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                <title>ईरान का बड़ा कदम: जहाजों के अनुरोधों पर होगी त्वरित कार्रवाई, 60 दिन तक नहीं वसूला जाएगा शुल्क</title>
                                    <description><![CDATA[ईरान-अमेरिका ऐतिहासिक शांति समझौते के बाद, ईरानी सुरक्षा परिषद ने होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों के लिए 60 दिनों तक मुफ्त आवाजाही की घोषणा की है। सुरक्षित पारगमन सुनिश्चित करने के लिए जहाजों को घोषित मार्ग और समय का पालन करना होगा। यह कदम क्षेत्र में व्यापार और समुद्री सुरक्षा को बढ़ावा देगा।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/big-step-by-iran-immediate-action-will-be-taken-on/article-157442"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-06/होर्मुज-जलडमरूमध्य.png" alt=""></a><br /><p>तेहरान। ईरान के सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद (एसएनएसई) ने घोषणा की है कि उसने होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने के लिए जहाजों के अनुरोधों पर तेजी से कार्रवाई करने का आदेश जारी किया है। यह कदम ईरान और अमेरिका के बीच हाल ही में हस्ताक्षरित एक समझौते के उद्देश्यों को पूरा करने के तहत उठाया गया है। एसएनएसई ने यह घोषणा ईरानी मीडिया की ओर से जारी एक बयान में की है। यह बयान ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेज़ेशकियन और अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा इलेक्ट्रॉनिक रूप से इस समझौते पर हस्ताक्षर किये जाने के कुछ घंटे बाद आया है।</p>
<p>परिषद ने कहा कि इस समझौते के तहत, होर्मुज जलडमरूमध्य को पार करने का अनुरोध करने वाले जहाजों से 60 दिनों तक कोई शुल्क नहीं लिया जाएगा और इसका पूरा खर्च ईरान सरकार उठाएगी। बयान में कहा गया है कि इस जलमार्ग से गुजरने के इच्छुक जहाजों को अपने अनुरोध ‘फारस की खाड़ी जलडमरूमध्य प्राधिकरण’ (पर्शियन गल्फ स्ट्रेट अथॉरिटी) को भेजने होंगे। परिषद ने कहा, “विशेष परिस्थितियों और मार्ग में कुछ सुरक्षा खतरों को देखते हुए तथा सुरक्षित आवागमन सुनिश्चित करने और समुद्री दुर्घटनाओं को रोकने के लिए जहाजों का घोषित मार्ग और घोषित समय पर ही गुजरना आवश्यक है।” इसके साथ ही परिषद ने भरोसा दिलाया कि इस जलमार्ग में जहाजों की आवाजाही धीरे-धीरे बढ़ेगी।</p>
<p>संस्था ने कहा कि इस जलडमरूमध्य से गुजरने के प्रशासनिक प्रबंधों और तकनीकी विवरणों की घोषणा ‘फारस की खाड़ी जलडमरूमध्य प्राधिकरण’ के माध्यम से की जाएगी। ईरान, अमेरिका और पाकिस्तान ने सोमवार तड़के लेबनान सहित सभी मोर्चों पर संघर्ष को समाप्त करने के उद्देश्य से इस समझौते को अंतिम रूप देने की घोषणा की थी। पेज़ेशकियन और ट्रंप ने गुरुवार तड़के इलेक्ट्रॉनिक रूप से इस समझौते पर हस्ताक्षर किये।</p>]]></content:encoded>
                
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                <pubDate>Fri, 19 Jun 2026 13:05:11 +0530</pubDate>
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                <title>ईरान का बड़ा ऐलान: यूरेनियम रहेगा देश में, अमेरिका से समझौते के बीच बधाई बड़ा बयान</title>
                                    <description><![CDATA[ईरान ने स्पष्ट किया है कि वह संवर्धित यूरेनियम को देश से बाहर नहीं भेजेगा, बल्कि देश के भीतर ही इसकी सांद्रता कम (डाउन-ब्लेंडिंग) करेगा। अमेरिका के साथ हुए हालिया समझौते के तहत, वाशिंगटन 30 दिनों के भीतर ईरान से सटे इलाकों से अपने सैनिक हटाने पर सहमत हुआ है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/irans-big-announcement-uranium-will-remain-in-the-country-amidst/article-157369"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-06/024.png" alt=""></a><br /><p>तेहरान। ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने कहा है कि ईरान अपनी इस बात पर कायम है कि देश से संवर्धित यूरेनियम बाहर नहीं ले जाया जाएगा। बघाई ने कहा, "हमने शुरू से ही कहा है कि संवर्धित सामग्री देश से बाहर नहीं ले जाई जाएगी। एक विकल्प ईरान के भीतर ही इसकी सांद्रता कम करना (डाउन-ब्लेंडिंग) है। यह कोई नया विकल्प नहीं है।" उनका यह बयान संघर्ष खत्म करने के लिए अमेरिका के साथ समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर की घोषणा के बाद दिया। उम्मीद है कि इसके बाद ईरान के परमाणु कार्यक्रम और ईरान पर लगे प्रतिबंधों को लेकर बातचीत होगी। </p>
<p>रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका अंतिम समझौते के 30 दिनों के भीतर ईरान से सटे इलाकों से अपने सैनिक हटा लेगा और तब तक अतिरिक्त बल तैनात नहीं करेगा। समझौते के चौथे पैराग्राफ में लिखा है, "अमेरिका अंतिम समझौते पर हस्ताक्षर के 30 दिनों के भीतर ईरान से सटे इलाकों से सैनिक हटाने का भी वादा करता है।" साथ ही, दस्तावेज़ के नौवें पैराग्राफ के अनुसार, समझौते पर हस्ताक्षर के बाद अमेरिका इस क्षेत्र में अतिरिक्त बल नहीं भेजेगा।</p>]]></content:encoded>
                
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                <pubDate>Thu, 18 Jun 2026 17:14:25 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>ईरान की इजरायल को दोटूक, लेबनान में संघर्ष विराम उल्लंघन पर दी कड़ी सैन्य कार्रवाई की चेतावनी</title>
                                    <description><![CDATA[ईरान ने चेतावनी दी है कि यदि इजरायल ने दक्षिणी लेबनान में अपनी 'शरारत' बंद नहीं की, तो उसे कड़े परिणाम भुगतने होंगे। ईरान-अमेरिका शांति समझौते के बीच, तेहरान ने इजरायल पर 84 बार संघर्ष विराम उल्लंघन का आरोप लगाते हुए कब्जे वाले क्षेत्रों से पूरी तरह पीछे हटने की मांग की है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/cant-tolerate-it-anymore-iran-accuses-israel-of-ceasefire-violations/article-157251"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-06/iran-israel.png" alt=""></a><br /><p>तेहरान। ईरान ने चेतावनी दी है कि यदि इजरायल ने दक्षिणी लेबनान में अपनी ‘शरारत’ बंद नहीं की, तो उसे ईरानी सशस्त्र बलों की ‘कड़ी’ प्रतिक्रिया के लिए तैयार रहना होगा। ईरान के मुख्य सैन्य कमान ‘खातम अल-अंबिया सेंट्रल हेडक्वार्टर्स’ ने मंगलवार को एक आधिकारिक बयान में कहा कि जब से अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने युद्ध समाप्ति की घोषणा की है, तब से इजरायली सेना ने दक्षिणी लेबनान में 84 बार संघर्ष विराम का उल्लंघन किया है और वह अब भी ‘पीड़ित लेबनानी लोगों के खिलाफ अपराध और उनकी हत्या’ जारी रखे हुए है।</p>
<p>रिपोर्ट के अनुसार, ईरान, अमेरिका और पाकिस्तान ने सोमवार तड़के लेबनान सहित पश्चिम एशिया क्षेत्र में सभी मोर्चों पर युद्ध समाप्त करने के लिए एक समझौता ज्ञापन को अंतिम रूप देने की घोषणा की थी। ईरान और अमेरिका शुक्रवार को स्विट्जरलैंड में इस समझौता ज्ञापन पर आधिकारिक रूप से हस्ताक्षर करने वाले हैं। मंगलवार को तेहरान में विदेशी राजनयिकों के साथ एक बैठक में ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने लेबनान में युद्ध की समाप्ति को ईरान-अमेरिका शांति समझौते का एक 'अटूट' हिस्सा बताया। उन्होंने कहा कि तेहरान के दृष्टिकोण से, इस समझौते के दो पक्ष हैं, एक तरफ अमेरिका और इजरायल हैं, तो दूसरी तरफ ईरान और हिजबुल्लाह है।</p>
<p>अराघची ने कहा, “युद्ध की समाप्ति का मतलब इजरायली कब्जे का खत्म होना भी है। जब तक इजरायली सेना इस युद्ध में कब्जाये गये लेबनानी क्षेत्रों से पीछे नहीं हटती, तब तक युद्ध की समाप्ति पूरी नहीं मानी जाएगी।” अराघची ने यह टिप्पणी इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के उस बयान के बाद की है, जिसमें नेतन्याहू ने सोमवार को एक संवाददाता सम्मेलन में कहा था कि इजरायली सेना लेबनान, सीरिया और गाजा पट्टी में अपने नियंत्रण वाले ‘सुरक्षा क्षेत्रों’ में तब तक बनी रहेगी, जब तक आवश्यक होगा।</p>]]></content:encoded>
                
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                <pubDate>Wed, 17 Jun 2026 18:32:12 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>ईरानी राष्ट्रपति का दावा, बोले- अमेरिका के साथ समझौते के बावजूद ईरान किसी भी स्थिति के लिए तैयार, अंतिम समझौता बाकी </title>
                                    <description><![CDATA[ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेज़ेश्कियान ने अमेरिका के साथ हुए शांति समझौते को युद्ध रोकने की दिशा में बड़ा कदम बताया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि अंतिम समझौता होना अभी बाकी है और ईरान हर स्थिति के लिए तैयार है। इस ऐतिहासिक समझौते पर 19 जून को स्विट्जरलैंड में औपचारिक हस्ताक्षर होंगे।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/iranian-president-claims-despite-agreement-with-america-iran-is/article-157113"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-06/111200-x-600-px)-(2)18.png" alt=""></a><br /><p>तेहरान। ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेज़ेश्कियान ने कहा कि ईरान-अमेरिका समझौता युद्ध खत्म करने की दिशा में एक अहम कदम है लेकिन ईरान किसी भी स्थिति के लिए तैयार है। पेज़ेशकियन ने एक्स पर कहा, "जिस बात पर सहमति बनी है वह युद्ध रोकने और बातचीत शुरू करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है लेकिन अभी अंतिम समझौता होना बाकी है। ईरान का इस्लामिक गणराज्य सभी विकल्पों के लिए तैयार है।"</p>
<p>उन्होंने कहा कि ईरान की सरकार अमेरिका के साथ अंतिम समझौते के बिना भी या उसके साथ लोगों की सेवा करेगी। पेज़ेशकियन ने बताया कि अमेरिका के साथ समझौता ज्ञापन तैयार करने में ईरान के सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई ने अहम भूमिका निभाई। ईरानी राष्ट्रपति ने कहा, "ईरान के राष्ट्रीय हितों की रक्षा करने वाली धाराओं को शामिल करने में सम्मानित सर्वोच्च नेता के मार्गदर्शन की सबसे बड़ी भूमिका रही है और हम इसके लिए उनके आभारी हैं।"</p>
<p>15 जून को, ईरान और अमेरिका ने उस ज्ञापन के पूरा होने की पुष्टि की, जिस पर 19 जून को स्विट्जरलैंड में हस्ताक्षर होने हैं। ईरानी पक्ष ने बताया कि इस ज्ञापन में लेबनान समेत सभी मोर्चों पर सैन्य कार्रवाई खत्म करने की बात कही गई है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोमवार को पुष्टि किया कि ईरान के साथ ज्ञापन पर वास्तव में हस्ताक्षर हो चुके हैं। ईरान ने कहा कि ज्ञापन के बाद, दोनों पक्ष एक अंतिम समझौते पर बातचीत शुरू करेंगे, जिससे ईरान के परमाणु मुद्दे और तेहरान पर अमेरिकी प्रतिबंधों का समाधान हो सकेगा।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
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                <pubDate>Tue, 16 Jun 2026 16:21:07 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>ऐतिहासिक अमेरिका-ईरान समझौता : सुरक्षा परिषद देगी अंतिम मंजूरी, $24 अरब की ईरानी संपत्ति से हटेगी रोक</title>
                                    <description><![CDATA[संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव से अमेरिका-ईरान समझौते को अंतिम मंजूरी दी जाएगी। शर्तों के तहत अमेरिका ईरान पर लगे तेल प्रतिबंध हटाएगा और उसकी $24 अरब की संपत्ति मुक्त करेगा। बदले में ईरान परमाणु हथियार न बनाने और 30 दिनों के भीतर होर्मुज जलडमरूमध्य खोलने पर सहमत हुआ है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/the-final-agreement-between-iran-and-america-will-be-approved/article-156987"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/trump2.png" alt=""></a><br /><p>तेहरान। ईरान और अमेरिका के बीच अंतिम समझौते को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के एक प्रस्ताव से मंज़ूरी दी जाएगी। ईरान और अमेरिका के बीच हुए समझौते के मसौदा का हवाला देते हुए रिपोर्ट में कहा, “अंतिम समझौते को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के एक प्रस्ताव से मंज़ूरी दी जाएगी।” एजेंसी ने कहा है कि अमेरिका ने ईरानी तेल और पेट्रोलियम उत्पादों के निर्यात पर लगे प्रतिबंधों को हटाने, ईरान के खिलाफ़ नये प्रतिबंध न लगाने और पश्चिम एशिया में अपनी सैन्य ताकत न बढ़ाने का वादा किया है। समाचार एजेंसी ने मसौदा ज्ञापन का हवाला देते हुए कहा, “तेल, पेट्रोकेमिकल उत्पादों और पेट्रोकेमिकल डेरिवेटिव्स की बिक्री पर लगे प्रतिबंध हटाए जाएंगे। </p>
<p>अमेरिका पश्चिम एशिया में अपनी सेना न बढ़ाने और ईरान के खिलाफ नये प्रतिबंध न लगाने का वादा किया है।” इसके अलावा मसौदा ज्ञापन के अनुसार, अमेरिका ने ईरान के आंतरिक मामलों में दखल न देने और इस्लामिक गणराज्य की संप्रभुता का सम्मान करने का वादा किया है। दोनों पक्षों के बीच ज्ञापन पर हस्ताक्षर होने के 30 दिनों के भीतर ही होर्मुज जलडमरूमध्य को खोल दिया जाएगा। रिपोर्ट के अनुसार, ईरान ने परमाणु हथियारों के प्रसार को रोकने की संधि (एनपीटी) के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहरायी है और परमाणु हथियार न बनाने का वादा किया है। एजेंसी ने मसौदा ज्ञापन का हवाला देते हुए कहा कि दस्तावेज़ में यह उल्लेख है।</p>
<p>हालांकि, इसमें यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि किन विशिष्ट प्रतिरोधी बलों का उल्लेख किया गया है। दस्तावेज़ में यह भी कहा गया है कि ईरान और अमेरिका के बीच अंतिम वार्ता तब तक शुरू नहीं होगी, जब तक ईरान की विदेशी परिसंपत्तियों का आधा हिस्सा मुक्त नहीं कर दिया जाता, ईरानी तेल पर लगाए गए प्रतिबंध नहीं हटा लिए जाते और अमेरिकी नौसैनिक नाकाबंदी समाप्त नहीं कर दी जाती। मसौदे के अनुसार, अमेरिका ने ईरान की 24 अरब डॉलर की विदेशी परिसंपत्तियों पर लगी रोक हटाने का वादा किया है। इनमें से आधी राशि दोनों देशों के बीच समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर होने से पहले ही ईरान को वापस दी जानी होगी। इससे पहले, ईरान के उप विदेश मंत्री काजेम गरीबाबादी ने ईरान और अमेरिका के बीच समझौता ज्ञापन पर काम पूरा होने की पुष्टि की थी। इस पर हस्ताक्षर 19 जून को स्विट्जरलैंड में होंगे।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
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                <pubDate>Mon, 15 Jun 2026 11:15:43 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>ईरान का पलटवार : बहरीन और जॉर्डन में अमेरिकी ठिकानों पर मिसाइल-ड्रोन हमला, अराघची ने कहा- सुरक्षित रहना है तो क्षेत्र छोड़ दें</title>
                                    <description><![CDATA[अपाचे हेलीकॉप्टर गिराए जाने के बाद अमेरिका-ईरान तनाव चरम पर है। राष्ट्रपति ट्रंप के आदेश पर अमेरिकी हमलों के जवाब में ईरान ने बहरीन और जॉर्डन स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर मिसाइलें दागीं। बहरीन, जॉर्डन और कुवैत की वायु रक्षा प्रणालियों ने कई खतरों को हवा में ही नष्ट किया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/irans-counterattack-missile-drone-attack-on-american-bases-in-bahrain-and/article-156574"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-05/delhi-hospital-bomb-threat.png" alt=""></a><br /><p>तेहरान। ईरान ने बुधवार को पश्चिम एशिया में अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर जवाबी मिसाइल और ड्रोन हमला किया। इन ठिकानों में बहरीन में अमेरिकी फिफ्थ फ्लीट का मुख्यालय और जॉर्डन में अल-अज़राक सैन्य अड्डा शामिल हैं। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने अमेरिका को यह चेतावनी भी दी कि अगर आप सुरक्षित रहना चाहते हैं तो हमारे क्षेत्र से चले जाएं। एएच-64 अपाचे हेलीकॉप्टर को गिराए जाने के जवाब में अमेरिकी सेना ने ईरान में हमले किया जिसके बाद ईरान ने ये हमले किए। ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स ने दावा किया कि उसने बहरीन में अमेरिकी फिफ्थ फ्लीट के मुख्यालय और जॉर्डन में अल-अज़राक सैन्य अड्डे को निशाना बनाया। बहरीन ने कहा कि उसने ईरान की कई मिसाइलों और ड्रोन को रोका जबकि जॉर्डन ने पांच मिसाइलों को रोकने की जानकारी दी। कुवैत ने भी कहा कि उसकी वायु रक्षा प्रणाली दुश्मन के हवाई लक्ष्यों का मुकाबला कर रही थी।</p>
<p>अराघची ने अमेरिका को चेतावनी देते हुए कहा कि अगर आप सुरक्षित रहना चाहते हैं तो हमारे इलाके से चले जाएं। उन्होंने कहा कि ईरान हमलों या धमकियों का जवाब ज़रूर देगा। ईरान की सरकारी समाचार एजेंसी तस्नीम ने बुधवार को एक अधिकारी के हवाले से कहा कि दो जलाशयों पर हमले के बाद कम से कम 20,000 ईरानियों के लिए पीने का पानी मिलना बंद हो गया है। ये जलाशय कोहेस्तक शहर और आस-पास के 10 गांवों को पीने का पानी आपूर्ति करते थे। तस्नीम ने बताया कि अभी टैंकर ट्रकों से पानी पहुंचाने और अस्थायी पंपिंग प्रणासी लगाने जैसे आपातकालीन उपाय किए जा रहे हैं। इससे अवसंरचना को भी नुकसान पहुंचा है।</p>
<p>अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने एक्स पर एक पोस्ट में कहा, "कल अमेरिकी सेना के अपाचे हेलीकॉप्टर को गिराए जाने के जवाब में, कमांडर-इन-चीफ़ के निर्देश पर अमेरिकी सेना ने मंगलवार शाम पांच बजे ईरान के ख़िलाफ़ आत्मरक्षा में हमला शुरू किया।" अमेरिकी सेना ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के आदेश पर कार्रवाई की। श्री ट्रंप ने कहा था कि होर्मुज जलडमरूमध्य के पास अमेरिकी सैन्य हेलीकॉप्टर को मार गिराने के लिए ईरान ज़िम्मेदार है और उन्होंने कड़ा जवाब देने का वादा किया था। अप्रैल में एफ-15 फाइटर जेट के नुकसान के बाद, अपाचे हेलीकॉप्टर दूसरा ऐसा अमेरिकी विमान है जिसमें चालक दल सवार था और जिसे मौजूदा संघर्ष के दौरान मार गिराए जाने की पुष्टि हुई है।</p>
<p>सेंटकॉम ने कहा कि क्षेत्रीय जलक्षेत्र में गश्त के दौरान ओमान के तट के पास अपाचे हेलीकॉप्टर के दुर्घटनाग्रस्त होने के बाद, दोनों सैनिकों को लगभग दो घंटे के भीतर सुरक्षित बचा लिया गया और उनकी हालत स्थिर थी। अमेरिका ने ईरान के दक्षिणी तट पर मौजूद वायु रक्षा प्रणाली, ग्राउंड कंट्रोल स्टेशन और सर्विलांस रडार केंद्र को निशाना बनाकर जवाबी कार्रवाई की। सिरिक और केशम द्वीप समेत कई शहरों में धमाकों और वायु रक्षा सायरन की खबरें आईं। ईरान के सरकारी टेलीविज़न ने फारस की खाड़ी के तट पर, जिसमें बंदर अब्बास, केशम और सिरिक शामिल हैं, धमाकों और वायु रक्षा गतिविधियों की जानकारी दी।</p>
<p>इस बीच ईरान के दक्षिणी होर्मोज़गन प्रांत में कई स्थानों पर धमाकों की खबर मिली जिसमें रणनीतिक रूप से अहम होर्मुज़ जलडमरूमध्य के आस-पास के इलाके भी शामिल हैं। ईरान के सरकारी मीडिया ने बताया कि अमेरिकी हमलों में पानी के जलाशयों को नुकसान पहुंचा जिससे स्थानीय जलापूर्ति बाधित हो गई और धमाकों की खबरों के बाद दक्षिणी ईरान के कुछ हिस्सों में वायु रक्षा प्रणाली को सक्रिय कर दिया गया। एक अमेरिकी अधिकारी ने सीएनएन को बताया कि ट्रंप प्रशासन का मानना है कि इन हमलों से संघर्ष खत्म करने के लिए चल रही कूटनीतिक कोशिशों के पटरी से उतरने की संभावना कम है। लेकिन एक दूसरे पर किये गये हमलों ने इलाके में तनाव और बढ़ा दिया है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 10 Jun 2026 18:35:57 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>खाड़ी में फिर भड़का तनाव: अमेरिकी कार्रवाई के बाद आईआरजीसी का पलटवार, कई ठिकानों को बनाया निशाना</title>
                                    <description><![CDATA[अमेरिकी कार्रवाई के जवाब में ईरानी सेना (IRGC) ने बहरीन में तैनात अमेरिकी नौसेना के पांचवें बेड़े पर ड्रोन हमले किए हैं। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने अमेरिका को क्षेत्र छोड़ने की चेतावनी देते हुए कहा कि हर हमले का मुंहतोड़ जवाब दिया जाएगा। क्षेत्र में तनाव चरम पर है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/tension-flares-up-again-in-the-gulf-after-us-action/article-156524"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-06/us.png" alt=""></a><br /><p>तेहरान। अमेरिकी हमलों के जवाब में ईरानी सेना ने क्षेत्र स्थित कई अमेरिकी ठिकानों पर हमले किये हैं। ईरान के खातम अल-अंबिया केंद्रीय मुख्यालय के हवाले से बुधवार को रिपोर्ट की है कि इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर (आईआरजीसी) ने अमेरिकी हमलों के जवाब में बहरीन में तैनात अमेरिकी नौसेना के पांचवें बेड़े के बलों पर ड्रोन से हमला किया है। रिपोर्टों के अनुसार, मुख्यालय ने यह भी दावा किया है कि अगर अमेरिका की आक्रामकता जारी रहती है,तो क्षेत्र में चुनिंदा ठिकानों के खिलाफ और भी बड़े पैमाने पर हमले किये जायेंगे। मंगलवार रात अमेरिकी केंद्रीय कमान ने कहा था कि सेना ने अमेरिका के अपाचे सैन्य हेलीकॉप्टर को मार गिराये जाने के जवाब में ईरान के खिलाफ हमले किये थे। इसके बाद प्रेस टीवी ने रिपोर्ट दी कि बंदर अब्बास, सीरीक और केश्म द्वीप में विस्फोटों की आवाजें सुनी गयीं।</p>
<p>रिपोर्टों के मुताबिक, आईआरजीसी ने यह भी बताया कि अमेरिकी हमलों में सीरीक में एक दूरसंचार टावर क्षतिग्रस्त हो गया है और दो जलाशय नष्ट हो गये हैं। अमेरिकी हमलों के बाद ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने बुधवार को कहा कि ईरानी सेना किसी भी हमले या धमकी को बिना जवाब के नहीं छोड़ेगी और उन्होंने अमेरिका से इस क्षेत्र को छोड़ने का आह्वान किया।</p>
<p>अराघची ने सोशल मीडिया मंच 'एक्स' पर कहा, “ युद्ध के मैदान में अपनी हार के बावजूद अमेरिका ने हमारे दृढ़ संकल्प की परीक्षा लेने का विकल्प चुना। हमारी शक्तिशाली सशस्त्र सेनाएं किसी भी हमले या धमकी को बिना जवाब के नहीं छोड़ेंगी। यदि आप सुरक्षित रहना चाहते हैं तो हमारे क्षेत्र को छोड़ दें। फारस की खाड़ी के इतिहास में घुसपैठ करने वाले बाहरी लोगों के भयानक अंजाम के कई अध्याय दर्ज हैं। ”</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 10 Jun 2026 16:44:28 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>ईरान-अमेरिका तनाव फिर भड़का: अमेरिकी हमलों पर तेहरान का बड़ा आरोप, युद्धविराम उल्लंघन बताकर संयुक्त राष्ट्र से कार्रवाई की मांग</title>
                                    <description><![CDATA[अमेरिकी सेना (सेंटकॉम) द्वारा ईरान के गोरुक और क़ेश्म द्वीप पर तटीय रडार ठिकानों को निशाना बनाने के बाद क्षेत्रीय तनाव बढ़ गया है। ईरान ने इसे युद्धविराम का उल्लंघन बताया है। उप विदेश मंत्री काज़ेम ग़रीबाबादी ने IAEA पर भूमिका के राजनीतिकरण का आरोप लगाते हुए तकनीकी रिपोर्टों को दबाव का साधन न बनाने की चेतावनी दी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/iran-america-tension-flares-up-again-tehrans-big-allegation-on-american/article-156259"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/america-and-iran.png" alt=""></a><br /><p>तेहरान। ईरान ने शनिवार को अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (आईएईए) पर अपनी भूमिका का राजनीतिकरण करने का आरोप लगाते हुए उसे तेहरान पर दबाव बनाने से बचने की सलाह दी। ईरान का यह बयान उस समय आया है जब अमेरिकी बलों ने ईरान के गोरुक शहर और क़ेश्म द्वीप स्थित तटीय निगरानी रडार ठिकानों पर हमला किया, जिससे मौजूदा युद्धविराम के बावजूद क्षेत्रीय तनाव और बढ़ गया है। ईरान के उप विदेश मंत्री काज़ेम ग़रीबाबादी ने कहा कि यदि आईएईए परमाणु विवाद के समाधान में कूटनीतिक भूमिका निभाना चाहता है तो उसे अपनी तकनीकी रिपोर्टों को राजनीतिक दबाव का उपकरण नहीं बनने देना चाहिए। यह टिप्पणी उस अमेरिकी सैन्य कार्रवाई के बाद आई, जिसमें ईरान के दक्षिणी तट पर स्थित रडार प्रतिष्ठानों को निशाना बनाया गया। अमेरिका की केंद्रीय कमान (सेंटकॉम) के अनुसार उसकी सेनाओं ने होरमुज जलडमरूमध्य की ओर बढ़ रहे ईरान के चार एकतरफा हमलावर ड्रोन मार गिराए और इसके बाद गोरुक तथा क़ेश्म द्वीप के तटीय निगरानी रडार स्थलों पर हमले किए।</p>
<p>सेंटकॉम ने दावा किया कि ये ड्रोन क्षेत्रीय समुद्री यातायात के लिए तत्काल खतरा थे और रडार ठिकानों पर हमले आगे होने वाले हमलों को रोकने के लिए किये गये। ग़रीबाबादी ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर लिखा, "यदि एजेंसी कूटनीतिक समाधान का हिस्सा बनना चाहती है, तो उसे तकनीकी रिपोर्टों को राजनीतिक दबाव का साधन बनाने से बचना होगा।" उन्होंने आईएईए के महानिदेशक राफेल ग्रोसी की भी आलोचना करते हुए कहा कि उन्होंने हाल में ईरान के परमाणु प्रतिष्ठानों पर हुए अमेरिकी और इजरायली हमलों की निंदा नहीं की। उनके अनुसार एजेंसी एक ओर हमलों के प्रभावों पर रिपोर्ट जारी करे और दूसरी ओर हमलावरों पर चुप्पी साधे रखे, यह स्वीकार्य नहीं है।</p>
<p>उन्होंने कहा, "एजेंसी हमलों के परिणामों की रिपोर्ट दे, ईरान से तकनीकी और राजनीतिक कीमत चुकाने की अपेक्षा करे और हमलावर के बारे में मौन रहे, यह उचित नहीं है।" ईरान ने तड़के हुए अमेरिकी ड्रोन हमलों को अप्रैल में हुए युद्धविराम का "स्पष्ट उल्लंघन" करार दिया और संयुक्त राष्ट्र से अमेरिकी कार्रवाइयों के खिलाफ कदम उठाने की मांग की। साथ ही उसने आत्मरक्षा के अपने वैध अधिकार को दोहराया। ईरान के विदेश मंत्रालय ने एक बयान में कहा कि सिरिक क्षेत्र और क़ेश्म द्वीप स्थित रडार एवं तटीय निगरानी सुविधाओं पर हमला युद्धविराम का खुला उल्लंघन और देश की संप्रभुता तथा क्षेत्रीय अखंडता के खिलाफ सैन्य आक्रमण है। मंत्रालय ने कहा कि जिन प्रतिष्ठानों को निशाना बनाया गया वे देश की सीमा सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय नौवहन मार्गों की सुरक्षा सुनिश्चित करने का काम करते हैं।</p>
<p>बयान में कहा गया, "यह कार्रवाई इस्लामी गणराज्य ईरान के खिलाफ अमेरिकी शासन के शत्रुतापूर्ण और उकसावेपूर्ण व्यवहार की निरंतरता है तथा यह अंतरराष्ट्रीय कानून और संयुक्त राष्ट्र चार्टर के मूल सिद्धांतों के प्रति अमेरिकी प्रशासन की पूर्ण अवहेलना को उजागर करती है।" ईरान ने दावा किया कि संयुक्त राष्ट्र चार्टर के अनुच्छेद 51 के तहत आत्मरक्षा के अधिकार का प्रयोग करते हुए उसकी सशस्त्र सेनाओं ने अमेरिकी कार्रवाई का "अनुपातिक और प्रभावी" जवाब दिया और हमलावरों को अपने उद्देश्यों में सफल नहीं होने दिया।</p>
<p>विदेश मंत्रालय ने कहा कि अमेरिका द्वारा बार-बार युद्धविराम का उल्लंघन यह साबित करता है कि वह क्षेत्र में तनाव कम करने या स्थिरता बहाल करने का इच्छुक नहीं है। बयान में कहा गया, "संयुक्त राज्य अमेरिका द्वारा बार-बार युद्धविराम का उल्लंघन एक बार फिर साबित करता है कि वह न तो तनाव कम करना चाहता है और न ही स्थिरता की दिशा में लौटना चाहता है, बल्कि अपनी उकसावेपूर्ण कार्रवाइयों से क्षेत्रीय सुरक्षा को खतरे में डाल रहा है।"</p>
<p>ईरान ने कहा कि वह अपनी संप्रभुता, सुरक्षा और राष्ट्रीय हितों की रक्षा के लिए सभी उपलब्ध संसाधनों और क्षमताओं का उपयोग करेगा। विदेश मंत्रालय ने क्षेत्रीय देशों से भी अपील की कि वे अच्छे पड़ोसी संबंधों के सिद्धांत का पालन करें और अपनी भूमि या सुविधाओं का उपयोग ईरान के खिलाफ किसी भी आक्रामक कार्रवाई की योजना बनाने या उसे अंजाम देने के लिए न होने दें। बयान में कहा गया, "विदेश मंत्रालय क्षेत्रीय देशों से आग्रह करता है कि वे अंतरराष्ट्रीय कानून के उस मूल सिद्धांत का सम्मान करें जिसके तहत किसी भी देश को अपनी भूमि और सुविधाओं का उपयोग किसी अन्य देश के खिलाफ आक्रामक गतिविधियों के लिए नहीं करने देना चाहिये।"</p>
<p>ईरान ने संयुक्त राष्ट्र महासचिव, सुरक्षा परिषद और अन्य अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं से भी अपील की कि वे अमेरिकी युद्धविराम उल्लंघनों पर तत्काल और प्रभावी प्रतिक्रिया दें तथा संयुक्त राष्ट्र चार्टर के उल्लंघन और क्षेत्रीय एवं वैश्विक शांति के लिए खतरा पैदा करने वाली गतिविधियों को सामान्य बनने से रोकें।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 07 Jun 2026 15:25:18 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>होर्मुज में बढ़ा युद्ध का खतरा: होर्मुज में अमेरिका और ईरान आमने-सामने, मिसाइल और ड्रोन हमलों से टूटा युद्धविराम</title>
                                    <description><![CDATA[होर्मुज जलडमरूमध्य में अमेरिका और ईरान के बीच भारी गोलाबारी शुरू हो गई है। ईरान ने कुवैत और बहरीन में अमेरिकी ठिकानों पर मिसाइलें दागीं, जिन्हें अमेरिकी सेना (CENTCOM) ने इंटरसेप्ट कर नाकाम कर दिया। यह टकराव अमेरिकी विमान द्वारा ईरान की ओर बढ़ रहे एक टैंकर पर हेलफायर मिसाइल दागने के बाद बढ़ा।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/danger-of-war-increases-in-hormuz-america-and-iran-face/article-155847"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/iran2.png" alt=""></a><br /><p>तेहरान। हॉर्मुज जलडमरूमध्य में अमेरिका और ईरान के बीच एक बार फिर सैन्य टकराव शुरू हो गया है। ईरानी की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड्स कॉर्प्स (आईआरजीसी) ने दावा किया कि केश्म द्वीप पर हुए अमेरिकी हमले के जवाब में उसने कुवैत और बहरीन में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया। ईरान के मुताबिक, अमेरिकी नौसेना के पांचवें बेड़े के मुख्यालय, सैन्य एयरबेस और हेलीकॉप्टरों पर मिसाइलों और ड्रोन से हमले किये गये। उधर अमेरिका ने कहा है कि उसने कुवैत और बहरीन पर हुए ईरानी मिसाइल एवं ड्रोन हमलों को नाकाम कर दिया है।</p>
<p>अमेरिकी सेना की सेंट्रल कमांड (सेंटकॉम )ने बताया कि कुवैत पर दागी गई दो ईरानी मिसाइलें रास्ते में ही गिर गईं या टूट गईं, जबकि बहरीन को निशाना बनाने वाली तीन मिसाइलों को अमेरिका और बहरीन के रक्षा बलों ने इंटरसेप्ट (रोक) कर लिया। इसके अतिरिक्त, कुवैत में अमेरिकी बलों को निशाना बनाने वाले छोडे़ गये असंख्य ड्रोन को बिना किसी नुकसान के निष्क्रिय कर दिया गया। इससे पहले अमेरिकी बलों ने ईरान के केश्म द्वीप पर स्थित सैन्य ठिकानों और एक ग्राउंड कंट्रोल स्टेशन पर भी हवाई हमले किये। सेंटकॉम ने यह भी जानकारी दी कि उसने क्षेत्रीय जलक्षेत्र से वैध रूप से गुजर रहे नागरिक नाविकों की ओर ईरान द्वारा लॉन्च किए गए तीन 'वन-वे अटैक ड्रोन' को हवा में ही मार गिराया।</p>
<p>दोनों तरफ से हुई इस भारी गोलाबारी ने ईरान-अमेरिका के बीच लागू युद्धविराम समझौते पर संकट गहरा गया है। सेंटकॉम के अनुसार, यह ताजा विवाद तब शुरू हुआ जब मंगलवार को अमेरिकी बलों ने अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में होर्मुज जलडमरूमध्य की अमेरिकी नाकेबंदी को तोड़ने का प्रयास कर रहे एक खाली टैंकर को रोकने की कार्रवाई की। बोत्सवाना के ध्वज वाले इस 'एम/टी लेक्सी' नामक टैंकर को चालक दल ने 24 घंटे की अवधि में बार-बार दी चेतावनियों को नजरअंदाज करने के बाद निशाना बनाया। जब यह टैंकर कुवैत के पास जलडमरूमध्य के उत्तर में स्थित ईरान के खार्ग द्वीप की ओर बढ़ रहा था, तब अमेरिकी विमान ने इसके इंजन को निष्क्रिय करने के लिए एक हेलफायर मिसाइल दागी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 03 Jun 2026 16:21:58 +0530</pubDate>
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                <title>बेरूत पर हमले की इजरायली धमकी के बीच ईरान की चेतावनी, उत्तरी कब्जे वाले इलाकों को खाली करने के ​निर्देश</title>
                                    <description><![CDATA[ईरान के 'खातम अल-अंबिया हेडक्वार्टर' ने इजरायल के उत्तरी निवासियों को इलाका छोड़ने की चेतावनी दी है। प्रवक्ता अलीरेजा अब्दुल्लाही ने कहा कि यदि प्रधानमंत्री नेतन्याहू ने बेरूत और दहियाह पर बमबारी की, तो ईरान जवाबी कार्रवाई करेगा। इजरायल ने हिजबुल्लाह द्वारा युद्धविराम उल्लंघन का आरोप लगाया है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/irans-warning-amid-israeli-threat-of-attack-on-beirut-instructions/article-155728"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/iran-attack.png" alt=""></a><br /><p>तेहरान। ईरान ने इजरायल के कब्जे वाले उत्तरी इलाकों के लोगों को चेतावनी दी है कि अगर इजरायल ने लेबनान की राजधानी बेरूत के दक्षिणी उपनगरों पर हमला किया तो वे तुरंत यहां से निकल जाएं। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, 'खातम अल-अंबिया सेंट्रल हेडक्वार्टर' की ओर से सोमवार को जारी एक बयान में कहा गया है कि इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने बेरूत के दक्षिणी उपनगर दहियाह के साथ-साथ खुद लेबनानी राजधानी पर भी बमबारी करने की धमकी दी है।</p>
<p>अंबिया सेंट्रल हेडक्वार्टर' के एक वरिष्ठ सैन्य अधिकारी और प्रवक्ता अलीरेजा अब्दुल्लाही ने कहा, "इजरायली शासन की ओर से युद्धविराम के बार-बार किये जा रहे उल्लंघनों के मद्देनजर हम कब्जे वाले क्षेत्रों के उत्तरी हिस्सों और सैन्य बस्तियों के निवासियों को चेतावनी देते हैं कि अगर वे नुकसान से बचना चाहते हैं, तो उन्हें यह इलाका छोड़ देना चाहिए। यह चेतावनी इजरायली धमकी को देखते हुए दी गयी है।" इजरायली प्रधानमंत्री नेतन्याहू ने सोमवार को दहियाह और बेरूत पर सैन्य हमलों के आदेश दिया और कहा कि यह कार्रवाई लेबनान में हिजबुल्लाह के युद्धविराम के 'बार-बार किये गये उल्लंघनों' का जवाब है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 02 Jun 2026 16:32:49 +0530</pubDate>
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                <title>अराघची की ट्रंप को चेतावनी, कहा- लेबनान समेत किसी भी मोर्चे पर उल्लंघन माना जाएगा पूरे युद्धविराम का खात्मा</title>
                                    <description><![CDATA[ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने साफ किया है कि लेबनान समेत किसी भी मोर्चे पर युद्धविराम का उल्लंघन पूरे समझौते का उल्लंघन होगा। इजरायल द्वारा दक्षिणी लेबनान में किए गए हालिया हमलों पर चिंता जताते हुए उन्होंने कहा कि किसी भी विफलता की पूरी जिम्मेदारी अमेरिका और इजरायल की होगी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/araghchis-warning-to-trump-violation-of-ceasefire-on-even-one/article-155725"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-06/abbas-araghchi.png" alt=""></a><br /><p>तेहरान। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा है कि ईरान और अमेरिका के बीच हुए युद्धविराम का किसी भी एक मोर्चे पर उल्लंघन पूरे युद्धविराम समझौते का उल्लंघन माना जाएगा, जिसमें लेबनान भी शामिल है। अराघची ने सोमवार को सोशल मीडिया मंच एक्स पर एक पोस्ट में कहा कि यह युद्धविराम "बिना किसी अस्पष्टता के सभी मोर्चों पर लागू एक व्यापक युद्धविराम है, जिसमें लेबनान भी शामिल है।" उन्होंने लिखा, "इस युद्धविराम का किसी एक मोर्चे पर किया गया कोई भी उल्लंघन सभी मोर्चों पर युद्धविराम के उल्लंघन के रूप में माना जाएगा।"</p>
<p>विदेश मंत्री ने कहा कि युद्धविराम के किसी भी उल्लंघन के परिणामों की जिम्मेदारी अमेरिका और इजरायल पर होगी। उनकी यह टिप्पणी ऐसे समय आयी है जब लेबनान में युद्धविराम लागू होने के बावजूद इजरायल की ओर से हमले जारी हैं। ईरानी समाचार एजेंसी इरना की रिपोर्ट के अनुसार, इजरायल रक्षा बलों ने दक्षिणी लेबनान के कस्बों और गांवों पर हमले जारी रखे हैं, जिनमें घरों और नागरिकों को निशाना बनाया गया। इसे युद्धविराम का बार-बार उल्लंघन बताया गया है। रविवार रात से सोमवार तक दक्षिणी लेबनान में 36 से अधिक स्थानों पर हमले किये गये, जिनमें 12 लोगों की मौत हो गई और 35 अन्य लोग घायल हुये हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 02 Jun 2026 14:13:40 +0530</pubDate>
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                <title>राष्ट्रपति पेजेशकियान ने दिया इस्तीफा: ईरान ने किया ख़बरों का खंडन, राष्ट्रपति कार्यालय ने कहा- ईरानी राष्ट्र एकजुटता और प्रतिरोध के मार्ग से नहीं हटेगा पीछे</title>
                                    <description><![CDATA[ईरान ने राष्ट्रपति मसूद पेज़ेशकियान के इस्तीफे की खबरों को सिरे से खारिज कर दिया है। 'ईरान इंटरनेशनल' ने दावा किया था कि राष्ट्रपति ने आईआरजीसी (IRGC) के बढ़ते हस्तक्षेप के विरोध में इस्तीफा दे दिया है। ईरानी अधिकारियों ने इसे झूठा बताते हुए राष्ट्रपति की प्रतिबद्धता दोहराई है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/president-pezeshkian-resigned-iran-denied-the-news-presidents-office-said/article-155584"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-06/iranian-president-masoud-pezeshkian.webp" alt=""></a><br /><p>तेहरान। ईरान ने राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान के इस्तीफा देने की खबरों का खंडन किया है। एक वरिष्ठ ईरानी अधिकारी ने रविवार को मीडिया की उन ख़बरों का खंडन किया, जिनमें दावा किया गया था कि मसूद पेज़ेशकियान ने अपने पद से इस्तीफ़ा दे दिया है। राष्ट्रपति कार्यालय में संचार मामलों के उप-प्रमुख सैयद मेहदी तबातबाई ने 'एक्स' पर लिखा, "राष्ट्रपति पेज़ेशकियान लोगों की सेवा करने से पीछे नहीं हटेंगे, ठीक वैसे ही जैसे ईरानी राष्ट्र एकजुटता और प्रतिरोध के मार्ग से पीछे नहीं हटेगा।"</p>
<p>यह टिप्पणी तब आई जब लंदन स्थित मीडिया संस्थान 'ईरान इंटरनेशनल' ने दिन में पहले यह रिपोर्ट दी थी कि पेज़ेशकियान ने सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई के कार्यालय में अपना इस्तीफ़ा सौंप दिया है। रिपोर्ट में एक अधिकारी का हवाला देते हुए आरोप लगाया गया कि उस पत्र में 'इस्लामिक रिवोल्यूशन गार्ड कॉर्प्स' (आईआरजीसी) की आलोचना की गई थी। रिपोर्ट के अनुसार आईआरजीसी ने प्रभावी रूप से सरकार के बड़े हिस्सों पर नियंत्रण कर लिया है और राष्ट्रपति तथा अन्य वरिष्ठ अधिकारियों को महत्वपूर्ण निर्णय लेने की प्रक्रियाओं से दरकिनार कर दिया है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 01 Jun 2026 11:32:00 +0530</pubDate>
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