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                <title>poet - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <title>कवि डॉ. पॉपुलर मेरठी से विशेष बातचीत, कहा- मुशायरों की मिट्टी से सोशल मीडिया तक कविता का दायरा बढ़ा</title>
                                    <description><![CDATA[डॉ. पॉपुलर मेरठी हिंदी-उर्दू के उन लोकप्रिय कवियों में हैं, जिन्होंने कवि सम्मेलन और मुशायरों के कई दौर देखे। उनका अनुभव केवल मंच तक सीमित नहीं रहा, बल्कि बदलते समय, मीडिया और समाज के साथ कविता के रिश्ते को भी उन्होंने बहुत करीब से महसूस किया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/special-conversation-with-poet-dr-popular-meerthi-said-the-scope/article-141122"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-01/1200-x-600-px)-(1200-x-600-px)-(2)55.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। डॉ. पॉपुलर मेरठी हिंदी-उर्दू के उन लोकप्रिय कवियों में हैं, जिन्होंने कवि सम्मेलन और मुशायरों के कई दौर देखे हैं। उनका अनुभव केवल मंच तक सीमित नहीं रहा, बल्कि बदलते समय, मीडिया और समाज के साथ कविता के रिश्ते को भी उन्होंने बहुत करीब से महसूस किया है। इस बातचीत में उन्होंने शायरी के पुराने दौर, सोशल मीडिया के प्रभाव और आज के संवेदनशील माहौल पर खुलकर अपने विचार रखे।<br />डॉ. पॉपुलर मेरठी बताते हैं कि एक समय ऐसा था, जब कविता और मुशायरा ही अभिव्यक्ति का मुख्य माध्यम हुआ करता था। उस दौर में कवियों को यह चिंता नहीं होती थी कि किस तरह की ऑडियंस सामने बैठेगी। श्रोता कविता सुनने और समझने आते थे। आज के समय में हालात बदल गए हैं। सोशल मीडिया ने कविता को हर हाथ में पहुंचा दिया है, लेकिन इसके साथ चुनौतियां भी बढ़ी हैं। उन्होंने बताया कि सोशल मीडिया ने कवियों के लिए कई दरवाजे खोले हैं।</p>
<p>आज अगर कोई कवि कविता पढ़ता है, तो वह कविता कुछ ही पलों में देश-विदेश तक पहुंच जाती है। पहले कवि सम्मेलन और मुशायरों में सीमित श्रोता होते थे, आज सोशल मीडिया पर वही कविता लाखों लोग सुनते हैं। उन्होंने बताया कि देश-विदशों में जाकर मुशायरे पढ़ चुके हैं और वहां भी शायरी के शौकीन बड़ी तादाद में मिलते हैं। डॉ. पॉपुलर मेरठी कहते हैं कि इस बदलाव से कवि और शायरों की पहचान तेजी से बढ़ी है। आज कोई नया कवि भी आता है, तो लोग उसे सुनने आते हैं। और जब कोई बड़ा नाम आता है, तो उसके लिए रास्ते अपने आप बन जाते हैं। वे मुस्कराते हुए कहते हैं। मीडिया और सोशल प्लेटफॉर्म से जुड़ाव ने प्रचार और पहचान, दोनों को आसान बनाया है।</p>
<p><strong>व्यंग्य आज भी असरदार है, बस उसकी भाषा और संकेत बदल गए</strong><br />उन्होंने इस बात पर जोर देते हैं कि सत्ता और समाज पर लिखते समय आज बेहद सतर्क रहने की जरूरत है। व्यंग्य उनकी पहचान रहा है, लेकिन मैं मानता हूं कि अब सीधे कहने के बजाय इशारों में कहना ज़्यादा कारगर है। व्यंग्य आज भी असरदार है, बस उसकी भाषा और संकेत बदल गए हैं। अपने बचपन को याद करते हुए वे बताते हैं कि उन्हें कविता का शौक बहुत पहले लग गया था। उनके शिक्षक कविता गाया करते थे और गांव में कवि सम्मेलन होते थे। वहीं से कविता की समझ विकसित हुई। पहले श्रोता शायरी को गंभीरता से समझते थे, आज कई बार हल्के चुटकुलों को ही कविता मान लिया जाता है। यह बदलाव उन्हें चिंतित करता है। डॉ. पॉपुलर मेरठी मानते हैं कविता समय चाहती है, साधना चाहती है। उन्होंने कहा कि समाज की बुराइयों पर अंकुश लगाना कविता का मूल उद्देश्य रहा है, लेकिन आज के दौर में यह काम बहुत सोच-समझकर करना पड़ता है। यही संतुलन एक सच्चे कवि की पहचान है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 29 Jan 2026 10:23:36 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>कविताओं के माध्यम से कुछ कवि राजनीति में पाना चाहते हैं स्थान: सुरेश अवस्थी</title>
                                    <description><![CDATA[मुझे काव्यपाठ करते हुए तीन दशक से अधिक समय हो गया है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/suresh-awasthi-wants-to-find-some-poets-in-politics-through/article-102277"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-01/786.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। पिंकसिटी में आकर हम गुलाबी-गुलाबी हो जाते हैं। मुझे काव्यपाठ करते हुए तीन दशक से अधिक समय हो गया है। इस दौरान अमेरिका, दुबई, इंग्लैंड सहित 24 से अधिक देशों में हुए कवि सम्मेलनों में हिस्सा ले चुका हूं। ये कहना था कवि सुरेश अवस्थी का। उन्होंने कहा कि विदेशों में रहने वाले भारतवंशियों को रोज कविताएं सुनने का मौका नहीं मिलता। क्योंकि भारत में तो इसके आयोजन होते रहते हैं, लेकिन विदेशों में इसके कभी कभार ही आयोजन होते हैं। इसलिए विदेशों में कवि सम्मेलनों में लोग कवियों को मन से सुनते हैं। उन्हें लगता है जैसे कोई अपना आ गया हो।</p>
<p>अवस्थी का कहना था कि कवि सम्मेलनों में कविताएं कम हो रही हैं और लाफ्टर बढ़ रहा है। क्योंकि आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में हर कोई व्यस्त और परेशान रहता है। परेशानी भरी लाइफ के बीच कुछ हंसी के पल मिलें, तो लोग इन्हें छोड़ना नहीं चाहते। ऐसे में कवि कविताओं में कुछ हंसी-ठिठोली भी कर देते हैं। </p>
<p><strong>नहीं पता कविताओं का अर्थ :</strong></p>
<p>कवि सुरेश अवस्थी का कहना है कि सोशल मीडिया के समय में हर इंसान की जिंदगी के लगभग हर पल सोशल मीडिया पर उपलब्ध हैं। कहीं जाना हो या कोई कार्यक्रम हर गतिविधियां सोशल मीडिया पर अपलोड कर दूसरों तक आसानी से पहुंचाई जा रही है। लेकिन इस बीच सोशल मीडिया के लोगों में से एक वर्ग ऐसा भी है जिन्हें कविताओं का अर्थ पता नहीं है। इससे आज के समय में कविताओं का स्तर नीचे की ओर जा रहा है। हालांकि इस बीच राजस्थान, मध्यप्रदेश, उत्तराखण्ड सहित कई ऐसे राज्य हैं, जहां आज भी बढ़ी संख्या में कविताओं के श्रेता हैं।</p>
<p><strong>राजनीति में पाना चाहते हैं जगह :</strong></p>
<p>कवि सुरेश अवस्थी का कहना है कि सोशल मीडिया के जमाने में कवि और कविताओं को सपोर्ट नहीं मिला है। आजकल तो देखने में आया है कि कविता के माध्यम से कुछ कवि राजनीति में स्थान पाना चाहते हैं। वे राजनीतिक संदर्भ को लेकर कविताएं पढ़ते हैं। कहा जाए तो जिस तरह राजनीति करने वाले लोग राजनीतिक फायदा उठाने के लिए आए दिन बयानबाजी करते हैं, ठीक उसी तरह कवि भी ऐसा करके राजनीतिक दुनिया के आसपास छाए हुए हैं। </p>
<p><strong>छोटे कमरों से बाहर अब होटलों और अन्य जगह हो रहे आयोजन :</strong></p>
<p>कवि अवस्थी ने बताया कि पहले के जमाने में संसाधन कम हुआ करते थे। हमने वो दिन भी देखा है जब एक छोटे से कमरे में कविता पाठ किए जाते थे। हमें बैठने के लिए छोटी चारपाइयों में जगह मिलती थी। पैदल-पैदल आयोजन स्थल जाया करते थे। फिर साइकिलें आई और अब बस, ट्रेन और अब फ्लाइट्स की भी सुविधा मिल रही है। </p>
<p><strong>हास्य और व्यंग के नाम पर फूहड़ता बर्दाश्त नहीं :</strong></p>
<p>हास्य कवि अवस्थी का कहना है कि देशभर में हजारों की संख्या में कवि सम्मेलन हो रहे हैं। जहां कई संस्थाएं कवि सम्मेलनों में शुद्ध कविता पाठ कराती हैं। लेकिन इस बीच देखा जा रहा है कि कवि सम्मेलनों में हास्य और व्यंग के नाम पर फूहड़ता परोसी जा रही है। जिसे कतई बर्दाश्त नहीं किया जाना चाहिए। यहां तक की अब तो राजनीति फायदा उठाने वाले व्यक्तियों पर भी व्यंग किए जाने लगे हैं, जो गलत है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 28 Jan 2025 12:26:36 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>कवि सबका होता है, जैसे देश व संविधान: जावेद</title>
                                    <description><![CDATA[हिन्दी और उर्दू के कवि कुंवर जावेद का कहना है कि सोशल मीडिया का फायदा यह है कि आपका काम मिनट से पहले पूरी दुनिया में पहुंच जाता है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/the-poet-belongs-to-everyone-like-the-country-and-the/article-102275"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-01/78-(11)1.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। हिन्दी और उर्दू के कवि कुंवर जावेद का कहना है कि सोशल मीडिया का फायदा यह है कि आपका काम मिनट से पहले पूरी दुनिया में पहुंच जाता है। नुकसान यह है कि जिनके पास काम पहुंचता है, वे एक झटके में पुराना कह देते हैं। लेकिन हमें गर्व होता है कि हमने भी कोईगीत, कविता, शेर, शायरी एक कार्यक्रम में सुनाया था। सोशल मीडिया के आने से कवि सम्मेलन तो कम नहीं हुए, उनकी क्वांटिटी में इजाफा ही हुआ है, लेकिन क्वालिटी को लेकर उनका ग्राफ  नीचे आया है। नकल का दौर है, लोग रील बना बना के डाल रहे हैं। अरे भाई गोविंदा, शाहरुख, प्रभुदेवा का डांस हम देख चुके हैं। मालिक ने सबको अलग अलग बनाकर इस धरती पर भेजा है, सबके भीतर एक सॉफ्टवेयर है, बस उसको खोजने और पकड़ने की देर है। लोगों को रील की बजाय रियल के पीछे भागना चाहिए। जावेद ने कहा कि कवि  सबका होता है, जैसे देश सबका है, संविधान सबका होता है, वैसे ही क्रिएटर भी सबका होता है। जावेद ने कहा कि कभी कभी आप वो काम कर रहे होते हैं, जो आपका मन नहीं होता, लेकिन आपको करना पड़ता है। चाहे फिर कोई भी वजह रही हो, लेकिन जब आप उसमें दो चार महीने गुजार लेते हैं तो फिर वह आपके नेचर का हिस्सा हो जाता है और फिर आप एक क्रिएटर भी हो जाते हो। </p>
<p> कुंवर ने कहा कि फाइन आर्ट्स में प्लानिंग नहीं चलती। फाइन आर्ट्स वालों के अंदर ही सपने और ख्वाब होते हैं और वह खुद व खुद ही बाहर आते हैं। कभी कभी गांव का भोजन भी फाइव स्टार होटल को मात दे देता है।</p>
<p><strong>कवियों को थोड़ा गंभीर होने की जरूरत :</strong>  पूराने और नए कवि सम्मेलन व कवि के सवाल के जवाब में जावेद ने कहा कि मुझे 40 साल हो गए मैंने तीन दौर देख लिए, मैंने मुझसे जो सीनियर थे उनको भी देखा, सुना, उसके बाद की जो पीढ़ी आई उसका भी लुत्फ  लिया और अब जो दौर या पीढ़ी है उनको भी सुन रहा हूं। आज के दौर के कवियों या पीढ़ी को बस यही कहना चाहता हूं कि अब आप थोड़ा सा गंभीर हो जाएं, देश के प्रति, श्रोताओं के प्रति और जो आयोजनकर्ता है उनके प्रति। सभी को इंसाफ  मिलना चाहिए और इंसाफ  का एक ही रास्ता है खुद लिखो, खुद पढ़ो, सब कुछ खुद का होना चाहिए। जयपुर को लेकर उन्होंने कहा कि यह शहर तो खुद एक यादों का भंडार है, एक दो यादों से तो काम चलेगा नहीं। इस शहर से तो पूरी दुनिया प्रभावित है। मेरा और मेरे बच्चों का बहुत ज्यादा लगाव रहा है इस शहर से, हम लोग खूब घूमने आया करते थे। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 28 Jan 2025 12:18:56 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>आईडी नहीं थी, तो दसवीं की मार्कशीट दिखाकर फ्लाइट से मुम्बई गया : सुरेश अलबेला</title>
                                    <description><![CDATA[आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में हंसना बहुत जरूरी है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/if-there-was-no-draft-add-id-then-suresh-albela/article-102273"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-01/78-(5)3.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में हंसना बहुत जरूरी है। क्योंकि लोग घर, बाहर सहित कई तरह के तनावों से घिरे हुए हैं। ऐसे में कविता के माध्यम से उनकी तनाव भरी जिंदगी में कुछ पल हंसी के आ जाएं, तो इससे अच्छी बात और क्या होगी? ये कहना है हास्य कवि सुरेश अलबेला का। उन्होंने कहा कि मैं टेंशन नहीं लेता क्योंकि इससे दिमाग पर लोड पड़ता है। हां,अमीर का घर वही है, जहां बुजुर्ग एवं बच्चे मुस्करा रहे हों। क्योंकि ऑफिस से थका मांदा व्यक्ति जब घर आता है, तो बच्चों की मुस्कराहट से व्यक्ति की थकान दूर हो जाती है और बुजुर्गों के आशीर्वाद और उनके ज्ञान से बड़ी से बड़ी कठिनाइयां पलभर में दूर हो जाती हैं।  </p>
<p><strong>    कुछ नया सुनाना सबसे बड़ा चैलेंज :</strong></p>
<p>हास्य कवि सुरेश अलबेला का कहना है कि आज के समय में देशभर में हजारों की तादाद में कवि सम्मेलन होते हैं। ऐसे में हर कवि सम्मेलन में लोगों को नई कविताएं सुनाना सबसे बड़ा चैलेंज है। क्योंकि ये जमाना सोशल मीडिया का है, आजकल लोग यूट्यूब, फेसबुक, इंस्टाग्राम पर सब सुन और देख लेते हैं। हम भी रोज-रोज कहां से नई-नई हास्य कविताएं लिखें। इसके बावजूद लोगों को मुस्कुराने के लिए कुछ न कुछ लिखते रहते हैं। </p>
<p><strong>    बडे समारोह के रूप में होते थे कवि सम्मेलन :</strong></p>
<p>सुरेश अलबेला का कहना था कि पहले के जमाने में सोशल मीडिया नहीं हुआ करता था। साथ ही की-पेड वाले फोन ही हुआ करते थे। उस समय कवि सम्मेलनों का आयोजन जश्न की तरह होता था। बड़ा समारोह माना जाता था। अब लोग मोबाइल फोन और सोशल मीडिया के माध्यम से घर बैठे ही कविताएं देख और पढ़ रहे हैं। एक तरह से मोबाइल और सोशल मीडिया ने लोगों की आउटडोर एक्टिविटी पर प्रतिबंध सा लगा दिया है। पुराने कवियों की बात करें तो वे सोशल मीडिया के बारे में नहीं जानते थे। अब 21वीं सदी में कवि इनका बखूबी इस्तेमाल कर रहे हैं। इससे सोशल मीडिया प्लेटफार्म पर इनके फॉलोअर्स की संख्या भी बढ़ रही है। </p>
<p><strong>    जिंदगी जीरो मान रहा था लेकिन इनाम में खुले 900 रुपए :</strong></p>
<p>अलबेला का कहना था कि मेरे सफर की शुरुआत बड़ी रोचक और रोमांचक रही है। मेरी जन्म भूमि चौथ का बरवाड़ा है, कोटा मेरी कर्म भूमि है। जैसे जैसे बड़ा होने लगा, तो हंसी मजाक के छोटे कार्यक्रमों में हिस्सा लेने लगा। इस बीच जयपुर में लॉफ्टर चैलेंज वालों ने ऑडिशन देने के लिए मुझ से सम्पर्क किया। उन्होंने कहा कि आपको ऑडिशन देने जयपुर आना है। लेकिन बड़ी समस्या ये थी कि मेरे पास पैसे नहीं थे। इस बीच अप्रेल 2007-08 में एक सज्जन का फोन आया कि जयपुर में महामूर्ख कवि सम्मेलन है। परंतु समस्या ये थी कि उसी दिन दोपहर में ऑडिशन भी था। ऐसे में जल्द ही एक मित्र से सौ रुपए उधार लिए। लेकिन सौ रुपए में मुझे मजा नहीं आया। एक दुकान पर इनाम खुलने वाली पर्ची पर दांव लगाया। दुकान वाले ने पूछा क्या नम्बर खोलूं तो मैंने भी कह दिया कि जिंदगी वैसे भी जीरो है, जीरो नम्बर खोल दो। फिर क्या था जीरो नम्बर पर ही 900 रुपए का इनाम खुला। </p>
<p><strong>    सलेक्शन के बाद किया मुम्बई का रुख :</strong></p>
<p>सुरेश अलबेला ने बताया कि मुम्बई से मेरे पास लॉफ्टर चैलेंज वालों का फोन आया कि आप ऑडिशन में सलेक्ट हो गए हैं। अब आपको शो में हिस्सा लेने के लिए मुम्बई आना है। उन्होंने कहा कि फ्लाइट का टिकट कहां से बनाना है तो मैंने भी कह दिया कि कोटा से। थोड़ी देर बाद उनका कॉल आया कि यहां से नहीं हो पाएगा तो मैंने कहा जयपुर से बना दीजिए। टिकट बना और मेरे पास कोरियर से आया। अब समस्या ये थी कि मेरे पास आईडी नहीं थी तो 10वीं की मार्कशीट दिखाकर फ्लाइट में बैठकर मुम्बई के लिए रवाना हुआ। मुम्बई में लॉफ्टर चैलेंज का विनर भी रहा।  इसके बाद मैं अब तक करीब 27 देशों में कवि सम्मेलन कर चुका हूं। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 28 Jan 2025 12:13:17 +0530</pubDate>
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                <title>वेद स्वयं काव्यरूप, उनमें काव्य का सम्पूर्ण सौन्दर्य समाहित : संजय झाला</title>
                                    <description><![CDATA[देवस्य पश्य काव्यं न ममार न जीर्यति’ के वैदिक वचन में देव के काव्य के रूप में वेद का ही निर्देश किया गया है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/veda-himself-contains-the-entire-beauty-of-poetry-in-them/article-102271"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-01/78-(8)2.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। ‘देवस्य पश्य काव्यं न ममार न जीर्यति’ के वैदिक वचन में देव के काव्य के रूप में वेद का ही निर्देश किया गया है और वेद के निर्माता परमात्मा के लिए वेदों मेंअनेक जगह ‘कवि’ शब्द का प्रयोग किया गया है। इसलिए वेद स्वयं काव्यरूप हैं और उनमें काव्य का सम्पूर्ण सौन्दर्य पाया जाता है। इसलिए साहित्यशास्त्र में काव्य सौन्दर्य के आधायक जिन गुण, रीति, ध्वनि आदि तत्त्वों का विवेचन किया गया है, वे सभी तत्व मूल रूप में वेद में पाए जाते हैं। ये कहना है फूड डिपार्टमेंट में डिप्टी डायरेक्टर और कवि संजय झाला का। </p>
<p><strong>काव्य की प्रयोजन-ग्रहनीयता और महत्ता :</strong> संजय झाला ने कहा कि काव्य की ग्रहनीयता को अग्नि पुराण में भी कहा गया है। लोक में मनुष्य होना दुर्लभ है, मनुष्य होने पर भी विद्या अत्यंत दुर्लभ है, विद्या के होने पर भी कवि होना दुर्लभ है और कवि होने पर शक्ति अर्थात प्रतिभा अत्यंत दुर्लभ है। यहां प्रतिभा से आशय निश्चित रूप से काव्य के प्रेषण, संप्रेषण, रोचकता और उसकी प्रभावोत्पादकता तथा गुण-अवगुण की अभिव्यक्ति से ही है। </p>
<p><strong>कविता का वैश्विक प्रसार-प्रसारण : </strong>झाला ने कहा कि 1983 में नव वर्ष के कार्यक्रम में सर्वप्रथम सुरेंद्र शर्मा की हास्य की लोकप्रिय कविता कालू का प्रसारण हुआ। 1984 में दूरदर्शन द्वारा कुबेर दत्त जी के निर्देशन में प्रथम आधिकारिक कवि सम्मेलन आयोजित किया गया जिसमें 22 कवि सम्मिलित हुए। इसके संचालक अशोक चक्रधर और अध्यक्षता गोपाल प्रसाद व्यास ने की थी। 1988-89 में भारत का पहला लाफ्टर-शो दूरदर्शन ने प्रारंभ किया। जिसका नाम था ‘कहकहे’। जिसमें कवि और स्टैंड अप कॉमेडियन दोनों को सम्मिलित किया गया। इसके प्रोड्यूसर शरद दत्त थे और इसमें प्रश्नों के उत्तर शरद जोशी दिया करते थे। </p>
<p><strong>कवियों को कुर्ते-पाजामे से इन्द्रधनुषी रंगत वाले लिबासों और मेकअप से किया फैशनेबल : </strong>संजय झाला ने कहा कि कवि सम्मेलनों के वर्तमान और उसके स्वरूप को परिवर्तित-परिवर्धित और परिष्कृत करने का श्रेय जाता है प्रख्यात कवि, अभिनेता और मोटिवेशनल स्पीकर शैलेश लोढ़ा को। जिसने विभिन्न टीवी चैनल, शोज के माध्यम से कविता को इंडिविजुअल से यूनिवर्सल, ग्लोबल और नोबल बना दिया। कवि और कविता को मार्केबल-रिमार्केबल, प्रेजेंटेबल बनाया और कवियों को कुर्ते-पाजामे से इंद्रधनुषी रंगत वाले लिबासों और मेकअप से फैशनेबल किया। कविता पगडंडियों से राजमार्गों पर, कस्बों से कॉरपोरेट घरानों तक आईं। कवि बसों से एयरबसों तक और रोडवेज से एयरवेज तक आई। कवि-कविता और कवि सम्मेलनों की एक नई परिभाषा गढ़ी गई। वेद को ‘देवों का अमर काव्य’ कहा गया है। ‘देवस्य पश्य काव्यं न ममार न जीर्यति’ के वैदिक वचन में देव के काव्य के रूप में वेद का ही निर्देश किया गया है और वेद के निर्माता परमात्मा के लिए वेदों में अनेक जगह ‘कवि’ शब्द का प्रयोग किया गया है। इसलिए वेद स्वयं काव्यरूप है और उसमें काव्य का सम्पूर्ण सौन्दर्य पाया जाता है। </p>
<p><strong>नाट्य और काव्य में समानता :</strong></p>
<p>झाला का कहना है कि देवासुर संग्राम में लड़ते-लड़ते देवता और असुर बुरी तरह थक गए थे। उनके प्रतिनिधि प्रजापति ब्रह्मा के पास गए और अपनी स्थिति का वर्णन किया। साथ ही उनसे प्रार्थना की कि कोई ऐसी विधि खोजी जाए जिससे जीवन की उदासी दूर भागे और मन में प्रसन्नता का संचार हो तो ब्रह्मा जी ने सोच-समझकर नाट्य वेद का आविष्कार किया। इसके साथ ही कविता का भी यह उद्देश्य है कि वह थके मांदे मन में ऊर्जा का संचार करे। नाटक और कविता भिन्न-भिन्न रुचि के लोगों के लिए संपूर्ण रूप से समर्थन करने वाली होती है। नाटक के लिए कालिदास ने कहा ‘नाट्यम भिन्न  रुचेर्जनस्य बुधाप्येकम समाधनं’ नाटक और काव्य सामान्य जन का तो मनोरंजन करता ही है पर समझदार विद्वानों को संतुष्ट न करे, तब तक उसकी कलात्मकता से प्रयोग करने वाले को संतोष नहीं होताा। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 28 Jan 2025 12:07:03 +0530</pubDate>
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                <title>कविता आज भी जिंदा है, पहले भी जिंदा थी और आगे भी रहेगी : सुनील व्यास </title>
                                    <description><![CDATA[ हास्य कवि सुनील व्यास का कहना है कि पुराने कवि सम्मेलन ट्रेडिशनल होते थे। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/kavita-is-still-alive-even-today-and-sunil-vyas-will/article-102268"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-01/78-(7)2.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। हास्य कवि सुनील व्यास का कहना है कि पुराने कवि सम्मेलन ट्रेडिशनल होते थे। इसके श्रोता ये मानते थे कि रात को 12 बजे बजे बाद कविता का रंग और सुरूर चढ़ेगा। पहले ज्यादातर कवि सम्मेलन देर रात या सुबह तक भी चलते थे। वहीं आज के कवि सम्मेलन शो के रूप में बदल गए है और इसका सबसे बड़ा कारण एंटरटेनमेंट के कई साधन होना है, लेकिन ये बात जरूर कहना चाहूंगा कि कविता आज भी जिंदा है, पहले भी जिंदा थी और आगे भी रहेगी। लाफ्टर शो, कवि सम्मेलन का नया स्वरूप है। जहां कवि सम्मेलन आज भी जिंदा है और लाफ्टर शो कुछ सेलेक्टेड जगहों पर ही जिंदा है। आजकल ओपन माइक का ट्रेंड और चला है। इसको मैं हास्य नहीं मानता हूं, इसमें हास्य तरसता है। केवल गालियों का उपयोग ज्यादा होता है। इस ओपन माइक कार्यक्रम में बीच में लगता है अब हास्य आएगा, लेकिन वो हास्य इंतजार करता है कि मैं कब आऊंगा। सोशल मीडिया का प्रभाव ये पड़ा है कि जो स्ट्रगल हम लोगों को करना पड़ा, वो आज की जेनरेशन को नहीं करना पड़ा है। हम कवि सम्मेलन में कागज-कॉपी पेन लेकर जाते थे, लेकिन आज के दौर में इन चीजों की जरूरत नहीं पड़ती है। आज के कवि पुराने नए दोनों की कविताओं को आसानी से सोशल मीडिया पर आसानी से देख और सुन सकते है। </p>
<p>व्यास ने कहा कि जिन नए बच्चों ने अच्छा लिखा है, जो लिखना चाहते है उनके लिए ये अच्छा प्लेटफॉर्म मिल गया है। वो रातों-रात वायरल हो गए है। इसी कारण सोशल मीडिया की वजह से ही इनकों हमारे दौर के बराबर स्ट्रगल नहीं करना पड़ रहा है। नेगेटिव प्रभाव कंटेंट कॉफी का पड़ा है। आजकल के दौर में हर कोई कंटेंट को कॉपी कर उसका उपयोग कर रहा है। अधिकतर लोग मेहनत करना नहीं चाहते है। इसके अलावा लोगों ने पढ़ना छोड़ दिया है। पहले के लोग पढ़ते थे। जब तक पढ़ा नहीं जाएगा, तब तक आप गहराइयों में नहीं उतर पाओगे। साथ ही महसूस भी नहीं कर पाओगे। व्यास ने नवज्योति के कवि सम्मेलन देश राग के बारे में बोला कि मैं बहुत बड़ा सौभाग्शाली हूं कि मुझे इसमें भाग लेने का मौका मिला। मैंने इस कवि सम्मेलन की बहुत तारीफे सुनी है। मैं बहुत ही भावुक हूं और खुश भी हूं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 28 Jan 2025 12:00:27 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
                            </item>
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                <title>साइकिल चलाना, एक्टिंग करना सीखा जा सकता है, लेकिन कविताएं सीखी नहीं जा सकती : जगदीश सोलंकी</title>
                                    <description><![CDATA[कविताएं कल भी हो रही थीं और ये आज भी हो रही हैं। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/deshrag-cycling-can-be-learned-to-act-but-poems-cannot/article-102264"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-01/78-(10).png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। कविताएं कल भी हो रही थीं और ये आज भी हो रही हैं। देश और विदेशों में हजारों की संख्या में कवि सम्मेलन हो रहे हैं। कहा जाए तो गली-मौहल्लों में होने वाले ये आयोजन अब बड़ी-बड़ी जगहों पर आयोजित हो रहे हैं। खासकर हास्य कवियों को खूब पसंद किया जा रहा है। इस बीच कई बार आयोजकों को ये पता नहीं होता कि अच्छे कवि कौन हैं। वे जल्दबाजी में इसका चयन नहीं कर पाते। ये कहना है कवि जगदीश सोलंकी का। उन्होंने कहा कि कवि सम्मेलन जैसे बड़े आयोजनों के लिए कवियों का चयन महत्वपूर्ण होता है। ताकि श्रोता भी अच्छी कविताओं से मुखातिब हो सकें। </p>
<p><strong>जिनमें ज्ञान की कमी, वे कवि नहीं :</strong></p>
<p>कवि जगदीश सोलंकी का कहना था कि बड़े-बड़े मंचों पर कवि सम्मेलन हो रहे हैं। मंच के सामने हजारों की संख्या में श्रोता होते हैं, जो कवियों की कविताओं को सुनते हैं। कई बार ऐसे कवि भी आ जाते हैं, जिनमें ज्ञान की कमी होती है। असल में वे कवि नहीं होते हैं। जिस तरह साइकिल चलाना, एक्टिंग करना, कार चलाना तो सीखी जा सकती है, लेकिन कविताएं सीखीं नहीं जाती, बल्कि उन्हें लिखना पड़ता है। इसके लिए भाव अंदर से आते हैं। इसके लिए हर बार कुछ नया सुनाने के लिए सोचना और लिखना पड़ता है। </p>
<p><strong>सोशल मीडिया का सकारात्मक और नकारात्मक दोनों प्रभाव :</strong></p>
<p>सोलंकी का कहना था कि आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में किसी के पास समय नहीं है। अपनों के बीच दूरियां बढ़ा दी है। पहले परिवार के लोग साथ मिलकर कवि सम्मेलनों में कवियों को सुनने जाया करते थे, लेकिन जब से सोशल मीडिया का जमाना आया है, तब से लोग सम्मेलनों में जाने की बजाया घर के एक कमरे में मोबाइल फोन के जरिए इन्हें देखने लगे हैं। वहीं, सकारात्मक प्रभाव की बात करें तो कवियों को अपनी बात देश-विदेश तक पहुंचाने के लिए एक प्लेटफार्म मिला है, जहां से वे कम समय में हजारों लोगों तक अपनी बात पहुंचा सकते हैं।  ऐसे में जिन्हें सोशल मीडिया का उपयोग नहीं आता वे पीछे रह गए हैं, वहीं जिन्हें इनका उपयोग आता है, वे बहुत आगे निकल गए हैं। </p>
<p><strong>बड़े स्तर पर हो रहे हैं कवि सम्मेलन :</strong></p>
<p>कवि जगदीश सोलंकी का कहना है कि पहले की अपेक्षा अब कवि सम्मेलन बड़े स्तर पर होने लगे हैं। इनके आयोजनों का दायरा भी बढ़ा है। यहां तक कि विदेशों में भी कवि सम्मेलनों की अधिक मांग होने लगी है। वहां भी बड़े स्तर पर इनके आयोजन हो रहे हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 28 Jan 2025 11:56:12 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
                            </item>
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                <title>जयपुर: धूमधाम से मनाया लहरिया उत्सव </title>
                                    <description><![CDATA[कवयित्रियों ने श्रृंगार रस सहित विविध रसों की काव्य धारा से समां बांध दिया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/jaipur-lahariya-festival-celebrated-with-pomp/article-18338"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-08/t-2.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal"><span lang="hi" style="font-size:10pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">जयपुर। काव्य साधिका मंच की ओर से मालवीय नगर में लहरिया उत्सव मनाया गया। अध्यक्षा डॉ रानी तंवर ने बताया कि कवित्रियों ने लहरिया उत्सव बड़े हर्षोल्लास के साथ मनाया। जिसमें वरिष्ठ कवित्रियों वीना चौहान</span>, <span lang="hi" style="font-size:10pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">डॉ शारदा कृष्ण</span>,<span lang="hi" style="font-size:10pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">विजय लक्ष्मी देथा<span> </span>के सानिध्य में प्रसिद्ध कवयित्री सपना सोनी और ममता जाट</span>,<span lang="hi" style="font-size:10pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">चंचल चपल </span>,<span lang="hi" style="font-size:10pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">पवनेश्वरी</span>,<span lang="hi" style="font-size:10pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">उमेश नाग जी</span>,<span lang="hi" style="font-size:10pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">प्रीति शर्मा</span>, <span lang="hi" style="font-size:10pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">दर्शना उत्सुक</span>,<span lang="hi" style="font-size:10pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">रेखा शर्मा नीलम सपना</span>,<span lang="hi" style="font-size:10pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">मंजू कपूर </span>,<span lang="hi" style="font-size:10pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">सलोनी क्षितिज और अन्य कवयित्रियों ने श्रृंगार रस सहित विविध रसों की काव्य धारा से समां बांध दिया। कविता ही नहीं कवित्रियों ने अद्भुत शास्त्रीय नृत्य प्रस्तुत कर आश्चर्य चकित कर दिया। कार्यक्रम का सफल संचालन नीति आहूजा ने किया। इस दौरान कई तरह की प्रतियोगिताएं भी आयोजित की गईँ।</span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 08 Aug 2022 16:33:42 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>गूगल बना शायर</title>
                                    <description><![CDATA[ “शुक्र मनाते हैं आप जैसे यूजर्स का, जो हमें सही राह दिखाते हैं. बेहतर बनाते जाने का ये सफ़र रुकेगा नहीं, मेरे हमसफ़र.”]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/google-made-poet/article-15664"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-07/google.jpg" alt=""></a><br /><p> इन दिनों गुगल पर एक शिकायत काफी ट्रेंडिग है.. दरअसल अधिकारिक ट्विटर पर अपनी शिकायत एक व्यक्ति ने गूगल के साथ शेयर की। कार्तिक ने अपने ट्वीट में लिखा, कि डियर गूगल इतने बढ़िया मैप्स बनाए, छोटा एक सा फीचर और डाल देते कि साफ-साफ बोल दे फ्लायर ओवर पर चढ़ना है या नीचे से जाना है। 5 इंच के स्क्रीन पर आधे मिलिमीटर का डेफ्लेक्शन से देखे आदमी? आपका अपना’ 2 किलोमीटर से यू टर्न लेते हुआ आदमी।</p>
<p>कार्तिक द्वारा की गई इस शिकायत को गूगल ने भी हल्के में नहीं लिया और बेहद ही शायराना अंदाज़ में उसका जवाब दिया और लिखा, “शुक्र मनाते हैं आप जैसे यूजर्स का, जो हमें सही राह दिखाते हैं. बेहतर बनाते जाने का ये सफ़र रुकेगा नहीं, मेरे हमसफ़र.”</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 21 Jul 2022 19:01:05 +0530</pubDate>
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                <title>अखिल भारतीय कप्तान दुर्गाप्रसाद चौधरी हिन्दी सेवा सम्मान समारोह आज</title>
                                    <description><![CDATA[इस पुरस्कार की शुरुआत 2012 से की गई थी। अब तक अशोक चक्रधर, पदमश्री सुरेन्द्र शर्मा, पद्मभूषण गोपालदास नीरज, आसकरण अटल, मधुप पांडे, शैलेष लोढ़ा, हरिओम पंवार, डॉ. कुंवर बेचैन, समीर अंजान और विनीत चौहान को ये पुरस्कार दिया जा चुका है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/all-india-captain-durgaprasad-chaudhary-hindi-service-award-ceremony-today--renowned-comic-poet-arun-jaimini-will-be-honored/article-5024"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-02/dp_chaudhary-ji.jpg" alt=""></a><br /><p> जयपुर। दैनिक नवज्योति की ओर से शनिवार को अखिल भारतीय कप्तान दुर्गाप्रसाद चौधरी हिन्दी सेवा सम्मान समारोह आयोजित किया जाएगा। दैनिक नवज्योति के निदेशक हर्ष चौधरी ने बताया कि यह पुरस्कार प्रख्यात हास्य कवि अरुण जैमिनी को दिया जाएगा। इस पुरस्कार की शुरुआत 2012 से की गई थी। अब तक अशोक चक्रधर, पदमश्री सुरेन्द्र शर्मा, पद्मभूषण गोपालदास नीरज, आसकरण अटल, मधुप पांडे, शैलेष लोढ़ा, हरिओम पंवार, डॉ. कुंवर बेचैन, समीर अंजान और विनीत चौहान को ये पुरस्कार दिया जा चुका है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 26 Feb 2022 10:23:36 +0530</pubDate>
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