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                <title>ganga - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <title>Ajit Pawar की अस्थियां हरिद्वार में विसर्जित, VIP घाट पर राष्ट्रवादी युवा कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष धीरज शर्मा ने पूरी की धार्मिक रस्में</title>
                                    <description><![CDATA[हरिद्वार में दिवंगत नेता अजित पवार की अस्थियों का गंगा तट पर विधिवत विसर्जन हुआ। राष्ट्रवादी युवा कांग्रेस ने अस्थि कलश यात्रा की शुरुआत की। कार्यकर्ता उपस्थित रहे। श्रद्धांजलि अर्पित]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/ajit-pawars-ashes-were-immersed-in-vip-ghat-in-haridwar/article-142019"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-02/11-(700-x-400-px)-(630-x-400-px)-(1)4.png" alt=""></a><br /><p>हरिद्वार। दिवंगत राष्ट्रवादी नेता अजित पवार की अस्थियों का गुरुवार को धर्मनगरी हरिद्वार में पवित्र गंगा तट पर विधि-विधान से विसर्जन किया गया। इस अवसर पर राष्ट्रवादी युवा कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष धीरज शर्मा विशेष रूप से हरिद्वार पहुँचे और वीआईपी घाट पर धार्मिक रीति-रिवाजों के साथ अस्थि विसर्जन संपन्न कराया।</p>
<p>गंगा तट पर वैदिक मंत्रोच्चार और धार्मिक अनुष्ठानों के बीच अजित पवार की अस्थियों को प्रवाहित किया गया। अस्थि विसर्जन की पूरी प्रक्रिया उनके पारिवारिक पुरोहित अभिषेक झा द्वारा संपन्न कराई गई। इस दौरान बड़ी संख्या में कार्यकर्ता और समर्थक उपस्थित रहे।</p>
<p>अस्थि विसर्जन के पश्चात राष्ट्रवादी युवा कांग्रेस की ओर से राष्ट्रव्यापी अस्थि कलश यात्रा का औपचारिक शुभारंभ किया गया। धीरज शर्मा ने बताया कि यह यात्रा हरिद्वार से प्रारंभ होकर देश की प्रमुख पवित्र नदियों तक जाएगी, ताकि अजित पवार की विचारधारा से जुड़े कार्यकर्ताओं और समर्थकों को श्रद्धांजलि अर्पित करने का अवसर मिल सके।</p>
<p>उन्होंने बताया कि यह यात्रा उत्तर प्रदेश की काशी, मध्य प्रदेश की नर्मदा, गुजरात की साबरमती, जम्मू-कश्मीर की चेनाब नदी तक पहुँचेगी। इसके बाद यात्रा दक्षिण भारत के रामेश्वरम और कन्याकुमारी तक जाएगी, जहाँ विभिन्न पवित्र नदियों में अस्थि विसर्जन किया जाएगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 05 Feb 2026 13:25:19 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>तमाम योजनाओं एवं प्रयासों के गंगा मैली क्यों?</title>
                                    <description><![CDATA[ सरकार यह समझे कि उसे केवल गंगा को साफ  ही नहीं करना, बल्कि उसकी निर्मलता एवं अविरलता के लिए एक अनूठा उदाहरण भी पेश करना है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/opinion/why-all-the-plans-and-efforts-of-the-ganges-are-dirty/article-46845"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-05/z-52.png" alt=""></a><br /><p>गंगा की सफाई, उसे प्रदूषण मुक्त करने एवं नदियों के माध्यम से आर्थिक विकास, धार्मिक आस्था एवं पर्यटन की संभावनाओं को तलाशने की दृष्टि से वर्तमान उत्तरप्रदेश सरकार एवं प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के तमाम प्रयासों के बावजूद गंगा आज भी मैली क्यों है? यह सवाल सरकार के नदियों को स्वच्छ बनाने के लिए लंबे समय से चल रही तमाम योजनाओं और कार्यक्रमों की पोल खोलते हैं। सरकार की ओर से घोषणाएं करने में शायद ही कभी कमी की जाती है, मगर उन पर अमल को लेकर कहां चूक या लापरवाही बरती जा रही है, इस पर गौर करना कभी जरूरी नहीं समझा जाता। सरकार यह समझे कि उसे केवल गंगा को साफ  ही नहीं करना, बल्कि उसकी निर्मलता एवं अविरलता के लिए एक अनूठा उदाहरण भी पेश करना है। ऐसा करके ही देश की अन्य नदियों को भी प्रदूषण मुक्त करने की दिशा में सकारात्मक वातावरण निर्मित किया जा सकेगा। गौरतलब है कि गंगा नदी पर अधिकार सम्पन्न कार्य बल यानी ईटीएफ की पिछले महीने हुई ग्यारहवीं बैठक में यह जानकारी भी सामने आई कि उत्तरकाशी में सुरंग के निर्माण के कारण इसके मलबे को गंगा नदी के किनारे डाल दिया गया। सरकार की अन्य विकास योजनाएं ही गंगा का प्रदूषित करने का जब जरिया बन रही है तो इसी गंगा नदी एवं अन्य नदियों में उद्योगों से विभिन्न रसायन, चीनी मिल, भट्टी, ग्लिस्रिन, टिन, पेंट, साबुन, कताई, रेयान, सिल्क, सूत, प्लास्टिक थेलियां-बोतले आदि जहरीले कचरे बड़ी मात्रा में मिलते हैैं, तो कोई आश्चर्य की बात नहीं है।<br /><br />गंगा कायाकल्प का दृष्टिकोण ‘अविरल धारा’ (सतत प्रवाह), ‘निर्मल धारा’ (प्रदूषणरहित प्रवाह) को प्राप्त करके और भूगर्भीय और पारिस्थितिक अखंडता को सुनिश्चित करके नदी की अखंडता को बहाल करने की समग्र योजना और रखरखाव के बावजूद गंगा लगातार प्रदूषित हो रही है। जबकि सरकार क्रॉस-सेक्टोरल सहयोग को प्रोत्साहित करने वाली नदी बेसिन रणनीति को लागू करके गंगा नदी के प्रदूषण को समाप्त करने और पुनरोद्धार को सुनिश्चित करने की दिशा में काम कर रही है। यह पानी की गुणवत्ता और पारिस्थितिक रूप से जिम्मेदार विकास को बनाए रखने की दृष्टि से गंगा नदी में न्यूनतम जैविक प्रवाह भी सुनिश्चित करता है। इन बहुआयामी योजनाओं के बावजूद गंगा स्वच्छता अभियान अब तक कहां पहुंचा है, इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि आज भी गंगा जैसी अहम नदी को स्वच्छ बनाने की कोई पहल करनी पड़ रही है। हालत यह है कि अलग-अलग मौके पर लागू दिशा-निर्देशों के बावजूद कम से कम मलबा डालने पर भी रोक नहीं लगाई जा सकी है। प्रदूषित नालों से गन्दगी गंगा में लगातार डाली जा रही है। यह समझना मुश्किल नहीं है कि समस्या शायद योजनाओं या कार्यक्रमों की नहीं होगी, उनके अमल में बरती गई लापरवाही या फिर गड़बड़ियों की वजह से किसी बड़ी और बेहद महत्वपूर्ण पहलकदमी का भी हासिल शून्य हो जा सकता है।<br /><br />अब एक बार फिर केंद्र सरकार ने गंगा नदी के किनारे मलबा डाले जाने या गांवों का गंदा पानी नदी में गिराने से प्रदूषण का स्तर बढ़ने पर संज्ञान लिया है। इसके तहत सरकार नदी किनारे स्थित चार हजार गांवों से निकलने वाले लगभग चौबीस सौ नाले को चिन्हित करके इनकी ‘जियो टैगिंग’ करेगी। सरकार इनसे ठोस कचरा प्रवाहित होने से रोकने के लिए एक ‘एरेस्टर स्क्रीन’ लगाएगी। यह गंगा नदी में अलग-अलग वजहों से होने वाले प्रदूषण को रोकने के अलावा किया जा रहा उपाय है। अब यह उम्मीद की जा सकती है कि इसके जरिए मानव सभ्यता के लिए एक बेहद जरूरी नदी में फिर से जीवन भर सकेगा। वास्तव में गंगा एक सम्पूर्ण संस्कृति की वाहक रही है, जिसने विभिन्न साम्राज्यों का उत्थान-पतन देखा, किंतु गंगा का महत्व कम न हुआ। आधुनिक शोधों से यह भी प्रमाणित हो चुका है कि गंगा की तलहटी में ही उसके जल के अद्भुत और चमत्कारी होने के कारण मौजूद है। यद्यपि औद्योगिक विकास ने गंगा की गुणवत्ता को दूषित किया है, किन्तुु उसका महत्व यथावत है। उसका महात्म्य आज भी सर्वोपरि है। गंगा स्वयं में संपूर्ण संस्कृति है, संपूर्ण तीर्थ है, उन्नत एवं समृद्ध जीवन का आधार है, जिसका एक गौरवशाली इतिहास रहा है। एक ज्वलंत सवाल और होना चाहिए कि गंगा नदी को स्वच्छ बनाने के लिए दशकों से लागू गंगा कार्य योजना या नमामि गंगे जैसे महत्वाकांक्षी कार्यक्रम और अन्य नीतियों के बावजूद आज भी इतनी बड़ी तादाद में ठोस कचरा या अन्य तरह की गंदगी बहाने वाले नालों पर कैसे रोक नहीं लग सकी? भारत में मुख्य नदी खासतौर से गंगा भारतीय संस्कृति और विरासत से अत्यधिक गहरे रूप में जुड़ी हुई है। मार्च, 2017 में उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ सरकार ने सत्ता में आने के बाद गंगा की स्वच्छता और निर्मलता सुनिश्चित करने के मोदी सरकार के लक्ष्य को आवश्यक गति और दिशा दी। अप्रैल, 2017 में कानपुर व कन्नौज में स्थित चमड़े के कारखानों को समयबद्ध योजना के तहत अन्यत्र स्थानांतरित करने की घोषणा की गई और औद्योगिक कचरे व अपशिष्ट पदार्थों के गंगा में मिलने से रोकने के लिए जल शोधन संयंत्र लगाने की योजना पर कार्य प्रारंभ किया गया। <br /><br />-ललित गर्ग<br />(ये लेखक के अपने विचार हैं)</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>ओपिनियन</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 27 May 2023 11:33:08 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur]]></dc:creator>
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                <title>नमामि गंगे: संकल्प शक्ति का अविरल प्रमाण</title>
                                    <description><![CDATA[अत्यधिक आकर्षक हिल्सा मछली की बढ़ती आबादी और उसके बाद हमारे मछुआरों की समृद्धि में यह रास्ता सबसे महत्वपूर्ण है। कुदरती तौर पर बहुआयामी और समग्र, इस कार्यक्रम के परिणामस्वरूप गंगा बेसिन में 30,000 हेक्टेयर वनीकरण, वसंत कायाकल्प, आर्द्रभूमि संरक्षण, पारंपरिक जल निकायों का कायाकल्प और शोधित जल का पुन: उपयोग हुआ है।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/opinion/namami-gange-is-a-continuous-proof-of-determination-power/article-34174"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-01/p-6.jpg" alt=""></a><br /><p>भारत के लिए 7 अगस्त, 2021  का दिन एक महत्वपूर्ण अवसर था, नीरज चोपड़ा नाम के एक एथलीट ने टोक्यो ओलंपिक में भाला फेंक में हमें स्वर्ण पदक दिलाकर गौरवान्वित किया। इस समाचार के परिशिष्ट में एक छोटा सा कार्य सुर्खियों में नहीं आया कि चैम्पियन अपना भाला नमामि गंगे कार्यक्रम के लिए नीलामी के उद्देश्य से दान कर रहा है। माननीय प्रधानमंत्री द्वारा उन्हें मिले उपहारों की नीलामी शुरू करने की पहल,  कार्यक्रम के लिए उनकी व्यक्तिगत भागीदारी, सरकार की अपार प्रतिबद्धता और उस पर दृढ़ विश्वास को बल देती है। इसी तरह 15 दिसम्बर 2022 को, इस प्रतिबद्धता ने आंशिक परिणाम हासिल किए, जब संयुक्त राष्ट्र ने इसे दुनिया के शीर्ष 10 इकोसिस्टम बहाली कार्यक्रमों में से एक के रूप में मान्यता दी। अपने मन की बात कार्यक्रम में माननीय प्रधानमंत्री ने सही कहा कि यह देश की ‘‘संकल्प शक्ति और अथक प्रयासों’’ का प्रमाण है और दुनिया को एक नया रास्ता दिखाता है।<br /><br />नमामि गंगे की कहानी 2014 की है जब माननीय प्रधानमंत्री ने गंगा नदी के पौराणिक गौरव को बहाल करने का कार्यक्रम शुरू किया था। अविरल (अप्रतिबंधित प्रवाह) और निर्मल (अप्रदूषित प्रवाह) गंगा की परिकल्पना से उत्साहित, एक समग्र और एकीकृत रास्ता अपनाने की पहल की गई। इस पहल को जन गंगा (जन भागीदारी और लोगों और नदी का सम्पर्क), ज्ञान गंगा (अनुसंधान और ज्ञान प्रबंधन) और अर्थ गंगा (स्वतंत्र प्रयास का आर्थिक मॉडल) के तीन कार्यक्षेत्रों से और आगे बढ़ाया गया था।<br /><br />अब तक 32,898 करोड़ रुपये की 406 परियोजनाओं को गंदे पानी के शोधन के बुनियादी ढांचे, नदी किनारे का विकास, नदी बेसिन की सफाई, जैव विविधता संरक्षण, वनरोपण, जन जागरूकता, उद्योगों से निकलने वाले सीवेज की निगरानी, अर्थ गंगा सहित अन्य के लिए मंजूरी दी गई है। इनमें से 225 परियोजनाएं पूरी हो चुकी हैं,  शेष निष्पादन के विभिन्न चरणों में हैं। गंगा बेसिन में 5270 एमएलडी शोधन क्षमता और 5,211 किमी सीवर नेटवर्क के निर्माण के लिए करीब 177 सीवरेज बुनियादी ढांचा परियोजनाओं को मंजूरी दी गई है। सीवरेज प्रबंधन के लिए इनमें से कई परियोजनाएं पूरी हो चुकी हैं।<br /><br />प्रारंभिक चरण के एक बड़े हिस्से को प्राप्त करने के साथ, नए जोश और कीमती अनुभव से लैस होकर, हम नमामि गंगे 2 की शुरूआत कर रहे हैं, जिसे अब सहायक नदियों जैसे यमुना और उप सहायक नदियों जैसे काली, गोमती, हिंडन, दामोदर नदी तक बढ़ा दिया गया है।<br /><br />कार्यक्रम की सफलता का एक प्रमुख कारण सार्वजनिक निजी भागीदारी मोड (एचएएम-पीपीपी) के तहत हाइब्रिड एन्यूइटी मॉडल है, जो अपशिष्ट जल क्षेत्र में अब तक अज्ञात दृष्टिकोण है। एचएएम मॉडल के तहत, अपशिष्ट जल उपचार संयंत्रों की निर्माण लागत का 40 प्रतिशत तक सरकार द्वारा आॅपरेटरों को भुगतान किया जाता है और शेष उनके प्रदर्शन मानकों का आकलन करने के बाद 15 वर्षों की अवधि में जारी किया जाता है। इसी तरह से ‘‘एक शहर, एक आॅपरेटर’’ मॉडल शुरू किया गया है जो पूरे शहर में सीवेज शोधन के लिए एक स्थान पर समाधान की परिकल्पना करता है। जबकि एचएएम आॅपरेटरों द्वारा प्रतिबद्धता, प्रदर्शन और स्थिरता सुनिश्चित करता है, ‘‘एक शहर, एक आॅपरेटर’’ एकल स्वामित्व और जवाबदेही सुनिश्चित करता है। <br /><br />औद्योगिक प्रदूषण में कमी के लिए, अत्यन्त प्रदूषणकारी उद्योगों (जीपीआई) की पहचान की गई है और प्रतिष्ठित तृतीय पक्ष तकनीकी संस्थानों द्वारा इनकी निगरानी की जा रही है। इसके परिणामस्वरूप उद्योगों द्वारा अनुपालन में सुधार हुआ है। इसकी एक शानदार सफलता कानपुर में जाजमऊ चमड़े के कारखाने (देश में अपने प्रकार का सबसे बड़ा) के लिए 20 एमएलडी कॉमन एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट (सीईटीपी) का निर्माण है। नमामि गंगे कार्यक्रम के तहत, इस परिवर्तन में मदद के लिए, पहली बार अक्टूबर 2018 में ई-फ्लो अधिसूचना के माध्यम से अपने स्वयं के जल पर नदी के अधिकार को मान्यता दी गई थी।<br /><br />कार्यक्रम के तहत मिलने वाले सकारात्मक परिणामों को तेजी से देश की अन्य नदियों के लिए मॉडल नदी कायाकल्प कार्यक्रम के रूप में देखा जा रहा है। कई स्थानों पर गंगा के पानी की गुणवत्ता में महत्वपूर्ण सुधार इसकी सफलता की गवाही देता है, जबकि 2018 में नदी की मुख्य नलिका के चार प्रदूषित हिस्से थे, 2021 में कोई भी विस्तार प्राथमिकता क (बीओडी&gt;30 मिली) से कश् (बीओडी &gt;6-10) तक नहीं है और केवल दो खंड सबसे कम प्रदूषित प्राथमिकता श् (बीओडी &gt;3-6) में हैं।<br />गंगा की पर्यावरणीय सफाई ने भारत के लोगों की आध्यात्मिक सफाई में मदद की है, और यह तब देखा गया जब 20 करोड़ से अधिक लोगों ने कुंभ के दौरान इसमें स्नान किया। गंगा में डॉल्फिन, घड़ियाल, ऊदबिलाव और अन्य जलीय प्रजातियों का अधिक संख्या में दिखाई देना हर दिन इसकी याद दिलाता है। राष्ट्रीय पशुपालन कार्यक्रम-2022 के तहत स्थानीय मछली प्रजातियों के कायाकल्प जैसे सूक्ष्म विवरणों का भी ध्यान रखा गया है।<br /><br />अत्यधिक आकर्षक हिल्सा मछली की बढ़ती आबादी और उसके बाद हमारे मछुआरों की समृद्धि में यह रास्ता सबसे महत्वपूर्ण है। कुदरती तौर पर बहुआयामी और समग्र, इस कार्यक्रम के परिणामस्वरूप गंगा बेसिन में 30,000 हेक्टेयर वनीकरण, वसंत कायाकल्प, आर्द्रभूमि संरक्षण, पारंपरिक जल निकायों का कायाकल्प और शोधित जल का पुन: उपयोग हुआ है।<br /><br />प्रधानमंत्री ने 2019 में राष्ट्रीय गंगा परिषद की पहली बैठक के दौरान अर्थ गंगा अवधारणा का भी समर्थन किया था। ‘‘अर्थ गंगा’’ का केन्द्रीय विचार "गंगा नदी पर निर्भर होने" के नारे की तर्ज पर अर्थनीति के सम्पर्क के माध्यम से लोगों और गंगा नदी को जोड़ रहा है। जन गंगा और अर्थ गंगा दोनों अब नमामि गंगे को एक जन आंदोलन में बदलने के इंजन बन चुके हैं। कार्यक्रम के लिए पिछले कुछ महीने घटनाओं से भरे रहे, अर्थ गंगा के तहत छह नए वर्टिकल की पहचान की गई है, जिनमें शून्य बजट प्राकृतिक खेती, मुद्रीकरण और कीचड़ और गंदे पानी के पुन: उपयोग, आजीविका सृजन के अवसर जैसे ‘घाट में हाट’, स्थानीय उत्पादों, आयुर्वेद, औषधीय पौधों को बढ़ावा देना आदि, हितधारकों, सांस्कृतिक विरासत और पर्यटन के बीच बेहतर तालमेल सुनिश्चित करने के लिए जन भागीदारी शामिल है जो बेहतर विकेंद्रीकृत जल प्रबंधन के लिए स्थानीय क्षमताओं को बढ़ाकर सामुदायिक जेटी के माध्यम से नौका पर्यटन, योग को बढ़ावा देने, साहसिक पर्यटन और गंगा आरती और संस्थागत निर्माण पर निर्भर है। जलज केन्द्रों की स्थापना, जैसा कि माननीय प्रधानमंत्री ने उल्लेख किया है, स्थायी नदी केन्द्रित आर्थिक मॉडल के निर्माण की दिशा में एक कदम है। 75 जलज केन्द्रों में से 26 की शुरूआत हो चुकी है। यह नदी के किनारे रहने वाले लोगों के लिए सुविधाएं स्थापित करके और स्थानीय लोगों का मार्गदर्शन करके आजीविका के अवसर पैदा करने की एक पहल है।<br /><br />नमामि गंगे का नया चरण इससे अधिक उपयुक्त समय पर नहीं आ सकता है, जब हम महान अटलजी को उनकी जयंती पर याद कर रहे हैं, भारत के अमृत काल का उत्सव मना रहे हैं और जी20 में भारत को अध्यक्षता मिलने का जश्न मना रहे हों। यह अटलजी ही थे जिन्होंने कभी कहा था, ‘‘भारत केवल जमीन का एक टुकड़ा नहीं है, यहां हर पत्थर में भगवान शिव हैं और पानी की हर बूंद गंगा जल है’’। जब वह हमें अपने सपने को साकार करते हुए देखेंगे तो निश्चित रूप से आकाश से मुस्कुरा रहे होंगे, वसुधैव कुटुम्बकम की सच्ची भावना के साथ 'एक पृथ्वी, एक परिवार, एक भविष्य' के आदर्शों पर अडिग रहते हुए, एक पर्यावरण चैंपियन के रूप में विश्व मंच पर हमारे प्रभुत्व पर उन्हें निश्चित रूप से गर्व होगा। </p>]]></content:encoded>
                
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                <pubDate>Thu, 05 Jan 2023 10:45:37 +0530</pubDate>
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                <title>सोनिया गांधी गंगा राम अस्पताल में भर्ती</title>
                                    <description><![CDATA[कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी को कोरोना से संबंधित परेशानी के कारण गंगा राम अस्पताल में भर्ती कराया गया है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/sonia-gandhi-admitted-in-ganga-ram-hospital/article-11955"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-06/454654654652.jpg" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी को कोरोना से संबंधित परेशानी के कारण गंगा राम अस्पताल में भर्ती कराया गया है। कांग्रेस संचार विभाग के प्रमुख रणदीप सिंह सुरजेवाला ने बताया कि गांधी पिछले दिनों कोरोना से संक्रमित हो गई थी और उसी के चलते उन्हें यहां अस्पताल में भर्ती कराया गया है।</p>
<p>गांधी की हालत स्थिर है और उन्हें चिकित्सकों की देखरेख के लिए अस्पताल में रखा गया है। कांग्रेस कार्यकर्ताओं,नेताओं तथा अन्य सभी लोगों का कोरोना पीड़ित गांधी के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना करने के लिए आभार व्यक्त किया है। <br /><br /></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 12 Jun 2022 16:03:36 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
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                <title>ऑपरेशन गंगा के लिए भारत सरकार का बड़ा कदम, मोदी सरकार के चार मंत्री जाएंगे यू्क्रेन के पड़ोसी देश</title>
                                    <description><![CDATA[ हरदीप पुरी, ज्योतिरादित्य सिंधिया, किरेन रिजिजू और जनरल वीके सिंह को यूक्रेन के पड़ोसी देशों में भेजने का फैसला किया ताकि निकासी मिशन का समन्वय किया जा सके और छात्रों की मदद की जा सके। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/big-step-of-government-of-india-for-operation-ganga--four-ministers-of-modi-government-will-go-to-neighboring-countries-of-ukraine/article-5175"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-02/india.jpg" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। रूस-यूक्रेन युद्ध के बीच भारत सरकार ने वहां से भारतीय नागरिकों को निकालने के लिए बड़ा फैसला लिया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 4 मंत्रियों यूक्रेन के पड़ोसी देशों में भेजे का फैसला किया है। इन मंत्रियों में हरदीप पुरी, ज्योतिरादित्य सिंधिया, किरेन रिजिजू और जनरल वीके सिंह को यूक्रेन के पड़ोसी देशों में भेजने का फैसला किया ताकि निकासी मिशन का समन्वय किया जा सके और छात्रों की मदद की जा सके। <br /><br /><strong>बुखारेस्ट से भारतीयों को लेकर दिल्ली पहुंची पांचवीं ऑपरेशन गंगा उड़ान</strong><br />युद्धग्रस्त यूक्रेन में फंसे भारतीय नागरिकों को निकालने के लिए ऑपरेशन गंगा के तहत सोमवार को रोमानिया की राजधानी बुखारेस्ट से 249 भारतीयों को लेकर पांचवां विमान यहां पहुंचा। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने ट्वीट कर कहा,''भारतीयों को स्वदेश लाने के लिए कदम उठाए जा रहे हैं।''<br /><br /><strong>यूक्रेन में फंसे छात्रों को निकालने की योजना साझा करे सरकार: राहुल-प्रियंका</strong><br />कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी और पार्टी की उत्तर प्रदेश की प्रभारी महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा ने सरकार से आग्रह किया है कि वह यूक्रेन में फंसे भारतीय छात्रों को तत्काल वापस लाने की अपनी योजना पीड़ति छात्रों तथा उनके परिजनों के साथ साझा करें।</p>
<p> गांधी ने ट्वीट किया, यूक्रेन में जारी हिंसा से जूझ रहे भारतीय छात्रों और इन वीडियो को देखने वाले उनके परिवार के सदस्यों के प्रति मेरी संवेदना है। किसी भी अभिभावक को इस तरह की पीड़ा से नहीं गुजरना चाहिए। भारत सरकार को फंसे हुए लोगों और उनके परिजनों के साथ उनको निकालने की अपनी योजना को तत्काल विस्तार से साझा करना चाहिए। हम अपनों को इस तरह नहीं छोड़ सकते। उन्होंने यूक्रेन में फंसे छात्रों का एक वीडियो भी जारी किया है जिसमें पीड़ति छात्र परेशान हो रहे हैं और यूक्रेन से बाहर आने के लिए छटपटा रहे हैं।<br /> </p>
<p>वाड्रा ने कहा कि नरेन्द्र मोदी और डॉ. एस जयशंकर जी यूक्रेन से आ रहे भारतीय छात्र-छात्राओं के वीडियो मन को बहुत ही ज्यादा व्यथित करने वाले हैं। इन बच्चों को भारत वापस लाने के लिए जो कुछ भी बन पड़ता है, भगवान के लिए, वह करिए। पूरा देश इन छात्र- छात्राओं और इनके परिवारों के साथ है। आपसे आग्रह है कि कैसे भी सरकार इनकी सकुशल वापसी करवाने का प्रयास करे।Þ</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
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                <pubDate>Mon, 28 Feb 2022 14:22:18 +0530</pubDate>
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