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                <title>nato - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <title>एन.पी.टी. के आसपास की स्थिति चिंताजनक, पश्चिमी देश इस संधि का कर रहा राजनीतिकरण : रूसी दूत</title>
                                    <description><![CDATA[जिनेवा में रूसी राजदूत गेनेडी गैतिलोव ने परमाणु अप्रसार संधि (NPT) के राजनीतिकरण पर चिंता जताई है। उन्होंने फ्रांस द्वारा "रूसी खतरे" के बहाने परमाणु हथियारों के संचय को वैश्विक स्थिरता के लिए जोखिम बताया। रूस ने स्पष्ट किया कि नाटो की शत्रुतापूर्ण योजनाओं का जवाब देने के लिए उनके पास पर्याप्त सुरक्षा उपाय मौजूद हैं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/the-situation-around-npt-is-worrying-western-countries-are-politicizing/article-151953"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/russia2.png" alt=""></a><br /><p>जिनेवा। जिनेवा में संयुक्त राष्ट्र के लिये रूस के स्थायी प्रतिनिधि गेनेडी गैतिलोव ने 'आर.आई.ए. नोवोस्ती' को दिए एक साक्षात्कार में कहा कि परमाणु अप्रसार संधि (एन.पी.टी.) के आसपास की स्थिति चिंताजनक है, क्योंकि पश्चिमी देश "संधि के मंच पर" कार्यों का राजनीतिकरण करना चाहते हैं। परमाणु अप्रसार संधि का 11वां समीक्षा सम्मेलन सोमवार को न्यूयॉर्क में शुरू हुआ। रूसी राजनयिक ने कहा, "सच कहूं तो, संधि के आसपास की स्थिति चिंताजनक है। पश्चिमी देश एन.पी.टी. मंच पर कार्यों का राजनीतिकरण करना जारी रखे हुए हैं, और संधि से असंबद्ध राष्ट्रीय मुद्दों को चर्चा के केंद्र में ला रहे हैं।"</p>
<p>गैतिलोव ने कहा कि "रूसी खतरे" के बहाने पेरिस परमाणु हथियारों का संचय कर रहा है, जो रूस की सुरक्षा के लिये तत्काल जोखिम पैदा करता है। राजनयिक ने कहा, "फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों की 'परमाणु' आकांक्षाओं का हमारे लिये एक महत्वपूर्ण पहलू यह है कि उन्हें एक काल्पनिक रूसी खतरे के माध्यम से उचित ठहराया जा रहा है। हमारा मानना है कि ऐसा घटनाक्रम न केवल रूस की सुरक्षा के लिये तत्काल जोखिम पैदा करता है, बल्कि रणनीतिक स्थिरता पर भी बहुत नकारात्मक प्रभाव डालता है।"</p>
<p>उन्होंने यह भी कहा कि यह "हमारे देश के प्रति फ्रांस और पूरे नाटो सैन्य-राजनीतिक गुट के शत्रुतापूर्ण इरादों की भी पुष्टि करता है।" रूसी राजदूत ने दावा किया कि रूस ने पेरिस द्वारा परमाणु हथियारों के संचय का जवाब देने के लिये पर्याप्त उपाय तैयार किये हैं। राजनयिक ने कहा, "रूसी संघ स्थिति की बारीकी से निगरानी कर रहा है। हम एक जिम्मेदार और संयमित दृष्टिकोण के प्रति प्रतिबद्ध हैं। साथ ही, यदि फ्रांस और अन्य नाटो देशों की उपरोक्त योजनाओं को पूरी तरह से लागू किया जाता है, तो निस्संदेह हमारे पास रूस और उसके नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिये पर्याप्त उपाय मौजूद हैं।"</p>
<p>मैक्रों ने मार्च में घोषणा की थी कि फ्रांस अपनी परमाणु निवारण नीति को मजबूत कर रहा है और उन्होंने परमाणु हथियारों की संख्या बढ़ाने का आदेश दिया था। उन्होंने यह भी कहा था कि फ्रांस को पूरे यूरोप को कवर करने के लिये अपनी परमाणु रणनीति का विस्तार करने पर विचार करना चाहिए। डेनमार्क ने पहले ही फ्रांस के साथ एक रणनीतिक परमाणु निवारण समझौता कर लिया है, जिसका उद्देश्य नाटो के निवारण तंत्र को पूरक बनाना है। पोलैंड भी इस पहल में शामिल होने के लिये पेरिस के साथ बातचीत कर रहा है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 28 Apr 2026 16:02:23 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>नाटो से समर्थन वापस ले सकता है अमेरिका : हम हर साल खर्च करते हैं सैकड़ों अरब डॉलर, ट्रंप बोले- हालिया रवैये को देखते हुए उनके साथ खड़े रहने की जरुरत नहीं</title>
                                    <description><![CDATA[राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने नाटो को लेकर कड़ा रुख अपनाते हुए समर्थन वापस लेने के संकेत दिए। मियामी में उन्होंने कहा कि अमेरिका हर साल भारी खर्च उठाता है, लेकिन बदले में अपेक्षित सहयोग नहीं मिल रहा। ईरान के खिलाफ कार्रवाई में नाटो के समर्थन न देने पर ट्रंप ने नाराजगी जताई और गठबंधन को “एकतरफा व्यवस्था” बताया।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/america-can-withdraw-support-from-nato-we-spend-hundreds-of/article-148229"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-01/trump3.png" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal"><span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">वॉशिंगटन। अमेरिका</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">के</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">राष्ट्रपति</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">डोनाल्ड</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">ट्रंप</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">ने</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">हालिया</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">घटनाक्रम</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">को</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">लेकर</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">असंतोष</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">जताते</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">हुए</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">संकेत</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">दिया</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">है</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">कि</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">वह</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">नाटो</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">को</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">दिए</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">जा</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">रहे</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">अपने</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">समर्थन</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">को</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">वापस</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">ले</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">सकते</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">हैं।</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">ट्रंप</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">ने</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">मियामी</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">में</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">आयोजित</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">एक</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">कार्यक्रम</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">में</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">शुक्रवार</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">को</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">कहा</span>, <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">हम</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">नाटो</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">पर</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">हर</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">साल</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">सैकड़ों</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">अरब</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">डॉलर</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">खर्च</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">करते</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">हैं</span>, <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">हम</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">उनकी</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">सुरक्षा</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">करते</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">हैं</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">और</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">हमेशा</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">उनके</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">साथ</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">खड़े</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">रहे</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">हैं</span>, <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">लेकिन</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">अब</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">उनके</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">हालिया</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">रवैये</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">को</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">देखते</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">हुए</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">शायद</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">हमें</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">ऐसा</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">करने</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">की</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">आवश्यकता</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">नहीं</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">है।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">उन्होंने</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">एक</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">दिन</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">पहले</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">कहा</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">था</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">कि</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">ईरान</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">के</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">खिलाफ</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">सैन्य</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">कार्रवाई</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">नाटो</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">के</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">लिए</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">अमेरिका</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">के</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">प्रति</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">समर्थन</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">की</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">परीक्षा</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">थी</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">और</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">इस</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">मामले</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">में</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">गठबंधन</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">के</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">रुख</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">से</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">वाशिंगटन</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">निराश</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">है।</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">उन्होंने</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">यह</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">भी</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">कहा</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">कि</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">अमेरिका</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">को</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">अब</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">नाटो</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">की</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">सहायता</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">की</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">आवश्यकता</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">नहीं</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">है। ट्रंप</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">ने</span> 17 <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">मार्च</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">को</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">कहा</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">था</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">कि</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">नाटो</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">ने</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">ईरान</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">के</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">खिलाफ</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">अमेरिकी</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">सैन्य</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">अभियान</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">का</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">समर्थन</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">नहीं</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">कर</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">बहुत</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">बड़ी</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">गलती</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">की</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">है।</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">उन्होंने</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">यह</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">भी</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">कहा</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">कि</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">अधिकांश</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">नाटो</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">देश</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">इस</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">अभियान</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">में</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">शामिल</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">नहीं</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">होना</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">चाहते</span>, <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">जो</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">उनके</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">लिए</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">आश्चर्यजनक</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">नहीं</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">है</span>, <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">और</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">उन्होंने</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">गठबंधन</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">को</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">एकतरफा</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">व्यवस्था</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">करार</span> <span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">दिया।</span></p>]]></content:encoded>
                
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                <pubDate>Sat, 28 Mar 2026 14:14:15 +0530</pubDate>
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                <title>हॉर्मुज जलडमरूमध्य क्षेत्र में गश्त की योजनाओं से पीछे हटने पर ट्रंप ने सहयोगी देशों पर जताई नाराजगी, बोले-ईरान के साथ जल्द हो सकता है खत्म संघर्ष </title>
                                    <description><![CDATA[राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हॉर्मुज जलडमरूमध्य की सुरक्षा के लिए सहयोगियों की "सुस्ती" पर नाराजगी जताई है। उन्होंने ब्रिटेन और जर्मनी के हिचकिचाते रवैये की आलोचना करते हुए कहा कि ऊर्जा सुरक्षा के लिए इन देशों को खुद आगे आना चाहिए। ट्रंप ने ईरान के साथ युद्ध जल्द खत्म होने का दावा किया, लेकिन त्वरित समाधान की संभावना से इनकार किया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/trump-expressed-displeasure-at-allies-for-withdrawing-from-patrolling-plans/article-146795"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/trump2.png" alt=""></a><br /><p>वॉशिंगटन। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने सहयोगी देशों की आलोचना करते हुए कहा है कि हॉर्मुज जलडमरूमध्य मार्ग को सुरक्षित करने के लिए उन्होंने जिस गठबंधन का प्रस्ताव रखा है, उसके प्रति सहयोगियों में उत्साह की कमी है। हॉर्मुज जलडमरूमध्य से ही दुनिया के ऊर्जा संसाधनों के पाँचवें हिस्से की ज़हाज़ों से जरिये आपूर्ति की जाती है।</p>
<p>ट्रंप ने सोमवार देर रात ओवल ऑफिस में पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि ईरान के साथ संघर्ष जल्द ही खत्म हो सकता है। उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि इस हफ़्ते किसी समाधान की संभावना कम है। उन्होंने इस सैन्य अभियान का बचाव करते हुए कहा कि ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने से रोकने के लिए यह जरूरी था।</p>
<p>ट्रंप ने कहा, यह अभियान जल्द ही खत्म हो जाएगा। हमारी दुनिया कहीं ज्यादा सुरक्षित होगी। गौरतलब है कि ईरान ने 28 फऱवरी को अमेरिका और इजरायल द्वारा किए गए हमलों के जवाब में इस क्षेत्र से होकर गुजरने वाले जहाजों को निशाना बनाने की धमकी दी थी जिसके बाद फ़ारस की खाड़ी से होने वाली ज़हाज़ों की आवाजाही काफ़ी हद तक कम हो गई है। </p>
<p>ट्रंप ने ब्रिटेन की प्रतिक्रिया पर असंतोष ज़ाहिर करते हुए कहा, ब्रिटिश प्रधानमंत्री कीर स्टारमर द्वारा इस संघर्ष में नाटो को शामिल करने में दिखाई गई हिचकिचाहट से मैं खुश नहीं हैं और बहुत हैरान हूँ। मैं ब्रिटेन के रवैये से खुश नहीं था। मुझे लगता है कि शायद वे इसमें शामिल होंगे, लेकिन उन्हें पूरे उत्साह के साथ शामिल होना चाहिए।</p>
<p>कई सहयोगियों ने पहले ही हॉर्मुज जलडमरूमध्य में गश्त करने के लिए राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के आह्वान पर अपनी नाराजगी ज़ाहिर कर दी है। जर्मन चांसलर फ्रेडरिक मर्ज उन नेताओं में शामिल थे जिन्होंने सोमवार देर रात संकेत दिया कि उनका देश फ़ारस की खाड़ी में स्थित इस महत्वपूर्ण जलमार्ग पर गश्त करने में शामिल नहीं हो सकता है। बर्लिन में जर्मन चांसलर फ्रेडरिक मर्ज ने कहा, हमारे पास संयुक्त राष्ट्र, यूरोपीय संघ या नाटो से जरूरी जनादेश नहीं है, जो हमारे मूल कानून के तहत आवश्यक है। उन्होंने यह भी कहा कि युद्ध शुरू करने से पहले अमेरिका और इजरायल ने जर्मनी से कोई सलाह-मशविरा नहीं किया था।</p>
<p>इससे पहले, ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टारमर ने कहा था कि ब्रिटेन हॉर्मुज जलडमरूमध्य को साफ़ करने के लिए बारूदी सुरंगों का पता लगाने वाले ड्रोन के इस्तेमाल की संभावना पर चर्चा कर रहा है। साथ ही उन्होंने यह भी संकेत दिया कि ब्रिटेन  के युद्ध क्षेत्र में अपने युद्धपोत भेजने की संभावना कम ही है। अमेरिका के दो और अहम सहयोगी, जापान और ऑस्ट्रेलिया, ने भी सोमवार को संकेत दिया कि वे विवादित होर्मुज जलडमरूमध्य में गश्त के लिए नौसैनिक ज़हाज़ भेजने को शायद तैयार न हों। यह बात तब सामने आई जब अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा था कि अमेरिका खाड़ी के तेल पर निर्भर सात देशों से बात कर रहा है ताकि इस संकरे लेकिन रणनीतिक समुद्री गलियारे में ज़हाज़ों की सुरक्षा में मदद मिल सके।</p>
<p>ट्रंप ने रविवार को एयर फ़ोर्स वन में पत्रकारों से बात करते हुए कहा था कि इस संकरे जलमार्ग से गुजरने वाले व्यापारिक ज़हाज़ों की सुरक्षा में मदद के लिए कई सरकारों से संपर्क किया गया है। हालांकि, ट्रंप ने उन देशों के नाम नहीं बताए, लेकिन शनिवार को एक सोशल मीडिया पोस्ट में उन्होंने कहा था कि उन्हें उम्मीद है कि चीन, जापान, दक्षिण कोरिया, ब्रिटेन और अन्य देश, जो इस कृत्रिम बाधा से प्रभावित हैं, इस अहम जलडमरूमध्य में गश्त के लिए ज़हाज़ भेजेंगे।</p>
<p>ट्रंप ने पत्रकारों से कहा था, मैं मांग कर रहा हूं कि ये देश आगे आएं और अपने ही क्षेत्र की रक्षा करें, क्योंकि यह उनका ही क्षेत्र है उन्हें मिलकर काम करना चाहिए, क्योंकि उन्हें अपनी ऊर्जा इसी क्षेत्र से मिलती है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 17 Mar 2026 13:26:13 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>नाटो के भविष्य पर मंडराया संकट: अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने होर्मुज़ जलडमरूमध्य खोलने के लिए मांगी सहयोगी देशों से मदद  </title>
                                    <description><![CDATA[राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने वैश्विक तेल आपूर्ति बहाल करने हेतु चीन, जापान और ब्रिटेन से होर्मुज जलडमरूमध्य में युद्धपोत भेजने की मांग की है। उन्होंने सहयोग न करने पर नाटो के भविष्य को लेकर चेतावनी दी। ईरान ने वार्ता की पेशकश की है, लेकिन 20 जहाजों पर हमलों के बाद ऊर्जा संकट का खतरा गंभीर बना हुआ है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/crisis-looms-over-natos-future-us-president-trump-seeks-help/article-146711"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-01/trump2.png" alt=""></a><br /><p>वाशिंगटन। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने होर्मुज जलडमरूमध्य के बंद होने की आशंकाओं के बीच कहा है कि चीन, फ्रांस, जापान, दक्षिण कोरिया, ब्रिटेन और अन्य देश इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग की सुरक्षा के लिए युद्धपोत भेजें। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि सहयोगी देश मदद नहीं करते हैं तो नाटो के लिए भविष्य "बहुत खराब" हो सकता है।</p>
<p>मीडिया रिपोर्टों के अनुसार अब तक ऑस्ट्रेलिया और जापान ने स्पष्ट किया है कि वे फिलहाल अपने जहाज भेजने की योजना नहीं बना रहे हैं। ब्रिटेन ने कहा है कि वह विकल्पों पर विचार कर रहा है, जबकि चीन ने संघर्ष को तत्काल समाप्त करने का आह्वान किया है। इस बीच ईरान के विदेश मंत्री ने कहा है कि जो देश जलडमरूमध्य के सुरक्षित उपयोग को लेकर बातचीत करना चाहते हैं, उनके साथ तेहरान चर्चा के लिए तैयार है।</p>
<p>ब्रिटेन की समुद्री एजेंसी के अनुसार पिछले तीन दिनों में कोई नई घटना सामने नहीं आई है, लेकिन जलडमरूमध्य पर खतरा अभी भी "गंभीर" बना हुआ है। युद्ध शुरू होने के बाद से फारस की खाड़ी, होर्मुज जलडमरूमध्य और ओमान की खाड़ी के आसपास कम से कम 20 जहाजों पर हमले हो चुके हैं।</p>
<p>रिपोर्टों के अनुसार, ईरान द्वारा इस प्रमुख समुद्री मार्ग को बंद किए जाने से विश्व के लगभग पांचवें हिस्से की तेल आपूर्ति प्रभावित हुई है, जिससे वैश्विक बाजार में तेल की कीमतों में तेज वृद्धि और ऊर्जा संकट की आशंका बढ़ गयी है। इसी बीच, ट्रंप ने कहा है कि इस मुद्दे पर चीन की भूमिका भी महत्वपूर्ण है। उन्होंने संकेत दिया कि महीने के अंत में चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ प्रस्तावित बैठक से पहले वह यह जानना चाहते हैं कि चीन जलडमरूमध्य को फिर से खोलने में सहयोग करेगा या नहीं।</p>
<p>उधर जापान की प्रधानमंत्री साने ताकाइची ने कहा कि जापान ने फिलहाल नौसैनिक जहाज भेजने का कोई निर्णय नहीं लिया है और देश अपने कानूनी ढांचे के भीतर संभावित विकल्पों पर विचार कर रहा है। ऑस्ट्रेलिया ने भी स्पष्ट किया है कि उसने इस मिशन में जहाज भेजने का कोई निर्णय नहीं लिया है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
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                <pubDate>Mon, 16 Mar 2026 18:43:49 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>होर्मुज संकट: अमेरिका की अपील के बावजूद जापान और ऑस्ट्रेलिया में होर्मुज़ जलडमरूमध्य में गश्त को लेकर असमंजस बरकार </title>
                                    <description><![CDATA[राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने होर्मुज जलडमरूमध्य की सुरक्षा हेतु सहयोगियों से युद्धपोत भेजने की अपील की है। हालांकि, जापान और ऑस्ट्रेलिया ने फिलहाल नौसैनिक बेड़े भेजने से इनकार कर दिया है। जापान अपने कानूनी दायरे की समीक्षा कर रहा है, जबकि ऑस्ट्रेलिया केवल सैन्य विमान तैनात करेगा। वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा के लिए यह समुद्री मार्ग अत्यंत महत्वपूर्ण बना हुआ है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/despite-americas-appeal-confusion-persists-in-japan-and-australia-regarding/article-146714"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-01/trump3.png" alt=""></a><br /><p>वाशिंगटन। अमेरिका के दो प्रमुख सहयोगी देशों जापान और ऑस्ट्रेलिया ने सोमवार को संकेत दिया कि वे विवादित होर्मुज जलडमरूमध्य मार्ग में गश्त के लिए अपने नौसैनिक जहाज़ तैनात करने को शायद तैयार न हों। यह संकेत तब आया है जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा था कि अमेरिका खाड़ी क्षेत्र के तेल पर निर्भर सात देशों से बातचीत कर रहा है और यह बातचीत इस संकरे लेकिन रणनीतिक समुद्री मार्ग में जहाज़ों की सुरक्षा में मदद पहुंचाने को लेकर हो रही है।</p>
<p>'एयर फ़ोर्स वन' में सवार होकर पत्रकारों से बात करते हुए ट्रंप ने रविवार को कहा कि इस संकरे जलमार्ग से गुज़रने वाले व्यापारिक जहाज़ों की सुरक्षा में मदद के लिए कई सरकारों से संपर्क किया गया है। हालांकि, उन्होंने उन देशों के नाम नहीं बताये। इससे पहले उन्होंने शनिवार को एक सोशल मीडिया पोस्ट में कहा था कि उन्हें उम्मीद है कि चीन, जापान, दक्षिण कोरिया, ब्रिटेन और अन्य ऐसे देश जो इस कृत्रिम बाधा से प्रभावित हैं, वे इस महत्वपूर्ण जलडमरूमध्य में गश्त के लिए अपने जहाज़ भेजेंगे।</p>
<p>ट्रंप ने कहा, "मैं अपील कर रहा हूं कि ये देश आगे आएं और अपने क्षेत्र की सुरक्षा करें, क्योंकि यह उनका ही क्षेत्र है।" उन्होंने कहा कि उन्हें आपस में सहयोग करना चाहिए, क्योंकि उन्हें ऊर्जा इसी क्षेत्र से मिलती है। अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा कि उन्हें उम्मीद है कि जिन देशों से संपर्क किया गया है, उनमें से कई देश जलडमरूमध्य से जहाजों के सुरक्षित गुज़रने की सुविधा प्रदान करने के लिए नौसैनिक जहाज़ तैनात करेंगे। यह जलडमरूमध्य एक अहम समुद्री मार्ग है, जिससे दुनिया की लगभग 20 प्रतिशत तेल आपूर्ति गुज़रती है।</p>
<p>राष्ट्रपति ट्रंप ने 'ऑपरेशन एपिक फ्यूरी' के बारे में बातचीत करते हुए संकेत दिया कि ईरान के साथ बातचीत अभी भी अनिश्चित बनी हुई है। उन्होंने कहा, "वे बातचीत करने के लिए बहुत ज़्यादा उत्सुक हैं जैसा कि उन्हें होना भी चाहिए लेकिन मुझे नहीं लगता कि वे वह करने के लिए तैयार हैं जो उन्हें करना चाहिए।" उन्होंने कहा, "हम इस काम को पूरा करेंगे।"</p>
<p>उल्लेखनीय है कि, फरवरी के अंत में शुरू हुई अमेरिका और इज़रायल तथा ईरान के बीच की जंग अब तक काफ़ी बढ़ गई है। इसके कारण इस संघर्ष ने टैंकरों की आवाजाही को बाधित किया है और वैश्विक ऊर्जा बाज़ारों में अस्थिरता पैदा कर दी है। ईरान ने ड्रोन, बारूदी सुरंगों आदि का इस्तेमाल करके इस मार्ग से होने वाली तेल की खेपों को रोकने का सहारा लिया है।</p>
<p>जापान की प्रधानमंत्री सनाए ताकाइची ने सोमवार को कहा कि जापान ने इस क्षेत्र में बढ़ते तनाव के बीच पश्चिम एशिया में जहाजों की सुरक्षा के लिए नौसैनिक जहाज़ भेजने का कोई फ़ैसला नहीं किया है। संसद में उन्होंने कहा कि सरकार अभी भी इस बात की जाँच कर रही है कि जापान के कानूनी दायरे के भीतर कौन से कदम उठाए जा सकते हैं और वह स्वतंत्र रूप से कौन सी कार्रवाई कर सकती है। उन्होंने कहा, "हमने सुरक्षा के लिए जहाज़ भेजने के बारे में अभी तक कोई फ़ैसला नहीं किया है। हम लगातार इस बात की जाँच कर रहे हैं कि जापान स्वतंत्र रूप से क्या कर सकता है और कानूनी दायरे के भीतर क्या किया जा सकता है।"</p>
<p>जापानी प्रधानमंत्री ने बताया कि अमेरिका ने इस क्षेत्र में जहाजों की सुरक्षा में मदद के लिए जापान से कोई औपचारिक अनुरोध नहीं किया है। जापान पश्चिमी एशिया से होने वाले ऊर्जा आयात पर बहुत ज़्यादा निर्भर है। उसके लगभग 70 प्रतिशत आयातित ऊर्जा संसाधन इसी क्षेत्र से आते हैं। इस वजह से, वहाँ के समुद्री मार्गों में स्थिरता बनाए रखना देश की ऊर्जा सुरक्षा के लिए बेहद ज़रूरी है।</p>
<p>इस बीच, भारत-प्रशांत क्षेत्र में अमेरिका के एक और अहम सहयोगी ऑस्ट्रेलिया ने संकेत दिया है कि इस क्षेत्र में उसकी भूमिका सीमित ही रहेगी। एक रेडियो इंटरव्यू में अवसंचना एवं परिवहन मंत्री कैथरीन किंग ने बताया कि देश रक्षा से जुड़ी गतिविधियों में मदद के लिए संयुक्त अरब अमीरात में एक सैन्य विमान तैनात करने की योजना बना रहा है।</p>
<p>हालांकि, उन्होंने यह साफ किया कि ऑस्ट्रेलिया होर्मुज जलडमरूमध्य में नौसेना के जहाज़ नहीं भेजेगा। उनके मुताबिक, ऑस्ट्रेलिया को जहाज़ भेजने के लिए कोई अनुरोध नहीं मिला है और वह इस जलडमरूमध्य से समुद्री आवाजाही बहाल करने के मकसद से चलाए जा रहे अभियान में शामिल नहीं है। उन्होंने आगे कहा कि सरकार की फिलहाल इस इलाके में नौसेना बल भेजने की कोई योजना नहीं है।</p>
<p>इससे पहले, ऑस्ट्रेलिया के विदेश मामले और व्यापार विभाग ने अपने 'स्मार्टट्रैवलर' प्लेटफॉर्म के ज़रिए इस क्षेत्र के कई देशों के लिए यात्रा संबंधी सलाह पहले ही जारी कर दी थी। विभाग ने शनिवार को अपनी सलाह का दायरा बढ़ाते हुए ऑस्ट्रेलियाई नागरिकों से आग्रह किया कि वे उन देशों से गुज़रने से भी बचें जिसमें देश में प्रवेश किए बिना सिर्फ़ एयरपोर्ट टर्मिनल के अंदर रुकना भी शामिल है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 16 Mar 2026 16:58:03 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव का दावा, बोलें-ब्रिक्स, एससीओ आम सहमति से काम करते हैं, नाटो के फैसले अमेरिका की मर्जी पर निर्भर</title>
                                    <description><![CDATA[रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने कहा कि ब्रिक्स और एससीओ में फैसले सर्वसम्मति से होते हैं, जबकि नाटो अमेरिका पर निर्भर है। उन्होंने ईयू की भी आलोचना की।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/russian-foreign-minister-sergei-lavrovs-claim-brics-sco-work-with/article-142777"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-02/11-(700-x-400-px)-(630-x-400-px)-(16)4.png" alt=""></a><br /><p>मॉस्को। रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने कहा है कि ब्रिक्स और शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) ज्यादातर मामलों में सर्वसम्मति के आधार पर फैसले करते हैं, जबकि नाटो के फैसले अमेरिका पर निर्भर करते हैं। </p>
<p>विदेश मंत्री लावरोव ने रूस के एक यूट्यूब चैनल एमपाशिया मनुची प्रोजेक्ट के साथ बातचीत में कहा, ज्यादातर मामलों में अंतरराष्ट्रीय समझौतों का पालन किया जाता है। जब बात हमारे पश्चिमी साथियों की हो तब नहीं, बल्कि जब उन प्रतिनिधियों की होती है जिन्हें हम वैश्विक बहुमत कहते हैं, जैसे ब्रिक्स, एससीओ, और सोवियत के बाद वाले सीएसटीओ, ईएईयू, और सीआईएस। इन ढांचों में आम सहमति ज्यादातर बनी रहती है। आप नाटो की तरह आसानी से फ़ैसले नहीं ले सकते, जहां अमेरिकी कहते हैं'चुप रहो और हमें दिखता है कि यह सब कैसे काम करता है।</p>
<p>इसके आगे विदेश मंत्री लावरोव ने कहा, यूरोपीय संघ भी फैसलों पर असर डालता है। यूरोपीय संघ की तरह, जहां ब्रसेल्स में बिना चुने हुए नौकरशाह देश की चुनी हुई सरकारों को बताते हैं कि क्या करना है, कैसे बर्ताव करना है, किसके साथ व्यापार करना है और किसके साथ नहीं करना है। हमारे हंगरी के साथियों ने ब्रसेल्स के हाल के गलत कामों पर साफ और समझने लायक टिप्पणी की है।</p>
<p>हंगरी के प्रधानमंत्री विक्टर ओरबान ने दिसंबर 2025 में  कहा था कि यूरोपीय संघ यूक्रेनी संघर्ष को लंबा खींचने के लिए व्यवस्थित तरीके से कानून को रौंद रहा है। उन्होंने कहा कि यूरोपीय संघ में कानून का राज ब्रसेल्स की तानाशाही से बदल गया है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 11 Feb 2026 16:44:39 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>ग्रीनलैंड के पास फ्रांस ने भेजा राफेल से लैस परमाणु एयरक्राफ्ट कैरियर, जबरन कब्जे की तैयारी में डोनाल्ड ट्रंप</title>
                                    <description><![CDATA[ग्रीनलैंड को लेकर यूरोपीय एकजुटता दिखाते हुए फ्रांस ने परमाणु एयरक्राफ्ट कैरियर चार्ल्स डी गाले को उत्तरी अटलांटिक की ओर तैनात किया, यूरोपीय संप्रभुता को समर्थन जताया और अमेरिका संदेश]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/france-sends-rafale-equipped-nuclear-aircraft-carrier-to-greenland-in-preparation/article-141142"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-01/500-px)11.png" alt=""></a><br /><p>पेरिस। ग्रीनलैंड को लेकर यूरोप के देश एकजुट होते दिख रहे हैं। अमेरिका को खुली चेतावनी देने के बाद फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुअल मैक्रों ने ग्रीनलैंड के पास उत्तरी अटलांटिक महासागर में अपने एकमात्र परमाणु ऊर्जा से चलने वाले एयरक्राफ्ट कैरियर चार्ल्स डी गाले को भेजा है। यह राफेल फाइटर जेट से लैस है। फ्रांस के रक्षा मंत्रालय ने इस तैनाती के बारे में ऐलान किया है। माना जा रहा है कि ग्रीनलैंड पर अमेरिकी सेना के हमले के खतरे को देखते हुए फ्रांसीसी नौसेना ऐक्शन में आई है। यही नहीं फ्रांसीसी राष्ट्रपति डेनमार्क और ग्रीनलैंड के नेताओं से पेरिस में मिलने जा रहे हैं। फ्रांसीसी राष्ट्रपति कार्यालय ने कहा है कि मैक्रों यूरोपीय एकजुटता को एक बार फिर से अपना समर्थन जाहिर करेंगे। साथ ही डेनमार्क और ग्रीनलैंड की संप्रभुता और क्षेत्रीय एकजुटता को भी अपना समर्थन देंगे।</p>
<p><strong>फ्रांसीसी स्ट्राइक कैरियर कहां जा रहा?</strong></p>
<p>फ्रांस, डेनमार्क और ग्रीनलैंड के नेता आर्कटिक में सुरक्षा खतरे, ग्रीनलैंड के आर्थिक तथा सामाजिक विकास के मुद्दों पर चर्चा करेंगे। इसको फ्रांस और यूरोपीय संघ दोनों ही सपोर्ट करने के लिए तैयार हैं। हालांकि, फ्रांसीसी रक्षा मंत्रालय ने यह नहीं बताया कि चार्ल्स डी गॉल को कहां तैनात किया जा रहा है, लेकिन समाचार एजेंसी के सूत्रों के हवाले से बताया कि यह उत्तरी अटलांटिक की ओर बढ़ रहा है। हाल के दिनों में यह इलाका अमेरिका और यूरोप के बीच भूराजनीतिक तनाव का केंद्र बनकर उभरा है। फ्रांस के रक्षा मंत्रालय ने बताया कि नेवल एयर ग्रुप ओरियन 26 सैन्य अभ्यास में हिस्सा लेने के लिए तोउलोन नौसैनिक अड्डे से रवाना हो गया है। </p>
<p><strong>स्ट्राइक कैरियर के साथ पूरा बेड़ा</strong></p>
<p>फ्रांस के कैरियर स्ट्राइक ग्रुप में चार्ल्स डी गॉल और उसके विमान, साथ ही कई एस्कॉर्ट और सपोर्ट जहाज शामिल हैं। इसमें एक डिफेंस फ्रिगेट, एक सप्लाई शिप और एक हमलावर पनडुब्बी है। यह अभ्यास ऐसे समय में होने जा रहा है जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप डेनमार्क के अर्ध-स्वायत्तशासी क्षेत्र ग्रीनलैंड को लगातार अमेरिका में मिलाने की धमकी दे रहे हैं।</p>
<p><strong>जंग के मूड में यूरोप, टूट सकता है नाटो </strong></p>
<p>अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ग्रीनलैंड पर कब्जे के लिए कमर कस चुके हैं। अमेरिका की सेना इसके लिए लगातार तैयारी भी कर रही है। ट्रंप के इस रुख से 32 देशों की सदस्यता वाले सैन्य संगठन उत्तर अटलांटिक संधि संगठन यानि नाटो के अस्तित्व पर ही खतरा मंडराने लगा है। ट्रंप की दादागिरी के खिलाफ यूरोपीय देश एकजुट हो रहे हैं। ब्रिटेन, इटली, फ्रांस, जर्मनी जैसे ताकतवर यूरोपीय देशों ने अमेरिका को ग्रीनलैंड को लेकर चेतावनी भी दी है। </p>
<p>इस बीच नाटो चीफ ने चेतावनी दी है कि बिना अमेरिका के नाटो देश अपनी रक्षा नहीं कर सकते हैं। ग्रीनलैंड का प्रशासन डेनमार्क देखता है जो नाटो का सदस्य देश है। ट्रंप ने कहा है कि ग्रीनलैंड अमेरिका की राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए बहुत ही जरूरी है। दरअसल, अमेरिका यहां पर अपना गोल्डन डोम डिफेंस सिस्टम लगाना चाहता है ताकि रूस और चीन की मिसाइलों से अमेरिका को बचाया जा सके। </p>
<p><strong>डोनाल्ड ट्रंप ने नाटो को दी टैरिफ की धमकी</strong></p>
<p>यही नहीं डोनाल्ड ट्रंप लगातार ग्रीनलैंड को लेकर यूरोपीय देशों पर भारी भरकम टैरिफ लगाने की धमकी दे रहे हैं। नाटो का आर्टिकल 5 कहता है कि अगर एक सदस्य देश पर दुश्मन का हमला होता है तो यह सभी देशों पर अटैक माना जाएगा। यही नहीं इस जंग में नाटो के हर सदस्य देश को सैन्य सहायता देना होगा। </p>
<p>नाटो के महासचिव जनरल मार्क रट ने सोमवार को खुलासा किया कि अमेरिकी सैन्य सहायता के बिना यूरोप अपनी खुद की रक्षा नहीं कर सकता है। उन्होंने यूरोपीय सांसदों से कहा कि यूरोप और अमेरिका को एक-दूसरे की जरूरत है।</p>
<p><strong>जर्मनी-पोलैंड बनाना चाहेंगे परमाणु बम</strong></p>
<p>एक्सपर्ट के अनुसार अमेरिका ठीक इसी समय यूरोप को अपने ऊपर निर्भर बनाए रखेगा और उसे एक विरोधी ब्लॉक के रूप में उभरने से रोकेगा। उन्होंने कहा कि ट्रंप के शासनकाल में नाटो के आंतरिक नियम बदलने जा रहे हैं। अगर अमेरिका नाटो से निकलता है तो यूरोपीय सुरक्षा ढांचा खंड-खंड हो जाएगा। </p>
<p>यूरोपीय देश सामूहिक सुरक्षा की जगह पर अपनी-अपनी सुरक्षा पर ध्यान केंद्रित कर देंगे। उन्होंने कहा कि जर्मनी और पोलैंड जैसे यूरोपीय देश परमाणु बम हासिल करने पर बहस करने लगेंगे। वहीं ब्रिटेन और फ्रांस असलियत में अमेरिका की कमी को पूरा नहीं कर पाएंगे। ये दोनों देश पूरे यूरोप की उस तरह से सुरक्षा नहीं कर पाएंगे जैसे कि अमेरिका करता है।</p>
<p><strong>अमेरिकी सेना का ग्रीनलैंड में बेस</strong></p>
<p>जैसे-जैसे वैश्विक तनाव बढ़ रहा है, यह द्वीप भू-राजनीतिक दबाव का एक मापक बन गया है। इससे पता चलता है कि पुरानी अंतरराष्ट्रीय कानूनी व्यवस्था किस तरह कमजोर पड़ने लगी है। इन सभी के केंद्र में पिटुफिक अंतरिक्ष ठिकाना है, जिसे पहले थुले एयरबेस के नाम से जाना जाता था। शीतयुद्ध के दौरान एक चौकी के रूप में इस्तेमाल यह बेस अब अमेरिकी सेना के अंतरिक्ष बल केंद्र का एक अहम हिस्सा है, जो मिसाइल का पता लगाने से लेकर जलवायु परिवर्तन पर नजर रखने तक हर चीज के लिए आवश्यक है। ग्रीनलैंड में अमेरिकी रुचि उस समय बढ़ रही है, जब युद्ध के बाद की नियम-आधारित अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था शांति और सुरक्षा बनाए रखने में तेजी से निष्प्रभावी साबित हो रही है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 29 Jan 2026 11:26:54 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>यूक्रेन में शांति सेना: राष्ट्रपति इमैनुअल मैक्रों का ऐलान, संघर्ष विराम के बाद अपने सैनिकों को भेजेंगे यूक्रेन</title>
                                    <description><![CDATA[फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने यूक्रेन-रूस संघर्ष विराम के बाद शांति बनाए रखने हेतु हजारों सैनिक तैनात करने की घोषणा की है। उन्होंने स्पष्ट किया कि ये सैनिक केवल निगरानी और पुनर्निर्माण में सहयोग करेंगे।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/president-emmanuel-macron-announces-that-ukraine-will-send-its-troops/article-138740"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-01/emmanuel-macron.png" alt=""></a><br /><p>पेरिस। फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुअल मैक्रों ने कहा है कि रूस और यूक्रेन के बीच संघर्ष विराम होने के बाद वह यूक्रेन में शांति बरकरार रखने के लिये 'हजारों फ्रांसिसी सैनिक' तैनात कर सकते हैं। उन्होंने यहां मंगलवार को पश्चिमी और यूरोपीय देशों की एक बैठक के दौरान फ्रांस-2 टीवी चैनल के साथ एक साक्षात्कार में कहा कि फ्रांस संघर्ष विराम पर हस्ताक्षर होने के बाद रूस-यूक्रेन सीमा की देखरेख के लिये'अभियानों में हिस्सा लेगा।</p>
<p>उन्होंने यह भी साफ किया कि फ्रांसिसी सैनिक यूक्रेन में युद्ध के लिये नहीं जायेंगे। फ्रांस की भूमिका यूक्रेनी सेना के पुनर्निमाण तक ही सीमित होगी। राष्ट्रपति मैक्रों ने कहा कि यूक्रेन, यूरोपीय देशों और अमेरिका के बीच बातचीत हुई है और यही देश फैसला करेंगे कि सीमा का उल्लंघन हुआ है या नहीं। </p>
<p>उल्लेखनीय है कि, 30 पश्चिमी और यूरोपीय देशों ने मंगलवार को यहां एक बैठक में इस बात पर सहमति जताई कि भविष्य का कोई भी शांति समझौता यूक्रेन के लिये मजबूत और बाध्य सुरक्षा गारंटियों के बिना नहीं होगा। सभी देशों ने एक संयुक्त बयान में कहा कि वे संघर्ष विराम होने के बाद वे एक राजनीतिक और कानूनी तौर पर बाध्य गारंटियों की व्यवस्था लागू करने के लिये तैयार हैं। इसमें अमेरिका के नेतृत्व वाले संघर्ष विराम की निगरानी व्यवस्था में हिस्सा लेना, यूक्रेन को सैन्य समर्थन देना और दीर्घकालिक रक्षा सहयोग शामिल होगा। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 07 Jan 2026 15:21:23 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>भारत ने खारिज किया यूक्रेन युद्ध पर नाटो चीफ का दावा, रूटे का दावा तथ्यात्मक रूप से गलत और पूरी तरह आधारहीन </title>
                                    <description><![CDATA[भारत ने शुक्रवार को नाटो के महासचिव मार्क रूटे के उन दावों को पूरी तरह से खारिज कर दिया, जिसमें उन्होंने कहा था कि अमेरिका द्वारा लगाए गए टैरिफ के बाद भारत ने यूक्रेन युद्ध को लेकर रूस की रणनीति पर सवाल उठाए हैं]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/india-rejected-nato-chief-claim-of-nato-chief-on-ukraine/article-128036"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-09/copy-of-news-(14)1.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। भारत ने शुक्रवार को नाटो के महासचिव मार्क रूटे के उन दावों को पूरी तरह से खारिज कर दिया, जिसमें उन्होंने कहा था कि अमेरिका द्वारा लगाए गए टैरिफ के बाद भारत ने यूक्रेन युद्ध को लेकर रूस की रणनीति पर सवाल उठाए हैं। भारत के विदेश मंत्रालय ने रूटे के इस दावे को तथ्यात्मक रूप से गलत और पूरी तरह आधारहीन बताया है। विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट कहा है कि रूस के साथ यूक्रेन युद्ध को लेकर भारत की ऐसी कोई बातचीत नहीं हुई और मार्क रूटे को भविष्य में ऐसी बयानबाजी को लेकर सावधानी बरतने की सलाह दी। भारतीय विदेश मंत्रालय की ओर से जारी आधिकारिक बयान में कहा गया, हमने नाटो महासचिव मार्क रूटे के बयान का संज्ञान लिया है, जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के बीच फोन पर कथित बातचीत का जिक्र है। यह बयान तथ्यों से मेल नहीं खाता और पूरी तरह झूठा है। प्रधानमंत्री मोदी ने कभी पुतिन से इस तरह बात नहीं की। ऐसी कोई बातचीत नहीं हुई। भारत ने मार्क रूटे की आलोचना करते हुए कहा कि नाटो जैसे महत्वपूर्ण संगठन के प्रमुख को सार्वजनिक बयानों में ज्यादा जिम्मेदारी और सटीकता दिखानी चाहिए।</p>
<p><strong>मार्क रूटे ने यूक्रेन युद्ध को लेकर क्या दावा किया?</strong><br />विदेश मंत्रालय ने कहा, हम उम्मीद करते हैं कि नाटो लीडरशिप के बयान ज्यादा सावधानी से दिए जाएं। प्रधानमंत्री की मुलाकातों को गलत तरीके से पेश करना या ऐसी बातचीत का जिक्र जो कभी हुई ही नहीं, यह स्वीकार्य नहीं है। रूटे ने गुरुवार को न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा के सत्र से इतर सीएनएन को दिए एक इंटरव्यू में यह दावा किया था। रूटे ने कहा था कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के भारत पर लगाए टैरिफ का रूस पर बड़ा असर पड़ रहा है। उन्होंने दावा किया कि नई दिल्ली और मॉस्को फोन पर एक दूसरे से संपर्क में हैं। नरेंद्र मोदी यूक्रेन युद्ध पर व्लादिमीर पुतिन को अपनी रणनीति समझाने को कह रहे हैं, क्योंकि भारत को इन टैरिफ से नुकसान हो रहा है। बता दें कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पिछले महीने भारत पर 25 प्रतिशत रेसिप्रोकल टैरिफ और रूसी तेल खरीदने पर 25 प्रतिशत का अतिरिक्त टैरिफ लगाया था। अमेरिका का कहना है कि भारत का रूसी तेल खरीदना यूक्रेन युद्ध को अप्रत्यक्ष रूप से समर्थन देता है।</p>
<p><strong>भारत की प्राथमिकता राष्ट्र हित और आर्थिक सुरक्षा</strong><br />नई दिल्ली ने अमेरिकी टैरिफ को अन्यायपूर्ण बताया था। भारत ने हमेशा यूक्रेन मुद्दे पर शांति की बात की है। पीएम मोदी ने हाल ही में पुतिन से फोन पर बात की थी और अपने जन्मदिन पर शुभकामनाओं के लिए उनका आभार जताया था। इस बातचीत में भी पीएम मोदी ने यूक्रेन युद्ध में शांति का समर्थन किया था। रूस से तेल खरीदने के मुद्दे पर भारत ने एक बार फिर दोहराया कि 140 करोड़ भारतीयों की ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करना उसकी पहली प्राथमिकता है। विदेश मंत्रालय ने कहा कि भारत अपने राष्ट्रीय हितों और आर्थिक सुरक्षा की रक्षा के लिए सभी आवश्यक उपाय करता रहेगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 27 Sep 2025 11:38:48 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>नाटो ने पांच लाख से अधिक सैनिकों को हाई अलर्ट पर रखा</title>
                                    <description><![CDATA[ दखलल्लाह ने सीएनएन से कहा कि 2014 के बाद से, नाटो ने हमारी सामूहिक रक्षा में सबसे महत्वपूर्ण परिवर्तन किया है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/nato-put-more-than-five-lakh-soldiers-on-high-alert/article-85531"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-07/farah-nato.png" alt=""></a><br /><p>ब्रुसेल्स। नाटो प्रवक्ता फराह दखलल्लाह ने कहा कि पांच लाख से अधिक नाटो सैन्यकर्मियों कोइस समय हाई अलर्ट पर रखा गया है। दखलल्लाह ने सीएनएन से कहा कि 2014 के बाद से, नाटो ने हमारी सामूहिक रक्षा में सबसे महत्वपूर्ण परिवर्तन किया है। हमने शीत युद्ध के बाद से सबसे व्यापक रक्षा योजनाएं बनाई हैं, वर्तमान में पांच लाख से अधिक सैनिक हाई अलर्ट पर हैं।</p>
<p>नाटो नेताओं ने बुधवार को जारी वाशिंगटन शिखर सम्मेलन घोषणा में पुष्टि किया कि यूक्रेन नाटो में अपरिवर्तनीय रास्ते पर है। संयुक्त बयान में रूस को अलग-थलग करने, पूर्वी तट पर सुरक्षा बढ़ाने और यूक्रेन के लिए सैन्य सहायता बढ़ाने के गठबंधन के प्रयासों को रेखांकित किया गया।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 22 Jul 2024 15:29:02 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>नाटो के सामने अब नई चुनौतियां</title>
                                    <description><![CDATA[पिछले सप्ताह संयुक्त राज्य अमेरिका की राजधानी वॉशिंगटन डीसी में उत्तर अटलांटिक संधि संगठन की 75 वीं वर्षगांठ के अवसर पर त्रिदिवसीय शिखर सम्मेलन संपन्न हुआ।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/opinion/nato-now-faces-new-challenges/article-84924"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-07/111u1rer-(2)4.png" alt=""></a><br /><p>पिछले सप्ताह संयुक्त राज्य अमेरिका की राजधानी वॉशिंगटन डीसी में उत्तर अटलांटिक संधि संगठन की 75 वीं वर्षगांठ के अवसर पर त्रिदिवसीय शिखर सम्मेलन संपन्न हुआ। इस सम्मेलन पर पूरे विश्व की नजरें टिकी हुई थीं। सम्मेलन में सभी सदस्यों ने एक स्वर से यूक्रेन के साथ एकजुटता दिखाते हुए उसे पर्याप्त सुरक्षा सहायता जारी रखने का फैसला लिया गया। तो दूसरी ओर चीन को आड़े हाथों लेकर उस पर तीखे प्रहार किए। सम्मेलन में यह भी तय हुआ कि अगला शिखर सम्मेलन अगले वर्ष जून माह में नीदरलैंड की राजधानी हेग में आयोजित किया जाएगा। 75 वां शिखर सम्मेलन ऐसे वक्त पर हुआ जब इसका नेतृत्व करने वाले देश अमेरिका में अगले नवंबर माह में राष्ट्रपति चुनाव होने जा रहे हैं। ब्रिटेन में लेबर पार्टी के कीर स्टॉर्मर नए प्रधानमंत्री बने हैं। अमेरिकी चुनाव के नतीजे आने के बाद ही सम्मेलन में लिए गए तमाम महत्वपूर्ण फैसलों का क्रियान्वयन और रणनीति की दशा और दिशा सुनिश्चित हो पाएगी। </p>
<p>शिखर सम्मेलन को मौजूदा राष्ट्रपति जो बाइडन ने संबोधित किया है। उन्होंने अपने संबोधन में यह समझाने की पूरी कोशिश की कि नाटो को इस अवसर का उपयोग जश्न मनाने के लिए इसलिए करना चाहिए , क्योंकि अमेरिका को इस गठबंधन से काफी लाभ मिला है। इसकी सदस्यता में एक ओर जहां वृद्धि हुई तो दूसरी ओर रक्षा पर यूरोपीय राज्यों के बढ़े बजटीय व्यय की रूपरेखा भी तैयार हुई। </p>
<p>उन्होंने यूक्रेन युद्ध में रूस की सहायता करने पर चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग की कड़ी निंदा की। चेतावनी दी कि यदि बीजिंग ने मास्को को सहायता देना तुरंत बंद नहीं किया तो उसे इसके परिणाम भुगतने पड़ेंगे। लेकिन सम्मेलन में बाइडन की जुबान की लड़खड़ाहट ने उनकी कमजोरी को भी जाहिर कर दिया। जब उन्होंने पास खड़े यूक्रेन के राष्ट्रपति जेलेंस्की को पुतिन और कमला हैरिस को ट्रंप के नाम से संबोधित किया। इससे पहले राष्ट्रपति चुनाव के लिए हुई पहली बहस में बाइडन को ट्रंप के मुकाबले मिली हार तथा उनकी जुबानी फिसलन ने उनकी बढ़ती उम्र की ओर डेमोक्रेटिक पार्टी को गंभीरता से सोचने को विवष कर दिया है। पार्टी के भीतर उनसे चुनावी मैदान से हटने का दबाव बन रहा है। लेकिन इसके बावजूद वे चुनाव लडने पर अड़े हुए हैं। यदि वे मैदान पर डटे रहे तो चुनावी नतीजे रिपब्लिकन पार्टी के प्रत्याशी डोनाल्ड ट्रंप के पक्ष में जा सकते हैं। दूसरी ओर नाटो को लेकर पूर्व राष्ट्रपति ट्रंप के नजरिए पर भी गौर करना होगा। अपने राष्ट्रपति कार्यकाल में टं्रप ने नाटो गठबंधन में शामिल देशों की व्यय साझा करने की अनिच्छा की खुलकर आलोचना की थी। ऐसे में उनका मत था कि वैश्विक सुरक्षा की जिम्मेदारी के वहन से अमेरिका को मिलता क्या है? हालांकि अब हालात में काफी बदलाव आ चुका है। अधिकांष यूरोपीय देश, अपनी जीडीपी के दो फीसदी हिस्से के बराबर धन देने के दायित्व को पूरा कर रहे हैं। ट्रंप को लेकर यह धारणा भी है कि वे पुतिन के करीबी हैं। </p>
<p>खैर, अमेरिकानीत इस सैन्य संधि संगठन के सामने मौजूदा वैष्विक परिदृश्य में दो प्रमुख चुनौतियां उभर कर सामने आ रही हैं। एक तो यूक्रेन के खिलाफ युद्ध छेड़े रूस को चीन की ओर से मदद मिलना। तो दूसरी ओर चीन का हिंद-प्रशांत महासागरीय क्षेत्र में वर्चस्व बढाने की नीति, इस के साथ उसकी परमाणु हथियारों और अंतरिक्ष क्षेत्र में आक्रामक क्षमता हासिल कर लेना। सम्मेलन के केंद्र में चीन का मुद्दा हालांकि पहले भी वर्ष 2019 के सम्मेलन में उठा था। लेकिन तब नाटो के वक्तव्य में चीन के जिक्र की भाषा इतनी कड़ी नहीं थी। लेकिन इस बार की तीखी घोषणा के तुरंत बाद चीन ने प्रतिक्रिया दी। उसने रूस की मदद के लगाए आरोपों को सरासर झूठ बताया है। उसकी ओर से जोर देकर कहा गया है कि रूस और चीन के बीच व्यापार और मैत्री का उद्देश्य किसी तीसरे पक्ष को निशाना बनाना नहीं है। लेकिन नाटो की ताजा घोषणा की भाषा ने रूस-यूक्रेन युद्ध को अब नाटो-चीन के बीच छद्म युद्ध में बदल दिया है। खैर, इतना जरूर हुआ कि नाटो की शिखर वार्ता शुरू होने से पहले यूक्रेन को अमेरिकी एफ-16 लड़ाकू विमानों की पहली खेप डेनमार्क और नीदरलैंड से भेज दी गई है। आने वाले दिनों में इनका इस्तेमाल किया जा सकता है। उसे रूसी हवाई हमलों से बचाव करने में भी मदद मिलेगी।</p>
<p>सम्मेलन में अमेरिकी विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन की ओर से यूक्रेन की नाटो संगठन की सदस्यता को लेकर स्पष्ट और मजबूत सेतू की बात तो जरूर कही गई है। लेकिन अंतिम फैसला युद्ध समाप्ति के बाद ही संभव हो पाएगा। तेजी से बदलते वैश्विक माहौल में आने वाली नई चुनौतियों से नाटो अब कैसे निपटता है, यह कठिन परीक्षा की घड़ी होगी।</p>
<p><strong>-महेश चंद्र शर्मा<br /></strong><strong>(ये लेखक के अपने विचार हैं)</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>ओपिनियन</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 17 Jul 2024 10:49:08 +0530</pubDate>
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                <title>अल्बानीज अमेरिका में होने वाले नाटो शिखर सम्मेलन में शामिल नहीं होंगे</title>
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/albanese-will-not-attend-nato-summit-in-america/article-83478"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-07/u1rer-(5)1.png" alt=""></a><br /><p>वाशिंगटन। ऑस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री एंथनी अल्बानीज ने अमेरिका की राजधानी वाशिंगटन में अगले सप्ताह होने वाले उत्तरी अटलांटिक संधि संगठन (नाटो) शिखर सम्मेलन में शामिल नहीं होने और रक्षा मंत्री रिचर्ड मार्लेस के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल भेजने का फैसला किया है। सिडनी मॉर्निंग हेराल्ड अखबार ने मामले से परिचित सूत्रों के हवाले से यह जानकारी दी। समाचार पत्र के मुताबिक कथित तौर पर यह निर्णय अल्बानीज ने तब लिया गया जब उन्हें शिखर सम्मेलन से पहले अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन के साथ द्विपक्षीय बैठक की पुष्टि नहीं मिली। प्रधानमंत्री कार्यालय ने उन्हें विवादों से बचने के लिए वहां बिल्कुल भी नहीं जाने की सलाह दी थी। इससे पहले अल्बानीज को शिखर सम्मेलन के अवसर पर इंडो-पैसिफिक फोर में जापान, दक्षिण कोरिया और न्यूजीलैंड के अपने समकक्षों के साथ बैठक करने की उम्मीद थी। </p><p>75वां नाटो शिखर सम्मेलन नौ से 11 जुलाई तक वाशिंगटन में होगा। नाटो महासचिव जेन्स स्टोलटेनबर्ग ने 17 जून को कहा था कि उन्होंने अमेरिका में नाटो के आगामी शिखर सम्मेलन में भारत-प्रशांत क्षेत्र के भागीदारों को आमंत्रित किया था। नाटो में 32 सदस्य देश शामिल हैं, लेकिन यह ऑस्ट्रेलिया सहित 40 से अधिक गैर-सदस्य देशों और अंतर्राष्ट्रीय संगठनों-नाटो भागीदारों-के साथ भी संबंध बनाए रखता है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 03 Jul 2024 12:07:43 +0530</pubDate>
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