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                <title>funds - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                            <item>
                <title>परिवहन विभाग के पास 700 करोड़ का फंड, फिर भी सड़क सुरक्षा पर लापरवाही</title>
                                    <description><![CDATA[राजस्थान परिवहन विभाग के पास 700 करोड़ रुपए का सड़क सुरक्षा कोष होते हुए भी इसका सही उपयोग नहीं हो पा रहा। विभाग केवल ट्रॉमा सेंटर्स पर फोकस कर रहा है, जबकि हादसों की रोकथाम पर ध्यान नहीं। विशेषज्ञों ने सुझाव दिया कि राजस्थान को उड़ीसा मॉडल अपनाना चाहिए, जहां ड्राइवरों की सख्त ट्रेनिंग से सड़क सुरक्षा बेहतर हुई है।
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/transport-department-has-a-fund-of-rs-700-crore-yet/article-131351"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-11/transport-department-logo.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। राजस्थान परिवहन विभाग के पास सड़क सुरक्षा कोष में करीब 700 करोड़ रुपए की राशि उपलब्ध है, लेकिन इसका सही उपयोग नहीं हो पा रहा है। जानकारी के अनुसार, सड़क सुरक्षा कोष में लगभग 500 करोड़ रुपए बकाया पड़े हैं, जबकि टोहास (ट्रक ऑपरेटर्स हाइवे एमिनिटीज सोसायटी) के खाते में करीब 200 करोड़ रुपए जमा हैं। यह राशि सड़क सुरक्षा, जागरूकता और हादसों की रोकथाम के लिए उपयोग की जानी चाहिए थी, लेकिन विभाग ने अब तक इन फंड्स का प्रभावी इस्तेमाल नहीं किया है।</p>
<p>विभाग वर्तमान में केवल ट्रॉमा सेंटर्स के सुदृढ़ीकरण पर ध्यान दे रहा है, यानी हादसे के बाद की व्यवस्थाओं पर फोकस है, जबकि दुर्घटनाओं को रोकने के लिए आवश्यक प्रशिक्षण, जागरूकता अभियान और सड़क सुरक्षा सुधार जैसे कदमों पर ध्यान नहीं दिया जा रहा। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि इन फंड्स का सही उपयोग किया जाए तो राज्य में सड़क हादसों की संख्या में उल्लेखनीय कमी लाई जा सकती है। विभाग की यह निष्क्रियता कई सवाल खड़े करती है कि आखिर इतने बड़े कोष का लाभ आम जनता तक क्यों नहीं पहुंच रहा।</p>
<p><strong>राजस्थान कब अपनाएगा उड़ीसा मॉडल ?</strong></p>
<p>हरमाड़ा हादसे के बाद फिर सवाल उठ रहा है कि राजस्थान उड़ीसा जैसा मॉडल क्यों नहीं अपनाता ? उड़ीसा में भारी वाहनों के ड्राइवरों के लाइसेंस जारी करने से पहले सख्त ट्रेनिंग प्रक्रिया अपनाई जाती है। नया हैवी लाइसेंस पाने के लिए एक माह की आवासीय ट्रेनिंग अनिवार्य है, जिस पर परिवहन विभाग 26 हजार रुपए तक खर्च करता है। वहीं लाइसेंस नवीनीकरण के लिए ड्राइवरों को तीन दिन की रिफ्रेशर ट्रेनिंग दी जाती है, जिसकी लागत 4250 रुपए है। इसके अलावा, जो ड्राइवर गंभीर श्रेणी के सड़क हादसों में लिप्त पाए जाते हैं, उनके लिए विशेष "ओफेंडर कैटेगरी ट्रेनिंग" अनिवार्य की गई है। उड़ीसा सरकार हर साल ड्राइवर ट्रेनिंग पर करीब 45 करोड़ रुपए खर्च करती है, जिससे सड़क सुरक्षा में उल्लेखनीय सुधार हुआ है।</p>
<p>इसके विपरीत राजस्थान में अब तक ड्राइवरों की ट्रेनिंग को लेकर ठोस पहल नहीं हुई है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर प्रदेश ड्राइवरों की स्किल ट्रेनिंग और नियमित रिफ्रेशर को अनिवार्य कर दे, तो सड़क हादसों की संख्या में बड़ी कमी लाई जा सकती है। परिवहन विभाग के लिए अब वक्त है कि वह इस दिशा में ठोस कदम उठाए।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 03 Nov 2025 17:55:43 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>लेह हिंसा के बाद गृह मंत्रालय की कार्रवाई : वांगचुक के एनजीओ का पंजीकरण रद्द, नहीं ले सकेंगे विदेशी फंड</title>
                                    <description><![CDATA[ संगठन के जवाब की जांच से पता चला है कि संगठन के खाते में अधिनियम की धारा 17 का उल्लंघन करते हुए साढे 3 लाख रुपए की राशि जमा कराई गई थी। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/foreign-funds-will-not-be-able-to-cancel-the-registration/article-127930"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-09/copy-of-news-(1)31.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। सरकार ने लद्दाख के सामाजिक और पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक के गैर सरकारी संगठन का विदेशी अंशदान नियमन पंजीकरण प्रमाण पत्र (एफसीआरए) वित्तीय अनियमितताओं और कानूनों के उल्लंघन के कारण रद्द कर दिया है। गृह मंत्रालय ने गुरुवार को कहा कि वांगचुक के संगठन स्टूडेन्ट्स एजूकेशनल एंड कल्चरल मूवमेंट ऑफ लद्दाख में अनियमितताओं का पता चलने के बाद गत 20 अगस्त को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया था। संगठन ने 19 सितम्बर को इसका जवाब दिया था। संगठन के जवाब की जांच से पता चला है कि संगठन के खाते में अधिनियम की धारा 17 का उल्लंघन करते हुए साढे 3 लाख रुपए की राशि जमा कराई गई थी। गृह मंत्रालय ने स्वीडन के एक दानदाता से करीब पांच लाख रुपए की राशि के दान पर भी सवाल उठाए हैं।</p>
<p><strong>लेह में बड़ी संख्या में पुलिस और सुरक्षा बल तैनात</strong><br />श्रीनगर। लेह में बुधवार को अलग राज्य का दर्जा देने और छठी अनुसूची में शामिल करने की मांग को लेकर हुई हिंसा के कारण भारतीय सुरक्षा संहिता की धारा 163 के तहत सुरक्षात्मक प्रतिबंध लगा दिया गया है। इस हिंसा में 4 लोगों की मौत हो गई थी और दर्जनों लोग घायल हो गए थे।  एक अधिकारी ने बताया कि बुधवार  शाम से हिंसा की कोई घटना दर्ज नहीं की गई है। प्रदर्शनकारियों ने भाजपा कार्यालय में आग लगा थी और कई गाड़ियों को भी क्षतिग्रस्त कर दिया था, लेकिन गुरुवार को क्षेत्र में फिर से शांति कायम हो गई है।</p>
<p><strong>केंद्र ने बताया वांगचुक को जिम्मेदार</strong><br /> केंद्र सरकार का आरोप है कि इस हिंसा के लिए पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक जिम्मेदार हैं। वांगचुक राज्य की मांग को लेकर भूख हड़ताल पर बैठे हुए थे, लेकिन कल की हिंसा के बाद उन्होंने अपनी भूख हड़ताल वापस ले ली है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 26 Sep 2025 10:44:39 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>अगस्त में एफपीआई ने बाजार से निकाले 11,792 करोड़ रुपए, शुद्ध रूप से 20,975 करोड़ रुपए की इक्विटी बेची</title>
                                    <description><![CDATA[विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (एफपीआई) ने अगस्त में घरेलू पूंजी बाजार से 11,792 करोड़ रुपए की शुद्ध निकासी की। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/business/in-august-fpi-sold-equity-worth-rs-20975-crore-purely/article-123898"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-08/1ne1ws-(1)45.png" alt=""></a><br /><p>मुंबई। विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (एफपीआई) ने अगस्त में घरेलू पूंजी बाजार से 11,792 करोड़ रुपए की शुद्ध निकासी की। यह लगातार तीसरा महीना है, जब एफपीआई ने भारतीय पूंजी बाजार से पैसे निकाले हैं। केंद्रीय डिपॉजिटरी सेवा (सीडीएसएल) के आंकड़ों के अनुसार, अगस्त में उन्होंने शुद्ध रूप से 20,975 करोड़ रुपए की इक्विटी बेची।</p>
<p>हाइब्रिड में भी उन्होंने 156.42 करोड़ रुपए की शुद्ध निकासी की। वहीं, डेट और म्युचुअल फंड में एफपीआई लिवाल बने हुए हैं। डेट में उन्होंने 7,828 करोड़ रुपए और म्यूचुअल फंड में 1,511 करोड़ रुपए का शुद्ध निवेश किया।  इससे पहले एफपीआई ने शुद्ध रूप से जुलाई में 5,261 करोड़ रुपए और जून में 7,769 करोड़ रुपए की बिकवाली की थी। इस साल मार्च और मई को छोड़कर अन्य सभी महीनों में उन्होंने बाजार से पैसे निकाले हैं। कुल मिलाकर साल 2025 में विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों ने भारतीय पूंजी बाजार से 63,196 करोड़ रुपए की शुद्ध निकासी की है। जियोजित इनवेस्टमेंट्स लिमिटेड के मुख्य निवेश रणनीतिकार वी.के. विजयकुमार के अनुसार, पिछले छह सप्ताह में घरेलू संस्थागत निवेशकों की भारी खरीददारी के बावजूद भारतीय शेयर बाजारों का प्रदर्शन कमतर रहा है। अगस्त के पहले पखवाडे में विदेशी संस्थागत निवेशकों ने शेयर बाजारों में 24,190 करोड़ रुपए की इक्विटी बेची है, लेकिन घरेलू निवेशकों ने 55,790 करोड़ रुपए की इक्विटी खरीदकर उस असर को समाप्त कर दिया है।  </p>
<p>वी.के. विजयकुमार ने कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के भारत पर भारी आयात शुल्क लगाने और अमेरिका-भारत के रिश्ते बिगड़ने से बाजार में निवेश धारणा प्रभावित हुई है। इसके साथ ही कंपनियों के तिमाही परिणामों के कमतर रहने से भी निवेशक सतर्क हैं। विदेशी संस्थागत निवेशकों की आईटी सेक्टरों में लगातार बिकवाली से आईटी कंपनियों के शेयर टूट गए।   विजयकुमार ने कहा कि आने वाले समय में अमेरिकी आयात शुल्क पर क्या कार्रवाई होती है इसका असर विदेशी संस्थागत निवेशकों के रुख पर देखा जाएगा। </p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>बिजनेस</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 18 Aug 2025 11:14:55 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur KD]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>जन भागीदारी विकास योजना में फंड आवंटित, परिसम्पत्ति सृजन के अटके काम शुरू होंगे</title>
                                    <description><![CDATA[ ग्रामीण विकास एवं पंचायतीराज विभाग ने महात्मा गांधी जन भागीदारी विकास योजना में 33 जिलों को 20 करोड़ रुपए का फंड आवंटित किया है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/the-pending-work-of-asset-creation-allocated-under-jan-bhagidari/article-81326"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-05/bhajanlal-sharmaa.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। ग्रामीण विकास एवं पंचायतीराज विभाग ने महात्मा गांधी जन भागीदारी विकास योजना में 33 जिलों को 20 करोड़ रुपए का फंड आवंटित किया है। अब इन जिलों की ग्राम पंचायतों में परिसम्पत्ति सृजन के अटके काम जन सहयोग से फिर शुरू हो सकेंगे। जारी बजट में बाड़मेर, जोधपुर और उदयपुर जिले को सबसे ज्यादा फंड मिला है और सबसे कम सिरोही को मिला है।</p>
<p><strong>ये है जन भागीदारी विकास योजना</strong><br />प्रदेश के ग्रामीण क्षेत्रों के लिए लागू यह राज्य वित्त पोषण योजना है। इसमें सामुदायिक परिसंपत्तियों के सृजन के लिए जन सहयोग 30 प्रतिशत, सृजित परिसंपत्ति पर दानदाता का नाम अंकित करने की स्थिति में 51 प्रतिशत, श्मसान/कब्रिस्तान की चारदीवारी, चबूतरा, टीनशेड आदि पर 10 प्रतिशत तथा अजाजजा बहुल क्षेत्र में जनसहयोग 20 प्रतिशत है। शेष राशि राज्य मद से उपलब्ध कराई जाती है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 12 Jun 2024 21:08:58 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>साढ़े तीन साल से अपने हक को तरस रहे कोरोना वॉरियर्स, नहीं मिली राशि</title>
                                    <description><![CDATA[ संकट के समय स्वास्थ्य कर्मियों को प्रोत्साहित करने के लिए सरकार ने प्रोत्साहन राशि देने की घोषणा की थी।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/corona-warriors-have-been-yearning-for-their-rights-for-three-and-a-half-years--did-not-receive-the-amount/article-57020"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-09/saade-teen-saal-s-apne-haq-ko-taras-rhe-corona-warriors,-nhi-mili-rashi...kota-news-13-09-2023.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। कोरोना वायरस के खौफ से जब पूरी दुनिया सहम गई थी, तब फ्रंट लाइन में खड़े रहकर जानलेवा वायरस से सामना स्वास्थ्य कर्मियों ने ही किया था। माहामारी के दौर में जब अपनों ने अपनों का साथ छोड़ दिया था, तब चिकित्सक, नर्सिंग सहित अन्य स्वास्थ्यकर्मी ही बेसहाराओं की ढाल बने थे। संक्रमण से लड़ रहे इन कर्मचारियों के लिए देशभर में ताली से थाली तक बजी। कोरोना योद्धा का सम्मान भी मिला। खुद की जान खतरे में डाल मानवीय धर्म निभाया। संकट के समय स्वास्थ्य कर्मियों को प्रोत्साहित करने के लिए सरकार ने प्रोत्साहन राशि देने की घोषणा की थी। लेकिन, साढ़े तीन साल बाद भी कोरोना वॉरियर्स को अपना हक नहीं मिला। स्वास्थ्यकर्मी अपने हक के लिए उच्चाधिकारियों से गुहार लगा चुके हैं, लेकिन उन्हें अभी तक प्रोत्साहन राशि नहीं मिली। </p>
<p><strong>पिछले साल निदेशालय को भिजवाया था डाटा</strong><br />कोरोना काल में काम करने वाले वॉरियर्स की हौसला अफजाई करने और आर्थिक रूप से सहारा देने के लिए सरकार द्वारा तय की गई प्रोत्साहन राशि और  पात्र  कोरोना वॉरियर्स की सूची जिला स्वास्थ्य एवं चिकित्साधिकारी व मेडिकल कॉलेज प्राचार्य की ओर से निदेशालय को भिजवाई गई थी। हालांकि, सीएमएचओ के अधीन आने वाले अस्पतालों के पात्र चिकित्सा एवं स्वास्थ्यकर्मियों को प्रोत्साहन राशि मिलने की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। ऐसे में उन्हें जल्द ही पैसा मिल जाएगा। वहीं, मेडिकल कॉलेज में संभाग के सबसे बड़े सुपरस्पेशलिस्ट चिकित्सालय में बने कोविड सेंटर में कार्यरत चिकित्साकर्मियों को नहीं मिला। </p>
<p><strong>कलक्टर से सीएमएचओ तक लगाई गुहार</strong><br />राजस्थान नर्सेज एसोसिएशन के जिलाध्यक्ष बेनीप्रसाद मीणा ने बताया कि कोविड के दौर में जब अपने अपनों का साथ छोड़ दिया था तब नर्सिंगकर्मी ही था जो उनका सहारा बना। रुटीन में 8 घंटे डयूटी करने वाले कर्मियों ने 12 से 15 घंटे बिना डरे आमजन की सेवा की। हालांकि, यह मानव धर्म था और उसी के मद्देनजर काम किया। सरकार ने वॉरियर्स को प्रोत्साहन राशि देने की घोषणा की थी। इसके लिए निदेशालय ने सीएमएचओ को जिले के सरकारी अस्पतालों में कार्यरत कोरोना वॉरियर्स की संख्या और कितना पैसा दिया जाना है, इसकी सूचना मांगी जा रही, जो निदेशालय को भिजवा दी गई। इसके बावजूद अभी तक सुपरस्पेशलिस्ट चिकित्सालय में बने कोविड सेंटर में कार्यरत चिकित्साकर्मियों को उनका हक नहीं मिला। </p>
<p><strong>किसे कितनी मिलनी है प्रोत्साहन राशि</strong><br />कोरोना वैश्विक महामारी में राज्य सरकार ने डॉक्टर्स के लिए 5 हजार और नर्सिंगकर्मी, एएनएम, एलएचवी, टैक्निशियन, वाहन चालक, वार्डबॉय, सफाईकर्मियों को एकमुश्त 2500 रुपए देना तय किया था। जिसका इंतजार हजारों कर्मचारियों को करना पड़ रहा है। </p>
<p>पिछले साल हमने पात्र कोरोना वॉरियर्स व उनके मिलने वाली राशि की सूची बनाकर निदेशालय से बजट की डिमांड की थी। जहां से बजट ट्रेजरी में आ गया। इस संबंध में संबंधित चिकित्साकर्मियों के बिल बनाकर ट्रैजरी में भेज दिए हैं। जल्द ही वॉरियर्स को प्रोत्साहन राशि मिल जाएगी। <br /><strong>- डॉ. जगदीश सोनी, सीएमएचओ कोटा</strong></p>
<p>मैं अभी कार्यक्रम में हूं, इस संबंध में जानकारी गुरुवार तक दे पाएंगे। <br /><strong>- डॉ. संगीता सक्सेना, प्राचार्य मेडिकल कॉलेज कोटा</strong></p>
<p><strong>क्या कहते हैं नर्सिंगकर्मी  </strong><br />पूर्व में जिला कलक्टर, मेडिकल कॉलेज प्राचार्य और सीएमएचओ तक को ज्ञापन देकर अवगत करा चुके हैं। लेकिन, अभी तक वॉरियर्स को प्रोत्साहन राशि नहीं मिली।  जबकि, कोरोना काल के दौरान मुख्यमंत्री द्वारा एक और घोषणा की थी, जिसके तहत आईसीयू में काम करने वाले चिकित्साकर्मियों को 200 रुपए प्रतिदिन एवं कोविड जनरल वार्ड सहित अन्य जगह ड्यूटी करने वाले कर्मचारियों को 100 रुपए प्रतिदिन देने की घोषणा की थी। इसके बावजूद मेडिकल कॉलेज कोटा के कोविड वार्ड में कार्यरत कर्मचारियों को आज तक पैसा नहीं मिला। <strong>- बैनी प्रसाद मीणा, जिलाध्यक्ष राजस्थान नर्सेज एसोसिएशन कोटा  </strong></p>
<p>प्रोत्साहन राशि के इंतजार में साढ़े तीन साल बीत गए लेकिन अब तक हक नसीब नहीं हुआ। जब लोग घरों से बाहर निकलने में कतराते थे, उस दौर में हम संक्रमण के बीच अपना फर्ज निभाने से पीछे नहीं हटे। 24 घंटे काम करने वाले स्वास्थ्यकर्मी अपने हक के लिए तरस रहे हैं। पूर्व में उच्चाधिकारियों को लिखित में ज्ञापन देकर मांगों से अवगत कराया। इसके बावजूद मेडिकल कॉलेज में कार्यरत कोरोना वॉरियर्स को प्रोत्साहन राशि नहीं मिली। <br /><strong>-हनुमान मीणा, प्रदेश सह संयोजक, राजस्थान नर्सेज एसोसिएशन</strong></p>
<p>महामारी के दौर में नर्सिंग सहित अन्य चिकित्साकर्मियों ने अपनी जान जोखिम में डाल मरीजों की सेवा की थी। सरकार ने प्रोत्साहन राशि देने की घोषणा की जो आज तक नहीं मिली। इससे कर्मचारियों में निराशा है। हमने हक के लिए  उच्चाधिकारियों को लिखित में पत्र देकर गुहार लगाई, आश्वासन मिले लेकिन हक का पैसा नहीं मिला। <br /><strong>- सीपी बैरवा, महासचिव, राजस्थान नर्सेज एसोसिएशन</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 13 Sep 2023 18:09:51 +0530</pubDate>
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                <title>डेट म्यूचुअल फंड्स से निवेशकों ने निकाले 32,722 करोड़ </title>
                                    <description><![CDATA[ भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के बढ़ती महंगाई को काबू में लाने के लिए प्रमुख नीतिगत दर रेपो रेट में बढ़ोतरी और उदार रुख को धीरे-धीरे वापस लेने की घोषणा के बाद निकासी बढ़ी है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/business/investors-withdraw-32722-crore-from-debt-mutual-funds/article-12143"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-06/buyers-guide-mutual-fund-min.jpg" alt=""></a><br /><p><strong> नई दिल्ली।</strong> फिक्स्ड इनकम वाले म्यूचुअल फंड प्रोडक्ट्स से मई महीने में निवेशकों ने 32,722 करोड़ की निकासी की है। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के बढ़ती महंगाई को काबू में लाने के लिए प्रमुख नीतिगत दर रेपो रेट में बढ़ोतरी और उदार रुख को धीरे-धीरे वापस लेने की घोषणा के बाद निकासी बढ़ी है। एसोसिएशन आॅफ  म्यूचुअल फंड्स इन इंडिया (एएमएफआई) के आंकड़ों के अनुसार, इससे पहले अप्रैल महीने में इसमें 54,656 करोड़ रु. का निवेश हुआ था। इसके अलावा इस साल अप्रैल और मई के बीच फोलियो की संख्या भी 73.43 लाख से घटकर 72.87 पर आ गई। बाजार में उतार-चढ़ाव के दौरान निवेश के लिहाज से बांड जैसे फिक्स्ड इनकम वाले प्रोडक्ट्स को सुरक्षित विकल्प माना जाता है। हालांकि, ब्याज दर में बढ़ोदरी, मैक्रो एनवायरनमेंट में उथल-पुथल और हायर यील्ड से निवेशकों पर बांड बाजार में निवेश को लेकर रुख प्रभावित हो सकता है।</p>
<p><strong>विश्लेषकों की सलाह</strong></p>
<p>मार्निंग स्टार इंडिया के सीनियर एनालिस्ट (रिसर्च मैनेजर) कविता कृष्णन ने कहा कि खाने-पीने की चीजों, कमोडिटी और फ्यूल की कीमतों में तेजी के साथ रूस-यूक्रेन युद्ध जैसे कारणों से नीतिगत दर में वृद्धि हुई है। रिजर्व बैंक का जोर अब मुद्रास्फीति को काबू में लाने पर है। इससे नीतिगत दर में आगे और वृद्धि की आशंका है। मौजूदा स्थिति को देखते हुए ओवरनाइट और लिक्विड फंड (अल्पकालीन निवेश उत्पाद) जैसे कोष को छोड़कर बांड और इसी तरह के अन्य उत्पादों से पूंजी निकासी जारी है। सिंगल डिजिट में रिटर्न और इक्विटी जैसे अन्य क्षेत्रों में बढ़ती रुचि से भी बांड कोष में पूंजी प्रवाह प्रभावित हुआ है। बजाज कैपिटल के चीफ  रिसर्च आॅफिसर आलोक अग्रवाल ने भी कहा कि पूंजी निकास का कारण आरबीआई का पिछले महीने मौद्रिक नीति समीक्षा में अपने रुख में बदलाव है। बिना तय कार्यक्रम के हुई बैठक में आरबीआई ने न केवल रेपो रेट में 0.40 प्रतिशत की वृद्धि की बल्कि कैश रिजर्व रेश्यो 0.5 प्रतिशत बढ़ाकर 4.5 प्रतिशत कर दिया।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>बिजनेस</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 14 Jun 2022 15:09:11 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur]]></dc:creator>
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                <title>पंचायतों की पीड़ा: करोड़ों का फंड बैंकों में अटका, टर्नओवर मेंटेंन के लिए बैंक और अफसरों के बीच होती है मिलीभगत!</title>
                                    <description><![CDATA[ गलत खाता संख्या और आईएफएससी कोड, बैंकों का विलय जैसे कारणों से यह पैसा ग्राम पंचायतों को समय पर नहीं मिल पा रहा।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/pain-of-panchayats--crores-of-funds-stuck-in-banks--there-is-collusion-between-bank-and-officers-for-turnover-maintenance/article-5171"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-02/news1.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। प्रदेश की कई नवगठित ग्राम पंचायतों सहित सैकड़ों पुरानी पंचायतों के विकास फंड का पैसा बैंक खातों में अटका है। गलत खाता संख्या और आईएफएससी कोड, बैंकों का विलय जैसे कारणों से यह पैसा ग्राम पंचायतों को समय पर नहीं मिल पा रहा। करोड़ों रुपए का यह भुगतान छह महीने से ज्यादा समय से बैंकों के पास लम्बित है। ऐसे में ग्राम पंचायतों को कर्मचारियों का वेतन और ठेकेदारों को भुगतान करने में परेशानी हो रही है। नवगठित पंचायतों में विकास कार्यों के लिए फंड केन्द्र और राज्य प्रवर्तित योजनाओं के जरिए राष्ट्रीयकृत बैंक खातों में दिया जाता है। नवगठित 250 ग्राम पंचायतों और 550 पुरानी पंचायतों में फंड का पैसा नहीं मिलने की शिकायतें हैं। इनकी पुष्टि के बाद विभाग का कहना है कि पहले कुछ ग्राम पंचायतों में नवगठन के बाद राजस्व दस्तावेजों की समस्या थी, उसके अधिकांश मामले निस्तारित हो गए। अब कई ग्राम पंचायतों से जुड़ी बैंकों के विलय मामले में खातों की जानकारी अपडेट नहीं होने से परेशानी बनी हुई है। बैंकों के आईएफएससी कोड भी बदले तो भुगतान मामले अटक गए। वहीं, सरपंचों का कहना है कि पिछले छह महीने से इन ग्राम पंचायतों के पास कोई फंड नहीं आया। कई ग्राम पंचायतों ने फंड बैंक में पड़े रहने के कारण काम करा लिए, लेकिन अब तकनीकी खामियों की वजह से भुगतान में समस्या आ रही है।<br /><br /><strong>बैंक और अफसरों की सांठगांठ</strong><br />ग्राम पंचायतों के खाते राष्ट्रीयकृत सरकारी और निजी बैंकों में खुले हैं। सूत्रों का कहना है कि कई बैंकों की जिला शाखाओं में टर्नओवर मेंटेंन लायक पैसे नहीं रहते तो बैंक वाले पंचायतीराज विभाग के अफसरों से मिलीभगत करते हैं। इन खातों में पैसा कुछ महीनों के लिए डलवा दिया जाता है। निजी बैंक विभागीय अफसरों को ज्यादा प्रलोभन देते हैं। गलत आईएफएससी कोड और खाता संख्या की आड में इस पैसे की महीनों की ब्याज विभाग और ग्राम पंचायतों को नहीं मिलती और ग्राम पंचायतें भुगतान के लिए परेशान रहती हैं।<br /><br /><strong>ऐसे मिलता है भुगतान</strong><br />वित्त आयोग और केन्द्र-राज्य प्रवर्तित योजनाओं के मद में ग्राम पंचायतों को जो राशि मिलती है। उसमें 75 प्रतिशत सीधे ग्राम पंचायत के खाते में, 20 प्रतिशत पंचायत समिति के खाते में और पांच प्रतिशत जिला परिषद के खाते में जाती है। पंचायतों से जुड़े सभी विकास कार्यों का ऑनलाइन भुगतान होता है। सूत्रों के अनुसार पंचायतों के चुनाव से पहले वीडीओ ही सर्वेसर्वा होते थे, इसलिए भुगतान मामलों में बैंकों से मिलीभगत हुई। अब पंचायतों में सरपंच, प्रधान और प्रमुख चुनकर आ गए तो वीडिओ की मिलीभगत के प्रकरणों से धूल साफ होने लगी है।<br /><br />कई नई और पुरानी ग्राम पंचायतों में पिछले छह महीने से फंड राशि नहीं मिल पा रही है। फंड मिला, लेकिन गलत जानकारी की आड में बैंकों में अटका है। कर्मचारी तनख्वाह, ठेकेदारों और फर्मों को भुगतान नहीं कर पा रहे। -<strong> रफीक पठान, प्रवक्ता, राजस्थान सरपंच संघ</strong><br /><br />ग्राम पंचायतों को फंड देने की तय व्यवस्था के तहत हम संबंधित बैंक खातों में राशि रिलीज कर देते हैं। पैसे अटकने के मामले जब वीडिओ के माध्यम से हमारे पास आते हैं, तो हम संबंधित बैंकों से बातकर उनका निदान करवाते हैं। - <strong>एचआर पंवार, वित्तीय सलाहकार, पंचायतीराज विभाग</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 28 Feb 2022 12:29:48 +0530</pubDate>
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