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                <title>s. jaishankar - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <title>'दलाल' देश बना शांतिदूत? कांग्रेस नेता जयराम रमेश का केंद्र पर हमला ; शांति वार्ता में पाकिस्तान की मेजबानी, भारतीय कूटनीति में बदलाव ज़रूरी</title>
                                    <description><![CDATA[कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने केंद्र सरकार की विदेश नीति पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि जिस पाकिस्तान को विदेश मंत्री ने 'दलाल' कहा, वही आज अमेरिका-ईरान शांति वार्ता की मेजबानी कर रहा है। रमेश के अनुसार, पाकिस्तान का बढ़ता वैश्विक प्रभाव और डोनाल्ड ट्रंप से उसकी करीबी भारत की रणनीतिक हार और कूटनीतिक विफलता का संकेत है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/pakistan-hosting-peace-talks-change-in-indian-diplomacy-necessary-congress/article-151104"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-05/jairam-ramesh-2.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। कांग्रेस ने सरकार पर पाकिस्तान को उसकी नीतियों के कारण अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अलग-थलग करने में विफल रहने का आरोप लगाते हुए कहा है कि जिस देश को विदेश मंत्री एस. जयशंकर ‘दलाल’ बता रहे थे, उसी को दूसरी बार अमेरिका-ईरान शांति वार्ता की मेजबानी का मौका मिल रहा है। कांग्रेस संचार विभाग के प्रभारी जयराम रमेश ने सोमवार को एक बयान में इसे केंद्र के नेतृत्व वाली सरकार की विदेश नीति के लिए झटका बताया और कहा कि अब कूटनीतिक तथा रणनीतिक स्तर पर बदलाव की सख्त जरूरत है।</p>
<p>उन्होंने विदेश मंत्री पर भी निशाना साधा और कहा, “बहुत जानकार और हमेशा सलीके से पेश आने वाले विदेश मंत्री ने जिस देश को ‘दलाल’ बताया था, वही आज अमेरिका-ईरान शांति वार्ता के दूसरे दौर की मेजबानी कर रहा है। बारह अप्रैल को पहले दौर की वार्ता पूरी होने के बाद पाकिस्तान ने सऊदी अरब और कतर से छह अरब डॉलर का कर्ज लिया, ताकि संयुक्त अरब अमीरात के 3.5 अरब डॉलर के कर्ज को चुका सके और 1.43 अरब डॉलर के यूरोबॉन्ड की एक किश्त का भुगतान कर सके।”</p>
<p>जयराम रमेश ने कहा कि पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था गंभीर संकट में है और वह मित्र देशों की सहायता पर निर्भर है, इसके बावजूद वह एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक भूमिका निभा रहा है। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान ने ओसामा बिन लादेन जैसे सभी आतंकवादियों को शरण दी, अफगानिस्तान में ड्रग पुनर्वास केंद्रों पर बमबारी की और हाल में पहलगाम आतंकवादी हमले की साजिश रची। उन्होंने कहा कि यह स्पष्ट है कि केंद्र सरकार की क्षेत्रीय और वैश्विक कूटनीति पाकिस्तान को अलग-थलग करने में विफल रही है, जबकि नवंबर 2008 के मुंबई आतंकवादी हमले के बाद तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के समय भारत ने पाकिस्तान पर प्रभावी दबाव बनाया था।</p>
<p>कांग्रेस नेता ने कहा कि यह भारत के लिए चिंता का विषय है कि पाकिस्तान के सेना प्रमुख आसिम मुनीर अब डोनाल्ड ट्रंप के करीबी माने जा रहे हैं। उनके अनुसार, पाकिस्तान ने ट्रंप के परिवार और उनके करीबी नेटवर्क के साथ संबंध बनाने में भारत की तुलना में अधिक सफलता पायी है। उन्होंने कहा, “यह भी केंद्र सरकार की विदेश नीति के लिए बड़ा झटका है। भारत को अपनी कूटनीतिक रणनीति और तौर-तरीकों में व्यापक बदलाव की जरूरत है, जिसके लिए मौजूदा नेतृत्व सक्षम नहीं दिखता।”</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 20 Apr 2026 18:13:15 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>पश्चिम एशिया में शांति बहाली पर पाकिस्तान को महत्व देना भारत की कूटनीतिक विफलता: जयराम रमेश ने खड़े किए भारत की विदेश नीति पर गंभीर सवाल</title>
                                    <description><![CDATA[कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने पश्चिम एशिया संकट में पाकिस्तान को मध्यस्थ बनाए जाने पर मोदी सरकार को घेरा है। उन्होंने इसे भारत की बड़ी कूटनीतिक विफलता बताते हुए कहा कि आतंकवाद को पनाह देने वाले देश को 'ब्रोकर' बनाना आपत्तिजनक है। जयराम ने डॉ. मनमोहन सिंह सरकार की उपलब्धियां गिनाते हुए वर्तमान विदेश नीति पर सवाल उठाए।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/giving-importance-to-pakistan-on-restoration-of-peace-in-west/article-147949"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-09/jairam-ramesh.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। कांग्रेस ने कहा है कि पश्चिम एशिया में शांति बहाली के वास्ते मध्यस्थ के रूप में आतंकवादी गतिविधियों को बढ़ावा देने वाले पाकिस्तान का नाम सामने आना भारत की कूटनीतिक विफलता है और अब विदेश मंत्री एस जयशंकर इस विफलता पर पर्दा डालने का प्रयास कर रहे हैं। कांग्रेस संचार विभाग के प्रभारी जयराम रमेश ने गुरुवार को एक बयान में कहा कि पाकिस्तान जैसे देश को मध्यस्थ के रूप में स्वीकार किया जाना बेहद आपत्तिजनक है। उनका कहना था कि पाकिस्तान लंबे समय से आतंकवाद को बढ़ावा देने, ओसामा बिन लादेन जैसे आतंकियों को पनाह देने, परमाणु अप्रसार नियमों के उल्लंघन और ए. क्यू. खान नेटवर्क के जरिए परमाणु प्रसार में शामिल रहा है। उसने अफगानिस्तान में नागरिक ठिकानों पर हमले किए और अपने ही नागरिकों तथा अल्पसंख्यकों के खिलाफ कार्रवाई की।</p>
<p>जयराम रमेश ने कहा कि 2008 के मुंबई हमले के बाद डॉ मनमोहन सिंह सरकार ने पाकिस्तान को वैश्विक स्तर पर अलग-थलग कर दिया था, लेकिन हाल के घटनाक्रमों में ऐसा नहीं हो सका। उन्होंने आसिम मुनीर के बयानों का हवाला देते हुए कहा कि इसके बावजूद पाकिस्तान विश्व मंच पर और प्रासंगिक बनता जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया "हमारी सरकार की कूटनीति, वैश्विक संपर्क और नैरेटिव प्रबंधन की कमजोरियों के कारण एक अस्थिर देश को 'ब्रोकर' की भूमिका मिल गई है, जो भारत की विदेश नीति पर गंभीर सवाल खड़े करता है।"</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 26 Mar 2026 14:42:00 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>आर्मेनिया सरकार को जयशंकर ने दिया धन्यवाद: 550 से अधिक भारतीय नागरिकों को ईरान से निकालने में की मदद, बचाव अभियान जारी</title>
                                    <description><![CDATA[ईरान में फंसे 550 से अधिक भारतीयों को आर्मेनिया के रास्ते सुरक्षित निकाला गया है। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने इस चुनौतीपूर्ण समय में सहयोग के लिए आर्मेनिया का आभार व्यक्त किया। छात्र और तीर्थयात्री सड़क मार्ग से आर्मेनिया पहुँच रहे हैं, जहाँ से उन्हें विशेष उड़ानों द्वारा दिल्ली लाया जा रहा है। यह रेस्क्यू ऑपरेशन अब भी जारी है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/jaishankar-thanked-the-armenian-government-for-helping-in-evacuating-more/article-146723"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/armaina.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। आर्मेनिया ने ईरान में फंसे 550 से अधिक भारतीय नागरिकों को सुरक्षित निकालने में भारत की मदद की है। विदेश मंत्री डॉ. एस जयशंकर ने सोमवार को ईरान से अब तक 550 से अधिक भारतीय नागरिकों की सुरक्षित वापसी में सहयोग के लिए आर्मेनिया सरकार और वहां के लोगों के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर कहा, ईरान से अब तक 550 से अधिक भारतीय नागरिकों की सुरक्षित निकासी की सुविधा प्रदान करने के लिए आर्मेनिया की सरकार और लोगों को धन्यवाद। इन चुनौतीपूर्ण समय में उनके समर्थन की सराहना करता हूं।</p>
<p>छात्रों, तीर्थयात्रियों और व्यवसायियों सहित भारतीय नागरिक ईरान के विभिन्न शहरों से सड़क मार्ग के जरिए सीमा पार कर आर्मेनिया पहुँच रहे हैं। वहां से इन लोगों को येरेवन के शॉर्ट नोट्स अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डेसे व्यावसायिक उड़ानों (जैसे दुबई के रास्ते) के माध्यम से नयी दिल्ली वापस लाया जा रहा है।</p>
<p>हालांकि, अब तक 550 से अधिक लोगों को निकाला जा चुका है, लेकिन यह अभियान अभी भी जारी है। इसी मार्ग से 15 मार्च को मुख्य रूप से जम्मू-कश्मीर के 70 छात्रों का एक जत्था दिल्ली पहुँचा था। इस पूरे प्रयास का प्रबंधन तेहरान और येरेवन में स्थित भारतीय मिशनों द्वारा आर्मेनियाई अधिकारियों के साथ घनिष्ठ सहयोग से किया जा रहा है। सरकार ने 12 मार्च को कहा था कि वह उन भारतीय नागरिकों की सहायता कर रही है जो अजरबैजान और आर्मेनिया के रास्ते व्यावसायिक उड़ानों से घर लौटना चाहते हैं। </p>
<p>विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा, हम उन्हें वीजा और सड़क मार्ग से सीमा पार करने में सहायता कर रहे हैं। जायसवाल ने यह भी कहा कि सरकार ने तेहरान में रहने वाले कई भारतीयों को देश के अन्य सुरक्षित स्थानों पर स्थानांतरित किया है और जो लोग आर्मेनिया या अजरबैजान के रास्ते वापस आना चाहते हैं, उन्हें वीजा संबंधी मदद दी जा रही है।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 16 Mar 2026 18:39:34 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur KD]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>भारत ने यूएनएचआरसी में दोहराया आतंकवाद मानवाधिकारों के लिए सबसे गंभीर खतरा, एकीकृत वैश्विक प्रतिक्रिया की आवश्यकता पर दिया जोर</title>
                                    <description><![CDATA[जेनेवा में राजदूत सिबी जॉर्ज ने स्पष्ट किया कि आतंकवाद मानवाधिकारों के लिए गंभीर खतरा है और इसके खिलाफ वैश्विक एकजुटता अनिवार्य है। भारत ने डिजिटल तकनीक और AI के माध्यम से 1.4 अरब लोगों के सशक्तिकरण का उदाहरण देते हुए न्याय और समानता पर जोर दिया। परिषद से केवल प्रस्तावों के बजाय ठोस कार्रवाई की मांग की गई।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/india-reiterates-in-unhrc-that-terrorism-is-the-gravest-threat/article-146253"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/unhrc.png" alt=""></a><br /><p>जेनेवा। भारत ने बुधवार को जेनेवा में संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद (यूएनएचआरसी) में इस बात को दोहराया कि आतंकवाद मानवाधिकारों के लिए सबसे गंभीर खतरों में से एक बना हुआ है और इसके खिलाफ एक एकीकृत वैश्विक प्रतिक्रिया की आवश्यकता है। भारत की ओर से राजदूत सिबी जॉर्ज ने परिषद के 61वें सामान्य सत्र में आह्वान किया कि परिषद सभी रूपों और अभिव्यक्तियों में आतंकवाद का मुकाबला करने के लिए दृढ़ रहे।</p>
<p>राजदूत ने कहा, जैसा कि विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने कुछ दिन पहले इस सम्मानित परिषद को संबोधित करते हुए रेखांकित किया था कि हमारे विचार-विमर्श केवल बयानों और प्रस्तावों तक सीमित नहीं रहने चाहिए, बल्कि सबसे कमजोर लोगों के दैनिक जीवन में मूर्त सुधार लाने वाले होने चाहिए। जॉर्ज ने जोर देकर कहा, आतंकवाद मानवाधिकारों के लिए सबसे गंभीर खतरों में से एक है। हमें इसके सभी रूपों और अभिव्यक्तियों का मुकाबला करने में अडिग रहना चाहिए। इस मुद्दे पर परिषद को एक स्वर में बोलना जारी रखना चाहिए।</p>
<p>राजदूत ने भारत में डिजिटल उपकरणों और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) के उपयोग का उल्लेख करते हुए बताया है कि कैसे इन तकनीकों ने 1.4 अरब भारतीयों को सशक्त बनाया है, जिससे न्याय तक पहुंच, नागरिक और राजनीतिक अधिकार, लोकतांत्रिक भागीदारी और महिला सशक्तिकरण का विस्तार हुआ है। जॉर्ज ने नई दिल्ली में हाल ही में संपन्न एआई इम्पैक्ट समिट का भी हवाला दिया और इस बात पर जोर दिया कि एआई की शक्ति का वास्तविक लाभ तभी मिलता है जब इसके फायदे समान रूप से साझा किए जाएं, जिसमें ग्लोबल साउथ भी शामिल हों।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 12 Mar 2026 16:16:25 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>पश्चिम एशिया संकट पर विपक्ष के हंगामे के बीच लोकसभा की कार्यवाही तीन बजे तक स्थगित: सदन ने दी भारतीय क्रिकेट टीम को विश्व कप जीत की बधाई, जयशंकर ने दिया विस्तृत वक्तव्य </title>
                                    <description><![CDATA[लोकसभा में पश्चिम एशिया संघर्ष पर चर्चा की मांग को लेकर विपक्ष ने भारी हंगामा किया, जिसके कारण कार्यवाही स्थगित करनी पड़ी। विदेश मंत्री एस जयशंकर के वक्तव्य के दौरान नारेबाजी जारी रही। संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने विपक्ष के व्यवहार को 'गैर-जिम्मेदाराना' बताया। सदन ने भारतीय क्रिकेट टीम को विश्व कप जीत की बधाई भी दी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/amid-opposition-uproar-lok-sabha-proceedings-adjourned-till-3-pm/article-145828"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/lok-sabha.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष पर चर्चा कराने की मांग पर विपक्ष के हंगामे के कारण लोकसभा की कार्यवाही तीन बजे तक के लिए स्थगित कर दी गयी। सदन की कार्यवाही बारह बजे शुरु होते ही पीठासीन अधिकारी जगदंबिका पाल ने भारत की टी20 क्रिकेट विश्व कप में जीत की सदन को सूचना दी। सदन की ओर से भारतीय क्रिकेट टीम को बधाई देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की गयी। उसके बाद कांग्रेस के सदस्यों में पश्चिम एशिया संघर्ष पर चर्चा कराने की मांग करते हुए सदन के बीचोंबीच आ गये और नारेबाजी करने लगे। हंगामे के बीच पीठासीन अधिकारी ने उसके बाद जरूरी कागजात सदन के पटल पर रखवाये। जगदंबिका पाल ने कहा कि विदेश मंत्री का वक्तव्य आ रहा है आप लोग अपने अपने स्थान पर चले जायें। शायद आप जो मांग कर रहे हैं उसका उत्तर मिल जाये। विपक्ष के भारी हंगामे और शोर-शराबे के बीच ही विदेश मंत्री एस जयशंकर ने अपना वक्तव्य देना शुरू किया।</p>
<p>हंगामा बढने पर पीठासीन अधिकारी ने कहा कि विदेश मंत्री ने पश्चिम एशिया संकट पर विस्तृत वक्तव्य दिया है। विदेश मंत्री ने सारी बातों का जवाब दिया है। इस बीच संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि विपक्ष भ्रमित है उसे पता ही नहीं कि क्या करना है। लोक सभा अध्यक्ष के खिलाफ नोटिस देते हैं, फिर दोबारा नोटिस देते हैं। हम चर्चा के लिए तैयार हैं तो दूसरा नोटिस देने का क्या मतलब है। उन्होंने कहा कि इस तरीके का व्यवहार सदन में कभी नहीं देखा है। उन्होंने कहा कि एक आदमी देश का महाराजा है क्या, कि सिर्फ उनकी बात सुनी जाएगी। कांग्रेस के लोगों को अंतरआत्मा में झांककर देखना चाहिए। विपक्ष संसद की गरिमा को गिरा रहा है। वह जो अनावश्यक प्रस्ताव लाये हैं उस पर चर्चा करने के लिए तैयार हैं।</p>
<p>इस बीच पीठासीन अधिकारी ने हंगामा कर रहे सदस्यों से कहा कि आप के प्रस्ताव को एजेंडे में शामिल किया गया है और उस पर सरकार चर्चा के लिए तैयार है। अध्यक्ष ओम बिरला ने आपके नोटिस को स्वीकार कर लिया है। फिर भी आप उस पर चर्चा करने के लिए तैयार नहीं है। उन्होंने सदस्यों से बार बार शांत रहने का आग्रह किया और कहा कि क्या आप अपने प्रस्ताव पर नहीं बोलना चाहते हैं। हंगामा नहीं थमने पर सदन की कार्यवाही तीन बजे तक के लिए स्थगित कर दी गयी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 09 Mar 2026 14:28:44 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>केंद्र सरकार ने कहा-भारत के ऊर्जा हितों की रक्षा उसकी प्राथमिकता: विपक्ष का राज्ययसभा से बहिर्गमन</title>
                                    <description><![CDATA[विदेश मंत्री एस जयशंकर ने राज्यसभा में स्पष्ट किया कि पश्चिम एशिया तनाव के बीच भारतीयों की सुरक्षा और ऊर्जा हितों की रक्षा सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। विपक्ष ने ऊर्जा सुरक्षा और गैस की बढ़ती कीमतों पर नियम 176 के तहत चर्चा की मांग करते हुए वॉकआउट किया। सरकार स्थिति का निरंतर आकलन कर रही है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/central-government-said-protecting-indias-energy-interests-is-its/article-145805"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/s-jaishankar1.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने सोमवार को राज्यसभा में स्पष्ट किया कि वह पश्चिम एशिया में उत्पन्न स्थिति का निरंतर आकलन कर रही है और इस क्षेत्र के देशों में भारतीयों की सुरक्षा, उनकी सकुशल वापसी तथा देश के ऊर्जा हितों की रक्षा करना उसकी प्राथमिकता है जबकि विपक्ष ने इस स्थिति के कारण देश के समक्ष ऊर्जा सुरक्षा की चुनौतियों पर नियम 176 के तहत चर्चा कराने की मांग को लेकर सदन से बहिर्गमन किया। विदेश मंत्री डा एस जयशंकर के पश्चिम एशिया तथा खाड़ी देशों की स्थिति के भारत पर प्रभाव के बारे में स्वत: दिये जाने वाले वक्तव्य से पहले विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खरगे ने इस स्थिति के कारण देश में ऊर्जा सुरक्षा की चुनौतियों के मुद्दे पर नियम 176 के तहत सदन में चर्चा कराये जाने की मांग की। नेता सदन जगत प्रकाश नड्डा ने कांग्रेस के रवैये को गैर जिम्मेदाराना बताते हुए कहा कि इनकी रूचि ने देश हित में है और न ही चर्चा में, बस इनकी रूचि केवल हुड़दंग मचाने में है। </p>
<p>नेता विपक्ष की मांग के तुरंत बाद डॉ. जयशंकर ने विपक्ष के भारी शोर शराबे के बीच अपने वक्तव्य में पश्चिम एशिया की स्थिति को चिंताजनक बताते हुए कहा कि सरकार अमरीका और इजरायल की ईरान पर सैन्य कार्रवाई के बाद से स्थिति का निरंतर आकलन कर रही है और सभी संबंधित पक्षों के निरंतर संपर्क में है। उन्होंने कहा कि भारत का दृष्टिकोण इस मामले में मुख्य रूप से तीन बिन्दुओं पर आधारित है पहला सभी मुद्दों का समाधान बातचीत से हो, क्षेत्र में तनाव कम करने के कदम उठाये जायें, आम लोगों पर हमले न किये जायें। दूसरा क्षेत्र में रहने वाले भारतीयों की सुरक्षा और सकुशल वापसी सरकार की प्राथमिकता है और तीसरा देश के राष्ट्रीय और ऊर्जा हितों की रक्षा के साथ कोई समझौता नहीं किया जायेगा। </p>
<p>इससे पहले खरगे ने ऊर्जा सुरक्षा का मुद्दा उठाते हुए इस पर नियम 176 के तहत सदन में चर्चा कराने की मांग की। उन्होंने कहा कि क्षेत्र में स्थिति निरंतर बदल रही है और भारत भी इससे प्रभावित हो रहा है। उन्होंने कहा कि भारत की ऊर्जा जरूरत का 55 प्रतिशत इस क्षेत्र से पूरा होता है और यदि स्थिति और बिगड़ती है तो इसका असर भारत की आर्थिक स्थिरता पर भी पड़ेगा। उन्होंने कहा कि रसोई गैस सिलेंडर पहले ही 60 रुपये महंगा हो गया है। </p>
<p>उन्होंने कहा कि इस क्षेत्र में भारत के करीब एक करोड़ लोग हैं और उनकी सुरक्षा हमारी प्राथमिकता होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि भारत के कुछ लोगों के मारे जाने तथा कुछ के लापता होने की घटनाएं सामने आयी हैं। नेता विपक्ष ने कहा कि सरकार को सदन में इन सभी मुद्दों पर चर्चा करानी चाहिए। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 09 Mar 2026 13:57:04 +0530</pubDate>
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                <title>भारत ने किया स्पष्ट: ईरानी युद्धपोत को कोच्चि में रुकने की अनुमति देना मानवीय फैसला</title>
                                    <description><![CDATA[विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने ईरानी युद्धपोत को कोच्चि बंदरगाह पर रुकने देने के फैसले का बचाव किया है। उन्होंने इसे कानूनी बारीकियों के बजाय मानवीय दृष्टिकोण से लिया गया निर्णय बताया। जयशंकर ने स्पष्ट किया कि जहाज कठिनाई में था और रायसीना डायलॉग में उन्होंने हिंद महासागर की भू-राजनीतिक वास्तविकताओं और भारत की स्वतंत्र नीति पर जोर दिया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/india-clarifies-that-allowing-iranian-warship-to-stop-in-kochi/article-145677"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/s-jaishankar.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने ईरानी युद्धपोत आईआरआईएस लावन को कोच्चि बंदरगाह पर रूकने की अनुमति देने के भारत के फैसले पर उठ रहे सवालों को खारिज करते हुए कहा है कि यह विशुद्ध कानूनी जटिलताओं से परे मानवीय आधार पर लिया गया निर्णय है जो उनकी समझ से सही है।</p>
<p>जयशंकर ने शनिवार को यहां प्रतिष्ठित रायसीना डायलॉग के तीसरे और अंतिम दिन ‘हिन्द महासागर का भविष्य’ विषय पर पैनल चर्चा में हिस्सा लेते हुए सवालों के जवाब में कहा कि ईरानी युद्धपोत को कोच्चि बंदरगाह पर रुकने का निर्णय विशेष परिस्थितियों और मानवीय आधार पर लिया गया है और इसे कानूनी बारीकियों में नहीं तोला जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि ईरान के तीन युद्धपोत आईआरआईएस डेना, आईआरआईएस लावन और आईआरआईएस बुशहर पिछले महीने विशाखापत्तनम में नौसेना के अंतरराष्ट्रीय बेड़ा समीक्षा समारोह तथा मिलन अभ्यास में शामिल होने आए थे और बाद में हिन्द महासागर में थे। </p>
<p><strong>हिन्द महासागर कुछ देशों तक सीमित नहीं </strong></p>
<p>डॉ. जयशंकर ने कहा कि हिन्द महासागर केवल हिन्द महासागर से लगे देशों तक ही सीमित है ऐसा नहीं है। उन्होंने कहा, हिन्द महासागर की वास्तविकता को समझें। डिएगो गार्सिया पिछले पांच दशकों से हिन्द महासागर में मौजूद है। जिबूती में विदेशी सैन्य बलों की तैनाती इस सदी के पहले दशक की शुरुआत में हुई थी। इसी अवधि के दौरान हम्बनटोटा भी बना।</p>
<p><strong>वे कठिनाइयों में थे</strong></p>
<p>विदेश मंत्री ने कहा कि जहां तक जहाज़ के अंदर आने की इच्छा का सवाल है, वे कठिनाइयों में थे। मुझे लगता है कि मानवीय दृष्टिकोण से उनकी मदद करना सही था। हमने इस मामले को सरल रूप में और मानवता के नज़रिए से देखा न कि केवल कानूनी मुद्दों के दृष्टिकोण से। भारत की तरह श्रीलंका ने भी ईरान के युद्धपोत को डॉक करने की अनुमति दी है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 08 Mar 2026 11:28:03 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>भारत-यूरोपीय यूनियन संबंधों पर पहली परामर्श समिति की बैठक: देश के स्थायी हितों की रोशनी में तय होगी विदेश नीति, विदेश मंत्री ने दी भारत-ईयू के मजबूत होते सहयोग पर जानकारी</title>
                                    <description><![CDATA[विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने 2026 की पहली परामर्श समिति बैठक में भारत-ईयू के मजबूत रिश्तों की सराहना की। ऐतिहासिक मुक्त व्यापार समझौते (FTA) के तहत व्यापार, तकनीक और सुरक्षा पर सहमति बनी है। $136 बिलियन के द्विपक्षीय व्यापार के साथ, यह सौदा 2 अरब उपभोक्ताओं को जोड़कर वैश्विक अर्थव्यवस्था के एक-चौथाई हिस्से को नई गति देगा।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/the-first-consultation-committee-meeting-on-india-european-union-relations-will/article-145018"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/200-x-60-px).png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। विदेश मंत्री एस जयशंकर ने वर्ष 2026 की भारत-यूरोपीय यूनियन संबंधों पर पहली परामर्श समिति की बैठक आयोजित की। इस बैठक में भारत-ईयू के मजबूत होते सहयोग और विभिन्न क्षेत्रों में आपकी लाभकारी पहलुओं पर विस्तार से चर्चा की गई। विदेश मंत्री ने शुक्रवार देर शाम को अपने आधिकारिक सोशल मीडिया अकाउंट से पोस्ट करते हुए बताया, भारत-यूरोपीय यूनियन संबंधों पर 2026 की पहली परामर्श समिति की बैठक आयोजित की गई है। उन्होंने बताया कि इस बैठक में भारत-यूरोपीय संघ साझेदारी की मजबूत गति और व्यापार, टेक्नोलॉजी, सुरक्षा और गतिशीलता सहित विभिन्न क्षेत्रों में इसके पारस्परिक लाभकारी पहलुओं पर चर्चा की गई। बैठक के एक प्रतिभागी ने कहा कि अब विदेश नीति के मुद्दे पर सभी राजनीतिक दलों में अपूर्व सहमति है। वे मानते हैं कि हमारी विदेश नीति देश के स्थायी हितों की रोशनी में तय होने चाहिए, न कि दबाव समूहों की ब्लैक मेलिंग से। </p>
<p>उन्होंने कहा कि अब तुष्टीकरण के लिए विदेश नीति तय नहीं की जाएगी। उसका पैमाना होगा देश का हित।  एस जयशंकर ने बैठक में सक्रिय भागीदारी के लिए सभी सांसदों का आभार व्यक्त किया। साथ ही इस मीटिंग की फोटोज भी सोशल मीडिया पर शेयर की। भारत और यूरोपीय संघ (ईयू) के बीच हाल में ही मुक्त व्यापार समझौता (एफटीए), जिसे मदर ऑफ ऑल डील्स हुआ है। यह व्यापार समझौता हाल ही में यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उसुर्ला वॉन डेर लेयेन, यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा और भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा घोषित किया गया। इस समझौते से लगभग 2 अरब उपभोक्ता और दुनिया की कुल जीडीपी के करीब एक-चौथाई हिस्से को एक साथ लाने का वादा किया गया है। यूरोपीय संघ और भारत ने मुक्त व्यापार समझौते के लिए बातचीत पहली बार 2007 में शुरू की थी, लेकिन कुछ मुद्दों के कारण 2013 में बातचीत स्थगित कर दी गई थी। जून 2022 में फिर से बातचीत शुरू की गई।</p>
<p>यूरोपीय संघ एक समूह के रूप में, वस्तुओं के मामले में भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है। वित्त वर्ष 2024-25 में यूरोपीय संघ के साथ भारत का कुल वस्तु व्यापार लगभग 136 अरब अमेरिकी डॉलर का था। इसमें निर्यात करीब 76 अरब अमेरिकी डॉलर और आयात 60 अरब अमेरिकी डॉलर का था। भारत और यूरोपीय संघ 2004 से रणनीतिक साझेदार रहे हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 01 Mar 2026 11:50:48 +0530</pubDate>
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                <title>खलीलुर रहमान बने बांग्लादेश के नए विदेश मंत्री: अराकान कॉरिडोर पर संकेत?</title>
                                    <description><![CDATA[प्रधानमंत्री तारिक़ रहमान ने अनुभवी कूटनीतिज्ञ खलीलुर रहमान को विदेश मंत्री चुना है। उनकी नियुक्ति को अमेरिका के साथ संबंधों को संतुलित करने और रोहिंग्या संकट सुलझाने की रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/khalilur-rahman-becomes-the-new-foreign-minister-of-bangladesh-hints/article-143696"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-02/bangladesh1.png" alt=""></a><br /><p>ढाका। बांग्लादेश के नये प्रधानमंत्री तारिक़ रहमान के मंत्रिमंडल में खलीलुर रहमान को विदेश मंत्री बनाये जाने को देश के कूटनीतिक हलकों में विदेश नीति की सावधानीपूर्वक पुनर्संतुलन प्रक्रिया के रूप में देखा जा रहा है। इससे पहले वह अंतरिम सरकार के प्रमुख मोहम्मद यूनुस के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (एनएसए) रह चुके हैं। </p>
<p>विश्लेषकों का कहना है कि वह पश्चिमी नीति-निर्माण हलकों में सहज माने जाते हैं और उन्हें अमेरिकी प्रशासन के करीब समझा जाता है। ऐसे समय में यह तथ्य अहम माना जा रहा है, जब बांग्लादेश अमेरिका के साथ एक असंतुलित माने जा रहे व्यापार समझौते के बीच अपने संबंधों को साधने की कोशिश कर रहा है। उल्लेखनीय है कि पिछले वर्ष एनएसए के रूप में उनकी नियुक्ति उस समय बीएनपी नेतृत्व के कड़े विरोध के बावजूद हुई थी। </p>
<p>भारत के पूर्व उच्चायुक्त पिनाक आर. चक्रवर्ती ने कहा, यह आश्चर्यजनक है कि बीएनपी का हिस्सा न होने के बावजूद खलीलुर रहमान को विदेश मंत्री बनाया गया है। वह तथाकथित टेक्नोक्रेट कोटे से आये हैं। उनकी नियुक्ति से संकेत मिलता है कि तारिक रहमान के कार्यकाल में भी अमेरिकी प्रभाव बना रहेगा। </p>
<p>भारत ने आधिकारिक तौर पर उनकी नियुक्ति का स्वागत किया है। विदेश मंत्री एस जयशंकर ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर उन्हें बधाई देते हुए कहा कि वह आपसी प्रगति और समृद्धि के लिए सहयोग को आगे बढ़ाने के लिए उनके साथ काम करने को उत्सुक हैं। मुहम्मद यूनुस के कार्यकाल के दौरान खलीलुर रहमान रोहिंग्या मुद्दे पर मुख्य सलाहकार के उच्च प्रतिनिधि के रूप में भी कार्य कर चुके हैं। उन्हें उन प्रभावशाली आवाजों में शामिल माना जाता है, जिन्होंने अराकान कॉरिडोर के निर्माण की वकालत की थी। यह एक मानवीय मार्ग होगा, जो चटगांव से होकर म्यांमार के रखाइन राज्य तक सहायता पहुंचाने में मदद करेगा।</p>
<p>समर्थकों का कहना है कि यह गलियारा मानवीय और रणनीतिक दोनों उद्देश्यों की पूर्ति करेगा तथा लंबे समय से चले आ रहे रोहिंग्या शरणार्थी संकट को लेकर बांग्लादेश पर बने अंतरराष्ट्रीय दबाव को कम कर सकता है। आलोचकों का मानना है कि इससे संप्रभुता, सुरक्षा जोखिम और म्यांमार के आंतरिक संघर्ष में गहराई से उलझने की आशंका बढ़ सकती है। चक्रवर्ती ने यह भी कहा कि खलीलुर रहमान हालिया बांग्लादेश-अमेरिका व्यापार समझौते को आकार देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा चुके हैं और इसी कारण वह नयी बीएनपी सरकार के लिए मूल्यवान बने रहेंगे, जो भविष्य में बेहतर शर्तें हासिल करने की कोशिश करेगी।</p>
<p>हाल ही में, हस्ताक्षरित व्यापार समझौते के तहत बांग्लादेश के वस्त्र उद्योग को कुछ राहत मिली है, क्योंकि शुल्क घटाये गये हैं और अमेरिकी कच्चे माल से बने परिधानों पर शून्य शुल्क का वादा किया गया है। समझौते में बांग्लादेश द्वारा अमेरिका से अधिक मात्रा में वस्तुएं खरीदने की प्रतिबद्धता भी है। साथ ही यह शर्त भी है कि बांग्लादेश ऐसे किसी देश से परमाणु रिएक्टर, ईंधन रॉड या संवर्धित यूरेनियम नहीं खरीदेगा, जो'अमेरिका के महत्वपूर्ण हितों को नुकसान पहुंचाता हो।'</p>
<p>विश्लेषकों के अनुसार, बांग्लादेश की विदेश नीति इस समय नाजुक मोड़ पर है। भारत के साथ संबंधों को मजबूत करने के साथ-साथ बांग्लादेश को चीन के हितों को भी संतुलित करना होगा। क्षेत्र में बीजिंग के प्रभाव को सीमित करने की मंशा रखने वाले अमेरिका ने हाल ही में बांग्लादेश में नियुक्त अपने राजदूत ब्रेंट टी क्रिस्टेनसेन के माध्यम से चीन के साथ कुछ प्रकार की भागीदारी के जोखिमों को लेकर चेतावनी भी दी है। </p>
<p>साथ ही, म्यांमार के साथ संबंध तनावपूर्ण बने हुए हैं। रोहिंग्या प्रत्यावर्तन प्रक्रिया ठप पड़ी है और बंगाल की खाड़ी क्षेत्र में भू-राजनीतिक प्रतिस्पर्धा तेज हो रही है। ऐसे में, यह देखना अहम होगा कि जिस मानवीय गलियारे की अवधारणा को नये विदेश मंत्री कभी समर्थन देते माने गये, वह केवल विचार तक सीमित रहती है या व्यवहार में भी उतरती है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 18 Feb 2026 17:09:59 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>विदेश मंत्री जयशंकर ने कहा, भारत के पड़ोस में आतंकवादी ढांचों को किसी भी प्रकार की सहायता न दें पोलैंड </title>
                                    <description><![CDATA[विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने पोलैंड के उप-प्रधानमंत्री रादोस्लाव सिकोरस्की से मुलाकात कर आतंकवाद के प्रति 'जीरो टॉलरेंस' अपनाने और भारत के पड़ोस में आतंकी बुनियादी ढांचे को समर्थन न देने का आग्रह किया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/foreign-minister-jaishankar-said-that-poland-should-not-provide-any/article-140127"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-01/jai-shankar.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। विदेश मंत्री डा. एस जयशंकर ने पोलैंड से आतंकवाद को कतई बर्दाश्त न करने की नीति अपनाने का आग्रह करते हुए कहा है कि उसे भारत के पड़ोस में आतंकवादी ढांचों को किसी भी प्रकार से सहायता नहीं देनी चाहिए। डा. जयशंकर ने भारत यात्रा पर आये पोलैंड के उप प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री रादोस्लाव सिकोरस्की के साथ सोमवार को यहां के दौरान प्रारंभिक वक्तव्य में कहा कि पोलैंड इस क्षेत्र के लिए कोई अजनबी नहीं हैं और वह सीमा-पार आतंकवाद की लंबे समय से चली आ रही चुनौती से भली-भांति परिचित हैं। उन्होंने कहा कि पोलैंड को आतंकवाद को कतई बर्दाश्त नहीं करने की नीति अपनानी चाहिए और हमारे पड़ोस में आतंकवादी ढांचे को किसी भी प्रकार से सहायता नहीं करनी चाहिए।</p>
<p>विदेश मंत्री ने कहा कि दोनों पक्षों की बातचीत में क्षेत्रीय और वैश्विक घटनाक्रमों पर चर्चा स्वाभाविक रूप से शामिल होगी। विशेष रूप से अपने-अपने पड़ोस के संबंध में आकलनों का आदान-प्रदान उपयोगी रहेगा। उन्होंने कहा कि वह यूक्रेन संघर्ष और उसके प्रभावों पर भारत के विचार पहले भी स्पष्ट रूप से साझा कर चुके हैं और उन्होंने जोर देकर कहा है कि चुनकर भारत को निशाना बनाना न केवल अनुचित बल्कि अन्यायपूर्ण भी है। विदेश मंत्री ने कहा कि वह आज एक बार फिर इस बात को दोहरा रहे हैं।</p>
<p>विदेश मंत्री ने कहा कि यह मुलाकात ऐसे समय में हो रही है जब दुनिया में काफी उथल-पुथल है। उन्होंने कहा कि भारत और पोलैंड  अलग-अलग क्षेत्रों में स्थित हैं, जिनकी अपनी-अपनी चुनौतियां और अवसर हैं इसे देखते हुए विचारों और दृष्टिकोणों का आदान-प्रदान करना स्वाभाविक रूप से उपयोगी है। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के द्विपक्षीय संबंध भी निरंतर प्रगति कर रहे हैं लेकिन इन पर निरंतर ध्यान दिये जाने की जरूरत है। </p>
<p>भारत और पोलैंड के बीच परंपरागत रूप से गर्मजोशीपूर्ण और मैत्रीपूर्ण संबंध रहे हैं। हाल के वर्षों में ये संबंध उच्च-स्तरीय राजनीतिक आदान-प्रदान तथा सशक्त आर्थिक और लोगों के बीच संपर्कों से आगे बढकर मजबूत हुए हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की वर्ष 2024 की पोलैंड यात्रा के दौरान संबंधों को रणनीतिक साझेदारी के स्तर तक उन्नत किया गया।</p>
<p>डा. जयशंकर ने कहा कि दोनों देश बातचीत के दौरान 2024 से 28 तक कार्ययोजना की समीक्षा करेंगे जिसके माध्यम से हम अपनी रणनीतिक साझेदारी की पूरी क्षमता को साकार करना चाहते हैं। इसके अलावा व्यापार और निवेश, रक्षा और सुरक्षा, स्वच्छ प्रौद्योगिकियों तथा डिजिटल नवाचार में सहयोग को आगे बढ़ाने के तरीकों पर भी चर्चा करेंगे।</p>
<p>विदेश मंत्री ने कहा कि पोलैंड मध्य यूरोप में भारत के सबसे बड़े व्यापारिक साझेदारों में से एक है और दोनों देशों का द्विपक्षीय व्यापार लगभग 7 अरब डॉलर है जिसमें पिछले एक दशक में लगभग 200 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है। पोलैंड में भारतीय निवेश तीन अरब डॉलर से अधिक हो चुका है, जिससे पोलैंड के नागरिकों के लिए रोजगार के अनेक अवसर सृजित हुए हैं। भारत की मजबूत आर्थिक वृद्धि, बड़े बाजार का आकार और निवेश-अनुकूल नीतियाँ वहां के व्यवसायों के लिए अपार अवसर प्रदान करती हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 19 Jan 2026 17:56:42 +0530</pubDate>
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                <title>दिल्ली पहुंचे उप प्रधानमंत्री रादोस्लाव सिकोरस्की, भारत-पोलैंड रणनीतिक साझेदारी पर चर्चा संभव</title>
                                    <description><![CDATA[पोलैंड के उप-प्रधानमंत्री रादोस्लाव सिकोरस्की जयपुर साहित्य उत्सव के बाद दिल्ली पहुंचे। वे विदेश मंत्री एस. जयशंकर के साथ रक्षा, सुरक्षा और व्यापार पर रणनीतिक चर्चा करेंगे।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/deputy-prime-minister-of-poland-radoslaw-sikorski-reached-delhi-possible/article-140066"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-01/polamnd.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। भारत के तीन दिवसीय दौरे पर आए पोलैंड के उप प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री रादोस्लाव सिकोरस्की भारत-पोलैंड रणनीतिक साझेदारी को मजबूत करने के उद्देश्य से सोमवार को नयी दिल्ली पहुंचे। जहां उनका स्वागत अतिरिक्त सचिव पूजा कपूर ने किया। उनके दौरे का उद्देश्य द्विपक्षीय संबंधों को आगे बढ़ाना और भारत और पोलैंड के बीच सहयोग के नए क्षेत्रों का पता लगाना है।</p>
<p>पोलैंड के उप प्रधानमंत्री के विदेश मंत्री एस जयशंकर से मुलाकात कर भारत-पोलैंड रणनीतिक साझेदारी को और आगे बढ़ाने पर चर्चा करने की उम्मीद है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने एक पोस्ट में कहा, नयी दिल्ली में आपका हार्दिक स्वागत है।</p>
<p>पोलैंड के उप प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री रादोस्लाव सिकोरस्की आज नई दिल्ली पहुंचे। नयी दिल्ली में उनके कार्यक्रम भारत-पोलैंड रणनीतिक साझेदारी को और आगे बढ़ाने पर केंद्रित हैं। राजधानी पहुंचने से पहले सिकोरस्की ने 17 से 18 जनवरी तक जयपुर का दौरा किया, जहां उन्होंने जयपुर साहित्य महोत्सव में भाग लिया।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>भारत</category>
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                <pubDate>Mon, 19 Jan 2026 12:21:57 +0530</pubDate>
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                <title>ऑपरेशन सिंदूर पर पश्चिमी देशों की दोहरी नीति पर जयशंकर ने उठाए सवाल, मजबूत साझेदारी पर आधारित संबंधों पर दिया जोर </title>
                                    <description><![CDATA[विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने भारतीय समुदाय को संबोधित करते हुए पश्चिमी देशों के पाखंड की आलोचना की। उन्होंने कहा कि जो देश भारत को क्षेत्रीय तनाव पर उपदेश देते हैं, वे अपने क्षेत्र की हिंसा और जोखिमों को नजरअंदाज करते हैं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/jaishankar-raised-questions-on-the-dual-policy-of-western-countries/article-138784"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-11/s.-jaishankar.jpg" alt=""></a><br /><p>लक्ज़मबर्ग। विदेश मंत्री डा. एस.जयशंकर ने लेटिन अमेरिका के घटनाक्रम का परोक्ष रूप से जिक्र करते हुए ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पश्चिमी देशों के दोहरे मानदंडों की बुधवार को कड़ी आलोचना की। डा. जयशंकर ने भारतीय समुदाय के लोगों के साथ बातचीत में भारत और लक्ज़मबर्ग के बीच मजबूत साझेदारी पर आधारित संबंधों पर भी जोर दिया। बातचीत के दौरान विदेश मंत्री ने उन देशों पर निशाना साधा जो भारत को क्षेत्रीय तनावों पर उपदेश देते हैं लेकिन अपने ही क्षेत्रों में हो रही हिंसा और जोखिमों को नजरअंदाज करते हैं।</p>
<p>उन्होंने कहा, कभी-कभी लोग कहते हैं, जैसे ऑपरेशन सिंदूर के दौरान कहा गया। अब अगर आप उनसे पूछें कि सच में आपको चिंता है, तो क्यों न आप अपने ही क्षेत्र को देखें? और खुद से पूछें कि वहां हिंसा का स्तर क्या है, कितने जोखिम उठाए गए हैं और हममें से बाकी लोग आपके कार्यों को लेकर कितने चिंतित हैं। लेकिन यही दुनिया की प्रकृति है। लोग जो कहते हैं, वह हमेशा वही नहीं होता जो वे करते हैं, और हमें इसे उसी भावना के साथ स्वीकार करना पड़ता है।</p>
<p>डा. जयशंकर की टिप्पणियों से उन देशों के प्रति उनकी नाराजगी झलकी जो ऐसे संघर्षों पर अनचाही सलाह देते हैं जिन्हें वे ठीक से समझते भी नहीं। उन्होंने कहा कि दूर बैठे देश अक्सर बिना जटिलताओं को समझे या अपने रणनीतिक हितों पर विचार किए बोलते हैं।</p>
<p>उन्होंने कहा, अब दुनिया के बाकी हिस्सों में हो रहे घटनाक्रमों का इस पर कितना असर पड़ता है, यह कहना मुश्किल है। दूर बैठे लोग बातें करेंगे, कभी सोच-समझकर, कभी बिना सोचे, कभी अपने स्वार्थ में, तो कभी लापरवाही से। आज के समय में देश अधिक आत्मकेंद्रित हो रहे हैं और वही करेंगे जिससे उन्हें सीधा लाभ हो। वे आपको मुफ्त की सलाह देते रहेंगे। विदेश मंत्री ने स्पष्ट किया कि भारत का रुख इस बात पर निर्भर करता है कि वह किससे निपट रहा है।</p>
<p>उन्होंने कहा, भारत उन देशों के साथ सकारात्मक और रचनात्मक रूप से जुडऩे को तैयार है जो नई दिल्ली के साथ सकारात्मक तरीके से काम करना चाहते हैं, लेकिन जो पाकिस्तान की तरह व्यवहार करते हैं, उनसे अलग ढंग से निपटना पड़ता है। पश्चिमी देशों की कथित दोहरी नीति की आलोचना से आगे बढ़ते हुए डा. जयशंकर ने भारत और लक्ज़मबर्ग के बीच 78 वर्षों पुराने मजबूत और विकसित होते संबंधों को भी रेखांकित किया।</p>
<p>उन्होंने कहा, हमने एक लंबा सफर तय किया है और हम लक्ज़मबर्ग को न केवल अपने आप में एक बहुत महत्वपूर्ण साझेदार मानते हैं, बल्कि यूरोपीय संघ के संदर्भ में भी, खासकर ऐसे समय में जब यूरोपीय संघ के साथ हमारे अपने संबंध भी एक महत्वपूर्ण मोड़ पर हैं।उन्होंने कहा, इस व्यापक रिश्ते को आकार देने में आपका जो प्रभाव है, जो समर्थन आप देते हैं, वह हमारे लिए बहुत मूल्यवान है। कई मायनों में आप भारत और यूरोपीय संघ के बीच संबंधों को गहरा करने के समर्थक रहे हैं।</p>
<p>भारतीय समुदाय के लोगों के साथ बातचीत के बाद विदेश मंत्री ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में कहा, आज लक्ज़मबर्ग में भारतीय समुदाय के सदस्यों से मिलकर खुशी हुई। राजनीतिक, व्यापार और प्रौद्योगिकी क्षेत्रों में लक्ज़मबर्ग के साथ हमारी साझेदारी के उल्लेखनीय विस्तार को रेखांकित किया। भारत-लक्ज़मबर्ग संबंधों को मजबूत करने में हमारे प्रवासी समुदाय के योगदान की सराहना करता हूँ। उन्होंने यूरोप के साथ भारत की भागीदारी में उल्लेखनीय वृद्धि का अनुमान जताया और इसे वैश्विक व्यवस्था में एक बार फिर से संतुलन का दौर बताया।</p>
<p>उन्होंने कहा, हर देश, हर क्षेत्र अपने हितों और गणनाओं का पुनर्मूल्यांकन कर रहा है और यह देख रहा है कि हम क्या कर सकते हैं। भारत और यूरोपीय संघ को और करीब लाने की दिशा में मैं पूरे भरोसे के साथ कह सकता हूँ कि 2026 में यूरोप के साथ संबंधों में तेजी देखने को मिलेगी।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 07 Jan 2026 18:58:21 +0530</pubDate>
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