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                <title>crocodile - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <title>कॉलोनियों के बीच खाली प्लॉट बने क्रोकोडाइल प्वाइंट, वर्द्धमान कॉलोनी के प्लॉटों में भरा 4 से 7 फीट पानी </title>
                                    <description><![CDATA[शाम ढलते ही कॉलोनियों में सन्नाटा, दहशत में कट रही  क्षेत्र के बाशिंदों की रात]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/vacant-plots-between-colonies-have-become-crocodile-hotspots--and-vardhaman-colony-s-plots-are-filled-with-4-to-7-feet-of-water/article-127217"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-09/_4500-px)-(2)8.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। कुन्हाड़ी व बोरखेड़ा क्षेत्र की कॉलोनियों के बाशिंदे इन दिनों मगरमच्छ के आतंक से दहशत में हैं।  इन इलाकों में बड़ी संख्या में खाली प्लॉट पड़े हैं, जिनमें 4 से 6 फीट तक बरसात का पानी भरा हुआ है। निकासी नहीं होने से मगरमच्छों का अड्डा बन गए। बीच-बीच में पानी से बाहर निकल धूप सेंकते नजर आ रहे हैं। रात को शिकार की तलाश में कॉलोनियों की सड़कों पर दौड़ रहे हैं। हालात यह हो गए, शाम ढलते ही लोग घरों में कैद होने को मजबूर हो गए। बच्चों को खेलना व बुजुर्गों का टहलना बंद हो गया।  क्षेत्रवासियों ने वन विभाग से मगरमच्छों का रेस्क्यू करने की गुहार लगाई लेकिन साधन संसाधनों से वंचित वनकर्मियों ने पानी में मगर से बैर लेने में असमर्थता जताई। ऐसे में रहवासी  दहशत के बीच रहने को मजबूर हैं। </p>
<p><strong>दहशत में कट रही रात </strong><br />पार्षद बलविंदर सिंह बिल्लू ने बताया कि कुन्हाड़ी क्षेत्र की वर्द्धमान कॉलोनी के आसपास बड़ी संख्या में खाली प्लॉट पड़े हैं। इनमें 4 से 6 फीट पानी भरा हुआ है, जो मगरमच्छ  छिपे हुए हैं। दोपहर को नजर आते हैं फिर वापस पानी में चले जाते हैं। रात में सड़कों पर दौड़ते हैं। शाम ढलते ही लोग घरों में कैद हो जाते हैं। रोड लाइटें खराब होने से कॉलोनी में अंधेरा पसरा रहता है। ऐसे में मगरमच्छ के घरों में घुसने व राहगीरों पर हमले का खतरा बना रहता है। </p>
<p><strong>सुबह से रात तक चलाया पम्पसेट, 2 फीट पानी निकाला</strong><br />पार्षद बिल्लू ने बताया कि खाली प्लॉटों में कमर तक पानी भरा हुआ है। जिसे निकालने के लिए एक बड़ा मड पम्प लगाया है।  सुबह 10 से रात 8 बजे तक लगातार चलाकर पानी बाहर निकाला गया। जब तक पूरा पानी नहीं निकलेगा तब तक मगरमच्छ का रेस्क्यू संभव नहीं होगा। हालांकि, क्षेत्रवासियों की सूचना पर  मंगलवार देर रात फोरेस्ट की रेस्क्यू टीम मौके पर पहुंची थी। लेकिन मगरमच्छ के वापस पानी में चले जाने से रेस्क्यू नहीं हो सका। हालात यह हैं, पिछले 6 दिन से लोग दहशत में हैं। </p>
<p><strong>इधर, डीसीएम क्षेत्र में युवकों ने पकड़ा 5 फीट लंबा मगरमच्छ</strong><br />डीसीएम इलाके के सूर्य नगर की सड़क पर 5 फीट लंबा मगरमच्छ आ गया, जिसे स्थानीय व्यक्तियों ने पकड़कर बोरखण्डी के नाले में छोड़ दिया। घटना तड़के 4 बजे की है। रेस्क्यू के बाद एक व्यक्ति ने मगरमच्छ को कंधे पर उठाकर वीडियो-फोटो खिंचवाया। फिर नाले में रिलीज किया। व्यक्ति का फोटो वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। मगरमच्छ सड़क पर दौड़ता हुआ कार के टायर के पास चला गया। मौके पर मौजूद व्यक्तियों ने मगरमच्छ की आंख पर बोरी फेंककर उसे काबू किया। लाडपुरा रेंजर इंद्रेश सिंह ने बताया कि टीम ने कैथून इलाके में मगरमच्छ पकड़ा है। सूर्य नगर में मगरमच्छ आने की जानकारी नहीं है। जिस व्यक्ति ने सूर्य नगर में मगरमच्छ पकड़ा उसने विभाग को सूचना नहीं दी। उसके बारे में पता किया जा रहा है।</p>
<p><strong>बोरखेड़ा : पार्वती कॉलोनी में भी दहशत </strong><br />पार्वती कॉलोनी निवासी अरबाज ने बताया कि कॉलोनी में  खाली प्लॉटों में 3 से 4 फीट पानी भरा हुआ है। जिनमें मगरमच्छ पनप रहे हैं। रात को घर की छत से टॉर्च लगाकर देखा तो भारी-भरकम मगरमच्छ पानी से बाहर निकल सड़क पर जाता नजर आया। हाल ही में सड़क पर दौड़ता नजर आया था। इसी तरह देवली अरब, काला तलाब, नम्रता आवास सहित अन्य कॉलोनियों में आए दिन मगरमच्छ आने की घटनाएं हो रही है। </p>
<p><strong>अलग-अलग प्लॉटों में छिपे मगरमच्छ</strong><br />स्थानीय निवासी सुरेंद्र सिंह, उपेंद्र यादव, सार्थक नागर ने बताया कि वर्द्धमान कॉलोनी में ही सड़क के दोनों तरफ खाली पड़े प्लॉट पानी से लबालब हैं। यहां तीन से चार मगरमच्छ नजर आए हैं। रोड लाइटें भी खराब है, अंधेरा पसरा रहता है। ऐसे में घर से बाहर निकले के दौरान मगरमच्छ द्वारा हमला करने का डर लगा रहता है। जिसकी वजह से बच्चों का खेलना भी छूट गया। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 18 Sep 2025 14:56:17 +0530</pubDate>
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                <title>असर खबर का -  एक साल से दहशत मचा रहे दानव को फ्लोटिंग केज से पानी में ही दबोचा </title>
                                    <description><![CDATA[नवज्योति की मेहनत और वन्यजीव विभाग का प्रयास लाया रंग। 
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/effect-of-news---the-monster-that-was-creating-terror-for-the-last-one-year-was-caught-in-the-water-with-a-floating-cage/article-110684"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-04/257rtrer-(2)37.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। कोटा, प्रदेश का पहला ऐसा जिला है, जहां वन्यजीव विभाग ने पानी में जाकर मगरमच्छ  का रेस्क्यू करने में सफलता हासिल की है। पिछले एक साल से सीवी गार्डन में दहशत मचा रहा मगरमच्छ को आखिरकार रविवार को धर-दबोच लिया है। 6 फिट लंबे और 60 किलो वजनी मगरमच्छ से मॉर्निंग वॉकर्स, पर्यटक दहशत में थे। चूंकी, मगरमच्छ पानी में था इसलिए वन्यजीव विभाग रेस्क्यू नहीं कर पा रहा था। ऐसे में हाल ही में आॅस्टेÑलियन तकनीक से तैयार किया गया प्रदेश का पहला फ्लोटिंग क्रोकोडाइल केज को तालाब में लगाया। पिछले 15 दिन के प्रयास के बाद आखिरकार मगरमच्छ पिंजरे में कैद हो गया। मगरमच्छ के पकड़े जाने से मॉर्निंग वॉकर्स, पर्यटक व शहरवासियों ने खुशी जताते हुए दैनिक नवज्योति का आभार जताया। </p>
<p><strong>पानी में तैरते पिंजरे में यूं फंसा मगरमच्छ</strong><br />वन्यजीव विभाग के डीएफओ अनुराग भटनागर ने बताया कि गत वर्ष से ही मगरमच्छ को पकड़ने का प्रयास कर रहे थे। लेकिन पानी में होने के कारण रेस्क्यू सफल नहीं हो पा रहा था। ऐसे में गत 27 मार्च को को 12 फीट लंबे और 3 फिट चौड़े फ्लोटिंग क्रोकोडाइल कैज को गार्डन के तालाब में लगाकर 5 किलो पाड़ा मांस बांधा। इसके बाद उसके पिंजरे में आने का इंतजार करते रहे। आखिरकार 15 दिन बाद वह मांस खाने जैसे ही पिंजरे में आया तो वह ट्रैप हो गया। इस पर सीवी गार्डन के संवेदक से सूचना मिलने पर तुरंत टीम  मौके पर पहुंची और तालाब से पिंजरे को बाहर निकाल  चिड़ियाघर ले आए। जिसे बाद में चंबल नदी में शिफ्ट किया जाएगा। इसकी उम्र करीब 8 से 10 साल है। </p>
<p><strong>बोटिंग में बच्चों पर हमले का रहता था डर  </strong><br />सीवी गार्डन के तालाब में केडीए द्वारा पेडल बोटिंग करवाई जाती है। जबकि, इसी तालाब में मगरमच्छ छुपा हुआ था। बोट में छोटे बच्चे भी होते हैं, जो पानी में भी हाथ डाल देते हैं। ऐसे में मगरमच्छ के हमले का डर बना रहता है। वहीं, तालाब किनारे पर्यटकों के सेलफी लेते समय मगरमच्छ के हमले का डर बना रहता था। </p>
<p><strong>दैनिक नवज्योति ने लगातार उठाया था मामला</strong><br />गत वर्ष मई माह में पहली बार सीवी गार्डन के तालाब में मॉर्निंग वॉकर्स को मगरमच्छ नजर आया था। इसके बाद वह अक्टूबर में फिर से नजर आया और बतखों पर हमला किया। घटना के बाद से ही पर्यटकों, मॉर्निंग वॉकर्स व श्रद्धालुओं में दहशत फैल गई। दैनिक नवज्योति ने लगातार खबरें प्रकाशित कर वन विभाग व जिला प्रशासन का इस ओर ध्यान आकर्षित किया। इसके बाद वन्यजीव विभाग मगरमच्छ को रेस्क्यू करने को मजबूर हुआ और आखिरकार को पकड़ने में सफलता हासिल हुई। सीवी गार्डन के स्टाफ, मॉर्निंग वाकर्स, पर्यटक व शहरवासियों ने नवज्योति का आभार जताया।  </p>
<p><strong>प्रदेश में पहली बार पानी में मगरमच्छ का रेस्क्यू</strong><br />डीएफओ अनुराग भटनागर ने बताया कि कोटा वन्यजीव विभाग ने पानी में मगरमच्छ को रेस्क्यू करने में सफलता हासिल की है। संभव: यह प्रदेश का पहला मामला है। मगरमच्छ के कारण गार्डन में आने वाले पर्यटक व मॉर्निंग वॉकर्स अनहोनी की आशंका से आशिंकित थे।  पहले हमने तालाब किनारे पैंथर का पिंजरा लगाकर उसे पकड़ने की कोशिश की थी लेकिन सफलता नहीं मिली। इसी दौरान सहायक वनपाल प्रेम कंवर के सुझाव पर आॅस्ट्रेलियन तकनीक से फ्लोटिंग क्रोकोडाइल कैज (पानी में तैरता पिंजरा) बनवाकर तालाब में लगाया, जिसका फायदा मगरमच्छ के रेस्क्यू के रूप में मिला। </p>
<p><strong>नवज्योति का आभार </strong><br />पिछले साल से सीवी गार्डन के तालाब में मगरमच्छ ने आतंक मचा रखा था।  पूर्व में बतखों पर हमला कर शिकार कर चुका है। तालाब किनारे मंदिर है, जहां श्रद्धालुओं पूजा करने जाते हैं, ऐसे में अनहोनी का डर सताता था। दैनिक नवज्योति ने लगातार खबरे प्रकाशित कर वन विभाग को मगरमच्छ को रेस्क्यू करने पर मजबूर किया। नवज्योति की वजह से ही मगरमच्छ का रेस्क्यू हो सका। इसके लिए नवज्योति का बहुत-बहुत आभार।<br /><strong>- डॉ. सुधीर गुप्ता, मॉर्निंग वॉकर</strong></p>
<p><strong>ठप हो गई थी बोटिंग </strong><br />दिनभर में 200 रुपए भी नहीं आते थे। कर्मचारियों की तनख्वाह निकालना भी मुश्किल हो गया था। वन विभाग के अधिकारियों को केडीए के माध्यम से पत्र  दिलवाकर मगरमच्छ को पकड़ने का आग्रह किया था लेकिन अधिकारियों ने ध्यान नहीं दिया। इस पर दैनिक नवज्योति ने लगातार खबरें प्रकाशित कर वन विभाग और प्रशासन को गंभीर समस्या से रुबरू कराया। इसके बाद ही वन विभाग रेस्क्यू करने पर मजबूर हुआ। ज्वलंत मुद्दे को अंजाम तक पहुंचाने के लिए दैनिक नवज्योति का बहुत-बहुत आभार। <br /><strong>- शिव शर्मा संवेदक सीवी गार्डन</strong></p>
<p><strong>दो-तीन और बनवाएंगे फ्लोटिंग क्रोकोडाइल कैज </strong><br />पानी में से मगरमच्छ को रेस्क्यू करने का प्रदेश का यह  पहला मामला है। फ्लोटिंग क्रोकोडाइल कैज की वजह से ही सफलता मिली है। वर्ष 2024 में सहायक वनपाल प्रेम कंवर शक्तावत मगरमच्छ रेस्क्यू प्रशिक्षण के लिए आॅस्टेÑलिया गई थी।  वहां पानी में मगरमच्छ को रेस्क्यू के लिए तैरते पिंजरों का उपयोग किया जाता है। ऐसे में प्रेम कंवर ने वहां पिंजरों को बनाने की टेक्निक समझी और उनके सुझाव पर हमने कोटा में फ्लोटिंग क्रोकाइल केज तैयार करवाया। <br /><strong>- अनुराग भटनागर, डीएफओ वन्यजीव विभाग कोटा </strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 14 Apr 2025 15:08:51 +0530</pubDate>
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                <title>9 फरवरी को ही पता लग गया था चंबल में पड़ी लाश, फिर भी नहीं करवाया पोस्टमार्टम</title>
                                    <description><![CDATA[वन्यजीवों की सुरक्षा के लिए पुख्ता कदम उठाने को  कार्यवाही करनी चाहिए थी, जो नहीं किया गया। वन अधिकारियों की लापरवाही से वन्यजीवों का संरक्षण व सुरक्षा खतरे में पड़ गई है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/on-february-9--it-was-known-that-the-dead-body-was-lying-in-chambal--still-the-post-mortem-was-not-done/article-105501"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-02/257rtrer-(2)55.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। मुकुंदरा हिल्स टाइगर रिजर्व के अधीन राष्ट्रीय चंबल घड़ियाल सेंचुरी में गत दिनों संदिग्ध परिस्थितियों में मिली अजगर और मगरमच्छ की लाश के मामले में बड़ा खुलासा हुआ है। वन विभाग को पहले दिन से ही पता लग गया था कि चंबल नदी में अजगर और मगरमच्छ की लाश पड़ी है। इसके बावजूद शवों को कब्जे में लेकर प्रोटोकॉल के तहत निस्तारण करवाने के बजाए आंखें मूंदी  रखी। वन्यजीवों की सुरक्षा के प्रति जिम्मेदारों की घोर लापरवाही उजागर हुई तो अफसरों की नींद खुली और शवों को ढूंढने के लिए सर्च किया। लेकिन, तब तक फिशिंग जाल में फंसे अजगर और  संदिग्ध मगरमच्छ का शव गायब हो चुके थे।  नतीजन, शेड्यूल-वन के एनिमल्स के शव के साथ उनकी मौत के कारण भी रहस्य बन गए।  दरअसल, दैनिक नवज्योति के पास ऐसे साक्ष्य मौजूद हैं, जिससे स्पष्ट होता है कि वन विभाग को 9 फरवरी को ही चंबल घड़ियाल सेंचुरी में दोनों एनीमल के  शव पड़े होने की जानकारी मिल चुकी थी। इसके बावजूद मामले को छिपाते रहे और जनता को गुमराह किया।</p>
<p><strong>पता होने के बाद भी मामलाछिपाना संदेहप्रद :</strong><br />मुकुंदरा हिल्स टाइगर रिजर्व के चंबल घड़िया  सेंचुरी में गत 9 फरवरी को ही विभाग को भंवरकुंज के पास फिशिंग नेट में फंसी अजगर की लाश और भंवरकुंज के पास संदिग्ध हालात मिली 12 फीट लंबे मगरमच्छ की डेड बॉड़ी पड़ी होने की सबूत के साथ जानकारी मिल गई थी। इसके बावजूद उनके शवों को कब्जे में ना लेना, मौका पंचनामा न बनवाना, पोस्टमार्टम न करवाना सहित गंभीर मामले को छिपाकर वन उच्चाधिकारियों और जनता गुमराह करना वन कर्मियों व अफसरों की कार्यशैली को सवालों के घेरे में लाता है। साथ ही मंशा पर संदेह पैदा करता है। </p>
<p><strong>एफआईआर दर्ज नहीं करना घोर लापरवाही :</strong><br />मामला उजागर होने के बाद भी एफआईआर दर्ज  नहीं करना घोर लापरवाही दर्शाता है। जबकि, प्रोटोकॉल के अनुसार, वन अधिकारियों को शेड्यूल वन के एनिमल के शव मिलने पर प्रकरण दर्ज कर मौका पंचनामा बनाना था। इसके बाद शवों का पोस्टमार्टम करवाकर मौत के कारणों का पता लगाने के लिए सैंपल जांच के लिए लैब भिजवाने थे। साथ ही वन्यजीवों की सुरक्षा के लिए पुख्ता कदम उठाने को  कार्यवाही करनी चाहिए थी, जो नहीं किया गया। वन अधिकारियों की लापरवाही से वन्यजीवों का संरक्षण व सुरक्षा खतरे में पड़ गई है। </p>
<p><strong>प्रोटोकॉल का खुला उल्लंघन, 18 दिन से शव  लापता :</strong><br />वन्यजीव विशेषज्ञ नागार्जुन बिंदू कहते हैं, जानकारी होने के बावजूद विभाग द्वारा छिपाया जाना गंभीर अपराध की श्रेणी में आता है।  शेड्यूल वन के एनिमल  की लाश गायब है। डेड बॉडी गायब हुई या करवा दी गई।  इसकी उच्च स्तरीय जांच करवाकर पर्दाफाश करना चाहिए। हालांकि, फिशिंग नेट में फंसी अजगर की लाश से जाहिर होता है कि घड़ियाल सेंचुरी में अवैध मत्सत्याखेट करने वालों का गिरोह सक्रिय है। जिससे  चंबल में बसी बेजुबानों की दुनिया खतरे में है। </p>
<p><strong>पोस्टमार्टम होता तो मौत के रहस्यों से उठता पर्दा :</strong><br />चंबल घड़ियाल सेंचुरी में मृत मिले वन्यजीवों की डेड़बॉडी मिलना बेहद जरूरी है। ताकि, पोस्टमार्टम में मौत के सटीक कारणों का पता लग सके। पीएम नहीं होने से कई तरह के सवाल जहन में उठते हैं, जिसमें पानी में जहर, प्रदूषण का स्तर, जानवरों में फैली बीमारी सहित अन्य शामिल है। समय पर कारणों का पता लगने से अन्य जलीय जीवों की जान बचाई जा सके। उच्चाधिकारियों को मामले की निष्पक्ष जांच करवाकर दोषियों के खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई करनी चाहिए।<br /><strong>-बाबूलाल जाजू, पर्यावरणविद् एवं प्रदेशाध्यक्ष पीपुल्स फॉर एनिमल सोसायटी </strong></p>
<p><strong>हर दिन मर रहे मगरमच्छ,रिकॉर्ड में नहीं ले रहा विभाग :</strong><br />चंबल सेंचुरी में इनलीगल फिशिंग करने वालों का समूह पूर्णरूप से सक्रिय है। ऐसे में जाल में फंसने से आए दिन मगरमच्छ सहित अन्य वन्यजीवों की मौत होती है। लेकिन, मुकुंदरा प्रशासन उनको रिकॉर्ड में नहीं लेता। यही वजह है विभाग के पास हर माह वन्यजीवों की मौत का आंकड़ा उपलब्ध नहीं है। जिसका खामियाजा, वन्यजीवों की सुरक्षा को लेकर   पॉलिसी नहीं बन पाने के रूप में भुगतना पड़ता है। मुकुंदरा उपवन संरक्षक की इससे बड़ी लापरवाही क्या होगी कि 9 फरवरी को ही मामले की जानकारी मिलने के बावजूद कार्रवाई नहीं की गई। अफसरों की लचरता से बेजूबानों की जान खतरे में पड़ गई है। उच्चाधिकारियों को मामले की गंभीरता को देखते हुए कड़ी कार्रवाई करनी चाहिए।<br /><strong>- तेपेश्वर सिंह भाटी, पर्यावरणविद् एवं एडवोकेट</strong></p>
<p><strong>गंभीर अपराध पर सीडब्ल्यूएलडब्ल्यू ने साधी चुप्पी, जवाब से बचती रहीं :</strong><br />शेड्यूल वन एनीमल के शवों का गायब होना तथा जानकारी होने के बावजूद प्रोटोकॉल का खुला उल्लंघन किए जाने के मामले में मुख्य वन संरक्षक एवं मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक (सीडब्ल्यूएलडब्ल्यू) शिखा मेहरा ने चुप्पी साध ली है। मामले में उनका पक्ष जानने के लिए नवज्योति ने फोन किए लेकिन उन्होंने रिसिव नहीं किए। इसके बाद उन्हें मैसेज किए, जिसे पढ़कर भी जवाब नहीं दिया। वन्यजीवों की सुरक्षा का दायित्व होने के बावजूद गंभीर मामले को नजरअंदाज करना समझ से परे है।</p>
<p> मामले की जांच चल रही है। रिपोर्ट आने के बाद ही आगे की कार्रवाई की जाएगी।<br /><strong>-सुगनाराम जाट, संभागीय वन संरक्षक एवं क्षेत्र निदेशक मुकुंदरा टाइगर रिजर्व</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 25 Feb 2025 16:49:14 +0530</pubDate>
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                <title>आखिर कहां गायब हो गई चंबल घड़ियाल सेंचुरी से अजगर व मगरमच्छ की लाश, जानकर भी अनजान बनते रहे अधिकारी</title>
                                    <description><![CDATA[मुकुंदरा हिल्स टाइगर रिजर्व के अधीन राष्ट्रीय चंबल घड़ियाल सेंचुरी में शेड्यूल-1 के एनिमल्स के शव छिपाए जाने का सनसनीखेज मामला सामने आया है
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/where-did-the-bodies-of-python-and-crocodile-disappear-from-chambal-gharial-sanctuary/article-105366"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-02/257rtrer-(2)52.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। मुकुंदरा हिल्स टाइगर रिजर्व के अधीन राष्ट्रीय चंबल घड़ियाल सेंचुरी में शेड्यूल-1 के एनिमल्स के शव छिपाए जाने का सनसनीखेज मामला सामने आया है। 12 दिन पहले गरड़िया महादेव व भंवरकुंज के पास चंबल नदी में शिकारियों के जाल में फंसे अजगर और मगरमच्छ के शव मिले थे। जिनका प्रोटोकॉल के तहत विधिवत शव का निस्तारण करवाने के बजाए, अधिकारियों ने शव मिलने से ही मना कर दिया। दैनिक नवज्योति ने मामले से जुड़े साक्ष्य उच्चाधिकारियों के समक्ष रखे तो विभाग में हड़कम्प मच गया। दरअसल, गत 9 फरवरी को चंबल घड़ियाल सेंचुरी में पर्यटकों को मछुआरों के जाल में लिपटा अजगर का शव मिला था। इसके अगले ही दिन 10 फरवरी को 12 फीट लंबे मगरमच्छ की संदिग्ध हालत में लाश मिली।  जिसकी सूचना संबंधित वनकर्मियों को भी दी गई। इसके बावजूद शव का न तो मेडिकल बोर्ड से पोस्टमार्टम करवाया गया और न ही मौका पंचनामा बनवाया। इतना ही नहीं शव मिले जाने से भी इंकार किया। जब नवज्योति ने जीपीएस कोर्डिनेट मय फोटो भेजे तो अधिकारियों के होश उड़ गए।  </p>
<p><strong>12 दिन से लाश गायब, जानकर भी अनजान बनते रहे अधिकारी</strong><br />सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, गत दिनों सीसीएफ ऑफिस स्थित जेटी से ट्यूरिस्ट बोट से ट्यूरिस्ट गरड़िया महादेव तक चंबल सफारी को गए थे। 9 फरवरी को गरड़िया महादेव के पास नदी में मगरमच्छ का शव संदिग्ध हालात में मिला। इसके अगले दिन 10 फरवरी को भंवरकुंज के सामने कोटिया भील फोर्ट के पास मछुआरों के जाल में फंसी अजगर की लाश मिली। जिसकी जानकारी विभाग को दी गई। इस पर कार्रवाई करने के बजाए मामला छिपाते रहे। 15 फरवरी को फोटो-वीडियो सामने आने पर मामले का खुलासा हुआ तो वनकर्मियों ने अगले ही दिन 16 फरवरी को अलसुबह शव को गायब कर दिया। नवज्योति ने अधिकारियों को मामले से अवगत कराया तो उन्होंने अनभिज्ञता जताते हुए पल्ला झाड़ लिया। इसके बाद जीपीएस कोडिनेट भेजे तो अधिकारियों  के होश उड़ गए। पिछले 12 दिन से जलीय जीवों की डेड बॉडी गायब है और अधिकारियों को होश तक नहीं। </p>
<p><strong>जीपीएस कोर्डिनेट भेजे तो उड़े अधिकारियों के होश </strong><br />दैनिक नवज्योति ने शनिवार को मुकुंदरा डीएफओ  से मामले को लेकर सम्पर्क किया तो उन्होंने मगरमच्छ व अजगर के फोटो-वीडियो कोटा चंबल घड़ियाल क्षेत्र के होने से इंकार कर दिया। साथ ही उनके शव मिलने से भी मना कर दिया। इस पर नवज्योति ने सैटेलाइट जीपीएस कोर्डिनेट के साथ फोटो भेजे।</p>
<p><strong>क्या कहता है प्रोटोकॉल</strong><br />वाइल्ड लाइफ रिसर्चर रवि कुमार  ने बताया कि शेड्यूल वन के एनिमल की किसी भी परिस्थिति में मौत होने पर सर्वप्रथम एफआईआर दर्ज की जाती है फिर मेडिकल बोर्ड गठित कर पोस्टमार्टम करवाकर सैंपल जांच के लिए फोरेंसिक व डब्ल्यूडब्ल्यूएआई को भेजे जाते हैं। इसके बाद वन्यजीव चिकित्सकों व अधिकारियों की मौजूदगी में शव का अंतिम संस्कार किया जाता है। लेकिन, इस मामले में न केवल प्रोटोकॉल का उल्लंघन किया गया बल्कि शव को गायब कर जघन्य अपराध को अंजाम दिया गया। जलीय जीवों की सुरक्षा में घोर लापरवाही   बरतने वाले वन अधिकारियों व कर्मचारियों के खिलाफ  कठोर कार्रवाई की जानी चाहिए। </p>
<p><strong>प्रत्यक्षदर्शी बोले-मगरमच्छ व अजगर को मृत देख दिल दुखा</strong><br />9 फरवरी को हम दो साथी चंबल सफारी को गए थे। जहां गरडिया महादेव के पास नदी किनारे मगरमच्छ पानी में मगरमच्छ का शव देखा। उसकी शरीर फूलकर पानी में तैर रहा था। बेजूबान की ऐसी बेकद्री देख दिल दुखा। जलीय जीवों की सुरक्षा को विभाग गंभीर नहीं है। यहां फोरेस्ट का लॉ इंफोर्समेंट बिलकुल भी नहीं है।<br /><strong>- विशाल राठौड़, स्टूडेंट नीट यूजी</strong></p>
<p>मैं अपने दोस्तों के साथ 10 फरवरी को चंबल सफारी पर गया था। कोटिया भील फोर्ट के पास मछली पकड़ने के जाल में अजगर का शव फंसा हुआ मिला था। जिसे नजदीक से देखा तो उसका शरीर जाल के कारण कई जगहों से कटा हुआ था। <br /><strong>- गौरव चतुर्वेदी, अंशुल त्रिपाठी, (परिवर्तित नाम) पर्यटक</strong></p>
<p>इस बारे में पहले से मुझे कुछ पता नहीं है, आपके द्वारा ही मामला संज्ञान में आया है। डीएफओ व सीसीएफ से पता कर आवश्यक कार्रवाई करेंगे। <br /><strong>- शिखा मेहरा, प्रधान मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक जयपुर </strong></p>
<p>आपके द्वारा ही  मामला संज्ञान में आया है। डीएफओ से पता करेंगे और 9 व 10 फरवरी को मामला सामने आ गया था तो अब तक सूचना क्यों नहीं दी गई। किस स्तर पर लापरवाही बरती गई, इसकी जांच करवाएंगे, जिसमें जो भी दोषी होगा उसके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। <br /><strong>- सुगनाराम जाट, संभागीय मुख्य वन संरक्षक एवं क्षेत्र निदेशक मुकुंदरा </strong></p>
<p>मामले से संबंधित फोटो आए थे, हमने टीम मौके पर भेजी थी लेकिन वहां कोई वन्यजीव की डेड बॉडी नहीं मिली। जीपीएस कोर्डिनेट नहीं होने से यह लोकेशन यहां की है या नहीं, इसका कोई आइडिया नहीं है। <br /><strong>- मूथू एस, डीएफओ मुकुंदरा हिल्स टाइगर रिजर्व </strong></p>
<p><strong>शव छिपाया जाना गंभीर</strong><br />मगरमच्छ व अजगर की जाल में फंसी लाश 9 व 10 फरवरी को मिल गई थी। जिसकी जानकारी वनकर्मियों को थी। इसके बावजूद अधिकारी शव मिले जाने से इंकार करते रहे। शेड्यूल-1 के वन्यजीव की मृत्यु पर विधि अनुसार निस्तारण नहीं किया जाना व प्रकरण उजागर होने के बाद भी दोनों वन्यजीवों के शव मृत्यु के स्थान पर नहीं मिलना या उन्हें जिम्मेदारों द्वारा छुपाया जाना गंभीर है, जो मुकुन्दरा में  वन्यजीव संरक्षण को लेकर जिम्मेदारों की घोर लापरवाही को स्पष्ट कर रहा है। इस प्रकरण के निपटान  में जिम्मेदारों का जो लापरवाही व मानमाना पूर्ण आचरण रहा है, उससे यह स्पष्ट है कि वे विधि द्वारा पाबंद नहीं है व विभागीय दिशा निर्देश से खुद को ऊपर समझते है। वहीं, वर्तमान उप वन संरक्षक का अपने अधीनस्थों पर नियंत्रण समाप्त हो चुका है। <br /><strong>- तपेश्वर सिंह भाटी, वन्यजीव विशेषज्ञ एवं एडवोकेट</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 24 Feb 2025 16:41:00 +0530</pubDate>
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                <title>सर्दी में पानी से बाहर आ रहा दानव, खतरे में पर्यटक</title>
                                    <description><![CDATA[तालाब किनारे जॉय ट्रेन होने से बच्चों की मौजूदगी अधिक रहती है। ऐसे में हादसे का खतरा बना रहता है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/monster-coming-out-of-water-in-winter--tourists-in-danger/article-99596"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-01/465465.jpg" alt=""></a><br /><p> कोटा। नयापुरा स्थित सीवी गार्डन के तालाब में 8 महीने से भारी-भरकम मगरमच्छ ने डेरा डाल रखा है। शिकायतों के बावजूद वन्यजीव विभाग के अफसरों ने आंखें मूंदी रखी। जबकि, 15 दिन पहले ही मगरमच्छ तालाब किनारे बतखों पर हमला कर चुका है। एक बतख को तो खा भी गया और दूसरी को लहुलूहान कर दिया। घटना के बाद से ही पर्यटक व मॉर्निंग वॉकर्स दशहत में है। वहीं, खतरे की जद में केडीए द्वारा बोटिंग  करवाई जा रही है। तालाब किनारे जॉय ट्रेन होने से बच्चों की मौजूदगी अधिक रहती है। ऐसे में हादसे का खतरा बना रहता है। जागरूक मॉर्निंग वॉकर्स ने पहले भी इसकी शिकायत वन्यजीव विभाग से की थी। सम्पर्क पोर्टल पर भी शिकायत दर्ज करवाई। इसके बावजूद वन्यजीव विभाग द्वारा अब तक कोई कार्रवाई नहीं की गई। हालांकि, कुछ माह पहले पिंजरा लगाकर खानापूर्ति जरूर की।  </p>
<p><strong>मॉर्निंग वॉकर्स में दहशत </strong><br />सीवी गार्डन में बोटिंग व जॉय ट्रेन संचालन में लगे कर्मचारियों ने बताया कि गत वर्ष 9 दिसम्बरको तालाब में छिपा मगरमच्छ ने बतखों पर हमला कर दिया था। बतखों के जोर-जोर से चिल्लाने की आवाज सुन स्टाफ व पर्यटक सकते में आ गए थे। मौके पर जाकर देखा तो मगरमच्छ बतखों पर हमला कर रहा था। एक बतख को तो खा गया और दूसरी को लहुलूहान कर दिया। लोगों की आवाजाही होने से मगरमच्छ वापस पानी में  चला गया। घटना के बाद से ही लोगों में दहशत है। </p>
<p><strong>वन अधिकारियों को लिख चुके पत्र, कोई सुनवाई नहीं</strong><br />सीवी गार्डन के बोटिंग व जॉय ट्रेन कॉन्ट्रेक्टर शिव शर्मा ने बताया कि गार्डन के तालाब में मगरमच्छ लंबे समय है। जबकि, इसी तालाब में पैदल बोटिंग करवाई जाती है। वहीं, जॉय ट्रेन भी यहीं हैं। ऐसे में लोगों व बच्चों की मौजूदगी अधिक रहती है। ऐसे में हादसे का खतरा बना रहता है। मगरमच्छ रेस्क्यू को लेकर हमने वन विभाग के अधिकारियों को कई बार पत्र लिखे लेकिन किसी ने भी ध्यान नहीं दिया। विभाग की अनदेखी से बड़ा हादसा हो सकता है। केडीए के अधिकारियों ने भी पत्र भेज रेस्क्यू करवाने की मांग की थी, जिसे भी वन अधिकारियों ने अनदेखा कर दिया। जबकि, पार्क में सुबह-शाम बड़ी संख्या में लोग आते हैं। </p>
<p><strong>तालाब किनारे ही धूप सेंक रहा मगरमच्छ</strong><br />मॉर्निंग वॉकर्स डॉ. सुधीर उपाध्याय ने बताया कि तालाब में एक नहीं दो मगरमच्छ है। सर्दियों में वह अक्सर तालाब किनारे ही धूप सेंकता नजर आता है। जबकि, तालाब के किनारे पर ही मंदिर है, जहां सुबह व शाम को श्रद्धालु आते हैं, ऐसे में वह मगरमच्छ के हमले का खतरा बना रहता है। वन अधिकारियों से इसकी शिकायत की थी तो उन्होंने कुछ दिन पिंजरा लगाकर खानापूर्ति कर दी लेकिन  रेस्क्यू करने का प्रयास नहीं किया। </p>
<p><strong>सम्पर्क पोर्टल पर भी की शिकायत   </strong><br /><strong>डॉ. उपाध्याय</strong> ने बताया कि गत वर्ष अगस्त माह में मुख्यमंत्री सम्पर्क पोर्टल पर भी शिकायत दर्ज करवाई थी। तालाब में 8 से 10 फीट लंबा मगरमच्छ डेरा जमाए हुआ है। मॉर्निंग व इवनिंग वॉक पर प्रतिदिन यहां बड़ी संख्या में शहरवासी व पर्यटक आते हैं। मगरमच्छ कभी पानी में तो कभी जमीन पर झाड़-झंकाड़ों के बीच छिपा रहता है। ऐसे में राहगीरों व बच्चों पर मगरमच्छ के हमले का खतरा ज्यादा रहता है। </p>
<p><strong>मंदिर के पास झाड़ियों में छिपा रहता है  </strong><br />राहगीरों ने बताया कि सीवी गार्डन में तालाब किनारे गणेश मंदिर बना हुआ है। जहां बोटिंग के लिए टिकट विंडो है। यहां बड़ी संख्या में बच्चे खेलते हैं। वहीं, श्रद्धालु दर्शन को जाते हैं। ऐसे में मगरमच्छ द्वारा हमला करने का डर लगा रहता है। सर्दियों में मगरमच्छ तालाब से बाहर आने  की संभावना अधिक रहती है। ऐसे में वह लोगों पर हमला कर सकता है। वन अधिकारियों की घोर लापरवाही से बड़ा हादसा हो सकता है। पूर्व में मगरमच्छ के फोटो-वीडियो वन्यजीव विभाग के डीएफओ को भेजकर रेस्क्यू का आग्रह किया था। इसके बावजूद वन अधिकारी लापरवाह बने हुए हैं। </p>
<p><strong>बोटिंग में बच्चे, हादसे का डर </strong><br />सीवी गार्डन के तालाब में केडीए द्वारा पेडल बोटिंग करवाई जाती है। जबकि, इसी तालाब में मगरमच्छ छुपा हुआ है। बोट में छोटे बच्चे भी होते हैं, जो पानी में भी हाथ डाल देते हैं। ऐसे में मगरमच्छ के हमले का डर बना रहता है। इधर, पर्यटक कैलाश माहेश्वरी व अशोक मीणा का कहना है, केडीए को या तो बोटिंग बंद करवानी चाहिए या फिर मगरमच्छ को रेस्क्यू करवाना चाहिए। अफसरों की लेटलतीफी व अनदेखी के चलते बच्चों की जान संकट में रहती है। </p>
<p><strong>पिंजरा भी उठा ले गए वनकर्मी </strong><br />मॉर्निंग वॉकर सुरेंद्र कुमार, नीलेश जोशी, अरविंद जाट का कहना है कि दो महीने पहले वन्यजीव विभाग के कर्मचारियों ने तालाब किनारे पिंजरा लगाया था लेकिन मॉनिटरिंग नहीं करते थे। वह पिंजरा देखने तक भी नहीं आते थे। मगरमच्छ को रेस्क्यू करने का प्रयास ही नहीं किया। वन अधिकारियों की घोर लापरवाही से किसी दिन बड़ा हादसा हो सकता है। जिला प्रशासन को हस्तक्षेप कर सीवी गार्डन के तालाब से मगरमच्छ को रेस्क्यू करने के लिए वन विभाग के अधिकारियों को पाबंद करना चाहिए। </p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br />सर्दियों में मगरमच्छ के पानी से बाहर रहने की संभावना अधिक रहती है। ऐसे में रेस्क्यू करने के प्रयास करेंगे। हालांकि, पर्यटकों को भी सावधानी बरतनी चाहिए। <br /><strong>- रामकरण खैरवा, संभागीय मुख्य वनसंरक्षक एवं क्षेत्र निदेशक वन विभाग </strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 04 Jan 2025 14:35:02 +0530</pubDate>
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                <title>सीवी गार्डन में घात लगाए बैठा काल</title>
                                    <description><![CDATA[शिकायतों के बावजूद वन विभाग नहीं गंभीर । 
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/death-lurks-in-cv-garden/article-97790"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-12/257rtrer-(2)24.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। नयापुरा सीवी गार्डन के तालाब में 6 महीने से भारी-भरकम मगरमच्छ ने डेरा डाल रखा है। शिकायतों के बावजूद वन्यजीव विभाग के अफसरों ने आंखें मूंदी रखी। जबकि, 7 दिन पहले ही मगरमच्छ ने तालाब किनारे बतखों पर हमला कर दिया। एक बतख को खा गया और दूसरी को जख्मी कर दिया। इसी तालाब में केडीए द्वारा पैडल बोटिंग करवाई जाती है। बोटिंग में बच्चों की संख्या अधिक रहती है। वहीं, तालाब किनारे जॉय ट्रेन होने से बच्चों की मौजूदगी अधिक रहती है। ऐसे में हादसे का खतरा बना रहता है। जागरूक मॉर्निंग वॉकर्स ने पहले भी इसकी शिकायत वन्यजीव विभाग से की थी। इसके बावजूद उसे रेस्क्यू नहीं किया जा रहा। हालांकि, पिंजरा लगाकर खानापूर्ति कर दी गई थी। </p>
<p><strong>बतखों पर किया हमला, दहशत में लोग </strong><br />सीवी गार्डन में बोटिंग व जॉय ट्रेन के कॉन्ट्रेक्टर शिव शर्मा ने बताया कि 7 दिन पहले 9 दिसम्बरको तालाब में छिपा मगरमच्छ ने बतखों पर हमला कर दिया था। बतखों के जोर-जोर से चिल्लाने की आवाज सुन स्टाफ सकते में आ गया। मौके पर देखा तो मगरमच्छ बतखों पर हमला कर रहा था। एक बतख को तो खा गया और दूसरी को लहुलूहान कर दिया। लोगों की आवाजाही होने से मगरमच्छ वापस पानी में  चला गया। बाद में घायल बतख का पशु चिकित्सा केंद्र ले जाकर इलाज करवाया।</p>
<p><strong>वन अधिकारियों को लिखे पत्र, नहीं किया रेस्क्यू</strong><br />सीवी गार्डन के कॉन्ट्रेक्टर शिव शर्मा ने बताया कि गार्डन के तालाब में मगरमच्छ लंबे समय है। जबकि, इसी तालाब में पैदल बोटिंग करवाई जाती है। वहीं, जॉय ट्रेन भी यहीं हैं। ऐसे में लोगों व बच्चों की मौजूदगी अधिक रहती है। ऐसे में हादसे का खतरा बना रहता है। मगरमच्छ रेस्क्यू को लेकर हमने वन विभाग के अधिकारियों को कई बार पत्र लिखे लेकिन किसी ने भी ध्यान नहीं दिया। विभाग की अनदेखी से बड़ा हादसा हो सकता है। केडीए के अधिकारियों ने भी पत्र भेज रेस्क्यू करवाने की मांग की थी, जिसे भी वन अधिकारियों ने अनदेखा कर दिया। जबकि, पार्क में सुबह-शाम बड़ी संख्या में लोग आते हैं। </p>
<p><strong>सम्पर्क पोर्टल पर की शिकायत फिर भी नहीं चेता वन विभाग </strong><br />मॉर्निंग वॉकर डॉ. सुधीर उपाध्याय ने बताया कि गत 6 माह से करीब 8 से 10 फीट लंबा मगरमच्छ सीवी गार्डन के तालाब में डेरा जमाए हुआ है। जिसकी पूर्व में प्रशासनिक व वन अधिकारियों से शिकायत भी की। लेकिन, सुनवाई नहीं हुई। जबकि, मॉर्निंग व इवनिंग वॉक पर प्रतिदिन यहां बड़ी संख्या में शहरवासी व पर्यटक आते हैं। मगरमच्छ कभी पानी में तो कभी जमीन पर झाड़-झंखाड़ं के बीच छिपा रहता है। ऐसे में राहगीरों व बच्चों पर मगरमच्छ के हमले का खतरा बना रहता है। इसके बाद मुख्यमंत्री सम्पर्क पोर्टल पर भी शिकायत की। इसके बाद विभाग को मगरमच्छ पकड़ने की याद आई। </p>
<p><strong>मंदिर के पास मूवमेंट, सर्दियों में बड़ा खतरा</strong><br />सीवी गार्डन में तालाब किनारे गणेश मंदिर बना हुआ है। जहां बोटिंग के लिए टिकट विंडो है। यहां बड़ी संख्या में बच्चे खेलते हैं। वहीं, श्रद्धालु दर्शन को जाते हैं। ऐसे में मगरमच्छ द्वारा हमला करने का डर लगा रहता है। सर्दियों में मगरमच्छ तालाब से बाहर आने  की संभावना अधिक रहती है। ऐसे में वह लोगों पर हमला कर सकता है। वन अधिकारियों की घोर लापरवाही से बड़ा हादसा हो सकता है। पूर्व में मगरमच्छ के फोटो-वीडियो वन्यजीव विभाग के डीएफओ को भेजकर रेस्क्यू का आग्रह किया था। इसके बावजूद वन अधिकारी लापरवाह बने हुए हैं। </p>
<p><strong>तालाब किनारे चिल्लाती 39 बतखें </strong><br />डॉ. गुप्ता ने बताया कि गार्डन में करीब 40 बतखें थी, जो मगरमच्छ के डर के मारे पिछले कई महीनों से पानी में नहीं उतरी। 9 दिसम्बर को मगरमच्छबतखों पर हमला कर एक को खा गया और दूसरी को जख्मी कर दिया। पानी में नहीं उतरने से बतखों का भोजन का संकट हो गया। तालाब किनारे छोटे बड़े पौधे व झाड़ियां उगी हुई हैं। जहां मगरमच्छ पानी से निकल घात लगाकर छिपा रहता है। जिससे हादसे का खतरा बना रहता है।</p>
<p><strong>तालाब में बोटिंग व किनारे पर जॉय ट्रेन</strong><br />राहगीरों का कहना है, तालाब में केडीए की ओर से बोटिंग करवाई जाती है। बोटिंग के दौरान पानी के बीच में बच्चे व बड़े अनजाने खतरे के साय में रहते हैं। वहीं, तालाब किनारे जॉय ट्रेन की टिकट विंडो है। जहां बच्चों की भीड़ लगी रहती है। वन विभाग की लापरवाही से बड़ा हादसा हो सकता है। </p>
<p><strong>पिंजरा भी उठा ले गए वनकर्मी</strong><br />मॉर्निंग वॉकर सत्येंद्र सिंह, यूसुफ खान, इरफान व हितेश जोशी ने बताया कि पिछले महीने वन्यजीव विभाग के कर्मचारियों ने तालाब किनारे पिंजरा लगाया था लेकिन मॉनिटरिंग नहीं करते थे। वह पिंजरा देखने तक नहीं आते थे। मगरमच्छ को रेस्क्यू करने का प्रयास ही नहीं किया। वन अधिकारियों की घोर लापरवाही से किसी दिन बड़ा हादसा हो सकता है। जिला प्रशासन को हस्तक्षेप कर सीवी गार्डन के तालाब से मगरमच्छ को रेस्क्यू करने के लिए वन विभाग के अधिकारियों को पाबंद करना चाहिए। </p>
<p>पानी के अंदर से हम मगरमच्छ को पकड़ नहीं सकते। डेढ़ महीने पिंजरा भी लगाया था। जिसमें कभी श्वान तो कभी अन्य जानवर ट्रैप होता रहा। किसी भी व्यक्ति ने पत्र के माध्यम से अब तक हमसे कोई शिकायत नहीं की है।  यहां कॉन्ट्रेक्टर या केडीए को एक व्यक्ति 24  निगरानी के लिए लगाना चाहिए। जब मगरमच्छ पानी से बाहर आए तो हमें सूचना कर दें और हम टीम भेजकर रेस्क्यू करवा लेंगे। </p>
<p><strong>अनुराग भटनागर, डीएफओ वन्यजीव विभाग</strong><br />मगरमच्छ का पानी से पकड़ नहीं सकते और पकड़ना भी नहीं चाहिए। लोगों की सुरक्षा के उपाए किए जा सकते हैं, बजाए मगरमच्छ को पकड़ने के। तालाब के चारों तरफ सुरक्षा दीवार बनाई जा सकती है और चेतावनी बोर्ड लगा दिए जाए। वैसे भी मगरमच्छ बोटिंग पर हमला नहीं करता। <br /><strong>- रामकरण खैरवा, संभागीय मुख्य वनसंरक्षक एवं क्षेत्र निदेशक वन विभाग </strong></p>
<p>मामला आपके द्वारा संज्ञान में आया है, संबंधित विभाग के अधिकारियों से सम्पर्क कर जल्द से जल्द समस्या का निस्तारण करवाएंगे।<br /><strong>- राजेंद्र माथूर, निदेशक अभियांत्रिकी केडीए</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/death-lurks-in-cv-garden/article-97790</link>
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                <pubDate>Mon, 16 Dec 2024 16:30:28 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[kota]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>असर खबर का -  6 माह से मगरमच्छ की दहशत, अब जागा वन्यजीव विभाग </title>
                                    <description><![CDATA[शिकार की तलाश में मगरमच्छ के पिंजरे में आने के दौरान ट्रैप होने की संभावना है।  ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/effect-of-the-news---fear-of-crocodile-for-6-months--now-the-wildlife-department-has-woken-up/article-93412"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-10/630400-size-(16)2.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। नयापुरा सीवी गार्डन के तालाब में 6 महीने से भारी-भरकम मगरमच्छ ने डेरा डाल रखा है। शिकायतों के बावजूद वन्यजीव विभाग के अफसरों ने आंखें मूंदी रखी। जबकि, तालाब में शाम के वक्त बोटिंग करवाई जाती है। ऐसे में पर्यटकों व राहगीरों की जान खतरा रहता है।  समाजसेवी डॉ. सुधीर उपाध्याय के 6 माह के लंबे संघर्ष के बाद आखिरकार, जिम्मेदार वन अधिकारी कुंभकरर्णीय नींद से जागे और शुक्रवार को सीवी गार्डन में मगरमच्छ को पकड़ने के लिए पिंजरा लगवाया। </p>
<p><strong>मगरमच्छ पकड़ने को लगाया पिंजरा, बांधा शिकार</strong><br />वन्यजीव विभाग की टीम शुक्रवार दोपहर को सीवी गार्डन पहुंची और मगरमच्छ को पकड़ने के लिए 6 से 8 फीट लंबा पिंजरा लगाया। इस दौरान पिंजरे में शिकार भी बांधा गया। शिकार की तलाश में मगरमच्छ के पिंजरे में आने के दौरान ट्रैप होने की संभावना है।  </p>
<p><strong>सुनवाई नहीं हुई तो सम्पर्क पोर्टल पर की शिकायत </strong><br />मॉर्निंग वॉकर डॉ. उपाध्याय ने बताया कि गत 6 माह से करीब 8 फीट लंबा मगरमच्छ सीवी गार्डन के तालाब में डेरा जमाए हुआ है। जिसकी पूर्व में प्रशासनिक व वन अधिकारियों से शिकायत भी की। लेकिन, सुनवाई नहीं हुई। जबकि, मॉर्निंग व इवनिंग वॉक पर प्रतिदिन यहां बड़ी संख्या में शहरवासी व पर्यटक आते हैं। मगरमच्छ कभी पानी में तो कभी जमीन पर झाड़-झंकाड़ों के बीच छिपा रहता है। ऐसे में राहगीरों व बच्चों पर मगरमच्छ के हमले का खतरा बना रहता है। इसके बाद मुख्यमंत्री सम्पर्क पोर्टल पर भी शिकायत की। इसके बाद विभाग को मगरमच्छ पकड़ने की याद आई। </p>
<p><strong>गणेश मंदिर के पास रहता है मूवमेंट</strong><br />राहगीरों ने बताया कि सीवी गार्डन में तालाब किनारे गणेश मंदिर बना हुआ है। जहां बोटिंग के लिए टिकट विंडो है। यहां बड़ी संख्या में बच्चे खेलते हैं। वहीं, श्रद्धालु दर्शन को जाते हैं। ऐसे में मगरमच्छ द्वारा हमला करने का डर लगा रहता है। मगरमच्छ के फोटो-वीडियो पूर्व में वन्यजीव विभाग के डीएफओ को भेजकर रेस्क्यू का आग्रह किया था। </p>
<p><strong>तालाब किनारे चिल्लाती 40 बतखें </strong><br />डॉ. गुप्ता ने बताया कि गार्डन में करीब 40 बतखें हैं, जो मगरमच्छ के डर के मारे पिछले कई महीनों से पानी में नहीं उतरी। तालाब किनारे बतखों का समूत चिल्लाती हुई वॉर्निंग कॉल देती है।  ऐसे में उनके भोजन का संकट हो गया। तालाब किनारे छोटे बड़े पौधे व झाड़ियां उगी हुई हैं। जहां मगरमच्छ पानी से निकल घात लगाकर छिपा रहता है।</p>
<p><strong>तालाब में बोटिंग व किनारे पर जॉय ट्रेन</strong><br />राहगीरों का कहना है, तालाब में केडीए की ओर से बोटिंग करवाई जाती है। बोटिंग के दौरान पानी के बीच में बच्चे व बड़े अनजाने खतरे के साय में रहते हैं। वहीं, तालाब किनारे जॉय ट्रेन की टिकट विंडो है। जहां बच्चों की भीड़ लगी रहती है। वन विभाग की लापरवाही से बड़ा हादसा हो सकता है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 19 Oct 2024 12:32:14 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>पानी से बाहर निकल रहे है मगरमच्छ, वन विभाग की टीम ने किया रेस्क्यू</title>
                                    <description><![CDATA[इससे आसपास के एरिया में दहशत का माहौल हो गया। लोगों की सूचना पर पहुंची वन विभाग की टीम देर रात मगरमच्छ को रेस्क्यू कर नाहरगढ़ ले गई।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/crocodiles-are-coming-out-of-the-water--forest-department-team-rescue/article-90718"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-09/2rtrer-(13)2.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। अच्छी बारिश के चलते आमेर स्थित मावठा और आमेर सागर ओवर फ्लो हो गए हैं। इसके चलते मगरमच्छ पानी से बाहर निकल रहे हैं। रात करीब 9 बजे मावठे से एक बड़ा मगरमच्छ हाथी स्टैंड की ओर आ गया। इससे आसपास के एरिया में दहशत का माहौल हो गया। लोगों की सूचना पर पहुंची वन विभाग की टीम देर रात मगरमच्छ को रेस्क्यू कर नाहरगढ़ बायोलॉजिकल ले गई।</p>
<p>आमेर में मगरमच्छ निकलने की ये दूसरी घटना है। गौरतलब है कि इससे पहले शुक्रवार को सुबह आमेर सागर से मगरमच्छ निकलकर खेड़ी गेट स्थित हर्षनाथ भैंरूजी के मंदिर के पास पहुंच गया था, जिसे समय रहते वन विभाग की टीम ने रेस्क्यू कर नाहरगढ़ बायोलॉजिकल पार्क स्थित राम सागर लेक में छोड़ दिया था।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 17 Sep 2024 10:35:33 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>आवास में मगरमच्छ दिखने पर मचा हड़कम्प, वन विभाग की टीम ने किया रेस्क्यू </title>
                                    <description><![CDATA[ऐसे में लोगों ने तुरंत वन विभाग को इसकी सूचना दी। वन विभाग के अधिकारियों ने बताया कि सूचना मिलने पर एक टीम को भेजा गया। टीम ने मगरमच्छ को रेस्क्यू कर पुनः वन क्षेत्र में रिलीज कर दिया। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/there-was-panic-after-seeing-crocodile-in-the-residence--forest-team-rescue/article-88023"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-08/6633-copy2.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। रायसर रेंज के रायपुर गाँव से एक मगरमच्छ को रेस्क्यू किया गया। इससे पहले सूचना मिलने पर वन विभाग की टीम मौके पर पहुँची। टीम ने काफी मशक्कत के बाद ने मगरमच्छ को रेस्क्यू किया। जानकारी के अनुसार गाँव के एक आवास के पास इसे देखे जाने पर लोगों में हड़कम्प मच गया। </p>
<p>ऐसे में लोगों ने तुरंत वन विभाग को इसकी सूचना दी। वन विभाग के अधिकारियों ने बताया कि सूचना मिलने पर एक टीम को भेजा गया। टीम ने मगरमच्छ को रेस्क्यू कर पुनः वन क्षेत्र में रिलीज कर दिया। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 18 Aug 2024 16:04:52 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>सीवी गार्डन में मगरमच्छ की दहशत, बच्चों पर हमले का खतरा</title>
                                    <description><![CDATA[तालाब किनारे गणेश मंदिर के पास हो रही साइटिंग।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/terror-of-crocodile-in-cv-garden--danger-of-attack-on-children/article-84278"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-07/53.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। नयापुरा स्थित सीवी गार्डन में एक महीने से शहरवासी मगरमच्छ की दहशत में हैं। मॉर्निंग व इवनिंग वॉक पर आने वाले राहगीर व पर्यटकों पर मगरमच्छ के हमले का खतरा बना हुआ है। वन विभाग को शिकायत करने के बावजूद मगरमच्छ का रेस्क्यू नहीं किया जा रहा। जबकि, गार्डन में सुबह-शाम बड़ी संख्या में शहरवासी घूमने आते हैं। इनमें बच्चों की संख्या अधिक रहती है। हैरानी की बात यह है, तालाब में बोटिंग भी करवाई जाती है। मगरमच्छ कभी पानी में तो कभी जमीन पर छिपा रहता है। ऐसे में राहगीरों व बच्चों पर मगरमच्छ के हमले का खतरा बना रहता है। </p>
<p><strong>गणेश मंदिर के पास रहता है मूवमेंट</strong><br />डा. सुधीर उपाध्याय ने  बताया कि सीवी गार्डन में स्थित तालाब किनारे गणेश मंदिर बना हुआ है। जहां बोटिंग के लिए टिकट विंडो है। यहां बड़ी संख्या में बच्चे खेलते हैं। वहीं, श्रद्धालु दर्शन को जाते हैं। ऐसे में मगरमच्छ द्वारा हमला करने का डर लगा रहता है। मगरमच्छ के फोटो-वीडियो वन्यजीव विभाग के डीएफओ को भेज रेस्क्यू करने का आग्रह किया। इसके बावजूद मगरमच्छ  का रेस्क्यू नहीं किया जा रहा। </p>
<p><strong>तालाब में बोटिंग व किनारे पर जॉय ट्रेन</strong><br />राहगीरों का कहना है, तालाब में केडीए की ओर से बोटिंग करवाई जाती है। बोटिंग के दौरान पानी के बीच में बच्चे व बड़े अनजाने खतरे के साय में रहते हैं। वहीं, तालाब किनारे जॉय ट्रेन की टिकट विंडो है। जहां बच्चों की भीड़ लगी रहती है। वन विभाग की लापरवाही से बड़ा हादसा हो सकता है। </p>
<p><strong>एक माह से पानी में नहीं उतरी बतख</strong><br />डॉ. सुधीर गुप्ता ने बताया कि गार्डन में सुबह व शाम सैर करने बड़ी संख्या में शहरवासी आते हैं। वहीं, पार्क में बच्चे खेलते हैं। ऐसे में मगरमच्छ के हमले का डर बना रहता है। इसकी शिकायत वन्यजीव विभाग के डीएफओ से भी कर चुके हैं। इसके बावजूद सुनवाई नहीं हो रही है। हालात यह हैं, पिछले एक महीने से 40 बतख पानी में नहीं उतरी। तालाब किनारे छोटे बड़े पौधे व झाड़ियां उगी हुई हैं। जहां मगरमच्छ पानी से निकल घात लगाकर छिपा रहता है। जिससे हादसे का खतरा बना रहता है।</p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br />मामला संज्ञान में आया है। मगरमच्छ सुबह व शाम के समय पानी से बाहर निकलते हैं। टीम को मौके पर भेज मगरमच्छ का रेस्क्यू करवाएंगे। <br /><strong>- रामकरण खैरवा, संभागीय मुख्य वन संरक्षक एवं क्षेत्र निदेशक, वन विभाग कोटा </strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/terror-of-crocodile-in-cv-garden--danger-of-attack-on-children/article-84278</link>
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                <pubDate>Wed, 10 Jul 2024 16:27:12 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[kota]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>नहर में 150 किलो वजनी मगरमच्छ और घर में आ धमका 60 किलो का कछुआ</title>
                                    <description><![CDATA[विभाग द्वारा हर साल करीब 80 से 90 मगरमच्छों का आबादी क्षेत्रों से रेस्क्यू किया जाता है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/crocodile-weighing-150-kg-found-in-the-canal-and-60-kg-tortoise-entered-the-house/article-57273"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-09/gan-(4)2.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। शहर में शुक्रवार की शाम चर्चित रही। एक ही दिन में दो अलग-अलग जगहों पर वन्यजीवों की मौजूदगी ने लोगों को हैरत में डाला तो वहीं, दहशत का भी माहौल बना रहा। हुआ यूं, देर शाम को नांता से गुजर रही पाटन नहर में 150 किलो वजनी मगरमच्छ आने से राहगीरों में हड़कम्म मच गया। वहीं, मोहनलाल सुखाड़िया आवासीय कॉलोनी में 60 किलो वजनी कछुआ आ धमका। जिसे देखने के लिए रहवासियों की भीड़ लग गई। पुलिस की सूचना पर मौके पर पहुंचे वन कर्मियों ने नहर में उतरकर जान जोखिम में डालकर मगरमच्छ को रेस्क्यू किया। बाद में कछुए को भी कब्जे में लेकर चिड़ियाघर पहुंचाया। </p>
<p><strong>नहर में उतरकर पकड़ा 10 फीट लंबा मगरमच्छ</strong><br />वनकर्मी धर्मेंद्र चौधरी ने बताया कि शुक्रवार देर शाम 6.30 बजे नांता स्थित पाटन नहर में मगरमच्छ दिखाई देने की पुलिस से सूचना मिली थी। इस पर 15 मिनट में टीम मौके पर पहुंची और मगर को रेस्क्यू करने की कवायद शुरू की। मगर करीब 10 फीट लंबा था और पानी में तैर रहा था। उसे पकड़ने के लिए कर्मचारियों को जान हथेली पर रख नहर में उतरना पड़ा। जैसे ही नहर में कदम रखा तो वह अटैक करने को झपट्टा लेकिन एन वक्त पर बाहर निकलकर जान बचाई। बाद में फिर से नहर में उतरे और सिर पर बोरी फैंककर रेस्क्यू करने की कोशिश की लेकिन वह काबू में नहीं आया। अंधेरा होने के कारण वह दिखाई भी नहीं दे रहा था। मोबाइल की टॉर्च में उसे पकड़ने का प्रयास जारी रखा। इस बीच उसने कई बार हमला करने का प्रयास किया।</p>
<p><strong>200 मीटर पानी में इधर-उधर भागा मगर</strong><br />चौधरी ने बताया कि मगरमच्छ 150 किलो वजन था। रस्सियों का फंदा बनाकर टीम ने दोनों तरफ से घेराबंदी कर उसके ऊपर फेंके। बमुशिकल वह फंदे में फंसा। जिसे खींचकर नहर से बाहर निकालने में काफी मशक्कत करनी पड़ी। नहर में उतरने के दौरान वनकर्मियों के कांच के टुकटे और कांटे लगने से पैर जख्मी हो गए। मौके पर लोगों की भीड़ तमाशबीन बनी रही लेकिन कोई भी मदद को आगे नहीं आया। भारी-भरकम मगरमच्छ को उठाकर गाड़ी में रख देवलीअरब क्रोकोडाइल प्वाइंट की ओर रवाना किया। इस दौरान रेस्क्यू में धर्मेंद्र चौधरी, वीरेंद्र सिंह, महावीर व होमगार्ड मौजूद थे।</p>
<p><strong>वनकर्मियों के पास नहीं साधन-संसाधन</strong><br />वन विभाग से मिली जानकारी के अनुसार विभाग द्वारा हर साल करीब 80 से 90 मगरमच्छों का आबादी क्षेत्रों से रेस्क्यू किया जाता है। रेस्क्यू के दौरान लोगों की अनावश्यक मौके पर जमा भीड़ परेशान करती है। रेस्क्यू में सहयोग नहीं करते। उन्होंने बताया कि टीम के पास न तो रेस्क्यू वाहन है और न ही साधन-संसाधन उपलब्ध हैं। रस्सियां भी खुद वनकर्मी अपने खर्चे से खरीदते हैं। विभाग को वन्यजीवों के रेस्क्यू के लिए जाल, रस्सियां, वाहन सहित अन्य जरूरी संसाधन उपलब्ध करवाना चाहिए। </p>
<p><strong>वन्यजीव प्रेमियों ने दिए सुझाव </strong><br />- नहर व नाले किनारे तार फेंसिंग की जाए।<br />- वन विभाग को साधन-संसाधनों की उपलब्धता बढ़ाई जाए। <br />- जितने हो सके उतने हेल्पलाइन नम्बर बांटना चाहिए। <br />- एक से ज्यादा क्रोकोडाइल रेस्क्यू टीम बनाई जाए। <br />- वन्यजीव विभाग रेस्क्यू के दौरान मगरमच्छों पर टेगिंग जरूर करवाएं। <br />- नहर व नालों में मृत जीव-जंतु, जानवर, मटन-चिकन के अवशेष व खाद्य सामग्री न फेंकी जाए। <br />- जब मगरमच्छों को भोजन नहीं मिलेगा तो वह आबादी क्षेत्रों से सटे नहर-नालों में नहीं आएंगे। <br />- इनके प्राकृतिक आवास को सुरक्षित रखा जाए। <br />- इनके संरक्षण व भोजन की नियमित व्यवस्था की जाए।</p>
<p><strong>कॉलोनी में घुसा 60 किलो वजनी कछुआ</strong><br />नांता पुलिस थाने के एएसआई दुर्गालाल ने बताया कि नहर में मगरमच्छ रेस्क्यू करने के दौरान मोहनलाल सुखाड़िया आवासीय कॉलोनी की सी-ब्लॉक में भारी-भरकम कछुए की सूचना मिली। इस पर वन विभाग की टीम तुरंत मौके पर पहुंची। जहां से उसे रेस्क्यू कर नयापुरा स्थित चिड़ियाघर में रिलीज किया। एएसआई दुर्गालाल ने बताया कि वे शाम को इलाके में गश्त कर रहे थे, तभी पाटन नहर में 10 फीट लंबे मगरमच्छ होने की सूचना मिली। इस पर उन्होंने वन विभाग की टीम को मौके पर बुलाकर मगरमच्छ व कछुए दोनों का रेस्क्यू करवाया। वन रक्षक धर्मेंद्र ने बताया कि इतने बड़े कछुआ को पहली बार रेस्क्यू किया है। कछुआ कॉलोनी के खाली पड़े भूखण्ड में था। मकान में दरवाजे भी नहीं है। संभवत: वह आसपास के नदी-नाले से होता हुआ यहा पहुंचा होगा। भारी भरकम कछुए को देखने के लिए लोगों में उत्सुकता नजर आई। </p>
<p><strong>बारिश के दिनों में खेतों में पड़े रहते हैं मगरमच्छ </strong><br />बारिश के दिनों में बैराज के गेट खुलने से चंबल की दांई व बाईं मुख्य नहर में पानी की आवक बढ़ जाती है। जिससे नाले में उफान आ जाता हैं और पानी ओवरफ्लो होकर खेतों में भर जाता है। वहीं, तेज बहाव से बचने के लिए मगरमच्छ खेतों की ओर रुख करते हैं। पानी उतरने के बाद मगरमच्छ खेतों से आबादी क्षेत्रों में घुस जाते हैं। वन विभाग की रेस्क्यू टीम हर साल करीब 90 से ज्यादा मगरमच्छों का रेस्क्यू कर सावनभौदोें डेम में शिफ्ट करती है।   <br /><strong>- एएच जैदी, नेचर प्रमोटर </strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 16 Sep 2023 19:09:51 +0530</pubDate>
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                <title>तलवंडी क्षेत्र में सड़क पर घूमता दिखा मगरमच्छ</title>
                                    <description><![CDATA[मगरमच्छ आवाजाही की परवाह किए बिना आराम से पूरी सड़क क्रॉस करता है और आगे नाले में चला जाता है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/crocodile-seen-roaming-on-the-road-in-talwandi-area/article-52233"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-07/630-400-size-की-कॉपी-(2)5.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। तलवंडी इलाके के मुख्य मार्ग पर मंगलवार देर रात करीब 5 फीट लंबा मगरमच्छ सड़क पार करता नजर आया, जो बाद में साजीदेहड़ा से गुजर रहे नाले में कूदकर चला गया। किसी राहगीर ने वीडियो बनाया जो सोशल मीडिया वायरल हो गया।  पहली बार इस इलाके में मगरमच्छ को देख क्षेत्रवासियों में हड़कम्प मच गया। मगरमच्छ के सड़क पार करने के दौरान इसका वीडियो किसी राहगीर ने बना लिया। लगभग आधे मिनट के वीडियो में मगरमच्छ आराम से सड़क क्रॉस करता नजर आ रहा है। जिसे देखकर राहगीरों ने अपने वाहन रोक दिए। वीडियो में साफ दिख रहा है कि मगरमच्छ आवाजाही की परवाह किए बिना आराम से पूरी सड़क क्रॉस करता है और आगे नाले में चला जाता है। मगरमच्छ को इस तरह रोड पार करते देखना लोगों के लिए दिलचस्प रहा। </p>
<p><strong>हर साल 90 से ज्यादा मगरमच्छों का रेस्क्यू</strong><br />वन विभाग के रेस्क्यू टीम के सदस्य धर्मेंद्र सिंह ने बताया कि वन विभाग हर साल करीब 90 से ज्यादा मगरमच्छों का आबादी क्षेत्रों से रेस्क्यू किया जाता है। वहीं, जनवरी से अब तक दो दर्जन से अधिक मगरमच्छों का रेस्क्यू कर चुके हैं। बारिश का मौसम आते ही मगरमच्छ रिहायशी इलाकों घूमते हुए नजर आ जाते हैं। नदी-नालों के ओवरफ्लो होने से मगरमच्छ इनके किनारे चलते हुए रिहायशी कॉलोनियों में घुस आते हैं।<br /> <br />बारिश के समय नदी-नाले ज्यादा उफान पर रहते हैं। इस वजह से कई बार मगरमच्छ इनसे बाहर निकलकर कॉलोनियों में घुस जाते हैं। ज्यादातर रेस्क्यू छोटे बच्चों का होता है क्योंकि वे तेज पानी का बहाव सहन नहीं कर पाते हैं। दरअसल, मगरमच्छ ज्यादा बहाव के दौरान सुरक्षित जगह ढूंढते हैं और ऐसे में सतहों पर आ जाते हैं।<br /><strong>- जयराम पांडे, डीएफओ कोटा वनमंडल</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 19 Jul 2023 18:08:28 +0530</pubDate>
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