    <description><![CDATA[क्यूट सा दिखने वाला जीव कुछ और नहीं बल्कि एक जहरीला ब्लू ड्रैगन है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/blue-dragon-found-on-the-beach-in-america--this-one-inch-fish-is-as-cute-as-it-looks/article-8128"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-04/blue-dragon.jpg" alt=""></a><br /><p>वाशिंगटन। सोचिए आप एक टापू पर घूमने गए हैं। नीला समंदर और ठंडी-ठंडी रेत के मजे ले रहे हैं, तभी आपको अपनी छोटी उंगली के बराबर एक क्यूट सी मछली दिखती है। लेकिन क्या होगा अगर आपको पता चले कि वह क्यूट सी मछली आपकी जान ले सकती है। कुछ ऐसा ही हुआ अमेरिका में टेक्सस के सैन एंटोनियो के रहने वाले एरिक यांता के साथ। जब वह अपनी पत्नी के साथ मुस्तांग टापू पर घूमने गए थे। समुद्र के किनारे घूमने के दौरान यांता और उनकी पत्नी ने नीले रंग का एक छोटा सा खूबसूरत जीव देखा जो करीब एक इंच का ही था। नीले रंग का यह जीव पत्थर से चिपका था। एरिक ने पत्थर को उठा लिया और उसे वापस पानी में डाल दिया। पानी में डालने से पहले उन्होंने बेहद करीब से उसका वीडियो भी बनाया। लेकिन अगर उन्हें पता होता कि वह क्यूट सा दिखने वाला जीव कुछ और नहीं बल्कि एक जहरीला ब्लू ड्रैगन है।<br /><br /><strong>नीले रंग के कारण छुप जाते हैं</strong><br />एरिक को इसके बारे में कुछ नहीं पता था। जिसके बाद उन्होंने इसका वीडियो रेडिट पर डाला और लोगों से इसके बारे में पूछा। एडिनबर्ग में टेक्सास विश्वविद्यालय में पर्यावरण और समुद्री विज्ञान स्कूल के प्रोफेसर और निदेशक डेविड हिक्स ने कहा कि ब्लू ड्रैगन समुद्र के किनारे रहते हैं। वह अपने नीले शरीर के जरिए समुद्र में छुपे रहते हैं, ताकि शिकारी जीव उन्हें न देख सकें। <br /><br /><strong>शरीर पर होता है जहरीला कांटा</strong><br />ग्लौकस अटलांटिकस या ब्लू ड्रैगन दिखने में जितने छोटे हैं वह उतने ही खतरनाक होते हैं। डेविड हिक्स ने बताया कि यह जेली फिश की फैमिली से आने वाले ‘पोर्तगीस मैन-ऑफ -वॉर’ जैसे जीवों को खाता है। पोर्तगीस मैन-ऑफ -वॉर में जहरीले कांटे होते हैं, उन्हीं कोशिकाओं को यह अपने शरीर में संरक्षित करता रहता है। जिन्हें सिनिडोसाइट्स कहा जाता है। बाद में ब्लू ड्रैगन शिकारियों से अपनी रक्षा के लिए इनका इस्तेमाल करते हैं। उन्होंने कहा कि इसका दर्द ‘पोर्तगीस मैन-ऑफ -वॉर’ के दर्द जैसा ही होता हैए कभी-कभी यह जानलेवा हो सकता है। इसके प्रभाव से उल्टी शुरू हो सकती है। डेविड का कहना है कि अगर कभी इसके कांटों से सामना हो जाए तो आपको तुरंत अस्पताल जाना चाहिए।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 19 Apr 2022 13:21:46 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Administrator]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>अलवर में भ्रष्टाचार: पार्षद तो छोटी मछली, मगरमच्छ पकड़ से दूर</title>
                                    <description><![CDATA[नगर परिषद् अलवर में सिविल कार्यों की निविदाओं में भ्रष्टाचार के मामले में पार्षद नरेन्द्र मीणा सहित दो ठेकेदार बीते गुरुवार पांच लाख पन्द्रह हजार की मोटी राशि सहित एसीबी के हत्थे चढ़ गए। इस कार्रवाई के बाद कई सवाल हैं। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/alwar/corruption-in-alwar--councilor-is-a-small-fish--crocodile-away-from-catch--the-question-is--how-did-a-councilor-dare-to-have-such-a-huge-corruption--the-earnings-of-corruption-used-to-be-distributed-till-the-top/article-4822"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-02/rishwat.jpg" alt=""></a><br /><p>अलवर। नगर परिषद् अलवर में सिविल कार्यों की निविदाओं में भ्रष्टाचार के मामले में पार्षद नरेन्द्र मीणा सहित दो ठेकेदार बीते गुरुवार पांच लाख पन्द्रह हजार की मोटी राशि सहित एसीबी के हत्थे चढ़ गए। इस कार्रवाई के बाद कई सवाल हैं। सबसे बड़ा सवाल तो ये है कि एक पार्षद की इतने बड़े भ्रष्टाचार की हैसियत कैसे हुई। साफ है कि पार्षद नरेन्द्र मीणा तो एक छोटी मछली है। मगरमच्छ तो दूसरे ही हैं। भ्रष्टाचार की कमाई ऊपर तक बंटती थी।मामले में तीनों आरोपियों को एसीबी कोर्ट ने तीन दिन के रिमांर्ड पर सौंपा। तीनों की रिमांड अवधि समाप्त होने पर सोमवार को एसीबी ने आरोपियों को फिर से कोर्ट में पेश किया। जहां से उन्हें जेल भेज दिया गया है। एसीबी की इस कार्रवाई से भ्रष्टाचारियों में इस कदर खौफ छा गया कि नगर परिषद् को नरक परिषद् बना चुके कई जनप्रतिनिधि, अधिकारी-कर्मचारी एवं ठेकेदारों ने फोन बंद कर लिए। इससे साफ जाहिर होता है, कि नगर परिषद् में भ्रष्टाचार के खुले खेल में सभी लोग शामिल थे। <br /><br /><strong>ठेकेदारों का पूल बनाकर कम दर पर ठेके का खेल</strong><br />एक पार्षद स्तर का नेता नगर परिषद् की ओर से जारी निर्माण कार्यों की निविदाओं पर अपने चहेते ठेकेदारों का पूल बनाकर उन्हें 5 से 7 प्रतिशत ब्लो रेट पर टेंडर दिलवा रहा था। खास बात यह है, कि इनमें एक दर्जन से अधिक ऐसी फर्म हैं, जिन्हें ईएसआई व पीएफ जैसी शर्तों को दरकिनार करते हुए टेंडर दिए गए। </p>
<p><br /><strong>मंत्री और बड़े कांग्रेस नेताओं का करीबी</strong><br />लोगों के बीच पार्षद नरेन्द्र मीणा की जिले के एक पूर्व केन्द्रीय मंत्री एवं राज्य के एक केबिनेट मंत्री सहित कांग्रेस के आला नेताओं से नजदीकियों को लेकर चर्चा है। राज्य सरकार में केबिनेट मंत्री के हर कार्यक्रम में पार्षद नरेन्द्र मीणा को मंच पर जगह मिलती रही है।  मीणा रिश्वत मामले में पकड़े जाने से पूर्व तक जिला कांग्रेस कमेटी के महासचिव के साथ ही प्रवक्ता भी थे। लोगों का कहना है कि केबिनेट मंत्री के सबसे कृपापात्र होने के कारण उनके हर कार्य को नरेन्द्र मीणा ही देखते थे। चाहे किसी को ठेका दिलवाना हो या फिर कोई डिजायर लिखवानी हो। इन सब कामों की फुल डीलिंग नरेन्द्र मीणा के हाथों  होती थी। <br /><br /><strong>पार्षद नरेन्द्र मीणा को मिला मंत्री की नजदीकी का फायदा</strong><br />अलवर से केबिनेट मंत्री बनने के साथ ही नरेन्द्र मीणा का कांग्रेस में रूतबा अचानक बढ़ गया। इससे पहले नरेन्द्र स्कीम नम्बर 5 स्थित मकान में रहते थे। लेकिन करीब तीन साल पहले मोती डूंगरी स्थित एक सोसायटी में फ्लैट लेकर केबिनेट मंत्री के पड़ौसी बन गए। तभी से नरेन्द्र मीणा का कद अचानक बढ़ता चला गया। <br /><br /><strong>बीना गुप्ता के ट्रैप होने के बाद सभापति बनने की थी तैयारी</strong><br />नगर परिषद् की पूर्व चेयरमैन बीना गुप्ता के रिश्वत प्रकरण में ट्रैप होने के बाद मंत्री का नजदीकी होने के कारण नरेन्द्र को ही चेयरमैन पद के चेहरे के रूप में देखा जा रहा था लेकिन कांग्रेस पार्षदों की आंतरिक कलह में क्रास वोट के डर से मुकेश सारवान को चेयरमैन बनाना पडा। इसमें नरेन्द्र मीणा की ही अहम भूमिका रही। यहां तक की मुकेश सारवान चेयरमैन बनते ही नगर परिषद् में नरेन्द्र मीणा के जयकारे लगाते दिखाई दिए। इसी से अंदाजा लगाया जा सकता है, कि चाहे नगर परिषद् में कोई भर्ती हो या फिर निविदा सहित अन्य कोई भी कार्य सबमें नरेन्द्र मीणा की सहमति सबसे जरूरी रहती थी।</p>
<p><br /><strong>आगाह कर रहे थे पार्षद</strong><br />कुछ पार्षदों ने नाम नहीं छापने की शर्त पर यहां तक कहा कि उनके द्वारा एसीबी की कार्रवाई से पहले कुछ दिनों से नरेन्द्र मीणा को बार-बार आगाह किया जा रहा था। लेकिन मंत्री के साथ नजदीकियों के चलते अति आत्मविश्वास के चलते एसीबी  प्रकरण हुआ। इससे पहले भी कई कांग्रेसी कार्यकर्ताओं में नरेन्द्र को लेकर काफी नाराजगियां रही। पार्षद नरेन्द्र मीणा राजगढ़-लक्ष्मणगढ़ विधानसभा चुनाव की तैयारी कर रहे थे। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>अलवर</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 22 Feb 2022 15:49:01 +0530</pubDate>
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