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                <title>sanctions - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                            <item>
                <title>हॉर्मुज जलडमरूमध्य में बढ़ा तनाव : ट्रंप का ऐलान-ईरानी नौकाएं दिखते ही तुरंत नष्ट करें, अमेरिकी नौसेना प्रमुख ने त्यागपत्र दिया </title>
                                    <description><![CDATA[राष्ट्रपति ट्रंप ने हॉर्मुज जलडमरूमध्य में बारूदी सुरंगें बिछाने वाली ईरानी नावों को नष्ट करने का सख्त आदेश दिया है। अमेरिकी घेराबंदी के तहत 31 जहाजों को वापस लौटा दिया गया। तनाव के बीच अमेरिकी नौसेना प्रमुख जॉन फेलन ने इस्तीफा दे दिया है, जबकि ईरान ने बातचीत की शर्त 'हार की स्वीकारोक्ति' रखी है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/tension-increases-in-the-strait-of-hormuz-trump-announces/article-151521"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-01/trump.png" alt=""></a><br /><p>वॉशिंगटन। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हॉर्मुज जलडमरूमध्य में तनाव को और बढ़ाते हुए अपनी नौसेना को कड़े आदेश दिए हैं तथा कहा है कि यदि ईरान से जुड़ी कोई भी नाव इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग में बारूदी सुरंगें बिछाती हुई पाई जाए, तो उसे तुरंत ‘नष्ट’ कर दिया जाए। ट्रंप ने अपने ‘ट्रुथ सोशल’ पर लिखा कि इस तरह की हरकतों को रोकने में किसी भी तरह की झिझक नहीं होनी चाहिए। उन्होंने बताया कि अमेरिकी नौसेना की टीमें इस रास्ते को साफ करने के काम में जुटी हुई हैं और सुरक्षा के लिहाज से यह कदम उठाना जरूरी है।</p>
<p><strong>ईरान की घेराबंदी : 31 जहाजों को वापस लौटने का निर्देश</strong></p>
<p>ईरान के खिलाफ अपनी समुद्री घेराबंदी को और सख्त करते हुए अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने गुरुवार को पुष्टि की कि उसने ‘ईरान के विरुद्ध अमेरिकी घेराबंदी के हिस्से के रूप में 31 जहाजों को वापस मुड़ने या बंदरगाह पर लौटने का निर्देश दिया है।’वापस लौटाए गए जहाजों में अधिकांश तेल टैंकर बताये जा रहे हैं।</p>
<p><strong>अमेरिका पहले हार माने, तभी होगी बातचीत: ईरान </strong></p>
<p>ईरान के सांसद हामिदरज़ा हाजी बाबाई ने कहा है कि जब तक अमेरिका अपनी हार स्वीकार नहीं करता, तब तक उससे किसी भी प्रकार की वार्ता संभव नहीं है। ईरानी संसद के उपाध्यक्ष हाजी बाबाई ने कहा, अमेरिका के हार स्वीकार किए बिना कोई भी बातचीत निषिद्ध है। </p>
<p>अमेरिकी नौसेना प्रमुख जॉन फेलन ने त्यागपत्र दे दिया है। इसकी जानकारी अमेरिका के युद्ध विभाग ने दी। विभाग ने बुधवार को एक बयान में कहा, नौसेना प्रमुख जॉन सी. फेलन तत्काल प्रभाव से पद छोड़ रहे हैं। बयान में कहा गया है कि उप प्रमुख हंग काओ नौसेना के कार्यवाहक प्रमुख के रूप में सेवा देंगे।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 24 Apr 2026 09:48:20 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>अमेरिका-ईरान वार्ता पर संशय : बुधवार को समाप्त हो रहा संघर्ष विराम, नए कूटनीतिक दौर की उम्मीदें अब भी अनिश्चित</title>
                                    <description><![CDATA[अमेरिका और ईरान के बीच दो सप्ताह का संघर्ष विराम बुधवार को समाप्त हो रहा है, लेकिन इस्लामाबाद वार्ता पर अब भी अनिश्चितता बरकरार है। जहाज जब्ती और तीखी बयानबाजी ने तनाव बढ़ा दिया है। जहां जेडी वेंस के नेतृत्व में अमेरिकी दल की संभावना है, वहीं ईरान ने नाकेबंदी के बीच झुकने से साफ इनकार कर दिया है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/doubt-over-us-iran-talks-ceasefire-ending-on-wednesday-hopes-for/article-151188"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/america-and-iran.png" alt=""></a><br /><p>तेहरान। अमेरिका-ईरान के बीच दो सप्ताह के संघर्ष विराम की समय सीमा बुधवार को समाप्त होने वाली है, लेकिन इस्लामाबाद में प्रस्तावित वार्ता में शामिल होने की पुष्टि अभी तक दोनों पक्षों ने नहीं की है। इससे संकेत मिलता है कि नये कूटनीतिक दौर की उम्मीदें अब भी अनिश्चित बनी हुई हैं। समुद्र में बढ़ते तनाव और नेताओं की तीखी बयानबाजी के बीच पैदा हुई इस अस्पष्टता ने उन आशंकाओं को बढ़ा दिया है कि शांतिपूर्ण समाधान का रास्ता बंद हो सकता है।</p>
<p>ईरानी विदेश मंत्रालय ने रविवार को अमेरिकी नौसेना के जब्त ईरानी मालवाहक जहाज के साथ-साथ 'उसके नाविकों, चालक दल और उनके परिवारों' को रिहा करने की मांग की है। ईरान ने इस जब्ती का बदला लेने का संकल्प लिया है। दोनों पक्षों के अधिकारियों की ओर से हालांकि मिले-जुले संदेश आये हैं जिससे वार्ता की स्थिति अस्पष्ट बनी हुई है। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने किसी भी समझौते पर पहुंचने के दबाव का खंडन किया है, हालांकि उन्होंने संकेत दिया है कि अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल जल्द ही पाकिस्तान की यात्रा कर सकता है।</p>
<p>ईरानी पक्ष की ओर से अधिकारियों ने अधिक सतर्क रुख अपनाया है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा कि वार्ता के अगले दौर की 'कोई योजना नहीं' है, जबकि राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान ने तनाव कम करने के लिए कूटनीति की आवश्यकता पर जोर दिया है। सूत्रों के अनुसार, श्री वेंस और शीर्ष अमेरिकी अधिकारियों के आज पाकिस्तान के लिए रवाना होने की उम्मीद है, ताकि ईरान के साथ युद्ध को लेकर संभावित दूसरे दौर की वार्ता की जा सके।</p>
<p>यह कूटनीतिक अनिश्चितता वैश्विक तेल मार्ग के लिए महत्वपूर्ण होर्मुज जलडमरूमध्य में अस्थिरता के बीच उत्पन्न हुई है। अमेरिका लगातार नौसैनिक नाकेबंदी कर रहा है और हाल ही में ईरान के ध्वज वाले एक मालवाहक जहाज की जब्ती की घटना ने तनाव को और अधिक भड़का दिया है। दोनों पक्ष एक-दूसरे पर दो सप्ताह के संघर्ष विराम समझौते के उल्लंघन का आरोप लगा रहे हैं, जो जल्द ही समाप्त होने वाला है। ईरानी अधिकारियों ने इसे अमेरिकी आक्रामकता में बढ़ोतरी के रूप में वर्णित करते हुए कड़ी प्रतिक्रिया दी है। ईरानी संसद अध्यक्ष मोहम्मद बघेर कालीबाफ ने 'धमकी के साये में' बातचीत खारिज कर दिया है और चेतावनी दी कि दबाव की रणनीति उन्हें झुकने पर मजबूर नहीं कर पायेगी। इसी तरह प्रथम उपराष्ट्रपति मोहम्मद रजा आरिफ ने संकेत दिया कि ईरान के तेल निर्यात पर निरंतर प्रतिबंधों के वैश्विक ऊर्जा स्थिरता के लिए व्यापक परिणाम हो सकते हैं।</p>
<p>इस बीच पर्दे के पीछे कूटनीतिक रास्ते खुले हुए हैं। ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची और पाकिस्तान के मोहम्मद इशाक डार ने पिछले कुछ दिनों में कई दौर की चर्चा की है। इसमें संघर्ष विराम और नये सिरे से बातचीत की संभावना पर ध्यान केंद्रित किया गया है।<br />तनाव के बावजूद संवाद जारी रखने की इच्छा के कुछ धुंधले संकेत मिल रहे हैं। अमेरिकी अधिकारियों का मानना है कि संभावित समझौता पहुंच के भीतर है, हालांकि इसका विवरण अभी अस्पष्ट है। वहीं दूसरी ओर ईरानी नेताओं ने अमेरिका के दिये सार्वजनिक बयानों के प्रति संदेह व्यक्त किया है, विशेष रूप से उन दावों के बाद जिनमें कहा गया था कि प्रमुख प्रावधानों पर पहले ही सहमति बन चुकी है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 21 Apr 2026 16:30:21 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>ईरान ने अमेरिका के साथ बातचीत से इनकार किया, तो उसे 'अभूतपूर्व समस्याओं' का करना पड़ेगा सामना : डोनाल्ड ट्रंप</title>
                                    <description><![CDATA[अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को सख्त चेतावनी देते हुए कहा है कि यदि वह शांति वार्ता से इनकार करता है, तो उसे अभूतपूर्व समस्याओं का सामना करना पड़ेगा। नाकेबंदी और तनाव के बीच ट्रंप ने समझौते की उम्मीद जताई है, जबकि ईरान ने धमकियों के दबाव में झुकने से साफ मना कर दिया है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/if-iran-refuses-to-negotiate-with-america-it-will-face/article-151149"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-01/trump.png" alt=""></a><br /><p>मॉस्को। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि अगर ईरान अमेरिका के साथ बातचीत करने से इनकार करता है, तो उसे अभूतपूर्व समस्याओं का सामना करना पड़ेगा। राष्ट्रपति ट्रंप ने सोमवार को पत्रकार जॉन फ्रेडरिक्स के साथ साक्षात्कार में कहा, “ वे बातचीत करेंगे, और अगर वे ऐसा नहीं करते हैं, तो उन्हें ऐसी समस्याओं का सामना करना पड़ेगा, जैसी उन्होंने पहले कभी नहीं देखी होंगी।” अमेरिका के राष्ट्रपति ने यह उम्मीद भी जतायी कि अमेरिका और ईरान के बीच कोई समझौता हो जाएगा। उधर, ईरानी संसद के स्पीकर मोहम्मद बगर ग़ालिबाफ़ ने इससे पहले कहा था कि ईरान धमकियों के दबाव में अमेरिका के साथ बातचीत नहीं करेगा।</p>
<p>गौरतलब है कि अमेरिका और इज़रायल ने 28 फरवरी को ईरान में कुछ ठिकानों पर हमले करके युद्ध की शुरुआत की थी, जिससे काफी नुकसान हुआ और आम नागरिकों की भी जानें गयी। सात अप्रैल को अमेरिका और ईरान ने दो हफ़्ते के लिए संघर्ष-विराम की घोषणा की। इसके बाद पाकिस्तान के इस्लामाबाद में दोनों देशों के बीच हुई बातचीत का कोई नतीजा नहीं निकला। फिर युद्ध शुरू होने की कोई घोषणा नहीं की गयी, लेकिन अमेरिका ने ईरान के बंदरगाहों की घेराबंदी शुरू कर दी। मध्यस्थ अब बातचीत का एक नया दौर शुरू करवाने की कोशिश कर रहे हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
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                <pubDate>Tue, 21 Apr 2026 12:41:07 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची का आरोप : इस्लामाबाद में 'सहमति' के बहुत करीब होने के बावजूद नई शर्तों और प्रतिबंधों का करना पड़ा सामना, वार्ता विफल के लिए अमेरिका को ठहराया जिम्मेदार</title>
                                    <description><![CDATA[ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने इस्लामाबाद वार्ता की विफलता के लिए अमेरिका को जिम्मेदार ठहराया है। उन्होंने कहा कि 'सहमति' के करीब होने के बावजूद अमेरिका ने नई शर्तें और प्रतिबंध थोप दिए। अराघची ने चेतावनी दी कि शत्रुता से केवल शत्रुता ही पैदा होती है और अमेरिका ने इतिहास से कोई सबक नहीं सीखा।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/iranian-foreign-minister-abbas-araghchi-alleged-that-despite-being-very/article-150221"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/abbas-araghchi.png" alt=""></a><br /><p>तेहरान। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने इस्लामाबाद वार्ता की विफलता के लिए अमेरिका को जिम्मेदार ठहराते हुये कहा है कि 'बदलती शर्तों और प्रतिबंधों' को हमारे सामने रखा गया। अब्बास अराघची ने सोमवार को 'एक्स' पर अपनी पोस्ट में कहा, "वार्ता के दौरान सहमति के बहुत करीब होने के बावजूद बदलती शर्तों और प्रतिबंधों को हमारे समक्ष लाया गया।" अब्बास अराघची ने एक अन्य पोस्ट में कहा, "कोई सबक नहीं सीखा गया। सद्भावना से सद्भावना पैदा होती है और शत्रुता से शत्रुता।"</p>
<p>ईरान के विदेश मंत्री ने कहा कि 47 वर्षों में उच्चतम स्तर की गंभीर वार्ता में, ईरान ने युद्ध को समाप्त करने के लिए नेक नीयत के साथ अमेरिका के साथ बातचीत की थी। उन्होंने कहा कि लेकिन जब हम 'इस्लामाबाद सहमति पत्र' से केवल कुछ ही दूर थे, तो हमें बदलती शर्तों और प्रतिबंधों सामना करना पड़ा।</p>]]></content:encoded>
                
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                <pubDate>Mon, 13 Apr 2026 17:42:23 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव का तीखा हमला, बोले-अमेरिका रूस को सभी ऊर्जा बाजारों से बाहर निकालने की कर रहा है कोशिश </title>
                                    <description><![CDATA[रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने अमेरिका पर रूस को वैश्विक ऊर्जा बाजारों से बाहर करने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि वाशिंगटन अंतरराष्ट्रीय समझौतों के बजाय अपने हितों को ऊपर रख रहा है। लावरोव ने आगाह किया कि पश्चिम एशिया में अमेरिका-इजरायल की सैन्य कार्रवाइयों के विनाशकारी परिणाम पूरी दुनिया को लंबे समय तक भुगतने होंगे।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/russian-foreign-minister-sergei-lavrovs-sharp-attack-said-america-is/article-147418"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/rusaia-forgaain.png" alt=""></a><br /><p>मास्को। रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने शनिवार को कहा कि मास्को को वर्तमान में रूस के हितों का सम्मान करने के लिए अमेरिका की कोई प्रतिबद्धता नजर नहीं आ रही है क्योंकि वाशिंगटन मास्को को सभी ऊर्जा बाजारों से बाहर निकालने की कोशिश कर रहा है।</p>
<p>लावरोव ने एक रूसी टीवी कार्यक्रम में कहा, "हमें सभी वैश्विक ऊर्जा बाजारों से बाहर धकेला जा रहा है। अंततः केवल हमारा अपना क्षेत्र ही शेष रहेगा। अमेरिकी हमारे पास आएंगे और कहेंगे कि वे हमारे साथ सहयोग करने के लिए तैयार हैं। लेकिन अगर हम अपने क्षेत्र में पारस्परिक रूप से लाभकारी परियोजनाएं लागू करने और अमेरिकियों को उनकी रुचि की चीजें उपलब्ध कराने के लिए तैयार हैं और अपने हितों को ध्यान में रखते हैं, तो उन्हें भी हमारे हितों पर विचार करना चाहिए। अभी तक हमें ऐसा होता हुआ नहीं दिख रहा है।"</p>
<p>उन्होंने आगे कहा कि अमेरिका ने यूरोपीय ऊर्जा बाजारों में रूस के हाशिए पर चले जाने का स्वागत किया है और करता रहेगा, जो उनके अनुसार, विश्व स्तर पर ऊर्जा प्रभुत्व का एक खुला दावा है। लावरोव ने कहा, "यह एक असामान्य स्थिति है एक ऐसे दौर में वापसी जब अंतरराष्ट्रीय संबंधों के लिए कोई संरचना नहीं था। यह स्पष्ट रूप से कहा गया था कि अमेरिका के हित किसी भी अंतरराष्ट्रीय समझौते से ऊपर हैं।"</p>
<p>लावरोव ने यह भी कहा कि पश्चिम एशिया में अमेरिका और इजरायल की कार्रवाइयों के गंभीर परिणाम आने वाले बहुत लंबे समय तक महसूस किए जाएंगे। रूसी विदेश मंत्री ने कहा, "हालाँकि यह एक नाटक जैसा प्रतीत होता है और मुझे लगता है कि बहुत से लोग इसे समझते हैं,लेकिन हमारे अमेरिकी सहयोगियों द्वारा, इस मामले में इजरायलियों के साथ मिलकर किए जा रहे कार्यों के परिणाम अत्यंत गंभीर हैं। इनके दूरगामी परिणाम लंबे समय तक दिखाई देंगे।"</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
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                <pubDate>Sun, 22 Mar 2026 13:03:57 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>जी-7 के छह सदस्यों सहित 7 देशों ने होर्मुज जलडमरूमध्य से सुरक्षित आवागमन सुनिश्चित करने में दिखाई तत्परता, ईरानी हमलों की निंदा की</title>
                                    <description><![CDATA[जापान और ब्रिटेन सहित G7 के सात देशों ने होर्मुज जलडमरूमध्य में वाणिज्यिक जहाजों पर ईरानी हमलों की कड़ी निंदा की है। उन्होंने वैश्विक तेल और गैस आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए नौवहन की स्वतंत्रता का समर्थन किया। इन देशों ने ऊर्जा बाजारों को स्थिर करने और संयुक्त राष्ट्र के नियमों का पालन करने का संकल्प लिया है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/seven-countries-including-six-g-7-members-showed-readiness-to-ensure/article-147215"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/harmoz.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। जी7 के छह सदस्य देशों जापान, कनाडा, ब्रिटेन, फ्रांस, जर्मनी तथा इटली और नीदरलैंड ने वाणिज्यिक जहाजों पर ईरानी हमलों की निंदा की है और कहा है कि वह होर्मुज जलडमरूमध्य से जहाजों का सुरक्षित आवागमन सुनिश्चित करने में योगदान देने के लिए तैयार हैं। </p>
<p>सात देशों के नेताओं ने गुरुवार रात जारी एक संयुक्त बयान में कहा, हम खाड़ी में वाणिज्यिक जहाजों पर ईरान द्वारा किए गए हालिया हमलों, तेल एवं गैस प्रतिष्ठानों सहित नागरिक अवसंरचना पर हमलों और ईरानी बलों द्वारा होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद करने की कड़ी निंदा करते हैं। इन देशों ने बढ़ते संघर्ष पर गहरी चिंता व्यक्त की और ईरान से जलडमरूमध्य को वाणिज्यिक जहाजों के लिए अवरुद्ध करने के प्रयासों, धमकियों, बारूदी सुरंगों को बिछाने, ड्रोन एवं मिसाइल हमलों को तुरंत रोकने का आह्वान किया। उन्होंने ईरान से संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव 2817 का पालन करने का भी आग्रह किया।</p>
<p>उन्होंने तेल एवं गैस प्रतिष्ठानों सहित नागरिक अवसंरचना पर हमलों पर तत्काल व्यापक रोक लगाने की मांग की। बयान में कहा गया कि नौवहन की स्वतंत्रता अंतरराष्ट्रीय कानून का एक मूलभूत सिद्धांत है जिसमें संयुक्त राष्ट्र समुद्री कानून समझौता भी शामिल है। इसमें कहा गया कि ईरान की कार्रवाइयों का असर दुनिया के सभी हिस्सों के लोगों पर पड़ेगा, खासकर सबसे कमजोर वर्गों पर। उन्होंने कहा कि हम होर्मुज जलडमरूमध्य से सुरक्षित आवागमन सुनिश्चित करने के लिए उचित प्रयासों में योगदान देने के लिए तत्पर हैं और हम उन देशों की प्रतिबद्धता का स्वागत करते हैं जो तैयारी संबंधी योजना बना रहे हैं।</p>
<p>अंतर्राष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी द्वारा रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार की समन्वित निकासी को अधिकृत करने के निर्णय का स्वागत करते हुए उन्होंने ऊर्जा बाजारों को स्थिर करने के लिए अन्य कदम उठाने का संकल्प लिया जिसमें कुछ तेल एवं गैस उत्पादक देशों के साथ मिलकर उत्पादन बढ़ाने पर काम करना शामिल है। उन्होंने आश्वासन दिया कि वे संयुक्त राष्ट्र और अंतर्राष्ट्रीय वित्तीय संस्थानों के माध्यम से सबसे अधिक प्रभावित देशों को सहायता करने के लिए भी काम करेंगे।</p>
<p>बयान में कहा गया, समुद्री सुरक्षा एवं नौवहन की स्वतंत्रता सभी देशों के लिए लाभकारी है। हम सभी देशों से अंतरराष्ट्रीय कानून का सम्मान करने और अंतरराष्ट्रीय समृद्धि एवं सुरक्षा के मूलभूत सिद्धांतों का पालन करने का आह्वान करते हैं। इस संयुक्त बयान के लिए हालांकि किसी विशिष्ट भौतिक बैठक की जानकारी नहीं है लेकिन यह 11 मार्च को हुई, जी7 नेताओं की वर्चुआल बैठक में पश्चिम एशिया की बिगड़ती स्थिति पर चर्चा की गयी और नागरिक अवसंरचना पर हमलों की निंदा की।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 20 Mar 2026 17:19:09 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>ईरान-अमेरिका बातचीत: 26 फरवरी को होगी तीसरे दौर की बातचीत, समझौते को अंतिम रूप देने की दिशा में अतिरिक्त प्रयास</title>
                                    <description><![CDATA[अमेरिका और ईरान के बीच परमाणु समझौते को लेकर अगले दौर की वार्ता इस गुरुवार को जिनेवा में होगी। ईरान के विदेश मंत्री अराघची ने प्रतिबंध हटाने और शांतिपूर्ण परमाणु कार्यक्रम की मान्यता पर जोर दिया है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/iran-us-talks-to-be-held-on-february-26-third-round/article-144320"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-02/america-or-iran.png" alt=""></a><br /><p>काहिरा। अमेरिका और ईरान ने परमाणु समझौते को लेकर अलग-अलग दृष्टिकोण के बावजूद बातचीत जारी रखने का फैसला किया है मगर अमेरिका की ओर से सैन्य तैनाती में उल्लेखनीय वृद्धि ने इस प्रक्रिया की नाजुकता और टकराव के जोखिम को उजागर किया है। ओमान के विदेश मंत्री सैयद बद्र बिन हमद बिन हमूद अलबुसैदी ने रविवार को कहा कि अमेरिका-ईरान (एजेंसी) का अगला दौर गुरुवार को जिनेवा में होगा। </p>
<p>उन्होंने सोशल मीडिया मंच एक्स पर कहा, यह बताते हुए खुशी हो रही है कि अमेरिका-ईरान (एजेंसी) इस गुरुवार को जिनेवा में तय हुई है, और समझौते को अंतिम रूप देने की दिशा में अतिरिक्त प्रयास किए जाएंगे। ईरान की सरकारी समाचार एजेंसी इरना के अनुसार, रविवार को ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची और अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (आईएईए) के महानिदेशक राफेल ग्रोसी के बीच फोन पर बातचीत हुई, जिसमें रचनात्मक सहभागिता और संवाद के रास्ते को अपनाने के महत्व पर जोर दिया गया, ताकि एक टिकाऊ परमाणु समझौता हासिल किया जा सके। </p>
<p>यह बातचीत अराघची के उस बयान के बाद हुई, जिसमें उन्होंने शुक्रवार को अमेरिकी मीडिया आउटलेट एमएसएनबीसी को दिए साक्षात्कार में कहा था कि तेहरान दो से तीन दिनों के भीतर संभावित परमाणु समझौते का मसौदा तैयार कर अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल को सौंपेगा। सीबीएस न्यूज को रविवार को दिए साक्षात्कार में अराघची ने एक बार फिर कहा कि ईरान अमेरिका के साथ मतभेदों को बातचीत के जरिए सुलझाने को तैयार है। </p>
<p>उन्होंने कहा कि वह गुरुवार को जिनेवा में अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के विशेष दूत स्टीव विटकॉफ से मुलाकात कर सकते हैं और यह अब भी संभव है कि ईरान और अमेरिका के बीच कूटनीतिक समाधान निकाला जाए। अराघची ने कहा कि दोनों पक्ष संभावित समझौते के विभिन्न पहलुओं पर काम कर रहे हैं और गुरुवार को प्रारंभिक मसौदे पर चर्चा हो सकती है।</p>
<p>उन्होंने स्पष्ट किया कि समझौते में ईरान के शांतिपूर्ण परमाणु कार्यक्रम को मान्यता मिलनी चाहिए और अमेरिका द्वारा लगाए गए प्रतिबंध हटाए जाने चाहिए। इसके साथ ही उन्होंने राष्ट्रीय परमाणु कार्यक्रम के तहत यूरेनियम संवर्धन के अधिकार पर ईरान के अडिग रुख को दोहराया। </p>
<p>उन्होंने यह भी कहा कि ईरान और अमेरिका 2015 में हुए समझौते से बेहतर परमाणु समझौता कर सकते हैं। उनके अनुसार, इस बार अत्यधिक बारिकियों में जाने की जरूरत नहीं है, बल्कि बुनियादी बातों पर सहमति बनाकर यह सुनिश्चित किया जा सकता है कि ईरान का परमाणु कार्यक्रम शांतिपूर्ण रहे और साथ ही अधिक प्रतिबंध हटाए जाएं। </p>
<p>अराघची ने चेतावनी दी कि यदि अमेरिका ईरान पर हमला करता है तो ईरान को आत्मरक्षा का अधिकार है। उन्होंने कहा, हमें क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी ठिकानों पर हमला करना पड़ेगा। इस बीच, ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान ने रविवार को कहा कि अमेरिका के साथ हालिया एजेंसीओं से उत्साहजनक संकेत मिले हैं, लेकिन ईरान किसी भी संभावित स्थिति के लिए तैयार है। </p>
<p>उन्होंने सोशल मीडिया पर कहा, ईरान क्षेत्र में शांति और स्थिरता के लिए प्रतिबद्ध है। हालिया (एजेंसी)ओं में व्यावहारिक प्रस्तावों का आदान-प्रदान हुआ और उत्साहजनक संकेत मिले, हालांकि हम अमेरिका की गतिविधियों पर करीबी नजर रख रहे हैं और हर संभावित स्थिति के लिए तैयारियां की गयी हैं।</p>
<p>अमेरिका का कहना है कि किसी भी समझौते में ईरान द्वारा यूरेनियम संवर्धन पर प्रतिबंध, समृद्ध सामग्री को हटाना, लंबी दूरी की मिसाइलों पर सीमाएं और क्षेत्रीय सहयोगी समूहों को समर्थन में कटौती शामिल होनी चाहिए। विश्लेषकों का मानना है कि ये शर्तें ईरान के लिए स्वीकार करना बेहद कठिन होगा। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 23 Feb 2026 18:48:51 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>अमेरिका ईरान वार्ता: जून 2025 के हमलों का जिक्र करते हुए ट्रंप ने कहा, जिनेवा में ईरान से समझदारी की उम्मीद</title>
                                    <description><![CDATA[राष्ट्रपति ट्रंप ने जिनेवा परमाणु वार्ता से पूर्व ईरान को 'तर्कसंगत' होने की सलाह दी है। उन्होंने बी-2 बमवर्षक हमलों का हवाला देते हुए कहा कि समझौता न करने के परिणाम गंभीर होंगे।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/us-iran-talks-referring-to-the-june-2025-attacks-trump-said/article-143470"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-09/trump.png" alt=""></a><br /><p>वॉशिंगटन। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के परमाणु ठिकानों पर जून 2025 में हुए हमलों का जिक्र करते हुए कहा है कि जिनेवा में होने वाली बैठक में ईरान से समझदारी की उम्मीद है। राष्ट्रपति ट्रंप ने सोमवार को कहा कि वह अमेरिका और ईरान के बीच मंगलवार को जिनेवा में होने वाली उच्च स्तरीय परमाणु (एजेंसी) में अप्रत्यक्ष रूप से शामिल रहेंगे। उन्होंने फोर्दो, इस्फहान और नतांज पर हुए अमेरिकी हमलों का उल्लेख करते हुए ईरान से बातचीत के दौरान तर्कसंगत रुख अपनाने की अपील की। </p>
<p>राष्ट्रपति ट्रंप ने एयर फोर्स वन में पत्रकारों से बातचीत में कहा, मैं अप्रत्यक्ष रूप से शामिल रहूंगा और ये बेहद महत्वपूर्ण होंगी। मुझे उम्मीद है कि ईरान अधिक तर्कसंगत होंगे। जिनेवा बैठक में अमेरिकी दूत स्टीव विटकॉफ और राष्ट्रपति के सलाहकार जेरेड कुशनर के शामिल होने की संभावना है। समझौते की संभावनाओं पर ट्रंप ने कहा कि ईरान पारंपरिक रूप से कड़ा रुख अपनाता रहा है, लेकिन पिछले वर्ष अमेरिकी हमलों से उसने सबक लिया है और अब (एजेंसी) के लिए अधिक इच्छुक है। </p>
<p>उन्होंने कहा, मुझे नहीं लगता कि वे समझौता न करने के परिणाम चाहते हैं। यह बहुत महत्वपूर्ण होगा। ईरान कठिन (एजेंसी)कार है, बल्कि मैं कहूंगा कि वे खराब (एजेंसी)कार हैं। हम समझौता कर सकते थे, बी-2 भेजने की जरूरत नहीं पड़ती। उन्होंने कहा, वे समझौता करना चाहते हैं। पश्चिमी एशिया में शांति है, क्योंकि हमने उनके परमाणु ठिकानों पर बी-2 बॉम्बर से हमले किये। अगर हम हमले न करते तो उन्होंने एक महीने के भीतर परमाणु हथियार हासिल कर लिया होता। अगर ऐसा होता, तो समझौता ही अलग होता। </p>
<p>उल्लेखनीय है कि, जून में हुए अमेरिकी हमलों से पहले अमेरिका चाहता था कि ईरान यूरेनियम संवर्धन पूरी तरह रोके, जबकि ईरान ऐसा करने के अपने अधिकार पर जोर दे रहा था। जिनेवा की बैठक छह फरवरी को ओमान में हुए पहले अप्रत्यक्ष दौर के बाद हो रही है। उस बैठक को दोनों पक्षों ने अच्छी शुरुआत बताया था, हालांकि मतभेद बने रहे। अमेरिका मिसाइल कार्यक्रम और क्षेत्रीय समूहों जैसे हिजबुल्लाह पर भी चर्चा चाहता है, जबकि ईरान का कहना है कि उसका मिसाइल कार्यक्रम (एजेंसी) का विषय नहीं है और वह केवल प्रतिबंधों में राहत के बदले परमाणु प्रतिबंधों पर बात करेगा। </p>
<p>इस बीच, ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने जिनेवा में अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (आईएईए) प्रमुख से मुलाकात की और सोशल मीडिया पर लिखा कि वह निष्पक्ष और न्यायसंगत समझौते के लिए वहां पहुंचे हैं। उन्होंने कहा, धमकियों के सामने आत्मसमर्पण की कोई संभावना नहीं है।</p>
<p>आईएईए ने पिछले वर्ष इजरायल-अमेरिका हमलों के बाद ईरान के 440 किलोग्राम उच्च संवर्धित यूरेनियम भंडार पर स्पष्टता मांगी है और नतांज, फोर्दो तथा इस्फहान स्थलों तक पूर्ण पहुंच की मांग की है। ईरान ने सोमवार को होर्मुज जलडमरूमध्य में एक सैन्य अभ्यास भी किया। ईरान ने चेतावनी दी है कि अगर अमेरिका उसके ऊपर कोई भी हमला करता है तो वह होर्मुज को बंद कर देगा, जिससे दुनिया का 20 प्रतिशत तेल व्यापार बाधित होगा और कच्चे तेल की कीमतों में उछाल आएगा। अमेरिका चाहता है कि ईरान परमाणु हथियारों के अलावा अपने मिसाइल कार्यक्रम पर भी बात करे, लेकिन ईरान का कहना है कि वह प्रतिबंध हटाने के लिए सिर्फ परमाणु मुद्दों पर ही बात करेगा। </p>
<p>इस बीच, अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने सोमवार को हंगरी के दौरे पर कहा कि ईरान के साथ समझौता करना मुश्किल होगा। रुबियो ने कहा, मुझे लगता है कि यहां कूटनीतिक तरीके से एक समझौते पर पहुंचने का मौका है. लेकिन मैं इसे बढ़ा-चढ़ाकर भी नहीं बताना चाहता।</p>
<p>रुबियो ने कहा, यह मुश्किल होने वाला है। किसी के लिए भी ईरान के साथ असली समझौता करना बहुत मुश्किल रहा है, क्योंकि हम कट्टरपंथी शिया मौलवियों के साथ काम कर रहे हैं जो धार्मिक फैसले ले रहे हैं, भू-राजनैतिक नहीं। ईरान के साथ समझौता करना आसान नहीं है, लेकिन हम कोशिश करेंगे। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 17 Feb 2026 14:11:24 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>ईरानी सरकार की बड़ी घोषणा, कहा अगर अमेरिका प्रतिबंध हटा दें तो हम समझौते के लिये तैयार, दोनों पक्षों ने बैठक को बताया अच्दी शुरूआत </title>
                                    <description><![CDATA[अमेरिका और ईरान के बीच परमाणु समझौते हेतु मंगलवार को जिनेवा में अहम वार्ता होगी। ईरानी उप विदेश मंत्री माजिद तख्त-रवांची ने प्रतिबंध हटाने की शर्त पर यूरेनियम संवर्धन में कटौती का संकेत दिया है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/big-announcement-of-iranian-government-said-that-if-america-lifts/article-143406"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-02/1200-x-600-px)-(19).png" alt=""></a><br /><p>वॉशिंगटन। ईरान ने संकेत दिया है कि अगर अमेरिका प्रतिबंधों को हटाने पर चर्चा के लिए तैयार है तो वह वह अमेरिका के साथ परमाणु समझौते की पेशकश कर सकता है। अमेरिका-ईरान परमाणु (एजेंसी) का एक नया दौर मंगलवार को जिनेवा में होने वाला है, जिसमें अमेरिकी दूत स्टीव विटकॉफ और राष्ट्रपति के सलाहकार जारेड कुशनर के शामिल होने की उम्मीद है।</p>
<p>यह छह फरवरी को ओमान में हुए पहले अप्रत्यक्ष दौर के बाद हो रही है, जहाँ ईरान ने यूरेनियम संवर्धन के अधिकार की मांग की थी, जबकि अमेरिका ने बैलिस्टिक मिसाइलों और हिजबुल्लाह जैसे क्षेत्रीय सहयोगियों पर व्यापक चर्चा के लिए दबाव डाला था। दोनों पक्षों ने पिछली बैठक को एक अच्छी शुरुआत बताया था, हालांकि बड़े मतभेद अभी भी बने हुए हैं।</p>
<p>ईरान के एक वरिष्ठ अधिकारी ने रविवार को कहा कि ईरान परमाणु समझौते पर अमेरिका के साथ समझौते के लिए तैयार है, बशर्ते अमेरिकी प्रशासन प्रतिबंधों को हटाने पर चर्चा करने का इच्छुक हो। ईरान के उप विदेश मंत्री माजिद तख्त-रवांची ने भी एक साक्षात्कार में कहा कि अब गेंद अमेरिका के पाले में है कि वह यह साबित करे कि वे समझौता करना चाहते हैं। यदि वे ईमानदार हैं, तो मुझे यकीन है कि हम समझौते की राह पर होंगे।</p>
<p>रवांची ने मीडिया को बताया, अगर वे प्रतिबंधों के बारे में बात करने के लिए तैयार हैं, तो हम अपने कार्यक्रम से संबंधित इस और अन्य मुद्दों पर चर्चा करने के लिए तैयार हैं। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने कहा है कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ईरान के साथ निपटने में कूटनीति को प्राथमिकता देते हैं और प्रशासन वर्तमान में बातचीत पर ध्यान केंद्रित कर रहा है।</p>
<p>स्लोवाकिया के प्रधानमंत्री रॉबर्ट फिको के साथ ब्रातिस्लावा में एक संवाददाता सम्मेलन के दौरान रुबियो ने कहा, राष्ट्रपति ने स्पष्ट कर दिया है कि वह कूटनीति को प्राथमिकता देते हैं। अमेरिका क्षेत्र में सैन्य उपस्थिति बनाए रखते हुए ईरान के परमाणु मुद्दे का कूटनीतिक समाधान तलाश रहा है। इस बीच, ईरानी अधिकारियों ने भी हमला होने पर जवाब देने की तैयारी का संकेत दिया है, जिससे जिनेवा (एजेंसी) से पहले तनाव बना हुआ है।</p>
<p>यह बातचीत ऐसे समय में हो रही है जब ट्रंप ने अनुपालन के मामले में ईरान के पिछले रिकॉर्ड का हवाला देते हुए संभावित समझौते पर संदेह व्यक्त किया है। विटकॉफ और कुशनर ओमान की मध्यस्थता के माध्यम से जिनेवा में ईरानी प्रतिनिधिमंडल से मिलेंगे, जो ईरान के परमाणु संवर्धन कार्यक्रम और अत्यधिक संवर्धित यूरेनियम के भंडार पर ध्यान केंद्रित करेंगे। रुबियो ने पुष्टि की कि यदि कोई सैन्य कार्रवाई आवश्यक होती है, तो अमेरिका संसद के साथ परामर्श करने की सभी कानूनी आवश्यकताओं का पालन करेगा।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 16 Feb 2026 18:41:34 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>कनाडा में रूसी विमान एन-124 की जब्ती का मामला अभी भी अदालतों में चल रहा है: ओलेग स्टेपनोव</title>
                                    <description><![CDATA[कनाडा की अदालत में रूसी मालवाहक विमान एन-124 की जब्ती पर कानूनी जंग जारी है। राजदूत ओलेग स्टेपनोव ने इसे अवैध बताते हुए बिना शर्त विमान की वापसी की मांग की है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/the-case-of-seizure-of-russian-aircraft-an-124-in-canada/article-143408"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-02/1200-x-600-px)-(20).png" alt=""></a><br /><p>ओटावा। रूसी एयर कार्गो कंपनी वोल्गा-ड्निप्र के मालवाहक विमान संबंधित एन-124  की जब्ती का मामला अभी भी कनाडा की अदालतों में सुना जा रहा है। कनाडा में रूस के राजदूत ओलेग स्टेपनोव ने रूसी संवाद समिति रिया नोवोस्ती को यह जानकारी दी स्टेपनोव ने कहा, यह मामला अभी भी कनाडा की अदालतों में सुना जा रहा है। इसका मालिक वोल्गा-ड्निप्र इसमें एक पक्ष है। हम एक देश के रूप में इस कार्यवाही में शामिल नहीं हैं और चल रहे मामले के कानूनी विवरणों पर टिप्पणी नहीं कर सकते।</p>
<p>राजदूत ने कहा कि रूस कनाडा में सभी कानूनी विकल्प समाप्त होने के बाद ही किसी विशिष्ट कदम को उठाने पर विचार करेगा। उन्होंने  कहा, साथ ही, एकतरफा जब्ती पर हमारा सैद्धांतिक रुख अपरिवर्तित है। कनाडा ने जानबूझकर वोल्गा-ड्निप्र विमान को यहाँ जब्त किया और बाद में गिरफ्तारी और जब्ती के लिए झूठे आधार तैयार किए।</p>
<p>स्टेपनोव ने इस बात पर जोर दिया कि इस तरह की कार्रवाई अस्वीकार्य और अवैध हैं और विमान को बिना शर्त उसके मालिक को वापस किया जाना चाहिए। गौरतलब है कि, रूसी एयर कार्गो कंपनी वोल्गा-ड्निप्र द्वारा संचालित एन-124 विमान कनाडा सरकार के साथ एक अनुबंध के तहत कोविड-19 रैपिड टेस्ट की खेप लेकर 27 फरवरी, 2022 को चीन से कनाडा पहुँचा था।</p>
<p>विमान को अगले दिन रवाना होना था। हालांकि, 27 फरवरी, 2022 को कनाडा ने रूसी विमानों के लिए अपना हवाई क्षेत्र बंद कर दिया और प्रस्थान की अनुमति को खारिज कर दिया। तब से, विमान टोरंटो हवाई अड्डे पर खड़ा है। कनाडा में रूसी दूतावास ने बार-बार इस बात पर जोर दिया है कि कनाडा को जब्त किए गए एन-124 विमान को उसके मालिकों को बिना शर्त वापस करना चाहिए। इसकी जब्ती अस्वीकार्य और अवैध होगी। राजनयिक मिशन का मानना है कि यह मामला अपनी शुरुआत से ही अत्यधिक राजनीति से प्रेरित रहा है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 16 Feb 2026 17:22:58 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>कांग्रेस महासचिव का हमला, बोलें-भारत कांग्रेस व्यापार समझौते के तहत हम जरूरत का 52 प्रतिशत तेल नहीं खरीद सकेंगे </title>
                                    <description><![CDATA[कांग्रेस नेता रणदीप सुरजेवाला ने आरोप लगाया कि अमेरिका के साथ नए समझौते के तहत भारत अब रूस से सस्ता कच्चा तेल नहीं खरीद पाएगा। इससे देश को भारी आर्थिक नुकसान होगा।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/congress-general-secretarys-attack-india-congress-will-not-be-able/article-143383"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-02/1200-x-600-px)-(15)1.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। कांग्रेस ने कहा है कि हाल ही में अमेरिका के साथ हुए व्यापारिक समझौते के तहत जो शर्त रखी गयी है कि उसके तहत भारत, रूस से कच्चा तेल नहीं खरीदेगा और इस शर्त के बाद भारत अपनी जरूरत का 52 प्रतिशत कच्चा तेल अब नहीं खरीद सकेगा जिससे देश को भारी आर्थिक नुकसान होगा। </p>
<p>कांग्रेस महासचिव तथा पार्टी के राज्यसभा सदस्य रणदीप सिंह सुरजेवाला ने सोमवार को यहां पार्टी मुख्यालय में संवाददाता सम्मेलन में कहा कि अमेरिका के राष्ट्रपति ने छह फरवरी को एक आदेश में कहा है कि भारत ने वादा किया है कि वह रूस से कच्चा तेल नहीं खरीदेगा और अगर खरीदता है तो अमेरिका इस पर निगरानी रखेगा। निगरानी में यदि पाया जाता है कि भारत ने प्रत्यक्ष या परोक्ष से रूस से तेल खरीदा है तो भारत पर सारी टैरिफ पैनल्टी लागू कर दी जाएगी।</p>
<p>उन्होंने कहा, 14 फरवरी को अमेरिकी विदेश मंत्री ने भी यही बात दोहराई है। उन्होंने एक अंतरराष्ट्रीय मंच पर कहा है कि भारत ने वादा किया है कि वह रूस से तेल नहीं खरीदेगा। इस शर्त के अनुसार भारत अब अमेरिका के कहने पर रूस से भी कच्चा तेल नहीं खरीद सकेगा। इससे पहले अमेरिका के कहने पर भारत ने ईरान से कच्चे तेल की खरीद बंद कर दी थी।</p>
<p>रणदीप​ सिंह सुरजेवाला ने एक आंकड़ा देते हुए बताया, रूस तथा ईरान, दोनों देशों से भारत रुपए में तेल खरीदते था और इससे हमारा पैसा बचता था। भारत कच्चा तेल रूस से 40 प्रतिशत और 11 प्रतिशत ईरान से खरीदता था लेकिन ईरान से तेल खरीद पर अमेरिका ने प्रतिबंध लगाया है तो भारत ने उस प्रतिबंध को आसानी से मान लिया है। अब यह समझौता कर लिया गया है कि भारत रूस से भी तेल नहीं खरीद सकता है। इस तरह से भारत अपनी जरूरत का 52 प्रतिशत तेल का आयात नहीं कर सकेगा।</p>
<p>उन्होंने कहा कि भारत बराबर रूस तथा ईरान से कच्चा तेल खरीदता रहा है और इन दोनों देशों से भारत को सस्ता कच्चा तेल मिलता था। इसी का परिणाम है कि पिछले चार साल में भारत ने 15 लाख 24 हजार करोड का कच्चा तेल खरीदा और इससे भारत को एक लाख 81 हजार करोड़ रुपए की बचत हुई है लेकिन अब अमेरिका के साथ समझौते के बाद भारत सस्ता तेल नहीं खरीद सकेगा और इस खरीद में बचत नहीं कर सकेगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 16 Feb 2026 16:34:45 +0530</pubDate>
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                <title>अमेरिका ईरान प्रतिबंध: अमेरिका ने लगाए ईरान के गृह मंत्री, शीर्ष अधिकारियों पर प्रतिबंध, हिंसक कार्रवाई के लिए बताया जिम्मेदार</title>
                                    <description><![CDATA[ईरान में प्रदर्शनों पर हिंसा के आरोप में अमेरिका ने गृह मंत्री इस्कंदर मोमेनी समेत कई वरिष्ठ अधिकारियों और आईआरजीसी से जुड़े लोगों पर प्रतिबंध लगाए।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/america-iran-sanctions-america-imposes-sanctions-on-irans-interior-minister/article-141422"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-01/500-px)-(7)1.png" alt=""></a><br /><p>वॉशिंगटन। ईरान में जारी प्रदर्शन के बाद अमेरिका ने ईरान के गृह मंत्री इस्कंदर मोमेनी और कई अन्य वरिष्ठ अधिकारियों पर प्रतिबंध लगाते हुए कहा है कि राष्ट्रव्यापी प्रदर्शनों पर ईरानी प्रशासन पर हिंसक कार्रवाई के लिये ये सभी जिम्मेदार थे। अमेरिका के वित्त मंत्रालय ने शुक्रवार को इसकी जानकारी देते हुए कहा, मोमेनी ईरान इस्लामिक गणराज्य के हत्यारे कानून प्रवर्तन बल का संचालन करते हैं, जो हजारों शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों की हत्या के लिये जिम्मेदार है।</p>
<p>बयान में अमेरिकी वित्त विभाग के विदेशी संपत्ति नियंत्रण कार्यालय (ओएफएसी) ने कहा, आज अमेरिका के वित्त मंत्रालय के विदेशी संपत्ति नियंत्रण कार्यालय ने ईरानी लोगों के खिलाफ ङ्क्षहसक कार्रवाई करने वाले अधिकारियों के विरुद्ध अतिरिक्त कार्रवाई की। जिन अधिकारियों पर प्रतिबंध लगाए गये, उनमें ईरान के गृह मंत्री इस्कंदर मोमेनी शामिल हैं।</p>
<p>इन प्रतिबंधों में इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉप्र्स (आईआरजीसी) के वरिष्ठ अधिकारियों और ईरानी व्यवसायी बाबक मोर्तेजा जंजानी को भी निशाना बनाया गया है, जिन पर ईरानी लोगों से अरबों डॉलर के गबन का आरोप है। मंत्रालय ने जंजानी से जुड़े डिजिटल करेंसी विनिमय पर भी रोक लगा दी है।</p>
<p>अमेरिका के प्रतिबंधों के तहत नामित व्यक्तियों या संस्थाओं की कोई भी संपत्ति जब्त कर दी जाती है और अमेरिकी नागरिकों तथा कंपनियों को उनके साथ व्यापार करने से मना किया जाता है। वित्त मंत्रालय ने बताया कि जंजानी ने आईआरजीसी और व्यापक ईरानी शासन का समर्थन करने वाली परियोजनाओं को आर्थिक रूप से समर्थन दिया है।  </p>
<p>ओएफएसी ने पहली बार जंजानी से जुड़े दो डिजिटल संपत्ति विनिमय नामित किये। यह ईरानी अर्थव्यवस्था में काम करने वाले डिजिटल एसेट विनिमय के खिलाफ उसकी पहली कार्रवाई है। मंत्रालय के सचिव स्कॉट बेसेंट ने कहा, एक समृद्ध ईरान बनाने के बजाय शासन ने देश के तेल राजस्व के बचे हुए हिस्से को परमाणु हथियारों के विकास, मिसाइलों और दुनिया भर में आतंकवादी संगठन पर बर्बाद करना चुना है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ईरान के लोगों के साथ खड़े हैं और उन्होंने मंत्रालय को शासन के सदस्यों पर प्रतिबंध लगाने का आदेश दिया है। </p>
<p>मंत्रालय ईरानी नेटवर्क और भ्रष्ट अभिजात वर्ग को निशाना बनाना जारी रखेगी जो ईरानी लोगों की कीमत पर खुद अमीरी में जीते हैं। प्रतिबंधित किये गये अन्य अधिकारियों में आईआरजीसी इंटेलिजेंस ऑर्गनाइजेशन के माजिद खादेमी, तेहरान प्रांत के आईआरजीसी सैय्यद अल-शोहादा कॉप्र्स के कमांडर ग़ोरबान मोहम्मद वलीजदेह, हमादान प्रांत के आईआरजीसी कमांडर हुसैन जारे कमाली, गिलान प्रांत के आईआरजीसी कमांडर हामिद दमघानी, और करमानशाह प्रांत के एलईएफ कमांडर मेहदी हाजियन शामिल हैं। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 31 Jan 2026 14:05:14 +0530</pubDate>
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