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                <title>असर खबर का : प्रसूता की मौत के मामले के बाद हरकत में आया प्रशासन , स्पीकर व विधायक ने किया दौरा</title>
                                    <description><![CDATA[चूक तो हुई है, निरीक्षण के बाद बोले उचित इलाज के साथ जांच के दिए निर्देश]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/impact-of-the-news-report--administration-springs-into-action-following-the-death-of-a-new-mother--speaker-and-mla-pay-a-visit/article-153051"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/1.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। मेडिकल कॉलेज अस्पताल में सिजेरियन ऑपरेशन के बाद प्रसूता की मौत व अन्य महिलाओं गम्भीर अवस्था की खबर को दैनिक नवज्योति द्वारा प्रमुखता से प्रकाशित किए जाने के बाद अस्पताल प्रशासन हरकत में आ गया है। इस गंभीर मामले पर संज्ञान लेते हुए बुधवार को कोटा दक्षिण विधायक संदीप शर्मा नवीन चिकित्सालय पहुंचे और बिगड़ते हालातों को देखते हुए प्रसूताओं तत्काल प्रभाव से बेहतर मेडिकल सुविधा उपलब्ध करवाने के निर्देश दिये।</p>
<p><strong>प्रशासनिक अमले में मची खलबली</strong><br />दैनिक नवज्योति में खबर छपने के बाद बुधवार सुबह से ही अस्पताल में हड़कंप का माहौल रहा। विधायक संदीप शर्मा ने अस्पताल पहुंचकर अस्वस्थ प्रसूताओं के स्वास्थ्य की जानकारी ली और एक ही वार्ड में कई महिलाओं के संक्रमित होने को अत्यंत गंभीर लापरवाही करार दिया। उन्होंने मौके पर ही कड़े निर्देश दिए कि प्रसूताओं और नवजात शिशुओं को 24 घंटे विशेषज्ञ चिकित्सकों की निगरानी में रखा जाए।</p>
<p><strong>कारणों की जांच के साथ पुनरावृति न होने देने की हिदायत</strong><br />विधायक ने कहा कि मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सरकार की प्राथमिकता है। और इसमें किसी भी प्रकार की कोताही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने प्रशासन को बिमारी के असली कारणों की जांच करने के साथ अन्य आवश्यक व्यवस्थाएं करने की भी सख्त हिदायत दी। कारणों की प्रभावी जांच करने के निर्देश दिए ताकि ऐसी दुखद घटना की पुनरावृत्ति न हो।</p>
<p><strong>परिजनों को भरोसा स्टाफ को चेतावनी</strong><br />विधायक ने अस्पताल में उपलब्ध सुविधाओं का जायजा लिया और मरीजों के परिजनों से बात कर उन्हें हर संभव मदद का आश्वासन दिया। तथा पीड़िताओं के परिवार के साथ खडे रहने की बात कही। उन्होंने चिकित्सकों और नर्सिंग स्टाफ को सेवाओं की गुणवत्ता बनाए रखने और लापरवाही न बरतने की चेतावनी दी। इस दौरान प्राचार्य डॉ. नीलेश जैन, अधीक्षक डॉ. आशुतोष शर्मा, जिला प्रवक्ता राजेन्द्र गुप्ता, मण्डल अध्यक्ष पन्नालाल बंजारा, कीर्तिकान्त गोयल सहित कई जनप्रतिनिधि और वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।</p>
<p><strong>विधायक ने माना गडबड़ तो हुई है जांच से पता चलेगा</strong><br />सिजेरियन गायनी के केस थे उनमे से 5 पेशेन्ट की ऑपरेशन के बाद महिलाओं को बीपी की शिकायत सामने आने के बाद दी गयी दवाओं की जांच की जा रही है। डॉ विकास खण्ड़ेलिया, साैरभ चित्तौड़ा की टीम सारे पहलुओं पर जांच की जा रही है। एक साथ 5 महिलाओं के साथ एक जैसी परेशानी होने के बाद उनका इलाज चल रहा है। 3 डॉक्टर की टीम बनाई गयी है जो पूरे मामले की जांच करेगी। अस्पताल में जांच के साथ सही जांच के लिये भी जरूरी कदम उठाये जायेंगे।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 07 May 2026 17:50:59 +0530</pubDate>
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                <title>तू ही तो जन्नत मेरी... तू ही मेरा जहां!</title>
                                    <description><![CDATA[मां के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने के लिए एक ‘मदर्स डे’ काफी नहीं है बल्कि एक सदी भी कम है।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/you-are-my-heaven%E2%80%A6-you-are-my-world/article-113832"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-05/news-(3)17.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। ममता का सागर, त्याग की प्रतिमूर्ति, जीवनदायिनी, हमारा सबसे बड़ा संबल, हमारी पहली गुरु, मार्गदर्शक..। यह सभी शब्द मिलाकर भी मां के किरदार को मुकम्मल नहीं कर सकते। उसकी ममता के लिए कोई पैमाना नहीं बना, उसकी भावनाओं का कोई चित्र नहीं है, उसके समर्पण का कोई दृश्य नहीं है। मां ङ्घ जब यह शब्द हमारे कानों में गूंजता है, तो उसमें प्रेम, त्याग, बलिदान और अनंत स्नेह की प्रतिध्वनि सुनाई देती है। क्यों दिन भर थकने के बाद भी मां के चेहरे पर थकान नहीं दिखती। क्यों घर-परिवार की परेशानियों के बीच भी मां के माथे पर शिकन नहीं दिखती। क्यों मां किसी के सामने आंसू नहीं बहाती। क्यों मां हमारे आंसुओं को पोंछने के लिए हमेशा तैयार रहती है। क्यों रसोईं में हमारी पसंद की चीजें ही बनती हैं। क्या मां की अपनी कोई पसंद नहीं है। मां के प्रेम और त्याग की भावनाएं हमारे दिल में तो होती हैं, लेकिन उन्हें शब्दों में पिरोना हमेशा कठिन होता है। किसी भी व्यक्ति के जीवन में मां के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने के लिए एक ‘मदर्स डे’ काफी नहीं है बल्कि एक सदी भी कम है।</p>
<p><strong>कागज पर उभरी मां के प्रति बच्चों की कृतज्ञता</strong><br />मदर्स डे के अवसर पर दैनिक नवज्योति मोदी ‘इंस्टीट्यूट आॅफ मैनेजमेंट एंड टेक्नोलॉजी’ (एमआईएमटी) के विद्यार्थियों के बीच पहुंचा। उनके साथ इस विषय पर उनकी राय को जानने कि वो अपनी मां के बारे में क्या सोचते और महसूस करते हैं? उनकी जिंदगी में उनकी मां कितनी अहम हैं? विद्यार्थियों को अपनी भावनाओं को उजागर करने के लिए खुला प्लेटफॉर्म दिया गया, जहां वह अपनी भावनाओं को कविता व लेख के माध्यम से व्यक्त करने के लिए स्वतंत्र थे। इसमें बीबीए, एमबीए, बीसीए, एमसीए, बीएससी, एमएससी, बीए, एमए के विद्यार्थियों ने भाग लिया। सभी विद्यार्थियों के लिए उनकी मां दुनिया की सर्वश्रेष्ठ मां होने के साथ किसी अनमोल रत्न की भांति है। हर मौके पर मुश्किल में वे उनका साथ देती हैं, सही-गलत की सीख अच्छे समझाती हैं। हर विद्यार्थी की अपनी अलग और खबसूरत अभिव्यक्ति रही, सभी को शामिल करना बहुत मुश्किल था। एक छात्रा ने इस तरह अपनी भावनाएं बयां की ‘कभी सुकून से सोई नहीं चिंता में वो हमारी, हमें खिलाने के लिए अक्सर खुद भूखी भी रह जाती है...मां!’ एक छात्र की मां के लिए भावनाएं-हम उन कष्टों और बलिदानों का भुगतान नहीं कर सकते हैं जो माताओं ने अपने बच्चों के लिए चुकाए हैं। मां के साथ बिताए हर पल और उनके द्वारा किए गए बलिदान के लिए आभारी होना चाहिए। </p>
<p><strong>प्रतियोगिता का परिणाम</strong><br />प्रतियोगिता में पांच विद्यार्थी विजेता रहे। इस इवेन्ट को संपन्न करवाने में मोदी एज्युकेशनल ग्रुप कोटा के चेयरमेन सुशील मोदी, मोदी इंस्टीट्यूट आॅफ मैनेजमेंट एंड टेक्नोलॉजी के डायरेक्टर डॉ. एनके जोशी और सभी फैकल्टी सदस्यों का सराहनीय योगदान रहा।</p>
<p><strong>प्रथम पुरस्कार </strong><br /><strong>तेरे कदमों के नीचे ही मेरी जन्नत है</strong><br />पांच साल की उम्र थी मेरी, तू रोज काम पे जाती थी, हर दर्द छुपा के चेहरे पे मुस्कान ले आती थी।<br />तू मां भी बनी, तू बाप का फर्ज़  भी निभा गई।<br />हर मोड़ पे मुझको संभाल और खुद को भूल गई।<br />तू मेरी तकदीर लिखने वाली हकीकत है, <br />तेरे कदमों के नीचे ही मेरी जन्नत है।<br /><strong>- गौरी नाझरे, बीबीए, तृतीय सेमेस्टर</strong></p>
<p><strong>द्वितीय पुरस्कार</strong><br /><strong>कितने उतार-चढ़ाव देखे फिर भी चेहरे पर है प्यारी सी मुस्कान</strong><br />मेरी मां मेरे लिए बहुत कीमती और सबसे प्यारी हैं। वह मेरे लिए भी बहुत कुछ करती हैं। वह घर का काम करती हैं और  कपड़े सिलती हैं और रात तक काम करती हैं । ताकि मैं केवल पढ़ाई पर ध्यान केंद्रित कर सकूं। मैं अपनी मां से बहुत प्यार करता हूं क्योंकि मैं जानता हूं कि उन्होंने कितने उतार-चढ़ाव देखे हैं।  वह मेरे सामने कभी नहीं रोईं, क्योंकि मैं हतोत्साहित नहीं हो जाऊं । उनके चेहरे पर हमेशा एक प्यारी सी मुस्कान रहती थी और वह मेरे लिए सारा प्यार संजो कर रखती थीं।<br /><strong>- अजलान खान, बीसीए, चतुर्थ सेमेस्टर</strong></p>
<p><strong>तृतीय पुरस्कार</strong><br /><strong>हर जन्म में यहीं मां मिले</strong><br />मेरी मां सिर्फ एक शब्द नहीं है, ये शब्द पूरा ब्रह्मांड है। वह शिक्षित नहीं हैं, लेकिन हमेशा आसमान की ऊंचाइयों को छूने के लिए प्रोत्साहित करती हैं। वह मेरी प्रेरणा हैं, मेरी शिक्षिका हैं, मेरी मार्गदर्शिका हैं, वह मेरी सबकुछ हैं। अपने जीवन से संघर्ष करने के बाद भी उन्होंने कभी अपना दुख हमें नहीं दिखाया, उन्होंने कभी भी अपना दुख किसी के साथ साझा नहीं किया। उनका जीवन बहुत जटिल था, उनके सामने कई बाधाएं आईं, फिर भी, वह हमेशा हमारे साथ मुस्कुराती हैं। हर जन्म में मैं उन्हें अपनी मां के रूप में चाहती हूं। <br /><strong>- युक्ता सामरिया, बीए, प्रथम सेमेस्टर</strong></p>
<p><strong>सांत्वना पुरस्कार</strong><br /><strong>मां की कमी कोई पूरी नहीं कर पाया</strong><br />मेरा खुद से ज्यादा उससे नाता है, ये जहां कहां कभी उसकी कमी पूरी कर पाया है, उसने इस दुनिया में आने से पहले ही मुझे अपनाया है। अपनी मां के कहां कभी कोई एहसान चुका पाया है क्योंकि उसको उसके जितना चाहने  की मेरी औकात नहीं। शायद खुदा ने बेटों को बख्शी ये सौगात  नहीं। <br /><strong>- आर्यन श्रीवास्तव, एमसीए, द्वितीय सेमेस्टर</strong></p>
<p><strong>मां के रूप में भगवान मेरे साथ</strong><br />मैं अपनी मां से कहना चाहती हूं कि तू नहीं तो कुछ नहीं... मैंने कभी भगवान को नहीं देखा लेकिन मेरा मानना है कि भगवान मां के रूप में मेरे साथ हैं। मेरी मां अशिक्षित हैं लेकिन वह एक मनोवैज्ञानिक की तरह मेरी समस्याओं को समझती हैं, डॉक्टर की तरह मेरी देखभाल करती हैं, । हिंदी ठीक से न बोल पाने के बावजूद वह हमेशा मेरे स्कूल की अभिभावक शिक्षक बैठक में भाग लेती हैं। मां धरती की तरह है जो बिना कुछ मांगे बदले में हमें हजारों चीजें देती हैं।<br /><strong>- मनीषा कुमारी, एमएससी, तृतीय सेमेस्टर</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 12 May 2025 14:40:33 +0530</pubDate>
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                <title>वे मांएं जिन्होंने गढ़ी वीर संतानें: मुझे कोख पर गर्व, एक और भगत सिंह को जन्म दे पाती तो उसे भी देश पर कुर्बान कर देती...</title>
                                    <description><![CDATA[च्चे का पहला गुरु ‘मां’ को माना गया है, मां के संघर्ष, त्याग और बलिदान की अनेक कहानियां हैं। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/those-mothers-who-created-heroic-children-i-am-proud-of-my-womb--if-i-could-have-given-birth-to-another-bhagat-singh--i-would-have-sacrificed-that-too-on-the-country/article-9340"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-05/17.jpg" alt=""></a><br /><p> जयपुर। संसार में ‘मां’ की अपनी महिमा है। बच्चे का पहला गुरु ‘मां’ को माना गया है, मां के संघर्ष, त्याग और बलिदान की अनेक कहानियां हैं। माना जाता है कि बच्चा जब जन्म लेता है तो वह पहला शब्द ही ‘मां’ बोलता है। भारतीय इतिहास में ऐसी अनेक माताएं हुई हैं, जिन्होंने अपने पुत्र के निर्माण में अपना पूरा जीवन खपा दिया। पुत्र को इस तरह तैयार किया कि उसने मुगलों की दास्ता स्वीकार नहीं की। अंग्रेजी हुकूमत के दौर में भगतसिंह की मां विदयावती कौर का जीवन भी प्रेरणा देता है। बहरहाल, मशहूर शायर ताबिश ने लिखा है- ‘एक मुद्दत से मेरी मां सोई नहीं ताबिश, मैंने एक कहा था कि मुझे अंधेरे से डर लगता है।’ इन शब्दों में मां की ममता के आंचल की गहराई का पला चलता है।<br /><br /><strong>भगत सिंह की मां विद्यावती</strong><br />शहीदे आजम भगतसिंह को फांसी देने का दिन 23 मार्च, 1931 तय हुआ तो अपने लाल को एक नजर भर देखने के लिए मां विदयावती जेल में मिलने गर्इंं। बेटे से मिलकर वापस जाने लगी तो आंखों के कोर में काफी समय से कैद मोती झलक गए। यह देखकर पास खड़े जेल के सिपाही ने कहा कि शहीद की मां होकर रोती है? इस पर विदयावती ने कहा कि ‘मैं अपने बेटे की शहीदी पर नहीं रो रही हूं, यदि इस कोख ने एक और भगतसिंह दिया होता तो उसे भी देश पर कुर्बान कर देती।’ धन्य हैं ऐसी माताएं, जिन्होंने ऐसे पुत्र को जन्म दिया।<br /><br /><strong>शिवा को गढ़ा मां जीजाबाई ने</strong> <br />छत्रपति शिवा ने 1674 में जब स्वतंत्र मराठा साम्राज्य की नींव रखी तो उसके पीछे उनकी मां जीजाबाई की प्रेरणा और उनके संस्कार ही थे। जीजाबाई को देश में तेजी से बढ़ते मुगल सामाज्य का शासन उनके सीने में कील की तरह चुभता था। उन्होंने अपने पुत्र शिवा का पुणे में इस कदर सैन्य, राजनीति, कूटनीति के सबक सिखाए, जो आगे चलकर दिल्ली दरबार के लिए नासूर बन गए। <br /><br /><strong>प्रताप को तराशा मां जयवंता बाई ने</strong> <br />दिल्ली मुगल दरबार की दासता स्वीकार नहीं करने वाले महाराणा प्रताप के खून में वीरता और स्वतंत्र रहने के संस्कार उनकी मां जयवंता बाई ने ही दिए थे। अकबर ने अपनी दासता स्वीकार कराने के लिए प्रताप पर हर तरीके आजमाए, लेकिन प्रताप ने अधिनता स्वीकार नहीं की। घनघोर विपरीत परिस्थितियों में जंगल-जंगल भटकते रहे, लेकिन मां के दूध पर आंच नहीं आने दी। चाहते तो आमेर के राजा मानसिंह की तरह दिल्ली दरबार में उच्च पद पा सकते थे, लेकिन 1576 में हल्दी घाटी का युद्ध लड़ा, जिसमें सामना आमेर के राजा मानसिंह से हुआ। राजस्थान के इतिहासकार श्रीकृष्ण जुगनू बताते हैं कि उनके पिता महाराणा उदयसिंह के व्यस्त होने से उनकी मां  जयवंता बाई ने ही उन्हें वीरता और महिलाओं के प्रति आदर के संस्कार दिए थे।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 08 May 2022 14:38:26 +0530</pubDate>
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                <title>स्माइली इमोजी से बयां की खुशी : प्रदेश के पहले बेबी फीडिंग रूम सुविधा पर 800 माताओं ने कहा-शुक्रिया... हवामहल!</title>
                                    <description><![CDATA[पुरातत्व एवं संग्रहालय विभाग के अधीन आने वाले किले, महलों और संग्रहालयों में पर्यटकों की सुविधार्थ कुछ ना कुछ नई गतिविधियां करता रहता है। कुछ ऐसी ही गतिविधी जुलाई, 2017 में हवामहल स्मारक में शुरू की थी, जिसे बच्चों की माताओं ने सहारा। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/smiley-emoji-expressed-happiness--800-mothers-on-the-state-s-first-baby-feeding-room-facility-said-%E2%80%93-thank-you%E2%80%A6-hawa-mahal/article-5044"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-02/54.jpg" alt=""></a><br /><p> जयपुर। पुरातत्व एवं संग्रहालय विभाग के अधीन आने वाले किले, महलों और संग्रहालयों में पर्यटकों की सुविधार्थ कुछ ना कुछ नई गतिविधियां करता रहता है। कुछ ऐसी ही गतिविधी जुलाई, 2017 में हवामहल स्मारक में शुरू की थी, जिसे बच्चों की माताओं ने सहारा। दरअसल स्मारक में भ्रमण के लिए पर्यटकों के साथ छोटे-छोटे बच्चे भी साथ आते हैं। इन बच्चों की सुविधा को ध्यान में रखकर यहां बेबी फिडिंग रूम बनाया गया। जहां माताएं भूख लगने पर बच्चों को दुग्धपान कराती हैं। तब से लेकर अब तक करीब 3 हजार से अधिक माताओं ने इस व्यवस्था का लाभ उठाया। इसमें से 800 से अधिक माताओं ने व्यवस्था को देखकर अपनी स्वेच्छा विजिटर बुक में सुविधा के बारे में अपने विचार लिखकर हवामहल प्रशासन को शुक्रिया कहा। <br /><strong><br />केवल हवामहल में बेबी फिडिंग रूम</strong><br />पुरातत्व विभाग के प्रदेश में संग्रहालयों और किलो-महलों को मिलाकर तकरीबन 29 से अधिक मॉन्यमेंट्स हैं। बेबी फिडिंग रूम की सुविधा केवल हवामहल स्मारक में ही देखने को मिल रही है। इसके अतिरिक्त विभाग के किसी अन्य जिलों में स्थित मॉन्यूमेंट्स में इस तरह की सुविधा नहीं है। स्मारक आने वाले अन्य पर्यटकों का कहना है कि यहां की तरह अन्य पर्यटन स्थलों पर भी बेबी फिडिंग रूम की सुविधा होनी चाहिए। <br /><br /><br /><strong>डोरेमॉन, स्पाइडर मैन देख चेहरे पर आती है मुस्कान</strong><br />स्मारक परिसर के अंदर बनाए गए बेबी फिडिंग रूम में जाते ही रोते हुए नन्हें-मुन्नों के चेहरों पर मुस्कान आ जाती है। यहां माताएं अपने छोटे-छोटे बच्चों को दुग्धपान कराती हैं। साथ ही यहां उनके लिए डोरेमॉन, स्पाइडर मैन जैसे कॉर्टून कैरेक्टर्स के खिलौने भी हैं, जो रोते हुए चेहरों पर नन्हीं मुस्कान ला देते हैं।<br /><br /><strong>ये कहा माताओं ने</strong><br />हमें यहां बच्चों को दूध पिलाने की सुविधा बहुत अच्छी लगी। - <strong>ईशा, दिल्ली</strong><br /><br />यहां छोटे बच्चों के लिए अच्छी व्यवस्था है। किसी अन्य पर्यटन स्थलों पर इस तरह की सुविधा नहीं है। -<strong> प्रियंका सैनी, जोधपुर</strong><br /><br />अपने शिशुओं को लेकर स्मारक में भ्रमण के लिए आने वाली माताओं की सुविधार्थ शिशुपान कक्ष बनाया था। यहां वे बच्चों को दुग्धपान करवा सकती हैं। साथ ही बच्चों को यहां आकर खूब आनन्द आता है। - <strong>सरोजनी चंचलानी, अधीक्षक, हवामहल स्मारकु</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 26 Feb 2022 12:53:16 +0530</pubDate>
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